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अब तक
अपने पढ़ा की कैसे अनुभव ने नकुल को अपने इंवेंट किये हुए मेडिसिन लगा देता है और फिर अपना आखरी अविष्कार जो सबसे खास और अनोमल था उसे अपनी बेटी कनिका को लगा दिया बहुत hi मस्कट के बाद.
अब आगे
अनुभव अपनी बेटी कनिका और नकुल को देखने लगा. फिर समय समय पर उन दोनों के शरीर को निरक्षण भी करता. उन दोनों का शरीर चेक करने के बाद उसको बिस्वास हो जाता की उन्हें कुछ नहीं होने वाला. क्युकी उन दोनों के हार्ट बीट्स नार्मल हो गयी थी. उन दोनों को देखते देखते अनुभव को पता hi नहीं चला कब उसको नींद आ गयी.
अनुभव की नींद तो तब खुल जब किसी के कराहने आवाज़ उसके कानो में पड़ी. जब अनुभव उठ कर सामने देख तोह कनिका को होस आने लगा था,
तोह वही नकुल जस के तस लेता हुआ था. अनुभव जल्दी से वह खड़ा हुआ और कनिका के पास आ कर उसको चेक करने लग गया.
"पिता जी मैं बिलकुल ठीक हु. आप मेरी चितना छोड़िये, पहले आप ये बताईये नकुल कैसा है." कनिका अपने मां से कही, कहने को तोह अनुभव उसका मां hi लगता था पर कनिका अनुभव को अपना पिता hi मानती थी. अनुभव अपनी बेटी की बात सुन, उसको चेक करते हुए बोलै, "बेटी कनिका नकुल को अभी होस नहीं आया है. पर जल्दी hi उसे होस आ जायेगा क्योकि उसके शरीर की क्रिया बिलकुल ठीक है. अब तुम मुझे चेक करने दो."
"ठीक है पिता जी. पिता जी अब से मैं hi नकुल की देख भल करुँगी. जब तक उसको होस नहीं आ जाता." अनुभव कनिका की शारीरिक प्रक्रिया एक के बाद चेक करना लगा. तोह वही कनिका अपनी पिता को बिना रोके अपनी बात कही. अपनी बात कह कर जैसे hi कनिका ने नकुल की तरफ देखि, तोह उसने पाया की नकुल को होस आ रहा था. कनिका अनुभव को अपने से जल्दी अलग की और कड़ी हो नकुल के पास आ गयी. .
"क्या हुआ कनिका" अनुभव कनिका के इस बर्ताव को देख ये सवाल उसे किया. जिस पर कनिका ने कहा, "पिता जी नकुल को होस आ रहा है." कनिका के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ देखि जा सकती थी. उसके चेहरे पर जो नूर था उसे देख कर किसका का भी मान एक पल ले लिए खो जाता, और अनुभव का हाल भी कुछ वैसा hi था अभी के लिए.
"एक मिनट बीटा मुझे नकुल को चेक करने दो." अनुभव कनिका को एक तरफ करते हुए उसे कहा और उसके बाद अनुभव ने नकुल को चेक करना सुरु कर दिया.
"पिता जी नकुल कैसा है अब." कनिका व्याकुलता पूर्वक अपने पिता से पूछी. अनुभव कनिका की मैं की दशा को अच्छी तरह से समझता था की उसकी बेटी नकुल से कितना प्यार करती है. अनुभव कनिका को धीरज धरती हुए बोलै, "कनिका तुम चिंता मई करो अब नकुल ठीक है." नकुल को अपनी आँखे खोलते हुए देख कनिका ख़ुशी से झूम उठी थी. अनुभव भी बाबत खुश था और अपने ख़ुशी को शयद hi वह इस समय दर्शा पता.
"नकुल अब तुम कैसा महसूस कर रहे हो." अनुभव ने नकुल से पूछा.
"पिता जी मैं बिलकुल ठीक हु और पर मुझे कुछ भरपान महसूस हो रहा है." नकुल अपने जिस्म में हो रहे परिवर्तन को देख कर अनुभव से कहा. कनिका ये सुन कर चिंतित हो गयी पर उसने कुछ कहा नहीं. क्योकि उसका प्यार बिलकुल ठीक थक उसके सामने मौजूद था.
