Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 183 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

“क्या हो गया? आज रस नहीं पिलाओगे...?” रेखा ने परम के लंड को सहलाते हुए पूछा।



“मैं क्या करूँ रानी! निकल ही नहीं रहा...!” परम ने हाँफते हुए कहा।
निर्मात्री फनलवर है।

रेखा ने मुस्कुराते हुए बड़ी बहू की तरफ देखा और बोली,

“मुझे लगता है, इसको (लंड) को चूत के रस की जरूरत है।”

रेखा ने बड़ी बहू की निप्पल को सहलाते हुए कहा,

“देख... भाभी की चूत कितनी प्यासी है... बहुत भूखी है... चल राजा... भाभी को ठंडा कर दे। मेरा भैया इस रांड को चोद नहीं पाता...”

“चल भाभी... आपकी चूत दिखा मेरे यार को और उसके लंड से पानी गिरा दे। दीखता नहीं बेचारा... मेरा पति है अभी और उसके लंड से माल नहीं निकल रहा और मेरी गांड भी जवाब दे गई है। अब तेरा सहारा है... तेरी चूत दे मेरे इस प्यारे से लंड को...”

रेखा ने कहा और उसने बड़ी बहू के दोनों हाथ पकड़ लिए।

बड़ी बहू ने खुद को रेखा और परम के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन परम ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया और 4-5 जोरदार धक्के लगा दिए। लंड चूत के अंदर तक चला गया।

आखिरकार लंड और चूत दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते थे।

रेखा को खुशी हुई जब उसने देखा कि भाभी चुदाई का आनंद ले रही है और अपने कूल्हे हिलाकर जवाब देने लगी है।

“भाभी... मजा आ रहा है ना...?”

“हाँ रेखा... बहुत मस्त लंड है तेरे यार का... और बहुत प्यार से दम लगाकर चुदाई करता है... मजा आ गया... तेरे भैया ने कभी ऐसा नहीं चोदा... तू भी चुदवा ले... परम की रंडी बनने का भी एक अलग ही मजा है रेखा...”

“बस... भाभी... मुझे एक बार ससुराल से वापस आने दे... फिर तो रात-दिन परम को अपनी चूत के अंदर बंद करके रखूँगी... तब तक तुम और पूनम जितना चाहो परम के लंड का मजा ले लो...”

बड़ी बहू ने अपनी टाँगें ऊपर उठाईं और कूल्हे को झटका दिया।

“परम को बोल ना कि वो छोटी भाभी को भी चुदाई का मजा दे... तेरा छोटा भैया उसको रंडी बनाना चाहता है... अपने दोस्तों से चुदवाना चाहता है... साला खुद तो बीबी को खुश नहीं कर सकता...”

भाभी की चूत से अब फच-फच की आवाजें आने लगी थीं।

“ठीक है भाभी... कल छोटी भाभी को लेकर आना... उसे भी परम से चुदवा दूँगी। वैसे भाभी... तेरी चूत ने काफी रस छोड़ दिया है जो इतनी आवाजें कर रही है...” रेखा ने जवाब दिया।
कथाकार फनलवर है।

रेखा को क्या मालूम कि उसकी दोनों भाभी को खूब चोदा जा चुका है।

इस तरह बात करते-करते परम भाभी की चुदाई कर रहा था। आखिर भाभी भी थक गई और परम को अपने शरीर से हटाने लगी। और बोली,

“परम... अब मेरी चूत में ज्यादा रस नहीं बचा... तेरे लंड ने तो कमाल कर दिया है... मेरी चूत अब कल तक अपना चुतरस नहीं बना पाएगी... कितनी बार झड़ चुकी हूँ... अब छोड़ मुझे... मेरे माल की माँ-बहन एक कर दी इस नालायक प्यारा सा लंड ने...”

लेकिन परम ने भाभी के कंधों को जोर से पकड़कर खूब जोर-जोर से धक्का मारने लगा। उसे लगा कि उसका पानी निकलने वाला है। परम ने चुतरस वाला लंड बाहर निकाला और रेखा के मुंह में घुसेड़ कर धना-धन धक्का लगाने लगा।

परम ढीला हो गया। और थोड़ा रस रेखा के मुँह में गिराने के बाद लंड बाहर निकाला और भाभी के मुँह में पेल दिया।

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बने रहिये दोस्तों।



फूँलवर.





 
फिर रेखा और बड़ी बहू दोनों ने परम के लंड को चूस-चूस कर ठंडा किया। बहू ने रेखा को यह नहीं बताया कि परम किरण और उसकी माँ दोनों को चोद चुका है।

“ओह... आज बहुत मजा आया...” बड़ी बहू ने कहा, “रेखा... पहले तूने और फिर इस लंड ने मेरी चूत को खुश कर दिया...” उसने परम के लंड को सहलाया और बोली, “मैं जब तक यहाँ हूँ, मुझे चोद... जितना हो सके... और तेरे में और तेरे इस लंड में जितनी ताकत है... मेरे छेदों पर ही निकालता रह...”

