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मनीषा- ऐसा है भैया. आप चुप hi रहिये. नहीं तो मैं अभी फ़ोन करने जा रही हूँ पापा को. आपसे बाद में बात करुँगी. पहले दीदी से तो निपट लू. हाँ तो बताइये दीदी. इस बात का तो पापा को पता चलना hi चाहिए की उनकी लाड़ली बेटी अपने भाई के साथ क्या क्या गुल खिला रही है.
सरिता di(rote हुवे)- ऐसा मत करना मनीषा. पापा को मत बताना. नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं पापा को मुंह नहीं दिखा पाऊँगी. मैं सकते कर लुंगी. मैं ये कलंक लेकर नहीं जी पाऊँगी. मुझे माफ़ कर दे मनीषा. तू जॉब hi सजा देगी मुझे मंज़ूर है.
दीदी की बात सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उसने अपने प्लान की पहली सीधी पर कर ली थी.
अब आगे.
दीदी ने जो बात कही थी किट ुम जो भी सजा डौगी मुझे मंजूर होगी उसे सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी, लेकिन उसने तुरंत अपने चेहरे पर गुस्सा लाया और दीदी से मुखातिब होते हुवे कहा.
मनीषा- सजा तो आप दोनों को अब पापा देंगे. मैं अभी पापा को फ़ोन करके सब बताती हूँ.
इतना कहकर मनीषा ने अपना फ़ोन हाँथ में लिया और उसमे किछ करने लगी. सरिता दीदी ने तुरंत उसके हाँथ पकड़ लिए और मिन्नत भरी आवाज़ में बोली.
सरिता दी- प्ल्ज़ मनीषा पापा को मत बताओ. मैं पापा की नज़रो में गिरकर नहीं जीना चाहती. तू मुझे माफ़ कर दे और एक मौका दे. मैं तुझसे वडा करती हूँ की जो चाहेगी मैं वो करुँगी.
मनीषा अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लेकर बोली.
मनीषा- ठीक है दीदी जब आप इतना कह रही हैं तो मैं पापा को कुछ नहीं बताउंगी. लेकिन उसके लिए आप दोनों को सजा मिलेगी. और मैं जो कहूँगी आपको मेरी बात man-ni होगी.
सरिता दी- ठीक है मनीषा. तुम जो कहोगी मैं वो सब करुँगी, लेकिन पापा को ये बात मत बताना.
मनीषा- एक बार और सोच लो दीदी, कही मेरी बात सुनकर आप मुकर गई तो.
सरिता दी- मैं नहीं मुकरूंगी. मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी, तुम एक बार कहो तो सही.
दीदी की बात सुनकर मनीषा ने अपना हाँथ बढाकर दीदी के आँशु साफ किये. और अपना हाँथ दीदी के सर के पीछे मज़बूती से पकड़कर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.
मनीषा- सच में आप मेरी हार बात मानोगी.
मनीषा की बात सुनकर दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. तो मनीषा ने अपना सर आगे झुकाया और अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. ऐसा करते hi दीदी को एक झटका सा लगा और वो मनीषा को अपने से दूर धकेलने लगी, लेकिन मनीषा ने दीदी का सर पकड़ा हुवा था इसलिए दीदी अपने आपको छुड़ा नहीं पाई और कसमसाने लगी. मनीषा ने लगभग 2 मिनट तक दीदी के होंठो को जोर जोर से चूसा और छोड़ दिया. दीदी मनीषा को अपने से दूर धकेला और गुस्से के साथ बोली.
सरिता दीदी- ये क्या बदतमीज़ी है मनीषा. तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो.
दीदी की बात सुनकर मैं और मनीषा मुस्कुराने लगे. दीदी मुझे हँसता देख आँखे फाडे कभी मुझे देखती और कभी मनीषा को देखती. दीदी ने मुझे हँसता देख मुझसे पूछा.
सरिता दी- तुम्हारी हंसी का मतलब है की तुम भी मनीषा के साथ मिले हुवे हो और मेरे साथ ये खेल खेल रहे हो. तुम दोनों को शर्म नहीं आती. मुझे ऐसे जलील करते हुवे.
इतना कहकर दीदी रोने लगी. दीदी को रट देख मैं और मनीषा दीदी के पास गए और उन्हें चुप करवाने लगे. दीदी बार बार मुझे अपने से दूर धकेल रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हुई तो उन्होंने मनीषा और मुझे देखते हुवे कहा.
सरिता दी- तुम दोनों को मुझे जलील करके क्या मिल गया. और अभी तुमने भी इसका साथ दिया. मैंने तुमको अपना सबकुछ सौप दिया. क्या कमी रह गयी थी मुझमे जो तुमने मेरे साथ ऐसा किया.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.
मैं- दीदी आप पहले चुप हो जाओ. हमने आप को जलील नहीं किया. ये सब मनीषा का प्लान था की हम दोनों को वो रेंज हांथो पकडे और हम दोनों के साथ चुदाई में शामिल हो सके.
मनीषा- हाँ दीदी आप मुझे गलत समझ रही है. मैं तो बस आपको डरा रही थी की आप मेरी बात आसानी से मान जाओ. और मुझे आप दोनों के बारे में शुरू से सब पता था. जब से आप मीरा की बात मानकर भैया को सडके करना शुरू किया तब से आज तक की साडी बाते मुझे पता हैं.
मनीषा की बात सुनकर दीदी का मुंह खुला का खुला रह गया. उन्हें तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की जिन्हे वो इतना सीधा सदा समझती हैं वो बहुत पहुंची हुई चीज़ है. दीदी के मुंह से कोई बोल नहीं फुट रहे थे. मनीषा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.
