Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 10 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-85

मैं- सरिता अब मैं तुम्हारे हाँथ के सहारे अपने जिस्म को कमर से ऊपर उठाऊंगा तो तुम अपने आप को संभालना.

सरिता दी- ठीक है.

दीदी की हाँ सुनकर मैंने दीदी के हाँथ को पकड़कर अपने जिस्म को जोर देखर आधा शरीर कमर से ऊपर उठाया जिससे मरे लुंड सीधा दीदी की गांड से टकरा गया. 2 सेकंड तक लुंड गांड पर टच करने के बाद मैं नीचे वापस आ गया. मैं लगभग 3 मिनट तक ये एक्सेरसीज़े करने के बाद उठकर खड़ा हो गया. अब दीदी एकदम बेशर्म बैंकर मेरे नंगे लुंड को घोर घोर कर देख रही थी.

अब आगे.

फिर मैं नंगा hi जिम स्ट्रेचर पर लेट गया और दीदी से वाइट उठाने में हेल्प मांगी. दीदी ने मेरी हेल्प की वाइट उठाने में. कुछ देर एक्सेरसीज़े करने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब मुझे कमजोरी महसूस हो रही है.

सरिता दी- तो अब एक्सेरसीज़े बंद कर दो और आराम करो.

मैं- लेकिन मैं और कसरत करना चाहता हूँ. तुम मेरी हेल्प कर दो.

सरिता di-ab इसमें मैं तुम्हारी क्या मैडम कर सकता हूँ.

मैं- मुझे दूध पीला दो तो मुझे ताकत आ जाएगी.

सरिता दी- लेकिन अभी तो दूधवाले के आने में बहुत समय है. अभी कहा से तुझको दूध दू.

मैं- सरिता तुम्हे दूध के लिए दूधवाले का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है (उनकी चुकी को घोरकर) दूध तो तुम्हारे पास hi है मैं इसी से काम चला लूंगा.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी और बोली.

सरिता दी- हाट बेशरम. बहन का ढूढ़ पीना चाहता है. तुझे शर्म नहीं आती.

मैं- कैसी शर्म सरिता. यहाँ मुझे कमजोरी हो रही है और तुम्हे शर्म की पड़ी है.

सरिता दी- लेकिन मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैं नहीं पिलाऊंगी अपने दूध.

लेकिन मैं दीदी को इतने आसानी से छोड़ने वाला नहीं था. उनकी बातो से लग रहा था की वो तैयार हैं लेकिन लड़की ठहरी तो थोड़ा नखरा लाज़िमी बनता है करना. मैं दीदी से लगातार कहता रहा तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- लो गई ये भी कोई बात हुई की कसरत करने औ तो तुम्हे दूध पुलाव.

मैं- तो क्या हुवा सरिता. भाई हूँ तुम्हारा और अपनी बहनो के दूध पर भाइयो का भी हक़ होता है.

सरिता दी- अच्छा ऐसा हक़ तो मैं पहली बार सुन रही हूँ.

मैं- लेकिन मैंने तो पहली बार नहीं सुना है ऐसा. बहुत से भाई हैं जो अपनी बहनो का दूध पिटे हैं सीधे चूचियों में मुंह लगाकर. और तुम्हारी चूचियों को देखकर लगता है की मुझे बहुत जल्दी ताकत आ जाएगी तुम्हारे दूध पीकर.

सरिता दी- (शर्माकर) ऐसा क्या है मेरे दूध में जो तू इन्हे पीना चाहता है.

मैं- अभी तो तुमने मुझे अपना दूध पिलाया hi नहीं है तो कैसे बता सकता हूँ, लेकिन मुझे ऐसा लगता है की तुम्हारा दूध बहुत मीठा है. एकदम रसीला है. थोड़ा पीला दो न.

हम दोनों ऐसे हॉट कन्वर्सेशन के कारन बहुत गरम हो गए थे. दीदी की चूचिया हवस के कारन एकदम तन गई थी जिससे उनके निप्पल t-shirt के ऊपर से hi नज़र आ रहे थे. और मेरा लुंड तो झटके मार रहा था जिसे मैं अपने हांथो से पकडे हुवे था और दीदी मेरे लुंड को hi देख रही थी.



सरिता di-(thoda न नुकुर करते हुवे) ठीक है. लेकिन मैं कपडे नहीं उतरूंगी. अगर कपडे के ऊपर से पीना चाहो तो पि सकते हो.

मैं- कपडे के ऊपर से पिने में क्या मज़ा आएगा.

इतना कहकर मैं दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनके कंधे को चूमने लगा और हाँथ आगे बढ़ा कर उनकी दोनों चूचियों को दबाने लगा और लुंड को उनकी गांड की दरार में घुसेड़ दिया. दीदी तो पहले hi गरम थी. मेरे ऐसा करने से और भी गरम हो gai.main उनकी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा जिससे दीदी ssssssssssssshhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhh करने लगी और अपने दोनों हाथ उठाकर मेरी गार्डन में लप्पेट लिया मैं अपनी जीब निकलकर उनके कण को चाटने लगा और दीदी से कहा.

मैं- सरिता मुझे कमजोरी हो रही है. अपना दूध पिलाओ न.

Didi(Madhosi में) थोड़ी देर रुक जाए अभी. दूधवाला आता hi होगा.

मैं- नहीं सरिता मुझे दूधवाले का दूध नहीं पीना. मुझे दो दूधवाली का मीठा मीता और ताज़ा गरम दूध पीना है. पिलाओगी न मुझे अपना दूध.

इतना बोलकर मैंने दोनों हाँथ से दीदी की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और कमर को थोड़ा पीछे करके खड़ा हो गया. कुछ सेकंड ऐसा खड़ा रहने के बाद मैंने उनकी चूचियों को कसकर मसलते हुवे अपने कमर को झटका दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में समां गया. दीदी की आनंद से आँख बंद हो गई और एक सिसकी उनके मुंह से निकली.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय धीरीईईए सीईई. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeyyyyyyy.

मैंने फिर से दीदी के कण और गार्डन चाटते हुवे दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब तो मुझे भूख भी लग रही है. अपना दूध पिलाओगी अपने इस भूखे भाई को.

मेरी बात सुनकर दीदी ने गार्डन घुमाकर मेरी आँखों में देखा उनकी आँखे एकदम लाल हो गई थी. दोनों गाल गुलाबी हो गए थे. होंठ कैंप रहे थे. जब दीदी मेरी आँखों में देख रही थी तो मैंने उनकी चूचियों को जोर से दबाया. तो दीदी ने ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh की सिसकी ली और अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. और मेरे होंठो को चूसने लगी.



मैं भी दीदी का साथ देने लगा और उनकी चूचियों को दबाते हुवे निचे से अपनी कमर को हल्का हल्का धक्का देता रहा. थोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को मसलने के बाद मैंने उनकी चूचियों को जोर से मसल दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मरीईई भाईईईईई. धीरीई से ooooooooohhhhhhhhhhhhhhh धारड़ड़ड़ड़ होताआ हिअआअ.

मैं- अपना दूध पिलाओ सरिता मैं तुम्हारे सरे दर्द दूर कर दूंगा. पि लू तुम्हारा दूध.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmm

दीदी की बात सुनकर मैं उनको छोड़कर पीछे हैट गया और चेस्ट स्टैंड पर जाकर बैठ गया. मैं अभी भी नंगा hi था. स्टैंड पर बैठने से मेरा लुंड ऊपर की तरफ तम्बू बनाकर खड़ा हो गया. दीदी मेरे लुंड को हवस भरी नज़रो से देखने लगी. मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे कहा.

मैं- सरिता यहाँ आओ और मेरी गॉड में बैठो.

Main-Aise कैसे. अपनी लोअर तो पहन लो.

मैं- नहीं सरिता मुझे तुम्हारा दूध ऐसे hi पीना है. कुछ नहीं होता यार आओ मेरी गॉड में बैठो.

दीदी भी अब पूरी गरम हो hi गाइट hi. मेरी बातो को सुनकर दीदी मेरे लुंड को देखती रही कुछ देर लुंड को देखने के बाद दीदी मेरे पास आई और आराम से अपनी गांड मेरे लुंड पर रखकर बैठ गई. मेरा लुंड दीदी की गांड के निचे डाब गया तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- मैं ऐसे कैसे तुम्हारा दूध पि पाउँगा सरिता.

सरिता दी- तुम खुद hi कह रहे हो मेरी गॉड में बैठो.

मैं- हाँ सरिता लेकिन मेरी तरफ मुंह करके बैठो तभी तो पिऊंगा.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी कड़ी हो गई और अपने दोनों टंगे फैलाकर अपनी मोती मोती और गद्देदार गांड मेरी जांधो पर राखी और अपनी छूट से मेरा लुंड फसकर आगे की तरफ खिसक आगि. अब सेतुएशन ये थी की अगर कोई हमें देख लेता तो उसको यही लगता की हम दोनों चुदाई कर रहे हैं. मैंने दीदी की नशीली और हवस भरी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तो बताओ सरिता रानी. अपने भाई को अपने दूध कैसे पिलाना पसंद करेंगी.

सरिता di(meri आँखों में देखकर) पीना तो तुझको है जैसे तुझे पीना हो वैसे पि ले.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की t-shirt निचे से पकड़ ली और उसे ऊपर खिसकने लगा. दीदी ने भी अपने हाँथ ऊपर कर t-shirt उतरने में मेरी मदद की. अब दीदी के मखमली शरीर पर ऊपर ब्रा थी. दीदी की ब्रा उनकी दोनों चूचियों को संभल पाने में असमर्थ थी.



तभी तो दीदी की चूचिया आधे से ज्यादा ब्रा से बहार झांक रही थी. दीदी तो दिखने में वैसे भी बहुत सेक्सी थी. लेकिन ब्रा में दीदी की जिस्म और भी जानलेवा था.

मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे अपना मुंह निचे झेककर उनकी चूचियों की घाटियों में घुसा दिया और उसकी नर्माहट का मज़ा लेने लगा. मेरे होंठ अपनी क्लीवेज पर लगते hi दीदी की मुंह से ssssssssssssssaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ssssssssshhhhhhhhhh की आवाज़ निकली और दीदी ने अपनी गोरी और मखमली बहे मेरे गले में दाल दी और मेरे सर को अपनी ृषभरी चूचियों पर बढ़ाने लगी. दीदी के जिस्म से निकलती पसीने की दुर्गंद और दीदी के गदराये जिस्म की सुगंद दोनों मिलकर मेरे शरीर में एक नया रोमांच पैदा कर रही थी

मैंने अपना हाँथ दीदी की गांड से थोड़ा ऊपर रखकर सहलाने लगा और दीदी की चूचियों के बिच अपने चेहरे को रगड़ने लगा. कुछ देर अपना चेहरा रगड़ने के बाद मैंने जीभ निकली और उनकी चूचियों की घाटी को चाटने लगा. और निचे से अपनी कमर को मूवमेंट देकर अपना लुंड दीदी की छूट पर घिसने लगा. दीदी तो मज़े के सातवे आसमान में उड़ रही थी.

मेरे छूट पर लुंड रगड़ने से दीदी भी मस्ती में अपनी छूट का प्रेसर मेरे लुंड पर बढ़ने लगी और मेरी जीभ को अपनी चूचियों के इर्द गिर्द महसूस करके sssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh आआआआअह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मैंने भी अब दीदी की चूचियों की घाटी से मुंह उठाकर ब्रा में कैद दीदी की चूचियों को चाटने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचियों को चाटने के बाद मैं अपने हाँथ ऊपर की तरफ सरकने लगा और ब्रा के हुक में फसकर ब्रा का हुक खोल दिया. जिससे दीदी की चूचिया किसी बॉल की तरह ब्रा से निकलकर बहार आ गयी. और मेरी आँखों के सामने थिरकने लगे. मैं तो दीदी की चूचिया देखकर जैसे खो सा गया. और दीदी से बोलै.



मैं- वह सरिता क्या नशीला हुस्न है तेरा. ये तेरी भरी भरी और बड़ी बड़ी चूचिया एकदम तानी हुई हैं. तनिक भी ढीलापन नहीं है इनमे. और तुम्हारी चूचियों में बहुत रास भरा है जिसे पिने में बहुत मज़ा आएगा.

इतना कहकर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंठ दीदी के छुडास से लाल हो चुके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. और अपने हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी भी मेरा होंठ चूसने में साथ देने लगी. लगभग 3 मिनट तक एक दूसरे के होंठ चूसने और उनकी चूचिया दबाने के बाद हम दोनों अलग हुवे. थोड़ी देर बाद मैंने अपने होंठो से दीदी की नंगी चूचिया चूमने लगा. चूचिया चूमते चूमते मैंने दीदी के एक निप्पल को मुंह में भर लिया और चूसने लगाई. निप्पल मुंह में लेते hi दीदी की मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ssssssssssssss sssssssssssssss की आवाज़ निकल गई और दीदी ने अपना हाँथ मेरे सर पर रखकर मेरे बालो को सहलाने लगी.

मैं दीदी के निप्पल को दबा दबा के चूस रहा था और निचे से अपने लुंड का झटका दीदी की छूट पर मार रहा था. मैंने कभी देर एक निप्पल को चूसा फिर उसे छोड़कर दूसरे निप्पल को चूसने लगा. मैं पूरा मुंह खोलकर दीदी की चूचियों को जितना हो सकता था मुंह में लेकर चूस रहा था. जिससे दीदी को भी बहुत मज़ा आने लगा था और वो कहने लगी.



सरिता दी- Aaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ माज़आआआ आए राहाआआ हैआईई. ऐसे हीई चूऊउउउउसस्स्सस्स मेरी भाआआअआइई अपनीईई सरिता कीईई छूछीयोओओओओओ कोऊ.

मैं दीदी की बात सुनकर और जोर जोर से दीदी की चूचियों को चूसने लगा. दीदी की चूचियों में जैसे एक नशा सा था. जिसको चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं चूचियों को चूसकर जैसे पागल सा हो गया और दीदी भी अपनी चूचिया चूसा चूसा कर पागल हो रही थी, तभी तो मस्ती में दीदी अपनी छूट को मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ घिस रही थी. मैं दीदी की चूचियों को चूसते चूसते दीदी की अपने गॉड में उठाकर खड़ा हो गया और और निचे से अपना लुंड उनकी गांड में सटाकर दीदी को उसपर बैठा दिया जिससे दीदी की गांड की दरार में मेरा लुंड घुसकर सीधे उनके ासशोले पर लगा. दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaasssssssss sssssssssss की आवाज़ निकल गई.

थोड़ी देर दीदी को अपनी गॉड में उठाकर अपने लुंड पर बैठने के बाद मैं दीदी को अपनी गॉड में ऊपर निचे करने लगा और दीदी की चूचियों को चूसने लगा. ऐसा लग रहा था की मैं दीदी को छोड़ रहा हूँ. मेरे लुंड की ठोकर अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी कैंप जाती थी. दीदी की लोअर पूरी गीली हो गई थी. मैंने दीदी की छूट पर अपने लुंड की एक तेज़ ठोकर मरी और दीदी की चूचियों को काट लिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii क्याआआआआ कारररररररर रहा हैईईई. दांत्तत्ततत्तत क्योनंन्नं गाडायआ राहाआआआआ हैईईईई. कीसीईईईइनी देख लियाआआ तो क्याआ जाआआआआआब दूंणणणगीीीी. धीरीईए चूस्स्स्सस्स्स्स मेरेईईईई bhaaiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ अच्छाआ लगगगगगगगग राहाआआआ हैईईई.

मैंने कुछ देर दीदी को गॉड में उठाये उनकी छूट पर लुंड रगड़ते और उनकी चूचिया पिटे खड़ा रहा. फिर मैंने दीदी को चेस्ट स्टैंड पर लिटा दिया और दीदी की चूचिया पिटे हुवे दीदी के ऊपर लेट गया और अपना लुंड उनकी छूट पर लोअर के ऊपर से रगड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyy Abhhiiiiiiiiiiiii Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh तू कीटनाआआआ ाआअच्छाआ haiiiiiiiiii. तू मेराआआआआ कीटनाआआआ ख्याहाल रखता हीी. मुझेईईई कुछःह होओओओ रहहाआआ हिअआआअ भीआइइइइइइइइइ मेरी ाण्ड्डड्डड्डड़ररररररर जैईईईसीएएएएएएए चीटीईईईई रेंगगगगगगगग राहीईई हाईंण्णन मेंनननननननन बहुत्तत्त pyaasiiiiiiiiii होऊणणन्न अभीइइइइइइ मेरीए अछ्हीईईईई भाईईईईई मेरिइइइइइइइ प्याआआस्स्सस्स्स्स बुझायआ दी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-86

दीदी की बात सुनकर मुझे यकीन हो गया की दीदी अब छोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. और इस सेतुएशन में दीदी मुझे किसी बात के लिए मन नहीं करेंगी. मैं दीदी को अभी hi छोड़ सकता था लेकिन दीदी कुंवारी थी. और मेरे लुंड को झेलना दीदी के बस की बात नहीं थी. क्योंकि लुंड के छूट में घुसते hi वो चिल्ला चिल्ला कर सारा घर सर पे उठा लेती. और इस समय घर में सभी मौजूद थे. मुझे दीदी की चुदाई करने के लिए कुछ तिकड़म भिड़ानी थी. और उसके लिए मुझे समय चाहिए था लेकिन उसके पहले मैं दीदी को पूरी तरह खोल देना चाहता था इसलिए मैं दीदी को और तड़पने के दीदी की चूचियों से मुंह हटाकर कहा.

मैं- रुको सरिता मैं अभी तुम्हे पानी देता हूँ.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiii ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मुझेईईई पनीइ कीई pyaasssssssssss nahiiiiiiiiiii haiiiiiiiiiiii. टूउऊउउउ समझहहहहहह रहा haiiiiiiiiiii नाहा मैंण्ण्ण्ण्ण्ण्क्याआ काआहंआआआ चाहाहति हूँण.

मैं- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है सरिता अगर तुम पानी नहीं पियोगी तो तुम्हारी प्यास कैसे बुझेगी.

इतना कहकर मैं फिर से दीदी की चूचियों को चूसने लगा और अपना लुंड दीदी की छूट पर रगड़ता रहा. तो दीदी फिर से तड़पते हुवे बोली.

सरिता di-oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ाभीईई क्यूओ तडपाआआआ रहा हैईईईई मुझेईई पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ भाईईईई मेरिइइइइइइ पयास्सस्सस्स बुझाआआआ दिए. दललललल दे apnaaaaaaaaaaa मेरेईईई अंडररररररर और भुजाआए डीएई मेरिइइइइ प्यास.

मैं- तुम क्या कह रही हो क्या दालु में तुम्हारे अंदर और कहा दालु मैं. साफ साफ कहो जो कहना है.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiii दलललल्ल दी नाहा क्यों तडपाआआ राहाआआ हैईईई. टूउउ समाआजहठ्ठ जायआ. मेंनननन नाहीई कहहहहहहह पाऊउउउउग्नीी.

दीदी की ये बात सुनकर मैंने उनकी चूचियों से मुंह हटा लिया और उनके ऊपर से उठ गया और बोलै.

मैं- जब तुम नहीं कह पाओगी तो मैं कुछ नहीं कर पाउँगा. अगर तुम्हे मुझसे अपनी प्यास बुझवानी है तो एकदम बेशर्म बैंकर खुलकर बोलो की क्या दालु मैं और कहा दालु.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखा दीदी की आँखे एकदम लाल हो चुकी थी. उनकी चूचिया जोर से साँस लेने के कारन ऊपर निचे हो रही थी. उनकी आँखों में मुझे छुडास साफ दिख रही थी. मेरे ऐसे उठ जाने से दीदी का मज़ा ख़राब हो गया था. दीदी एकदम कटी पतंग की तरह हो गई थी. कुछ देर तक दीदी ने कुछ नहीं कहा और आँखों से मुझसे मिन्नत करती रही. लेकिन जब मैंने कोई रिस्पांस नहीं किया तो दीदी ने भी अब बेशरम बनते मेरे हाँथ को पकड़कर अपने ऊपर खींचते हुवे तड़पकर कहा.

सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhh अभीइइइइइइइ मेरी भाईईईई मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट मीटी बहुत्तट्ठ आग लगइईईई हैईईईई. मुझीीी छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ दे. मेरिइइइइइइ पयास्सस्स बुझायआ दी. डाललललललललल डीई अपनाआआ ताआएगाआडा लुँड्ड्ड मेरिइइइइइइ गरममममममम छुट्ट्ट्ट मीटीए. और बणायआ ली मुझीीी अपनीईई हमेशाआ की लिएईईए.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की चूचियों को बेरहमी से मसलने लगा और अपने लुंड को उनकी छूट पर घिसते हुवे बोलै.

मैं- तुम मेरी बहन हो मैं तुम्हे नहीं छोड़ सकता.

सरिता दी( मेरी आँखों में देखकर) मैं तेरी बहन पहले थी लेकिन अब मैं तेरी बहन नहीं रह गई हूँ. तूने अब मुझे अपनी बहन रहने कहा दिया है. तूने मुझे अपनी गफ बना लिया है.

मैं- हाँ अब तुम मेरी गफ हो. तुम मेरी चुड़क्कड़ मॉल हो. बोलो सरिता तुम और क्या हो मेरी.

सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ. तू मुझेईई जोऊ भीईईई बनाना छाअहीए बनाए leeee.lekin अभी मेरिइइइइ प्यासस्सस्स बुझाआआआ डीएई. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhh.

मैं- तेरी प्यास बुझाने से पहले मैं तुझे बता तो दू की मैं तुझे अपनी क्या बनाना चाहता हूँ. अज्ज से तू मेरी गुलाम बैंकर रहेगी. मैं जो कहूंगा तू सब मानेगी. मैं तुझे अपनी पर्सनल रखैल बनाना चाहता हूँ. तुझे मैं रंडी की तरह छोड़ना चाहता हूँ. बोल बनेगी तू मेरी रखैल. छुडवायेगी तू मुझसे रंडी बैंकर. बोल जल्दी बोल.

इतना कहकर मैंने दीदी की चूचियों को जोर जोर से मसल मसल कर चूसने लगा और अपने लुंड को तेज़ तेज़ दीदी की छूट पर घिसने लगा. जिससे दीदी एकदम बेकाबू हो गई और अंत संत बकने लगी.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सलीबी. अपनी बहनणनननन को अपनी रखईईईईईललल बनानाआ चाहाहता हैईईईई. चू बहुत्तट्ठ कमीना हिअआ सलेटी कुट्टीीी. लेकिनन्ननननन मुझेईई टीड़ीए साथःहःहः बहुत्त मज़ाआ ाताआ हिअआअ. तुझको जोऊ करन्ना हैईईई मरीईई सठह तू कर. मुझीऐ रनडीईईईई बनाए, कुटिया बणायआ, रखैललललल बनाए. जूऊऊऊ भीईई मर्जज़्ज़्ज़्ज़िइइइइइइ वोऊ बनाआआआ लेकिननननन अब्ब मिझीीे चुड़ डीएई मेरेईईई बुर्र मीटी बहुत्त आगआआआ लागीयी haiiiiiii.mainnnnnnnmaarrrrrrrrr ज्जाआँआंग़ीीीी. छोड़ड़ड़ड़ड़ मुझेईईई ooooooooooooohhhhhhhh.

दीदी की बात सुनकर मैं उनके ऊपर से उठकर निचे बैठ गया और उनकी चूचियों को चुसते हुवे काटते हुवे एक हाँथ दीदी की छूट पर लोअर के ऊपर से रख दिया. जिसपर दीदी फिर कम्प उठी. मैंने अपना हाँथ दीदी की लोअर में डाला और उनकी पंतय को साइड करके सीधे उनकी छूट को सहलाने लगा. दीदी मचलने लगी. फिर मैंने अपनी एक ऊँगली दीदी की छूट में एक झटके के साथ दाल दी जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- ooooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh AAAAbhiiiiiiiiiiiii Dhireeeeeeeeee कररररररर कुत्त्तीीी. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh hhhhhhhheyyyyyyyyyyyyy मेंननननननन अभीयी कुंआरीईई हूंणणंन्न. थोड़द्दाआआआ प्यार सी भाईईई.

मैंने दीदी की बात की परवाह किये बगैर तेज़ी से अपनी ऊँगली उनकी छूट में अंदर बहार करने लगा और अंगूठे से उनकी क्लीट को सहलाने लगी. और दीदी की चूचिय को एक हाँथ से मसलते हुवे चूसने लगा. जिससे दीदी का शरीर अकड़ने लगा और वो अंत संत बकते हुवे झड़ने लगी.