रेखा ने बड़ी बहू की निप्पल को बहुत जोर से खींचा और छोड़ दिया।
लेखिका फनलवर है।

“देखा ना भाभी... मैं कहती थी कि मेरे इस यार का लंड एक बार जिसकी चूत में गया... वह चूत उसकी हो जाती है... तेरे इस माल का सत्यानाश करने अब तू सामने से ही उसके लंड पर लटकेगी...”

दोनों औरतें थक गई थीं, परम भी थक गया था। तीनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। परम दो मालों के बीच में था। दोनों ने एक-एक चुची उसकी छाती पर और एक-एक जाँघ उसके पैरों पर रख दी थी।

और वहाँ परम का कमरा, जो नीचे था

सेठजी कमरे में दाखिल हुए। अँधेरा था। उन्होंने लाइट जलाई और तुरंत अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। किरण के जवान, नग्न शरीर से उनकी नजरें हट ही नहीं रही थीं।

सेठजी अपने कमरे में सुंदरी और फिर छोटी बहू का इंतजार कर रहे थे। वे लगभग आधी रात को सोने चले गए थे और अब सुबह के तीन बज चुके थे। उनकी दोनों रखैलें चुदाई के लिए नहीं आईं। उन्होंने सोचा कि शायद सुंदरी अपने घर चली गई होगी और यह सोचकर उन्हें गुस्सा आ गया कि छोटी बहू अभी भी परम से चुद रही है।

इसलिए वे उठे और परम के कमरे में आ गए।

उन्होंने देखा कि एक तरफ पाँच छोटे लड़के सो रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी साली की इकलौती बेटी किरण नंगी सो रही है। उन्हें किरण के बगल में परम का पायजामा और कमीज़ पड़ा दिखाई दे रहा था। साफ था कि परम ने इस लड़की को भी चोदा है। परम का लंड किरण की दरार को भर चुका है।

सेठजी को आश्चर्य हुआ कि परम अपने कपड़े यहाँ छोड़कर कहाँ चला गया होगा! तभी उनकी नजर एक साड़ी पर पड़ी जो सेठजी ने रात के खाने के समय छोटी बहू के शरीर पर देखी थी।

सेठजी को यह सोचकर गुस्सा आ गया कि किरण की चुदाई करने के बाद परम छोटी बहू को चुदाई के लिए किसी दूसरे कमरे में ले गया है। लेकिन उसकी नजर जवान लड़की किरण की बिना बाल वाली, बहुत कमसिन, छोटी चूत पर पड़ी।

अपने जवानी के दिनों में सेठजी ने अपनी साली (किरण की माँ) के साथ छेड़खानी की थी, लेकिन उन्होंने उसे कभी नहीं चोदा। असल में सेठजी को किरण की माँ कभी पसंद नहीं थी क्योंकि उनका शरीर उन रंडियों की तरह आकर्षक नहीं था जिन्हें वह चोद रहे थे।
फनलवर का निर्माण।

उन्होंने किरण की ओर देखा और उसके माल को देखा। किरण नंग-धड़ंग लेग्स इधर-उधर कर लेती थी। नींद में उसकी छोटी लेकिन गोल-गोल, टाइट बोबले हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं।

सेठजी किरण के पास आकर खड़े हो गए। किरण की चिकनी और नन्ही चूत देखकर सेठजी का लंड फड़फड़ाने लगा। वो सुंदरी और छोटी बहू दोनों को भूल गए।

सेठजी ने अपना धोती खोला। फिर गंजी बाहर निकला।

सेठजी ने फैसला किया कि अब जो भी हो, इस लड़की, जो उनकी छोटी साली की लड़की है, को चोदेंगे जरूर। सुंदरी की गदराई मस्त जवानी सेठजी को बहुत प्यारी थी और है, लेकिन पिछले दिनों पहले छोटी बहू, फिर कल शाम को महक और आज दिन में पूनम को चोदने के बाद सेठजी को कच्ची, जवान माल ज्यादा पसंद आने लगा था। वो पहले भी कोलकाता में छोटी बहू की नौकरानी की कमसिन लड़की को चोदकर कच्ची चूतों का मजा ले चुके थे।

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बस यही तक दोस्तों।

आगे की कहानी आपके कोमेंट्स आने के बाद तुरंत।

तब तक के लिए
फूँलवर की ओर से जय भारत।।

 
सेठजी और किरण सुबह के तीन बजे.......



सेठजी किरण के पास आकर खड़े हो गए। किरण की चिकनी, बिना बाल वाली, नन्ही चूत देखकर उनका लंड फड़फड़ाने लगा। वो सुंदरी और छोटी बहू दोनों को भूल गए। यह होने स्वाभाविक था।
फनलवर की प्रस्तुति।

सेठजी ने अपना धोती खोला। उनका मोटा, भारी लंड बाहर निकला, गंजा सुपारा चमक रहा था।

सेठजी ने किरण की चूत को सहलाया। किरण को कुछ भी पता नहीं चला। सेठजी को लगा वो बिना बाल वाली चूत को सहला रहे हैं। आज सुबह ही सुंदरी ने किरण की झांट साफ की थी और उसके बाद मुनीम ने उसे चोदा था। मुनीम ने उसे पाँव-रोटी जैसी चूत बना के छोड़ा था।

