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फ्लैशबैक
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सोनिआ : पापा आ गए..
राज को देख कर सोनिआ दीपिका की गॉड से निकल कर भागना hi चाहती थी. दीपिका ने उसकी कलाई पकड़ ली.
दीपिका- अब कहाँ चली.. पापा के आते hi हमारी वैल्यू ख़तम.
सब है पड़े तोह राज भी हस्ता हुआ वहीँ दीपिका के बाजु में जा बैठा.
सोनिआ-- नहीं आंटी.. मेने ऐसा तो नहीं कहा.. सोनिआ कुछ कंफ्यूज हो गई थी.
राज ने उसका दूसरा हाथ पकड़ लिए.. मैं हों तुम्हारे साथ. ये भी तोह ख़ास हाँ न.
सोनिआ-- हाँ पापा आंटी बहुत अच्छी हाँ. सब बहुत अचे हाँ. मुझे सब बहुत प्यार कर रहे हाँ.
राज इधर उधर देखता हुआ-- छोटू कहा है
सोनिआ-- वह नहीं है
राज-- क्यों.. कहाँ गया वह
सोनिआ दीपिका का मोह देखने लगी
दीपिका है पड़ी-- उसे तेरे हरामी दोस्त ले गए हाँ. वह भी छोटू को देख कर मचल गए थे. छोटू के साथ छोटे बने खेल रहे हाँ.
वहां सब थी. सब हसने लगी.
राज ने अंजलि को देखा और बेशर्मो वाला इशारा कर दिए.. अंजलि शर्मा कर मोह घुमा गई. उसके होंटो पर स्माइल भी आ गयी थी.
आरती साथ बैठी थी. वह अंजलि की चीन को थाम कर बोली-- अपने पति से शर्माना hi चाहिए. हाय कितनी पायरी लग रही हो आप दीदी.
भावना-- कुछ देर बाद बताना दीदी.. दीदी अब भी सुंदर हाँ, ye(raj को देख कर) दीदी की सुंदरता को ग्रहण लग जायेगा
दोनों बड़े धीमे अंदाज़ में बात कर रही थी. सोनिआ पास थी तोह उसे सुनाई न दे.
राज-- बड़ी भूक लगी है. खाने को क्या है घर में..
दीपिका-- कुछ भी नहीं. आज तोह सबके हिस्से में खाना कुछ अलग किसम का है.. तुम्हे कैसे भूक लग सकती है. इतने स्पेशल किसम की डिशेस खाने को मिल रही हाँ तुझे..
सोनिआ-- पापा मुझे भी वह साडी डिशेस कहानी है..
सोनिआ की बात पर हंसी का तूफ़ान hi आ गया.. राज ने सोनिआ को पकड़ कर अपनी गॉड में बिठा लिया.. सोनिआ हैरानगी से सबको देखने लगी.
दीपिका-- बिन्नी को बोल दिए था. ऑनलाइन आर्डर द्वारा खाना आएगा आज. आज सब बहार का खाएंगे.
सोनिआ-- याहो फिर तोह मैं भी खाओगी
राज-- हाँ हाँ तुम्हे तोह मैं अपने हथु से खिलाऊँगा..
सोनिआ-- पापा फिर आप कैसे खाएंगे..
राज-- तुम मुझे अपने हथु से खिला देना.
सोनिआ खुश हो गई..
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निहारिका (दिनेश एल्डर सिस्टर) -- दिनेश मैं तुम्हारे लिए दुन्या की सबसे सुंदर लड़की ढूंढ निकलूंगी. सिमरन को भूल जाओ मेरे भाई.
दिनेश अजीब सी नज़रों से अपनी दीदी को देखने लगा-- दीदी आप जानती है, मैंने कभी ज़िद नहीं की. जो मुझसे प्यार करता है, मैं उससे कहीं बढ़कर प्यार करता हों. आज तक मैंने किसी लड़की की और आकर्षित भी नहीं हुआ. सिमरन hi क्यों मुझे पसंद आई. सिमरन की और hi क्यों मैं इतना आकर्षित हुआ. दीदी मैं नहीं जनता, क्यों सिमरन मुझे इतनी भा गई है. क्यों वह मेरे दिल में वहां जा बसी है. जहाँ पहले कभी कोई नहीं बस सकीय.. दीदी मैं ज़िद्दी नहीं हों. पर सिमरन के शिव मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता.. सिमरन नहीं तोह कोई और भी नहीं. सिमरन मेरी न हुई तोह मैं नहीं जनता मैं क्या कर जाऊँगा. सिमरन का चेहरा मेरी नज़रों से दूर हत्ता hi नहीं है.
निहारिका अपने भाई को देख दीपपरेसेड होने लगी. उसका भाई ऐसा कभी नहीं था. वह तोह सबपर प्यार लौटने वाला था. यहाँ भी सिमरन को लेके भी वह प्यार की hi भाषा में बात कर रहा था. पर प्यार का ये रंग देख कर निहारिका के अंदर हलचल मच उठी थी.
सिमरन की आवाज़ सुनकर, उसके शब्द सुन और जान कर उसे ख़ुशी भी मिली थी. सिमरन कैसी नेचर और कैसे इरादों वाली लड़की है. ये भी वह जान गई थी. सिमरन एक शादीशुदा लड़की है. वह राज के शिव किसी और की और धयान नहीं दे सकती. ये भी वह बहुत अच्छे से समझ गयी थी.
सिमरन आम लड़कियों जैसी होती तोह वह अपने भाई के लिए कुछ भी कर जाती. पर राज और सिमरन का मटर बहुत अलग था. वह कुछ भी नहीं कर पाएगी. ऐसा उसे अंदाज़ा हो गया था..
