Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 8 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

राज-- सुनैना आप बहुत सुंदर हाँ, इस रूप में तोह क़यामत ध रही हाँ. इतनी सुंदर होक भी आपने कभी खुद पर धयान नहीं दिए.

सुनैना खुश हो गई. एंटी देर से खुद को अपने पति के लिए सजा रही थी. राज ने तारीफ करि तोह उसे लगा, उसकी म्हणत सफल हुई. उसके होंटो पर एक दिलकश मुस्कान टेरने लगी.

राज-- सुनैना मैं अब क्या कहता है आपका.

सुनैना बोलना तोह चाहती तोह पर बोल न पाई और राज को देखने लगी.

राज- अब भी आप में जीजाक बाकि है सुनैना. जो भी मन में आ रहा है, आप कर सकती हाँ.

सुनैना- पतिदेव जी, मन में तोह बहुत कुछ आने लगा है. पर सोचती हों कहीं आपको बुरा न लग जाये. आप मुझे लेके कुछ और न सोचने लगें. एक पत्नी हमेशा अपने पति से डर्टी रहती है न.

राज-- क्या हम केवल पति पत्नी hi हाँ. कुछ और नहीं. क्या आपको शक है, मुझे जो आपसे मोहब्बत है. या आपको मुझसे जो मोहब्बत है. उसे लेकरके कुछ डाउट में हाँ.

सुनैना- नहीं ऐसी बात नहीं है जी.

राज- तो फिर करें आप अपने मन की. राज बीएड से नहीं उतरा था. सुनैना को और भी खोल रहा था. उसकी जीजाक काम कर रहा था.

सुनैना- हर लड़की, हर औरत की छह होती है. वो अपनी प्रेमी को, अपने पति को सबसे सूंदर दिखे. सुनैना हिम्मत पकड़ते हुए बोली

राज- हाँ ये बात तो है. और होनी भी चाहिए

सुनैना- कभी मेने भी सपने देखे थे. अपने पति के साथ खूब प्यार करने के, मस्ती करने के. पर ऐसा कभी कर नहीं पाई थी. अब फिरसे मेरे मैं में हलचल मचने लगी है. फिरसे बरसों पहले देखे सपने पुरे करने की छह मन में पलने लगी है.

राज-- ये तोह और भी अच्छी बात है सुनैना जी

सुनैना- एक पति अपनी पत्नी से प्यार भी करता है, और विश्वास भी. एक पत्नी का सब कुछ उसके पति का hi होता है न. तोह पत्नी फिर अपने पति के सब कुछ को जैसे चाहे दिखा सकती है.

राज सुनैना का मतलब समझते हुए.

राज-- तो आपका भी मैं हो रहा है मुझे अपने शरीर के जलवे दिखने का.

सुनैना हाँ में सर हिला गयी. उसका चेहरा कुछ लाल पड़ने लगा था.

राज-- तो दिखाइए अपने पति को अपने जलवे. अपने सुंदर शरीर के नज़ारे दिखा कर हमें मोहित कर दें. हमें आज आपके शिव कुछ और दिखाई न दे. ऐसी बिजलिया गिराएं आप हमपर.

सुनैना शर्मा कर स्माइल मंद मंद मुस्कुराने लगी. उसे सब बहुत अच्छा लग रहा था. ऐसे जैसे वह जॉन हो गई हो और नयी नवेली पत्नी के जैसे अरमान अपने अंदर पलने लगी थी. ऐसे पति के लिए जो उसका प्रेमी भी हो.

सुनैना राज को स्माइल से देखती हुई अपनी साड़ी का पल्लू साइड कर गयी.

3.jpg


राज देखता रह गया. कमरे में लगी लाइट की रौशनी में सुनैना का सुंदर और गोरा शरीर चमकने लगा था.

सुनैना साइड हुई और ब्लाउज की ज़िप खोलने लगी.

4.jpg


राज सुनैना की धीरे धीरे खुलती ज़िप के कारण दिख रहे सुनैना के मस्त बदन को देखने लगा. चुचु पर नज़र पड़ी तोह राज बोल पड़ा-- वह क्या बात है, कुछ hi देर में इतने चमकदार हो गए हाँ आपके चुके सुनैना रानी.. सुनैना खुश हो गई और एक साइड से पूरा ब्लाउज खोल कर राज को देखने लगी.

5.jpg


सुनैना मस्त मूड में आती जा रही थी. राज का लुंड तोह था hi ऐसा. एक hi दृश्य उसके लुंड को खड़ा कर दिए करता था.

सुनैना-- स्वामी में कैसी दिख रही हों आपको.

राज-- रानी.. बिलकुल एक रानी से भी सुंदर.

सुनैना खिल उठी. राज बोलै-- और भी दिखाओ न मुझे अपने इस सुंदर शरीर के जलवे. राज अपने लुंड को मसलते हुए बोलै तोह सुनैना राज के खड़े लुंड को देख कर है पड़ी. ुस्य खूब बाज़ा आ रहा था. राज के साथ अपने मैं की करते हुए. अपने जलवो पर राज को बेचैन देख कर वह और भी खुश हो रही थी.

सुनैना राज को और भी ज़यादा गर्माने के लिए ब्लाउज उतर कर साड़ी के साथ पोज़ बना के राज को देखने लगी. बड़ी चमक बढ़ने लगी थी, सुनैना की आँखों में, सुनैना के चेहरे पर.

6.jpg


7.jpg
8.jpg


राज से रहा नहीं गया और बीएड से उतर पड़ा. सुनैना देख कर है पड़ी और राज को अपनी और आता देख कर निहारने लगी. और भी मस्त पोज़ बना के राज को घायल करने लगी. राज सुनैना के सामने पोहंचा और उसके चुके पकड़ लिए.

big-boobs-kanpur-milf-hot.jpg


राज-- सुनैना रानी हमें आपके ये चुके बहुत पसंद आये हाँ. इनका सारा दूध निकल कर मैं पीना चाहता हों क्या आप मुझे अपने चुचु का सारा दूध पिलायेंगी.

सुनैना को और क्या चाहिए था. यही तोह छह थी उसकी. यही तोह बरसों से मैं में दबाये जी रही थी. अपने मैं पंसद मर्द के साथ ऐसे मस्ती करे, प्यार करे. मिलान करे. इस के शिव कुछ और चाहा भी तो नहीं था कभी सुनैना ने.

राज ने सुनैना के चुके छोड़े तोह सुनैना अपने चुके पकड़ कर राज से बोली..

big-boobs-kanpur-milf-hot-pics.jpg


सुनैना- स्वामी इन चुके की भी एक हसरत हुआ करती है. ये भी प्यार के भूके हाँ. बच्चू को दूध पिलाये समय ये कभी खुश हो लिया करते थे. पर पति के प्यार के लिए ये भी उम्र भर तरसते रहे हाँ. हवस के चलते इनके साथ बहुत खेला गया है. इन्हे मज़े भी मिले हाँ. पर मन की शांति कभी नहीं मिली. ये मेरे मैं से जुड़े हुए हाँ न. मुझे प्यार नहीं मिला तोह ये भी प्यार को बरसों से तरसते रहे हाँ.. बरसों बाद आज मेरे साथ साथ इनकी भी किस्मत खुली है. मेरे साथ साथ आज इन्हे भी प्यार प्राप्त होने लगा है स्वामी जी. ये hi नहीं, मेरा एक एक अंग असली प्यार के लिए, आपके प्यार के लिए मचल रहा है. सम्मान के लिए मचल रहा है. जैसा प्यार और सम्मान आप दे रहे हाँ स्वामी जी. वैसे कभी मुझे या मेरे किसी अंग को प्राप्त नहीं हुआ. मुझ समेत आज मेरे एक एक अंग की किस्मत को बदल दें स्वामी जी. देर न करें आपकी पत्नी आपके असली प्यार के लिए बोहत मचल रही है.

राज तोह सुनैना की तड़प पर खुद भी तड़प उठा था. जितना दर्द काम करता था, उतना hi बाकि रह जाता था. जब तक राज सुनैना को पूरा नहीं प् लेता. तब तक सुनैना ऐसे hi मचलती रहने वाली थी.

राज ने सुनैना की आँखों में देखा तोह राज के लिए प्रेम की इन्तहा थी. राज ने सुनैना को गले से लगा लिया और चूमने लगा. सुनैना भी राज के गिर्द बहन लपेट कर राज के प्यार को महसूस करने लगी. सुनैना के अंदर अब सही मानो में सुरूर उतर रहा था.

राज के एक एक स्पर्श कर सुनैना मदहोश होती जा रही थी. राज ने खड़े खड़े hi सुनैना के पुरे चेहरे को चूमना शुरू कर दिया था. राज का खड़ा लुंड सुनैना की छूट पर दस्तक दे रहा था. पर राज ने या सुनैना ने उसपर धयान नहीं दिए. सुनैना तोह राज के चुम्बन पर hi मदहोश होने लगी थी.

राज ने फिर सुनैना को उठाया और बीएड पर ले आया. वहीँ सुनैना को लिटा कर राज सुनैना की ट्रांसपेरेंट साड़ी को खोलने लगा. निचे केवल पंतय में hi थी सुनैना. साड़ी अलग हुई तोह राज सुनैना के पैरों में आया और सुनैना के पैरों को छत्ता हुआ ऊपर जाने लगा.

सुनैना ने सर उठा कर राज को देखा और मुस्कुरा पड़ी. राज का ये अंदाज़ उसे बहुत भय था. राज कितने चाओ से उसके पुरे शरीर को चुम चाट रहा था. ऐसा सब करने की ज़यादा भी छह नहीं थी सुनैना के मैं में. पर राज केप्यार के अंदाज़ को देख कर, शिद्दत को देख कर सुनैना खुश हो गहि थी. यही तोह एक छह हुआ करती है एक नारी की.

राज बहुत अचे से सुनैना के मैं की सब समझते हुए उससे प्यार कर रहा था. सुनैना अब पूरी मस्त होने लगी थी. राज सुनैना के एक एक इंच को चूमता छत्ता सुनैना की छूट पर आ पोहंचा. पंतय के ऊपर नक् लगा कर वह सुनैना की छूट की स्मेल लेने लगा. सुनैना की छूट एक बार फिरसे गीली होने लगी थी. राज को मस्त स्मेल अपने अंदर उतरती महसूस हुई तोह उसका लुंड और भी झटके मारने लगा.

राज ने पंतय को हाथ से पकड़ कर निचे खेंच दिए. सुनैना ने गांड उठा कर राज को अपनी पंतय उतरने में मदद दी. पंतय उत्तरी तोह सुनैना बीएड पर पूरी नंगी लेती हुई थी.

राज सुअनीना के पुरे बदन को देखने लगा.

राज-- सुनैना मेरी रानी.. कैसा संगे मर्मर के जैसा शफाफ बदन है आपका. कितनी हसीं है आप. मेरे तोह भाग hi खुल गए जो आप मेरी पत्नी के रूप में मेरे सामने हाँ.

सुनैना राज को देखती हुई-- ऐसा नहीं है जी.. भाग तोह आज मेरे बरसों बाद खुले हाँ, जो मुझे आपके जैस पति मिला है. मेरी ऐसी किस्मत पहले कहाँ थी. अब आप के मेरी ज़िन्दगी में आ जाने से hi मेरी ज़िन्दगी में रंग उतरने लगे हाँ. ये सब तोह आपके कारण hi है स्वामी जी.

राज मुस्कुराया और फिर खुद को नंगा करने लगा. सुनैना अपने पति को नंगा होते हुए देखने लगी. पहले भी अपने पति का लुंड देख चुकी थी. पर अब की बार का देखना उसे कहीं ज़यादा मज़ा देने लगा था. उसकी छूट में सरसराहट बढ़ी और दो बूंदें टपक के बेडशीट को भिगो गयी.

राज का विशाल लुंड सुनैना की आँखों में नशे बढ़ने लगा. उसकी निप्पल्स में भी सनसनी दौड़ने लगी. सुअनीना न चाहते हुए भी अपने होंटो पर जीब फेरने लगी. राज ने देख लिया था.

राज-- सुनैना जी अपने पति के लुंड को चूसना चाहेंगी आप..

सुनैना-- ये तोह मेरे मैं की छह है जी.. जैसे मेरा सब कुछ आप का है. वैसे hi आपका भी तोह सब कुछ अब मेरा है.

राज माहौल को फनी बनाते हुए.. मेरी गांड का कभी मत सोचना, वह केवल मेरी hi रहेगी

सुनैना-- एहहहहहहहहए.... सुनैना राज की बात पर दिल खोल कर हसने लगी.

राज-- अब से ऐसे hi हस्ती रहना. आप हस्ते हुए बहुत प्यारी दिखती हाँ.

सुनैना-- मेरी मुस्कान और हसनी तो अब आपके दम से है स्वामी जी. आपका प्यार मुझे कभी दुखी नहीं होने देगा.

राज-- और मेरे प्यार में आपको कभी कमी नहीं आने दूंगा..

राज लेट गया-- सुनैना जी अपने पति के लुंड को चूस कर खुद भी मज़ा लें और अपने पति को भी दें. सुनैना ख़ुशी से उठी और राज के लुंड पर झुकती हुई थाम कर अच्छे से देखने लगी. दबा दबा के उसकी सख्ती जांचने लगी.

राज-- कुछ देर पहले दादी की चीखों से अंदाज़ा नहीं हुआ आपको. मेरा लुंड कितना स्ट्रांग है.

सुनैना राज को देख कुछ शर्मा गई-- नहीं.. ww..wo मई

राज ने सुनैना की टांगों को पकड़ और दोनों पेअर अपने मोह के दोनों साइड्स करके सुनैना की छूट अपने मोह के बराबर कर दी.. देर नहीं लगाई और सुनैना की गीली लेकिन टाइट छूट में जीब घुसा कर चाटने लगा..

सुनैना तोह तड़प कर मचल hi उठी थी. कितनी जल्दी राज ने उसकी छूट अपने मोह पर रख दी थी. वह अभी राज के लुंड को दबा कर देख hi रही थी.

राज ने कुछ सेकंड अच्छे से सुनैना की छूट छाती फिर वह बोलै-- सुनैना जी, जीजाक को कम्प्लीटली ख़तम कर दें. तभी पुरे प्यार का मज़ा आएगा आपको.

सुनैना-- जानती हों स्वामी जी.. मैं भी मन बना चुकी हों. पर फिर भी कुछ तोह समय लगेगा न. आप hi अपने प्यार से मुझे पूरा बदल सकते हाँ. वर्ण मई ऐसी hi रह जाऊँगी.

राज ने एक ऊँगली छूट में दाल कर छूट चटनी शुरू कर दी. कुछ देर में सुनैना भी राज के लुंड को चूमने चाटने के बाद मोह में भर कर चूसने लगी. उसकी जीजाक जाने लगी थी. उसकी छूट में राज बहुत स्पीड से बहुत महारत से लगा हुआ था.

सुनैना की छूट में बारह आने लगी तोह वो राज के बड़े लुंड को आधे से ज़यादा मोह में भर कर चूसने लगी. सुनैना धीरे धीरे मस्त होने लगी. तोह लुंड चुसाई की स्पीड वह भी बढ़ा गयी.

कुछ देर में राज ने सुनैना को साइड कर दिए. तोह सुनैना भी राज के लुंड को मोह से निकल साइड बीएड पर गिर कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. सुनैना को देख कर राज सुनैना के ऊपर आया और अपने लुंड को सुअनीना की गीली छूट पर रगड़ते हुए सुनैना के गालों को चूमने लगा. सुनैना खुसी से राज को देखने लगी. सुनैना ने अपने दू पेअर खोल दिए थे..

सुनैना- स्वामी जी जो बात बरसों से मेरे मैं में मचल रही थी. आज वो मैं आपसे कहने जा रही हों. स्वामी जी हमें आपसे बेहद प्रेम है. इतना कह हमने अपने जीवन में कभी किसी से भी नहीं किया. अपने बच्चू से भी नहीं.

राज ने सुनैना की आँखों को चुम लिया.. फिर नक् की नोक को और फिर होंटो को.

राज-- और सच कहें तोह हम देहली आये hi आपके लिए हाँ. हमारा आपसे प्रेम इतना है. हम ज़माने भर से लड़ जायेंगे. पर कभी भी आपको खुद से दूर नहीं होने देंगे. आपके लिए हम कुछ भी कर जायेंगे सुनैना जी. लोग कहते है, मैं आपके लिए आस्मां से तारे तोड़ कर ला सकता हों. तोह मैं आपके प्यार में ये कह सकता हों. मैं आपके लिए संसार की हर एक चीज आपके क़दमों में ला के ढेर कर दूंगा. इतना hi प्यार हम भी आपसे करते हाँ..

सुनैना को ऐसी ख़ुशी मिली, जो आज पूरा दिन भी नहीं मिल पायी थी. वर्ण पिछले कुछ घंटों से उसका एक एक पल बे इन्तहा ख़ुशी भरा बीत रहा था. पर राज के ऐसे शब्दों पर सुनैना को वह ख़ुशी मिली. जिसकी कोई हद hi नहीं थी.

सुनैना राज पर टूट पड़ी. राज के चेहरे को दोनों हाथ से थाम लिया और पुरे चेहरे को बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.

राज ने हरकत रोक दी थी. सुनैना बड़े चाओ से, बड़ी शिद्दत से उसे चुम रही थी. राज हिलता तोह सुनैना का ध्यान टूट सकता था.

सुनैना ने राज को छोड़ा तोह उसकी आँखों की चमक उसे सारा संसार मिलने जाने की गवाही दे रही थी. सब कुछ तोह किसी को भी नहीं मिलता. पर सच्चा प्यार मिल जाए तोह पूरा संसार hi मिल जाया करता है. सुनैना को भी आज पूरा संसार मिल गया था.

सुनैना-- हम अब से पहले दर रहे थे स्वामी जी. कसम से हम अपने बच्चू को लेके. अपनी बेहेन और भाइयो को लेके, अपने माता पिता को लेके भी दर रहे थे. हमें दर था, कहीं कुछ ऐसा न हो जाए. हमारे रिश्ते की बात खुल जाए तोह बाद में कोई बड़ा हंगामा न हो जाए. पर अब हम भगवन की सौगंध कहते हाँ स्वामी जी. हम किसी से भी नहीं डरेंगे. आपके प्रेम ने हमें हिम्मत hi इतनी दे दी है. हम किसी से भी टकराने की हिम्मत रखते हाँ. बात बिगड़ भी गई तोह आप हमें अपने साथ पाएंगे स्वामी जी. ज़िन्दगी दो दिन की मिले या अब सालों की. हम अपनी आखरी सांस तक ऐसे hi आपसे प्रेम करते रहेंगे. हमेशा आपका साथ देते रहेंगे. भले hi फिर मुझे सब छोड़ जाएँ. मुझे अब किसी की भी कोई परवा नहीं रही है. बचे बड़े हो चुके हाँ. खुद से अपनी ीफ़े सेट कर लेंगे. और फिर अब मेरी उनकी और से जिम्मेदारी भी ख़तम हो चुकी है स्वामी जी.. हमें बस अब हर पल आके साथ रहना है. आपका प्यार पाना है.

राज भी सुनैना की बातें और प्यार की शिद्दत को देख कर हैरान रह गया था. कितना प्यार, कितने काम समय में वह उससे करने लगी थी. राज को सुनैना पर गर्व होने लगा. उसके अंदर का हरामीपन तोह काम होने वाला नहीं था. पर अब उसका विश्वास प्यार पर भी कई गुना बढ़ गया था.

राज-- तो अब मेरी रानी आप अपने पहले प्रेम मिलान के लिए तैयार हाँ..

सुनैना भी सब समझती हुई-- जी स्वामी जी. मैं तोह बरसों से पर्म मिलान की छह में तड़प रही हों. अब और इंतज़ार न करवाइये स्वामी जी.

राज-- दर्द होगा मेरी रानी को. मेरा बहुत बड़ा है और आपकी मुनिया में भी काफी दिनों से नहीं गया है. और फिर मेरा मूसल भी तोह आपकी मुनिया के हिसाब से बड़ा है न.

सुनैना-- स्वामी जी. आप मेरी और मेरी मुनिया की चिंता छोड़ दें. प्रेम मिलान के लिए तोह मई कुछ भी सहन कर जाऊँगी. दर्द तोह हमेशा से अपनी आत्मा पर सहन करती आई हों. आज शरीर पर भी सहन कर लुंगी. पर आज दर्द काम और आनंद ज़यादा प्राप्त होने वाला है मुझे..

