Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 8 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-65





मैं- हाँ साली सविता तू ाआब बहन नहीं है मेरी. तू मेरी चुड़क्कड़ माल है. और तू शादीशुदा है तभी तो मेरे आगे अपनी छूट फैलाकर लेती hi. क्योंकि तेरा पति तुझे ठीक से छोड़ता नहीं है. इसीलिए तू अपने भाई से छूट छुड़वा रही है. बहुत छुडासी है तू सविता. तुझे तो पटक पटक कर छोड़ना चाहिए तब तेरे छूट की प्यास बुझेगी.

अब आगे.



इतना बोलकर मैं दीदी को छोड़ने लगा. मेरी इस जोरदार चुदाई से दीदी को भी मज़ा आने लगा था. मैंने दीदी भी अब अपनी गांड पीछे की तरफ धक्का देकर चुदाई में साथ देने लगी. फिर मैंने दीदी की चुकी दोनों हांथो से पकड़कर अपनी तरफ लगाम की तरह खींचकर जोर जोर से छोड़ने लगा और बड़बड़ाने लगा.

मैं- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh साली सअअअअअविताआआआआ क्या चूऊत्त हैईईई teeeeeeeeeeeeriiiii. एकदम तीते. लगता है जीजा ने तुझे ठिक्क से छोड़ा नहीं है. अब से मैं तुझे छोडूंगा. अब से तू मेरी मॉल है. तेरी छूट तो भहत्थी की तरह जाआ रही हैं. तू बहुत चुड़क्कड़ है साली सविता.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh हराआआमी साआआईईई. अपनी baaaaaaaaaaaahaaaaaan को इतनी बेडाआर्डडी से छोड़ड़ड़ड़ड़ रहा हिअआआअ सल्ले मुफ्त्त्त्तत्त काआअ माआआआ समममममममममझ रखा हैईईई क्याआआआ. Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhh बाआआआहुत ाएचआआआ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ता है टूउउउउ छोड़ साहाली ऑररररर जोरर सीई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़. फ्फ्फफ्फ्फ्फफ्फ़आयआयड डीईईईएमईईएडीइइइइइइइ चूऊउतायआ kooooooooooo.

मैं दीदी को झटके दे देकर पेलने लगा और बाबड़ाने लग.



मैं- ह्ह्ह्हहनननननन सल्ल्ल्ल्ली टूउउउ बाआअहुँत्तत्तत्त बाजआराममम माआआआ haaaaaaaaaai. टट्ट्टीीेरिइइइइइइ छुट्ट्ट्ट मेई आआआआअज हैआईई कामिनीईई. लीईई मीरा लैंड और अंडरररर तक लेटी. टूउउउउ ररऊऊऊऊजजजजज राआआत कुओ मीरीईए कम्मरे मीटीई आआआआजआआआआआ. मीटीएए टीएईऋ छूट को चुद करररररर थाआयंदाआआ करररर दुगाआआ.

सविता दी- oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुझीीीी ऑररररर टीज़ से छोड़ड़ड़ हाराममममी ऑरररररर टीएईज चूऊऊऊडड़डडडडड भादवईईईई. मेईयररररी चूऊउउउउउत में चीईटीयाआ रेंग raaaaaaaaaahi हैंण्ण्ण्ण्न मुझेईईई कुछहहहहहह हो रहा हिआआआआ. और टीएईज दहाआआक्की मरररररर कुट्टीीी. छोड़ अपनी दीदी को और छोड़ड़ड़ड़ड़ड़.

दीदी अब झड़ने वाली थी. तो मैंने अपने एक हाँथ. दीदी की छूट पर रखकर मसलने लगा और लम्बे लम्बे स्ट्रोक देने लगा. दीदी का शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्लाते हुवे बोली.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मममममममममिययययययय आएऔर तेज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ चूऊऊऊद मुझीीीी. और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ सलीईई ऑररररर टीएईज मैं झाड़नीयी वाआळी होऊं.

मैं- लिए सलीईई ऑररररर लिए अंडररररररर तू एकककदमम रंडी है सविताआआ. मैंईईईई तेरे जैसी चूडाकककड़ लड़की कह्हह्ही नाहीईई देखि. इतना मज़ाहा तो मुझेईई नताशा को भईईई छोड़ड़ड़ड़कर नहीं आया थाहा. जितना तुझीऐ छोड़कर अअअअअ रहा हिअआअ. अब सी तू मेरररी गुलाम हैईईई. मैररररररा जब मान करेगाआ तुझीऐ छोडूंगा. बोलल छुड़ेगी न मुझसे.

सरिता दी- हाआआआ aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhyyyyyyyyyyyyyyh हाआआआ ाआज से मइईईई टीएएएएएएडीइइइइइइइ गुलाआआआं hoooooooooon तू जबबबबबबब चाहाहे मुझीीी चुद लेनाआआआ. बहुत्तट्ट्ट्ट मास्त्टटटटट लुँड्ड्ड है तेरा. और तेज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मेंनननन आईएईए वालीईई होओओओओ.

दीदी की बात सुनकर मैंने तेज़ी से उन्हें छोड़ना शुरू किया. मैं बहुत लम्बे लम्बे स्ट्रोक दीदी की छूट में लगाने लगा. कुछ hi देर में दीदी की छूट ने भलभलाकर पानी छोड़ दिया और दीदी चीखते हुवे झाड़ गई.

सविता di-oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssssssssss मैं गाआआअआइईईई मरीईई भाआआआईईईई. सम्भालो मुझेईईई. टीएईऋ बहहननननन झाआंआड़ रआआआहियी हैईईई. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

सविता di-oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssssssssss मैं गाआआअआइईईई मरीईई भाआआआईईईई. सम्भालो मुझेईईई. टीएईऋ बहहननननन झाआंआड़ रआआआहियी हैईईई. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

और इतना बोलकर दीदी की छूट ने पानी चूड दिया. पानी छोड़ने के बाद दीदी निढाल बिस्टेर पर लेट गई. मैंने अपनी चुदाई बंद कर दी. कुछ देर बाद जब दीदी की सनस दुरुस्त हो गई तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्यों सविता मज़ा आया की नहीं अपने भाई से छुड़वाकर.

सरिता दी- बहुत मज़ा आया अभी लाइफ में इतना मज़ा पहली बार आया है.

मैं- तो बताओ हैं न मेरा हथियार जीजा से ज्यादा ताकतवर. देख दिया इसका स्टैमिना.

सरिता दी- सच में अभी तेरा हथियार बहुत दमदार है और बहुत स्टैमिना है तुझमे. मेरी छूट की हालत ख़राब कर दी तुमने. बहुत मज़ा आया. आज पहली बार मेरा पानी इतनी जल्दी निकला है

मैंने दीदी की बात सुनकर उनकी छूट से अपना लुंड निकल लिया और दीदी को पलटकर सीधा किया और घसीट कर बिस्तर के किनारे ले आया और उनके मुंह के सामने अपने लुंड को लहराते हुवे कहा.

मैं- लेकिन मुझे मज़ा नहीं आया सविता. मेरा पानी अभी नहीं निकला. चल मेरे लुंड को चूस ताकि मैं तुझे फिर से छोड़ सकू.

मेरी बात सुनकर दीदी चकित रह गई उन्होंने अपने मुंह पर हाँथ रखते हुवे कहा.

सविता दी- क्या बात कर रहा है अभी. अभी तू डिस्चार्ज नहीं हुवा. इतने देर में तो तेरे जीजा 2 बार झाड़ जाते.

मैं- ये तो अच्छा hi है जो वो इतनी जल्दी झाड़ जाते हैं. नहीं तो मुझे तेरी ये गरम और गदराई जवानी को पिने का मौका hi नहीं मिलता.

सविता दी- हाँ अभी अब तो तेरे लुंड ने मुझे अपना गुलाम बना लिया है. तू जब चाहे जैसे चाहे वैसे मुझे छोड़ सकता है.

मैं- तो चल चूस मेरा लुंड.

इतना कहकर मैंने दीदी के सर खींचकर बिस्टेर के एकदम कोने पर कर दिया और अपने एक पांव को बिस्टेर पर रखकर दीदी के मुंह के सामने अपने लुंड कर दिया. दीदी जीब निकल कर मेरा लुंड चाटने लगी. दीदी की जीभ का स्पर्श पाकर मेरे मुंह से sssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. थोड़ी देर लुंड चटवाने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह में दाल दिया और उनका मुंह हलके हलके धक्के मार्कर छोड़ने लगा.

दीदी भी मेरे लुंड को मुंह से दबा दबा कर चूसने लगी. थोड़ी देर मैंने हलके हलके दीदी का मुंह धीरे धीरे छोड़ता रहा. उसके बाद मैंने अपने लुंड को टोपे तक पीछे किया और एक जी झटके में पूरा दीदी के मुंह में पेल दिया. दीदी के मुंह ssssssssssssssss की आवाज़ आई. दीदी का शरीर इस झटके से अकड़ गया. फिर मैंने अपने हाँथ को बिस्टेर पर रखकर ताबड़तोड़ अपने लुंड से दीदी का मुंह छोड़ने लगा. हर झटके के साथ दीदी की सांसे भरी होने लगी. उनकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी और उनके मुंह से ggguuuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuuuu की आवाज़ आने लगी. मैं दीदी का मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ा रहा था.



मैं- ले साली. बहुत गरम माल है तू. तुझे जीजा ने मेरे लिए बचाकर रखा था. तू बड़ी चुड़क्कड़ है इसलिए तेरी जवानी को जीजा नहीं संभल सका. अब तेरी जवानी को तेरा भाई संभालेगा. ले साली और अंदर ले. बहुत आग लगी है तुँझमे.

थोड़ी देर तक दीदी का मुंह पेलने के बाद मैंने अपना लुंड बहार खींचा और एक झटके में दीदी के मुंह में पेल दिया और उनके मुंह से लुंड बहार नहीं निकला. दीदी की सांसे फूलने ले. वो ggggggggggguuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuu कर रही थी. आँखों में आँशु आ गए थे. जब मुझे लगा की उनकी साँस अब घुट जाएगी तो मैंने लैंड बहार खींच लिया और जैसे hi दीदी ने साँस ली मैंने फिर लुंड मुंह में पेल दिया. और बड़बड़ाने लगा.



मैं- ले साली. बहुत गर्मी चढ़ी थी तुझपर. इसीलिए मेरे सामने तू नंगी होकर घूमती थी. अरे इतनी hi गर्मी थी तेरे अंदर तो पहले hi बोल दिया होता तूने मुझे तो मैं कब का तुझे छोड़कर ठंडा कर दिया होता. ले चुड़क्कड़ रंडी और अंदर ले मेरा लुंड. आज तुझे छोड़कर तेरी छूट की धज्जिया उदा दूंगा रंडी.

उसके बाद मैंने दीदी के मुंह से लुंड बहार खींच लिया. लुंड बहार आते hi दीदी की जान में जान आई. उन्होंने एक गहरी साँस ली और मेरी आँखों में देखा, मैं उनकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगा. फिर मैं बीएड पर बैठ गया और दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया. दीदी ने गॉड में बैठकर मेरे लुंड को अपने हांथो में पकड़ा और अपनी गांड उठाकर लुंड को अपनी छूट के मुंह पर रख लिया और धीरे धीरे निचे बैठने लगी. मैंने भी नीचे से एक जोर का धक्का लगाया. तो लुंड पूरा दीदी की छूट में समां गया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभी. मेंननननन माहाआर गाआआआईई धीरे कर. एक झटके में डालना जरुउरी थाहा क्याआआआ.

मैं- दर्द में hi तो मज़ा है दीदी. बस तुम मेरा साथ दो. मैं तुम्हे जन्नत की सैर कराऊंगा.

फिर दीदी मेरी गॉड में उछलते हुवे लुंड अंदर बहार करती रही. मैंने दीदी की एक चुकी को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा तथा एक हाँथ से उनकी चुकी को दबाने लगा. और दीदी को 3 तरफ से मज़ा देना लगा. इस मज़े से दीदी गरम हो गई और आहे भरते हुवे दीदी लुंड पर उछलते हुवे बड़बड़ाने लगी.



सविता di-oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh बायहीइइइइइइ. क्याआआआ मास्ट चूड्डड्डेइइइइइइ कार्ररता हैईईई टूउउउ. तुंबीईईई तूऊऊऊ मुझीीेछोड़ड़ड़ड़ड़कररर मेरररररा दद्दील खुश करररर दिया मेरी भइईईई. क्याआआआ लुँड्ढड्डड़ हैईईई टीएईएएरा.

मैंने दीदी के बात सुनकर निचे से धक्के लगाने गाला और अपने दोनों हाथो से उनके कंधे को पकड़कर उन्हें अपने लुंड पर पटकने लगा. जिससे मेरा लुंड दीदी की बच्चेदानी पर टकराने लगा. इस पोजीशन में दीदी की छूट बहुत टाइट लग रही थी. मेरा लुंड छूट की दीवारों से रगड़ रगड़ कर छूट में जा रहा था. जिससे मुझपर भी जोश चढ़ाने लगा और मैं भी बड़बड़ाने लगा.

मैं- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh कितियाआआअ बहुत टाइट छूट हैई टेरररीई. तेरी छूट मेरे लुँड्ढड्डड़ को निछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ रही हैई salllllli.meeeeeraaaaaa लंनंड्डड्डड्डड्डड़ टीईईडीईई चूऊऊऊत मीटीए रागाड़ काआआर आयंदाआर जाआ रहा हैईईईई और तेरी बछहड़ानी सी तकरायआ रहा हिअआ. तेरई छूट बहुत गाहरी हैईईई मेररररररररी रनणण्डीी.

