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- Dec 5, 2013
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राज खाना खा के वही कमरे में hi रहा. मौसी कुछ देर बाद राज के लिए चाय और कपडे ले आई.
राज-- चची ये
मौसी-- चाय तो हर कोई पिता है बीटा. और कपडे इसलिए ले हों, तुम्हारे पहले वाले कपडे बहुत ख़राब हाँ. चाय पि के इसे बदल लेना.
मौसी कपडे और चाय रख कर चली गई. राज हरामी पीछे से मौसी की गांड को देखते हुए सोचने लगा. मौसी कितनी ग्राम होगी अआप्की गांड. उफ़ कितने समय से मौसा का लुंड नहीं गया होगा आपकी गांड. गया भी होगा क नहीं. नहीं गया तोह फिर तोह मेरे डबल मज़े हो जायेंगे.
वही कॉलेज में इशिता गुमसुम सी थी. उसकी फ्रेंड्स उसे देख कर हैरान थी. इशिता ऐसी तोह कभी नहीं थी.
अब इशिता उसे क्या बताती. कल से उसकी हालत किसी है. साली छूट रिसना बंद hi नहीं हो रही.. अपनी सभी फ्रेंड्स में इशिता चुपचाप थी.
एक्ने उसके बूब्स को पकड़ कर दबाया तोह इशिता चीख पड़ी-- संजना कुत्तिया तुझे कितनी बार कहा है मेरे बूब्स मत दबाया कर..
संजना जो राज की मौसी की बेटी थी. वो इशिता की बेस्ट फ़िरेन्द भी थी. बड़ी चालू लड़की थी. अक्सर hi इशिता के बूब्स दबा दिए करती थी.
संजना-- क्या करूँ यार. तेरे बूब्स कसम से बहुत अट्रैक्टिव हाँ. बार बार मन होने लगता है इन्हे दबाने का.
दूसरी फ्रेंड्स भी है पड़ी.
इशिता-- तेरे भी तोह किसी से काम नहीं है कामिनी.. मैंने कभी दबा दिए न तोह--
संजना-- हाय दबा ने. कितनी बार कहा है तुझे, दबा दिया कर. मुझे तोह मज़ा hi आयेगा न. देख यार मैं कितनी हॉट हों. मुझे और भी हॉट बना दे यार. कसम से बहुत मचल रही हों में..
इशिता है पड़ी. पर उसकी छूट से दो बूंदें और ज़रूर टपक गई थी. राज के लुंड को देख कर उसकी बेचैनी बहुत बढ़ गई थी. पहले वो जो थोड़े से मज़े के लिए मचल रही थी. अब उसके अंदर का मौसम कुछ और hi डिमांड कर रहा था.
संजना कॉलेज से घर पोहंची तोह घर में कोई और नहीं लौटा था.
संजना सबसे पहले अपने कमरे में गयी. कपड़ चेंज किये और दादी के कमरे में जा पोहंची. दादी बीमार थी अक्सर hi लेती रहा करती थी.
मौसी के परिवार का परिचय
purnima----70..mahesh माँ
महेश मौसा--47
सुनैना मौसी-46
रुपाली..25
वैशाली.22
संजना.21
अखिल--20
संजना जितनी नटखट थी, उतना hi अपनी दादी से प्यार करती थी, उनकी केयर किया करती थी.
दादी-- तू लौट आयी मेरी बच्ची.
संजना-- हाँ दादी. आप किसी हाँ अब
दादी हास्के-- मई तोह अब आखरी सांस तक ऐसे hi रहने वाली हो संजना बेटी. अब उम्र भी तोह हो गई है न.
संजना -- ऐसा न कहा करें आप दादी. भगवन आपको मेरी उम्र भी लगा दे.. 100 साल आप और जियें
दादी-- अब तोह बस एक hi छह है मेरे दिल में संजना बेटी
संजना शोखी से-- आप हम सब की शादी होते देखना चाहती हाँ. हमारे बच्चू को अपनी गॉड में लेके प्यार करना चाहती हाँ. उन्हें चूमना चाहती हाँ. दादी आप रोज़ hi ये बात बोलती रहती हाँ. देखना भगवन आप की ये छह ज़रूर पूरी करेंगे.
दादी भी मुस्कुरा पड़ी-- और कर भी क्या सकती हों संजना बेटी. अब तोह बाकि की बची ज़िन्दगी इसी बिस्तर पर hi पूरी करनी है.
