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- Dec 5, 2013
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चची कम्पटी हुई-- राज बीटा तू मुझे, अपनी चची के साथ भी ज़बरदस्ती कर जाएगा. कुछ तो इज़्ज़त रहने दे अपनी चची की. राज ने अपने सोये हुए लुंड को चची की छूट पर रगड़ा.. चची कसमसाने लगी.
राज--- कसम से चची आपका ये गदराया हुआ जिस्म मुझे चैन से सोने नहीं देता. आप क्या जानो चची आज भी आपका ये जिस्म कितना सेक्सी है. राज की बात पर चची की सांस तेज़ होने लगी.
चची--- राज बीटा छोड़ दे मुझे कोई आ जाएग... चची को पता था जल्दी कोई नहीं आएगा. फिर भी वह राज से जान छुड़ाए के लिए ऐसा बोली
राज ने चची की गाल पर ऊँगली चलनी शुरू कर दी. पता है चची मुझे, इतनी जल्दी कोई नहीं आने वाला. में तो कहता हों चची यही पर थोड़ा से मज़े न कर लें. चची सर्दी में भी पसीना छोड़ने लगी थी. राज हरामियों का हरामी था. चची जानती थी.
चची ने ज़ोर लगा कर खुद को राज से छुड़वाया और भागने लगी. राज ने चची के एक हाथ को पकड़ लिया.. चची ने मुद कर राज को देखा. और आँखों से कहने वाली. छोड़ दे मुझे राज बीटा. क्यों इस उम्र में मुझे गन्दा करना चाहते हो. राज ने हस्ते हुए चची को खेंचा और फिरसे अपनी बहन में भर लिया.
राज --- चची कसम से इतनी सर्दी में भी आपके जिस्म की गर्मी ने मुझे पागल करना शुरू कर दिए है. आज छोड़ रहा हों चची. जल्दी hi मुझे आपको अपनी छूट देनी पड़ेगी चची. वर्ण.. इतना बोल कर राज चची को छोड़ कर निकल गया.
चची राज के जाने के बाद अपनी छूट को मसलने लगी. जिसमे पानी आने लगा था. राज किसी को छेड़े और वो गीली न हो ये हो नहीं सकता था. चची कभी राज को गलियां देती तो कभी अपनी रसीली छूट के पानी को कपडे के ऊपर से मसल के मज़े लेने लगती.
मैं तोह चची का भी ख़राब होने लगा था इतने सालों की राज की छेड़ छड़ से. पर वह आगे नहीं बढ़ना चाहती थी. अपने पति के शिव कभी किसी के सामने वो नंगी भी तो नहीं हुई थी..
राज घर पोहंचा तो घर का दूर खुला हुआ मिला. राज का घर बहुत खुला था. पहले वाला हिस्से में जानवर बंधे हुए थे. वहां दो नौकर भेंसो का दूध निकलने में लगे हुए थे.. राज दोनों से मिलकर अंदर जाने लगा.. अंदर का दरवाज़ा भी खुला हुआ था.
अंदर गया तो उसकी माँ और गाओं की एक औरत बैठी बातें कर रही थी. राज जा के उस औरत के पास जा बैठा.. राज को आते देख कर वो औरत घबरा कर उठ कड़ी हुई.. राज ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी गॉड में बिठा लिया.. वह हलकी आवाज़ में चीख पड़ी. आराधन हस्सन लगी. वो औरत आराधना को देख कर बोली
औरत--- आराधना कितनी बड़ी भूल हुई मुझसे, जो इस हरामी को भूल कर में यहाँ चली आई.. आराधना हसने लगी. राज ने औरत को अपनी गॉड में बिठा कर उसकी गर्दन पर ऊँगली फेरनी शुरू कर दिए. औरत ने जर्सी पहनी हुई थी. उसके बड़े बड़े दूध उसे जर्सी में छुपे हुए थे. आराधना को पता था राज अब क्या करेगा.. वो हस्ती हुई उठ कड़ी हुई, औरत आराधना को जाते हुए देख कर बोली
औरत---- हटा ले अपने इस हरामी बेटे को आराधना.. ोीी माँ.. देख ने कैसा हरामीपन कर रहा है ये मेरे साथ
आराधना हस्ते हुए--- दीदी आपने भी इसे बिगड़ने में कोई कसार नहीं छोड़ी. अब में कुछ नहीं कर सकती. वर्ण ये मेरे पीछे पद जाएगा.. आराधना हस्ते हुए दूसरे कमरे में चली गई और राज ने औरत के गरेबान में हाथ दाल कर उसका एक चुका पकड़ लिया.