मनीषा- आपको याद है की सोनम दीदी की शादी में आपको जाना था, लेकिन आपकी जगह मैं चली गई. जानती हैं क्यों, क्योंकि मैं आप सब को बहुत प्यार करती हूँ और मैं आपको खुश देखना चाहती हूँ, इसलिए मैं बहाना बनाकर वह चली गई ताकि आप दोनों को प्राइवेसी मिल सके. अगर मुझे आपको जलील करना होता तो मैं आपको शुरू में hi ऐसा करते हुवे पकड़ लेती और जलील करती.
मनीषा की बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने हाँ में गार्डन हिला दी. दीदी ने फिर से मनीषा की तरफ देखा. दीदी को अभी भी भरोषा नहीं हो रहा था की मनीषा ने शुरू से लेकर आखिर तक सबकुछ अपनी आँखों से देखा है. दीदी ने लड़खड़ाती हुई जुबान में मनीषा से फिर पूछा.
मनीषा- जब तुम्हे सब पहले से hi पता था. तो तुम पहले क्यों सामने नहीं आई. आज क्यों आई हो.
इस बार मनीषा की जगह मैं बोलै.
मैं- बात ये है दीदी की कल मैंने मनीषा को भी छोड़ दिया और जब मैंने मनीषा की गांड मरने की सोची तो मनीषा ने ये शर्त रख दी की वो मुझसे गांड तभी मरने देगी जब मैं उसकी गांड आपके सामने मरू और आप इसमें उसकी मदद करे.
मेरी बात सुनकर दीदी मुझे और मनीषा को घूर घूर कर देखने लगी और बोली.
सरिता दी- क्या………….. तुमने मनीषा को छोड़ लिया और मुझे बताया तक नहीं और मैंने तुझसे पूछा तो तुमने मन भी कर दिया की तुम दोनों देर रत तक बात करते रहे और तुम तरय करते रहे. लेकिन काम नहीं हुवा.
मनीषा- क्या………. आप दोनों भी यही चाहते थे पहले से hi.
मैं- हाँ मनीषा. मैं तुम्हे छोड़ सकू इसीलिए मैंने दीदी को शर्मा जी के यहाँ जाने के लिए कहा था.
मनीषा- लो ये तो अच्छी बात है. अब तो कोई पर्दा hi नहीं रह गया है और साडी बाटे क्लेयरे भी हो गई हैं तो क्यों न हम तीनो साथ में मिलकर ये खेल खेले.
सरिता दी- लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं हूँ.
मनीषा- क्यों दीदी. मैंने आपके लिए और आपकी ख़ुशी के लिए इतना कुछ किया. सब कुछ जानते हुवे भी कभी मैंने ये बात किसी पर जाहिर नहीं होने दी. और आप दोनों को प्राइवेसी भी दी ताकि आपको वो ख़ुशी भैया से मिल सके जो आप चाहती थी, लेकिन आप मेरी ख़ुशी के लिए इतना भी नहीं कर सकती.
सरिता दी- हाँ. मैं ये नहीं कर पाऊँगी. तुम सबकुछ जानती हो मैं इस बात से अनजान थी, लेकिन अब मुझे पता चल गया है की तुम्हे सब पता है तो मैं तुम्हारे सामने ये सब नहीं कर पाऊँगी.
मनीषा- तो इसका मतलब आप भैया से कभी नहीं छुडवाएंगी. क्योंकि अब आप भी ये जान गई हैं की मुझे सब कुछ पता चल गया है.
मनीषा की बात सुनकर दीदी खामोश हो गई. उन्होंने मनीषा के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. मनीषा ने दीदी को खामोश देखकर फिर कहा.
मनीषा- मैं जानती हूँ की आप भैया से बिना चूड़े अब नहीं रह सकती और अब मेरा भी यही हॉल है. भैया का लुंड आपको भी चाहिए और मुझे भी. तो क्यों न हम दोनों मिलकर साथ में भैया से चुदाई करवाए.
मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ देर के लिए किसी सोच में डूब गई दीदी अपने नाख़ून को अपने दांतो से कुतरने लगी. थोड़ी देर सोचने के बाद दीदी ने अपना सर ऊपर उठाया और कहा.
सरिता दी- लेकिन मनीषा ये ठीक नहीं है. मैं ये सब कैसे कर पाऊँगी. मुझे शर्म आएगी.
दीदी की बात सुनकर मनीषा को अपनी बात बनती हुई नज़र आने लगी. तो मनीषा ने इमोशनल अत्याचार दीदी के ऊपर करना शुरू कर दिया और दीदी से कहा.
मनीषा- ठीक है दीदी. मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, इसलिए मैंने हमेशा आपकी ख़ुशी चाही है. सोनम दीदी के ः जाने के समय आपने एक वडा मुझसे किया था की मैं आपसे जो कुछ मांगूंगी आप मुझे देंगी. और मैंने उस दिन वो वडा उधर कर दिया था. इसी दिन के लिए, पर शायद आप मुझसे तनिक भी प्यार नहीं करती, इसलिए मैं आपको आपके उस वेड से मुक्त करती हूँ. आप अपनी ख़ुशी में खुश रहिये. मैं किसी को कुछ नहीं बताउंगी. मैं जा रही हूँ और आज के बाद आप दोनों के बिच नहीं आउंगी.
इतना कहकर मनीषा मुड़कर जाने लगी. मुझे भी लगा की अब मनीषा की गांड मुझे कुछ समय मिलने से रही, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था, इसलिए मैं चुप- चाप खड़ा रहा, क्योंकि मुझे कही न कही ये लग रहा था की मनीषा जैसी खुराफाती लड़की इतनी आसानी से तो man-ne वही है नहीं. उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो जरूर चल रहा होगा दीदी को रस्ते पर लेन के लिए.