सरिता di-oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्यययय मैंनं gaaiiiiiiiiiiii. मेंननननननन गिरररररर रहीए हूंणन्नन्नन्न मम्मीयिययियीय देखहहह टेरी बीटीईए नईईईई टेरिइइइइइइइइ betiiiiiiiiiii कुओ अपनीईई रखैललललललल बनाए लियाआआ. Ohhhhhhhhhhhhhh Saleeeeeeeeee Abhiiiiiiiiiii मैईयीं गिररररररर jaauggiiiiiiiiiiii मेंननननन झाड़ राहीईई हूंणंन्न मुझेईई सँभाललललललललल ले कुट्ट्टीीीे. मेंननननननन gaaiiiiiiiiiii.

इतना बोलकर दीदी झाड़ गई और चेस्ट शीट पर लेती लेती हांफने लगी. थोड़ी देर बाद जब दीदी की सांसे दुरुस्त हुई तो वो मुझे देखकर शर्माने लगी. मेरा लुंड अभी तक खड़ा हुवा था. दीदी ने जब मेरे लुंड को देखा तो नज़ारे झुका ली. मैंने दीदी को छेड़ते हुवे कहा.

मैं- क्यों सरिता मज़ा आया एक्सेरसीज़े करके.

दीदी मेरी बात सुनकर मंद मंद मुस्कुराने लगी. तो मैं दीदी के पास गया और उनकी ठुड्डी से पकड़कर उनके सर को ऊपर उठाया और उनकी आँखों में देखने लगा.



दीदी की आँखे अभी भी लाल थी लेकिन अब उसमे एक संतुस्ती झलक रही थी. दीदी के होंठ अभी भी कैंप रहे थे. मेरे इस तरह देखने से दीदी के गलो पर हाय की लाली छ गई. कुछ देर दीदी की आँखों में देखने के बाद मैंने अपने होंठ बढाकर दीदी के होंठ पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. मैंने अपने हाँथ से दीदी की चूचिया पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा. कुछ देर ऐसा करने के बाद दीदी की शर्म अब थोड़ी काम हो गई तो मैंने उन्हें छोड़ दिया और उनसे कहा.



मैं- तुमने बताया नहीं सरिता तुम्हे मज़ा आया की नहीं.

सरिता दीदी- hhhhhmmmmmmmmmmmmmmmm.

मैं- तुम्हारा काम तो हो गया तुम थो ठंडी हो गई लेकिन अभी मैं ठंडा नहीं हुवा हूँ. तुम मुझे भी ठंडा कर दो.

अब तक दीदी ने अपने कपडे पहन लिए थे. तो वो उठी और मुस्कुराते हुवे, थोड़ा शरमाते हुवे एक ऐडा के साथ बोली.

सरिता दी- तुझे ठंडा करे मेरी जुटी. चल भाग यहाँ से. बड़ा आया.

दीदी इतना कहकर निचे जाने लगी तो मैंने उन्हें आवाज़ देखर रोका तो दीदी रुक गई. तो मैंने चुदाई के लिए सविता दीदी और सरिता दीदी के लिए जो शामे ड्रेस ली थी. उसको निकल कर दीदी को देते हुवे कहा.

मैं- ये तुम्हारे लिए मेरी तरफ से गिफ्ट है सरिता. और मैं चाहता हूँ की तुम जब छुड़वाने के लिए मेरे पास आओ तो यही कपडे पहनकर आओ.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों में देखते हुवे बेशर्मी से कहा.

मैं- तुम कितने बड़े कमीने हो. इतना छोटा सा गिफ्ट देखर अपनी बड़ी बहन की कुंवारी छूट छोड़ना चाहते हो. तुम्हे शर्म नहीं आती.

मैं- सरिता ये तो उस गिफ्ट का एक छोटा सा नमूना था. जब तुम ये कपडे पहन कर छुड़वाने के लिए मेरे पास आओगी तब मैं तुमको असली और बड़ा गिफ्ट दूंगा.

ये बात मैंने अपने लुंड को सहलाते हुवे दीदी की आँखों में देख कर इशारे करते हुवे कहा. मेरा इशारा समझकर दीदी ने मेरे लुंड की तरफ देखा और अपने होंटो पर जीभ फिरती हुई बोली.



सरिता दी- खुली आँखों से सपने देखना बंद कर दे. मैं तेरे हाँथ नहीं आने वाली. और मैं तेरा ये गिफ्ट भी नहीं पहनूंगी.

मैं- तुम्हारे कहने से क्या होता है. मुझे पूरा भरोषा है अपनी दीदी पर की वो अपनी जिस्म की प्यास अपने भाई से शांत करवाने के लिए ये गिफ्ट पहनकर जरूर आएगी और कहेगी की भाई मुझे छोड़ दो.

सरिता दी- ऐसा कुछ भी नहीं होगा.

मैं- देखते हैं.

सरिता दी- देख लेना.

इतना बोलकर दीदी निचे जाने लगी. तो मैं भी अपनी लोअर पहनने लग. तभी मुझे मनीषा की आवाज़ सुनाई दी जो दीदी से बाते कर रही थी. मैं भी उनकी बाटे सुनने लगा.

मनीषा- गुड मॉर्निंग दीदी.

सरिता दी- गुड मॉर्निंग मनीषा.

मनीषा- हो गई आज की एक्सेरसीज़े. खूब मज़ा आता होगा न दीदी.

सरिता दी- हाँ हो गई. हाँ मज़ा तो बहुत आता है.

मनीषा- हाँ दीदी भाई के साथ करती हो इसलिए ज्यादा मज़ा आता है.

सरिता दी उसकी बात सुनकर उसकी तरफ क्वेश्चन वाली नज़रो से देखा और कहा और थोड़ा नाराज़गी से कहा

सरिता दी- मतलब क्या है तुम्हारा मनीषा.

मनीषा- क्या दीदी आप तो गुस्सा हो गई. मैं ये कह रही थी की कही बहार अगर आप जिम ज्वाइन करती तो वह आपको रोज स्पोर्ट क्लॉथ पहनकर जाना पड़ता. और वह कैसे कैसे लोग आते हैं वो बताने की जरुरत नहीं है. आपको जिम सीखने के बहाने यहाँ वह टच भी कर सकते थे. मेरी इतनी प्यारी दीदी के साथ गलत हारकर कर सकते थे वो लोग. लेकिन घर में सिखने से भैया आपको बहुत प्यार से सिखाते होंगे. आपकी हर जरुरत को पूरी करते होंगी. यहाँ आप अपने हिसाब से सीखती हैं. जब मन चाहा आराम भी कर लेती हैं. और भैया सब कुछ बहुत प्यार से करते होंगे. है न दीदी.

मनीषा ने जो बात कही थी. उसको सुनकर मेरा दिमाग फिर से उन्ही बातो में उलझ गया की शायद मनीषा कुछ जानती है. लेकिन मनीषा ने सरिता दीदी को अपनी गोल गोल बातो में ऐसे उलझाया की वो एकदम खुश हो गई और उसका गाल सहलाकर बोली.

सरिता दी- तू सही कह रही है मनीषा अभी बहुत प्यार से सिखाता है. और वो बोल भी रहा था की मैं जैसे भी सीखना चहु और मेरी जैसी भी जरुरत होगी तो मेरी हर जरूरत को पूरी करेगा. अभी बहुत अच्छा है मनीषा.

मैं- मैं भी तो वही कह रही थी की भैया के साथ करने में ज्यादा मज़ा आता है लेकिन आप तो गुस्सा हो गई मुझसे.

सरिता दी- सॉरी मनीषा. मुझे समझ में नहीं आया की तू क्या बोल रही है इसलिए थोड़ा गुस्सा आ गया सॉरी यार.

मनीषा- कोई बात नहीं दीदी. वैसे ये आपकी लोअर कैसे भीग गई दीदी.

मनीषा की बात सुनकर मुझे और सरिता दीदी को झटका सा लगा. मैं तो खैर कमरे में था लेकिन दीदी तो मनीषा के सामने थी. उसकी बात सुनकर वो हड़बड़ा गई और इधर उधर देखने लगी. उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था की वो उसे क्या जवाब दे. लेकिन जवाब तो देना hi था तो सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- वो क्या है मनीषा एक तो आज रोज के बनस्पत गर्मी ज्यादा है और आज अभी ने ज्यादा hi जी जान लगा दी कसरत करवाने में मेरी संतुस्ती के लिए. इसलिए पसीना बहुत आ गया. ये देख मेरी t-shirt भी गीली हो गई है. अच्छा ये सब छोड़ तू बता. आज सुबह सुबह छत पर किसलिए जा रही है.

मिनिषा- वो आज मेरा मन किया की छत पर चलकर ठंडी हवा खा ली जाये इसलिए मैं छत पर जा रही हूँ. और आप के हाँथ में ये पैकेट कैसा.

सरिता दी- वो क्या है मनीषा की आज मैंने इतनी म्हणत और लगन से कसरत की. की अभी ने खुश होकर मुझे ये गिफ्ट दिया है.

मनीषा- वाओ दीदी. मुझे भी तो दिखाओ क्या है इसमें.

मनीषा की बात सुनकर मेरी गांड फैट गई. क्योंकि मैंने जो गिफ्ट दीदी को दिया था उसमे एकदम ट्रांसपरेंट्स ड्रेस थी. जिसको पहनना और न पहनना दोनों बराबर था और अगर मनीषा ने वो ड्रेस देख ली तो उसे अगर थोड़ा बहुत शक होगा तो वो यकीन में बदल जाएगा इसलिए मैंने खुद आगे बढ़कर बात करने की ठानी. क्योंकि सरिता दीदी मनीषा को मन नहीं कर पाएंगी ये मैं जनता था इसलिए मैं कमरे से बहार आया और मनीषा से कहा.

मैं- मनीषा मैंने ये गिफ्ट दीदी को दिया है. किसी का दिया हुवा गिफ्ट देखा नहीं करते. मैं इससे भी बढ़िया गिफ्ट तुम्हे लेकर दूंगा.

मनीषा- ठीक है भैया. लेकिन मुझे 2 दिन के अंदर hi गिफ्ट मिल जाना चाहिए नहीं तो मैं दीदी से ये गिफ्ट चीन लुंगी. बता दे रही हूँ.

मैं- ठीक है मेरी मान. जैसा तू कहे. अब आजा छत पर और ठंडी हवा खा और दिमाग को शांत रख.

मेरी बात सुनकर मनीषा छत पर आ गई टहलने के लिए और सरिता दीदी अपने कमरे में चली गई. मैं भी फ्रेस होने बाथरूम में चला गया और अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत करने लगा और सोचने लगा आज तो बाल बाल बच गए अगर कुछ देर और हो जाती तो पकड़ा जाना तय था. लेकिन ये आजकर कुछ ज्यादा हो ऑब्सेर्वे करने लगी है. में तो इसे कितना सीधा समझता था. ये तो बहुत शातिर है. इससे तबतक बचकर रहना पड़ेगा जबतक मैं इसको पता नही लेता. नहीं तो ये कुछ भी कर सकती है. हो सकता है पापा को hi बता दे. इन्ही सब बातो को सोचते हुवे मुझे 30 मिनट बिट गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-87

मैं- ठीक है मेरी मान. जैसा तू कहे. अब आजा छत पर और ठंडी हवा खा और दिमाग को शांत रख.

मेरी बात सुनकर मनीषा छत पर आ गई टहलने के लिए और सरिता दीदी अपने कमरे में चली गई. मैं भी फ्रेस होने बाथरूम में चला गया और अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत करने लगा और सोचने लगा आज तो बाल बाल बच गए अगर कुछ देर और हो जाती तो पकड़ा जाना तय था. लेकिन ये आजकर कुछ ज्यादा हो ऑब्सेर्वे करने लगी है. में तो इसे कितना सीधा समझता था. ये तो बहुत शातिर है. इससे तबतक बचकर रहना पड़ेगा जबतक मैं इसको पता नही लेता. नहीं तो ये कुछ भी कर सकती है. हो सकता है पापा को hi बता दे. इन्ही सब बातो को सोचते हुवे मुझे 30 मिनट बिट गए.

अब आगे..

मैं 30 मिनट बाद जब बाथरूम से बहार आया तो मैंने जो लुंड पर ठंडा पानी डालकर अपने लुंड को ठंडा किया था वह फिर से खड़ा हो गया. वजह थी मनीषा की चूचिया. मनीषा बाथरूम से थोड़ी दूर पर दिप मार रही थी. जिसके कारन चाट के पैरलर होने के कारन उसकी चूचिया बहुत गहराई तक बहार दिख रही थी.



मैं तो बाथरूम के दरवाज़े के पास hi खड़ा होकर उसकी चूचियों को देखता रहा. मनीषा ने भी मुझे अपनी चूचिया देखते हुवे देख लिया लेकिन वो सीधी नहीं हुई और दिप मरती रही. थोड़ी देर दिप मरने के बाद उसने कहा.

मनीषा- अच्छा है न.

मैं- हाँ बहुत hi मस्त. लेकिन क्या अच्छा है.

मनीषा- मैंने अच्छी तरह से कर रही हूँ या नहीं. यही पूछा था की ाचा है.

मैं- मैंने भी तो वही कहा की अच्छा है.

मनीषा- अच्छा भैया मुझे भी थोड़ा सिखाओ न. मुझे कमर को जो लेफ्ट राइट करके झुककर अपने हाँथ से अपने पांव को जो छूटे हैं वो करने में मुझको दिक्कत आ रही है. मुझे थोड़ा गाइड कर दीजिए.

इतना कहकर वो उठ कड़ी हुई और मेरी तरफ देखने लगी. मैं उसकी तरफ देखते हुवे अपने हाँथ से एक बार अपने लुंड को मसल कर छोड़ दिया जिसे उसने देख लिया.



फिर मैं उसके पास चला गया और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी कमर पर हाँथ रख दिया. और उससे कहा.

मैं- कोई भी एक्सेरसीज़े करने के लिए सबसे जरुरी बात ये है की कमर में लचक होनी चाहिए. ताकि उसकी मूवमेंट स्मूथली हो सके.

इतना कहकर मैं उसकी कमर को सहलाने लगा और उससे बोलै.

मैं- लेकिन तुम्हारी कमर में लोच बिलकुल नहीं है इसलिए तुमको दिक्कत हो रही है. चलो मैं बताता हूँ.

इतना बोलकर मैं उससे सत्कार खड़ा हो गया जिससे मेरा लुंड मनीषा की गांड से टकरा गया. जिससे मनीषा का शरीर कैंप गया. थोड़ी देर उसके कमर को सहलाने के बाद मैंने उससे कहा.

मैं- चलो अब अपनी कमर को बेंड करके अपने एक हाँथ को ऊपर उठाओ और दूसरे हाँथ को अपने पांव के पास रखने की कोशिश करो मैं तुम्हारी हेल्प करता हूँ.

इतना कहकर मैं उससे एकदम चिपक कर खड़ा हो गया और अपना हाँथ आगे बढाकर उसके पेट पर रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा की साँस तेज़ चलने लगी. फिर वो अपनी कमर को बेंड कर अपने एक हाँथ को ऊपर उठाकर एक हाँथ को निचे अपने पांव के पास रखा. जिससे उसकी चूचिया फिर से बहार की तरफ निकल गई.



और उसकी गांड मेरे लुंड पर एकदम से सात गई. वो कुछ देर इसी पोजीशन में बानी रही तो मैंने अपनी कमर को पीछे करके एक जोरदार झटका उसकी गांड पर मर दिया जिससे मेरा लुंड उसकी गांड की दरार में घुस गया. मेरे इस धक्के से वो आगे की तरफ गिरना लगी तो उसे ठीक से पकड़ने के चक्कर में मेरे दोनों हाँथ उसकी चूचियों पर पहुंच गए. जिसे मैंने दबाकर उसे अपनी तरफ खींचा तो उसके मुंह से चीख निकल गई.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या कर रहे हो भैया छोडो मुझे.

मैंने उसकी बात अनसुना करते हुवे उसे और कसकर अपने आप से चिपका लिया और अपने होंठ उसकी गार्डन पर रख दिए. तो वो एकदम से सिहर गई और पूरा जोर लगाकर मुझसे छोटकर दूर कड़ी हो गई. जब मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर गुस्सा था. वो गुस्से में मुझसे बोली.

मनीषा- या क्या कर रहे थे आप मेरे साथ. मैं बहन हूँ आपकी कोई गफ नहीं जो आप मेरे साथ ऐसा कर रहे है.

उसके तेवर देखकर तो मैं दर hi गया. उसका बेहेवियर मुझे समझ में hi नहीं आ रहा था. कभी मुझे लगता है की वो भी राज़ी है तो कभी दूसरा रूप नज़र आता है. मैंने बात को सँभालते हुवे उससे कहा.

मैं- सॉरी मनीषा वो गलती से हो गया. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं हिय.

मनीषा- हाँ. आपसे हर काम गलती से hi हो जाता है. आप कहाँ कुछ जानबूझकर करते हैं.

मनीषा ने वही बात कही जो सविता दीदी मुझसे कहती थी. अब मुझे पूरा यकीं हो गया था की मनीषा कुछ न कुछ तो जरूर पता है. लेकिन कितना पता है ये एक सवाल था. मेरे चुप रहने पर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अब चुप क्यों हो भैया. आपको ऐसे हरकत मेरे साथ करते हुवे शर्म नहीं आई. मैं बहन हूँ आपकी.

मैं- नहीं मनीषा मैंने कुछ नहीं किया वो तो मैंने तुमको निचे गिरने से बचने के लिए पकड़ा था.

मनीषा- (मेरे पास आकर) लेकिन धक्का तो आपने hi दिया था. मुझे गिराने के लिए.

मैं- वो तो बस ऐसे hi मने सोचा मैं भी तुम्हारे साथ एक दो स्टेप कर लू एक्सेरसीज़े.

मनीषा- मैं सब समझती हूँ भैया. मैं कोई बच्ची नहीं हूँ अब.

उसकी बात सुनकर मैंने वह से जाना hi मुनासिब समझा इसलिए मैंने उसकी बायत का कोई जवाब दिए बगैर अपने कामे में चला गया. कमर में आकर मैं सोचने लगा की मनीषा तो बहुत खतरनाक है. इसके होते हुवे मैं सरिता दीदी को नहीं छोड़ पाउँगा. इसका कुछ न कुछ तो करना hi पड़ेगा. यही सब सोचकर मैं कपडा पहनकर निचे आ गया. थोड़ी देर बाद मां पापा भी आ गए. मैंने नाश्ता किया और अपने कमरे में आकर तैयार होने लगा बहार जाने के लिए.

तैयार होकर निचे आया तो मम्मी पापा जा चुके थे. मैं भी अपने काम पर चला गया. 2 हॉर्स बाद अपना काम समेटकर मैं घर के लिए निकल pada.Raste में मैं अपने एक जान पहचान वाले दोस्त के पास चला गया. उसकी मेडिकल की फार्मेसी थी. मैंने उससे नींद न आने का बहाना बनाकर नींद की गोलिये मांगी. उससे गोली लेकर मैं एक शॉपिंग काम्प्लेक्स में गया और मनीषा के लिए एक ड्रेस ली और घर के लिए निकल पड़ा. घर पहुंचकर मैंने कुछ देर अपना काम फिनिश किया फिर मैंने दवा ली और दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. जब मैं दवाज़ा नॉक करके आवाज़ लगाई तो दीदी ने दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खुलते hi मैं तो बस दीदी को hi देखने लगा. दीदी ने क्या कपडे पहने थे. दीदी बहुत hi खूबसूरत लग रही थी और सेक्सी भी क्योंकि उनका ड्रेससुप hi ऐसा था. उन्होंने एक शर्ट और लोअर पहनी हुई थी. शर्ट के ऊपर के 4 बटन खुले हुवे थे. जिससे दीदी की जालिम चूचिया ब्रा में नज़र आ रही थी. दीदी को देखकर मेरा लुंड फिर से खड़ा होना लगा. मैंने तुरंत कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद किया और दीदी को अपनी बहो में भर लिया और उनसे कहा.



मैं- क्या बात है Sarita.Abhi से hi प्रैक्टिस शुरू कर दी है क्या रात वाली.

सरिता दी- चल हैट ऐसा कुछ नहीं है. वो तो मेरा मन हुवा इसलिए इसलको पहन लिया. वैसे कैसी लग रही हूँ.

मैं- वैसे तुम चाहे जो कपडे पहनो तुम चुड़क्कड़ hi लगती हो. लेकिन इस कपडे में तुम बहुत छुडासी लग रही हो.

सरिता दी- तू बहुत कमीना है. अपनी बहन को छुडासी बोल रहा है.

मैं- मेरे बोलने से क्या होता है सरिता छुडासी तो तुम हो hi. और आज के बाद तुम मेरी पर्सनल गुलाम बन जाओगी.

इतना कहकर मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए और उनके होंठ चूसने लगा. दीदी तो पहले से hi छुडासी थी. मेरे होंठ चूसने से वो गरम होने लगी और मेरा साथ देने लगी. मैं उनके होंठ चूसते हुवे अपने जीभ उनके होंठो पर भी फिरने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद दीदी ने अपने मुंह खोल दिया तो मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी जिसको दीदी चूसने लगी. काफी देर तक मेरी जुबान चूसने के बाद दीदी ने अपनी जीभ से मेरी जुबान को प्रेशर देकर बहार निकला और अपनी जुबान मेरे होंठो पर फेरने लगी.

मैंने भी दीदी की जुबान पर अपनी जुबान चलने laga.thodi देर ऐसा करने के बाद मैंने उनकी जुबान अपने मुंह में ले ली और चूसने लगा. अब मैंने उनकी जुबान चूसने के साथ साथ अपने हांथो को भी हरकत देते हुवे उसे दीदी की गांड पर रख दिया और उसे दबाने लगा. थोड़ी देर उनकी जीभ चूसने के बाद दीदी ने अपनी जुबान मेरे मुंह से निकली और अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुवे कहा.



सरिता दी- बहुत हो गया ab.tu जा अब. मनीषा भी है घर में.

मैं- अरे वो तो अपने कमरे में है. तुम चिंता मत करो.

सरिता दी- मैंने कहा न की अभी तू अपने कमरे में जा.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके एक हाँथ को पकड़कर उन्हें धकेलते हुवे दिवार के पास ले गया और उनके हाँथ को मोड़कर उन्हें दीवाल की तरफ गुमा दिया. और धक्का देखर दीवाल से सटाकर खड़ा कर दिया और अपना मुंह उनके कण के पास ले जाकर बोलै.

मैं- कितने नखरे करती है तू साली. बोल रहा हूँ न की मनीषा अपने कमरे में है. थोड़ी देर में मैं चला जाउगा.

इतना बोलकर मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिए और उनकी गार्डन को चाटने लगा. और अपने एक हाँथ से दीदी की गांड को दबाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने पर दीदी फिर से मस्त होने लगी और लम्बी लम्बी साँस छोड़ने लगी. मैंने अपना मुंह उनके कण के पास लेकर कहा.



मैं- सरिता तू सच में एकदम तूंच मॉल है. ऊपर से तेरी ये कातिल गांड. बहुत मज़ा आएगा तुझे छोड़ने में.

इतना कहकर मैंने दीदी को दीवाल के सहारे थोड़ा सा झुका दिया. जिससे दीदी की गांड बहार की तरफ निकल आई तो मैं दीदी की गांड सहलाने लगा. थोड़ी देर गांड सहलाने के बाद मैंने एक थप्पड़ दीदी की गांड पर जमा दिया. Chataakkkkkkkkkkkkkkkkkk. जिससे दीदी उछलकर सीधी हो गई और बोली.

सरिता di-aaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhh. क्या कर रहा है अभी. मुझे मार क्यों रहा है.

मैं- सरिता तेरी गांड इतनी जबरदस्त है की मेरे हाँथ अपने कण्ट्रोल से बहार हो गया हैं. थोड़ी देर तुझे बर्दास्त करना hi होगा अब.

इतना कहकर मैंने दीदी को फिर से झुकाने के लिए कहा थो दीदी फिर से पहले की तरह झुक गई तो मैंने दीदी की गांड पर थप्पड़ मरना शुरू किया पहले धीरे धीरे, फिर तेज़, और तेज़, और तेज़ थप्पड़ मरने लगा, हर थप्पड़ के साथ chaaaataaaaakkkkkkkkkkkk chaataaaaaaaaakkkkkkkkkkkk की आवाज़ आते और दीदी सिसकते हुवे कराहने लगती.



