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जब मैं दीदी की छूट chat-te हुवे अपनी ऊँगली उनकी गांड में डाली तो दीदी हल्का दर्द के कारन सिसक पड़ी. मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड में लगातार पहले धीरे धीरे फिर जोर जोर से अंदर बहार करना शुरू कर दिया. दीदी भी मनीषा की छूट को जोर जोर से चाट रही थी. थोड़ी देर मनीषा की छूट चाटने के बाद दीदी ने अपनी एक ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर मनीषा की छूट में ऊँगली करने के बाद दीदी ने अपना मुंह मनीषा की छूट से हटाया और मुझसे कहा.
सरिता दीदी- अभी. अब तू मेरी जगह मनीषा की छूट चाट मैं तेरा लुंड चुस्ती हूँ.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की छूट छोड़ दी और हैट गया . दीदी भी मनीषा की छूट से अपना मुंह हटा लिया और उठकर बैठ गई. मनीषा हम दोनों को देख रही थी. मैंने मनीषा से पुछा.
मनीषा- टेल है क्या तुम्हारे कमरे में.
मनीषा- टेल की क्या जर्रूरत है भाई.
मैं- आज तुम्हारी गांड का उद्घाटन होगा. तो उसके लिए पहले मुझे तुम्हारी गांड को चिकना करना पड़ेगा. लुंड को तुम्हारी गांड में घुसाने के लिए रास्ता बनाना पड़ेगा. उसके लिए तेल की जरुरत है.
मनीषा- क्या जरुरी है भैया मेरी गांड मरना. आज छूट छोड़ लो गांड फिर कभी मर लेना.
मैं- देखे मनीषा तुमने hi कहा था की जब सरिता दीदी तुम्हारे साथ होंगी और वो तुम्हारी गांड मरवाने में तुम्हारी मदद करेंगी तभी तुम मुझसे अपनी गांड मरवाओगी. तो अब सरिता दीदी भी हमारे साथ हैं. तो अब क्या प्रॉब्लम है तुमको.
मनीषा- प्रॉब्लम कुछ नहीं है भैया. बस थोड़ा दर लग रहा है. आपका बहुत बड़ा है न.
मैं- कुछ नहीं होगा मनीषा. सरिता तो बहुत मज़े से अपनी गांड मरवाती हैं.
सरिता di(hanskar)- हआ हआ मुझे पता है की मुझे कितना मज़ा आता है. सेल एकदम जानवर बैंकर गांड मरते हो. तनिकक भी रहम नहीं करते.
मैं- क्या यार सरिता, क्यों मनीषा को दरकार मेरे लुंड को तरसना चाहती हो. अगर मनीषा ने आज अपनी गांड मुझे नहीं दी तो मैं तुम्हारी गांड की आज धज्जिया उदा दूंगा. देख लेना.
सरिता दी- चालल हैट बड़ा आया धज्जिया उड़ने वाला. कही ऐसा न हो की मेरी गांड की धज्जिया उड़ने के चक्कर में तुम्हारे लुंड का काम न तमाम हो जाये.
मैं- वो तो अभी कुछ देर में पता चल जायेगा की मरे काम तमाम होता है की तुम्हारी गांड fat-ti है.
मनीषा- अब आप लोग बस भी करिये. जो करना है पहले उसको करिये. ये बहस बाद में कर लेना.
मैं- देखो सरिता. कुछ सीखो अपनी छोटी बहन से. सच्ची समय पर सही चीज़ करनी चाहिए.
मनीषा- उस डरोएर में है करवा तेल.
मनीषा ने एक डरोययर की तरफ इशारा करते हुवे कहा. सरिता दीदी ने डरोययर खोलकर करवा तेल निकल लिया और मुझे दे दिया. मैंने मनीषा की कमर की निचे एक मोती तकिया लगा दिया. जिससे उसकी छूट और गांड ऊपर उठ गयी. मैंने मनीषा की तंग पकड़कर उसे और अपनी तरफ खींचा और मैं निचे जमीन पर खड़ा हो गया. मैंने सरिता दीदी को बीएड के सहारे तक लगा कर बैठा दिया. अब मैं मनीषा की छूट पर झुक गया और उसकी छूट को चाटने लगा. मेरे झुकने से मेरा लुंड दीदी के मुंह के बिलकुल पास आ गया. जिसे दीदी ने अपने हांथो में लेकर सहलाने lagi.main मनीषा की छूट को चाटते हुवे अपनी एक ऊँगली उसकी छूट में घुसकर अच्छी तरह गीली कर ली और फिर उसको निकल कर उसके ाशोले पर रख दिया.
मैं अपनी ऊगली उसकी गांड की छेड़ पर घूमने लगा और जोर जोर से मनीषा की छूट चाटने लगा. मैंने एक हाँथ से बोतल उठाकर कुछ तेल मनीषा की गांड पर गिराया और अपनी ऊँगली से उसे मनीषा की गांड के छेड़ में डालने की कोशिश करने लगा. थोड़ी देर बाद जब तेल सुख गया तो मैंने फिर कुछ तेल मनीषा की गांड पर गिराया और अपनी ऊँगली अच्छी तरीके से तेल पर लप्पेट कर मनीषा की गांड के छेड़ पर रख दिया और उसे अंदर प्रेस करने लगा. उधर निचे दीदी मेरे लुंड अपने पूरा मुंह खोलकर अंदर लेकर आगे पीछे कर रही थी. और एक हाँथ से मेरी गोटिया सहला रही थी.
मैंने अपनी कमर धीरे धीरे चलनी शुरू कर दी और दीदी का मुंह छोड़ने लगा. ऊपर मैंने अपनी ऊँगली मनीषा की गांड के छेड़ पर रखकर थोड़ा जोर दिया तो पुकककककक की आवाज़ आई और मेरे ऊँगली 1 इंच मनीषा की गांड में चली गई. उस प्खकक की आवाज़ के साथ मनीषा की चीख भी सुनाई पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaahhhhh भठाईयाँआ बहारर निकालूओ अपनी ऊंगलीई मेर्रीीी गानाद्द्ड सीए. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हैई. ऊऊऊओह्ह्ह्हह भैइय्या.
मैं- बॉस मनीषा थोड़ा दर्द बर्दास्त कर लो. मैं लुंड के लिए राष्ट बना रहा हूँ.