अभी मनीषा दरवाज़े तक hi पहुंची थी की दीदी ने दौड़कर उसका हाँथ पकड़ लिया और उसको दीवाल से सटाकर कड़ी कर दिया और उसके चेहरे पर अपनी उंगलिया फिरते हुवे बोली.
सरिता दी- तुमने ये कैसे सोच लिए की मैं तुमसे प्यार नहीं करती. मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी इसलिए मैं मन कर रही थी. लेकिन मैंने सोचा की जब तुम मेरे लिए इतना कर सकती हो तो मैं भी तो तुम्हारी ख़ुशी के लिए थोड़ा बहुत तो कर hi सकती हूँ. वैसे भी अब हम सब के बिच कोई सेकरते तो रह नहीं गया है. इसलिए मैं तुम्हारे साथ हूँ मनीषा. अब हम तीनो मिलकर मज़ा करेंगे.
इतना बोलकर दीदी ने अपने होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया.
मनीषा ने भी अपने होंठ दीदी के होंठो से पूरा सटाकर दीदी के होंठ चूसने लगी. दोनों की होंठ चूसै का कार्यक्रम देख कर मैं बहुत खुश हुवा और चलते हुवे उन दोनों के पास पहुंच गया और पीछे से दीदी की गांड में अपने लैंड घुसकर दीदी की गार्डन को चूमें लगा. दीदी ने अपना होंठ मनीषा के होंठो से अलग किया और पलटकर मेरी तरफ हो गयी और मुझसे बोली.
सरिता दी- आज तुम्हारी छुट्टी है अभी. तुम बस चुपचाप बैठकर नज़ारे का आनंद लो. कल दिन में हम तीनो मिलकर चुदाई करेंगे. अभी तुम आराम से जाकर कुर्सी पर बैठो और हमारी रासलीला का आनंद लो.
दीदी की बात सुनकर मैं आकर कुर्सी पर बैठ गया. दीदी फिर से मनीषा की तरफ घूम गई और उसके होंठो को चूसने लगी. मनीषा ने अपने दोनों हांथो से दीदी के सर को पकड़ा और जोर जोर से दीदी के होंठ चूसने lagi.thodi देर होंठ चूसने के बाद मनीषा और दीदी अलग हुवे और दोनों अपनी अपनी जीभ बहार निकलकर आपस में लड़ने लगी.
मनीषा और दीदी की रासलीला देखते हुवे मुझे भी जोश चढ़ने लगा. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो गया. मैंने भी उन्हें देखते हुवे अपने लोअर के ऊपर से hi अपने लुंड को सहलाने लगा.
दीदी और मनीषा अपनी जीभ आपस में ऐसे लगा लहि थी जैसे दोनों के बिच कोई जुंग चल रही हो. जैसे दो तलवार आपसे में टकरा रही हैं. थोड़ी देर तक दोनों अपनी जीभ लगाती रही उसके बाद मनीषा ने दीदी की जीभ अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. दीदी ने मनीषा के सर को पीछे से पकड़ लिया और अपनी जीभ ज्यादा से ज्यादा मनीषा के मुंह में डालने लगी. मैं कुर्सी बार बैठा अपना लुंड सहला रहा था और इस हसीं नज़ारे का आनंद ले रहा था. मेरी दो मस्त जवान बहाने एक दूसरे के जिस्म से खेल रही थी. वो भी अपने भाई के सामने.
थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी के मुंह में अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर जीभ अंदर बहार करने के बाद मनीषा ने अपना पूरा मुंह दीदी के मुंह से चिपका दिया और अपनी पूरी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी.
दीदी जोर जोर से मनीषा की जीभ चूस रही थी. थोड़ी देर एक दूसरे की जीभ चूसने के बाद दोनों ने अपना मुंह हटा लिया. दोनों के होंठ एक दूसरे के थूक से साणे हुवे थे. दोनों ने दरवाज़े के पास खड़े होकर मेरी तरफ देखा. फिर दीदी ने मनीषा के कण में कुछ कहा. तो मनीषा ने मेरी तरफ देखा और कहा.
मनीषा- क्यों भैया कैसा लग रहा है अपनी बहनो का लाइव शो देखकर.
मैं- पूछो मत मनीषा. मुझे ऐसे लग रहा है की मुझसे ज्यादा किस्मत वाला कोई भाई नहीं होगा.
सरिता दी- बस तुम बैठकर शो देखो. अभी तुमको बहुत मज़ा मिलेगा.
इतना कहकर मनीषा और दीदी ने एक दुसरे की तरफ देखा और हंसने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने और हसने के बाद दीदी अपना होठ आगे की तरफ झुकाया तो मनीषा भी दीदी की तरफ झुककर अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और दोबारा से एक दूसरे के होंठ चलने लगी.
दोनों बहुत जोर जोर से एक दुसरे के होंठ चूस रही थी. मैं उन दोनों को देखकर बस अपना लुंड मसल रहा था. थोड़ी देर लुंड मसलने के बाद मैं कुर्सी से उठकर अपनी लोअर निचे सरका दी और कुर्सी पर बैठ कर अपने नंगे लुंड पर हाँथ फेरने लगा. मनीषा और दीदी अभी भी किश में दूभि हुई थी. दोनों एक दूसरे की जीभ को मुंह में लेकर चूस रही थी. जिससे सस्सप्प्प्प्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ स्स्स्सस्स्स्सप्प्प्पपप्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दोनों एक दूसरे से अलग हुवे और मेरी तरफ dekha.mujhe नंगा होकर लुंड मसलते देख दोनों मुस्कुराने लगे. सरिता दीदी ने मुझसे कहा.
