Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 3 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

श्रुति को देख के hi राज को लगा, श्रुति एक नंबर की रंडी है. अब जब राज यहाँ आया hi छोड़ने था तो फॉर्मलिटीज की ज़रूरत नहीं थी. श्रुति, नेहा या नैना कुछ बोलती. राज ने एकदुम्म से श्रुति के दोनों गलों को थम के किश करने लगा. श्रुति की हैरत से ऑंखें hi बड़ी हो गई, वह फटी आँखों से राज को देखने लगी. हैरान तोह नेहा और नैना भी हुई थी. पर जल्द hi वह हसने लगी. राज भी हरामी मुस्कान से श्रुति को किश करने लगा. कुछ देर की किश के बाद राज ने श्रुति को छोड़ दिए. श्रुति लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी. राज ने श्रुति के दोनों बूब्स पकड़ कर मसल दिए. श्रुति दो कदम पीछे हैट गई. राज है पड़ा.

राज ने आगे बढ़के श्रुति को गॉड में उठा और नेहा से बोलै. किस रूम में चलना है. इस रंडी को देख के, इसकी शराबी बदन को देख के मेरा खुद पे काबू नहीं रहा. सबसे पहले तोह में इसे hi छोडूंगा.

राज श्रुति को उठा के चलने लगा. श्रुति हेरात से राज को देखने लगी. नेहा और नैना भी हस्ते हुए पीछे चलने लगी. कुछ देर में चरों एक कमरे में थे और कमरे का श्रुति ने बताया था.

राज ने कमरे में दाखिल होते hi श्रुति को निचे उतरा और श्रुति की बूब्स पार्स शर्ट को पकड़ कर एक झटका दे दिए. छिरर्र के साथ, श्रुति की चीख के साथ शर्ट फटती चली गई. नेहा और नैना हसने लगी.

श्रुति-- तुम तोह सच में hi बहुत बड़े हरामी हो राज

राज-- ऐसा वैसा. राज ने श्रुति के बूब्स पे एक हलके सा थप्पड़ मारा तोह श्रुति फिरसे चीख पड़ी.

श्रुति -- हरामी ये क्या कर रहे हो. मर क्यों रहे हो

राज-- साली तू ऐसे hi छोड़ने लायक चीज़ है. तुझे सबसे पहले और ऐसे hi में छोडूंगा.

राज की बात पे श्रुति की आँखों में चमक आ गई. राज ने श्रुति की पंत भी पहाड़ दी. श्रुति मस्त नज़रों से राज के मफलर को पकड़ कर बोली.

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श्रुति-- फिर तोह आज खूब मज़ा आएगा मुझे भी. ऐसा hi पार्टनर तो में हमेशा ढूंढा करती थी.

श्रुति राज को नंगा करने लगी. राज के लुंड को देख के श्रुति की आँखों में चमक बढ़ गई. श्रुति राज के लुंड को पकड़ने लगी तोह राज ने उसे बीएड पे धक्का दे दिए. श्रुति ने दोनों पैरों से राज के लुंड को जकड लिया और सहलाने लगी.

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श्रुति की गोरी, चिकनी बालों से पाक छूट देख के राज का लुंड भी झटके मारने लगा. नेहा और नैना भी अब तक नंगी हो चुकी थी.

राज-- तुम दोनों साइड hi रहो, पहले इस रंडी के मज़े ले लेने दो मुझे. बड़ी छूट और गांड को चमकाए हुए है, में पहले इसकी गांड टास्ते करूँगा, इसकी गांड में लुंड दाल के देखूंगा. फिर तुम दोनों की बरी आएगी.

श्रुति-- राज तुम्हे मेरी गांड चाट के भी उतना hi मज़ा आएगा, जितना मेरी छूट में है.

राज -- देखते हाँ. राज ने श्रुति को घोड़ी बना दिए. और श्रुति की गांड पे जीब लगा के चाटने लगा.

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राज को मज़ा आया तोह श्रुति राज की गर्म जीब अपनी गांड पे पा के सिसक उठी. राज ने

एक थप्पड़ श्रुति के चुत्तड़ पे मार दिए.

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एक ऊँगली भी श्रुति की छूट में घुसा के राज अंदर बहार करने लगा. राज की ऊँगली फस फस के श्रुति की छूट में जाने लगी. अभी ज़यादा गीली नहीं हुई थी श्रुति की छूट. श्रुति ने कुछ लगा के अपनी छूट और गांड के छेड़ को टाइट भी कर लिया था. बोहत बड़ी रंडी थी श्रुति.

कुछ देर गांड चाटने के बाद राज ने अपने लुंड को श्रुति की गांड पे सेट क्या, फिर पुरे ज़ोर का धक्का मार दिए. राज एक सांड भी था. श्रुति की टाइट गांड को फाड़ता हुआ अंदर घुसता चला गया. श्रुति पूरी जान से हिल गई. राज ने एक और धक्का मारा और पूरा लुंड श्रुति की गांड में घुसा के पूरी स्पीड से छोड़ने लगा.

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पहले कुछ देर श्रुति चीखती रही, राज को गलियां देती रही. फिर श्रुति भी मस्त होक छोड़ने लगी.

श्रुति-- राज हरामी तू तोह सच में भी बहुत बड़ा हरामी है सेल. कोई तेरे जैसा वेह्शी भी होगा. मेरी फूल की गांड का क्या हशर कर दिए तुमने.

राज ने एक थप्पड़ उसकी के पिछवाड़े पे माँ और बोलै. साली रंडी तू जयंती बड़ी चुड़ककर है, तुझे क्या फर्क पड़ेगा ऐसी चुदाई से. देख कितनी जल्दी तेरी गांड में मेरा लुंड रउवा होने लगा है.

नेहा और नैना दोनों एक दूसरे से लगी हुई थी. राज की चुदाई देख के दोनों मस्त हो गई थी.

राज ने श्रुति की गांड से लुंड निकल के खुद बीएड पे लेट गया. चल रंडी बैठ मेरे लुंड पे, राज बोलै तोह श्रुति झट से राज के लुंड पे बैठी और गांड में लुंड न ले के छूट में लेके ऊपर निचे होने लगी.

राज-- आह साली तूने चालाकी दिखा hi दी न. श्रुति हस्ते हुए स्पीड से ऊपर निचे होने लगी. राज ने उसकी दोनों चुत्तड़ो पे थप्पड़ मारते हुए निचे से पूरी स्पीड के साथ अपने लुंड को श्रुति की छूट में अंदर बहार करने लगा.

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श्रुति-- कसम से मुझे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया. श्रुति एक हाथ से अपनी छूट मसलते हुए बोली. कुछ देर बाद राज ने श्रुति को साइड में धक्का दिए, छूट से लुंड निकल के गांड में डालने लगा.

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श्रुति-- राज मेरा होने वाला था, प्ल्ज़ छूट में दाल के एक बार मेरा पानी निकल दो.

राज-- चुप कर साली रंडी. फिर राज ने धक्का मार के सारा लुंड श्रुति की गांड में घुसाया और दबा दबा के छोड़ने लगा. गांड में षुरूति को दर्द होने लगा था. वह सिसकी लेने के साथ साथ कराहने भी लगी. पर राज लगा रहा.

राज-- पता है साली तू नेहा और नैना दोनों से भी मस्त माल है. तेरे बड़े बड़े चुत्तड़ और अनार मुझे बहुत भाये हाँ. तुझे छोड़ने में भी मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. राज श्रुति का एक पेअर उठा के छोड़ने लगा तोह श्रुति अपनी के पानी को निअक्लने के लिए अपनी छूट को जोश के साथ मसलने लगी.

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राज-- तुझे इतनी जल्दी झड़ने नहीं दूंगा में रंडी.. राज ने फिरसे अपना लुंड श्रुति की गांड से निकला षुरूति को अपने ऊपर बिठा के षुरूति की गांड में लुंड दाल दिए.

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अब राज पूरी स्पीड से श्रुति की गांड मारने लगा.

साले तू मेरी गांड का कबाड़ा करने में क्यों तुला हुआ है आठ मा मुझसे रंडी को भी इतना दर्द दे दिए. उफ्फ्फ्फ़ आठ उम्म्म्म नेहा कुत्तिया ये तू किसे ले आई आअह्ह्ह ओह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaa

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राज की स्पीड hi नहीं बढ़ी श्रुति की सिसकियाँ आहें भी भड़ने लगी. राज कभी कभी श्रुति के बूब्स पर भी स्लैप कर देता था. शूरति ऐसे समय राज को ग़ुस्से से देखने लगती थी. मन में वह बोल भी रही थी. मार्ले जितनी बेदर्दी से मेरी गांड मारनी है साले. उम्र भर तुझे अपना कुत्ता न बनाया तो मेरा नाम भी श्रुति नहीं. राज का मोटा लुंड श्रुति के लिए लुंड नहीं डंडा बन चूका हटा. उसकी मैट हनी मार के रख दी थी राज ने..

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राज का स्टैमिना भी खूब था, राज खुद झाड़ नहीं रहा था और श्रुति को झड़ने भी नहीं दे रहा था. जब भी श्रुति मस्त होती राज हरामीपन करते हुए अपनी स्पीड बढ़ा देता. श्रुति अपनी छूट मसल के झड़ने का मैं बनती तोह राज उसके बूब्स के तोह कभी उसके चुत्तड़ो पे थप्पड़ मार देता. श्रुति को राज का ऐसा करना जहाँ बहुत दर्द भी दे रहा था. वहां उसे इतनी लज़्ज़त भी प्राप्त हो रही थी, जो श्रुति ने पहले कभी नहीं पाई थी. इसी लिए वह राज को अब हमेशा के लिए अपना कुत्ता बनाने की सोच रही थी. जैसा लुंड राज के पास था, श्रुति क्रोरो कमा भी सकती थी. श्रुति मैं में बहुत खुश भी थी राज के मिल जाने पे. राज चुदाई में फुल्ली ट्रेंनेड भी था. ये जान के भी श्रुति बहुत खुश थी.

बहुत देर रक् श्रुति की गांड की बंद बजने के बाद राज श्रुति की गांड में भी ठुस्स हो गया. राज ने श्रुति को साइड में बीएड पे फेंका और हांपने लगा. इतनी देर तक राज ने भी कभी किसी की गांड नहीं मरी थी.

कुछ देर में श्रुति भी रिलैक्स होक उठने लगी.

राज-- कहाँ जा रही है मेरी रंडी श्रुति. श्रुति जो साथ वाले कमरे में जा के साड़ी बानी वीडियो को सेव कर लेना चाहती थी. उसे राज से खतरा भी महसूस होने लगा था. राज काम हरामी नहीं था. इसलिए वह जल्द से जल्द वीडियो को कहीं सेव क्र देना चाहती थी. बाद में राज फिर उसका बेदम घुलम बन सके.

अब राज था हरमिओ का हरामी, 1000 हरामी मरे होंगे कहीं तोह राज पैदा हुआ था. उससे कुछ भी नहीं छुप सका था. उसकी तेज़ आँखों में कमरे में लगे हुए हिडन कामर्स को ढूंढ निकला था. ऐसा hi उसे पहले भी कुछ लगा था. तभी तोह षुरूति को राज ने ऐसे छोड़ा था.

राज ने श्रुति का हाथ पकड़ के खेंचा, श्रुति राज के ऊपर ाँ गिरी. श्रुति राज को देखते हुए बोली. इतनी खतरनाक चुदाई के बाद भी तुम थके नहीं हो.

राज-- हाहाहा तुम क्या मुझे चूतिये समझती हो. तुझे नेहा ने, नैना ने नहीं बताया था. मैंने पहली hi मुलाक़ात में नेहा रंडी को पार्क में hi पकड़ लिया था. सोचो जो ऐसा कर सकता है. वह कितना बड़ा हरामी होगा. राज श्रुति को खड़ा करके उसे एक कस के थप्पड़ मारते हुए बोलै. नेहा और नैना जो एक दूसरे को ठंडा कर चुकी थी. राज की बात सुनके हैरान रह गई. फिर फ़ौरन hi वह श्रुति को देखने लगी.

राज आगे बढ़ा और नेहा और नैना की रेशमी ज़ुल्फ़ें पकड़ कर श्रुति के पास फ़ेंक दिए.

राज-- तुम दोनों क्या समझती थी. मैं ऐसे hi तुम दोनों के साथ कहीं भी चला जाऊँगा. तुम जैसी रंडियो की मेरे आगे हैसियत hi क्या है. अरे मुझसे तोह मेरी माँ और बहने, मेरे दूसरे ृश्रेडर, पूरा गाओं पनाह मांगता है. और तुम तीनो मिलके मेरे साथ गेम खेलने चली थी.

राज ने पहले दूर को अंदर से बंद किया. फिर श्रुति को उसके hi फाड़े कपडे की पत्तियां बना के बांध दिए. नेहा और नैना दोनों थार थार काँप रही थी.

राज-- नेहा और नैना रंडी तुम आज से हमेशा के लिए मेरी रंडियां मेरी घुलम बन के रहोगी. मेरी मर्ज़ी के बिना तुम दोनों मूट भी नहीं सकुंगी. नेहा और नैना को बांध कर राज पूरी कोठी को चेक करने लगा. कक्तव में जितनी भी, जहाँ भी उसकी वीडियो कैप्चर हुई थी. वह साडी अपने मोबाइल में ट्रांफर करके राज फिरसे कमरे में आ गया.

नेहा और नैना राज को ख़ौफ़ज़दा नज़रों से देखने लगी तोह श्रुति राज को ग़ज़बनाक निगाहों से.

राज-- तुम अभी नहीं सुधरेगी श्रुति रंडी. तेरे साथ तो मैं वह करूँगा जो तूने कभी सोचा नहीं होगा. राज आगे बढ़ा और नेहा के बूब्स के बैठ के अपने ढीले लुंड को उसके मोह में दे दिए. नेहा तोह डर के मारे अपना पूरा मोह hi खोल गई थी. राज नह के मोह को छोड़ने लगा. कुछ देर में उसका लुंड पूरा खड़ा हो चूका था.
 
नेहा डरते डरते राज का लुंड चूसने लगी. राज एक पहलवानी जिस्म वाला लड़का भी था. ऊपर से एक बड़े और भयंकर लुंड वाला भी. जैसी उसने षुरूति की गांड मारी थी. नेहा दर गई थी.

श्रुति-- राज तुम बहुत पछवाओगे. मुझसे पुंगा लेके तुम बहुत पछताओगे. खोल दो मुझे, नहीं तोह तुम्हारे साथ मैं क्या करुँगी तुम सोच भी नहीं सकते.

राज-- मैं नेहा रंडी और नैना रंडी को छोड़ लूँ, तब तब तुम अच्छे से सोच विचार कर लो. जो मैं में ए बाद में मेरे साथ कर लेना. राज ने अपना लुंड निकला और नैना के मोह में ठोस दिए.

नैना भी कुछ नहीं बोल पाई, बस मोह खोल के राज के लुंड को लेके चूसने लगी. राज नैना के मोह को छोड़ने लगा. कुछ देर बाद राज ने नेहा के पैरो को खोल दिए और नेहा की चाट चाटने लगा. नेहा और नैना दोनों राज के नाना के मोहल्ले की थी और राज को दोनों से काम भी था तोह राज सुकून से नेहा की छूट चाटने लगा. नेहा जो दर रही थी राज के उसकी छूट में जीब दाल के चाटने से मस्त होने लगी.

नेहा-- लव यू राजा, तुम बहुत अच्छे से छूट छत्ते हो. आठ uffffffffff माँ राज चाटने के साथ दो उँगलियाँ भी नेहा की खुली छूट में दाल के अंदर बहार करने लगा. नैना भी मस्त होने लगी. श्रुति वक़्फ़े वक़्फ़े से राज को बुरा भला बोल रही थी. कभी मिन्नतें करने लगती तोह कभी राज को धमकियाँ देने लगती. राज ने नेहा की छूट चाट के अपने लुंड को नेहा की छूट में फंसाया और एक धक्का मार दिए.

नेहा-- आठ माँ मैं मर गई.. राज तेरा लुंड बड़ा है प्ल्ज़ पहले धीरे से डालो.

राज-- साली क्यों नाटक करती है. इतनी सी आगे hi में तूने अपनी छूट को भोसड़ा बना लिया है. इतना दर्द नहीं हुआ तुझे जितना तू चीख रही है. राज ने एक हल्का सा थप्पड़ नेहा के बूब्स पे मारा, साथ hi एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना लुंड और भी नेहा की छूट में घुसा दिए. नेहा फिरसे चीख पड़ी. राज ने आखरी धक्के में अपना सारा लुंड नेहा की छूट में घुसा दिए. ऊपर आ के नेहा के निप्पल पकड़ के मसलते हुए राज नेहा को छोड़ने लगा.

राज-- राज भोसड़ा लेके भी तोह भी काम मस्त नहीं है. नजाने कितने लुंड तू ले चुकी होगी. पर तुझमे सवाद ज़रा भी काम नहीं हुआ. खुली छूट भी कुछ काम मज़ा नहीं दे रही है. एक ऊँगली राज नैना की छूट में घुसा के नेहा को छोड़ने लगा.

नेहा-- राज आठ आठ राज थोड़ी और स्पीड बढ़ाओ. मा कितना मज़ा है बड़े लुंड का. नेहा मस्त हुई तोह सारा दर भूल गई. बंधी होने से जो दर्द उसे हो रहा था. उसे भी भूल गई.

राज ने नेहा को खोल कर नेहा को घोड़ी बनाया और नेहा की गांड पे लुंड रख के धक्का मार दिए.

नेहा-- आह्ह्ह्हह राज गांड में तोह प्ल्ज़ धीरे दाल दो. वो तो भोसड़ा नहीं है न. आठ माँ. राज धीरे.. अह्ह्ह प्ल्ज़ धीरे.. राज ने 3 धक्को में पूरा लुंड नेहा की गांड में डाला तोह नेहा की सांस hi अटकने लगी थी. राज ने पूरा लुंड सुपड तक बहार निकला और फिर एक hi धक्के में सारा अंदर दाल दिए.

नेहा फिरसे चीख पड़ी... राज हलके हलके थप्पड़ नेहा के चुत्तड़ो पर मरते हुए नेहा की गांड मारने लगा. गांड अच्छे से खुली करके राज ने अपना लुंड गांड से निकल से नेहा की छूट में डाला तोह नेहा को सुकून मिला. राज लगा रहा नेहा की छूट में, जब तक नेहा की छूट ने पानी नहीं छोड़ दिए.

राज ने नेहा को साइड किया और नैना को खोल कर उसकी गांड मारने लगा.

नैना -- राज ये क्या किया तुमने.. आह्ह्ह्हह्ह मेरी गांड.. नैना भी चीख पड़ी. नैना की गांड नेहा से तंग थी. नैना को ज़ायदा दर्द हुआ. पर राज नहीं रुका. नैना की गांड मर मर के साडी खुली कर दी. राज झड़ने वाला हुआ तोह राज ने नैना की गांड से लुंड निकल के श्रुति के मोह में घुसा दिए.

षुरूति को राज का लुंड दिख गया था. राज का लुंड क्लीन नहीं था. श्रुति गन्दा सा मोह बना के राज के लुंड को अपने मोह से निकलने लगी. पर राज ने नहीं निकलने दिए. कुछ देर में राज के लुंड का माल भी श्रुति में मोह में निकल गया. श्रुति हूँ हूँ करने लगी. जब तक सारा माल श्रुति के हलक़ से निचे नहीं उतर गया राज ने अपना लुंड नहीं निकला.

शूरति सारा माल जातक गई तोह राज हरामी मुस्कान देते हुए उठ खड़ा हुआ..

राज-- जानती है तू श्रुति रंडी. मैं इतना बड़ा हरामी हों कह मैं अगर किसी से मैं बदल दूँ न तोह वह मेरे पैरों में गिर कर माफ़ी मांगने लगे. तू मेरे साथ गेम खेलने की कभी सोचना भी मत.. वर्ण तुझे मैं पब्लिक प्लेस में नंगा करके सबके सामने छोड़ दूंगा. और ऐसा करते हुए मुझे दर भी नहीं लगेगा. बाद में जो होगा देखा जाएगा. तू भी इस देश में फिर रहने लायक नहीं रहेगी. राज की आँखों में देख के श्रुति ने राज की बात सुनी तोह इस बार वह अंदर तक कैंप उठी. इस बार उसकी सोच पूरी hi बदल गई थी. आज तक उसे कोई मर्द नहीं मिला था. कोई राज के जैसा नहीं मिला था. जिसे चाहती थी अपना गुहलाम बना के अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया करती थी. वह समझ गई अगर राज से भिड़ने की कोशिश की तोह इतने सालों से बनाया सब कुछ ख़तम होक रह जाएगा. इज़्ज़त तो उसकी हाई सोसाइटी में बहुत थी. पैसा भी उसने खूब कमा लिया था. अब वह पैसा और इज़्ज़त दोनों नहीं खोना चाहती थी. राज ने श्रुति की आँखों में देख के सब जान लिया.

राज-- अच्छी सोच रखोगी तोह कभी फ्यूचर में मुझे मौका मिला तोह तेरे किसी काम भी आ जाऊँगा. मेरे सामने या पीठ पीछे मेरे साथ गलत करने वाले को मैं शमशान तक नहीं छोड़ता. मुझसे बच के रहना. अपनी ज़िन्दगी के मज़े ले रही हो लेती रहो. पर कभी किसी की ज़िन्दगी के साथ मत खेलना. यही पर अभी तेरी ज़िन्दगी का मैं खेल ख़तम कर दूँ तोह जितना पैसा तूने इतने सैलून में बनाया है, वह तेरे किसी काम नहीं आएगा.

श्रुति राज की बातों पर हैरान hi रह गई. फिर उसे याद राज ने पुरे घर की तलाशी ली है. ज़रूर राज को उसकी डायरी बी मिल गई होगी. जिसमे वह सबका हिसाब किताब रखा करती थी. राज की बहुत अच्छे से उसकी समझ में भी आ रही थी.

नैना-- राज प्ल्ज़ अब मुझे भी शांत कर दो न. कितनी देर से जल रही हों. राज ने एक स्टूल खेंचा और उसपे बेथ गया.

राज-- चल अब तुम दोनों मेरे लुंड को फिरसे चूस कर खड़ा करो. नेहा और नैना दोनों खशी ख़ुशी राज के लुंड को थाम के खेलने लगी. कुछ देर में राज का लुंड खड़ा हुआ तोह राज ने पेअर खोल के नैना को अपने लुंड पे बैठने का बोल दिए. नैना ख़ुशी ख़ुशी राज के लुंड पे बैठी और उछलने लगी.

नेहा-- राज मुझे माफ़ कार्डो, मैं सब जानते हुए भी तुम्हे यहाँ ले आई थी. श्रुति के कहने पे hi मैं और नैना तुम्हे यहाँ लेके आई थी. वर्ण हमारे पास एक ठिकाना और भी था.

नैना भी उछालते हुए राज से माफ़ी मांगने लगी. मैंने भी गलती की है राज. तुम सच में बहुत अच्छे हो. श्रुति के हमने खुद से बताया था. ऐसा हम पहले भी कई बार कर चुकी है.