संजना-- दादी आप भी तोह हिम्मत नहीं करती.. डॉक्टर ने कितना कहा आप खुद से हिम्मत करें तोह आपकी बीमारी काम हो सकती है. आप ज़यादा से ज़यादा चला करें. हर टाइम लेटने से आपकी ताक़त और भी काम हो रही है दादी.
दादी-- क्या करूँ संजना बेटी. सच में मेरी हिम्मत नहीं होती. थोड़ा चलने के बाद hi थक जाती हों.
मौसी--- संजना बेटी तू नहीं समझा सकती अपनी दादी को. तुम्हारी दादी जितनी हिम्मत वाली हुआ करती थी, अब उतनी hi हिम्मत खो बैठी हाँ.
राज भी द्वार पे आ के सुनने लगा. वो अंदर आया और दादी के पेअर छू लिए.. दादी और संजना उसे देख कर हैरान हो गई. मौसी ने अभी दादी को भी नहीं बताया था. संजना तोह अभी अभी आई थी.
राज-- दादी आपकी खोई हिम्मत मई लौटा के दे सकता हों.
मौसी खुश हुई तोह संजना हैरान हो गई. दादी भी हैरान हुई.
दादी--- सुनैना बेटी कौन है ये लड़का. पहले तोह कभी नहीं देखा.
मौसी-- माँ जी मेने इसे काम पे रखा है. बहुत अच्छा लड़का है. घर का काम कर दिए करेगा
संजना राज को ऊपर से निचे तक देख रही थी. राज शलवार कमीज़ में विलेज बॉय hi दिख रहा था. पर बॉडी सहोदय से एक पहलवान. संजना राज को बड़े घोर से देख रही थी.
दादी-- बीटा तुम कोण हो कहाँ से आये हो. सूरत से तोह किसी भले घर के लगते हो. किसी गाओं से आये हो क्या.
संजना-- माँ ये ड्रेस तोह पापा का है न
मौसी-- हाँ उनका hi है. इसके पास कपडे नहीं थे तोह तेरे पापा के दे दिए पहनने को.
राज बीएड के करीब दादी के पास बेथ गया और दादी के पाऊँ दबाने लगा. राज के हथु में ताक़त थी तोह दादी को कुछ सुकून मिलने लगा. सुनैना या बच्चियां दबा दिए करती थी. घर का कोई मर्द उन्हें नहीं दबाता था. अब लड़कियों के हथु में ताक़त तोह होती नहीं. कैसे दादी को सुकून मिलता. राज की ताक़त के आगे दादी सुकून से होने लगी.
दादी खुश हो गई. राज सर झुका क्र दादी के पेअर दबाने लगा. मौसी ये देख कर और भी ज़यादा खुश हो गई थी. राज कितना अच्छा लड़का है, मौसी मैं में बोलने लगी. राज का ऐसा करना मौसी को बहुत पसंद आया था.
मौसी राज को दादी और संजना का बताने लगी और घर के दूसरे मेंबर्स के बारे में बताने लगी. राज तोह पहल से hi सब जनता था.
संजना उठ के चली गई. राज दादी और मौसी बातें करने लगे. राज से उसके घर के बारे में पूछने लगी. राज हरामी अपनी माँ और बहनो की अच्छी बातें दोनों को बताने लगा. बड़ी बेहेन की टूटी शादी को भी मिर्च मसाला लगा के बताने लगा. राज हरामी ऐसी एक्टिंग करने कर रहा था. सुनकर मौसी और दादी दोनों की आँखों में आंसू आ गए थे. दोनों राज के झूठे दर्द के आंसू बहाने लगी.
राज ने फिर दोनों को चुटकले सुनाने शुरू कर दिए.. दोनों हसने लगी.. दोनों कुछ मिंटो में hi राज की ऐसी दीवानी हुई, ऐसे लगने लगा अब राज के बिना वो रह नहीं पाएंगी.
राज-- चची गाओं में रहके बहुत कुछ जान गया हों. शहर में भी ऐसा आयल मिल जाता है, जिसकी मालिश से दादी एकदुम्म ठीक हो जाएँगी. माँ और चची भी मुझसे मालिश करवा कर घोड़ी के जैसी भगति रहती हाँ.
राज ने बड़े सीधे अंदाज़ में कहा. मौसी और दादी तोह सुनकर हैरान hi रह गई.