राज----- साली तू अंदर से कितनी गरम है, तेरे ये चुके कभी ठन्डे नहीं होंगे क्या.
राज उस औरत के निप्पल कास कास के मसलने लगा था. जल्द hi वो औरत भी गर्म होने लगी. वह औरत राज की हंसाई थी, राज का लुंड सबसे पहले उसी की छूट और गांड में गया था. वह तोह ऊपर ऊपर से आराधन के सामने ऐसा बोलती थी वर्ण तो वह राज के लुंड की दीवानी थी.
अरुआत---- राज बीटा तेरे जैसा लुंड जो औरत ले ले. फिर उसकी छूट, गांड या चुचु की गर्मी काम कैसे हो सकती है. चल न लगा न कुण्डी और कर दे मेरी अंदर की गर्मी को ख़तम.. वह भी मूड में आते हुए बोली.
राज नंदनी को जैम कर छोड़ चूका था अभी उसका मूड नहीं था. पर वह औरत उसकी सेक्स गुरु भी थी. राज को उसकी माननी hi थी. राज ने जल्दी से उठ कर दूर को अंदर से बंद किया और फिर नंगा हो गया.. वह साली चिन्तल औरत भी बिना देरी के नंगी हो कर राज के लुंड के छुपे लगाने लगी. राज उसके बालों को पकड़ कर उसके मोहन को छोड़ने लगा. वह भी मज़े से राज से लुंड से अपने मोहन को छुड़वाने लगी. बड़ी भरे भरे जिस्म की मालिक थी वो औरत.. बड़े बड़े चुके राज ने बहुत बार निचोड़े थे.
कुछ देर में वो राज को खटिया पर लिया कर उसके ऊपर आई और लुंड लेकर छोड़ने लगी.. राज भी उसे थप्पड़ मारते हुए छोड़ने लगा..
20 मिंट की चली चुदाई में औरत के अंदर की साडी गर्मी निकल गई. वो खुश हो गई. आज 2 महीने बाद वो राज के लुंड से चूड़ी थी. दोनों कपडे पहन कर कमरे से बहार निकले. वो औरत फिर वही नहीं रुकी, वो अपने घर चली गई. राज अपने कमरे में जाने लगा, उसकी गांड पर बड़े ज़ोर का डंडा पड़ा.. राज चीखता हुआ पीछे मुरा तो दीपिका हाथ में एक डंडा लिए कड़ी थी. उसकी ऑंखें ग़ुस्से से लाल थी. साथ भावना भी थी.
दीपिका ----- हरामी साले कुत्ते रत तुझे इसी लिए घर से भगाया था, सुबह आते hi उस हरमिजादि के साथ मोहन काला कर लेगा.
भावना ----- हरामी कुछ तो हमारा भी ख्याल कर लिया कर.
राज ढिटाई से बोलै-- वही तो कई सालों से करने की कोशिश कर रहा हों. आप हाँ कह मेरी शिव पर मुझे मरने लगती है. भावना और दीपिका को ग़ुस्सा आने लगा तो वो राज को फिरसे पीटने लगी. राज ने दीपिका को एक टाइम पर अपने शिकंजे में कस लिया. भावना दीपिका को बचती उससे पहले hi राज ने दीपिका को उठाया और अपने कमरे में ले जा कर दूर अंदर से बंद कर दिए.
दीपिका घबरा गई.. भावना चीख पड़ी. अंजलि, आरती और आराधना भावना से पूछने लगी "क्या हुआ"
भावना ---- राज दीपिका को उठा कर ले गया है
अंजलि, आरती -- kyaaaaaaaaaaa?