सरिता दी- aaaaaaaauuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhh. Oohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaooooooooohhhhhhhhhhhhhh मत कर अभी दर्द हो रहा है. छोड़ दे मुझे.

थोड़ी देर दीदी की गांड पर थप्पड़ मरने के बाद मैंने दीदी को दीवार से हटाया और अपनी तरफ घुमा कर उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आँख माधोसी के कारन लाल हो गाइट hi. उनके गाल सुर्ख हो गए थे. मैंने अपने होंठ आगे बढाकर दीदी की दोनों आँखों और गलो पर किश करते हुवे पूछा.

मैं- सरिता. क्या मैं जो कुछ तुम्हारे साथ कर रहा हूँ वो तुम्हे बुरा लगता है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी आँखों में देखा फिर अपना सर झुककर धीरे से कहा.

सरिता दी- नहीं

मैं- तो क्यात ुम सच में मुझसे छुड़वाना चाहती हो.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmm

मैं- लेकिन मैं छोड़ते समय बहुत गन्दी गन्दी बाटे करता हूँ. बहुत रगड़ रगड़ के छोड़ता हूँ. तुम नाराज़ तो नही होगी मुझसे.

सरिता दी ने फिर से नज़र उठाकर मेरी आँखों में देखा. दीदी के ऊपर मेरी बातो का भी असर हो रहा था. उनकी सांसे तेज़ चलने लगी थी. मेरी बात सुनकर दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और निचे देखना लगी.

मैं- बताओ न सरिता अगर मैं तुम्हे रगड़ रगड़ कर छोडूंगा तो तुम नाराज़ तो नहीं होगी मुझसे.

सरिता दी- (धीरे से) नहीं होउंगी.

मैं- तुम बहुत छुडासी हो न सविता. एकदम सच सच बताना.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. दीदी की सहमति देख कर मैंने भी जोश में आकर दीदी की दोनों चूचियों को अपनी मुठी में भरकर जोर से मसल दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. बहुत्तत्ततत्तत्त दररररडडडडडडडड हूँ rahaaaaaaaaaa haiiiiiiiiii bhaaaaaaaaaiiiiiiiiii. Dhireeeeeeeeeeeee dabaaaaaaaaoooooooooooo uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं- क्या तुमको ाचा नहीं लगता क्या सविता. जब मैं जोर से दबाता हूँ.

सरिता दी- (धीरे से) अच्छा तो लगता है लेकिन बहुत दर्द होता है.

मैं- इसी दर्द में तो मज़ा है सरिता. और तुम इतनी ज्यादा छुडासी हो की तुम्हे नार्मल चुदाई में बिलकुल भी मज़ा नहीं आएगा. तुम्हे तो रफ़ तरीके से छोड़ना पड़ेगा.

दीदी मेरी बात सुनकर मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखों में मुझे इस समय हवस hi हवस नज़र आ रही थी. मैं दीदी की आग को और भड़काना चाहता था. इसलिए मैंने उनके अपने साइन से सत्ता लिया और उनकी गार्डन को चूमने चाटने लगा. साथ hi अपना हाँथ दीदी की गांड पर रखकर उसे दबाने लगा. दीदी मेरे गले लगे हुवे लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. थोड़ी देर तक उनकी गार्डन को चूमने चाटने के बाद मैंने अपना होंठ उठाकर उनके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. अपने हाँथ से उनकी गांड भी दबाता रहा. फिर मैंने अपने एक हाँथ को उठाकर उनकी गांड पर एक थप्पड़ मर दिया.



दीदी aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuucccccccchhhhhhhh की आवाज़ दे साथ मेरे सर को पकड़कर रोगलय तरीके से किस करना शुरू कर दिया. मैं भी दीदी का साथ देने लगा लगभग 10 मिनट दीदी मुझे किश करती रही और अपनी गांड एक हाँथ से दबवाती रही और एक हाँथ से थप्पड़ कहती रही. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे होंठो से अपना होंठ हटा लिया.

मैंने एक हाथ उनकी गांड से उठाकर आगे लेकर दीदी की छूट पर लोअर के ऊपर से रख दिया और दबाने लगा. दीदी का लोअर गिला हो गया था. थोड़ी देर छूट दबाने के बाद मैंने दीदी की छूट मुठी में भर भर कर दबाने लगा. दीदी बस sssssssssssssssssssssssssss sssssssssssssssssssssss सीसियति रही. कुछ देर बाद मैंने अपना हाँथ उठाकर दीदी की चुकी पर रख और दीदी के सर को पीछे की तरफ झुककर अपने लुंड को छूट के पास एडजस्ट कर उनकी चूचियों को जोर से मसलते हुवे अपने लुंड को उनकी छूट पर थोक दिया दीदी चिल्ला उठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii धीरीईईई कररररररररर मुझेईईई डरडडडडडडड होताआआआ हैईईईई. तुझेईईई जोऊ करनाआए hiaaaaaaaaaaaa आराममममममममम से करररररर ooooooooooohhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyyyyy.

अभी दीदी ने इतना hi कहा था की मुझे बहार किसी के कदमो की आहात सुनाई पड़ी. मैंने तुरंत दीदी को छोड़ दिया और दिया और अलग होकर खड़ा हो गया. मेरे इस तरह अचानक अलग होने से दीदी ने मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. तू मुझसे दूर क्यों हैट गया.

मैं- कुछ नहीं दीदी वो मुझे कुछ काम याद आ गया अचानक.

इतना बोलकर मैंने कमरे का दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-88

जब मैंने कमरे के बहार किसी के पैरो की आहात सुनी तो मैं दीदी से अल्लाह होकर तुरंद दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था. घर में इस समय मनीषा hi थी. लेकिन उसके कमरे का दरवाज़ा बंद था. तो मैंने इसे अपना वहां मानकर इग्नोर कर दिया और वापस दीदी के पास आ गया और दीदी को नींद को दवा देते हुवे बोलै.

मैं- दीदी इसको अपने पास रखो और रात को दूध में मिलकर सबको पीला देना. उसके बाद हमें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.

सरिता दी- लेकिन ये है क्या.

मैं- ये नींद को गोलिया हैं. इसको खाने के बाद सभी आराम से सो जायेंगे. और हम दोनों मज़ा करेंगे. कोई भी हमें डिस्टर्ब करने वाला नहीं होगा.

सरिता दी- लेकिन ये गलत है.

मैं- अगर तुम्हे अपने जिस्म की प्यास बुझानी है तो तुमको ये करना hi पड़ेगा. बाकि तुम्हारी मार्गी. अब मैं जा रहा हूँ. तुम कुछ देर सो लो क्योंकि आज मैं तुम्हे पूरी रात सोने नहीं दूंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और दूसरी तरफ देखने लगी. मैं भी दीदी की कमरे से निकलकर अपने कमरे में चला गया. कमरे में आने के कुछ देर बाद मुझे प्यास लगी तो मैंने जग में देखा तो उसमे पानी नहीं था तो मैंने जग उठाया और पानी लेने किचन की तरफ चल पड़ा. जैसे hi मैं किचन में पंहुचा तो मैंने देखा की मनीषा किचन में पहले से hi मौजूद है. उसने एक सफ़ेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी जो उसकी जांघो तक hi थी. जिसके अंदर उसकी पैंटी छिपी हुई थी.



मैं तो मनीषा के इस रूप को देखकर जैसे जैम सा गया. मैं किचन के दरवाज़े पर खड़ा उसे एकटक देखने लगा. उसके हाँथ में एक पानी की बोतल. जब मनीषा ने मुझे देखा तो वो पानी पिने लगी. लेकिन कुछ इस तरीके से की वो लगातार मेरी hi तरफ देख रही थी और मुंह खोलकर बोतल ऊपर कर पानी ऊपर से मुंह में दल रही थी. जिसके कारन 90% पानी उसके मुंह में न जाकर बहार निकल रहा था. और वो बहकर उसके कपडे के अंदर समां जा रहा था. तोड़ी देर में वो बोतल खली हो गई तो मनीषा ने दूसरी बोतल निकल ली और फिर से वैसे hi पिने लगी

लेकिन अब नज़ारा बिलकुल बदल चुक्का था. और उस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा. क्योंकि पानी उसकी शर्ट पर गिरकर उसे गिला कर चुके. जो उसकी चूचियों पर चिपक गए था. उसकी चूचिया हल्का हल्का दिखने लगी थी.



उसने शर्ट के निचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी जिसके कारन उसकी चूचिया पूरी नंगी hi दिख रही थी. दूसरी बोतल का पानी भी 90% बहार hi गिर रहा था जिससे उसका t-shirt और भी गिला हो गहा था और उसकी चूचिया एकदम नंगी दिखने लगी थी. इस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा.

मनीषा लगातार मेरी तरफ hi देखकर पानी पि रही थी. मैं उसके इस कामुक रूप को देखकर अपने लुंड पर हाँथ रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा भी मुझे लुंड सहलाते हुवे देख रही थी. जब दूसरी बोतल भी खली हो गई तो मनीषा ने बोतल सेल्फ पर रख दी और मुझे लुंड सहलाता हुआ देखने लगी. उसके होंठो पर हलकी सी मुस्कान थी. वो धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आने लगी. पहले तो मैं उससे लगभग 12 फिट की दूरी पर खड़ा होकर उसकी नंगी चूचिया देख रहा था. लेकिन जब वो चलकर मेरे करीब आ गयी तो उसकी चूचियों को इतने पास से देखते hi मेरी हालत ख़राब हो गई. मेरा गाला एकदम सुख गया. मैं अपने होंठो पर अपनी जीभ फिरने लगा. क्योंकि उसकी चूचिया एकदम नंगी दिख रही थी. मनीषा ने मेरे पास आकर मेरे लुंड को कुछ देर देखा फिर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.



मनीषा- क्या हुवा भैया प्यास लगी है क्या.

मैं (उसकी चूचियों को देखते हुवे). हाँ बहुत ज्यादा.

Manisha-(apni चूचियों को आगे निकलकर) तो देख क्या रहे हो अपनी प्यास बुझा लो.

मैं- तू मेरी प्यास बुझाएगी न मनीषा.

मनीषा- हाँ भैया क्यों नहीं बुझाऊँगी. आप एक बार कहिये तो.

मनीषा की बात सुनकर मैं बेकाबू हो गया और अपने लुंड को सहलाना छोड़कर मनीषा को पकड़कर दीवाल से सत्ता दिया और अपने हांथो में उसकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा और अपने होंठो को उसके होंठो पर रखकर किश करने लगा. मनीषा मेरे इस हमले से छटपटाने लगी और अपने आप को छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा और दोनों हांथो में उसकी चूचिया अचे से पकड़कर पूरी ताकत के साथ मसल दिया मनीषा के मुंह से चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyy mainnnnnnnnnnnn marrrrrrrrrr gaaiiiiiiiiiiiiiiii. Hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyy बहुत दर्द्द हूँ रहा हैईईईई.

इतना बोलकर उसने पूरी ताकत के साथ मुझे धक्का दे दिया और गुस्से से चिल्लाकर बोली.

मनीषा- ये क्या बेहूदगी है भैया. मैं तुम्हारी बहन हूँ तुम्हे शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ गन्दी हरकत करते हुवे. मैं तुम्हे कितना प्यार करती हूँ. और तुम मुझे हवस की नज़र से देखते हो.

मैं- सॉरी मनीषा. लेकिन मैंने ये जानबूझकर नहीं किया. आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो तो मैं खुद को रोक नहीं पाया.

मनीषा- इसका क्या मतलब है. मैं प्यारी लग रही हूँ तो आप मेरी इज़्ज़त के साथ खेलोगे.

मैं- नहीं मनीषा तुम गलत समझ रही हो. मैं तो तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हारे बारे में कभी गलत नहीं सोच सकता.

मनीषा- प्यार तो आप दोनों दीदियो से भी बहुत करते हैं. है न.

मनीषा ने फिर दोनों दीदी का नाम लिया था. मैं फिर से सोच में डूब गया. मुझे सोचता देखकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अब प्यास नहीं लगी क्या भैया. जाओ जाकर पानी पि लो. और ऐसी उलटी सीधी हरकते करना बंद कर दो. नहीं तो मैं मां पापा को सब बता दूंगी. मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ. मैं बात नहीं करुँगी आपसे अब.

इतना बोलकर मनीषा अपने कमरे में चली गयी. और मैं ठगा सा वही खड़ा मनीषा को जाते हुवे देखता रहा. क्या लड़की है यार ये मनीषा. मेरी समझ से बिलकुल परे है. मैं पानी पि कर अपने कमरे में आया और कुछ देर बैठा रहा. फिर मैंने अभी के लिए मनीषा से सॉरी बोलने के लिया उसके कमरे की तरफ चल दिया.

उसके कमरे के पास पहुंचकर मैंने दरवाज़ा नॉक किया तो उसने अंदर आने के लिए कहा. जब मैं अंदर गया तो मुझे एक और झटका लगा. मैं तो मनीषा को बस देखता hi रह गया. मेरा लुंड फिर से खड़ा होकर झटके मरने लगा. अंदर मनीषा ब्रा और लोअर में कड़ी थी. मेरे अंदर जाने के बाद मनीषा मुझे देखने लगी. मैं तो बस आँखे फाडे मनीषा के इस अनुपम सौंदर्य का दीदार करने लगा. मेरा हाँथ कब मेरे लुंड पर पहुंचकर उसे सहलाने लगा. मुझे पता hi नहीं चला.



मनीषा भी मेरे लुंड को देख रही थी. उसने मेरे आने के बाद भी ब्रा के ऊपर अभी तक कुछ भ्ही नहीं पहना था. थोड़ी देर बाद मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने मनीषा की तरफ देखा. लेकिन वो तो मेरे लुंड के सम्मोहन में खोई हुई थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखकर जब उसने अपनी नज़र उठाई तो मुझे देखकर हल्का सा शरमाई और मुस्कुराने लगी. मैं चलते हुवे उसके पास पंहुचा और नज़दीक से उसकी चूचियों को देखने लगा. जब उसने मुझे अपनी चूचियों की तरफ घूरता पाया तो उसने कहा.

मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो भैया.

मैं- मनीषा कसम से तू बहुत खूबसूरत है. और इन कपड़ो में तू बहुत सेक्सी लगती है.

मनीषा- कुछ तो शर्म करो भैया. अपनी बहन को सेक्सी बोल रहे हो. और अगर मैं खूबसूरत होती तो अप्प दिन रात दोनों दीदियो से न चिपके रहे होते.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू सच में सेक्सी है. मैं तो पागल हूँ जो कभी तुम्हारी ख़ूबसूरती पर दयँ नहीं दिया. तू कितनी जवान हो गई है मनीषा.

मनीषा- भैया ये क्या बोल रहे हैं आप. अपनी बहन की जवानी पर नज़र रखते हो आप. सुधर जाओ नहीं तो पापा को बोल दूंगी मैं.

मैं- तू हमेशा पापा से बताने की धमकी क्यों देती रहती है. मैंने कौन सी बुरी हरकत की है तुम्हारे साथ.

मनीषा- तुम्हे शर्म नहीं आती भैया. मैंने अभी तक कपडे भी नहीं पहने हैं और तुम मेरे कमरे में आ गए.

मैं- लेकिन मैं नॉक करके आया था न.

मनीषा- लेकिन जब आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हु तो आपको चले जाना चाहिए था. लेकिन नहीं. बहन की जवानी देखनी थी आपको. आने दो पापा को आज मैं उन्हें सब बता दूंगी.

मैं- सॉरी मनीषा. वो तूने कहा नहीं जाने के लिए इसलिए मैं नहीं गया. लेकिन मेरा कोई गलत इंटेंसिव नहीं है तुझे लेकर.

मनीषा- मुझे पता है भैया की आपका क्या इंटेंसिव है. वैसे एक बात सच सच बताना भैया. क्या मैं सच में खूबसूरत लगती हूँ.

मैं- सच में तू बहुत hi खूबसूरत है. तुझे देखकर तो अचे अचे उठकर खड़े हो जाते हैं. (मैंने ये बात मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपने लुंड को सहलाकर बोलै था. जिसे मनीषा ने भी देख लिया. और शर्माकर दूसरी तरफ देखने लगी)

मनीषा- अच्छा भैया ये बताओ की मैं अभी ज्यादा अच्छी लग रही हूँ या किचन में ज्यादा अच्छी लग रही थी.

मैं मनीषा की बात सुनकर उसे hi देखने लगा और सोचने लगा की इसके मन में क्या चल रहा है. कभी एकदम नाराज़ हो जाती है तो कभी ऐसे सवाल पूछती है. मैंने भी अपने लुंड को मसलते हुवे कहा.

मैं- तू दोनों जगह hi खूबसूरत लग रही थी. किसी को तू अभी खूबसूरत लग रही है (फिर मनीषा की आँखों में देख कर अपने लुंड की तरफ इशारा करके) किसी को तू किचन में खूबसूरत लग रही थी.



मनीषा समझ गई की मैं क्या कहना छह रहा हूँ तो उसने थोड़ा नाराज़गी के साथ मुझे देखते हुवे कहा.

मनीषा- आप सच में बहुत कमीने हो भैया. आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है. लेकिन मैं आपके हाँथ नहीं आने वाली. इतना याद रखिये.

मनीषा के ये कहते hi मुझे पूरा यकीं हो गया की मनीषा को दोनों दीदी और मेरे बारे में सबकुछ पता है. दोनों दीदियो के साथ होने पर मैंने ऐसा कई बार महसूस किया था की कोई आस पास है. लेकिन मैंने हमेशा इग्नोर किया था इस बात को, मनीषा कई बात बातो बातो में मुझे इशारा देती रही की उसे सब बता है. लेकिन मैं हमेशा कंफ्यूज था. लेकिन अभी उसके कहे हुवे एक शब्द से ये कन्फर्म हो गया था की उसे सब कुछ पता है.

मनीषा को कहना चाहिए था की आप की गन्दी नज़र मुझपर है लेकिन उसने कहा था की आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है.

मतबल उसको पता है की मैं दोनों दीदी को पता चुक्का हूँ. अगर मनीषा को सब पता था तो उसने कभी मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया. अगर मां पापा को नहीं बताया तो काम से काम दोनों दीदियो को बता देती इंदिरेक्ट्ली की उसे सब पता है. मैंने इन सब बातो पर गहन सोचविचार करके एक फैसला किया. की अब मैं मनीषा के साथ भी आगे बढूंगा वो भी खुल कर के. अगर इसे बताना होता तो ये अब तक बता चुकी होती लेकिन इसको भी इन सब में शायद मज़ा आ रहा है. इसलिए इसने अभी तक किसी को कुछ नहीं बताया. मैं अभी इसी सोच में डूबा हुवा था की मुझे मनीषा की आवाज़ सुनाई पड़ी.

मनीषा- क्या हुवा भैया. किस सोच में डूब गए.

मैं- कुछ नहीं बस तेरे बारे में कुछ सोच रहा था. तेरे भले के लिए

मनीषा- अरे वाह आप मेरे भले के लिए सोच रहे थे. क्या बात है.

मैं- तेरा भाई हूँ मैं नहीं सोचूंगा तो और कौन अच्छा सोचेगा अपनी बहन के बारे में.

मनीषा- ये तो आपने बिलकुल सही कहा. आप अपनी बहनो के बारे में बहुत अच्छा सोचते है. तो मुझे भी बताइये की आप क्या सोच रहे थे.

Main-jane दे मनीषा मैं नहीं बताने वाला हूँ कुछ भी.

मनीषा- बताओ न भैया. क्या सोच रहे थे मेरे बारे में.

मैं- मैंने कहा नहीं बताऊंगा. तू फिर से बिना मतलब के नाराज़ हो जाएगी. और में तुझे नाराज़ नहीं करना चाहता.

मनीषा- बताइये न भैया. मैं सच में नाराज़ नहीं होउंगी. प्रॉमिस.

मैं- ठीक है मनीषा मैं बता तो दे रहा हूँ लेकिन अगर तुम नाराज़ हुई तो मैं बात नहीं करूँगा तुमसे.

मनीषा- पक्का नहीं नाराज़ होगी. आप बताओ.

मैं- देख मनीषा. तू बहुत खूबसूरत है. इसमें कोई डाउट नहीं है और इन कपड़ो में तू और भी खूबसूरत नज़र आ रही है.

मनीषा (शर्माकर मुझे देखते हुवे) सच भैया थैंक यू.

मैं- तुझे देख कर लगता है की तू अब पूरी जवान हो गई है. और मुझे ऐसा लगता है की तू ज्यादा दिन अपनी जवानी के बोझ को नहीं संभल पाएगी. इसे सँभालने के लिए किसी हट्टे काटते मर्द को ढूंढकर तेरी बहुत जल्दी शादी करवानी पड़ेगी. जिससे तेरी इस मदमस्त जवानी को कोई संभाले वाला मिल जाएगा.



मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और थोड़ा बनावटी गुस्से के साथ मेरी तरफ देखा. तो मैंने मासूम सा फेस बनाकर आँख मार दी. तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो बोली.

मनीषा- क्या भये कैसी बाते कर रहे हो. मन की मैं जवान हो गई हूँ. लेकिन इतनी भी नहीं हुई हूँ की आप मेरी शादी करवाने की बात करे. अभी मैं शादी के लिया बहुत छोटी हूँ.

मैं- मुझे तो नहीं लगता की तू अभी छोटी है. सब कुछ तो बड़ा बड़ा दिख रहा है.

मेरी बात सुनकर मनीषा समझ गई की मैं क्या कह रहा हूँ तो उसने मुझे घूरकर देखा और कहा.

मनीषा- भैया बहुत हो गया अब. मेरे साथ ऐसी बाते मत करिये नहीं तो मैं पापा को बोल दूंगी.

मैं- देखा इसीलिए मैं नहीं बोल रहा था. मुझे पता था की तुम नाराज़ हो जाओगी.

मनीषा- मैं नाराज़ नहीं हूँ भैया. लेकिन फिर भी सोचो मैं आपकी छोटी बहन हूँ.

मैं- बहन है तभी तो मुझे तुम्हारी इतनी फ़िक्र है. मैं चाहता हूँ की तुम अपनी लाइफ खूब अचे से इंजॉय करो.

मनीषा- भैया मैं तो आप के साथ अपनी लाइफ खूब इंजॉय करना चाहती हूँ, लेकिन आप तो दीदियो में बस्सी रहते हैं. आप मुझपर ध्यान hi नहीं देते.

मैं- अच्छा मनीषा अब मैं तुझपर पूरा ध्यान दूंगा.

और इतना बोलकर मैं उसकी चूचियों को घूरने लगा. मुझे अपनी चूचियों को घूरता पाकर वो शर्मा गई और बोली.

मनीषा- ये क्या है भैया. इतना क्यों घूर रहे हो.

मैं- तुम्ही ने तो अभी कहा की मैं तुमपर ध्यान hi नहीं देता. इसलिए अब तुमपर ध्यान दे रहा हूँ.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्माकर हंस पड़ी. मैं भी उसके साथ हंस दिया. थोड़ी देर बाद मैं उससे बोलै.

मैं- एक बात और बोलू मनीषा. लेकिन बुरा मत मन्ना.

मनीषा- ठीक है. मैं बुरा मानकर कर भी क्या सकती हूँ. बोल दो.

मैं- सच में तू एकदम जवान हो गई है. और एकदम मॉल लगने लगी है.

मेरी बात सुनकर मनीषा मेरे पास आई और मेरे हाँथ पर मरने लगी. और मुझे धक्का देखर दरवाज़े के पास ले आई और दरवाज़ा खोलकर मुझे बहार जाने का कहकर वापस कमरे में चली गई. मैं फिर से उसके पीछे पीछे गया और उसके कंडे को पकड़कर अपना मुंह उसके कण के पास लेजाकर उससे कहा.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू जवान होकर एकदम तूंच मॉल बन गई हो.



इतना कहकर मैं उसे छोड़कर बहार भगा. मेरी बात सुनकर मनीषा मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन ब्रा में होने के कारन दरवाज़े पर hi रुक गई और मुझसे बोली.

मनीषा- भैया मैं आपको किसी दिन बहुत मरूंगी. आने दो पापा को मैं आज शिकायत करूंगी आपकी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-89

मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू जवान होकर एकदम तूंच मॉल बन गई हो.

इतना कहकर मैं उसे छोड़कर बहार भगा. मेरी बात सुनकर मनीषा मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन ब्रा में होने के कारन दरवाज़े पर hi रुक गई और मुझसे बोली.

मनीषा- भैया मैं आपको किसी दिन बहुत मरूंगी. आने दो पापा को मैं आज शिकायत करूंगी आपकी.

अब आगे.

