Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 184 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

सेठजी की नींद खुली तो उन्हें अपनी पीठ पर किसी मुलायम शरीर का एहसास हुआ। उन्होंने मुड़कर देखा तो छोटी बहू अपनी निप्पल उन पर रगड़ रही थी।

“ओह... भेन्चोद... रानी... तुम कहाँ थी... कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ...” उसने शिकायत की।

“और माँ के चुदे, इसी के लिए इस कली (Bud) को चोद डाला!” छोटी बहू ने कहा।

बहू को बुरा लगा कि सेठ ने उसकी पत्नी की बहन की बेटी को चोदा।
फनलवर की प्रस्तुति।

“देख, ऐसा माल को कोई भी चोदता... तुम्हारी तलाश में मैं जब इस कमरे में आया तो मैंने देखा कि ये लड़की की चूत पकड़कर, अपनी टाँगें फैलाकर लेटी है... तो क्या करता... लंड टाइट था... पेल दिया...और उसने भी बड़े आराम से अपनी चूत खोल दी थी। फिर मैं कुछ नहीं कर सकता था बस चूत में मेरा लंड चला गया और मैं सिर्फ देखता रहा। उसमे मेरा कोई कसूर नहीं। जो भी किया इस हरामजादे लंड ने किया।” कहते हुए सेठजी ने छोटी बहू को सीधा करवाया और उसका पेटीकोट उठाकर लंड को चूत पर रगड़ा।

“और बहन के लंड... तूने ये भी नहीं देखा कि ये लड़की तुम्हारी बेटी से भी छोटी है... और तुम्हारी साली की बेटी है... कच्चा माल है...”

छोटी बहू लंड को चूत पर रगड़ती रही, मना नहीं कर सकती थी। आज ही सेठजी ने उसकी सैलरी दी- पूरा एक लाख! कोलकाता की कोठी तो पहले आपने नाम लिखवा लिया था।

“और मैं भोसडी के आपके लंड की याद में मैं बिल्कुल सोई नहीं हूँ... पूरी रात वैसे ही गुजर गई... अगर मन है तो पेल दो...चूत अभी तैयार है भर दो अपने वीर्य से। कही नहीं चुदी, बस तुम्हारे इस लंड के इंतज़ार में तड़पती रही।”

उसने अपने कूल्हे उठाए और सेठजी ने भी एक धक्का दिया और छोटी बहू की चूत तो पहले से ही चिकनी हो चुकी थी तो बड़े आराम से सेठजी का लंड उसकी चूत में घुस गया।

किरण इस चुदाई से अनजान थी।

यह एक सॉफ्ट चुदाई थी। ज्यादा नहीं चली... बस 7-8 मिनट में ही सेठजी डिस्चार्ज हो गए। छोटी बहू को बिल्कुल भी मजा नहीं आया। फिर भी उसने उसे चूमा और अपने कमरे में वापस जाने की सलाह दी। मन ही मन बहु अपने ससुर को माँ-बहन की गाली देती रही। उसे मुनीम की याद आई। “आप कहा हो मूनिमजी आपके लंड के सिवा यह चूत की आग बजने से रही।“

सेठजी खुश थे कि अपनी छोटी बहू के साथ मौज-मस्ती करने के अलावा उन्हें किरण के साथ और भी बहुत कुछ मिला और वे खुशी-खुशी अपने लटकते हुए और मुरझाये हुए लंड को धोती में बाँध कर अपने कमरे में चले गए। उनके जीवन में किरण सबसे छोटा माल आया था जो उनके लंड को चखने को मिला था।

सेठजी के बाहर जाने के बाद...

अंदर कमरे में छोटी बहू ने अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया। वह बिल्कुल नंगी हो गई, जैसे किरण गहरी नींद में उसके बगल में लेटी हो।

छोटी बहू को अभी तक समलैंगिक क्रिया का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उसे अपनी और जवान किरण की नग्नता पसंद थी। हालाँकि वह खुद अपने ससुर के साथ अनाचार कर रही थी, लेकिन उसे इस बात का दुख था कि किरण को उसके मौसाजी ने चोदा।
लेखिका फनलवर है।

और ज़िंदगी में पहली बार उसने किसी और औरत की चूत सहलाई। उसने पाया कि किरण का गुप्तांग बहुत चिकना और रेशमी है। उसने अपने शरीर की तुलना किरण से की।