सविता दी- Hhhhhhhhaaaaaaaaaan bhaaaaaaaaaaaaaaiiiii सअअअअअअअअल माआआअदायआरचूडड़ड. एईई छुट्ट्ट्ट मैनीईई टीईईडीईईई लिएईईए हीईईई बाकचाकरररररर रक्खीईईईई हैईईईई, छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुहीईईई ऑरररररजोररररर सी छूऊऊऊद. फआयआयड डीएई मेरररीईईई छुटटटटटट koooooooooo, बहुत्तत्त पणीइइइइइ बाहाआआटीईई हाआआईईईई ईईईई. ाऊऊऊर टीएएजज़्ज़्ज़्ज़ chooooood.mujheeeeeeee kuccccccccccccch हो राहाआआआ haaaaaaaaaaiiii. मेररररररीईईई चूऊउत्तत मइईईई khuuujhaaaaaaaliiiiiiiiii हो रहीइइइइइइइ है. maiiiiiiiiiin झाड्डड्डनीीे आआआआईईईई हूऊऊऊणणन्न. समममममभआआआआ मुझेईईई abhiiiiiiiiii.

इतना कहकर दीदी की छूट ने फिर पानी छोड़ दिया. अभी मेरा पानी नहीं निकला था तो मैंने दीदी को बीएड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनके होंठो को चूमने लगा. जिसमे दीदी मेरा साथ देने लगी. साथ साथ दीदी की चूचिया भी चूस रहा था. जिससे दीदी फिर से गरम होने लगी. फिर मैंने दोनों हांथो में दीदी की छूछीहो को पकड़ा और कसकर मसल दिया. दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaabhiiiiiiiiiii सलेईईईई धीरे नहीं दबा सकताआआआ हैईईईई क्याआआ. तायनीकक भी राहाआम नही ाताआए मुझपर

मैं- तेरी जैसी चुड़क्कड़ औरत पर रहम करना भी नहीं चाहिए.

जब मैंने देखा की दीदी एकदम गरम हो गई हैं तो मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट पर रखा और दीदी की आँखों में देखते हुवे एक hi झटके में पूरा लुंड उनकी छूट में पेल दिया. इस झटके से दीदी के मुंह से चीख निकल गई.



सविता दी- oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh साली haaaramiiiiiiiiii धीरीईईए नाहीइइइइइइइ डाललललललललल सकताआ थाआआआ क्याआ. मेरिइइइइइइ जनन लेगा kyaaaaaaaaaa भड़वे.

मैं तेज़ तेज़ झटके लगाकर दीदी को छोड़ते हुवे बोलै

मैं- तेरी जैसी रंडी की प्यास नार्मल चुदाई से नहीं बुझेगी. तेरे जैसे रंडी को तो पटक पटक कर छोड़ना चाहिए. और मैं रंडियो को इसी तरह छोड़ता हूँ. (फिर उनकी छूट को सहलाकर छोड़ते हुवे). अब बता कौन है तू मेरी. भूल साली.

सविता दी इस दमदार चुदाई से एकदम बावली हो गई थी. उनका चेहरा एकदम लाल हो गया था बाल बिखर गए थे. सरीर कैंप रहा था. कुल मिलकर वो चुदाई का भरपूर आनंद उठा रही थी. और इस समय दीदी पर चुदाई की पूरी मस्ती और खुमारी छै हुई थी. मेरे पूछने पर दीदी ने कहा.

सविता दी- हॉँण्णन मेंननननन हूँ टीईडी ररउंडड्ड्डी. मुझीपररर परररर कोई रहममम मत्तत्तत कररररणाआ. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ो अपनी रआआआआन्द्ड़ड्डी डीडीई को. फआयआयड डालूऊऊओ मेरिइइइ छुट्ट्ट्ट को. डीईएकहूऊऊऊ maaaaaamyyyyyyyyyyy तुम्हारा बेताऑ तुम्हहारीय बेटीईईईई को आआआअपनी रआआआआआदीीी बनाआआअकर छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ रहा hiaaaaaaaaaa.

मैं- (दीदी को पूरी ताकत से छोड़ते हुवे). Haaaaaaaaaan सलीईई रंडी ाजजज्जज माआआईई तेरी छूट फाड़ दूंगा. सलीईईई टुनीईईई अपनी जवाणीइइइइइइइ दिखाआकाररररररर मुझे बहुत तड़पाया है. आआआअज मैंनं उसकाआ सराआआ बड्ड़डडलाआ तुझीीी छोड़ड़ड़ड़कर लूंगाआआआ.

सरिता di-(mujhe चूमती हुई) हैं भाआईईई और जोर से छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ो . बहुत्तत्त अछ्हा लग रहाआआ है. फआयआयड दालुओ मेरिइइइइ छूट को. मेरिइइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट मीटीए कुछहहहह चीटियाआआ रेंगगगगगगग रहे हैईईईई. उन्हीीीी अपनी लुंदड़ से लगाआआअआद रगाआड करररर माहार डालो अअअअअअभीयी ऑररररर जोररर से छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ो. तुममममम दुनियाआआआ केईएए सबसीईई अच्छीीीी भाआआआई hoooooooooooo जो अपणीइइइइइइ बहनणननणणन कईईईई पयास्सस्स बुझायआ रहा हीी.

फिर मैंने दीदी को बीएड से उठाकर जमीं पर खड़ा किया और उनके पीछे से जाकर दीदी की एक तंग बीएड पर राखी और और उनके दोनों हांथो को पीछे करके अपने एक हाँथ में फसकर एक हाँथ से उनकी गार्डन को पकड़कर पीछे से लुंड उनकी छूट में एक hi झटके में डालकर छोड़ने लगा. दीदी बड़बड़ाने लगी.



सविता दी- oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiii chooooooooooodd दूऊऊ अपनी randiiiiiiiiiiiiii baaddddddddddddi बहाएं को. फ़ायद दो अपनीईईई बाहाआआ की छूटत को अपनेईईई मुसाहायल सीई. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh आआआआहहहहहहह. मेरे प्याआआरी भईईई. Oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh और जोर से छोड़ो अपनी रंडी को aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइ ाआजजज्जजज सीईई तुमहाआआअररररी बाहाआआआं तुम्हाररररररररीईईई गुलाआआआं हैईईईई. Tumhariiiiiiiiii रुन्द्डडडडडडडडी हैईईई तुम्हाररररररररी कुटियाआआआ हिआआआआ. जहा भीईई जैईसे भीइइइइइइ जब भीईई तुमहारा माआआं कररररी तुम मुझेईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ लेनाआआआ. औरर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ चूऊउड़ूऊऊऊ भाआआआईईई मइईईईइ aaneeeeeeeeeee waliiiiiiiiii होओओओओओओ. मैं गाआआईईई अभियई. सँभालुओ मुझीऐ.

इतना कहकर दीदी फिर से झाड़ गई. इतनी देर तक चुदाई के बाद अब मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया tha.teen बार झड़ने के कारन दीदी एकदम लास्ट हो गाइट hi तो मैंने तुरंत दीदी को जमीन पर बीएड से तक लगाकर बिताया. और अपना लुंड दीदी के मुंह के सामने कर दिया. दीदी मेरा इशारा समझ गई. उन्होंने तुरंत मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. जब मुझे लगा की मैं छूटने वाला हूँ तो मैंने दीदी के सर को पकड़ कर अपना लुंड दीदी के मुंह में पूरा अंदर पेल दिया और भलभलाकर झड़ने लगा. और झड़ते झड़ते कहने लगा.



में- Aaaaaaahhhhhhhhhhh रनडीईईई ohhhhhhhhhh मैं gayaaaaaaaaa.lee मेरीए लुँड्ढड्डड़ का पणीइइइइइइ. ऑररररररररर पीईईई जाआआआ. ीककककक बूंदडडडडडड भीई बहार मत्तत्तत गिरना मेरीए कुटिया.

दीदी मुझे पीछे करने की कोसिस करने लगी लेकिन मैंने दीदी के सर को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उन्होंने मेरे लुंड का पूरा पानी नहीं पि लिया. झड़ने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह पर एक थप्पड़ मरकर अपने लुंड को बहार निकला तो दीदी खांसते हुवे हांफने लगी और अजीब सा मुंह बनाते हुवे बोली.

सविता दी- ये तूने क्या किया पूरा मुंह गन्दा कर दिया. और पता नहीं इसका स्वाद कैसा था.

मैं- मैं इसको वेस्ट नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने इसे आपको पिलाया. ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. धीरे धीरे तुमको इसकी आदत पद जाएगी. वैसे कैसे लगा दीदी अपने भाई से छुड़वाकर.

ये सुनकर दीदी ने मेरे मुंह को चूमकर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- ये मेरे आज कर की सबसे बेस्ट चुदाई थी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-66



अभी मैं दीदी से कुछ कहता इससे पहले hi किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. हम दोनों को तो काटो खून नहीं ऐसी हालत हो गई. दीदी दर के करें बिस्टेर पर चढ़ कर बैठ गई. तभी दरवाज़ा एक बार फिर खटखटाया गया और सरिता दीदी की आवाज़ आई.

सरिता दी- अभी ो अभी.

लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था की वो अभी hi रो देंगी. हम दोनों का चुदाई का भूत पूरी तरह से उतर चुक्का था. दीदी तुरंत बीएड से उतारकर अपने कपडे ढूढ़ने लगी. लेकिन कपडे तो मैंने फाड् डेल थे. अभी उनकी एक पैंटी थी जो उनके हाँथ में थी. तभी सरिता दी की आवाज़ फिर सुनाई पड़ी.

सरिता दी- अभी दरवाज़ा खोलो. तुम्हारे साथ अंदर कौन है.

जब मैंने दीदी से पूछा था की टुनको चुदाई कैसी लगी तो दीदी ने कहा था आज तक की सबसे बेस्ट चुदाई थी ये. शायद सरिता दीदी ने वो सुन लिया था इसलिए सरिता दीदी की ये बात सुनकर मेरी तो गांड hi फैट गई. अब हम दोनों पक्का पकड़े गए थे. ये बात सुनकर दीदी की आँखों में आंसू आ गए. वो मेरी तरफ मिन्नत भरी नजरो से देख रही थी. जैसे कह रही हो की अब मेरी इज़्ज़त और ज़िन्दगी तेरे हाँथ में है. मुझे भी कोई तरीका नहीं सूझ रहा था. तभी फिर से सरिता दी की आवाज़ सुनाई दी.

सरिता दी- दरवाज़ा खोल अभी. कुछ काम है तुझसे. और अंदर कौन है तेरे साथ.

मैं- क्या है क्यों इतनी रात को परेशां कर रही हो. अच्छा रखो खोलता हूँ दरवाज़ा.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी बहुत दर गई. और मुझसे धीरे से कहने लगी.

सविता दी- नहीं अभी दरवाज़ा मत खोलना. अगर सरिता ने मुझे इस तरह देख लिया तो मैं उसे क्या मुंह दिखाउंगी. मैं तो जीते जी मर जाउंगी. कैसे नजरे मिलाऊँगी. क्या जवाब दूंगी उसके सवालो का.

मैं- आप चिंता मत करो मैं संभल लूंगा.

अब तक मेरे दिमाग में एक तरकीब आ गाइट hi. मैंने दीदी को मेरे बीएड के पीछे जो जगह थी उसके पीछे छीपा diya.aur उनसे चुप रहने का इशारा kiya.fir अपने मोबाइल में एक बहुत hi इरोटिक ब्लू फिल्म चला दी और उसका वलयमे हल्का कर दिया और फॉरवर्ड करके वह तक लाया जब चुदाई शुरू हो गाइट hi. और मोबाइल को दरवाज़े की तरफ डिस्प्ले करके रख दिया. मेरा लुंड तो अब तक बैठ गया था. इसलिए मैंने लोअर पहना और दरवाज़ा खोलने चला गया. दरवाज़ा खोलते hi सरिता दीदी को देखते hi मेरा कुछ देर पहले झाड़ा और अब बैठ चूका लुंड फिर से खड़ा हो गया. din-ba-din सरिता दीदी के कपडे उनके जिस्म पर काम होते जा रहे थे. उनके जिस्म पर इस समय एक निघ्त्य काम t-shirt थी जो उनकी चूचियों को छुपा काम दिखा ज्यादा रही थी. मैं उनकी चूचियों को देखते हुवे कहा.



मैं- क्या है इतनी रात को क्यों परेशां कर रही हो.

सरिता दी- तुम्हारे साथ कमरे में कौन है मैंने किसी की चीख सुनी थी.

मैं- आप भी न दीदी. आपके कान तो बहुत तेज़ है. चीख मेरे कमरे से hi आई थी.

सरिता दी- कौन है वो और इतनी रात में तेरे साथ क्या कर रही है.

मैं- मेरी गिर्ल्फ्रेंड है वो. और मेरे साथ वो कर रही थी जो एक गिर्ल्फ्रेंड और बॉयफ्रंड करते हैं.

इधर मेरी बात सुनकर सविता दीदी की हालत ख़राब हो गई थी. एक तो वो पूरी नंगी थी कमरे में और ऊपर से मैं ऐसी बाते कर रहा था तो उनका डरना वाज़िब था.

सरिता दी- क्या कौन है वो कलमुही जो मेरे भाई के साथ उसके कमर में इतनी रात को नैन मटक्का कर रही है. मुझे देखने है उसे.

मैं सरिता दीदी की कमर में हाँथ डालकर उन्हें अपने से सत्ता लिया. जिससे मेरा लुंड सरिता दीदी की गांड पर प्रेस होने लगा. दीदी को भी मेरे लुंड का एहसास हो गया. इसलिए वो मुझसे दूर हो कर कड़ी हो गई तब मैंने उनके कंधे पर हाँथ रखा और इशारे से मोबाइल की तरफ दिखाया जिसमे इस समय चुदाई चल रही थी.