मनीषा के कमरे से निकलकर मैं अपने कमरे में चला गया और अपना मोबाइल निकलकर दीदी से बात करने आगा. थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने सोना ठीक समझा और बिस्तर पर लेटकर सो गया. शाम को मेरी नींद खुली मैं फ्रेस होकर निचे आया तो हॉल में मां, पापा, सरिता दी और मनीषा थे. वो कुछ आने जाने की बात कर रहे थे. मैं भी जाकर उनके पास बैठ गया और पापा से कहा.

मैं- कहा जाने की बात हो रही है पापा.

पापा- वो क्या है न की कल सुबह तेरी सोनम दीदी (मौसेरी बहन) को देखने के लिए लड़के वाले आ रहे हैं और अगर उन्हें सोनम पसंद आ गई तो कुछ हाँथ में रख कर रिश्ता पक्का भी कर denge.lekin तेरी मौसी की तबियत ख़राब है और तेरे मौसा घर में अकेले हैं. कर सूटेरदाय है और छुट्टी भी है तो तेरे मौसा ने फ़ोन किया था की मैं तेरी मम्मी और सरिता तीनो वह आ जाये. जिससे उनकी हेल्प हो जाएगी.

पापा के मुंह से सरिता दीदी के जाने की बात सुनकर मुझे बहुत दुःख हुवा. मैंने जब दीदी की तरफ देखा तो उनका भी फेस लटक गया था. कहाँ तो आज हम दोनों ने चुदाई का प्लान बनाया था और कहा दीदी को मौसी के यहाँ जाना पद रहा है, लेकिन मैं कुछ कह भी नहीं सकता था. इसलिए मजबूरन मुझे कहना पड़ा.

मैं- ये तो बहुत ख़ुशी की बात है. आप सबको जाना चाहिए.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- लेकिन पापा मैं नहीं जा पाऊँगी. मुझे कुछ नोट्स बनाने हैं. जिसके लिए मुझे बहुत म्हणत करनी पड़ेगी. अगर मैं उधर चली गई तो मेरा काम अधूरा रह जाएगा.

पापा- लेकिन सरिता सोनम ने बड़े प्यार से तुझे बुलाया है और तू मन कर रही है उसे कितना ख़राब लगेगा.

पापा की बात सुनकर मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो उनका चेहरा और लटक गया था. उन्होंने मुझे आँखों के इशारे से कुछ करने के लिए कहा लेकिन मैं मजबूर था. तभी मेरी नजर मनीषा पर गयी तो वो हम दोनों को देखकर एक सरारती मुस्कान मुस्कुरा रही थी. मैंने तुरंत अपनी नज़र निछि कर ली. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- क्या पापा आप भी. जो नहीं जाना चाहता है उसके पीछे जबरदस्ती पड़े हुए हैं आप और जो जाना चाहता है आपने उससे पूछा भी नहीं.

पापा- तुम्हे चलना है क्या.

मनीषा- और नहीं तो क्या. दीदी नहीं जाना चाहती तो उनको रहने दीजिये मैं चल रही हूँ दीदी की जगह. क्यों दीदी ठीक है न अब.

और इतना कहकर मनीषा ने एक शरारती मुस्कान के साथ मुझे देखा. मनीषा की बात सुनकर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई लेकिन मैं अपनी खुसी वैसे hi दबाये बैठा रहा. मुझे ऐसे देखकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अरे भैया आपको क्या हुवा. अब तो खुश हो जाइये. दीदी नहीं जा रही हैं.

मनीषा की बात सुनकर मैं और दीदी एकदम चौक पड़े. मैंने इसलिए की कही ये अपना मुंह न खोल दे और दीदी इसलिए की मनीषा ने ऐसा क्यों बोलै. मैंने मनीषा से कहा.

मैं- मैं क्यों दुखी रहूँगा. चाहे तुम जाओ चाहे दीदी जाये.

मनीषा- अरे मेरे प्यारे भैया. मैं अगर यहाँ रुक गई तो आप भूखे रह जाओगे. क्योंकि मैं आपको कुछ नहीं दे पाऊँगी. मगर दीदी रुख रही हैं तो अब आप भूखे नहीं रहेंगे. दीदी कई तरह की चीजे आपको खिलाती रहेंगी और आपको प्यास भी नहीं लगने देंगी. मैंने कई बार देखा है की जब कभी आप पानी ले जाना भूल जाते थे तो दीदी आपको पानी दे जाती थी. और दीदी को बहुत पकवान बनाना आते हैं तो आपको भूख भी नहीं लगेगी.

मनीषा ने जो कुछ भी कहा. उसका मतलब मैं और मनीषा hi समझ रहे थे उसकी बात सुनकर तो ये साफ हो गया की इसे सबकुछ पता है और इसने किसी को नहीं बताया. मतलब इसके मन में कुछ न कुछ खिचड़ी पाक रही है. मैं यही सब सोच रहा था की तभी दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

सरिता दी- (मुस्कुरा कर) थैंक यू मेरी प्यारी बहन.

मनीषा- लेकिन इसके बदले में मुझे कुछ चाहिए आपसे. और मैं जो कुछ भी मांगूंगी आपसे आप मन नहीं करेंगी.

सरिता दी- ठीक है मनीषा तू जो किछ भी मांगेगी मैं मन नहीं करुँगी.

मनीषा- ऐसे नहीं एक बार अचे सो सोच लो और सबके सामने वडा करो की मैं जो कुछ भी मांगूंगी आप मुझे देंगी आप मन नहीं करेंगी.

सरिता दी- ठीक है मैं वडा करती हूँ की तू जो कुछ भी मुझसे मांगेगी मैं तुझे दूंगी.

मनीषा- ठीक है दीदी ये वडा आप पर उधर रहा. जब मुझे जरुरत होगी मैं मांग लुंगी.

मनीषा जाने के लिए तैयार हो गई थी और उन्हें अभी निकलने था तो सभी अपने कमरे में चले गे तैयार होने के लिए. अब हॉल में मैं अरु सरिता दी hi बचे थे. मैंने उनको देखा तो उनके चेहरे पर सुकून था. मैंने दीदी को छेड़ते हुवे कहा.

मैं- तो आपको पढाई करनी है आज. क्यों दीदी.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुराने lagi.lekin बोली कुछ नहीं. तो मैंने कहा.

मैं- तुम चिंता मत करो दीदी. आज मैं तुम्हारी पूरी तयारी करवा डोंगा. मैं तुम्हारा सेलेबस अपनी पेण्ड्रीवे लगाकर पूरी रात इस तरीके से याद करवाऊंगा की तुम ये सेलेबस कभी नहीं भूल पाओगी. और तुम इतनी परिपक्व हो जाओगी की तुम्हे कोई भी फेल नहीं कर सकता.

मेरी बात सुनकर सरिता दी मुस्कुराते हुवे अपने कमरे में जाने लगी. सीधी के पास पहुंचकर उन्होंने अपनी जीभ निकल कर मुझे दिखाई और चिढ़कर अपने कमरे में चली गई.



मैं वही हॉल में बैठ गया. थोड़ी देर बाद मां पापा और मनीषा तैयार होकर कमरे से बहार आ गए. मनीषा बहुत सुन्दर लग रही थी. सरिता दीदी भी निचे आ गाइट hi. सभी लोग घर के बहार आ गए तो मां हम दोनों को साथ में रहने और झगड़ा न करने की नसीहत देकर गाड़ी में बैठ गई.

मैं और मनीषा पास hi खड़े थे मैंने मनीषा से कहा.

मैं- मनीषा सच में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हूँ.

मिनिषा- किसको लग रही हूँ.

पहले तो मुझे उसकी बात समझ में नहीं आई और जब समझ आई की वो क्या कहना चाहती है तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. उसने गाडी में बैठने से पहले मुझसे कहा.

मनीषा- आल थे बेस्ट भैया. खूब अच्छे से खाना और दूध पीकर अपनी सेहत बनाना. दो दिन बाद आउंगी तो कमजोर नहीं लगने चाहिए आप.

इतना बोलकर उसने मुझे बहुत hi नशीली निगाहों से देखा और कार में बैठ गई तो पापा ने कार आगे बढ़ा दी.



मैं बस उसकी कही बात सोचने लगा. मतलब मनीषा ने जानबूझकर हम दोनों को मौका दिया. मतलब उसे कोई एतराज़ नहीं है हम दोनों के रिलेशनशिप का. ये सोचकर मैं बहुत खुश हो गया की चलो अब मनीषा भी धीरे धीरे लाइन पर आ रही है. फिर मैं घर के अंदर गया तो दीदी डाइनिंग टेबल पर बैठी थी अपनी अधनंगी चूचिया उसपर रखकर. मैं भी जाकर उनके पीछे खड़ा हो गया और उनके कंधे पर हाँथ रखकर उनसे कहा.

मैं- अब तो तुम खुश हो न. अब तो कोई घर पर नहीं है. अब तो मज़ा आएगा. क्यों दीदी.

मेरी बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली और पलटकर मेरी तरफ देखने लगी. उन्होंने सीरियस होकर मुझसे कहा.

सरिता दी- अभी क्या हम दोनों जो कर रहे हैं वो सही है. मतलब हम दोनों भाई बहन हैं.

मैं- क्या यार दीदी. तुम फिर से शुरू हो गई. भाई बहन तो हम हैं hi लेकिन साथ में एक मर्द और औरत भी हैं और इस समय हम दोनों प्यासे हैं. और हम दोनों को एक दूसरे की जरुरत है.

इतना कहकर मैंने दीदी को पकड़कर उठाया और सोफे की तरफ ले जाकर मैंने उन्हें सोफे पर बैठा दिया और उन्हें किश करने लगा. दीदी भी मेरे साथ देने लगी.



दीदी मेरे चेहरे को पकड़कर मुझे किश कर रही thi.thodi देर तक दोनों किश करते रहे जब हमारी सनस उखाड़ने लगी तो हमने एकदूसरे के होंठ छोड़ दिए. मैंने दीदी की आँखों में देखा तो उसमे एक खुमारी नज़र आई. कुछ देर तक दीदी की आँखों में देखने के बाद मैंने अपनी जीभ निकली और दीदी के होंठो पर फिरने लगा. दीदी ने भी कुछ देर बाद मेरे जीभ के स्वागत के लिया अपने मुंह खोलका मेरी जीभ को अंदर लेकर चूसने लगी. दीदी जोर जोर से मेरी जीभ चूस रही थी.

कुछ देर बाद दीदी ने मेरी जीभ छोड़ी और अपनी जीभ बहार निकलकर मेरे मुंह में घुसा दी. मैं भी दीदी की जीभ चूसने लगा. दीदी गरम होने लगी. उनकी जीभ चुने के बाद मैंने अपने एक हाँथ को उनकी लोअर के ऊपर रख दिया और छूट को सहलाने लगा. दीदी भी गरम होने लगी. थोड़ी देर तक छूट सहलाने के बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- सरिता तुमको अच्छा तो लग रहा है न.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmm

मैं- अपनी लवर उतर दो अब सरिता.

मेरे कहने पर दीदी ने मेरी तरफ देखा और कुछ देर बाद उन्होंने अपनी लोअर उतर दी. मैं फिर से दीदी के होंठ चूमने लगा. दीदी गरम हो कर एकदम वाइल्ड हो गई थी. वो जोर जोर से मेरे होंठ चूस रही थी. मैंने अपना हाँथ दोबारा दीदी की छूट पर रखा और उसे पंतय के अंदर डालकर उनकी छूट सहलाने लगा. मेरा हाँथ छूट पर लगते hi दीदी ssssssssssss ssssssssssssss ooooooooooooohhhhhhhhhhh की आवाज़ करने लगी. मैंने दीदी की छूट सहलाते हुवे अपनी एक ऊँगली उनकी छूट के मुंह पर रख दी और दीदी के होंठ चूसते हुवे अपनी ऊँगली दीदी की छूट में डालने लगा. मेरी ऊँगली छूट में जाने से दीदी कसमसाने लगी और अपने हाँथ से मुझे रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने फाॅर्स के साथ अपनी पूरी ऊँगली दीदी की छूट में पेल दी और अंदर बहार करने लगा. दीदी मेरे होंठ चूसते हुवे ssssssssssssss आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कर रही थी.

थोड़ी देर तक उनकी छूट में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकल ली और दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया और उनके होंठो को किश करने लगा. मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे अपना उनकी शर्ट की ऊपर की 3 बटन खोकर एक हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर उन्हें दबाने लगा.



मेरा लुंड पूरी तरह खड़ा होकर दीदी की गांड के निचे दबा हुवा था और हल्का हल्का दीदी की गांड में झटके मर रहा था. मैंने दीदी की चूचियों को दबाते हुवे मैंने उनके होंठ को फोरस्फुल्ली किस्स्स करना शुरू कर दिया. लगभग 10 मिनट तक दीदी के होंठ चूस चूस कर मैंने एकदम लाल कर दिया और जब मैंने अपना मुंह हटाया तो दीदी हांफने लगी. थोड़ी देर साँस दुरुस्त करने के बाद दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता दी- अभी तू कभी कभी जानवर बन जाता है. तुझे मेरे ख्याल hi नहीं रहता.

मैं- अभी कहा सरिता. जानवर तो मैं बिस्टेर पर बनता हूँ. और तेरा ख्याल है इसीलिए तो मैं कितने सोफ़्त्ल्य ये सब तेरे साथ कर रहा हूँ. नताशा के साथ तो मैं और भी बुरी तरीके से करता था.

सरिता दी- उसका नाम भी मेरे सामने मत लेना. मेरे भाई को उसने hi बिगाड़ा था. उसी ने तुझे हमसे दूर किया था.. वो तो अच्छा हुवे वो चली गई और तू सुधर गया और हमारे पास रहने लगा.

दीदी की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुवे दीदी की शर्ट की पूरी बटन कॉल दी और उसे उतारकर सोफे पर रख दिया. अब दीदी ब्रा और पंतय में मेरी गॉड में बैठी थी. मैं दीदी की चूचियों को देखकर एक्सीटेंड हो गया. कितनी बड़ी बड़ी चूचिया थी. मुझे तो उस छोटी सी ब्रा पर बहुत तरस आ रहा था. जिसने िस्नी बड़ी बड़ी चूचियों का भर सम्बल था. दीदी मुझे अपनी चूचियों को देखता पाकर कहा.

सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है अभी.

मैं- तुम्हारी चूचिया बहुत जालिम हैं दीदी. इसे इनपर तनिक भी तरस नहीं आता.

सरिता दी- किनपर तरस नहीं आता.

मैं- तुम्हारी चूचियों को इन ब्रा पर तनिक भी तरस नहीं आता. देखो तो अपना पूरा बोझ इस नन्ही सी जान पर डाला है. इसका तो डैम घुट जाता होगा इतनी बड़ी बड़ी चूचिया सँभालने में. और मुझे जलन भी होती है तुम्हारी ब्रा से. काश की इनकी जगह मैं हटा. तो काम से काम दिन रत तुम्हारी इन गदरायी और मदमस्त चूचियों से लिप्त रहता और इनका दीदार करता रहता.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. मैंने दीदी के चेहरे को देखते हुवे अपना चेहरा निचे किया और दीदी की चूचियों की घाटियों में रख कर उन्हें किश करने लगा और अपने दोनों हैंतो से दीदी की चुचायो को हल्का हल्का दबाने लगा. दी ने मेरे सर पर हाँथ रखकर मेरे चेहरे को अपनी चूचियों पर दबा लिया.



थोड़ी देर मैं ब्रा से बहार निकली दीदी की चूचियों और क्लीवेज को चूमता रहा चाटता रहा और हांथो से दीदी की चूचियों को दबाता रहा. फिर मैंने दीदी की चूचियों के ऊपरी भाग को मुंह में बहरा और दोनों हांथो से उनकी दोनों चूचियों को कसकर मरोड़ दिया और चूचियों पर दन्त काट लिए. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ क्या करररररर राहाआआ haiiiiiiiiii. इतनाआआआ जाअलीमंम

मैट बननननननननन मुझीीी दररदददददद होताआ haiiiiiiiiii ऊह्ह्ह्हह्ह uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiii ममा.

मैं फिर से दीदी की चूचियों चाटने लगा और हलके हांथो से दीदी की चूचियों को दबाता रहा. दीदी भी मस्त हो गाइट hi. वो भी गरम गरम सांसे छोड़ रही थी जो मुझे मेरे सर पर महसूस हो रही थी. थोड़ी देर उनकी चूचियों को चाटने के बाद मैंने फिर से दीदी की चुकी पर दन्त कटा और दोनों चूचियों को जोर से मसल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी.

सरिता दी- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaa bachaaaaaaoooooooooooo aooooooooooooooooooooooo aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa बहुत्तट्ठ डरडडडडडड होओओओओ राहाआआ हिअआअ. क्याआआ कररर रहःहा आ है अभीइइइइइइ. धीरीईईई करररर bhaaaiiiiiiiiiiii.

इसके बाद मैंने कुछ देर और दीदी की चूचियों से खेलता रहा. फिर मैंने दीदी को खड़ा कर दिया और उनकी नशीली आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी अब मेरा कुछ ख्याल करो. मेरे लोअर को उतरो.

दीदी ने मुझे उठाया और मेरी लोअर में ऊँगली फसकर उसे निचे कर दिया अब मैं दी के सामने ुंडेरवेरे में खड़ा था. दीदी मेरे लुंड को देखने लगी एकदम मदहोश हो गई मेरे लुंड को ुन्दरवरे में देखकर. थोड़ी देर बाद दीदी ने अपनी नशीली नजर उठाकर मुझे देखा तो मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी अब इसे थोड़ा प्यार करो अपने मुंह में लेकर.

सरिता दी- छहियी अभी ये कितना गन्दा होता है. और तुम उसे मुंह में लेने के लिए बोल रहे हो. मैं नहीं करुँगी ये.

मैंने- कुछ गन्दा नहीं होता दी. चुदाई करने में यही तो मज़ा है. और आप मेरे कहे अनुसार चलेंगी तो आपको बहुत मज़ा आएगा. एक बार तरय तो करो.

मेरे बार बार कहने के बाद दीदी मन गई. मैं ुन्दरवरे में दीदी के सामने खड़ा था. दीदी अपने घुटनो पर बैठ गई और कुछ देर तक मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड पर ुंडेरवेरे के ऊपर से फिरने लगी.



दीदी की जीभ उव के ऊपर से hi महसूस करके मैं आनंद के सागर में गोते लगाने लगा. मेरे मुंह से aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. दीदी मेरे लुंड को लगभग 5 मिनट कर उव के ऊपर से hi चाहती रही. मेरी उव दीदी के थूंक से गीली हो गई. थोड़ी देर और लुंड को चाटने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब मेरी उव भी उतर कर इसे प्यार करो. ये तुम्हारी प्यार के लिए तरस रहा है.

मरी बात सुनकर दीदी ने मेरी उव भी उतर दी. अब मैं दीदी के सामने निचे से नंगा खड़ा था. मैंने दीदी को खड़ा किया और उन्हें लेकर डाइनिंग टेबल के पास आ गया दीदी बस मुझे hi देख रही थी की मैं क्या करने वाला हूँ. मैंने भी दीदी को देखते हुवे अपना लुंड डाइनिंग टेबल पर रख दिया और दीदी को लुंड चाटने के लिए कहा. दीदी मेरी बात सुनकर मेरी आँखो में देखते हुवे मेरे लुंड पर अपनी जीभ रख दी और चाटने लगी. मेरे मुंह से ssssssssshhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. दीदी अपनी जीभ केवल टोपे की अस पास hi फिर रही थी तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- ऐसे नहीं सरिता अपनी जीब को इसके ऊपर तक फिराओ और अचे से छतो इसे.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरे आधे से ज्यादा लुंड के ऊपर जीभ फिरने लगी. मेरे मुंह से सिसकारी निकल रही है मैं अपना हाँथ दीदी के सर पर रखकर उनका सर सहलाने लगा और बोलने लगा.



मैं- हाँ सरिता ऐसी hi चत्तत्ते मेरे लुंड को. तुम बहुत अछठा कर रररहि हो. तुममम बहुतत्त जल्दीई लुंड चूसना भी सीख ज्जाओगईई. थोड़ा औरर ऊपर टक्क छातो. ट्टूमंत्रीय जीभहह बआहुत्त गरम हाई सरित्ता मेरी ज्जानंन्न. और त्तेज चायतू और तेज़्ज़ज़.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-90

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और तेज़ी से लुंड चाटने लगी. मेरा लुंड दीदी के थूक से पूरा सं गया था. थोड़ी देर और लुंड चटवाने के बाद मैंने अपना लुंड डाइनिंग टेबल से उठा लिया और दीदी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उनसे बोलै.

मैं- तुम बहुत अच्छा कर रही थी सरिता. अब मेरे लुंड को अपने गरम मुंह में लेकर इसे मज़ा दो.

सरिता दी- छःईंईईई मैं इसे मुंह में नहीं लुंगी. ये बहुत गन्दा है.

मैं- अब गन्दा कहा है तुमने तो इसे चाट चाट कर साफ कर दिया है.

सरिता दी- फिर भी मैं मुंह में नहीं लुंगी इसे. कितना बड़ा है ya.Tum कहो तो इसे किश कर सकती हूँ.

मैं- चलो न तुम्हारी बात और न मेरी बात. तुम बस इस टोपे को एक बार मुंह में लेकर चूस लो बस.

मेरी बात सुनकर दीदी ने कुछ देर तक फिर से मेरे लुंड को देखा और अपना मुंह खोलकर लुंड को सुपडे तक मुंह में भर लिया और उसपर अपनी जीभ फिरने लगी. मेरी तो आनंद के मरे जान hi निकल रही थी. मैं दीदी से बोलै



मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह सरिता बहुत बढ़िया कर रही होओओओ. कितना ग्राम मुँहहह हैई तुम्हाराआआआ. बहुत्तत्त अछ्हाआआआ थोड़ा जोरर लगाकर चुस्स्सो सरिता. बहुत्तत्त मज़ाआ आ रहःहा हैई.

दीदी ने थोड़ा जोर लगाकर मेरा लुंड चूसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर अपना सूपड़ा चुसवाने के बाद मैंने दीदी के मुंह से अपना लुंड निकल liya.mere लुंड निकलने से दीदी मुझे सवालिया नज़रो से देखने लगी. शायद उन्हें लुंड चूसना अच्छा लग रहा था. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्यों सरिता मज़ा आ रहा था क्या लुंड चूसने में.

मेरी बात सुनकर दीदी ने शर्माकर अपनी गार्डन निचे झुका ली, लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैंने दीदी को उठाकर खड़ा किया और उनको किश करने लगा. दीदी तो पहले से hi गरम थी. उन्होने भी किश में मेरा पूरा साथ दिया. किश करते- करते मैं दीदी को सोफे तक ले आया. मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर दीदी की पीठ सहलाने लगा. पीठ सहलाते सहलाते मैंने दी की ब्रा का हुक खोल दिया जिससे दीदी की पीठ पर ब्रा की दोनों पत्तिया लटक गयी. मैंने 5 मिनट तक फोरस्फुल्ली दीदी को किश करने के बाद अगल हुवा और दीदी की ब्रा को उनकी चूचियों से नोचकर निचे फेक दिया. अब दीदी मेरे सामने सिर्फ पंतय में कड़ी थी. मैंने दीदी की चूचियों को देखते हुवे कहा.



मैं- सच में सरिता. तेरी चूचिया बड़ी जालिम हैं. इसे मैं जितनी बार भी देखता हूँ. ये पहले के मुकाबले और बड़ी दिखती है. तेरी चूचियों के सामने तो अजंता एलोरा की कलाकृतिया भी फीकी पद जाती हैं.

मेरी मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर सरिता दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई. दीदी का चेहरा इस समय वासना और मुस्कान से मिलकर बहुत की कामुक लग रहा था. तभी दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दी- अब इतनी भी झूटी तारीफ मत करो अभी.

मैं- मैं झूठी तारीफ कभी नहीं करता सरिता. जो सच है वही बोल रहा हूँ. तेरी चूचिया सच में तारीफ के काबिल हैं मैंने आज तक ऐसी ठोस और कड़क चूचिया नहीं देखि. तेरी चूचिया इतनी जानलेवा हैं की इन्हे देखकर तो तेरे भाई का भी इमां दोल गया है.

