- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 32,172
अपडेट-53
माहौल गरमाया हुआ था, पूरी परजा पूरी सेना देव के सामने कड़ी थी, देव का गुस्सा बढ़ रहा था,
भवर सिंह- मारो इसे, मेरा आदेश ह ये,
सभी सैनिक देव की तरफ दौड़े, देव गुस्से में बाहर गया और उसने एक सैनिक को उठाया और जमीन में पटक दिया,
देव- अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो एक कदम भी आगे मत बढ़ाना,
सभी दर कर पीछे हो गए, भवर सिंह गुस्से में आगे बढ़ा और देव पैर वॉर कर दिया, देव ने तलवार को पकड़ दिया,
देव- अपना हाथ रोक लो वर्ण मैं भूल जाऊंगा की आपसे मेरा कोई रिश्ता भी ह,
तभी वह राजवीर भी आ गए,
राजवीर- भवर सिंह तू इंसान नहीं ह जानवर ह, तूने जीवन भर हमेशा गलत किया, तूने मुझे इतने वर्षो तक बंदी बना क्र रखा, और आज यहाँ मेरी बहन और भांजे पैर इल्जाम लगा रहा ह,
निहारिका राजय के लोगो से- आप सब इसकी बातो में आ रहे हो, जिसने कभी आपको इंसान भी नहीं समझा,
राजय के लोग- अरे इन्होने कभी मर्यादा तो नहीं तोड़ी, इन्होने समाज में गदगी तो नहीं फैलाई,
अक्षरा- गन्दगी जितनी गन्दगी इस इंसान ने फैलाई ह, उसे ज्यादा तो किसी ने नहीं फैलाई, इस परिवार में इस राजय में अगर किसी ने गलत किया ह तो वो ये ह,
भवर सिंह- तूने अपनी माँ को धोखा दिया और अब इनकी तरफ से बोल रही ह,
भीड़- इन्होने समाज के नियम नहीं थोड़े,
अक्सहर- इन्होने इस राजय किन ा जाने कितनी hi लड़कियों का बलात्कार किया, और इस इंसान ने अपनी hi बहन के साथ नाजायज सम्बन्ध रखे, क्या ये समाज के नियम में आता ह,
बहन के साथ सम्बन्ध की बात सुनकर सभी चौंक गए, खुद परिवार के सभी लोग चौक गए,
भीड़- तुम झूट बोल रही हो,
अक्षरा- भवर सिंह और काम्य के बिच नाजायज सम्बन्ध थे, जिससे इनकी 3 औलादे भी हैं,
भवर सिंह- क्या बकवास कर रही ह तू, ये सब झूट बोल रही ह,
भीड़- तुम झूटी हो, काम्य देवी की तो 2 hi संतान हैं, तुम्हारा झूट पकड़ा गया,
अक्षरा- ये hi तो राज ह, भवर सिंह की 3 सताने जो काम्य से पैदा हुई जिसमे एक ह अभिजीत और दूसरी मैं जो काम्य की शादी के बाद पैदा हुई, और तीसरी संतान ह कस्तूरी जो काम्य की शादी से पहले hi पैदा हो गाइट hi, जिसे इस जानवर ने प्रेमलता ये अपनी रखैल को दे दिया पलने के लिए, और ये hi नहीं प्रेमलता की बेटी सुगंधा भी इसकी और प्रेमलता की संतान हैं, इस इंसान ने आईटीआई गांड फैलाई हुई ह और तुम सब देव पैर इल्जाम लगा रहे हो,
चारो तरफ एक दूसरे से चर्चा शुरू हो गई,
सूरज- ये झूट बोल रही ह, क्योकि ये खुद देव से चुदवाती ह, सोमिया और अमिता और अक्षरा तीनो hi देव से चुदवाती हैं, और ये कस्तूरी तो पहले hi देव के साथ चुदाई कर चुकी ह,
ज्वाला- मुझे तो लगता ह ये साडी लड़किया भी देव से चुदवाती हैं, इसीलिए पिता जी पैर इल्जाम लगा क्र उन्हें बदनाम कर रही हैं,
सूरज- क्या पता ये हम भाइयो पैर भी इल्जाम लगा दे की हमने इनके साथ कुछ गलत किया ह,
अमिता- है ये सच hi तो ह, तुम तीनो भाइयो सुरजा ज्वाला और अभिजीत ने हम तीनो बहेनो के साथ बलात्कार करने की कोशिश किट hi,
अमरावती और सौमित्र ये सब सुनकर झटके पैर झटके खा रही थी,
ज्वाला- देखा देखा अब हम पैर इल्जाम लगाने लगी,
भवर सिंह- इन सबको मार दो और इस राजय को साफ़ करो,
भीड़ में खड़े लोगो ने पत्थर फैके शुरू क्र दिए, एक पत्थर रीवा की तरफ आ रहा था जिसके बिच में अभेंद्र आ गया, लेकि दूसरा पता निहारिका के माथे पैर लगा, पत्थर लगते hi देव का गुस्सा फुट पड़ा और उसने भवर सिंह की तलवार को झटके से तोड़ दिया और उसे उठा क्र दूर फेंक दिया, और भीड़ में कूद पड़ा, जो उसके सामने आ रहा तो वो उठा उठा क्र फेंक रहा था, देव अपना आप खो चुक्का था,
तभी किसी ने देखा की निहारिका के माथे पैर जो घाव लगा था ो ठीक होने लगा, और ये देखते hi भीड़ में से लोग उसे डायन चुड़ैल बोलने लगे, भवर सिंह और सूरज और ज्वाला एक साथ देव पैर टूट पड़े, इधर राजवीर और अभेंद्र सेनिको को लड़कियों के पास आए से रोके हुए थे, लेकिन सैनिक बहुत अधिक थे,
देव ने तीनो बाप बेटो को मरना शुरू क्र दिया, देव ने तलवार से भवर सिंह को घायल किया, उसका घाव नहीं भरे, जिसे देख वो थोड़ा घबरा गया, वही सूरज और ज्वाला का तो कोई मुकाबला hi नहीं था देव से,
वो पीछे हटने लगी, तभी रीवा की आवाज आई – devvvvvvvvvv
देव ने पीछे देखा तो सैनिक लड़कियों के पास पहुंच चुके थे, देव उधर मुदा तब तक वह दत्त आ चुक्का था, और निहारिका ने भी तलवार उठा ली थी, दत्त की दहाड़ से पूरी भीड़ कंपनी लगी,
सभी दर क्र पीछे हटने लगे, लेकिन तभी देव की कमर पैर किसी ने एक लात मरी और देव उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा, देव को गिरता हुआ देख क्र सभी चौंक गए, और जब मुद क्र देखा तो वह भैरव सिंह खड़ा था, और उसके पीछे सात्विक चिरंजीवी संबु और भानु खड़े थे, उन्हें वह देख क्र सेनिको ने उनकी तरफ तलवारे तान दी,
भवर सिंह- रुक जाओ, ये सब हमारे मित्र हैं, इस देव और निहारिका की वजह से बहुत ग़लतफ़हमिया हुई ह, सब ठीक ह,
तभी प्रताप सिंह भी आ गया और बोलै
प्रताप सिंह- अब दोनों राजय एक दूसरे के मित्र हैं, तो पूरी परजा सुरक्षित ह, और अब सब मिलकर इस असली शत्रु का विनाश करेंगे,
देव खड़ा हुआ और निहारिका और बाकि लड़कियों के पास आया,
निहारिका- ये सब क्या हो रहा ह,
देव- हम जानते थे ये युद्ध होगा, लेकिन इस तरह से होगा ये नहीं जानते थे, हमारे पास न कोई सेना ह, न कोई मित्र, अब हम सब अकेले हैं,
राजवीर- यहाँ से निकलने में hi फायदा ह बीटा,