सेठजी की गर्मी बढ़ती जा रही थी। अब वे चूत को सहलाने के साथ-साथ चुची को भी मसल रहे थे। सेठजी का लंड बिल्कुल टाइट हो गया। किरण अभी भी नींद में बेहोश थी।

थोड़ी देर के लिए सेठजी ने चूत पर से हाथ हटाया और दोनों हाथों से दोनों चुचियों को पैक करके 4-5 बार मसला। सेठजी को लगा कि किरण की चुचियाँ महक और पूनम की चुचियों से ज्यादा टाइट हैं, हाँ उनकी निप्पल जैसी स्पंजी और बड़ी नहीं हैं।

निप्पल दबाते-दबाते सेठजी ने अपनी साली की बेटी को चूम लिया। परम ने किरण को चोद-चोदकर इतना थका दिया था कि वो जागी नहीं। सेठजी ने प्यार से दोनों निप्पलों को चूसा, थोड़ी देर तक चूसते रहे, काटते रहे और चबाते रहे।

अब सेठजी को बर्दाश्त के बाहर होने लगा था। उन्हें कल शाम की बात याद आई जब वो महक को अकेली देखकर इतना गर्म हो गए थे कि महक ने एक बार लंड को दबाया और पानी निकल गया। लेकिन फिर सेठजी को गर्व महसूस हुआ कि बाद में महक को जमकर चोदा और चोद-चोदकर संतुष्ट किया। अब संतुष्ट किया या खूद संतुष्ट हुए यह तो सेठजी ही बता सकते है, या फिर महक।

महक की चुदाई को याद कर सेठजी किरण के पैरों के बीच बैठ गए। उन्होंने लंड को चूत पर दबाया और अपनी दो उँगलियों से चूत के होंठों को फैलाया और लंड को थोड़ा और चूत के छेद पर दबाया। लंड का ऊपरी भाग, सुपारा उसकी चूत में घुस गया।

(अब जहाँ मुनीम का सुपारा जिस चूत में सैर कर गया हो, उस चूत में कोई और सुपारा घुसे तो क्या असर होने वाला था...)

सेठ जी को हैरत हुई की उनके लंड का सुपारा भी किरण पर कोई असर नहीं दिख रही थी। सेठजी किरण के ऊपर फैल गए और उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़कर 3-4 जोरदार धक्के मारे।

“ओह्ह्ह परम... इतना जोर से नहीं...” किरण को पहले लगा कि परम फिर से चोद रहा है, लेकिन तुरंत ही किरण को फील हुआ कि जो लंड उसकी चूत के अंदर है वो पतला है और उसके शरीर पर जो आदमी है वो परम से बहुत भारी है।

किरण ने आँखें खोलीं। वह यह देखकर हैरान हो गई कि उसके मौसा जी पूरी लाइट जलाकर उसे चोद रहे हैं। वह चिल्लाना चाहती थी और उसने अपना मुँह खोलने की कोशिश की।
फनलवर का निर्माण।

सेठजी ने अपने भारी और बड़े हाथ उसके मुँह पर रखकर कहा,

“देख बेटी... मैं तो यहाँ किसी और के लिए आया था... लेकिन तुम्हारी मस्त नंगी जवानी को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और लंड चूत में पेल दिया...अब लैंड को शांत करना तेरी जिम्मेदार है बेटी।”

सेठजी ने उसके गालों को सहलाया और चूमा और आगे बोले,

“और अब जब लंड और चूत ने एक-दूसरे को पसंद कर लिया है तो तुम भी चुदाई का मजा लो। देखो... हर चूत की यह जिम्मेदारी है कि घर के लंडों को ठंडा रखे। है ना! बस तुम भी मेरा लंड लेकर ठंडा होने दो... कब से बेचारा चूत के लिए तरस रहा है...”

उसने कुछ जोर के धक्के दिए और गति धीमी कर दी।

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जुड़े रहिये दोस्तों।



फूँलवर.





 
सेठजीने आगे कहा,



“आज अगर मेरी जगह कोई भी होता... यानी की तेरा बाप और भैया भी होता तो तुम्हें नंगी देखकर जरूर चोद डालता...और चोदना भी चाहिए, बेटी बस थोड़ी देर और चोदने दो।”

उसने चुदाई जारी रखी और बोला,

“सच-मुच रानी... तेरे जैसी गरम और टाइट चूत मैंने अब तक नहीं चोदी...” सुने एक-दो और धक्के चूत में दे मारे। हालाकि किरण को उस धक्को से ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी की उसे चिल्लाना पड़े।
निर्मात्री फनलवर है।

सेठजी किरण को मस्का मारकर खुश कर रहा था। असल में किरण महक और पूनम की तुलना में बहुत कम चुदी थी।

“रानी... तू डर मत... किसी को कुछ पता नहीं चलेगा... तू चुदाई का मजा ले...” इतना कहते हुए सेठजी ने जमकर अपनी साली की बेटी को चोदा।

“लेकिन मौसाजी... यह गलत है...” किरण ने हाँफते हुए कहा।

“क्या गलत है! लगता है की तुझे तेरी माँ ने सिखाया नहीं की चूत का काम है लंड को ढीला रखना या करना। जब तुम्हारे पास माल है तो कोई तो जोहरी चाहिए ना! और तुझे क्या करना है बेटी... थोड़ी देर अपने पैरों को फैलाकर रख... मैं तेरी चूत को चोद के चला जाऊँगा... किसी को कानो कान खबर तक नहीं होगी की मैंने तुम्हें चोद दिया है...तुम्हे घर के लंड को ढीला रखने के लिए नहीं सिखाया है?”