सरिता दी- ये क्या कर रहे हो अभी. तुमको शर्म नहीं आती अपनी बहन के कमरे में नंगे होकर बैठे ऐसी हारकर कर रहे हो. यहाँ इतना अच्छा शो का इंतेज़ाम हम दोनों ने तुम्हारे लिए किया है, लेकिन तुम इस शो को इग्नोर करके अपने लुंड के साथ खेल रहे हो.
मैं दीदी की बात सुनकर पाने लुंड को दबाकर छोड़ दिया जिससे मेरा लुंड झटके से आकर मेरे पेट पर
ठोकर मरी. मेरे मुंह से aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सरिता निकल गया. मैंने फिर से अपने लुंड को निचे दबाकर छोड़ दिया. मेरा लुंड फिर से जाकर मेरे पेट से टकराया. मेरे मुंह से इस बार आआआहहहहहहह मनीषा निकल गया. दोनों मुझे देखकर हंसने लगी. मैंने उनको देखकर कहा.
मैं- देखो तुम दोनों ने मेरी क्या हालत कर दी है. तुम दोनों के इस कामुक खेल को देखकर मेरा लुंड कैसे हिचकोले मर रहा है. मुझपर ऐसा जुल्म मत करो तुम दोनों. मुझे भी अपने साथ शामिल कर लो. मैं बिकते बैठे बोर हो रहा हूँ.
मनीषा- कैसे भाई हो आप. अपनी बहनो की जवानी देखकर भी आप बोर हो रहे हो. तो आज आपकी यही सजा है की आप केवल दर्शक बैंकर hi इस खेल का आनंद उठाये.
इतना कहकर दोनों चलती हुई मेरे करीब आकर कड़ी हो गई और मेरे लुंड को देखने लगी. मैं भी उन की आँखों में बरी बरी से देखते हुवे लुंड को मसलने लगा. दोनों की आँखे लाल हो गई थी. दोनों की आँखों में वासना साफ दिखाई दे रही थी. कुछ देर मेरा लुंड देखने के बाद मनीषा जाकर दीदी के पीछे कड़ी हो गई और दीदी से चिपक गई. मनीषा ने दीदी की बगल से हाँथ डालकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी.
दीदी ने भी अपने दोनों हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख लिया. मनीषा ने थोड़ी देर दीदी की चूचियों को धीरे धीरे दबाया. उसके बाद दीदी की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगी. दीदी के मुंह से आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा oooooooooohhhhhhhhh मनीषा की सिसकारी निकलने लगी.
मनीषा दीदी की चूचिया दबाते हुवे अपने होंठो से दीदी की गार्डन चूमने लगी और कभी कभी जीभ निकलकर दीदी की गार्डन भी चाटने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi गार्डन को चूमने चाटने के बाद मनीषा ने दीदी के कान के पास अपना मुजन्ह ले जाकर उनके कण की लौ को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी और दोनों चूचियों को हथेली में भरकर जोर से मसल दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गयी.
सरिता दी- aaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मनीषा. oooooooohhhhhhhhhh धीरी सीए. टूउउ भठी इस कमीनी की तआर्रआह्ह्ह्ह होई जोरर से दबा रही हीी. aaaaaauuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhh.
मनीषा( उनके कण में सरगोशी करते हुवे)- मुझे पता है दीदी की आपको धीरे दबवाने में मज़ा नहीं आता. तभी तो आप भैया से जोर जोर से दबवाती थी अपनी चूचिया.
मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली. मनीषा दीदी की दोनों चूचिय. जोर जोर से दबती रही और दीदी की गार्डन और कान को मुंह में भरकर चुस्ती रही. इतना कामुक नज़ारा देखकर मैं अपना लुंड जोर जोर से सहलाने लगा. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैं भी अब इस खेल में शामिल होना चाहता था. तभी मनीषा ने दीदी की चूचियों को फिर जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.
सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh meriiiiiiiiiiiiiiii प्यारीइइइइइइ बहाणणणणणणण. ऐसी हीईईई दब्बब्बाऊओऊ. बहुत्तट्ठ माज़आ आ ररहा हैई मुझी.
दीदी की बात सुनकर मनीषा और जोर से दीदी की चूचिया दबाने लगी. मैं भी अब उठकर मनीषा के पीछे जाकर उससे सत्कार खड़ा हो गया. मनीषा ने मेरी तरफ देखा तो उसकी आँखे लाल हो गई थी. चेहरा सुर्ख हो चुक्का था. मनीषा ने मुझे आँखों के इशारे से बैठने के लिए कहा, मगर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड में घुसेड़कर अपना होंठ मनीषा की गार्डन पर रख दिया और उसे चूमने लगा. मनीषा ने उत्तेजना में आकर दीदी के दोनों निप्पल को पानी ऊँगली और अंगूठे के बिच में पकड़ लिया और पूरी ताकत के साथ दीदी के निप्पल को मसल दिया. दीदी चीख पड़ी.
सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyy. क्याआ करररर रही हैई टूउउ मनीषआआ. इतनीई जूर्रर सीए क्यूँ मसलाआ तुणीऐ. मुझी बहुत्त दररदद्ड होऊ रहा हैई. aaahhhhhhhhhhh. oooooooohhhhhhhhhhhhh.