राज ने एक किश सुनैना के होंटो पर करि-- तोह अपने प्यारे हथु से अपने स्वामी जी के मूसल को अपनी मुनिया के गेट पर सेट करें. ऐसे प्रेम भी बढ़ेग और आनंद भी.

सुनैना ने एक हाथ बढ़ाया और राज के लुंड को थाम कर अपनी छूट के छेड़ पर फेरने लगी. अच्छे से गर्म लुंड के मोठे सुपड को अपनी छूट के छेड़ पर महसूस करने लगी.

राज-- मुझे आपकी आँखों से सब दिख रहा है सुनैना जी.

सुनैना-- दिखेगा hi स्वामी जी. मन की आँखों से सब दीखता है. प्रेम है न तोह दिखाई देना ज़रूरी है.. सुनैना ने राज के लुंड को अपनी छूट के छेड़ में थोड़ा सा घुसा कर कहा.. स्वामी जी अब आप प्रवेश अपने मूसल के साथ मेरी गुफा में प्रवेश कर सकते हाँ. मैंने तोह आपका पुरे मैं से सवागत कर लिया. अब मेरी मुनिया और अंदर का सब भी आपका और आपके मूसल का सवागत करने लगे हाँ. आप को प्रवेश करने की अनुमति देते हाँ.

राज ने एक किश और करा सुनैना के होंटो पर और अपने लुंड का दबाओ बढ़ा दिए. लुंड का सुपड छूट में घुसा तो राज ने धक्का मर दिए. सुनैना को सच में दर्द नहीं हुआ. राज सुनैना की आँखों में देख कर धक्का मर गया था. सनैना भी राज की आँखों में देख रही थी. कुछ दर्द आँखों में आया था. पर होंटो पर मुस्कान थी.

राज ने हल्का सा धक्का और मार दिए. थोड़ा सा लुंड और सुनैना की छूट को खोलता हुआ घुसता चला गया. सुनैना की आँखों में दर्द के भाव आने लगे थे. पर जाने कैसा प्यार वह राज से कर बैठी थी. राज की आँखों से नज़रें हटा hi नहीं रही थी. होंटो पर अब भी मुस्कान थी.

राज हरामी था. फिर भी हरामीपन नहीं कर सकता. ऐसे hi सुनैना की आँखों में देखता हुआ हलके हलके धक्के मार मार कर पूरा लुंड hi सुनैना की छूट में उतर दिए.

6 इंच के बाद का लुंड सुनैना को बहुत दर्द दे गया था. सुनैना ने अपने होंटो को भींच लिया था. आँखों में आंसू भी आ गए थे पर वह एक हाथ से आंसू साफ़ करके फिरसे राज की आँखों में देखने लगती थी. पूरा लुंड सुनैना की छूट में घुसा कर राज सुनैना की आँखों को चाटने लगा. बह रहे आंसू राज अपने अंदर उतरने लगा.

सुनैना को इससे बढ़ कर और क्या चाहिए था. कितना प्यार मिल रहा था उसे राज. इतना भी उसने नहीं सोचा था. कितना दर्द उसे होने वाला था. पर राज ने अपने प्यार के चलते उसे दर्द से भी बचा लिया था. कुछ दर्द के कारण जो आंसू बहे थे वह भी चाट रहा था.

सुनैना लम्बी सांस लेकर इन पलों को जैसे अपने अंदर सेव कर लेना चाहती थी. बरसों बाद एक लुंड उसकी छूट में समाया हुआ था. बहुत भी एक विशाल लुंड. एक मूसल लुंड. इतने बड़े लुंड की भी उसने कभी कल्पना नहीं करि थी. बड़े लुंड से ज़यादा आनंद भी मिलता है. इतने आनंद की भी कल्पना उसने नहीं करि थी.

अपनी छूट की अंत गहराई तक वह राज के लुंड को फील कर रही थी. कैसा फसा हुआ था राज का लुंड उसकी छूट में. सुनैना सोच कर hi आनंदी हो रही थी.

राज सुनैना के होंटो को भी चूस कर उसकी आँखों में देखने लगा.

राज-- कैसा लग रहा है सुनैना जी

सुनैना-- इतना अच्छा. इतना अच्छा. कह मैं बता नहीं सकती. सुकून की कोई हद नहीं होती. अगर होती है तोह उस आखरी हद से भी कहीं कर आनंद प्राप्त हो रहा है मुझे स्वामी जी.

राज-- दर्द तोह नहीं हो रहा है न अब.

सुनैना ने भी राज को किश करि- कैसे हो सकता था मुझे दर्द. आपका प्यार hi इतना था, मुझे दर्द का एहसास hi नहीं हुआ.

राज-- चल झूटी कहीं की.. फिर ये आंसू कहाँ से आ गए.. सुनैना भी है पड़ी राज के इन शब्दों पर.

सुनैना-- ये आंसू तोह अब के मिले दर्द के कारण नहीं हाँ स्वामी जी. ये तोह मेरे अंदर का बरसों पुराण दर्द था. जो आपके प्यार के कारण बहार निकलने लगा है.

राज ने सुनैना को फिरसे चूमना शुरू कर दिए. साथ hi अपने लुंड को हिला कर बहार निकलने लगा. सुनैना राज के लुंड को बहुत अच्छे से महसूस कर प् रहा थी. राज का लुंड सुनैना के लिए बहुत बड़ा बहुत गर्म भी था.

राज अपना लुंड सुपड तक निकल कर प्यार से अंदर डालने लगा. राज बड़े चाओ से सुनैना को छोड़ रहा था. सुनैना भी राज का किश में साथ देती हुई राज के लुंड को पूरी तरह से अपनी छूट में अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर प् रही थी.

उसकी छूट ने पानी छोड़ कर राज के लुंड को चिकना कर दिए था. अब आराम से राज का लुंड अंदर बहार हो रहा था. कसावट अब भी थी लुंड की सुनैना की में. फस फस hi जा रहा था. पर दर्द बहुत काम हो गया था.

राज ने धीरे धीरे स्पीड बढ़ानी शुरू की तोह सुनैना और भी मस्त होती चली गई. राज ने किश तोड़ी और एक चुके हाथ में थाम कर सुअनीना को छोड़ने लगा. साथ hi उसकी आँखों में देख रहा था.

धीरे धीरे सुनैना चरम की और बढ़ने लगी. आँखों में नशे बढ़ने लगा. सुनैना सिसकने लगी. आहें भरने लगी. राज जान गया था सुनैना अब मस्त हो चली है.

राज ने दोनों हाथ साइड पर करते हुए कुछ और स्पीड बढ़ा कर सुनैना को छोड़ना शुरू कर दिए

सुनैना-- स्वामी जी.. आपकी सुनैना को बहुत आनंद प्राप्त हो रहा है.

राज-- अब और भी बढ़ता चला जाएगा सुनैना जी

सुनैना-- जी स्वामी जी... राज ने स्पीड बधाई तोह सुनैना को ऐसा लगा, जैसे उसके बदन में एकदुम्म से hi आग बढ़ने लगी हो. छूट का पानी बहुत ज़यादा हीट छोड़ने लगा था. राज का गर्म लुंड उस गरम पानी में नहाते हुए स्पीड से सुनैना की छूट में घुस रहा था.

सुनैना सहन नहीं कर प् रही थी. उसके बड़े अड़े चुके हिलने लगे. झटके बढ़ने लगे. बरसों बाद, लाइफ में पहली बार प्रेम मिलान के कारण सुनैना की छूट का रास कुछ झटके सुनैना को दे के निकलने लगा..

सुनैना सुस्त पड़ने पड़ती चली गई. राज ने स्पीड जारी राखी और पानी को बहार निकलने के लिए चप्पू चलने लगा..

सुनैना नार्मल हुई तोह राज को अपनी बहन में कास गई.. चूमना शुरू कर दिए.

सुनैना-- आज मैं पूरी हो गयी स्वामी जी. आपने मुझे पूरा कर दिए. शरीर के साथ साथ मुझे आत्मा सुख भी दे दिए आपने.. आपकी दासी अब बहुत खुश है.

राज-- सुनैना जी..

सुनैना-- जी स्वामी जी..

राज-- सुनैना जी.. प्रेम मिलान मेरे साथ हुआ है आपका. बड़े अजीब अंदाज़ में हमारा विवाह हुआ है. न आपने सोचा था और न hi मैंने. मैं आपके बच्चू से भी छोटा हो. फिर भी आप मेरी पत्नी बानी हाँ. अपने भी मुझे स्वीकार कर लिया है. ये प्रेम मिलान है न

सुनैना-- हाँ स्वामी जी. ये प्रेम मिलान hi है.

राज-- इसमें हवस तोह नहीं है न कहीं भी.

सुनैना- ऐसा क्यों सोच रहे हाँ आप. हवस हो तोह एक औरत समझ नहीं सकेगी क्या. ये सारा प्रेम मिलान hi था स्वामी जी. प्रेम मिलान न होता तोह मुझे इतना आनंद कैसे प्राप्त होता. मेरा दर्द और न बढ़ जाता.

राज-- प्रेम मिलान.. आप अपने बेटे की उम्र के लड़के से प्रेम मिलान करके आनंद प्राप्त कर गई हाँ सुनैना जी. ऐस सोच के कुछ परेशानी नहीं बानी आपको.

सुनैना-- नहीं स्वामी जी. प्रेम मिलान में उम्र देखि hi कहाँ जाती है. और अब तोह आप मेरे पति भी तोह हाँ न.

राज-- फॉर एक्साम्प्ले.. जो कुछ मेने किया है. वही अगर अखिल करता.. जो प्रेम मुझसे आपको प्राप्त हुआ है. वही अगर अखिल से प्राप्त होता तोह तब आपके क्या विचार होते..

अखिल के नाम पर सुनैना को झटका लगा था. चुदाई के बीच वो अपने बेटे का ज़िक्र उसे कुछ अजीब लगा था.

सुनैना- स्वामी जी.. ये किसी बात कर रहे हाँ आप.

राज- वो भी बता दूंगा, में ऐसी बात क्यों कर रहा हों. आप बताएं, प्रेम तोह किसी से भी हो सकता है. हमारे बीच भी तोह सब इन्सिडेंटली हुआ है न. अगर ऐसा इंसिडेंट अखिल के साथ हुआ होता तोह..

सुनैना ने राज मैं से पति मन था. बात बड़ी अजीब थी. रूटीन से हटके थी. कोई और ऐसी बात करता तोह सुनैना खुद पर काबू भूल जाती. पर राज राज था... बड़े वाला हरामी था.

सुनैना-- नहीं जानती मैं क्या कर जाती. मैंने ऐसे कबि नहीं सोचा था. एक माँ, एक बेटे के बीच ऐसा सब हो भी कैसे सकता है भला.

राज-- बात इन्सिडेंटली की हो रही है सुनैना जी.. राज अभी भी अपना लुंड सुनैना की छूट के अंदर बाहर कर रहा था. वो रुका नहीं था. सुनैना फिरसे कुछ मस्त होने लगी थी.

सुनैना-- सच कहूं तोह जैसा आनंद मुझे प्राप्त हुआ है. ऐसे आनंद मुझे किसी से भी मिलता तोह मैं उसी की हो जाती. पर हर कोई आपके जैसा तोह नहीं हो सकता न.

राज-- मतलब जैसा आनंद मुझसे प्राप्त हुआ है आपको.. मेरी जगा अखिल आपको इतना hi सुख दे जाता तोह आपको सब अच्छा लगता.

सुनैना कुछ देर सोचने के बाद बोली-- हाँ एक औरत होने के नाते में ऐसा hi सब फील करती. और फिर-- सुनैना चुप कर गई.

राज-- बोलो न आगे. आप चुप न रहें. मन की साडी करें मेरे साथ

सुनैना-- हमारे मोहल्ले में hi एक लड़का अपनी माँ के साथ सेक्स रिलेशन में है. ये अंदर की बात है. सब नहीं जानते. मुझे भी पता चला था. पर वो माँ अपने बेटे से बहुत प्यार करती है.

राज-- ये तोह अच्छी बात है न. वहां भी हवस नहीं होगी. वहां भी प्यार hi होगा न.

सुनैना- पर में समझ नहीं पाई स्वामी जी. आप ऐसा सब क्यों बोल रहे हाँ.

राज-- मैं भी आपका अखिल hi हूँ.

सुनैना को झटका लगा-- मौसी..

राज-- हैं मेरा आपके साथ एक रिश्ता नहीं है मौसी.. मेरा आपके साथ एक और रिश्ता भी है. आप मेरी मौसी भी हाँ.

सुनैना की आँखों ने रंग बदलना शुरू कर दिए.

सुनैना-- आप अर्चना के बेटे नहीं हाँ तोह फिर--- सुनैना का सोच कर दिल धक् धक् करने लगा.. वह बहुत सही समझ गई थी... एकदुम्म से hi उसकी आँखों से आंसुओं की लड़ी निकली और बहती हुई निचे जाने लगी..

सुनैना-- आराधना..

राज-- हाँ मौसी मैं आपकी आराधना का बीटा राज हों. आप सब को एक करने के लिए, आप सबकी ज़िंदगियों के सरे दर्द दूर करने के लिए यहाँ आया हों.

राज ने अपना लुंड मौसी की छूट से निकला और मौसी के साथ लेट कर मौसी को अपने ऊपर गिरा लिया. मौसी राज के सीने पर सर रख कर आंसू बहाने लगी..

राज ने मोबाइल उठा कर अपनी माँ का नंबर डायल करना शुरू कर दिए.. बेल्ल की टोन के साथ साथ मौसी की सिसकियों की आवाज़ भी राज के कानो में गूँज रही थी.
 
फोन उठाने वाली दीपिका थी-- बोल हरामी कैसे फोन किया तुमने..

राज-- हाहाहा अभी भी में हरामी hi हों आपकी नजरो में.

दीपिका-- तू हर समय सबत करता hi रहता है. तू बहुत बड़ा harami..saala..kutta है.. ज़रूर तूने मौसी को भी छोड़ दिए होगा. तभी तोह फोन किया है तुमने. तुझे में नहीं जाँऊगी तोह और कोण जानेगा.

राज ने लाउड स्पीकर ों कर दिए था. मौसी सुनकर सिसकते हुए भी हैरान हो गई थी. राज ने मौसी के चुत्तड़ को पकड़ कर अपने ऊपर कर लिया. मौसी को एक किश किया. आवाज़ सुनकर दीपिका चीख पड़ी-- साले अब तू मुझे मौसी को किश करने की आवाज़ भी सुनाएगा. हरामी तू मेरे पास आ तो सही. फिर बताती हों में तुझे.. दीपिका चीख कर बोली थी. सब सुनकर उसके पास आ गयी..

आराधना-- क्यों शोर मचा रही हो दीपिका.. क्या कर दिए है आज मेरे बेटे ने.

दीपिका- वही तोह आपकी माँ के साथ कर चूका है हरामी कहीं. मौसी को भी पेल दिए हरामी ने.. सब सुनकर हसने लगी तोह आराधना चीख पड़ी.. डीईईडीईईई

सुनैना कब तक खुद पर काबू रखती. वो भी चीख पड़ी.. मेरी सुनैना... फिर रोने लगी...

दोनों और का मौसम अब बदल गया था. दोनों और से रोने की आवाज़ें आने लगी. राज भी अब सीरियस हो गया था.

राज जो नानी को छोड़ कर, दोनों को सच बता कर अपनी माँ की अपने नाना नानी से बात करवा चूका था. नाना ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी. तब से आराधना बहुत खुश थी. जल्द से जल्द अपने माँ पापा के पास पोहंच जाना चाहती थी. पर राज ने कुछ समय के लिए उन्हें रोक लिया था.

अब मौसी भी मिल गई थी. मौसी को भी अपने साथ मिला लिया था राज ने. आराधना अपनी बेहेन की आवाज़ सुनकर रोने लगी थी. वही सुनैना का भी वही हाल था. सुनैना के कारण hi उसकी और अर्चना की ज़िन्दगी बर्बाद हुई थी, फिर भी सुनैना ने या अर्चना ने आराधना को लेके मैं में खेद नहीं रखा था.

आराधना- दीदी.. दीदी.. फिरसे रोने लगी..

सुनैना-- मेरी बेहेन.. मेरी बेहेन कैसी है तू.. कितने बरसों बाद तेरी आवाज़ सुन रही हों न.

आराधना भी रोटी हुई-- हाँ दीदी.. दीदी मुझे माफ़ कर दें. मेरे कारण आप--

सुनैना-- ऐसा मत बोल आराधना मेरी बेहेन.. फिर राज को देखती हुई.. ये सब तोह नसीब में लिखा था.. जो मुझे मिल गया. तूने तो अपनी ज़िन्दगी की कुछ कुशियो के लिए भाग कर शादी करि थी. तूने कुछ गलत नहीं किया था मेरी बेहेन.

अंजलि, आरती, भावना और दीपिका भी आंसू बहाने लगी थी.

आराधना-- दीदी मुझे आपसे मिलना है. सब से मिलना है.

राज-- ऐसे कैसे आप सब मिल सकते है. अभी तोह मुझे अर्चना मौसी की छूट में लुंड डालना है. तीनो ममियों की छूट में भी लुंड डालना है. ओह्ह्ह गांड तो रह hi गई. छूट, गांड सबकी खोल कर सब को एक करूँगा. फिर मिलान होगा आप सबका. तब तक मुझे मज़े लेने दें न. अभी तो सुनैना जी ने भी मेरे लुंड का पानी नहीं निकला है.

सुनैना तोह राज को देखती hi रह गयी-- स्वामी जी. ये कैसे बात कर रहे हाँ आप अपनी माँ और बहनो से. सुनैना केवल हैरान हुई थी. अपने नए पति की बातों पर उसे घिन नहीं ै थी. इतना प्यार करने लगी थी.

दीपिका-- kyaaaaaaaaaaa.. सुनैना जी.. स्वामी जी.. राज हरामी साले कुत्ते ये सब क्या है. आराधना जो रो रही. अंजलि, आरती और भावना भी भीगी आँखों से सब सुन रही थी.

वो भी हैरान हो गई थी.

राज-- ओह्ह्ह माँ, आपकी दीदी अब आपकी दीदी नहीं रही है. अब वो मेरी पत्नी है और आपकी बहु..

आराधना भी रोना भूल गई.-- kyaaaaaaaaaaaaaaa

राज-- और दीपिका गर्म छूट वाली, अब से सुनैना आपकी चरों की भाभी भी है.

अंजलि-- राज तोह कितना बड़ा हरमे बनेगा रे..

आरती-- इतना बड़ा तोह पूरी दुन्या में कोई हो भी नहीं सकता.

भणवा-- राज हरामी तू हमारे लिए हमारी मौसी को मौसी hi रहने दे..

दीपिका-- कुट्टी साले तू कभी भी नहीं सुधरेगा. तू मौसी को छोड़ गया है. मौसी से शादी भी कर ली है तूने. फिर मौसी से बोली.. मौसी आप राज से शादी पर खुश तो हाँ न. राज ने बजर्दस्ती तोह नहीं करि न.

सुनैना जो अब बहुत कुछ समझने लगी थी. दादी को छोड़ चूका था राज. सुनैना ये भी जानती थी. अब वह राज को अच्छे से जान रही थी. वह बोली-- हाँ करि तोह ज़बरदस्ती hi तोह पर मुझे बहुत बड़ी खुसी मिली है राज का मेरा पति जान जाने पर.

राज-- सुन लिया आप सबने. चलें अब आप सब फोन पर hi रहें. बात न करें, केवल सुने. मेरी पत्नी की सिसकियों से अंदाज़ा लगाएं वह कितनी खुश हाँ. क्यों सुनैना जी आप सुनाएंगी नई अपनी सास और ननदो को अपनी सिसकियाँ. उन्हें भी बताएं न आप अपनी ख़ुशी के बारे में

सुनैना हैरान तो हुई पर अब पतिधर्म भी निभाना था और ससुराल वळून को भी बताना था वह राज को प् के कितनी खुश है..

सुनैना राज के ऊपर सही से बैठी और राज के लुंड को थाम कर अपनी छूट में घुसा गई.