राज-- अगर तुम दोनों के घर पर सब पता चला, तुम दोनों चुदाई के साथ साथ किसी रैकेट का भी हिस्सा हो तोह क्या गुज़रेगी उनपर. शर्म से सब डूब मरेंगे, अगर तुम दोनों किसी चककर में फँस गई तोह.

नेहा-- कसम से राज जितना तुम बोल रहे हो, उतना सब हमें नहीं मालूम था.

नैना-- श्रुति हमें कबि कबि दूसरी कोठियों पर ले जाती थी. पर हमने कभी पैसो के लिए ऐसा सब नहीं किआ था.

श्रुति-- राज मेने इन दोनों से सब छुपा रखा था. नेहा और नैना जैसी और भी कई लड़कियों को भी में इस्तेमाल किया करती थी पैसो के लिए. पैसे मुझे मिलते थे और मज़े इन दोनों को. पर मैंने दोनों का ज़यादा परेशान कबि नहीं किया.

राज ने नैना की छूट का पानी निकल दिए था. नैना को उठा कर नेहा को बिठा दिए था राज ने अपने लुंड पे. नेहा भी राज की और मोह करके राज के लुंड पर उछलने लगी.

राज-- फिरसे ऐसा कभी मत करना. पैसो की छह अच्छी बात है पर लालच एकदुम्म से सब कुछ छीन भी लेता है. इज़्ज़त भी और साँसे भी.

श्रुति-- आज ज़िन्दगी में पहली बार मुझे रीलीज़ हुआ है राज. वर्ण इससे पहले मैंने ऐसा कबि नहीं सोचा था.

नेहा को बीएड पर लिटा कर राज नेहा के चुके चूसते हे नेहा को छोड़ने लगा.

नेहा-- आह्हः राज ओह्ह्ह हवस के साथ इतना मज़ा उफ्फ्फ्फ़ पहली बार आ रहा है. और से छोड़ो मेरी छूट को राज.

राज हलके से नेहा के निप्पल्स को कट्टा हुआ नेहा को छोड़ने लगा. इस बार राज प्रेम से छोड़ रहा था नेहा को.

राज झड़ने वाला हुआ तोह लुंड नेहा की छूट से निकल दिए. श्रुति को इशारा किया तोह वो बंधी हालत में hi बीएड पर आ गई. नैना ने राज के कहने पे श्रुति को खोल दिए. फिर तीनो मिलके राज के लुंड को चाटने चूसने लगी. राज तीनो को देखने लगा. दिल्ली शहर में एक साथ तीन तीन को 3 बार छोड़ के राज का मैं बहुत हल्का हो गया था. राज खुश होक तीनो को देखने लगा. कुछ देर में राज के लुंड से माल निकला तोह तीनो मिल बाँट कर पेट में उतरने लगी.

राज-- अब किसी के मैं में कुछ है क्या.

श्रुति-- नहीं राज कसम से अब मेरे मैं में तुम्हारे लिए कुछ भी गलत नहीं है.

नेहा-- मैं तोह श्रुति के कहने पे तुम्हे यहाँ ले आई थी राज.. वर्ण तुम तो मुझे पहली नज़र में hi भ गए थे. सुबह पार्क में तुम्हारी डेरिंग पर बी मैं मोहित हो गई थी राज. बस श्रुति के साथ हमारी गाथेरिंग थी तोह इसे बता दिए. बाकि का हमें भी मालूम नहीं था.

नैना-- हाँ राज वर्ण हम तोह अपने मज़े के लिए इतना सब करती है. साडी लड़कियां hi अपनी लाइफ को एन्जॉय करती हाँ, पर हमारा श्रुति के धंदे से कोई लेना देना नहीं था.

राज- छोडो अब ऐसी बातें. आगे से धयान रहे. अपनी ज़िन्दगी अपने हिसाब से जियो. बस अपने परिवार वलु के लिए कभी कुछ मत होने दो. इतनी आज़ादी दे राखी है तुम दोनों को तुम्हारे परिवार ने. इतनी आज़ादी का नाजायज़ फायदा मत उठाओ.

कुछ देर में राज ने तीनो को वही छोड़ा और कपडे पहन के कोठी से निकल पड़ा. बहार एक बाइक दिखी तोह राज वापिस आया. जहाँ अभी भी नंगी बैठी राज के बारे में बातें कर रही थी. तीनो की बातें सुनके राज के होंटो पे स्माइल आ गई. तीनो आगे से पहले जैसी hi मस्ती करेंगी, पर किसी को फँस कर नहीं. राज के लिए किसी के दिल में अब कुछ भी गलत नहीं था. राज बहुत बड़ा हरामी था. सजा और मज़ा दोनों देके तीनो को अपने वश में कर लिया था. राज को देख के तीनो उठी और राज को किश करने लगी.

राज-- छोड़ू सालिओ अभी तक मन नहीं भरा क्या तुम तीनो का.

षुरूति-- हेहेहे छूट और मोह तोह भर गया है, मैं कभी नहीं भरेगा. तुम्हारे जैसा भी तोह पहले कोई नहीं मिला था न. अब मिला है तोह हम तोह तुमसे चिपकी hi रहेंगी.

राज-- बहार बाइक किसकी कड़ी है.

श्रुति-- वह.. राज तुम्हे बाइक चाहिए क्या

राज-- इसी लिए तोह पूछ रहा हो

श्रुति-- वह तुम ले जा सकते हो. यहाँ पे आये एक लड़के की थी, मेरे लिए छोड़ गया था. एक मस्त आइटम दिलाई थी उसे. खुश होक वह बाइक छोड़ गया मेरे लिए..

राज ने चाबी ली और बाइक पे बैठ के कोठी से निकल पड़ा. रस्ते में कार बहुत ज़यादा स्पीड से राज के पास से गुज़री तोह राज गाड़ी के साइड मिरर से ड्राइवर लड़की को देख गया. उस लड़की की गाड़ी के पीछे एक और गाडी बड़ी स्पीड से गुज़रती चली गई. राज ने भी स्पीड पकड़ ली और दोनों गाड़ियों का पीछा करने लगा. राज हरामी को लड़की का व्यू थोड़ा सा दिखा था. पर देखते hi राज समझ गया था लड़की बहुत खूबसूरत बहुत क्यूट है.

कुछ आगे लड़की की गाडी ने साइड से एक फलों वाली रेहड़ी को टक्कर मार दी. लड़की ने आगे जा के गाडी रोकी और फिर गाड़ी को बैक करती हुई वापिस आने लगी. रेहड़ी वाला तोह बच गया था पर उसकी रेहड़ी का कुछ नहीं बच सका था. वह साइड में बैठा अपने नुकसान पर आंसू बहाने लगा. राज और दूसरी गाडी भी वहां पोहंच चुकी थी.

लड़की गाडी से बड़ी ग़ुस्से से निकली और रेहड़ी वाले के पास पोहच के एक थप्पड़ उसके मोह पे मार दिए. राज तोह लड़की को ब्यूटी और क्यूटनेस hi देखता रह गया. उसने रेहड़ी वाले पर धयान नहीं दिए. लड़की दिल्ली के टॉप बुसिनेस्स्में राकेश वर्मा की पोती सिमरन थी.

सिमरन-- स्टुपिड तुम अपनी इस घट्टिया रेहड़ी के साथ साइड पे नहीं चल सकते थे क्या. मेरी गाड़ी का इतना नुकसान कर दिए. आस पास और भी बहुत से लोग खड़े होक देखने लगे. राज भी बाइक में बैठा सिमरन को देखने लगा. राज तोह बस सिमरन के चेहरे में hi खोया रहा. आस पास धीमे लहजे में सिमरन बारे भी बातें होने लगी. राज जान गया सिमरन कोण है. राज अपने नाम के साथ सिमरन की गार्डन करने लगा. राज सोचने लगा, लड़कियां तोह लाइफ में बड़ी आई बड़ी गई. और भी नजाने कितनी आएंगी. पर सिमरन के जैसी कोई नहीं आ सकती. राज सिमरन को भी अलग एंगल से सोचने लगा.

दूसरी गाडी से पांच लोग उतरे, दो गॉर्डस और 3 नौकर. पांचू भागते हुए लड़की के पास पोहंचे. कुछ बोल नहीं सके.

सिमरन बड़े ग़ुस्से में थी. वह फल फरोश पर फिरसे बरसने लगी. राज ने बाइक को बंद नहीं किया, स्टार्ट hi रहने दिए. बाइक से उतरा और सिमरन के सामने जा खड़ा हुआ. सब लोग और सिमरन के गार्ड्स, नौकर राज को देखने लगे.

सिमरन भी राज को देखने लगी. एक पल के लिए सिमरन भी राज को देखती रह गई. राज की पर्सनालिटी कहीं भी काम नहीं थी. बस राज का कपडे सिमरन के स्टैण्डर्ड के हिसाब से नहीं थे. फ़ौरन hi सिमरन के चेहरे के भाव फिरसे पहले वाले हो गए और वह राज को देखने लगी.

सिमरन-- कौन हो तुम और मेरे सामने क्यों आ क्र खड़े हो गए हो. सिमरन आग उगलती आँखों से राज को देखते हुए बोली.

राज-- उस बेचारे किस किस्मत hi ख़राब थी जो वह तुम्हारी गाडी क साँमे आ गया. वैसे देखा जाए तोह ये अच्छा भी हुआ है.

सिमरन-- राज को घूरते हुए.. अच्छे से क्या मतलब है तुम्हारा..

राज-- अगर ये सामने न होता, तो तुम्हारी गाड़ी कैसे इसकी रेहड़ी से टकराती. अगर टकराई न होती तोह फिर हमारी तोह आज की मुलाक़ात हवा हो जनि थी. कसम से अब तक की ज़िन्दगी में ब्यूटी की इन्तहा देख चूका हों. खालिस से खालिस लड़की को देख चूका हों. पर कसम है जनम देने वाली की, तुम जैसी आज तक नहीं देखि. इतनी सुंदरता, इतनी क्यूटनेस, ऊपर से ग़ुस्सा, साथ में नौकर और बोडीगार्ड्स, ाएस पास मजमा लगाए हुए .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ मैं तोह के hi नज़र में घायल हो गया हों. सिमरन राज की बातें सुनके ग़ुस्से की शिद्दत से कंपनी लगी. गार्ड्स सिमरन की प्रेमिशन के बिना आगे नहीं बढ़ सकते थे. सिमरन बहुत से मामलो में हटके लड़की थी.

राज की बातों ने सिमरन को इतना ग़ुस्सा दिलाया कह सिमरन ने उठा के घुमा दिए. उसका इरादा सीधा राज के मोह पे थप्पड़ मार देने का था.

राज ने सिमरन का हाथ पकड़ के झटक दिए. सिमरन संभालती राज ने सिमरन के क्यूट से चेहरे को दोनों हथु में थम के सिमरन के होंटो पे किश कर दिए.

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सिमरन की ऑंखें तोह इतनी बड़ी हो गई थी. जितनी अब तक की ज़िन्दगी में नहीं हुई थी. राज ने फ़ौरन hi सिमरन को छोड़ा और एक बात बोल के फ़ौरन hi वहां से भाग खड़ा हुआ. बाइक स्टार्ट hi थी. रश की वजा से गॉर्डस फायर भी नहीं कर सकते थे. सिमरन जब तक संभालती या गॉर्डस कुछ कर पाते, राज वहां से खिसक चूका था. इतने रश में राज का पीछे भी नहीं किया जा सकता था.

राज ने सिमरन से कहा था. "ये हमारे प्यार का मेरी ऑर्डर से पहले नज़राना. इसे एहसास को हमेशा याद रखना, जल्द hi फिर मिलेंगे"

सिमरन तोह चीखने लगी थी. नौकर और गार्ड्स एक दूसरे को देखते रह गए थे. गॉर्डस सिमरन के साथ सिमरन की सुरक्षा के लिए थे. कोई दुश्मनी वाला चक्कर सिमरन परिवार से नहीं था. सिमरन आये दिन कोई न कोई हंगामा कर दिए करती thi.isliye दो गॉर्डस हमेशा उसके साथ रहा करते थे. गोली चलने वाली बात भी नहीं थी. ऐसा पहले कभी कोई चांस नहीं बना था. राज ने भी तो एकदुम्म से सिमरन को किश कर दिए था. कैसे इतनी जल्दी कोई समझ सकता.

सिमरन वही कड़ी चीखने चिल्लाने लगी. पहले तोह लोग हसने लगे थे. फिर सिमरन को ग़ुस्से में देख के वहां से खिसक लिए थे. नौकर और गॉर्डस वहां से भाग नहीं सकते थे. इसलिए वही सिमरन के ाताब का शिकार हुए. कुछ देर में सिमरन गाडी में बैठी और वहां से घर की ऑर्डर जाने लगी. एक नौकर ने गाडी से उतारते hi रेहड़ी वाले को कुछ पैसे दे दिए थे.

वह भी फिरसे गाड़ी में बैठे और सिमरन के पीछे जाने लगे. सिमरन कोठी पर पोहंची तोह बड़े ग़ुस्से से गाडी से उत्तरी और चीखती चिल्लाती हुई अंदर जाने लगी. सिमरन ी चीखो पुकार सुनके सब घर वाले जमा होने लगे. सिमरन बहगति हुई एक दिवार के साथ लगी दोनाली गन उतर कर उसमे बुलेट्स भरने लगी. सब उसे ग़ुस्से में देख के डरे नहीं, वह हैरान रह गए. इतने ग़ुस्से में सिमरन पहले कभी नहीं आएगी.

सिमरन ने दोनाली बंदूक सबकी और कर दी. इस बार सब घबरा गए. सिमरन के दादा दादी, मम्मी, और दूसरे सब भी वही थे. पापा चाचा और भाई घर पे नहीं थे.

सिमरन-- चीखते हुए.. ी विल किल तहत बास्टर्ड.. ी विल किल तहत बास्टर्ड.. नरका हाँ सब के सब.. सिमरन के दादा आगे बढे तोह सिमरन ने दोनाइल बंदूक दादा के सीने से लगा दी.

सिमरन-- ददददददूऊ आप पीछे हैट जाएँ. आज मैं उस कमीने को ज़िंदा नहीं छोडूंगी.

दाद्दु-- haan..haan.. बिलकुल भी ज़िंदा मत छोड़ना. जान से मर देना उसे.. दाद्दु सिमरन को ग़ुस्से में देख के भी सीरियस नहीं हो पाए थे. बड़ी मुश्किल से वो अपनी हंसी पे काबू पाए हुए थे. फिर वह चेहरे के भाव और लहजे को बदल के बोले.. वैसे सिमरन बेटी तुम किस पुरुष की बात कर रही हो.

सिमरन ने दोनाली का दबाओ और भी बढ़ा दिए. दाद्दु को पता था, सिमरन गन चलने में एक्सपर्ट है, जितनी ग़ुस्से वाली है, उतनी hi गन के मामले में एक्टिव भी है.

सिमरन-- उस हरामी ने.. सिमरण रुक गई.

दाद्दु-- हाँ उस हरामी ने.. आगे बोलो सिमरन बेटी.. दूसरे सब भी सिमरन के हाथ में मौजूद दोनाली बंदूक की टेंशन न लेते हुए सस्पेंस में आ गए. सब जानना चाहते, सिरमन किस की और किसी बात करने वाली है.

सिमरन ने एक नज़र सबको फिर दाद्दु को देखा.

सिमरन-- चीखते हुए.. मैं गोली मार दूंगी दाद्दु आपको और सबको भी. बहार मेरी इतनी इंसल्ट हुई है और आप सब हाँ कह मेरी इंसल्ट पर भी सीरियस नहीं हाँ. मुझे ऐसे देख रहे हाँ. जैसे मेरी बात की कोई अहमियत hi न हो. सिमरन दहाड़ते हुए बोली.. सिमरन की दहाड़ पे सिमरन की मम्मी ने अपनी होंटो को दबा के बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी को काबू में किया.

मम्मी-- सिमरन बेटी पूरी बात बता न... सिमरन ने अपनी मम्मी को देखा, उसके भाव देखे तोह ग़ुस्से से दाद्दु के सीने से नाल हटा के अपनी मम्मी की और करदी... मम्मी फ़ौरन hi अपनी देवरानी के पीछे जा छुपी.

सिमरन- किसको पहले जानना है. वह खुल के बताये मुझे. सब इंकार में सर हिलने लगे. ऑंखें सबकी मुस्कुरा रही थी. सिमरन ने सबकी आँखों में देखा.. फिर दोनाली बंदूक को ग़ुस्से से निचे फ़ेंक दिए.

सिमरन-- एक तोह उस हरामी लड़के ने बीच सड़क पर मुझे किश कर दी. ऊपर से आप सब मुझपर हस्स रहे थे. सिमरन का ग़ुस्सा दुःख में बदलने लगा.

सब के मोह से निकला. kyaaaaaaaaaaaaaaa

और दाद्दु बोले-- वाह्ह्ह मेरी शेरनी बेटी में भी कोई शेर आ गया है. इसका मतलब मेरी बरसों की चितना अब ख़तम होने वाली है.. दाद्दु ऊपर देख के भगवन को थैंक्स बोलने लगे. और सिमरन दाद्दु की बात पर फिरसे ग़ुस्से में आते हुए दोनाली उठा के दाद्दु के सीने पर लगा के दबा दी.

सिमरन-- उससे पहले hi मैं उस बरतर को जान से जान दूंगी. अगर आपके रखे हुए पालतू किसी काम के होते तो अब तक उसकी लाश वही सड़क पर पड़ी होती. पर सब के सब नाकारा हाँ.. बिलकुल आपकी तरह..

दाद्दु-- ेंन! मैं नाकारा कबसे हो गया. दाद्दु भोलेपन से बोले तोह सिमरन पेअर पटखते हुए दोनाली फ़ेंक कर अंदर जाने लगी.

दाद्दु अपने होंटो दबा के सिमरन को जाते हुए देखने लगे. सिमरन के जाने के बाद सब दाद्दु के पास जमा हो गए.

दादी-- सहकर है भगवन का हमारी सिमरन की ज़िन्दगी में कोई तोह ऐसा आया. जो इसकी टक्कर का है. वर्ण तोह पूरा शहर hi हमसे और सिमरन से 10 कदम दूर रहता है.

दाद्दु ने नौकरो को बुलवाया और साडी बात सुनी. साड़ी बात सुनके दाद्दु खुल कर हसने लगे और बाकि सब मोह में हाथ रख के हेरात का इज़हार करने लगा.

दाद्दु-- ऐसा hi शेर जवान मुझे अपनी पोती के लिए चाहिए. सुनो उस इलाके के कक्तव की वीडियो निकल कर उस लड़की की फोटो मुझे ला के दो. मुझे उस लड़के से मिलना है. ऐसे हीरे लड़के से मैं जल्द से जल्द मिल लेना चाहता हों.

कोई भी राज के सिमरन को किश करने पर बुरा महसूस नहीं कर पाया था. सब तोह जान के बहुत खुश थे. वर्ण तोह सिमरन हमेशा hi मर्दों से दूर रहने की आदि थी. खंडन का, शहर का कोई भी लड़का सिमरन अपने पास भी फटकने नहीं देती थी. सिमरन ने खुले लफ़्ज़ों में शादी से इंकार कर दिए था.

सिमरन और टाइप की लड़की थी. राज ने उसकी ज़िन्दगी में एंट्री मार के सिमरन की लाइफ में हलचल मचा दी थी. तोह सब सिमरन की लाइफ के इस इंसिडेंट पर बहुत खुश थे. फ़ौरन hi सिमरन के पापा और भाइयो को खबर दी गई तो वह भी सब सुनके हांसे भी और चैन की साँस भी ली. वर्ण सिमरन के लिए बड़े परेशां थे.

पुरे खंडन में कोई भी सिमरन की टक्कर का नहीं था और सिमरन पुरे परिवार के साथ, पुरे खंडन की लाड़ली भी थी.

सिमरन अपने कमरे में शीशे के सामने कड़ी अपने होंटो को रगड़ रही thi.usay अभी के राज के होंटो की तपिश फील हो रही थी. सिमरन मस्त होने की बजाये और भी ज़यादा ग़ुस्से में आती जा रही थी. और कसम खा रही रही राज का वह ऐसा हाल करेगी, राज उम्र भर याद रखे..
 
राज मस्त मूड में नाना के घर जा पोहचा. राज सिमरन के अपनी ज़िन्दगी में आ जाने से बहुत खुश था. छोड़ने के लिए कोई भी उसकी ज़िन्दगी में आ जाती राज को ज़यादा फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला था. राज को सिमरन अपनी ज़िन्दगी के देखि अब तक की लड़ियों में सबसे अलग लड़की लगी थी. उम्र में उससे बड़ी भी थी, पर राज ने इस बात को दिमाग से झटक दिए था. राज ने तय कर लिया था, कुछ भी करना पड़े वह सिमरन को हाथ से जाने नहीं देगा. हमेशा के लिए उसे रानी बना के रहेगा.

राज नाना के घर पोहंचा तोह नाना और नानी ताज को देख के खुश हो गए. क्युकी राज भी बहुत खुश था. राज को खुश देख के दोनों खुश हो गए थे.

नानी-- राज बीटा आज तुम बहुत खुश दिख रहे हो. राज आगे बढ़ा और नानी नाना दोनों के पाऊँ छू लिए.

राज-- दादी आज शहर में घुतमे समय मुझे एक लड़की दिखी, बड़े संस्कारो वाली, बड़ी hi सूंदर सी लड़की थी. उसे देख के मैं खुश हो गया मेरा. राज बात को बदलते हुए बोलै. नाना और नानी राज की बात पर है पड़े.

नाना-- राज बीटा उसे साथ hi लेते आना था, हम भी तोह देखते संस्कारो वाली लड़की.

नानी-- मुझे तोह लगता है शर्मा जी राज बेटे का दिल आ गया है उस लड़की पर.

नाना-- राज बीटा दिल आना बुरी बात नहीं है. ऐसा होता रहता है, पर--

राज नाना की बात टोकते हुए-- दाद्दु मैंने कहा न उसे बस देखा hi था. सुनने में आया है कोई राकेश वर्मा हाँ इस शहर के बहुत बड़े बिजनेसमैन उनकी पोती है.

नाना-- राकेश वर्मा.. वह तोह बहुत बड़े और बहुत अच्छे इंसान हाँ. कई बार उनका ज़िक्र सुना है. सच में राज बीटा वह बड़े संस्कारो वाले हाँ.

नानी-- इतने बड़े घर की बेटी तुझे भाई है राज बीटा. नानी राज को स्माइल से देखने लगी. फिर तोह तेरी वहां दाल नहीं गलेगी..

नाना भी हस्ते हुए.. बिलकुल नहीं गलेगी. वह खड़ी लोग हाँ, ऐसे तोह नहीं देंगे अपनी बेटी का हाथ किसी के भी हाथ में और फिर राज बीटा तो अभी पढ़ रहा है, उम्र hi कितनी है उसकी.

राज-- अरे दाद्दु मैं कोई बच्चा थोड़ी न हों. और फिर मैं कोनसा शादी करने जा रहा हों उससे. मैंने तोह बस इतना hi कहा उसे देख के मैं खुश हो गया था.

नानी-- और सुना शहर में क्या कुछ देख के आया है और ये बाइक किसकी है.