अभी मनीषा कोई जवाब देती इससे पहले hi बहार बेल्ल बजने की आवाज़ आई. मैं तुरंत hi मनीषा के पीछे से हटा और अपना लोअर पहनकर अपने लुंड को ऊपर की तरफ दबाकर डोरी में फंसा दिया. और दोनों को अपना हुलिया दुरुस्त करने का बोलकर निचे दरवाज़ा खोलने के लिए चला गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
मनीषा- ऐसा है भैया. आप चुप hi रहिये. नहीं तो मैं अभी फ़ोन करने जा रही हूँ पापा को. आपसे बाद में बात करुँगी. पहले दीदी से तो निपट लू. हाँ तो बताइये दीदी. इस बात का तो पापा को पता चलना hi चाहिए की उनकी लाड़ली बेटी अपने भाई के साथ क्या क्या गुल खिला रही है.
सरिता di(rote हुवे)- ऐसा मत करना मनीषा. पापा को मत बताना. नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं पापा को मुंह नहीं दिखा पाऊँगी. मैं सकते कर लुंगी. मैं ये कलंक लेकर नहीं जी पाऊँगी. मुझे माफ़ कर दे मनीषा. तू जॉब hi सजा देगी मुझे मंज़ूर है.
दीदी की बात सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उसने अपने प्लान की पहली सीधी पर कर ली थी.
अब आगे.
दीदी ने जो बात कही थी किट ुम जो भी सजा डौगी मुझे मंजूर होगी उसे सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी, लेकिन उसने तुरंत अपने चेहरे पर गुस्सा लाया और दीदी से मुखातिब होते हुवे कहा.
मनीषा- सजा तो आप दोनों को अब पापा देंगे. मैं अभी पापा को फ़ोन करके सब बताती हूँ.
इतना कहकर मनीषा ने अपना फ़ोन हाँथ में लिया और उसमे किछ करने लगी. सरिता दीदी ने तुरंत उसके हाँथ पकड़ लिए और मिन्नत भरी आवाज़ में बोली.
सरिता दी- प्ल्ज़ मनीषा पापा को मत बताओ. मैं पापा की नज़रो में गिरकर नहीं जीना चाहती. तू मुझे माफ़ कर दे और एक मौका दे. मैं तुझसे वडा करती हूँ की जो चाहेगी मैं वो करुँगी.
मनीषा अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लेकर बोली.
मनीषा- ठीक है दीदी जब आप इतना कह रही हैं तो मैं पापा को कुछ नहीं बताउंगी. लेकिन उसके लिए आप दोनों को सजा मिलेगी. और मैं जो कहूँगी आपको मेरी बात man-ni होगी.
सरिता दी- ठीक है मनीषा. तुम जो कहोगी मैं वो सब करुँगी, लेकिन पापा को ये बात मत बताना.
मनीषा- एक बार और सोच लो दीदी, कही मेरी बात सुनकर आप मुकर गई तो.
सरिता दी- मैं नहीं मुकरूंगी. मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी, तुम एक बार कहो तो सही.
दीदी की बात सुनकर मनीषा ने अपना हाँथ बढाकर दीदी के आँशु साफ किये. और अपना हाँथ दीदी के सर के पीछे मज़बूती से पकड़कर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.
मनीषा- सच में आप मेरी हार बात मानोगी.
मनीषा की बात सुनकर दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. तो मनीषा ने अपना सर आगे झुकाया और अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. ऐसा करते hi दीदी को एक झटका सा लगा और वो मनीषा को अपने से दूर धकेलने लगी, लेकिन मनीषा ने दीदी का सर पकड़ा हुवा था इसलिए दीदी अपने आपको छुड़ा नहीं पाई और कसमसाने लगी. मनीषा ने लगभग 2 मिनट तक दीदी के होंठो को जोर जोर से चूसा और छोड़ दिया. दीदी मनीषा को अपने से दूर धकेला और गुस्से के साथ बोली.
सरिता दीदी- ये क्या बदतमीज़ी है मनीषा. तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो.
दीदी की बात सुनकर मैं और मनीषा मुस्कुराने लगे. दीदी मुझे हँसता देख आँखे फाडे कभी मुझे देखती और कभी मनीषा को देखती. दीदी ने मुझे हँसता देख मुझसे पूछा.
सरिता दी- तुम्हारी हंसी का मतलब है की तुम भी मनीषा के साथ मिले हुवे हो और मेरे साथ ये खेल खेल रहे हो. तुम दोनों को शर्म नहीं आती. मुझे ऐसे जलील करते हुवे.
इतना कहकर दीदी रोने लगी. दीदी को रट देख मैं और मनीषा दीदी के पास गए और उन्हें चुप करवाने लगे. दीदी बार बार मुझे अपने से दूर धकेल रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हुई तो उन्होंने मनीषा और मुझे देखते हुवे कहा.
सरिता दी- तुम दोनों को मुझे जलील करके क्या मिल गया. और अभी तुमने भी इसका साथ दिया. मैंने तुमको अपना सबकुछ सौप दिया. क्या कमी रह गयी थी मुझमे जो तुमने मेरे साथ ऐसा किया.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.
मैं- दीदी आप पहले चुप हो जाओ. हमने आप को जलील नहीं किया. ये सब मनीषा का प्लान था की हम दोनों को वो रेंज हांथो पकडे और हम दोनों के साथ चुदाई में शामिल हो सके.
मनीषा- हाँ दीदी आप मुझे गलत समझ रही है. मैं तो बस आपको डरा रही थी की आप मेरी बात आसानी से मान जाओ. और मुझे आप दोनों के बारे में शुरू से सब पता था. जब से आप मीरा की बात मानकर भैया को सडके करना शुरू किया तब से आज तक की साडी बाते मुझे पता हैं.
मनीषा की बात सुनकर दीदी का मुंह खुला का खुला रह गया. उन्हें तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की जिन्हे वो इतना सीधा सदा समझती हैं वो बहुत पहुंची हुई चीज़ है. दीदी के मुंह से कोई बोल नहीं फुट रहे थे. मनीषा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.