अपनी तारीफ सुनकर दीदी शर्माकर मुस्कुराने लगी. फिर मैंने दीदी को धक्का देकर सोफे पर लिटा दिया और उनके पैरो के पास बैठ कर उनके पेअर को उठाकर अपनी गॉड में रख लिया और चूमने लगा. मेरे चूमने से दीदी के शरीर में एक लहार दौड़ गई. दीदी की छतिया ऊपर निचे होने लगी. मैं जीभ निकलकर उनके दोनों पैरो को चाटने लगा और चाटते चाटते ऊपर की तरफ जाने लगा. दीदी एक तक बस मुझे और मेरी हरकतों को देखने लगी. उनके पेअर चाटते हुवे मैं दीदी की जांघो तक पहुंच गया और दीदी की आँखों में देखते हुवे पंतय के ऊपर से ऊनि छूट पर अपना मुंह रख दिया. दीदी एकदम सिहर गई और बोली.

सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. वोओओओओ गड्ड्ढडीइइइइइइ जगहःहःहःहः हैईईईई व्हाआआआ सीई मुँहहहह हटाए ली.

मैं- नहीं सरिता तुम्हारा शरीर कुंदन है. तुम्हारे शरीर का कोई भी अंग गन्दा नहीं है.

ये कहकर मैं दीदी की छूट को पंतय के ऊपर से चाटने लगा. दीदी मचलने लगी. उनकी छूट पहले से hi बहुत पानी छोड़ चुकी थी जिससे दीदी की पंतय गीली हो गई थी. थोड़ी देर पंतय के ऊपर से छूट चाटने के बाद मैंने उनकी पंतय में ऊँगली फसे और एक झटके में उसे खींचकर उनके पैरो से निकलकर जमीन पर फेंक दिया. दीदी ने हाँथ बढाकर पंतय पकड़ने की कोशिश की. लेकिन तब तक पंतय उतर चुकी थी. दीदी ने अपने हाँथ से अपनी छूट धक् ली और शर्माकर अपनी आँखे बंद कर ली. मैंने दीदी को शरमाते हुवे देखा तो मैंने धीरे से कहा.

मैं- सरिता. शर्मा क्यों रही हो. अपने हाँथ अपनी छूट से हटाओ और अपने इस नायब हुस्न का मुझे दीदार करने दो.

मेरे कहने पर जब दीदी नई अपना हाँथ नहीं हटाया तो मैंने दीदी का हाँथ पकड़कर उनकी छूट से हटा दिया अब दीदी मादरजात नंगी मेरे सामने सोफे पर लेते हुई थी. मैंने दीदी के नंगे शरीर को देखते हुवे कहा.

मैं- वाह्ह्हह्ह सरिता. एकदम तराशा हुवा बदन है तुम्हारा. बनाने वाले ने बड़ी फुर्सत में तुमको बनाया है. तुम्हारे शरीर में कही भी एक्स्ट्रा फैट नहीं है सिवाय तुम्हारी चूचियों और गांड को छोड़कर. तुम्हरे इस जालिम और तराशे हुवे हुस्न को अगर कोई मुर्दा भी देख ले तो वो भी जिन्दा हो जाये. तुम्हारे इस जालिम जवानी को पाने के लिए तो मैंने साडी दुनिया सा लड़ जाऊ. तू सच में मॉल बन गई है सरिता.

अपनी तारीफ सुनकर दीदी एकदम से शर्मा गई और धीरे से बोली.

सरिता दी- क्या अभी कुछ भी बोलते रहते हो. मुझे शर्म आती है.

मैं- क्या सरिता. अपने भाई के सामने नंगी लेती हुई हो तो शर्म नहीं आ रही और मेरे बोलने से तुमको शर्म आ रही है.

इतना बोलकर मैंने निचे झुककर दीदी की छूट पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा. मेरे होंठ छूट पर लगते hi दीदी के शरीर ने झटका खाया. मैं दीदी की छूट चूसने के साथ साथ हाँथ ऊपर करके दीदी की चूचियों को भी दोनों हांथो से थम लिया और दबाने लगा.

छूट चूसते हुवे मैंने दीदी के चेहरे की तरफ देखा तो दीदी का चेहरा लाल हो गया था. उनकी नथुने फूल पाचक रहे थे. गाल गुलाबी हो गए थे. छूट चुसवाते हुवे जब दीदी एकदम छुडासी हो गई तो उन्होंने अपनी कोहनी को सोफे पर रखकर अपने सर को ऊपर उठाया और मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबाने लगी और बोलने लगी.

सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiii माआआआआ. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh बहुत्त मज़ाआ आए रहा हैई अभियई. चुस्सस्स्स्स मेरिइइइइइइइइ चूठ्टटट. कहाआआ जाआआ ीसीईईई. ैरररररररर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ चुस्स्सस्स मेरे भईईई. टूउउउउ बहुत्तट्ट्ट्ट अछ्हाआअ चुस्स्सस्स रहा हिअआइईईई मुझी बहुत्त मज़ाआआ आआ रहहह हिअआअ.

दीदी की बात सुनकर मैं अपने हाँथ दीदी की चूचियों से उठाकर दीदी की छूट सहलाने लगा और अपनी जीभ की नोक से दीदी की छूट चूसने लगा. दीदी के शरीर में मस्ती भरने लगी. मैंने एक हाँथ से दीदी की छूट को सहलाते हुवे दूसरे हाँथ से दीदी की छूट में ऊँगली दाल दी और छोड़ने लगा साथ hi दीदी की छूट को मुंह में भरकर खींच खींच कर चूसने लगा. लगभग 7 मिनट तक दीदी की छूट ऐसे hi चूसने से दीदी का शरीर अकड़ने लगा. वो अपने शरीर को बिस्टेर पर ऊपर निचे करने लगी और जोर जोर से चिल्लाने लगी.



सरिता दी- Ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiii ईईईई Abhiiii.aaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhh बसससससस अईसे हीईई oooooooohhhhhhhhhh भाईईई कहाआआआ jaaaaaaaaaa मेरिइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट को, मेरेईईई राजायआ भाईईईई ऐसी होई चाटूवूओ अपनीईई सरिताआए कोई छूट को. Uuuuuuuuuuufffffffffff भाईईई क्याआ कररर रहःहा हीआईईई कुट्ट्टीीी ऑररररर अंडररर दाआललललल्लापनीईई जीईएभहहह औरर चुसस्स ली मेरिइइइ चुउत्त्त का raaassssssss.ooooooooooohhhhhhhhhh सचहहहहह मीटीए मीरआ स्सह्ह्ह्हीीी कहतीई थीई. छुट्ट्ट्ट चुस्सस्स्स्सस्बानी मी बहुत्त माज़ाआ आता हैईईई. ऑररररर तेज़ज़्ज़ज़ चुस्स्स भाईईई मेंनननन आईईएई वालीईई होऊणननननननन चुस्स्स कुट्टी ऑरररररर जोरर सी. Aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhn.

मेरी छूट चूसै से दीदी चीखते हुवे झाड़ गयी. और सोफे पर संत होकर लेट गइईईई. थोड़ी देर बाद जब वो नार्मल हुई थो अपने आपको नंगा देखकर वो शर्माने लगी. और अपने कपडे ढूढ़ने लगी तो मैंने उनसे कहा.

Main-Abhi कहा जा रही हो सरिता. इसको कौन शांत करेगा.

मैंने अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुवे कहा. तो दीदी की नज़र मेरे लुंड पर पड़ी जो एकदम खड़ा हुवा था. मेरे लुंड को देखते हुवे दीदी ने अपने होंठो को दांतो से कटा और मुझसे कहा.



सरिता दी- उसको तू खुस hi शांत कर ले. अब मुझे किचन संभालना है. नहीं तो आज भूखा रहना पड़ेगा.

इतना बोलकर वो अपने कमरे में भाग गई. मैं भी लुंड हिलता बाथरूम में चला गया और अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत किया. और अपने कमरे में चला गया. मैंने सविता दीदी से बात करने की सोची और उनको फ़ोन कर दिया.

सविता दी- हैल्लो अभी.

मैं- ही मेरी मॉल सविता.

सविता दी- तू नहीं सुधरेगा कभी भी. और कैसे हो तुम.

मैं- मैं ठीक हूँ. तुम कैसी हो

सविता di-main भी ठीक hi हूँ. कब आ रहे हो मेरे पास.

मैं- मैं क्यों औ आपके पास. जीजा जी तो हैं न तुम्हारे पास.

सविता दी- उनका होना और न होना दोनों बराबर है. मुझे तो तेरी जरूरत है.

Main-meri या मेरे लौड़े की.

सविता दी- मुझे दोनों की जरुरत hai.jab तू आएगा तभी तो वो आएगा.

मैं- ठीक है सविता बहुत जल्द आने की कोशिश करता हूँ. कोई अच्छी सी फोटो भेजो.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने अपनी एक बहोतो ब्रा में भेजी. इस ब्रा में दीदी की चूचिया एकदम उभरकर बहार दिख रही थी.



मैं- क्या बात है सविता. तुम्हारी चूचिया तो din-b-din बढ़ती जा रही hain.lagta है जीजा कुछ झाड़ा hi म्हणत कर रहे हैं.

सविता दी- ये सब तेरी म्हणत का नतीजा है. अगर मैं एक महीने तक तेरे साथ अकेले रह गई तो मेरे सरे कपडे छोटे हो जाएंगे.

मैं- तो क्या हुवा सविता. मैं तुम्हारे लिए नए कपडे बनवा दूंगा. अपनी पसंद का. अच्छा एक और फोटो भेजो.

इस बार दीदी ने अपनी नुदे फोटो भेजी थी. जिसे देखकर मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया.



फिर मैंने दीदी से कुछ इधर उधर की बाते की और फ़ोन रख दिया. थोड़ी देर अपने कमरे में बैठा रहा तो मुझे सरिता दी ने खान ेके लिए बुलाया. मैं हाँथ मुंह डोकर निचे डाइनिंग टेबल पर बैठ गया.

दीदी खाना लेकर आई. और खाना रखने लगी. दीदी के झुकने के कारन उनका पल्लू चूचियों से हैट गया जिससे उनकी चूचिया अंदर तक दिखने लगी.



मैं दीदी की चूचियों को देखता रहा. फिर दीदी सीधी होकर सामने बैठ गई हम दोनों ने खाना खाया मैं खाना खा कर उठा और दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया. दीदी ने मुझे अपने पीछे खड़े देखा तो पीछे मुड़कर मुझे देखा मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे दोनों हाँथ उनके कंधे से आगे बढाकर उनकी चूचियों को पकड़कर कसकर मसल दिया. दीदी सिसक पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii माआ क्याआआआ करता है. थोड़ा धीरे से दबा. दर्द होता है.

Main-Abhi कहा दर्द दिया तुमको. आज की रात तुमको वो दर्द दूंगा की तुम उस दर्द में मिलने वाले मज़े को कभी भूल नहीं पाओगी. तुम अपने कमरे में जाकर अच्छी तरह तैयार हो जाओ और जो गिफ्ट मैंने दिया है उसे पहन लेना. उसके निचे कुछ मत पहनना. मैं 1 हॉर्स बाद तुम्हारे कमरे में आ रहा हूँ.

दीदी तो पहले से hi मुझसे छुड़वाने के लिए मरी जा रही थी. लेकिन मेरी बात सुनकर उन्होंने नखरा दिखते हुवे कहा.

सरिता दी- मुझे नहीं तैयार होना तुम्हारे लिए. और मेरे कमरे में hi क्यों. मैं तुम्हारे कमरे में भी आ सकती हूँ.

Main-(muskurakar). बात ये है न सरिता रानी की जब सब रहते थे तो मेरे कमरे में आती थी. लेकिन आज कोई नहीं है तो मैं तुम्हारे ऊपर ये एहसान तो कर hi सकता हूँ की तुम्हे मेरे कमरे में आने की तकलीफ न उठानी पड़े.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुराने लगी और मुस्कुरा कर बोली.

सरिता दी- बड़ा आया एहसान करने वाला. ये सब तू अपने लिए कर रहा है.

मैं- अरे नहीं सरिता रानी ये मैं तुम्हारे लिए कर रहा हूँ. तुम्हारे जिस्म की प्यास बुझाने के लिए कर रहा हूँ. ये एहसान नहीं है तो और क्या है.

सरिता di-(tunak कर). अगर तू मेरे ऊपर एहसान करने के लिए कर रहा है तो मुझे तुम्हारा एहसान नहीं चाहिए.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की चूचियों को फिर जोर से मसल दिया दीदी के मुंह seaaaaaaaahhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhh sssssssssssssssssss ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई की आवाज़ निकल गई. फिर मैंने दीदी से कहा.



मैं- अरे सरिता तुम तो बेकार में नाराज़ हो रही हो. अगर मैं तुम्हारे ऊपर एहसान कर रहा हूँ तो तुम भी तो मेरे ऊपर एहसान कर रही हो. मैं भी तो प्यासा हूँ. तो तुम मेरी प्यास बुझाना और मैं तुम्हारी प्यास बुझाऊंग.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई. मैंने झुककर दीदी की गार्डन को चूमने लगा और दीदी की चूचियों को मसलने लगा. जिससे दीदी गरम होने लगी और लम्बी लम्बी साँस लेने लगी. कुछ देर दीदी को चूमने के बाअद मैंने दीदी के गार्डन को अपने मुंह में भर लिया और दोनों हांथो से उनकी चूचिया कसकर पकड़कर पूरी ताकत से कसल दिया और उनकी गार्डन को काट लिया. दीदी के मुंह से चीख निकल गई.

सरिता di-ooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh AAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कामिनी सलेटी. कितनी जुर्ररर सी कट्ट्ट्टा हैई . टूउउ पुराआ जाआआंआररररर हीी. Oooooooooohhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्ययययययय. ठुड्ड़दद्दाआआ धीयड़ीये कारररररर दबाआआआ मरीईईई भाआईईईई.

दीदी की बात सुनकर मैं धीरे धीरे उनकी चूचिया दबाने लगा और अपनी जीभ से दीदी की गार्डन को चाटने लगा. जिससे दीदी की आँखे बंद होने लगी और उन्होंने अपनी गार्डन को पीछे कर कुर्सी पर रक् दिया. जब मैंने देखा की दीदी बहुत गरम हो गई हैं तो मैंने फिर से दीदी की चूचियों को मुट्ठी में भर लिया और जोर से मसल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी.



सरिए di-aaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कक्क्क्कमीीिनीईईए. Oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyh टूउउउ नाहीईईई सुधारीयेगाआआआ. Uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. थोड़ा धीरे दबाआ नाआआआ.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को छोड़ दिया. जिससे दीदी ने अपनी आँखे खोल ली और पीछे मुड़कर मुझे देखा. जैसे कह रही हो की पीछे क्यों हैट गए और करो न. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- अब जो भी करूँगा तुम्हारे कमरे में hi करूँगा. मैं 1 हॉर्स बाद तुम्हारे कमरे में आ रहा हूँ तुम तैयार रहना.

इतना कहकर मैं अपने कमरे में चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-91

Didi ki baat sunkar maine didi ko chhod diya. jisase didi ne apni aankhe khol li aur pichhe mudkar mujhe dekha. jaise kah rahi ho ki pichhe kyo hat gaye aur karo na. maine didi ki aankho me dekhte huwe kaha.

Main- Ab jo bhi karunga tumhare kamre me hi karunga. Main 1 hours baad tumhare kamre me aa raha hoon tum taiyar rahna.

Itna kahkar main apne kamre me chala gaya.

अब आगे.

Apne kamre me aakar maine apna lower utarkar underwere utar diya aur fir se lower pahan li. upar se maine ek t-shirt dal li. aur kamre se nikal kar chhat par tahalne laga. 1 hours pura hone ke baad maine apne sharer par sent mara aur didi ke kamre ki taraf chal pada. Maine darwaze par nock kiya to darwaza halka sa khul gaya.

jab main darwaza kholkar andar gaya to didi ko dekhte hi mera land lower me khada ho gaya. ddi mere kahe anusar hi tiyar hui thi. unhone mera diya huwa gift pahna tha. jo transparants tha. jisme se didi ki chuchiya nangi dikh rahi thi. didi ne salike se apne baal sanware the aur use khula chhod rakha tha jo fan ki hawa ke sath lahra rahe the. Unhone apni aankho me maskhara lagaya hua tha jisase didi ki aankhe bahut sundar dikh rahi thi. Didi ke apne galo par halki si creem lagai thi jisase didi ke gal surkh dikh rahe the. Honto par laal rang ki lipistic aur nakhono me nail polish lagai hui thi. didi ki lipistic ka color aur nail polish ka color ek saman tha. didi apne dono hanth apne pet par rakhkar ek ada ke sath sharmate huwe mujhe dekhne lagi.



कुल मिलकर दीदी इतनी कमुख लग रही थी की जितना वो नंगी होने पर भी नहीं लगती थी. मैं बस एकटक दीदी के सौंदर्य को निहारे जा रहा था. दीदी को कामुक रूप को देखकर मैंने अपना हाँथ अपने खड़े लुंड पर रख दिया और उसे मसलने लगा. दीदी भी मुझे लुंड को मसलते हुवे देखने लगी. थोड़ी देर बाद दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. ऐसे क्यों देख रहा है. अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या मैं.

मैं दीदी की बात सुनकर अपना लुंड मसलते हुवे दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना लुंड दीदी की गांड में पेलकर कहा.

मैं- क्या बात कर रही हो दीदी. तुम इन कपड़ो में बहुत चुड़क्कड़ लग रही हो. मेरा मन तो कर रहा है की तुम्हे अभी पटक कर छोड़ दूँ.

सरिता दी- तू कितना कमीना है. अपनी दीदी से कितनी गन्दी गन्दी बाते करता है.

मैं- लो अब इसमें गन्दी बात कहा से आ गई. तुम लग hi ऐसी रही हो. यहाँ आओ और शीशे में देखो अपने आपको.

मैं दीदी को घुमाकर शीशे के सामने खड़ा कर दिया और उनसे कहा.

मैं- देखो सरिता अपने इस नायब हुस्न को देखो. जिसे ये मेरा गिफ्ट संभल नहीं प् रहा है. तुम्हारी चूचिया इसे फाड़कर बहार निकलना चाहती हैं.



इतना कहकर मैंने उनकी बगल से हाँथ आगे बढाकर दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा और अपने होंठो को दीदी की गार्डन पर रखकर किश करने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता ये बिस्टेर देख रही हो न. आज मैं तुम्हारे इसी बिस्टेर पर तुम्हारी नाथ उतरूंगा. और तुम्हे जन्नत की सैर कराऊंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली. तो मैं दीदी को पलटकर एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया. जिससे दीदी मेरी बहो में आ गयी और उनकी लगभग नंगी रसीली चूचिया सीधे आकर मेरी साइन से टकराई. तो हम दोनों के मुंह से aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh निकल गई. मेरी बहो में आकर दीदी शर्म से अपना सर निचे झुका लिया. मैंने दीदी की चिक हो पकड़कर उनका सर ऊपर किया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आंको में इस वक्त सिर्फ प्यास hi प्यास थी. कुछ देर उनकी आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है सरिता तुम नाराज़ हो क्या मुझसे.

दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता di-Hhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm.

मैं- कोई बायत नहीं सरिता मैं अभी तुम्हारी नाराज़गी दूर कर देता हूँ.

इतना कहकर मैंने दीदी के माथे को चूमा फिर दीदी की दोने सुरमयी आँखों को चूमा. मेरे होंठो के स्पर्श से दीदी sssssssssssssssssss sssssssssssssssssss करने लगी. फिर मैंने जीभ निकलकर दीदी के गलो को चाटने लगा. मने एक हाँथ से दीदी का सर पकड़ा और एक हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर उन्हें दबाने लगा. दीदी मस्ती में सिसकारियां भरने लगी. कुछ देर उनकी गाल चाटने के बाद मैंने अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी भी किश में मेरा साथ देने लगी. किश करते हुवे दीदी ने अपनी जीभ निकलकर मेरे मुंह में डालने लगी तो मैंने अपना मुंह खोल दिया और दीदी की जीभ को चूसने लगा. एक हाँथ से मैं दीदी की चूचिया बदल बदल कर दबाता रहा.

दीदी के मुंह का स्वाद बहुत टेस्टी था. थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी. दीदी मेरी जीभ चूसने लगी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा. कभी मैं अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल देता तो कभी दीदी मेरे मुंह में अपनी जीभ दाल देती. हम दोनों का मुंह एक दूसरे के थूक से सं गया था. 10 मिनट तक एक दूसरे का मुंह चूसने के बाद मैं दीदी के चेहरे को चाटने लगा और निचे की तरफ बढ़ने लगा.

मैंने अपने होंठ दीदी की चूचियों पर कपडे के ऊपर से रख दिया और किश करना लगा.



किश करते हुवे मैंने अपना हाँथ दीदी की गांड पर रखकर दबाने लगा. थोड़ी देर चूचियों को चूमने के बाद मैंने दीदी की चूचियों के निप्पल को किश करने लगा. दीदी भी माधोसी में मेरे बालो पर हाँथ फिरने लगी. मैं दीदी की निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगा और उनकी गांड को दबाने लगा. जिससे दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अभियई बॉस ऐसी हीई चूशस्सस मेरीए छुछियैआए बहुत मज़ा आ रहा हीी. खा जाए मेरिइइइ चूचियाआआ मेरे भाईईई.

जब मैंने दीदी की सिसकिया सुनी तो मैं और तेज़ तेज़ दीदी के निप्पल को चूसने लगा और दीदी की गांड दबाने लगा. थोड़ी देर तक निप्पल चूसने के बाद मैंने अपने दांतो से दीदी के निप्पल को पकड़कर दोनों हांथो में दीदी की गांड को भरकर पूरी ताकत से मसल दिया और उनके निप्पल को काट लिया. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइ. Kyaaaaaaaaaaa karrrrrrrrrr rahhaaaaaaaaaa hiaaaaaaaaaa . धीरीईई कररररर naaaaaaaaaaa. Uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyyyyy. Heeeeeeeeeeeyyyyyyyy बहुत्तत्ततत्तत डरडडडडडडडड होता हिअ.

मैं- सरिता रानी. तुम्हारा ये नशीला बदन धीरे धीरे खेलने के लिया नहीं है. इन्हे जितनी कसकर मसला और दबाया जाये. उतना hi तुमको मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने फिर से दीदी की दूसरी चुकी की घुंडी को मुंह में लिया जोर से दन्त गदा दिया और दोनों हांथो से उनकी गाड़ को पकड़कर जोर से मसल दिया. दीदी फिर चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuccccccccccchhhhhhhhhhhhh. Uuuuuuuuuuuuuiiiiiiii मममममिययययययय. धीरीईए कररररररर bhaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiii मुझेईई डरडडडडडडडड होताआआआ haaaaaiiiiiiiiii. Ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh.

दीदी की चीख सुनकर मैंने दीदी को छोड़ दिया तो दीदी मेरी तरफ देखने लगी. मैं दीदी की आँखों में देखा तो उनमे वासना के लाल डोरे तैर रहे थे. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी से कहा.

मैं- क्यों सरिता. तुम्हे अच्छा नाहीइ लग रहा है क्या.

सरिता दी- ऐसी बात नहीं है. लेकिन तू बहुत दर्द देता है. थोड़ा धीरे किया कर.

मैं- तुम चिंता क्यों करती हो. वैसे भी 2 दिनों तक घर में कोई नहीं है. अगर तुम्हे दर्द होता है तो तुम बिना किसी दर के चिल्ला सकती हो. क्योंकि मैं तुम्हारे ऊपर कोई रहम नहीं करूँगा. और मैं जनता हूँ की तुम्हारी प्यास मुझे कैसे बुझानी है. तो बस मेरा साथ दो और ज़िन्दगी के मज़े लो.

सरिता दी- मतलब मुझे मरने का इरादा है तेरा.

मैं- नहीं सरिता. मैं तुझे क्यों मरूंगा. मैं तो तुम्हारी मरूंगा. तो अब तुम भी एकदम बेशरम बैंकर मेरे साथ जवानी के मज़े लूटो.

मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी और आगे बढ़कर अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी.



दीदी बहुत hi वाइल्ड तरीके से किश कर रही थी. मेरे पुरे होंठ अपने मुंह में भरकर चूस रही थी. जैसे आज मेरे मुंह को खा hi जाएंगी. लगभर 5 मिनट तक चूसने के बाद दीदी ने अपनी जुबान मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैंने भी दीदी की जुबान को अपनी जुबान से ठेलकै बहार निकला और उनके मुंह में अपनी जुबान दाल दी. हम दोनों एक दूसरे के मुंह में बरी बरी अपनी जुबान डालकर चूसने लगे. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी t-shirt को पकड़कर ऊपर की तरफ सरकना शुरू कर दिया. और मेरी गार्डन तक लेकर आई. फिर अपना मुंह मेरे होंठो से हटाकर मेरी t-shirt को एक hi झटके में उतारकर जमीन पर फेंक दिया और फिर से मेरे होंठो पर टूट पड़ी.