राज-- ये बाइक.. राज नाना और नानी को देखने लगा. दाद्दु शहर में जाते हुए मुझे नेहा और उसकी दोस्त नैना मिल गई थी. दोनों अपनी किसी फ्रेंड के पास जा रही थी. उसके पास फालतू थी तोह मैंने पैसे दे के ले ली. राज झूट बोलने पे आया तोह बोलता hi चला गया, भूल गया, अगर झूट पकड़ा गया तोह उसके बूढ़े नाना नानी के दिल को कितनी ठेस पुहंचेगी. टूटे घर को जोड़ने के लिए भी झूट बोलना hi पड़ता है. पर यहाँ तो राज के लिए हालत किसी समय भी संगीन सूरत अख्तियार कर सकते थे.

नाना-- तुम उसी इतनी जल्दी कैसे जान गए.

नानी-- कल तुम आये हो और आज उसे मिलके उसकी दोस्त के घर भी चले गए.

राज-- जैसे आप दोनों को फ़ौरन hi अपन बना लिया था न, उसी तरह उन दोनों के साथ भी दोस्ती कर ली. बहुत सी बातें भी हुई थी हमारे बीच दादी. देखना आज किसी समय नेहा आएगी और आपसे माफ़ी भी मांगेगी. अब से आप दोनों उसे बदला हुआ भी देखेंगे.

दोनों राज की बात पे हैरान रह गए.

राज का कहा सच हुआ शाम के बाद नेहा संस्कारी लिबास में सर पे दुपट्टा लिया हुए पोहंच गई. राज ने फोन करके नेहा को ऐसा सब करने को बोल दिए था. नेहा तोह राज की कोई भी बात ताल नहीं सकती थी.

दोनों नेहा को बदले देख के बड़े हैरान हुए, बड़े खुश भी हुए. रत को राज फिरसे दोनों के पाऊँ एक साथ दबाते हुए बातें कर रहा था. दोनों आज राज से और भी ज़यादा खुश हो गए थे. नेहा के कारण उनकी ख़ुशी और भी बढ़ गई थी. राज ने और भी खूब बातें की दोनों से. फिर राज सोने के लिए अपने कमरे में चला गया.

घर में सब से बात की. सबको नाना नानी और सरे हालत बता दिए. सब जान के बड़े दुखी हुए थे. आराधना तो रोने लगी थी. उसके कारण कितना कुछ बिगड़ क्र रह गया था.

अंजलि ने वह बात कर दी थी राज से, जिसे सुनके सबके मोह खुले रह गए थे राज समेत.

अंजलि-- देख राज तू हमेशा hi मुझे और सब को परेशान करता रहा है. तूने हम सब के साथ हर घट्टिया हरकत करि है, पर आखरी हद तुमने कभी क्रॉस नहीं की. अंजलि रुकी और कुछ शर्मा गई. सब उसे देख के कुछ हैरान हुए. अंजलि फिर आगे बोली. राज मेरे भाई जैसे हालत बिगड़ चुके हाँ, ऐसे बिगड़े हालत को तुम अगर सही कर देते हो तो इनाम के तौर पे मैं तुमने अपना सब कुछ दे दूंगी. वो सब कुछ जो एक पत्नी अपने पति के लिए बचा के रखती है. अंजलि की बात पे राज का मोह रज़ाई के अंदर hi खुला का खुला रह गया. वह कुछ बोल नहीं सका.

वहां भी अंजलि के गिर्द मौजूद सब भी अंजलि को मोह फाड़े देखने लगी थी. आरती बोली. दीदी आप होश में तो हाँ न.

अंजलि-- पता नहीं आरती, पर मैंने ठान लिया है, अगर मेरा भाई माँ के दर्द को काम करता है, सब बिखरे परिवार को एक करता है तोह उसे ऐसा इनाम मिलना hi चाहिए और फिर.....

भावना भरी सांसो के साथ बलि... और क्या दीदी..

अंजलि सबको देखते हुए बोली... और एक सच ये भी है कह.. अंजलि फिर से चुप क्र गई. अरधा जो पहले रो रही थी. वह भी अंजलि की बातों में अपना रोना भूल गई थी. वो भी अंजलि की बातों पर शॉकेड हो गई थी. दीपिका की हालत तोह सबसे ज़्यादा ख़राब थी. राज से सबसे ज़्यादा उसे hi परेशान किया था.

अंजलि-- राज हमारा भाई होने के साथ साथ हमारे लिए एक हीरो भी है. न चाहते हुए भी राज के लिए मेरे दिल में वैसी फीलिंग जनम ले चुकी थी. पर मैंने कभी शो नहीं करवाया.

kyaaaaaaaaaaaaaa... सब एक साथ बोली तोह अंजलि शर्मा गई. और हाँ में सर हिलने लगी.

आराधना-- अंजलि मेरी बेटी तुम तो मुझे हार्ट अटैक hi देने पे टूल गई हो.

अंजलि-- क्यों माँ आप नहीं राज के लिए ऐसा सब सोचती. बस बीटा समझ के दूर दूर भगति है. वर्ण तो आप भी राज के लिए अक्सर तदपि हाँ. अंजलि की बात सुनके आराधना शर्म से निगाहें फेर गई.

राज सब सुनके शॉकेड भी था और बहुत खुश भी. एक सच ये भी था, राज अपनी सभी बहनो के साथ पहली बार hi नहीं हमेशा hi रिलेशन में रहना चाहता था. पर छेड़ छड़ से आगे नहीं बढ़ा था. किसी का दिल नहीं तोडना चाहता था राज.

राज-- और मैं खुद को हमेशा खुश नसीब समझता रहूँगा दीदी अगर मुझे ऐसा सब प्राप्त होता है तोह. कसम से दीदी आप सबके जैसी कोई भी नहीं है. अरे हाँ एक बात तोह मैं आप सब को बताना भूल hi गया.

सबकी मस्ती और शर्म पल भर में हवा हुई और सब एक साथ बोल पड़ी. क्या बात है राज

राज-- माँ आपके लिए मैंने एक बहु और दीदी आप सब के लिए एक स्पेशल किसम की भाभी भी देख ली है. कसम से इतनी सुन्दर और दुन्या भर की लड़कियों से अलग है कह क्या hi बताओं मैं उसके बारे में.

सब बड़े शोक से राज की ये बात सुनंने लगी.

आराधना-- बड़ी मिठास के साथ बोली.. कैसी है मेरी होने वाली बहु राज बीटा.

राज फिर जो हुआ वह सब सच सच बताने लगा. सब सुनके खुश भी हुई तोह दीपिका ने राज को गाली दे दी. साले तू हर जगा हरामीपन hi करता रहेगा. इतनी अच्छी भाभी को तुम अपनी ऐसी hi हरकतों के कारण खो बैठोगे.

राज-- हस्ता हुआ.. मेरे दाम से कभी कोई निकल सकता है मेरी डार्लिंग दीदी.

आराधना-- राज बीटा सिमरन के मामले में धयान से रहना. और माँ और पापा का ख्याल रखें. आराधन फिरसे ग़मगीन हो गई. ऐसी hi बातें कुछ देर और चली फिर राज ने कॉल कट कर दी. और सो गया..

राज सोने से पहले नानी बारे सोचने लगा. कुछ तोह प्लान करना hi पड़ेगा. वर्ण कभी खेल बिगड़ा तो नाना नानी उसे धक्के मार कर घर से निकल देंगे. उससे पहले hi नानी को अपने दाम में लाना होगा. बहुत सोचने के बाद राज कमरे से निकला और किचन में जा के पियाज़ लिए उन्हें काट के कमरे में रखा और बहार जा के नाहा लिया. सर्दी के मौसम में ठन्डे पानी से नहाने के बाद राज को सच में hi अपनी नानी याद आ गई. राज सर्दी में थार थार कांपने लगा.

नाना नानी सुकून से अपने कमरे में सोते रहे और राज सर्दी में गीला hi सेहेन में खड़ा रहा. ऐसी जगा जहाँ कोई पडोसी उसे देख न सके.. आधे घंटे बाद राज थार थार काँपता हुआ अंदर कमरे में घुसा और पियास काट के अपनी बग़लों में दबा दिए. राज को लगा ऐसे उसकी तबीयत ज़रूर कुछ बिगड़ जायेगी.. राज ने रज़ाई भी अपने ऊपर नहीं ली और ऐसे hi सो गया..

नींद तोह उसे नहीं आयी पर बुखार ज़रूर आ गया. राज हरामी का टोटका काम कर गया था. सुबह तक राज सर्दी और बुखार में तड़पता रहा.

सुबह नानी ने दरवाज़ा खटखटाया तोह राज कमरे में सब देख भाल के दरवाज़ा खोलने लगा. नानी ने राज को कांपते देखा तोह परेशान हो गई. राज के माथे पे हाथ रखा तोह चीख पड़ी. नाना भी आ गया, उसे पता चला तोह वह भी परेशान हो गए.

नानी-- चलो हॉस्पिटल चलते हाँ.

राज-- नहीं दादी मैं यही ठीक हों.

नाना--- खाक ठीक हो तुम. सूरत से hi बरसों के बीमार दिख रहे हो. राज को लेके दोनों पास के सरकारी हॉस्पिटल ले गए वहां से मेडिसिन लेके घर आ गए. राज की खिदमत नाना नानी दोनों मिलके करने लगे.

राज नानी के सामने दवाई लेना का नाटक करता पर दवाई नहीं ली उसने. राज अभी दो दिन ठीक नहीं होना चाहता था. वर्ण तोह डॉक्टर ने कह दिए था एक hi दिन में ठीक हो जायेगा, ज़यादा मसला नहीं है. राज का टोटका ज़यादा जानदार सबत नहीं हुआ था. पर इसी बीच राज को अपना काम भी करना था.

दिन बीता पर राज ठीक नहीं हुआ. नेहा भी एक बार चक्कर लगा गई थी वो भी राज की बीमारी जान कर कुछ परेशान हो गई थी. राज ने उसे कुछ महसूस नहीं होने दिए.

नाना नानी ने कहा भी फिर डॉक्टर को दिखा देते हाँ. पर राज ने मन कर दिया. राज बड़ी हिम्मत से दिन भर नहीं सोया. नानी सारा दिन उसके साथ रही. रत हुई तोह राज को अपने हथु से नानी ने खाना खिलाया. सोने के टाइम पे राज ने सोने का नाटक किया और नानी के हाथ को सख्ती से थाम के सो गया.

नानी राज के साथ खटिया पर बैठी हुई थी और नाना कुर्सी पर. नानी उठने लगी तोह पता चला राज ने नानी का हाथ सख्ती से पकड़ा हुआ है.

नानी पेरशान हो गई नाना ने देखा तोह नानी बोल पड़ी. अब्ब क्या करूँ शर्मा जी, हाथ छुड़ाया तोह राज बेटे की नींद टूट जाएगी.

नाना भी ये देख के कुछ परेशान हुए. सोचते रहे, फिर वो बोले. मल्टी तुम राज के पास hi सो लो.

नानी हैरान हो के-- ये कैसे बात कर रहे हाँ आप शमरा जी. में कैसे यहाँ सो सकती हों. राज सब सुन रहा था. मन में वह बोलै, नानी तुम मेरे साथ सोयोगी नहीं तोह मेरा काम कैसे होगा.

नाना-- क्यों कुछ परेशान बन जाएगी क्या राज बेटे से...

नानी-- नं. नहीं मैंने ये तो नहीं कहा. राज मेरे लिए मेरे पोते सम्मान hi है. मैं क्यों ऐसा सोचने लगी.

नाना-- देखो मल्टी ज़्यादा परेशान की बात नहीं है. राज बहुत अच्छा बीटा है, हाथ छुओगी तोह उसकी नींद ख़राब होगी. कहीं उसकी सेहत और न बिगड़ जाए.

नानी ने मजबूरन हाँ करनी पड़ी. नाना उठ के चले गए. दरवाज़े के दोनों पैट बंद करके वह अपने कमरे में चले गए और नानी को आज़माइश में दाल गए. नानी राज को तोह कभी अपने हाथ को देखने लगी. नानी कुछ देर बैठी रही, फिर उसे ठण्ड लगने लगी तोह वह राज के साथ रज़ाई में घुस गई. राज नाना के जाते hi फिरसे कांपने लगा था. बेहोशी जैसा अंदाज़ अख्तियार किये हुए बड़बड़ा भी रहा था. नानी ने राज को करीब से देखा तोह राज पूरी तरह नींद में था. नानी को राज के साथ लेटने में बड़ी परेशान हो रही थी. वह कुछ घबराई हुई थी.

कुछ देर ऐसे hi गुज़री तोह नानी को नींद आने लगी. राज ने अपने एक पेअर नानी की ऊपर रख दिए. नानी की नींद फ़ौरन hi टूट गई, कमरे की लाइट ों थी, नानी राज को देखने लगी. कहीं राज नाटक तो नहीं कर रहा. पर नानी को कोण बताता राज हरामियों का हरामी था. नानी कभी रहत की सांस लेती तोह कभी भरी सांस. कुछ देर में जब राज ने अपना एक हाथ नानी के चुके से कुछ निचे रखा तो नानी को अपनी सांस अटकती हुई महसूस होने लगी. नानी परेशान निघून से राज को देखने लगी. राज गहरी नींद में था. ऐसा नानी को लग रहा था. राज खुद कुछ कुछ काँप रहा था, पर उसका लुंड धीरे धीरे नानी के जिस्म की गर्मी पा के खड़ा हो रहा था.

नानी ने राज के लुंड को अपनी जांग पर हरकत करते पाया तोह नानी बोल पड़ी.

नानी-- राज.. राज बीटा.. राज.. राज बीटा.. पर राज तोह बेहोशी वाली नींद में था. कहाँ वह नानी की बात सुनता. सुन तोह राज का लुंड भी नहीं रहा था.

राज गहरी नींद में था पर उसका लुंड पूरी तरह से जाएगा हुआ, परइ तरह से एक्टिव. राज मस्त होने लगा और नानी की शरीर में सनसनी बढ़ने लगी.
 
नानी ने सोचा भी नहीं था ऐसा कुछ भी हो सकता है. राज को आवाज़ दी, पर राज तो सोया हुआ था. राज ने कुछ देर बाद नानी को कमर से पकड़ा और सीने से लगा दिए. पहले राज करवट पे बल था और नानी सीधी लेती हुई थी.

अब राज ने नानी को भी करवट पर कर दिए तो राज का लुंड नानी की छूट पर ठोकरें मरने लगा, साथ hi राज नानी को भींच भी रहा था. नानी के चुके राज के सीने में दबने लगे. नानी का चेहरे राज के चेहरे के बराबर था. नानी की तो साँस hi ऐसे चलने लगी, जैसी 100 मिले दौड़ क ै हो. नानी राज के लुंड को अपनी छूट पे प् के मचलने लगी. राज भी नहीं रुका और बड़बड़ाते हुए नानी को बार बार भींचते लगा.

नानी तेज़ चल रही सांसो के साथ राज को hi देख रही थी. राज ऐसे सोया था, नानी को शक hi नहीं हुआ, राज नाटक कर रहा है. नानी तो गलत राज के शिकंजे में फँसी हुई थी.

नानी-- राज बीटा उठो देखो तोह तुम क्या कर रहे हो. देखो राज बीटा ये सब कितना गलत है. नानी न चाहते हुए भी मस्त होने लगी थी. पहले राज ने नानी का हाथ कास के पकड़ा हुआ था. अब पूरी नानी राज की पकड़ में थी. साथ hi राज का गरमा गर्म लुंड भी नानी की छूट पर लगा हुआ था. नानी ने कुछ देर कोशिश करि राज को उठाने की, पर राज नहीं उठा.

बहुत देर ऐसे hi रहा, नानी की छूट भी रिसने लगी. नानी बड़ी परेशान हो गई थी. राज का हाथ कमर पर धरा हाथ नानी की कमीज़ में घुसा और नानी की पीठ को सहलाने लगा. नानी को मज़ा भी आ रहा था और बोहत ज़यादा ग़ुस्सा भी. कभी नानी का मैं करता राज को खेंच के एक थप्पड़ मार दे. पर वो ऐसा नहीं कर सकीय. वो समझ रही थी, राज नींद में ऐसा सब कर रहा है. मजबूरन नानी राज की गुस्ताखी बर्दाष्त करने लगी.

राज कहाँ रुकने वाला था. धीरे धीरे राज ने नानी को इतना गर्म कर दिए, नानी मस्त होने लगी. नानी को पता hi नहीं चला कब राज का लुंड उसके ट्रॉउज़र के अंदर से निकला और नंगा hi नानी की छूट पर चुभने लगा. राज ने नानी का एक हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रख दिया. नानी धयान नहीं दे पाई. 40 मिंट के चले इस खेल में नानी बहुत कुछ भूलने लगी थी. नानी शायद नाना की यादों खो गई थी. नानी खुद से राज के लुंड को मसलने लगी और राज नानी के चुके दबाने लगा. धीरे धीरे नानी बेखुद होती चली गई. नानी राज के लुंड को ज़ोर ज़ोर से मसलते हुए अपनी छूट पे रगड़ने लगी.

कुछ देर में नानी सहन न कर पाई और राज को सख्ती से भींच के अपनी बूढी छूट का पानी निकलने लगी. राज ने अपने लुंड को ट्रॉउज़र में कैद नहीं किया. राज ऐसे hi नानी को हुग किये सोया रहा.

कुछ देर में नानी को होश आई तोह वो एक झटके में राज से अलग हुई, रज़ाई हटा के निचे उत्तरी और राज को देखने लगी. राज के खड़े लुंड पर नज़र पड़ी, लुंड पर अपनी छूट का पानी लगा देख के नानी को बड़ा ग़ुस्सा आया. वह यही समझी गलती से उसने hi राज के लुंड को ट्रॉउज़र से निकल दिए है. नानी का मैं तोह किया राज को एक थप्पड़ मार दे. पर ऐसा कर न सकीय. नानी अपनी कमीज़ हटा के अपनी गीली छूट को देखने लगी. इस उम्र में पंतय तोह नानी पेहनतनी नहीं थी. पूरी शलवार चुतरस से भरी हुई थी. नानी को ये याद नहीं रहा था, राज ने सब अपनी मर्ज़ी से किया है राज नींद में. राज का लुंड राज ने खुद निकला है या वह गर्म होने के बाद होश खो कर खुद से निकल गई है.

नानी बड़ी परेशानी से राज को देखने लगी. राज को फिरसे ठण्ड लगी तोह राज ने अपनी ऑंखें खोल दी. राज नानी को खड़े देख कर अपने लुंड पर धयान न देते हुए उसी हालत में निचे उतर के नानी को हुग कर लिया. राज का खड़ा लुंड फिरसे नानी की छूट पर दबने लगा. राज पूरा पूरा नाटक कर रहा था.

राज-- दादी आप गई नहीं अभी तक अपने कमरे में. राज कांपते हुए बोलै. नानी बड़े धयान से राज के चेहरे के भाव देख रही थी. नानी को राज के चेहरे पर कुछ दिखा तोह बस मासूमियत hi. नानी ने एक लम्बी सांस ली और राज से बोली. राज बीटा पहले अपने निचे धयान दो. राज सब जनता था उसका लुंड पूरा अकार के साथ नानी की छूट पर डाब रहा था. पर राज तोह भोला बना नानी को हुग किये खड़े था.

राज-- कहाँ धयान डॉन दादी. चलें मैं आपको आपके कमरे तक छोड़ के आता है. राज को सर्दी तोह सच में hi लग रही थी. नानी को राज पर इस हालत में भी बड़ा प्यार आने लगा. राज कितना भोला और कितना मासूम है. खड़े लुंड के साथ भी उसे होश नहीं है. वर्ण लुंड खड़ा और एक औरत की छूट पे धरा हो तोह कोई भी खुद पर काबू खो सकता था. पर यहाँ तोह नानी कुछ देर पहले खुद पर काबू भूल गई थी. ऐसा नानी सोच रही थी. नानी का राज पर विश्वास और भी गहरा होने लगा.

नानी-- राज बीटा मुझे निचे से कुछ चुभ रहा है.

राज -- अच्छा क्या चुभ रहा है आपको. राज ने नानी को छोड़ा और निचे देखने लगा. अपने लुंड पर नज़र पड़ी तोह राज लडखडे की एक्टिंग करने लगा. नानी बड़े धयान से राज देख रही थी. राज के बड़े लुंड को देख के एक बार वह हैरान तो हुई थी. पर उसने कोनसा लेना था, या लेने की छह थी तोह फिरसे शोक से देखती. राज अपने लुंड को देख के शॉकेड हो गया. फिर राज ग़ुस्से में आने लगा.

राज-- आठ में मैं कितना घट्टिया निकल दादी. अपनी दादी के साथ के साथ ऐसा कैसे कर सकता हों मैं. राज गुलिटी वाले भाव अपने चेहरे पे लेट हुए बोलै. राज ने फ़ौरन hi अपना बैग पकड़ा और अपने कपडे बैग में डालने लगा..

नानी-- राज बीटा ये क्या कर रहे हो.

राज-- नहीं दादी मैं यहाँ नहीं रहूँगा. मैं यहाँ से चला जाऊँगा दादी. कैसे मैं अपनी hi नज़रों में गिरने के बाद यहाँ रह सकता हों. राज कंपनता हुआ बैग में कपडे डालने लगा. राज ने अपना लुंड ट्रॉउज़र में नहीं किया था.

नानी ने राज से बैग छीना और राज से बोली. तुम कहीं नहीं जाओगे. तुम यही रहोगे.

राज-- नहीं दादी में आज hi पता चला दादी मैं कितना गलत हों. मई यहाँ रहा तोह फिरसे कोई ऐसी hi घट्टिया हरकत कर जाऊँगा.

नानी-- फिर भी तुम यहाँ से नहीं जाओगे. मैं तुम्हे नहीं जाने दूंगी.

राज-- नहीं दादी मई यहाँ.. मई यहाँ.. राज इतना बोल के थार थार कांपते हुए बिस्तर पे गिर गया. नानी राज की हालत देख के और भी परेशान हो गई. राज ऑंखें बंद किये भयंकर कंपनी लगा था.

नानी फ़ौरन राज के साथ लेट के ऊपर रज़ाई कर गई और राज को अपने सीने के साथ लगा लिया. इस बार राज का लुंड नानी की छूट पर और भी अच्छे से चुभ रहा था. पर नानी ने धयान नहीं दिए. नानी राज को हीट देने की कोशिश करने लगी. पर नानी तोह एक बार झड़ने के बाद ठंडी हो चुकी थी. राज के गर्म लुंड ने थोड़ी देर बाद फिरसे नानी को गर्म करना शुरू कर दिए. राज की कपकपी काम होने लगी. नानी को राज की ऑर्डर से सुख मिला तोह राज के लुंड की ऑर्डर से परेशानी बढ़ने लगी.