"बीटा नकुल ये पास कुछ hi पालो के लिए है. बहुत hi जल्दी तुम्हारा शरीर पहले से कही ज्यादा मजबूत और फुर्तीला हो जायेगा. तुम थोड़े देर आराम करो. उसके बाद तुम कनिका को ले कर यहाँ से दिल्ली चले जाओ." अनुभव कनिका की और देखते हुए ये बात नकुल से कही थी. नकुल भी अनुभव की बार सुन अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. उसके बाद अनुभव उन दोनों को अकेल छोड़ वह से निकल गया.
"तुम कुछ परेशां सी लग रही हो कनिका. कही तुम मुझे लेकर तोह परेशां तोह नहीं हो न." नकुल उठ कर बैठ गया था और बिस्तर का तक लेकर के. फिर कनिका की और देखते हुए उसने ये कनिका से पूछा. कनिका ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला कर उसकी बात कर समर्थन दे दी की वह उसी के वजह से परेशां थी.
"तुम इस तरह से पेरशान नहीं होना चाहिए कनिका. क्योकि आने वाले वक़्त में इस तरह की नज़ाने कितनी परेशानी आने वाली है हमारे जीवन में." नकुल कनिका को अपनी बाँहों में भर कर उसके सर पर हाथ फिरते हुए बोलै. कनिका भी नकुल के इस स्पर्श से बहुत hi खुश हो गयी थी और उसका मैं किसी शांत सरोवर की तरह शांत हो गया था.
"तुम्हारे ऊपर आने वाली हर मुसीबत को पहले मुझसे टकराना hoga.......Uske बाद तुमसे." कनिका अपनी बात को बहुत hi बिना किसी भाव के नकुल से बोल गयी. तोह नकुल कनिका बात सुन कर मुस्कुरा दिया
"अच्छा सुन अब हमें यहाँ से निकलना चाहिए. वर्ण हम यहाँ फास सकते है." कनिका को अपने से अलग कर नकुल ने ये बात कही थी. उसके बाद नकुल कनिका को लेकर निकल गया. जब वह हॉल में आया तोह अनुभव सोफे पर बैठ हुआ उनका इंतज़ार कर रहा था और उसके हाथ में कुछ कक्जाद थे. नकुल अनुभव के सामने पहुंच कर बोलै, "पिता जी अब आपको किसीसे डरने की जरुरत नहीं है. मैं तुम्हे देख लूंगा."
"बीटा अभी तुम कमजोर हो. मैं नहीं चाहता तुम्हें कुछ हो. अगर तुम्हे कुछ हो गया तोह कनिका भी जीवित नहीं रहेगी. इसलिए तुम्हे कनिका को लेकर अभी निकलना होगा." अनुभव नकुल को प्यार से समझते हुए बोलै. उसका कहना भी बिलकुल सही था क्योकि नकुल के शरीर को मजबूत होने में समय लगने वाला था, अगर अभी उसने लडडत तोह, उसे कुछ नहीं तोह पर उसको गंभीर चोट आ सकती थी, जिस वजह से वह बेहोस भी हो सकता था, फिर नकुल को जान से मरना की धमकी दे कर कनिका और उसको उनके साथ जाने पर मजबूर कर देते. जो किसी भी तरह से न उनके लिए सही था और नहीं देश के लिए.
"कप मेरी चिंता मत कीजिये अब मैं सबको देख लूंगा. चाहे वो कितना hi तककटवार क्यों न हो." नकुल ने एक बार फिर से कहा.
"मैं मंटा हु तुम सब लड़ भी सकते. अगर कनिका को उनमे से किसने कुछ कर दिया तोह तब तुम क्या करोगे. बताओगे जरा मुझे. इसलिए तुम्हें यहाँ से जाने के लिए कह रहा हु. ताकि मेरी बेटी सुरक्षित रह सके." अनुभव ने अनुरोध करते हुए कहा. इस बार नकुल ने कुछ नहीं कहा सिवाए इसके, "ठीक पिता जी."
"नकुल ये एक बैंक अकाउंट का पेपर है, जिसके मद्दत से तुम कही भी आराम से रह सकते हो. ये पेपर दिल्ली बने हुए एक मकान का है, जहाँ पर तुम आराम से रह सकते हो." अनुभव नकुल के तरफ पहले बैंक अकाउंट के पेपर बढ़ते हुए अपनी बात कही उसके बाद अलग दिल्ली के मकान के दस्तावेज देते हुए. कनिका इस बिच अपने पिता से एक शब्द भी नहीं कहे थे.