“वो सब तो ठीक है मौसाजी... पर जो कर रहे हैं वो ठीक नहीं है... और मेरी माँ ने यह तो नहीं कहा था की अपने माल को मौसाजी को भी भेंट करना होगा...अपने ही खुद के मौसाजी के आगे पैरो को फैला के उनके लंड को.....”

“कोई बात नहीं बेटी... शायद तेरी माँ यह सब सिखाना भूल गई होगी... अब मैं तुम्हें सिखा रहा हूँ ना कि इस घर में कोई कुछ नहीं है बेटी... सब लंड और चूत का खेल है...”

इस बातों में सेठजी ने लंड को पूरा समा लिया था। बस अब कुछ धक्कों की ही बात रह गई थी।
फनलवर की रचना।

किरण ने अपने पैरों को जोड़ने की नाकाम कोशिश की। पर सेठजी के हाथों से उसके पैर छूट नहीं सके। वैसे देखा जाए तो उसने कुछ खास मेहनत भी नहीं की थी।

“चलिए मौसाजी... मेरे माल में से अपना लंड निकाल दीजिए... मुझे मेरे माल को मौसाजी से नहीं चुदवाना...”

“अब तेरे इस माल में मेरा लोडा अंदर तक जा चुका है... बस थोड़ी देर रुक जाओ... मेरा लंड से धार निकल लो... तुम्हें कुछ चाहिए होगा तो मैं देने के लिए तैयार हूँ...”

“बस करो मौसाजी... मैं कोई वेश्या नहीं हूँ... मेरा माल सिर्फ मेरे कुछ चुनिंदा लोगों के लंड के लिए है...” उसने लंड को पकड़कर बाहर की ओर लेने का प्रयास किया, लेकिन वह जानती थी कि थोड़े धक्कों की ही बात है। खुद भी सैर कर ले मौसाजी के लंड की।

“अरे मैंने कब कहा की तुम वेश्या हो! बस घर की बात है... घर का लंड है और घर की चूत... खेलने दो लंड और चूत को बेटी...”

“मौसाजी... कोई आएगा तो मर जाना पड़ेगा... मेरे माल का अब कुछ हो नहीं सकता... आपने बिना पूछे ही मेरे माल में अपना लंड उतार दिया है...यह बात सरा सर गलत है। हमारे में भी एक व्यवहार और नियम भी तो है की चूत की परमिशन के बिना कोई भी लंड शांत नहीं कर सकता। आप शायद भूल गए है।”

“बेटी... कोई नहीं आएगा... और अगर कोई आएगा भी तो मैं हूँ ना संभालने के लिए... तू चिंता मत कर... बस पैर फैलाकर अपना माल ढीला कर ताकि मेरा लंड तेरे इस माल को चोद सके...नियम की बाते बाद में भी हो सकती है।”

लेकिन परम की मस्त चुदाई के बाद किरण को कोई खास मजा नहीं आ रहा था। लेकिन जब लौड़ा चूत में घुस गया तो क्यों ना मजा ले, यह सोचकर किरण भी सिसकारी मारने लगी।
संपादिका मैत्री पटेल।

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जुड़े रहिये दोस्तों।



फूँलवर.

 




“ओह्ह्ह मौसाजी... चोदिए... जमकर चोदो अपनी बेटी को...चलिए डालिए आपका लंड इसमें...” किरण ने सिसकारी भरते हुए कहा।

सेठजी ने किरण के निप्पल को जोर से मसलते हुए पूछा,

“किरण... बोल... परम ने तेरी चूत कितनी बार मारी...?”

किरण ने सेठजी को गले लगाते हुए जवाब दिया,

“कल रात... यहीं पर परम ने मेरी सील तोड़ी थी... और फिर दोबारा चोदा था... और आज आपके आने के पहले फिर से चोद कर... पता नहीं साला कहाँ गया...और मस्त कर के गया...क्या करती मैं भी चुद ही गई उससे।”

उसने सेठजी को गले लगाया और कहा,

“परम लास्ट में मेरी गांड में उँगली डालके सो गया था... पर अभी नहीं है... चूत टाइट है ना...?”