नानी सोचने लगी कहीं मैं ये सब गलत तोह नहीं कर रही. कहीं बात बढ़ कर कोई भयानक रुख न अख्तियार कर ले. नानी ये सब सोचते हुए भी दर रही थी. और राज फिरसे बेहोशी का नाटक करते इस बार नानी के साथ कुछ और भी चिपक गया था. नानी साडी राज नहीं सो पाई और राज का लुंड भी एक बार नानी की छूट पर अपनी पानी छोड़ के फिरसे खड़ा होने के बाद नानी की परेशान करने लगा. नानी तोह पूरी रात बार बार चुतरस बहाने लगी. न चाहते हुए भी नानी को मज़ा आने लगा था. इतने घंटो तक नानी ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में ऐसे मज़े नहीं लिए थे. लिए थे तोह बस कुछ मिंटो के लिए थे. राज के लुंड की गर्मी और लम्बाई मोटाई पर भी अब नानी बहुत धयान दे रही थी.

कई घंटो की बीती इस रात ने नानी के अंदर हलचल मचा के रख दी थी. पहले 2 घंटे के बाद नानी सुबह तक अपने मैं से राज के लुंड के मज़े लेने पे मजबूर हो गई थी. कोण महिला इतने घंटों तक खुद पर काबू पा सकती थी. नानी उतनी संस्कारी नहीं थी, जितना नाना थे. नानी तोह अपने पतिदेव के साथ चलने पर मजबूर थी. राज के लुंड ने नानी की छूट पर अपना माल छोड़ा और नानी की छूट से कई बार पानी निकला, नानी की शलवार ऐसे हो गई थी, जैसे किसी ने गम की पूरी बोतल hi खली कर दी हो.

नानी सुबह जल्दी उठी और अपने कमरे में जा के कपडे लेकर बाथरूम में घुस गई. गरम पानी से नहाते हुए नानी ने बरसों बाद अपनी छूट को भी साफ़ किया और कुछ देर अपनी छूट के साथ खेलती भी रही. नानी के होंटो पर मुस्कान थी तोह सोचों में हलचल. नानी को सब गलत लगते हुए भी बहुत अच्छा भी लग रहा था. सर्दियों की रातें लाबी होती है. एक hi लम्बी रात ने नानी को फिरसे जवान बना दिए था.

नानी नहाने के बाद अपने कमरे में जा के नाना को उठाने लगी. नानी का फ्रेश चेहरा देख के नाना ने नानी को अपने ऊपर गिरा लिया.

नाना-- मल्टी आज कैसे सुबह सुबह तुम चमक रही हो. खैर तोह है न.

नानी-- क्या करते हाँ आप, घर में एक मर्द भी है, दरवाज़ा खुला है, कहीं वह आ गया तोह. नानी शर्माने लगी.

नाना-- हाहाहा इस उम्र में अब मुझसे कैसे दर.. अब तोह मैं और मेरा घोडा दोनों hi थक चुके हाँ. नाना नानी के गलों पे हाथ फेरते हुए बोले.

नानी-- मैं में.. पर राज बेटे का घोडा 100 साल तक भी नहीं थकने वाला शर्मा जी. नानी उठी और कमरे से बहार निकल पड़ी. नाना भी उठा और बहार जा के फ्रेश होने लगा. नाना नहीं जानते थे उसकी पत्नी के अंदर का मौसम एक हरामी ने एक hi रत में बदल कर रख दिए था. सालों से सूखी ज़मीन से रत भर पानी निकलता रहा है. अब वह अंदर से हरी भरी हो गई थी. और जो हरी भरी हो जाए, फिर उसके अंदर भी मन चाहे जज़्बात जनम लेने लगते हाँ.

नानी भी किचन में धीमे लहजे में गुनगुनाते हुए चाय बनाने लगी. नानी खुद भी नहीं जानती थी उनके होंठ गुनगुना रहे हाँ.

नाना किचन में दाखिल हुए तोह बोले.. मतली आज तोह बड़ी बदली हुई लग रही हो. नानी ने पलट के अपने पति को देखा तोह स्माइल से बात करने लगी.

नानी-- पता नहीं क्यों शर्मा जी पर मन बड़ा खुश है मेरा. नानी बात बदल गई.

नाना-- ये सब राज बेटे के कारण है न. नाना एक स्टूल पे बैठते हुए बोले. नानी राज के साथ बीती रत के सभी पलों को एक hi पल में याद करते हुए.. हाँ शर्मा जी भगवन ने राज को हमारी ज़िन्दगी में भेज के हमारे सूने पैन को ख़तम कर दिए है.

नाना-- हम्म्म ये भी सही कहा तुमने मल्टी. अब केसा है राज बीटा. नानी चिंता में डूबी हुई बोली. रात भर बहुत हालत ख़राब रही है राज बेटे की. मैं में.. और मेरी भी ख़राब किये राखी है उस के हरामी डंडे ने.

नाना-- परेशान होक. अच्छा अब किसी तबियत है राज बेटे की.

नानी-- अब सुकून से सो रहा है.

नाना-- उसे सोने देना, खुद से उठे तोह सही रहेगा. नानी ने चाय बना के एक कप नाना को दिए दूसरा खुद थाम के चाय के कप में घूरने लगी. रात कितनी खतरनाक, कितनी भयंकर, कितनी सुकून वाली, कितनी मस्त थी मेरे लिए. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ एक hi रत ने किसी हलचल मचा दी है मेरे अंदर. पहले मुझे कितना बुरा लगा था, फिर कितना अच्छा लगने लगा. कितनी पानी भी निकला है मेरा. कितनी अंदर से हलकी हो गई हों में. ऐसा लग रहा है, जैसे बरसों गार्ड में रहने के बाद मैं आज पुरे मैं से नहीं हों.

फिर सोचने लगी. नहीं, ऐसे तोह बहुत कुछ गलत हो जायेगा. कहीं बात बढ़ न जाए. राज बीटा कहीं फिरसे खुद को गिल्ट में पा के यहाँ से भाग न जाए. रत कितनी कितनी हालत ख़राब हो गई थी उसकी. सब जान के कैसे एक पल भी यहाँ रुकने को त्यार नहीं था. नहीं मैं राज को कहीं नहीं जाने दूंगी.

अगर राज न गया तोह मैं कैसे अब खुद पे काबू रख पाऊँगी. मुझे भी तोह अब राज के छूने से सुकून माइन लगा है. मैं भी तो अब राज के साथ ऐसे hi कई और लम्हे जीने के लिए मचल रही हों. उफ्फ्फ मैं शर्मा के साथ गद्दारी कैसे कर सकती हों. इस उम्र में भी मुझे ऐसे लम्हो की छह क्यों होने लगी. पिछले 6 साल से शर्मा जी ने एक बार में भी मेरा पानी निकल के मुझे शांत नहीं किया. फिर भी मैं खुद पे काबू पाए हुए हों. अब क्यों ऐसी बनने लगी हों मई. अब क्यों मेरा फिरसे उन्ही लम्हों को जीने का मैं करने लगा है. नहीं ये सब बहुत गलत है. राज भी यहाँ से चला जाएगा. शर्मा जी को पता चला तोह वो जीते जी मर जायेंगे. मई कैसे फिर शर्मा जी की नज़रों का सामना कर सुकूँगी.

राज भी मुझे चाहिए, शमरा जी भी मुझे चाहिए और अब तोह मुझे रात भर मिले हसीं लम्हे भी फिरसे प्राप्त करने की छह होने लगी है. उफ्फ्फफ्फ्फ़ मैं क्या करूँ भगवन.

नाना-- चाय को क्या घूर रही हो मतली. पहले hi सर्दी बहुत है, घूरती रहूगी तोह चाय ठंडी हो जाएगी. नानी हड़बड़ा के सीढ़ी हुई और चाय की चुस्की लेने लगी. पर उसकी सोचों से राज के साथ बिताये लम्हे कहीं जा hi नहीं रहे थे. कई घंटों तक तोह नानी ने राज के लुंड को अपनी छूट पे महसूस किया था. कैसे उसे अपने मंद से हटा सकती थी.
 
राज नानी के साथ मस्ती करते हुए सच में hi लेट नाईट सो गया था. बाद में नानी ने खुद से कितने मज़े लिए थे राज नहीं जनता था. बीमार तो वो सच में हो गया था. बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू रखते हुए राज ने रत बीते थी.

राज की आंख देर से खुली तोह राज को रत का सब यद् आने लगा. यद् आते hi राज के होंटो पर स्माइल आ गई. राज मन में बोलने लगा. नानी आप नहीं जानती मई कितना बड़ा हरामी हों जो ठान लोन वो कर के hi रहता. बड़ी मुश्किल से मैंने अपने लुंड पर काबू पाए रखा है. बड़ी मुश्किल से पूरी रत में सिर्फ एक hi बार झडा हों. पूरी hi मेरा लुंड आपकी छूट पर दबा रहा है. आपकी का पानी निकलता रहा है. मैं हार नहीं सकता नानी. अब बस जल्द hi आपकी मुन्निया में अपना मोटा लम्बा लुंड दाल के आपको हमेशा के लिए अपनी बनाना है. फिर तोह सब काम आसान हो जायेगा.

राज उठा और खिड़की खोल के पड़ोसियों की छत पर देखने लगा. आज उसे वह औरत नहीं दिखी. राज कपडे पहन के कमरे से निकल पड़ा. राज अब ठीक था. राज को देख के नानी शर्मा गई और नाना जो बच्चू को पढ़ा रहे थे. राज को देख के बोले. राज बीटा किसी तबियत है अब तम्हारी.

राज-- अब ठीक हों दाद्दु.

नाना-- अब तोह ठण्ड नहीं लग रही न राज बीटा.

राज नानी को देखते हुए.. नहीं दाद्दु दादी का प्यार प् के मेरी साडी ठण्ड दूर हो गई है. रत मेरी आंख खुली थी दाद्दु तो दादी को अपने पास देख के मुझे बड़ा सुकून मिला दाद्दु. फिर कैसे अब में बीमार रह सकता हों.

नानी शर्मा रही. और नाना खुश हो गया.

नाना-- आअज मत नहाना राज बीटा, फिरसे न बीमार पद जाओ. राज जो बाथरूम की और बढ़ने लगा था तो नाना ने चिंता दिखते हुए कहा.

राज-- दाद्दु अब में इतना भी कमज़ोर नहीं हों. अब देखना मुझे कुछ नहीं होगा. राज बाथरूम में घुसा और नाहा के बहार आ के धुप में बैठ गया.. नानी खुद पर काबू रखते हुए राज की सेवा में लग गई. राज के लिए खाना परोसने लगी.

राज नानी को देख के नोर्मल्ली रियेक्ट कर रहा था. नानी को सुकून मिला, वर्ण वह राज की आँखों के भाव देख के बहुत बेचैन हो रही थी.

ा घंटे बाद नानी अंदर गई तोह राज भी नानी के पीछे चल पड़ा. नानी अपने कमरे में घुसी तोह राज भी कमरे में आ के पीछे से नानी को हुग कर गया.

नानी- छोड़ दो न मुझे राज बीटा. तेरे दाद्दु देखेंगे तोह क्या कहेंगे.

राज-- सॉरी दादी रत मेने बहुत गलत किया था. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. में फिरसे नींद में चला गया था दादी, उसके बाद क्या हुआ, कहीं मेने फिरसे कुछ गलत तोह नहीं कर दिए न.

नानी को लगा राज बाद के बारे में कुछ नहीं जनता तोह वह बोली. नहीं राज बीटा तुम बाद में सुकून से सोये रहे हो.

राज-- पक्का न दादी.

नानी : हाँ राज बीटा. अब मुझे छोड़ दो. राज का लुंड नानी की गांड में चुभ रहा था. रजा फिरसे भोला बन गया था.

राज--- दादी मुझे और भी कई बार आपके साथ सोने का मैं है.

नानी चुप कर गई.

राज-- बोलेन न दादी. कहीं आपको दर तोह नहीं लग रहा है मुझसे. राज ने अपने लुंड का दबाओ कुछ और बढ़ाया तोह नानी रत को मिले आनंद को याद करने लगी. फिरसे नानी कुछ मस्त होने लगी. छूट तो नानी की गीली नहीं हुई पर उसे अच्छा लगने लगा.

नानी- क्यों नहीं राज बीटा. तेरे दाद्दु से में पूछूँगी.

राज ने एक किश दादी के गाल पे कर दी. दादी आप बहुत स्वीट हाँ. नानी कैंप कर रह गई. नानी का मन तोह नहीं था राज उससे अलग हो, कुछ ऐसा hi राज ने नानी के मैं को बदल कर रख दिए था. पर नाना घर पर थे और किसी समय भी आ सकते थे. नानी ने एक बार और कहा तोह राज ने नानी को छोड़ दिए और एक किश दूसरे गाल पे करके अपने कमरे में चला गे.

नानी मन में.. मई ज़रूर पागल हो जाऊँगी राज बेटे के सुपर्ष से. क्यों ऐसा होने लगा है मेरे साथ. क्यों मुझे राज का पास होना अच्छा लगने लगा है. कितना गलत है ये सब. नानी आईने के सामने पोहंची और खुद को देखने लगी. चेहरे पर भी झुर्रियां थी. बच्चू के बच्चे भी जवान हो गए थे. अब इस उम्र में ऐसे रंग आने का कोई मतलब बी नहीं बनता था.

नानी को अचानक से लगा कह उसकी छूट फिरसे कुछ गीली हो चुकी है तोह वह भाग कर घर के अंदर बने हुए एक बाथरूम में घुसी और नंगी होक अपनी छूट को देखने lagi.chut पर पानी सच में था. उफ्फ्फ पूरी रात इसकी दीवारें ने पानी बहाना नहीं छोड़ा, थोड़ा सा पीछे क्या हीट मिली मुझे आगे से फिरसे पानी आने लगा. नानी अपनी छूट को वाश करने लगी.

लगता है कुछ गलत ज़रूर होक रहेगा. क्या मोह दिखाऊँगी में मैं शर्मा जी को. नानी फिरसे कपडे पहन के बहार निकली और धुप में बैठ के अपने पीटीआई को देखने लगी. जो बड़े अच्छे मूड में बच्चू को पढ़ा रहे थे.
 
राज बहुत खुश था एक hi रात में नानी की छूट में आग लगा दी थी. अब नानी को दिन की रौशनी में पीछे से हुग किया और साथ hi अपना लुंड भी नानी की गांड पर लगाया तोह भी नानी ने कुछ नहीं कहा. राज ऐसी फ़तेह पे बहुत खुश था. जितना उसने सोचा उससे कहीं बढ़कर उसे रिजल्ट मिला था.

राज कपडे बदल के कमरे से बहार निकला. तोह नानी राज को देख के फिरसे शर्मा गई. नानी को कुछ देर पहले की अपनी गेली छूट यद् आ गई थी. राज को बहार जाते देखा तोह उठ कर राज के पास आ गई.

नानी-- कहा जा रहे हो राज बीटा.

राज-- नानी बहार घूमने जा रहा हों. क्यों

नानी- नहीं बस ऐसे hi. तुम्हारी तबियत सही नहीं है न, में तो कहती है आज कहीं मत जाओ.

नाना भी बोले.. हाँ राज बीटा आज कही मत जाओ. पूरी तरह से ठीक हो जाओ फिर चले जाना.

राज-- दाद्दु में आज दूर नहीं जाऊँगा. मोहल्ले में hi घूम के आ जाऊँगा.

नानी-- फिर ठीक है राज बीटा. राज घर से निकला और मोहल्ले के चक्कर लगाने लगा. नेहा और नैना को फिरसे छोड़ने का मैं नहीं बना था राज का. राज का मूड कुछ बदला हुआ था. राज ऐसे hi घूमता हुआ एक स्नूकर क्लब पर जा पोहंचा. वहां के लड़के राज को देख के रेस्पेक्ट देने लगे. कुछ उसे देख के हैरान ज़रूर हुए थे. राज को बहुत से लड़के जान भी गए थे.

राज- ऐसे मत देखो यार, ये खेल बुरा तो नहीं है, और तुम सब भी कोनसे बुरे लड़के हो.

राज की बात पर लड़के खुश हो गए.

एक बोलै.. भाई तुमसे मिलके अच्छा लगा. दूसरा बोलै बहुत हैंडसम भी हो तुम भाई. तीसरे हस्ते हुए बोलै. क्या फायदा ये मास्टर जी के घर रहता है, तोह ऐसी पर्सनालिटी बना के क्या मिल जायेगा. लड़कियों से तो ये दूर hi रहने वाला है.

सब उसकी बात पे हसने लगे. राज भी है पड़ा.

राज-- मुझे भी खिलाओ यार बड़ा मन कर रहा है आज. राज को सबसे अपने साथ शामिल किया और राज खेलने लगा. राज इस खेल का भी मास्टर था. निशाना और कण्ट्रोल में तो राज हर काम में बेस्ट था. स्नूकर पर कुछ देर रहा राज, जितनी देर भी रहा, राज ने किसी की नहीं चलने दी. सब राज के खेल को सराहने लगे. राज फिर वहां से चल दिए. पीछे सब लड़के राज की hi तारीफ करने लगे.

राज गलियों में घूमता हुआ घर पोहंच गया. साथ hi वह कुछ सामान भी ले गया था. बच्चे चले गए थे. नाना नानी राज को देख के खुश हो गए. राज ने सामान नानी को थमाया और नाना के पास बैठ के बातें करने लगा.

राज-- दाद्दु अब मुझे बताएं अपने बेटों और बेटियों के बारे में. कल से hi मैं इस काम को शुरू कर देना चाहता हों. जल्द से जल्द सबको आपके साथ देखना चाहता हों मैं.

नाना-- राज बीटा फिरसे सोच lo,ye काम कोई आसान काम नहीं है. बड़ी परेशानी उठानी पद सकती हाँ तुम्हे. ज़लील भी होना पद सकता है. कोण सुनेगा तुम्हारी बातें.

राज-- मैं कोनसा किसी को सुनाने की कोशिश करूंगा दाद्दु. में तू बस सब को पहले अपना बनाने की कोशिश करूँगा. फिर सबको एक साथ मिला के आपके बारे में बताऊंगा. मुझे पूरा यकीं है दाद्दु ऐसा करने से सब को बहुत अच्छे से एहसास होगा, सब कितना गलत कर चूका है आपके साथ.

नाना भी राज की बातों से जैसे खवाब जैसी कटिशन में हो गए. नानी भी सामान रख के साथ बेथ गई थी.

नानी-- राज बीटा. कुछ भी आसान नहीं है. और फिर तुम क्यों अपना टाइम वास्ते करना चाहते हो.

राज-- टाइम कहाँ वास्ते होगा दादी. मैं तोह कामयाब इंसान बन जाऊँगा. दूसरे पढ़ लिख कर, अच्छी नौकरी करके कामयाब इंसान बनते हाँ और मैं अपणु को सुख देने, उसका दर्द और तन्हाई काम करके उन्हें सुख दे के कामयाब होना चाहता हों.

राज की ऐसी hi बातों पर नाना बहुत ज़यादा खुश हुआ करते थे. अब भी वो राज को खुश होक देखने लगे.

नाना-- राज बीटा अगर ऐसी hi सोच तुम्हारी रही तोह ज़िन्दगी में कभी भी तुम फ़ैल नहीं होंगे. कामयाबी हमेशा तुम्हारा मुक़दर बनती रहेगी.

नानी-- राज बीटा अगर इस घर की गई रोकें फिरसे वापिस आ सकती हाँ तोह ज़रूर लौटाओ, मरने से पहले मैं सबको इस घर में एक साथ मिल बैठ के देखना चाहती हों.

राज-- बहुत जल्द दादी, बहुत जल्द इस घर की गई साडी रोकें वापिस लौटने वाली हाँ. ये राज का आप दोनों से वडा है.

रत को राज नाना नानी के कमरे में था. और राज दोनों के पैरों को दबा रहा था. कुछ देर बाद राज उठा और कमरे से आयल की बोतल उठा के नाना को अंडरवियर में होने का बोल दिए. नाना तोह हैरान hi रह गए.

नाना-- राज बीटा इसकी क्या ज़ररत है.

राज-- ज़रूरत है दाद्दु. आपके शरीर को इसकी बहुत ज़रूरत है. आप जल्दी से अंडरवियर में हो जाएँ.

नाना-- तेरी दादी के सामने hi.. नाना नानी को देखते हुए बोले. तो राज फिरकी लेने से बाज़ नहीं आया.

राज-- दाद्दु कोनसा पहली बार आप दादी के सामने कपडे उतर रहे हाँ. पहली बार होता तोह इतना बच्चे कहाँ से आते.. नानी अपने मोह पे हाथ रख के मोह साइड में कर गई. नाना राज को पहले तोह हैरत से देखने लगे. राज के शरारती चेहरे को देखा तोह फिर ज़ोर से है पड़े. नानी नाना को कुछ हेरात कुछ ख़ुशी से देखने लगी. बहुत समय बाद शर्मा जी ने ऐसी बात को मज़ाक समझा था.

नाना-- राज बीटा तुम बड़े शरारती हो. नाना उठे और कपडे उतर के अंडरवियर में हो गए. राज नाना के पुरे जिस्म पर टेल की मालिश करने लगा. पहले तो नाना चीखे चिल्लाये राज के सख्त हथु पर. फिर नाना मस्त होने लगे. राज के सख्त और खुरदरे हथुन ने नाना के जिस्म के बंद जोड़ो को ढीला करना शुरू कर दिए था. जोड़ ढीले hi नहीं हुए, नाना खुद को हलक फुल्का भी महसूस करने लगे. बहुत आरसे बाद नाना खुद को हल्का महसूस कर रहे थे.

नानी राज को जान वॉर देने वाले नज़रों से देखने लगी. आधे घंटे बाद hi नाना को नींद आने लगी. राज ने मालिश बंद कर दी और नाना के ऊपर रज़ाई दाल दी.

राज--- दाद्दु मुझे आज भी दादी को अपने साथ सुलाना है. मैं ले जाओं क्या दादी को अपने साथ.

नाना-- हाँ हाँ राज बीटा, तेरी दादी है मुझसे क्या पूछना. जाओ मल्टी तुम राज बेटे के साथ hi सो जाओ. मुझे भी नींद आ रही है. नानी नाना को देख के खुश भी थी और हैरान भी. राज के वह भी कितने दीवाने हो गए थे. नहीं जानते थे राज पर उनकी पत्नी बुढ़ापे में hi फ़िदा होने लगी है.

रजा नानी का हाथ पकड़ के अपने साथ अपने कमरे में ले गया. दादी शर्माती हुई राज के साथ जाने लगी. राज ने इस बार कमरे को अंदर से कुण्डी लगा दी. नानी ने देखा तो बोल पड़ी.. राज बीटा कुण्डी क्यों लगाई.

राज-- दादी आज मैं आपका रपे करने वाला हों. राज डरावने अंदाज़ में नाटक करते हुए बोलै तो नानी खिलखिला कर है पड़ी.

नानी-- कसम से राज बीटा तुम पुरे नौटंकी भी हो.

राज -- तो फिर एक नौटंकी और करता हों मैं. राज ने नानी को उठाया और गॉड में लिए बिस्तर पर ले आया. नानी तो राज की डेरिंग और ताक़त को देखती hi रह गई. नानी की सांस फ्रीसे कुछ भारी हुई और नानी खुष्काण ख्यालों में खोने लगी. राज भी नानी को देख रहा था. राज समझ गया नानी उसके ऐसा करने से बहुत खुश होती हाँ. बिस्तर पर लिया के राज नानी के ऊपर आया, दोनों हाथ साइड में रख के राज नानी के चेहरे पे फांकें मारने लगा.