आराधना हसने लगी-- वो उठा के घर में hi ले गया है कहीं बहार नहीं.. और उठा कर, भगा कर कोई शादी नहीं करने वाला मेरा राज दीपिका से.. हहहहए आराधन बड़े खुल कर हसने लगी थी. तीनो अपने माथे पर हाथ मारने लगी अपनी माँ को हस्ते देख कर
दीपिका को भी लगा आज वो बुरी फँसी राज के शिकंजे में.. वो बुरी तरह से घबरा गई थी पर ऊपर ऊपर से वो राज को घुसा दिखने लगी.
दीपिका ---- छोड़ मुझे हरामी साले कुत्ते
राज ने दीपिका को बीएड पर पटका और दीपिका के ऊपर ा कर दीपिका के होंटो पर एक हलकी सी किश करदी. दीपिका तो अंदर तक हिल गई थी. दर उसकी आँखों में दिखने लगा था. पर वो राज को शो नहीं करवाना चाहती थी. राज भी हरामियों का हरामी था. वो कोई बच्चा तो था नहीं जो सब न समझ सकता. वो स्माइल करने लगा. उसकी स्माइल देख कर दीपिका के होश उड़ने लगे.
राज ---- दीदी हरामी हों तो हरामी बन के दिखाओगे. एक हरामी क्या कुछ कर सकता है. ये भी आपको अच्छे से पता होगा. परसो रात आपकी छूट में ऊँगली सही से नहीं कर सका था में.. आज करूँगा. बहुत दिनों से आपकी छूट भी नहीं देखि, वो भी देखूंगा. ज़िन्दगी में कभी आपकी छूट में जीब नहीं डाली, आज वो भी दाल के अआप्की रसीली छूट को टास्ते करूँगा.. राज की घिनौनी बातें सुनकर दीपिका की सांस अटकने लगी.. दूर बहार से कोई खटखटा रहा था. पर राज ने खोलने का मैं बदल दिए था. दीपिका भी छह कर खुद को बचा नहीं सकती थी. क्यों की राज हरामी होने के साथ साथ बहुत ताक़तवर और वज़नी था. दीपिका को आज अपना बहुत कुछ बिगड़ता हुआ महसूस होने लगा था. उसके चेहरे पर आने वाली पसीने की बुन्देव में इज़ाफ़ा होने लगा.
राज--- कसम से चची आपका ये गदराया हुआ जिस्म मुझे चैन से सोने नहीं देता. आप क्या जानो चची आज भी आपका ये जिस्म कितना सेक्सी है. राज की बात पर चची की सांस तेज़ होने लगी.
चची--- राज बीटा छोड़ दे मुझे कोई आ जाएग... चची को पता था जल्दी कोई नहीं आएगा. फिर भी वह राज से जान छुड़ाए के लिए ऐसा बोली
राज ने चची की गाल पर ऊँगली चलनी शुरू कर दी. पता है चची मुझे, इतनी जल्दी कोई नहीं आने वाला. में तो कहता हों चची यही पर थोड़ा से मज़े न कर लें. चची सर्दी में भी पसीना छोड़ने लगी थी. राज हरामियों का हरामी था. चची जानती थी.
चची ने ज़ोर लगा कर खुद को राज से छुड़वाया और भागने लगी. राज ने चची के एक हाथ को पकड़ लिया.. चची ने मुद कर राज को देखा. और आँखों से कहने वाली. छोड़ दे मुझे राज बीटा. क्यों इस उम्र में मुझे गन्दा करना चाहते हो. राज ने हस्ते हुए चची को खेंचा और फिरसे अपनी बहन में भर लिया.
राज --- चची कसम से इतनी सर्दी में भी आपके जिस्म की गर्मी ने मुझे पागल करना शुरू कर दिए है. आज छोड़ रहा हों चची. जल्दी hi मुझे आपको अपनी छूट देनी पड़ेगी चची. वर्ण.. इतना बोल कर राज चची को छोड़ कर निकल गया.
चची राज के जाने के बाद अपनी छूट को मसलने लगी. जिसमे पानी आने लगा था. राज किसी को छेड़े और वो गीली न हो ये हो नहीं सकता था. चची कभी राज को गलियां देती तो कभी अपनी रसीली छूट के पानी को कपडे के ऊपर से मसल के मज़े लेने लगती.