सरिता दी- छियईईई अभी तू कितना गन्दा है. ऐसी गन्दी वीडियो देखता है. लेकिन जो आवाज़ मैंने सुनी थी. वो इसी से आई थी क्या.

मैं- अब इतनी रात में मुझे थोड़ी हो पता था की आप आ जाओगी मेरे कमर में. वो बस आज गिर्ल्फ्रेंड की याद आ रही तो बस……….. समझा करो दीदी.

सरिता दी- हाँ बस बस समझ गई.

मैं- अच्छा वो सब छोड़ो ये बताओ की आपने इतनी रत को मुझे क्यों डिस्टर्ब किया. सारा मज़ा ख़राब कर दिया.

सरिता दी- हाँ हाँ मुझे पता है की तेरा कौन सा मज़ा ख़राब हुआ. तुझे शर्म नहीं आती अपनी बहन के सामने ऐसी बात करते हुवे.

मैं- लो कर लो बात. मैं तो अपने कमरे में आराम से वीडियो देख रहा था. आप ने आकर डिस्टर्ब किया और ऊपर से मुझपर नाराज़ भी हो रही हो. अच्छ ये सब छोडो इतनी रात को क्या काम पद गया मुझसे.

सरिता दी- अरे वो क्या है न अभी. मुझे इंटरनेट से कुछ पढाई करनी है. और नेट चल नहीं रहा है. चल के देख न क्या हुआ है.

मैं- (मन में). तुम्हारी छूट में इतनी आग लगी है दीदी की सुबह तक का भी इंतज़ार नहीं कर पाई. और रात में आकर मेरा सारा मज़ा ख़राब कर दिया. नहीं तो अभी मेरा मन सविता दीदी को और छोड़ने का कर रहा था. लेकिन इसकी छूट की आग ने सारा काम ख़राब कर दिया. लगता है सविता दीदी से पहले अब इसको hi छोड़ना पड़ेगा.

मैं- अरे यार तो इसके लिए इतनी रात को कौन सा पहाड़ टूट पड़ा. ये तो मैं सुबह भी देख सकता थान न.

सरिता दी- नहीं भाई बहुत जरुरी है. इसलिए इतनी रात को परेशां किया.

मैं- अच्छा चलो मैं 5 मिनट में आता हूँ.

सरिता दी- अभी सविता दीदी कहा हैं. उनके कमरे का दरवाज़ा खुला है और वो कमरे में नहीं हैं.

सरिता दीदी की बात सुनकर मुझे सविता दीदी पर बहुत गुस्सा आ रहा था. चुदाई की इतनी जल्दी थी की दरवाज़ा भी बंद नहीं किया. अब मैं क्या जवाब दूँ इसको. उधर जब सविता दीदी ने सुना की सरिता दीदी जानती हैं की वो कमरे में नहीं हैं तो उनकी हालत और ख़राब हो गई. फिर मैंने कहा.

मैं- अरे यार मुझे क्या पता गई होंगी बाथरूम या किचेन में. आप चलो मैं आ रहा हूँ.

उसके बाद सरिता दीदी निचे चली गई तो मैंने दरवाज़ा बंद किया और दीदी को बहार आने को बोलै. दीदी जब बहार आई तो बहुत दरी हुई थी. उन्होंने मुझसे कहा.

सविता दी- सरिता को तो सब पता चल गया की मैं कमरे में नहीं हूँ. अब मैं उसको क्या जवाब दूँगी.

मैं- घबराओ मत दीदी. अभी आप मेरे ये कपडे लो और इसे पहनकर बाथरूम में जाओ अपने आपको ठीक करो. और एकदम रिलैक्स होकर निचे जाओ. ऐसा सो करना जैसे कुछ हुवा hi नहीं hai.Sarita दीदी ने अगर पूछा तो एकदन शांति से बोल देना की पीरियड आये हुवे हैं तो बाथरूम में गई थी. उनको तनिक भी शक नहीं होगा.

उसके बाद मैंने टाइम देखा तो 12.40 हो गए थे मतलब मैं और सविता दीदी लगभग 1.30 हॉर्स से साथ थे. यही सब सोचते हुवे मैं सरिता दीदी के कमरे में चला गया. वह जाकक चेक करने पर पता चला की नेट पैक ख़तम हो गया है. तो सरिता दीदी ने जबरन मुझसे रिचार्ज करवाया. उसके बाद मैं बहार आने लगा तो सरिता दी भी बहार आ गई. और मुझसे सविता दीदी के कमरे में चलने के लिए कहने लगी. जब हम दीदी के कमरे में पहुंचे तो वो बाथरूम से अभी अभी आई थी और तौलिये से अपना मुंह पोछ रही है. मैंने उनसे पूछा.

मैं- दीदी आप दरवाज़ा खुला छोड़ कर कहाँ गाइट hi. सरिता परेशां हो रही थी.

सरिता दीदी- हाँ दीदी इतनी रात को आप कहा चली गाइट hi. आपको पता है मैं कितनी दर गाइट hi.

सविता दी- (जैसा मैंने बताया था उसी तरह)- हाँ मैं कोई छोटी बच्ची हूँ न जो गम हो जाउंगी वो कुछ प्रॉब्लम थी तो बाथरूम गई थी.

सरिता दी- क्या प्रॉब्लम है दीदी. आपकी तबियत तो ठीक है न.

सरिता दी- (उन्हें आँखे दिखाकर). अब तू बच्ची नहीं है जो तुझे हर बात बतानी पड़ेगी.

सविता दीदी का इशारा सरिता दीदी समझ गई थी. क्योंकि मैं वह खड़ा था इसलिए वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी. फिर सविता दीदी ने पूछा.

सविता दी- और तुम दोनों साथ साथ मेरे कमरे में इतनी रात को क्या कर रहे हो.

सरिता दी- वो क्या है न दीदी मुझे नेट पर बहुत काम था और नेट बंद हो गया था तो उसी को देखने के लिए अभी को बुलाकर ले हूँ.

सविता दी- तो उसे इतनी रात में जगाने की क्या जरुरत थी. कल सुबह दिखा देती.

सरिता दी- (धीरे से) ये सो थोड़ी रहा था ये तो मज़ा कर रहा था वीडियो देखकर.

जैसी मैंने और सविता दीदी ने सुन लिया. सरिता दीदी ने कहा.

सविता दी- अच्छा अब जाओ तुम दोनों. मुझे भी सोना है.

सरिता दीदी को तो भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़नी थी तो वो तुरंत hi गुड़ नाईट बोल कर चली गई. अब कमरे में हम दोनों hi थे. तो सविता दीदी ने गुस्से में कहा.

सविता दी- इसे पता नहीं ऐसा कौन सा काम करना है नेट पर की इतनी रात को डिस्टर्ब किया. सारा मज़ा ख़राब कर दिया कामिनी ने.

मैं सविता दीदी की बात सुनकर हंसने लगा. मुझे हँसता देखकर दीदी को और गुस्सा आ गया. उन्होंने कहा.

सविता दी- हंस ले तू भी हंस लो. अभी पकड़े गए होते तो साडी हंसी गगग…… में घुस जाती. लाइफ में पहली बार इतना मज़ा आ रहा था. कामिनी ने आकर सारा मज़ा ख़राब कर दिया.

मैं- अरे आप चिंता क्यों करती हैं दीदी. कल आपकोफिर से जरूर छोडूंगा. अगर घर पर नहीं तो कही और चलेंगे. लेकिन बिना आपको चोदे मुझे अब चैन नहीं आएगा. आपके इस नशीले हुस्न ने मुझपर जादू कर दिया है.

ये बात मैंने सविता दीदी का गुस्सा काम करने के लिए कहा था. मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई और सर निचे करके बोली.

सविता दी- मुझे कही बहार नहीं जाना तेरे साथ. (ये इस बात का इशारा था की दीदी बहार जाकर छोड़ने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं थी.)

मैं- अच्छा ठीक है इस बारे में हम कल बात करेंगे. अभी आप सो जाइये. गुड़ नाईट.

और इतना बोलकर मैं अपने कमरे में आ गया और बिस्टेर पर लेटकर ये सोचने लगा की अगर थोड़ी सी भी चूक हो गई होती तो आज सविता दीदी और मैं पकडे गए होते. वैसे सरिता दीदी से दर काम hi था. वो थोड़ा बहुत हंगामा करती लेकिन मां पापा को तो बिलकुल नहीं बताती. लेकिन इससे सविता दीदी को बहुत शर्मिंदा होना पड़ता. यही सब सोचते हुवे मैंने अपने सर को हल्का झटका देकर इन ख्यालो को अपने दिमाग से निकला और सोने की कोशिश करना लगा. थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई.


इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-67

और इतना बोलकर मैं अपने कमरे में आ गया और बिस्टेर पर लेटकर ये सोचने लगा की अगर थोड़ी सी भी चूक हो गई होती तो आज सविता दीदी और मैं पकडे गए होते. वैसे सरिता दीदी से दर काम hi था. वो थोड़ा बहुत हंगामा करती लेकिन मां पापा को तो बिलकुल नहीं बताती. लेकिन इससे सविता दीदी को बहुत शर्मिंदा होना पड़ता. यही सब सोचते हुवे मैंने अपने सर को हल्का झटका देकर इन ख्यालो को अपने दिमाग से निकला और सोने की कोशिश करना लगा. थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई.




अब आगे




सुबह मैं किसी के जगाने से उठा. मैं आँखे मलते हुवे उठा और जब थोड़ी आँख खोलकर देखा तो मेरे आँखे अपने आप खुल गई. क्योंकि सामने का नज़ारा hi ऐसा था. सरिता दीदी जिम करने के लिए आई थी एकदम माल बांके. उन्होंने स्पोर्ट वाले कपडे पहने हुवे थे जो उनके जिस्म पर एकदम कैसे हुवे थे. जिससे उनके जिस्म का हर एक एंड और हर एक कटाव नुमाया हो रहा था. मैं तो बस आँखे फाडे उनको देख रहा था. दीदी ने मुझे अपनी चूचियों को घूरते हुवे पाया तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और उन्होंने कहा.



सरिता दी- आँख खुली या और दिखाऊ.

इतना कहकर दीदी थोड़ा सा और झुक गई जिससे उनकी t-shirt से उनकी चूचिया और ज्यादा दिखने लगी थी. मेरी उनकी चूचियों को देखकर और बड़ी बड़ी हो गई. मैं अपने होंठो पर जीभ फिरने लगा तो दीदी ने बगल की टेबल पर रखा गिलास उठा कर मुझे दिया और बोली.

सरिता दी- अब लगता है तेरी आँख खुल गई है और तुझे प्यास भी लग रही है तो ये पानी पि ले.

मैं उनके हाँथ से पानी का गिलास लेकर पिने लगा और उनकी चूचियों को देखता रहा. मैंने पानी पि कर गिलास दीदी को वापस किया तो उन्होंने उसे टेबल पर रखकर मुझसे कहा.

सरिता दी- क्या अभी अगर इतनी देर तक सोता रहेगा तो फिर मुझे जिम कैसे सिखाएगा चल उठ और बता कैसे करना है.

मैं रात में लोअर hi पहनकर सो गया था. एक तो सुबह वैसे भी लुंड ेरेक्ट रहता है और ऊपर से दीदी की गदराई चूचियों को देखकर मेरा लुंड एकदम खड़ा हो चुक्का था. अब मुझे सरिता दीदी से कोई शर्म थी नहीं इसलिए मैं अपने बिस्टेर से उठ गया और एक जोरदार अंगड़ाई ली. जिससे मेरे लुंड लोअर से और बहार की तरफ दिखने लगा. दीदी की नज़र जब मेरे लुंड पर पड़ी तो वो उसे hi देखने लगी. दीदी अपलक मेरे लुंड को देखे जा रही थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- अब अगर देखकर दिल भर गया हो तो शुरू करे.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई और शुरू करने के लिए हाँ में गार्डन हिला दी. तो मैंने सबसे पहले उन्हें दुम्ब्ले उठाने के लिए कहा और एक दुम्ब्ले अपने हाँथ में लेकर उन्हें कैसे करना है ये बताने लगा. उसके बाद दीदी दुम्ब्ले उठाने लगी और मैं दूसरी एक्सेरसीज़े करने लगा. मैं उनकी चूचियों को देखते हुवे अपनी एक्सेरसीज़े करता रहा. दीदी दुम्ब्ले से एक्सेरसीज़े करते हुवे मरे खड़े लुंड को देखे जा रही थी. फिर मैं अपनी प्रैक्टिस बंद करके दीदी के पास आया और उनके पीछे कड़े होकर दीदी से बोलै.

मैं- क्या कर रही हैं दीदी. आपकी कलाई बेंड हो रही है. ऐसे में कलाई में मोच आ सकती है. रुकिए मैं आपकी मदद करता हूँ.

उसके बाद मैंने पीछे से hi हाँथ बढाकर दीदी के दुम्ब्ले हाँथ को पकड़ा और उन्हें बताने लगा. फिर धीरे से मैं दीदी के साथ पीछे से सत्कार खड़ा हो गया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड में टच होने लगा. मेरा लुंड दीदी की गांड में टच होने पर दीदी के जिस्म हल्का सा हिला और दीदी पीछे मुड़कर मेरी आँखों में देखने लगी. कुछ देर मेरी आँखों में देखने के बाद उन्होंने वापस आगे देखते हुवे दुम्ब्ले से प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया. दीदी के कुछ न बोलने से मैं दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया. जिससे मेरे लुंड दीदी की गांड की दरार में घुसने लगा तो दीदी ने अपनी कमर थोड़ा सा आगे करके गार्डन घुमाकर मेरी आँखों में देखा और फिर अपनी कमर पीछे कर ली. फिर मैंने दीदी की कलाई पकड़ी और उन्हें समझने लगा.