इतना कहकर मैं फिर से मणिधा की छूट चाटने लगा और फिर थोड़ा सा तेल ुकि गांड के छेड़ पर डालकर उतनी hi ऊँगली उसकी गांड में घूमने लगा. साथ hi मैंने अपनी कमर को एक झटका दिया और अपना पूरा लुंड दीदी के मुंह में पेल दिया. और अपनी कमर को वही रोक दी. दीदी gggggguuuuuuuuuu गगगगगगगगगूउऊउउउ करने लगी. जब मुझे लगा की दीदी की साँस रुकने लगी है तो मैंने अपनी कमर पीछे कर ली और अपना लुंड दीदी के मुंह से बहार निकल लिया. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और बोली.
सरिता दी- क्या कमीने. थोड़ा धीरे नहीं कर सकता था. एक hi बार में पुरे हलक तक पेल दिया. सेल मुझे मरने का इरादा है क्या. अगर मैं मर गयी न तो तू छूट के लिये तरस जायेगा.
main-(chut से मुंह हटाकर). मैं तुझे ऐसे थोड़ी hi मरने दूंगा सरिता. अभी तो मैंने तुझको अच्छी तरह छोड़ा hi कहा है. अभी तो तुझे सविता दीदी के साथ मिलकर छोड़ना है.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और मनीषा दोनों चकित रह गयी. तब मनीषा ने कहा.
मनीषा- ज्यादा सपने मत देखो भैया. सविता दीदी को आप मनीषा या सरिता दीदी न समझे. वो कभी भी इसके लिए तैयार नहीं होंगी. आप उन्हें अच्छी तरह जानते हैं.
मैं- वो सब तुम मुझपर छोड़ दो. अभी उसमे बहुत समय है. अभी तो तुम दोनों को साथ में छोड़ लू.
इतना कहकर मैंने फिर से ढेर सारा तेल मनीषा की गांड पर गिरा दिया और उसकी छूट चाटते हुवे मनीषा मनीषा की गांड में अपनी ऊँगली अंदर बहार करने लगा. निचे दीदी फिर से मेरा लुंड चूसने लगी थी. मैं फिर से जोर जोर के धक्के लगाकर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi मनीषा की गांड में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकली और मनीषा की छूट को पूरा अपने मुंह में भरकर जोर से चूसा और एक झटके में अपनी ऊँगली मनीषा की गांड में घुसा दी. मनीषा दर्द से चीख पड़ी.
मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyyy. बहररर निकालूओ भैयाआ अपनीइ ऊंगलीईईई मेरिइइइइ गांडड सीए. आआआआहहहहहहह मुझी बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा हैईईई. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ . मैंन मारर्र जाउँगग्गीइइइइइ. रहमममम करूओ भैईयाआ.
मनीषा चखने के साथ hi अपने शरीर को इधर उधर करके अपने आपको छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसकी जांघो को मजबूती से पकड़ रखा था. इसलिए वो मचलने के आलावा कुछ नहीं कर सकती थी. थोड़ी देर मैंने अपनी ऊँगली उसकी गांड में रोक दी और मनीषा की छूट जोर जोर से चाटने लगा. निचे मैं अपना लुंड जोर जोर से दीदी के मुंह में पेलने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने थोड़ा सा तेल मनीषा की गांड में दाल दिया और अपनी ऊँगली धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा. मैं मनीषा की छूट जोर जोर से चूसने के साथ अब अपनी एक ऊँगली मनीषा की छूट में भी दाल दी. और उसकी छूट छोड़ने लगा.
निचे मैं अपनी कमर हचक हचक कर दीदी के मुंह में ठोकने लगा. मेरा पूरा लुंड दीदी के हालत तक घुस रहा था. मैं अब झड़ने के करीब पहुंच गया tha.maine अपने मुंह और हाँथ की गति मनीषा की छूट में बढ़ा दी थी. मनीषा भी अब झड़ने के करीब पहुंच गई. मैं अपनी ऊँगली उसकी गांड में तेज़ी से अंदर बहार करना laga.manisha आअह्ह्ह्ह भैया ऊऊऊओह्ह भैया करने लगी. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा का शरीर अकडने लगा. और वो जोर से चिल्लाते हुवे झड़ने लगी.
मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. मैंनं अअअअअ रहियी होऊणननननननन बहुतत्त मज़ाआ आए रहा ही. मुझी औरर जोररर सीई चूसिएई मेरीए छुट्ट्ट्ट कोऊ भैयाआ. कहा जेईई. डीडीईई मैं झाड़ड़ड़ रहहीइ हुन्न. भईया नई मेरीए छूटत चाट चाट कर इसका पनीई निकाल दिया. aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ मैंन gaiiiiiiiiii सलेईईईई.
इतना कहकर मनीषा झाड़ गई. मैं भी अब झड़ने की कगार पर था. तो मैंने एक पेअर उठाकर बिस्टेर पर रखा और मनीषा की छूट का रास पिटे हुवे पूरी ताकत से दीदी के मुंह को छोड़ने लगा. और दीदी को गालिया देते हुवे बड़बड़ाने लगा.
मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh सवितत्ताआआआ. मेरिइइइइइइइ जाननननननन. ली मैंनं आआ रहा हूंणन्नन्नन्न. मेंननननननन झाड़ड़ड़ रहा हूंणंन्न. बहुत्तत्त छुडासीइइइइइ रहतीई हीी चू सलीईई. बहुतत्त ग्रामं मुँहहह हैई तेरा. तूने तो मेरीए लुंदड़ निछोड़ड़ड़ लिया. बहुतत्त गराम माललळ हैई टूउउ. लिए रनडीई सलिई ऑर्डर अंडरर तक्क मेरा लुंदड़ अपनी मुंह मई. आजजज मैं तेरा मुंह फाड़ डालूंगा. लिए कामिनीईई. मैं झाड़ड़ड़ रहा होऊणंन्न. पूरा माललळ पीई जा मेरे लुंदड़ का. इक्क बूँद भी नहीं गिरना चाहियेए जमीनी मी. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सरिताआए.
इतना कहकर मैं सरिता दीदी के मुंह में झड़ने लगा. मैंने अपना लुंड अभी तक दीदी के गले में डाला हुवा था. मैंने तब तक अपना लुंड बहार नहीं निकला जब तक मेरे वीर्य की एक एक बूँद दीदी ने पि नहीं ली. जब मैंने लुंड बहार निकला तो दीदी हांफ रही थी. 5 मिनट तक मैं ऐसे hi पड़ा रहा उसके बाद मैंने खड़ा हुवा और दीदी को उठाकर खड़ा किया और बिस्टेर पर जाकर लेट गया. और दीदी को देखते हुवे कहा.