देव- ये लोग हमे ऐसे निकलने नहीं देंगे, मैं इन सबको रोकता हु आप पुरे परिवार को लेकर निकल जाइये,
निहारिका- हम तुझे अकेला छोड़ क्र कैसे जा सकते हैं,
देव- माँ ये मिलकर भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकते, लेकिन बाकि सबको बचाना मेरे लिए मुश्किल हो जायेगा,
राजवीर- लेकिन इन्हे निकला कैसे जायेगा,
इधर देव बात कर रहा था वही प्रताप सिंह किन अजर निहारिका पैर थी,
प्रताप सिंह- चिरंजीवी बीटा मुझे निहारिका चाहिए,
भैरव- मुझे ये सभी सुदरिया चाहिए, इतनी सुंदरता मैंने आज तक नहीं देखि, और ये औरत ये कोई अप्सरा ह, इतनी भीड़ में भी इसका सौन्दर्य किसी सूर्य की तरह चमक रहा ह,
रेणुका- ये ह निहारिका, और उसके पीछे जो कड़ी ह इसी की परछाई रीवा, इस संसार में इन दोनों से खूबसूरत कोई नहीं ह,
भैरव- ये मुझे चाहिए, इस धरती पैर मेरे लिए कोई नहीं बानी थी, लेकिन ये दोनों मेरी पत्नी बनने के लायक हैं,
प्रताप सिंह- निहारिका मेरी ह,
रेणुका- इस निहारिका की वजह से मेरे घर परिवार बर्बाद हो गया, इसका तो मैं चीरहरण करवाउंगी,
भवर सिंह- सेनिको पकड़ लो इन सबको,
भैरव- नहीं कोई इन्हे हाथ नहीं लगेया, ये सभी लड़किया मेरी दासी बनेंगी, और ये निहारिका और इसकी बेटी मेरी पत्नी बनेगी, अगर तुम सभी लड़किया जिन्दा रहना चाहती हो और मेरे साथ सुख से मजे में रहना चाहती हो तो मेरे पास आ जाओ,
इससे भवर सिंह थोड़ा विचलित हो गया, लेकिन चिरंजीवी ने उसे रोक दिया,
चिरंजीवी- इस समय कुछ मत बोलो,
साडी लड़किया घबरा गई, सब देव के पीछे आ गई,
देव- तुम सब निकलो यहाँ से, अभेंद्र सबको लेकर निकालो यहाँ से,
अभेंद्र ने सबको इशारा किया, सभी अभेंद्र के साथ महल के अंदर की तरफ भागी, सभी लड़कियों को भागने के तकलीफ हो रही थी, लेकिन जब जान खतरे में हो तो किसी के भी पैरो में ताकत आ जाती ह,
अमरावती और सौमित्र वही कड़ी रह गई,
लड़कियों के भागते hi चिरंजीवी भानु संभु सूरज और ज्वाला तेजी से उनकी तरफ दौड़े, लेकिन उनके बिच में देवा ुर दूत आ गए, देव को देख क्र सब रुक गए, लेकिन भैरव के सामने आ गया, जिससे बाकि लोग लड़कियों के पीछे भाग लिए,
अमरावती और सौमित्र ने सूरज और ज्वाला को रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने दोनों को दूर धकेला और आगे भाग लिए, उनके पीछे दत्त ने दौड़ लगा दी,
राजवीर और अभेंद्र सभी को लेकर महल के अंदर घुस गए, अंदर से कुछ छुपे हुए रस्ते थे, जो देव और अभेंद्र पहले hi बना चुके थे,
भैरव- मैंने तुझे एक सुझाव दिया था की मुझसे मिल जा, इसमें तेरा hi फायदा ह, लेकिन शायद तुझे अपनी मृत्यु से ज्यादा प्रेम ह,
देव- ये तो उप्पेर वाला hi जाने क्या होगा, कोण किसकी मृत्यु बनेगा,
भैरव- मैंने एक बार hi तेरे राजय में पेअर रखा ह और ये पूरा राजय मेरा हो गया ह, ऐसे hi पूरी पृथ्वी मेरी होगी,
भैरव ने देव पैर मुक्के से वॉर किया लेकिन देव इस बार चौकन्ना था, वो तुरंत एक तरफ हो गया, भैरव ने फिर से वॉर किया लेकिन देव फिर बच गया, भैरव लगातार वॉर कर रहा था लेकिन देव को छू नहीं प् रहा था, तभी पीछे से बहवर सिंह आ गया और उसने देव की पीठ पैर वॉर किया, जिससे देव लड़खड़ा गया और इसका फायदा भैरव ने उठाया और एक जोर दर वॉर देव की छाती में किया, जिससे देव उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा, भैरव का मुक्का काफी जोर दर था, देव ने उसकी ताकत को अचे से महसूस किया, देव खुद को सम्हालता हुआ उठा,
देव ने अपने कपडे झड़े और जैसे hi भैरव और भवर सिंह पास आये देव ने घूम क्र एक लात भवर सिंह को मरी, और लात लगते hi भवर सिंह दीवार में जाकर लगा, वो दर्द से बिलबिला उठा, इधर भैरव ने फिर से देव पैर वॉर किया लेकिन इस बार देव ने भैरव का हाथ पकड़ लिया, और उसके मुँह पैर एक मुक्का मारा, मुक्का लगते hi भैरव जमीन में गिर पड़ा, भैरव बड़े आश्चर्य से देव को देखने लगा, उसे यकीन hi नहीं हुआ की उसके सामने इतनी ताकत वाला इंसान खड़ा ह, भैरव खड़ा हुआ अपने जबड़ा मसलने लगा, फिर वो देव पैर टूट पड़ा, दो महा शक्ति शक्ति इंसान एक दूसरे पैर टूट पड़े थे,
भैरव की ताकत देव से बहुत अधिक थी, देव की फुर्ती भैरव से ज्यादा थी इसलिए वो उसके हमलो से बच रहा था, और उछाल उछाल क्र उस पैर हमले कर रहा था,
भैरव देव पैर हावी पद रहा था, भवर सिंह बिच बिच में आकर देव पैर हुम्ला करता, लेकिन देव उसे एक दो मुक्को में hi दूर फेंक देता, इनकी लड़ाई का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा था, न कोई थक रहा थान ा hi हर मन रहा था, देवा ुर भैरव में से जिसको भी घाव लगता तुरंत ठीक होजाता, बाकि परजा और सैनिक खड़े देख रहे थे,
वही दूसरी तरफ अभेंद्र और राजवीर सभी लड़कियों को लेकर महल के छुपे रस्ते से बहार निकल गए थे, चिरंजीवी संभु और भानु के सामने दत्त आ गया, दत्त की ताकत का मुकाबला करना भी आसान नहीं था, ज्वाला और सूरज उन सबके पीछे आगे बढ़ गए, लेकिन वो दोनों अकेले थे और सामने अभेंद्र राजवीर और साडी लड़किया, जो सभी युद्ध कला सिख चुकी थी,
अभेंद्र और निहारिका रुक गए बाकि सबको राजवीर आगे लेकर निकल गए, निहारिका और अभेंद्र ने ज्वाला और सूरज पैर हुम्ला कर दिया, वो दोनों योद्धा थे अचे योद्धा थे, लेकिन अभेंद्र अब उनसे कही भीतर योद्धा बन हकूका था, और निहारिका को हराना उनके लिए नामुमकिन था,
चिरंजीवी दत्त को झांसा देकर निकल गया, भानु और संभु को दत्त ने अपने जबड़ो से अचे से घायल क्र दिया था, चिरंजीवी जब तक सूरज और ज्वाला के पास पूछा तब तक दोनों घायल बेसुध से हो चुके थे, अभेंद्र ज्वाला को मरने hi वाला था तभी चिरंजीवी वह आ गया, उसने अभेंद्र पैर हुम्ला कर दिया, अभेंद्र चिरंजीवी का सामना करने लायक ताकतवर नहीं था, लेकिन निहारिका और अभेंद्र मिलकर चिरंजीवी का सामना कर प् रहे थे, लेकिन जल्दी hi चिरंजीवी उन दोनों पैर बहरी पड़ने लगा, अभेंद्र घायल हो चुक्का था,
