अपडेट 6
अब तक
अपने पढ़ा कैसे वो लड़का अपने मौत से लड़ते हुए क्लिनिक से डॉ साहब के लेबोटरी तक सफर किया. किस तरह से उस इंजेक्शन को उस लड़के को दिया गया और साथ hi उसके शरीर में हलचल हुई, अंत में उसका शरीर शांत हो गया. फिर कनिका रोने लगी और उसके पिता ने उसको शमझाया. फिर से उस लड़के शरीर में हलचल हुई और डॉ साहब ने अपनी बेटी के कहने पर फिर उस लड़की को चेक करने चले गए.
अब आगे
"पिता जी सब ठीक तो है न. वो बच तो जायेगा न." कनिका के जिस्म में उस लड़के को ले कर दर उसके अंदर महसूस किया जा सकता था. उसके सवाल और बोलने के तरीके से ये बार साफ़ पता चल रही थी. वही कनिका के पिता जी बिना कोई प्रतिक्रिया दिए बगैर अपने काम में लगे हुए थे. सब कुछ सही से चेक करने के बाद अंत में उन्होंने कहा, "हे इस फाइन. वो बच गया है. मेडिसिन ने काम करना सुरु कर दिया है. अब वो जल्दी hi ठीक हो जायेगा. तुम निश्चिंत रहो. उसके मैं कुछ नहीं होने दूंगा."
कनिका अपने पिता की बात सुन कर बहुत खुश हो गयी, यहाँ तक उसके सुन्दर नयन से पानी भी बहार आ गया, जो उसके कोमल गलो को भिगो दिया. वही अपनी बेटी को रोटा देख डॉ साहब उसके पास आ गया और उसको अपने गले लगा लिया. फिर कनिका का सर सहलाते हुए बोले, "बीटा रट नहीं है. रोना अच्छा नहीं होता जब कोई बीमार हो. चलो अब अपने मोती साफ़ करो और हम आराम करते है. और हाँ जो थोड़ा सा बच गया है. तुम उस इंजेक्शन को दुबारा वही रख दो जहा से उठाया था." कनिका अपने पिता की बात सुन जोर से गले लगा लिया और फिर उनके गाल पर किश कर दी. डॉ सबह भी अपनी बेटी के इस प्यार को देख कर खुश हो गए और खुद से दूर करते हुए उसके माथे को चुम लिया. वही अपने पिता की बात सुन कर कनिका थोड़ी परेशां हो गयी थी कोई उसने उस इंजेक्शन को उस लड़के को पूरा लगा दिया था. कनिका धीरे से अपने पिता से बोली, "मैं तो रेड तुबे में जो था सारा उसको इंजेक्ट कर दी. अब तो वो ख़त्म हो गयी."
"क्या?????? पर मैं ने तो आधा hi दिया रहा." अपने बेटी की बात सुन उन्होंने कहा. फिर वह अपनी बेटी के तरफ देखने लगे. जैसे वह कुछ जानने की कोशिश कर रह हो. अपने पिता को अपने तरफ इस तरह देखते हुए कनिका बड़े hi प्यार से और मस्सों सा चेहरा बना कर कहने लगी. "वो क्या है पिता जी मुझे लगा, की उसकी हालत देख कर मुझे लगा वो ज्यादा सीरियस है. थोड़े से क्या होगा ये सोच के मैंने बाकि का बचा हुआ सारा उसको लगा दिया."
डॉ साहब अपनी लाडली बेटी की बात सुन कर अपना सर पीट लिया और कहा, "बेटी तुम ने ये क्या कर दिया." अपने पिता की बात सुन और उनके हावभाव देख परेशां हो गयी. उसके लगने लगा की कही उसने बहुत बड़ी लगाती तो नहीं कर दी. इस बात को जानने के लिए अपने पिता जी से पूछ पड़ी, "मैं कोई गलती तो नहीं कर दी और ऐसा क्या है उस इंजेक्शन में. जो आप इस तरह से चिंतित हो गए है."