थोड़ी देर तक मेरे होंठो को चूसने के बाद दीदी ने मेरे निचले होंठ को अपने दांतो में दबाकर काट लिया जिससे मेरे होंठो से खून निकलने लगा और मैं जोर से चीखा.

मैं- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मात्र. क्या करती ही साली. मेरे होंठ काट लिए री. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhn..

सरिता di-(hnaste हुवे) क्यों अभी मज़ा आया.

मैं- साली मेरे होंठ काटकर पूछ रही है की मज़ा आया.

सरिता दी- तुम भी मेरे साथ यही करते हो और पूछते हो मज़ा आया. अब पता चला की मुझे भी दर्द होता है.

इतना कहकर दीदी ने अपनी जुबान निकलकर मेरे होंठो से बैठे हुवे खून को चाट लिया और फिर से मेरे होंठो को चूसने लगी. साथ hi अपने हाँथ से मेरी पीठ को सहलाने लगी. मैंने भी दी के होंठ चूसते हुवे अपना हाथ दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिया और सहलाने लगा. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद दीदी मेरे चेहरे को चाटने लगी और निचे की तरफ आने लगी. दीदी मेरे गाल मेरी गार्डन मेरे कंधे को चाटने के बाद अपने होंठ मेरे साइन पर रख दिया और ताबड़तोड़ चुम्बन लेने लगी. साथ hi अपना एक हाँथ आगे लेकर मेरे निप्पल पर उंगलिया फिरने लगी. दीदी की इस हारकर से मेरे मुंह से sssssssssssss आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की आवाज़ निकलने लगी. दीदी ने अपनी गार्डन उठाकर मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.

सरिता दी- क्यों अभी मज़ा आ रहा है या नहीं.

मैं- बहुत मज़ा आ रहा है सरिता. तेरे होंठो में जादू है.

मेरी बात सुनकर दीदी फिर से मेरे एक निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगी और एक निप्पल को अपनी उंगलियों से सहलाने लगी. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद दीदी ने अपने दांतो और दो उंगलियों के बिच मेरे निप्पल को पकड़ा और जोर के दत्त काटकर निप्पल को मसल दिया. मेरे मुंह से चीख निकल गई.

Main-aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuccccccccccchhhhhhhhhhhhh. Oooooooooooohhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh सरिता मेरी जाएं लेने का इरादा हैईईई क्याआ सलीईई.

इतना कहकर मैंने दीदी को पलट दिया और पीछे से दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया और दीदी के खुले बालो को उनके कंडे से हटाकर एक तरफ किया और उनके कंडे पर अपना होठ रख दिया. फिर अपने हाँथ को आगे बढाकर दीदी की चूचियों के ऊपर से कपडे को पकड़कर एक झटका दिया. chaaaarrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr cccchhhhhhhhhhaaaaaaarrrrrrrrr की आवाज़ के साथ कपडा फटता चला गया. और दीदी की चूचिया उछलकर बहार आ गई. मैंने जल्दी से उसे दीदी के जिस्म से निकलकर जमीन पर फ़ेंक दिया. दीदी ने मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.



सरिता दी- ये क्या क्या अभी. मेरा गिफ्ट फाडड्ड दिया तूने.

मैं- सरिता तेरी इस मदमस्त और कातिल जवानी के लिए ऐसे हज़ारो गिफ्ट कुर्बान. मेरा बस चले तो मैं तेरे सरे कपडे जो तू अपने इस कातिल बदन पर रोज पहनती है. सब फाड् दालु.

अपनी तारीफ सुनकर दीदी शर्मा गई और अपनी नज़ारे झुका ली. थोड़ी देर बाद फिर मेरी आँखों में देखते हुवे दीदी ने कहा.

सरिता di-lekin इसे फाड़ने की क्या जरुरत थी. तू इसे उतर भी तो सकता था न.

मैं- मैं इसे उतर सकता था. लेकिन मैं इस कपडे को फाड़कर तुझे ये बताना चाहता था की बहुत जल्द मैं तेरी छूट और ये गद्देदार गांड अपने लुंड से इसी तरह फाड़ूंगा.

ये बात सुनकर दीदी बुरी तरह साम्रा गई और अपनी एक ऊँगली अपने मुंह में दाल ली. दीदी की इस ऐडा ने मेरे बदन में सनसनी दौड़ा दी. मैंने दीदी के कंधे को चूमते हुवे अपना हाँथ बढाकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और हल्का हल्का दबाने लगा और पीछे से अपने लुंड को दीदी की गांड पर धीरे धीरे धक्का देने लगा. दीदी ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और आंख बंद कर जवानी के इस खेल का मज़ा लेने लगी. मैंने दीदी को किश करते हुवे दीदी की चूचियों को मुठी में भरकर दबा दिया और अपने लुंड को प्रेशर से दीदी की गांड में पेल दिया. दीदी सिसक उठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii धीरीईई कारररररर मरीईईई भाईई.

Main(apne मुंह उनके कण के पास लेजाकर) तुमको अच्छा लग रहा है सरिता.

सरिता दी- हां अभी. तू ऐसे hi मुझे प्यार करता रह.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की चूचिया दबाते हुवे उनके कंधे से होंठ हटाकर दीदी की पीठ पर रख दिए और उनकी पीठ को चाटने और चूमने लगा.



मेरी इस हरकत से दीदी का शरीर गंगना गया और उनके मुंह से ssssssssssssssssssssss आआआआअह्हह्ह्ह्हह ाभीईई की आवाज़ निकल गई. मैंने दीदी की पीठ को चाट चाट कर अपने थूक से पूरा गिला कर दिया. कुछ देर उनकी पीठ को चाटने के बाद मैंने उनकी पीठ कमर के पास अपने दांतो से पकड़ा और दोनों चूचियों के निप्पल को ऊँगली और अंगूठे में फसकर मसल दिया और और उनकी कमर को काट लिया. दीदी हवस और दर्द से चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuucccccccchhhhhhhhhh. Uuuuuuuuuiiiiiiiiiiii माँ क्याआ कर्ताआ हैईईई abhiiiiiiiiiiii. Mujheeeeeeeeeee डरडडडडडडड होताआआआ हैईईईई. कुछःह तू राहाम्म्म करररररररर बहनणनननन हूंणंन्न मैंनंन्न टेरिइइइइइइइइ.

इतना बोलकर दीदी ने अपने आपको मुझसे छुड़ा लिया और घूमकर मेरे पीछे आ गई और मुझसे सत्कार कड़ी हो गई. जिससे दीदी की बड़ी बड़ी चूचिया मेरी पीठ पर धस गई. मेरे मुंह से sssssssssss निकल गया. दीदी मेरी नंगी पीठ पर अपनी चूचिया जोर जोर से मसल रही थी और oooooooooooooohhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhh sssssssssssssssssss की आवाज़ कर रही थी. मेरी भी हालत ख़राब हो रही थी. दीदी ऐसे hi बहुत देर तक अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ती रही और आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aaaahhhhhhhhhhhhh करती रही.

थोड़ी देर बाअद मुझे मेरे लुंड पर कुछ महसूस हुवा जब मैंने निचे देखा तो दीदी अपनी चूचिया मेरे पीठ पर रगड़ती हुई मेरे लैंड को पकड़ने की कोशिश कर रही थी और कुछ देर बाद मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ कर दबा दिया. मैंने दीदी को तरफ मुंह करके उनकी आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और दीदी मेरे होंठ चूसने लगी. मैं तो जैसे आसमान में उड़ने लगा. एक तरफ दीदी मेरे होंठ चूसते हुवे मेरी पीठ पर अपनी चूचिया रगड़ रही थी. और दूसरी तरफ दीदी ने मेरे लुंड को भी पकड़ कर दबा रही थी. मैं तो बस ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh sssssssssssss करता रहा. तोड़ी देर बाद मैंने दीदी का हाँथ पकड़ कर अपने सामने किया तो मैंने देखा की दीदी की चूचिया एकदम लाल हो गई थी. दीदी की सांसे माधोसी के कारन तेज़ तेज़ चल रही थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.



मैं- तुम तो कमल की हो सरिता. बहुत मज़ा दिया है तुमने. चलो अब मैं तुम्हे जन्नत की सैर करता हूँ.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-92

इतना बोलकर मैंने दीदी को धक्का देखर बिस्तर पर लिटा दिया. और कमर तक बिस्तर के बहार खींच लिया. और उनकी टांड फैलाकर उनकी छूट के पास बैठ गया और अपनी नक् उनकी छूट के पास पैंटी के ऊपर लेजाकर एक जोर की साँस अंदर खींची और दीदी से कहा.

मैं- वह सरिता. क्या सुगंध है तुम्हारे छूट की. जब इसकी महक hi इतनी बढ़िया है तो छूट भी बहुत स्वादिस्ट होगी

मेयर बात सुनकर दीदी शर्माने लगी तो मैंने निचे झुककर दीदी की छूट को पंतय के ऊपर से hi चुम लिया जिससे दीदी की मुंह से ssssssssssssssssssssssss सिसकारी निकल गई. फिर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपनी उंगलिया उनकी पंतय में फसे और धीरे धीरे खींचकर पंतय उतरने लगा. दीदी ने हाँथ बढाकर मेरे हाँथ को पकड़ लिया और गार्डन न में हिलने लगी, लेकिन उनके हांथो में कोई पकड़ नहीं थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनकी पंतय उतारकर निचे फेंक दी और उनकी छूट को देखने लगा. दीदी की छूट के दोनों लिप्स आपस में जुड़े हुवे थे. और बहुत प्यारे लग रहे थे. मुझे अपनी छूट को देखते पाकर दीदी ने शर्माकर मुझसे पूछा.

सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है. जैसे पहली बार देखा हो.

मैं- सच में सरिता तुम्हारी छूट है hi ऐसी. जितनी बात देखता हूँ मन करता है बस देखता जाऊ. एकदम कासी हुई छूट है तुम्हारी.

सरिता di(sharmakar)- इसकी कसावट आखिरी बार देख लो. आज के बाद इसकी सकल बिगड़ जाएगी.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) तुम सही कह रही हो सरिता. आज मैं तुम्हे छोड़कर तुम्हारी छूट की शकल बिगड़ डोंगा. लेकिन एक बात है. तुम्हारी छूट की शकल बिगड़ जाएगी लेकिन इसकी कसावट में कोई कमी नहीं आएगी.

सरिता di-(madhosi से)- क्यों. तेरा इतना बड़ा मुसल जब इसके अंदर जाएगा तो इसको फाड़ कर रख देखा. और ये फैट जाने के बाद ढीली हो जाएगी.

मैं- नहीं सरिता. जो औरत छुडासी होती है उसकी छूट स्पंज की तरह होती है. उसमे चाहे मुसल hi दाल दो. मुसल निकलने के बाद वह फिर से उसी तरह हो जाती है, लेकिन तू तो बहुत ज्यादा छुडासी है. तो तेरी छूट का तो हांथी का लुंड भी कुछ नहीं बिगड़ सकता.

मेरी बात सुनकर सरिता दी बहुत बुरी तरह शर्मा गई और कमर के सहारे उठकर मुझे मरने लगी. मैं बस हांसे जा रहा था. थोड़ी देर मरने के बाद दीदी फिर लेट गई और मुझसे कहा.

सरिता दी- तू बहुत गन्दा है अभी. मुझसे ऐसे गन्दी गन्दी बाते कर रहा है. मैं बहन हूँ तेरी. कुछ से इज़्ज़त कर मेरी.

मैं- तुम बहन के साथ साथ एक छुडासी औरत और मेरी चुड़क्कड़ा मॉल हो. और आज मैं अपनी बहन की इज्जत लूटूँगा. बोलो सरिता. तुम मुझसे अपनी इज़्ज़त लुटवाना चाहती हो या मैं जाओ अपने कमरे में.

मेरी बात सुनकर दीदी मेरी आँखों में देखने लगी. इस समय दीदी की आँखे बहुत नशीली हो गाइट hi. उनके होंठ सुख गए थे. मेरी इतनी गन्दी गन्दी बात सुनकर hi उनकी छूट पानी बहाने लगी थी. मैंने हाँथ बढाकर दीदी की छूट पर रख दिया और सहलाने लगा. दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.

सरिता दी- नहीं भाई तू मुझे ऐसे प्यासा छोड़कर मत जा. मैं तुझसे अपनी इज़्ज़त लुटवाना चाहती हूँ. लूट ले मेरी इज़्ज़त और बना ले मुझे अपना हमेशा के लिए.

इतना बोलकर दीदी ने हाँथ बढाकर मेरे सर को पकड़ा और उसे अपनी छूट के ऊपर दबाने लगी. मैं दीदी का इशारा समझ गया और अपना होंठ दीदी की छूट पर रख दिया और चूमने लगा. मेरे होंठो के स्पर्श से दीदी का शरीर कम्प गया और दीदी की सिसकी निकल गई.

सरिता दी- AAAAAAAAAAAAAaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरे bhaaiiiiiiiiii. चुस्स्स लिए इसी.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की छूट को जोर जोर से चूसने लगा और हाँथ ऊपर बढाकर दीदी की दोनों चूचियों को भी दबाने लगा. दीदी बस aaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiii ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई करती रही. थोड़ी देर तक दीदी की छूट चाटने ने बाद मैंने अपनी जीभ दीदी की छूट में दाल दी और अपनी जीभ से दीदी की छूट छोड़ने लगा और अपने हांथो से दीदी की चूचियों को दबाता रहा. छूट छोड़ते छोड़ते मैंने दीदी की छूट को अपने मुंह में भर कर जोर जोर से चूसने लगा और दीदी की चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा. सरिता दीदी सिसकिया लेकर बोलने लगी.

सरिता दी- aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. और चूशस्सस मेरिइइइइइइ चूठ्टटटट कोऊ. कहा जाआ ीसीईए. बहुउउत्तत्त पारेस्सलसहाननं करटीईईई है ये टीएडीइइइइइइ डीडीइइइइइइ को. ऑरररररर जोरररर सी दाबआ मेरिइइइइइइइ चूचियोओओओओ को. इन्हीबीएई बहुतत्त घामंडडडडड हैईईईई अपनीई क्काआतुरताआ पररर. निछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई inkoooooooooo. ढीला कररर दिए इससे दबा दबाए कर.

मैं दीदी की छूट से अपना मुंह हटाकर दीदी की चूचियों को और जोर जोर से दबाकर दीदी की नशीली आँखों में देखते हुवे बोलै.

मैं- हआ सरिता तुम बिलकुल भी चिंता मत कारु. आज मैं तुम्हारी चूचियों को मसल मसल कर इसका सारा राष्ठ्हह निचोड़ लूंगा. बहुत परेशां किया है इसने मुझे. तेरी छूट को भी आज चूस चूस कर उसका सारा रास पि जाऊंगा मेरी रानी.

इतना कहकर मैंने फिर से अपने मुंह में दीदी की छूट को भर लिया और उसे निचोड़ निचोड़ कर चूसने लगा. थोड़ी देर तक दीदी की छूट को चूसने के बाद मैंने दीदी की चूचियों के दोनों हथेली में भरकर डैम लगाकर मसल दिया और छूट को मुंह में भरकर आगे की तरफ खींचकर चूड दिया. दीदी लज्जत से सिसक पड़ी.

सरिता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAAaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiiii बास्स्स्सस्स्स्स आईसीएएएएए होई चुसोऊ मेरिइइइइइइइ छूट कोऊ. थोड़ाए धीयड़ी daabaaaaaaaaoooooooooo मेरिइइइ चूचियों को bhaaiiiiiiiiii. Oooooooooooooooooaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh . बहुत मज़ाआ आए रहा है.

दीदी की बात सुनकर मैंने एक हाँथ उनकी चूचियों से हटाकर उनकी छूट पर रख दिया और उनकी क्लीट को मसलने लगा. एकक हाँथ से दीदी की चुकी को दबाकर दीदी की छूट चाटने लगा. दीदी अपने शरीर को बिस्टेर पर रगड़ने लगी. दीदी एकदम गरम हो गई थी. थोड़ी देर उनकी क्लीट सहलाने के बाद मैंने अपनी ऊँगली दीदी की छूट में डालने लगा. दीदी को शायद हल्का हल्का दर्द हो रहा था इसलिए वो अपना बदन ैठने लगी. तो मैंने एक झटके में अपनी बिच वाली ऊँगली दीदी की छूट में पेल दी और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. दीदी के मुंह से मादक सिसकारी aaaaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह sssssssssssss ाभीईई निकलने लगी.

छूट में ऊँगली करते हुवे मैं दीदी की क्लीट को चाटने लगा और एक हाँथ से दीदी की चुकी बदल बदलकर जोर जोर से मसलने लगा. कुछ देर बाद मैंने दीदी की चुकी को हंट में भरकर, उनकी छूट से ऊँगली थोड़ा बहार निकलकर और क्लीट को अपने मुंह में भर लिया. फिर चुकी को जोर से दबाया, ऊँगली एक झटके में छूट में पेल दी और क्लीट को हल्का सा बाईट किया. मेरे इस 3 तफ़ा हमले से दीदी के मुंह से वासना युक्त चीख निकल गई.

सरिता दी- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययी aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh क्याआआआ कर रहहाआ हैईईईई सलीईई. मेरिइइइइइ जाननननननन लेनेईई कहा इरादा हैईईई क्या. थोड़ड्डड्डड्ड धीरीईई कर भाईईईईई. थोड़ड्डाआंआ प्याआर सीई कारररररररर. मेंनननननन कहियी भागीयी नाहीइ जा राहीईई हूणंण. Ooooooohhhhhhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhhhhh meriiiiiiiiii चूठ्टटटट मई कुछहहह होओओओ राहाआआ हैईईईई भाईईई aaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh.

दीदी की बात सुनकर लगा की वो अब झड़ने वाली हैं तो मैंने अपनी ऊँगली की स्पीड तेज़ कर दी और दीदी की चुकी दबाते हुवे उनकी क्लीट को जोर जोर से चूसने लगा. थोड़ी hi देर में दीदी का बदन ऐठने लगा. वो कमान की तरह तन गई और अंत संत बकने लगी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मेंनननननन gaiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiii मेंनननननन gaaiiiiiiiiiiiii. मेरिइइइइ छूठ मीटीए चीईटीया रेंगगग रहियी हैईईई. और जुर्ररर सी चुसस्स सल्ल्ल्ली. मेंनननन उड्डड्डड़ रहीी होऊणन ैसाआ माज़्ज़्ज़्ज़्ज़ाए मुझीऐ काभीई नाहीई मिल्ल्ल्लआआआ ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ भाईईईईई. टूउउ बहुउत्तत्ततत्तत्त अछ्हीईई छुट्ट्ट्ट चुसस्ताआआ हीी सआईईईई. खायआ जाआ मेरिइइइ चुउत्त्तकोऊ. Ooooooooohhhhhhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh कुछहहहहह काररररररररर सआईईईई मेंननननननन गिररररररररर रहीइइइइइइइइ होऊणननननननन सँभाललललललल लिए मुझीीीी मदारचूडड़ड़. मेंनननननन गईइइइइइइइ aoooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh मेररररररे भाईईईई.

इतना कहकर दीदी के भलभला कर पानी छोड़ दिया और बेसुध होकक बिस्टेर पर पड़ी रही मैं दीदी की छूट का सारा पानी पि गया. मैं दीदी की छूट को अभी भी चूस रहा था. छूट के पानी से मेरा पूरा चेहरा सं गया था. मैं अपना चेहरा उठाकर दीदी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. मैं दीदी को देखते हुवे ऊपर गया और दीदी के होंठो पर अपना होंठ रख दिया.



लगभग 2 मिनट दीदी के होंठ चूसने के बाद मैं दीदी से अलग हुवा और उन्हें उठाकर जमीन में बैठा दिया और दीदी के पास खड़ा होकर उनसे कहा.

मैं- अब तुम्हारी बरी है मुझे खुश करने के. मेरा लोअर उतरो और इसे मुंह में लेकर चुसो.

सरिता दी- लेकिन मैं कैसे. एक तो ये गन्दा होता है और ऊपर से मुझे कोई एक्सपीरियंस नहीं है.

मैं- चुदाई के समय कुछ भी गन्दा नहीं होता. और अगर तुम इसको खुस करोगी तभी तो ये तुम्हारी प्यास बुझाएगा. तुमने लॉलीपॉप चूसा है न बस इसको भी उसी तरह मुंह में लेकर चूसना है.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी लोअर में ऊँगली फसे और निचे करने लगी. मेरा लैंड तो पहले से hi खड़ा था. जैसे hi लुंड लोअर से बहार निकला वह सीधे दीदी की घुद्धि से तरककर उनकी आँखों के सामने लहराने लगा. दीदी कभी मेरे लुंड को देखती तो कभी मेरी आँखों में देखती. फिर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. दीदी का हाँथ मेरे लुंड पर महसूस करके मेरे मुंह से सिसीकी sssssssssssssssssssss निकल गई. थोड़ी देर जब दीदी मेरा लुंड सहलाती रही तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- इसे मुंह में लेकर प्यार करो सरिता रानी.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और लुंड चाटने लगी. दीदी की जीभ मेरे लुंड पर लगते hi मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई.



मेरा हाँथ अनायाश hi दीदी के सर पर चला गया और मैं दीदी के बालो को सहलाने लगा. थोड़ी देर मेरे लुंड को चैहटन के बाद दीदी ने अपना मुंह खोदा और शूपदे को मुंह में भरकर चुम लिया जिससे पपूउउउछहः की आवाज़ आई. दीदी ने ऐसे कई बार किया वो सुपडे को मुंह में भरकर पुछठ पूछह की आवाज़ निकल कर सुपडे को चूमती और छोड़ देती. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- कैसा लग रहा है सरिता तुमको अपने भाई का लुंड

सरिता दी- बहुत बड़ा है अभी. इसे मैं कैसे ले पाऊँगी अंदर.

मैं- औरतो की छूट बहुत गहरी होती है. मेरे लुंड का दो गुना मोटा और लम्बा लुंड भी तुम्हारी छूट में चला जायेगा सरिता रानी. लेकिन उसके पहले मेरे लुंड को चूसकर गिला तो करो. ताकि तुमको इसे अंडाल लेने में परेशानी न हो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में अपनी नशीली आँखों से देखते हुवे अपना मुंह खोला और मेरे लुंड को 2”अपने मुंह में ले लिया. मेरी तो आनंद से आँखे hi बंद हो गयी और मैं दीदी के सर को सहलाने लगा. दीदी मेरे 2”लुंड को चूसने लगी मैंने दीदी को और लैंड अंदर लेने के लिए कहा. दीदी ने कोशिश करके और लुंड अंदर ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. दीदी लैंड को टोपे तक अपने मुंह से बहार निकलती और फिर लुंड को अंदर ले लेती. मैं दीदी को उत्साहित करते हुवे कहा.

मैं- वह सरिता क्या लुंड चुस्ती हो तुम. तुम बहुत अचे से मेरा लुंड चूस रही हो. लग hi नहीं रहा है की तुम पहली बार लुंड चूस रही हो. कहा से सीखा ये लुंड चूसना सरिता.

दीदी मेरा लुंड अपने मुंह से निकल कर बोली.

सरिता दी- जाने दे न. मैं पहली बार hi लुंड चूस रही हूँ. वो भी अपने भाई का मोटा लुंड.

मैं- लेकिन तुम किसी एक्सपर्ट की तरह लुंड चूस रही हो. सच बताओ कहाँ से सीखा लुंड चूसना.

सरिता दी- कहानिया और पोर्न वीडियो देखकर सीखा.

मैं- बहुत अच्छा किया की तुमने पोर्न वीडियो देखकर ये सिख लिया. जो आज मेरे काम आ रहा है. चलो अब टाइम वेस्ट मत करो और मेरा लुंड चुसो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने फिर से मेरा लुंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी.. थोड़ी देर धीरे धीरे चूसने के बाद दीदी ने लुंड चूसने की स्पीड बढ़ा दी. मुझे लुंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. और मैं चाहता था की दीदी मेरा पूरा लुंड मुंह में ले ले. लेकिन दीदी उतना hi लैंड मुंह में ले कर चूस रही थी. तो मैंने अपना हाँथ दीदी के सर पर रखा और अपने लैंड पर दबाने लगा. जिससे मेरा लुंड दीदी के मुंह में घुसने लगा. जैसे जैसे मेरा लुंड दीदी के मुंह में घुस रहा था वैसे वैसे दीदी की आँखे बड़ी होती जा रही थी. दीदी के चेहरे पर दर्द बढ़ने लगा था. ये देखकर मैंने दीदी के सर को मजबूती से पकड़कर अपनी कमर को एक धक्का देखर लुंड दीदी के मुंह में पेल दिया.