मैं- बहुत मज़ा आया सरिता तुम्हारा मुंह छोड़कर. ऐसा लग रहा था की मैं छूट छोड़ रहा हूँ.
सरिता दी- तुझे तो मज़ा मिलना hi था सेल. मेरा गाला फाड़ दिया तुमने. तुम दोनों का तो हो गया अब मेरे बार में भी कुछ सोचो तुम दोनों.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपने साइन पर बैठने के लिए कहा. दीदी आकर पाने पेअर दोनों तरफ रखकर मेरे साइन पर बैठ गयी. मैंने दीदी की गांड पकड़कर अपने मुंह की तरफ खींचा तो दीदी की छूट मेरे मुंह से जा लगी.
और मैं दीदी की छूट चाटने लगा. मैंने दीदी की छूट chat-te हुवे अपना दोनों हाँथ ऊपर करके दीदी की दोनों चूचियों को अपने हांथो में भर लिया और उन्हें दबाने लगा. मुझे झड़े 15 मिनट का समय हो गया था इसलिए मेरे लुंड में जान आने लगी. तभी मुझे अपने लैंड पर मनीषा का हाँथ महसूस हुवा. मेरे शरीर ने एक झटका खाया. मैंने अपने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती से चीख पड़ी.
सरित ा दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैयाआआआ. थोड़ा धिर्री दबाओओओओओओओओओ. ऊऊऊओह्ह्ह्ह और जूर्रर सीए चटूओ मेरीए छुट्ट्ट्ट aaaaahhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइ.
दीदी इतना बोलकर मेरी तरफ देखने लगी मैंने दी जब दीदी की आँखों में देखा तो दीदी की आँखों लाल हो गयी थी. मैंने दीदी की चूचियों को जार जोर से बढ़ाते हुवे दीदी की छूट पूरी मुंह में भरकर चूसने लगा. निचे मेरा लुंड पूरा खड़ा हो गया था जिसे मनीषा अपने मुंह में लेकर चूस रही थी. थोड़ी देर लुंड चूसे के बाद मनीषा अपना पूरा मुंह खोला और तेज़ी से मेरे लुंड पर अपना मुंह पटकने लगी. मैं भी दीदी की छूट जोर जोर से चूसने लगा. छूट चूसै और चूचिया दबवाने से दीदी एकदम छुडासी हो गयी थी और वो अपने दोनों हांथो से अपने अपने बालो में फसकर इधर उधर करती हुई बिली.
सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiii मेरेईईई राजाआं. अब्ब्ब्ब चूड्डड्ड दिए मुझी चू. मेरीए छूट में खुजलिई माछह गयी हैईईई इस खहजली को चू अपनी लुंड सी मिटा दी मेरे भाईईई. छोड़ दी अपनीइ डीडीई कोऊ मेरे दिलबररर.
इतना कहकर दीदी मेरे ऊपर से हैट गयी तो मैंने हाँथ बढाकर मनीषा का सर पकड़कर अपनी कमर ऊपर उछाल उछाल कर अपना लुंड मनीषा के मुंह में पेल दिया और लगातार 8-10 जोरदार धक्के लगाकर अपना लुंड बहार खींच लिया.
मैंने दीदी को डोगग्य स्टाइल में खड़ा किया और दीदी के पीछे आ गया. मैंने मनीषा को दीदी के मुंह के पास छूट करके लेटने के लिए कहा. मनीषा मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.
manisha-(shararati मुस्कान के साथ) क्या बात हैई भैय्या. आपने दीदी को 3-4 बार hi छोड़ा है और दीदी ने आपको अपना राजा, अपना दिलबर बना लिया. पता नहीं जैसे जैसे आप दीदी को छोड़ते जाओगी वैसे वैसे दीदी आपको और पता नहीं क्या क्या बनती चली जाएँगी. देखना भैया कही ऐसा न हो की दीदी आपको अपने भैया से सैया न बना ले. फिर तो जीजा जी का पत्ता hi काट जाएगा.
सरिता दी- अच्छा अब तू ज्यादा मत बोल. और जल्दी से लेते. कब से बकर बकर कर रही है.
दीदी की बात सुनकर मैंने मनीषा से कहा.
मैं- तू चिंता मत कर मनीषा. मैं तुझे भी इतना मज़ा दूंगा की बहुत जल्दी तू भी मुझे अपना सैया बना लेगी.
मेरी बात सुनकर मनीषा दीदी के निचे पीठ के बल लेते गयी और अपनी छूट दीदी के मुंह के सामने कर दी. मैंने दीदी का सर पकड़कर मनीषा की छूट पर झुका दिया दीदी ने तुरंत अपनी जीभ निकल कर मनीषा की छूट को चाट लिया मनीषा भी गरम हो गाइट hi. उसके मुंह से सिसकी निकल गयी.
मनीषा- Aaaaaaahhhhhhhhhh didiiiiiiiiiiii. आईसीईए होई.
मैंने अपना लुंड दीदी की छूट पर रख दिया और दीदी की एक जांघ को पकड़कर उनकी छूट पर एक धक्का मारा. मेरा लुंड दीदी की छूट में आधा घुस गया. दीदी मस्ती में सिसक पड़ी और मनीषा की छूट से मुंह हटाकर बोली.
सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. ऐसे हीईईई छोड़ड़ड़ पनीइ डीडीईई कोऊ.
दीदी फिर से मनीषा की छूट चूसने लगी. मनीषा ने हाँथ बढाकर दीदी के सर को पकड़ लिया और अपनी छूट पर दबाने लगी. मैंने दीदी की जांघ को पकड़कर एक और धक्का दिया जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट में जड़ तक घुस गया दीदी पूरी तरह से मनीषा की छूट पर अपना मुंह जोर से दबा दिया और कुछ देर बाद अपना मुंह हटाकर चीखते हुवे बोली.
सरिता di-aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Saaleeeeeeeeeeeee अभीयी. बस आईसीए होऊ छोड़ड़ड़ मुझी मेरे छोड़ू सनमममम. चू बहुत्त अच्छआ चुड़क्कड़ भाईई हीी. जोऊ अपनीई बहन को छोड़ता हैईईई. बहुत्त मज़ाआ आ रहा हीी. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़ मुझेईई. मैंन आअज्ज्ज्ज तुझसेएई अपना हर्र छेईड्ड खुलवाऊंगीीी. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.
दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार खींच लिया. दीदी पलटकर मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने उन्हें इशारे से चुप रहने के लिए कहा और मनीषा को घूमकर लेटने के लिए कहा. मेरी बात मानकर मनीषा घूमकर दीदी के निचे फिर लेट गयी तो मैंने दीदी को मनीषा के ऊपर लिटा दिया अब दीदी की छूट मनीषा के मुंह की तरफ और मनीषा की छूट दीदी के मुंह की तरफ हो गई मैंने फिर से अपना लुंड सरिता दीदी की छूट पर रखा और एक hi झटके में अपने पूरा लुंड दीदी की छूट में पेल दिया दीदी दर्द और मज़े से अपनी छूट मनीषा के मुंह पर रगड़ते हुवे चिल्लाई.
सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ सलीईई. पूरा डायलललल दिए अपन्ना यी मोटा लुंदड़ मेरीए छुटत मई, पल दी मुज्झी जी भार के पीए मुझी. अपनी कुटिया बनाकररर छोड़ मुझीऐ. छोड़ड़ड़ मुझी साली. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़. दम्मम नाहीइ हाई kyaaa.chhooodd मुज्झिये. ऑर्डर जोर जोरर सी छोड़. मुझी बहुत्त मज़ा आ रहा हैई.
मैंने हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. मनीषा अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाटने लगी. कभी कब्भी मनीषा अपना सर थोड़ा सा ऊपर करके अपनी जीभ चलती थी तो वो मेरे लुंड को भी चाट लेती थी. मनीषा ने अपनी पेअर को कैची बनाकर सरिता दीदी की गार्डन पर लप्पेट लिया और अपनी छूट पर दबाने लगी, सरिता दीदी अपनी जीभ निकल कर मनीषा की छूट चाटने लगी. थोड़ी देर छूट चाटने के बाद दीदी ने अपनी ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और जोर जोर से अंदर बहार करने लगी. मैंने दीदी से कहा.
मैं- सरिता. तुम अपनी ऊँगली से मनीषा की गांड को भी धीरे धीरे छोड़ो. ताकि इसकी गांड भी थोड़ी ढीली हो जाये. नहीं तो इसको मेरा लुंड लेने में बहुत दर्द सहना पड़ेगा.
मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी ऊँगली छूट से निकली और मनीषा की गांड में एक झटके में दाल दी. मनीषा के शरीर में दर्द की लहार दौड़ गई और मनीषा धीरे से चिल्ला उठी.
मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह diidiiiiiiiiii. आरईईए भैया तू फिररर भीई जानवर बाण जाती हैं, लेकिन आप तो मेरीए बहाणं हीी. आप तू मेरी गनददद मी धीरे से उगली दाल सक्ती थिई ना लेकिन आप भी भैया की साथ चुदाई करवा कररर एकदामम जानवर्र बन्न गयी होऊ.
मनीषा की बात सुनकर दीदी जोर जोर से उसकी गांड में ऊँगली करने लगी और उसकी छूट चूसने लगी. मैंने भी सरिता दीदी की कमर थामकर दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. मैं बहुत जोर जोर से धक्का मर्डर रहा था. दीदी की गांड मेरे हर धक्के से साथ थिरकने लगती थी. दीदी अब बहुत गरम हो गई थी. वो भी अपनी गांड पीछे की तरफ उछाल उछाल कर अपनी छूट छुड़वा रही थी और बोल रही थी.
सरिता दीदी- AAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कामिनी. धीरी कर नाहा. टूउउ कभी कभी बहुतत्त तेज़ ढक्की मरता हीी. मुझी हर्र ढक्की से ऐसी लगता हैई जैसी मेरा कलेजा मुंह को आए जायेगा. ऐसी होई छोड़ड़ड़ अपनीई रानीई कोऊ. oooooooooohhhhhhhh अभीयी.
दीदी की बात सुनकर मैंने और डैम लगाकर दीदी की छूट छोड़ने लगा. दीदी की छूट इतनी आगे पीछे हो रही थी की मनीषा के पूरा मुंह पर दीदी की छूट घिस रही थी. और मनीषा भी अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाट रही थी. थोड़ी देर तक दीदी को ऐसे hi छोड़ने के बाद दीदी झड़ने के करीब पहुंच गई इसलिए वो और जोर जोर से अपनी कमर पिचई करने लगी और गालिया देते हुवे बड़बड़ाने लगी.
सरिता दीदी- aahhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh haaaaaaaaaaannnnnnnn मेरी राजाआं, मारर्र गईई री चूडड़ड री ऑर्डर जोरर सीए चुड़ड़ड़ड़ड़. uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्य्यय्य मैंन gayyyyyiiiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiiiii. ऑर्डर जोररर सी चूडड़ड बहाणं छोड़ड़ड़ड़. uiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiii manishaaaaaaaaaaa. देखहहहहह टीईर्र्र्र भईईई नीई मेरीए छुट्ट्ट्ट पहाड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई हीी री. फातटत गयी मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट. ारी हार्रामीइइइइइइइ. अपनीईई डीईडीई कोई छुटत फाडड्ड दलीय तुमनेई. टुन्नी टूवू ाजजजजजजज चुड्ड़ कर मेराआ daaammmmmmmmmm होई निक्काललल दिया रईईए.
मैंनं एककददाम्मम बिहालल होऊ गाइइइइइइइ हुन्न. बहुत्तत्तत्त मदारररचुड्ड़ होऊ तुमममम bhaaiiiiiiiiii. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुउट्ठ बाददद लुंदड़ हैई तेराआ kaminneeeee.aaahhhhhhhhhhhhh. अगारररर मैंनं तुझसी आईसीई होई ीअपनीइ अपनीई शाद्दीय तआक़्क़क़ चूड़वत्तीय रही तू मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट कोऊ टूउउ भॉसड़ा बनाकररर ही मुझी मेरेई ससुरालललल भेजिएगा. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कामिनी सल्ली मैंन झाड़नी वालीए होऊणननननन. मैनी गयी मैं gaiiiiiiiiii.