"कनिका कभी भी कोई मेडिसिन और इंजेक्शन हमेशा सही मात्रा में देना चाहिए. और ये उस मरीज के लिए बहुत जरुरी होता है, जब तक जरुरी न हो उस मेडिसिन और इंजेक्शन को डबल दोसे नहीं देते. रही बात सी इंजेक्शन की तो सुनो जो इंजेक्शन तुम लगाया है उसकी सबसे बड़ी खाशियत ये है की जिसको भी ये इंजेक्शन दिया जायेगा, उसकी सेक्सुअल पावर बहुत अधिक बढ़ जाएगी साथ hi उसकी दिमाग की और शरीर सकती में कई गुना हो जाएगी. वो एक आम आदमी से कही ज्यादा ताकतवर हो जायेगा, उसकी मात्र 10 बून्द से, मैं ने तो फिर भी आधा दिया था और तुमने तो उसे पूरा का पूरा लगा दिया. पता नहीं अब इस लड़के का क्या होगा. जब इसे होस आएगा. अब तो भगवन hi इस बचा सकता है."
"पिता जी इस इंजेक्शन का असर कितनी देर बाद सुरु होगा," कनिका अपने पिता की बात सुन कर उनसे पूछने लगी. कनिका को भी अब दर लगने लगा था कही उस लड़के को कुछ हो न जाये. अपनी बेटी को चिंतित देख कर डॉ साहब ने फिरसे कहा, "कनिका तुम टेंशन मत लो उसे कुछ नहीं होगा. जिस मात्रा में तुमने इसे दिया है इसका असर तो सुरु हो चूका है, इसका उदहारण उसके दिल की धनदकं कर फिरसे चलना. बाकि का भी जल्दी दिखने लगेगा. पर कब तक ये मैं नहीं कह सकता."
"मुझे एहि रुकना होगा. तुम जा के आराम करो. अब मैं नहीं चाहता इस लड़के को कुछ भी हो. इस लिए मुझे यह रुकना hi होगा." कनिका के पिता ने अपनी लाडली बेटी के सर पर हाथ फेरते हुए बोले. कनिका भी अपने पिता की बात समझ गयी थी वह क्या कहना चाहते थे. और इस लिए कनिका भी वहां पर न रुकी. वह से निकल कर अपने रूम में आ गयी. फिर कनिका ने अपना सलवार सूट उतर के एक नाईट पहन ली और अपने बिस्तर पर जा पसरी. कनिका बिस्तर पर लेते हुए वह उस लड़के के बारे म सोचने लगी. उसके बारे में सोचते हुए, कनिका को कब नींद ने घेर लिया उसको पता भी नहीं चली और वो सो गयी.
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वही दूसरी नकुल को मरने के बाद जब सभी घर पहुंच गए. सभी बहुत खुश थे खास कर रेशमा ठाकुर और महेंद्र ठाकुर. जब सभी घर के अंदर आये तो सामने हॉल में कुछ लोगो आये हुए देख, सभी परेशां हो गए. क्योकि वहां पर सभी सरकारी कर्मचारी थे. सभी के सभी साधारण कपड़ो में थे. सिर्फ एक को छोड़ कर.
"आप सभी कौन है और यहाँ क्यों आये हुए है." रेशमा ठाकुर ने गरजते हुए बोली. उसकी आवाज़ को सुन, सभी एक साथ आवाज की दिशा में मुद गए. रेशमा ठाकुर इस समय एक हलक गुलाबी रंग की साडी पहनी हुई थी, जो उसके जिस्म को और सुन्दर बना रही थी. वही उसकी आवाज़ में वो भारीपन था की सामने वाला कोई साधारण व्यक्ति होता तो अभी दर के मरे हालत ख़राब हो गयी होती. रेशम ठाकुर चलते हुए उन सब की पास आ गयी और उसके पीछे hi बाकि सभी फिर.