दादी-- तुम अब भी अपनी माँ और चची की मालिश करते हो
राज-- हानन दादी.. माँ और चची की अब भी में मालिश कर दिए करता हों. क्यों इसमें कुछ बुरा है क्या. माँ तो माँ होती है न दादी और चची भी तोह माँ के सम्मान hi होती हाँ न.
मौसी मैं में.. कितना सीधा लड़का है.. इसकी माँ और चची भोली तोह नहीं हो सकती. ज़रूर रघु बीटा hi बहुत अच्छा होगा. तभी तोह वो अब भी इससे मालिश कर लेती हाँ.
दादी मैं में--- पर में तोह नहीं नहीं करवा सकती इससे मालिश.. मालिश का काम तोह महिला hi महिला की कर सकती हाँ.
राज-- दादी मेरी मालिश से आप भी माँ और चची के जैसी भली चंगी हो जाएँगी. देखना सब आपको देख कर कीटने खुश होंगे.
दादी घबराई के-- नहीं.. नहीं रघु बीटा. में ऐसे hi ठीक हों.
मौसी जो राज को लेके नाना नानी के जैसे hi कुछ अपनापन फील करने लगी थी. और राज बहुत सीधा और प्यारा लड़का भी दिख रहा था.
मौसी-- माँ जी इतनी देर से रघु बीटा आपके पाऊँ दबा रहे हाँ. कितना फर्क महसूस कर प् रही हाँ आप. हमारे और रघु बेटे के दबाने में..
दादी -- बहुत ज़यादा सुनैना बेटी. ऐसे लगता है, जैसे मेरे अंदर ताक़त आने लगी हो. साडी थकन भी उत्तरी हुई लग रही है
मौसी-- तोह मेरा ख्याल है माँ जी. आपको रघु बेटे से मालिश करवा लेनी चाहिए.
दादी-- ये तुम क्या कह रही हो सुनैना.. दादी कुछ सीरियस होक बोली
मौसी-- रघु बीटा तुम जाओ अपने कमरे में. में अभी आती हों.
राज बहार चला गया तोह मौसी बोली-- माँ जी, आप आखरी सांस तक इसी बिस्तर पर hi पड़ी रहना चाहती हाँ क्या
दादी-- नहीं मेने ऐसा कब कहा. में hi क्या, कोई भी बीएड पर लेते लेते पूरी उम्र क्यों बिताया चाहेगा. पर मेरी तोह मज़बूरी है न.
मौसी-- कोई मज़बूरी नहीं है माँ जी. डॉक्टर ने भी कहा है. आप हम्मत करें तोह जल्द अच्छी भी हो सकती हाँ. रघु बेटे में ताक़त भी है और उसे सलीका भी है. आप करवा लें उससे मालिश.. मुझे पक्का यकीं है, दो चार दिन में hi आप बहुत अच्छी हो जाएँगी
दादी-- पर सुनैना बेटी में कैसे उसके सामने अपने कपडे
मौसी-- सरे उतरने की क्या ज़रूरत है माँ जी. ब्रा और चड्डी पहने रहे अआप. में भी कमरे में आपके साथ रहूंगी.
दादी- तुम भी... नहीं नहीं.. फिर तोह मुझे और भी ज़यादा शर्म आएगी. नहीं. नहीं में नहीं करवाने वाली कोई मालिश वालिश
मौसी-- वो तो अब आपको करवानी hi पड़ेगी माँ जी. में आपको ऐसे हमेशा बिस्तर पर पड़े नहीं देख सकती.. मौसी अटल फैसले से बोली तोह दादी मौसी को देखने लगी..
दादी मैं में--- अहह बिगड़े बेटे ने कभी भी मेरी बहु को सुख नहीं दिया. फिर भी सदा मुझे एक माँ बराबर hi सम्मान दिए है. अब भी मेरी चिंता में hi सब कर रही है.. चलो मान लेती हों इसकी बात. इसका दिल भी नहीं दुख सकती मैं. पहले hi बहुत दुखी है. तन से भी और मैं से भी. पर मैं इसके सामने मालिश नहीं करवाऊंगी. इतनी हिम्मत नहीं है. एक लड़के से मालिश करवाएं और मेरी बहु मुझे देखे
दादी-- तुम नहीं मानती तोह ठीक है. मैं करवा लेती हों मालिश.. पर तुम कमरे में नहीं रहूगी.