राज ने उसे झुककया और किश करने लगा. साथ hi उसे छोड़ने भी लगा. किश तोड़ कर बोलै-- हो गई मेरी और मेरी पत्नी की चुदाई फिरसे शरू.. अंजलि दीदी..

अंजलि-- kk..kya है हरामी साले... लाइव चुदाई कभी नहीं सुनी थी. एक पल में hi सबके मिज़ाज बदल गए थे. अंजलि तोह राज के लिए खुद को बोल कर राज के सपने भी देखने लगी थी. फोन पर अपने भाई की मौसी के साथ चुदाई वाली बात पर वह मचल उठी.

आराधना भी रोना भूल क्र फोन से आ रही आवाज़ सुनने लगी. भावना और आरती का भी कुछ ऐसा hi हाल था. राज ने बहुत बड़ा काम कर दिखाया था तोह राज के लिए सबके फीलिंग्स कुछ बदल गई थी.

एक सच बात ये भी थी. रोज़ रोज़ राज की छेड़ छड़ से जितना वह सब तंग थी. राज के स्पर्श की वो सब आदि भी हो गई थी. अब बहुत दिनों से राज सबसे दूर था. किसी के बूब्स नहीं दबा सकता था. किसी की छूट या गांड में ऊँगली नहीं कर सकता था. ज़बरदस्ती नंगा करके मस्ती नहीं कर सकता था.

राज के दूर हो जाने से सब अधूरेपन का शिकार हो गई थी. कभी कभी खुद से अपने शरीर के साथ छेड़ छड़ करने लग जाती थी.

राज हरामी नहीं जनता था. सब उसे कितना मिस कर रही हाँ. अब राज और मौसी की चुदाई पर वह भी अंदर से मचलने लगी थी. आराधन तोह राज के लुंड की गर्मी फील क्र चुकी थी. वो ज़्यादा बेचैन होने लगी. लास्ट टाइम दीपिका भी राज के साथ अच्छे से फोरप्ले कर बैठी थी. वह भी सबको देख कर नशे में होने लगी.

सुनैना की आवाज़ सुनाई दी-- आठ स्वामी जी. आप अपनी पत्नी को अपनी सास और ननदो के सामने प्यार कर रहे हाँ.

राज-- हाँ मेरी रानी सुनैना. आप भी सब जान सकें, कैसे आपके पति घर में रहते हाँ. अभी तक आपके पति ने आपकी सास और नन्दो को छोड़ा नहीं है.

सुनैना-- अह्ह्ह स्वामी जी. बातों से तोह नहीं लगा मुझे. ऐसा लगा जैसे आपने सब के साथ प्रेम मिलान कर लिया हो.

राज-- अब करूँगा न. एक के से प्रेम मिलान. क्यों माँ.. क्या हाल हाँ आपकी छूट के. कितना पानी निकल रहा है आपकी से.

आराधना जो फिरसे राज के लंड को सोच कर अपनी छूट पर हाथ रख बैठी थी. झट से पीछे हटा गई.

आराधना-- नं.. नहीं. राज बीटा मुझे कुछ नहीं हुआ है.

सुनैना-- हेहेहे स्वामी जी. सास जी तोह कुछ घबराई हुई लगती है.

राज-- ज़रूर माँ की छूट ने पानी छोड़ दिए होगा... अंजलि दीदी ज़रा देखो तो माँ की छूट पर कितना पानी चमक रहा है.

अजनाली-- चुप कर हरामी. एक तो सब को सब कुछ सुना रहा है. ऊपर से ऐसी गन्दी बात बोल रहा है. मौसी की hi देख ले न. वहां तोह बढ़ आने वाली हो गई..

राज-- क्यों सुनैना जी आपकी छूट में बढ़ आई हुई है या नहीं

सुनैना कुछ स्पीड से उछालते हुए-- एक बार तोह पूरा hi बंद टूट चूका है स्वामी जी. दूसरी बार भी कुछ देर में टूट जाएंगे.

राज-- सुन लिया दीदी. दीदी, माँ की छूट देख.

दीपिका-- बकवास बंद कर हरामी साले कुत्ते..

आरती-- आज तोह मान लो राज की बात..

raj-hahaha

sab--shocked..

दीपिका-- दीदी.. आप क्या बोली अभी..

आरती-- बता दो न राज को. अब हमें उसकी छेड़ छड़ के बिना रहने की आदत नहीं रही.

राज--- क्याआआ.. ववव.. मतलब वहां मुझे कुछ नहीं मिला तोह दूर हो जाने पर मुझे अब सब मेवे मिलेंगे.. फिर तोह मज़ा hi आ जायेगा.. सुनैना भी सब समझती हुई हसने लगी..

आरती-- हाँ भाई.. अंजलि दीदी यह कमल hi कर गई थी. कल रत मुझसे कह रही थी.. अच्छा हुआ मेरी शादी ताऊ--------- अंजलि ने आरती के मोह पर हाथ रख दिए..

अंजलि-- कामिनी ये क्या बोल रही है. फिर ऑंखें दिखती हुई.. दन्त पीसती हुई.. तुझे कहा था न.. किसी को मत बताना..

आरती मोह पर आया हाथ छुड़ा कर दो कदम पीछे हटी और हसने लगी.

आरती चीख कर बोलो--- रआआआआजजज.. तेरे लिए हम सब पागल हाँ..

दीपिका-- तुम सब होगी पागल मैं नहीं उस हरामी के लिए पागल सम्भि आप दीदी... कुत्ता है वो पूरा.. जब भी छेड़ छड़ करता है. अपनी मर्ज़ी से करता है.

भावना-- अब हमारा मैं बदल रहा है. तोह लौट के hi नहीं आता.. आ जा न भाई. हमें भी तुझे देखना है. तेरे प्यार को तरस रही हाँ हम सब.

राज इमोशनल होते हुए-- हे हे हे.. बंद करो ये ड्रामा.. जब आऊँगा तोह देखूंगा. तब तक के लिए सब अपने अपने शरीर को चमका लो.. अब मुझे सुनैना के मज़े लेने दो. और माँ की छूट को देखो. सुनैना जी आप घोड़ी जाएँ न. मुझे अब अपने मैं से आपको छोड़ना है. सब मुझे इमोशनल कर रही हाँ. और इमोशंस मेरे जैसे हरामी को हज़म नहीं होते. सुनैना लुंड निकल कर उठी और घोड़ी बन गई..

राज सुनैना के पीछे आया और सुनैना की छूट में लंड दाल कर छोड़ने लगा. दीपिका दी आप भी मुझे इमोशनल करने लगी. मुझे हरामी hi रहने दें. मई हरामी hi सही हों.

राज का बदला लहजा सुनकर सब को कुछ हैरानगी भी हुई थी. पर दीपिका और भावना समझती थी. राज एक बार उन दोनों के सामने भी इमोशनल भी हो चूका था.

दीपिका-- क्यों कर करो तुझे में मैं इमोशनल हरामी.. saale..kutte.. कितना दर्द दिया है तूने हमें उम्र भर. अब हमें अपना आदि बना कर, हमसे दूर होकर हमें और भी दर्द दे रहा है.

राज ने स्पीड से सुनैना को छोड़ना शुरू कर दिए.. सुनैना सिसकने लगी. उसकी सिसकियाँ सब सुनने लगी.

सुनैना-- आठ उम्म्म्म स्वामी जी आपका बड़ा है. मुझे बड़ा मज़ा दे रहा है स्वामी जी. ऐसे hi अपनी पत्नी को प्रेम मिलान का सुख देते रहें.. पूरा पूरा दाल कर पूरा पूरा सुख दें अपनी पत्नी को

raj--sun लिया ना आप सबने.. अंजलि दीदी माँ की छूट देखि नहीं क्या अभी तक आपने.

आराधना अपने बेटे के प्यार के लिए खुद से वहीँ नंगी होने लगी. जो बीटा उसकी माँ और बेहेन को छोड़ गया था. अब उसी कैसे माफ़ी दे सकता था. और फिर उसका भी अब दिल होने लगा था अपने बेटे से प्रेम मिलान के लिए. बरसों से वह भी तोह पियासी hi थी..

चरों बहनो भी आज बहुत बदल रही थी. सबका इकलौता अगर हरामी था तोह कैसे वह शरीफ बन के रह सकती थी. आधी हरामी तोह वो भी बन hi चुकी थी. वो भी वहीँ मूड में आने लगी.

दीपिका-- राज जब तो मौसी से शादी कर सकता है तोह क्या अपनी बहनो से नहीं कर सकता.

भावना ने दीपिका को देखा तोह वो भी बोल पड़ी.. किसी और पर हमें विश्वास नहीं है भाई. हमें तेरे स्पर्श के बिना किसी और के स्पर्श से चैन भी नहीं मिलेगा भाई.

आरती-- और मई तोह खुद को भाई के लिए पहले से hi त्यार कर चुकी हों. कैसे हमारे बदन जो बरसो से भाई के स्पर्श के, भाई के प्यार के आदि रहे हाँ. अब वह शरीर किसी और के हो सकते हाँ. मई भी अब से हमेशा के लिए भाई की hi हो के रहूंगी.

अंजलि-- मैंने तोह खुद से सबके सामने कह दिए था. शादी से पहले अपने भाई को अपने सील गिफ्ट में दूंगी. सोचा था, एक भाई की शादी बहन से नहीं हो सकती. इसलिए कभी आगे का नहीं सच्चा था. पर तेरे प्यार की मैं भी आदि हो चुकी हों राज.. अब मौसी के बाद मैं भी तोह अपने भाई की पत्नी बनने क छह दिल में पाल सकती हों.

आराधना एक एक को देख रही थी. अपने बेटे के लिए अपनी बेटियों के प्यार को देख रही थी. वो आंसू बहाने लगी.

आराधना-- राज बेटे मैं तोह सबके होने से हों. प्यार के बिना कोण रह सकता है. औरत होने के नाते मैं भी बरसों से पियासी हों. पर शरीर की पियास सहन करने की ताक़त न होती तोह कबकी गलत रह पर चल निकली होती. शरीर सुख के साथ अगर मुझे प्रेम सुख भी मिलता है तोह मैं भी हमेशा खुश रहूंगी राज बीटा. मैं अब से तुझे कभी नहीं रोकूंगी.

सुनैना बड़ी मुश्किल से सबकी बातें सहन कर प् रही थी. कितनी सेक्सी और कितनी इमोशनल बातें थी. ऊपर से राज पूरा पूरा लुंड पूरी पूरी स्पीड से उसकी छूट में अंदर बाहर कर रहा था. सुनैना बड़े ज़ोर से अपनी मुट्ठियों से बीएड शीट को कैसे हुए थी.

राज भी सब सुनकर और भी इमोशनल हो रहा था. साला इतना बड़ा हरामी होक, इतना प्यार सहन नहीं कर पा रहा था. अपने इमोशंस पर काबू पाने के लिए सुनैना की छूट की धज्जियाँ उदा रहा था. और सुनैना की छूट में बाढ़ आने लगी. सुनैना को दर्द नहीं हो रहा था. आराधना का जान कर वह अब और भी ज़यादा आनंद प्राप्त कर पा रही थी. उसे अपना पूरा बिखरा परिवार फिरसे एक होता हुआ दिखाई देने लगा था.

एक hi दिन में राज का बड़ा लुंड और पूरा परिवार उसे मिल रहा था. उससे बढ़ कर कौन खुश हो सकती थी.

चुदाई के बीच में hi आराधना और चरों मिलकर मज़े करने लगी. सबने खुद को राज की पत्नी मां लिया था. अब वह सब एक दूसरे की सौतने थी.. तोह बाकि की शर्म को भी अब भूल जाना चाहती थी.

लड़कियों औरतों में शर्म वैसे भी जल्दी चली जाती है. वहां भी सिसकियों ने ज़ोर पकड़ना शुरू क्र दिए. राज सुनैना की छूट में अपना लुंड खली कर गया. सुनैना राज से नंगी लिपटी सबसे फोन पर बात करने लगी. कुछ दुखी बातों के बाद, हाल चाल अच्छे से पूछ लेने के बाद वह सब फिर हसने खिलखिलाने लगे.

इसी बीच संजना भी घर आ गई थी. संजना ने दूर नॉक किया था. पर किसी ने दूर नहीं खोला था. दादी अपनी ताबड़ तोड़ गांड चहकाई के बाद चैन से सो रही थी. उसे भी पता नहीं चला था दुर्बल का..

राज और सुनैना तोह थे hi मस्त मूड में. एक तोह लाउड स्पीकर ों था. दूसरा वह सेक्स के साथ साथ है है कर बातें कर रहे थे वह भी दुर्बल नहीं सुन पाए थे.

अक्सर ऐसा हो जाता था. दोनों के सो जाने से दुर्बल किसी को सुनाई नहीं देती थी. आज भी एक बार के बाद संजना ने अपने पास की के निकल कर दूर खोला और घर में प्रवेश करती हुई राज वाले रूम के दूर के पास आ कर कड़ी हो गई थी. वह देखने आई थी, ये वाला रूम क्यों खुला है.

पर अंदर का नज़ारा देख कर वह शॉकेड रह गई थी. अंदर उसकी माँ नंगी राज के साथ लेती हुई है रही थी. फोन उसे दिखाई नहीं दिए था.

वह तोह है रही अपनी माँ के हाथ में राज का बड़ा लुंड देख कर शॉकेड हो गई थी. वह बड़े लुंड पर शॉकेड थी. और शॉकेड थी अपनी माँ को देख कर. कितने संस्कारो वाली थी उसकी माँ. कैसे पूरी नुदे होक घर के नौकर के साथ है है कर बातें कर रही थी..

राज और सुनैना अपनी मस्ती में लगे हुए थे. और संजना दूर पर कड़ी अंदर का नज़ारा देखने लगी..
 
संजना को एक बार तोह ग़ुस्सा आ गया था. अपनी संस्कारी माँ को घर के नौकर के साथ देख कर. वो सोच भी नहीं सकती थी, उसकी ऐसा घटिया काम भी कर सकती है.

पर जल्द hi उसका ग़ुस्सा उतर भी गया. उसे अपनी माँ का खिला चेहरा देख कर बोहत अच्छा लगा था. इतना खुश उसने अपनी माँ को पहले कभी नहीं देखा था. अपनी माँ का दमकता चेहरा देख कर उसे ख़ुशी मिली थी. जानती थी उसकी माँ अंदर से कितनी खली है. पर आज वो हरी भरी दिखाई दे रही थी. इतनी खुश दिखाई दे रही थी. देख कर संजना के दिल को ख़ुशी मिली.

दूसरा वह राज का लुंड देख कर भी शॉकेड हो गई थी. कितना बड़ा लुंड था राज का. ऐसा hi लुंड तोह वो मोबाइल में देख कर आई थी. वो भी तोह मस्त लाइफ जीने वाली लड़की थी. वह भी तो जवानी की गर्मी के आगे बेबस लड़की थी. अपनी लाइफ अपनी मर्ज़ी से जीने की आदि थी. पर घर पर वो अलग ढंग से रहती थी. वो hi नहीं सभी घर पर नोर्मल्ली hi रहती थी. बाहिर अपनी फ्रेंड्स में ज़रूर सब मन पसंद लाइफ जी रही थी.

राज के लुंड को देख कर उसकी छूट ने भी टपकना शुरू कर दिए. बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पते हुए वो वापिस पलटी और 2ंद फ्लोर पर अपने कमरे में जा घुसी. दूर बंद करके वह लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

संजना-- उफ्फ्फ .. कैसा दिर्श्य था वो. सच में इतना बड़ा भी होता है किसी का. उफ्फ्फ माँ ने वो सारा ले लिया होगा अपनी छूट में. आठ माँ आप कितनी खुश किस्मत हाँ. आपको इतने बड़े लुंड से छोड़ने का मौका मिला.. इसीलिए आप इतनी खुश दिखाई दे रही हाँ.

संजना नंगी होक मिरर के सामने जा पोहंची और खुद को आईने में देखती हुई अपने बूब्स और छूट को देखने लगी. मुझे भी तोह ऐसी hi ख़ुशी चाहिए माँ. संजना अपने बूब्स थाम कर धीरे धीरे दबाने लगी. फिर एक हाथ से अपनी छूट के लिप्स में ऊँगली करके चुतरस ऊँगली पर लगा कर देखने लगी.

आठ कितनी जल्दी में भी गर्म हो गई.. आठ कितने समय खुद पर कण्ट्रोल बनाये हुए थी. पर अब्ब.. अब्ब मुझसे नहीं रहा जायेगा. अब तोह लाइव देख लिया. माँ भी मज़े करने लगी है. मैं भी तोह कर सकती हों. मुझे भी तो अपनी लाइफ की खुशियों को पाना है. मुझे भी तोह जवानी के सरे रंग देखने हाँ.

संजना ऐसे hi विचारों में बहती अपने बूब्स और छूट को मसलने लगी. कुछ मिंटो में उसके शरीर की कम्पन बढ़ी तोह एक तेज़ सिसकी उसके होंटो से जारी हो गई. नशीली आँखों से संजना मिरर में खुद को देखने लगी.

आह्हः इमेजिन करके hi इतना मज़ा आ रहा है. रियल में करूंगी तोह कितना मज़ा आएगा. संजना के हथु में तेज़ी और सख्ती आने लगी. संजना बेचैन होने लगी तोह उसकी छूट की आग बढ़ती चली गई.

स्पीड और भी बढ़ी तोह संजना झटके कहते हुए झड़ने लगी.

उम्मम्मम्मम आज कितने दिन बाद चुतरस के निकलने पर असली वाला आनंद मिला है मुझे. संजना तेज़ तेज़ सांस लेती खुद को आईने में देखने लगी. कुछ देर में वह बाथरूम में घुसी और खुद को मॉल मॉल कर धोने लगी. आज वह बड़े चाओ से नाहा रही थी.

दादी की आंख तब खुली जब दुर्बल की आवाज़ बार बार उसे सुनाई दे रही थी. दादी उठी और टाइम देखा तोह..

दादी ने माथे पर हाथ मार दिए-- ओह्ह्ह कितनी देर हो गई मुझे सोये हुए. अब तोह बच्चे भी आ गए..

दादी झट से उठी और दूर खोलने के लिए जाने लगी. फिर जैसे कुछ याद आया और वापिस पलटी और राज के कमरे में जा घुसी.. वहां देखा तोह दोनों नंगे लिपटे हुए है है कर फोन पर बातें कर रहे थे.

दादी-- तुम दोनों को दुर्बल सुनाई नहीं दे रही क्या.. दादी बोली तोह दोनों ने पलट कर दादी को देखा.

राज-- क्या हुआ दादी डार्लिंग

दादी-- डार्लिंग के बच्चे, टाइम देखो. कबसे दुर्बल बज रही है.. सब आ गए हाँ. तुम दोनों अभी भी ऐसे hi पड़े हो.

सुनैना को झटका लगा वह उठी और अपने कमरे उठा कर अपने कमरे की और भागने लगी. दूर पर खड़े होकर राज को देखा और--- सॉरी स्वामी जी. मुझे ऐसे घबराना नहीं चाहिए था. सुनैना वापिस पालनते लगी

राज- नहीं सुअनीना जी आप जाएँ. हम फिर मिलते हाँ न. सुनैना खुश खुश अपने कमरे में चली. राज भी अपने कपडे समेत कर अपने कमरे में जा घुसा.

दादी ने दूर खोला तोह बहार अखिल, के साथ साथ, रुपाली और वैशाली मौजूद थी. तीनो ग़ुस्से में थे

अखिल- दादी इतनी देर क्यों लगा दी आज आपने दूर खोलने में.

रुपाली-- कितनी देर से खड़े दुर्बल बजा रहे हाँ.

वैशाली-- रघु नहीं है क्या घर में. वो तोह खोल hi सकता था न दूर.

दादी साइड हैट गई. तीनो अंदर आ गए..

दादी-- मेरी आंख लग गई थी. तेरी माँ नाहा रही थी. रघु का मुझे पता नहीं. दहकती हों क्यों उसने दुर्बल नहीं सुनी.. फिर बोली-- संजना नहीं आई अभी तक

तीनो-- क्या.. वो अभी तक नहीं आई.

अखिल-- उसे तोह लेट होने की आदत hi नहीं है. आज भी वह जल्दी hi आ गयी थी. मुझे खबर मिली थी वह कॉलेज से टाइम से पहले hi निकल गई थी.