नानी-- राज बीटा ये सब सही नहीं है. मुझे दर लगता है राज बीटा, इस उम्र में ये सब नहीं होता.

राज-- दादी वो छोड़े और मुझे ये बताएं आज दाद्दु को इतनी जल्दी नींद क्यों आ गई. नानी हस्ते हुए.. तुमने भी तोह उनकी मालिश करके उनको हल्का कर दिए है. देखा नहीं था कितने सुकून से हो गए थे वह.

राज-- दादी फिर तोह आपको भी ऐसी hi एक नींद की ज़रूरत है न. राज की बात पे नानी के चेहरे पर एक रंग आने लगा, एक जाने लगा. नानी ऑंखें चौड़ी करके राज को देखने लगी.

राज नानी के गाल को चुम के उठा और आयल की बोतल ले आया. नानी बड़ी परेशान होक राज को देखने लगी.

राज पूरा हरामी बांके... दादी अब आप भी अंडरवियर में हो hi जाएँ. नानी मोह खोल के राज को देखने लगी.

नानी-- मम.. मैं.. nn..nahi ..rr.raj ..bb.beta..nani लम्बी सांस लेते हुए बोली.

राज आगे बढ़ा और नानी के दोनों हाथ पकड़ लिए.

राज-- दादी मुझसे दर लग रहा है आपको. नानी हाँ में सर हिलने लगी.

राज-- पर क्यों.. नानी फ़ौरन hi बोल पड़ी.. नहीं राज बीटा मुझे तुमसे दर नहीं लगा रहा. पर मैं तुम्हरे सामने ऐसे कैसे.

राज-- कुछ नहीं होता दादी. देखने थोड़ी देर में hi आप भी दाद्दु के जैसे मस्त होने लगेगी.

नानी-- नहीं राज बीटा मुझे नहीं करवानी कोई मालिश.. प्ल्ज़ मान जाओ न मेरी बात.

राज-- दादी मेरा बड़ा मैं है आपको ख़ुशी देने का. मुझे पता है जैसे दादू को मैंने सुकून दिए है, ऐसे hi आपको भी सुख और शांति मिलेगी. मुझे मन मत करें प्ल्ज़..

नानी-- अच्छा ठीक है. पर में कपडे नहीं निकलने वाली. तुम मेरी कमर पर और मेरे पैरों पर मालिश कर सकते हो.

राज-- ठीक है दादी. राज ने नानी की शलवार निचे से ऊपर करनी शुरू की तोह वो तंग होने के कारण घुटनो से ऊपर hi नहीं जा पाई.

राज नानी को देखने लगा और नानी नज़रें चुराने लगी. राज बोलै . दादी आप कोई लुंगी बांध लेंगे. राज उठा और नानी को लुंगी दे दी. नानी लुंगी थाम के लुंगी को देखने लगी. मैं में तो नानी के भी हलचल मची हुई थी. पर पूरी उम्र शर्म में जी थी. अब कैसे चली जाती शर्म. रत भर में कुछ और भी बढ़ गई थी. राज दूसरी और मोह करके खड़ा हो गया. दादी जल्दी से बांध लें लुंगी.

राज के बोलने पर नानी नई हिम्मत कड़ी और लुंगी बांध कर शलवार निकल दी. नानी ने शलवार चारपाई के दूसरी और निचे दाल दी. नानी को बड़ी शर्म आ रही थी. नानी उलटी लेट गई. राज ने कुछ देर बाद मुद के देखा तोह नानी उलटी लेती हुई थी. नानी की सांस बहुत तेज़ चल रही थी.

राज करीब होक नानी के चुत्तड़ देखने लगा. नानी नहीं देख सकती थी. राज अपने लुंड को मसलते हुए मन में बोलने लगा. नानी आप तोह मेरी तवक़्क़ो से भी बढ़के गर्म होने लगी है. कितनी जल्दी आप मेरे आगे ढेर होने लगी हाँ. लगता है नाना ने बरसों से आपकी छूट की आग नहीं बुझाई. मेरी रत की लगाई आएग ने आपको बड़ा परेशान कर रखा है. राज भी अंडरवियर में हो गया और लुंगी नानी के जंगों तक करके आयल डालने लगा.

नानी-- राज बीटा और ऊपर मत करो, मुझे बड़ी शर्म आ रही है. दर है कुछ गलत न हो जाए.

राज मन में... वह तोह हो के रहे गए नानी. इसके शिव कोई चारा भी तो नहीं है.

राज ने अच्छे से नानी के दोनों पैरों पर ऊपर जंगों तक आयल डाला और अपने सख्त, खुरदरे और गरम हथु से मालिश करने लगा.

नानी मन में.. आज तोह पक्का मेरी साडी हिम्मत टूट के रहेगी. रत भी में मैं बहक गई थी. कैसे मैं सब कुछ भूल गई थी. अब्ब भी ज़रूर मई राज बेटे के सुपर्ष से सब कुछ भूल जाऊँगी. आठ ऐसा नहीं होना चाहिए. राज मेरे पोते के बराबर है और फिर मई इस उम्र में अपने पति को धोका देते हुए अच्छी लाऊंगी भला... उफ्फ्फ्फ़ कितना मन को आनंद मिल रहा है. कितना सुकून है राज बेटे के सुपर्ष में. रत भर में कितनी दुन्यो की सैर कर ली थी मैंने. आज फिर ऐसा न कुछ हो जाये. अगर हुआ तोह मैं ज़रूर पागल हो जाऊँगी.

राज के दोनों हाथ पैरों के सिरे से शुरू होक नानी की छूट से 6इंच के फैसले तक आ के रुक जाते थे. नानी को नहीं पता था आज भी कुछ ऐसा hi होगा. वर्ण नानी पंतय ज़रूर पहन लेती. नानी की बिना पंतय वाली छूट रिसने लगी. नानी को मज़ा आने लगा और नानी राज के सुपर्ष पर मस्त होती चली गई.
 
एक पुराणी बात है, जो खुद के पास हो, उसकी छह से बढ़कर दूसरे के पास चीज की छह ज़यादा रहती है. वही बेटर भी लगने लगती है.

नानी के साथ भी कुछ ऐसा hi हो रहा था. नानी ने नाना के साथ उम्र गुज़र दी थी. कई दहाइयों तक चुद के ढेर सरे बच्चे जान लिए थे. फिर भी राज के स्पर्श से मिलने वाले आनंद को वह अपनी ज़िन्दगी का सबसे अनमोल आनंद फील कर रही थी. राज के जैसी कभी प्रोफ की सेहत भी नहीं रही थी. शर्मा जी एक शेहरे लौंडे थे, शहरी और गाओं वाले में अंतर तोह होना hi था. शर्मा का लुंड न तोह इतना बड़ा था और न hi इतना गर्म. न hi शर्मा जी ने पूरी लाइफ में एक भी रात नानी की मैट नहीं मारी थी. कई घंटों की बेटी रात ने नानी की आत्मा hi रोले के रख दी थी. नानी ऐसा आनंद पहले किसी प् सकती थी. नाना तो नानी को कभी एक बार तोह कभी दो बार छोड़ के सो जाया करते थे. पर राज के लुंड ने पूरी रात नानी की छूट को सूखने नहीं दिए था. तभी तोह नानी एक hi रात में बदल गई थी. वर्ण जैसी संस्कारी वो थी, सवाल hi पैदा नहीं होता था नानी बदल जाती.

पर राज हरामियों का हरामी था. खुद पर जबर करते हुए पूरी रात नानी की छूट के साथ अपना बड़ा लुंड लगाए रखा था.

अब्ब भी राज ने मालिश शुरू की तोह नानी राज के स्पर्श पे पागल हो उठी. राज ने मालिश करते करते अपने हाथ जंगों से ऊपर किये और जंगों के जोड़ तक ले आया. नानी राज को क्या रोकती नानी का तोह आनंद और भी बढ़ने लगा. नानी गुज़री रात की तरह से फिरसे नए सफर पे चल निकली. राज ने देखा नानी ने कोई रियेक्ट नहीं किया है तोह राज ने नानी की लुंगी को और भी ऊपर कर दिए. कमरे में जल रही लाइट की रौशनी में नानी का पिछवाड़ा राज को दिखा तोह बूढ़ा पर गोरा पिछवाड़ा देख कर राज के लुंड की हार्डनेस और भी बढ़ गई. राज जान गया वह बाज़ी मर चूका है.

राज ने नानी की जंगों को थोड़ा सा खोला और घुटन से ऊपर मालिश करते हुए नानी की जंगों के जोड़ तक मालिश करने लगा. नानी मज़े से राज की मालिश का आनंद ले रही थी.

राज ने नज़र अपनी नानी की बड़े बड़ी फैंको वाली छूट पर पद चुकी थी. राज ने फिरसे ऊपर हाथ लेजाए समय नानी की छूट की फंखो में दोनों अंघूठे घुसा दिए. नानी तोह उछाल पड़ी. पीछे मुद के नहीं देखा.

नानी-- राज बीटा ये क्या कर रहे हो. नानी तेज़ चल रही सांस के साथ बोली.

राज-- दादी गलती से लग गया था. दादी आपकी वो बहुत पानी भी छोड़ रही है न तोह हाथ स्लिप हो गया था. नानी की पीठ तेज़ चल रही साँस के कारन ऊपर उठ रही थी.

राज-- नानी जब ीनता मुझे दिख hi गया है तोह कमीज़ भी उतर दें न. कुछ नहीं होता. राज बड़े मीठे अंदाज़ में बोलै. नानी कुछ नहीं बोली. राज ने नानी के पेट के निचे हाथ दिया और नानी की कमीज़ ऊपर को सरका दी. फिरसे नानी के पेट से हाथ हटा कर राज ने नानी की पूरी पीठ ब्रा तक नंगी कर दी.

नानी मैं में.. उफ़ क्या करूँ अब मई. जिस बात का दर था वही हो रहा है. राज बेटे को रोकने का भी मैं नहीं हो रहा. अगर रोका तोह नाराज़ होक चला न जाए. अब्ब तो राज ने मेरे बच्चू को एक करने की आस भी दिला दी है.

नानी राज को नहीं रोकी राज ने नानी की पीठ पे आयल गिराया और मालिश करने लगा. नानी की कमीज़ ऊपर करते hi राज ने उनवेअर उतर दिए था. अब नानी तोह कुछ कहेगी नहीं. कहेगी कैसे, पीछे मुद के भी नहीं देखेगी.

राज ने नानी की पीठ की मालिश शुरू की तोह राज नानी की जाएंगे पर था. रजा का लुंड झुक पर पीठ की मालिश करने से नानी की छूट पर लगने लगा.

नानी का एक बार मैं तोह किया उठ के राज के मोह पर थप्पड़ मार दे. पर रजा के गर्म लुंड ने उसकी हिम्मत ख़तम कर के रख दी थी. नानी की छूट भी तोह पानी बहुत छोड़ रही थी. खुजली थी कह बढ़ती hi जा रही थी.

राज नानी का और भी बुरा हाल करने की सोच चूका था. राज नानी की बच पर ब्रा तक मालिश करते समय अपने को नानी की छूट पर रगड़ने लगा.

नानी अब किसी काम की नहीं रही थी. रत राज का लुंड नानी की शलवार समेत छूट पर लगा था तोह नानी बेहाल हो गई थी. अब तो डायरेक्ट नानी की छूट के बड़े बड़े लिप्स के बीच में से गुज़र रहा था. कैसे नानी कुछ बोल पति, कैसे नानी इस मिलने वाले आनंद से बहार आ के राज को रोक पति. नानी भरी और गर्म साँसे छोड़ने लगी.

एक टाइम पे नानी ने अपनी गांड हिला के अपनी छूट में भयंकर मच रही हलचल बारे राज को सिंगल भी दिए. पर राज ने खुद से धयान नहीं दिए.

नानी चाहने लगी. राज कैसे भी करके उसकी छूट का पानी निकल दे. पर राज अब ज़ालिम बना नानी की मालिश hi करता रहा. राज का लुंड खुद से नानी की छूट पर रगड़ रहा था.

बहुत देर के बाद नानी की सहन शक्ति ख़तम होने लगी तोह नानी बोल पड़ी

नानी-- राज बीटा क्यों मेरी जान के दुश्मन बने हुए हो. एक तोह तुम इतना सब गलत कर रहे हों मेरे साथ. ऊपर से मेरी जान भी निकले दे रहे हो. मत करो राज बीटा. इस बूढी पर दया करो.

राज पूरा hi नानी पर लेट गया. राज का लुंड नानी की छूट से लगा जंगों में कैद था.

राज-- दादी मेने गलत तो नहीं कर दिए न. दादी आप मेरे ऐसा करने से नाराज़ तो नहीं हाँ न.

नानी बड़ी मुश्किल से बोली. राज बीटा प्ल्ज़ पहले मेरी खुक्ली को ख़तम कार्डो. मैं अंदर से बहुत जल रही हों.

राज-- एक शर्त पर दादी

नानी-- किसी शर्त राज बीटा. और इस टाइम पे शर्त मत लगाओ मुझसे. कितने बेदर्दी हो तुम.

राज-- नानी इतना सब हो गया है तो अब आपको अपनी पूरी कमीज़ उतरनी पड़ेगी.

नानी कुछ नहीं बोली. राज ने फिरसे कहा तोह नानी फिर भी नहीं बोली. नानी बस लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

राज ने नानी को सीधा नहीं किया, फिरसे नानी के निचे हाथ दाल के नानी को एक हाथ से ऊपर उठाया दूसरे हाथ से नानी की कमीज़ और भी ऊपर करने लगा. नानी कुछ नहीं बोली. राज ने बड़ी म्हणत से नानी की कमीज़ लेते हुए hi नानी के गले से, बाज़ुओं से निकल दी. राज ने नानी की ब्रा भी खोल दी. नानी का बस नहीं चल रहा था. वह कहीं भाग जाये.

कमीज़ उत्तरी तोह नानी को बहुत शर्म आने लगी.

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नानी की छूट की ख्जलि ब्रेक लगने से कुछ काम भी हो गई थी. नानी फिरसे खुद से लड़ने भी लगी. मैं में फिरसे आना लगा, राज को दो थप्पड़ मार के यहाँ से निकल ले. पर नानी के अंदर ऐसी सोच hi रही, हिम्मत ख़तम हो चुकी थी. राज ने नानी की पीठ को चेतना शुरू कर दिए, जहाँ आयल नहीं था.

नानी-- ऐसे मत करो राज बीटा. नानी सिसक पड़ी.

राज-- दादी आपको अपनी खुजली नहीं मिटानी क्या.

नानी-- मिटानी है राज बीटा. पर मुझे ऐसे गुदगुदी भी हो रही है.

राज-- मज़ा भी तोह आ रहा है न आपको दादी

नानी-- नहीं मुझे कोई मज़ा नहीं आ रहा. राज ने अपने लुंड को पकड़ के अच्छे से नानी की छूट के लबो में सेर किया और एक धक्का मार दिए. राज का लुंड नानी की छूट के छेड़ से टकराता हुआ निचे चला गया. नानी ऐसे उछली जैसी करंट लगा हो.

राज हल्का सा है पड़ा.. नानी बोली. राज बीटा मत तड़पाओ मुझे. बहुत देर से तुम मुझपर ज़ुल्म कर रहे हो. अपनी दादी पर रेहम खाओ राज बीटा.

राज पीछे हुआ और नानी को सीधा कर दिए.. नानी को राज से इस बात की तवक़्क़ो नहीं थी. नानी ने झट से अपनी अंकों पर हाथ रख दिए. पर झरि बना के ज़रूर राज को देखने लगी. नानी का ब्रा राज ने पकड़ कर साइड क्र दिए. नानी का चेहरा मरे शर्म के लाल टमाटर के जैसा हो गया.

नानी मैं में.. आह्हः शर्मा जी, देखो आपका पोता आपकी पत्नी के साथ केसा घिनोना खेल खेल रहा है. उफ्फ्फ श्रम जी आपने कभी ऐसा सब मेरे सतह क्यों नहीं किया. मुझे इतना मज़ा आपने क्यों नहीं दिए. अगर दिया होता तोह आज मैं खुद से लड़ कर भी राज को हटा देती. अपने शरीर के साथ खेलने की इजाज़त नहीं देती.

राज ने नानी के दोनों चुके हथु में लिए और मसलने लगा. नानी राज के चेहरे को hi देख रही थी. नानी को राज के चेहरे पर ऐसी मर्दानगी दिखी जो शर्मा जी के चेहरे पर कभी नहीं दिखी थी. नानी शर्मा जी के हथुन के स्पर्श और राज के स्पर्श में अंतर निकलने लगी. नानी को राज शर्मा जी कहीं बढ़ कर लगा रहा था. नानी सोचने लगी. शर्मा जी ने कभी भी इतनी तसल्ली के साथ उसे आनंद नहीं दिए था. इतने प्यार के उसके शरीर के साथ नहीं खेला था.

उफ्फ्फ ऐसे मेरे चुके कभी नहीं दबाये थे. उम्म्म्म राज बेटे के हाथ कितने सख्त, गर्म और खुरदरे हाँ. इस उम्र में भी मेरे चुके कितने सख्त होने लगे हाँ. नानी अपनी दोनों जंगों को कसने लगी. राज का लुंड और भी फस फस कर नानी की छूट पर रगड़ खाने लगा. नानी सोचने लगी. आठ मैंने पहले धयान क्यों नहीं दिए. पहले hi ऐसा करती तोह कबकी मेरी खुजली ख़तम हो जाती.

राज भी नानी के चहेरे के पल पल बदलते भाव देख रहा था. नानी फिरसे मस्त हुई तो राज ने एकदुम्म से अपने हाथ भी हटा लिए और नानी की छूट पर लुंड की रगड़ भी रोक दी. नानी एकदुम्म से राज के रुक जाने से सहन नहीं कर पाई और आँखों से हाथ हटा के राज से बोलने लगी थी. पर फिर बड़ी मुश्कीलसे खुद पर काबू पाया और राज को उसकी मर्ज़ी पर छोड़ दिए. नानी को शर्म भी बहुत आ रही थी. राज झुका और नानी के दोनों पेअर खोल दिए.

नानी देहल उठी. नानी समझ गई अब उसकी बूढी छूट में राज लुंड डालने वाला है. नानी ऐसा नहीं चाहती थी. मस्ती मज़ा अलग बात थी, पर नानी राज का लुंड अपनी छूट में घुसते हुए नहीं देख सकती थी. इतना सहन शक्ति नानी की अब भी बाकि थी. नानी किसी भी हाल में राज को रोक देने वाली थी. नानी आँखों से हाथ हटा के राज से कहने hi वाली थी. पर राज को और भी पीछे हट्टे देख के नानी चुप कर गई. नानी कुछ हैरान भी हुई कह राज इतना पीछे क्यों हैट गया है. क्या वह छूट में लुंड नहीं डालने वाला.. नानी राज के अगले स्टेप का वेट करने लगी. अगर राज लुंड डालने की करेगा तोह नानी उसे रोक देती. पर राज ने तोह वो काम किया कह नानी अपनी आँखों से हाथ हाथ कर कोहनियों के बल आधी उठ के राज को देखने लगी.

राज ने नानी के दोनों पेअर और भी खोल के अपना मोह नानी की बूढी और बड़े बड़े लबों वाली छूट पर रख दिए था. नानी की छूट राज की जीब से खुली तोह नानी का मोह राज के ऐसा करने से खुल गया था.

नानी-- रररर.. राज बीटा ये क्या कर रहे हो.. छहियी छःठीई कितना गन्दा काम कर रहे हों तुम राज बीटा. उठो राज बीटा, प्ल्ज़ ऐसा गन्दा काम मत करो. आअह्ह्ह्ह माँ मेरी खुजली और भी क्यों बढ़ गई है. नानी की बात पर राज कुछ नहीं बोलै. राज जीब और ऊँगली नानी की छूट पर चलने लगी.

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नानी की बेकरारी और मज़ा दोनों बढे तोह नानी एकदुम्म से निचे गिर पड़ी और दोनों हथु से बिस्तर को मुठियों में भींच कर अपने सर्र को डैन बैन करने लगी.

राज आधी जीब और पूरी ऊँगली नानी की छूट में घुसी कोहराम बरपा किये हुए थी. नानी तड़पने लगी. नानी सिसकने लगी. नाना के साथ नानी जो कभी सिसकी नहीं ले सकीय थी. राज के नानी की छूट चाटने, चूसने पर सहन नहीं कर पाई और सिसकियाँ लेने लगी.

राज तब तक नहीं रुका, जब तक नानी की छूट ने सैलाबी रेला नहीं छोड़ दिया. राज सारा पानी अपने मोह में उतरने लगा.. नानी की अब वह हालत हो चुकी थी, जो पिछली रात कई घंटों में भी नहीं हो पाई थी. नानी ऐसे साँसे लेने लगी. जैसी नानी मिलो दूर से भाग के आए हो.

राज हरामी उठ के साइड बैठा है नानी को देख के स्माइल कर रहा था.
 
कुछ देर में नानी को होश आई तोह, याद आया क्या कुछ राज ने उसके साथ कर दिए है. नानी ग़ुस्से से उठ बैठे और राज के गाल पे एक थप्पड़ मार दिए.

नानी-- ये सब क्यों किया तुमने राज. नानी को ग़ुस्सा बी और दुःख भी. शर्म भी आ रही थी नानी को. राज ने नानी को डेक के स्माइल hi करता रहा. नानी के थप्पड़ पे भी राज स्माइल करने लगा तोह नानी का ग़ुस्सा शर्म में बदल गया. नानी नज़रें चुराने लगी.

राज फिरसे नानी के ऊपर आया अपने लुंड को नानी की छूट के खुले लिप्स में फंसा के के ऊपर झुक गया. नानी ने राज को नहीं देखा पर वो दर गई थी. कहीं राज अब सच में अपना लुंड तो नहीं डालने वाला.

राज ने नानी के गाल को चुम लिया.. दादी मैंने गलत किया न.. नानी कुछ नहीं बोली. मन में ज़रूर वो बोली. राज बीटा तूने किया hi क्या है. सब कुछ मेने खुदसे hi तोह करवा लिया है. कितनी बहक जाती हों में तुम्हारे साथ रहते हुए.

राज--- बताओ न दादी. मेने बहुत गलत किया है न. नानी ने राज को देखा तो उसका चेहरे श्रम से लाल था. राज ने दूसरे गाल पे किश क्र दी.

नानी-- राज बीटा ये सही नहीं हुआ. में ऐसी तो नहीं थी. पता नहीं तुम्हारे पास आ के मुझे क्या होने लगता है. नानी बड़ी शर्म और गिलानी महसूस कर रही थी.

राज ने अपने लुंड को पकड़ के नानी की गीली छूट में हिलना शुरू कर दिए. नानी झाड़ चुकी थी, पर लुंड की गर्मी से फिरसे बेचैन हो उठी. राज को देखा तोह राज के चेहरे पे मासूमियत चाय हुई थी.

नानी-- राज बीटा अंदर मत डालना प्ल्ज़. में इससे आगे और नहीं बढ़ना चाहती. सब बहुत गलत है. प्ल्ज़ तुम अंदर मत डालना. नानी परेशान भी थी और फिरसे मस्त भी होने लगी थी.