मैं- दीदी आपको अपनी कलाई को तनिक भी ढील नहीं देनी है नहीं तो इसमें मोचा आ सकती हैं.

इतना बोलकर मैंने अपना हाँथ दीदी के हाँथ से हटाकर उनके कंधे पर रख दिया और अपने होंठ को उनकी गार्डन पर रख दिया. मगर दीदी ने कुछ नहीं कहा और वो प्रैक्टिस करती रही. जब दीदी ने कुछ नहीं बोलै तो मैं उनसे पूरा चिपक गया और अपनी कमर को थोड़ी तेज़ी से उनकी गांड पर चिपकाया. जिससे मेरा लुंड पूरा दीदी की गांड की दरार में घुस गया. और मैंने एक चुम्बन दीदी की गार्डन पर कर दिया. जिससे दीदी दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकली. और दाम्ब्ले निचे गिर गया.



सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssssssssss.

मैं- क्या हुवा दीदी-

सरिता दी- लगता है मेरी कलाई बेंड हो गई और दाम्ब्ले निचे गिर गया.

मैं- ऐसे एक्सेरसीज़े करेंगी तो कैसे सीखेंगी. चलो दूसरी वाली बताता हूँ उसको करिये.

फिर मैंने दीदी को दंड पेलने वाली कसरत बताने लगा की कैसे करना है. दीदी को बताकर मैं जाकर दीदी के सामने बीएड पर बैठ गया. दीदी के एकदम पैरलर झुकने के कारन दीदी की चूचिया अंदर तक मुझे नजर आ रही थी. मैं दीदी की चूचिया देख रहा था और दीदी मेरी आँखों में देखकर वो कसरत कर रही थी. कुछ देर दीदी की चूचिया देखने के बाद मैं दीदी के पास गया और उनसे बोलै.



मैं- आप ये एक्सेरसीज़े तो ठीक कर रही हैं लेकिन आपके फिनिशिंग में कुछ कमी नजर आ रही है. आप अगर कहिये तो मैं आपकी हेल्प कर दूँ.

सरिता दीदी- ठीक है.

दीदी के इतना बोलने के बाद मैं उनकी कमर के पास आकर अपने पेअर को क्रॉस करके उनके दूसरी तरफ रख लिया. अब दीदी मेरे दोनों पैरो के बिच में थी. फिर मैं झुका और दीदी की चूचियों के ठीक निचे अपनी एक बांह दाल दी और एक हाँथ उनकी पीठ पर रख दिया. और दीदी को प्रैक्टिस करने लगा. थोड़ी देर तक मैं केवल उन्हें समझाता रहा. फिर मैंने अपने हाँथ को मूवमेंट दिया और दीदी की पीठ पर अपने हंट को फेरने लगा. जो बांह दीदी की चूचियों के निचे थी उसकी अंगुलियों से मैं दीदी की चूचियों के साइड से सहलाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने मैंने अपने पेअर को उठाकर एक साइड में कर लिया और अपना पीठ वाला हाँथ सरकते हुवे उनकी गांड की तरफ बढ़ने लगा. मैंने निचे से अपनी बांह को थोड़ा बहार खींचा जिससे मेरी हथेली दीदी की एक चीची के सामने आ गयी. दीदी अपनी प्रैक्टिस कर रही थी और मेरे हाँथ की हर मूवमेंट को महसूस कर रही थी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- आप एकदम ठीक कर रही हैं दीदी. आपको कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने रूककर मेरी तरफ देखा. उनकी साँस तेज़ चल रही थी. उनकी आँखे शुर्क हो गई थी. कुछ देर मेरी तरफ देखने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- नहीं अभी मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

दीदी के इतना बोलते hi मैंने अपनी हथेली दीदी की चूचियों और पीठ वाला हाँथ दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिया. मेरा हाँथ दोनों जगह महसूस कर दीदी का शरीर कैंप गया. वो कुछ सेकंड तक रुकी और फिर से प्रैक्टिस करने लगी. कुछ देर हाँथ ऐसे रखने के बाद मैंने अपने दोनों हांथो को मूवमेंट दी मैंने दोनों हांथो की हथेली से दीदी की चुकी और गांड दबाने लगा और अपना सर झुककर उनके कंडे पर अपना होंठ रख दिया. दीदी का शरीर मेरे इस हरकत पर मचल गया. और एक sssssssssssssss की आवाज़ उनके मुंह से निकल गई. कुछ देर तक दीदी की चुकी और गांड को हलके हलके दबाने के बाद मैंने दीदी की गांड और चुकी को अपनी हथेली में भरा और थोड़ा तेज़ी से दबा दिया और जीभ निकल कर उनकी गार्डन को चाट लिया. दीदी के मुंह से एक सिसकारी युक्त चीख निकल गई.



सविता दी- haaaaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeee aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ाभीईई. मैं ठीक से कर रही हूँ न.

मैं- हाँ दीदी आप बहुत अचे से कर रही हैं. अगर आप इसी तरह मन लगाकर अपनी प्रैक्टिस करती रही तो बहुत जल्द आप सिख जाओगी.

दीदी फिर से अपनी प्रैक्टिस करने लगी और मैंने फिर से उनकी गांड और चुकी को मुठी में भरकर और तेज़ी से दबा दिया. और उनकी गार्डन को मुंह में भर कर खींचकर छोड़ diya.jisase प्पआआआआ की आवाज़ निकली. जिसे दीदी सहन नहीं कर पाई और धम्म से जमीन पर लेट गई और दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई.

सरिता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मी aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmaaaaaaaarrrrrrrrrrr गाआआआईईईई.

मैं- क्या हुवा दीदी.

सरिता दी- वो कुछ नहीं. मेरा बैलेंस अचानक बिगड़ गया और मैं जमीन पर गिर गई.

दीदी की सांसे एकदम फूल चुकी थी. चेहरा लाल हो गया था. नाक फूल पाचक रही थी. और आँखे नशीली हो गई थी मैं उठकर उनके सामने आकर बैठ गया. वो अभी लेती थी लेकिन उन्होंने अपने सर को ऊपर उठाकर मुझसे बात कर रही थी. जिसके कारन उनकी चुकी मुझे अंदर तक दिखाई दे रही थी. उनके सामने बैठने के कारन मेरा लुंड ठीक उनकी सामने लोअर में झटके मर रहा था जिसे दीदी बड़े गौर से देख रही थी. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी उतर कड़ी हो गई और मेरे लुंड को देखते हुवे बोली.



सरिता दी- अब मैं जा रही हूँ. और प्रैक्टिस बाद में करेंगे.

इतना कहकर वो निचे चली गई और मैं फ्रेस होने बाथरूम चला गया. जब मैं फ्रेश होकर निचे आया तो मां पापा, महिषा और सविता दीदी हॉल में बैठे थे. मैं थोड़ी देर उनके पास बैठा फिर किचन में चला गया. वह पर सरिता दीदी नाश्ता बना रही थी. मैं जाकर उनके पीछे चिपक कर खड़ा हो गया. जिससे दीदी चौक गई. और तुरंत पलट कर कड़ी हो गई. जब मेरी तरफ देखा तो शांत हो गई और बोली.

सरिता दी- अरे तू किचन में. कुछ काम था क्या.

मैं- हाँ दीदी मैं आपका hi काम करने आया हूँ.

सरिता दी- मेरा कौन सा काम.

मैं- अरे दीदी मतलब ये की मैं आपकी हेल्प करने आया हूँ.

सरिता दी- अब बहाना बनाना छोड़ और सीधे सीधे ये बता की तू यहाँ किसलिए आया है.

मैं उनकी आँखों में देखते हुवे उनकी चूचियों पर नज़र गदा कर उनसे कहा.

मैं- दीदी मुझे प्यास लगी है

सरिता दी- (मेरी आँखों में देखते huwe)to पि ले न

मैं- तो पीला दो न( उनकी चूचियों की तरफ देखते हुवे.)

ये सुनकर दीदी ने जाकर फ़रीज़े से पानी लेकर मुझे दिया और हँसते हुवे कहा.

सरिता दी- लो पि लो

मैं- क्या दीदी आप भी संतरे का लालच देखर पानी पीला रही हैं.

सरिता दी- अच्छा अब तू जा और मुझे काम करने दे.

मैं किचन से बहार आकर सबके साथ बैठ गया. थोड़ी देर बाद नाश्ता करके मां पापा जॉब पर चले गए. मैं भी अपने कमरे में तैयार होने के लिए गया. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी झाड़ू लगाने के लिए आई. आज उन्होंने और भी डीप गले का शट पहना हुआ था जिसमे से उनकी ऑलमोस्ट निप्पल तक चूचिया बहार दिख रही थी. दीदी ने कमरे में आकर झाड़ू निचे रख दिया और मुझसे कहा.



सरिता दी- अभी तुम अपने कमरे की ठीक से सफाई भी नहीं कर पते देखो तो कितने जले लगी हुवे हैं ऊपर.

मैं- मैं वह तक पहुंच नहीं पता इसलिए साफ नहीं करता उसे.

सरिता दी- चल ठीक है मैं आज उसे साफ़ कर देती हूँ. चल तू मुझे उठा कर ऊपर कर तो मैं उसे साफ़ कर दू.

उनकी बात सुनकर मैं बहुत खुश हुवा की चलो इसी बहाने फिर से दीदी के जिस्म को छूने का मौका मिलेगा. लेकिन मैंने बहाना बना कर कहा.

मैं- मुझे मरना थोड़ी hi है. इतनी मोती भैस जैसी हो गई हो पता चला अगर मेरे ऊपर गिर गई तो मेरा तो ऊपर का टिकट काट jaega.(maine ये बात उनकी चूचियों को देखकर हस्ते हुवे कही)

सरिता दी- तू न अभी अब मार खायेगा मुझसे. बता मुझे कहा से मैं तुझे मोती लग रही हूँ.

मैं- रहने दो दीदी. अगर मैं बताऊंगा तो आप नाराज़ हो जाओगी. वैसे भी आप बहुत जल्दी नाराज़ हो जाती हो.

सरिता दी- अब तो तुझे बताना hi पड़ेगा. नहीं तो तू मुझसे आज मार खायेगा.

मैं- ये तो अजीब जबरदस्ती है. बताऊ तो आप नाराज़ हो जाओ और न बताऊ तो मुझे मारो

सरिता di-Achha ठीक है नहीं नाराज़ होती. प्रॉमिस. अब तो बता.

मैं- ऐसे नहीं बताऊंगा. छू कर बताउगा.

सरिता di-(mujhe आँख दिखाकर) ये तो गलत है. फिर भी चलो ठीक है छूकर hi बता दे.

ये सुनकर मैं दो राउंड दीदी के गोल गोल चक्कर लगाया और फिर जाकर दीदी के पीछे सत्कार खड़ा हो गया. दीदी को इस क़यामत रूप को देखकर मेरा लुंड पहले hi खड़ा हो गया था. दीदी की पीछे सत्कार खड़े होने से मेरा लुंड दीदी की गांड पर टच होने लगा. दीदी वैसे hi कड़ी रही. बस उनकी साँस थोड़ा तेज़ चलने लगी थी. कुछ देर ऐसे खड़ा रहने के बाद मैंने दीदी के कंधे पर हाँथ रख दिया और उनसे एकदम चिपक कर खड़ा हो गया. मेरा लुंड दीदी की गांड की पतों के बिछ घुस गया. मेरे हाँथ और लुंड के स्पर्श से दीदी के मुंह से aaaaaassssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

मैं दीदी के पीछे खड़ा होकर अपने होंठो को दीदी के कान के पास लाया और एक गहरी साँस लेकर छोड़ दिया. मेरे साँस की गर्मी दीदी अपनी गार्डन पर महसूस कर रही थी. मैंने दीदी के कण में सरगोशी करते हुवे कहा.

मैं- बताऊ दीदी की आप कहा कहा से मोती हो गई हैं.

सरिता दीदी- (भरी साँस लेते हुवे) हां अभी बताओ.

मैं –(उनकी गार्डन को चूमकर) आप नाराज़ तो नहीं होंगी न.

सरिता दी- आआआहहहहहहह नहीं होगी नाराज़.

फिर मैंने अपने हाँथ दीदी के कंधे से सरकते हुवे उनके पेट पर रख दिया और उनके पेट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ पेट पर पड़ते hi दीदी की aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल गई.





इसके आगे की कहानी अगले भाग में..


 
अपडेट-68



मेरा हाँथ अपने पेट पर महसूस करते hi दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. उन्होंने पीछे मुड़कर कुछ देर मुझे देखा फिर अपनी गर्दन सीधी कर ली लेकिन बोली कुछ नहीं. फिर मैंने अपना हाँथ ऊपर बढ़ाते हुवे उनकी दोनों चूचियों पर रख दिया. जिससे दीदी के शरीर में झोझूरे दौड़ गई. कुछ देर मैंने हाँथ को उनकी चूचियों पर वैसे hi रहने दिया और और अपने होंठो से दीदी के कंडे और गार्डन पर किश करने लगा. कुछ देर किश करने के बाद मैं उनकी गार्डन को चाटने लगा. कुछ देर गार्डन को चाटने से दीदी और तेज़ तेज़ साँस लेने लगी. दीदी अब गरम हो रही थी. मैंने अपना मुंह दीदी के कण के पास लेजाकर पूछा.