दादी-- फिर कहाँ होगी वह.. दादी चिंता में आ गई.

रुपाली-- उसके पास एक के रहती है न. शायद वह खुद से दूर खोल कर अंदर घुस आई हो..

दादी सुनकर परेशान हो गयी. सोचने लगी, अगर ऐसा हो चूका ह तोह कहीं उसने-- इससे आगे सोचने पर भी दादी को पसीना आने लगा

दादी-- देखो तोह ऊपर जा कर. वो अपने कमरे में है भी या नहीं..

कुछ देर में दादी को पता चल गया, संजना बहुत देर से अपने रोम में है. दादी और ज़यादा परेशान हो गई. राज के कमरे में घुसी तोह उसे भैस संजना का बता दिए.

राज ने दादी को अपनी बहन में भरा-- ये तोह अच्छा होगा. देख के वो नज़र अंदाज़ कर गई है. मतलब आधी वह त्यार हो गई है.

दादी-- तुम बस यही सब सोचते राहु. कुछ और गड़बड़ हुई तोह फिर..

राज-- कुछ नहीं होता दादी. देखना आज hi उसकी छूट चेक कर के आप को बता दूंगा. वह कितनी रिसने लगी है.

दादी वहां से निकल कर सुनैना के कमरे में गई और उसे भी बता दिए संजना का. सुनयना भी सुनकर परेशान हो उठी. फिर राज का सोच कर उसमे हिम्मत आ गई. राज को अब वो अच्छे से जान गई थी. राज हरामी अपनी माँ, बहनो और नानी को नहीं बख्श सका. अपने साथ मिला लिया. कितना कुछ कर गया था. तोह संजना को भी राह पर ला सकता था.

सुनैना ने अपने दिल की बात दादी को बताई तोह दादी हसने लगी-- एक hi दिन में कितनी बदल गई हो तुम सुनैना.

सुनैना भी है पड़ी. फिर राज को यद् करके बोली-- माँ जी, राज ने मुझे प्यार hi इतना दिए है. बदलती न, ऐसा कैसे हो सकता था.

5 बजे सब ड्राइंग रूम में बैठे हुए टीवी देख रहे थे. रुपाली, वैशाली और अखिल राज को देख कर कुछ हैरान थे. आज राज का अंदाज़ कुछ बदला हुआ था. राज ने खुद को कुछ खोलना शुरू कर दिए था. तीनो देख कर कुछ हैरान थे. संजना हैरान नहीं थी. बस राज को देख कर राज के लुंड को सोच कर उसकी मुनिया रिसने लगी थी. वो दृश्य उसकी आँखों से हैट hi नहीं रहा था. लाइफ का पहले दृष्टा था न. इसलिए भी वह भुला नहीं प् रही थी. वीडियो और रियल में इतना अंतर होता है. ये उसे आज पता चल रहा था.

राज दादी और सुनैना से है है बातें कर रहा था. रुपाली hi बोली.. जो बड़ी देर से अपनी माँ को देख रही थी. इतनी खुश पहले कभी दिखाई नहीं दी थी. इतनी सज धज के साथ भी वह कभी सामने नहीं आई थी.

रुपाली-- माँ क्या बात है. आज आप बहुत हटके दिख रही हाँ.

रुपाली की बात पर अखिल और वैशाली भी अपनी माँ को देखने लगे.

संजना मैं में.. इतना बड़ा लुंड लिया है. ऐसी नहीं दिखेंगी तोह और कैसी दिखेंगी.

दादी-- क्यों अच्छी नहीं लग रही क्या तुम्हे अपनी माँ ऐसे रूप में.

रुपाली-- मैंने ऐसा कब कहा दादी. मैं तोह माँ को बदला हुआ देख क्र पूछ रही थी. माँ तो आज बहुत सुंदर दिख रही हाँ.

सुनैना सुनकर शर्मा गई. उसके होंटो पर शर्मीली मुस्कान भी आ गई. टर्की नज़र से राज को देखा तोह वो भी उसे स्माइल कर गया. संजना सब देख कर समझ रही थी. कोई और नहीं समझ पाया.

डिनर के समय महेश नहीं लौटा था.

सुनैना-- अखिल बीटा आज तेरे पापा नहीं आये

ाकीहल-- ओह्ह में बताना भूल गया था. माँ पापा कुछ दिनों के लिए मुंबई गए है. एक मीटिंग भी थी वहां.. कॉल आई थी मुझे पापा की.

दादी-- ऐसे कैसे अचानक से चला गया. मुझे भी नहीं बताया.. मैं में सोचने लगी. कैसे बता के जाता. उसकी पत्नी अब नहीं रही. किस मोह से अब वह घर आता. कुछ दिन बहार रहेगा. फिर लौट आएगा.

सुनैना ने ज़यादा नहीं सोचा. उसकी सोचों में तोह राज hi राज था. राज को वह रघु hi कह रही थी. राज ने उसे बहुत कुछ समझा भी दिए था. सबके सामने अपने पति को रघु बोलना उसे अजीब सा भी लगा था. पर अभी ऐसा करना ज़रूरी भी था.

राज मन में है रहा था.

डिनर के बाद अखिल बहार निकल गया. सुनैना किचन में जा घुसी, रुपाली और वैशाली भी अपनी माँ के साथ काम करने लगी. संजना वही बेथ कर टीवी ों करके देखने लगी. राज उठा तोह संजना ने टेढ़ी आंख से उसे देखा. राज एकदुम्म से चलता हुआ संजना के साथ बेथ गया. संजना उछाल पड़ी. राज ने उसे अपनी बहन में भर लिया. संजना के चुके साइड से राज के सीने में दबने लगे तोह संजना की सांस hi उखड गई थी राज के ऐसा करने से. दादी भी हलके से है पड़ी थी.

संजना- ये क्या बदतमीज़ी है रघु.. अपनी लिमिट में रहो.. राज हरामी ने एक किश संजना के होंटो पर कर दी. और फ़ौरन hi उसकी जीन्ज़ की पंत के ऊपर से hi उसकी छूट को मसल दिए.

संजना तोह शॉक हो गई. दादी के सामने भी राज ऐसा कर सकता ha.sanjana ने सोचा नहीं था.

राज-- क्यों छूट गीली हो रही है न. राज ज़ोर से उसकी छूट को मसलते हुए बोलै

संजना मरदाना स्पर्श पहली बार पानी छूट पर प् रही थी. किश भी अब का उसकी लाइफ का पहला किश था. उसके होंठ जल उठे थे. छूट की खुजली बढ़ चुकी थी. करंट दौड़ने लगा था पुरे शरीर में..

संजना-- बेहवे योरसेल्फ रघु. अपनी हद में raho..chhodo मुझे.

संजना बोली तोह पर उसकी आवाज़ उसके काबू में नहीं रही थी.

राज ने एक किश और करदी. संजना ने दादी को देखा तोह वो स्माइल कर रही थी. संजना बड़ी हैरान भी हुई थी. आज की लड़की थी, फ़ौरन hi समझ भी गई.. ओह्ह्ह दादी भी, लगता है, रघु से चुद गई है.... आठ माँ, कितना बेशरम है ये लड़का.
 
दादी भी उठी और संजना के दूसरी साइड जा के बेथ गई.

दादी-- संजना बेटी, अपनी लाइफ अब तुम अपनी मर्ज़ी से जी सकती हो. पहले जो कभी में तुम्हे संस्कारो के भाषण दे दिए करती थी. अबसे नहीं दूंगी. मुझे एहसास हो गया है. लाइफ अपनी मर्ज़ी से जेने पर कितने आनंद मिलता है. तुम भी अपनी लाइफ अपनी मर्ज़ी से जिओ और सभी खवाब पुरे करो. रघु बेटे के मेरे सामने तुम्हे ऐसे पकड़ लेने से किश कर लेने पर भी तुम्हे वो ग़ुस्सा नहीं आया है, जो एक लकड़ी को आता है. इसका एक hi अर्थ है संजना के तुम्हारे दिल में भी कुछ कुछ होने लगा.

राज ने वही बैठे हुए एक हाथ आगे बढ़ाया और दादी का एक चुका पदाद के दबा दिए.

राज-- दादी आप बड़ी मस्त महिला है. बड़ी प्यारी भी हाँ. अपनी बच्चू का अच्छे से ख्याल भी रखती हाँ. सॉरी संजना तुम्हे तुम्हारी मर्ज़ी के बिना छुआ. ऐसा न करता तोह शायद तुम अपने विचार अपने अंदर hi दबा कर रखती. में चलता हों तो तुम दादी से बात कर सकती हो.

राज उठा और अपने कमरे में चला गया.

सज्नना लाल आँखों से दादी को देखने लगी.

सज्नना-- दादी..

दादी-- रह बेटे ने कुछ गलत किया क्या.

संजना ने होंटो भींच कर ना में सर हिलाया दिए. अब उसे शर्म भी आने लगी थी. ऐसे खुले में भी उसके साथ ऐसा हो सकता है. उसने सोचा नहीं था. राज कितना बड़ा हरामी था, उसे समझ आने लगी थी.

दादी स्माइल से-- दिखाओ तो मुझे तेरी मुनिया सच में hi रिसने लगी है क्या..

संजना और भी शर्मा गयी-- डाआडीईईई..

दादी हसने लगी

संजना को कुछ याद आया-- दादी मेने सब देखा था. माँ और रघु को एक साथ. दोनों-

दादी-- मैं समझ गई थी संजना beti.isi लिए मेने रघु को बता दिए. रघु ने अभी जैसा तुम्हारे साथ किया है. ऐसा सब करने से भी मुझे पता चल गया है, तू अपनी माँ को रघु के साथ चुकी है.

संजना- माँ दादी ये सब गलत है न.

दादी-- नहीं कुछ भी गलत नहीं है. देखा नहीं अपनी माँ को. कितनी खुश है woh.mujhe देख कैसे एक hi दिन में चलने लगी हों. कितने हिम्मत आ गई है मुझमे.

संजना-- दादी आप भी--

दादी-- हाँ रघु बेटे ने मेरे साथ ज़बरदस्ती नहीं करि है संजना बेटी. बड़ा प्यार और सम्मान भी दिए है मुझे. तुझे एक बात और बताओ..

संजना- वह क्या दादी.

दादी इधर उधर देख कर-- तेरे पापा ने तेरी माँ को डाइवोर्स दे दी है..

संजना-- kyaaaaaaaaaaaa.. चीख पड़ी थी संजना.

दादी ने उसके मोह पर हाथ रख दिए. रुपाली और विकशाली चीख सुनकर वहां आ गई.

रुपाली-- क्या हुआ संजना. ऐसे क्यों चीखी हो

दादी-- तुम दोनों काम करके औ. फिर बताती हों. मस्त जोके सुनाया है संजना को. देखो तोह इसका फेस कैसे हो गया है.

दोनों हस्ती हुई वापिस से किचन में जा घुसी.

दादी ने संजना का हाथ पकड़ा और उसे लेके अपने कमरे में जा घुसी.. दूर भी लॉक कर दिए..

दादी उसे लेके बीएड पर बैठी-- संजना बेटी तुम जानती हो na,tere पापा ने हमेशा तेरी माँ को दुःख hi दुःख दिए हाँ.

संजना दुखी होक-- हाँ दादी. सब जानती हों. पापा ने माँ को कभी सुख नहीं दिए.

दादी-- आज देखा कितनी सुखी दिख रही है तेरी माँ.

संजना-- इसी लिए तो में भी चुप हो गई थी दादी. वर्ण कोण बेटी अपनी माँ के साथ किसी बेगाने को देख सकती है.

दादी-- वह कोई बेगाना नहीं है संजना बेटी.. वह--

संजना-- क्या मतलब दादी. वो घर में काम करने आया है, और आप कह रही हाँ वह बेगाना नहीं है

दादी-- आराधना का नाम सुना है तूने कभी.

संजना हैरान होक-- आराधना.. मेरी मौसी.. वह जो भाग गई थी.

दादी-- रघु राधना का बीटा है संजना बेटी..

संजना को आज बड़े शोक लग रहे थे. झटके पर झटके मिल रहे थे उसे.

संजना मोह खोल क्र दादी को देखती रह गई.

दादी-- वो तोह यहाँ सब को मिलाने आया था. पर मुझमे हिम्मत की कमी देख कर प्यार कर बैठा. तेरी माँ के दर्द को जान कर उसे प्यार देकर सुख दे बैठा. देख कितना नेक लड़का है रघु. कितना अच्छा है. आते hi दो hi दिन में इस में खुशियों का ढेर लगा दिए.

संजना-- पर पापा ने माँ को डाइवोर्स क्यों दी दादी.. ऐसे तोह माँ का दुःख और भी बढ़ जायेगा. इस आगे की माँ एक दिवोर्सीद---

दादी हस्ती हुई-- अब से तेरे पापा बदल गए हाँ

संजना को फिरसे झटका लगा-- क्याआआआ.. मतलब क्या है आआप्का दादी.

दादी हस्ती हुई-- तेरी माँ की शादी आज hi रघु से हो गई है.

संजना तो गिरते गिरते बची. इतने झटके वह कैसे सहन कर पति. चहहुई मूई सी लड़की इतने झटके सहन नहीं क्र प् रही थी.

तेरी माँ ऐसे तोह रघु के साथ सोने से रही. बड़ी नेक विचारो वाली है तेरी माँ. रघु ने तेरी माँ की मांग भरी, फिर तेरे पापा को बुलवा कर मेरे सामने भगवन को साक्षी मान कर डाइवोर्स दिलवाई. अब्ब से तेरी माँ की ज़िन्दगी में एक hi मर्द रहेगा. और वो है रघु..

संजना बीएड पर लेट गई थी. उसे इतने शॉक मिल रहे थे. सहन नहीं कर पा रही थी.

संजना-- दादी ये सब सही हुआ है क्या.. कहीं कोई गड़बड़.. ाकीहल को, दीदी को पता चला तोह.

दादी-- तू मुझे सच सच बता. रघु ने तेरे साथ जो किया है. तुझे कितना घस्सा आया है.

संजना ने दादी को देखा, फिर नजरें चुरा गई

dadi-me जानती हों संजना बेटी. तेरे दिल में भी कुछ कुछ होने लगा है. देखना दो hi दिन में रघु सब ठीक क्र देगा. और फिर पुर शहर में ढंढूरा पीटने की ज़रूरत hi क्या है. घर की बात है. घर में hi रहे तोह अच्छा है. तेरी माँ को सुख प्राप्त हो रहा है तोह होने दो. बरसों से सब बिखरे हुए हाँ. एक होने दो. तेरी मौसी अर्कःनए भी तोह बहुत दुखी है. अभी उसे भी तोह सुख देना है रघु बेटे ने.

संजना कुछ सोचने लगी-- पर तीनो ममियों का वह क्या करेगा. उनके आगे तोह अब तीनो मामाओं की भी नहीं चलती. बड़ी घमंडी हाँ वह तीनो तोह. वह कैसे रघु के जाल में आएँगी. और फिर अब उन्हें हम सब से, या फिर नाना नानी से कोई मतलब भी तोह नहीं रह गया है. वह अपनी लाइफ में बहुत खुश हाँ.

दादी -- अरे तुम बस देखती जाओ. रघु बीटा कैसे सब ठीक करता है. तुम बस ये सब किसी को मत बताना. एक बार सब ठीक हो जाये तो फिर कोई चिंता नहीं रहेगी..

संजना-- में क्यों बताऊँगी किसी को.

दादी मज़े लेती हुई- चल दिखा न अब मुझे अपनी मुनिया.. करा न मुझे अपनी मुनिया के दर्शन.

संजना हस्ती हुई उठ बैठी-- दादी कसम से आपका ये रूप देख के मुझे बड़ा मज़ा आने लगा है. मुझे आपसे पहले भी बहुत प्यार था. पर अब तोह और भी बढ़ने लगा है. घर में कोई नहीं थी, जिससे अपने दिल की बात कर सकती. अब आप हाँ न मेरे दिल की सुनने के लिए.

दादी-- तेरे दिल का हाल तोह मेने जान लिया संजना बेटी. अब तू मुझे अपनी मुनिया का हाल दिखा.. दादी उसी टोन में बोली तोह संजना खिलखिला कर हसने लगी.

संजना- दादी पहले आप मुझे बताएं, कैसे सब हुआ था. कैसे रघु और आपका गेम शुरू हुआ था. कैसे आगे बढे आप दोनों..

संजना अब अपने कॉलेज वाली संजना थी. वह घर में hi कॉलेज वाली संजना बनने लगी. दादी को भी अब मज़ा आने लगा था. संजना दादी की सबसे चाहती पोती थी. अब खेल बदले थे, जीने के रंग बदले थे तोह दोनों का प्यार भी बदलने लगा था.

दादी कड़ी हुई और नंगी होने लगी. संजना होंटो और आँखों में मुस्कान लिए दादी को देखने लगी..
 
दादी संजना के साथ खूब खुल गई थी. संजना को दादी ने रघु से हुई चुदाई बारे पुरे मिर्च मसाले के साथ सब बता दिए. संजना बहुत गर्म हो गई थी. दादी को सुअनीना और रघु को सबकी नज़रों में लाना था तोह सबको एक करना भी ज़रूरी थी. उसके लिए भी ऐसा सब करना ज़रूरी था.

बचन के साथ hi दादी ने संजना को नंगा कर दिए. और उसकी छूट के साथ खेलती हुई उसे अपनी चुदाई बारे बताने लगी. संजना भी होममेड सेक्स में खोते हुए दादी से सब सुनते हुए दादी के शरीर के साथ खेलने लगी थी.

संजना एक hi दिन में दो बार अपनी छूट का पानी राज के कारन निकल चुकी थी. राज संजना की सोचों में बहुत गहराई तक उतर आया था. संजना दादी के कमरे से निकली तोह उसे चरों और राज hi राज दिखाई दे रहा था. दादी ने बहुत गरमा दिए था संजना को..

राज अपने कमरे से निकला तोह रुपाली, वैशाली और सुनैना ड्राइंग रूम में बैठी हुई टीवी देख रही थी. साथ में बातें भी कर रही थी.

रुपाली- रघु तुमने कॉफ़ी बनाना सीख लिया क्या.

रघु-- जी मां साब

सुनैना के होंटो पर मुस्कान आई तोह वह अपने होंठ दबा कर अपनी मुस्कान छुपा गई.

रुपाली-- अच्छी बात है. ऐसा करना कल सुबह मेरे कमरे में तुम कॉफ़ी बना के ले आना.

वैशाली-- दीदी पहले टास्ते तोह कर लें.

सुनैना-- मेने टास्ते करि है. रघु कॉफ़ी अच्छी बनता है.

रुपाली-- ठीक है तुम कल से मेरे रूम में कॉफ़ी लेके आना.

विषैली- मेरे लिए ले आना. में भी टास्ते कर लुंगी. माँ के हाथ की पि पि कर अब पहले जैसा मज़ा नहीं रहा.. वैशाली मस्ती से बोली तोह सब है पड़े.

रघु-- जी मम साब. ज़रूर ले आऊँगा..

रात सुनैना को जी भर के राज ने खुश किया. संजना का भी वह जान गया था. अगली सुबह सुनैना और राज मिलकर कॉफ़ी बना रहे थे. राज को कॉफ़ी बनाना नहीं आती थी. पर ये कोई मुश्किल काम नहीं था. राज जैसा हरामी ये भी करने लगा.

एक ट्रे में 3 कप कॉफ़ी लिए वह ऊपर वाले पोरशन पर जा पोहंचा. सबसे पहले राज

रुपाली के hi कमरे में जा घुसा. दूर खुला हुआ था. कमरे ग्राम था. हेतर ों था. रुपाली एक चादर में लिपटी हुई सो रही थी. राज तोह देखता hi रह गया. रुपाली कुछ सो रही थी.

1.jpg


राज सोचने लगा, रुपाली ने उसे ऐसी hi तोह अपने कमरे में बुलाया होगा. ज़रूर वो उसे ये सब दिखने का सोची होगी. राज कॉफ़ी साइड रखके घूम कर देखने लगी. राज ने देखा साली रुपाली बिना पंतय के सो रही थी. उसकी छूट क्लेअर्ल्य दिखाई नहीं दे रही थी. पर कुछ झलक उसे दिखाई दे गई थी. राज को लगा जैसे तो जाग रही है और सोने का नाटक कर रही है.