छोटी बहू दुबली-पतली और लंबी थी, जबकि किरण छोटी और मोटी थी। किरण की जाँघें और कमर छोटी बहू से ज़्यादा मांसल थीं। किरण की चुची भी छोटी बहू से बड़ी थी, लेकिन उसे याद था जब परम, सेठजी और उसके आज रात के प्रेमी ने उसके फिगर और खासकर उसकी जाँघों और पतली कमर की तारीफ़ की थी। परम हमेशा कहता है कि उसकी निप्पल सबसे अच्छी है।

खैर, उसने किरण की निप्पल को सहलाना जारी रखा और उसकी छोटी सी क्लिट को सहलाया। किरण गहरी नींद में थी। छोटी बहू का हौसला बढ़ा और उसने किरण की चुची की दरार खोली और चुची की लंबाई पर उँगली फिराई। उसे चुची के अंदर गीलापन महसूस हुआ और उसने दो उँगलियों से चुची की पंखुड़ियाँ खोल दीं।

छोटी बहू चूत के द्वार पर सफेद मोटी बूंदें देख सकती थी, जो की अपने ससुर का माल होने की पुष्टि कर चुकी थी। चूत को चौड़ा करके उसने चूत पर एक हल्का सा चुम्बन लिया। उसकी जीभ को किरण की चूत के होंठों का स्वाद मिला और उसे स्वाद अच्छा लगा। हालाँकि सिर्फ किरण का चुतरस नहीं था, पर सेठजी का माल भी उसमें शामिल था।

छोटी बहू और नीचे झुकी और चूत की दरार पर जीभ फिराने लगी।


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जुड़े रहिये दोस्तों।



कहानी अभी जारी है।


Funlover.

 
परम और छोटी बहू का कमरा, सुबह

परम ने छोटी बहू को अपने शरीर पर खींच लिया। उसकी नंगी चूत परम के मोटे लंड पर रगड़ रही थी। छोटी बहू ने परम के लंड को अपनी उँगलियों में पकड़कर सहलाना शुरू कर दिया।

“कैसा स्वाद है भाभी...?” परम ने मुस्कुराते हुए पूछा।
फनलव की पेशकश।

यह सुनकर छोटी बहू चौंक गई। उसने अपना चेहरा छिपा लिया और शर्म से लाल हो गई।

“भाभी, शरमाती क्यों हो? लगता है तुमने पहली बार किसी का चूत का स्वाद लिया है!” परम ने हँसते हुए कहा।

तभी परम ने छोटी बहू को अपनी बाहों में कस लिया और बोला,

“मैं महक और सुंदरी को बोल दूँगा कि तुम्हें अपनी-अपनी चूत का मजा दें और तुम्हारी चूत चूसें...”

छोटी बहू ने परम के सीने में अपना सिर छिपाते हुए शर्म से बोली,

“छी... छी... माँ और बहन के बारे में कैसी बातें करते हो!”

उसने परम को चूमा और पूछा,

“तू इस कुतिया (किरण) को चोदकर कहाँ चला गया था? अपनी बीबी रेखा के पास!”

“तुम बाहर चली गई तो क्या करता! रेखा की ही गांड मार आया...उसकी गांड को भी समयांतर पर सर्विस देंना मेरा धर्म है। तो उसकी गांड में आयल पानी कर आया। ” परम ने बहू को अपने शरीर पर और कसकर खींच लिया और बोला,

“तुम नहीं जानती, सुंदरी और बड़ी बहू एक-दूसरे की चूत चाटकर खूब मस्ती करती हैं। और महक तो चूत चूसने और चाटने में सबसे एक्सपर्ट है।”

“तुमसे किसने कहा...?”

“बड़ी भाभी और माँ को तो मैंने खुद देखा है, एक-दूसरे से मजा लेते हुए... और महक के बारे में पूनम ने बताया है।”

परम ने छोटी बहू की चूचियों को दबाते हुए कहा,

“चलो भाभी... एक बार जमकर चुदाई करते हैं और फिर सो जाते हैं... सुबह होने वाली है...तेरी चूत में लंड खाली करने का समय भी तो है।”

छोटी बहू ने परम के लंड को हिलाते हुए कहा,

“आज छोड़ दे... आज तेरे भैया ने मेरी चूत को बहुत रगड़ा है... कल पूरा मजा दूँगी... देखना चूत कितनी सूज गई है...”