मैं तोह चची का भी ख़राब होने लगा था इतने सालों की राज की छेड़ छड़ से. पर वह आगे नहीं बढ़ना चाहती थी. अपने पति के शिव कभी किसी के सामने वो नंगी भी तो नहीं हुई थी..
राज घर पोहंचा तो घर का दूर खुला हुआ मिला. राज का घर बहुत खुला था. पहले वाला हिस्से में जानवर बंधे हुए थे. वहां दो नौकर भेंसो का दूध निकलने में लगे हुए थे.. राज दोनों से मिलकर अंदर जाने लगा.. अंदर का दरवाज़ा भी खुला हुआ था.
अंदर गया तो उसकी माँ और गाओं की एक औरत बैठी बातें कर रही थी. राज जा के उस औरत के पास जा बैठा.. राज को आते देख कर वो औरत घबरा कर उठ कड़ी हुई.. राज ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी गॉड में बिठा लिया.. वह हलकी आवाज़ में चीख पड़ी. आराधन हस्सन लगी. वो औरत आराधना को देख कर बोली
औरत--- आराधना कितनी बड़ी भूल हुई मुझसे, जो इस हरामी को भूल कर में यहाँ चली आई.. आराधना हसने लगी. राज ने औरत को अपनी गॉड में बिठा कर उसकी गर्दन पर ऊँगली फेरनी शुरू कर दिए. औरत ने जर्सी पहनी हुई थी. उसके बड़े बड़े दूध उसे जर्सी में छुपे हुए थे. आराधना को पता था राज अब क्या करेगा.. वो हस्ती हुई उठ कड़ी हुई, औरत आराधना को जाते हुए देख कर बोली
औरत---- हटा ले अपने इस हरामी बेटे को आराधना.. ोीी माँ.. देख ने कैसा हरामीपन कर रहा है ये मेरे साथ
आराधना हस्ते हुए--- दीदी आपने भी इसे बिगड़ने में कोई कसार नहीं छोड़ी. अब में कुछ नहीं कर सकती. वर्ण ये मेरे पीछे पद जाएगा.. आराधना हस्ते हुए दूसरे कमरे में चली गई और राज ने औरत के गरेबान में हाथ दाल कर उसका एक चुका पकड़ लिया.
राज----- साली तू अंदर से कितनी गरम है, तेरे ये चुके कभी ठन्डे नहीं होंगे क्या.
राज उस औरत के निप्पल कास कास के मसलने लगा था. जल्द hi वो औरत भी गर्म होने लगी. वह औरत राज की हंसाई थी, राज का लुंड सबसे पहले उसी की छूट और गांड में गया था. वह तोह ऊपर ऊपर से आराधन के सामने ऐसा बोलती थी वर्ण तो वह राज के लुंड की दीवानी थी.
अरुआत---- राज बीटा तेरे जैसा लुंड जो औरत ले ले. फिर उसकी छूट, गांड या चुचु की गर्मी काम कैसे हो सकती है. चल न लगा न कुण्डी और कर दे मेरी अंदर की गर्मी को ख़तम.. वह भी मूड में आते हुए बोली.
राज नंदनी को जैम कर छोड़ चूका था अभी उसका मूड नहीं था. पर वह औरत उसकी सेक्स गुरु भी थी. राज को उसकी माननी hi थी. राज ने जल्दी से उठ कर दूर को अंदर से बंद किया और फिर नंगा हो गया.. वह साली चिन्तल औरत भी बिना देरी के नंगी हो कर राज के लुंड के छुपे लगाने लगी. राज उसके बालों को पकड़ कर उसके मोहन को छोड़ने लगा. वह भी मज़े से राज से लुंड से अपने मोहन को छुड़वाने लगी. बड़ी भरे भरे जिस्म की मालिक थी वो औरत.. बड़े बड़े चुके राज ने बहुत बार निचोड़े थे.
कुछ देर में वो राज को खटिया पर लिया कर उसके ऊपर आई और लुंड लेकर छोड़ने लगी.. राज भी उसे थप्पड़ मारते हुए छोड़ने लगा..