राज ने हाथ आगे बढ़ाया रुपाली की छूट पर हलकी सी ऊँगली चला दी. राज ने रुपाली के चेहरे पर देखा तोह, राज को रुपाली के होंठ हरकत में महसूस हुए..

राज ने रुपाली को तड़पने के लिए रुपार्ली के ऊपर चादर दाल कर उसे उठा दिए. रुपाली कसमति हुई उठी और राज को देख कर अपनी चादर को सही करने लगी.

रुपाली खुद को चादर में ढाका देख कर राज से ग़ुस्से से बोली-- स्टुपिड दूर नॉक करके नहीं आ सकते थे.

राज-- सॉरी मम साब.

रुपाली मोबाइल उठा के टाइम देखने लगी.

2.jpg


राज ने उसे कॉफ़ी दी और निकल पड़ा. पीछे से रुपाली बडबडी-- गधा दर कर आगे नहीं बढ़ सका. एक लड़की खुद से उसे सब दिखा रही है ये है छू कर भी हाथ पीछे हटा लिया..

रुपाली वर्जिन नहीं थी. अपनी लाइफ के पुरे पुरे मज़े ले चुकी थी. राज को पहली नज़र देख कर hi मैं बना लिया था उसने छोड़ने का.

राज वैशाली के कमरे में घुसा तोह वह दूर खुलने की आवाज़ पर hi उठ गयी थी. उसकी नींद पहले से hi पूरी हो चुकी थी.

राज को कॉफ़ी के साथ देखा तोह स्माइल करने लगी.

3.jpg


वैशाली-- सही टाइम पर आये हो तुम रघु. रघु तुम काफी हैंडसम हो. कुछ बताओ न अपने बारे में..

राज-- बताऊंगा न आप को सब अपने बारे में. वैसे सब आप जान तो चुकी hi हाँ

वैशलि सिप लेती हुई-- वो नहीं. कुछ मस्ती वाला बताओ न अपनी लाइफ का. विलेज की लाइफ तोह बोहतु मस्त होती है न.

राज-- चची के सामने बताऊंगा. राज उसे भी छेड़ता हुआ बोलै. रुपाली और वैशाली दोनों राज से खुल रही थी तोह राज का मैं होने लगा दोनों से अलग तरह से छेड़ छड़ करने का.

वैशाली-- इडियट.. माँ के सामने क्यों बताओगे तुम.

राज-- दादी के सामने बता दूंगा.. वैशाली को हंसी आ गई.

राज भी हस्ता हुआ वहां से निकल पड़ा. संजना के कमरे में पोहंचा और कॉफ़ी साइड रख कर दूर को लॉक कर दिए. संजना के साथ राज का मन कुछ और था.

राज बीएड पर गया, संजना करवट के बल सो रही थी. बोहत मीठी नींद में थी वह. राज उसके पीछे गया और उसके साथ जुड़ गया. संजना के गालों पर हाथ फेरने लगा. संजना कसमाने लगी. राज कभी संजना के गालों पर तोह कभी संजना के होंटो पर ऊँगली चलने लगा. संजना की नींद टूटे लगी. नींद टूटी तोह संजना को अपने चेहरे पर किसी का हाथ महसूस हुआ. संजना ने चेहरा मोड़ कर पीछे देखा तोह राज था. संजना खिल उठी. राज ने देर नहीं करि और संजना के होंटो पर अपने होंठ रख दिए. संजना जो रत पर अपने होंटो पर राज के होंटो की गर्मी फील कर रही थी. उसे मदहोश होने में देर नहीं लगी. वो भी पुरे मैं से राज के होंटो को चूसने लगी.

4.webp


संजना बड़ी जल्दी राज को एक्सेप्ट कर गई थी. शायद राज उसकी मौसी का भी बीटा है. ये सोच कर भी संजना खुलती जा रही थी.

राज ने संजना को सीधा किया और उसकी शर्ट उतार दी.

संजना कुछ शर्म से तोह कुछ प्यार से राज को देखने लगी.

संजना- तू तुम मेरे पापा भी हो और मेरे भाई भी. मेरी मौसी के बेटे भी हो. ओह्ह रघु तुम कितने प्यारे हो. कितने हॉट एंड केयरिंग हो. कितने सुख दे दिए दो hi दिन में दादी और माँ को. रघु तुम मुझे भी बहुत पसंद आ गए थे. पर अब तुम.. अब तुम मेरे दिल में बहुत गहराई तक उतरने लगे हो.

राज-- तुम्हे कुछ भी बुरा नहीं लगा.

संजना- बुरा क्यों लगेगा मुझे. बुरा तोह तब लगता. जब पता चलता तुमने माँ और दादी के साथ ज़बरदस्ती करि है. उसकी आत्मा को घायल किया है. तुम तोह बहुत अच्छे हो रघु. जो हम सब को मिलाने आये हो. बोनस में तुमने माँ को वह सुख भी दे दिए. जिसके लिए माँ हमेशा से तड़प रही थी. तुम नहीं जानते हो रघु. मैंने माँ को अकेले में बहुत बार रट हुए देखा है. माँ की लाइफ में बस साँसे hi थी. अंदर से वह खली थी. तुमने माँ को ज़िंदा कर दिए है रघु. माँ को इस रूप में देखे कर मैं बहुत खुश हुई हों

राज ने एक किश और करि तोह संजना कुछ लाल हो गई.

संजना-- रघु मुझे अपनी बॉडी दिखाओ न. कसम से कभी किसी लड़के को इतने करीब से नहीं देखा. अब जब तुम मेरे साथ भी खुल गए हो. तोह मेरे बेस्ट फ्रेंड भी बन जाओ और.. और.. और..

राज हस्ता हुआ-- और लवर भी.. संजना ने अपने चेहरा दोनों हथु से छुपा लिया.

संजना-- पता नहीं क्यों मुझे इतनी शर्म आ रही है. वर्ण अपनी फ्रेंड्स में मैं सबसे बड़ी बेशरम हों रघु.

राज-- तुम बेसहराम सिर्फ अपनी फ्रेंड्स में हो संजना. ऐसे मामले में तोह शर्म का आता बनता hi है. यही तोह हाँ हमारे संस्कार..

राज सीधा हुआ और अपनी शर्ट उतार कर अपनी बॉडी संजना को दिखने लगा. सनजना राज के शरीर को छू छू कर देखने लगी.

संजना-- रघु तुम्हारा शरीर बोहत स्ट्रांग है. एक पहलवान के जैसा.

राज-- तुम्हे पसंद आया.

संजना-- हम्म्म

राज फिरसे झुका और इस बार तसली से संजना को किश करने लगा. संजना के अंदर अब केवल राज hi राज था. वह राज के किश में खुद को भूलने लगी. अपनी लाइफ के किश के मज़े लेने लगी. एक मर्द के स्पर्श को पुरे मैं से महसूस करने लगी.

5.jpg


राज भी संजना को उसके हिसाब से प्यार देने लगा. घर की मुर्ग़ी थी, प्यार से hi खाना सही था. राज संजना को किश करते हुए उसके बूब्स भी पकड़ कर दबाने लगा. संजना ने ऑंखें खोल कर राज को देखा. आँखों की चमक बढ़ गई थी. यही तोह सब वह एक मुद्दत से छह रही थी. राज का खड़ा लुंड उसे अपनी छूट पर महसूस हुआ तोह वह अपनी टांगों खोल कर अपनी जंगों में राज के लुंड को दबा गयी. बड़ा आनंद प्राप्त हो रहा था उसे.

राज ने उसकी ब्रा को हटा कर उसके बूब्स नंगे किये और किश तोड़ कर बूब्स पर आ गया.

संजना- रघु मुझे प्यार करने लगे हो

राज-- वह तोह बहुत देर से कर रहा हों

संजना-- रघु मेरा बड़ा मैं था ऐसे प्यार का.. पर कोई मुझे जच्चा hi नहीं. दर भी बहुत रहता था. पर तुम्हारे साथ सबकरके मुझे दर नहीं लग रहा. मुझे बहुत अच्छा लग रहा ha.raj करो न मुझे प्यार. देखो तोह मेरे सुंदर शरीर कैसे तुम्हे दावत इ लज़्ज़त दे रहा है. रघु मुझे मदहोश कर दो. मुझे प्यार के वह रंग दिखा दो. जो मैं आज तक नहीं देख सकीय.

राज- सब तोह नहीं दिखा सकूंगा अभी.

संजना- जानती हों रघु. जितना हो सके उतने hi दिखा दो.

राज संजना के गोर सख्त हो रहे बूब्स पर टूट पड़ा. पहले एक चुके पर जीब फेरने लगा. पुरे चुके को चाटने लगा. संजना राज को देखने लगी. उसे बहुत मस्ती चढ़ने लगी थी. पर ये उसका पहला टाइम था तोह शर्म और जीजाक भी बोहत हो रही थी उसे. राज को अपने बूब्स के साथ खेलते देख कर वह बहुत खुश थी. बहुत मज़े में थी.

राज ने एक निप्पल को मोह में भरा और चूसने लगा

संजना-- ाःह रघु.. ये क्या कर रहे हो.. इनमे दूध नहीं आना शरू हुआ है अभी.

राज-- आ जायेगा तुम कुछ देर वेट करो.. राज निप्पल मोह से निकल कर बोलै तोह संजना और भी मस्त होने लगी.. राज के लुंड को और भी कास लिया था उसने अपनी जंगों में. अब लंड छूट से कुछ निचे हो गया था. पर हीट महसूस करके वह बहुत मस्त थी.

राज बारी बारी दोनों चुके निचोड़ने लगा. संजना धीरे धीरे और भी ज़यादा गर्म होने लगी. लम्बी साँसे लेने लगी. राज के लुंड को और भी कास लिया था उसने..

कुछ देर में संजना का हाल ख़राब होने लगा.

संजना-- आह्ह्ह्हह रघु.. कैसी आग लगा दी है तुमने.. मेरे भाई अपनी सिस्टर की आग बुझा दो. आठ मेरे चुके कहीं पहात न जाएँ.. कितने फूलने लगे हाँ. उफ्फ्फ्फ़ मेरे निप्पल... अह्ह्ह खा जाओ रघु मेरे दोनों निप्पल.. अलग कर दो इन दोनों को मेरे चुचु से.. maaaaaaaaaa.. आपने सच में भी बहुत मज़ा लिया है भाई ka.dadi आपकी भी छूट में भाई का यही डंडा घुसा था. आह्ह्ह्ह मा मैं .. रघु मेरे भाई.. मैं आने वाली हों..

राज ने स्पीड बढ़ा दी.. अपने डेंटन से संजना के निप्पल दबाने लगा.. दूसरे हाथ को बूब्स पर ऊपरी शरीर पर फेरने लगा. संजना की सिसकियाँ बढ़ने लगी.

कुछ देर में झटके खाने के बाद संजना की छूट ने पानी छोड़ दिए. संजना लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

राज ने संजना को पलट दिए. और उसके ऊपर ा कर उसके साइड गाल पर किश करने लगा.

संजना रिलैक्स हुई तोह खिल उठी थी.

राज-- कैसा लगा मेरी रानी तुम्हे अपने नए पापा, नए भाई का प्यार..

संजना-- इतना अच्छा.. इतना अच्छा मुझे अपनी पूरी लाइफ में नहीं लगा पापा. अंत में संजना हसने लगी..

6.webp


राज भी हसने लगा..

raj--toh अपने पापा को तुम अपनी पारी कब दिखा रही हो..

संजना भी मज़े-- पापा सिर्फ माँ की पारी देख सकते हाँ. बेटी की पारी तोह बेटी का पति hi देख सकता.

राज-- तोह फिर पापा का लुंड जो अकड़ा हुआ बेटी की गांड को मज़े करा रहा ha..usay भी मन कर देते हाँ.

संजना-- नहीं. इतना हक़ तोह उसे मिलना hi चाहिए पापा.. आखिर बेटी की है वो

राज-- मतलब पापा को पारी दिखा न दिखे. बाकि कुछ भी कर सकता है.

संजना-- बेटी को नए पापा बहुत पसंद आये हाँ. बेटी की पारी भी ख़ुशी से आज इतना झूम उठी है. खुद के पानी में नाहा गई है.

राज-- तोह पका के पप्पी को भी उसी पानी से नेहला दो न

संजना- अभी पप्पू को नहलाने के लिए माँ का पानी काफी है न पापा जी..

राज-- मतलब मैं और मेरा पप्पू उस पानी में नाहा नहीं सकते.

संजना-- जी बिलकुल पापा जी. अभी पापा की बेटी को बहुत सा प्यार चाहिए. तब तक आप बेटी की माँ के साथ पुरे पुरे मज़े करें और बेटी की दादी के साथ.

राज-- और बेरी की दीदियां जो हाँ. वो भी तोह पापा के प्यार के लिए तयां हाँ

संजना-- क्याआआआ..

राज- हाँ बड़ी बेटी के कमरे में गया तोह निचे से नंगी सो रही थी. वो सोने का नाटक करते हुए पापा को अपनी छूट के दर्शन करवा रही थी.

संजना-- ओह्ह्ह पापा दीदी बहुत हॉट एंड सेक्सी हाँ.

राज-- एंड जूसी भी..

संजना-- जूसी तोह होंगी hi.. जो उनके पास है, वह बहुत हेतुप है पापा.

राज-- और मंझली बेटी का क्या..

संजना-- उसका भी मुझे शक है पापा.. वो कभी खुलती नहीं है. पर उसके मैं में भी बहुत कुछ है.

raj-par मेरे साथ वह खुलना चाहती थी.

संजना-- ओह्ह्ह्ह इसका मतलब है, इस घर की सभी परियां पापा की होने वाली हाँ.

राज-- मतलब तुम भी मुझे अपनी पारी देने का मन बनाये हुए हो.. राज किश करते हुए बोलै तोह संजना बोली-- ओह्ह्ह पापा पारी तोह हमेशा hi पापा की होती है. किसी और की हो गयी तोह वह पारी कहाँ रहेगी

ऐसे hi मस्ती भरी बाटने चल रही थी. किसी ने दूर नॉक कर दिए..

संजना हड़बड़ गई.. रघु कोई आ गया है. हटो मेरे ऊपर से प्ल्ज़.

राज- दर गई हो क्या तुम

संजना-- भाई भी हो सकता है प्ल्ज़..

दूर फिरसे नॉक होने लगा. राज उठा और दूर खोल दिए.. सामने रुपाली कड़ी थी और उसकी नज़र राज के लुंड पर थी. जो पुरे चार्म पर था...
 
रुपाली दूर पर कड़ी राज के लुंड को तिरछी नज़रों से देख रही थी. राज ने भी उसे देखते हुए देख लिया था. राज मन में हसने लगा.

वहीँ रुपाली मैं में-- हरामी मुझे देखा नहीं और संजना के साथ मज़े कर रहा है. संजना कामिनी भी कितनी फ़ास्ट निकली. मुझसे पहले hi नंबर लगवा गई. देखती हों इसको.

रुपाली राज को ग़ुस्से से देखते हुए साइड हो गए-- जाओ निचे.

राज स्माइल करता हुआ निचे जाने लगा. रुपाली अंदर घुसी और चादर में लितपी संजना को देख कर आगे बढ़ी और चादर खेंच दी. संजना की ब्रा को ऊपर देख कर, उसके नंगे और गीले बूब्स देख कर वह संजना की छूट को देखने लगी. छूट पंतय में थी और पंतय गीली थी.

रुपाली-- कामिनी तू भी जवान हो गई.

संजना भी एक क्यूट स्माइल के साथ- रघु जैसा मर्द मिले तोह जवानी खुद से hi आ जाती है दीदी.

रुपाली-- बहुत बोलने लगी है तू. देख ये सब सही नहीं है. घर में माँ और दादी को पता चला तोह गड़बड़ हो जाएगी. मैं में.. फिर माँ और दादी रघु को निकल देंगी तोह मैं कहाँ से ढूंढूंगी उसे. कितना हॅंडसमे है रघु. उसके साथ मेरी फंतासी अधूरी रह जाएगी. विलेज हुए है. दुम्म तो बहुत होगा उसमे.

संजना-- क्या सोचने लगी हो दीदी.

रुपाली होश में आई-- मई क्यों कुछ सचने लगी

संजना नॉटी स्माइल के साथ-- लगता है आपका भी दिल ा गया है रघु पर

रुपाली- मेरा उस इडियट पर दिल क्यों आने लगा. उसमे ऐसा है hi क्या.

संजना उठी और रुपाली को गले लगा कर गाल पर एक किश कर दिए-- आपके मैं में रघु को लेके कुछ भी नहीं है.

रुपाली भी संजना को देख कर बोली-- मेरे दिल में क्यों कुछ आएगा

संजना-- अच्छा तोह आप फिर निचे से नंगी होक क्यों सो रही थी. रघु को पानी पारी दिखने के लिए.

रुपाली ने संजना को बीएड पर धक्का दे दिए. संजना हसने लगी.. रुपाली मन में-- कितना बड़ा हरामी है रघु.. कुत्ते ने बिना देरी के संजना को सब बता दिए.

संजना उठी और रुपाली का हाथ थाम कर-- दीदी मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है, रघु को थोड़ा सा आपके साथ भी में बाँट सकती हो. कोनसा वो घिस जाएगा.

संजना है कर बोली यह रुपाली-- आई बड़ी मेरे साथ शेयर करने वाली.. मुझे ज़रूरत नहीं है उस इडियट की

संजना-- दीदी आपको रघु के जैसा एक भी नहीं मिला होगा. जितने भी मिले है, उनमे उतना दुम्म नहीं होगा. जितना रघु में है.

रुपाली के मैं के कुछ हलचल हुई और वो बीएड पर बेथ गई-- संजू मुझे बता राज का साइज क्या है.

संजना-- हेहेहे दीदी. उसका.. kiska..batana तो ज़रा

रुडपली ने एक धप संजना के कंधे पर मार दी. बता न. रघु के साइज बारे.

संजना-- मुझही क्या पता मैंने कौनसा देखा है. संजना रुपाली के मज़े लेने लगी

रुपाली-- कामिनी तेरे से थोड़ा सा खुल क्या रही हों तुम तो सर पर hi चढ़ने लगी हो

रुपाली भी ड्रामा करते हुए उठने लगी तोह संजना ने उसका हाथ थाम लिया

संजना-- दीदी मेने देखा नहीं है.

रुपाली ने संजना के बूब्स को मसल दिए. उसकी छूट को दबा दिए-- बूब्स गीले हाँ छूट पानी छोड़ गई है. फिर भी तोह उसका लुंड देख नहीं पायी.. ये कैसे हो सकता है

संजना कुछ शर्मा कर-- दीदी फील किया है. देखने का समय hi नहीं मिला और धयान भी नहीं दे सकीय में. मज़े hi इतना आ रहा था.

रुआपि ने संजना को गले से लगा लिया- ाचा तोह मेरी लड़ो रानी को अब शर्म आ रही है. चल बता फील करने से तुझे कितना बड़ा लगा वह.

संजना रघु के लुंड को ख्यालों में देखने लगी. माँ के साथ देख चुकी थी. रुपाली को ये वाली बात तोह बता नहीं सकती थी.

संजना-- ी थिंक दीदी 9इंच के करीब तोह होगा hi..

रुपाली शॉकेड हो गई.. kyaaaaaaaaaa.. 9इंच.. नहीं इतना बड़ा कैसे हो सकता है किसी का. इंडिया में तोह कसी का इतना बड़ा नहीं देखा मेने.

संजना फिरसे नॉटी होते हुए-- कितनो के देख लिए हाँ दीदी आपने..

रुपाली- चल हैट बेशरम.. तू सच कह रही है न रघु का इतना hi है, जितना जो बता रही थी.

संजना रुपाली को और भी बेचैन करने के लिए-- हाँ दीदी. हीट में इतना था मेरी तोह छूट दो मिंट में hi सारा पानी पिघला गई. मुझसे सहन नहीं हुआ और मैं झाड़ गई. बड़ा लम्बा मोटा और गर्म है रघु का लुंड.. संजना भी अब खुल रही थी.

रुपाली राज के लुंड को इमेजिन करने लगी.

संजना देख कर मज़े लेने लगी.

न्सह्ते के बाद दादी सुनैना से बोली-- नीलेश सही नहीं कर रहा है सुनैना..

सुनैना और राज दादी को देखने लगे.

