Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 11 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-88

जब मैंने कमरे के बहार किसी के पैरो की आहात सुनी तो मैं दीदी से अल्लाह होकर तुरंद दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था. घर में इस समय मनीषा hi थी. लेकिन उसके कमरे का दरवाज़ा बंद था. तो मैंने इसे अपना वहां मानकर इग्नोर कर दिया और वापस दीदी के पास आ गया और दीदी को नींद को दवा देते हुवे बोलै.

मैं- दीदी इसको अपने पास रखो और रात को दूध में मिलकर सबको पीला देना. उसके बाद हमें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.

सरिता दी- लेकिन ये है क्या.

मैं- ये नींद को गोलिया हैं. इसको खाने के बाद सभी आराम से सो जायेंगे. और हम दोनों मज़ा करेंगे. कोई भी हमें डिस्टर्ब करने वाला नहीं होगा.

सरिता दी- लेकिन ये गलत है.

मैं- अगर तुम्हे अपने जिस्म की प्यास बुझानी है तो तुमको ये करना hi पड़ेगा. बाकि तुम्हारी मार्गी. अब मैं जा रहा हूँ. तुम कुछ देर सो लो क्योंकि आज मैं तुम्हे पूरी रात सोने नहीं दूंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और दूसरी तरफ देखने लगी. मैं भी दीदी की कमरे से निकलकर अपने कमरे में चला गया. कमरे में आने के कुछ देर बाद मुझे प्यास लगी तो मैंने जग में देखा तो उसमे पानी नहीं था तो मैंने जग उठाया और पानी लेने किचन की तरफ चल पड़ा. जैसे hi मैं किचन में पंहुचा तो मैंने देखा की मनीषा किचन में पहले से hi मौजूद है. उसने एक सफ़ेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी जो उसकी जांघो तक hi थी. जिसके अंदर उसकी पैंटी छिपी हुई थी.



मैं तो मनीषा के इस रूप को देखकर जैसे जैम सा गया. मैं किचन के दरवाज़े पर खड़ा उसे एकटक देखने लगा. उसके हाँथ में एक पानी की बोतल. जब मनीषा ने मुझे देखा तो वो पानी पिने लगी. लेकिन कुछ इस तरीके से की वो लगातार मेरी hi तरफ देख रही थी और मुंह खोलकर बोतल ऊपर कर पानी ऊपर से मुंह में दल रही थी. जिसके कारन 90% पानी उसके मुंह में न जाकर बहार निकल रहा था. और वो बहकर उसके कपडे के अंदर समां जा रहा था. तोड़ी देर में वो बोतल खली हो गई तो मनीषा ने दूसरी बोतल निकल ली और फिर से वैसे hi पिने लगी

लेकिन अब नज़ारा बिलकुल बदल चुक्का था. और उस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा. क्योंकि पानी उसकी शर्ट पर गिरकर उसे गिला कर चुके. जो उसकी चूचियों पर चिपक गए था. उसकी चूचिया हल्का हल्का दिखने लगी थी.



उसने शर्ट के निचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी जिसके कारन उसकी चूचिया पूरी नंगी hi दिख रही थी. दूसरी बोतल का पानी भी 90% बहार hi गिर रहा था जिससे उसका t-shirt और भी गिला हो गहा था और उसकी चूचिया एकदम नंगी दिखने लगी थी. इस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा.

मनीषा लगातार मेरी तरफ hi देखकर पानी पि रही थी. मैं उसके इस कामुक रूप को देखकर अपने लुंड पर हाँथ रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा भी मुझे लुंड सहलाते हुवे देख रही थी. जब दूसरी बोतल भी खली हो गई तो मनीषा ने बोतल सेल्फ पर रख दी और मुझे लुंड सहलाता हुआ देखने लगी. उसके होंठो पर हलकी सी मुस्कान थी. वो धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आने लगी. पहले तो मैं उससे लगभग 12 फिट की दूरी पर खड़ा होकर उसकी नंगी चूचिया देख रहा था. लेकिन जब वो चलकर मेरे करीब आ गयी तो उसकी चूचियों को इतने पास से देखते hi मेरी हालत ख़राब हो गई. मेरा गाला एकदम सुख गया. मैं अपने होंठो पर अपनी जीभ फिरने लगा. क्योंकि उसकी चूचिया एकदम नंगी दिख रही थी. मनीषा ने मेरे पास आकर मेरे लुंड को कुछ देर देखा फिर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.



मनीषा- क्या हुवा भैया प्यास लगी है क्या.

मैं (उसकी चूचियों को देखते हुवे). हाँ बहुत ज्यादा.

Manisha-(apni चूचियों को आगे निकलकर) तो देख क्या रहे हो अपनी प्यास बुझा लो.

मैं- तू मेरी प्यास बुझाएगी न मनीषा.

मनीषा- हाँ भैया क्यों नहीं बुझाऊँगी. आप एक बार कहिये तो.

मनीषा की बात सुनकर मैं बेकाबू हो गया और अपने लुंड को सहलाना छोड़कर मनीषा को पकड़कर दीवाल से सत्ता दिया और अपने हांथो में उसकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा और अपने होंठो को उसके होंठो पर रखकर किश करने लगा. मनीषा मेरे इस हमले से छटपटाने लगी और अपने आप को छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा और दोनों हांथो में उसकी चूचिया अचे से पकड़कर पूरी ताकत के साथ मसल दिया मनीषा के मुंह से चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyy mainnnnnnnnnnnn marrrrrrrrrr gaaiiiiiiiiiiiiiiii. Hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyy बहुत दर्द्द हूँ रहा हैईईईई.

इतना बोलकर उसने पूरी ताकत के साथ मुझे धक्का दे दिया और गुस्से से चिल्लाकर बोली.

मनीषा- ये क्या बेहूदगी है भैया. मैं तुम्हारी बहन हूँ तुम्हे शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ गन्दी हरकत करते हुवे. मैं तुम्हे कितना प्यार करती हूँ. और तुम मुझे हवस की नज़र से देखते हो.

मैं- सॉरी मनीषा. लेकिन मैंने ये जानबूझकर नहीं किया. आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो तो मैं खुद को रोक नहीं पाया.

मनीषा- इसका क्या मतलब है. मैं प्यारी लग रही हूँ तो आप मेरी इज़्ज़त के साथ खेलोगे.

मैं- नहीं मनीषा तुम गलत समझ रही हो. मैं तो तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हारे बारे में कभी गलत नहीं सोच सकता.

मनीषा- प्यार तो आप दोनों दीदियो से भी बहुत करते हैं. है न.

मनीषा ने फिर दोनों दीदी का नाम लिया था. मैं फिर से सोच में डूब गया. मुझे सोचता देखकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अब प्यास नहीं लगी क्या भैया. जाओ जाकर पानी पि लो. और ऐसी उलटी सीधी हरकते करना बंद कर दो. नहीं तो मैं मां पापा को सब बता दूंगी. मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ. मैं बात नहीं करुँगी आपसे अब.

इतना बोलकर मनीषा अपने कमरे में चली गयी. और मैं ठगा सा वही खड़ा मनीषा को जाते हुवे देखता रहा. क्या लड़की है यार ये मनीषा. मेरी समझ से बिलकुल परे है. मैं पानी पि कर अपने कमरे में आया और कुछ देर बैठा रहा. फिर मैंने अभी के लिए मनीषा से सॉरी बोलने के लिया उसके कमरे की तरफ चल दिया.

उसके कमरे के पास पहुंचकर मैंने दरवाज़ा नॉक किया तो उसने अंदर आने के लिए कहा. जब मैं अंदर गया तो मुझे एक और झटका लगा. मैं तो मनीषा को बस देखता hi रह गया. मेरा लुंड फिर से खड़ा होकर झटके मरने लगा. अंदर मनीषा ब्रा और लोअर में कड़ी थी. मेरे अंदर जाने के बाद मनीषा मुझे देखने लगी. मैं तो बस आँखे फाडे मनीषा के इस अनुपम सौंदर्य का दीदार करने लगा. मेरा हाँथ कब मेरे लुंड पर पहुंचकर उसे सहलाने लगा. मुझे पता hi नहीं चला.



मनीषा भी मेरे लुंड को देख रही थी. उसने मेरे आने के बाद भी ब्रा के ऊपर अभी तक कुछ भ्ही नहीं पहना था. थोड़ी देर बाद मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने मनीषा की तरफ देखा. लेकिन वो तो मेरे लुंड के सम्मोहन में खोई हुई थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखकर जब उसने अपनी नज़र उठाई तो मुझे देखकर हल्का सा शरमाई और मुस्कुराने लगी. मैं चलते हुवे उसके पास पंहुचा और नज़दीक से उसकी चूचियों को देखने लगा. जब उसने मुझे अपनी चूचियों की तरफ घूरता पाया तो उसने कहा.

मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो भैया.

मैं- मनीषा कसम से तू बहुत खूबसूरत है. और इन कपड़ो में तू बहुत सेक्सी लगती है.

मनीषा- कुछ तो शर्म करो भैया. अपनी बहन को सेक्सी बोल रहे हो. और अगर मैं खूबसूरत होती तो अप्प दिन रात दोनों दीदियो से न चिपके रहे होते.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू सच में सेक्सी है. मैं तो पागल हूँ जो कभी तुम्हारी ख़ूबसूरती पर दयँ नहीं दिया. तू कितनी जवान हो गई है मनीषा.

मनीषा- भैया ये क्या बोल रहे हैं आप. अपनी बहन की जवानी पर नज़र रखते हो आप. सुधर जाओ नहीं तो पापा को बोल दूंगी मैं.

मैं- तू हमेशा पापा से बताने की धमकी क्यों देती रहती है. मैंने कौन सी बुरी हरकत की है तुम्हारे साथ.

मनीषा- तुम्हे शर्म नहीं आती भैया. मैंने अभी तक कपडे भी नहीं पहने हैं और तुम मेरे कमरे में आ गए.

मैं- लेकिन मैं नॉक करके आया था न.

मनीषा- लेकिन जब आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हु तो आपको चले जाना चाहिए था. लेकिन नहीं. बहन की जवानी देखनी थी आपको. आने दो पापा को आज मैं उन्हें सब बता दूंगी.

मैं- सॉरी मनीषा. वो तूने कहा नहीं जाने के लिए इसलिए मैं नहीं गया. लेकिन मेरा कोई गलत इंटेंसिव नहीं है तुझे लेकर.

मनीषा- मुझे पता है भैया की आपका क्या इंटेंसिव है. वैसे एक बात सच सच बताना भैया. क्या मैं सच में खूबसूरत लगती हूँ.

मैं- सच में तू बहुत hi खूबसूरत है. तुझे देखकर तो अचे अचे उठकर खड़े हो जाते हैं. (मैंने ये बात मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपने लुंड को सहलाकर बोलै था. जिसे मनीषा ने भी देख लिया. और शर्माकर दूसरी तरफ देखने लगी)

मनीषा- अच्छा भैया ये बताओ की मैं अभी ज्यादा अच्छी लग रही हूँ या किचन में ज्यादा अच्छी लग रही थी.

मैं मनीषा की बात सुनकर उसे hi देखने लगा और सोचने लगा की इसके मन में क्या चल रहा है. कभी एकदम नाराज़ हो जाती है तो कभी ऐसे सवाल पूछती है. मैंने भी अपने लुंड को मसलते हुवे कहा.

मैं- तू दोनों जगह hi खूबसूरत लग रही थी. किसी को तू अभी खूबसूरत लग रही है (फिर मनीषा की आँखों में देख कर अपने लुंड की तरफ इशारा करके) किसी को तू किचन में खूबसूरत लग रही थी.



मनीषा समझ गई की मैं क्या कहना छह रहा हूँ तो उसने थोड़ा नाराज़गी के साथ मुझे देखते हुवे कहा.

मनीषा- आप सच में बहुत कमीने हो भैया. आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है. लेकिन मैं आपके हाँथ नहीं आने वाली. इतना याद रखिये.

मनीषा के ये कहते hi मुझे पूरा यकीं हो गया की मनीषा को दोनों दीदी और मेरे बारे में सबकुछ पता है. दोनों दीदियो के साथ होने पर मैंने ऐसा कई बार महसूस किया था की कोई आस पास है. लेकिन मैंने हमेशा इग्नोर किया था इस बात को, मनीषा कई बात बातो बातो में मुझे इशारा देती रही की उसे सब बता है. लेकिन मैं हमेशा कंफ्यूज था. लेकिन अभी उसके कहे हुवे एक शब्द से ये कन्फर्म हो गया था की उसे सब कुछ पता है.

मनीषा को कहना चाहिए था की आप की गन्दी नज़र मुझपर है लेकिन उसने कहा था की आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है.

मतबल उसको पता है की मैं दोनों दीदी को पता चुक्का हूँ. अगर मनीषा को सब पता था तो उसने कभी मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया. अगर मां पापा को नहीं बताया तो काम से काम दोनों दीदियो को बता देती इंदिरेक्ट्ली की उसे सब पता है. मैंने इन सब बातो पर गहन सोचविचार करके एक फैसला किया. की अब मैं मनीषा के साथ भी आगे बढूंगा वो भी खुल कर के. अगर इसे बताना होता तो ये अब तक बता चुकी होती लेकिन इसको भी इन सब में शायद मज़ा आ रहा है. इसलिए इसने अभी तक किसी को कुछ नहीं बताया. मैं अभी इसी सोच में डूबा हुवा था की मुझे मनीषा की आवाज़ सुनाई पड़ी.

मनीषा- क्या हुवा भैया. किस सोच में डूब गए.

मैं- कुछ नहीं बस तेरे बारे में कुछ सोच रहा था. तेरे भले के लिए

मनीषा- अरे वाह आप मेरे भले के लिए सोच रहे थे. क्या बात है.

मैं- तेरा भाई हूँ मैं नहीं सोचूंगा तो और कौन अच्छा सोचेगा अपनी बहन के बारे में.

मनीषा- ये तो आपने बिलकुल सही कहा. आप अपनी बहनो के बारे में बहुत अच्छा सोचते है. तो मुझे भी बताइये की आप क्या सोच रहे थे.

Main-jane दे मनीषा मैं नहीं बताने वाला हूँ कुछ भी.

मनीषा- बताओ न भैया. क्या सोच रहे थे मेरे बारे में.

मैं- मैंने कहा नहीं बताऊंगा. तू फिर से बिना मतलब के नाराज़ हो जाएगी. और में तुझे नाराज़ नहीं करना चाहता.

मनीषा- बताइये न भैया. मैं सच में नाराज़ नहीं होउंगी. प्रॉमिस.

मैं- ठीक है मनीषा मैं बता तो दे रहा हूँ लेकिन अगर तुम नाराज़ हुई तो मैं बात नहीं करूँगा तुमसे.

मनीषा- पक्का नहीं नाराज़ होगी. आप बताओ.

मैं- देख मनीषा. तू बहुत खूबसूरत है. इसमें कोई डाउट नहीं है और इन कपड़ो में तू और भी खूबसूरत नज़र आ रही है.

मनीषा (शर्माकर मुझे देखते हुवे) सच भैया थैंक यू.