तभी वह दत्त आ गया और चिरंजीवी पैर हुम्ला किया और उसे घयल क्र दिया, इसक अमोका पाकर निहारिका और अभेंद्र वह से निकल गए, और कुछ देर में दत्त भी उनके पीछे चला गया,
इधर देव भवर सिंह और भैरव से अकेले लड़ रहा था, अब युद्ध तलवारो से हो रहा था, तलवार चलने में देव बहुत hi फुर्तीला था, और खास बात थी की देव पैर जो घाव लगता उसके घाव तुरंत भर जार हे थे, लेकिन भवर सिंह और भैरव के घाव नहीं भर रहे थे, उनके खून भी रहा था, तभी सात्विक ने एक शक्ति का हुम्ला देव पैर किया जिससे उसका शरीर बांध सा गया, जिसका मौका पाकर भवर सिंह ने तलवार के अनेको वॉर देव पैर क्र दिए,
देव ने अपनी पूरी ताकत लगाई और सात्विक की शक्ति को तोड़ दिया, शक्ति टूट ते hi भवर सिघ घबरा कर पीछे हो गया,
जब युद्ध को बहुत लम्बा समय हो गया और देव अब भी काबू में नहीं आ रहा था तो भैरव ने अपनी कमर पैर से एक तलवार निकली, तलवार की चमक से किसी की भी आँखे चुंधिया जाये, उस तलवार को लेकर भैरव देव के सामने पंहुचा और उस पैर वॉर किया, कुछ देर तो देव बचता रहा लेकिन एक वॉर देव की छाती को चीरता चला गया, देव को ऐसे घाव बहुत लगे थे लेकिन वो हर बार भर जाते थे, लेकिन इस तलवार का दिया हुआ घाव नहीं भरा और देव को भयंकर दर्द भी हुआ, देव दर्द से चीख उठा, maaaaaaaaaaaaaaaaaa
अब तक वह चिरंजीवी, भानु शम्भू ज्वाला और सूरज भी वापस आ चुके थे, देव को ऐसे घायल देख क्र वो भी चौंक गए,
जिसे कोई घाव नहीं लगता था उसके शरीर पैर इतना बड़ा घाव कैसे बन गया,
तभी भैरव ने दूसरा वॉर किया और उसकी कमर को चिर दिया, देव के शरीर से खून की नदी सी भेने लगी, देव दर्द से कराह रहा था,
सात्विक- ये ये कैसे किया आपने, ये हथियार किस चीज का बना ह,
भैरव- ये hi वो हथियार ह जो किसी की भी जान ले सकता ह, और ये तलवार अब इस देव की जान लेगी,
तभी दत्त के दहाड़ने की आवाज गूंज गई, उसकी दहाड़ इतनी तेज थी की वह खड़े सब लोगो का दिल दहल गया, दत्त की आवाज से भैरव भी एक पल के लिए बोखला गया,
दत्त पूरी राफ्तेर से डोडा चला आ रहा था और उसके उप्पेर बैठी थी निहारिका, उसे देख क्र हारक ो अचम्भित सा देखता रह गया, लोग सामने से हैट ते चले गए, निहारिका करी बा रही थी, भवर सिंह ने उस पैर हुम्ला करना चाहा लेकिन तभी एक धमाका हुआ और चारो तरफ धुआँ धुआँ हो गया, किसी को कुछ नहीं दिख रहा था,
सात्विक ने तुरंत अपनी शक्ति से उस धुए को हटाया तो सब चौंक गए, क्योकि जहा देव घयल पड़ा था अहा अब कोई नहीं था, निहारिका देव को दत्त पैर बैठा केर वह से बिजली की तरह दौड़ गई,
भवर सिंह- ये क्या हुआ, ये धुआँ कैसे आया,
सात्विक- भौमिक यही कही आस पास था,
जी है भौमिक भीड़ में आ चुक्का था, देव पैर हो रहे हमले को रोकने का तरीका धुंध रहा था तभी निहारिका आई तो उसे मौका मिल गया,
चिरंजीवी- हमे उनका पीछा करना चाहिए,
सात्विक- अब उन्हें पकड़ा आसान नहीं ह,
भैरव- उसकी जरुआत hi नहीं ह, वो देव अब नहीं बचेगा, इस तलवार के वॉर से वो जिन्दा नहीं रहे पायेगा,
भवर सिंह और प्रताप सिंह ने अपने सैनिक निहारिका के पीछे लगा दिए थे,
चिरंजीवी- ये तलवार आई कहा से, ऐसे किसी हथियार के बारे में हमे कोई जानकारी नहीं थी,
भैरव- आज इस धरती पैर इससे ज्यादा शक्ति शैली हथियार कोई और नहीं ह, इसके अंदर भगवान् की ऊर्जा बह रही ह, ये किसी भी वास्तु को चिर सकती ह, जो नहीं मर सकता उसे मार सकती ह,
भवर सिंह- लेकिन ये तलवार तो हमारे राजय की ह, इस पैर हमारे राजय को मोहर ह, मैंने तो इसके बारे में कभी नहीं सुना, मेरे राजय में ऐसा हथियार ह और मुझे hi नहीं पता,
सात्विक- क्योकि इसे बने हुए ज्यादा समय नहीं हुआ ह, जहा तक मेरी जानकरी ह ये वो तलवार ह जिससे देव और निहारिका को मारा गया था, मैंने जब देव का अतीत देखा था तो उसे आखरी बार झरने से गिरते देखा था और देव के हाथ में तलवार थी जो उसने उस चिताः के पेट में घुसाई हुई थी, हो न हो जब शक्ति उस देव को मिली तो इस टावर के जरिये वो शक्ति उस चिताः के शरीर में भी गई, और एक ऊर्जा इस तलवार में भी रह गई,
भैरव- सही कहा ऐसा hi हुआ होगा, और इसी शक्ति ने मुझे अपनी तरफ आकर्षित किया था, इस तलवार को हाथ में लेते hi मैं समझ गया था इसके अंदर वही ऊर्जा ह जो तुम सबके अंदर ह, तो ये hi तलवार इन शक्ति धारको का अंत क्र सकती ह,
अब बाकि सब थोड़े घबरा गए थे, लेकिन प्रताप सिंह और रेणुका खुशिया मन रहे थे, सबसे ज्यादा कोई खुश था ो थी रेणुका,
भवर सिंह- राजय में उत्सव मनाया जाये, आज हमने एक बड़े शत्रु को मार गिराया,
परजा शोर मचा कर ख़ुशी जाहिर करने लगी, लेकिन उस भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी थे जो बहुत दुखी थे, जिन्हे पता था ये जो हुआ कितना गलत हुआ ह, अब इस राजय के लोगो का क्या होगा, ये राजय बर्बाद हो जायेगा,
उनमे से अमृता और सौमित्र भी ऐसा hi सोचती थी, वो दोनों भी दुखी थी, जब से उन्होंने देव के साथ रिश्ता बनाया था उनके अंदर देव के लिए एक अलग hi प्रेम जग चुक्का था, और जब उन्हें पताचला की उनके बेटो ने उन्ही बेटियों के साथ ऐसा करने की कोशिश की तो वो और टूट गई, लेकिन यहाँ वो कुछ बोल नहीं सकती थी, इसलिए चुप चाप सबके पीछे पीछे रही,
महल में आकर जब सिंघासन पैर बैठने की बरी आई तो वह 3 राजा खड़े थे, भवर सिंह जिसका ये राजय था, प्रताप सिंह जिसने इस राजय को जीत लिया था, और भैरव सिंह जो खुद को पूरी पृथ्वी का राजा मंटा था,