“हाँ रानी... बहुत टाइट है... मजा ले...देख लंड को मजा आना चाहिए बस, तेरी चूत भी तो तुम्हे मजा देगी, चिंता मत कर।”

सेठजी ने उसके छोटे-छोटे कूल्हों को पकड़कर ऊपर की ओर धकेल दिया। सेठजी ने उसके कूल्हों को पकड़कर चुदाई जारी रखी। वो जोर-जोर से धक्के मार रहा था। सेठजी का 90 किलो का ताकतवर वजन किरण की चूत में होने के बावजूद, सेठजी उसे परम या मुनीम की तरह उत्तेजित नहीं कर सके।

लेकिन सेठजी किरण की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्होंने चूत में डिस्चार्ज कर दिया। उसे बहुत आराम और खालीपन महसूस हुआ।

“मौसा जी... बहुत मजा दिया आपने...” किरण ने सेठजी को खुश करने के लिए कहा। उसने सेठजी को धक्का देकर नीचे गिरा दिया और उनके ऊपर लेट गई। लेकिन मन ही मन उन्हें कोस भी रही थी। ज्यादा मजे उसे आई तो नहीं थी, पर क्या करती मौसा को खुश भी रखना था। और आखिरकार एक लंड जो कभी कोई नहीं मिला तो यह मैसजी का लंड से अपने माल की सर्विस करवा सकती है।

“ओह मौसा जी... आपने बहुत मस्ती दी... जब तक मैं यहाँ हूँ... रोज़ मुझे चोदना पड़ेगा... परम मुझे चोदे या ना चोदे... आपका ये लौड़ा मुझे चूत में रोज़ चाहिए...”

उसने सेठजी को 69 पोजीशन में घुमाया और करीब 10 मिनट तक उनका लंड चूसा। फिर सेठजी ने उसे बाहों में ले लिया। वह बहुत खुश था कि किरण जैसी जवान लड़की ने उसकी चुदाई की सराहना की और कहा कि उसने परम से बेहतर चुदाई की।

उसके पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं था।

“बेटी... तूने मुझे बहुत खुश किया है... बोल... क्या चाहिए... जो मांगेगी... दूँगा...”

“आपने भी मुझे बहुत मस्ती दी... परम से भी ज्यादा... बस मुझे रोज आपका लौड़ा चाहिए...”

“फिर भी... कल मेरे रूम में मुझसे मिलना... मैं तुम्हें कुछ दूँगा...और चोदुंगा भी। तेरी माँ से भी मस्त है तुम तो।”

हालाँकि सेठजी ने कल किरण को आते हुए देखा था और पहले भी देखा था, लेकिन उन्होंने कभी भी साधारण दिखने वाली लड़की के साथ चुदाई करने के बारे में नहीं सोचा था। और अब यह लड़की ही उसे जबरदस्त आनंद देती थी और उसे 20 मिनट से अधिक समय तक अपने अंदर रोके रख सकती थी। सेठजी को याद नहीं आ रहा था कि उन्होंने सुंदरी समेत किसी और को 10 मिनट से ज्यादा चोदा हो या नहीं। वह किरण को कोई उचित उपहार देना चाहता था।

“ठीक है मौसाजी... आऊँगी... और आपके उस कुछ के साथ-साथ आपका ये मस्त लंड भी लूँगी...”

सेठजी ने उसे गले लगा लिया। वह जाना चाहता था। वह उठा और बोल्ट खोल दिया। लेकिन किरण ने उसे पीछे खींच लिया और कुछ देर उसके साथ सोने और फिर से चोदने को कहा। सेठ ने सोचा कि कुछ देर गले मिलने के बाद वह अपने कमरे में चला जाएगा, लेकिन किरण के साथ वह भी सो गया।

सुबह

सेठजी को अपने पिछवाड़े पर एक कोमल शरीर का अहसास हुआ, तो जाग उठे। वह मुड़ा और देखा कि छोटी बहू अपनी निप्पल उस पर रगड़ रही है।

“ओह... भेन्चोद... रानी... तुम कहाँ थी... कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ...” उसने शिकायत की।

“और भोसडिके इसी चूत के चक्कर के लिए इस कली (Bud) को चोद डाला!” छोटी बहू ने कहा।

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यही तक दोस्तों ।

बाकि आपके कोमेंट्स आने के बाद।



जय भारत।।

फूँलवर.
 
आपका इतना शानदार और उत्साह से भरा कमेंट पढ़कर सच में बहुत अच्छा लगा।



शादी का माहौल ही कुछ ऐसा होता है कि हर तरफ हँसी, शरारत, रिश्तों की गर्माहट और अनगिनत छोटी-बड़ी घटनाएँ एक साथ चलती रहती हैं। यही कोशिश रहती है कि कहानी में उसी माहौल की चहल-पहल, मस्ती और अलग-अलग किरदारों की अपनी-अपनी कहानी भी जीवंत बनी रहे।

सेठ जी की किस्मत पर आपकी नज़र तो बड़ी गहरी है, और उनका हिसाब-किताब भी अच्छे से दिखाया। :DD: लेकिन अभी शादी और रेखा की विदाई तक कहानी में कई नए मोड़, नए समीकरण और कुछ ऐसे सरप्राइज़ भी आनेकी संभावनाए हैं, जिनकी शायद अभी किसी ने कल्पना भी न की हो।

आपका साथ, आपके ऐसे उम्दा विश्लेषण और दिल से लिखे हुए कमेंट ही लिखने की प्रेरणा देते हैं। आगे भी इसी तरह अपने विचार और सुझाव ज़रूर साझा करते रहिए।



धन्यवाद!
 