"नमस्ते ठकुरियन जी. मैं राजेश शर्मा. मैं पेशे से एक वकील हु. मैं यहाँ पर मानव ठाकुर के वसीयत (विल) ले कर आया हु. मुझे नकुल से मिलना है." मर. राजेश शर्मा ने कहा. जो एक 55 वर्ष के वृद्ध व्यक्ति थे. उसके बोलने के तरीके से, उनके वक्तित्व का साफ़ पता चल रहा था की वह कैसे व्यक्ति है. शरीर पर एक सफ़ेद रंग का शर्ट पंत और गले में काळा रंग का टाई बंधा हुआ था और ऊपर से काळा रंग का कोट डाला हुआ था. मर. राजेश शर्मा की बात सुन, रेशमा ठाकुर भी शांत हो गयी थी और बाकि सभी भी. किसी को भी इतनी जल्दी वकील का आने की आकांक्षा नहीं था.
"माफ़ कीजिये का मैं आपको पहचान नहीं पायी. वो क्या है न आपको बहुत समय पहले देखा था. और उसके बाद आज, इस लिए मुझसे ऐसी गलती हो गयी. वैसे आप यहाँ इतनी जल्दी कैसे आना हुआ." रेशमा ठाकुर ने हाथ जोड़ा कर माफ़ी मांगने लगी. अब रेशमा ठाकुर के बात में नमी आ गयी. बोलने का तरीका भी बदल गया था.
"ठकुरियन जी इसमें माफ़ी मांगने की कोई बात नहीं है. आप बस नकुल को बुला दीजिये, ताकि हम उसे मिल सके और ये वसीहत उसके सामने पढ़ सके." मर. राजेश शर्मा ने बहुत शांत और साफ़ शब्दों में कहा था. उनकी बात ऐसा लग रहा था की उस वसीहत में कुछ खास लिखा हुआ था, जो उसके सामने hi पढ़ा जाना था. रेशमा ठाकुर के साथ साथ बाकि सब भी परेशां हो गए थे, मरस. राजेश शर्मा की बात को सुन कर. उन्होंने समझा नहीं आ रहा था की कैसे नकुल के बारे में बात करे.
"इतनी सुबह सुबह वो भी नकुल से मिलने, सिर्फ इस वसीहत के लिए. सब खैरियत से तो है न." रेशमा ठाकुर ने कहा. "कजरी जरा सभी लिए चाय और कॉफ़ी का बना कर जल्दी से ला कर आ." अपने नौकरानी को आवाज़ लग कर बोली. कजरी रसोई घर से भाग कर बहार आयी और हाथ जोड़ कर बोली, "जी मालकिन अभी लायी." कजरी वह से चली गयी. कजरी की ुरम कोई 35 होगी, पर देखने में 30 की लगती थी, उसका शरीर भरा हुआ था और प्राकृतिक ने उसके बदन के हर खास हिस्से को अच्छी तरह सजाया रखा था.
"इसकी कोई जरुरत नहीं है ठकुरियन जी. हम सब ने पहले ले लिया है. अगर हो सके तो जरा नकुल को जल्दी बुला दीजिये. हमें कही और भी जान है, किसी काम से." मर. राजेश शर्मा ने चाय कॉफ़ी के लिए मन करते हुए कहा. वही उनके साथ आये हुए अभी तक शांत बैठे हुए थे, जैसे उनका होना और न होना बराबर था.
"ऐसे कैसे आप बिना कुछ लिए चले जायेगे. भले hi आपने और आपके साथ आये सभी लोगो ने पहले hi पी लिया हो. तो क्या हुआ आप सब हमारे साथ भी पी लीजिये." रेशमा ठाकुर ने कहा. अभी रेशमा ठाकुर की बात ख़त्म hi हुई थी की कजरी ट्राई में चाय और कॉफ़ी ले आयी, उसके साथ एक औरत भी थी. वही महेंद्र और रजनी ठाकुर रष्मा ठाकुर के बातो का सर्मथन किया. "ये लीजिये चाय और कॉफ़ी आ भी गया. कजरी सब को पूछ कर उनके हिसाब से पीने को दो. अभी तो नकुल यहाँ पर नहीं है, वो बहार गया हुआ है. और ये लोग कौन है आपके साथ अपने इनका परिचय नहीं दिया अभी तक."