मैं- तुझे देख कर लगता है की तू अब पूरी जवान हो गई है. और मुझे ऐसा लगता है की तू ज्यादा दिन अपनी जवानी के बोझ को नहीं संभल पाएगी. इसे सँभालने के लिए किसी हट्टे काटते मर्द को ढूंढकर तेरी बहुत जल्दी शादी करवानी पड़ेगी. जिससे तेरी इस मदमस्त जवानी को कोई संभाले वाला मिल जाएगा.



मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और थोड़ा बनावटी गुस्से के साथ मेरी तरफ देखा. तो मैंने मासूम सा फेस बनाकर आँख मार दी. तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो बोली.

मनीषा- क्या भये कैसी बाते कर रहे हो. मन की मैं जवान हो गई हूँ. लेकिन इतनी भी नहीं हुई हूँ की आप मेरी शादी करवाने की बात करे. अभी मैं शादी के लिया बहुत छोटी हूँ.

मैं- मुझे तो नहीं लगता की तू अभी छोटी है. सब कुछ तो बड़ा बड़ा दिख रहा है.

मेरी बात सुनकर मनीषा समझ गई की मैं क्या कह रहा हूँ तो उसने मुझे घूरकर देखा और कहा.

मनीषा- भैया बहुत हो गया अब. मेरे साथ ऐसी बाते मत करिये नहीं तो मैं पापा को बोल दूंगी.

मैं- देखा इसीलिए मैं नहीं बोल रहा था. मुझे पता था की तुम नाराज़ हो जाओगी.

मनीषा- मैं नाराज़ नहीं हूँ भैया. लेकिन फिर भी सोचो मैं आपकी छोटी बहन हूँ.

मैं- बहन है तभी तो मुझे तुम्हारी इतनी फ़िक्र है. मैं चाहता हूँ की तुम अपनी लाइफ खूब अचे से इंजॉय करो.

मनीषा- भैया मैं तो आप के साथ अपनी लाइफ खूब इंजॉय करना चाहती हूँ, लेकिन आप तो दीदियो में बस्सी रहते हैं. आप मुझपर ध्यान hi नहीं देते.

मैं- अच्छा मनीषा अब मैं तुझपर पूरा ध्यान दूंगा.

और इतना बोलकर मैं उसकी चूचियों को घूरने लगा. मुझे अपनी चूचियों को घूरता पाकर वो शर्मा गई और बोली.

मनीषा- ये क्या है भैया. इतना क्यों घूर रहे हो.

मैं- तुम्ही ने तो अभी कहा की मैं तुमपर ध्यान hi नहीं देता. इसलिए अब तुमपर ध्यान दे रहा हूँ.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्माकर हंस पड़ी. मैं भी उसके साथ हंस दिया. थोड़ी देर बाद मैं उससे बोलै.

मैं- एक बात और बोलू मनीषा. लेकिन बुरा मत मन्ना.

मनीषा- ठीक है. मैं बुरा मानकर कर भी क्या सकती हूँ. बोल दो.

मैं- सच में तू एकदम जवान हो गई है. और एकदम मॉल लगने लगी है.

मेरी बात सुनकर मनीषा मेरे पास आई और मेरे हाँथ पर मरने लगी. और मुझे धक्का देखर दरवाज़े के पास ले आई और दरवाज़ा खोलकर मुझे बहार जाने का कहकर वापस कमरे में चली गई. मैं फिर से उसके पीछे पीछे गया और उसके कंडे को पकड़कर अपना मुंह उसके कण के पास लेजाकर उससे कहा.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू जवान होकर एकदम तूंच मॉल बन गई हो.



इतना कहकर मैं उसे छोड़कर बहार भगा. मेरी बात सुनकर मनीषा मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन ब्रा में होने के कारन दरवाज़े पर hi रुक गई और मुझसे बोली.

मनीषा- भैया मैं आपको किसी दिन बहुत मरूंगी. आने दो पापा को मैं आज शिकायत करूंगी आपकी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-89

मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू जवान होकर एकदम तूंच मॉल बन गई हो.

इतना कहकर मैं उसे छोड़कर बहार भगा. मेरी बात सुनकर मनीषा मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन ब्रा में होने के कारन दरवाज़े पर hi रुक गई और मुझसे बोली.

मनीषा- भैया मैं आपको किसी दिन बहुत मरूंगी. आने दो पापा को मैं आज शिकायत करूंगी आपकी.

अब आगे.

मनीषा के कमरे से निकलकर मैं अपने कमरे में चला गया और अपना मोबाइल निकलकर दीदी से बात करने आगा. थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने सोना ठीक समझा और बिस्तर पर लेटकर सो गया. शाम को मेरी नींद खुली मैं फ्रेस होकर निचे आया तो हॉल में मां, पापा, सरिता दी और मनीषा थे. वो कुछ आने जाने की बात कर रहे थे. मैं भी जाकर उनके पास बैठ गया और पापा से कहा.

मैं- कहा जाने की बात हो रही है पापा.

पापा- वो क्या है न की कल सुबह तेरी सोनम दीदी (मौसेरी बहन) को देखने के लिए लड़के वाले आ रहे हैं और अगर उन्हें सोनम पसंद आ गई तो कुछ हाँथ में रख कर रिश्ता पक्का भी कर denge.lekin तेरी मौसी की तबियत ख़राब है और तेरे मौसा घर में अकेले हैं. कर सूटेरदाय है और छुट्टी भी है तो तेरे मौसा ने फ़ोन किया था की मैं तेरी मम्मी और सरिता तीनो वह आ जाये. जिससे उनकी हेल्प हो जाएगी.

पापा के मुंह से सरिता दीदी के जाने की बात सुनकर मुझे बहुत दुःख हुवा. मैंने जब दीदी की तरफ देखा तो उनका भी फेस लटक गया था. कहाँ तो आज हम दोनों ने चुदाई का प्लान बनाया था और कहा दीदी को मौसी के यहाँ जाना पद रहा है, लेकिन मैं कुछ कह भी नहीं सकता था. इसलिए मजबूरन मुझे कहना पड़ा.

मैं- ये तो बहुत ख़ुशी की बात है. आप सबको जाना चाहिए.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- लेकिन पापा मैं नहीं जा पाऊँगी. मुझे कुछ नोट्स बनाने हैं. जिसके लिए मुझे बहुत म्हणत करनी पड़ेगी. अगर मैं उधर चली गई तो मेरा काम अधूरा रह जाएगा.

पापा- लेकिन सरिता सोनम ने बड़े प्यार से तुझे बुलाया है और तू मन कर रही है उसे कितना ख़राब लगेगा.

पापा की बात सुनकर मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो उनका चेहरा और लटक गया था. उन्होंने मुझे आँखों के इशारे से कुछ करने के लिए कहा लेकिन मैं मजबूर था. तभी मेरी नजर मनीषा पर गयी तो वो हम दोनों को देखकर एक सरारती मुस्कान मुस्कुरा रही थी. मैंने तुरंत अपनी नज़र निछि कर ली. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- क्या पापा आप भी. जो नहीं जाना चाहता है उसके पीछे जबरदस्ती पड़े हुए हैं आप और जो जाना चाहता है आपने उससे पूछा भी नहीं.

पापा- तुम्हे चलना है क्या.

मनीषा- और नहीं तो क्या. दीदी नहीं जाना चाहती तो उनको रहने दीजिये मैं चल रही हूँ दीदी की जगह. क्यों दीदी ठीक है न अब.

और इतना कहकर मनीषा ने एक शरारती मुस्कान के साथ मुझे देखा. मनीषा की बात सुनकर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई लेकिन मैं अपनी खुसी वैसे hi दबाये बैठा रहा. मुझे ऐसे देखकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अरे भैया आपको क्या हुवा. अब तो खुश हो जाइये. दीदी नहीं जा रही हैं.

मनीषा की बात सुनकर मैं और दीदी एकदम चौक पड़े. मैंने इसलिए की कही ये अपना मुंह न खोल दे और दीदी इसलिए की मनीषा ने ऐसा क्यों बोलै. मैंने मनीषा से कहा.

मैं- मैं क्यों दुखी रहूँगा. चाहे तुम जाओ चाहे दीदी जाये.

मनीषा- अरे मेरे प्यारे भैया. मैं अगर यहाँ रुक गई तो आप भूखे रह जाओगे. क्योंकि मैं आपको कुछ नहीं दे पाऊँगी. मगर दीदी रुख रही हैं तो अब आप भूखे नहीं रहेंगे. दीदी कई तरह की चीजे आपको खिलाती रहेंगी और आपको प्यास भी नहीं लगने देंगी. मैंने कई बार देखा है की जब कभी आप पानी ले जाना भूल जाते थे तो दीदी आपको पानी दे जाती थी. और दीदी को बहुत पकवान बनाना आते हैं तो आपको भूख भी नहीं लगेगी.

मनीषा ने जो कुछ भी कहा. उसका मतलब मैं और मनीषा hi समझ रहे थे उसकी बात सुनकर तो ये साफ हो गया की इसे सबकुछ पता है और इसने किसी को नहीं बताया. मतलब इसके मन में कुछ न कुछ खिचड़ी पाक रही है. मैं यही सब सोच रहा था की तभी दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

सरिता दी- (मुस्कुरा कर) थैंक यू मेरी प्यारी बहन.

मनीषा- लेकिन इसके बदले में मुझे कुछ चाहिए आपसे. और मैं जो कुछ भी मांगूंगी आपसे आप मन नहीं करेंगी.

सरिता दी- ठीक है मनीषा तू जो किछ भी मांगेगी मैं मन नहीं करुँगी.

मनीषा- ऐसे नहीं एक बार अचे सो सोच लो और सबके सामने वडा करो की मैं जो कुछ भी मांगूंगी आप मुझे देंगी आप मन नहीं करेंगी.

सरिता दी- ठीक है मैं वडा करती हूँ की तू जो कुछ भी मुझसे मांगेगी मैं तुझे दूंगी.

मनीषा- ठीक है दीदी ये वडा आप पर उधर रहा. जब मुझे जरुरत होगी मैं मांग लुंगी.

मनीषा जाने के लिए तैयार हो गई थी और उन्हें अभी निकलने था तो सभी अपने कमरे में चले गे तैयार होने के लिए. अब हॉल में मैं अरु सरिता दी hi बचे थे. मैंने उनको देखा तो उनके चेहरे पर सुकून था. मैंने दीदी को छेड़ते हुवे कहा.

मैं- तो आपको पढाई करनी है आज. क्यों दीदी.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुराने lagi.lekin बोली कुछ नहीं. तो मैंने कहा.

मैं- तुम चिंता मत करो दीदी. आज मैं तुम्हारी पूरी तयारी करवा डोंगा. मैं तुम्हारा सेलेबस अपनी पेण्ड्रीवे लगाकर पूरी रात इस तरीके से याद करवाऊंगा की तुम ये सेलेबस कभी नहीं भूल पाओगी. और तुम इतनी परिपक्व हो जाओगी की तुम्हे कोई भी फेल नहीं कर सकता.

मेरी बात सुनकर सरिता दी मुस्कुराते हुवे अपने कमरे में जाने लगी. सीधी के पास पहुंचकर उन्होंने अपनी जीभ निकल कर मुझे दिखाई और चिढ़कर अपने कमरे में चली गई.



मैं वही हॉल में बैठ गया. थोड़ी देर बाद मां पापा और मनीषा तैयार होकर कमरे से बहार आ गए. मनीषा बहुत सुन्दर लग रही थी. सरिता दीदी भी निचे आ गाइट hi. सभी लोग घर के बहार आ गए तो मां हम दोनों को साथ में रहने और झगड़ा न करने की नसीहत देकर गाड़ी में बैठ गई.

मैं और मनीषा पास hi खड़े थे मैंने मनीषा से कहा.

मैं- मनीषा सच में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हूँ.

मिनिषा- किसको लग रही हूँ.

पहले तो मुझे उसकी बात समझ में नहीं आई और जब समझ आई की वो क्या कहना चाहती है तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. उसने गाडी में बैठने से पहले मुझसे कहा.

मनीषा- आल थे बेस्ट भैया. खूब अच्छे से खाना और दूध पीकर अपनी सेहत बनाना. दो दिन बाद आउंगी तो कमजोर नहीं लगने चाहिए आप.

इतना बोलकर उसने मुझे बहुत hi नशीली निगाहों से देखा और कार में बैठ गई तो पापा ने कार आगे बढ़ा दी.



मैं बस उसकी कही बात सोचने लगा. मतलब मनीषा ने जानबूझकर हम दोनों को मौका दिया. मतलब उसे कोई एतराज़ नहीं है हम दोनों के रिलेशनशिप का. ये सोचकर मैं बहुत खुश हो गया की चलो अब मनीषा भी धीरे धीरे लाइन पर आ रही है. फिर मैं घर के अंदर गया तो दीदी डाइनिंग टेबल पर बैठी थी अपनी अधनंगी चूचिया उसपर रखकर. मैं भी जाकर उनके पीछे खड़ा हो गया और उनके कंधे पर हाँथ रखकर उनसे कहा.

मैं- अब तो तुम खुश हो न. अब तो कोई घर पर नहीं है. अब तो मज़ा आएगा. क्यों दीदी.

मेरी बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली और पलटकर मेरी तरफ देखने लगी. उन्होंने सीरियस होकर मुझसे कहा.

सरिता दी- अभी क्या हम दोनों जो कर रहे हैं वो सही है. मतलब हम दोनों भाई बहन हैं.

मैं- क्या यार दीदी. तुम फिर से शुरू हो गई. भाई बहन तो हम हैं hi लेकिन साथ में एक मर्द और औरत भी हैं और इस समय हम दोनों प्यासे हैं. और हम दोनों को एक दूसरे की जरुरत है.

इतना कहकर मैंने दीदी को पकड़कर उठाया और सोफे की तरफ ले जाकर मैंने उन्हें सोफे पर बैठा दिया और उन्हें किश करने लगा. दीदी भी मेरे साथ देने लगी.



दीदी मेरे चेहरे को पकड़कर मुझे किश कर रही thi.thodi देर तक दोनों किश करते रहे जब हमारी सनस उखाड़ने लगी तो हमने एकदूसरे के होंठ छोड़ दिए. मैंने दीदी की आँखों में देखा तो उसमे एक खुमारी नज़र आई. कुछ देर तक दीदी की आँखों में देखने के बाद मैंने अपनी जीभ निकली और दीदी के होंठो पर फिरने लगा. दीदी ने भी कुछ देर बाद मेरे जीभ के स्वागत के लिया अपने मुंह खोलका मेरी जीभ को अंदर लेकर चूसने लगी. दीदी जोर जोर से मेरी जीभ चूस रही थी.

कुछ देर बाद दीदी ने मेरी जीभ छोड़ी और अपनी जीभ बहार निकलकर मेरे मुंह में घुसा दी. मैं भी दीदी की जीभ चूसने लगा. दीदी गरम होने लगी. उनकी जीभ चुने के बाद मैंने अपने एक हाँथ को उनकी लोअर के ऊपर रख दिया और छूट को सहलाने लगा. दीदी भी गरम होने लगी. थोड़ी देर तक छूट सहलाने के बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- सरिता तुमको अच्छा तो लग रहा है न.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmm

मैं- अपनी लवर उतर दो अब सरिता.