सेठजी की नींद खुली तो उन्हें अपनी पीठ पर किसी मुलायम शरीर का एहसास हुआ। उन्होंने मुड़कर देखा तो छोटी बहू अपनी निप्पल उन पर रगड़ रही थी।



“ओह... भेन्चोद... रानी... तुम कहाँ थी... कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ...” उसने शिकायत की।

“और माँ के चुदे, इसी के लिए इस कली (Bud) को चोद डाला!” छोटी बहू ने कहा।

बहू को बुरा लगा कि सेठ ने उसकी पत्नी की बहन की बेटी को चोदा।
फनलवर की प्रस्तुति।



“देख, ऐसा माल को कोई भी चोदता... तुम्हारी तलाश में मैं जब इस कमरे में आया तो मैंने देखा कि ये लड़की की चूत पकड़कर, अपनी टाँगें फैलाकर लेटी है... तो क्या करता... लंड टाइट था... पेल दिया...और उसने भी बड़े आराम से अपनी चूत खोल दी थी। फिर मैं कुछ नहीं कर सकता था बस चूत में मेरा लंड चला गया और मैं सिर्फ देखता रहा। उसमे मेरा कोई कसूर नहीं। जो भी किया इस हरामजादे लंड ने किया।” कहते हुए सेठजी ने छोटी बहू को सीधा करवाया और उसका पेटीकोट उठाकर लंड को चूत पर रगड़ा।

“और बहन के लंड... तूने ये भी नहीं देखा कि ये लड़की तुम्हारी बेटी से भी छोटी है... और तुम्हारी साली की बेटी है... कच्चा माल है...”

छोटी बहू लंड को चूत पर रगड़ती रही, मना नहीं कर सकती थी। आज ही सेठजी ने उसकी सैलरी दी- पूरा एक लाख! कोलकाता की कोठी तो पहले आपने नाम लिखवा लिया था।

“और मैं भोसडी के आपके लंड की याद में मैं बिल्कुल सोई नहीं हूँ... पूरी रात वैसे ही गुजर गई... अगर मन है तो पेल दो...चूत अभी तैयार है भर दो अपने वीर्य से। कही नहीं चुदी, बस तुम्हारे इस लंड के इंतज़ार में तड़पती रही।”

उसने अपने कूल्हे उठाए और सेठजी ने भी एक धक्का दिया और छोटी बहू की चूत तो पहले से ही चिकनी हो चुकी थी तो बड़े आराम से सेठजी का लंड उसकी चूत में घुस गया।

किरण इस चुदाई से अनजान थी।

यह एक सॉफ्ट चुदाई थी। ज्यादा नहीं चली... बस 7-8 मिनट में ही सेठजी डिस्चार्ज हो गए। छोटी बहू को बिल्कुल भी मजा नहीं आया। फिर भी उसने उसे चूमा और अपने कमरे में वापस जाने की सलाह दी। मन ही मन बहु अपने ससुर को माँ-बहन की गाली देती रही। उसे मुनीम की याद आई। “आप कहा हो मूनिमजी आपके लंड के सिवा यह चूत की आग बजने से रही।“

सेठजी खुश थे कि अपनी छोटी बहू के साथ मौज-मस्ती करने के अलावा उन्हें किरण के साथ और भी बहुत कुछ मिला और वे खुशी-खुशी अपने लटकते हुए और मुरझाये हुए लंड को धोती में बाँध कर अपने कमरे में चले गए। उनके जीवन में किरण सबसे छोटा माल आया था जो उनके लंड को चखने को मिला था।

सेठजी के बाहर जाने के बाद...

अंदर कमरे में छोटी बहू ने अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया। वह बिल्कुल नंगी हो गई, जैसे किरण गहरी नींद में उसके बगल में लेटी हो।

छोटी बहू को अभी तक समलैंगिक क्रिया का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उसे अपनी और जवान किरण की नग्नता पसंद थी। हालाँकि वह खुद अपने ससुर के साथ अनाचार कर रही थी, लेकिन उसे इस बात का दुख था कि किरण को उसके मौसाजी ने चोदा।
लेखिका फनलवर है।

और ज़िंदगी में पहली बार उसने किसी और औरत की चूत सहलाई। उसने पाया कि किरण का गुप्तांग बहुत चिकना और रेशमी है। उसने अपने शरीर की तुलना किरण से की।

छोटी बहू दुबली-पतली और लंबी थी, जबकि किरण छोटी और मोटी थी। किरण की जाँघें और कमर छोटी बहू से ज़्यादा मांसल थीं। किरण की चुची भी छोटी बहू से बड़ी थी, लेकिन उसे याद था जब परम, सेठजी और उसके आज रात के प्रेमी ने उसके फिगर और खासकर उसकी जाँघों और पतली कमर की तारीफ़ की थी। परम हमेशा कहता है कि उसकी निप्पल सबसे अच्छी है।

खैर, उसने किरण की निप्पल को सहलाना जारी रखा और उसकी छोटी सी क्लिट को सहलाया। किरण गहरी नींद में थी। छोटी बहू का हौसला बढ़ा और उसने किरण की चुची की दरार खोली और चुची की लंबाई पर उँगली फिराई। उसे चुची के अंदर गीलापन महसूस हुआ और उसने दो उँगलियों से चुची की पंखुड़ियाँ खोल दीं।