20 मिंट की चली चुदाई में औरत के अंदर की साडी गर्मी निकल गई. वो खुश हो गई. आज 2 महीने बाद वो राज के लुंड से चूड़ी थी. दोनों कपडे पहन कर कमरे से बहार निकले. वो औरत फिर वही नहीं रुकी, वो अपने घर चली गई. राज अपने कमरे में जाने लगा, उसकी गांड पर बड़े ज़ोर का डंडा पड़ा.. राज चीखता हुआ पीछे मुरा तो दीपिका हाथ में एक डंडा लिए कड़ी थी. उसकी ऑंखें ग़ुस्से से लाल थी. साथ भावना भी थी.
दीपिका ----- हरामी साले कुत्ते रत तुझे इसी लिए घर से भगाया था, सुबह आते hi उस हरमिजादि के साथ मोहन काला कर लेगा.
भावना ----- हरामी कुछ तो हमारा भी ख्याल कर लिया कर.
राज ढिटाई से बोलै-- वही तो कई सालों से करने की कोशिश कर रहा हों. आप हाँ कह मेरी शिव पर मुझे मरने लगती है. भावना और दीपिका को ग़ुस्सा आने लगा तो वो राज को फिरसे पीटने लगी. राज ने दीपिका को एक टाइम पर अपने शिकंजे में कस लिया. भावना दीपिका को बचती उससे पहले hi राज ने दीपिका को उठाया और अपने कमरे में ले जा कर दूर अंदर से बंद कर दिए.
दीपिका घबरा गई.. भावना चीख पड़ी. अंजलि, आरती और आराधना भावना से पूछने लगी "क्या हुआ"
भावना ---- राज दीपिका को उठा कर ले गया है
अंजलि, आरती -- kyaaaaaaaaaaa?
आराधना हसने लगी-- वो उठा के घर में hi ले गया है कहीं बहार नहीं.. और उठा कर, भगा कर कोई शादी नहीं करने वाला मेरा राज दीपिका से.. हहहहए आराधन बड़े खुल कर हसने लगी थी. तीनो अपने माथे पर हाथ मारने लगी अपनी माँ को हस्ते देख कर
दीपिका को भी लगा आज वो बुरी फँसी राज के शिकंजे में.. वो बुरी तरह से घबरा गई थी पर ऊपर ऊपर से वो राज को घुसा दिखने लगी.
दीपिका ---- छोड़ मुझे हरामी साले कुत्ते
राज ने दीपिका को बीएड पर पटका और दीपिका के ऊपर ा कर दीपिका के होंटो पर एक हलकी सी किश करदी. दीपिका तो अंदर तक हिल गई थी. दर उसकी आँखों में दिखने लगा था. पर वो राज को शो नहीं करवाना चाहती थी. राज भी हरामियों का हरामी था. वो कोई बच्चा तो था नहीं जो सब न समझ सकता. वो स्माइल करने लगा. उसकी स्माइल देख कर दीपिका के होश उड़ने लगे.
राज ---- दीदी हरामी हों तो हरामी बन के दिखाओगे. एक हरामी क्या कुछ कर सकता है. ये भी आपको अच्छे से पता होगा. परसो रात आपकी छूट में ऊँगली सही से नहीं कर सका था में.. आज करूँगा. बहुत दिनों से आपकी छूट भी नहीं देखि, वो भी देखूंगा. ज़िन्दगी में कभी आपकी छूट में जीब नहीं डाली, आज वो भी दाल के अआप्की रसीली छूट को टास्ते करूँगा.. राज की घिनौनी बातें सुनकर दीपिका की सांस अटकने लगी.. दूर बहार से कोई खटखटा रहा था. पर राज ने खोलने का मैं बदल दिए था. दीपिका भी छह कर खुद को बचा नहीं सकती थी. क्यों की राज हरामी होने के साथ साथ बहुत ताक़तवर और वज़नी था. दीपिका को आज अपना बहुत कुछ बिगड़ता हुआ महसूस होने लगा था. उसके चेहरे पर आने वाली पसीने की बुन्देव में इज़ाफ़ा होने लगा.