मेरे कहने पर दीदी ने मेरी तरफ देखा और कुछ देर बाद उन्होंने अपनी लोअर उतर दी. मैं फिर से दीदी के होंठ चूमने लगा. दीदी गरम हो कर एकदम वाइल्ड हो गई थी. वो जोर जोर से मेरे होंठ चूस रही थी. मैंने अपना हाँथ दोबारा दीदी की छूट पर रखा और उसे पंतय के अंदर डालकर उनकी छूट सहलाने लगा. मेरा हाँथ छूट पर लगते hi दीदी ssssssssssss ssssssssssssss ooooooooooooohhhhhhhhhhh की आवाज़ करने लगी. मैंने दीदी की छूट सहलाते हुवे अपनी एक ऊँगली उनकी छूट के मुंह पर रख दी और दीदी के होंठ चूसते हुवे अपनी ऊँगली दीदी की छूट में डालने लगा. मेरी ऊँगली छूट में जाने से दीदी कसमसाने लगी और अपने हाँथ से मुझे रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने फाॅर्स के साथ अपनी पूरी ऊँगली दीदी की छूट में पेल दी और अंदर बहार करने लगा. दीदी मेरे होंठ चूसते हुवे ssssssssssssss आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कर रही थी.

थोड़ी देर तक उनकी छूट में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकल ली और दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया और उनके होंठो को किश करने लगा. मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे अपना उनकी शर्ट की ऊपर की 3 बटन खोकर एक हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर उन्हें दबाने लगा.



मेरा लुंड पूरी तरह खड़ा होकर दीदी की गांड के निचे दबा हुवा था और हल्का हल्का दीदी की गांड में झटके मर रहा था. मैंने दीदी की चूचियों को दबाते हुवे मैंने उनके होंठ को फोरस्फुल्ली किस्स्स करना शुरू कर दिया. लगभग 10 मिनट तक दीदी के होंठ चूस चूस कर मैंने एकदम लाल कर दिया और जब मैंने अपना मुंह हटाया तो दीदी हांफने लगी. थोड़ी देर साँस दुरुस्त करने के बाद दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता दी- अभी तू कभी कभी जानवर बन जाता है. तुझे मेरे ख्याल hi नहीं रहता.

मैं- अभी कहा सरिता. जानवर तो मैं बिस्टेर पर बनता हूँ. और तेरा ख्याल है इसीलिए तो मैं कितने सोफ़्त्ल्य ये सब तेरे साथ कर रहा हूँ. नताशा के साथ तो मैं और भी बुरी तरीके से करता था.

सरिता दी- उसका नाम भी मेरे सामने मत लेना. मेरे भाई को उसने hi बिगाड़ा था. उसी ने तुझे हमसे दूर किया था.. वो तो अच्छा हुवे वो चली गई और तू सुधर गया और हमारे पास रहने लगा.

दीदी की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुवे दीदी की शर्ट की पूरी बटन कॉल दी और उसे उतारकर सोफे पर रख दिया. अब दीदी ब्रा और पंतय में मेरी गॉड में बैठी थी. मैं दीदी की चूचियों को देखकर एक्सीटेंड हो गया. कितनी बड़ी बड़ी चूचिया थी. मुझे तो उस छोटी सी ब्रा पर बहुत तरस आ रहा था. जिसने िस्नी बड़ी बड़ी चूचियों का भर सम्बल था. दीदी मुझे अपनी चूचियों को देखता पाकर कहा.

सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है अभी.

मैं- तुम्हारी चूचिया बहुत जालिम हैं दीदी. इसे इनपर तनिक भी तरस नहीं आता.

सरिता दी- किनपर तरस नहीं आता.

मैं- तुम्हारी चूचियों को इन ब्रा पर तनिक भी तरस नहीं आता. देखो तो अपना पूरा बोझ इस नन्ही सी जान पर डाला है. इसका तो डैम घुट जाता होगा इतनी बड़ी बड़ी चूचिया सँभालने में. और मुझे जलन भी होती है तुम्हारी ब्रा से. काश की इनकी जगह मैं हटा. तो काम से काम दिन रत तुम्हारी इन गदरायी और मदमस्त चूचियों से लिप्त रहता और इनका दीदार करता रहता.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. मैंने दीदी के चेहरे को देखते हुवे अपना चेहरा निचे किया और दीदी की चूचियों की घाटियों में रख कर उन्हें किश करने लगा और अपने दोनों हैंतो से दीदी की चुचायो को हल्का हल्का दबाने लगा. दी ने मेरे सर पर हाँथ रखकर मेरे चेहरे को अपनी चूचियों पर दबा लिया.



थोड़ी देर मैं ब्रा से बहार निकली दीदी की चूचियों और क्लीवेज को चूमता रहा चाटता रहा और हांथो से दीदी की चूचियों को दबाता रहा. फिर मैंने दीदी की चूचियों के ऊपरी भाग को मुंह में बहरा और दोनों हांथो से उनकी दोनों चूचियों को कसकर मरोड़ दिया और चूचियों पर दन्त काट लिए. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ क्या करररररर राहाआआ haiiiiiiiiii. इतनाआआआ जाअलीमंम

मैट बननननननननन मुझीीी दररदददददद होताआ haiiiiiiiiii ऊह्ह्ह्हह्ह uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiii ममा.

मैं फिर से दीदी की चूचियों चाटने लगा और हलके हांथो से दीदी की चूचियों को दबाता रहा. दीदी भी मस्त हो गाइट hi. वो भी गरम गरम सांसे छोड़ रही थी जो मुझे मेरे सर पर महसूस हो रही थी. थोड़ी देर उनकी चूचियों को चाटने के बाद मैंने फिर से दीदी की चुकी पर दन्त कटा और दोनों चूचियों को जोर से मसल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी.

सरिता दी- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaa bachaaaaaaoooooooooooo aooooooooooooooooooooooo aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa बहुत्तट्ठ डरडडडडडड होओओओओ राहाआआ हिअआअ. क्याआआ कररर रहःहा आ है अभीइइइइइइ. धीरीईईई करररर bhaaaiiiiiiiiiiii.

इसके बाद मैंने कुछ देर और दीदी की चूचियों से खेलता रहा. फिर मैंने दीदी को खड़ा कर दिया और उनकी नशीली आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी अब मेरा कुछ ख्याल करो. मेरे लोअर को उतरो.

दीदी ने मुझे उठाया और मेरी लोअर में ऊँगली फसकर उसे निचे कर दिया अब मैं दी के सामने ुंडेरवेरे में खड़ा था. दीदी मेरे लुंड को देखने लगी एकदम मदहोश हो गई मेरे लुंड को ुन्दरवरे में देखकर. थोड़ी देर बाद दीदी ने अपनी नशीली नजर उठाकर मुझे देखा तो मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी अब इसे थोड़ा प्यार करो अपने मुंह में लेकर.

सरिता दी- छहियी अभी ये कितना गन्दा होता है. और तुम उसे मुंह में लेने के लिए बोल रहे हो. मैं नहीं करुँगी ये.

मैंने- कुछ गन्दा नहीं होता दी. चुदाई करने में यही तो मज़ा है. और आप मेरे कहे अनुसार चलेंगी तो आपको बहुत मज़ा आएगा. एक बार तरय तो करो.

मेरे बार बार कहने के बाद दीदी मन गई. मैं ुन्दरवरे में दीदी के सामने खड़ा था. दीदी अपने घुटनो पर बैठ गई और कुछ देर तक मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड पर ुंडेरवेरे के ऊपर से फिरने लगी.



दीदी की जीभ उव के ऊपर से hi महसूस करके मैं आनंद के सागर में गोते लगाने लगा. मेरे मुंह से aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. दीदी मेरे लुंड को लगभग 5 मिनट कर उव के ऊपर से hi चाहती रही. मेरी उव दीदी के थूंक से गीली हो गई. थोड़ी देर और लुंड को चाटने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब मेरी उव भी उतर कर इसे प्यार करो. ये तुम्हारी प्यार के लिए तरस रहा है.

मरी बात सुनकर दीदी ने मेरी उव भी उतर दी. अब मैं दीदी के सामने निचे से नंगा खड़ा था. मैंने दीदी को खड़ा किया और उन्हें लेकर डाइनिंग टेबल के पास आ गया दीदी बस मुझे hi देख रही थी की मैं क्या करने वाला हूँ. मैंने भी दीदी को देखते हुवे अपना लुंड डाइनिंग टेबल पर रख दिया और दीदी को लुंड चाटने के लिए कहा. दीदी मेरी बात सुनकर मेरी आँखो में देखते हुवे मेरे लुंड पर अपनी जीभ रख दी और चाटने लगी. मेरे मुंह से ssssssssshhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. दीदी अपनी जीभ केवल टोपे की अस पास hi फिर रही थी तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- ऐसे नहीं सरिता अपनी जीब को इसके ऊपर तक फिराओ और अचे से छतो इसे.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरे आधे से ज्यादा लुंड के ऊपर जीभ फिरने लगी. मेरे मुंह से सिसकारी निकल रही है मैं अपना हाँथ दीदी के सर पर रखकर उनका सर सहलाने लगा और बोलने लगा.



मैं- हाँ सरिता ऐसी hi चत्तत्ते मेरे लुंड को. तुम बहुत अछठा कर रररहि हो. तुममम बहुतत्त जल्दीई लुंड चूसना भी सीख ज्जाओगईई. थोड़ा औरर ऊपर टक्क छातो. ट्टूमंत्रीय जीभहह बआहुत्त गरम हाई सरित्ता मेरी ज्जानंन्न. और त्तेज चायतू और तेज़्ज़ज़.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

कोई बात नहीं सर जी।

पहले पेट पूजा फिर काम दूजा।

आपको ये कहानी अच्छी लग रही है, इसलिए आपको लगता है कि इस कहानी को खिताब मिलेगा। जरूरी नहीं कि सब को यह कहानी अच्छी ही लगे।

और वैसे भी इस कहानी को कोई खिताब मिले या न मिले। उससे मुझे कोई सरोकार नहीं। ये तो बाद की बात है। बस मैं यही चाहती हूँ कि मैं ज्यादा से ज्यादा अच्छी तरीके से कहानी लिखूँ ताकि पाठक मेरी कहानी पढ़कर निराश न हों।

बाकी आप जैसे मार्गदर्शक अगर साथ रहे तो मैं ये जरूर कर लूँगी।

साथ बने रहिएगा।
 
अपडेट-90

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और तेज़ी से लुंड चाटने लगी. मेरा लुंड दीदी के थूक से पूरा सं गया था. थोड़ी देर और लुंड चटवाने के बाद मैंने अपना लुंड डाइनिंग टेबल से उठा लिया और दीदी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उनसे बोलै.

मैं- तुम बहुत अच्छा कर रही थी सरिता. अब मेरे लुंड को अपने गरम मुंह में लेकर इसे मज़ा दो.

सरिता दी- छःईंईईई मैं इसे मुंह में नहीं लुंगी. ये बहुत गन्दा है.

मैं- अब गन्दा कहा है तुमने तो इसे चाट चाट कर साफ कर दिया है.

सरिता दी- फिर भी मैं मुंह में नहीं लुंगी इसे. कितना बड़ा है ya.Tum कहो तो इसे किश कर सकती हूँ.

मैं- चलो न तुम्हारी बात और न मेरी बात. तुम बस इस टोपे को एक बार मुंह में लेकर चूस लो बस.

मेरी बात सुनकर दीदी ने कुछ देर तक फिर से मेरे लुंड को देखा और अपना मुंह खोलकर लुंड को सुपडे तक मुंह में भर लिया और उसपर अपनी जीभ फिरने लगी. मेरी तो आनंद के मरे जान hi निकल रही थी. मैं दीदी से बोलै



मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह सरिता बहुत बढ़िया कर रही होओओओ. कितना ग्राम मुँहहह हैई तुम्हाराआआआ. बहुत्तत्त अछ्हाआआआ थोड़ा जोरर लगाकर चुस्स्सो सरिता. बहुत्तत्त मज़ाआ आ रहःहा हैई.

दीदी ने थोड़ा जोर लगाकर मेरा लुंड चूसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर अपना सूपड़ा चुसवाने के बाद मैंने दीदी के मुंह से अपना लुंड निकल liya.mere लुंड निकलने से दीदी मुझे सवालिया नज़रो से देखने लगी. शायद उन्हें लुंड चूसना अच्छा लग रहा था. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्यों सरिता मज़ा आ रहा था क्या लुंड चूसने में.

मेरी बात सुनकर दीदी ने शर्माकर अपनी गार्डन निचे झुका ली, लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैंने दीदी को उठाकर खड़ा किया और उनको किश करने लगा. दीदी तो पहले से hi गरम थी. उन्होने भी किश में मेरा पूरा साथ दिया. किश करते- करते मैं दीदी को सोफे तक ले आया. मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर दीदी की पीठ सहलाने लगा. पीठ सहलाते सहलाते मैंने दी की ब्रा का हुक खोल दिया जिससे दीदी की पीठ पर ब्रा की दोनों पत्तिया लटक गयी. मैंने 5 मिनट तक फोरस्फुल्ली दीदी को किश करने के बाद अगल हुवा और दीदी की ब्रा को उनकी चूचियों से नोचकर निचे फेक दिया. अब दीदी मेरे सामने सिर्फ पंतय में कड़ी थी. मैंने दीदी की चूचियों को देखते हुवे कहा.



मैं- सच में सरिता. तेरी चूचिया बड़ी जालिम हैं. इसे मैं जितनी बार भी देखता हूँ. ये पहले के मुकाबले और बड़ी दिखती है. तेरी चूचियों के सामने तो अजंता एलोरा की कलाकृतिया भी फीकी पद जाती हैं.

मेरी मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर सरिता दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई. दीदी का चेहरा इस समय वासना और मुस्कान से मिलकर बहुत की कामुक लग रहा था. तभी दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दी- अब इतनी भी झूटी तारीफ मत करो अभी.

मैं- मैं झूठी तारीफ कभी नहीं करता सरिता. जो सच है वही बोल रहा हूँ. तेरी चूचिया सच में तारीफ के काबिल हैं मैंने आज तक ऐसी ठोस और कड़क चूचिया नहीं देखि. तेरी चूचिया इतनी जानलेवा हैं की इन्हे देखकर तो तेरे भाई का भी इमां दोल गया है.

अपनी तारीफ सुनकर दीदी शर्माकर मुस्कुराने लगी. फिर मैंने दीदी को धक्का देकर सोफे पर लिटा दिया और उनके पैरो के पास बैठ कर उनके पेअर को उठाकर अपनी गॉड में रख लिया और चूमने लगा. मेरे चूमने से दीदी के शरीर में एक लहार दौड़ गई. दीदी की छतिया ऊपर निचे होने लगी. मैं जीभ निकलकर उनके दोनों पैरो को चाटने लगा और चाटते चाटते ऊपर की तरफ जाने लगा. दीदी एक तक बस मुझे और मेरी हरकतों को देखने लगी. उनके पेअर चाटते हुवे मैं दीदी की जांघो तक पहुंच गया और दीदी की आँखों में देखते हुवे पंतय के ऊपर से ऊनि छूट पर अपना मुंह रख दिया. दीदी एकदम सिहर गई और बोली.

सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. वोओओओओ गड्ड्ढडीइइइइइइ जगहःहःहःहः हैईईईई व्हाआआआ सीई मुँहहहह हटाए ली.