छोटी बहू चूत के द्वार पर सफेद मोटी बूंदें देख सकती थी, जो की अपने ससुर का माल होने की पुष्टि कर चुकी थी। चूत को चौड़ा करके उसने चूत पर एक हल्का सा चुम्बन लिया। उसकी जीभ को किरण की चूत के होंठों का स्वाद मिला और उसे स्वाद अच्छा लगा। हालाँकि सिर्फ किरण का चुतरस नहीं था, पर सेठजी का माल भी उसमें शामिल था।

छोटी बहू और नीचे झुकी और चूत की दरार पर जीभ फिराने लगी।

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जुड़े रहिये दोस्तों।

कहानी अभी जारी है।



फूँलवर.



 
परम और छोटी बहू का कमरा, सुबह



परम ने छोटी बहू को अपने शरीर पर खींच लिया। उसकी नंगी चूत परम के मोटे लंड पर रगड़ रही थी। छोटी बहू ने परम के लंड को अपनी उँगलियों में पकड़कर सहलाना शुरू कर दिया।

“कैसा स्वाद है भाभी...?” परम ने मुस्कुराते हुए पूछा।
फनलव की पेशकश

यह सुनकर छोटी बहू चौंक गई। उसने अपना चेहरा छिपा लिया और शर्म से लाल हो गई।

“भाभी, शरमाती क्यों हो? लगता है तुमने पहली बार किसी का चूत का स्वाद लिया है!” परम ने हँसते हुए कहा।

तभी परम ने छोटी बहू को अपनी बाहों में कस लिया और बोला,

“मैं महक और सुंदरी को बोल दूँगा कि तुम्हें अपनी-अपनी चूत का मजा दें और तुम्हारी चूत चूसें...”

छोटी बहू ने परम के सीने में अपना सिर छिपाते हुए शर्म से बोली,

“छी... छी... माँ और बहन के बारे में कैसी बातें करते हो!”

उसने परम को चूमा और पूछा,

“तू इस कुतिया (किरण) को चोदकर कहाँ चला गया था? अपनी बीबी रेखा के पास!”

“तुम बाहर चली गई तो क्या करता! रेखा की ही गांड मार आया...उसकी गांड को भी समयांतर पर सर्विस देंना मेरा धर्म है। तो उसकी गांड में आयल पानी कर आया। ” परम ने बहू को अपने शरीर पर और कसकर खींच लिया और बोला,

“तुम नहीं जानती, सुंदरी और बड़ी बहू एक-दूसरे की चूत चाटकर खूब मस्ती करती हैं। और महक तो चूत चूसने और चाटने में सबसे एक्सपर्ट है।”

“तुमसे किसने कहा...?”

“बड़ी भाभी और माँ को तो मैंने खुद देखा है, एक-दूसरे से मजा लेते हुए... और महक के बारे में पूनम ने बताया है।”

परम ने छोटी बहू की चूचियों को दबाते हुए कहा,

“चलो भाभी... एक बार जमकर चुदाई करते हैं और फिर सो जाते हैं... सुबह होने वाली है...तेरी चूत में लंड खाली करने का समय भी तो है।”

छोटी बहू ने परम के लंड को हिलाते हुए कहा,

“आज छोड़ दे... आज तेरे भैया ने मेरी चूत को बहुत रगड़ा है... कल पूरा मजा दूँगी... देखना चूत कितनी सूज गई है...”

(उसने झूठ बोला, जैसा कि हम जानते हैं कि दोनों भाइयों ने छोटी बहू के साथ नहीं, बल्कि अपनी चचेरी बहनों के साथ चुदाई की और सोए थे।)

परम ने मुस्कुराते हुए कहा,

“ठीक है भाभी... चल तू मेरे ऊपर आ जा...”
फनलवर का निर्माण

उसने छोटी बहू को अपने शरीर पर खींच लिया। छोटी बहू ने अपने कूल्हे हिलाकर परम के लंड को अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। उसकी भरी हुई चूचियाँ परम की छाती से रगड़ रही थीं।

“अगर किरण या ये सब बच्चे हमको ऐसा देखेंगे तो...?” वह चिंतित थी।

परम ने उसके निप्पल को चूसते हुए बोला,

“क्या होगा... सबको तो मालूम है कि परम छोटी बहू की देखभाल करता है... सेठजी, सेठानी और बड़ी बहू को मालूम है कि मेरा लंड तुम्हारी प्यारी सी नन्ही चूत में घुसेड़ने के लिए हमेशा बेकरार रहता है। यह मेरा फर्ज भिबंता है की मैं आपकी चूत की भी मरम्मत लिया करू। रही बात इस किरण की तो वह वैसे ही मेरे लंड का स्वाद ले चुकी है और अपनी चूत फ़डवा चुकी हैइस से कोई शर्म नहीं।”

उसने छोटी बहू को चूमा और उसके मांसल कूल्हों को दबाते हुए कहा,

“याद नहीं रानी! मैंने कैसे तुमको पटाकर चोदा था।”

“तुमने जब मुझसे कहा था कि सेठजी मुझे यानी अपनी छोटी बहू को चोदना चाहते हैं, तभी मैं समझ गई थी कि तू मेरी चूत के अंदर घुसना चाहता है...मेरे माल को चखना चाहता है। तू क्या समजता है तूने मुझे चोदा था? नहीं मैंने तुम्हे चोदा था। मेरी मर्जी से।” उसने प्यार से परम को चूमा और बोली,

“तुम मान या न मान... मेरी चूत तेरी दीवानी है... और मुझे मालूम है कि तुझे मैं नहीं, रेखा, बड़ी भाभी और पूनम बहुत पसंद हैं...”