इतना कहकर डीडीई भलभलाकर झाड़ gaiiiiiiiiiiiiii.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
जब मैं दीदी की छूट chat-te हुवे अपनी ऊँगली उनकी गांड में डाली तो दीदी हल्का दर्द के कारन सिसक पड़ी. मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड में लगातार पहले धीरे धीरे फिर जोर जोर से अंदर बहार करना शुरू कर दिया. दीदी भी मनीषा की छूट को जोर जोर से चाट रही थी. थोड़ी देर मनीषा की छूट चाटने के बाद दीदी ने अपनी एक ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर मनीषा की छूट में ऊँगली करने के बाद दीदी ने अपना मुंह मनीषा की छूट से हटाया और मुझसे कहा.
सरिता दीदी- अभी. अब तू मेरी जगह मनीषा की छूट चाट मैं तेरा लुंड चुस्ती हूँ.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की छूट छोड़ दी और हैट गया . दीदी भी मनीषा की छूट से अपना मुंह हटा लिया और उठकर बैठ गई. मनीषा हम दोनों को देख रही थी. मैंने मनीषा से पुछा.
मनीषा- टेल है क्या तुम्हारे कमरे में.
मनीषा- टेल की क्या जर्रूरत है भाई.
मैं- आज तुम्हारी गांड का उद्घाटन होगा. तो उसके लिए पहले मुझे तुम्हारी गांड को चिकना करना पड़ेगा. लुंड को तुम्हारी गांड में घुसाने के लिए रास्ता बनाना पड़ेगा. उसके लिए तेल की जरुरत है.
मनीषा- क्या जरुरी है भैया मेरी गांड मरना. आज छूट छोड़ लो गांड फिर कभी मर लेना.
मैं- देखे मनीषा तुमने hi कहा था की जब सरिता दीदी तुम्हारे साथ होंगी और वो तुम्हारी गांड मरवाने में तुम्हारी मदद करेंगी तभी तुम मुझसे अपनी गांड मरवाओगी. तो अब सरिता दीदी भी हमारे साथ हैं. तो अब क्या प्रॉब्लम है तुमको.
मनीषा- प्रॉब्लम कुछ नहीं है भैया. बस थोड़ा दर लग रहा है. आपका बहुत बड़ा है न.
मैं- कुछ नहीं होगा मनीषा. सरिता तो बहुत मज़े से अपनी गांड मरवाती हैं.
सरिता di(hanskar)- हआ हआ मुझे पता है की मुझे कितना मज़ा आता है. सेल एकदम जानवर बैंकर गांड मरते हो. तनिकक भी रहम नहीं करते.
मैं- क्या यार सरिता, क्यों मनीषा को दरकार मेरे लुंड को तरसना चाहती हो. अगर मनीषा ने आज अपनी गांड मुझे नहीं दी तो मैं तुम्हारी गांड की आज धज्जिया उदा दूंगा. देख लेना.
सरिता दी- चालल हैट बड़ा आया धज्जिया उड़ने वाला. कही ऐसा न हो की मेरी गांड की धज्जिया उड़ने के चक्कर में तुम्हारे लुंड का काम न तमाम हो जाये.
मैं- वो तो अभी कुछ देर में पता चल जायेगा की मरे काम तमाम होता है की तुम्हारी गांड fat-ti है.
मनीषा- अब आप लोग बस भी करिये. जो करना है पहले उसको करिये. ये बहस बाद में कर लेना.
मैं- देखो सरिता. कुछ सीखो अपनी छोटी बहन से. सच्ची समय पर सही चीज़ करनी चाहिए.
मनीषा- उस डरोएर में है करवा तेल.
मनीषा ने एक डरोययर की तरफ इशारा करते हुवे कहा. सरिता दीदी ने डरोययर खोलकर करवा तेल निकल लिया और मुझे दे दिया. मैंने मनीषा की कमर की निचे एक मोती तकिया लगा दिया. जिससे उसकी छूट और गांड ऊपर उठ गयी. मैंने मनीषा की तंग पकड़कर उसे और अपनी तरफ खींचा और मैं निचे जमीन पर खड़ा हो गया. मैंने सरिता दीदी को बीएड के सहारे तक लगा कर बैठा दिया. अब मैं मनीषा की छूट पर झुक गया और उसकी छूट को चाटने लगा. मेरे झुकने से मेरा लुंड दीदी के मुंह के बिलकुल पास आ गया. जिसे दीदी ने अपने हांथो में लेकर सहलाने lagi.main मनीषा की छूट को चाटते हुवे अपनी एक ऊँगली उसकी छूट में घुसकर अच्छी तरह गीली कर ली और फिर उसको निकल कर उसके ाशोले पर रख दिया.
मैं अपनी ऊगली उसकी गांड की छेड़ पर घूमने लगा और जोर जोर से मनीषा की छूट चाटने लगा. मैंने एक हाँथ से बोतल उठाकर कुछ तेल मनीषा की गांड पर गिराया और अपनी ऊँगली से उसे मनीषा की गांड के छेड़ में डालने की कोशिश करने लगा. थोड़ी देर बाद जब तेल सुख गया तो मैंने फिर कुछ तेल मनीषा की गांड पर गिराया और अपनी ऊँगली अच्छी तरीके से तेल पर लप्पेट कर मनीषा की गांड के छेड़ पर रख दिया और उसे अंदर प्रेस करने लगा. उधर निचे दीदी मेरे लुंड अपने पूरा मुंह खोलकर अंदर लेकर आगे पीछे कर रही थी. और एक हाँथ से मेरी गोटिया सहला रही थी.
मैंने अपनी कमर धीरे धीरे चलनी शुरू कर दी और दीदी का मुंह छोड़ने लगा. ऊपर मैंने अपनी ऊँगली मनीषा की गांड के छेड़ पर रखकर थोड़ा जोर दिया तो पुकककककक की आवाज़ आई और मेरे ऊँगली 1 इंच मनीषा की गांड में चली गई. उस प्खकक की आवाज़ के साथ मनीषा की चीख भी सुनाई पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaahhhhh भठाईयाँआ बहारर निकालूओ अपनी ऊंगलीई मेर्रीीी गानाद्द्ड सीए. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हैई. ऊऊऊओह्ह्ह्हह भैइय्या.
मैं- बॉस मनीषा थोड़ा दर्द बर्दास्त कर लो. मैं लुंड के लिए राष्ट बना रहा हूँ.