मनीषा- आपको याद है की सोनम दीदी की शादी में आपको जाना था, लेकिन आपकी जगह मैं चली गई. जानती हैं क्यों, क्योंकि मैं आप सब को बहुत प्यार करती हूँ और मैं आपको खुश देखना चाहती हूँ, इसलिए मैं बहाना बनाकर वह चली गई ताकि आप दोनों को प्राइवेसी मिल सके. अगर मुझे आपको जलील करना होता तो मैं आपको शुरू में hi ऐसा करते हुवे पकड़ लेती और जलील करती.
मनीषा की बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने हाँ में गार्डन हिला दी. दीदी ने फिर से मनीषा की तरफ देखा. दीदी को अभी भी भरोषा नहीं हो रहा था की मनीषा ने शुरू से लेकर आखिर तक सबकुछ अपनी आँखों से देखा है. दीदी ने लड़खड़ाती हुई जुबान में मनीषा से फिर पूछा.
मनीषा- जब तुम्हे सब पहले से hi पता था. तो तुम पहले क्यों सामने नहीं आई. आज क्यों आई हो.
इस बार मनीषा की जगह मैं बोलै.
मैं- बात ये है दीदी की कल मैंने मनीषा को भी छोड़ दिया और जब मैंने मनीषा की गांड मरने की सोची तो मनीषा ने ये शर्त रख दी की वो मुझसे गांड तभी मरने देगी जब मैं उसकी गांड आपके सामने मरू और आप इसमें उसकी मदद करे.
मेरी बात सुनकर दीदी मुझे और मनीषा को घूर घूर कर देखने लगी और बोली.
सरिता दी- क्या………….. तुमने मनीषा को छोड़ लिया और मुझे बताया तक नहीं और मैंने तुझसे पूछा तो तुमने मन भी कर दिया की तुम दोनों देर रत तक बात करते रहे और तुम तरय करते रहे. लेकिन काम नहीं हुवा.
मनीषा- क्या………. आप दोनों भी यही चाहते थे पहले से hi.
मैं- हाँ मनीषा. मैं तुम्हे छोड़ सकू इसीलिए मैंने दीदी को शर्मा जी के यहाँ जाने के लिए कहा था.
मनीषा- लो ये तो अच्छी बात है. अब तो कोई पर्दा hi नहीं रह गया है और साडी बाटे क्लेयरे भी हो गई हैं तो क्यों न हम तीनो साथ में मिलकर ये खेल खेले.
सरिता दी- लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं हूँ.
मनीषा- क्यों दीदी. मैंने आपके लिए और आपकी ख़ुशी के लिए इतना कुछ किया. सब कुछ जानते हुवे भी कभी मैंने ये बात किसी पर जाहिर नहीं होने दी. और आप दोनों को प्राइवेसी भी दी ताकि आपको वो ख़ुशी भैया से मिल सके जो आप चाहती थी, लेकिन आप मेरी ख़ुशी के लिए इतना भी नहीं कर सकती.
सरिता दी- हाँ. मैं ये नहीं कर पाऊँगी. तुम सबकुछ जानती हो मैं इस बात से अनजान थी, लेकिन अब मुझे पता चल गया है की तुम्हे सब पता है तो मैं तुम्हारे सामने ये सब नहीं कर पाऊँगी.
मनीषा- तो इसका मतलब आप भैया से कभी नहीं छुडवाएंगी. क्योंकि अब आप भी ये जान गई हैं की मुझे सब कुछ पता चल गया है.
मनीषा की बात सुनकर दीदी खामोश हो गई. उन्होंने मनीषा के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. मनीषा ने दीदी को खामोश देखकर फिर कहा.
मनीषा- मैं जानती हूँ की आप भैया से बिना चूड़े अब नहीं रह सकती और अब मेरा भी यही हॉल है. भैया का लुंड आपको भी चाहिए और मुझे भी. तो क्यों न हम दोनों मिलकर साथ में भैया से चुदाई करवाए.
मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ देर के लिए किसी सोच में डूब गई दीदी अपने नाख़ून को अपने दांतो से कुतरने लगी. थोड़ी देर सोचने के बाद दीदी ने अपना सर ऊपर उठाया और कहा.
सरिता दी- लेकिन मनीषा ये ठीक नहीं है. मैं ये सब कैसे कर पाऊँगी. मुझे शर्म आएगी.
दीदी की बात सुनकर मनीषा को अपनी बात बनती हुई नज़र आने लगी. तो मनीषा ने इमोशनल अत्याचार दीदी के ऊपर करना शुरू कर दिया और दीदी से कहा.
मनीषा- ठीक है दीदी. मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, इसलिए मैंने हमेशा आपकी ख़ुशी चाही है. सोनम दीदी के ः जाने के समय आपने एक वडा मुझसे किया था की मैं आपसे जो कुछ मांगूंगी आप मुझे देंगी. और मैंने उस दिन वो वडा उधर कर दिया था. इसी दिन के लिए, पर शायद आप मुझसे तनिक भी प्यार नहीं करती, इसलिए मैं आपको आपके उस वेड से मुक्त करती हूँ. आप अपनी ख़ुशी में खुश रहिये. मैं किसी को कुछ नहीं बताउंगी. मैं जा रही हूँ और आज के बाद आप दोनों के बिच नहीं आउंगी.
इतना कहकर मनीषा मुड़कर जाने लगी. मुझे भी लगा की अब मनीषा की गांड मुझे कुछ समय मिलने से रही, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था, इसलिए मैं चुप- चाप खड़ा रहा, क्योंकि मुझे कही न कही ये लग रहा था की मनीषा जैसी खुराफाती लड़की इतनी आसानी से तो man-ne वही है नहीं. उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो जरूर चल रहा होगा दीदी को रस्ते पर लेन के लिए.