भवर सिंह जैसे hi राजगद्दी की तरफ चला तो भैरव ने उसे रोक दिया,
भैरव- ये राजय मेरा ह, और यहाँ से बैठ क्र मैं पूरी धरती पैर राज करूँगा, सुना ह इसी राजय के लोगो को जिम्मेदारी दी गई थी मेरा इतहास मिटने की, हहहहहहहह अब ये hi राजय मेरी ताकत की पहचान बनेगा,
भवर सिंह बोखला गया, लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था, वो पीछे हैट गया, ये देख कर अमरावती और सौमित्र और दर गई, उन्हें अहसास हो गया की अब ये राजय तबाह हो जायेगा,
वही दूसरी तरफ निहारिका देव को लेकर एक जंगल में पहुंची, जहा बाकि लड़कियों को लेकर राजवीर पहले hi पहुंच चुक्का था,
देव को ऐसे घायल और बेसुध देख क्र सभी घबरा गई और सबकी आँखों में आंसू आ गए,
रीवा- ये कैसे हो सकता ह, देव कोई कैसे घायल क्र सकता ह,
निहारिका- मुझे नहीं पता वह क्या हुआ, बस मैं सही समय पैर वह पहुंच गई, वर्ण अनर्थ हो जाता ह,
अभेंद्र- हम यहाँ ज्यादा देर नहीं रुक सकते, हमे यहाँ से निकलना होगा, वो लोग हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगे,
राजवीर- लेकिन देव को इस हालत में लेकर कहा जायेंगे, देव को उपचार की जरुरत ह, और हमारे पास छुपने की कोई जगह भी नहीं ह,
अभेंद्र- जगह ह, देव ने पहले hi सब कर दिया था, लेकिन उसके लिए यहाँ से उत्तर दिशा की तरफ चलना होगा, वही देव का उपचार कर पाएंगे,
अभेंद्र की बात सबको सही लगी, देव को अभेंद्र ने एप कंधे पैर उठा लिया, और दत्त आगे का रास्ता देखता रहा की सुरक्षित ह या नहीं,
बाकि सबा पैदल hi चल दिए, कुछ समय चलने के बाद वो सब एक जगह रुक गए, अभेंद्र ने एक पत्थर हटाया और सब उस पत्थर के निचे गुफा में घुस गए,
यहाँ छिपने के लिए अच्छी खासी जगह बाई गई थी, रहने खाने और सोने की ठीक थक व्यवश्ता की गाइट hi,
निहारिका- जल्दी से किसी वैद को बुलाओ,
मैच पहले से hi यहाँ हु महारानी,
सब आवाज सुनकर दर गए, लेकिन जब वो सामने आये तो सबकी जान में जान आई, क्योकि सामने भौमिक जी खड़े थे,
निहारिका- आप यहाँ
भौमिक जी- मैंने hi देव से ये जगह बनवाई थी, आप घाबरिये नहीं, सब ठीक हो जायेगा,
रीवा- आप देव को बचने क्यों नहीं आये
भौमिक जी- क्योकि मैं सही समय पैर सही जगह पहुँचता हु, जब देवी निहिरका वह आई मैं वही था, और वो धुआँ मैंने hi किया था,
निहारिका- भौमिक जी ये घाव, देव के ये घाव कैसे भरेंगे, वो कैसी तलवार थी जिसने देव को घायल क्र दिया,
भौमिक जी- उस तलवार में वही ऊर्जा ह जो आपके और देव के अंदर ह, ये वही तलवार ह जिससे देव ने दत्त को मारा था, और उसी तलवार के जरिये देव की ऊर्जा दत्त के अंदर गाइट hi, मैं कभी सोच नहीं पाया था की उस तलवार में भी ऊर्जा रह जाएगी,
अक्षरा- आप देव को जल्दी ठीक कीजिये न
भौमिक जी अपने साथ औषधीय लेकर आये थे, जिनसे उन्होंने देव का इलाज शुरू क्र दिया था,
भौमिक जी- अब देव को आराम करे दो,
सभी एक साथ एक दूसरे की बहो में सिमटे हुए बैठे थे,
रेवती- मैं उन्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी, मेरे माँ बाप ने मेरे सुहाग को मरने की कोशिश की ह,
अमिता- हमारे बाप ने hi अपने बेटे को और हम सबको मरने की कोशिश की ह,
रीवा- सबको सजा मिलेगी, कोई नहीं बचेगा,
कस्तूरी- लेकिन हम उनसे लड़ेंगे कैसे, हम सब एक साधारण इंसान और वो सब इतने शक्ति शैली और अमर इंसान ह,
मनीषा- कितना बुरा समय आया ह, कल रात तक सब कितना अच्छा था और सूरज निकलते निकलते hi सब ख़तम हो गया,
भौमिक जी- अभी तो असली तूफ़ान आना बाकि ह, एक ऐसी परलय जो सब तहश नहश क्र देगी,
निहारिका- ऐसा न कहो भौमिक जी, मैं और नहीं झेल पाऊँगी,
भौमिक जी- आपको hi तो झेला ह महारानी, आपको खुद को मजबूत करना होगा, और बच्चियों सही समय आने का इंतजार करना होगा, तुम सब का कौमार्य भांग हो चुक्का ह न,
इस बात से सबके सर झुक गए,
भौमिक जी- मुझसे मत शर्माओ, मेरे लिए सब कुछ जानना जरुरी ह,
निहारिका- भैया आप और अभेंद्र बहार जाइये और सुरक्षा का ख्याल रखिये,
अभेंद्र और राजवीर बहार निकल गए,
निहारिका- जी सबकी सुहागरात हो चुकी ह,
भौमिक जी- सबके अंदर देव का वीर्य गिरा ह न
निहारिका ने सबकी तरफ देखा, तो सबने है में गार्डन हिला दी सिवाय सुगंधा के
निहारिका- सुगंधा तुम है नहीं बोल रही,
सुगंधा- क्योकि हम एक नहीं हो पाए थे माँ
निहारिका ने डरते हुए भौमिक जी को देखा,
भौमिक जी- ये सही नहीं हुआ, इसका मतलब मुझे अपना यज्ञ पूरा hi करना होगा,
निहारिका- कैसा यज्ञ
भौमिक जी ने मनीषा और सुगंधा को देख क्र बोलै- कुछ लोगो का वापस लाना ह,
भौमिक जी वह से निकल गए, बाकि परिवार देव को घेर क्र बैठ गए,
भवन पूरा में क्या हुआ ये खबर काम्य तक भी पहुंच गाइट hi,
अभिजीत- माँ माँ वापस आ गए, देव को मर दिया गया ह, लेकिन अब राजय पैर किसी भैरव का अधिकार हो चुक्का ह, क्या हमे वापस चलना चाहिए,
काम्य- नहीं अभी नहीं, वह क्या हुआ ह मुझे सब जानकारी ह, अगर हम वह गए तो हालत बदल जायेंगे, अगर सब ठीक रहा तो वो खुद हमे लेने आएंगे,
अभिजीत- माँ मैंने कुछ अजीब सुना ह, वह जो बाते हुई हमारे जासूस ने आकर बताई क्या वो सच ह,
काम्य ने घेरि साँस भरी- है वो सब सच ह,
अभिजीत- तो भवर सिंह मेरे पिता ह,
काम्य- है वो hi तेरे पिता ह,
अभिजीत- फिर तो उस राजय पैर मेरा भी अधिकार हुआ,
काम्य- तुझे अधिकार की चिंता ह, तूने ये नहीं सोचा भवर सिंह मेरे भाई हैं और तू मेरे भाई की संतान ह,
अभिजीत- मुझे इस बात से फरक नहीं पड़ता, मुझे किसी रिश्ते से फरक नहीं पड़ता, आपकी जिंदगी ह आप जिससे चाहो सम्भोग करो, मुझे बस राजपथ चाहिए,