परम ने उसे टोका,

“तुम गलत सोचती हो... मैं रेखा और पूनम से शादी करना चाहता हूँ और बड़ी भाभी के बड़े-बड़े बोबले मुझे बहुत पसंद हैं... लेकिन अपनी कसम, मुझे तू पूरी तरह से अच्छी लगती है... ऊपर से नीचे तक तुम्हारा सब कुछ मुझे बहुत पसंद है... एकदम तीखी, हरी मिर्च जैसी...और तेरी इस चूत में बहोत मजा है।” परम ने भाभी की छुट की दरार को थोडा फैलाते हुए कहा।

परम ने छोटी बहू के निप्पलों को चूसा और उसके मांसल कूल्हों को जोर से दबाया।

“अगर कोई मुझे कहता तो मैं इस लड़की किरण को कभी नहीं चोदता... लेकिन साली कल रात खुद नंगी होकर चोदने के लिए खुशामद करने लगी तो कुतिया का सील तोड़ना पड़ा... देखो आज भी कैसी रंडी जैसी नंगी सोई है... इस हरामजादी के कारण तुम्हारे साथ मस्ती नहीं मार पाया...” परम ने मस्का मारते हुए कहा। लेकिन छोटी बहु भी जानती थी की उसकी चूत और किरण की चूत में कितना फर्क है। और एक छोटी चूत किसको पसंद नहीं होती।
संपादिका मैत्री पटेल

उसने छोटी बहू को चूमा और उसके कसे हुए कूल्हों को मसल कर ढीला करना जारी रखा।

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यही तक दोस्तों।

कहानी तो अभी जारी है पर आगे की कहानी आपके कोमेंट्स आने के बाद।

तब तक
फूँलवर की तरफ से जय भारत।।

 
आपके इतने दिल से लिखे हुए फीडबैक के लिए दिल से bahut-bahut शुक्रिया.



Aapne episode ko sirf padha nahi, balki uske har scene ke peeche chhupe emotion aur thought process ko mehsoos kiya, aur ek writer ke liye isse badi tareef shayad hi koi ho

Chhoti Bahu aur Vachchal Seth wala scene aapko itna pasand aaya, ye jaankar sach mein bahut khushi hui.

Aur Chhoti Bahu-Sethani ji aur phir Param ke saath uski baaton ko jis tarah aapne notice kiya, usse laga ki meri mehnat sahi jagah pahunch rahi hai.

Aapki chai wali misaal to dil jeet gayi, Bilkul isi tarah mere liye bhi kisi intimate ya emotional moment ki khoobsurti sirf us ek pal mein nahi, balki us pal tak pahunchne wali poori journey mein hoti hai, baaton mein, nazron mein, hichkichahat mein, mahaul mein aur dheere-dheere badhte ehsaas mein. Jab emotions naturally build hote hain, tab scene zyada gehra aur yaadgaar ban pata hai.

Aap jaise readers jab itni bareeki se scenes ko samajhkar apni feelings share karte hain, to writer ko agla scene aur behtar likhne ki himmat milti hai.

Itna pyara feedback dene ke liye dil ki gehraiyon se Dhanyavad.

Aise hi padhte rahiye, mehsoos karte rahiye aur apni बेबाक राय mujh tak pahunchate rahiye.



आपका हर फीडबैक मेरे लिए बहुत मायने रखता है.
 
शुक्रिया दोस्त आपके कमैंट्स के लिए.

मेरे हिसाब से अडुल्टेरी में इन्सेस्ट नहीं आता जब की इन्सेस्ट में अडुल्टेरी आ जाता है. इसलिए कहानी में ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप की बात आती है तो वह 'इन्सेस्ट' में डाली जाती है.

मुझे खेद है की मेरी इस कहानी में पुरे इन्सेस्ट नहीं है ओर है जरूर. ुंफोरटूनटेली आपकी पसंदगी में नहीं खरी नहीं उतरी. कोई बात नहीं.

यह फोरम मनोरंजन के लिए है और बहोत से लोगो के बहोत सी पसंदगी का मटेरियल उपलब्ध है. आपको पसंद नहीं आती आप दूसरी कहानी जो इन्सेस्ट लेबल में हो पढ़िए. वैसे भी सभी इन्सेस्ट कहानी रसप्रद हो जरूरी नहीं.

आपका कीमती समय देने के लिए धन्यवाद्. आशा रखूंगी की कुछ एपिसोड्स आपके काम के होंगे.
 
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