"ये सब उस प्रॉपर्टी के सिलसले में आये हुए है. ये है यहाँ के दिग मर अनुभव सिन्हा, इनके बगल में जो बैठे हुए वो है यहाँ मजिस्ट्रेट मर. अनुराग रॉय, ये है इस इलाके (एरिया) के इंस्पेक्टर मर. अरुण शर्मा." मर. राजेश शर्मा ने अपने साथ आये सभी लोगो को परिचय रेशमा ठाकुर से करवाया. वही कजरी ने सभी के कॉफ़ी और चाय दे दिया था और वहां से जा चुकी थी.
"कही क्या कहना है." रेशमा ठाकुर ने कहा. और कॉफ़ी का घुट अपने मुँह में ले कर पीने लगी.
"बात ये है ठकुरियन जी. आप तो जानती hi है की साडी प्रॉपर्टी नकुल के नाम है." मर. राजेश शर्मा इतना कहने के बाद चुप हो गए. वही रेशमा ठाकुर शर्मा जी आगे कहने का इंतज़ार कर रही थी. जब रेशमा ठाकुर ने देख की शर्मा जी कुछ नहीं बोलै रहे तो.
"शर्मा जी मैं जानती हु. कहिये क्या कहना है." रेशमा ठाकुर ने कहा. फिर कॉफ़ी का आखरी घुट पी, कप को निचे रख दी.
"वसीहत के अनुरसर उसमे लिखे बातो को तो मैं उसके सामने hi पढूंगा. पर आप इतना कह रही है तो मैं आपको कुछ बाते बता देता हु. उसमे लिखा है की अगर नकुल को कुछ हो हुआ तो ये साडी प्रॉपर्टी सर्कार के हाथो म काली जाएगी. जब तक वो कोर्ट में आ कर हम लोगे के सामने अपनी साडी प्रॉपर्टी किसी के नाम नहीं कर देता. तब तक उसकी प्रॉपर्टी उसकी के नाम नहीं हो सकती." मर रेशमा शर्मा ने कहा और टेबल पर राखी फाइल को उठा लिया. रेशमा ठाकुर इतना समझ चुकी थी की उसने जल्दबाजी बहुत बड़ी मूर्खता का काम कर बैठी थी.
"पर शर्मा जी कल रात के पार्टी मैं तो आपने ऐसा कुछ नहीं कहा था. पर आज कहा से ये बात आ गयी." रेशमा ठाकुर ने कहा. और ये बात उसकी मूर्खता का एक बहुत बड़ा उदहारण दिया था, यहाँ मौजूद सबके सामने.
"ठकुरियन आप सही बोल रही है. और पार्टी में भला कोई ऐसी बात बोलता है क्या? मैं तो यहाँ पर सिर्फ नकुल से मिलने और उसे ये एनवलप देने आया था. उस समय मुझे जो सही लगा वो मैं वह वसीयत के अनुसार कहा, क्योकि उस समय ये सभी मेरे साथ वहां पर नहीं थे. इस लिए मुझे उतना hi कहा या पढ़ा." मर. राजेश शर्मा ने एनवलप को निकल एक तरफ रख ने और फिर उसे रेशमा ठाकुर को दिखा ये बात कहा था.
"ठीक है शर्मा जी. अब इसमें क्या लिखा है." रेशमा ठाकुर ने शर्मा जी से पूछ लिया, एनवलप की तरफ इशारा करते हुए. मर रेशमा शर्मा बात सुन मुस्कुरा दिए.