"ठीक है पिता जी, मैं कनिका को अपने साथ ले जा रहा हु यहाँ से, पर आप अपना ख्याल रखना. क्युकी मुझे पता है हम दोनों के साथ नहीं आने वाले है." नकुल अनुभव से कहा. क्योकि नकुल अनुभव की बात को अच्छी तरह से समझ गया था की वह क्या करना छह रहे थे. ये बात कनिका भी समझती थी पर उसने एक बार प्रयन्त करने की कोशिश की शयद इस बार उसके पिता मान जाए. इसलिए कनिका रट हुए अनुभव से बोली, "पिता जी आप भी हमारे साथ चलिए न."
"नहीं बीटा मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकता. पर मैं तुमसे वादा करता हु की मैं तुमसे जल्दी hi मिलूंगा. एक बात ध्यान रखना नकुल बीटा. अब तुम पहले जैसे नहीं रहे और तुम बिलकुल ठीक हो चुके हो. इसलिए अब तुम्हें एक से ज्यादा लड़कियों के साथ हमबिस्तर होना पड़ेगा." अनुभव ने कनिका से अपनी बात कही उसके बाद नकुल को एक तरफ ले जा लार अपनी आखरी के शब्द कहे. जिसको सुन कर नकुल की आँखे बड़ी हो गयी, उसे समझा नहीं आ रहा था की अनुभव ऐसा क्यों कहा था.
"मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा. मैं कनिका को धोखा नहीं दे सकता चाहिए मुझे कुछ भी हो जाये." नकुल ने अनुभव को साफ़ मन कर दिया था की वह कनिका के सिवाए किसी और लड़की से सम्बन्ध नहीं बनाएगा. जब ये बात अनुभव ने सुनी तोह उसने कनिका को भी वह बात बता दी जिसको नकुल से अकेले में कहा था. अनुभव नहीं चाहता था की कभी नकुल अपने जिस्म के आग में विवश हो कर किसी लड़की से हमबिस्तर हो गया, और ये बात कनिका को पता चली तोह कही कुछ गलत न बैठे. इसलिए उसने ये बात कनिका को भी बता दी.
कनिका ने एक बार फिरसे अपने पिता से अनुरोध की पर अनुभव नहीं माने. फिर नकुल कनिका को ले कर घर के पीछे रस्ते से निकल गया.
अब तक
अपने पढ़ा की कैसे अनुभव ने नकुल को अपने इंवेंट किये हुए मेडिसिन लगा देता है और फिर अपना आखरी अविष्कार जो सबसे खास और अनोमल था उसे अपनी बेटी कनिका को लगा दिया बहुत hi मस्कट के बाद.
अब आगे
अनुभव अपनी बेटी कनिका और नकुल को देखने लगा. फिर समय समय पर उन दोनों के शरीर को निरक्षण भी करता. उन दोनों का शरीर चेक करने के बाद उसको बिस्वास हो जाता की उन्हें कुछ नहीं होने वाला. क्युकी उन दोनों के हार्ट बीट्स नार्मल हो गयी थी. उन दोनों को देखते देखते अनुभव को पता hi नहीं चला कब उसको नींद आ गयी.
अनुभव की नींद तो तब खुल जब किसी के कराहने आवाज़ उसके कानो में पड़ी. जब अनुभव उठ कर सामने देख तोह कनिका को होस आने लगा था,
तोह वही नकुल जस के तस लेता हुआ था. अनुभव जल्दी से वह खड़ा हुआ और कनिका के पास आ कर उसको चेक करने लग गया.
"पिता जी मैं बिलकुल ठीक हु. आप मेरी चितना छोड़िये, पहले आप ये बताईये नकुल कैसा है." कनिका अपने मां से कही, कहने को तोह अनुभव उसका मां hi लगता था पर कनिका अनुभव को अपना पिता hi मानती थी. अनुभव अपनी बेटी की बात सुन, उसको चेक करते हुए बोलै, "बेटी कनिका नकुल को अभी होस नहीं आया है. पर जल्दी hi उसे होस आ जायेगा क्योकि उसके शरीर की क्रिया बिलकुल ठीक है. अब तुम मुझे चेक करने दो."
"ठीक है पिता जी. पिता जी अब से मैं hi नकुल की देख भल करुँगी. जब तक उसको होस नहीं आ जाता." अनुभव कनिका की शारीरिक प्रक्रिया एक के बाद चेक करना लगा. तोह वही कनिका अपनी पिता को बिना रोके अपनी बात कही. अपनी बात कह कर जैसे hi कनिका ने नकुल की तरफ देखि, तोह उसने पाया की नकुल को होस आ रहा था. कनिका अनुभव को अपने से जल्दी अलग की और कड़ी हो नकुल के पास आ गयी. .