मौसी खिल उठी-- मुझे तोह बस आपको अच्छा देखना है. जैसे आपको सही लगे और मुझे रघु बेटे पर भी पुर पूरा विश्वास भी है.
मौसी ने जा के राज से कह दिए.. जाओ और आयल ले आओ.. राज भी चहक उठा और मौसी से पैसे लेके 2 घंटे में hi आयल लेके आ गया.
कई किसम के आयल को राज ने मिक्स कर दिए था. टोटका कोई था नहीं. बस राज तोह मज़े मरना चाहता था. और हरामी था पूरा का पूरा. जनता था मालिश करने से कोई भी भला चंगा हो जाता है. और मालिश के साथ किसी महिला को अगर लुंड भी मिल जाये तोह फिर उसके ठीक होने में देर नहीं रहती..
राज घर में दाखिल हुआ तोह शाम होने में 1 घंटा बाकि था और महेश अभी नहीं लौटा था. बाकि सब घर में थे.
राज घर पोहंचा तोह सब उसे ड्राइंग रूम में hi मिल गए. घर बड़ा था. दो मंज़िला था. निचे वाली मंज़िल पर च कमरे थे और चरों कमरे के बीच के बैठने की जगा थी. उसे hi ड्राइंग रूम का नाम भी दिए गया था.
रुपाली, वैशाली और संजना, अखिल ऊपर वाले कमरों में hi रहते थे. दादी, मौसी और मौसा निचे वाले कमरों में. अब राज भी निचे रहने वाला था.
सब राज को देखने लगे. मौसी, दादी और संजना राज से पहले hi मिल चुके थे. वैशाली, रुपाली और अखिल राज को देखने लगा.. राज हरामी से एक सीधा साधा लल्लू टाइप लड़का दिखाई देने लगा.
मौसी-- आ गए तुम रघु बीटा.. इनसे मिलो ये हाँ, रुपाली, वैशाली और अखिल.. और ये हाँ रघु आज से यही काम करेगा.
सभी मोडरें लाइफ जीने वाले थे. सभी राज को बड़े घोर से देखने लगा. अखिल कुछ ज़यादा hi धयान से देख रहा था.
राज कुछ कंफ्यूज होने की एक्टिंग करने लगा. सबको लगा, ऐसे देखते हुए रहे तोह कहीं गिर वीर न जाए. सा नोर्मल्ली राज को देखने लगे.
राज-- चची ये
मौसी-- चाय तो हर कोई पिता है बीटा. और कपडे इसलिए ले हों, तुम्हारे पहले वाले कपडे बहुत ख़राब हाँ. चाय पि के इसे बदल लेना.
मौसी कपडे और चाय रख कर चली गई. राज हरामी पीछे से मौसी की गांड को देखते हुए सोचने लगा. मौसी कितनी ग्राम होगी अआप्की गांड. उफ़ कितने समय से मौसा का लुंड नहीं गया होगा आपकी गांड. गया भी होगा क नहीं. नहीं गया तोह फिर तोह मेरे डबल मज़े हो जायेंगे.
वही कॉलेज में इशिता गुमसुम सी थी. उसकी फ्रेंड्स उसे देख कर हैरान थी. इशिता ऐसी तोह कभी नहीं थी.
अब इशिता उसे क्या बताती. कल से उसकी हालत किसी है. साली छूट रिसना बंद hi नहीं हो रही.. अपनी सभी फ्रेंड्स में इशिता चुपचाप थी.
एक्ने उसके बूब्स को पकड़ कर दबाया तोह इशिता चीख पड़ी-- संजना कुत्तिया तुझे कितनी बार कहा है मेरे बूब्स मत दबाया कर..
संजना जो राज की मौसी की बेटी थी. वो इशिता की बेस्ट फ़िरेन्द भी थी. बड़ी चालू लड़की थी. अक्सर hi इशिता के बूब्स दबा दिए करती थी.
संजना-- क्या करूँ यार. तेरे बूब्स कसम से बहुत अट्रैक्टिव हाँ. बार बार मन होने लगता है इन्हे दबाने का.
दूसरी फ्रेंड्स भी है पड़ी.
इशिता-- तेरे भी तोह किसी से काम नहीं है कामिनी.. मैंने कभी दबा दिए न तोह--
संजना-- हाय दबा ने. कितनी बार कहा है तुझे, दबा दिया कर. मुझे तोह मज़ा hi आयेगा न. देख यार मैं कितनी हॉट हों. मुझे और भी हॉट बना दे यार. कसम से बहुत मचल रही हों में..