माहौल गरमाया हुआ था, पूरी परजा पूरी सेना देव के सामने कड़ी थी, देव का गुस्सा बढ़ रहा था,
भवर सिंह- मारो इसे, मेरा आदेश ह ये,
सभी सैनिक देव की तरफ दौड़े, देव गुस्से में बाहर गया और उसने एक सैनिक को उठाया और जमीन में पटक दिया,
देव- अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो एक कदम भी आगे मत बढ़ाना,
सभी दर कर पीछे हो गए, भवर सिंह गुस्से में आगे बढ़ा और देव पैर वॉर कर दिया, देव ने तलवार को पकड़ दिया,
देव- अपना हाथ रोक लो वर्ण मैं भूल जाऊंगा की आपसे मेरा कोई रिश्ता भी ह,
तभी वह राजवीर भी आ गए,
राजवीर- भवर सिंह तू इंसान नहीं ह जानवर ह, तूने जीवन भर हमेशा गलत किया, तूने मुझे इतने वर्षो तक बंदी बना क्र रखा, और आज यहाँ मेरी बहन और भांजे पैर इल्जाम लगा रहा ह,
निहारिका राजय के लोगो से- आप सब इसकी बातो में आ रहे हो, जिसने कभी आपको इंसान भी नहीं समझा,
राजय के लोग- अरे इन्होने कभी मर्यादा तो नहीं तोड़ी, इन्होने समाज में गदगी तो नहीं फैलाई,
अक्षरा- गन्दगी जितनी गन्दगी इस इंसान ने फैलाई ह, उसे ज्यादा तो किसी ने नहीं फैलाई, इस परिवार में इस राजय में अगर किसी ने गलत किया ह तो वो ये ह,
भवर सिंह- तूने अपनी माँ को धोखा दिया और अब इनकी तरफ से बोल रही ह,
भीड़- इन्होने समाज के नियम नहीं थोड़े,
अक्सहर- इन्होने इस राजय किन ा जाने कितनी hi लड़कियों का बलात्कार किया, और इस इंसान ने अपनी hi बहन के साथ नाजायज सम्बन्ध रखे, क्या ये समाज के नियम में आता ह,
बहन के साथ सम्बन्ध की बात सुनकर सभी चौंक गए, खुद परिवार के सभी लोग चौक गए,
भीड़- तुम झूट बोल रही हो,
अक्षरा- भवर सिंह और काम्य के बिच नाजायज सम्बन्ध थे, जिससे इनकी 3 औलादे भी हैं,
भवर सिंह- क्या बकवास कर रही ह तू, ये सब झूट बोल रही ह,
भीड़- तुम झूटी हो, काम्य देवी की तो 2 hi संतान हैं, तुम्हारा झूट पकड़ा गया,
अक्षरा- ये hi तो राज ह, भवर सिंह की 3 सताने जो काम्य से पैदा हुई जिसमे एक ह अभिजीत और दूसरी मैं जो काम्य की शादी के बाद पैदा हुई, और तीसरी संतान ह कस्तूरी जो काम्य की शादी से पहले hi पैदा हो गाइट hi, जिसे इस जानवर ने प्रेमलता ये अपनी रखैल को दे दिया पलने के लिए, और ये hi नहीं प्रेमलता की बेटी सुगंधा भी इसकी और प्रेमलता की संतान हैं, इस इंसान ने आईटीआई गांड फैलाई हुई ह और तुम सब देव पैर इल्जाम लगा रहे हो,
चारो तरफ एक दूसरे से चर्चा शुरू हो गई,
सूरज- ये झूट बोल रही ह, क्योकि ये खुद देव से चुदवाती ह, सोमिया और अमिता और अक्षरा तीनो hi देव से चुदवाती हैं, और ये कस्तूरी तो पहले hi देव के साथ चुदाई कर चुकी ह,
ज्वाला- मुझे तो लगता ह ये साडी लड़किया भी देव से चुदवाती हैं, इसीलिए पिता जी पैर इल्जाम लगा क्र उन्हें बदनाम कर रही हैं,
सूरज- क्या पता ये हम भाइयो पैर भी इल्जाम लगा दे की हमने इनके साथ कुछ गलत किया ह,
अमिता- है ये सच hi तो ह, तुम तीनो भाइयो सुरजा ज्वाला और अभिजीत ने हम तीनो बहेनो के साथ बलात्कार करने की कोशिश किट hi,
अमरावती और सौमित्र ये सब सुनकर झटके पैर झटके खा रही थी,
ज्वाला- देखा देखा अब हम पैर इल्जाम लगाने लगी,
भवर सिंह- इन सबको मार दो और इस राजय को साफ़ करो,
भीड़ में खड़े लोगो ने पत्थर फैके शुरू क्र दिए, एक पत्थर रीवा की तरफ आ रहा था जिसके बिच में अभेंद्र आ गया, लेकि दूसरा पता निहारिका के माथे पैर लगा, पत्थर लगते hi देव का गुस्सा फुट पड़ा और उसने भवर सिंह की तलवार को झटके से तोड़ दिया और उसे उठा क्र दूर फेंक दिया, और भीड़ में कूद पड़ा, जो उसके सामने आ रहा तो वो उठा उठा क्र फेंक रहा था, देव अपना आप खो चुक्का था,
तभी किसी ने देखा की निहारिका के माथे पैर जो घाव लगा था ो ठीक होने लगा, और ये देखते hi भीड़ में से लोग उसे डायन चुड़ैल बोलने लगे, भवर सिंह और सूरज और ज्वाला एक साथ देव पैर टूट पड़े, इधर राजवीर और अभेंद्र सेनिको को लड़कियों के पास आए से रोके हुए थे, लेकिन सैनिक बहुत अधिक थे,
देव ने तीनो बाप बेटो को मरना शुरू क्र दिया, देव ने तलवार से भवर सिंह को घायल किया, उसका घाव नहीं भरे, जिसे देख वो थोड़ा घबरा गया, वही सूरज और ज्वाला का तो कोई मुकाबला hi नहीं था देव से,
वो पीछे हटने लगी, तभी रीवा की आवाज आई – devvvvvvvvvv
देव ने पीछे देखा तो सैनिक लड़कियों के पास पहुंच चुके थे, देव उधर मुदा तब तक वह दत्त आ चुक्का था, और निहारिका ने भी तलवार उठा ली थी, दत्त की दहाड़ से पूरी भीड़ कंपनी लगी,
सभी दर क्र पीछे हटने लगे, लेकिन तभी देव की कमर पैर किसी ने एक लात मरी और देव उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा, देव को गिरता हुआ देख क्र सभी चौंक गए, और जब मुद क्र देखा तो वह भैरव सिंह खड़ा था, और उसके पीछे सात्विक चिरंजीवी संबु और भानु खड़े थे, उन्हें वह देख क्र सेनिको ने उनकी तरफ तलवारे तान दी,
भवर सिंह- रुक जाओ, ये सब हमारे मित्र हैं, इस देव और निहारिका की वजह से बहुत ग़लतफ़हमिया हुई ह, सब ठीक ह,
तभी प्रताप सिंह भी आ गया और बोलै
प्रताप सिंह- अब दोनों राजय एक दूसरे के मित्र हैं, तो पूरी परजा सुरक्षित ह, और अब सब मिलकर इस असली शत्रु का विनाश करेंगे,
देव खड़ा हुआ और निहारिका और बाकि लड़कियों के पास आया,
निहारिका- ये सब क्या हो रहा ह,
देव- हम जानते थे ये युद्ध होगा, लेकिन इस तरह से होगा ये नहीं जानते थे, हमारे पास न कोई सेना ह, न कोई मित्र, अब हम सब अकेले हैं,
राजवीर- यहाँ से निकलने में hi फायदा ह बीटा,
देव- ये लोग हमे ऐसे निकलने नहीं देंगे, मैं इन सबको रोकता हु आप पुरे परिवार को लेकर निकल जाइये,