सुनैना-- क्या सही नहीं कर रहा है माँ जी.

राज दादी और सुनैना को देखने लगा.

दादी-- निशा की शादी एक बिज़नेस डील के लिए कर रहा है वह. कितना गलत कर रहा है. निशा कितनी दुखी है इस रिश्ते से

सुनैना-- हाँ एक वही तोह है जो हमारे साथ अच्छे से मिलती है. बाकि तोह सभी भाइयो के बच्चे उनके जैसे hi हाँ.

राज-- क्या बात है दादी मुझे बताएं. राज बोलै तोह दादी को लगा राज कुछ कर सकता है

दादी-- रघु बीटा तेरी निशा बेहेन बहुत मासूम है. बड़ी चंचल बड़ी संस्कारी भी है. बड़ी पैरी लड़की है वह. संजना से भी ज़यादा प्यारी. अभी 4तह ईयर में पढ़ रही है. पर तेरे मंझले मां एक बड़ी बिज़नेस डील के चलते निशा की शादी एक बिजनेसमैन से बेटे से कर रहे हाँ.

राज-- तोह क्या हुआ- होने दें शादी. राज दादी के मज़े लेने लगा. दादी निशा को लेके दुखी थी तोह राज दादी को छेड़ने लगा.

दादी-- रघु बीटा तू कुछ कर सकता है क्या.

राज-- मैं क्या कर सकता हों दादी. मैं कोई सुपरमैन थोड़ी न हों. छोड़ने में मैं मास्टर हों. शादी रुकवाना कोई बच्चू का खेल थोड़ी न है.

सुनैना अब राज को बहुत अच्छे से समझ गई थी. वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

दादी-- सुपरमैन तेरे सामने क्या बेचता है रघु बीटा. वो तोह फैमली हीरो है. तू तोह असल में हीरो है. दादी राज को आस्मां पर चढ़ाते हुए बोली तोह राज और सुनैना दोनों है पड़े. दादी भी हसने लगी.

सुनैना-- सुनिए जी. आप कुछ कर सकते हाँ तोह प्ल्ज़ कर दीजिये..

राज ने सुनैना को पकड़ा और अपनी गॉड में बिठा के किश करने लगा.

राज-- बिना मतलब के मुझे कुछ करने की आदत नहीं है. निशा की कुंवारी छूट और गांड दिलवाने का वडा करें तोह कुछ किया भी जा सकता है. दादी ज़ोर से है पड़ी. तोह सुनैना स्माइल करने लगी.

सुनैना-- मेरी और से खुली छूट है आपको. जब संजना के साथ इतना सब कर सकते हाँ तोह निशा के लिए आपको कोई परेशानी नहीं बनेगी. मुझे बीच में मत लाएं.

राज-- ये नहीं हो सकता. हर बार मैं hi शिकार करता फ़िरों. आप दोनों हाँ न अब मेरे पार्टनर शिकारी. मेरे लिए शिकार का इंतेज़ाम आप दोनों hi करेंगी अब..

दादी-- चल ठीक है तू भी क्या याद करेगी. दादी तुझे निशा त्यार करके देगी.

राज-- वह रंडी दादी तू अब दलाली भी करने lagi.raj हस्ता हुआ बोलै तोह दादी भी हस्ते हुए राज को गलियां देने लगी.

सुनैना को तोह राज हर एक रंग बहुत भने लगा था.

तीन दिन बाद सगाई थी तोह 2 महीने बाद शादी.. राज ने सोच लिया जब इतने झंडे गाढ़ दिए हाँ तोह निशा वाला भी सही. एक तोह उसे क्योर फेस वाली लड़की की छूट और गांड मिलेगी. दूसरा निशा मन पसंद शादी भी कर सकेगी.

तीन दिन राज जब भी मौका मिलता, दादी की छूट काम तोह गांड ज़यादा मारता. दादी की आत्मा hi रोले के रख दी थी राज ने.

वहीँ राज सुनैना को जी भर कर प्यार दे रहा था. बड़े चाओ के साथ उसे छोड़ता था. संजना के साथ राज ज़यादा आगे नहीं बढ़ा था. किश टचिंग, जिसे से आगे नहीं बढ़ा था. संजना को भी राज मज़े से छोड़ना चाहता था. संजना राज से बहुत खुश थी.

वैशाली भी कुछ कुछ राज की और अत्त्रक्ट हो रही थी. पर ज़यादा नहीं. रुपाली तोह राज के लिए पागल होने लगी थी. राज को बार बार अपने कमरे में बुलवा कर अपना फिगर दिखाना, हॉट बातें करना. बार बार निचे जा के भी राज के सामने जाना. राज को गर्म करने की कोशिश कर रही थी. पर राज अब एक तरह के खाने खा खा के ऊब गया था. संजना के साथ राज अलग अंदाज़ से आगे बढ़ रहा था तोह रुपाली को तड़पा कर, तरसा कर वह आगे बढ़ रहा था.

राज रुपाली के खूब मज़े ले रहा था. सुनैना और दादी देख कर दिल hi दिल में बहुत हस्ती थी. राज के सामने पेट पकड़ कर है पड़ती थी.

संजना भी राज और रुपाली के लिए खूब एक्ससिटेड थी. उसे भी राज का रुपाली के साथ ऐसे बर्ताव खूब मज़ा दे रहा tha.sanjana तो डबल मज़े में हो गई थी. खुद के भी और रुपाली को देख के भी.

तीसरे दिन सब मिलकर एक गाडी में बैठे मंझले मां की कोठी पर जा रहे थे. राज अस ा गेस्ट जा रहा था. कोई नहीं जनता था, राज पहले मौसी के घर नौकर बन कर आया था.

सब वहां पोहंचे तोह गेट से कुछ hi आगे बढे थे. राज वहां आईएनएस शिवानी को देख कर हैरान हो गया. संजना तेज़ क़दमों से आगे बढ़ी और शिवानी के गले लग गयी..

संजना- कैसी हो दीदी.

शिवानी-- एकदुम्म मस्त मेरी बेहेन-- शिवानी संजना के गाल पर किश करते हुए बोली.

राज को झटका लगा. बड़ा झटका तब लगा जब सुनैना ने कान में कहा ये आपकी मौसी अर्चना की बड़ी बेटी शिवानी है. ये पुलिस आईएनएस है इसी शहर में..

राज हैरान हो hi रहा था. कुछ फैसले पर राज को एक एज्ड औरत और मैरिड लड़की दिखाई दी. औरत और लड़की के साथ साथ उसकी गॉड में बेबी देख कर राज को एक और झटका लगा..

सुनैना ने देख लिया राज कहाँ देख रहा है.

सुनैना-- वह लड़की आपके मां के बड़ी बेटी राधिका है, उनकी गॉड में उनका बीटा है और साथ में उनकी सास है. radhika....city में रहती है. वहीँ उसका ससुरात भी है...
 
शिवानी संजना से मिलके सबसे मिली. राज से मिलके पूछने लगी. ये कोण है. राज इतना भी चेंज्ड नहीं था, शिवानी उसे पहचान न सकती. एक पुलिस वाली थी तोह खूब राज को पहचान गई थी. पर अनजान बनते हुए राज के बारे में पूछ गई. राज बे बड़े धयान से शिवानी को देखा था. पर जजमेंट नहीं कर पाया था.

मन तोह हुआ था सुनैना, संजना और दादी का. बता दें, शिवानी ये तुम्हारा भाई है. पर नहीं बता सकीय.

दादी-- ये हमारे गेस्ट हाँ शिवानी बीटा. मेरे पति के दोस्त के नाती. यहाँ पढाई के चलते आये थे तोह अपने साथ hi रख लिया. आज इसे भी साथ ले आई.

शिवानी ने हाथ बढ़ा दिए था. राज शिवानी का हाथ की गर्मी और नरमी महसूस करने लगा. एक पुलिस वाली का हाथ था. देखना तोह था hi. शिवानी आज ब्लू साड़ी में थी. आज वह बहुत हसीं दिख रही थी.

सब आगे बढ़ने लगे. वहां पर भी इंट्रो होने लगे. ममियां घमंडी थी. मड़ई ममी कुछ चेंज्ड थी. मंझले मां रितेश ज़यादा पैसे वाले थे. उसी हिसाब से मझली ममी के अंदर भी घमंड ज़यादा था.

राज का इंट्रो वैसे hi हुआ, जैसे शिवानी को बताया गया था. कोई ऐसा नहीं था जो राज को पहचान पता. इसलिए राज सुकून से था.

वो एज्ड औरत और लड़की डॉन वही थी. जब एक बार राज अपने हरामी दोस्तों के साथ शहर गया था. वहां उसने लड़की के बूब्स प्रेस किये थे तोह उसकी सास के गले मिलते हुए उसकी छूट में ऊँगली करके उसका चुतरस निकल दिए था. राज दोनों को देख कर हैरान हुआ था. ये जान क्र और भी हैरान हुआ था. लड़की उसके मां की बड़ी बेटी थी.

दोनों ने भी राज को देखा था. पर पहचान नहीं पाई थी. हाँ राधिका ने ज़रूर धयान दिया था. बड़े घोर से राज को देखा था. राज उसे कुछ जाना पहचाना सा लगा था पर वह पहचान नहीं पाई थी.

राज सुनैना परिवार के शिव किसी के लिए खास नहीं था तोह राज को ज़्यादा भाव नहीं मिला. राज को भाव की ज़रूरत hi कहाँ थी. जहाँ चाहता अपना भाव बढ़ा सकता था.

राज वहां की गर्ल्स एंड बॉयज के साथ घुल मिल गया था. राज का समय अच्छे से बीता.

एक दो बार शिवानी से आमना सामना हुआ तोह शिवानी ने राज को स्माइल कर दी. राज ने भी बदले में उसे स्माइल कर दी.

तीसरे बार राज शिवानी का आमना सामना हुआ तोह राज बोलै -- क्यों बिजलियाँ गिराने पर तुली हुई हाँ आप हम जैसे गरीबो पर..

शिवानी राज को देख कर मुस्कुराई-- बिजली गिरना hi तोह हम लड़कियों का काम होता है रघु जी. ऐसे hi तोह नहीं हम बन थान के यहाँ मौजूद हाँ.

राज का नाम सुनैना के शिव सब रघु hi जानती थी.

राज-- चलो न कुछ बातें कर लें.

शिवानी-- क्यों.. इधर उधर कर फिरसे boli..mai hi क्यों.. इतनी लड़कियां हाँ यहाँ पर. तुम हैंडसम हो, किसी के साथ भी बात कर सकते हो. कोई भी तुम्हे नज़र अंदाज़ नहीं करेगी. तुम भी तोह एक हैंडसम लड़के हो.

राज-- वही कहा आपने. बहुत लड़कियां हाँ यहाँ पर. मैं हैंडसम भी हों. पर आप सब से अलग हाँ.

शिवानी-- ये बात भी नहीं है रघु जी. हर लड़का लड़की को बांस पर चढ़ाने के लिए ऐसा hi बोलता है.

राज-- स्माइल से.. आईने में देख के आप भी खुद पर निसार हो गई होंगी. मेरे सामने क्यों खुद को हल्का पेश कर रही हाँ. आप तोह सबसे स्पेशल हाँ.

शिवानी- अच्छा. मई स्पेशल हों तुम्हारी नज़र में.

राज-- यस.. ये भी भला बोलने वाली बात है. सूरत और सीरत खुद hi बता देते हाँ, सामने वाला कितना स्पेशल है.

शिवानी-- बातें तोह खूब करते हाँ आप रह जी.

राज-- आप जैसो को देख कर मैं से खुद बा खुद hi ऐसी बातें निकलने लगती हाँ.

संजना दोनों के पास आ गई

संजना-- क्या बातें हो रही हाँ भाई. मैं भी शामिल हो सकती हों क्या आप दोनों की बातों में.

शिवानी-- अरे तुम तोह मेरी जान, मेरी बेहेन हो. तुम्हे परमिशन लेने की ज़रूरत hi क्या है.

संजना-- तोह फिर क्या बातें हो रही थी.

शिवानी मज़े से राज को देखते हुए-- रघु जी का कहना है. मैं आज की महफ़िल में सबसे स्पेशल हों. सबसे अलग दिख रही हों.

संजना-- ये तोह रघु जी ने मेरे मैं की बात कही है दीदी.. कसम से मई लड़का होती न तोह आप को अभी के अभी प्रोपोज़ क्र देती. इतनी hi ब्यूटी प्रिंसेस दिख रही हाँ आप कसम से.. संजना शिवानी के गाल को चूमते हुए बोली. शिवानी हलके से है दी.

राज-- तोह संजना जी आपको लड़का हाँ नहीं. लड़का में हों तोह आपकी जगा मई hi आपकी प्रिंसेस का प्रिंस बन जाता हों.

संजना सोखी से-- फिर मेरा क्या होगा प्रिंस.

राज, शिवानी और संजना तीनो है पड़े.. तीनो को हस्ता देख कर सब इधर hi देखने लगे. लड़के लड़कियां एक दूसरे से खुसर फुसर करने लगे. राधिका फिरसे राज की और आकर्षित होकर देखने लगी. राज का हसना बोलना उसे खटक रहा था. उसे खुद पर बड़ी हैरानी हो रही है. उसे ऐसा क्यों फील हो रहा था. राज को घोर से देखने पर भी उसे राज पहचान में नहीं आ रहा था. राधिका की सास भी एक दो बार बड़े घोर से राज को देख चुकी थी. वह भी राज को देख के विचारों में खो गई थी.

राज को किसी से घंटा भी फर्क नहीं पड़ता था. मौसी अर्चना को राज अच्छा दिख रहा था. शिवानी और राज की कोई जोड़ी नहीं थी. राज शिवानी से कई साल छोटा था. पर फिटनेस और मर्दानगी के बल कर वह शिवानी के साथ भी खूब जांच रहा था. अर्चना मौसी आज बहुत दिनों बाद कुछ फ्रेश और खुश दिखाई दे रही थी. सुनैना को देख कर खुश थी शायद. सुनैना को इतना खुश उसने पहले कभी नहीं देखा tha.ye देख कर भी वह बहुत खुश थी.

तीनो ममियां भी राज की पर्सोनाइटी से खूब इम्प्रेस हुई थी. पहले जो भाव नहीं दिए था. अब राज पर धयान दे रही थी. राज बहुत है मुख दिखाई दे रहा था.

आधे घंटे बाद सगाई का प्रोगम्मे चालू हुआ तोह नसिह को लाया गया. लड़का तोह राज पहले hi देख चूका था. राज को भी लड़का पसंद नहीं आया था. इतने शब्द उसके मोह से नहीं निकले थे बातों के लिए. जितनी बार उसने अपनी मूंछो को ताओ दिया था. साला कहीं से भी निशा के लायक नहीं था.

निशा को देख कर राज स्टेचू सा बन गया था. शहर की किसी लड़की को पहले बार दुल्हन के रूप में देख रहा था. पूरी दुल्हन तोह नहीं थी. अभी सगाई थी. फिर भी निशा बेहद हसीन दिखाई दे रही थी. राज तोह उसे देखता hi रह गया.

राज मैं में-- निशा तोह आस्मां से उत्तरी हुई कोई अप्सरा है. कितनी हसीं, कितनी प्यारी है निशा. इस घुंचू के साथ तोह मैं कभी भी निशा की शादी नहीं होने दूंगा.

सगाई को रोका नहीं जा सकता था. हाँ शादी को ज़रूर वह तुड़वा सकता था. अब तोह राज ने पूरा मन बना लिया था. निशा की शादी इस उल्लू के पट्ठे से तोह वह होने hi नहीं देगा.

अपने तीनो मामाओं को देख कर, मामियों को देख कर राज बड़ा हैरान था. बड़ी ममी कुछ निशा के लिए चिंतित दिखी थी. बाकि दोनों मामियां और मामे नार्मल hi थे. अर्चना मौसी भी निशा के लिए दुखी थी तोह मौसा को कोई फर्क नहीं पद रहा था.

निशा के डैड के पार्टनर बहुत खुश दिखाई दे रहे थे. उसका बीटा उल्लू का पट्ठा कुछ ज़यादा hi निशा को देख देख कर अपनी मूंछो को ताओ दे रहा था. कुछ कमैंट्स का भी उसे सामना करना पड़ा था. पर वह बेशर्मी से है दिए था.

सगाई हो गई. कुछ

सब को खाना खिलाया जाने लगा. सुनैना से कह कर राज ने निशा से बात करने का कहा.

रात 12 बजे के बाद सब मेहमान चले गए. सिर्फ अपने hi रह गए थे. सुनैना निशा के साथ बेथ गई तोह दूसरी और दादी बेथ गई.

सुनैना ने निशा के गाल पर किस करके उसे गले से लगा लिया. धीरे से उसके कान में बोली.. निशा बेटी वह देख रही है उस लड़के को.. जो हमारे साथ आया है. रघु नाम है उसका. समझ लो तेरा एक ऐसा भाई तेरे पास आ गया है जो तुझे तेरी ज़िन्दगी की साडी खुशियां लौटा देगा. तेरी शादी नहीं होने देगा. तुम अपने सरे देखे खवाब पुरे कर सकती हो..

निशा बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाए हुए थी. अपने पेरेंट्स के फैसले से वह खुश नहीं थी. बहुत मन किया था उसने डील के बदले शादी के लिए. पर किसी ने उसकी नहीं सुनी थी. बहुत से खवाब देख रखे थे उसने. उसे पढ़ना भी था और मन पंसद लड़के से शादी करनी थी. खुद से अपना फ्यूचर बनाना चाहती थी. बहुत काबिल भी थी निशा. पर छह कर भी खुद के लिए फाइट नहीं कर पाई थी. अच्छी लड़की थी, वर्ण घर छोड़ने की धमकी भी दे सकती थी. ऐसा नहीं किया था उसने. सुनैना की बात सुनी तोह उसका दर्द बहार आने लगा. नज़र उठा कर राज को देखा.

राज बड़े चाओ से उसे देख रहा था. आखिर निशा उसकी मां की बेटी थी. उसकी बेहेन थी. सच्ची फीलिंग्स तोह आणि hi थी.

निशा-- बुआ कोण है वह लड़का.

सुनैना-- अपना hi है.

निशा-- मतलब..

सुनैना ने राज को देखा तोह राज हाँ में सर हिला दिए.

सुनैना-- निशा बेटी खुद पर काबू रखना. किसी को अपनी हालत का अंदाज़ा न होने देना.

निशा समझ नहीं सकीय तोह अपनी बुआ को हेरात से देखने लगी.

सुनैना-- वह तेरा भाई है. तेरी तीसरी बुआ का बीटा.

निशा-- क्याआ.. निशा की आवाज़ तोह धीमी hi थी. पर उसे हेरात का झटका ज़रूर लगा था. वह टुकर टुकर राज को देखने लगी.

सुनैना-- देख उसे निशा. तेरा भाई है वह.. तेरी बुआ का बीटा राज.. यहाँ सब उसे रघु के नाम से जानते हाँ. वह हम को मिलाने के लिए आया है निशा बेटी. तेरे दादा दादी को भी तेरी बुआ के साथ मिला दिए है राज ने. मुझे देख मैं कितनी खुश हों. माँ जी को देख, जो चला फिर नहीं सकती थी. आज देखो कैसे घोड़े के जैसी भागी भागी फिर रही हाँ. राज के आने आने से हम सब की खुशियां लौटने लगी हाँ. तेरे खवाब भी राज बीटा कभी टूटने नहीं देगा. देख उसके चेहरे को देख. देख तुझसे मिले बिना hi वह तेरे लिए दिल में कितना प्यार समाये हुए है. देख उसके चेहरे को देख. देख और बता मुझे. क्या ऐसा मर्द कभी अपने इरादों में फ़ैल हो सकता है. ये यहाँ केवल तेरे लिए आया है निशा बेटी.

निशा का दिल धक् धक् करने लगा था. राज को देख कर उसके दिल में भी ख़ुशी सामने लगी थी. एक आस उसे भी दिखने लगी थी. बहुत दिनों से जो राह, जो आस उसे दिखाई नहीं दे रही है. राज की सूरत वह उसे दिखाई देने लगी थी. सुनैना की बातों में उसने बहुत विश्वास पा लिया था. राज के चेहरे को भी देख कर वह बहुत कुछ समझ गई थी.