(उसने झूठ बोला, जैसा कि हम जानते हैं कि दोनों भाइयों ने छोटी बहू के साथ नहीं, बल्कि अपनी चचेरी बहनों के साथ चुदाई की और सोए थे।)

परम ने मुस्कुराते हुए कहा,

“ठीक है भाभी... चल तू मेरे ऊपर आ जा...”
फनलवर का निर्माण।

उसने छोटी बहू को अपने शरीर पर खींच लिया। छोटी बहू ने अपने कूल्हे हिलाकर परम के लंड को अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। उसकी भरी हुई चूचियाँ परम की छाती से रगड़ रही थीं।

“अगर किरण या ये सब बच्चे हमको ऐसा देखेंगे तो...?” वह चिंतित थी।

परम ने उसके निप्पल को चूसते हुए बोला,

“क्या होगा... सबको तो मालूम है कि परम छोटी बहू की देखभाल करता है... सेठजी, सेठानी और बड़ी बहू को मालूम है कि मेरा लंड तुम्हारी प्यारी सी नन्ही चूत में घुसेड़ने के लिए हमेशा बेकरार रहता है। यह मेरा फर्ज भिबंता है की मैं आपकी चूत की भी मरम्मत लिया करू। रही बात इस किरण की तो वह वैसे ही मेरे लंड का स्वाद ले चुकी है और अपनी चूत फ़डवा चुकी हैइस से कोई शर्म नहीं।”

उसने छोटी बहू को चूमा और उसके मांसल कूल्हों को दबाते हुए कहा,

“याद नहीं रानी! मैंने कैसे तुमको पटाकर चोदा था।”

“तुमने जब मुझसे कहा था कि सेठजी मुझे यानी अपनी छोटी बहू को चोदना चाहते हैं, तभी मैं समझ गई थी कि तू मेरी चूत के अंदर घुसना चाहता है...मेरे माल को चखना चाहता है। तू क्या समजता है तूने मुझे चोदा था? नहीं मैंने तुम्हे चोदा था। मेरी मर्जी से।” उसने प्यार से परम को चूमा और बोली,

“तुम मान या न मान... मेरी चूत तेरी दीवानी है... और मुझे मालूम है कि तुझे मैं नहीं, रेखा, बड़ी भाभी और पूनम बहुत पसंद हैं...”

परम ने उसे टोका,

“तुम गलत सोचती हो... मैं रेखा और पूनम से शादी करना चाहता हूँ और बड़ी भाभी के बड़े-बड़े बोबले मुझे बहुत पसंद हैं... लेकिन अपनी कसम, मुझे तू पूरी तरह से अच्छी लगती है... ऊपर से नीचे तक तुम्हारा सब कुछ मुझे बहुत पसंद है... एकदम तीखी, हरी मिर्च जैसी...और तेरी इस चूत में बहोत मजा है।” परम ने भाभी की छुट की दरार को थोडा फैलाते हुए कहा।

परम ने छोटी बहू के निप्पलों को चूसा और उसके मांसल कूल्हों को जोर से दबाया।

“अगर कोई मुझे कहता तो मैं इस लड़की किरण को कभी नहीं चोदता... लेकिन साली कल रात खुद नंगी होकर चोदने के लिए खुशामद करने लगी तो कुतिया का सील तोड़ना पड़ा... देखो आज भी कैसी रंडी जैसी नंगी सोई है... इस हरामजादी के कारण तुम्हारे साथ मस्ती नहीं मार पाया...” परम ने मस्का मारते हुए कहा। लेकिन छोटी बहु भी जानती थी की उसकी चूत और किरण की चूत में कितना फर्क है। और एक छोटी चूत किसको पसंद नहीं होती।
संपादिका मैत्री पटेल।

उसने छोटी बहू को चूमा और उसके कसे हुए कूल्हों को मसल कर ढीला करना जारी रखा।


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यही तक दोस्तों।

कहानी तो अभी जारी है पर आगे की कहानी आपके कोमेंट्स आने के बाद।


तब तक
Funlover की तरफ से जय भारत।।
 
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