"ठीक ठकुरियन जी इसमें क्या लिखा है ये तो नहीं जनता मैं. पर वसीहत के कुछ और बात आपको बता देता हु. जब तक नकुल नहीं आ जाता. तब तक आप सभी को हर महीने खर्चे के एक 1लक रुपये दिए जायेगे. और नकुल की माँ को 5लक." मर. राजेश शर्मा जी वसीहत की कुछ बात बताई. शर्मा जी की बात सुन सभी हैरान हो गए थे उन्हें इस बात का बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था, नकुल के न रहने पर इतना कुछ हो जायेगा. "अब हम सब को जाने की इजाजत दीजिये."
"ठीक है शर्मा जी. आप सबको इजाजत है." रेशमा ठाकुर ने खड़े होते हुए बोली. उसके बाद सभी खड़े हो गए. मर. राजेश शर्मा जाते हुए फिरसे कहा, "नमस्ते ठकुरियन जी और जितनी जल्दी हो सके नकुल को बुला ली जिजयेगा." उसके बाद सभी रेशमा ठाकुर को नमस्ते कर वहां से सभी चले गए. अब वहां पर रह गया था तो सिर्फ रेशमा ठाकुर और उसके साथ के लोग.
"भाभी अब क्या होगा. हम सब ने मिल के नकुल को मर दिया है. कहा से लगेंगे नकुल को." महेंद्र ठाकुर ने चिंतित होते हुए कहा. सभी को यही बात खाये जा रही थी.
"देवर जी जो हुआ उसे भूल जाईये, अब हमें इस मुसीबत से कैसे निकलना है वो देखना है. फालतू की बात मैं कुछ नहीं रखा हुआ है." रेशमा ठाकुर ने सभी को शांत करते हुए बोली. उसकी बात को सुन कर सब शांत बैठ गए. सभी सोचने लग गए की वो क्या करे.
"भाभी सही कह रही है और मेरे पास एक प्लान है. अगर आप कहो तो मैं उस प्लेन को आप सके सामने राखु." रुक्मणि ने कुछ सोचने के बाद बोली. उसकी बात सुन सभी उसकी तरह देखने लग गए. वही रेशमा ठाकुर ने कहा, "क्या प्लान है. बताओ सभी को. अगर सभी को सही कहा तो हम सब वही करेंगे."
"हम वकील (मर. राजेश शर्मा) से कह देते ह की नकुल अपनी आगे की स्टडी के लिए बहार गया हुआ है अपने दोस्तों के साथ." रुक्मणि ने कहं
"मान लो मैं ने शर्मा जी से ये सब कह भी दिया तो वह कहेगे नहीं की उसे बात करो मेरी तो क्या कहोगी. कहा गया है स्टडी के लिए जब शर्मा जी पूछा तो फिर क्या करोगी." रेशमा ठाकुर ने तर्क देते हुए अपनी बात रुक्मणि से कही. रेशमा ठाकुर की बात सब को सही लग रही थी.
"हम कह देंगे की वो उसे क्या हुआ है स्टडी के लिए और उन्होंने जैसा अपने कहा अगर कह तो मन कर देंगे की नकुल ने किसी को भी बताने से मन किया है. उसे में कहा पर स्टडी कर रहा है." रुक्मणि ने कहा. उसकी बात भी सही लगी. रेशमा ठाकुर रुक्मणि की बात मान गयी और ये निर्णय हुआ की रुक्मणि का hi प्लान वर्कआउट करेंगे. उसके बाद सभी आराम करने आपने अपने रूम चले गए.
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वही दूसरी और सुहब जब वो लड़का उठा तो देखता है को वह एक रूम में है और चारो तरफ मेडिकल से रिलेटेड मशीन रखा हुआ है और उसके हाथ में भी इन्सुलिन लगा हुआ है. और पास में hi कोई लेता हुआ है. उस लड़के ने अपने हाथ से इन्सुलिन निकल दिया. उस लड़के ने कनिका ने पिता को जगाया जो थोड़े से दुरी में कुर्शी पर सो रहे थे.