राज- क्यों दादी, कितना ाचा लग रहा है मुझे.

नानी को जैसे कुछ याद आया. राज बीटा तुम ज़रूर पहले भी किसी के साथ कर चुके हो. तुम वो सब बी करते रहे हो न.

राज-- हाँ दादी. आपके में झूट नहीं बोलूंगा.

नानी-- क्या. पर तुम तो दिखने में ऐसे नहीं दीखते. नानी बोल तो रही थी. पर राज के लुंड की रगड़ से फिरसे बेचैन भी होने लगी थी. उनकी छूट के फाँखें खुद से ढीली होने लगी थी. राज का लुंड सुपड तक नानी की बड़ी फंखो वाली छूट में घुस के मूव हो रहा था. आगे नानी की खुली फंखो वाली छूट टाइट थी. नानी को बहुत ज़यादा मज़ा आने लगा था.

राज-- नानी क्या ऐसा काम करने वाले सब बुरे होते हाँ.

नानी-- होते हाँ न, शादी से पहले ऐसा सब करने वाले अच्छे कैसे हुए.

राज-- और फिर अगर किसी को काम उमरी में hi अगर कोई बड़ी उम्र की महिला बेहला फुसला कर ऐसा सब करना सीखा दे तोह.

राज की बात नानी समझ गई. वो समझ गई राज गाओं से हाँ, वहां ऐसा सब हो hi जाया करता है. नानी औरतों की गर्मी बारे बहुत कुछ जानती थी.

नानी-- ठीक है पर मेरे साथ आगे मत बढ़ना तुम राज बीटा. मई सब तुम्हारे साथ नहीं करना चाहती प्ल्ज़ तुम भी ये ख्याल रखना.

राज-- नहीं करूँगा दादी. पर मेरी भी एक शर्त है.

नानी-- किसी शर्त.. नानी हैरान हो गई थी.

राज-- पहले मुझे आज ये बताएं दादी. मेने गलत तो नहीं किया न. नानी ने कुछ पल राज की आँखों में देखा. इतनी देर से राज के निचे नंगी थी नानी. कुछ झिझक ख़तम हो चुकी थी. नानी ने ना में सर हिला दिए. मन में वह बोली.. शमा करना शर्मा जी, पर मैं भी क्या करती. खुद से लड़ नहीं सकीय. राज बेटे का प्यार प् के इस उम्र में भी मैं बहक गई.

राज खुश हो गया. दादी आपको मज़ा आया, मुझे बड़ी ख़ुशी मिली. अच्छा दादी एक बात और बताएं मुझे. दादी मेने जो लास्ट काम किया था आपको अच्छा लगा न. राज की बात सुनके नानी की रजा की गरम जीब का एहसास अपनी छूट में होने लगा. लुंड की हीट नानी को कुछ भी बढ़ती हुई महसूस होने लगी. नानी ने हमेशा hi लुंड लिया था, कभी छूट छतवई नहीं थी. कितनी जल्दी उनकी बेचैनी राज ने छूट चाटते समय बढ़ा दी थी. कितना आनंद मिला था उनको, नानी ये सोच कर मस्त होने लगी. राज नानी के चेहरे के भाव देख के खुश हो गया.

राज-- दादी आपको भी अच्छा लगा था न. नानी शर्मा कर मोह फेर गई और राज को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी. राज पहलवान था कैसे हैट सकता था.

राज- बोलिये न दादी, मेरी चटाई से आपको आनंद मिला न.

नानी-- राज बीटा कितना गन्दा काम किया था तुमने. छियई सोच के hi में शर्म से पानी पानी होने लगी हों. राज हस्ता हुआ.. दादी गन्दा नहीं होता मज़ेदार होता है. तभी तोह आप भी सब भूल गई थी.

राज नानी पर झुका तोह लुंड का दबाओ बढ़ गया. नानी ने राज को देखा और बोली. राज बीटा उसे निकल लो बहार. कहीं आगे hi न चला जाए. में वो नहीं ले सकती राज बीटा. नानी मस्त भी थी, शर्म भी महसूस कर रही थी. छह भी रही थी सब हो जाये. दर भी रही थी, कहीं वह इतना बड़ा लेकर चलने लायक hi न रहें.

राज-- नहीं न दादी मुझे बताएं, आपको अच्छा लगा था न.

नानी मन में.. अब तुझे में क्या बताओं मुझे तो वह सब ाचा लगने लगा है जो भी तुम करने लगते हो..

राज ने नानी के होंटो पे हल्का सा किश किया तो नानी राज को देखने लगी. होंटो पे किश बी नानी के लिए अजीब एहसास था.

नानी शरमाते हुए.. पता नहीं राज बीटा. सब गलत है फिर बी अच्छा लगने लगा है.

राज-- दादी आप चाहती हाँ न में अंदर और न दलों तो आपको बी मेरा मोह में लेना पड़ेगा. अंदर डालने के इलावा आपको सब करना पड़ेगा. नानी का तो मोह hi खुल गया था. राज स्माइल करने लगा.

नानी- राज बीटा तुम कितने गंदे हो. छियई कितना गन्दा काम मुझसे बोल रहे हो.

राज को पता था नानी ऐसे नहीं मानेगी. राज ने अपना लुंड निकला और 69 में होक नानी के मोह पर लुंड लगा कर नानी की छूट फिरसे चाटने लगा. नानी तोह राज को देखती hi रह गई. राज तोह वह कर गया था जो नानी ने सोचा भी नहीं था. कुछ देर नानी अपने चेहरे पे लगे राज के लुंड को नज़र अंदाज़ करती रही. ये अनुभव नानी के लिए और भी हैट के था. नाना के साथ उसने कबि ऐसा नहीं किया था.

राज दो उँगलियाँ नानी की छूट में दाल के चाट रहा था. नानी कैसे सहन कर पति. नानी की छूट में फिरसे बढ़ आने लगी तोह नानी राज के लुंड को थाम कर सेहनलाने लगी. कुछ देर और गुज़री तोह नानी ने राज के लुंड को चुम लिया. नानी को अजीब लगा, राज के लुंड पे नानी की छूट का पानी भी लगा हुआ था.

राज की स्पीड बढ़ी तोह नानी की बेचैनी बढ़ गई. नानी सहन नहीं कर प् रही थी. वो मजबूर होने लगी. न चाहते हुए भी उन्हें राज के लुंड से मस्त खुशबु आने लगी. गर्म और बढ़ी तोह राज का गर्म लुंड नानी को भी मस्त करने लगा.

राज ने महसूस कर लिया था नानी की साँसे बहुत गर्म हाँ. राज ने अपनी गांड हिला के अपने लुंड को सही पोजीशन में किया. नानी फिर राज के लुंड के सुपड को मोह में भर कर चाटने चूसने लगी. पहले तीन चार बार नानी ने फ़ौरन hi निकल लिया था. लेकिन बाद में नानी मज़े से राज के लुंड को चूसने लगी. नानी को लुंड चूसना नहीं आता था. जैसा भी आता था, वह चूसने लगी.

जैसे जैसे राज की स्पीड बढ़ी नानी हॉर्नी होती चली गई. राज का लुंड अब हार मानने वाला था. राज ने अपना लुंड नहीं हटाया. नानी फिरसे झड़ी तोह राज भी नानी के मोह में झाड़ गया. नानी राज के लुंड के मॉल को अपने मोह में प् कर हड़बड़ा गई थी. पर उनकी खुद की सांस भी पहली हुई थी. वो ऐसे hi पड़ी रही.

कुछ देर बाद राज नानी के बराबर आ के लेट गया और नानी के चुके दबाते हुए नानी को खुद में भींच के सो गया.

नानी को अपने मोह का टास्ते बहुत बुरा लग रहा था. पर जो आनंद वो प् गई. ऐसे कामुकता से भरपूर लम्हे वह जी गई थी. वो लम्हे प् के नानी राज से दिल से खुश थी. सब गलत होते हुए भी नानी मस्त होक राज की बहन में सो गई. राज भी खुश था नानी को अपने दाम में लेके. अब नानी कभी राज से दूर नहीं हो सकती थी. नानी को चोदे बिना तोह राज रहने वाला था नहीं, नानी से लुंड चुसवा के राज ने बहुत बड़ा काम किया था. छोड़ना और बात है और लुंड चुसवाना और बात है. नानी राज का लुंड भी चूस गई थी. नानी ने नाना का लुंड कभी नहीं चूसा था. नानी नए मज़ा पा के राज की हो गई थी. ये बात राज जनता था.

वही सिमरन राज के कारण बौह्त अपसेट थी. बहुत ग़ुस्से में थी. दूसरी रात भी उसे चैन की नींद नहीं आ रही थी. पूरा दिन वह शहर की सड़कों पर राज को ढूंढ़ती रही थी. पर राज कहीं नहीं दिखा था उसे. उसके ग़ुस्से का शिकार सब घर वाले भी हो रहे थे. पर सब खुश भी थे, उनकी सिरफिरी बेटी को काबू में करने वाला कोई आ गया था. वर्ण सब सिमरन को लेके बहुत परेशान भी थे.

सिमरन बीएड पर लेती हुई छत को तक रही थी और चाट पे राज को इमेजिन करते हुए बोल रही थी. बहुत बड़ी गलती कर दी तुम कमीने मुझे किश करके. मेरे सामने किसी के टिक पाने की हिम्मत नहीं है. तुमने मुझे सरे आम किश कर दिए. बदला तो मई लेके रहूंगी. वो भी बहुत भयंकर. ढूंढ निकलूंगी में तुम्हे हरामी इंसान, छुप रहो जहाँ भी छुपे हुए हो. एक न एक दिन फिरसे तुम मेरे सामने आओगे hi. फिर बताऊँगी में तुम्हे सिमरन क्या चीज़ है.

वही सिमरन के दाद्दु ने भी अपने बहुत से आदमियों को राज की खोक पर लगा दिए था. पूरा दिन गुज़रने पर भी नहीं मिला तोह अपने यार कम को कॉल करके राज की पिछ सेंड कर दी. ये भी कह दिए जहाँ भी मिले इज़्ज़त के साथ हमारे पास भेजा जाए. वो कोई मुजरिम नहीं है. इसलिए उसे स्पेशल प्रोटोकॉल दिए जाए.

कम ने भी पुलिस को राज की पिछ दे दी और ढूंढ़ने पर लगा दिए. सब मिलकर राज को ढूंढ रहे थे. और राज नानी को बहन में भरे मज़े से सो रहा था. नानी भी मज़े से सो रही थी.
 
नानी सुबह जल्दी उठ के कपडे पहनने लगी. राज को उठा के वो कमरे से निकल पड़ी. राज भी कपडे पहन के बहार निकल पड़ा पार्क की ऑर्डर.

नानी का मैं बहुत अच्छा था. पर उसे अपने मोह का ज़ायक़ा बड़ा अजीब सा लग रहा था. ऐसा लग रहा था, जैसे राज का वीर्य अभी भी उसके मोह में हो. उसका दिल भी कच्चा होने लगा था. पर सब चाह भी बहुत लग रहा था. सब गलत है, ऐसे विचार भी थे नानी के मैं में. पर वो फिर भी बड़ी खुश थी. उसे ये नयी मिलने वाली ज़िन्दगी बहुत बहाने लगी थी. अपने पति के साथ ये धोका था, इस पर दुखी भी थी. पर राज नानी को अपना लगा था. नानी को राज के साथ सब करने पर भी घिन नहीं आ रही थी. नानी इस बात पर सुकून से थी.

नाहा के नानी ने नाना को उठा दिए. वह भी उठने के बाद बहुत फेश फील कर रहे थे.

नाना-- रात तोह मुझे होश hi नहीं रहा.

नानी हस्ते हुए-- राज बेटे के हथु का जादू है शर्मा जी.

नाना भी हस्ते हुए-- ः मल्टी, सच में राज के हथु का जादू है. बड़ा प्यारा लड़का है राज. उसके आने से हमारी फीकी ज़िदगी में कितनी रौनक ा गई है.

नानी मैं में.. हाँ उसके आने से मेरी बरसों की सूखी छूट में भी बाढ़ आने लगी है. शर्मा जी अआप्को क्या बताओं, मैं कितनी खुश हों राज बेटे के आ जाने से.

नानी-- हाँ ये तोह है.

राज पार्क में नाहा और नैना से मिला कुछ देर की बात चीत और छेड़ करि, फिर वापिस लौट आया. नेहा और नैना दोनों राज से बहुत खुश थी. राज के जैसा एक भी दोनों को नहीं मिला था आज तक

राज घर पोहंचा तोह नाना बहार धुप में थे. राज नाना के पास जा के बेथ गया.

नाना-- बहा आये पसीने राज बीटा. नाना राज के भीगे कपडे देख के बोले.

राज-- हाँ नाना पसीना तोह बहाना hi पड़ता है. जितना बहेगा, उतनी hi तंदरुस्ती मिलेगी.

नाना-- खुश राहु राज बीटा.

राज-- नाना केसा लगा है अब आपको..

नाना-- बहुत हल्का फील हो रहा है राज बीटा. ऐसा लग रहा है. जैसे फिरसे जवानी लौट आई हो. राज नाना से मस्ती करते हुए बोलै. दाद्दु धयान रहे, इस उम्र में कहीं दादी की हड्डियां hi न चटखा दें आप. राज की बात पे नाना खुल कर हसने लगे. राज के कंधे पर हाथ रखते हुए बोले

नाना-- राज बीटा मुझे ऐसे बात करने की आदत कभी नहीं थी कभी. पर तुम्हारे साथ ऐसी बातों पर भी मुझे बुरा नहीं लगता. तुम मन के बहुत अच्छे और संस्कारी लड़के हो.

राज मैं में.. नाना कभी आपको पता चला मैं कितना बड़ा हरामी हों तब आपका क्या हाल होगा.

नाना को वही छोड़ के राज अंदर किचन में घुस गया. अंदर घुसा तोह एक लड़की को नानी के साथ देख राज हैरान रह गया. नानी ने मुद के देखा तोह

नानी-- राज बीटा ा गए तुम. राज बीटा ये शीतल है, ऊपर के कराएदार हाँ और शीतल बेटी ये है राज. जिसकी बातें में तुमसे कर रही थी. लड़की सूरत से कुछ फैशनेबुल दिख रही थी. पर आँखों में हाय था. राज ने दोनों हाथ जोड़ के परनाम कर दिए. बहार होता तोह किश करके hello बोलता.

शीतल-- दादी से आपके बारे में सुना. दादी बहुत तारीफ कर रही थी आपकी. मिलके अच्छा लगा. शीतल क्यूट सी राज की hi आगे की लड़की थी. स्लिम पर बड़े मम्मू वाली. गोरी चिट्टी दूध के जैसी रंगत वाली.

राज-- मुझे भी आपसे मिलके अच्छा लगा.

शीतल: अच्छा दादी अब में चलती हुई मुझे कॉलेज भी जाना है. शीतल वहां से चली गई. राज ने एक नज़र दूर पे जा के नाना को देखा. वो धुप में बैठे हुए थे. राज पलटा और नानी को पीछे से हुग कर लिया. फ़ौरन hi राज की चीख भी निकल गई.

नानी हसने लगी. बहार से नाना बोल पड़े. क्या हुआ राज बीटा. नानी ज़ोर से बोली. राज ने गलती से गर्म चमचे को हाथ लगा लिया था. नाना हसने लगे.

नानी ने राज के लुंड और अपनी गांड के बीच में गर्म चमचा कर दिए था. नानी की खुद की गांड भी जल गई थी. पर नानी राज को सबक़ सिखाई गई थी. नानी खिखिला के हसने लगी और राज पीछे मुद के अपने लुंड को मसलने लगा. नानी राज को देख के और भी हसने लगी. नानी आगे बढ़ी एक हाथ में गर्म चमचा पकड़ के धीमे से बोली.

नानी-- लगा न फिर मुझे अपने गले राज बीटा. राज तोह नानी के रंग देख के hi हैरान था. नानी दो रातों में कितनी बदल गई थी.

राज आगे बढ़ा और खिखिला रही नानी को फिरसे बहन में भरने लगा. नानी ने फिरसे चमचा आगे किया तोह राज ने नानी का हाथ पकड़ के चमचा चीन लिया और साइड में रख दिए. फिर नानी को अपने गले से लगा के अपने लुंड को नानी की छूट पर दबा के बोलै. दादी कसम से आप तोह अठरा साल की लड़की बन गई हाँ. पर मज़ा तोह मई चखा के hi रहूँगा.

नानी भी राज की आँखों में देखते हुए कुछ बेशर्मी से बोली. क्यों जो रत को चखाया था वह काम था क्या.. फ़ौरन hi नानी को अंदाज़ा हुआ कह वह कितना खुल रही हाँ राज से. तो शर्मा कर नज़रें भी झुका गई. राज को नानी पर बड़ा प्यार आने लगा.

राज-- दादी आप शर्माती हुई कितनी पायरी लगती हाँ. अब तोह मुझे आपके साथ सब करना hi पड़ेगा. जब अंदर डालूंगा तोह फिर आपके चेहरे पर आई शर्म देखने लायक होगी. नानी हस्ते हुए ज़ोर लगा कर राज से अलग हो गई.

नानी-- बच्चू इतना भी मत उछलो, वर्ण जितना मिल गया है, उससे भी हाथ धो बैठोगे. नानी कभी शर्माती तोह कभी खुलने लगती. कभी मस्ती करने लगती तोह कभी शरारत. नानी अंदर मैं से इतनी hi फ्रेश हो गई थी. राज के लिए प्यार भी नानी के दिल में बहुत बढ़ गया था.

राज-- वो तोह मैं कभी भी हासिल कर सकता हों दादी. मुझे आप अब रोक नहीं सकती. ाचा ये बताएं ये लड़की क्यों आई थी. और दाद्दु ने मुझे किचन में आते हुए क्यों नहीं बताया. पहले तो आप दोनों खुद से कह रहे थे. ऊपर वाले बहुत संस्कारी हाँ, उन्हें परेशनी न बने. अब खुद hi मुझे मिला दिया शीतल से.

नानी-- तेरे दाद्दु को लगता है तुम बड़े संस्कारी हो. इसलिए तुमने नहीं रोका. तेरे दाद्दु को आप तुम पर बहुत यकीं आए गया है.

राज-- और आपको मुझपर कितना यकीं है.

नानी राज की नक् पकड़ के खेंचते हुए बोली. ये तो पता है तुम कोई सीधे साढ़े लड़के नहीं हो. जैसे दीखते हो, वैसे हो नहीं. ज़रूर और भी कई लड़कियां तुम्हारी ज़िन्दगी में भी शामिल होंगी. अगर ऐसा नहीं होता तोह तुम मेरे साथ ीनता सब नहीं करते. कोई भी लड़की हो या लड़का, जिसके लिए ये खेल नया हो, वह इतनी जल्दी इतना आगे नहीं बढ़ता. सोचों में हलचल जाया करती है राज बीटा. एक बार अनजाने में कुछ भी हो जाता है. दूसरी बार नहीं. तुम इस खेल के बड़े मंझे हुए खिलाडी हो.

राज कुछ हैरान तोह हुआ नानी की बात सुनकर. पर परेशां नहीं हुआ. नानी को उसने अपने हाथ में कर लिया था.

राज-- दादी आप फिर भी मेरे साथ इतना आगे निकल गई.

नानी ने राज की नक् पकड़ी और के सर को पकड़ कर राज के माथे को चुम लिया.

नानी-- राज बीटा, ये जो दिल है न, ये हर इंसान को बहुत कुछ बता देता है. कौन कैसा है, उसके बारे में सब कुछ न सही, पर बहुत कुछ बता देता है. हम औरतों से ऐसे मर्दों की नज़रों को पहचान लेना मुश्किल काम नहीं है. मुझे भी पहली रात तुम्हारे बारे में बहुत कुछ पता चल गया था. पर तब तक देर हो चुकी थी. तुम मेरे दिल में हलचल मचा चुके थे. और फिर मेरे दिल ने तुम्हे अपना भी मान लिया था. वर्ण किसकी इतनी हिम्मत जो मल्टी शर्मा को छू भी सके. मैं उसके हाथ न काट के रख दूँ. राज बीटा तुम अपने लगते हो. ऐसा लगता है जैसे तुमसे जनम जनम का कोई रिश्ता हो. तुमसे दूर रहने को मन नहीं करता. तुम्हे कुछ भी करने से रोकने को मैं नहीं करता. मुझे भी तुम्हारा हर किसम के प्यार प् के शांति hi मिलती है राज बीटा. एक ऐसा आनंद जिसकी छह बरसो से मेरे दिल को थी. राज बीटा जब मैंने तुझे खुद के लिए नहीं रोका तो मैं किसी और के लिए भी नहीं रोकूंगी. शीतल बहुत पायरी लड़की है. तेरा उसपे या उसका तुझपे मैं आये तोह कुछ भी कर सकते हो.

राज नानी की बातों पर बहुत हैरान हो रहा था. वो तो समझ रहा था, उसने झंडा गाढ़ दिए है. पर नानी तोह खुद सिक्सर लगा रही थी.

नानी-- राज बीटा पहली रत जितना सहन मैंने किया है, शायद hi कोई नारी करे. बरसों से प्यासी नारी तुम्हारे जैसे लड़के के साथ हो वो खुद पर काबू नहीं रख सकती. बिना देरी के वह तेरा हथियार पकड़ के अपने अंदर दाल देती. पर दूसरी रात भी मैंने खुद प् काबू पाए रखा है. मैं नहीं करता खुद पर काबू पाने को राज बीटा. तुम इतने hi प्यारे भी हो. तेरे दाद्दु भी इसी वजा से तेरे हो गए हाँ. पर वो मेरी तरह नहीं है राज बीटा. तुम्हारी के भी गलती पर वह तुम्हे घर से निकल देंगे. फिर कभी तुम्हारी सूरत भी नहीं देखेंगे. और मैं ऐसा कुछ नहीं चाहती राज बीटा. तुमने अपने दाद्दु को और मुझे एक आस भी दिला दी है और मुझे भी यकीं आ गया है, अब तुम जल्द hi सबको एक भी कर डोज. पर हालत को बिगड़ने मत देना राज बीटा. वर्ण तुम्हे मुझसे दूर जाना पड़ेगा और मैं कमली अब तुमसे दूर नहीं रह सकती. आखरी सांस तक तुझे अपने सामने देखना चाहती हों.

नानी आंसू बहाने लगी और राज आज फिरसे इमोशनल होने लगा. नानी ने कितनी खरी बातें बोल दी थी राज से. नानी राज के लिए पागल हो चुकी थी. अपने लिए और राज की ख़ुशी के लिए भी इतना सब कर गुज़री थी. शीतल तक के लिए नानी ने राज को बोल दिए था. राज शॉकेड था.

राज ने नानी को अपनी बहन में भर लिया.

राज-- कभी दूर नहीं जानोगे दादी मैं आपसे. मैं भी हमेशा आपके साथ रहना चाहता हों.

नाना-- क्या बात है भाई, बड़ा प्यार लुटाया जा रहा है एक दूसरे पर. नानी आंसू भरी आँखों से नाना को देखने लगी. नाना की आँखों में ख़ुशी की चमक थी.