मैं- आप जानना चाहती हो की आप कहा से मोती हो गई हो.

मेरे ऐसा पूछने से दीदी ने अपनी गार्डन पीछे घुमाई और मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखे इस समय वासना से सुर्ख लाल हो गई थी. उनके नथुने फूल पाचक रहे थे. गलो पर लाली आ गई थी. मैं भी दीदी को hi देख रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे उखड़ी सांसो से कहा.

सरिता दी- हाँ ममैं ज्जाननाआआ चाकहति हूँ.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके गाल पर अपनी जुबान फेर दी तो दीदी ने अपना सर सीधा कर लिया. मैं फिर से दीदी की गार्डन को किश करने लगा. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने दीदी की दोनों चूचियों को मुठी में भरा और जोर से दबा दिया और पीछे से लुंड की उनकी गांड में दबा दिया. जिससे दीदी के मुंह से चीख भरी सिसकी निकल गई.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy mmmmuummmmmmmmmmyyyyyyyyyyy. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं- आप यहाँ से बहुत मोती हो गई हैं.

इतना बोलकर मैंने दीदी को पलटकर अपनी तरफ कर लिया और उनकी आँखों में देखने लगा. कुछ देर मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़र निचे कर लिया और मेरे खड़े हुवे लुंड को देखने लगी. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने फिर से मेरी आँखों में देखने लगी. अब तक दीदी की आँखे माधोसी में लाल हो गई थी. थोड़ी देर दीदी को देखने के बाद मैंने उनकी कमर में हाँथ डाला और अपनी तरफ खींच लिया जिससे दीदी की पहाड़ जैसी चूचिया मेरे साइन में डाब गई औरर मेरा लुंड सीधे दीदी की जांघो पर टकराया जिससे दीदी के मुंह से दर्द भरी चीख निकल गई

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभी.

मैं- क्या हुवा दीदी

सरिता दी- कोई इतनी तेज़ी से खींचता है क्या. मुझे कितना दर्द हुआ.

मैं- (हँसते हुवे) सॉरी दीदी. अभ धीरे से खीचूंगा.

दीदी मेरी बात सुनकर मेरे साइन पर मुक्का मरने लगी. और मुझसे छूटने की कोसिस करने लगी. लेकिन मैंने उन्हें नहीं छोड़ा और अपना हाँथ उनकी पीठ से सरककर उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया. मेरा जैसे hi मैंने अपना हाँथ उनकी गांड पर रखा दीदी के सरीर ने एक झटका खाया. मैं कुछ देर उनकी गांड को सहलाता रहा. उसके बाद मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे उनकी दोनों गांड को मुठी में भरा और जोर लगाकर मसल दिया. दीदी दर्द से कराह उठी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy mmmmuummmmmmmmmmyyyyyyyyyyy. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. ाबबबबबबभीइइइइइ aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. दर्द होता है.

मैं- आप यहाँ से भी मोती हो गई हैं.

उसके बाद मैंने दीदी को छोड़ दिया. दीदी की सांसे बहुत तेज़ चल रही थी. जिससे उनकी पहाड़ जैसी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी और मैं उनकी ऊपर निचे होती चूचियों को देखने लगा. कुछ देर उनकी चूचियों को देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- अब तो आपको पता चल गया न की आप कितनी मोती हो गई हैं.

सरिता di-(nazre झुककर) हूउउउउउ.

मैं- (हँसते हुवे) तो आप खुद सोचिये दीदी की अगर आप अपने इतने मोठे मोठे और बड़े बड़े सामान सहित मेरे ऊपर गिर गई तो मेरे तो ऊपर का टिकट काट जाएगा न.

सरिता दी- (मेरी बात सुनकर शरमाते हुवे) अभी तू बहुत कमीना हो गया है. बहन से कोई ऐसी शरारत भला कोई करता है क्या.

मैं- औरो का तो पता नहीं दीदी लेकिन मैं अब ऐसी शरारत आपसे रोज करूँगा.

सरिता दी- अच्छा ये सब छोड़ मुझे ऊपर उठा तो मैं जला चाफ कर देती हूँ.

फिर मैंने दीदी के सामने आकर खड़ा हो गया और उनकी कमर में हाँथ डालकर उन्हें अपने से सत्ता लिया. और उनकी आँखों में देखने लगा. उनकी आँखों में देखते हुवे मैंने दोनों हांथो से उनकी कमर पकड़ी और उन्हें ऊपर उठाने लगा. दीदी को मैंने अभी इतना उठाया था की उनकी चूचिया मेरे मुंह के पास थी. मैं दीदी को लेकर वैसे hi कहा रहा और अपने सर को दीदी की चूचियों पर दबाने लगा. किछ देर बाद मैंने अपने होंठ को चूचियों के क्लीवेज में रख दिया और चूमने लगा. मेरे होंठो का स्पर्श अपनी चूचियों के पास पाकर दीदी तड़प गई. उनके जिस्म में एक आनंद की लहार दौड़ गई. मैं उनकी क्लीवेज को चुम रहा था और बिच बिच में जीभ निकल कर उनके क्लीवेज को चाट भी रहा था. कुछ देर चाटने के बाद मैंने उनकी चूचियों के शट से बहार नज़र आ रहे हिस्से को अपने मुंह में भर लिया और दांतो से दबा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल gayi.aur वो मेरी तरफ देखते हुवे सिसक कर बोली.

सरिता दी- AAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh अब्बब्बबभीइइइइइ hhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. अब और ऊपर uthhhhhaaaaaaaaaa हाँथ नहीं पहुंच रहा है.

मैंने फिर अपने एक हाँथ को दीदी की कमर से हटाकर उनकी गद्देदार गांड पर रखा और उससे दीदी को सहारा देखर दूसरा हाँथ भी कमर से उठकर उनकी गांड पर रखा और उनकी ऊपर उठाने लगा. अब दीदी का पेट मेरे मुंह से सामने था.

मैंने अपने होंठो को दीदी के पेट पर शट के ऊपर से रख दिया और चूमने लगा और अपने हंथ दे दीदी की गांड को दबाने लगा. कुछ देर चूमने के बाद मैंने अपनी नज़र ऊपर उठाई तो दीदी मुझे hi देख रही थी. उनकी आँखों में एक खुमारी. सांसे तेज़ी से चल रही थी. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- और कितनी देर लगेगा दीदी. साफ हो गया की नहीं.

सरिता दी- बस इतनी hi स्टैमिना है तुझमे. थोड़ी देर में hi थक गया. अभी और समय लगेगा साफ करने में.

मैं- दीदी अभी आपने मेरा स्टैमिना देखा hi खः है. आप एक बार मौका तो दो फिर आपको दिखता हूँ की मुझमे कितना स्टैमिना है.

सरिता दी- चल चल बड़ा आया स्टैमिना वाला. मुझे उठाकर थोड़ी देर में hi थक गया और स्टैमिना की बात करता है.

मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनकी गांड को मसल दिया. जिससे दीदी के मुंह से sssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. मैंने दीदी से कहा.

मैं- आप के ये मोठे मोठे मतलब आप इतनी मोती हो और आपका वजन मेरे हाँथ के ऊपर हैं तो थोड़ी तकन तो लगेगी hi न.

सरिता दी- मैं इतनी भी मोती नहीं हूँ. और इसीलिए तो मैंने जिम करना शुरू किया है की अगर थोड़ा बहुत मोती हो गई हूँ तो वो काम हो जाये.

दीदी से बात करने के बाद मैंने फिर से दीदी के पेट को चूमने लगा. पेट चूमते चूमते मैं थोड़ी थोड़ी देर में उनके पेट को मुंह में भरकर काट लेता था. जिससे दीदी ssssssssssssssss करने लगती थी. पेट चूमते हुवे मैं अपने हाँथ से दीदी की गांड भी दबा रहा था. कुछ देर दीदी की गांड दबाने के बाद मैंने उनकी गांड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और डैम लगाकर दबा दिया. जिससे दीदी मेरे सर को अपने हांथो से पकड़कर अपने पेट में दबा लिया और चीख पड़ी.



सरिता दी- ooooooooohhhhhhhhhhhhhooooooohhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हहह heeeeeeeyyyyyyyyyy raaaaaaaaaammmm oooooooooohhhhhhhhhhhhhhh mmuuuuummyyyyyyyyyyyyyyy मररररररर gaaaaaaaaaaiiiiii. दद्धिरररररे ममममरे भाआईईई. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़िड़ीएएएए . aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

फिर मैं अपने एक हाँथ को उनकी गांड से सरका कर आगे की तरफ ले गया और उनकी सलवार के ऊपर से उनकी छूट को टटोलने लगा. जिससे दीदी मचलने लगी और अपने शरीर को इधर उधर करने लगी. ये देखकर मैंने अपने हाँथ वापस खींच लिया क्योंकि इससे दीदी गिर भी सकती थी. मैंने फिर से अपने हथेली में दीदी की गांड को थम लिया और पूरी ताकत से दबा दिया और उनके पेट को मुंह में भरकर डाट काट लिया. दीदी ने पूरी ताकत से मेरे सर को अपने पेट में दबा लिया और मुंह से जोर से आनंद युक्त चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अब्बभीइइइइइइ Aaahhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaammyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh. मुझहीईईई सँभाललललल bhaaaaaaaiiiiiiiiii मैईयीं गगगगगरररर जाआआआंगगगगगगीयी. Aaaaaaaaahhhhhhhhhhh.

मैं- आपको क्या हुआ दीदी. आप चीखी किसलिए.

सरिता दी- मेरा शरीर दर्द करने लगा है इसलिए चीख निकल गई. अब मुझे निचे उतर.

इतनी देर से दीदी के साथ मस्ती करने के कारन मेरा लुंड एकदम तनकट तम्बू बन गया था जो लोअर टैंकर बहार निकला हुवा था. मैंने एक बार फिर दीदी की गांड को जोर से दबा दिया दीदी फिर aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कर उठी. उसके बाद मैंने दीदी को निचे उतरने लगा. निचे उतारते हुवे दीदी की चूचिया मेरे मुंह के सामने आ गयी तो मैंने दीदी को वही रोक लिया और दीदी की तरफ देखा. दीदी एकदम गरम हो गई थी और हलकी हलकी मदहोश भी हो रही थी.

मैं दीदी की आँखों में ेखते हुवे अपने होंठ दीदी की चूचियों के खुले भाग पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी बस मेरा सर पकड़े sssssssssssssssssssssssss ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कर रही थी.



कुछ देर तक चूमने के बाद मैंने उसपर जुबान फिरनी शुरू कर दी. दीदी की आँखे मस्ती से बंद होने लगी. कुछ देर बाद मैंने अपनी जुबान दीदी के क्लीवेज में अंदर डालकर चाटने लगा. दीदी बस मेरे सर को पकड़े मस्ती में ओह्ह्ह्हह्हह ssssssssssssss आआआआअह्ह्ह्ह किये जा रही थी. फिर मैंने उनकी चूचियों के खुले भाग को डेप्ने मुंह में भर लिया और उनकी गांड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर चूचियों पर दांत करा और गांड को जोर से मसल दिया. जिससे दीदी चीख निकल गई.

सरिता दी- haaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ररररररममममममममम अभीइइइइइइइ मेरी भाआआआईई. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh माहाअररररररररर gaaaaaaaaaaaai maiiiiiinnnnnnnnnn aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh.

मैंने सरिता दीदी की सिसकी की परवाह न करते हुवे फिर से उनकी चूचियों के ऊपरी भाग को दांतो से काट लिया और दोनों हांथो से उनके गांड को जोर लगा कर मसल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी

सरिता दी- haaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ररररररममममममममम अभीइइइइइइइ मेरी भाआआआईई. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh माहाअररररररररर gaaaaaaaaaaaai maiiiiiinnnnnnnnnn aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh. डड्ढीएडीईई मीटीरे ब्बभआआआआईई डीईईडी.

फिर मैंने दीदी को निचे उतर दिया और उनके चेहरे की तरफ देखने लगा. दीदी की आँखे अभी भी बंद थी. दीदी का चेहरे लाल हो गया था और होंठ कैंप रहे थे. कुछ देर तक मैं दीदी को देखता रहा फिर दीदी को आवाज़ दी.

मैं- दीदी क्या हो गया है आपको आँखे खोलो अपनी.

दीदी ने मेरी आवाज़ सुनकर आँखे खोली और मेरी तरफ देखा. मुझसे नजर मिलते hi दीदी ने शर्माकर अपनी नज़ारे निचे झुका ली. लेकिन नज़र निचे करने पर दीदी को मेरा खड़ा लुंड नज़र आने लगा. कुछ देर तक मेरे लुंड को देखती रही और अपनी उखड़ी सांसो को काबू करती रही. कुछ देर के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- अब मैं जा रही हूँ और काम बाद में कर दूंगी

मैं- जाने से पहले एक झप्पी नहीं डौगी दीदी. आखिर इतनी देर आपके मोठे मोठे. मतलब मोती दीदी का वजन उठाया है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुरा दी. और मुझे एक झप्पी दाल ली. मैंने भी तुरंत अपना एक हाँथ दीदी की गांड पर रखा और एक हाँथ दीदी की चुकी पर रख और अपना मुंह उनके कान के पास लेजाकर कहा.

मैं- वैसे दीदी आपके हैं तो बहुत मोठे मोठे, लेकिन आज आपको गॉड में उठाकर मज़ा आ गया. काश ऐसा मौका रोज़ रोज़ मिलता.

और इतना कहकर मैंने ुकि गांड और उनकी चुकी एक साथ जोर से दबा दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.



सरिता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मामयिययियीय hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Maaaaaaaaaarrrrrrrrrrrr gaaaaaaaaaaaai माहाऎणंन्न.