"तुम बिस्तर से कैसे उठ गए, अभी तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है. और तुम्हे आराम की जरुरत है " कनिका के पिता ने उस लड़के को वापस बीएड पर ला कर लेता दिया. वो लड़का भी चुपचाप जा कर बीएड पर लेट गया और बोलै, "मैं ठीक हु. मैं यह कैसे आया. मुझे यहाँ कौन के कर आता. आपका नाम क्या है."
"मेरा नाम अनुभव घुसे है, मैं एक साइंटिस्ट हु और डॉक्टर भी. यही पास के गाओं में मेरा एक छोटा सा क्लिनिक है, जहाँ पर लोगो का इलाज करता हु. जब मैं अपने क्लिनिक में गोअन के लोगो का इलाज कर रहा था तभी गाओं की लड़किया तुम्हें मेरे पास कर आयी थी. उस समय तुम बहुत hi सीरियस हालत में थे. इस लिए तुम्हें यहाँ ले आया. तुम्हारा नाम क्या है," अनुभव घुसे ने नकुल के हाथ में फिरसे ग्लूकोज़ लगा दिया. नकुल ये देख रहा था की उसके हाथ में फिरसे ग्लूकोज़ लगा जा रहा था पर अपनी हालत देख कर वह चुपचाप लगने दिया.
"मेरा नाम नकुल खुश्वाहा है. पर मेरा घाव इतनी जल्दी ठीक कैसे हो गया. जब की मुझे तो उठा भी नहीं जाना चाहिए." नकुल ने अपना परिचय के साथ जल्दी ठीक होने का कारन पुचन्द लगा.
"नकुल तुम इस लिए इतनी जल्दी ठीक हो गए क्युकी मैंने तुम्हें एक ऐसा इंजेक्शन दिया है, जिसे मैं ने सालो के म्हणत के बाद बनाया था. इस की एक खाशियत ये थी की ये इंजेक्शन जिसे भी लगया जायेगा वो जल्दी ठीक हो जायेगा साथ hi उसकी सेक्सुअल पावर भी बाद जायेगा. पर तुम्हारे साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ ये मुझे कुछ समझा नहीं आ रहा है."
"मुझे पता है की मेरे साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ क्योकि मुझे बचपन से hi एक ऐसा इंजेक्शन दिया जाता रहा है जो मुझे नामर्द बना दे. उस इंजेक्शन की खाशियत ये है की अगर किसी को भी एक बार लग गया तो वो जिनगी भर के लिए नामर्द बन जायेगा. शायद वजह से मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ." नकुल ने दुखी होते हुए कहा. इस बात को सुन कर अनुभव घुसे को भी बहुत दुख हुआ की एक छोटे से बचे के साथ ऐसा करते हुए आ रहे थे और अभी तक दिया जा रहा था. नकुल का उदास चेहरा देख कर अनुभव घुसे बोले, " नकुल तुम चिंता मत करो. मैं तुम्हे जो इंजेक्शन दिया है. तुम्हे पूरी तरह ठीक कर देगा."
उसी समय एक लड़की आवाज आयी, "पिता जी चलिए खाना खा लीजिये, 2 बजे रहे सुबह के, पिता जी ये कौन है और वो लड़का कहा गया." नकुल का चेहरा में काफी बदलाव आ गए थे, यहाँ तक उसके शरीर में भी. जहाँ उसका शरीर पहले मरियल सा था, वही अब एक रेसलर की तरह हो गया था.
"बेटी ये वही लड़का ह जिसका हम इलाज कर रहे थे. इसका नाम नकुल है." अनुभव घुसे ने अपने बेटी को हैरान और परेशां देख कर नकुल के बारे में बताया. 'नकुल के शरीर में ये सरे बदलाव उस इंजेक्शन के वजह से आया हुआ है."
"hello नकुल, अब तुम कैसे हो." कनिका ने अपना हाथ आगे बढ़ दिया. नकुल ने भी उसके हाथ मिला कर बोलै, " मैं ठीक हु."