नानी-- शर्मा जी दर लगता है, कहीं हालत एक बार फिरसे हमारे साथ ज़्यादती न कर जाएँ, एक बार फिरसे हम अकेले न रह जाएँ. अब राज से दूर नहीं रहा जायेगा मुझसे शर्मा जी.

नाना- ऐसा कैसे जायेगा राज हमारी ज़िन्दगी से. कान पकड़ के इसे वापिस ले आऊँगा. जहाँ भी जाएगा. नाना प्यार से बोले तोह नानी की आँखों से आंसू छलक पड़े.

दिन के 11 बजे राज बाइक पर बैठा और निकल पड़ा... राज सब के बारे में जान गया था. सबकी डिटेल और पिक्स भी ले ली थी राज ने. राज श्रुति की कोठी पर जा पोहंचा. फोन कर दिए था राज ने पहले hi श्रुति को.

श्रुति ने बहुत अच्छे से राज का वेलकम किया.. हुग करते राज को एक जानदार किश की. राज ने भी श्रुति के चुत्तड़ दबा के एक ज़ोरदार किश की. दोनों एक दूसरे की बहन में लिपटे अंदर जाने लगे.

श्रुति-- राज मैंने उस दिन के बाद फिरसे किसी को परेशान नहीं किया. तब से मैं खुद भी किसी से मिलने नहीं गई हों. तुम्हारे साथ बिताये समय का नशा अभी तक नहीं गया. श्रुति राज के साथ एक सूफी पर बेतहरी हुई बोली. राज ने श्रुति को अपनी गॉड में बिठा लिया. श्रुति को फिरसे किश करने लगा, साथ hi श्रुति के दोनों बूब्स भी कास कास के दबाने लगा. कुछ देर ये सब चलता रहा. फिर दोनों अलग हो गए.

श्रुति की आँखों में बहुत ज़यादा खुमारी उतर आई थी. राज का लुंड भी खड़ा हो चूका था. श्रुति राज की आँखों में देखती हुई है पड़ी और फिर बोली. राज मैं सोसाइटी की बहुत बड़ी रंडी हों, साथ hi बहुत बड़ी दलाल भी रही हों. बहुत सी लड़कियों, लड़कों को मैंने सप्लाई किया है पैसे के लिए. पर तुम्हारे साथ रहते समय मैं खुद को रंडी नहीं समझती. मेरे अंदर यू क्नोव राज जैसे कुछ बदल सा गया है. मैं से सब करने लगी हों मैं. वर्ण पैसे की हवस और सेक्स का नशा hi हमेशा मुझपर ग़ालिब रहा है राज. आज मुझे ख़ुशी भी बहुत हो रही है.

राज ने श्रुति की शर्ट ऊपर करके निकल दी. ब्रा को भी ऊपर करके श्रुति के मुम्मे नंगे कर दिए. हल्का सा थप्पड़ मार दिए दोनों बूब्स पर. श्रुति सिसकी भी और हंसी भी.

राज-- श्रुति कोई भी लड़की बुरी नहीं होती. उसे अच्छा इंसान नहीं मिलता न. तुम खूबसूरत भी बहुत हो और सेक्सी भी. हर कोई तुम्हे छोड़ने की मशीन समझ के छोड़ेगा. रंडी समझ के छोड़ेगा. मैंने भी लास्ट टाइम ऐसा hi सब कुछ समझ के छोड़ा था. पर जब तुम्हारी हक़ीक़त मुझपर खुली तो मैंने तुम्हे अपने दिल की बात बता दी. श्रुति सेक्स किसी से भी कर सकते हाँ. जब भी मैं हो कर सकते हाँ. हमें कोई रोकने वाला नहीं है. पैसो के बिना भी ज़िन्दगी फीकी हो जाया करती है. पैसे से पावर भी मिलता है और दुन्या भर के ऐशो आराम भी. साड़ी हसरतें भी पूरी हो जाती हाँ. पर कब तक. गलत तरीके से किये काण्ड का रिजल्ट कभी भी अच्छा नहीं निकलता. तुझे एक बात बताओं मैंने अपने गाओं में बहुत सी लड़कियों को औरतों को ज़बरदस्ती छोड़ा है. बाद में वो पुरे मैं से मुझसे छोड़ने लगी. पर लास्ट टाइम एक मुस्लिम लड़की की कजिन को मैंने ज़बरदस्ती छोड़ दिए. उसके साथ फोरप्ले कर लिया. उतने के लिए उसने कुछ नहीं कहा. मैंने उसे ज़बरदस्ती छोड़ दिए. वो मज़े से छोड़ने लगी. लुंड मर्ज़ी से घुसे या बिना मर्ज़ी, सील खुले, दर्द मिले तब भी बाद में मज़ा hi आता है. उसके साथ भी ऐसा hi हुआ था. वह मज़े से चूड़ी. बाद में जब उसकी छूट की झुजलि ख़तम हुई तोह वह रोने लगी, मुझे थप्पड़ मार दिए. मुझे बद्दुआ भी दे दी. श्रुति उस दिन ज़िन्दगी में मुझे पहली बार लगा, हर कोई एक सा नहीं होता. हर किसी के साथ एक जैसा सलूक नहीं किया जा सकता. छोड़ो ज़बरदस्ती करो. पर यकीं भी हो कह बाद में वह तुम्हारा साथ ज़रूर देगी. उसने मुझे वही खड़े खड़े बद्दुआ दी. घर गया तोह पता चला उसी दिन मेरी बेहेन की शादी टूट गई.

श्रुति किसी का दिल तोड़ के, किसी की इज़्ज़त को रोले के सजा ज़रूर मिलती है. मुझे भी मिल गई थी. तुम जैसा सब पहले कर रही थी. उसमे दिल भी टूटा होगा, भरोसा भी टूटा होगा. कई को धोका भी देना पड़ा होगा. इस सब का भी रिजल्ट निकल सकता है श्रुति. क्या फायदा एक दिन कोई गड़बड़ हुई और इतने दिलो को तोड़ के, इतना का भरोसा तोड़ के, धोका दे के जो पैसे तुमने कमाए होंगे तुमने, वह तुम्हारे किसी काम नहीं आएंगे. इसलिए पहले वाला सब छोड़ दो. मस्ती करो अपनी लाइफ में, मज़ा भी करो और खूब करो. जितना पैसा है तुम्हारे पास, कोई काम धंदा करो, उससे भी पैसा बढ़ सकता है. रिस्क अपनी ज़िन्दगी से ख़तम कर दो. ज़िन्दगी हसीं से भी हसीं हो जाये.

राज षुरूति के दोनों बूब्स अच्छे से मसलते हुए बोलै तोह श्रुति राज के हथु पर उतनी बेचैन नहीं हुई, जितनी राज की बातों से हुई. राज की बातों से वो पहले भी सुधरने लगी थी. राज की बातों में पहले भी उसके दिल पर बोहत असर किया था. पर आज राज की आवाज़ में बात hi कुछ और थी, आज राज का अंदाज़ भी कुछ और था. श्रुति को अपने किये हुए सभी गलत कामों का बहुत अच्छे से एहसास होने लगा. उसे सब याद आने लगे, पैसे के लिए अपने मज़े के लिए उसने अपनी कितनी फ़िरेन्ड्स को चीट किया था. कुछ मासूम लड़कियों को भी पैसे के लिए बलि पर चढ़ा गई थी.

श्रुति की आँखों से आंसू बहने लगे. राज ने श्रुति को गले से लगा लिया.

राज-- हे श्रुति तू आंसू ब्याहने लगी.

श्रुति-- राज बड़ी गन्दी ज़िन्दगी जी है मैंने. मई एक अनाथ थी राज, कोई नहीं था मेरा इस दुन्या में. एक लड़की के लिए सर्वाइव कर पाना कितना मुश्किल होता है. तुम समझ सकते हो. इसलिए मई ऐसी बन गई. बोल्ड hi नहीं बानी बहुत आगे निकल गई मैं राज. और फिर पैसे कमाने के लिए मुझे यही रास्ता सही लगा. मज़े के साथ पैसे भी आने लगा. बहुत दिल दुखाये हाँ मैंने राज. बहुत गुनाह किये हाँ मैंने राज.

श्रुति हिचकियो में रोने लगी. राज उसे चुप करवाने लगा. पर श्रुति चुप नहीं हुई. राज ने श्रुति को सूफी पर लिया और उसके चुके मोह में भर के प्यार से छोड़ने लगा. राज बहुत प्यार से श्रुति के जिस्म से खेल रहा था. कुहक देर में श्रुति चुप हो गई. उसकी आँखों में राज के लिए प्यार उमड़ आया था.

श्रुति-- ी लव यू राज. तुम बहुत प्यारे हो राज. तुम्हारे जैसा मुझे आज तक नै मिला. पहले मिला होता तोह मैं ऐसी न बनती. राज ने श्रुति का एक निप्पल होंटो में दबा के ऊपर खेंचे तो "पाचक" की आवाज़ आई. श्रुति के होंटो पर बड़ी प्यारी मुस्कान आ गई.

श्रुति-- राज तुम्हारा एक एक अंदाज़ मेरे दिल में उतर रहा है. मुझे खुद में नए रंग उतारते हुए महसूस होने लगे हाँ. इतना सब मुझे कभी भी अच्छा नहीं लगा था. हमेशा से ऐसे लम्हो में मैं हवसी और हॉर्नी हो जाया करती थी. पर तुम्हारे साथ मैं जैसे स्वर्ग यात्रा पर निकल जाया करती हों. बड़ा प्यार देते हो तुम मुझे राज.

राज -- तुम हो भी तोह बहुत प्यारी श्रुति. शायद इसी लिए भगवन ने तुम्हे बदल भी दिया. वर्ण तुम जैसी कहाँ बदलती हाँ.

श्रुति-- राज ये सब तुम्हारे कारण hi है. वर्ण मैंने कभी नहीं सोचा था, ऐसा चेंज भी मेरी लाइफ में आएगा.

राज खड़ा हुआ और अपने कपडे उतरने लगा. पिछले बार देख के श्रुति मचल उठी थी, राज के लुंड को देख के. श्रुति के अंदर भयंकर हवस भी बढ़ गई थी. पर आज श्रुति अंदर से बहुत शांत और खुश थी. राज के लुंड के लिए नहीं, राज के पास होने से, राज का प्यार मिलने के कारण.

राण सूफी पर बैठा तो शूरति राज की गॉड में आ बैठी. राज के लुंड को अपनी छूट पर सेट करके राज को किश करने लगी. धीरे धीरे करके सारा लुंड अपनी छूट में लिया और बड़े पैर से राज की आँखों में देखती हुई किश करती हुई छोड़ने लगी.

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राज भी श्रुति को किश में साथ देते हुए श्रुति के दोनों बूब्स प्यार से दबाने लगा. कुछ देर में राज ने किश तोड़ दी और श्रुति से बोलै..

महेश शर्मा के बारे में क्या जानती हो तुम श्रुति..

श्रुति उछालते हुए पूरा पूरा लुंड अपनी छूट में लेते हुए. कौन महेश शर्मा.

राज श्रुति को महेश शर्मा के बारे में डिटेल से बताने लगा. महेश शर्मा राज का बैड मौसा थे. दिल्ली में hi एक गारमेंट्स की फैक्ट्री दाल राखी थी.

श्रुति-- उस हरामी को कौन नहीं जनता. साले के लुंड की खुराक जाती hi नहीं है. बहुत बड़ा ठरकी है साला. अपने पत्नी को शायद hi कभी छोड़ कभी छोड़ता हो. वर्ण तोह हर रोज़ रदियाँ बदल बदल कर चुदाई करता है.

राज-- नेचर का कैसा है.

श्रुति-- अय्याश है राज वो हरामी बहुत बड़ा. पर हिम्मत की कमी है उसमे. ठरकी है बहुत बड़ा. नयी छूट के लिए दीवाना रहता है. मुझे तोह लगता है, अपनी बेटियों को देखे के भी लालसाहता होगा साला हरमे..

राज-- फिर तोह मेरा काम आसान हो जायेगा.

श्रुति-- कैसा काम, मुझे बताओ राज. कसम से तुम्हारे लिए मैं अपनी जान भी वॉर दूंगी.

राज-- अरे नहीं इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. मुझे बस उसके घर में घुसना है. कुछ काम है उससे और तुझे मैं समय आने पर बता दूंगा. ये मत समझना मैं तुमसे कुछ छुपा रहा हों. एक दिन बताऊंगा ज़रूर.

श्रुति राज के लुंड से, राज के प्यार से मस्त थी. वो बोली. बस मुझे अपना प्यार देते रहने राज. मैं इतने में hi खुश रह लिया करुँगी. मेरी किसी तरह की भी ज़रूरत पड़े तोह बताना.

राज-- कोई ऐसी लड़की जिसके लिए महेश पागल हो और वह लड़की उसे मिल न सकीय हो. शरीफ नहीं होनी चाहिए. सेक्स की दुन्या से उसका ताल्लुक़ हो बास..

उसी की कॉलोनी में रहती है एक शादी शुदा लड़की है. साली दिखने में मुझसे भी कही आगे की चीज़ है. वह पैसो के लिए चुदती, बस किसी पर मैं आ जाये तोह चुद लेती है. पैसे वाली भी है. महेश को पता चला था, साली अपने पति के शिव भी कैयो से चुद चुकी है. तो महेश उसके लिए पागल हो उठा. एक बार मुझसे भी बोलै था महेश. कहने लगा श्रुति उसके लिए मैं 5 लाख भी देने को तैयार हों, बस एक रात के लिए मुझे उसकी दिला दो. पर मैंने महेश से कह दिए वह पैसो के लिए सेक्स नहीं करती.

रज-- तुम तो उसकी इतनी तारीफ कर रही हो. साला सुनके मेरे लुंड की सख्ती और जोश भी बढ़ने लगा.

श्रुति-- हेहेहे मुझे महसूस हो गया है राज. पहले hi तुम्हारा लुंड इतना मोटा और बड़ा है, ऐसी बातों से और भी फूलने लगता है. तुमने अभी उसे देखा नहीं है तो ये हाल है, जब उसे छोड़ोगे तोह क्या हाल होगा तुम्हारे लुंड का.. श्रुति राज के सर को अपने बूब्स पर झुकाते हुए बोली. बहुत मज़ा आ रहा था श्रुति को राज से बातें करते हुए राज का लुंड लेने में. राज भी श्रुति के दोनों निप्पल को बारी बारी चूसने लगा.

राज-- पर तुम्हारे जितना मज़ा मुझे उसमे नहीं मिलेगा. तुम बहुत ख़ास हो श्रुति.

श्रुति-- ये तो तुम्हारा प्यार है. वर्ण मुझे पता है उर्वशी मुझसे कहीं बढ़ कर है.

राज-- ओह्ह तो उसका नाम उर्वशी है. बड़ा सुन्दर नाम है, बिलकुल तुम्हारी तरह.

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श्रुति-- नाम hi सुन्दर नहीं है उसका. जब उसे नुदे देखोगे तोह पागल हो जाओगे राज. एक बार देखा था मैंने उसे एक शादी पे ड्रेस चेंज करते हुए नंगा. कसम से मैं खुद मोहित हो गई थी उसके बदन की चमक देख के.

राज-- मैं सोच रहा था, उर्वशी को छोड़ के एक बार महेश से छुड़वा दूँ. फिर महेश के घर में घुसने में भी आसानी हो जायेगी.

श्रुति-- मुश्किल है राज बहुत मुश्किल, उर्वशी उस हरामी के निचे नहीं लेतेगी. पर तुम्हारे लिए शायद मुश्किल न रहे. तुम में बहुत ख़ास बात है राज.

राज फिर श्रुति को सूफी पे लिटा कर दबा डाब छोड़ने लगा.

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श्रुति की छूट से जल्द hi पानी निकल गया. राज ने श्रुति को घोड़ी बनाया और उसकी गांड मारने लगा. श्रुति कुछ देर में फिरसे मस्त होने लगी. राज कुछ मिंटो में शरती की गांड में hi झाड़ गया.

कुछ देर की रेस्ट के बाद राज उठ खड़ा हुआ. नंगा hi बाथरूम में घुस गया. नाहा के निकला और कपडे पहन लिए.

श्रुति-- जा रहे हो राज.

राज-- हाँ श्रुति बहुत काम भी करने हाँ मुझे. महेश से मिलना, उर्वशी को सेट करके छोड़ना है. फिर महेश से थ्रीसम करवाना है. फिर महेश के घर में घुसना है. टाइम बहुत लगने वाला है मुझे इस काम में.

श्रुति-- राज पैसों की ज़रूरत पड़ेगा न तुम्हे.

श्रुति बड़े प्यार से बोली.. राज ने श्रुति को एक किश किया.

राज-- अगर मैं मन करता हों तो तुम्हे लगेगा. मुझे तुम्हारे पैसों से घिन आती है. ऐसा मत सोचना. अभी हाँ मेरे पास, ज़रूरत पड़ी तोह खुद से कह दूंगा.

श्रुति खुश हो गई. कुछ देर में राज बाइक पर बैठा कोठी से बहार था.

एक रोड से गुज़र रहा था, एक पुलिस वन आगे आ के रुक गयी. राज ने तुरंत ब्रेक लगा के बाइक रोक दी. राज पुलिस को देख कर हैरान हो गया था. राज बाइक से नहीं उतरा. पुलिस वन से एक आईएनएस और 3 पुलिस वाले उतरा. उनके हाथ में मोबाइल था और मोबाइल में राज की पिछ.

आईएनएस-- सॉरी मर.

राज-- राज नाम है मेरा.

आईएनएस-- सॉरी मर राज, आप को हमारे साथ थाने जाना होगा... राज हैरानगी से आईएनएस को देखने लगा. आईएनएस आगे बोलै. नहीं घराने की कोई ज़रूरत नहीं है मर राज. हम तुम्हे किसी जुर्म में नहीं, किसी और बात के चलते अपने साथ ले जा रहे हाँ. समझ लो तो हमारे ख़ास मेहमान बांके. आईएनएस ने राज से हाथ मिलते हुए कहा.

राज-- पर क्यों, मेरा आप सब से क्या वास्ता.

आईएनएस-- आप चाहें तो अपनी बाइक पर हमारे पीछे आ सकते हाँ. रीज़न भी वही बता देंगे. राज को आईएनएस की सूरत पर और शब्दों पर यकीं आ गया. और फिर राज कौनसा दर गया था. डरने की आदत राज को नहीं थी, और न hi राज ने कोई जुर्म किया था.

15 मिंट में राज पुलिस वन के पीछे रहते हुए ठाणे की हुदूद में दाखिल हो रहा था. बाइक स्टैंड पर कड़ी करके राज आईएनएस के साथ अंदर जाने लगा. एक कुर्सी पर बिठा आईएनएस सप के रूम में जाने लगा. एक पुलिस वाले को राज के लिए कोल्ड ड्रिंक लाने को कह दिए था. राज बड़ा हैरान था.

राज हेतैन बैठा हुआ सब सोच hi रहा था. बहार से एक लेडी आईएनएस अंदर आते हुए दिखी. उसे देख के राज न चाहते हुए भी अपने लुंड को मसलने पर मजबूर हो गया. आने वाली लेडी आईएनएस थी hi एंटी होती और बड़े बड़े मुम्मो वाली. राज उसके मुम्मो को ताड़ते हुए अपने लुंड को मसलने लगा.

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उस लाडू आईएनएस का नाम शिवानी गुप्ता था. उसकी राज पर नज़र तो नहीं पड़ी. पहले से hi ठाणे में मौजूद एक पुलिस वाले की नज़र राज पर ज़रूर पद गई.

वो-- अबे साले हरामी किधर देख रहा है तू. और ये क्या कर रहा है.

राज ने उस पुलिस वाले को देखा और बोल पड़ा. तेरी गांड में क्यों मिर्ची लगने लगी है. तू आराम से बैठ के अपना काम कर न. वह तोह हाथे से hi उखड गया. राज की बात पर उठ खड़ा हुआ.

वो उठ के राज को थप्पड़ मरने को हुआ तो राज भी उठ खड़ा हुआ और उसका हाथ पदाद लिया. सब का धयान उसकी और आकर्षित हो गया. सब देखने लगे. राज ग़ुस्से से उसे देखते हुए बोलै. पुलिस वाला है तो किसी पर भी हाथ उठाएगा क्या..

शिवानी गुप्ता राज को घूरते हुए आगे बढ़ी और ग़ुस्से से बोली.

शिवानी-- ठाणे में खड़े हो और पुलिस वाले से ऐसी बात करते हो. साले तेरा तोह मैं बिना F.I.R के अंदर दाल के वह हाल करुँगी, तेरी सात पुश्तें याद करती रहेंगी. रजा हरामी स्माइल होंटो पे लाये पुलिस वाले का हाथ छोड़ के शिवानी गुप्ता के सामने जा खड़ा हुआ.

राज-- मटकों में भरा दूध बिना F.I.R कटे निकला भी कैसे जा सकता है आईएनएस साहिबा. कसम से मेरी तो लाटरी hi निकल पड़ेगी, अगर मेरे साथ ऐसा कोई चांस बना तो..

शिवानी गुप्ता तोह खुले मोह के साथ राज को देखती hi रह गई. और कुछ पुलिस वाले कहि कहि खरने लगे.

शिवानी ने इधर उधर देखा तोह-- ोुउउउउउउउउ.. दन्त पीसते हुए बोली.. तुझे नहीं छोडूंगी मैं. शिवानी या कोई कुछ और बोलता. अंदर गया आईएनएस और सप बहार आ गए.

सप- ये सब क्या हो रहा है.

सब सप को देख के सीधे खड़े हो गए.

शिवानी-- सर इसने रामदियाल पर हाथ उठाया है. शिवानी साफ़ झूट बोल गई. उसे झूट बोलते देख कर राज के होंटो पर क्यूट सी स्माइल आ गई.

राज-- सप साब आपके ठाणे की इतनी हसीं आईएनएस अगर ऐसा बोल रही है तोह सच hi बोल रही होगी.

सप भी अपने होंठ दबा गया. वर्ण एक क़हक़हा उसके होंटो से भिजारी होने वाला था. आईएनएस ज़रूर है पड़ा था.

शिवानी हैरान भी हुई और ग़ुस्से में भी आ गई... देखा सर आपने, कितना बद्तमीज़ है ये.

"ऐसे hi बद्तमीज़ की मुझे बरसों से तलाश थी.. पिछले दो दिन से इसी बद्तमीज़ को हम ढूंढ रहे थे"

सबने देखा तोह राकेश वर्मा के साथ पुलिस कम थे. राकेश वर्मा के होंटो पर मुस्कान थी. और कम राज को हैरत से देख रहा था. राज पर्सनालिटी में किसी से काम भी नहीं था. कम दिल hi दिल में राज की पर्सनालिटी पर राज को दाद दे रहा था.

और राज राकेश वर्मा और पुलिस कम को देख कर हैरान. वो समझ नहीं पा रहा था. उसे क्यों ढूंढा जा रहा था.
 
राकेश वर्मा और कम चलते हुए राज के पास जा पोहचे. राकेश वर्मा भी राज की पर्सनालिटी देख कर बहुत खुश हुआ था. जैसा राज ने सिमरन के साथ बीच सड़क पर किया था. आज ठाणे में भी राज ने अपने डेरिंग और ऐटिटूड दिखा कर राकेश वर्मा का मैं मोह लिया था.