मेरे इस हमले से दीदी ने चीखते हुवे मुझे धक्का देखर पीछे किया और मेरे कमरे से निकल कर निचे चली गई.



इसके आगे की कहानी अगले भर में..
 


अपडेट-69





सरिता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मामयिययियीय hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Maaaaaaaaaarrrrrrrrrrrr gaaaaaaaaaaaai माहाऎणंन्न.



मेरे इस हमले से दीदी ने चीखते हुवे मुझे धक्का देखर पीछे किया और मेरे कमरे से निकल कर निचे चली गई.



अब आगे



सरिता दीदी के निचे जाने के बाद मैं भी बाथरूम में गया. अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत किया. और तैयार होकर अपने काम पर निकल गया. वह से 1 हॉर्स में अपना काम समेत कर मैं घर चला आया. मैंने बेल्ल बजे तो मनीषा ने दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलकर वो तुरंत अपने कमरे में चली गई. जब मैं घर में एंटर हुवा तो उस समय हॉल में कोई नहीं था. अभी मैं ऊपर जाने के लिए सीधी के पहले स्टेप पर पेअर रखा hi था की बगल वाले बाथरूम का दरवाज़ा खुला और उसमे से सरिता दीदी बहार निकली.



दीदी अभी अभी नहाकर बहार आई थी. उन्होंने अपने जिस्म पर एक टॉवल लपेटा हुवा था जो उनकी आधी चूचियों से शुरू होकर उनकी गांड तक आता था. जब दीदी ने मुझे देखा तो वही रुक गई और मेरी तरफ एक ऐडा से देखने लगी.



मैं बस दीदी की अधनंगी चूचियों के देखे जा रहा था. दीदी के बालो से पानी उनके कंधो पर गिरकर निचे सरकते हुवे उनकी चूचियों की घाटी में गम हो रहा था. मैं दीदी के इस अनुपम सौंदर्य को अपनी आँखों से पि रहा था. मैंने एक नजर उनकी चूचियों से उठाकर दीदी के चेहरे की तरफ देखा तो दीदी मुस्कुरा रही थी. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.

सरिता दी- ऐसे आँखे पहाड़ पहाड़ कर क्या देख रहा है. कभी कोई लड़की नहीं देखि क्या.

मैं- लड़की तो बहुत देखि है. लेकिन ऐसी लड़की कही नहीं देखि दीदी. आप इतनी ज्यादा सुन्दर हैं की मैं आपको देखने के बाद अपनी पलके झपकना भूल गया हूँ.

सरिता दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई और शरमाते हुवे बोली

सरिता दी- चल हैट मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ. जितनी तू तारीफ कर रहा है.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ दीदी मैंने आप के जैसी खूबसूरत लड़की आज तक नहीं देखि. आप खूबसूरत भी हो और……………………… (रुक गया)

सरिता दी- खूबसूरत भी हूँ और. आगे बोल न.

मैं- अरे दीदी. कुछ नहीं जाने दीजिए न.

सरिता दी- अरे बता न. शर्मा क्यों रहा है.

मैं- दीदी वो आप न वो खूबसूरत होने के साथ साथ बहुत हॉट भी हैं.



सरिता दीदी- चुप कर बेशरम अपनी बहन को हॉट बोलता है.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ. आप बहुत खूबसूरत और हॉट हो. अगर आप मेरी बहन न होती हो मैं आपको apni………….(ruk गया)

सरिता दी- अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता तू.

मैं- कुछ नहीं दीदी. आप बहन हो न मेरी. वो गलती से निकल गया मुंह से.

सरिता दी- हाँ पता है तेरे मुंह से सब गलती से निकलते है. अच्छा बता न अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता.

मैं- जाने दो न दी. आप नाराज़ हो जाओगी.

सरिता दी- मैं नाराज़ नहीं होउंगी तू बोल.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड बना लेता और बहुत प्यार करता.

सरिता दी- चल हैट बेशरम. तू कितना कमीना हो गया है अपनी बहन को गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है.

मैं- अगर आप मेरी बहन न होती तो पक्का आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनता. लेकिन अगर आप मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हैं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

सरिता दी- (मुस्कुराते हुवे) चल हैट बेशरम तेरी गिर्ल्फ्रेंड बने मेरी जुटती.

इतना कहकर वो कपडे चेंज करने के लिए कमरे में जाने लगी. मेरा लुंड जो अब तक दीदी की गरम जवानी देखकर पंत में तन गया था मैंने उसपे अपना हाथ रख दिया और दीदी के मटकती गांड को देखने लगा. दरवाज़े पे पहुंचकर दीदी ने मेरी तरफ dekha.unki नज़र मेरे लुंड पर चली गई. उन्होंने मेरे लुंड को देखते हुवे अपने टॉवल को दोनों तरफ से पकड़का फैला दिया. और हंसती हुई कमरे में चली गई. मैं बस आँखे फाडे लुंड को सहलाते हुवे उनकी मटकती गांड को देखता रहा.



कुछ देर तक वही खड़े रहने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और अपना काम करने लगा. अपना काम फिनिश करने के बाद मुझे सविता दीदी का ध्यान आया. मैंने आज सुबह से उनसे बात नहीं की थी. तो मैंने अपना फ़ोन निकला और सविता दीदी को मश्ग किया. थोड़ी देर बाद रपल्य आ गया.

मैं- Hello दीदी. कैसी हो.

सविता दीदी- मैं ठीक हूँ. अभी टाइम मिला तुम्हे मुझको याद करने का.

मैं- सॉरी सविता. वो सुबह से बिजी था इसलिए समय नहीं मिल पाया.

सविता दीदी- चल कोई बात नहीं. और क्या कर रहे हो.

मैं- कुछ नहीं सविता. तुम्हारे पास आ जाऊ.

सविता दी- नहीं. अभी सरिता और मनीषा दोनों घर में हैं और तुम किओ न कोई उलटी सीधी हरकत जर्रूर करोगे. अगर उन्होंने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी.

मैं- कुछ नहीं करूँगा सविता. बस तुमको देखना था.

सविता दी- तू समझा कर अभी. किसी ने ने देख लिया तो मेरी क्या इज़्ज़त रहेगी फिर.

मैं- अच्छा ठीक है. तो रात में आ जाना फिर ऊपर.

सविता दी- मन तो मेरा भी है लेकिन अभी कल पकडे जाने से बचे थे, तो कैसे औ.

मैं- आ जाना सविता और आते समय सीधी वाला गेट बंद करके आना.

सविता दी- चल देखती हूँ. क्या हो सकता है.

मैं- तुमको देखने था तो अपनी फोटो भेजो न सविता.

सविता दी- रात में आउंगी तब देख लेना.

मैं- रात को तो देखूंगा hi. लेकिन अभी भी देखना है. और थोड़ा उस तरह की.

सविता दी- नौगहत्य. अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद सविता दीदी ने एक फोटो भेजी. इसमें दीदी ने सदी पहनी हुई थी. ब्लाउज नहीं पहना था दीदी ने. और सदी का पल्लू ब्रा के ऊपर अपनी चूचियों पर डाला हुवा था.



मैं- ये क्या सविता. अपना पल्लू हककर भेजो न.

सविता दी- तू बहुत बदमाश हो गया है. अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे वो ब्रा में थी. ब्रा में दीदी की चूचिया एकदम पहाड़ की छोटी की तरह तानी हुई थी. मेरा तो लुंड टनटनाने लगा दीदी की चूचिया देखकर.



Main-waah सविता क्या जन्मऋ चूचिया हैं तुम्हारी. एकदम तानी हुई. इन्हे तो मैं मसल मसल कर ढीला करूँगा. देखना तुम. अच्छा एक फोटो ब्रा को उतर कर भी भेज दो.

सरिता दी- चल हैट. अब मैं कोई फोटो नहीं भेजने वाली. अब जो होना होगा वो रात में आने के बाद hi होगा. अब फ़ोन रखो मुझे कुछ काम है.

मैंने अपना फ़ोन साइड में रख दिया और सो गया. शाम को मैं सोकर उठा तो मां पापा घर आ गए थे. मैं जब हॉल में आया तो सरिता दीदी तैयार बैठी थी. मुझे देखते hi कहा.

सरिता दी- मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी. चलो चलते हैं अब.

मैं- अब 5 मिनट दीदी. थोड़ा पानी तो पिने दो.

फिर पानी पीकर मैं और सरिता दी गाड़ी में बैठकर मैदान की तरफ चलर गए. गाड़ी में बैठने के बाद दीदी ने अपना शॉल अपने जिस्म से उतर दिया. दीदी ने एक t-shirt और लेग्गी पहनी हुई थी. T-shirt से दीदी की आधी चूचिया बहार दिख रही थी. दीदी ने शॉल कार के पीछे रख दिया और मेरी तरफ देखने लगी. मैंने उनकी चूचियों के देखकर कहा.



मैं- यू अरे दम्म सेक्सी दीदी. बहुत hi खूबसूरत.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और सामने की तरफ देखने लगी. कुछ देर में हम मैदान में पहुंच गए. वह आकर मैंने दीदी को कुछ समझाया और ड्राइविंग शीट से उतर गया. दीदी ड्राइविंग शीट पर बैठ गई और कार चलने लगी. लेकिन दीदी बार बार गलतिया कर रही थी. अब ये गलती वो जानबूझकर कर रही थी या सच में उनसे गलती हो रही थी. ये नहीं पता. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- इस तरह तो आप कभी भी कार चलना नहीं सिख पाएंगी.

सरिता दी- तो क्या करू मैं. कोशिश तो कर रही हूँ मैं.

मैं- अच्छा एक काम करता हूँ. मैं ड्राइविंग शीट पर बैठ जाता हूँ और आप मेरी गॉड में बैठ जाना. उसके बाद आप कार चलना. मैं आपको बताता भी चलूँगा. कैसे चलना है और कुछ गलती होने पर संभल भी लूंगा. दीदी ने कुछ देर सोचा. उसके बाद उन्होंने हाँ कर दिया.

सरिता दी- तू ठीक कर रहा है. ऐसा hi करते हैं.

इतना कहकर दीदी ड्राइविंग शीट से उतर गई और मैं ड्राइविंग शीट पर जाकर बैठ गया. दीदी की अधनंगी चूचिया देख कर मेरा लुंड पहले से hi खड़ा था. ऊपर से ये सोचकर की दीदी मेरी गॉड में बैठेंगी. और ज्यादा तीते हो गया. मैं ड्राइविंग शीट पर बैठते टाइम अपने लुंड को अर्जेस्ट किया. और जब बैठा तो लोअर में एक तम्बू बन गया. दीदी जब मेरी गॉड में बैठने के लिए आई तो उनकी नज़र सीधे मेरे खड़े लुंड पर पड़ी. तो वो रुक गई और मेरे लुंड को देखने लगी.

दीदी के सर गाड़ी के अंदर था. और वह झुकी हुई थी. जिसके कारन उनकी ृषभरी चूचिया कपडे फाड़कर बहार आने को हो रही थी. मैं भी उनकी चूचियों के देख रहा था. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़र ऊपर उठाई तो मुझे अपनी चूचियों को देखते पाया. मैंने भी अपनी नज़र ऊपर उठाई. हम दोनों की नज़ारे मिली. कुछ देर तक मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी अंदर आई और मेरे खड़े लुंड पर बैठ गई. दीदी की गद्देदार गांड मेरे लुंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से और उनकी गांड के दरार में मेरा लुंड घुसने से दोनों के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

फिर दीदी ने कार सम्बल ली. तो मैंने उनके दोनों पेअर के ऊपर अपने पेअर रख दिए. गियर वाले हाँथ पर एक हाँथ रख दिया और स्टेरिंग पर उनके हाँथ पर अपना हाँथ रखा. फिर दीदी ने गाड़ी स्टार्ट की और चलने लगी. मैंने भी उनका सहयोग करता रहा जब मैंने देखा की दीदी अब गाड़ी संभल चुकी हैं तो मैंने स्टेरिंग और गियर वाला हाँथ उठाकर दीदी के पेट पर रख लिया और सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपने पेट पर लगते hi दीदी का शरीर लहरा गया. मगर दीदी गाड़ी चलती रही.

कुछ देर पेट सहलाने के बाद मैंने अपने दोनों हाँथ को ऊपर करते हुवे उनकी बड़ी बड़ी बहार निकली हुई चूचियों पर रख दिया. मेरा हाँथ अपनी चूचियों पर लगते hi दीदी ने एक झटके में गाड़ी रोक दी. मैंने उन्हें बचने के लिए उनकी चूचियों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. गाड़ी रुकने के बाद दीदी ने पीछे घूमकर मेरी आँखों में देखा और फिर से आगे देखने लगी. दीदी ने फिर गाड़ी स्टार्ट की और चलने लगी.

जब दीदी फिर से गाड़ी चलने लगी तो मैं उनकी चूचियों को हलके हलके दबाने लगा. मेरा लुंड दीदी की गांड पैर ठीकर मार रहा था. चूचिया दबाते दबाते मैंने अपने होंठ दीदी के कंडे पर रख दिए. मेरे होंठो का स्पर्श पाकर दीदी के मुंह से एक aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh निकल गई. कुछ देर तक चूचिया धीरे धीरे दबाने के बाद मैंने दीदी की दोनों चूचियों का अपनी हथेली में रखा और जीभ निकल कर कंधे को चाटते हुवे उनकी चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई और गाड़ी फिर से बंद हो गई.



सरिता दी- AAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh AAAbhiiiiiiiiiii oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मत कर न. ऐसी गायआदिई कैसी चलाऊंगी.