उसका मैं हुआ उठ कर राज के गले लग जाए और कहे. मेरे भाई मेरे खवाब टूटने से बचा लो. आ hi गए हो तोह मुझे मेरी ज़िन्दगी मेरे हिसाब से जीने का हक़ भी मुझे दिलवा दो. पर सुनैना ने सख्ती से उसके हाथ को उसकी hi जांग पर दबा रखा था.

राज ने सर हिला कर उसे सिंगल दे दिया. वह अपनी बेहेन की खुशियों के लिए कुछ भी कर जाएगा. छूट और गांड तोह बिलकुल भी नहीं छोड़ेगा.. निशा आखरी इशारा नहीं समझ सकीय.

निशा सुनैना के गले लगी और आंसू बहाने लगी-- बुआ सच में मेरे खवाब टूटने से बच जायेगे.

सुअनीना उसकी पीठ सहलाते हुए.. क्या तुझे अब भी कोई शक है. अपने घर वळून को तूने पहचान लिया है. अपने चाचा और भाइयों को भी पहचान लिया है. क्या तू राज को देख कर नहीं पहचान सकती. तेरे भाई तेरे लिए कुछ भी कर जाएगा निशा. ये यकीं अपने अंदर रख कर समय काट. कुछ भी करना पड़े उसे. वह पीछे हटने वळून में से नहीं है.

निशा ने एक बार फिरसे पलट कर राज को देखा. उसके होंटो पर स्माइल आ गई.

मंझली ममी आ गई. निशा तुम रोने क्यों लग पड़ी हो.

सुनैना-- भाभी मुझसे मिलकर कुछ दुखी हो गई थी.

ममी-- देखो सुनैना मेरी बेटी के कान भरने की कोशिश मत करना.

राज ममी को देख कर ग़ुस्से में नहीं आया. वह तोह ममी की बड़ी गांड देखने लगा था. सोच रहा था. पहले इसे hi खुला करूँगा. फिर पूछूंगा. बात कैसे की जाती है.

कुछ देर और रुक कर सब वहां से निकल पड़े. अब निशा को कोई चिंता नहीं रही थी. एक आस थी उसके पास. उसकी शादी तोड़ने वाला आ गया था.

पर ये नहीं जानती थी. शादी टूटी तोह छूट और गांड की सील भी टूटेगी. शादी टूटने पर दिल को ख़ुशी मिलती. तोह छूट और गांड की सील टूटने पर बहुत ज़यादा दर्द भी सहन करना को मिलने वाला था.
 
अगले दिन राज दोपहर के टाइम सुनैना के घर से निकला. हेलमेट पहने बाइक पर राज शहर की सड़कों पर घूम रहा था.

एक सिंगल रोड से गुज़रा तो आगे एक पुलिस वन जा रही थी. राज ने थोड़ी स्पीड पकड़ी और पुलिस वन से आगे निकलने लगा. उसी समय सामने से एक बाइक वाले भी गलत तरीके से बाइक चलता हुआ राज के पास से गुज़रा. राज ने बड़ी पूर्ति से बाइक थोड़ी लेफ्ट को घुमा दी. राज बाल बाल बचा था, वर्ण सामने से आने वाला बाइकर उसे थोक देता.

राज उसे मैं में गलियां देने hi वाला था. पुलिस वन राज की बाइक से टकरा गयी. थोड़ी सी साइड लग गई थी. राज बाइक संभल नहीं पाया और गिर पड़ा.

पुलिस वन भी रुकी और उसके अंदर से आईएनएस शिवानी उत्तरी. वो ग़ुस्से से चीखने लगी.

शिवानी- साले तुझे बाइक चलनी भी नहीं आती.

शिवानी राज के पास पोहंच कर बोली. आस पास के लोग भी जमा हो गए थे. राज हेलमेट उतरे बिना hi उठ खड़ा हुआ और शिवानी को देखने लगा. राज ज़ख़्मी होने से बच गया था.

राज -- अरे शिवानी जी आप.

शिवानी हैरान होक-- कोण हो तुम.

राज-- रघु.. रत को hi तो मिले थे सगाई में.

शिवानी राज को घोर से देखने लगी. ओह तो तुम हो रघु.

राज-- हाँ में hi हों रघु. ड्राइविंग तोह आपको भी नहीं आती आईएनएस साहिबा. मैं तोह बाइक वाले से बच गया. पर आप ने मुझे टोक दिए. वो तो किस्मत अच्छी थी जो बच गया. वर्ण आज तो मेरा काम हो जाना था. राज हस्ते हुए बोलै

शिवानी भी है पड़ी-- वैसे पुलिस वन के निचे आ कर मरते तोह शहादत की मौत मिलती तुम्हे.

राज-- हाहाहा.. अभी मेरा मरने का मैं नहीं है. शिवानी के मस्त फिगर को घूरते हुए. अभी तोह मुझे बहुत सी दाऊ पीनी है. उसे पिए बिना मेरा इस दुन्या को छोड़ के जाने का मैं नहीं है.

शिवानी-- ऊऊऊ.. लगता है, कुछ ज़यादा hi गर्मी छड़ी हुई है. उतरनी पड़ेगी.

राज-- जी बिलकुल.. ये गर्मी तोह आपक जैसी hi कोई उतर सकती है.

शिवानी-- हेहेहे मत भूलो में एक पुलिस वाली भी हों. और मुझे गर्मी उतरने के और भी हज़ारों तरीके आते हाँ.

शिवानी फूल खुल कर राज से बात कर रही थी. राज शिवानी को खुलते देख कर और भी खुल रहा था.

राज इधर उधर खड़े लोगों को देख कर धीमे से बोलै-- हज़ारों तरीको से गर्मी काम नहीं होती शिवानी जी. उससे गर्मी और भी बढ़ जाती है. काम या ख़तम करने के लिए कुछ और करना पड़ता है.

शिवानी-- बड़े एक्सपेरिएंस्ड हो तुम तो.

राज-- पता नहीं हों या नहीं. पर आपको देख कर एक्सपीरियंस खुद से होने लगा है.

शिवानी हसने लगी-- चलो आज तोह में बिजी हों. अपना नंबर दो मुझे. टाइम मिलने पर मिलके बात करते हाँ. देखते हाँ कितनी गर्मी है तुममे.

राज ने अपना नंबर दिए तोह शिवानी पुलिस वन में बेथ कर निकल पड़ी. राज भी बाइक सीढ़ी करते हुए उसपे बैठा और निकल पड़ा. वहां खड़े हुए लोग राज और शिवानी को लेके खूब मिर्च मसाला ले के बातें करने लगे.

राज के दिमाग में दूर दूर तक नहीं था. शिवानी सिमरन से अटैच्ड भी हो सकती है.

एक पार्क में घुस के राज एक पेड़ के निचे बैठा और फोन निकल के नानी को कॉल मिला दी.

राज-- किसी हो मेरी सेक्सी डार्लिंग

नानी- आ गई तुझे मेरी याद.

राज-- आणि तोह नहीं चाहिए थी सेक्सी. पर क्या करता. आपकी गांड की याद आ गई थी.

नानी नाना के पास hi बैठी हुई थी. नाना में आये रंग को गहरा करने के लिए नानी ने लाउड स्पीकर ों कर दिए.

नानी-- क्या बोलै तोह था, ज़रा फिरस बोलना

राज-- अरे नानी डार्लिंग मेने कहा तेरी गांड में लुंड घुसाए बहुत दिन हो गए हाँ. क्रीम श्रीम लगा कर रखो. उसे कुछ टाइट करो. जल्द hi उसमे अपना लुंड डालने आ रहा हों.

नाना पहले तोह राज की आवाज़ और शब्द सुनकर हैरान हुए. फिर नानी को देख कर हैरान हुए. फिर ज़ोर से है पड़े.

नाना-- राज बीटा तुम.. तुम कितने बड़े हरामी हो. कुछ तोह थोड़ी सी शर्म कर लिया करो.

राज-- हाहाहा नाना जी.. ओह सॉरी आपके साथ मिलके नानी को छोड़ा है. तोह अब से हम बराबर हुए न. हम दोनों अब एक सम्मान हुए न. तोह मेरे छोड़ो पार्टनर कैसे मिज़ाज हाँ आपके.

नानी है पड़ी. नाना 2 सेकंड खामोश रहे फिर बोले-- राज बीटा तू तोह मुझे भी अपने जैसा बनाने पर तुला हुआ है.

राज-- वो तोह आप नेहा और नैना की छूट में लुंड घुसा कर मेरे जैसे बन hi गए थे.

नाना को नेहा और नैना की चुदाई याद आई तोह वह अपने लुंड को मसलने लगे.

नानी हसने लगी

राज-- क्या हुआ मेरी सेक्सी डार्लिंग

नानी-- राज तेरे नाना नेहा और नैना को नहीं भूल प् रहे हाँ.

राज-- हाहाहा क्यों मेरे ठरकी नाना. फिरसे छोड़ने का मैं है दोनों को.

नाना ने नानी को देखा

नानी-- शर्मी जी, अब भी शर्म करेंगे आप.. कितना कुछ बदल गया है हमारी ज़िन्दगी में. कितने अच्छे बदलाव आ गए हाँ हमारी ज़िंदगी में. एक खोई बेटी मिल गई है. दूसरी की ज़िन्दगी में भी अब खुशियां आने लगी हाँ. जल्द hi बाकि के सब बचे भी हमारे साथ हो जायेंगे. अब तोह आप भी पूरे बदल जाएँ. पता नहीं कितनी साँसे लिखी हाँ. जितनी बची हाँ उनको तोह ख़ुशी कृषि ले लें.

नाना ने नानी को देख कर एक लम्बी सांस ली.. फिर बोली-- राज बीटा. इस संसार में बहुत से चीजों के बिना इंसान रह नहीं सकता. पर प्यार और सबका साथ मिलके रहना एक ऐसी बात है. जो अगर किसी को अवेलेबल न हो सके तोह साँसों की अहमियत न होने के बराबर है.

मैंने अपनी ज़िन्दगी के बहुत से साल वास्ते कर दिए हाँ. अब और नहीं करना चाहता राज बीटा. अब मुझे भी प्यार और सबका साथ चाहिए राज बीटा. मैं अब से सारा बदल जाऊँगा. इस उम्र में शर्म कर, जीजाक कर मुझे कुछ नै मिलेगा. हाँ बचा खुचा भी खो दूंगा.

राज-- तोह बताएं फिर नानी की बूढी छूट में मज़ा है या नेहा और नैना की छूट में.

नाना भी हस्ते हुए-- तू जितना भी बड़ा हरामी बन जाए राज बीटा. पर मैं फिर भी यही कहूंगा. जो खालिस माल हो, जो अपना माल हो, उससे बढ़कर कोई नहीं हो सकती. तेरी नानी बूढी है तोह क्या है, उम्र भर मेरा साथ दिए है उसने. इसके साथ किसी की बराबरी नहीं हो सकती. नेहा और नैना दोनों जवान हाँ. मल्टी से ज़यादा मस्त जिस्म की मालिक है. पर जो सवाद और आनंद मल्टी से आता है वह दोनों के साथ से नहीं ेगा. पावर वाली गोलियां खिला कर तोह सबसे शरीर hi सुंदर दीखते हाँ.

नानी नाना को प्यार से देखने लगी तोह राज बोलै-- ो नाना जी. अब्ब बने हाँ आप मेरे असली वाले हरामी नाना.

नाना-- नहीं न तोह हरामी है और न hi मैं हरामी हों. हरामीपन पर उतर आये थे मेरे बेटे. बेटियों के सतह मेने अच्छा नहीं किया था पर बेटों को ऐसा नहीं करना चाहिए था हमारे साथ. वह अपने घर अलग ले कर रह सकते थे. पर हमसे ऐसे दूर नहीं हो सकते थे. बेटियों के साथ मेने सही नहीं किया था. वो जैसा चाहे बर्ताव मेरे साथ कर सकती थी. पर बेटों की शादी तोह पहले hi मेने उनकी पसंद से करवा दी थी.

राज-- अच्छा मेरी बात सुनें आप दोनों.. राज ने फिर निशा की शादी वाली बात दोनों को बता दी. नानी सुबकने लगी तोह नाना दुखी हो गए,.

नाना-- में तोह अहंकार और गलत सोच के चलते अपनी बेटियों की ज़िन्दगी से खेल गया था. पर वह तोह मुझसे आगे निकल गए. पैसों के लिए अपनी बेटी की ज़िन्दगी का सौदा करने लगे हाँ

नानी-- राज बीटा तू बचा लेना मेरी निशा को.. मुझे भी तोह बड़ी प्यारी लगती है. उसकी लाइफ बर्बाद होने से बचा लो राज बीटा.

राज-- क्या फायदा बचा के. वहां से बचेगी तोह मेरे हाथे चढ़ जायेगी

नानी नाना दोनों हसने लगे.

नाना-- हाहाहा राज बीटा तू जो भी करेगा, पर उसकी ज़िन्दगी के साथ नहीं खेलेगा. इतना मुझे विश्वास हो गया है तुझपर. श्रुति जैसी लड़की को तूने कितना बदल दिए है. मैं सब जान गया हों राज बीटा. भगवन सदा तेरे साथ रहे

कुछ देर की और बातों के बाद रज ने कॉल कट कर दी.

सिमरन को कॉल मिल दी.. राज ने इस बार पुराण नंबर एक्टिव किया था. जो मौसी के घर जाते हुए बंद कर दिए था.

राज-- कैसी हो मेरी भुलझडी.

सिमरन चीखती हुई-- तहत नॉट फेयर राज.. तुम छुपे रहोगे तोह फिर हमारा कंपीटिशन कैसे चलेगा. मैं तुम्हे चीट कैसे करुँगी. मुझे तुम्हे हराना है. तुम यौन ग़ायब रहोगे तोह कैसे मैं तुम्हे हरा सुकूँगी. सामने आओ राज, यौन कायरों की तरह छुप कर मत रहो.

राज--- जल्द hi सामने ा जाऊँगा मेरी रानी. अभी मैं कुछ बिजी हों तोह मिलता हों जल्द hi तुमसे. मेरी दूसरी रानी का तोह अच्छे से ख्याल रख रही हो न.

सिमरन नासमझी से-- दूसरी रानी? दूसरी रानी कोण है

राज हरामीपन से हस्ता हुआ-- हाहाहा मेरी रानी की भी तोह एक रानी है न. वही जिसपर मेरा राजा घिसा था. जहाँ से कुछ बूँद पानी भी टपक गया था.

सिमरन-- yoooooooouuuuuuuuuuuuuuuuuu.. राज तुम सामने होते तोह मई तुम्हारा मोह नोच लेती. तुम्हे मुझे ऐसे हराना है क्या.

राज-- हाहाहा.. तुम्हारा अपना अंदाज़ तोह मेरे अपना अंदाज़.. तुम अपनी मर्ज़ी से खेलो, मैं अपना खेल अपनी मर्ज़ी से खेलूंगा.

सिमरन-- पक्की बात है न फिर. अब तुम खुद से कह रहे हो में अपना खेल अपनी मर्ज़ी से खेल सकती हों.

राज-- अरे मेरी जान हो तुम. तुम्हे मैंने हर मामले में छूट दे राखी है. बस मेरे किसी अपने इज़्ज़त और ज़िन्दगी के साथ मत खेल जाना. बाकि कुछ भी कर सकती हो तुम.

सिमरन-- इज़्ज़त और ज़िंदगी से खेलना मुझे भी पसंद नहीं है राज. इज़्ज़त तोह दूसरों की बढ़ा देती हों. ज़िन्दगी भी मेने अनेको की बना दी है. ये दो काम मैं नहीं करुँगी. हाँ मेरे खेल कुछ हटके ज़रूर हो सकते हाँ. बस अब तुम देखते जाओ.

राज-- अच्छा तुमने बताया नहीं क्या हाल है मेरी रानी का.

सिमरन खुद को देखती हुई मुस्कान से बोली-- आके खुद hi देख लो. तुम्हारी रानी है. तुम्हे देखने से मन कैसे कर सकती हों. फोन पर मैं तोह सही से बताने वाली नहीं. अपनी चीज को खुद hi आ कर अच्छे से देख लो.

राज-- ओह्ह्ह तोह उसे तैयार रखना तुम. इस बार तोह मैं उसकी कुछ हटके सर्विस करूंगा.

सिमरन-- ok तो तुम जल्द hi आ जाओ. तुम्हारी रानी और रानी की रानी तुम्हारा बेसब्री से इंतज़ार कर रही हाँ.. सिमरन खिलखिलाती हुई है पड़ी तोह राज भी है पड़ा.

सिरमन की बातों से राज बहुत कुछ समझ रहा था. पर कहते हाँ औरत के तरकश में कितने तीर होते हाँ. एक मर्द नहीं जान सकता.

राज जान पता है या नहीं ये देखने वाली बात थी.
 
राज सिमरन से बात करने के बाद पार्क से निकला और मौसी के घर जाने लगा.

वहां पोहंचा तोह उसे अखिल मिला. अखिल राज को देख कर बोलै

ाकीहल-- बैठो रघु मेरे पास

राज रघु के बराबर सोफे पर बेथ गया.

अखिल राज को ऊपर से निचे तक देखने लगा. राज आज कुछ बदला हुआ था. अच्छे कपड़ो में था.

अखिल- रघु तुम्हे लेके सब क्यों बदले हुए हाँ. तुम घर में आये तोह नौकर थे. तुम्हारे आने से दादी चलने लगी, माँ खुश रहने लगी. कल तोह कमल hi हो गया. तुम्हे मां के घर सगाई पर एक ममिलय मेंबर के जैसे ले गई. तुम कोई नौकर नहीं हो सकते. तुम पर्सनालिटी से विल्लगेर लगते हो. पर हो नहीं. तुम सीधे नहीं हो. मुझसे भी फ़ास्ट लड़के हो. कोण हो तुम. यहाँ मेरे घर में किस लिए आना हुआ तुम्हारा.

अखिल की बात सुनकर सुनैना जो किचन की और बढ़ रही थी. रुक कर देखने लगी. वह कुछ चिंतित हुई. फिर सर झटक कर आगे बढ़ गई. राज को लेके उन्हें कोई चिंता नहीं रहती थी अब.

राज-- क्या करोगे मेरे बारे में जान कर तुम अखिल

अखिल-- क्या करूंगा जान कर. मेरे घर में हो तोह मेरा हक़ बनता है सब जान्ने का. मेरे सवालुं के जवाब दिए बिना तुम यहाँ नहीं रह सकते. कल रात मेने खुद पर बहुत कण्ट्रोल रखा है. तुम्हे वाहन देख कर शिवानी दीदी से बातें करते देख कर मेरे लिए सहन करना मुश्किल था. पर मैं कर गया. अब मुझे तुमसे सभी बातों का जवाब चाहिए रघु.

राज-- न डॉन तोह.

अखिल घुसे से उठ खड़ा हुआ. राज के होंटो पर हरामियों वाली मुस्कान आ गई.

अखिल- तुम्हे इस घर से फिर जाना होगा रघु.

राज आगे बढ़ा और अखिल को गले से लगा लिया.

राज-- तेरे बारे में सुना है तोह कुछ लापरवा किसम का लड़का है.

अखिल को और भी घुसा आ गया. किसने कहा में लापरवा हों. और तू होता कोण है मुझसे ऐसे बात करने वाला.

राज-- तेरा भाई

अखिल हैरान हो गया-- भाआआअआइई

राज-- हाँ मैं तेरा भाई hi हों अखिल

अखिल और भी ग़ुस्से में आ गया-- ये क्या बकवास है. तू मेरा भाई कैसे हो सकता है. और किस रिश्ते से तू मेरा भाई है.

राज-- चल ये भी बता देता हों. चल मेरे साथ तेरे कमरे में. वहीँ बताता हों तुझे में..

अखिल एक दिन ऐसे बेहवे ज़रूर करेगा राज जनता था. राज मुदा तोह राज ने सुनैना को आंख से इशारा कर दिए. सुनैना मुस्कुरा कर स्माइल करने लगी. और सहमति दे दी.

राज अखिल के कमरे में पोहंचा तोह वह बोलै-- हाँ अब बोल. क्या बोलने वाला है.

घर में बाकि सब भी थे. पर वह सब अपने अपने कमरे में थे.

राज -- कुछ देर वेट कर. सब बताता हों.