निहारिका- हम तुझे अकेला छोड़ क्र कैसे जा सकते हैं,
देव- माँ ये मिलकर भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकते, लेकिन बाकि सबको बचाना मेरे लिए मुश्किल हो जायेगा,
राजवीर- लेकिन इन्हे निकला कैसे जायेगा,
इधर देव बात कर रहा था वही प्रताप सिंह किन अजर निहारिका पैर थी,
प्रताप सिंह- चिरंजीवी बीटा मुझे निहारिका चाहिए,
भैरव- मुझे ये सभी सुदरिया चाहिए, इतनी सुंदरता मैंने आज तक नहीं देखि, और ये औरत ये कोई अप्सरा ह, इतनी भीड़ में भी इसका सौन्दर्य किसी सूर्य की तरह चमक रहा ह,
रेणुका- ये ह निहारिका, और उसके पीछे जो कड़ी ह इसी की परछाई रीवा, इस संसार में इन दोनों से खूबसूरत कोई नहीं ह,
भैरव- ये मुझे चाहिए, इस धरती पैर मेरे लिए कोई नहीं बानी थी, लेकिन ये दोनों मेरी पत्नी बनने के लायक हैं,
प्रताप सिंह- निहारिका मेरी ह,
रेणुका- इस निहारिका की वजह से मेरे घर परिवार बर्बाद हो गया, इसका तो मैं चीरहरण करवाउंगी,
भवर सिंह- सेनिको पकड़ लो इन सबको,
भैरव- नहीं कोई इन्हे हाथ नहीं लगेया, ये सभी लड़किया मेरी दासी बनेंगी, और ये निहारिका और इसकी बेटी मेरी पत्नी बनेगी, अगर तुम सभी लड़किया जिन्दा रहना चाहती हो और मेरे साथ सुख से मजे में रहना चाहती हो तो मेरे पास आ जाओ,
इससे भवर सिंह थोड़ा विचलित हो गया, लेकिन चिरंजीवी ने उसे रोक दिया,
चिरंजीवी- इस समय कुछ मत बोलो,
साडी लड़किया घबरा गई, सब देव के पीछे आ गई,
देव- तुम सब निकलो यहाँ से, अभेंद्र सबको लेकर निकालो यहाँ से,
अभेंद्र ने सबको इशारा किया, सभी अभेंद्र के साथ महल के अंदर की तरफ भागी, सभी लड़कियों को भागने के तकलीफ हो रही थी, लेकिन जब जान खतरे में हो तो किसी के भी पैरो में ताकत आ जाती ह,
अमरावती और सौमित्र वही कड़ी रह गई,
लड़कियों के भागते hi चिरंजीवी भानु संभु सूरज और ज्वाला तेजी से उनकी तरफ दौड़े, लेकिन उनके बिच में देवा ुर दूत आ गए, देव को देख क्र सब रुक गए, लेकिन भैरव के सामने आ गया, जिससे बाकि लोग लड़कियों के पीछे भाग लिए,
अमरावती और सौमित्र ने सूरज और ज्वाला को रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने दोनों को दूर धकेला और आगे भाग लिए, उनके पीछे दत्त ने दौड़ लगा दी,
राजवीर और अभेंद्र सभी को लेकर महल के अंदर घुस गए, अंदर से कुछ छुपे हुए रस्ते थे, जो देव और अभेंद्र पहले hi बना चुके थे,
भैरव- मैंने तुझे एक सुझाव दिया था की मुझसे मिल जा, इसमें तेरा hi फायदा ह, लेकिन शायद तुझे अपनी मृत्यु से ज्यादा प्रेम ह,
देव- ये तो उप्पेर वाला hi जाने क्या होगा, कोण किसकी मृत्यु बनेगा,
भैरव- मैंने एक बार hi तेरे राजय में पेअर रखा ह और ये पूरा राजय मेरा हो गया ह, ऐसे hi पूरी पृथ्वी मेरी होगी,
भैरव ने देव पैर मुक्के से वॉर किया लेकिन देव इस बार चौकन्ना था, वो तुरंत एक तरफ हो गया, भैरव ने फिर से वॉर किया लेकिन देव फिर बच गया, भैरव लगातार वॉर कर रहा था लेकिन देव को छू नहीं प् रहा था, तभी पीछे से बहवर सिंह आ गया और उसने देव की पीठ पैर वॉर किया, जिससे देव लड़खड़ा गया और इसका फायदा भैरव ने उठाया और एक जोर दर वॉर देव की छाती में किया, जिससे देव उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा, भैरव का मुक्का काफी जोर दर था, देव ने उसकी ताकत को अचे से महसूस किया, देव खुद को सम्हालता हुआ उठा,
देव ने अपने कपडे झड़े और जैसे hi भैरव और भवर सिंह पास आये देव ने घूम क्र एक लात भवर सिंह को मरी, और लात लगते hi भवर सिंह दीवार में जाकर लगा, वो दर्द से बिलबिला उठा, इधर भैरव ने फिर से देव पैर वॉर किया लेकिन इस बार देव ने भैरव का हाथ पकड़ लिया, और उसके मुँह पैर एक मुक्का मारा, मुक्का लगते hi भैरव जमीन में गिर पड़ा, भैरव बड़े आश्चर्य से देव को देखने लगा, उसे यकीन hi नहीं हुआ की उसके सामने इतनी ताकत वाला इंसान खड़ा ह, भैरव खड़ा हुआ अपने जबड़ा मसलने लगा, फिर वो देव पैर टूट पड़ा, दो महा शक्ति शक्ति इंसान एक दूसरे पैर टूट पड़े थे,
भैरव की ताकत देव से बहुत अधिक थी, देव की फुर्ती भैरव से ज्यादा थी इसलिए वो उसके हमलो से बच रहा था, और उछाल उछाल क्र उस पैर हमले कर रहा था,
भैरव देव पैर हावी पद रहा था, भवर सिंह बिच बिच में आकर देव पैर हुम्ला करता, लेकिन देव उसे एक दो मुक्को में hi दूर फेंक देता, इनकी लड़ाई का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा था, न कोई थक रहा थान ा hi हर मन रहा था, देवा ुर भैरव में से जिसको भी घाव लगता तुरंत ठीक होजाता, बाकि परजा और सैनिक खड़े देख रहे थे,
वही दूसरी तरफ अभेंद्र और राजवीर सभी लड़कियों को लेकर महल के छुपे रस्ते से बहार निकल गए थे, चिरंजीवी संभु और भानु के सामने दत्त आ गया, दत्त की ताकत का मुकाबला करना भी आसान नहीं था, ज्वाला और सूरज उन सबके पीछे आगे बढ़ गए, लेकिन वो दोनों अकेले थे और सामने अभेंद्र राजवीर और साडी लड़किया, जो सभी युद्ध कला सिख चुकी थी,
अभेंद्र और निहारिका रुक गए बाकि सबको राजवीर आगे लेकर निकल गए, निहारिका और अभेंद्र ने ज्वाला और सूरज पैर हुम्ला कर दिया, वो दोनों योद्धा थे अचे योद्धा थे, लेकिन अभेंद्र अब उनसे कही भीतर योद्धा बन हकूका था, और निहारिका को हराना उनके लिए नामुमकिन था,
चिरंजीवी दत्त को झांसा देकर निकल गया, भानु और संभु को दत्त ने अपने जबड़ो से अचे से घायल क्र दिया था, चिरंजीवी जब तक सूरज और ज्वाला के पास पूछा तब तक दोनों घायल बेसुध से हो चुके थे, अभेंद्र ज्वाला को मरने hi वाला था तभी चिरंजीवी वह आ गया, उसने अभेंद्र पैर हुम्ला कर दिया, अभेंद्र चिरंजीवी का सामना करने लायक ताकतवर नहीं था, लेकिन निहारिका और अभेंद्र मिलकर चिरंजीवी का सामना कर प् रहे थे, लेकिन जल्दी hi चिरंजीवी उन दोनों पैर बहरी पड़ने लगा, अभेंद्र घायल हो चुक्का था,