इशिता है पड़ी. पर उसकी छूट से दो बूंदें और ज़रूर टपक गई थी. राज के लुंड को देख कर उसकी बेचैनी बहुत बढ़ गई थी. पहले वो जो थोड़े से मज़े के लिए मचल रही थी. अब उसके अंदर का मौसम कुछ और hi डिमांड कर रहा था.
संजना कॉलेज से घर पोहंची तोह घर में कोई और नहीं लौटा था.
संजना सबसे पहले अपने कमरे में गयी. कपड़ चेंज किये और दादी के कमरे में जा पोहंची. दादी बीमार थी अक्सर hi लेती रहा करती थी.
मौसी के परिवार का परिचय
purnima----70..mahesh माँ
महेश मौसा--47
सुनैना मौसी-46
रुपाली..25
वैशाली.22
संजना.21
अखिल--20
संजना जितनी नटखट थी, उतना hi अपनी दादी से प्यार करती थी, उनकी केयर किया करती थी.
दादी-- तू लौट आयी मेरी बच्ची.
संजना-- हाँ दादी. आप किसी हाँ अब
दादी हास्के-- मई तोह अब आखरी सांस तक ऐसे hi रहने वाली हो संजना बेटी. अब उम्र भी तोह हो गई है न.
संजना -- ऐसा न कहा करें आप दादी. भगवन आपको मेरी उम्र भी लगा दे.. 100 साल आप और जियें
दादी-- अब तोह बस एक hi छह है मेरे दिल में संजना बेटी
संजना शोखी से-- आप हम सब की शादी होते देखना चाहती हाँ. हमारे बच्चू को अपनी गॉड में लेके प्यार करना चाहती हाँ. उन्हें चूमना चाहती हाँ. दादी आप रोज़ hi ये बात बोलती रहती हाँ. देखना भगवन आप की ये छह ज़रूर पूरी करेंगे.
दादी भी मुस्कुरा पड़ी-- और कर भी क्या सकती हों संजना बेटी. अब तोह बाकि की बची ज़िन्दगी इसी बिस्तर पर hi पूरी करनी है.
संजना-- दादी आप भी तोह हिम्मत नहीं करती.. डॉक्टर ने कितना कहा आप खुद से हिम्मत करें तोह आपकी बीमारी काम हो सकती है. आप ज़यादा से ज़यादा चला करें. हर टाइम लेटने से आपकी ताक़त और भी काम हो रही है दादी.
दादी-- क्या करूँ संजना बेटी. सच में मेरी हिम्मत नहीं होती. थोड़ा चलने के बाद hi थक जाती हों.
मौसी--- संजना बेटी तू नहीं समझा सकती अपनी दादी को. तुम्हारी दादी जितनी हिम्मत वाली हुआ करती थी, अब उतनी hi हिम्मत खो बैठी हाँ.
राज भी द्वार पे आ के सुनने लगा. वो अंदर आया और दादी के पेअर छू लिए.. दादी और संजना उसे देख कर हैरान हो गई. मौसी ने अभी दादी को भी नहीं बताया था. संजना तोह अभी अभी आई थी.
राज-- दादी आपकी खोई हिम्मत मई लौटा के दे सकता हों.
मौसी खुश हुई तोह संजना हैरान हो गई. दादी भी हैरान हुई.
दादी--- सुनैना बेटी कौन है ये लड़का. पहले तोह कभी नहीं देखा.
मौसी-- माँ जी मेने इसे काम पे रखा है. बहुत अच्छा लड़का है. घर का काम कर दिए करेगा
संजना राज को ऊपर से निचे तक देख रही थी. राज शलवार कमीज़ में विलेज बॉय hi दिख रहा था. पर बॉडी सहोदय से एक पहलवान. संजना राज को बड़े घोर से देख रही थी.
दादी-- बीटा तुम कोण हो कहाँ से आये हो. सूरत से तोह किसी भले घर के लगते हो. किसी गाओं से आये हो क्या.
संजना-- माँ ये ड्रेस तोह पापा का है न
मौसी-- हाँ उनका hi है. इसके पास कपडे नहीं थे तोह तेरे पापा के दे दिए पहनने को.