कुछ मिनट्स के बाद दादी कमरे में आयी तोह अखिल उसे देखता रह गया. दादी ने खुला ब्लाउज पहना हुआ था. दादी के हाथ में ट्रे थी और ट्रे पर कॉफ़ी के दो कप रखे हुए थे. दादी ने झुक क्र पहले राज के आगे तृत करि. राज ने कॉफ़ी का कप उठा लिया. दादी अखिल के सामने झुकी और ट्रे आगे कर दिए. अखिल तोह दादी के रंगा रंग साड़ी ब्लाउज को hi देखता रह गया था.

दादी झुकी तोह निप्पल तक अखिल को नज़र आने लगे. अखिल ऐसा hi लड़का था. वह भी अपने बाप के जैसा ठरकी लड़का था. बहार मोह मारने की उसे भी बहुत आदत थी. जब भी जहाँ भी ऐसे मस्त नज़ारे देखने को मिलते थे. वह देखता बड़े शोक से था.

दादी ने उसे अपने चुके देखने दिए. दादी ने नहीं टोका तोह अखिल कुछ देर अपनी ऑंखें सेकने लगा. कुछ देर में अखिल को खुद से hi ख्याल आया तोह वह शर्मसार सा होकर दादी के फेस को देखने लगा. पर दादी तोह नार्मल hi रही थी.

अखिल ने कांपते हथु से कॉफ़ी उठाई तोह दादी बिना राज को देखे वहां से चली गई.

राज उठा और कमरे के दूर को अंदर से बंद कर दिए.

राज अखिल के सामने आए कर बेथ गया. अखिल के बौनेर को देखने लगा. राज के होंटो पर स्माइल थी.

अखिल की जांग पर हाथ रख कर दबाते हुए बोलै-- दादी मस्त माल है न अखिल

अखिल पहले तोह अपने होंटो पर जीब फेर कर राज को देखने लगा. फिर ग़ुस्से में ा गया. कॉफ़ी का कप साइड रख कर वह उठ खड़ा हुआ और ग़ुस्से से hi राज से बोलै

अखिल-- साले तेरी इतनी हिम्मत तू मुझे मेरी दादी को लेके बोलेगा. मेरी दादी को मस्त माल बोलेगा. तेरी ऑंखें निकल लूंगा में साले. तेरी जीब गद्दी से निकल दूंगा main.jaan ले लूंगा मैं तेरी.

अखिल आया तोह ग़ुस्से में था. पर वह अपने बाप के जैसा ठरकी था. राज के जैसा हरामी नहीं था. शेर भी नहीं था.

राज कॉफ़ी का सिप लेते हुए बोलै.. चल पहले कॉफ़ी का एक सिप ले. फिर तुझसे बात करता हों. दादी ने ख़ास अपने दूध से कॉफ़ी बनाई है. इस उम्र में भी दादी के चुके फिरसे दूध से भर गए हाँ. छूट भी दादी की किसी कुंवारी लड़की के जैसी हो गई है. गांड की बात तोह तू मुझसे पूछ hi मत. मेरा लौड़ा दादी की गांड में जाता है न तोह कसम से ऐसे फस फस कर जाता है, मज़ा hi आ जाता है. किसी कुंवारी लड़की की गांड भी दादी की गांड से ज़यादा मस्त नहीं हो सकती.

अखिल को राज की बातों पर और भी ग़ुस्सा आने लगा. पर अपनी दादी के बारे में सुनकर उसे मज़ा भी आ रहा था. लुंड की अकड़न और भी बढ़ रही थी. घर में ऐसा सब कभी चांस नहीं बना था. बहार जितनी भी मिल जाएँ. घर में जवान जिस्म की बात हो या फिर बूढ़े जिस्म की. मज़ा hi अलग मिलने लगता है.

अखिल लुंड की अकड़न बढ़ जाने के बाद भी ग़ुस्से से बोलै- साले अब तो तू गया. मेरी दादी को लेके ऐसा बोलता है. क्या कहा तूने दादी की छूट मस्त है. गांड भी मस्त है. मतलब तू दादी के साथ सब क्र चूका है. साले तू मेरे घर में घुस कर ये सब कर रहा है. अब नहीं बचेगा तोह मेरे हाथ से.. अखिल आगे बढ़ा तोह राज ने बाएं हाथ से उसकी कलाई थाम ली

राज-- चल पहले मुझसे अपनी कलाई छुड़वा. फिर मुझसे लड़ भी लेना. पर पहले अपने लुंड को तोह ढीला कर ले.. देख कैसे दादी के चुके देख कर, दादी की छूट और गांड का सुनकर अकड़ा हुआ है.

अखिल ने झट से अपने लुंड को देखा तोह हैरान रह गया.

राज-- साले तू भी तोह दादी की चुके मज़े से देख रहा था. दादी तेरी भी दादी है और मेरी भी. इस हिसाब से हम हुए दोनों भाई भाई. बोल दादी की छूट और गांड में लुंड डालेगा. दोनों मिलकर दादी की बजाते हाँ. बोल या फिर मैं अकेला hi दादी को छोड़ लिया करूँ..

अखिल फिरसे अपने होंटो पर जेब फेरने लगा. उसके लुंड की हालत भी ख़राब थी और उसकी कलाई में भी बहुत दर्द हो रहा था. राज की पकड़ उससे सहन नहीं हो रही थी.

राज ने दबाओ बढ़ाया तोह अखिल के चेहरे पर खून का प्रेशर बढ़ने लगा. दर्द के भाव अखिल के फेस पर आने लगे.

राज ने अखिल का हाथ छोड़ दिए और लुंड को पकड़ लिया. अखिल अपनी लाल हो चुकी कलाई थाम कर दहकने लगा. मन hi मन में राज की पावर बारे सोचने लगा. वह राज से नहीं लड़ सकता था ये बात वह जान गया था.

राज ने उसका लुंड पकड़ा तोह उसकी अकड़न कुछ और बढ़ गई.

राज-- बोल दादी को छोड़ेगा.

अखिल राज को देख रहा था. बड़ा हैरान था राज कैसा अजीब लड़का है. कितनी देर में कितने रंग बदल लिए थे राज ने. दादी किसी अखिल को अपने बूब्स दिखने चली आई थी. ये सब भी राज के कारण hi हो रहा था.

राज-- बोल या फिर तोह घर के बहार की hi छूट में घूम रहेगा. जो मज़ा इन्सेस्ट में है वह बहार कहाँ. राज ने अखिल के लुंड को छोड़ और बोलै-- चल तू नहीं छोड़ना चाहता दादी को तो तेरी मर्ज़ी. मैं चलता हों अब्ब.

राज दूर के पास पोहंचा और दूर खोलने ह वाला था कह अखिल ने आवाज़ दे कर रोक लिया.

अखिल ठरकीपन से अपने लुंड को मसलते हुए- दादी मान जायेगी क्या मुझसे छोड़ने के लिए...

अखिल अपने लुंड को मसलते हुए बोलै तोह राज पलट कर हसने लगा. चलता हुआ अखिल के सामने जा पोहंचा..
 
राज -- तू जनता है इन्सेस्ट में छूट कब मिलती है.

अखिल मोह पहाड़ कर राज को देखने लगा..

राज-- जब हवस काम और प्यार ज़यादा हो. दादी के चुके देख कर तेरे लुंड की अकड़ बढ़ गई है. ये तोह बढ़ती hi है. पर तू इस अकड़न को भूल कर मैं में दादी के प्यार और सम्मान ला तोह तुझे दादी का सब कुछ मिल जायेगा. इसेक शिव तुझे एक और छूट भी घर में मिल सकती है.

अखिल बावला होकर राज को देखने लगा

राज-- रुपाली तेरी दीदी.. वह है जिसकी तुझे मिल सकती है. पर तुझे खुद को बदलना होगा. अपने अंदर के ठरकी पैन को ख़तम करना होगा. तू अपने पिता के बाद घर का अकेला मर्द है. तुझे बदलना होगा. तुझे घर का असली मर्द बनना होगा. जो तेरा बाप नहीं बन सका.

राज ने एक तीर से कई शिकार करने का सोच लिया tha.saala बहुत बड़ा हरामी था. कोई सोच भी नहीं सकता था. राज दिमाग से कितना फ़ास्ट था.

अपनी राह का कांटा भी ख़तम कर रहा था. दादी के लिए भी एक लुंड का रेगुलर इंतेज़ाम कर रहा था. राज के पास पहली hi छूटो की लाइन लगी हुई थी. राज किस किस की छूट में घुसता. अभी तोह अपने माँ और बहनो की छूट और गांड भी थी. फिर एक मौसी थी, उसकी भी बेटियां थी. तीन ममियां उसकी भी बेटियां था. सिमरन थी वहां भी बहुत सी छूटो पर उसकी नज़र थी. सबको रेगुलर तोह राज छोड़ नहीं सकता था.

अखिल को अपनी रह से हटाने के साथ साथ दादी का भी इंतेज़ाम कर रहा था राज. रुपाली पहले से hi फटी छूट वाली, फटी गांड वाली थी. ये राज जान गया था. दो चार बार उसे छोड़ कर राज उसे भी अखिल के हवाले कर देता. फिर अखिल भी उसके दाम में आ जाता.

संजना और वैशाली को वह अखिल को नहीं देने वाला था.

रुपाली का नाम सुनकर अखिल जैसे खवाब की सी कंडीशन में हो गया था. उसे सोच कर hi नशा होने लगा था. घर में दादी के बाद बड़ी दीदी की भी छूट मिल सकती थी. वह अपने लुंड को मसलने लगा.

राज हस्ता हुआ-- पर उसके लिए तुझे बदलना होगा. बहार जो तुम चस्के ले रहे हो. उसे काम कर दो. घर में मज़े करो और अपने फ्यूचर पर अपना फोकस बढ़ाओ.

राज -- बोलो दादी की अभी लोगे या बाद में.

अखिल लम्बी सांस लेता हुआ-- नहीं तुमने सही कहा.. मैं सच में hi अपने पापा के जैसा hi हों. पापा के काले करतूत में अच्छे से जनता हों. माँ के साथ उन्हों ने क्या कुछ किया है, ये भी अच्छे से जनता हों. रघु तुमने मेरी ऑंखें खोल दी हाँ. कोशिश करूँगा मैं वैसा hi इंसान बनो. जैसा तुमने कहा. सेक्स के बिना भी लाइफ नहीं है. पर जब सेक्स में प्यार शामिल हो जाए तोह बात hi कुछ और है. मैं अभी ये कह देता कह दादी को अभी छोड़ना है तोह ये मेरी हवस होती. मई दादी के साथ सब करना तोह चाहता.. दीदी के साथ भी चांस बना तोह ज़रूर करूँगा. और फिर दीदी बहार भी तोह कीटों के साथ कर चुकी हाँ. मुझे सब पता है. इसलिए में भी ऐसा hi बन गया था. पर अब खुद को बदलने की कोशिश करूँगा. हवस की जगा प्यार लाने की कोशिश करूँगा.

राज खुश हो गया. उसने तोह अँधेरे में तीर छोड़ा था. पर लगा निशाने पर था. उसने तोह अखिल का मंद अपनी और से हटाने की कोशिश करि थी. बात कहाँ से कहाँ निकल गयी थी. राज में मन में जो आया था. राज बोलता चला गया था. अब रिजल्ट देख कर वह खुश हो गया था.

राज-- चल इसी ख़ुशी में तुझे दादी के साथ कुछ मस्ती करा देता हों. आखिर रेती दादी है. कुछ उसे प्यार दे कुछ खुद प्यार ले. दिल भी खुश और लुंड भी खुश.. राज हस्ते हुए बोलै तोह अखिल भी हसने लगा. अब उसे राज बहुत अच्छा लगने लगा था.

राज अखिल को लिए निचे आया और दादी के कमरे के कमरे में जा घुसा.. सुनैना भी वही थी. राज ने इशारे से उसे जाने को बोल दिए.

सुनैना होंटो पर स्माइल लिए वहां से निकल गई. दादी राज के अंडर थी. और फिर अखिल उसका पोता था. कैसे शर्म. राज ने दादी की साडी नहीं तोह आधी से जदया शर्म उतार दी थी.

राज ने दूर को अंदर से बंद कर दिए.

अखिल सर झुका कर खड़ा था. वह होल होल कैंप भी रहा था शायद. राज को ऐसा hi लगा.

राज दादी को देखते हुए- दादी देख आपका पोता आपको प्यार करने आया है. दादी उठी और अखिल को अपने सीने से लगा लिया.

दादी-- एक पोता को दादी से प्यार करने के लिए जीजाक कबसे होने लगी.

अखिल ने दादी को देखा पर बोलै कुछ नहीं

राज -- दादी अखिल बोल रहा था उसे आपसे प्यार करना है. पर जब तक हवस उसके अंदर है, तब तक वह आपसे प्यार नहीं करेगा.

दादी ने अखिल को खुद से अलग किया और बोली-- अखिल बीटा खुनी रिश्तो में हवस होती hi कहाँ है. प्यार hi प्यार होता है. तेरा मैं है मुझसे प्यार करने का तोह कर लो प्यार. मैं मन थोड़ी न करेंगी. अखिल अपने होंटो पर जीब फेरने लगा.

राज आगे बढ़ा और अखिल के हाथ को थाम क्र दादी के चुके पर रख दिए.

राज-- अखिल दबा कर अपनी जीजाक ख़तम करो. देखो कितने सॉफ्ट और गरम हाँ दादी के चुके.

अखिल दबाने लगा. दादी राज को स्माइल से देखने लगी. दादी को भी कुछ कुछ जीजाक थी. पर राज सुनैना के सामने भी 2 बार उसकी जैम कर चुदाई कर चूका था. जिसके कारण दादी की जीजाक बहुत काम हो गई थी.

कुछ देर में अखिल खुद से दादी के दोनों चुके दबाने लगा. राज निचे से दादी को नंगा करने लगा. दादी नंगी हुई तोह राज दादी के पीछे बेथ कर दादी की गांड चांटे लगा. अखिल तोह देख कर हैरान हो रहा था. उसके हथुन की सख्ती दादी के चुचु पर बढ़ने लगी.

दादी-- अखिल बीटा निकल मेरा ब्लाउज.. पि जा तू भी आज मेरा दूध.. बरसो तेरे पापा को पिलाया है आज तू भी पि जा..

कुछ देर में राज नंगा होकर दादी की गांड में लुंड घुसाए दादी को छोड़ रहा था तोह अखिल के मटको से मोह लगाए दूध पि रहा था. अब अखिल मस्त मूड में था. उसकी जीजाक जा चुकी थी. कुछ देर में राज ने छोड़ छोड़ दादी की गांड खुली कर. दादी की छूट टपक टपक कर निचे पानी गिरा रही थी.

राज- चल अखिल अब तू दादी की छूट का पानी टास्ते कर.. अखिल निचे बैठा और दादी की छूट से मोह लगा कर चाटने लगा..

अखिल इस काम में एक्सपर्ट था. वह एक ऊँगली दादी की छूट में घुसा कर चाटने लगा. बूढी छूट थी, पर टास्ते में अच्छी थी. अखिल को मज़ा आने लगा. जिस छूट के मिलने के चांस न हों. वह मिल जाये तोह मज़ा कई गुना बढ़कर आने लगता है. अखिल को भी दादी की छूट चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था.

राज-- चल दादी बीएड पर घोड़ी बनकर अपने पोते को अपनी छूट और गांड के दर्शन छे से करवा. राज एक कपडे से अपने लुंड को साफ़ करता हुआ बोलै.. अखिल की जीजाक उतर दी थी उसने. अब राज दादी को छोड़ने के मूड में नहीं था. दादी घोड़ी बानी तोह अखिल भी राज के कहने पर नंगा हो गया.

अखिल मस्त घोड़ी बानी दादी को देखने लगा.

desi-aunty-ki-chut-chudai-xxx-pics-9.jpg


अखिल राज को देख कर फिरसे दादी को देखने लगा.

राज- क्या सोच रहे हो यार छतो दादी की गांड, छूट भी छतो, फिर दादी की छूट और गांड दोनों में लुंड घुसा कर मज़े करो..

अखिल-- तुम और नहीं करोगे..

राज-- फिर कभी मिलकर करेंगे. अब तू अकेले दादी के मज़े ले. देख कैसे दादी की गांड और छूट चमक रही है.

अखिल बड़ी देर से बेचैन था. वह झुका और दादी की छूट और गांड पूरी पूरी जीब निकल कर चाटने लगा. भूल गया था कुछ देर पहले राज दादी की गांड मार रहा था.

उसे तोह मज़ा आ रहा था. अखिल का लुंड भी काम नहीं था. राज जितना लम्बा मोटा नहीं था. पर जानदार था, और लेंथ भी अच्छी थी

राज ने चुपके से मोबाइल लिया और अखिल की वीडियो बनाने लगा. अखिल नहीं जान पाया था. पर राज ने अपनी सेफ्टी ज़रूर कर ली थी. वीडियो में दादी का फेस भी नहीं आने दिए था राज ने.

राज हरामी था तोह अपनी राह में कोई कांटा नहीं देख सकता था..

कुछ देर की वीडियो बना कर राज ने मोबाइल अपनी पॉकेट में डाला और अखिल को देखने लगा.

कुछ देर की चटाई के बाद अखिल सीधा हुआ और अपने लुंड को दादी की छूट की और बढ़ने लगा.

desi-aunty-ki-chut-chudai-xxx-pics-7-Copy-rotated.webp


अखिल अपने लुंड को दादी की गांड पर रगड़ने लगा.

राज-- अखिल दूर बंद कर लो. में जा रहा हों. तुम दादी के साथ मज़े करके दादी को अपने प्यार का भी एहसास करा देना. मज़ा तोह मिलेगा hi. पर अपनी दादी को मंत्र का सुख भी देगा..

अखिल ने हाँ में सर हिला दिए. राज ने दूर के पास पोहंच के दूर को खोल dia.mud कर दादी को देखा तोह दादी ने इशारा दे दिए. मैं ठीक हों. मुझे अखिल बेटे से कोई परेशानी नहीं है.

राज बहार निकल तोह अखिल ने दूर बंद कर दिए. अखिल दादी के साथ मज़े करने लगा तोह राज सुनैना वाले कमरे में घुस कर दूर लॉक कर गया. सुनैना उसे देख कर चहक उठी..

राज ने उसे अपनी बहन में भर लिया था सुनैना को लगा उसकी ज़िन्दगी की ख़ुशी राज के सीने में समाये रहने से hi है.

सुनैना-- अखिल बीटा भी दादी के प्यार में पद गया. सुनैना हस्ते हुए बोली.

राज ने अखिल से हुई साडी बातें सुनैना को बता दी. सुनकर सुनैना हरेन भी हुई और खुश भी.

सुनैना-- स्वामी जी आप बहुत अच्छे हाँ. मुझे यकीं था आप अखिल को संभल लेंगे. पर आपने तोह कमल hi कर दिए. अखिल बेटे को भी बदल दिए.

राज-- अब आप अपना कमाल दिखाएँ मुझे मेरी रानी जी.. देखो कैसे दादी की गांड में घुसने के बाद मेरा लुंड फूला हुआ है. इसे शांत नहीं करेंगी आप.

सुनैना- ये तोह मेरा धरम, मेरा करम है स्वामी जी. मैं ज़रूर इसे शांत करुँगी. दनो बीएड पर पोहंचे तोह सुनैना राज के लुंड को आज़ाद करने लगी. आज़ाद हुआ तोह दादी की गांड की स्मेल आ रही थी उसमे..

राज-- जाएँ इसे क्लीन करने का इंतेज़ाम करें. सुनैना उठी और एक टॉवल गीला करके ले आई. उससे राज के लुंड को रगड़ रगड़ कर साफ़ करने लगी.

फिर राज के लुंड को थाम कर मोह में भर लिया और चूसने लगी. सुनैना मस्त मज़े लेते हुए राज के लुंड को चूसने लगी. राज को इतना मज़ा आया, उसने सुनैना की छूट की ऊँगली करनी शुरू कर दी. कपड़ो के ऊपर से hi सुनैना की छूट पानी छोड़ने लगी. कुछ में राज ने सुनैना की छूट से पानी निकल दिए. और सुनैना ने चूस चूस कर राज के लुंड को खली कर दिए.

दोनों एक दूसरे से बहन में समाये ऊपर ब्लैंकेट लिए उसी हालत में सो गए.
 
Back
Top