राज राकेश वर्मा को देख के कुछ हैरान था.

कम : वर्मा सर क्या है इस लड़के में, जो दो दिन आप इसे तलाश करवा रहे हाँ.

वर्मा शब्द पर राज के कान खड़े हो गए. राकेश वर्मा के बारे में राज ने सिमरन के बारे में सुना था. सिमरन किसी राकेश वर्मा की पोती है. राज राकेश वर्मा को घोर से देखने लगा.

वर्मा : बीटा तुम मुझे पहचानते हो क्या. राकेश वर्मा ने सीधे hi राज से सवाल कर दिया.

राज पुरे कॉन्फिडेंस के साथ. आप राकेश वर्मा हाँ न दाद्दु.. राज हरामी hi नहीं था, हरामियों का बाप था. माहौल के हिसाब से पैसा फेंकना भी जनता था.

कम हैरान हुआ तोह राकेश वर्मा ज़ोर ज़ोर से हसने लगे.

वर्मा : किन कम अब समझे क्यों मैं इसे ढूंढ रहा था.

कम : ज़रूर इसने आपको पहले से देख रखा होगा.

वर्मा : क्यों बीटा क्या तुमने मुझे पहले कभी देखा है कहीं.

राज-- कैसे देखूंगा दाद्दु, मुझे तोह 3 दिन hi हुए हाँ दिल्ली ए हुए. मैं यहाँ का हों hi नहीं.

कम के साथ साथ सब राज की बात पर उसे हैरत से देखने लगे.

कम : लगता तोह नहीं तुम इस शहर में नए हो. कोई भी नए शहर में जाए तोह उसकी चाल ढाल hi अलग हुआ करती है.

राज-- सर चाल ढाल में बदलाव उनमे हुआ करता है, जो चुटिया होते हाँ, जो चोर होते हाँ या जिनके दिल में दर होता है. मुझमे ऐसा कुछ भी नहीं है. न तोह मैं चुटिया हों, न hi चोर हों और न hi मुझे किसी से डरने की आदत है.

वर्मा : शाबाश बीटा. मुझे तुम बहुत पसंद आये. अब बताएं कम साब मैं इसे ठीक hi ढूंढ रहा था न.

कम : वर्मा सर आप इसे किश लिए ढूंढ रहे थे.

राकेश वर्मा ने कम के कान में सिमरन का बताया तोह कम की ऑंखें hi चौड़ी हो गई. वह राज को उप्पर से निचे तक देखने लगे. कुछ पल देखते रहे. फिर हसने लगे.

आगे बढे और राज के कंधे को थपथपाने लगे. बीटा अपना धयान रखना. आईएनएस शिवानी से बोले. आईएनएस जल्द hi तुम्हे इसके बारे में अच्छी ख़बरें सुनने को मिलने वाली हाँ. फिर कम हस्ते हुए पीछे हैट गए.

किसी के पल्ले कुछ नहीं आया. पर राज हरामी बहुत कुछ समझ गया था. वो बड़े धयान से राकेश वर्मा को देख रहा था.

वर्मा : चलो बीटा मेरे साथ तुमसे कुछ बात करनी है. अगर तुम्हारे पास टाइम है तोह. राज आईएनएस शिवानी के मुम्मे ताड़ता हुआ राकेश वर्मा के साथ जाने लगा. तोह शिवानी जो राज के रिलेशन जान के हैरान थी. राज की आँखों की गुस्ताखी पर जल भून गई थी. पहले वाला आईएनएस और सप राज से कोई बात किये अंदर चले गए. कम भी वर्मा और राज के साथ बहार जाने लगा.

राज गाड़ी में वर्मा के साथ पिछली सीट पर बैठा हुआ था और कम वही से आगे अपने ओफ्फिन्स के लिए निकल पड़े थे. एक नौकर राज की बाइक पर पीछे आ रहा था. 20 मिंट बाद गाड़ी एक कोठी पर रुकी. ये राकेश वर्मा की एक दूसरी कोठी थी.

राकेश वर्मा राज को अलग न बिठा कर अपने साथ बिठा गए. राज का एक हाथ पकड़ कर बड़े प्यार से राज को देखने लगे.

वर्मा-- राज बीटा सिमरन के साथ जैसा तुमने किया, वह जान कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई. यक़ीनन तुम्हारे लिए ये बात बड़ी हरणकूं होगी. एक दादा अपनी पोती के मुतल्लक़ ऐसी बात कैसे कर सकता है. आज के ज़माने में किश एक आम बात है. पर सिमरन के मामले में वह किश आम बात नहीं थी राज बीटा. सिमरन को मर्दों से नफरत नहीं है, अगर है तोह इस हिसाब से वह खुद को मर्दों की दुन्या का लड़की नहीं समझती. वह मर्दों की दोस्त तो बन सकती है, पर लव शव, प्यार व्यार, शादी वाले मामले में उसकी सोच हटके है. परिवार के, खंडन से सभी मर्दों में मिल बैठने की शौक़ीन भी है, मस्ती मज़ाक भी खूब करती हां. पर जब भी शादी की, किसी लड़के के लिए बात की जाए तोह ऐसे बिदकती है, जैसे खारिश ज़ादा घोड़ी.

राकेश वर्मा हसने लगे तोह राज भी हसने लगा.

वर्मा -- राज बीटा मेरी पोती लाखों में एक है, और हम उसकी ज़िन्दगी में ये वाली खामी नहीं देख सकते. आज तक कई रिश्ते उसने ठकुरा दिए. कई लड़के उसकी ज़िन्दगी में आये तोह धुत्कार दिया. सिमरन ने कभी किसी की परवा नहीं की. तुम्हे ये जान कर हैरत भी होगी, सिरमन हर किसम की गन चला लेती है, करते के दो कहर दो पेच भी जानती है . कभी कुछ लड़कों ने उसे परेशान करने की कोशिश की. पर सिमरन ने सबको मज़ा चखा दिया. यही वजा है जो सिमरन के पास भी कोई नहीं फटकता. तुम वाहिद लड़के हो, जिसने सिमरन को बीच सड़क पर किश करदी. उसे कोई मौका भी नहीं दिया जो वो तुमपर अपने दो पेच इस्तेमाल कर सकती. ज़िन्दगी में पहले बार उसके साथ किसी ने ऐसा किया है. मुझ समेत सब उससे बेहद प्यार करते हाँ राज बीटा. तुमसे ये सब कहने का मकसद सिर्फ इतना है राज बीटा, तुम hi मेरी पोती को सुधर सकते हो. सच कहूं तोह तुम्हारा ज़िक्र सुनके hi मुझे तुम पसंद आ गए थे. फिर भी कुछ डॉब्टस थे. जो आज तुम्हे देख के ख़तम हो गए. बीटा ये बाल मैंने धुप में सफेद नहीं किये हाँ. मेरी इन तजुर्बेकार आँखों ने तुम्हे पहचान लिया है. तुम जिस किसी शहर के भी हो. पर तुम हो एक खानदानी लड़के. हमें इससे ज़यादा और कुछ नहीं चाहिए. न हमें अपनी सिमरन के लिए अपने स्टैण्डर के लड़के की छह है और न hi हमारी hi तरह से वो पैसे वाला हो. हमें बस अपनी सिमरन को हमेशा खुश देखना है. और सिमरन के लिए मुझसे तुमसे बेस्ट कोई नहीं मिलेगा.

अंत में राकेश वर्मा जज़्बाती हो गए थे. राज बड़े धयान से साडी बातें सुन रहा था. कुछ देर घोर करने के बाद वह बोलै.

राज-- दादू..

वर्मा-- पहली बात जो मुझे तुममे पसंद आई राज बीटा. तुम ने फ़ौरन hi मुझे ठाणे में पहचान भी लिया और मुझे दाद्दु भी बोल दिए. मुझे बड़ी ख़ुशी मिली है राज बीटा.

राज-- दाद्दु मेरे बारे में आपने बहुत से अंदाज़े लगा लिए. आपने अपने तजुर्बे की बिना पर मुझे परखा, मुझे एक खानदानी लड़का कहा. हाँ मैं हों एक खानदानी लड़का दाद्दु. पर मैं आपकी सोच से परे का इंसान भी हों. अपने बारे में मैं बाद में बाटूंगा, पहले सिमरन की बात की जाए तोह सिमरन मुझसे आगे में बड़ी है. फिर भी पहली hi नज़र में उसे देख के मेरे दिल में हलचल मच उठी, मेने तय कर लिया, सिमरन hi मेरी पत्नी बनेगी. सिमरन को अपनी ज़िन्दगी में शामिल करने के लिए मुझे कुछ भी करना पड़े मैं कर गुज़रूंगा.

अब बताता हों दाद्दु मैं आपको अपने बारे में. मुझे देख के अक्सर लोग धोका भी खा जाता हाँ. साफ़ शब्दों में कहूं तोह मुझे लगता है इस दुन्या में मुझसे बड़ा हरामी कोई नहीं है. कुछ सालों में hi 100 के करीब लड़कियों औरतों के साथ मैंने सम्बन्ध बना लिया हाँ. किसी पर भी मैं आये तोह मैंने उसे हमेशा हासिल hi किया है. चाहे फिर वह कोई लड़की हो या औरत. एक बार जो मैंने सोच लिया, वह कर के hi रहा हों.

सिमरन को देख के मुझे समझ गया था, सिमरन किस टाइप की लड़की है. सिमरन मेरी ज़िन्दगी में आने वाली वाहिद लड़की है, जिसे देख के मेरे मैं में कुछ गलत विचार नहीं आये, उसे किश करना भी उसकी ज़िन्दगी में खुद को शामिल करना था. उसे बतलाना था, कोई है जो उससे प्यार करने लगा है. उसे चाहने लगा है.

आप सब के बारे में मैं नहीं जनता था. अब आप को देखा तोह मुझे लगा मुझे खुद को छुपा के सिमरन को हासिल करना सही नहीं रहेगा. दाद्दु आपसे मिल के मुझे बहुत ख़ुशी मिली है. आपके जैसे hi मेरे नाना भी हाँ. मैं जितना भी बुरा लड़का हों, पर जिसके साथ चलता हों दिल से चलता हों. उससे साफ़ दिल से चलता हों. अपनी बुराई कोई नहीं करता. पर मैं कर कर रहा हों. रिलेशन बताते समय भी हमेशा सच को सामने रकना चाहिए. इसलिए मैंने आप अपना सारा सच बता दिया. मेरे अपने मेरे लिए जान वर्ते हाँ तो मैं अपणु के लिए अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हत्ता.

राकेश विराम बोले तोह राज सुन रहा था. राज बोलै तोह राकेश वर्मा सुनने लगे. राज जैसे जैसे बोल रहा था, राकेश वर्मा राज की आँखों में पुरे धयान से देख रहे थे. राज की बातों को सुन रहे थे. लहजे से राज की बातों का वज़न जाँच रहे थे. पूरी उम्र बिज़नेस करते करते बिता दी थी. इंसान की परख बहुत थी राकेश वर्मा में.

राज की साड़ी बातें सुनी तोह उठ खड़े हुए और बेपनाह ख़ुशी का इज़हार करते हुए चहक पड़े.. राज बीटा मेरा तजुर्बा गलत नहीं था. हाँ कुछ कमी रह गई थी. जितना अच्छा मैंने तुमने समझा था, तुम उससे भी कहीं बढ़कर हो. मैं सोच भी नहीं सकता था, मेरी पोती सिमरन की ज़िन्दगी में तुम जैसा लड़का भी आ सकता है. राज बीटा सिमरन लाखों में नहीं क्रोरो में एक हो. तुम्हे अपनी पोती के लिए मैं पुरे मैं से सेलेक्ट करता हों. और रही बात तुम्हारी आदतों की, तुम्हारे लाइफ स्टाइल तोह यार जवानी दीवानी होती है. हम भी अपनी जवानी में ऐसे hi बिगड़े जवान हुआ करते थे. सच्चा इंसान तोह तुम जैसा hi हुआ करता है. खाओ पियो अपनी लाइफ अपने हिसाब से जियो. बस मेरी बेटी को हंसः खुश रखना. फिर ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे. और सबसे पहले उसे अपने दाम में लाना है. सिमरन बेटी अत्रि घोरी है, उसे राम करते करते तुम्हारे पसीने छूट जाएंगे. बहुत पापड़ बेलने पड़ेंगे तुम्हे. इतनी जल्दी वह तुम्हारे दाम में नहीं आने वाली. मुकाबला बहुत सख्त रहेगा राज बीटा. तुम सेर हो तोह वो सवा सेर है. तुम शोला हो तो वो भी शबनम नहीं है. इतनी घातक तोह बंदूक से निकली गोली नहीं है, जितनी वह है.

राज भी हस्ता हुआ बोलै... दाद्दु सिमरन मुझे भी ऐसे hi पसंद नहीं आ गई. अगर वह ऐसे न होती तोह कैसे मेरा दिल उसपर आता.

वर्मा--- हाँ ये तो तुमने एकदुम्म सही कहा राज बीटा.

राज को अचनाक hi श्रुति की याद आ गई. दाद्दु मेरी एक दोस्त है, शायद आप भी उसके बारे में जानते हों.

वर्मा -- हाँ हाँ बोलो राज बीटा.

राज-- श्रुति नाम की एक लड़की के बारे में आपने सुना होगा. जो--

वर्मा-- जो हायर सोसाइटी में लड़कियां सिप्पली भी करती है. बड़ा नाम है भाई उसका.

राज-- दाद्दु मेरी उससे दोस्ती हुई है तोह मैंने उसे धंदे से हटा दिए है.

राकेश वर्मा खुश हो गए... असंबभ है ये तो. ऐसे धंदे से किसे रोका जा सकता है भला. तुमने ये काम कर दिखया तोह ज़रूर मेरी सिमरन को भी राम कर hi लोगे.

राज-- उसे सोसाइटी में कभी प्रॉब्लम हो सकती है. तो मैं--

वर्मा-- राज बीटा तुम परेशान मत हो. ऐसे लड़कियों के लिए मैं हमेशा hi आगे रहता हों. कोई खुद को सुधारना चाहे तोह उसके लिए मैं कुछ भी कर जाया करता हों. मैं जनता हों वो एक अनाथ लड़की है. शाबाश राज बीटा. तुमने ये वला काम बहुत खूब किया. इससे तुम्हारे लिए मेरे दिल में प्यार के साथ साथ इज़्ज़त भी बढ़ गई है.

राज-- दाद्दु तो अब्ब्ब मुझे चलने चाहिए.

वर्मा-- हाँ हाँ क्यों नहीं. पर अब से अपना ख्याल रखना. सिमरन भी तुम्हे दो दिन से पुरे शहर में ढूंढ रही है. अब तक वो भी जान गई होगी. माइआ तुमसे मिल चूका हों. मेरे पुरे परिवार तुम्हारे hi चर्चे रहते हाँ. अब जब मैं सबको तुम्हारे बारे में चर्चे और भी बढ़ जाएने.

कुछ देर में राज बाइक पर बैठा कोठी से बहार था. राज को राकेश वर्मा से और राकेश वर्मा को राज से मिलके बहुत अच्छा लगा था. राज को सिमरन के परिवार के बारे में, दाद्दु के बारे में जान के बहुत ख़ुशी मिली थी. और राकेश वर्मा वो तोह राज के फैन हो गए थे.

राज कोठी से तीन चार रोड घूम कर मैं रोड पर चढ़ने hi वाला था. पीछे से सिमरन की गाडी आंधी तूफ़ान की तरह से आई और राज की बाइक को टक्कर मार दी. राज ने भी अंत में धयान दे दिया था. राज बड़ी चोट से तोह बच गया. पर सर रोड पर टकराने से राज खून में नाहा गया.

सिमरन ग़ुस्से से गाडी का दरवाज़ा खोल क्र अंधी तूफ़ान की तरह राज के पास जा पोहंची.

सिमरन बेपनाह नफरत से राज को देख रही थी.

सिमरन-- मुझे चीट करने वाला, मुझे परेशान करने वाला पातळ में भी छुपा हुआ क्यों न हो. मैं उसे ढूंढ निकलती हों.

राज सिमरन को खून ज़ादा चेहरे के साथ देखने लगा. राज के सर का अगला हिस्सा रोड से टकराया था. बचत हो गई थी. राज उठ खड़ा हुआ. चक्कर आने पर लड़खड़ा गया पर गिरा नहीं.

आस पास ट्रैफिक मजा हो गया. राज होंटो पर स्माइल ला के सिमरन को देखने लगा. कुछ पीछे राकेश वर्मा भी थे. वो जानते थे सिमरन सब जान के राज को कहीं भी धार लेगी. और सिमरन ने राज को धार भी लिया था. राज के खून आलूद चेहरे को देख राकेश वर्मा को दर्द तोह हुआ. पर राज से मिलके वह राज के बारे में सब जान भी गए थे. राज को खड़े होते हुए देखा तोह खुश हो गए. अपने आदमियों को भी सावधान रहने को बोल दिए.

राज सिमरन के सामने जा खड़ा hua.simran कुछ हैरान भी हो गई थी. वह तो सम्भि थी, राज का काम हो गया है. पर राज फिरसे उसके सामने खड़ा हुआ था. अस पास के लोग तमाशा देखने में लगे हुए थे.

राज अपने चेहरे पर आये खून को अपने सीधे हाथ की पूरी हथेली पर मलने लगा. राज का खून देख के सिमरन के होंटो पर विजयी मुस्कान आ गई.

सिमरन-- ये मत समझ लेना ये पहली चोट दी है मैंने तुम्हे. अभी तोह मेरा बदला शुरू हुआ है.

राज-- और मुझे इस शहर में औए हुए कुछ hi दिन हुए हाँ. मैं भी हार मान के भागूंगा नहीं. तुम्हे किश करके तुम्हे ये बता दिया था. तुम मेरे दिल में बस गई हो. तुम सिर्फ मेरी हो और मेरी hi रहोगे. किसी और की होने नहीं दूंगा. और तू----

सिमरन हाथ उठा के टोकती हुई... बस बस दीखते में हीरो लगते हो तो क्या किसी फ़िल्मी हीरो के जैसे डायलाग भी बोलोगे.

राज--- हाहाहा ये खूब कहा तुमने मेरी जान.

सिरमन हैरान होक. ग़ुस्सा भी उसे आ गया था... मेररररररररीईईई jaaaaaaaaaaaaannnnn

शट योर माउथ स्टुपिड. मेरे एक hi वॉर पर तुम चित हो गए हो. अभी मैंने दूसरा वॉर भी नहीं किया तुमपर.. जाओ अब पहले पट्टी करवा कर ठीक हो जाओ. और मेरे दूसरे वॉर के लिए भी खुद को तैयार कर लो. जल्द hi मैं फिरसे तुमसे मिलोगी. सिमरन जाने लगी तोह राज ने लेफ्ट हैंड से सिमरन को पकड़ लिया.

सिमरन लड़खड़ा कर पीछे को मुड़ी. मुद कर राज को ग़ुस्से से देखने लगी.

सिमरन-- हाथ छोडो मेरा.. सिमरन राज के लुंड पर किक मरने के लिए खुद को तोलने लगी. राज ने देर नहीं लगाई और लेफ्ट हैंड से hi सिमरन को अपने साथ सत्ता लिया. लेफ्ट हैंड को सिमरन की कमर पर कस्ते हुए सिमरन को अपने साथ भींच लिया. सिमरन का ग़ुस्सा इन्तहा को पोहचने लगा. सिमरन कुछ बोलती. राज ने खून वाली पूरी हथेली सिमरन के माथे पर रगड़ दी. सिमरन हक्की बक्की रह गई तो राकेश वर्मा ख़ुशी से चीखते हुए अपनी जंग पर हाथ मार गए. ये लगाया है तुमने राज बीटा सिक्सर... शाबाश.. बहुत अच्छे.

सिमरन हरिअत से राज को देखने लगी और राज होंटो पर स्माइल सजाये सिमरन को देखने लगा. राज का चेहरा खून से लटपट था तोह सिमरन का पूरा माथा, पूरी मांग खून से भर गई थी. राज ने फिर दोनों हाथों से सिमरन के चेहरे को पकड़ और फिरसे सिमरन के होंटो को अपने होंटो में भर लिया. सिमरन तोह शॉकेड थी. राज के किश पर धयान नहीं दे पाई और राज सुकून से सिमरन को किश करने लगा.

राकेश वर्मा आज लाइव अपनी पोती की और राज की किश मालाहज़ा फार्मा रहे थे. बहुत खुश थे वह. अब तोह सिमरन राज की पत्नी बन गई थी. राज को किश करने का परमिट भी मिल चूका था.

राज सुकून से सिमरन के होंटो का खुनी रास पीटा रहा. आस पास के लोगों के तब्सरे बढे तोह सिमरन होश में आ गई. राज के सीने पर दोनों हाथ रखते हुए ज़ोर का धक्का राज को दिया और चीखने चिल्लाने लगी.

सिमरन-- कुत्ते कमीने ये तुमने क्या किया.. m..main.. मैं तुम्हारी जान ले लुंगी. सिमरन ग़ुस्से पागल होक चरों और देखने लगी. जो उसे जानते थे वह वहां से खिसकने लगे. सिरमन फिर भाग के गाड़ी की और बढ़ी और दूर खोल कर डैशबोर्ड के अंदर से पिस्तौल निकल लिया राज को शूट करने के लिए. उसी समय राकेश वर्मा भी दौड़ते हुए सिमरन के पास पोहच गए.

वर्मा-- सिमरन बेटी ये क्या कर रही हो.. सिमरन शेरनी की तरह अपने दाद्दु को देखते हुए चिल्लाई.. आज उस कुत्ते को मैं ज़िंदा नहीं छोडूंगी दाद्दु. बहुत बड़ा अपमान किया है उस दो कोड़ी के इंसान के. उसकी हिम्मत भी कैसे हुई मेरी मांग भरने की. नहीं दाद्दु उसे ज़िंदा रहना का कोई हक़ नहीं है...

वर्मा-- वो तोह जा चूका है सिमरन बेटी.. दाद्दु मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले तोह सिमरन नागिन की तरह पलट कर देखने लगी. राज सच में hi सिमरन से अलग होने के बाद बाइक उठा के खिसक लिया था. हाहाहाहा... हरामी था इस दुन्या का सबसे बड़ा हरामी.

सिमरन को अपनी ज़िन्दगी में दूसरी बार बेबसी का एहसास हुआ था. गाड़ी में बैठी. पिस्तौल साइड सीट पर फेंका और घर की और गाडी दौड़ने लगी.

वर्मा-- हे भगवन आज घर पर सबको बचा लेना.. आज बहुत ग़ुस्से में है मेरी पोती. भगवन तेरा शुक्र है, जो तूने मेरी सिरफिरी पोती की ज़िन्दगी में राज को भेज दिए.

राकेश वर्मा गाडी में बैठे और घर पर फोन करने लगे. सब को बताना चाहते थे. सिमरन का ग़ुस्सा आज हमेशा से बढ़ा हुआ. सब अपना अपना बचाओ कर लें. कहीं किसी को टपका hi न दे...
 
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