राज बीएड के करीब दादी के पास बेथ गया और दादी के पाऊँ दबाने लगा. राज के हथु में ताक़त थी तोह दादी को कुछ सुकून मिलने लगा. सुनैना या बच्चियां दबा दिए करती थी. घर का कोई मर्द उन्हें नहीं दबाता था. अब लड़कियों के हथु में ताक़त तोह होती नहीं. कैसे दादी को सुकून मिलता. राज की ताक़त के आगे दादी सुकून से होने लगी.
दादी खुश हो गई. राज सर झुका क्र दादी के पेअर दबाने लगा. मौसी ये देख कर और भी ज़यादा खुश हो गई थी. राज कितना अच्छा लड़का है, मौसी मैं में बोलने लगी. राज का ऐसा करना मौसी को बहुत पसंद आया था.
मौसी राज को दादी और संजना का बताने लगी और घर के दूसरे मेंबर्स के बारे में बताने लगी. राज तोह पहल से hi सब जनता था.
संजना उठ के चली गई. राज दादी और मौसी बातें करने लगे. राज से उसके घर के बारे में पूछने लगी. राज हरामी अपनी माँ और बहनो की अच्छी बातें दोनों को बताने लगा. बड़ी बेहेन की टूटी शादी को भी मिर्च मसाला लगा के बताने लगा. राज हरामी ऐसी एक्टिंग करने कर रहा था. सुनकर मौसी और दादी दोनों की आँखों में आंसू आ गए थे. दोनों राज के झूठे दर्द के आंसू बहाने लगी.
राज ने फिर दोनों को चुटकले सुनाने शुरू कर दिए.. दोनों हसने लगी.. दोनों कुछ मिंटो में hi राज की ऐसी दीवानी हुई, ऐसे लगने लगा अब राज के बिना वो रह नहीं पाएंगी.
राज-- चची गाओं में रहके बहुत कुछ जान गया हों. शहर में भी ऐसा आयल मिल जाता है, जिसकी मालिश से दादी एकदुम्म ठीक हो जाएँगी. माँ और चची भी मुझसे मालिश करवा कर घोड़ी के जैसी भगति रहती हाँ.
राज ने बड़े सीधे अंदाज़ में कहा. मौसी और दादी तोह सुनकर हैरान hi रह गई.
दादी-- तुम अब भी अपनी माँ और चची की मालिश करते हो
राज-- हानन दादी.. माँ और चची की अब भी में मालिश कर दिए करता हों. क्यों इसमें कुछ बुरा है क्या. माँ तो माँ होती है न दादी और चची भी तोह माँ के सम्मान hi होती हाँ न.
मौसी मैं में.. कितना सीधा लड़का है.. इसकी माँ और चची भोली तोह नहीं हो सकती. ज़रूर रघु बीटा hi बहुत अच्छा होगा. तभी तोह वो अब भी इससे मालिश कर लेती हाँ.
दादी मैं में--- पर में तोह नहीं नहीं करवा सकती इससे मालिश.. मालिश का काम तोह महिला hi महिला की कर सकती हाँ.
राज-- दादी मेरी मालिश से आप भी माँ और चची के जैसी भली चंगी हो जाएँगी. देखना सब आपको देख कर कीटने खुश होंगे.
दादी घबराई के-- नहीं.. नहीं रघु बीटा. में ऐसे hi ठीक हों.
मौसी जो राज को लेके नाना नानी के जैसे hi कुछ अपनापन फील करने लगी थी. और राज बहुत सीधा और प्यारा लड़का भी दिख रहा था.
मौसी-- माँ जी इतनी देर से रघु बीटा आपके पाऊँ दबा रहे हाँ. कितना फर्क महसूस कर प् रही हाँ आप. हमारे और रघु बेटे के दबाने में..
दादी -- बहुत ज़यादा सुनैना बेटी. ऐसे लगता है, जैसे मेरे अंदर ताक़त आने लगी हो. साडी थकन भी उत्तरी हुई लग रही है
मौसी-- तोह मेरा ख्याल है माँ जी. आपको रघु बेटे से मालिश करवा लेनी चाहिए.
दादी-- ये तुम क्या कह रही हो सुनैना.. दादी कुछ सीरियस होक बोली
मौसी-- रघु बीटा तुम जाओ अपने कमरे में. में अभी आती हों.
राज बहार चला गया तोह मौसी बोली-- माँ जी, आप आखरी सांस तक इसी बिस्तर पर hi पड़ी रहना चाहती हाँ क्या
दादी-- नहीं मेने ऐसा कब कहा. में hi क्या, कोई भी बीएड पर लेते लेते पूरी उम्र क्यों बिताया चाहेगा. पर मेरी तोह मज़बूरी है न.