"क्या हुआ कनिका" अनुभव कनिका के इस बर्ताव को देख ये सवाल उसे किया. जिस पर कनिका ने कहा, "पिता जी नकुल को होस आ रहा है." कनिका के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ देखि जा सकती थी. उसके चेहरे पर जो नूर था उसे देख कर किसका का भी मान एक पल ले लिए खो जाता, और अनुभव का हाल भी कुछ वैसा hi था अभी के लिए.
"एक मिनट बीटा मुझे नकुल को चेक करने दो." अनुभव कनिका को एक तरफ करते हुए उसे कहा और उसके बाद अनुभव ने नकुल को चेक करना सुरु कर दिया.
"पिता जी नकुल कैसा है अब." कनिका व्याकुलता पूर्वक अपने पिता से पूछी. अनुभव कनिका की मैं की दशा को अच्छी तरह से समझता था की उसकी बेटी नकुल से कितना प्यार करती है. अनुभव कनिका को धीरज धरती हुए बोलै, "कनिका तुम चिंता मई करो अब नकुल ठीक है." नकुल को अपनी आँखे खोलते हुए देख कनिका ख़ुशी से झूम उठी थी. अनुभव भी बाबत खुश था और अपने ख़ुशी को शयद hi वह इस समय दर्शा पता.
"नकुल अब तुम कैसा महसूस कर रहे हो." अनुभव ने नकुल से पूछा.
"पिता जी मैं बिलकुल ठीक हु और पर मुझे कुछ भरपान महसूस हो रहा है." नकुल अपने जिस्म में हो रहे परिवर्तन को देख कर अनुभव से कहा. कनिका ये सुन कर चिंतित हो गयी पर उसने कुछ कहा नहीं. क्योकि उसका प्यार बिलकुल ठीक थक उसके सामने मौजूद था.
"बीटा नकुल ये पास कुछ hi पालो के लिए है. बहुत hi जल्दी तुम्हारा शरीर पहले से कही ज्यादा मजबूत और फुर्तीला हो जायेगा. तुम थोड़े देर आराम करो. उसके बाद तुम कनिका को ले कर यहाँ से दिल्ली चले जाओ." अनुभव कनिका की और देखते हुए ये बात नकुल से कही थी. नकुल भी अनुभव की बार सुन अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. उसके बाद अनुभव उन दोनों को अकेल छोड़ वह से निकल गया.
"तुम कुछ परेशां सी लग रही हो कनिका. कही तुम मुझे लेकर तोह परेशां तोह नहीं हो न." नकुल उठ कर बैठ गया था और बिस्तर का तक लेकर के. फिर कनिका की और देखते हुए उसने ये कनिका से पूछा. कनिका ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला कर उसकी बात कर समर्थन दे दी की वह उसी के वजह से परेशां थी.
"तुम इस तरह से पेरशान नहीं होना चाहिए कनिका. क्योकि आने वाले वक़्त में इस तरह की नज़ाने कितनी परेशानी आने वाली है हमारे जीवन में." नकुल कनिका को अपनी बाँहों में भर कर उसके सर पर हाथ फिरते हुए बोलै. कनिका भी नकुल के इस स्पर्श से बहुत hi खुश हो गयी थी और उसका मैं किसी शांत सरोवर की तरह शांत हो गया था.
"तुम्हारे ऊपर आने वाली हर मुसीबत को पहले मुझसे टकराना hoga.......Uske बाद तुमसे." कनिका अपनी बात को बहुत hi बिना किसी भाव के नकुल से बोल गयी. तोह नकुल कनिका बात सुन कर मुस्कुरा दिया
"अच्छा सुन अब हमें यहाँ से निकलना चाहिए. वर्ण हम यहाँ फास सकते है." कनिका को अपने से अलग कर नकुल ने ये बात कही थी. उसके बाद नकुल कनिका को लेकर निकल गया. जब वह हॉल में आया तोह अनुभव सोफे पर बैठ हुआ उनका इंतज़ार कर रहा था और उसके हाथ में कुछ कक्जाद थे. नकुल अनुभव के सामने पहुंच कर बोलै, "पिता जी अब आपको किसीसे डरने की जरुरत नहीं है. मैं तुम्हे देख लूंगा."