अपने भाई के हाथ को थाम कर वह धीरे से बोली- भाई हमारे परिवार में बहुत प्यार है. दुःख क्या होता है, हमने आज तक नहीं जाना. और जानना भी नहीं चाहती. भाई तुम क्या करोगे मैं नहीं जानती. पर इतना कहूँगी, कुछ भी ऐसा मत करना, जिससे सबकी लाइफ में हलचल मच उठे. कहीं ऐसा न हो, बरसों से जो परिवार खुशियों में जी रहा है.. उसकी लाइफ के आगे के सभी पल दुखो में बदल जाएँ. मैं भगवन से यही प्रार्थना करुँगी, भगवन मेरे भाई को सदा खुश रखे. मेरे भाई की को भी मंज़िल हो, जो भी गोआल हो, भगवन मेरे भाई को सफलता दे. अगर सिमरन का साथ तुम्हारे नसीब में लिखा है. तोह कुछ ऐसा हो, किसी का भी दिल न दुखे. दुःख हमें मिलें या सिमरन या राज को मिले. सिमरन या राज के परिवार के किसी सादड़ी को मिले. वह दुःख वह दर्द भी तोह हमारा hi दर्द होगा. हम न खुद को दुखो में घिरा देख सकते हाँ और hi किसी को..
निहारिका रोने लगी थी.. दिनेश अपने फैसले पर अटल रहते हुए अपनी दीदी को अपने सीने से लगा गया..
दिनेश- दीदी मैं नहीं जनता, मैं सिमरन को पाने के लिए किस हद तक जाऊँगा. पर मैं आपसे वडा करता हों. कुछ भी ऐसा नहीं करूँगा, जिससे आप सब का सर शर्म से झुक जाए. मैं तोह अपनी लाइफ से सबसे बड़ी ख़ुशी को प्राप्त करने के लिए सिमरन को अपनी लाइफ में शामिल देखना चाहता हों. अगर सिमरन मेरी ज़िन्दगी में आती है. और ऐसे अंदाज़ में आती है कह आप सब मुझसे दूर हो जाएँ तोह दीदी मैं ऐसा नहीं चाहता. जैसे सिमरन मेरे लिए ख़ास हो गई है. ऐसे hi आप सब भी मेरे लिए ख़ास हाँ. मैं बुरा इंसान नहीं हों दीदी. बस क्या करूँ, सिमरन के मामले में मैं ऐसा हो गया हों. ऐसा बन गया हों.
वहां और भी कई फॅमिली मेंबर्स आ गए थे. सब दिनेश और निहारिका की इमोशनल बातें सुनकर आंसू बहाने लगे.
दिनेश मम्मी -- दिनेश बीटा तू हम सब की आँखों का तारा है. हम सब एक दूसरे के साथ जुड़े हुए है. हममे से किसी को भी कुछ होता है तोह दुःख भी हम सभी को एक सम्मान मिलता है. इस खुशियों भरे परिवार में किसी की आँखों से दुःख दर्द के कारण आंसू बहे.
सब और भी इमोशनल हो गए.. दिनेश ऐसे सबसे वेड करने लगा.
वह जान कर भी अनजान बना हुआ था. जैसी मंज़िल का उसने चूसे किया था. उस मंज़िल को प्राप्त करने के लिए उसे किस हद तक जाना पद सकता है.
अभी तोह वह खुद से, सबसे वडा कर रहा था. बिना किसी को दर्द दिए hi वह अपनी manzil(simran) को पाने की छह दिल में पाले हुए था. ऐसा होना आसान नहीं था.
उसका लास्ट ईयर चल रहा था. वह अपना आखरी साल पिछले गुज़रे लास्ट सालों से भी बढ़िया बिताना चाहता था. इस बार वह और भी लगन से अपनी स्टडी में बिजी हो गया था. सिमरन को पाने के लिए भी उसे एक सक्सेसफुल इंसान के रूप में सामने आना था. अपने कुछ फ्रेंड्स और आदमियों को उसने राज और सिमरन के लिए मसरूफ कर दिए था.
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खाने के बाद सोनिआ आराधना और चची के साथ सो गई थी. दिशा छोड़ू के साथ अनीता के रूम में थी..
एक बड़े कमरे में नंदनी के साथ साथ दीपिका, भणवा, आरती और अंजलि भी मौजूद थी..
रूम में सब नंगे थे. राज चाट पते मसाले दर खाने खा कर फिरसे गर्म हो गया था. वह नंगा था और उनका लुंड कोहराम मचने के लिए तैयार था..
दीपिका यहाँ पर दिशा वाला रोले निभाने के लिए मौजूद थी. नंदनी बढे हुए पेट के साथ छूट के गीलेपन से परेशान थी. दीपिका ने एक hi रात में सबको निपटा देने का सोच लिया था. खुद सुकून से राज के साथ मज़े करने के मूड में थी..
दीपिका ने अपने लिए अलग से और स्पेशल से कुछ करने का मैं बना लिया था.. दीपिका जहाँ राज से कभी परेशान रहा करती थी. वहीँ अब वह राज को के बहुत से प्लान बनाये हुए थी. वह अपनी फर्स्ट नाईट या कहें तोह फर्स्ट टाइम बहुत स्पेशल बना देना चाहती थी.
सब का लुंड सबको नंगा देख कर झटके पर झटके खाये जा रहा था. सबसे पहले नंबर अंजलि का था. तोह शर्म से उसका चेहरा लाल होने लगा था..