मौसी-- कोई मज़बूरी नहीं है माँ जी. डॉक्टर ने भी कहा है. आप हम्मत करें तोह जल्द अच्छी भी हो सकती हाँ. रघु बेटे में ताक़त भी है और उसे सलीका भी है. आप करवा लें उससे मालिश.. मुझे पक्का यकीं है, दो चार दिन में hi आप बहुत अच्छी हो जाएँगी
दादी-- पर सुनैना बेटी में कैसे उसके सामने अपने कपडे
मौसी-- सरे उतरने की क्या ज़रूरत है माँ जी. ब्रा और चड्डी पहने रहे अआप. में भी कमरे में आपके साथ रहूंगी.
दादी- तुम भी... नहीं नहीं.. फिर तोह मुझे और भी ज़यादा शर्म आएगी. नहीं. नहीं में नहीं करवाने वाली कोई मालिश वालिश
मौसी-- वो तो अब आपको करवानी hi पड़ेगी माँ जी. में आपको ऐसे हमेशा बिस्तर पर पड़े नहीं देख सकती.. मौसी अटल फैसले से बोली तोह दादी मौसी को देखने लगी..
दादी मैं में--- अहह बिगड़े बेटे ने कभी भी मेरी बहु को सुख नहीं दिया. फिर भी सदा मुझे एक माँ बराबर hi सम्मान दिए है. अब भी मेरी चिंता में hi सब कर रही है.. चलो मान लेती हों इसकी बात. इसका दिल भी नहीं दुख सकती मैं. पहले hi बहुत दुखी है. तन से भी और मैं से भी. पर मैं इसके सामने मालिश नहीं करवाऊंगी. इतनी हिम्मत नहीं है. एक लड़के से मालिश करवाएं और मेरी बहु मुझे देखे
दादी-- तुम नहीं मानती तोह ठीक है. मैं करवा लेती हों मालिश.. पर तुम कमरे में नहीं रहूगी.
मौसी खिल उठी-- मुझे तोह बस आपको अच्छा देखना है. जैसे आपको सही लगे और मुझे रघु बेटे पर भी पुर पूरा विश्वास भी है.
मौसी ने जा के राज से कह दिए.. जाओ और आयल ले आओ.. राज भी चहक उठा और मौसी से पैसे लेके 2 घंटे में hi आयल लेके आ गया.
कई किसम के आयल को राज ने मिक्स कर दिए था. टोटका कोई था नहीं. बस राज तोह मज़े मरना चाहता था. और हरामी था पूरा का पूरा. जनता था मालिश करने से कोई भी भला चंगा हो जाता है. और मालिश के साथ किसी महिला को अगर लुंड भी मिल जाये तोह फिर उसके ठीक होने में देर नहीं रहती..
राज घर में दाखिल हुआ तोह शाम होने में 1 घंटा बाकि था और महेश अभी नहीं लौटा था. बाकि सब घर में थे.
राज घर पोहंचा तोह सब उसे ड्राइंग रूम में hi मिल गए. घर बड़ा था. दो मंज़िला था. निचे वाली मंज़िल पर च कमरे थे और चरों कमरे के बीच के बैठने की जगा थी. उसे hi ड्राइंग रूम का नाम भी दिए गया था.
रुपाली, वैशाली और संजना, अखिल ऊपर वाले कमरों में hi रहते थे. दादी, मौसी और मौसा निचे वाले कमरों में. अब राज भी निचे रहने वाला था.
सब राज को देखने लगे. मौसी, दादी और संजना राज से पहले hi मिल चुके थे. वैशाली, रुपाली और अखिल राज को देखने लगा.. राज हरामी से एक सीधा साधा लल्लू टाइप लड़का दिखाई देने लगा.
मौसी-- आ गए तुम रघु बीटा.. इनसे मिलो ये हाँ, रुपाली, वैशाली और अखिल.. और ये हाँ रघु आज से यही काम करेगा.
सभी मोडरें लाइफ जीने वाले थे. सभी राज को बड़े घोर से देखने लगा. अखिल कुछ ज़यादा hi धयान से देख रहा था.
राज कुछ कंफ्यूज होने की एक्टिंग करने लगा. सबको लगा, ऐसे देखते हुए रहे तोह कहीं गिर वीर न जाए. सा नोर्मल्ली राज को देखने लगे.