"बीटा अभी तुम कमजोर हो. मैं नहीं चाहता तुम्हें कुछ हो. अगर तुम्हे कुछ हो गया तोह कनिका भी जीवित नहीं रहेगी. इसलिए तुम्हे कनिका को लेकर अभी निकलना होगा." अनुभव नकुल को प्यार से समझते हुए बोलै. उसका कहना भी बिलकुल सही था क्योकि नकुल के शरीर को मजबूत होने में समय लगने वाला था, अगर अभी उसने लडडत तोह, उसे कुछ नहीं तोह पर उसको गंभीर चोट आ सकती थी, जिस वजह से वह बेहोस भी हो सकता था, फिर नकुल को जान से मरना की धमकी दे कर कनिका और उसको उनके साथ जाने पर मजबूर कर देते. जो किसी भी तरह से न उनके लिए सही था और नहीं देश के लिए.
"कप मेरी चिंता मत कीजिये अब मैं सबको देख लूंगा. चाहे वो कितना hi तककटवार क्यों न हो." नकुल ने एक बार फिर से कहा.
"मैं मंटा हु तुम सब लड़ भी सकते. अगर कनिका को उनमे से किसने कुछ कर दिया तोह तब तुम क्या करोगे. बताओगे जरा मुझे. इसलिए तुम्हें यहाँ से जाने के लिए कह रहा हु. ताकि मेरी बेटी सुरक्षित रह सके." अनुभव ने अनुरोध करते हुए कहा. इस बार नकुल ने कुछ नहीं कहा सिवाए इसके, "ठीक पिता जी."
"नकुल ये एक बैंक अकाउंट का पेपर है, जिसके मद्दत से तुम कही भी आराम से रह सकते हो. ये पेपर दिल्ली बने हुए एक मकान का है, जहाँ पर तुम आराम से रह सकते हो." अनुभव नकुल के तरफ पहले बैंक अकाउंट के पेपर बढ़ते हुए अपनी बात कही उसके बाद अलग दिल्ली के मकान के दस्तावेज देते हुए. कनिका इस बिच अपने पिता से एक शब्द भी नहीं कहे थे.
"ठीक है पिता जी, मैं कनिका को अपने साथ ले जा रहा हु यहाँ से, पर आप अपना ख्याल रखना. क्युकी मुझे पता है हम दोनों के साथ नहीं आने वाले है." नकुल अनुभव से कहा. क्योकि नकुल अनुभव की बात को अच्छी तरह से समझ गया था की वह क्या करना छह रहे थे. ये बात कनिका भी समझती थी पर उसने एक बार प्रयन्त करने की कोशिश की शयद इस बार उसके पिता मान जाए. इसलिए कनिका रट हुए अनुभव से बोली, "पिता जी आप भी हमारे साथ चलिए न."
"नहीं बीटा मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकता. पर मैं तुमसे वादा करता हु की मैं तुमसे जल्दी hi मिलूंगा. एक बात ध्यान रखना नकुल बीटा. अब तुम पहले जैसे नहीं रहे और तुम बिलकुल ठीक हो चुके हो. इसलिए अब तुम्हें एक से ज्यादा लड़कियों के साथ हमबिस्तर होना पड़ेगा." अनुभव ने कनिका से अपनी बात कही उसके बाद नकुल को एक तरफ ले जा लार अपनी आखरी के शब्द कहे. जिसको सुन कर नकुल की आँखे बड़ी हो गयी, उसे समझा नहीं आ रहा था की अनुभव ऐसा क्यों कहा था.
"मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा. मैं कनिका को धोखा नहीं दे सकता चाहिए मुझे कुछ भी हो जाये." नकुल ने अनुभव को साफ़ मन कर दिया था की वह कनिका के सिवाए किसी और लड़की से सम्बन्ध नहीं बनाएगा. जब ये बात अनुभव ने सुनी तोह उसने कनिका को भी वह बात बता दी जिसको नकुल से अकेले में कहा था. अनुभव नहीं चाहता था की कभी नकुल अपने जिस्म के आग में विवश हो कर किसी लड़की से हमबिस्तर हो गया, और ये बात कनिका को पता चली तोह कही कुछ गलत न बैठे. इसलिए उसने ये बात कनिका को भी बता दी.
कनिका ने एक बार फिरसे अपने पिता से अनुरोध की पर अनुभव नहीं माने. फिर नकुल कनिका को ले कर घर के पीछे रस्ते से निकल गया.