तभी वह दत्त आ गया और चिरंजीवी पैर हुम्ला किया और उसे घयल क्र दिया, इसक अमोका पाकर निहारिका और अभेंद्र वह से निकल गए, और कुछ देर में दत्त भी उनके पीछे चला गया,
इधर देव भवर सिंह और भैरव से अकेले लड़ रहा था, अब युद्ध तलवारो से हो रहा था, तलवार चलने में देव बहुत hi फुर्तीला था, और खास बात थी की देव पैर जो घाव लगता उसके घाव तुरंत भर जार हे थे, लेकिन भवर सिंह और भैरव के घाव नहीं भर रहे थे, उनके खून भी रहा था, तभी सात्विक ने एक शक्ति का हुम्ला देव पैर किया जिससे उसका शरीर बांध सा गया, जिसका मौका पाकर भवर सिंह ने तलवार के अनेको वॉर देव पैर क्र दिए,
देव ने अपनी पूरी ताकत लगाई और सात्विक की शक्ति को तोड़ दिया, शक्ति टूट ते hi भवर सिघ घबरा कर पीछे हो गया,
जब युद्ध को बहुत लम्बा समय हो गया और देव अब भी काबू में नहीं आ रहा था तो भैरव ने अपनी कमर पैर से एक तलवार निकली, तलवार की चमक से किसी की भी आँखे चुंधिया जाये, उस तलवार को लेकर भैरव देव के सामने पंहुचा और उस पैर वॉर किया, कुछ देर तो देव बचता रहा लेकिन एक वॉर देव की छाती को चीरता चला गया, देव को ऐसे घाव बहुत लगे थे लेकिन वो हर बार भर जाते थे, लेकिन इस तलवार का दिया हुआ घाव नहीं भरा और देव को भयंकर दर्द भी हुआ, देव दर्द से चीख उठा, maaaaaaaaaaaaaaaaaa
अब तक वह चिरंजीवी, भानु शम्भू ज्वाला और सूरज भी वापस आ चुके थे, देव को ऐसे घायल देख क्र वो भी चौंक गए,
जिसे कोई घाव नहीं लगता था उसके शरीर पैर इतना बड़ा घाव कैसे बन गया,
तभी भैरव ने दूसरा वॉर किया और उसकी कमर को चिर दिया, देव के शरीर से खून की नदी सी भेने लगी, देव दर्द से कराह रहा था,
सात्विक- ये ये कैसे किया आपने, ये हथियार किस चीज का बना ह,
भैरव- ये hi वो हथियार ह जो किसी की भी जान ले सकता ह, और ये तलवार अब इस देव की जान लेगी,
तभी दत्त के दहाड़ने की आवाज गूंज गई, उसकी दहाड़ इतनी तेज थी की वह खड़े सब लोगो का दिल दहल गया, दत्त की आवाज से भैरव भी एक पल के लिए बोखला गया,
दत्त पूरी राफ्तेर से डोडा चला आ रहा था और उसके उप्पेर बैठी थी निहारिका, उसे देख क्र हारक ो अचम्भित सा देखता रह गया, लोग सामने से हैट ते चले गए, निहारिका करी बा रही थी, भवर सिंह ने उस पैर हुम्ला करना चाहा लेकिन तभी एक धमाका हुआ और चारो तरफ धुआँ धुआँ हो गया, किसी को कुछ नहीं दिख रहा था,
सात्विक ने तुरंत अपनी शक्ति से उस धुए को हटाया तो सब चौंक गए, क्योकि जहा देव घयल पड़ा था अहा अब कोई नहीं था, निहारिका देव को दत्त पैर बैठा केर वह से बिजली की तरह दौड़ गई,
भवर सिंह- ये क्या हुआ, ये धुआँ कैसे आया,
सात्विक- भौमिक यही कही आस पास था,
जी है भौमिक भीड़ में आ चुक्का था, देव पैर हो रहे हमले को रोकने का तरीका धुंध रहा था तभी निहारिका आई तो उसे मौका मिल गया,
चिरंजीवी- हमे उनका पीछा करना चाहिए,
सात्विक- अब उन्हें पकड़ा आसान नहीं ह,
भैरव- उसकी जरुआत hi नहीं ह, वो देव अब नहीं बचेगा, इस तलवार के वॉर से वो जिन्दा नहीं रहे पायेगा,
भवर सिंह और प्रताप सिंह ने अपने सैनिक निहारिका के पीछे लगा दिए थे,
चिरंजीवी- ये तलवार आई कहा से, ऐसे किसी हथियार के बारे में हमे कोई जानकारी नहीं थी,
भैरव- आज इस धरती पैर इससे ज्यादा शक्ति शैली हथियार कोई और नहीं ह, इसके अंदर भगवान् की ऊर्जा बह रही ह, ये किसी भी वास्तु को चिर सकती ह, जो नहीं मर सकता उसे मार सकती ह,
भवर सिंह- लेकिन ये तलवार तो हमारे राजय की ह, इस पैर हमारे राजय को मोहर ह, मैंने तो इसके बारे में कभी नहीं सुना, मेरे राजय में ऐसा हथियार ह और मुझे hi नहीं पता,
सात्विक- क्योकि इसे बने हुए ज्यादा समय नहीं हुआ ह, जहा तक मेरी जानकरी ह ये वो तलवार ह जिससे देव और निहारिका को मारा गया था, मैंने जब देव का अतीत देखा था तो उसे आखरी बार झरने से गिरते देखा था और देव के हाथ में तलवार थी जो उसने उस चिताः के पेट में घुसाई हुई थी, हो न हो जब शक्ति उस देव को मिली तो इस टावर के जरिये वो शक्ति उस चिताः के शरीर में भी गई, और एक ऊर्जा इस तलवार में भी रह गई,
भैरव- सही कहा ऐसा hi हुआ होगा, और इसी शक्ति ने मुझे अपनी तरफ आकर्षित किया था, इस तलवार को हाथ में लेते hi मैं समझ गया था इसके अंदर वही ऊर्जा ह जो तुम सबके अंदर ह, तो ये hi तलवार इन शक्ति धारको का अंत क्र सकती ह,
अब बाकि सब थोड़े घबरा गए थे, लेकिन प्रताप सिंह और रेणुका खुशिया मन रहे थे, सबसे ज्यादा कोई खुश था ो थी रेणुका,
भवर सिंह- राजय में उत्सव मनाया जाये, आज हमने एक बड़े शत्रु को मार गिराया,
परजा शोर मचा कर ख़ुशी जाहिर करने लगी, लेकिन उस भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी थे जो बहुत दुखी थे, जिन्हे पता था ये जो हुआ कितना गलत हुआ ह, अब इस राजय के लोगो का क्या होगा, ये राजय बर्बाद हो जायेगा,
उनमे से अमृता और सौमित्र भी ऐसा hi सोचती थी, वो दोनों भी दुखी थी, जब से उन्होंने देव के साथ रिश्ता बनाया था उनके अंदर देव के लिए एक अलग hi प्रेम जग चुक्का था, और जब उन्हें पताचला की उनके बेटो ने उन्ही बेटियों के साथ ऐसा करने की कोशिश की तो वो और टूट गई, लेकिन यहाँ वो कुछ बोल नहीं सकती थी, इसलिए चुप चाप सबके पीछे पीछे रही,
महल में आकर जब सिंघासन पैर बैठने की बरी आई तो वह 3 राजा खड़े थे, भवर सिंह जिसका ये राजय था, प्रताप सिंह जिसने इस राजय को जीत लिया था, और भैरव सिंह जो खुद को पूरी पृथ्वी का राजा मंटा था,