मैं- अगर मेरे कहे अनुसार आप चलेंगी तो आप हर गाड़ी की सवारी कर सकती हैं वो भी बड़े आराम से.

मेरी बात सुनकर दीदी ने चेहरा मेरी तरफ किया और मेरी तरफ देखने लगी मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे. अपनी जीभ उनके गलो पर फेरने लगा. दीदी ने अपना चेहरा घुमा लिया. तो मैंने एक हाँथ उनकी एक चुकी से हटाकर उनके चेहरे को पकड़ा और अपनी तरफ घुमा लिया. दीदी फिर से मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखे वासना के कारन सुर्ख हो गाइट hi. उनके होंठ फड़फड़ा रहे थे और साँस तेज़ी से चल रही थी. मैंने एक हाथ से उनकी चूचिय को बढ़ाते हुवे अपने होंठ बढाकर दीदी के होंठो पर रख दिया. मेरे होंठ का स्पर्श पाकर दीदी का शरीर कैंप गया और उन्होंने अपने होंठ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उनके होंठो को आज़ाद नहीं किया.



3 मिनट तक उनके होंठो को चूसने के बाद दीदी ने भी थोड़ा रिस्पांस देना शुरू किया और वो भी अब मेरे होंठ को थोड़ा बहुत चूसने लगी थी. मैं लगातार उनकी चूचियों को बदल बदल कर दबा रहा था. कुछ देर तक चूचियों को दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी t-shirt में हाँथ डालने की कोशिश की तो दीदी ने मेरा हाँथ पकड़ लिया. और मेरी आँखों में देखते हुवे न का इशारा करने लगी. फिर मैंने उनके चेहरे वाला हाँथ हटा लिया और उसे उनके पेट पर रख दिया. मेरे हाँथ हटाने के बाद भी दीदी ने अपना चेहरा आगे नहीं घुमाया.

कार अभी भी बंद hi थी. और दीदी मेरी गॉड में बैठकर मेरे होंठो को चूस रही thi.maine फिर से t-shirt के अंदर जोर लगाकर हाँथ डालने की कोशिश की और थोड़ी देर में मैं कामयाब हो गया. अब दीदी की चुकी ब्रा के ऊपर से मेरे हाँथ में थी. मैं उनकी चुकी को मसलने लगा और अपना पेट वाला हाँथ हटाकर लेग्गी के ऊपर से उनकी छूट पर रख दिया. छूट पर हाँथ पड़ते hi दीदी का शरीर अकड़ गया उन्होंने किश तोड़ी और मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रक् दिया. लेकिन मैं उनके हाँथ रखने के बावजूद दीदी की छूट को सहलाने लगा दीदी के मुंह से ssssssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी.

दीदी की लेग्गी छूट के पास एकदम गीली हो गई thi.didi की छूट ने बहुत राश छोड़ा था. थोड़ी देर तक जब उनकी छूट और चुकी के रगड़े से दीदी एकदम गरम हो गई और अपना मुंह पीछे घुमाकर मुझे किश करने लगी. मैंने भी किश में दीदी का साथ देने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की छूट और चुकी को अपनी मुठी में भरा और किश करते हुवे उन्हें जोर से दबा दिया. दीदी मादकता से चीख पड़ी.

सरिता दीदी- AAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyyyyyy ाबबबबबभीइइइइइइ oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh डीईईडी बबबबभाआईईईईई दरररररडडडडडडड हुओटाआ हैईईई.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-70



जब मैंने दीदी की चुकी और छूट जोर से दबायी तो दीदी मादकता से चीख पड़ी तो मैंने दीदी से पूछा.

मैं- क्या हुवा दीदी. आपको अच्छा नहीं लग रहा है क्या.

सरिता दी ने मेरी बातो का कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने फिर से उनको किश करते हुवे उनकी छूट और चुकी को मुठी में भरकर दबा दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.

सरिता दी- AAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मायआमम्मीयीय माआआर गाआआआई मइईईईन्न्न. ददददददहरररररररे अअअअअअभीइइइइ दाआरड़ड़ड़ड़ड़ड़ होताआआआ हीीीं.

Main-bataiye न दीदी आपको मज़ा नहीं आ रहा है क्या.

सरिता दी- (दीदी मदहोशी में बिली) तू इतनी तेज़ दबाता है. बहुत दर्द होता है. मज़ा कैसे आएगा.

मैं- (दीदी की छूट को दबाते हुवे)- लेकिन आपकी ये तो मज़े ले लेकर पानी छोड़ रही थी.

सरिता दी- एक तो तू मुझे दर्द देता है और ऊपर से मुझे परेशां भी कर रहा है.

मैं- अभी कहा दर्द दिया आपको. ये तो बस एक ट्रेलर था. पूरी फिल्म तो अभी बाकि है.

इतना बोलने के बाद मैंने अपने दन्त से दीदी के गार्डन के पास पकड़ा और जोर से दन्त काट लिया और अपने हांथो से दीदी की छूट और चुकी को जोर से मसल दिया. दीदी सिसक पड़ी और एक थप्पड़ मेरे गाल पर धीरे से मार दिया.

सरिता दी- AAAAAAAAAAaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh. तू जानवर है kyaaaaaaaaaa. क्यों मीरीईईई जाआआं lennnnnnnnnna चाहता है. मुझीऐ नाहीइ सीखना अअअअअअब गाड़ी चलना. चल अब घर चल. कोई इतनी तेज़ी से दबाता है क्या. बहनन हूँ तेरी कुछ तो रहम करना चाहिए.

मैं- अच्छा सॉरी दीदी. मैंने जानबूझकर नहीं किया वो गलती से हो gaya.(masum चेहरा बनाकर)

सरिता दी- है तू कुछ भी जानबूझकर नहीं करता सब गलती से हो जाता है न.

उसके बाद हम घर की तरफ चल पड़े. रस्ते में दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- अच्छा अभी ये बता. तेरी कोई गिर्ल्फ्रेंड है.

मैं- कहाँ दीदी कोई नहीं है. और जिसको मैं गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता हूँ वो बनती hi नहीं है.

सरिता दी- अच्छा. कौन है जो मेरे इतने प्यारे भाई को मन कर रही है.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) सरिता नाम है उसका. मुझसे 2 साल बड़ी है. लेकिन देखने में बहुत सुन्दर और सेक्सी है. इसीलिए तो मैं उसपर मर मिटा हूँ. लेकिन वो समझ hi नहीं रही है.

सरिता di(Apni तारीफ सुनकर ख़ुशी से शरमाते हुवे). हो सकता है की वो भी तेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हो लेकिन कह नहीं प् रही हो.

मैं- अच्छा अगर वो कह नहीं प् रही है तो इशारे में hi बता दी. अच्छा याद आया. (उनकी चूचियों की तरफ इशारा करके) उसके इन दोनों पर टिल है. अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती है तो वो बिना t-shirt के मुझे उनकी फोटो भेज दे. मैं समझ जाऊंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई और मुस्कुराते हुवे बहार देखने लगी. थोड़ी देर में हम घर आ गए. गाड़ी कड़ी करके मैं अपने कमरे में चला गया. खाना खाने के समय मैंने खाना खाया. कुछ देर मम्मी पापा से बात की और वापस अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर बाद मीरा वाली ईद पर मश्ग आया. मैंने रपल्य किया.

म- ही सेक्सी कैसी हो.

सरिता दी- एकदम मस्त आप बताओ.

म- मैं भी ठीक हूँ. और बताइये कुछ बात आगे बढ़ी.

मेरे ये पूछने पर दीदी ने आज दिन भर में जो कुछ भी हुवा उसको बता दिया. जो मैं जनता hi था. सब कुछ सुनाने के बाद मैंने दीदी से कहा.

म- क्या बात है यार बहुत फ़ास्ट जा रही हो. लगता है हफ्ते 10 दिन के अंदर अपने भाई से अपनी छूट छुड़वा हो लोगी.

सरिता दी- चाल हैट. वो सब तो ठीक है लेकिन एक प्रॉब्लम हो रही है मुझे.

म-( थोड़ा दर कर की कही इनका मन तो नहीं बदल गया) कैसी प्रॉब्लम.

सरिता दी- यार अभी बिलकुल जानवर है. बहुत जोर जोर से दबाता है. बहुत दर्द होता है.

म- (मेरी जान में जान आई) अरे ये भी कोई प्रॉब्लम है. इसी दर्द में तो मज़ा है. मर्द जितनी जोर जोर से गांड और चूचिया दबाता है उतना hi ज्यादा मज़ा आता है.

सरिता दी- लेकिन जो दर्द होता है उसका क्या.

म- मैं आज एक बात आपको बता रही हूँ उसे ध्यान से सुनो. अगर अपने भाई से चुदाई का असली आनंद उठाना है तो उसे रोकना मत. वो जितनी जोर से दबाएगा पहले तो आपको दर्द होगा, लेकिन आपको बहुत मज़ा आएगा. और मर्द लोग छोड़ते समय गालिया भी खूब देते हैं. तो अगर तुम्हारा भाई भी तुम्हे छोड़ते समय गालिया दे तो आप भी उसको गली देना. जिससे चुदाई का मज़ा दुगुना हो जाएगा. उसके बाद तुम खुद फील करोगी की मैंने गलत नहीं कहा.

सरिता दी- लेकिन गन्दी गन्दी गली मैं कैसे दे पाऊँगी.

म- क्यों नहीं दे पाओगी. कोई बचपन से नहीं खिख लेता. और कुछ मर्द बहुत रगड़ रगड़ के छोड़ते हैं. छोड़ते समय गांड पर चूचियों पर और गाल पर थप्पड़ भी मरते हैं. जिससे चुदाई में बहुत मज़ा आता है. तुम्हारा भाई भी इसी केटेगरी का लग रहा है. तो मैं तुम्हे पहले hi बता देती हूँ की अगर तुम्हारे भाई ने तुमको खूब रगड़ रगड़ के छोड़ा तो उससे नाराज़ मत हो जाना. क्योंकि पहले तुमको अच्छा नहीं लगेगा. लेकिन जैसे जैसे चुदाई आगे बढ़ती जाएगी. तुमको वो मज़ा आएगा जो तुमने सोचा भी नहीं होगा.

सरिता दीदी- लेकिन मैं ये सब कैसे कर पाऊँगी. ये सब मुझसे नहीं होगा. मैं गन्दी गन्दी गालिया नहीं सुन पाऊँगी. और चुड़ै के समय दर्द बर्दास्त नहीं कर पाऊँगी.

म- तुम सब कर लोगी, बस थोड़ा हौसला रखना पड़ेगा तुमको. मैं फिर से तुमको बता रही हूँ की ज़िन्दगी का जो मज़ा रफ़ चुदाई में आता है. वो नार्मल चुदाई में नहीं आता. अगर अपने भाई से चुदाई का पूरा आनंद लेना है तो जैसा मैं कहती हूँ वैसे hi करना.

सरिता दी- मुझे बहुत दर लग रहा है. कैसे कर पाऊँगी मैं ये सब.

म- (हँसते हुवे). अरे तुम्हारी छूट में तो इतनी आग लगी हुई है की तुम गधे का भी लुंड ले लो. और भाई का लुंड लेने में नखरे कर रही हो.

सरिता दी- तुम बहुत बकवास करती हो यार. मैंने कब कहा की मैं भाई का लुंड नहीं लुंगी. लेकिन वो गली वाली. मैं कैसे मैनेज कर पाऊँगी.

म- तुम सब कर लोगी. और मेरी बात मनो तो जैसा मैंने कहा है वैसे hi करो.

सरिता दी- एक बात और सुनो. अभी इंदिरेक्टली मुझसे बोल रहा था की वो मुझे अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है.

म- अरे वाह ये तो बहुत hi ख़ुशी की बात है. इसका मतलब ये है की वो तुम्हे हर हॉल में छोड़ना चाहता है. मेरी मान तो हाँ कर दे. तेरी मंज़िल और भी आसान हो जाएगी.

सरिता दी- मैं उससे ये नहीं बोल पाऊँगी की मैं उसकी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हूँ.

म- (मैं कुछ सोचने का नाटक करते हुवे). अगर सामने से नहीं बोल प् रही हो तो कोई इशारा hi दे दो जिससे वो समझ जाये की आप उसकी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हो.

सरिता दी- उसने कहा है की अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनने के लिए मान गई है तो अपनी चूचियों की फोटो भेजे ब्रा में.

म- तो देर किस बात की है. शुभ काम में देरी नहीं करनी चाहिए. मेरी मनो तो तुरंत 2-4 फोटो भेज दो. फिर देखना वो तुम्हारी छूट सूंघते हुवे तुम्हारे आगे पीछे घूमेगा.

सरिता दी- तुम बहुत कामिनी हो. यही बात अचे से नहीं कर सकती हो.

M-tumse गन्दी बात करने में बहुत मज़ा आता है.

सरिता दी- तुम तो बेशर्म थी hi मुझे भी अपनी तरह बना रही हो.

म- अगर अपनी तरह तुमको बेशर्म नहीं बनाउंगी तो तुम अपने भाई से चुड़ोगी कैसे. अच्छा अब मैं जा रही हूँ.

सरिता di-Haan जाइये. भाई जो बुला रहा होगा. हाहाहाहा. गुड़ नाईट.

उसके बाद मैंने मोबाइल मैंने मोबाइल साइड में रख दिया. अभी थोड़ी देर hi हुई थी की सरिता दीदी का मश्ग व्हाट्सप्प पर मेरे पास आया.

सरिता दी- ही अभी.

मैं- ही दीदी.

सरिता दी- क्या कर रहा है तू.

मैं- कुछ नहीं दीदी बस लेता हुआ था और मूवी देख रहा था.

