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“क्या हो गया? आज रस नहीं पिलाओगे...?” रेखा ने परम के लंड को सहलाते हुए पूछा।
“मैं क्या करूँ रानी! निकल ही नहीं रहा...!” परम ने हाँफते हुए कहा। निर्मात्री फनलवर है।
रेखा ने मुस्कुराते हुए बड़ी बहू की तरफ देखा और बोली,
“मुझे लगता है, इसको (लंड) को चूत के रस की जरूरत है।”
रेखा ने बड़ी बहू की निप्पल को सहलाते हुए कहा,
“देख... भाभी की चूत कितनी प्यासी है... बहुत भूखी है... चल राजा... भाभी को ठंडा कर दे। मेरा भैया इस रांड को चोद नहीं पाता...”
“चल भाभी... आपकी चूत दिखा मेरे यार को और उसके लंड से पानी गिरा दे। दीखता नहीं बेचारा... मेरा पति है अभी और उसके लंड से माल नहीं निकल रहा और मेरी गांड भी जवाब दे गई है। अब तेरा सहारा है... तेरी चूत दे मेरे इस प्यारे से लंड को...”
रेखा ने कहा और उसने बड़ी बहू के दोनों हाथ पकड़ लिए।
बड़ी बहू ने खुद को रेखा और परम के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन परम ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया और 4-5 जोरदार धक्के लगा दिए। लंड चूत के अंदर तक चला गया।
आखिरकार लंड और चूत दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते थे।
रेखा को खुशी हुई जब उसने देखा कि भाभी चुदाई का आनंद ले रही है और अपने कूल्हे हिलाकर जवाब देने लगी है।
“भाभी... मजा आ रहा है ना...?”
“हाँ रेखा... बहुत मस्त लंड है तेरे यार का... और बहुत प्यार से दम लगाकर चुदाई करता है... मजा आ गया... तेरे भैया ने कभी ऐसा नहीं चोदा... तू भी चुदवा ले... परम की रंडी बनने का भी एक अलग ही मजा है रेखा...”
“बस... भाभी... मुझे एक बार ससुराल से वापस आने दे... फिर तो रात-दिन परम को अपनी चूत के अंदर बंद करके रखूँगी... तब तक तुम और पूनम जितना चाहो परम के लंड का मजा ले लो...”
बड़ी बहू ने अपनी टाँगें ऊपर उठाईं और कूल्हे को झटका दिया।
“परम को बोल ना कि वो छोटी भाभी को भी चुदाई का मजा दे... तेरा छोटा भैया उसको रंडी बनाना चाहता है... अपने दोस्तों से चुदवाना चाहता है... साला खुद तो बीबी को खुश नहीं कर सकता...”
भाभी की चूत से अब फच-फच की आवाजें आने लगी थीं।
“ठीक है भाभी... कल छोटी भाभी को लेकर आना... उसे भी परम से चुदवा दूँगी। वैसे भाभी... तेरी चूत ने काफी रस छोड़ दिया है जो इतनी आवाजें कर रही है...” रेखा ने जवाब दिया। कथाकार फनलवर है।
रेखा को क्या मालूम कि उसकी दोनों भाभी को खूब चोदा जा चुका है।
इस तरह बात करते-करते परम भाभी की चुदाई कर रहा था। आखिर भाभी भी थक गई और परम को अपने शरीर से हटाने लगी। और बोली,
“परम... अब मेरी चूत में ज्यादा रस नहीं बचा... तेरे लंड ने तो कमाल कर दिया है... मेरी चूत अब कल तक अपना चुतरस नहीं बना पाएगी... कितनी बार झड़ चुकी हूँ... अब छोड़ मुझे... मेरे माल की माँ-बहन एक कर दी इस नालायक प्यारा सा लंड ने...”
लेकिन परम ने भाभी के कंधों को जोर से पकड़कर खूब जोर-जोर से धक्का मारने लगा। उसे लगा कि उसका पानी निकलने वाला है। परम ने चुतरस वाला लंड बाहर निकाला और रेखा के मुंह में घुसेड़ कर धना-धन धक्का लगाने लगा।
परम ढीला हो गया। और थोड़ा रस रेखा के मुँह में गिराने के बाद लंड बाहर निकाला और भाभी के मुँह में पेल दिया।
******************************************************************..
बने रहिये दोस्तों।
फूँलवर.