मैं- नहीं सरिता तुम्हारा शरीर कुंदन है. तुम्हारे शरीर का कोई भी अंग गन्दा नहीं है.

ये कहकर मैं दीदी की छूट को पंतय के ऊपर से चाटने लगा. दीदी मचलने लगी. उनकी छूट पहले से hi बहुत पानी छोड़ चुकी थी जिससे दीदी की पंतय गीली हो गई थी. थोड़ी देर पंतय के ऊपर से छूट चाटने के बाद मैंने उनकी पंतय में ऊँगली फसे और एक झटके में उसे खींचकर उनके पैरो से निकलकर जमीन पर फेंक दिया. दीदी ने हाँथ बढाकर पंतय पकड़ने की कोशिश की. लेकिन तब तक पंतय उतर चुकी थी. दीदी ने अपने हाँथ से अपनी छूट धक् ली और शर्माकर अपनी आँखे बंद कर ली. मैंने दीदी को शरमाते हुवे देखा तो मैंने धीरे से कहा.

मैं- सरिता. शर्मा क्यों रही हो. अपने हाँथ अपनी छूट से हटाओ और अपने इस नायब हुस्न का मुझे दीदार करने दो.

मेरे कहने पर जब दीदी नई अपना हाँथ नहीं हटाया तो मैंने दीदी का हाँथ पकड़कर उनकी छूट से हटा दिया अब दीदी मादरजात नंगी मेरे सामने सोफे पर लेते हुई थी. मैंने दीदी के नंगे शरीर को देखते हुवे कहा.

मैं- वाह्ह्हह्ह सरिता. एकदम तराशा हुवा बदन है तुम्हारा. बनाने वाले ने बड़ी फुर्सत में तुमको बनाया है. तुम्हारे शरीर में कही भी एक्स्ट्रा फैट नहीं है सिवाय तुम्हारी चूचियों और गांड को छोड़कर. तुम्हरे इस जालिम और तराशे हुवे हुस्न को अगर कोई मुर्दा भी देख ले तो वो भी जिन्दा हो जाये. तुम्हारे इस जालिम जवानी को पाने के लिए तो मैंने साडी दुनिया सा लड़ जाऊ. तू सच में मॉल बन गई है सरिता.

अपनी तारीफ सुनकर दीदी एकदम से शर्मा गई और धीरे से बोली.

सरिता दी- क्या अभी कुछ भी बोलते रहते हो. मुझे शर्म आती है.

मैं- क्या सरिता. अपने भाई के सामने नंगी लेती हुई हो तो शर्म नहीं आ रही और मेरे बोलने से तुमको शर्म आ रही है.

इतना बोलकर मैंने निचे झुककर दीदी की छूट पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा. मेरे होंठ छूट पर लगते hi दीदी के शरीर ने झटका खाया. मैं दीदी की छूट चूसने के साथ साथ हाँथ ऊपर करके दीदी की चूचियों को भी दोनों हांथो से थम लिया और दबाने लगा.

छूट चूसते हुवे मैंने दीदी के चेहरे की तरफ देखा तो दीदी का चेहरा लाल हो गया था. उनकी नथुने फूल पाचक रहे थे. गाल गुलाबी हो गए थे. छूट चुसवाते हुवे जब दीदी एकदम छुडासी हो गई तो उन्होंने अपनी कोहनी को सोफे पर रखकर अपने सर को ऊपर उठाया और मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबाने लगी और बोलने लगी.

सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiii माआआआआ. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh बहुत्त मज़ाआ आए रहा हैई अभियई. चुस्सस्स्स्स मेरिइइइइइइइइ चूठ्टटट. कहाआआ जाआआ ीसीईईई. ैरररररररर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ चुस्स्सस्स मेरे भईईई. टूउउउउ बहुत्तट्ट्ट्ट अछ्हाआअ चुस्स्सस्स रहा हिअआइईईई मुझी बहुत्त मज़ाआआ आआ रहहह हिअआअ.

दीदी की बात सुनकर मैं अपने हाँथ दीदी की चूचियों से उठाकर दीदी की छूट सहलाने लगा और अपनी जीभ की नोक से दीदी की छूट चूसने लगा. दीदी के शरीर में मस्ती भरने लगी. मैंने एक हाँथ से दीदी की छूट को सहलाते हुवे दूसरे हाँथ से दीदी की छूट में ऊँगली दाल दी और छोड़ने लगा साथ hi दीदी की छूट को मुंह में भरकर खींच खींच कर चूसने लगा. लगभग 7 मिनट तक दीदी की छूट ऐसे hi चूसने से दीदी का शरीर अकड़ने लगा. वो अपने शरीर को बिस्टेर पर ऊपर निचे करने लगी और जोर जोर से चिल्लाने लगी.



सरिता दी- Ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiii ईईईई Abhiiii.aaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhh बसससससस अईसे हीईई oooooooohhhhhhhhhh भाईईई कहाआआआ jaaaaaaaaaa मेरिइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट को, मेरेईईई राजायआ भाईईईई ऐसी होई चाटूवूओ अपनीईई सरिताआए कोई छूट को. Uuuuuuuuuuufffffffffff भाईईई क्याआ कररर रहःहा हीआईईई कुट्ट्टीीी ऑररररर अंडररर दाआललललल्लापनीईई जीईएभहहह औरर चुसस्स ली मेरिइइइ चुउत्त्त का raaassssssss.ooooooooooohhhhhhhhhh सचहहहहह मीटीए मीरआ स्सह्ह्ह्हीीी कहतीई थीई. छुट्ट्ट्ट चुस्सस्स्स्सस्बानी मी बहुत्त माज़ाआ आता हैईईई. ऑररररर तेज़ज़्ज़ज़ चुस्स्स भाईईई मेंनननन आईईएई वालीईई होऊणननननननन चुस्स्स कुट्टी ऑरररररर जोरर सी. Aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhn.

मेरी छूट चूसै से दीदी चीखते हुवे झाड़ गयी. और सोफे पर संत होकर लेट गइईईई. थोड़ी देर बाद जब वो नार्मल हुई थो अपने आपको नंगा देखकर वो शर्माने लगी. और अपने कपडे ढूढ़ने लगी तो मैंने उनसे कहा.

Main-Abhi कहा जा रही हो सरिता. इसको कौन शांत करेगा.

मैंने अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुवे कहा. तो दीदी की नज़र मेरे लुंड पर पड़ी जो एकदम खड़ा हुवा था. मेरे लुंड को देखते हुवे दीदी ने अपने होंठो को दांतो से कटा और मुझसे कहा.



सरिता दी- उसको तू खुस hi शांत कर ले. अब मुझे किचन संभालना है. नहीं तो आज भूखा रहना पड़ेगा.

इतना बोलकर वो अपने कमरे में भाग गई. मैं भी लुंड हिलता बाथरूम में चला गया और अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत किया. और अपने कमरे में चला गया. मैंने सविता दीदी से बात करने की सोची और उनको फ़ोन कर दिया.

सविता दी- हैल्लो अभी.

मैं- ही मेरी मॉल सविता.

सविता दी- तू नहीं सुधरेगा कभी भी. और कैसे हो तुम.

मैं- मैं ठीक हूँ. तुम कैसी हो

सविता di-main भी ठीक hi हूँ. कब आ रहे हो मेरे पास.

मैं- मैं क्यों औ आपके पास. जीजा जी तो हैं न तुम्हारे पास.

सविता दी- उनका होना और न होना दोनों बराबर है. मुझे तो तेरी जरूरत है.

Main-meri या मेरे लौड़े की.

सविता दी- मुझे दोनों की जरुरत hai.jab तू आएगा तभी तो वो आएगा.

मैं- ठीक है सविता बहुत जल्द आने की कोशिश करता हूँ. कोई अच्छी सी फोटो भेजो.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने अपनी एक बहोतो ब्रा में भेजी. इस ब्रा में दीदी की चूचिया एकदम उभरकर बहार दिख रही थी.



मैं- क्या बात है सविता. तुम्हारी चूचिया तो din-b-din बढ़ती जा रही hain.lagta है जीजा कुछ झाड़ा hi म्हणत कर रहे हैं.

सविता दी- ये सब तेरी म्हणत का नतीजा है. अगर मैं एक महीने तक तेरे साथ अकेले रह गई तो मेरे सरे कपडे छोटे हो जाएंगे.

मैं- तो क्या हुवा सविता. मैं तुम्हारे लिए नए कपडे बनवा दूंगा. अपनी पसंद का. अच्छा एक और फोटो भेजो.

इस बार दीदी ने अपनी नुदे फोटो भेजी थी. जिसे देखकर मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया.



फिर मैंने दीदी से कुछ इधर उधर की बाते की और फ़ोन रख दिया. थोड़ी देर अपने कमरे में बैठा रहा तो मुझे सरिता दी ने खान ेके लिए बुलाया. मैं हाँथ मुंह डोकर निचे डाइनिंग टेबल पर बैठ गया.

दीदी खाना लेकर आई. और खाना रखने लगी. दीदी के झुकने के कारन उनका पल्लू चूचियों से हैट गया जिससे उनकी चूचिया अंदर तक दिखने लगी.



मैं दीदी की चूचियों को देखता रहा. फिर दीदी सीधी होकर सामने बैठ गई हम दोनों ने खाना खाया मैं खाना खा कर उठा और दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया. दीदी ने मुझे अपने पीछे खड़े देखा तो पीछे मुड़कर मुझे देखा मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे दोनों हाँथ उनके कंधे से आगे बढाकर उनकी चूचियों को पकड़कर कसकर मसल दिया. दीदी सिसक पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii माआ क्याआआआ करता है. थोड़ा धीरे से दबा. दर्द होता है.

Main-Abhi कहा दर्द दिया तुमको. आज की रात तुमको वो दर्द दूंगा की तुम उस दर्द में मिलने वाले मज़े को कभी भूल नहीं पाओगी. तुम अपने कमरे में जाकर अच्छी तरह तैयार हो जाओ और जो गिफ्ट मैंने दिया है उसे पहन लेना. उसके निचे कुछ मत पहनना. मैं 1 हॉर्स बाद तुम्हारे कमरे में आ रहा हूँ.

दीदी तो पहले से hi मुझसे छुड़वाने के लिए मरी जा रही थी. लेकिन मेरी बात सुनकर उन्होंने नखरा दिखते हुवे कहा.

सरिता दी- मुझे नहीं तैयार होना तुम्हारे लिए. और मेरे कमरे में hi क्यों. मैं तुम्हारे कमरे में भी आ सकती हूँ.

Main-(muskurakar). बात ये है न सरिता रानी की जब सब रहते थे तो मेरे कमरे में आती थी. लेकिन आज कोई नहीं है तो मैं तुम्हारे ऊपर ये एहसान तो कर hi सकता हूँ की तुम्हे मेरे कमरे में आने की तकलीफ न उठानी पड़े.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुराने लगी और मुस्कुरा कर बोली.

सरिता दी- बड़ा आया एहसान करने वाला. ये सब तू अपने लिए कर रहा है.

मैं- अरे नहीं सरिता रानी ये मैं तुम्हारे लिए कर रहा हूँ. तुम्हारे जिस्म की प्यास बुझाने के लिए कर रहा हूँ. ये एहसान नहीं है तो और क्या है.

सरिता di-(tunak कर). अगर तू मेरे ऊपर एहसान करने के लिए कर रहा है तो मुझे तुम्हारा एहसान नहीं चाहिए.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की चूचियों को फिर जोर से मसल दिया दीदी के मुंह seaaaaaaaahhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhh sssssssssssssssssss ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई की आवाज़ निकल गई. फिर मैंने दीदी से कहा.



मैं- अरे सरिता तुम तो बेकार में नाराज़ हो रही हो. अगर मैं तुम्हारे ऊपर एहसान कर रहा हूँ तो तुम भी तो मेरे ऊपर एहसान कर रही हो. मैं भी तो प्यासा हूँ. तो तुम मेरी प्यास बुझाना और मैं तुम्हारी प्यास बुझाऊंग.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई. मैंने झुककर दीदी की गार्डन को चूमने लगा और दीदी की चूचियों को मसलने लगा. जिससे दीदी गरम होने लगी और लम्बी लम्बी साँस लेने लगी. कुछ देर दीदी को चूमने के बाअद मैंने दीदी के गार्डन को अपने मुंह में भर लिया और दोनों हांथो से उनकी चूचिया कसकर पकड़कर पूरी ताकत से कसल दिया और उनकी गार्डन को काट लिया. दीदी के मुंह से चीख निकल गई.

सरिता di-ooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh AAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कामिनी सलेटी. कितनी जुर्ररर सी कट्ट्ट्टा हैई . टूउउ पुराआ जाआआंआररररर हीी. Oooooooooohhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्ययययययय. ठुड्ड़दद्दाआआ धीयड़ीये कारररररर दबाआआआ मरीईईई भाआईईईई.

दीदी की बात सुनकर मैं धीरे धीरे उनकी चूचिया दबाने लगा और अपनी जीभ से दीदी की गार्डन को चाटने लगा. जिससे दीदी की आँखे बंद होने लगी और उन्होंने अपनी गार्डन को पीछे कर कुर्सी पर रक् दिया. जब मैंने देखा की दीदी बहुत गरम हो गई हैं तो मैंने फिर से दीदी की चूचियों को मुट्ठी में भर लिया और जोर से मसल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी.



सरिए di-aaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कक्क्क्कमीीिनीईईए. Oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyh टूउउउ नाहीईईई सुधारीयेगाआआआ. Uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. थोड़ा धीरे दबाआ नाआआआ.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को छोड़ दिया. जिससे दीदी ने अपनी आँखे खोल ली और पीछे मुड़कर मुझे देखा. जैसे कह रही हो की पीछे क्यों हैट गए और करो न. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- अब जो भी करूँगा तुम्हारे कमरे में hi करूँगा. मैं 1 हॉर्स बाद तुम्हारे कमरे में आ रहा हूँ तुम तैयार रहना.

इतना कहकर मैं अपने कमरे में चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

एक बार हमने जो सोचा था लिखने के लिए वही आपने comment में बोल दिया था, जिसके कारण मुझे कहानी को दूसरी तरफ़ मोड़ना पड़ा था।

लेकिन इस बार फिर आपने, जैसा मैंने सोचा था लिखने के लिए वैसा ही कमेंट कर दिया है।

कहीं हमारी जासूसी तो नहीं कर रहे हैं आप😊😊😊😊😊☺☺☺

लेकिन इस बार मैं बिल्कुल भी कहानी में फेर बदल नहीं करूंगी।

साथ बने रहिए। जो भी होगा सामने आएगा।
 
ये सब आप सब पाठकों के प्रेम और कहानी के प्रति लगाव का परिणाम है।

जब तक मेरे पास समय है और मैं घर से बाहर हूँ मैं नियमित रूप से लिखती रहूँगी।

क्योंकि घर जाने के बाद मैं शायद कहानी आगे न लिख पाऊँ। और यदि आगे लिखूँगी भी तो अपडेट नियमित नहीं रहेगा।

इसलिए जब तक नियमित लिख रही हूँ तब तक आनंद लीजिए। बाद की बाद में देखी जाएगी।
 
अपडेट-91

Didi ki baat sunkar maine didi ko chhod diya. jisase didi ne apni aankhe khol li aur pichhe mudkar mujhe dekha. jaise kah rahi ho ki pichhe kyo hat gaye aur karo na. maine didi ki aankho me dekhte huwe kaha.