अभी मनीषा दरवाज़े तक hi पहुंची थी की दीदी ने दौड़कर उसका हाँथ पकड़ लिया और उसको दीवाल से सटाकर कड़ी कर दिया और उसके चेहरे पर अपनी उंगलिया फिरते हुवे बोली.
सरिता दी- तुमने ये कैसे सोच लिए की मैं तुमसे प्यार नहीं करती. मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी इसलिए मैं मन कर रही थी. लेकिन मैंने सोचा की जब तुम मेरे लिए इतना कर सकती हो तो मैं भी तो तुम्हारी ख़ुशी के लिए थोड़ा बहुत तो कर hi सकती हूँ. वैसे भी अब हम सब के बिच कोई सेकरते तो रह नहीं गया है. इसलिए मैं तुम्हारे साथ हूँ मनीषा. अब हम तीनो मिलकर मज़ा करेंगे.
इतना बोलकर दीदी ने अपने होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया.
मनीषा ने भी अपने होंठ दीदी के होंठो से पूरा सटाकर दीदी के होंठ चूसने लगी. दोनों की होंठ चूसै का कार्यक्रम देख कर मैं बहुत खुश हुवा और चलते हुवे उन दोनों के पास पहुंच गया और पीछे से दीदी की गांड में अपने लैंड घुसकर दीदी की गार्डन को चूमें लगा. दीदी ने अपना होंठ मनीषा के होंठो से अलग किया और पलटकर मेरी तरफ हो गयी और मुझसे बोली.
सरिता दी- आज तुम्हारी छुट्टी है अभी. तुम बस चुपचाप बैठकर नज़ारे का आनंद लो. कल दिन में हम तीनो मिलकर चुदाई करेंगे. अभी तुम आराम से जाकर कुर्सी पर बैठो और हमारी रासलीला का आनंद लो.
दीदी की बात सुनकर मैं आकर कुर्सी पर बैठ गया. दीदी फिर से मनीषा की तरफ घूम गई और उसके होंठो को चूसने लगी. मनीषा ने अपने दोनों हांथो से दीदी के सर को पकड़ा और जोर जोर से दीदी के होंठ चूसने lagi.thodi देर होंठ चूसने के बाद मनीषा और दीदी अलग हुवे और दोनों अपनी अपनी जीभ बहार निकलकर आपस में लड़ने लगी.
मनीषा और दीदी की रासलीला देखते हुवे मुझे भी जोश चढ़ने लगा. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो गया. मैंने भी उन्हें देखते हुवे अपने लोअर के ऊपर से hi अपने लुंड को सहलाने लगा.
दीदी और मनीषा अपनी जीभ आपस में ऐसे लगा लहि थी जैसे दोनों के बिच कोई जुंग चल रही हो. जैसे दो तलवार आपसे में टकरा रही हैं. थोड़ी देर तक दोनों अपनी जीभ लगाती रही उसके बाद मनीषा ने दीदी की जीभ अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. दीदी ने मनीषा के सर को पीछे से पकड़ लिया और अपनी जीभ ज्यादा से ज्यादा मनीषा के मुंह में डालने लगी. मैं कुर्सी बार बैठा अपना लुंड सहला रहा था और इस हसीं नज़ारे का आनंद ले रहा था. मेरी दो मस्त जवान बहाने एक दूसरे के जिस्म से खेल रही थी. वो भी अपने भाई के सामने.
थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी के मुंह में अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर जीभ अंदर बहार करने के बाद मनीषा ने अपना पूरा मुंह दीदी के मुंह से चिपका दिया और अपनी पूरी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी.
दीदी जोर जोर से मनीषा की जीभ चूस रही थी. थोड़ी देर एक दूसरे की जीभ चूसने के बाद दोनों ने अपना मुंह हटा लिया. दोनों के होंठ एक दूसरे के थूक से साणे हुवे थे. दोनों ने दरवाज़े के पास खड़े होकर मेरी तरफ देखा. फिर दीदी ने मनीषा के कण में कुछ कहा. तो मनीषा ने मेरी तरफ देखा और कहा.
मनीषा- क्यों भैया कैसा लग रहा है अपनी बहनो का लाइव शो देखकर.
मैं- पूछो मत मनीषा. मुझे ऐसे लग रहा है की मुझसे ज्यादा किस्मत वाला कोई भाई नहीं होगा.
सरिता दी- बस तुम बैठकर शो देखो. अभी तुमको बहुत मज़ा मिलेगा.
इतना कहकर मनीषा और दीदी ने एक दुसरे की तरफ देखा और हंसने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने और हसने के बाद दीदी अपना होठ आगे की तरफ झुकाया तो मनीषा भी दीदी की तरफ झुककर अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और दोबारा से एक दूसरे के होंठ चलने लगी.
दोनों बहुत जोर जोर से एक दुसरे के होंठ चूस रही थी. मैं उन दोनों को देखकर बस अपना लुंड मसल रहा था. थोड़ी देर लुंड मसलने के बाद मैं कुर्सी से उठकर अपनी लोअर निचे सरका दी और कुर्सी पर बैठ कर अपने नंगे लुंड पर हाँथ फेरने लगा. मनीषा और दीदी अभी भी किश में दूभि हुई थी. दोनों एक दूसरे की जीभ को मुंह में लेकर चूस रही थी. जिससे सस्सप्प्प्प्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ स्स्स्सस्स्स्सप्प्प्पपप्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दोनों एक दूसरे से अलग हुवे और मेरी तरफ dekha.mujhe नंगा होकर लुंड मसलते देख दोनों मुस्कुराने लगे. सरिता दीदी ने मुझसे कहा.