भवर सिंह जैसे hi राजगद्दी की तरफ चला तो भैरव ने उसे रोक दिया,
भैरव- ये राजय मेरा ह, और यहाँ से बैठ क्र मैं पूरी धरती पैर राज करूँगा, सुना ह इसी राजय के लोगो को जिम्मेदारी दी गई थी मेरा इतहास मिटने की, हहहहहहहह अब ये hi राजय मेरी ताकत की पहचान बनेगा,
भवर सिंह बोखला गया, लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था, वो पीछे हैट गया, ये देख कर अमरावती और सौमित्र और दर गई, उन्हें अहसास हो गया की अब ये राजय तबाह हो जायेगा,
वही दूसरी तरफ निहारिका देव को लेकर एक जंगल में पहुंची, जहा बाकि लड़कियों को लेकर राजवीर पहले hi पहुंच चुक्का था,
देव को ऐसे घायल और बेसुध देख क्र सभी घबरा गई और सबकी आँखों में आंसू आ गए,
रीवा- ये कैसे हो सकता ह, देव कोई कैसे घायल क्र सकता ह,
निहारिका- मुझे नहीं पता वह क्या हुआ, बस मैं सही समय पैर वह पहुंच गई, वर्ण अनर्थ हो जाता ह,
अभेंद्र- हम यहाँ ज्यादा देर नहीं रुक सकते, हमे यहाँ से निकलना होगा, वो लोग हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगे,
राजवीर- लेकिन देव को इस हालत में लेकर कहा जायेंगे, देव को उपचार की जरुरत ह, और हमारे पास छुपने की कोई जगह भी नहीं ह,
अभेंद्र- जगह ह, देव ने पहले hi सब कर दिया था, लेकिन उसके लिए यहाँ से उत्तर दिशा की तरफ चलना होगा, वही देव का उपचार कर पाएंगे,
अभेंद्र की बात सबको सही लगी, देव को अभेंद्र ने एप कंधे पैर उठा लिया, और दत्त आगे का रास्ता देखता रहा की सुरक्षित ह या नहीं,
बाकि सबा पैदल hi चल दिए, कुछ समय चलने के बाद वो सब एक जगह रुक गए, अभेंद्र ने एक पत्थर हटाया और सब उस पत्थर के निचे गुफा में घुस गए,
यहाँ छिपने के लिए अच्छी खासी जगह बाई गई थी, रहने खाने और सोने की ठीक थक व्यवश्ता की गाइट hi,
निहारिका- जल्दी से किसी वैद को बुलाओ,
मैच पहले से hi यहाँ हु महारानी,
सब आवाज सुनकर दर गए, लेकिन जब वो सामने आये तो सबकी जान में जान आई, क्योकि सामने भौमिक जी खड़े थे,
निहारिका- आप यहाँ
भौमिक जी- मैंने hi देव से ये जगह बनवाई थी, आप घाबरिये नहीं, सब ठीक हो जायेगा,
रीवा- आप देव को बचने क्यों नहीं आये
भौमिक जी- क्योकि मैं सही समय पैर सही जगह पहुँचता हु, जब देवी निहिरका वह आई मैं वही था, और वो धुआँ मैंने hi किया था,
निहारिका- भौमिक जी ये घाव, देव के ये घाव कैसे भरेंगे, वो कैसी तलवार थी जिसने देव को घायल क्र दिया,
भौमिक जी- उस तलवार में वही ऊर्जा ह जो आपके और देव के अंदर ह, ये वही तलवार ह जिससे देव ने दत्त को मारा था, और उसी तलवार के जरिये देव की ऊर्जा दत्त के अंदर गाइट hi, मैं कभी सोच नहीं पाया था की उस तलवार में भी ऊर्जा रह जाएगी,
अक्षरा- आप देव को जल्दी ठीक कीजिये न
भौमिक जी अपने साथ औषधीय लेकर आये थे, जिनसे उन्होंने देव का इलाज शुरू क्र दिया था,
भौमिक जी- अब देव को आराम करे दो,
सभी एक साथ एक दूसरे की बहो में सिमटे हुए बैठे थे,
रेवती- मैं उन्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी, मेरे माँ बाप ने मेरे सुहाग को मरने की कोशिश की ह,
अमिता- हमारे बाप ने hi अपने बेटे को और हम सबको मरने की कोशिश की ह,
रीवा- सबको सजा मिलेगी, कोई नहीं बचेगा,
कस्तूरी- लेकिन हम उनसे लड़ेंगे कैसे, हम सब एक साधारण इंसान और वो सब इतने शक्ति शैली और अमर इंसान ह,
मनीषा- कितना बुरा समय आया ह, कल रात तक सब कितना अच्छा था और सूरज निकलते निकलते hi सब ख़तम हो गया,
भौमिक जी- अभी तो असली तूफ़ान आना बाकि ह, एक ऐसी परलय जो सब तहश नहश क्र देगी,
निहारिका- ऐसा न कहो भौमिक जी, मैं और नहीं झेल पाऊँगी,
भौमिक जी- आपको hi तो झेला ह महारानी, आपको खुद को मजबूत करना होगा, और बच्चियों सही समय आने का इंतजार करना होगा, तुम सब का कौमार्य भांग हो चुक्का ह न,
इस बात से सबके सर झुक गए,
भौमिक जी- मुझसे मत शर्माओ, मेरे लिए सब कुछ जानना जरुरी ह,
निहारिका- भैया आप और अभेंद्र बहार जाइये और सुरक्षा का ख्याल रखिये,
अभेंद्र और राजवीर बहार निकल गए,
निहारिका- जी सबकी सुहागरात हो चुकी ह,
भौमिक जी- सबके अंदर देव का वीर्य गिरा ह न
निहारिका ने सबकी तरफ देखा, तो सबने है में गार्डन हिला दी सिवाय सुगंधा के
निहारिका- सुगंधा तुम है नहीं बोल रही,
सुगंधा- क्योकि हम एक नहीं हो पाए थे माँ
निहारिका ने डरते हुए भौमिक जी को देखा,
भौमिक जी- ये सही नहीं हुआ, इसका मतलब मुझे अपना यज्ञ पूरा hi करना होगा,
निहारिका- कैसा यज्ञ
भौमिक जी ने मनीषा और सुगंधा को देख क्र बोलै- कुछ लोगो का वापस लाना ह,
भौमिक जी वह से निकल गए, बाकि परिवार देव को घेर क्र बैठ गए,
भवन पूरा में क्या हुआ ये खबर काम्य तक भी पहुंच गाइट hi,
अभिजीत- माँ माँ वापस आ गए, देव को मर दिया गया ह, लेकिन अब राजय पैर किसी भैरव का अधिकार हो चुक्का ह, क्या हमे वापस चलना चाहिए,
काम्य- नहीं अभी नहीं, वह क्या हुआ ह मुझे सब जानकारी ह, अगर हम वह गए तो हालत बदल जायेंगे, अगर सब ठीक रहा तो वो खुद हमे लेने आएंगे,
अभिजीत- माँ मैंने कुछ अजीब सुना ह, वह जो बाते हुई हमारे जासूस ने आकर बताई क्या वो सच ह,
काम्य ने घेरि साँस भरी- है वो सब सच ह,
अभिजीत- तो भवर सिंह मेरे पिता ह,
काम्य- है वो hi तेरे पिता ह,
अभिजीत- फिर तो उस राजय पैर मेरा भी अधिकार हुआ,
काम्य- तुझे अधिकार की चिंता ह, तूने ये नहीं सोचा भवर सिंह मेरे भाई हैं और तू मेरे भाई की संतान ह,
अभिजीत- मुझे इस बात से फरक नहीं पड़ता, मुझे किसी रिश्ते से फरक नहीं पड़ता, आपकी जिंदगी ह आप जिससे चाहो सम्भोग करो, मुझे बस राजपथ चाहिए,