Main- Ab jo bhi karunga tumhare kamre me hi karunga. Main 1 hours baad tumhare kamre me aa raha hoon tum taiyar rahna.

Itna kahkar main apne kamre me chala gaya.

अब आगे.

Apne kamre me aakar maine apna lower utarkar underwere utar diya aur fir se lower pahan li. upar se maine ek t-shirt dal li. aur kamre se nikal kar chhat par tahalne laga. 1 hours pura hone ke baad maine apne sharer par sent mara aur didi ke kamre ki taraf chal pada. Maine darwaze par nock kiya to darwaza halka sa khul gaya.

jab main darwaza kholkar andar gaya to didi ko dekhte hi mera land lower me khada ho gaya. ddi mere kahe anusar hi tiyar hui thi. unhone mera diya huwa gift pahna tha. jo transparants tha. jisme se didi ki chuchiya nangi dikh rahi thi. didi ne salike se apne baal sanware the aur use khula chhod rakha tha jo fan ki hawa ke sath lahra rahe the. Unhone apni aankho me maskhara lagaya hua tha jisase didi ki aankhe bahut sundar dikh rahi thi. Didi ke apne galo par halki si creem lagai thi jisase didi ke gal surkh dikh rahe the. Honto par laal rang ki lipistic aur nakhono me nail polish lagai hui thi. didi ki lipistic ka color aur nail polish ka color ek saman tha. didi apne dono hanth apne pet par rakhkar ek ada ke sath sharmate huwe mujhe dekhne lagi.



कुल मिलकर दीदी इतनी कमुख लग रही थी की जितना वो नंगी होने पर भी नहीं लगती थी. मैं बस एकटक दीदी के सौंदर्य को निहारे जा रहा था. दीदी को कामुक रूप को देखकर मैंने अपना हाँथ अपने खड़े लुंड पर रख दिया और उसे मसलने लगा. दीदी भी मुझे लुंड को मसलते हुवे देखने लगी. थोड़ी देर बाद दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. ऐसे क्यों देख रहा है. अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या मैं.

मैं दीदी की बात सुनकर अपना लुंड मसलते हुवे दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना लुंड दीदी की गांड में पेलकर कहा.

मैं- क्या बात कर रही हो दीदी. तुम इन कपड़ो में बहुत चुड़क्कड़ लग रही हो. मेरा मन तो कर रहा है की तुम्हे अभी पटक कर छोड़ दूँ.

सरिता दी- तू कितना कमीना है. अपनी दीदी से कितनी गन्दी गन्दी बाते करता है.

मैं- लो अब इसमें गन्दी बात कहा से आ गई. तुम लग hi ऐसी रही हो. यहाँ आओ और शीशे में देखो अपने आपको.

मैं दीदी को घुमाकर शीशे के सामने खड़ा कर दिया और उनसे कहा.

मैं- देखो सरिता अपने इस नायब हुस्न को देखो. जिसे ये मेरा गिफ्ट संभल नहीं प् रहा है. तुम्हारी चूचिया इसे फाड़कर बहार निकलना चाहती हैं.



इतना कहकर मैंने उनकी बगल से हाँथ आगे बढाकर दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा और अपने होंठो को दीदी की गार्डन पर रखकर किश करने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता ये बिस्टेर देख रही हो न. आज मैं तुम्हारे इसी बिस्टेर पर तुम्हारी नाथ उतरूंगा. और तुम्हे जन्नत की सैर कराऊंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली. तो मैं दीदी को पलटकर एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया. जिससे दीदी मेरी बहो में आ गयी और उनकी लगभग नंगी रसीली चूचिया सीधे आकर मेरी साइन से टकराई. तो हम दोनों के मुंह से aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh निकल गई. मेरी बहो में आकर दीदी शर्म से अपना सर निचे झुका लिया. मैंने दीदी की चिक हो पकड़कर उनका सर ऊपर किया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आंको में इस वक्त सिर्फ प्यास hi प्यास थी. कुछ देर उनकी आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है सरिता तुम नाराज़ हो क्या मुझसे.

दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता di-Hhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm.

मैं- कोई बायत नहीं सरिता मैं अभी तुम्हारी नाराज़गी दूर कर देता हूँ.

इतना कहकर मैंने दीदी के माथे को चूमा फिर दीदी की दोने सुरमयी आँखों को चूमा. मेरे होंठो के स्पर्श से दीदी sssssssssssssssssss sssssssssssssssssss करने लगी. फिर मैंने जीभ निकलकर दीदी के गलो को चाटने लगा. मने एक हाँथ से दीदी का सर पकड़ा और एक हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर उन्हें दबाने लगा. दीदी मस्ती में सिसकारियां भरने लगी. कुछ देर उनकी गाल चाटने के बाद मैंने अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी भी किश में मेरा साथ देने लगी. किश करते हुवे दीदी ने अपनी जीभ निकलकर मेरे मुंह में डालने लगी तो मैंने अपना मुंह खोल दिया और दीदी की जीभ को चूसने लगा. एक हाँथ से मैं दीदी की चूचिया बदल बदल कर दबाता रहा.

दीदी के मुंह का स्वाद बहुत टेस्टी था. थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी. दीदी मेरी जीभ चूसने लगी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा. कभी मैं अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल देता तो कभी दीदी मेरे मुंह में अपनी जीभ दाल देती. हम दोनों का मुंह एक दूसरे के थूक से सं गया था. 10 मिनट तक एक दूसरे का मुंह चूसने के बाद मैं दीदी के चेहरे को चाटने लगा और निचे की तरफ बढ़ने लगा.

मैंने अपने होंठ दीदी की चूचियों पर कपडे के ऊपर से रख दिया और किश करना लगा.



किश करते हुवे मैंने अपना हाँथ दीदी की गांड पर रखकर दबाने लगा. थोड़ी देर चूचियों को चूमने के बाद मैंने दीदी की चूचियों के निप्पल को किश करने लगा. दीदी भी माधोसी में मेरे बालो पर हाँथ फिरने लगी. मैं दीदी की निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगा और उनकी गांड को दबाने लगा. जिससे दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अभियई बॉस ऐसी हीई चूशस्सस मेरीए छुछियैआए बहुत मज़ा आ रहा हीी. खा जाए मेरिइइइ चूचियाआआ मेरे भाईईई.

जब मैंने दीदी की सिसकिया सुनी तो मैं और तेज़ तेज़ दीदी के निप्पल को चूसने लगा और दीदी की गांड दबाने लगा. थोड़ी देर तक निप्पल चूसने के बाद मैंने अपने दांतो से दीदी के निप्पल को पकड़कर दोनों हांथो में दीदी की गांड को भरकर पूरी ताकत से मसल दिया और उनके निप्पल को काट लिया. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइ. Kyaaaaaaaaaaa karrrrrrrrrr rahhaaaaaaaaaa hiaaaaaaaaaa . धीरीईई कररररर naaaaaaaaaaa. Uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyyyyy. Heeeeeeeeeeeyyyyyyyy बहुत्तत्ततत्तत डरडडडडडडडड होता हिअ.

मैं- सरिता रानी. तुम्हारा ये नशीला बदन धीरे धीरे खेलने के लिया नहीं है. इन्हे जितनी कसकर मसला और दबाया जाये. उतना hi तुमको मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने फिर से दीदी की दूसरी चुकी की घुंडी को मुंह में लिया जोर से दन्त गदा दिया और दोनों हांथो से उनकी गाड़ को पकड़कर जोर से मसल दिया. दीदी फिर चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuccccccccccchhhhhhhhhhhhh. Uuuuuuuuuuuuuiiiiiiii मममममिययययययय. धीरीईए कररररररर bhaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiii मुझेईई डरडडडडडडडड होताआआआ haaaaaiiiiiiiiii. Ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh.

दीदी की चीख सुनकर मैंने दीदी को छोड़ दिया तो दीदी मेरी तरफ देखने लगी. मैं दीदी की आँखों में देखा तो उनमे वासना के लाल डोरे तैर रहे थे. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी से कहा.

मैं- क्यों सरिता. तुम्हे अच्छा नाहीइ लग रहा है क्या.

सरिता दी- ऐसी बात नहीं है. लेकिन तू बहुत दर्द देता है. थोड़ा धीरे किया कर.

मैं- तुम चिंता क्यों करती हो. वैसे भी 2 दिनों तक घर में कोई नहीं है. अगर तुम्हे दर्द होता है तो तुम बिना किसी दर के चिल्ला सकती हो. क्योंकि मैं तुम्हारे ऊपर कोई रहम नहीं करूँगा. और मैं जनता हूँ की तुम्हारी प्यास मुझे कैसे बुझानी है. तो बस मेरा साथ दो और ज़िन्दगी के मज़े लो.

सरिता दी- मतलब मुझे मरने का इरादा है तेरा.

मैं- नहीं सरिता. मैं तुझे क्यों मरूंगा. मैं तो तुम्हारी मरूंगा. तो अब तुम भी एकदम बेशरम बैंकर मेरे साथ जवानी के मज़े लूटो.

मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी और आगे बढ़कर अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी.



दीदी बहुत hi वाइल्ड तरीके से किश कर रही थी. मेरे पुरे होंठ अपने मुंह में भरकर चूस रही थी. जैसे आज मेरे मुंह को खा hi जाएंगी. लगभर 5 मिनट तक चूसने के बाद दीदी ने अपनी जुबान मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैंने भी दीदी की जुबान को अपनी जुबान से ठेलकै बहार निकला और उनके मुंह में अपनी जुबान दाल दी. हम दोनों एक दूसरे के मुंह में बरी बरी अपनी जुबान डालकर चूसने लगे. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी t-shirt को पकड़कर ऊपर की तरफ सरकना शुरू कर दिया. और मेरी गार्डन तक लेकर आई. फिर अपना मुंह मेरे होंठो से हटाकर मेरी t-shirt को एक hi झटके में उतारकर जमीन पर फेंक दिया और फिर से मेरे होंठो पर टूट पड़ी.

थोड़ी देर तक मेरे होंठो को चूसने के बाद दीदी ने मेरे निचले होंठ को अपने दांतो में दबाकर काट लिया जिससे मेरे होंठो से खून निकलने लगा और मैं जोर से चीखा.

मैं- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मात्र. क्या करती ही साली. मेरे होंठ काट लिए री. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhn..

सरिता di-(hnaste हुवे) क्यों अभी मज़ा आया.

मैं- साली मेरे होंठ काटकर पूछ रही है की मज़ा आया.

सरिता दी- तुम भी मेरे साथ यही करते हो और पूछते हो मज़ा आया. अब पता चला की मुझे भी दर्द होता है.

इतना कहकर दीदी ने अपनी जुबान निकलकर मेरे होंठो से बैठे हुवे खून को चाट लिया और फिर से मेरे होंठो को चूसने लगी. साथ hi अपने हाँथ से मेरी पीठ को सहलाने लगी. मैंने भी दी के होंठ चूसते हुवे अपना हाथ दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिया और सहलाने लगा. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद दीदी मेरे चेहरे को चाटने लगी और निचे की तरफ आने लगी. दीदी मेरे गाल मेरी गार्डन मेरे कंधे को चाटने के बाद अपने होंठ मेरे साइन पर रख दिया और ताबड़तोड़ चुम्बन लेने लगी. साथ hi अपना एक हाँथ आगे लेकर मेरे निप्पल पर उंगलिया फिरने लगी. दीदी की इस हारकर से मेरे मुंह से sssssssssssss आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की आवाज़ निकलने लगी. दीदी ने अपनी गार्डन उठाकर मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.

सरिता दी- क्यों अभी मज़ा आ रहा है या नहीं.

मैं- बहुत मज़ा आ रहा है सरिता. तेरे होंठो में जादू है.

मेरी बात सुनकर दीदी फिर से मेरे एक निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगी और एक निप्पल को अपनी उंगलियों से सहलाने लगी. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद दीदी ने अपने दांतो और दो उंगलियों के बिच मेरे निप्पल को पकड़ा और जोर के दत्त काटकर निप्पल को मसल दिया. मेरे मुंह से चीख निकल गई.

Main-aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuccccccccccchhhhhhhhhhhhh. Oooooooooooohhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh सरिता मेरी जाएं लेने का इरादा हैईईई क्याआ सलीईई.

इतना कहकर मैंने दीदी को पलट दिया और पीछे से दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया और दीदी के खुले बालो को उनके कंडे से हटाकर एक तरफ किया और उनके कंडे पर अपना होठ रख दिया. फिर अपने हाँथ को आगे बढाकर दीदी की चूचियों के ऊपर से कपडे को पकड़कर एक झटका दिया. chaaaarrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr cccchhhhhhhhhhaaaaaaarrrrrrrrr की आवाज़ के साथ कपडा फटता चला गया. और दीदी की चूचिया उछलकर बहार आ गई. मैंने जल्दी से उसे दीदी के जिस्म से निकलकर जमीन पर फ़ेंक दिया. दीदी ने मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.



सरिता दी- ये क्या क्या अभी. मेरा गिफ्ट फाडड्ड दिया तूने.

मैं- सरिता तेरी इस मदमस्त और कातिल जवानी के लिए ऐसे हज़ारो गिफ्ट कुर्बान. मेरा बस चले तो मैं तेरे सरे कपडे जो तू अपने इस कातिल बदन पर रोज पहनती है. सब फाड् दालु.

अपनी तारीफ सुनकर दीदी शर्मा गई और अपनी नज़ारे झुका ली. थोड़ी देर बाद फिर मेरी आँखों में देखते हुवे दीदी ने कहा.

सरिता di-lekin इसे फाड़ने की क्या जरुरत थी. तू इसे उतर भी तो सकता था न.

मैं- मैं इसे उतर सकता था. लेकिन मैं इस कपडे को फाड़कर तुझे ये बताना चाहता था की बहुत जल्द मैं तेरी छूट और ये गद्देदार गांड अपने लुंड से इसी तरह फाड़ूंगा.

ये बात सुनकर दीदी बुरी तरह साम्रा गई और अपनी एक ऊँगली अपने मुंह में दाल ली. दीदी की इस ऐडा ने मेरे बदन में सनसनी दौड़ा दी. मैंने दीदी के कंधे को चूमते हुवे अपना हाँथ बढाकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और हल्का हल्का दबाने लगा और पीछे से अपने लुंड को दीदी की गांड पर धीरे धीरे धक्का देने लगा. दीदी ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और आंख बंद कर जवानी के इस खेल का मज़ा लेने लगी. मैंने दीदी को किश करते हुवे दीदी की चूचियों को मुठी में भरकर दबा दिया और अपने लुंड को प्रेशर से दीदी की गांड में पेल दिया. दीदी सिसक उठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii धीरीईई कारररररर मरीईईई भाईई.

Main(apne मुंह उनके कण के पास लेजाकर) तुमको अच्छा लग रहा है सरिता.

सरिता दी- हां अभी. तू ऐसे hi मुझे प्यार करता रह.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की चूचिया दबाते हुवे उनके कंधे से होंठ हटाकर दीदी की पीठ पर रख दिए और उनकी पीठ को चाटने और चूमने लगा.