सरिता दी- ये क्या कर रहे हो अभी. तुमको शर्म नहीं आती अपनी बहन के कमरे में नंगे होकर बैठे ऐसी हारकर कर रहे हो. यहाँ इतना अच्छा शो का इंतेज़ाम हम दोनों ने तुम्हारे लिए किया है, लेकिन तुम इस शो को इग्नोर करके अपने लुंड के साथ खेल रहे हो.
मैं दीदी की बात सुनकर पाने लुंड को दबाकर छोड़ दिया जिससे मेरा लुंड झटके से आकर मेरे पेट पर
ठोकर मरी. मेरे मुंह से aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सरिता निकल गया. मैंने फिर से अपने लुंड को निचे दबाकर छोड़ दिया. मेरा लुंड फिर से जाकर मेरे पेट से टकराया. मेरे मुंह से इस बार आआआहहहहहहह मनीषा निकल गया. दोनों मुझे देखकर हंसने लगी. मैंने उनको देखकर कहा.
मैं- देखो तुम दोनों ने मेरी क्या हालत कर दी है. तुम दोनों के इस कामुक खेल को देखकर मेरा लुंड कैसे हिचकोले मर रहा है. मुझपर ऐसा जुल्म मत करो तुम दोनों. मुझे भी अपने साथ शामिल कर लो. मैं बिकते बैठे बोर हो रहा हूँ.
मनीषा- कैसे भाई हो आप. अपनी बहनो की जवानी देखकर भी आप बोर हो रहे हो. तो आज आपकी यही सजा है की आप केवल दर्शक बैंकर hi इस खेल का आनंद उठाये.
इतना कहकर दोनों चलती हुई मेरे करीब आकर कड़ी हो गई और मेरे लुंड को देखने लगी. मैं भी उन की आँखों में बरी बरी से देखते हुवे लुंड को मसलने लगा. दोनों की आँखे लाल हो गई थी. दोनों की आँखों में वासना साफ दिखाई दे रही थी. कुछ देर मेरा लुंड देखने के बाद मनीषा जाकर दीदी के पीछे कड़ी हो गई और दीदी से चिपक गई. मनीषा ने दीदी की बगल से हाँथ डालकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी.
दीदी ने भी अपने दोनों हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख लिया. मनीषा ने थोड़ी देर दीदी की चूचियों को धीरे धीरे दबाया. उसके बाद दीदी की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगी. दीदी के मुंह से आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा oooooooooohhhhhhhhh मनीषा की सिसकारी निकलने लगी.
मनीषा दीदी की चूचिया दबाते हुवे अपने होंठो से दीदी की गार्डन चूमने लगी और कभी कभी जीभ निकलकर दीदी की गार्डन भी चाटने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi गार्डन को चूमने चाटने के बाद मनीषा ने दीदी के कान के पास अपना मुजन्ह ले जाकर उनके कण की लौ को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी और दोनों चूचियों को हथेली में भरकर जोर से मसल दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गयी.
सरिता दी- aaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मनीषा. oooooooohhhhhhhhhh धीरी सीए. टूउउ भठी इस कमीनी की तआर्रआह्ह्ह्ह होई जोरर से दबा रही हीी. aaaaaauuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhh.
मनीषा( उनके कण में सरगोशी करते हुवे)- मुझे पता है दीदी की आपको धीरे दबवाने में मज़ा नहीं आता. तभी तो आप भैया से जोर जोर से दबवाती थी अपनी चूचिया.
मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली. मनीषा दीदी की दोनों चूचिय. जोर जोर से दबती रही और दीदी की गार्डन और कान को मुंह में भरकर चुस्ती रही. इतना कामुक नज़ारा देखकर मैं अपना लुंड जोर जोर से सहलाने लगा. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैं भी अब इस खेल में शामिल होना चाहता था. तभी मनीषा ने दीदी की चूचियों को फिर जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.
सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh meriiiiiiiiiiiiiiii प्यारीइइइइइइ बहाणणणणणणण. ऐसी हीईईई दब्बब्बाऊओऊ. बहुत्तट्ठ माज़आ आ ररहा हैई मुझी.
दीदी की बात सुनकर मनीषा और जोर से दीदी की चूचिया दबाने लगी. मैं भी अब उठकर मनीषा के पीछे जाकर उससे सत्कार खड़ा हो गया. मनीषा ने मेरी तरफ देखा तो उसकी आँखे लाल हो गई थी. चेहरा सुर्ख हो चुक्का था. मनीषा ने मुझे आँखों के इशारे से बैठने के लिए कहा, मगर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड में घुसेड़कर अपना होंठ मनीषा की गार्डन पर रख दिया और उसे चूमने लगा. मनीषा ने उत्तेजना में आकर दीदी के दोनों निप्पल को पानी ऊँगली और अंगूठे के बिच में पकड़ लिया और पूरी ताकत के साथ दीदी के निप्पल को मसल दिया. दीदी चीख पड़ी.
सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyy. क्याआ करररर रही हैई टूउउ मनीषआआ. इतनीई जूर्रर सीए क्यूँ मसलाआ तुणीऐ. मुझी बहुत्त दररदद्ड होऊ रहा हैई. aaahhhhhhhhhhh. oooooooohhhhhhhhhhhhh.
अभी मनीषा कोई जवाब देती इससे पहले hi बहार बेल्ल बजने की आवाज़ आई. मैं तुरंत hi मनीषा के पीछे से हटा और अपना लोअर पहनकर अपने लुंड को ऊपर की तरफ दबाकर डोरी में फंसा दिया. और दोनों को अपना हुलिया दुरुस्त करने का बोलकर निचे दरवाज़ा खोलने के लिए चला गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..