जिससे दीदी की आँखे बहार आ गई और उनकी आँखों में आंसू आ गए. दीदी मेरी जांघो पर हाँथ मरने लगी तो मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह से बहार निकल लिया. लुंड निकलते hi दीदी खांसने लगी और मुझसे बोली.

सरिता दी- kkkhhhhhhooooooooooo ख्ह्ह्हूऊऊऊ. ये क्या कर रहा है तू. मेरी जान लेगा क्या. मैं चूस तो रही हूँ तो फिर ऐसा करने की क्या जरुरत थी.

मैं- तुम्हारा मुंह इतना गरम है सरिता की मेरा लुंड बोल रहा है की मैं इसके मुंह में पूरा जाऊंगा. इसलिए मैंने पूरा लुंड तुम्हारे मुंह में पेल दिया.

सरिता दी( शर्मा कर फिर मुस्कुराकर). चाहे मैं मर hi जॉन.

मैं (अपना लुंड दीदी के मुंह में डालते हुवे). लुंड लेने से आज तक कोई लड़की नहीं मरी तो तुम कैसे मर जाती.

दीदी मेरे लुंड को फिर से चूसने लगी. जोर जोर से चूसने लगी. मैंने फिर से दीदी का सर पकड़कर अपना लुंड दीदी के मुंह में धीरे धीरे धक्का लगते हुवे पेलने लगा. दीदी के मुंह से गगगगगगूउऊउउउउउ गगगगगगुणु की आवाज़ निकलने लगी. मुझपर अब ठरक पूरी तरह हावी हो चुकी थी इसलिए मैंने थोड़ी देर दीदी के मुंह को धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने दीदी के सर को मजबूती से पकड़कर तेज़ तेज़ लुंड अंदर बहार करने लगा. दीदी अपना सर पीछे की तरफ करने लगी लेकिन मैंने दीदी के सर को नहीं छोड़ा और जोर जोर से लुंड उनके मुंह में पेलता रहा. थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गई और लुंड को मुंह में लेने लगी तो मैंने अपनी कमर को पीछे कर लुंड टोपे तक मुंह से बहार निकला और एक झटके में पूरा लुंड उनके मुंह में पेल लिया. जो जाकर दीदी की हलक से टकराया. दीदी की आँख बहार आ गई और आँखों से आंसू निकलकर गलो पर बहने लगे. मैं लुंड उनके हलक में रखते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- ले साली मेरा लुंड. बहुत भूखी है न तू लुंड के लिए. तो चूस मेरा लुंड और भुझे ले अपनी प्यास. तेरा मुंह बहुत गरम है साली. मेरा लुंड पिघला जा रहा है. चूस मेरा लौड़ा सरिता. तेरे मुंह में जन्नत है रानी. ले चूस और निचोड़ ले मेरे लुंड को.

थोड़ी देर मैं अपने लुंड को दीदी की हलक में रखने के बाद जब उनकी साँस रुकने लगी तो मैंने लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया. लुंड निकलने पर दीदी की थोक का एक रेशा मेरे लुंड से दीदी के मुंह तक बना हुवा था. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और जब उनकी सांसे दुरुस्त हुई तो वो बोली.

सरिता दी- जान लेने का इरादा है क्या सेल. तू एकदम जानवर है. तुझे मेरी तनिकक भी परवाह नहीं चाहे मैं मर hi क्यों न जाओ.

दीदी की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी की मैंने फिर से दीदी का सर पकड़कर अपना लुंड दीदी के मुंह जब तक उतर दिया दीदी के आँखों से फिर से आंसू बहने लगे. 10 सेकंड तक लुंड अंदर रखने के बाद मैंने टोपे तक लुंड बहार खींचा और जब दीदी की साँस फिर संभल गई तो मैंने फिर से पूरा लुंड उनके मुंह में पेल दिया और 10 सेकंड तक रखने के बाद फिर वापस खींच लिया. ऐसा मैंने 10 मिनट तक लगातार किया. मुझे मालूम था की दीदी को दर्द हो रहा होगा लेकिन मैं अपनी धुन में दीदी का मिन्ह पेलता रहा. और बड़बड़ाता रहा.



मैं- ले साली और ले बहुत छुडासी है न तू. आज तेरी साडी छुडास मिटा दूंगा. तेरा मुंह बहुत गरम है साली तारा मुंह भी बहुत छुडासा है. तू बहुत बड़ी चुड़क्कड़ा है जो अपने भाई से hi छुड़वाने के लिए तड़प रही है. ले साली और ले मेरा लुंड अपने इस गरम मुंह में. चूस साली मेरा लुंड निचोड़ ले इसे और पि जा मेरे अमृत को. Aaaahhhhhhhhhh आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.......

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-93

Main- le Sali aur le bahut chudasi hai na tu. Aaj teri sari chudas mita dunga. Tera munh bahut garam hai SALI tara munh bhi bahut chudasa hai. tu bahut badi chudakkada hai jo apne bhai se hi chudwane ke liye tadap rahi hai. le Sali aur le mera lund apne is garam munh me. Chus Sali mera lund nichod le ise aur pi ja mere amrit ko. Aaaahhhhhhhhhh aahhhhhhhhh

अब आगे.

Mere itni buri tarah se munh chodne se didi ka chehra ekdam lal ho gaya tha. baal puri tarah bikhar gaya tha. aankho ka kajal bahkar unke galo tak aa gaya tha. didi ka pura chehra thok se naha huwa tha. unke munh se thook bahkar unki chuchiyo par gir raha tha. main kisi randi ki tarah didi ka munh chod raha tha. main bhi aab jhadne ke bahut kareeb tha to maine apni speed badha di aur puri takat se didi ka munh chodte huwe ant sant bakte huwe unke munh me hi jhad gaya.

Main- Aaaahhhhhhhhhhhh Saaaalllllllliiiiiiiiiiiii randdddddiiiiiii mainnnn gaayyyyyyyyyyyaaa. Leeee meraaaa lundddddd aur chusssss. Tereeeee munh mee jaduu haiiiiiiiii. Tereeeeee harr ang meeee jaduuuu hiaiiiiiiii aur jor se chussss randiiiiii. Main aane wala hooon pi ja mereeeeeee lund se nikallllle huwe amritt ko. Tuuu jannnttt kiiii hooor haiiiii saritttaaaa. Aurrr teeraa munhh jannaaat haiiiiiii maiii gayaaaaaaa. Main jhaaaaadddddddd gayaaaaaaaa Saritaaaaaaaaaa aaaaaaaaaahhhhhh ohhhhhhhhhhhhhn.

Itna kahkar main didi ke munh me jhad gaya aur apna lund didi ke munh se nikal liyaaa. Lund nikalte hi mere bacha huwa virya didi ne jameen par thook diya aur lambi lambi sanse lene lagi. main bhi apna lund unke munh se nikalkar dhadam se wahi rakhi kursi par baith gaya. thodi der baad jab didi ki sanse durust ho gai to unhone gusse se mujhse kaha.

Sarita di- tu sach me janwar hai. tujhe mere upar bilkul bhi taras nahi aata. Itni buri tarah se kiya hai ki mera munh dard karne laga hai. tu jallad hai ekdam.

Didi ki baae sukar main didi ke paas gaya aur unhe uthakar bed par baithaya aur unki nashili aankhe jinme aanshu bhare huwe the unme dekhte huwe didi se kaha.

Main- main kya karu sarita tere is gadraye huye jism ko dekhkar main bekabu ho jata hoon. teri in jalim chuchiyon aur teri katil gand me mere jism me aag laga rakhi hai. inhe dekhne ke baad main khud me nahi rahta. Lekin ek baat to manni padegi. Tera munh bhi teri chut se kam nahi hai. tere munh me bhi bahut aag hai Sarita.

Apni gandi tareef sunkar didi muskurane lagi. maine apne honth badhakar didi ke hontho par rakh diye aur unhe chusne laga. didi bhi mera sath dene lagi. honth chuste huwe maine didi ka hanth pakadkar apne lund par rakh diya. didi mere lund ko sahlane lagi. maine apna ek hanth didi ki chuchi par rakh diya aur unko dabane laga. didi fir se garam hone lagi. mere lund ko jhade huwe 15 minute bit chuke the to mera lund bhi didi ke sahlane se khada hone laga. kuchh der tak honth chusne aur chuchi dabane ke baad maine didi ko bister par leta diya aur unke sir ko kheechkar bed ke kinare par latka diya aur apne lund ko didi ke munh par marne laga.

didi mera ishara samajh gai aur apne jeebh nikalkar mera lund chatne lagi. main oohhhhhhh sariiiiiiiitaaaaaaa aaahhhhhhhhh saritaaaaa karne laga. thodi der lund chatne ke baad didi ne lund ko tope ko munh me bhar liya aur puchchhhhh pucchhhhhh ki aawaz nikalkar use chusne aur chhodne lagi. thodi der kewal supada chusne ke baad didi ne apna munh khola aur jitna lund andar le sakti thi lekar use andar bahar karne lagi. meri to aanand ki koi sima nahi rahi. main bas ooooooooooohhhhhhhhhh aaahhhhhhhhhhhhh karta didi ke munh ko halka halka dhakka marker pelta raha. jab mujhse bardast nahi huwa to maine apna ek panv uthakar bed par rakh aur ek jhatke me didi ke munh me apna lund pel diya.



मेरा लुंड पूरा मुंह में घुसने से दीदी के शरीर ऐंठ गया. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. मैं उसकी परवाह किये बगैर दीदी के मुंह को ताबड़ तोड़ पेलने लगा. दीदी की आँखों से आंसू बहले लगे. थोड़ी देर मुंह जोर जोर से पेलने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया और दीदी को उठाकर बीएड पर सीधा लिटा दिया और उनकी टैंगो के बिच बैठ गया. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.

सरिता दी- अभी तू इतनी जोर जोर से क्यों करता है. थोड़ा धीरे किया कर मैं कही भागी थोड़ी hi जा रही हूँ.

मैं- मुझे धीरे धीरे करने में मज़ा नहीं आता. और तुम्हे बिना चोदे मैं कही जाने hi नहीं दूंगा. आज जब तुम इस कमरे से बहार जाओगी तो तुम काली से फूल बन कर hi जाओगी.

दीदी से इतना कहकर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी के पांव की उंगलियों को अपने मुंह में बाहर लिया और चूसने लगा. दीदी बस मेरी आँखों में hi देखे जा रही थी. इसी तरह मैंने दीदी को सभी उंगलियों को चूसते हुवे दीदी के पैरो को चाटने लगा. दीदी के पैरो को चाटता हुवा मैं ऊपर की तरफ आने लगा और उनकी जांघो तक पहुंचकर मैंने अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और चाटने लगा. मेरा मुंह छूट पर रखते hi दीदी आआआआअह्हह्ह्ह्हह ाभीईई बोल पड़ी. मैं दीदी की छूट को जोर जोर से चूसने लगा. अब एकदम बेकाबू होती जा रही थी. उन्होंने हाँथ बढाकर मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबा लिया और मेरे बालो पर अपनी उंगलिया चलने लगी.

मैंने दीदी की छूट को चाटते हुवे अपने दोनों हांथो से दीदी की दोनों चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा. जिससे दीदी आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह aaaahhhhhhhhhhh अभीयी करने लगी. थोड़ी देर दीदी की चूचिया दबाने के बाद मैंने अपना एक हाँथ दीदी की चुकी से हटाकर उनकी छूट पर रख दिया और 5 थप्पड़ जोर जोर से दीदी की छूट पर लगा दिए दीदी एकदम मचल गई और अपने शरीर को ैठने लगी और बोली.

सरिता दी- aaaahhhhhhhhhhhhhh Abbbhhhhhhhiiiiiiiiii ooooooooooohhhhhhhhhhhh मेरी भाईईई ककयाआआ कार्त्तता हैईईई. Ooooooooohhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं दीदी की बात सुनकर उनकी छूट पर 3 तप्पड़ और मर दिया और उनकी चुकी को दबाते हुवे उनकी छूट को चाटने लगा. फिर मैंने एक ऊँगली दीदी की छूट में दाल दी और अंदर बहार करने लगा. अब दीदी एकदम छुडासी हो गई. इसलिए दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii मरीईईई bhaaiiiiiiiiii. अब मुझ्सीईई बरदायत्ततत्तत नाहीईईई होओओओओ राहाआआआ haiiiiiiiiii बुझाआआआ डीएई मेररररीईईई पयास्सस्स्स्स मरीईई bhaiiiiiiiiii.

मैं दीदी की बात सुनकर खुस हो गया की अब दीदी छुड़वाने के लिए एकदम तैयार हैं, लेकिन मैं दीदी को थोड़ा और तड़पना चाहता था इसलिए मैंने दीदी की छूट से अपनी ऊँगली निकल ली और एक हाँथ से दीदी की चुकी और एक हंट से दीदी की छूट सहलाते हुवे कहा.

मैं- रुको सरिता मैं अभी पानी लेकर आता हूँ. और तुम्हारी प्यास बुझाता हूँ.

सरिता दी- नाहीइइइइइइ abhiiiiiiiiiiii मुझेईई पनीईई नाहीइइइइइइइ चहियीईइ. तू दाआललललललल डीएई अपनीई मरीईईई अंडरररररररर और मेरिइइइइइइइइ पयास्सस्सस्स भुझायआ दी.

मैं- (दीदी की छूट सहलाते हुवे)- क्या दाल दू सरिता और कहाँ दालुउउउउउ.

सरिता di-Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii मेरिइइइइइइइइ जानननननननन अब्बब्बब्बब्ब ऑरररररर नाहा tadpaaaaaooooooooooooo पपपपपपपपपललललललजजज़्ज़्ज़्ज़्ज़ अब्बब्बबबबबब दाहाआलललललल ddddddooooooooooo ाण्ड्डड्डड्डड्डड़रररररररर aurrrrrrrrrr meriiiiiiiiii पयास्सस्स्स्स bujhhhhhhhhhhaaaa दू.

मैं- वहीइ तो मैं पूछ रहा हूँ की क्या दालु और कहाँ दालु सरिता (छूट को सहलाते हुवे).

सरिता दी- Aaaaaaaaaahhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii टूउऊउउउउउ apnaaaaaaaaaa मेरिइइइ चूठ्टटटटट मीटीई daaaaaalllllllllll कररररररररर meriiiiiiiiiiiiii प्याआआआआ बुझाआआआ डीई bhaaaaaaiiiiiiiiiiiii. अब्बब्बब मुझेईईईई बारररररदास्त्टटटट नाहीइइइइइइ हूँ राहाआआआआ हैईईईई.

मैं- ( चुकी को दबाते huwe).wo तो ठीक है सरिता, लेकिन क्या डालकर और किश चीज़ से तुम्हारी प्यास बुझाउ. पानी लउउउउ.

सरिता di-aaaaaaaaahhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhh मीररररीीीे यारी जानननननननन मेरी भाईईईई. अपनाआ लुँड्ढड्डड़ मेरिइइइइइइ चूऊउउउत्तत्त मेई डालललललकारररररररर मुझेईईई हचककककक हचककककककक कररररररर छोड़ूऊऊऊओ ऑररररर मेरिइइइइइइइ प्याजसससस बुझाआआआ दोओओओ aaaahhhhhhhhhhhhh oooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरीए bhaaiiiiiiiiiiii. ाभ्ह्ह्ह्हह्ह ऑरररर मत्तत्तट्ठ ताडडडडडडडपाआऊऊऊऊ नाहीईई तू तुम्हारीइइइइइ बहाणणणणणणण मर्डर जाएगीइइइइइइ.



मैं- (दीदी की छूट और चुकी सहलाते हुवे) देखो सरिता. तुम इस समय एकदम चउदसीई हो और तुम्हारा बदंन बहुत्त ज्यादा गडरा गया है. तुम्हारी उम्र की लौंडिया तो दिन रात्त अपनी छुटत मी अपनी पति का या अपने याअरर का लुंदड़ लिए पड़ी रहती हैं. तुम्हारा यी कटीला बदन देखकर मेरा भी मन होता ही की मैं तुमको पटक पटक के रगड़ रगड़ कर छोड़ू और तुम्हारी छूट पहाड़ दालु. लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता. क्योंकि तुम मेरी दीदी हो मेरी बहन हो और दीदी को छोड़ना पाप होता है.

दीदी के ऊपर छुडास इस समय पूरी तरह हावी थी. उनको तो इस समय लुंड चाहिए था किसी भी कीमत पर इसलिए वो सबकुछ भूलकर बस लुंड चाहती थी. इसलिए दीदी ने मेरी बात सुनकर कहा.

सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कोईई पापपपपप नही होता अभियई. जब मेंनननननन खुड़ड़ड़ड़ तुमसीईई चुंदड़वानाआए चाहतीई हूँण तू चू छोड़ड़ड़ड़ दी मुझीीी तू जैसेईईई छोड़ना चाहता ही.

मैं- (छूट सहलाते हुवे) लेकिन मैं तुम्हारा भाई हूँ और तुम मेरी बहन हो मैं ये पाप नहीं कर

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh अब्ब्ब्ब मैट ताड्ढणआआ ाभीईई छोड़ड़ड़ड़ड़ डीई मुझीीी. टूउउ मेराआआ भाईईई भी है और मेराआआ याअरररररर भी हैईईई लेकिन मैंनं टेरिइइइइइ बहाणं नाहीईई हूँ अब्ब्ब. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दिए अभीइइइइइइइ नाहीईई तू मैं मर जाउँगीई

Main(chut पर थप्पड़ मरते हुवे)- अगर तुम बहन नहीं हो तो फिर क्या हो मेरी.

सरिता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh ooohhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भाईईईई माईंन्न्नन्नं tumhariiiiiiiiii chudkkkaddddddddddddd mallllllllllll होऊणनननननन छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ mujheeee.meriiiiiiiii पयास्सस्स्स्सस्स बुझायआ डीईई mainnnnnnnnnn teeeeeriiiiiiiiiii rannnndiiiiiiiiii बाहाआनंनंन्न हूँण. अब तो छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दिए मुझेईई.

मैं- (दीदी की छूट सहलाते हुवे). अछ्हाआआआआ टूउउउ मेरिइइइइइइ रनडीईईई हाइइइइइइ सरिता. एक बर्र और सोचहहहहह लिए.

सरिता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh हनननननन मेंनननननननन terrriiiiiiiiii rundiiiiiiiiiiii होऊणनननननन. मैनीईई सूछह ललियाआआआ हैईईईई. मुझेईईई छोड़ड़ड़ डीई अब मेरे भाईईईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ अपनीईईई रनडीईईई बहनणनननन कोऊ औरर बणायआ लेटी मुझेईईई अपपनीईई रअकेलललललललल.

मैं- (चुकी दबाते हुवे). ठिक्क है सरिता जब तुम मुझसे छुड़वाने के लिए इतना तड़प रही हो तो मैं तुम्हारी साडी तड़प मिटा दूंगा, लेकिन कुछ दिन बाद तुम्हारी शादी हो जाएगी तो फिर क्या होगा मेरा.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मम्म्मूउमम्मीयी. उसकेईएएएए बाडडडडडडडड भीई मैं तुझसी छुडवाऊंगीए. चू कहिएगा तू मैंन शादियी भ्हीइ नाहीई करूंगग्गीइ. मैंनं पुररी जिन्दगीयी तेरई रखाईइललल बंनकररर रहुंगीय. लेकिंन अब्ब मैट ताड़पा मुँहीी मेरे भाईईई. खूबबबबबब कस्सस काससस कररर चूडड़ड मुझी. मीरीईई छूठ कोऊ खूब कस्सस काससस कररर अपनीईई मोठे लुङदङ सीए पेलू. Oooooooooooohhhhhhhhhh ssssssssiiiiiiiiiiiii ओह्ह्ह्हह्ह mummmmyyyyyyyyyyy. अपनीईईई बीती को काहूऊऊ कोई मुझीऐ चूड्डड्ड दिए. मईंण छुउड़न्ना छठाःटीई हूंणंन्न तुमससीईई मेरी भाई. सआरईई ज़ीईनदडडागीयी छुउड़नन्ना छहःछतियई होऊणन. मुझी खूबबब रागादड़ रायगगादड़ की ोुर्र पाताकककक पट्टाककक कर चुदोऊ ऑर्डर मेररिई पयास्सस्सस्स बुझा दोऊ.

मैं- (दीदी की छूट सहलाते हुवे)- बस एक आखिरी बात. मात्र लो अगर तुम्हारे अलावी मुझे कोई और लड़की पसंद आ गयी और मैं उसे छोड़ना चाहूँ तो तुम मना तू नही करोगीइ मुझी.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh bhaaaiiiiiiiiiiii ooohhhhhhhhhhhhhhhhh टूउउउ जिस्ससी भी छोड़नी का मान काररी चू छोड़ लींना. मैंन कभी माना नाहीइ करूंगीए. बबाससस चू मुझही सारीय जींदगीय छोड़ड़ता राह बॉस औरर मुझही कुछ नहहीइ चाहहिएई. अभी अब्ब्ब मुझी ोुर्र बारदास्तत्त नाहीइ हूँ रहा ही. अब छोड़ दिए मुझी नाहीइ तू तेरई बाहन मेरर जाएगीइ.

मैं- ठिक्क है सरिता अब तुम जब इतना कर रही हो तो मैं तुम्हे छोड़ hi देता हूँ.

इतना कहकर मैंने दीदी के ऊपर आ गया और उनकी आँखों में देखा तो उसमे से हवस के अंगारे नज़र आ रहे थे मैंने दीदी के पेअर को मोड़कर दीदी की चूचियों से लगा दिया और अपने लुंड को दीदी की छूट पर रगड़ने लगा और दीदी को होंठो को अपने मुंह में भरकर दिस्स करने लगा. 4-5 बार लुंड रगड़ने के बाद मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- सरिता तुम्हारी छूट अभी बहुत कासी हुई है और मेरा लुंड मोटा है. तुम्हे अंदर लेने में बहुत तकलीफ होगी. और तुम्हारी छूट भी फैट सकती हैं.

सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhh abhiiiiiiiiii अब्ब्ब मुझसेइ अपने जिस्म कोई प्यास बर्दास्त नही हो रही ही. मैंन सर्जरी दार्द बर्दास्त कर लुंगीय छूट फटती ही तू फटने ड्डू लेकिन तुम मुझे चूड दो. नाहीई तो मैं मर जौंगीय इस आएग ममी जलकर.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने मुंह से थूक निकलकर अपने लुंड पर और दीदी की छूट पर लगाया और अपना चेहरा दीदी के चेहरे के ऊपर लेजाकर दीदी की मदमस्त और नशीली आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तो तैयार हो अपने यार का लुंड अपनी छूट में लेने के लिए

दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिलायी तो मैंने अपने होंठ उनको होंठो पर रखकर किश करने लगा और एक हल्का सा धक्का दीदी की छूट पर मारा, लेकिन लुंड फिसलकर ऊपर चला गया दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh निकल गई. मैंने फिर से अपने एक हाँथ से अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट पर टिका दिया और हल्का धक्का फिर मारा. इस बाद आधा टोपा दीदी की छूट में घुस गया. मैंने तुरंत hi फिर धक्का मारा तो पूरा टोपा दीदी की छूट में घुस गया. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. वो छटपटाने लगी. उनके मुंह से निकली चीख मेरे मुंह में डाब गई और ggggggggggggggguuuuuuuuuuu gggggggggguuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी दीदी अपने नाखून मेरी पीठ पर गाड़ने लगी लेकिन मैंने दीदी को नहीं छोड़ा. और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाने लगा और दीदी के होंठ चुसंता रहा. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हो गई तो मुझे आँखों के इशारे से अंदर डालने के लिए कहा. दीदी का इशारा मिलने पर मैंने लुंड बहार निकलकर अपने मुंह से थूक लेकर लुंड पर माला और लुंड फिर से दीदी की छूट पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा और अपना होंठ दीदी के होंठो से हटा लिया. इस दकके के साथ मेरा 4”लुंड दीदी की छूट में समां गया. दीदी के मुंह से जोर दर चीख निकल गई. वो मुझे अपने ऊपर से हटाने लगी.



सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyy. मरररररर गाइइइइइइइइइ मेंनननननननन aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh बआहाररररररर निकाएआलूऊऊ ीसीएएएएए. मेंनननननननन marrrrrrrrrrr jauunggggggggiiiiiiiiii Bhaaiiiiiiiiiiii. मुझ्कूऊऊऊ नाहीई चूड्डड्डड्डड़वणाआ तुममसीईई. बाहाआरररररररर निक्कालूओ अभीइइइइइइइ. बहुत्तट्ट्ट्ट डरडडडडडड होओओओ राहाआआआ हैईईई.

दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे. उनका चेहरा दर्द के कारन लाल हो गया था. वो लगातार छटपटा रही थी. मैंने अपना एक हाँथ दीदी की छूट पर रखकर उसे सहलने लगा और एक हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाते हुवे दीदी से कहा.

मैं- बस सरिता. चुप हो जाओ. पहली बार छुड़वाने में दर्द होता है. लेकिन एक बार तुम पूरा अंदर ले लोगी तो तुमको बहुत मज़ा आएगा. बस थोड़ा सा दर्द बर्दास्त कर लो.

सरिता दी- (सिसकते huwe)Bahuttttt दाअररररररडद्ड होओओओ रहा हीी भऐई. बाआअहारररर निकाललललल लो मैंण्ण्ण्न मारररर जाउँगगीई. ooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-94

दीदी की छूट में 4”लुंड घुसने से दीदी को बहुत दर्द हो रहा था और वो बार बार लुंड बहार निकलने के लिए कह रही थी. दीदी की बात सुनकर मैं दीदी के होंठो को चूमने लगा. उनकी चूचियों को दबाते हुवे एक हाँथ से दीदी की छूट को सहलाता रहा. मैं जनता था की एक बार अगर मैंने लुंड दीदी की छूट से निकल लिया तो दोबारा फिर बहुत मुश्किल से दीदी अंदर डालने देंगी. इसीलिए मैं अपना लुंड अंदर डेल दीदी की जिस्म से खेलता रहा. थोड़ी देर बाद दीदी की दर्द जब काम हो गया तो मैंने दीदी की आँखों में देखा तो दीदी ने अंदर डालने के लिए कहा. मैंने अपना होंठ दीदी के होंठो से हटा लिया ताकि दीदी दिल खोलकर चिल्ला सके. मैंने दीदी की दोनों चूचियों को हथेली में भरकर अपने लुंड को सुपडे तक बहार खींचा और एक तेज़ झटके से अपना लुंड 6” चाट दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी और अपने बदन को ैठने लगी.

सरिता di-ooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii माआआं. माअरररररर गाएआइइइइइइइइइ mainnnnnnnnnnnnnnn. Koiiiiiiiiiii bachaaooooooooooo मुझीीीी मुझीीी. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiiiiii baharrrrrrrrrrrr निकाललललल लीईईई. मैंईईईई मररररर जाएङ्गीइइइइइ. पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ bhaaiiiiiiiiiii रहममममममम कररररर अपनीईईई डीडीइइइइइइइ पाररररररर. Mujheeeeeeeeeeeee nahiiiiiiiiiii chuddwaaniiiiiiiiii अपनीई चूऊउत्तत्ततत्तत. Oooooooooooohhhhhhhhhhhhhh मुम्ममय…

दीदी चिल्लाती जा रही थी और रोटी जा रही थी. मैं दीदी को सांत्वना दिए जा रहा था. मैं अपनी जीभ से दीदी के बहते आंसुओ को पिने लगा. मैंने फिर से दीदी की एकक चुकी दबाते हुवे दूसरे हठः से दीदी की छूट पर रख दिया तो मेरे हाँथ में पन्नी जैसा कुछ लगा. मैंने हाँथ ऊपर करके देखा तो वो खून था. दीदी का कौमार्य मेरे लुंड ने लूट लिया था. अब दीदी काली से फूल बन चुकी थी. मैंने अपना हाँथ वापस दीदी की छूट पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. चूचिया दबाने और छूट सहलाने से कुछ देर बाद दीदी नार्मल हो गई तो मैंने फिर से अपना लुंड सुपडे तक बहार खींचा और दीदी की दोनों चूचियों को दमलगाकर अपनी मुट्ठी में भरा और पूरी ताकत के साथ अपना लुंड दीदी की बुर में पेल दिया. दीदी दर्द से दोहरी हो गयी और जोर से चिल्लाई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmuuummmmyyyyyyyyyyyyyyyyy मेंननननननन marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiii. Oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh कोइइइइइइइइइ मुझेईईईई बचाऊऊऊऊ इस्स्स्सस्स्स्स मदरररररररचाऊडड़डडडडड सीएएएएएएए ईईईई ाजजजजजजज मेरिइइइइइइइ जानननननननन लेईईंईई पर तुलाआआआ haiiiiiiiiiiii. Aaaaaaahhhhhhhhhhhhhh meriiiiiiiiiii छुटटटटटट faaaddddddddddddd diiiiiiiiiii सालेईईईई नीई. Ooooooooooohhhhhhhhhhh mummmmyyyyyyyyyyy रऊऊऊऊकूओ इस्स्स्सस्स्स्स जँवारररररररर कोऊ nahiiiiiiiiiii toooooooooo ईई तुम्हारररररईईईई बीटीईईई कोऊ ाजजजजजजज maarrrrrrrrrr डालीईएएगा. Mainnnnnnnnnn हीईई पागाललललल थीइइइइइ जोऊ इस्सस मदारचुदड़द्द सीए अपनीईई चूऊउत्त्त्तत चूडड़वाएंआआआ छाअहिततियई ठठीीी. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ. मेरीए भाआईईई छूवोड्ढड्डड़ दिए मुझी नाहीइ तू मैंन मर्डर जौंगीई.

इस बार मेरे पूरा लुंड दीदी की छूट को चीरता हुवा दीदी की बच्चेदानी से जा टकराया. डीडीई लगतरर रो रही थी और छूटने की फरियाद कर रही थी. मैंने दीदी के आंसू अपनी जीभ से छत्ते हुवे कहा.

मैं- बस हो गया सरिता. मेरा पूरा लुंड तुम्हारी छूट में चला गया है. जो दर्द होना था वो हो चुक्का है अब तुम्हे मज़ा hi आएगा.

सरिता di(rote हुवे). मुज्ज्ज्ज्ज्जीीीे नाहीईई चुऊद्वानंन्ना टूउझह्सेई. टूउउ ीककदममममम जानवार हीी. तुझक्का राहामं नाहीइइइइइइ आता अपनीईई बहन पररर. मेररिई छुटिई सी छूटत पहाड़ डीई तुमंत्री… निकालल लिए अपना लुंदड़ बहार. मुझी बहुत ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हीी.

मैंने दीदी की बात को अनसुना करते हुवे अपना लुंड जब तक उनकी छूट से बहार निकला और दोनों चूचियों को कसकर पकड़कर अपना लुंड पूरी ताकत के साथ उनकी छूट में पेल दिया दीदी फिर से चीख पड़ी.



सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmmyyyyyyyyyyyy Faaaddddddddddd दलायआ reeeeeeeeeee. मैंनं मरररररर gaiiiiiiiiiiiii. कोइइइइइइइइ meriiiiiiiiiiii चुउत्त्तत्त को बच्चाआआआआउउउ aaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiiiii mainnnnnnnnnn maarrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. Ooooooooooh muuummyyyyyyyyyy मुझेईईई बचाए ली. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हारामीइइइइइइ अपणीइइइइइइ bahaaannnnnnnnnn कीइइइइइइइ जांणण लीजाआ क्याआआआ कुत्तेईईई मदारचूडड़डडडडडडड. मेंनननननन मरररररर gaiiiiiiiiiii ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh.

दीदी की बात सुनकर मैं भी जोश मी आ चूका था. मैंने भी अपने लुंड non-stop दीदी की छूट में पेलना शुरू कर दिया और बड़बड़ाने लगा.

मैं- aaaahhhhhhhhhh ली सालललललईईईई मेरा लुंडडडड अपपनीइस हुउत्त्तत्त मई. बहुत्तट्ठ छुडाएसीईई थीइइइइइइ ना. मेरे लुँड्ड़डडडडड के लिएएएएए. तू ाभः क्यूओ रोऊ रहीए हैईईई. ाआजज टीएडीइइइइइइइ चुउत्त्तत छोड़ चूडड़ड करररर इसी भोसड़ा बनाआआआ दूंगा randiiiiiiiiii बहुत्तट्ठ तड़पाया हैई तुणीऐ मुझीीी. बिनाआआ टेरिइइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट फडीईई तुझीये मरनीईईएनाहीइ दूंगा randiiiiiiiiii. यी ली औरर अंदर तक्क लीईई.

मेरा हर धक्के से दीदी का शरीर कम्प जाता था. मैं ताबड़तोड़ दीदी की चुदाई कर रहा था. दीदी के आँशु निकलना अब बंद हो गए थे. लेकिन उन्हें अभी भी दर्द हो रहा था. वो दर्द से कराहती हुई बोली.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh भोस्स्डीइइइइवली. मैं मरररररररर जङ्गीइइइइइइ. रहमममम कररर मुझपरररररररर nalayakkkkkkkkkk. तेराआआ लुँड्ढड्डड़ बहुत्तट्ट्ट्ट बड़ा हैई मेराआ पेटट पहाड़ देगा. Oooooooooooohhhhhhhhhhhhhh टुनीईईई बेरहमीइइइइइइइ सीए पुरररा अंडरर्ड्र्र डालललललल दिया हिअआआअ. Aaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuu बहुत्तत्तत्त दररददददद होओओओओओओ राहाआआ हीईईआआआआ कोइइइइइइइइइ tooooooooooo बाछआआआआ looooooooooo मुझेईई िस्स्सस्स्स्स कामिनीईईए सीईए. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhh ाभीईई निकाआआअललललललल ली bhaaiiiiiiiiii. Dardddddddddd हूँ राहाआआ हैईईई बहणणछोड़ड़ड़ड़.

मैं- लिए randdiiiiiiiiiiii लीईई मेराआ lundddddddddd . बहुत्तट्ट्ट्ट आग लगइईईईई थीई नाहा टेरिइइइइइ छुटत में. जूऊऊऊ अपनेईईई bhaaaiiiiiiiiiii सीईईई हीईईई चूड्डड्डड्डड़आआआ liyaaaaa.leeeee मेराआआआ लुँड्ड़डडडडडड पनीईई छुट्ट्ट्ट मीटीए मेरिइइइइइइइ सरिताआए. Aaaaaaaaaaaajjjjjjjj मेंनननननन तुझीये चूडड़डकररररररर बहणणछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ बनननननन गया होओओओ टूवू मइईईईईन्न्नण teriiiiiiiiii kunwariiiiiiiiii चूत्तत्ततत्तत फ़ाड़करररररररर ही दममममममम लूंगाआआ. लीईईई saliiiiiiiiiiiiii ऑररररररररलीीीीे अपनीई याआआआररररररररर काआआआ लुँड्ड़डडडडडड अपनीई छुटत मी.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. दीदी का दर्द अब कुछ काम हो गया था. लेकिन अभी भी थोड़ा थोड़ा दर्द उन्हें हो रहा था. मैंने अपने मुंह में उनके होंठ भर लिए और जोर जोर से चूसने लगा. दीदी की चूचिया भी दबाने लगा. अब दीदी uuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कर रही थी. तो मैंने फिर से दीदी की दोनों चूचियों को अपने हांथो में भर कर मसलते हुवे अपना लुंड दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी के मुंह से फिर से आनंद की एक चीख निकल गई.

सरिता दी- ooooooooohhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh aaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiii मात्र Bhaiiiiiiiiiii निकाएआलललललल लीईई अब्बब्बबबबबब . मुझेईई दरद्धू राहाआआ हिअआ. चाहिएई तू फिरररररर दललल लेना अंडररररररर. Oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh बाहँणछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ रहममममम काररररर मुझपरररररररर मेंननननननन टेरिइइइइइ बहनणनननननन होऊणननननननन सलेईईई कोइइइइइइइ रअंदड्डड्डीई नाहीईईई हूंणणन्न जोऊ इतनी बेरहमीईई सीईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ राहाआआ हैई.

मैं- चुप कररररररर सलीईई. टेरिइइइइइइइ चूत्तत्ततत्तत्त बहुत्तत्ततत्तत तिघटततततततत haiiiiiiiiiiiii. ईईईई धीरे धीरीईए छोड़नी की लिए नहीं baniiiiiiiiii हैई saliiiiiiiiiiii. ीसीईई टूऊंऊं जित्त्तत्तत्नीी बेरहमी सीईई चूऊऊऊडड़डडडआआआ जाएएएएएएए उतना हीई तुंही मज़ाआ aayeeegaaaaaaaaaa सरिताआआआ. सलीईईईई टूउउ कामाआलल्ल कोई haiiiiiiiiiiii. ायबबब टकककक कोइई ऑरररर लड़की होतीइइइइइ टूओ बेहूशा होऊ गईई हॉटटीईई ऑररररररर mujheeeeeeeeee बिछहहह मेई होई छुडाईइइइइइ बंदददद करणीय पडतीय. लेकीननननननन टूउउउउ अभीइइइइइइ भीईईई मेराआ लुँड्ढड्डड़ लेनी की बाडडडडडड होशूयओ हवाससससस मीटीए हैईईईई. टूउऊउउउउ कीसीईईईई रांदडीईई सीईई कम्मं नाहीईई है सरीयताआआआ. लीईई ऑरररररर anddddddarrrrrrrrrrrr टककक लेटी मेरेईईई लौंडडडडडडडडड मेरिइइइइ रनडीईईई बहनाआआआ.

मैं इतने रफ़्तार से दीदी को छोड़ रहा था की 10 सेकंड के अंदर मैं 24-25 बार अपना लुंड दीदी की छूट में पेलता था. इस ताबड़तोड़ चुदाई ने दीदी को झड़ने के करीब ला दिया था. जब दीदी झड़ने के करीब पहुंची तो अंत संत बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhhh हराआमईईईई सलीईईई टूउउउ टूऊंऊं असलीईईई बहछोड़ड़ड़ड़ निकलाआआआआ. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhh tuneeeeeeeeeee अपणीइइइइइइइ हीईई bahannnnnnnnnnki छुट्ट्ट्ट फाडड्ड डीई. Ooooohhhhhhhhhh माआआ की लौंडईईए और जुरररररररर सीईई choodddddddddd मुझीऐ हरामममममममजादेईएएए. बहुत्तट्ठ दम्मम हीी तेरी लुँड्ड्ड मीटीए. तू पुरीय दुनियाआआअआकू छोड़ड़ड़ड़ सकता हैईईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ सलीबी बहनणनननचोड़ड़ड़ड़ हरामीईई और जोरररररर सीईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मेरीए यारररररररर. मेंनननननन झाड़नी वालीइइइइइ हूँण बहन की लौडी. ईईईई छुट्ट्ट्ट्ट ाजजज्जज सीए टेरिइइइइइइ होऊ गईइइइइइइ हैईईईई uuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffff मेंनननननननन gaiiiiiiiiii bhaaiiiiiiiiiiiii मइईईईन्न्नन्नं झाआंआड़नईईईई waliiiiiiiiiii hoooonnnnnnnnnn. मुझीीीी कसकरररररररर पकाआअड़द्द लेटी भाईईईईई ऑरररररररर जोररररररर जोररररररररर सीईई ठोकककककककक लुँड्ढड्डड़ मेरिइइइइइइइ chutttttttttt मीटीए मदररररछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़…

इतना कहकर दीदी की छूट ने पनीई छोड़ड़ड़ड़ दिया और डीडीई हांफने लगी. लेकिन मैं नहीं रुखा. मैं अपनी स्पीड में दीदी की छूट छोड़ता रहा. मेरा लुंड अब्बब्बब्ब छुट्ट्ट्ट के पानी से चिकना हो गया था. इसलिए हर झक्के के साथ फुक्छःहःहःहः fuchhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल रही थी. जब दीदी से बर्दास्त नहीं हुवा तो उन्होंने मुझसे हटने के लिए कहा.

सरिता दी- Oooooooooohhhhhhhhhh ाभ्ह्ह्हीईई अब्ब्ब मत्तट कररर मैं बहुत्त ताकक गयी हूँ थोड़ा आरम्म करनी लेनी दे भाई.

दीदी की बात सुनकर मैंने लुंड दीदी की छूट से निकल लिया और बिस्तर प् लेट गया और अपना लुंड सहलाते हुवे दीदी से कहा.

मैं- क्यों सरिता रानी मज़ा आया भाई से छुड़वाकर.

सरिता दी- Hhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmm

मैं- क्या यार अभी भी शर्मा रही हूँ. अब तू शर्म छोड़ दो और खुलकर बोलो.

सरिता दी- हाँ अभी. शुरू शुरू में तो तुमने मेरी जान hi निकल दी थी, लेकिन बाद में मुझे ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में हूँ. बहुत मज़ा आया भाई.

मैं- तो अब तुम भी मुझको मज़ा दो. चलो मेरे लुंड को चुसो.

इतना बोलकर मैंने हाँथ बढाकर दीदी के होंठो पर रख दिए और उनको होंठो पर हाँथ फेरने लगा.



दीदी मेरे हाँथ फेरने से मदहोश होने लगी और मेरी आँखों में देखने लगी. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी ने मेरे लुंड को अपने हांथो में भर लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर लुंड सहलाने के बाद दीदी ने मेरे लुंड को अपने चेहरे पर किया और उसे अपने चेहरे पर फिरने लगी. मेरे लुंड पर दीदी की छूट का पानी अभी भी लगा हुवा था तो लुंड चेहरे पर फिरने के कारन दीदी के चेहरे पर मेरे लुंड का पानी लग गया. जिससे दीदी का चेहरे चमकने लगा.



थोड़ी देर लुंड अपने चेहरे पर फिरने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड को चाटने लगी. दीदी अपनी जीभ पुरे लुंड पर ऊपर से निचे और निचे से ऊपर तक फिरने लगी. मेरे मुंह से आआआआअह्ह्ह्हह sssssssssssssssss uuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhh सरिता की आवाज़ निकलने लगी. थोड़ी देर लुंड पर जीभ फिरने के बाद दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था तो मैंने दीदी को उत्साहित करते हुवे कहा.

मैं- wwwwwwwwwwwwwaaaahhhhhhh सरितत्ता तुममम बहुतत्त अच्छा लुंड चुस्ती हूँ, और चुसो ऑर्डर जोरर सी चुसू पुर्रा मुंह में लेकर चुसोऊ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने लुंड और अंदर लिया और चूसने लगी. लेकिन अभी भी मेरा लुंड पूरा उनके मुंह में नहीं गया था. तो मैंने दीदी के सर को पकड़ लिया और जोर जोर से कमर उठा उठाकर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. दीदी के मुंह से gggguuuuuuuuuuu जूउउउउउउउ की आवाज़ निकलने लगी. कुछ देर तक दीदी को लुंड चुसवाने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया और दीदी से बोलै.

मैं- सरिता अब हम दोनों एक साथ एक दूसरे का लुंड और छूट चूसेंगे.

इतना कहकर मैंने दीदी के पेअर पकड़कर अपने सर की तरफ खींच लिया और उनकी छूट को मुंह के सामने करके उनकी छूट पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा. दीदी भी मेरे लुंड को चूसने लगी.



मैंने अपना एक हाँथ दीदी की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. एक हाँथ से दीदी की छूट की क्लीट को रगड़ने लगा. मेरे इस 3 तरफ़ा हमले से दीदी गरम होने लगी और जूउउउउउउउ gggguuuuuuuuuuuuuu की आवाज़ के साथ लुंड चूसने लगी. मैं दीदी की गांड दबाते हुवे दीदी की छूट को सहलाते हुवे दीदी की छूट चाट रहा था. जब दीदी से बर्दास्त नहीं हुवा तो उन्होंने मेरा लुंड अपने मुंह से निकल लिया और मदहोशी के साथ बोली.

सरिता दी- बस कर अभी. अब बर्दास्त नहीं हो रहा है छोड़ मुझे.

दीदी की बात सुनकर मैं बिस्टेर से निचे उतर गया और दीदी को खींचकर बीएड के किनारे किया और डोगग्य स्टाइल में दीदी को खड़ा कर दिया. फिर मैंने अपने लुंड को हाँथ से पकड़कर दीदी की छूट पर सेट किया और एक धक्का मारा. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता di-oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh जाहाआलिममममम थुदाआआ धीरीईईई सीई. मुझीीीी डरडडडडडड होताआआआ haiiiiiiiiiiiii. ाजजजजजज पहलीयई बाररररररररर तुझ्सीईईई चूडड़वाआआआ रहीइइइइइइइ हूंणणंन्न. ाभीईई meriiiiiiiiiii चूत्तत्ततत्तत्त तिघटततततत haiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiii. थोड़ड्डड्डा धीरीईई करररररर.

मैं- Saaaaaaliiiiiiiiii अभियई तू ऑररररररर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ teezzzzzzzzzz छोडूँगाआआआ. टूउउ धीरीईई धिइरीटीए छोडनीयी वलियी maaallllllllll नाहीइ हीी. तुझीऐ तू हचहककक हाचायककक कररर छोड़ूँगा. टीएडीइइइइइइ छुट्ट्ट्ट मई बआहूतट ाजगगगग हैईईई. बहुउत्तत्त पाणीइइइइइइ भारा हैई टेरिइइइ चुउत्त्तत मेई. ाजजजजज मैएँणंसाराआआआ पानीईई पीई लुंगग्गाआँ टेरिइइइ चुउत्त्त का सारित्ताआ रानीई.

इतना बोलने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से टोपे तक बहार निकला और दीदी की गार्डन में अपने हाँथ डालकर उन्हें ऊपर उठाया और एक झटके में अपना पूरा लुंड दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी दर्द से दोहरी हो गयी और जोर से चीख पड़ी.



सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyy mummmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy माहाअररर्र gaaiiiiiiiiiiiii miainnnnnnnnnn madarrrchooddddddddddd. Ooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh छहददददद दिए mujheeeeeeeeee. मुझीीीी नाहीइ छुड़वाना. कोइइइइइइइ बचाओओओओओ मुझीीी इस्सस बहनंन के लौडीइए सीए. Kamineeeeeeeeeeee तूंबीएई मेरिइइइइइ chuuutttttttttt फाआआअड़ड्डड्डड्डड्ड दलीयई haiiiiiiiiiii अब्बब्बबबबबब tooooooooooo रहमममममममम कररर अपनीईई डीडीइइइइइइइ पारररररर chhhoodddddddddd डीएई bahannnncboodddddddddd. Kiiissssssssss janaaammmmmmmmmm काआआआआ बदललललललललाआआआआ निकललललललललल रहहाआआआआ haiiiiiiiiii saleeeeeeeeeeee. जूऊऊ ीत्नीईईई बेरहमीइइइइइइ seeeeeeeeeee छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ राहाआआ हैईईई.

मैंने दीदी की बात की कोई परवाह नहीं की और दीदी के बाल पकड़कर अपना लुंड ताबड़तोड़ दीदी की छूट में पेलने लगा मेरे ईद धक्के से दीदी की आँख बहार आने लगी मैं लुंड को पेलते हुवे दीदी से बोलै.



मैं- लिए सललीई ऑर्डर ली. बाडीई आएग लागीइइइइइइइ थीइइइइइ ना टेरिइइइइइइइ छुटत मेई. बहुत्तत्तत्त खुजलियी माछीइइइइइइ रहहटईइइइइइइइ थीइइइइइइ टेरिइइइइइइइ चुउत्त्त मीटीई इसीलिएईईई टूउऊउउउउ मुझीीी अपनाआआआआ न्नंगा बड़ननननन दिखाकरररर भाआयडडडकातीयईईई रहतत्तततत्तैईईईई थीईई ना लेईईई saaliiiiiiiiiiii Randddddddddd. आजजज मेंननननननन टीएडीइइइइइइइ सरीईईईई खुजलीइइइइइइइइ मिलाआआआ डूंगाआआ. तुझीीी पट्टाककक पाताककककक कररररर इतनाआए choodungaaaaaaaaaa की टेरिइइइइइइइ 7 जन्मूँऊऊओ कीई पयास्सस्सस्स ाजजजजज बुझ जाएगीइइइइइइइ. ाजजजजजज मेंननननननन मुझी छोड़ड़ड़ड़ड़ chooodddddddddd कररररर तेरी सरीईई छेदददददद रवा कर डूंगाआआ. लेटी saliiiiiiiiii ऑररररर अंडरर्ड्र्र लेटी मेराआ लुँड्ड्ड.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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