मेरी इस हरकत से दीदी का शरीर गंगना गया और उनके मुंह से ssssssssssssssssssssss आआआआअह्हह्ह्ह्हह ाभीईई की आवाज़ निकल गई. मैंने दीदी की पीठ को चाट चाट कर अपने थूक से पूरा गिला कर दिया. कुछ देर उनकी पीठ को चाटने के बाद मैंने उनकी पीठ कमर के पास अपने दांतो से पकड़ा और दोनों चूचियों के निप्पल को ऊँगली और अंगूठे में फसकर मसल दिया और और उनकी कमर को काट लिया. दीदी हवस और दर्द से चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuucccccccchhhhhhhhhh. Uuuuuuuuuiiiiiiiiiiii माँ क्याआ कर्ताआ हैईईई abhiiiiiiiiiiii. Mujheeeeeeeeeee डरडडडडडडड होताआआआ हैईईईई. कुछःह तू राहाम्म्म करररररररर बहनणनननन हूंणंन्न मैंनंन्न टेरिइइइइइइइइ.

इतना बोलकर दीदी ने अपने आपको मुझसे छुड़ा लिया और घूमकर मेरे पीछे आ गई और मुझसे सत्कार कड़ी हो गई. जिससे दीदी की बड़ी बड़ी चूचिया मेरी पीठ पर धस गई. मेरे मुंह से sssssssssss निकल गया. दीदी मेरी नंगी पीठ पर अपनी चूचिया जोर जोर से मसल रही थी और oooooooooooooohhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhh sssssssssssssssssss की आवाज़ कर रही थी. मेरी भी हालत ख़राब हो रही थी. दीदी ऐसे hi बहुत देर तक अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ती रही और आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aaaahhhhhhhhhhhhh करती रही.

थोड़ी देर बाअद मुझे मेरे लुंड पर कुछ महसूस हुवा जब मैंने निचे देखा तो दीदी अपनी चूचिया मेरे पीठ पर रगड़ती हुई मेरे लैंड को पकड़ने की कोशिश कर रही थी और कुछ देर बाद मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ कर दबा दिया. मैंने दीदी को तरफ मुंह करके उनकी आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और दीदी मेरे होंठ चूसने लगी. मैं तो जैसे आसमान में उड़ने लगा. एक तरफ दीदी मेरे होंठ चूसते हुवे मेरी पीठ पर अपनी चूचिया रगड़ रही थी. और दूसरी तरफ दीदी ने मेरे लुंड को भी पकड़ कर दबा रही थी. मैं तो बस ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh sssssssssssss करता रहा. तोड़ी देर बाद मैंने दीदी का हाँथ पकड़ कर अपने सामने किया तो मैंने देखा की दीदी की चूचिया एकदम लाल हो गई थी. दीदी की सांसे माधोसी के कारन तेज़ तेज़ चल रही थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.



मैं- तुम तो कमल की हो सरिता. बहुत मज़ा दिया है तुमने. चलो अब मैं तुम्हे जन्नत की सैर करता हूँ.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-92

इतना बोलकर मैंने दीदी को धक्का देखर बिस्तर पर लिटा दिया. और कमर तक बिस्तर के बहार खींच लिया. और उनकी टांड फैलाकर उनकी छूट के पास बैठ गया और अपनी नक् उनकी छूट के पास पैंटी के ऊपर लेजाकर एक जोर की साँस अंदर खींची और दीदी से कहा.

मैं- वह सरिता. क्या सुगंध है तुम्हारे छूट की. जब इसकी महक hi इतनी बढ़िया है तो छूट भी बहुत स्वादिस्ट होगी

मेयर बात सुनकर दीदी शर्माने लगी तो मैंने निचे झुककर दीदी की छूट को पंतय के ऊपर से hi चुम लिया जिससे दीदी की मुंह से ssssssssssssssssssssssss सिसकारी निकल गई. फिर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपनी उंगलिया उनकी पंतय में फसे और धीरे धीरे खींचकर पंतय उतरने लगा. दीदी ने हाँथ बढाकर मेरे हाँथ को पकड़ लिया और गार्डन न में हिलने लगी, लेकिन उनके हांथो में कोई पकड़ नहीं थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनकी पंतय उतारकर निचे फेंक दी और उनकी छूट को देखने लगा. दीदी की छूट के दोनों लिप्स आपस में जुड़े हुवे थे. और बहुत प्यारे लग रहे थे. मुझे अपनी छूट को देखते पाकर दीदी ने शर्माकर मुझसे पूछा.

सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है. जैसे पहली बार देखा हो.

मैं- सच में सरिता तुम्हारी छूट है hi ऐसी. जितनी बात देखता हूँ मन करता है बस देखता जाऊ. एकदम कासी हुई छूट है तुम्हारी.

सरिता di(sharmakar)- इसकी कसावट आखिरी बार देख लो. आज के बाद इसकी सकल बिगड़ जाएगी.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) तुम सही कह रही हो सरिता. आज मैं तुम्हे छोड़कर तुम्हारी छूट की शकल बिगड़ डोंगा. लेकिन एक बात है. तुम्हारी छूट की शकल बिगड़ जाएगी लेकिन इसकी कसावट में कोई कमी नहीं आएगी.

सरिता di-(madhosi से)- क्यों. तेरा इतना बड़ा मुसल जब इसके अंदर जाएगा तो इसको फाड़ कर रख देखा. और ये फैट जाने के बाद ढीली हो जाएगी.

मैं- नहीं सरिता. जो औरत छुडासी होती है उसकी छूट स्पंज की तरह होती है. उसमे चाहे मुसल hi दाल दो. मुसल निकलने के बाद वह फिर से उसी तरह हो जाती है, लेकिन तू तो बहुत ज्यादा छुडासी है. तो तेरी छूट का तो हांथी का लुंड भी कुछ नहीं बिगड़ सकता.

मेरी बात सुनकर सरिता दी बहुत बुरी तरह शर्मा गई और कमर के सहारे उठकर मुझे मरने लगी. मैं बस हांसे जा रहा था. थोड़ी देर मरने के बाद दीदी फिर लेट गई और मुझसे कहा.

सरिता दी- तू बहुत गन्दा है अभी. मुझसे ऐसे गन्दी गन्दी बाते कर रहा है. मैं बहन हूँ तेरी. कुछ से इज़्ज़त कर मेरी.

मैं- तुम बहन के साथ साथ एक छुडासी औरत और मेरी चुड़क्कड़ा मॉल हो. और आज मैं अपनी बहन की इज्जत लूटूँगा. बोलो सरिता. तुम मुझसे अपनी इज़्ज़त लुटवाना चाहती हो या मैं जाओ अपने कमरे में.

मेरी बात सुनकर दीदी मेरी आँखों में देखने लगी. इस समय दीदी की आँखे बहुत नशीली हो गाइट hi. उनके होंठ सुख गए थे. मेरी इतनी गन्दी गन्दी बात सुनकर hi उनकी छूट पानी बहाने लगी थी. मैंने हाँथ बढाकर दीदी की छूट पर रख दिया और सहलाने लगा. दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.

सरिता दी- नहीं भाई तू मुझे ऐसे प्यासा छोड़कर मत जा. मैं तुझसे अपनी इज़्ज़त लुटवाना चाहती हूँ. लूट ले मेरी इज़्ज़त और बना ले मुझे अपना हमेशा के लिए.

इतना बोलकर दीदी ने हाँथ बढाकर मेरे सर को पकड़ा और उसे अपनी छूट के ऊपर दबाने लगी. मैं दीदी का इशारा समझ गया और अपना होंठ दीदी की छूट पर रख दिया और चूमने लगा. मेरे होंठो के स्पर्श से दीदी का शरीर कम्प गया और दीदी की सिसकी निकल गई.

सरिता दी- AAAAAAAAAAAAAaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरे bhaaiiiiiiiiii. चुस्स्स लिए इसी.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की छूट को जोर जोर से चूसने लगा और हाँथ ऊपर बढाकर दीदी की दोनों चूचियों को भी दबाने लगा. दीदी बस aaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiii ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई करती रही. थोड़ी देर तक दीदी की छूट चाटने ने बाद मैंने अपनी जीभ दीदी की छूट में दाल दी और अपनी जीभ से दीदी की छूट छोड़ने लगा और अपने हांथो से दीदी की चूचियों को दबाता रहा. छूट छोड़ते छोड़ते मैंने दीदी की छूट को अपने मुंह में भर कर जोर जोर से चूसने लगा और दीदी की चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा. सरिता दीदी सिसकिया लेकर बोलने लगी.

सरिता दी- aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. और चूशस्सस मेरिइइइइइइ चूठ्टटटट कोऊ. कहा जाआ ीसीईए. बहुउउत्तत्त पारेस्सलसहाननं करटीईईई है ये टीएडीइइइइइइ डीडीइइइइइइ को. ऑरररररर जोरररर सी दाबआ मेरिइइइइइइइ चूचियोओओओओ को. इन्हीबीएई बहुतत्त घामंडडडडड हैईईईई अपनीई क्काआतुरताआ पररर. निछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई inkoooooooooo. ढीला कररर दिए इससे दबा दबाए कर.

मैं दीदी की छूट से अपना मुंह हटाकर दीदी की चूचियों को और जोर जोर से दबाकर दीदी की नशीली आँखों में देखते हुवे बोलै.

मैं- हआ सरिता तुम बिलकुल भी चिंता मत कारु. आज मैं तुम्हारी चूचियों को मसल मसल कर इसका सारा राष्ठ्हह निचोड़ लूंगा. बहुत परेशां किया है इसने मुझे. तेरी छूट को भी आज चूस चूस कर उसका सारा रास पि जाऊंगा मेरी रानी.

इतना कहकर मैंने फिर से अपने मुंह में दीदी की छूट को भर लिया और उसे निचोड़ निचोड़ कर चूसने लगा. थोड़ी देर तक दीदी की छूट को चूसने के बाद मैंने दीदी की चूचियों के दोनों हथेली में भरकर डैम लगाकर मसल दिया और छूट को मुंह में भरकर आगे की तरफ खींचकर चूड दिया. दीदी लज्जत से सिसक पड़ी.

सरिता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAAaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiiii बास्स्स्सस्स्स्स आईसीएएएएए होई चुसोऊ मेरिइइइइइइइ छूट कोऊ. थोड़ाए धीयड़ी daabaaaaaaaaoooooooooo मेरिइइइ चूचियों को bhaaiiiiiiiiii. Oooooooooooooooooaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh . बहुत मज़ाआ आए रहा है.

दीदी की बात सुनकर मैंने एक हाँथ उनकी चूचियों से हटाकर उनकी छूट पर रख दिया और उनकी क्लीट को मसलने लगा. एकक हाँथ से दीदी की चुकी को दबाकर दीदी की छूट चाटने लगा. दीदी अपने शरीर को बिस्टेर पर रगड़ने लगी. दीदी एकदम गरम हो गई थी. थोड़ी देर उनकी क्लीट सहलाने के बाद मैंने अपनी ऊँगली दीदी की छूट में डालने लगा. दीदी को शायद हल्का हल्का दर्द हो रहा था इसलिए वो अपना बदन ैठने लगी. तो मैंने एक झटके में अपनी बिच वाली ऊँगली दीदी की छूट में पेल दी और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. दीदी के मुंह से मादक सिसकारी aaaaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह sssssssssssss ाभीईई निकलने लगी.

छूट में ऊँगली करते हुवे मैं दीदी की क्लीट को चाटने लगा और एक हाँथ से दीदी की चुकी बदल बदलकर जोर जोर से मसलने लगा. कुछ देर बाद मैंने दीदी की चुकी को हंट में भरकर, उनकी छूट से ऊँगली थोड़ा बहार निकलकर और क्लीट को अपने मुंह में भर लिया. फिर चुकी को जोर से दबाया, ऊँगली एक झटके में छूट में पेल दी और क्लीट को हल्का सा बाईट किया. मेरे इस 3 तफ़ा हमले से दीदी के मुंह से वासना युक्त चीख निकल गई.

सरिता दी- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययी aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh क्याआआआ कर रहहाआ हैईईईई सलीईई. मेरिइइइइइ जाननननननन लेनेईई कहा इरादा हैईईई क्या. थोड़ड्डड्डड्ड धीरीईई कर भाईईईईई. थोड़ड्डाआंआ प्याआर सीई कारररररररर. मेंनननननन कहियी भागीयी नाहीइ जा राहीईई हूणंण. Ooooooohhhhhhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhhhhh meriiiiiiiiii चूठ्टटटट मई कुछहहह होओओओ राहाआआ हैईईईई भाईईई aaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh.

दीदी की बात सुनकर लगा की वो अब झड़ने वाली हैं तो मैंने अपनी ऊँगली की स्पीड तेज़ कर दी और दीदी की चुकी दबाते हुवे उनकी क्लीट को जोर जोर से चूसने लगा. थोड़ी hi देर में दीदी का बदन ऐठने लगा. वो कमान की तरह तन गई और अंत संत बकने लगी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मेंनननननन gaiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiii मेंनननननन gaaiiiiiiiiiiiii. मेरिइइइइ छूठ मीटीए चीईटीया रेंगगग रहियी हैईईई. और जुर्ररर सी चुसस्स सल्ल्ल्ली. मेंनननन उड्डड्डड़ रहीी होऊणन ैसाआ माज़्ज़्ज़्ज़्ज़ाए मुझीऐ काभीई नाहीई मिल्ल्ल्लआआआ ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ भाईईईईई. टूउउ बहुउत्तत्ततत्तत्त अछ्हीईई छुट्ट्ट्ट चुसस्ताआआ हीी सआईईईई. खायआ जाआ मेरिइइइ चुउत्त्तकोऊ. Ooooooooohhhhhhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh कुछहहहहह काररररररररर सआईईईई मेंननननननन गिररररररररर रहीइइइइइइइइ होऊणननननननन सँभाललललललल लिए मुझीीीी मदारचूडड़ड़. मेंनननननन गईइइइइइइइ aoooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh मेररररररे भाईईईई.

इतना कहकर दीदी के भलभला कर पानी छोड़ दिया और बेसुध होकक बिस्टेर पर पड़ी रही मैं दीदी की छूट का सारा पानी पि गया. मैं दीदी की छूट को अभी भी चूस रहा था. छूट के पानी से मेरा पूरा चेहरा सं गया था. मैं अपना चेहरा उठाकर दीदी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. मैं दीदी को देखते हुवे ऊपर गया और दीदी के होंठो पर अपना होंठ रख दिया.



लगभग 2 मिनट दीदी के होंठ चूसने के बाद मैं दीदी से अलग हुवा और उन्हें उठाकर जमीन में बैठा दिया और दीदी के पास खड़ा होकर उनसे कहा.

मैं- अब तुम्हारी बरी है मुझे खुश करने के. मेरा लोअर उतरो और इसे मुंह में लेकर चुसो.

सरिता दी- लेकिन मैं कैसे. एक तो ये गन्दा होता है और ऊपर से मुझे कोई एक्सपीरियंस नहीं है.