“मैं क्या करूँ रानी! निकल ही नहीं रहा...!” परम ने हाँफते हुए कहा। निर्मात्री फनलवर है।
रेखा ने मुस्कुराते हुए बड़ी बहू की तरफ देखा और बोली,
“मुझे लगता है, इसको (लंड) को चूत के रस की जरूरत है।”
रेखा ने बड़ी बहू की निप्पल को सहलाते हुए कहा,
“देख... भाभी की चूत कितनी प्यासी है... बहुत भूखी है... चल राजा... भाभी को ठंडा कर दे। मेरा भैया इस रांड को चोद नहीं पाता...”
“चल भाभी... आपकी चूत दिखा मेरे यार को और उसके लंड से पानी गिरा दे। दीखता नहीं बेचारा... मेरा पति है अभी और उसके लंड से माल नहीं निकल रहा और मेरी गांड भी जवाब दे गई है। अब तेरा सहारा है... तेरी चूत दे मेरे इस प्यारे से लंड को...”
रेखा ने कहा और उसने बड़ी बहू के दोनों हाथ पकड़ लिए।
बड़ी बहू ने खुद को रेखा और परम के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन परम ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया और 4-5 जोरदार धक्के लगा दिए। लंड चूत के अंदर तक चला गया।
आखिरकार लंड और चूत दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते थे।
रेखा को खुशी हुई जब उसने देखा कि भाभी चुदाई का आनंद ले रही है और अपने कूल्हे हिलाकर जवाब देने लगी है।
“भाभी... मजा आ रहा है ना...?”
“हाँ रेखा... बहुत मस्त लंड है तेरे यार का... और बहुत प्यार से दम लगाकर चुदाई करता है... मजा आ गया... तेरे भैया ने कभी ऐसा नहीं चोदा... तू भी चुदवा ले... परम की रंडी बनने का भी एक अलग ही मजा है रेखा...”
“बस... भाभी... मुझे एक बार ससुराल से वापस आने दे... फिर तो रात-दिन परम को अपनी चूत के अंदर बंद करके रखूँगी... तब तक तुम और पूनम जितना चाहो परम के लंड का मजा ले लो...”
बड़ी बहू ने अपनी टाँगें ऊपर उठाईं और कूल्हे को झटका दिया।
“परम को बोल ना कि वो छोटी भाभी को भी चुदाई का मजा दे... तेरा छोटा भैया उसको रंडी बनाना चाहता है... अपने दोस्तों से चुदवाना चाहता है... साला खुद तो बीबी को खुश नहीं कर सकता...”
भाभी की चूत से अब फच-फच की आवाजें आने लगी थीं।
“ठीक है भाभी... कल छोटी भाभी को लेकर आना... उसे भी परम से चुदवा दूँगी। वैसे भाभी... तेरी चूत ने काफी रस छोड़ दिया है जो इतनी आवाजें कर रही है...” रेखा ने जवाब दिया। कथाकार फनलवर है।
रेखा को क्या मालूम कि उसकी दोनों भाभी को खूब चोदा जा चुका है।
इस तरह बात करते-करते परम भाभी की चुदाई कर रहा था। आखिर भाभी भी थक गई और परम को अपने शरीर से हटाने लगी। और बोली,
“परम... अब मेरी चूत में ज्यादा रस नहीं बचा... तेरे लंड ने तो कमाल कर दिया है... मेरी चूत अब कल तक अपना चुतरस नहीं बना पाएगी... कितनी बार झड़ चुकी हूँ... अब छोड़ मुझे... मेरे माल की माँ-बहन एक कर दी इस नालायक प्यारा सा लंड ने...”
लेकिन परम ने भाभी के कंधों को जोर से पकड़कर खूब जोर-जोर से धक्का मारने लगा। उसे लगा कि उसका पानी निकलने वाला है। परम ने चुतरस वाला लंड बाहर निकाला और रेखा के मुंह में घुसेड़ कर धना-धन धक्का लगाने लगा।
परम ढीला हो गया। और थोड़ा रस रेखा के मुँह में गिराने के बाद लंड बाहर निकाला और भाभी के मुँह में पेल दिया।
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बने रहिये दोस्तों।
फूँलवर.