इतना कहकर मैं फिर से मणिधा की छूट चाटने लगा और फिर थोड़ा सा तेल ुकि गांड के छेड़ पर डालकर उतनी hi ऊँगली उसकी गांड में घूमने लगा. साथ hi मैंने अपनी कमर को एक झटका दिया और अपना पूरा लुंड दीदी के मुंह में पेल दिया. और अपनी कमर को वही रोक दी. दीदी gggggguuuuuuuuuu गगगगगगगगगूउऊउउउ करने लगी. जब मुझे लगा की दीदी की साँस रुकने लगी है तो मैंने अपनी कमर पीछे कर ली और अपना लुंड दीदी के मुंह से बहार निकल लिया. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और बोली.
सरिता दी- क्या कमीने. थोड़ा धीरे नहीं कर सकता था. एक hi बार में पुरे हलक तक पेल दिया. सेल मुझे मरने का इरादा है क्या. अगर मैं मर गयी न तो तू छूट के लिये तरस जायेगा.
main-(chut से मुंह हटाकर). मैं तुझे ऐसे थोड़ी hi मरने दूंगा सरिता. अभी तो मैंने तुझको अच्छी तरह छोड़ा hi कहा है. अभी तो तुझे सविता दीदी के साथ मिलकर छोड़ना है.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और मनीषा दोनों चकित रह गयी. तब मनीषा ने कहा.
मनीषा- ज्यादा सपने मत देखो भैया. सविता दीदी को आप मनीषा या सरिता दीदी न समझे. वो कभी भी इसके लिए तैयार नहीं होंगी. आप उन्हें अच्छी तरह जानते हैं.
मैं- वो सब तुम मुझपर छोड़ दो. अभी उसमे बहुत समय है. अभी तो तुम दोनों को साथ में छोड़ लू.
इतना कहकर मैंने फिर से ढेर सारा तेल मनीषा की गांड पर गिरा दिया और उसकी छूट चाटते हुवे मनीषा मनीषा की गांड में अपनी ऊँगली अंदर बहार करने लगा. निचे दीदी फिर से मेरा लुंड चूसने लगी थी. मैं फिर से जोर जोर के धक्के लगाकर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi मनीषा की गांड में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकली और मनीषा की छूट को पूरा अपने मुंह में भरकर जोर से चूसा और एक झटके में अपनी ऊँगली मनीषा की गांड में घुसा दी. मनीषा दर्द से चीख पड़ी.
मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyyy. बहररर निकालूओ भैयाआ अपनीइ ऊंगलीईईई मेरिइइइइ गांडड सीए. आआआआहहहहहहह मुझी बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा हैईईई. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ . मैंन मारर्र जाउँगग्गीइइइइइ. रहमममम करूओ भैईयाआ.
मनीषा चखने के साथ hi अपने शरीर को इधर उधर करके अपने आपको छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसकी जांघो को मजबूती से पकड़ रखा था. इसलिए वो मचलने के आलावा कुछ नहीं कर सकती थी. थोड़ी देर मैंने अपनी ऊँगली उसकी गांड में रोक दी और मनीषा की छूट जोर जोर से चाटने लगा. निचे मैं अपना लुंड जोर जोर से दीदी के मुंह में पेलने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने थोड़ा सा तेल मनीषा की गांड में दाल दिया और अपनी ऊँगली धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा. मैं मनीषा की छूट जोर जोर से चूसने के साथ अब अपनी एक ऊँगली मनीषा की छूट में भी दाल दी. और उसकी छूट छोड़ने लगा.
निचे मैं अपनी कमर हचक हचक कर दीदी के मुंह में ठोकने लगा. मेरा पूरा लुंड दीदी के हालत तक घुस रहा था. मैं अब झड़ने के करीब पहुंच गया tha.maine अपने मुंह और हाँथ की गति मनीषा की छूट में बढ़ा दी थी. मनीषा भी अब झड़ने के करीब पहुंच गई. मैं अपनी ऊँगली उसकी गांड में तेज़ी से अंदर बहार करना laga.manisha आअह्ह्ह्ह भैया ऊऊऊओह्ह भैया करने लगी. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा का शरीर अकडने लगा. और वो जोर से चिल्लाते हुवे झड़ने लगी.
मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. मैंनं अअअअअ रहियी होऊणननननननन बहुतत्त मज़ाआ आए रहा ही. मुझी औरर जोररर सीई चूसिएई मेरीए छुट्ट्ट्ट कोऊ भैयाआ. कहा जेईई. डीडीईई मैं झाड़ड़ड़ रहहीइ हुन्न. भईया नई मेरीए छूटत चाट चाट कर इसका पनीई निकाल दिया. aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ मैंन gaiiiiiiiiii सलेईईईई.
इतना कहकर मनीषा झाड़ गई. मैं भी अब झड़ने की कगार पर था. तो मैंने एक पेअर उठाकर बिस्टेर पर रखा और मनीषा की छूट का रास पिटे हुवे पूरी ताकत से दीदी के मुंह को छोड़ने लगा. और दीदी को गालिया देते हुवे बड़बड़ाने लगा.
मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh सवितत्ताआआआ. मेरिइइइइइइइ जाननननननन. ली मैंनं आआ रहा हूंणन्नन्नन्न. मेंननननननन झाड़ड़ड़ रहा हूंणंन्न. बहुत्तत्त छुडासीइइइइइ रहतीई हीी चू सलीईई. बहुतत्त ग्रामं मुँहहह हैई तेरा. तूने तो मेरीए लुंदड़ निछोड़ड़ड़ लिया. बहुतत्त गराम माललळ हैई टूउउ. लिए रनडीई सलिई ऑर्डर अंडरर तक्क मेरा लुंदड़ अपनी मुंह मई. आजजज मैं तेरा मुंह फाड़ डालूंगा. लिए कामिनीईई. मैं झाड़ड़ड़ रहा होऊणंन्न. पूरा माललळ पीई जा मेरे लुंदड़ का. इक्क बूँद भी नहीं गिरना चाहियेए जमीनी मी. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सरिताआए.
इतना कहकर मैं सरिता दीदी के मुंह में झड़ने लगा. मैंने अपना लुंड अभी तक दीदी के गले में डाला हुवा था. मैंने तब तक अपना लुंड बहार नहीं निकला जब तक मेरे वीर्य की एक एक बूँद दीदी ने पि नहीं ली. जब मैंने लुंड बहार निकला तो दीदी हांफ रही थी. 5 मिनट तक मैं ऐसे hi पड़ा रहा उसके बाद मैंने खड़ा हुवा और दीदी को उठाकर खड़ा किया और बिस्टेर पर जाकर लेट गया. और दीदी को देखते हुवे कहा.