मैं- चुदाई के समय कुछ भी गन्दा नहीं होता. और अगर तुम इसको खुस करोगी तभी तो ये तुम्हारी प्यास बुझाएगा. तुमने लॉलीपॉप चूसा है न बस इसको भी उसी तरह मुंह में लेकर चूसना है.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी लोअर में ऊँगली फसे और निचे करने लगी. मेरा लैंड तो पहले से hi खड़ा था. जैसे hi लुंड लोअर से बहार निकला वह सीधे दीदी की घुद्धि से तरककर उनकी आँखों के सामने लहराने लगा. दीदी कभी मेरे लुंड को देखती तो कभी मेरी आँखों में देखती. फिर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. दीदी का हाँथ मेरे लुंड पर महसूस करके मेरे मुंह से सिसीकी sssssssssssssssssssss निकल गई. थोड़ी देर जब दीदी मेरा लुंड सहलाती रही तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- इसे मुंह में लेकर प्यार करो सरिता रानी.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और लुंड चाटने लगी. दीदी की जीभ मेरे लुंड पर लगते hi मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई.



मेरा हाँथ अनायाश hi दीदी के सर पर चला गया और मैं दीदी के बालो को सहलाने लगा. थोड़ी देर मेरे लुंड को चैहटन के बाद दीदी ने अपना मुंह खोदा और शूपदे को मुंह में भरकर चुम लिया जिससे पपूउउउछहः की आवाज़ आई. दीदी ने ऐसे कई बार किया वो सुपडे को मुंह में भरकर पुछठ पूछह की आवाज़ निकल कर सुपडे को चूमती और छोड़ देती. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- कैसा लग रहा है सरिता तुमको अपने भाई का लुंड

सरिता दी- बहुत बड़ा है अभी. इसे मैं कैसे ले पाऊँगी अंदर.

मैं- औरतो की छूट बहुत गहरी होती है. मेरे लुंड का दो गुना मोटा और लम्बा लुंड भी तुम्हारी छूट में चला जायेगा सरिता रानी. लेकिन उसके पहले मेरे लुंड को चूसकर गिला तो करो. ताकि तुमको इसे अंडाल लेने में परेशानी न हो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में अपनी नशीली आँखों से देखते हुवे अपना मुंह खोला और मेरे लुंड को 2”अपने मुंह में ले लिया. मेरी तो आनंद से आँखे hi बंद हो गयी और मैं दीदी के सर को सहलाने लगा. दीदी मेरे 2”लुंड को चूसने लगी मैंने दीदी को और लैंड अंदर लेने के लिए कहा. दीदी ने कोशिश करके और लुंड अंदर ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. दीदी लैंड को टोपे तक अपने मुंह से बहार निकलती और फिर लुंड को अंदर ले लेती. मैं दीदी को उत्साहित करते हुवे कहा.

मैं- वह सरिता क्या लुंड चुस्ती हो तुम. तुम बहुत अचे से मेरा लुंड चूस रही हो. लग hi नहीं रहा है की तुम पहली बार लुंड चूस रही हो. कहा से सीखा ये लुंड चूसना सरिता.

दीदी मेरा लुंड अपने मुंह से निकल कर बोली.

सरिता दी- जाने दे न. मैं पहली बार hi लुंड चूस रही हूँ. वो भी अपने भाई का मोटा लुंड.

मैं- लेकिन तुम किसी एक्सपर्ट की तरह लुंड चूस रही हो. सच बताओ कहाँ से सीखा लुंड चूसना.

सरिता दी- कहानिया और पोर्न वीडियो देखकर सीखा.

मैं- बहुत अच्छा किया की तुमने पोर्न वीडियो देखकर ये सिख लिया. जो आज मेरे काम आ रहा है. चलो अब टाइम वेस्ट मत करो और मेरा लुंड चुसो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने फिर से मेरा लुंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी.. थोड़ी देर धीरे धीरे चूसने के बाद दीदी ने लुंड चूसने की स्पीड बढ़ा दी. मुझे लुंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. और मैं चाहता था की दीदी मेरा पूरा लुंड मुंह में ले ले. लेकिन दीदी उतना hi लैंड मुंह में ले कर चूस रही थी. तो मैंने अपना हाँथ दीदी के सर पर रखा और अपने लैंड पर दबाने लगा. जिससे मेरा लुंड दीदी के मुंह में घुसने लगा. जैसे जैसे मेरा लुंड दीदी के मुंह में घुस रहा था वैसे वैसे दीदी की आँखे बड़ी होती जा रही थी. दीदी के चेहरे पर दर्द बढ़ने लगा था. ये देखकर मैंने दीदी के सर को मजबूती से पकड़कर अपनी कमर को एक धक्का देखर लुंड दीदी के मुंह में पेल दिया.



जिससे दीदी की आँखे बहार आ गई और उनकी आँखों में आंसू आ गए. दीदी मेरी जांघो पर हाँथ मरने लगी तो मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह से बहार निकल लिया. लुंड निकलते hi दीदी खांसने लगी और मुझसे बोली.

सरिता दी- kkkhhhhhhooooooooooo ख्ह्ह्हूऊऊऊ. ये क्या कर रहा है तू. मेरी जान लेगा क्या. मैं चूस तो रही हूँ तो फिर ऐसा करने की क्या जरुरत थी.

मैं- तुम्हारा मुंह इतना गरम है सरिता की मेरा लुंड बोल रहा है की मैं इसके मुंह में पूरा जाऊंगा. इसलिए मैंने पूरा लुंड तुम्हारे मुंह में पेल दिया.

सरिता दी( शर्मा कर फिर मुस्कुराकर). चाहे मैं मर hi जॉन.

मैं (अपना लुंड दीदी के मुंह में डालते हुवे). लुंड लेने से आज तक कोई लड़की नहीं मरी तो तुम कैसे मर जाती.

दीदी मेरे लुंड को फिर से चूसने लगी. जोर जोर से चूसने लगी. मैंने फिर से दीदी का सर पकड़कर अपना लुंड दीदी के मुंह में धीरे धीरे धक्का लगते हुवे पेलने लगा. दीदी के मुंह से गगगगगगूउऊउउउउउ गगगगगगुणु की आवाज़ निकलने लगी. मुझपर अब ठरक पूरी तरह हावी हो चुकी थी इसलिए मैंने थोड़ी देर दीदी के मुंह को धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने दीदी के सर को मजबूती से पकड़कर तेज़ तेज़ लुंड अंदर बहार करने लगा. दीदी अपना सर पीछे की तरफ करने लगी लेकिन मैंने दीदी के सर को नहीं छोड़ा और जोर जोर से लुंड उनके मुंह में पेलता रहा. थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गई और लुंड को मुंह में लेने लगी तो मैंने अपनी कमर को पीछे कर लुंड टोपे तक मुंह से बहार निकला और एक झटके में पूरा लुंड उनके मुंह में पेल लिया. जो जाकर दीदी की हलक से टकराया. दीदी की आँख बहार आ गई और आँखों से आंसू निकलकर गलो पर बहने लगे. मैं लुंड उनके हलक में रखते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- ले साली मेरा लुंड. बहुत भूखी है न तू लुंड के लिए. तो चूस मेरा लुंड और भुझे ले अपनी प्यास. तेरा मुंह बहुत गरम है साली. मेरा लुंड पिघला जा रहा है. चूस मेरा लौड़ा सरिता. तेरे मुंह में जन्नत है रानी. ले चूस और निचोड़ ले मेरे लुंड को.

थोड़ी देर मैं अपने लुंड को दीदी की हलक में रखने के बाद जब उनकी साँस रुकने लगी तो मैंने लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया. लुंड निकलने पर दीदी की थोक का एक रेशा मेरे लुंड से दीदी के मुंह तक बना हुवा था. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और जब उनकी सांसे दुरुस्त हुई तो वो बोली.

सरिता दी- जान लेने का इरादा है क्या सेल. तू एकदम जानवर है. तुझे मेरी तनिकक भी परवाह नहीं चाहे मैं मर hi क्यों न जाओ.

दीदी की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी की मैंने फिर से दीदी का सर पकड़कर अपना लुंड दीदी के मुंह जब तक उतर दिया दीदी के आँखों से फिर से आंसू बहने लगे. 10 सेकंड तक लुंड अंदर रखने के बाद मैंने टोपे तक लुंड बहार खींचा और जब दीदी की साँस फिर संभल गई तो मैंने फिर से पूरा लुंड उनके मुंह में पेल दिया और 10 सेकंड तक रखने के बाद फिर वापस खींच लिया. ऐसा मैंने 10 मिनट तक लगातार किया. मुझे मालूम था की दीदी को दर्द हो रहा होगा लेकिन मैं अपनी धुन में दीदी का मिन्ह पेलता रहा. और बड़बड़ाता रहा.



मैं- ले साली और ले बहुत छुडासी है न तू. आज तेरी साडी छुडास मिटा दूंगा. तेरा मुंह बहुत गरम है साली तारा मुंह भी बहुत छुडासा है. तू बहुत बड़ी चुड़क्कड़ा है जो अपने भाई से hi छुड़वाने के लिए तड़प रही है. ले साली और ले मेरा लुंड अपने इस गरम मुंह में. चूस साली मेरा लुंड निचोड़ ले इसे और पि जा मेरे अमृत को. Aaaahhhhhhhhhh आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.......

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
इस कहानी में अब कोई पुरुष पात्र नहीं जोड़ सकती हूँ।

जोड़ने को तो कई पुरुष पात्र को जोड़ ले, लेकिन फिर कहानी पूरी नहीं कर पाएँगे तो आप सब के ही द्वारा कहाँ मर गई, कहानी छोड़कर भाग गई और न जाने क्या क्या सुनने को मिलेंगे। इसलिए इस कहानी को पूरा होने दीजिए। अगर सब सही रहा और मैंने दूसरी कहानी लिखी तो आपकी फरमाइश जरूर पूरा करूँगी।
 
अपडेट-93

Main- le Sali aur le bahut chudasi hai na tu. Aaj teri sari chudas mita dunga. Tera munh bahut garam hai SALI tara munh bhi bahut chudasa hai. tu bahut badi chudakkada hai jo apne bhai se hi chudwane ke liye tadap rahi hai. le Sali aur le mera lund apne is garam munh me. Chus Sali mera lund nichod le ise aur pi ja mere amrit ko. Aaaahhhhhhhhhh aahhhhhhhhh

अब आगे.

Mere itni buri tarah se munh chodne se didi ka chehra ekdam lal ho gaya tha. baal puri tarah bikhar gaya tha. aankho ka kajal bahkar unke galo tak aa gaya tha. didi ka pura chehra thok se naha huwa tha. unke munh se thook bahkar unki chuchiyo par gir raha tha. main kisi randi ki tarah didi ka munh chod raha tha. main bhi aab jhadne ke bahut kareeb tha to maine apni speed badha di aur puri takat se didi ka munh chodte huwe ant sant bakte huwe unke munh me hi jhad gaya.

Main- Aaaahhhhhhhhhhhh Saaaalllllllliiiiiiiiiiiii randdddddiiiiiii mainnnn gaayyyyyyyyyyyaaa. Leeee meraaaa lundddddd aur chusssss. Tereeeee munh mee jaduu haiiiiiiiii. Tereeeeee harr ang meeee jaduuuu hiaiiiiiiii aur jor se chussss randiiiiii. Main aane wala hooon pi ja mereeeeeee lund se nikallllle huwe amritt ko. Tuuu jannnttt kiiii hooor haiiiii saritttaaaa. Aurrr teeraa munhh jannaaat haiiiiiii maiii gayaaaaaaa. Main jhaaaaadddddddd gayaaaaaaaa Saritaaaaaaaaaa aaaaaaaaaahhhhhh ohhhhhhhhhhhhhn.

Itna kahkar main didi ke munh me jhad gaya aur apna lund didi ke munh se nikal liyaaa. Lund nikalte hi mere bacha huwa virya didi ne jameen par thook diya aur lambi lambi sanse lene lagi. main bhi apna lund unke munh se nikalkar dhadam se wahi rakhi kursi par baith gaya. thodi der baad jab didi ki sanse durust ho gai to unhone gusse se mujhse kaha.

Sarita di- tu sach me janwar hai. tujhe mere upar bilkul bhi taras nahi aata. Itni buri tarah se kiya hai ki mera munh dard karne laga hai. tu jallad hai ekdam.

Didi ki baae sukar main didi ke paas gaya aur unhe uthakar bed par baithaya aur unki nashili aankhe jinme aanshu bhare huwe the unme dekhte huwe didi se kaha.

Main- main kya karu sarita tere is gadraye huye jism ko dekhkar main bekabu ho jata hoon. teri in jalim chuchiyon aur teri katil gand me mere jism me aag laga rakhi hai. inhe dekhne ke baad main khud me nahi rahta. Lekin ek baat to manni padegi. Tera munh bhi teri chut se kam nahi hai. tere munh me bhi bahut aag hai Sarita.

Apni gandi tareef sunkar didi muskurane lagi. maine apne honth badhakar didi ke hontho par rakh diye aur unhe chusne laga. didi bhi mera sath dene lagi. honth chuste huwe maine didi ka hanth pakadkar apne lund par rakh diya. didi mere lund ko sahlane lagi. maine apna ek hanth didi ki chuchi par rakh diya aur unko dabane laga. didi fir se garam hone lagi. mere lund ko jhade huwe 15 minute bit chuke the to mera lund bhi didi ke sahlane se khada hone laga. kuchh der tak honth chusne aur chuchi dabane ke baad maine didi ko bister par leta diya aur unke sir ko kheechkar bed ke kinare par latka diya aur apne lund ko didi ke munh par marne laga.

didi mera ishara samajh gai aur apne jeebh nikalkar mera lund chatne lagi. main oohhhhhhh sariiiiiiiitaaaaaaa aaahhhhhhhhh saritaaaaa karne laga. thodi der lund chatne ke baad didi ne lund ko tope ko munh me bhar liya aur puchchhhhh pucchhhhhh ki aawaz nikalkar use chusne aur chhodne lagi. thodi der kewal supada chusne ke baad didi ne apna munh khola aur jitna lund andar le sakti thi lekar use andar bahar karne lagi. meri to aanand ki koi sima nahi rahi. main bas ooooooooooohhhhhhhhhh aaahhhhhhhhhhhhh karta didi ke munh ko halka halka dhakka marker pelta raha. jab mujhse bardast nahi huwa to maine apna ek panv uthakar bed par rakh aur ek jhatke me didi ke munh me apna lund pel diya.



मेरा लुंड पूरा मुंह में घुसने से दीदी के शरीर ऐंठ गया. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. मैं उसकी परवाह किये बगैर दीदी के मुंह को ताबड़ तोड़ पेलने लगा. दीदी की आँखों से आंसू बहले लगे. थोड़ी देर मुंह जोर जोर से पेलने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया और दीदी को उठाकर बीएड पर सीधा लिटा दिया और उनकी टैंगो के बिच बैठ गया. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.

सरिता दी- अभी तू इतनी जोर जोर से क्यों करता है. थोड़ा धीरे किया कर मैं कही भागी थोड़ी hi जा रही हूँ.

मैं- मुझे धीरे धीरे करने में मज़ा नहीं आता. और तुम्हे बिना चोदे मैं कही जाने hi नहीं दूंगा. आज जब तुम इस कमरे से बहार जाओगी तो तुम काली से फूल बन कर hi जाओगी.

दीदी से इतना कहकर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी के पांव की उंगलियों को अपने मुंह में बाहर लिया और चूसने लगा. दीदी बस मेरी आँखों में hi देखे जा रही थी. इसी तरह मैंने दीदी को सभी उंगलियों को चूसते हुवे दीदी के पैरो को चाटने लगा. दीदी के पैरो को चाटता हुवा मैं ऊपर की तरफ आने लगा और उनकी जांघो तक पहुंचकर मैंने अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और चाटने लगा. मेरा मुंह छूट पर रखते hi दीदी आआआआअह्हह्ह्ह्हह ाभीईई बोल पड़ी. मैं दीदी की छूट को जोर जोर से चूसने लगा. अब एकदम बेकाबू होती जा रही थी. उन्होंने हाँथ बढाकर मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबा लिया और मेरे बालो पर अपनी उंगलिया चलने लगी.

मैंने दीदी की छूट को चाटते हुवे अपने दोनों हांथो से दीदी की दोनों चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा. जिससे दीदी आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह aaaahhhhhhhhhhh अभीयी करने लगी. थोड़ी देर दीदी की चूचिया दबाने के बाद मैंने अपना एक हाँथ दीदी की चुकी से हटाकर उनकी छूट पर रख दिया और 5 थप्पड़ जोर जोर से दीदी की छूट पर लगा दिए दीदी एकदम मचल गई और अपने शरीर को ैठने लगी और बोली.

सरिता दी- aaaahhhhhhhhhhhhhh Abbbhhhhhhhiiiiiiiiii ooooooooooohhhhhhhhhhhh मेरी भाईईई ककयाआआ कार्त्तता हैईईई. Ooooooooohhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं दीदी की बात सुनकर उनकी छूट पर 3 तप्पड़ और मर दिया और उनकी चुकी को दबाते हुवे उनकी छूट को चाटने लगा. फिर मैंने एक ऊँगली दीदी की छूट में दाल दी और अंदर बहार करने लगा. अब दीदी एकदम छुडासी हो गई. इसलिए दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii मरीईईई bhaaiiiiiiiiii. अब मुझ्सीईई बरदायत्ततत्तत नाहीईईई होओओओओ राहाआआआ haiiiiiiiiii बुझाआआआ डीएई मेररररीईईई पयास्सस्स्स्स मरीईई bhaiiiiiiiiii.

मैं दीदी की बात सुनकर खुस हो गया की अब दीदी छुड़वाने के लिए एकदम तैयार हैं, लेकिन मैं दीदी को थोड़ा और तड़पना चाहता था इसलिए मैंने दीदी की छूट से अपनी ऊँगली निकल ली और एक हाँथ से दीदी की चुकी और एक हंट से दीदी की छूट सहलाते हुवे कहा.

मैं- रुको सरिता मैं अभी पानी लेकर आता हूँ. और तुम्हारी प्यास बुझाता हूँ.

सरिता दी- नाहीइइइइइइ abhiiiiiiiiiiii मुझेईई पनीईई नाहीइइइइइइइ चहियीईइ. तू दाआललललललल डीएई अपनीई मरीईईई अंडरररररररर और मेरिइइइइइइइइ पयास्सस्सस्स भुझायआ दी.

मैं- (दीदी की छूट सहलाते हुवे)- क्या दाल दू सरिता और कहाँ दालुउउउउउ.

सरिता di-Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii मेरिइइइइइइइइ जानननननननन अब्बब्बब्बब्ब ऑरररररर नाहा tadpaaaaaooooooooooooo पपपपपपपपपललललललजजज़्ज़्ज़्ज़्ज़ अब्बब्बबबबबब दाहाआलललललल ddddddooooooooooo ाण्ड्डड्डड्डड्डड़रररररररर aurrrrrrrrrr meriiiiiiiiii पयास्सस्स्स्स bujhhhhhhhhhhaaaa दू.

मैं- वहीइ तो मैं पूछ रहा हूँ की क्या दालु और कहाँ दालु सरिता (छूट को सहलाते हुवे).

सरिता दी- Aaaaaaaaaahhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii टूउऊउउउउउ apnaaaaaaaaaa मेरिइइइ चूठ्टटटटट मीटीई daaaaaalllllllllll कररररररररर meriiiiiiiiiiiiii प्याआआआआ बुझाआआआ डीई bhaaaaaaiiiiiiiiiiiii. अब्बब्बब मुझेईईईई बारररररदास्त्टटटट नाहीइइइइइइ हूँ राहाआआआआ हैईईईई.

मैं- ( चुकी को दबाते huwe).wo तो ठीक है सरिता, लेकिन क्या डालकर और किश चीज़ से तुम्हारी प्यास बुझाउ. पानी लउउउउ.

सरिता di-aaaaaaaaahhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhh मीररररीीीे यारी जानननननननन मेरी भाईईईई. अपनाआ लुँड्ढड्डड़ मेरिइइइइइइ चूऊउउउत्तत्त मेई डालललललकारररररररर मुझेईईई हचककककक हचककककककक कररररररर छोड़ूऊऊऊओ ऑररररर मेरिइइइइइइइ प्याजसससस बुझाआआआ दोओओओ aaaahhhhhhhhhhhhh oooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरीए bhaaiiiiiiiiiiii. ाभ्ह्ह्ह्हह्ह ऑरररर मत्तत्तट्ठ ताडडडडडडडपाआऊऊऊऊ नाहीईई तू तुम्हारीइइइइइ बहाणणणणणणण मर्डर जाएगीइइइइइइ.



मैं- (दीदी की छूट और चुकी सहलाते हुवे) देखो सरिता. तुम इस समय एकदम चउदसीई हो और तुम्हारा बदंन बहुत्त ज्यादा गडरा गया है. तुम्हारी उम्र की लौंडिया तो दिन रात्त अपनी छुटत मी अपनी पति का या अपने याअरर का लुंदड़ लिए पड़ी रहती हैं. तुम्हारा यी कटीला बदन देखकर मेरा भी मन होता ही की मैं तुमको पटक पटक के रगड़ रगड़ कर छोड़ू और तुम्हारी छूट पहाड़ दालु. लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता. क्योंकि तुम मेरी दीदी हो मेरी बहन हो और दीदी को छोड़ना पाप होता है.

दीदी के ऊपर छुडास इस समय पूरी तरह हावी थी. उनको तो इस समय लुंड चाहिए था किसी भी कीमत पर इसलिए वो सबकुछ भूलकर बस लुंड चाहती थी. इसलिए दीदी ने मेरी बात सुनकर कहा.

सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कोईई पापपपपप नही होता अभियई. जब मेंनननननन खुड़ड़ड़ड़ तुमसीईई चुंदड़वानाआए चाहतीई हूँण तू चू छोड़ड़ड़ड़ दी मुझीीी तू जैसेईईई छोड़ना चाहता ही.

मैं- (छूट सहलाते हुवे) लेकिन मैं तुम्हारा भाई हूँ और तुम मेरी बहन हो मैं ये पाप नहीं कर

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh अब्ब्ब्ब मैट ताड्ढणआआ ाभीईई छोड़ड़ड़ड़ड़ डीई मुझीीी. टूउउ मेराआआ भाईईई भी है और मेराआआ याअरररररर भी हैईईई लेकिन मैंनं टेरिइइइइइ बहाणं नाहीईई हूँ अब्ब्ब. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दिए अभीइइइइइइइ नाहीईई तू मैं मर जाउँगीई

Main(chut पर थप्पड़ मरते हुवे)- अगर तुम बहन नहीं हो तो फिर क्या हो मेरी.

सरिता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh ooohhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भाईईईई माईंन्न्नन्नं tumhariiiiiiiiii chudkkkaddddddddddddd mallllllllllll होऊणनननननन छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ mujheeee.meriiiiiiiii पयास्सस्स्स्सस्स बुझायआ डीईई mainnnnnnnnnn teeeeeriiiiiiiiiii rannnndiiiiiiiiii बाहाआनंनंन्न हूँण. अब तो छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दिए मुझेईई.

मैं- (दीदी की छूट सहलाते हुवे). अछ्हाआआआआ टूउउउ मेरिइइइइइइ रनडीईईई हाइइइइइइ सरिता. एक बर्र और सोचहहहहह लिए.

सरिता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh हनननननन मेंनननननननन terrriiiiiiiiii rundiiiiiiiiiiii होऊणनननननन. मैनीईई सूछह ललियाआआआ हैईईईई. मुझेईईई छोड़ड़ड़ डीई अब मेरे भाईईईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ अपनीईईई रनडीईईई बहनणनननन कोऊ औरर बणायआ लेटी मुझेईईई अपपनीईई रअकेलललललललल.

मैं- (चुकी दबाते हुवे). ठिक्क है सरिता जब तुम मुझसे छुड़वाने के लिए इतना तड़प रही हो तो मैं तुम्हारी साडी तड़प मिटा दूंगा, लेकिन कुछ दिन बाद तुम्हारी शादी हो जाएगी तो फिर क्या होगा मेरा.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मम्म्मूउमम्मीयी. उसकेईएएएए बाडडडडडडडड भीई मैं तुझसी छुडवाऊंगीए. चू कहिएगा तू मैंन शादियी भ्हीइ नाहीई करूंगग्गीइ. मैंनं पुररी जिन्दगीयी तेरई रखाईइललल बंनकररर रहुंगीय. लेकिंन अब्ब मैट ताड़पा मुँहीी मेरे भाईईई. खूबबबबबब कस्सस काससस कररर चूडड़ड मुझी. मीरीईई छूठ कोऊ खूब कस्सस काससस कररर अपनीईई मोठे लुङदङ सीए पेलू. Oooooooooooohhhhhhhhhh ssssssssiiiiiiiiiiiii ओह्ह्ह्हह्ह mummmmyyyyyyyyyyy. अपनीईईई बीती को काहूऊऊ कोई मुझीऐ चूड्डड्ड दिए. मईंण छुउड़न्ना छठाःटीई हूंणंन्न तुमससीईई मेरी भाई. सआरईई ज़ीईनदडडागीयी छुउड़नन्ना छहःछतियई होऊणन. मुझी खूबबब रागादड़ रायगगादड़ की ोुर्र पाताकककक पट्टाककक कर चुदोऊ ऑर्डर मेररिई पयास्सस्सस्स बुझा दोऊ.

मैं- (दीदी की छूट सहलाते हुवे)- बस एक आखिरी बात. मात्र लो अगर तुम्हारे अलावी मुझे कोई और लड़की पसंद आ गयी और मैं उसे छोड़ना चाहूँ तो तुम मना तू नही करोगीइ मुझी.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh bhaaaiiiiiiiiiiii ooohhhhhhhhhhhhhhhhh टूउउउ जिस्ससी भी छोड़नी का मान काररी चू छोड़ लींना. मैंन कभी माना नाहीइ करूंगीए. बबाससस चू मुझही सारीय जींदगीय छोड़ड़ता राह बॉस औरर मुझही कुछ नहहीइ चाहहिएई. अभी अब्ब्ब मुझी ोुर्र बारदास्तत्त नाहीइ हूँ रहा ही. अब छोड़ दिए मुझी नाहीइ तू तेरई बाहन मेरर जाएगीइ.

मैं- ठिक्क है सरिता अब तुम जब इतना कर रही हो तो मैं तुम्हे छोड़ hi देता हूँ.

इतना कहकर मैंने दीदी के ऊपर आ गया और उनकी आँखों में देखा तो उसमे से हवस के अंगारे नज़र आ रहे थे मैंने दीदी के पेअर को मोड़कर दीदी की चूचियों से लगा दिया और अपने लुंड को दीदी की छूट पर रगड़ने लगा और दीदी को होंठो को अपने मुंह में भरकर दिस्स करने लगा. 4-5 बार लुंड रगड़ने के बाद मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- सरिता तुम्हारी छूट अभी बहुत कासी हुई है और मेरा लुंड मोटा है. तुम्हे अंदर लेने में बहुत तकलीफ होगी. और तुम्हारी छूट भी फैट सकती हैं.

सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhh abhiiiiiiiiii अब्ब्ब मुझसेइ अपने जिस्म कोई प्यास बर्दास्त नही हो रही ही. मैंन सर्जरी दार्द बर्दास्त कर लुंगीय छूट फटती ही तू फटने ड्डू लेकिन तुम मुझे चूड दो. नाहीई तो मैं मर जौंगीय इस आएग ममी जलकर.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने मुंह से थूक निकलकर अपने लुंड पर और दीदी की छूट पर लगाया और अपना चेहरा दीदी के चेहरे के ऊपर लेजाकर दीदी की मदमस्त और नशीली आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तो तैयार हो अपने यार का लुंड अपनी छूट में लेने के लिए

दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिलायी तो मैंने अपने होंठ उनको होंठो पर रखकर किश करने लगा और एक हल्का सा धक्का दीदी की छूट पर मारा, लेकिन लुंड फिसलकर ऊपर चला गया दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh निकल गई. मैंने फिर से अपने एक हाँथ से अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट पर टिका दिया और हल्का धक्का फिर मारा. इस बाद आधा टोपा दीदी की छूट में घुस गया. मैंने तुरंत hi फिर धक्का मारा तो पूरा टोपा दीदी की छूट में घुस गया. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. वो छटपटाने लगी. उनके मुंह से निकली चीख मेरे मुंह में डाब गई और ggggggggggggggguuuuuuuuuuu gggggggggguuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी दीदी अपने नाखून मेरी पीठ पर गाड़ने लगी लेकिन मैंने दीदी को नहीं छोड़ा. और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाने लगा और दीदी के होंठ चुसंता रहा. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हो गई तो मुझे आँखों के इशारे से अंदर डालने के लिए कहा. दीदी का इशारा मिलने पर मैंने लुंड बहार निकलकर अपने मुंह से थूक लेकर लुंड पर माला और लुंड फिर से दीदी की छूट पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा और अपना होंठ दीदी के होंठो से हटा लिया. इस दकके के साथ मेरा 4”लुंड दीदी की छूट में समां गया. दीदी के मुंह से जोर दर चीख निकल गई. वो मुझे अपने ऊपर से हटाने लगी.



सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyy. मरररररर गाइइइइइइइइइ मेंनननननननन aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh बआहाररररररर निकाएआलूऊऊ ीसीएएएएए. मेंनननननननन marrrrrrrrrrr jauunggggggggiiiiiiiiii Bhaaiiiiiiiiiiii. मुझ्कूऊऊऊ नाहीई चूड्डड्डड्डड़वणाआ तुममसीईई. बाहाआरररररररर निक्कालूओ अभीइइइइइइइ. बहुत्तट्ट्ट्ट डरडडडडडड होओओओ राहाआआआ हैईईई.

दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे. उनका चेहरा दर्द के कारन लाल हो गया था. वो लगातार छटपटा रही थी. मैंने अपना एक हाँथ दीदी की छूट पर रखकर उसे सहलने लगा और एक हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाते हुवे दीदी से कहा.

मैं- बस सरिता. चुप हो जाओ. पहली बार छुड़वाने में दर्द होता है. लेकिन एक बार तुम पूरा अंदर ले लोगी तो तुमको बहुत मज़ा आएगा. बस थोड़ा सा दर्द बर्दास्त कर लो.

सरिता दी- (सिसकते huwe)Bahuttttt दाअररररररडद्ड होओओओ रहा हीी भऐई. बाआअहारररर निकाललललल लो मैंण्ण्ण्न मारररर जाउँगगीई. ooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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