मैं- बहुत मज़ा आया सरिता तुम्हारा मुंह छोड़कर. ऐसा लग रहा था की मैं छूट छोड़ रहा हूँ.
सरिता दी- तुझे तो मज़ा मिलना hi था सेल. मेरा गाला फाड़ दिया तुमने. तुम दोनों का तो हो गया अब मेरे बार में भी कुछ सोचो तुम दोनों.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपने साइन पर बैठने के लिए कहा. दीदी आकर पाने पेअर दोनों तरफ रखकर मेरे साइन पर बैठ गयी. मैंने दीदी की गांड पकड़कर अपने मुंह की तरफ खींचा तो दीदी की छूट मेरे मुंह से जा लगी.
और मैं दीदी की छूट चाटने लगा. मैंने दीदी की छूट chat-te हुवे अपना दोनों हाँथ ऊपर करके दीदी की दोनों चूचियों को अपने हांथो में भर लिया और उन्हें दबाने लगा. मुझे झड़े 15 मिनट का समय हो गया था इसलिए मेरे लुंड में जान आने लगी. तभी मुझे अपने लैंड पर मनीषा का हाँथ महसूस हुवा. मेरे शरीर ने एक झटका खाया. मैंने अपने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती से चीख पड़ी.
सरित ा दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैयाआआआ. थोड़ा धिर्री दबाओओओओओओओओओ. ऊऊऊओह्ह्ह्ह और जूर्रर सीए चटूओ मेरीए छुट्ट्ट्ट aaaaahhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइ.
दीदी इतना बोलकर मेरी तरफ देखने लगी मैंने दी जब दीदी की आँखों में देखा तो दीदी की आँखों लाल हो गयी थी. मैंने दीदी की चूचियों को जार जोर से बढ़ाते हुवे दीदी की छूट पूरी मुंह में भरकर चूसने लगा. निचे मेरा लुंड पूरा खड़ा हो गया था जिसे मनीषा अपने मुंह में लेकर चूस रही थी. थोड़ी देर लुंड चूसे के बाद मनीषा अपना पूरा मुंह खोला और तेज़ी से मेरे लुंड पर अपना मुंह पटकने लगी. मैं भी दीदी की छूट जोर जोर से चूसने लगा. छूट चूसै और चूचिया दबवाने से दीदी एकदम छुडासी हो गयी थी और वो अपने दोनों हांथो से अपने अपने बालो में फसकर इधर उधर करती हुई बिली.
सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiii मेरेईईई राजाआं. अब्ब्ब्ब चूड्डड्ड दिए मुझी चू. मेरीए छूट में खुजलिई माछह गयी हैईईई इस खहजली को चू अपनी लुंड सी मिटा दी मेरे भाईईई. छोड़ दी अपनीइ डीडीई कोऊ मेरे दिलबररर.
इतना कहकर दीदी मेरे ऊपर से हैट गयी तो मैंने हाँथ बढाकर मनीषा का सर पकड़कर अपनी कमर ऊपर उछाल उछाल कर अपना लुंड मनीषा के मुंह में पेल दिया और लगातार 8-10 जोरदार धक्के लगाकर अपना लुंड बहार खींच लिया.
मैंने दीदी को डोगग्य स्टाइल में खड़ा किया और दीदी के पीछे आ गया. मैंने मनीषा को दीदी के मुंह के पास छूट करके लेटने के लिए कहा. मनीषा मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.
manisha-(shararati मुस्कान के साथ) क्या बात हैई भैय्या. आपने दीदी को 3-4 बार hi छोड़ा है और दीदी ने आपको अपना राजा, अपना दिलबर बना लिया. पता नहीं जैसे जैसे आप दीदी को छोड़ते जाओगी वैसे वैसे दीदी आपको और पता नहीं क्या क्या बनती चली जाएँगी. देखना भैया कही ऐसा न हो की दीदी आपको अपने भैया से सैया न बना ले. फिर तो जीजा जी का पत्ता hi काट जाएगा.
सरिता दी- अच्छा अब तू ज्यादा मत बोल. और जल्दी से लेते. कब से बकर बकर कर रही है.
दीदी की बात सुनकर मैंने मनीषा से कहा.
मैं- तू चिंता मत कर मनीषा. मैं तुझे भी इतना मज़ा दूंगा की बहुत जल्दी तू भी मुझे अपना सैया बना लेगी.
मेरी बात सुनकर मनीषा दीदी के निचे पीठ के बल लेते गयी और अपनी छूट दीदी के मुंह के सामने कर दी. मैंने दीदी का सर पकड़कर मनीषा की छूट पर झुका दिया दीदी ने तुरंत अपनी जीभ निकल कर मनीषा की छूट को चाट लिया मनीषा भी गरम हो गाइट hi. उसके मुंह से सिसकी निकल गयी.
मनीषा- Aaaaaaahhhhhhhhhh didiiiiiiiiiiii. आईसीईए होई.
मैंने अपना लुंड दीदी की छूट पर रख दिया और दीदी की एक जांघ को पकड़कर उनकी छूट पर एक धक्का मारा. मेरा लुंड दीदी की छूट में आधा घुस गया. दीदी मस्ती में सिसक पड़ी और मनीषा की छूट से मुंह हटाकर बोली.
सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. ऐसे हीईईई छोड़ड़ड़ पनीइ डीडीईई कोऊ.
दीदी फिर से मनीषा की छूट चूसने लगी. मनीषा ने हाँथ बढाकर दीदी के सर को पकड़ लिया और अपनी छूट पर दबाने लगी. मैंने दीदी की जांघ को पकड़कर एक और धक्का दिया जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट में जड़ तक घुस गया दीदी पूरी तरह से मनीषा की छूट पर अपना मुंह जोर से दबा दिया और कुछ देर बाद अपना मुंह हटाकर चीखते हुवे बोली.
सरिता di-aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Saaleeeeeeeeeeeee अभीयी. बस आईसीए होऊ छोड़ड़ड़ मुझी मेरे छोड़ू सनमममम. चू बहुत्त अच्छआ चुड़क्कड़ भाईई हीी. जोऊ अपनीई बहन को छोड़ता हैईईई. बहुत्त मज़ाआ आ रहा हीी. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़ मुझेईई. मैंन आअज्ज्ज्ज तुझसेएई अपना हर्र छेईड्ड खुलवाऊंगीीी. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.
दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार खींच लिया. दीदी पलटकर मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने उन्हें इशारे से चुप रहने के लिए कहा और मनीषा को घूमकर लेटने के लिए कहा. मेरी बात मानकर मनीषा घूमकर दीदी के निचे फिर लेट गयी तो मैंने दीदी को मनीषा के ऊपर लिटा दिया अब दीदी की छूट मनीषा के मुंह की तरफ और मनीषा की छूट दीदी के मुंह की तरफ हो गई मैंने फिर से अपना लुंड सरिता दीदी की छूट पर रखा और एक hi झटके में अपने पूरा लुंड दीदी की छूट में पेल दिया दीदी दर्द और मज़े से अपनी छूट मनीषा के मुंह पर रगड़ते हुवे चिल्लाई.
सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ सलीईई. पूरा डायलललल दिए अपन्ना यी मोटा लुंदड़ मेरीए छुटत मई, पल दी मुज्झी जी भार के पीए मुझी. अपनी कुटिया बनाकररर छोड़ मुझीऐ. छोड़ड़ड़ मुझी साली. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़. दम्मम नाहीइ हाई kyaaa.chhooodd मुज्झिये. ऑर्डर जोर जोरर सी छोड़. मुझी बहुत्त मज़ा आ रहा हैई.
मैंने हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. मनीषा अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाटने लगी. कभी कब्भी मनीषा अपना सर थोड़ा सा ऊपर करके अपनी जीभ चलती थी तो वो मेरे लुंड को भी चाट लेती थी. मनीषा ने अपनी पेअर को कैची बनाकर सरिता दीदी की गार्डन पर लप्पेट लिया और अपनी छूट पर दबाने लगी, सरिता दीदी अपनी जीभ निकल कर मनीषा की छूट चाटने लगी. थोड़ी देर छूट चाटने के बाद दीदी ने अपनी ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और जोर जोर से अंदर बहार करने लगी. मैंने दीदी से कहा.
मैं- सरिता. तुम अपनी ऊँगली से मनीषा की गांड को भी धीरे धीरे छोड़ो. ताकि इसकी गांड भी थोड़ी ढीली हो जाये. नहीं तो इसको मेरा लुंड लेने में बहुत दर्द सहना पड़ेगा.
मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी ऊँगली छूट से निकली और मनीषा की गांड में एक झटके में दाल दी. मनीषा के शरीर में दर्द की लहार दौड़ गई और मनीषा धीरे से चिल्ला उठी.
मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह diidiiiiiiiiii. आरईईए भैया तू फिररर भीई जानवर बाण जाती हैं, लेकिन आप तो मेरीए बहाणं हीी. आप तू मेरी गनददद मी धीरे से उगली दाल सक्ती थिई ना लेकिन आप भी भैया की साथ चुदाई करवा कररर एकदामम जानवर्र बन्न गयी होऊ.
मनीषा की बात सुनकर दीदी जोर जोर से उसकी गांड में ऊँगली करने लगी और उसकी छूट चूसने लगी. मैंने भी सरिता दीदी की कमर थामकर दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. मैं बहुत जोर जोर से धक्का मर्डर रहा था. दीदी की गांड मेरे हर धक्के से साथ थिरकने लगती थी. दीदी अब बहुत गरम हो गई थी. वो भी अपनी गांड पीछे की तरफ उछाल उछाल कर अपनी छूट छुड़वा रही थी और बोल रही थी.
सरिता दीदी- AAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कामिनी. धीरी कर नाहा. टूउउ कभी कभी बहुतत्त तेज़ ढक्की मरता हीी. मुझी हर्र ढक्की से ऐसी लगता हैई जैसी मेरा कलेजा मुंह को आए जायेगा. ऐसी होई छोड़ड़ड़ अपनीई रानीई कोऊ. oooooooooohhhhhhhh अभीयी.
दीदी की बात सुनकर मैंने और डैम लगाकर दीदी की छूट छोड़ने लगा. दीदी की छूट इतनी आगे पीछे हो रही थी की मनीषा के पूरा मुंह पर दीदी की छूट घिस रही थी. और मनीषा भी अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाट रही थी. थोड़ी देर तक दीदी को ऐसे hi छोड़ने के बाद दीदी झड़ने के करीब पहुंच गई इसलिए वो और जोर जोर से अपनी कमर पिचई करने लगी और गालिया देते हुवे बड़बड़ाने लगी.
सरिता दीदी- aahhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh haaaaaaaaaaannnnnnnn मेरी राजाआं, मारर्र गईई री चूडड़ड री ऑर्डर जोरर सीए चुड़ड़ड़ड़ड़. uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्य्यय्य मैंन gayyyyyiiiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiiiii. ऑर्डर जोररर सी चूडड़ड बहाणं छोड़ड़ड़ड़. uiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiii manishaaaaaaaaaaa. देखहहहहह टीईर्र्र्र भईईई नीई मेरीए छुट्ट्ट्ट पहाड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई हीी री. फातटत गयी मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट. ारी हार्रामीइइइइइइइ. अपनीईई डीईडीई कोई छुटत फाडड्ड दलीय तुमनेई. टुन्नी टूवू ाजजजजजजज चुड्ड़ कर मेराआ daaammmmmmmmmm होई निक्काललल दिया रईईए.
मैंनं एककददाम्मम बिहालल होऊ गाइइइइइइइ हुन्न. बहुत्तत्तत्त मदारररचुड्ड़ होऊ तुमममम bhaaiiiiiiiiii. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुउट्ठ बाददद लुंदड़ हैई तेराआ kaminneeeee.aaahhhhhhhhhhhhh. अगारररर मैंनं तुझसी आईसीई होई ीअपनीइ अपनीई शाद्दीय तआक़्क़क़ चूड़वत्तीय रही तू मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट कोऊ टूउउ भॉसड़ा बनाकररर ही मुझी मेरेई ससुरालललल भेजिएगा. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कामिनी सल्ली मैंन झाड़नी वालीए होऊणननननन. मैनी गयी मैं gaiiiiiiiiii.
इतना कहकर डीडीई भलभलाकर झाड़ gaiiiiiiiiiiiiii.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..