सरिता दी- कही कल की तरह वो वाली मूवी तो नहीं देख रहा है. तू कितना गन्दा हो गया है अभी.

मैं- अब क्या करू दीदी. मेरी जो गिर्ल्फ्रेंड थी नताशा. वो थो मुझे छोड़कर चली गयी. तो क्या करू मैं. इसी से काम चला रहा हूँ.

सरिता दी- क्यों तेरी वो नै गिर्ल्फ्रेंड है न सरिता उसने तुझे कुछ जवाब दिया की वो तेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हैं या नहीं.

मैं- कहा दीदी. उसने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया. अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बन जाये तो मैं ये मूवी देखना बंद कर दूंगा.

सरिता दी- उसके गिर्ल्फ्रेंड बनने के बाद ये मूवी देखना क्यों बंद कर देगा तू.

मैं- क्योंकि जो कुछ देखने के लिए मैं ये मूवी देखता हूँ. वो सब मैं अपनी गिर्ल्फ्रेंड में देखूंगा.

सरिता दी- केवल देखेगा hi बस.

मैं- नहीं दीदी. अगर मेरी गिर्ल्फ्रेंड की मर्जी होगी तो मैं उसके साथ वो सब करूँगा जो इन फिल्मो में दिखाया जाता है. लेकिन ये तभी होगा जब वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनेगी.

सरिता दी- बड़ा उतावला हो रहा है गिर्ल्फ्रेंड बनाना के लिए.

मैं- अब क्या करू दीदी. वो मेरे दिलो दिमाग में बस गई है. सोते जागते बस उसका hi चेहरा नज़रो के सामने घूमता रहता है.

दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई और शर्म भी आई उनको. लेकिन आखिर ठहरी एक लड़की hi. तो अपनी और तारीफ सुनने के लिए मुझसे कहा.

सरिता di-Itni पसंद है वो तुझको. ऐसा क्या खास है उसमे जो तू उसके पीछे पागल है.

मैं - ये पूछो दीदी की क्या नहीं है उसमे. उसके बाल इतने मुलायम हैं जैसे कोई रेशम हो. उसके गाल एकदम सेब जैसे लाल लाल हैं. उसकी आँखे एकदम हिरणी के जैसी काली काली है. उनके होंठो का तो पूछो hi मत. एकदम गुलाब की पंखुड़ी की तरह मुलायम. उसकी सुराहीदार गार्डन और…………………



दीदी अपनी तारीफ सुनकर ख़ुशी से झूम उठी. लेकिन मैंने और वाक्य अधूरे छोड़े तो दीदी तुरंत बोल उठी.

सरिता दीदी- उसकी सुराहीदार गार्डन और………………….. आगे क्या है वो तो बोल.

मैं- बस हो गया दीदी. उसकी तारीफ बहुत हो गई. अब सो जाइये.

सरिता दी- नहीं मुझे जानना है. तू बोलता है या मार खायेगा मुझसे.

मैं- यार दीदी आप हर समय मुझे मरने की धमकी देखर सब कुछ जान लेती है और फिर मुझसे नाराज़ हो जाती है. अब मैं नहीं बताउगा. इसके आगे के शब्द थोड़ा बोल्ड टाइप के हैं इसलिए.

सरिता दी- जैसे भी हो. तू बता मुझे सुन्ना है.

मैं- लेकिन आप नाराज़ हो जाओगी उसका क्या.

सरिता दी- चल नहीं नाराज़ होउंगी प्रॉमिस. अब बोल

मैं- लेकिन मैं एकदम खुलकर बोलूंगा. और अगर आप मेरी बात से नाराज़ हो गई तो मैं आपको आज के बाद कुछ भी नहीं बताऊंगा.

सरिता दी- चल ठीक है नहीं होउंगी नाराज़. प्रॉमिस. अब तू बोल.

मैं- उसकी सुराही दर गार्डन. उसकी बड़ी बड़ी और पर्वत की छोटी के सामान उन्नत चूचिया. उसकी चूचिया कपडे के ऊपर से hi इतनी बड़ी और ठोस लगती हैं की मेरा मन उन्हें देखकर मचल जाता है. उसकी चूचियों को देखकर ऐसा लगता है की उसमे बहुत राश भरा है. मन तो करता है की उसको पकड़कर बिस्तर पर पटक दू और उसके कपडे फाड़कर उसकी चूचियों का सारा राश निचोड़ लू. उसकी चूचिया कपडे के ऊपर से देखकर मेरा ये हॉल है तो उसकी नंगी चूचिया देखकर तो मैं मर hi जाऊंगा. उसकी चूचिया ऐसे है जैसे कोई दसहरी आम हो. एकदम राश से भरपूर है उसकी चूचियां



मेरे इतने खुले लफ्जो में अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर दीदी का चेहरा शर्म से लाल हो गया. और उनके चेहरे पर हाय दिखाई देने लगी. मैंने आगे कहना शुरू किया.

मैं- उसकी केले के तने सामान चिकनी टंगे. एक भी बाल नहीं. ऊपर से उसकी गद्देदार कातिल गांड. एकदम कहर ढाती है. जब वो चलती है तो उसकी गांड ऐसे मटकती है जैसे घडी का पेंडुलम. उसकी गांड को देखकर मन करता है की उसको थप्पड़ मर मर कर लाल कर दू.



मेरी अपने शरीर के अंगो के बारे में ऐसी खुली बात सुनकर दीदी की सांसे तेज़ चलने लगी. और यहाँ मेरा लुंड भी दीदी की खुली तारीफ करके लोअर में तम्बू बन गया था .कुछ देर बाद उन्होंने अपनी सांसे संयत करने के बाद कहा.

सरिता दी- छी अभी तू कितनी गन्दी बाते करता है अपनी होनेवाली गिर्ल्फ्रेंड के बारे में.

मैं- देखा आप फिर नाराज़ हो गई. इसीलिए मैं नहीं बता रहा था.

सरिता दी- मैं नाराज़ नहीं हूँ. लेकिन तू उसकी तारीफ अच्छी लैंग्वेज में भी तो कर सकता था.

मैं- उसकी हरेक अंग की तारीफ करने के लिए अच्छी लैंग्वेज में शब्द hi नहीं हैं दीदी. इसीलिए मुझे उस लैंग्वेज में उसकी तारीफ करनी पड़ी लेकिन क्या फायदा उसने अभी तक कोई इशारा hi नहीं दिया है की वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती है या नहीं.

सरिता दी- तुझे बड़ी जल्दी है उसके इशारे की. एक बात बताऊ वो तैयार है तेरी गिर्ल्फ्रेंड बनने के लिए.

मैं- मैं आपके बताने से कैसे मान की वो तैयार है. अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनने के लिए तैयार है तो वो मुझे इशारा करे. आपके कहने से थोड़ी होता है.

सरिता दी- अच्छा रुक अभी तुझे प्रूफ देती हूँ.



उसके बाद दीदी ने अपने एक फोटो भेजी जिसमे t-shirt से आधी बहार झांक अपनी चूचियों की फोटो भेजी जिसे देखकर मेरा लुंड और तन गया. उनकी फोटो में उनकी चूचियों के ऊपरी भाग में जो टिल था वो भी दिख रहा था उसको देखकर मैंने दीदी से कहा.

मैं- मैंने उसको सिर्फ ब्रा में चूचियों की फोटो इशारे के रूप में भेजने के लिए कहा था. लेकिन लगता है वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड नहीं बनना चाहती. आप क्यों परेशां हो रही हैं.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने ब्रा में कई अपनी चूचियों की 2 फोटो एकसाथ भेजी. और कैप्शन में लिखा.

सरिता दी- अब तो तुझे यकीं हो गया न की सरिता तुझे अपना बॉयफ्रंड बनाना चाहती है.





उनकी बात सुनकर मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता डार्लिंग. इस ख़ुशी के मौके पर अपनी सेक सेक्सी वाली फोटो और भेज दो.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मुस्कुराते हुवे अपनी बहुत hi कामुक एक और फोटो भेज दी. फोटो भेजने के थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- अच्छा अब बहुत रात हो गई है अब मैं सोने जा रही हूँ. गुड़ नाईट.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-71

मैं- सरिता डार्लिंग. इस ख़ुशी के मौके पर अपनी सेक सेक्सी वाली फोटो और भेज दो.



मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मुस्कुराते हुवे अपनी बहुत hi कामुक एक और फोटो भेज दी. फोटो भेजने के थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अच्छा अब बहुत रात हो गई है अब मैं सोने जा रही हूँ. गुड़ नाईट.



अब आगे

फ़ोन रख कर मैं बिस्तर पर लेट गया और सोचने लगा. अगर आज कोई रूकावट नहीं हुई तो सविता दीदी को तो आज फिर से छोड़ दूंगा. सरिता दीदी भी अब मुझसे पूरी तरह खुल गई हैं. तो हफ्ते 10 दिन में ये भी मेरे लुंड के निचे होंगी. अब बची मनीषा. लेकिन वो तो बहुत प्यारी और मासूम है. और मुझसे शुरू से hi कितना प्यार करती है. तो उसके साथ मैं कैसे ये सब कर पाउगा. लेकिन अगर दोनों दीदियो की चुदाई हमेशा करनी है तो मनीषा को भी छोड़ना hi पड़ेगा. वार्ना किसी दिन उसने देख लिया तो बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा कर देगी.

अभी मैं यही सब सोच रहा था की मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और सविता दीदी कमरे में आई. उनके चेहरे से hi लग रहा था की वो बहुत छुडासी हैं. उन्होंने कल की hi तरह अपने बदन पर लबेदा डाला हुवा था. इसका मतलब था की लबेदा के निचे जरूर कुछ सेक्सी नज़ारा होगा. मैंने दीदी को देखते हुवे हँसते हुवे कहा.

मैं- आ गई मेरी छुडासी सविता डार्लिंग.

सविता दी- तू कभी अचे से बात नहीं कर सकता है क्या.

मैं- मैं तो ऐसा hi हूँ और अब तुम भी ये सब सुनाने की आदत दाल लो.

सविता दी- लगता है तू मुझे बेशरम बना कर hi छोड़ेगा.

मैं- उसी में तो मज़ा है सविता.

दीदी चलते हुवे मेरे बीएड के पास आकर कड़ी हो गई और अपने शरीर ले लबेदा उतारकर फ़ेंक दिया. लबेदा शरीर से उतारते hi मैंने देखा की दीदी सज संवर कर आई थीं उन्होंने कानो में झुमके पहने हुवे थे. गले में एक बड़ा सा हार था जो उनकी चूचियों तक जाता था. मांग में सिन्दूर लगा हुवा था. आँखों में काजल. होंठो पर लाली गली थी, लेकिन दीदी ने अपने जिस्म पर केवल सदी पहनी हुई थी.



उसके निचे जो ब्लाउज था उसके पुरे बटन खुले हुवे था और वह उनकी कमर के पीछे लटक रहा था. दीदी के इस कातिल और मदमस्त रूप को मैं आँखे फाड़कर देख रहा था. दीदी ने जब मुझे इस तरह अपने शरीर को देखता हुवा पाया तो दीदी की हंसी निकल गई और वो हँसते हुवे बोली.

सविता दी- अभी तू तो मुझे ऐसे देख रहा है. जैसे पहली बात मुझे इस अवस्था में देखा है.

मैं- कसम से सविता आज तक मैंने तुम्हरा यह रूप नहीं देखा था. कसम से आज तुम एकदम चुड़क्कड़ लग रही हो. क्या चूचिया हैं तुम्हारी. देखो तुम्हारी चूचियों को सदी के अंदर hi देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया है.

सविता di-tu नहीं सुधर सकता. कुछ तो लिहाज़ कर बड़ी बहन हूँ तेरी. और तू मुझे चुड़क्कड़ बोल रहा है.

मैं- हाँ मैं जनता हूँ की मेरी चुड़क्कड़ा सविता हो.

इतना बोलकर मैंने दीदी को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया .जिससे दीदी सीधा मेरे साइन पर गिर पड़ी. मैंने दीदी को अपने साथ चिपका लिया और उनके होंठो को चूसने लगा. दीदी मुझसे छूटने के लिए कसमसाने लगी. कुछ देर मैंने दीदी के होंठ चूसने के बाद उन्हें छोड़ दिया. दीदी उठकर खड़ी हो गई और बोली.

सविता दी- तू इतना उतावला क्यों रहता है. मैं कही भागी थोड़ी hi जा रही हूँ.

मैं- अब इसमें मेरा क्या दोष. जब तुम्हारी जवानी hi इतनी कातिल है की तुम्हे देखने के बाद मुझसे बर्दास्त hi नहीं होता. मेरा मन तो करता है की मैं तुम्हे घर पर सारा दिन नंगा hi राखु और जब भी मेरा लुंड खड़ा हो उसे तुम्हारी छूट में पेल दू.

सविता दी- तू din-ba-din ठरकी होता जा रहा है. मैं बहन हूँ तेरी कुछ तो इज़्ज़त किया कर.

मैं- इज़्ज़त की बात क्यों कर रही हो (अपने लुंड की तरफ इशारा करके). कल तुम्हारी उसी इज़्ज़त को अपने हथियार से मैंने उतारकर तुम्हे बेशरम बहा दिया था. इतनी जल्दी भूल गई क्या.

सविता दी- (मुस्कुराते हुवे). तुझसे तो बातो में कोई जीत hi नहीं सकता.

दीदी की बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा. मैंने बिस्टेर से उठकर दीदी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखने लगा. उनके कंधो को चूमने लगा. मैंने उनके कंधे से उनकी सदी उतर दी और ब्लाउज को आगे कर दिया. जिससे दीदी का रूप और भी कनक हो गया.



मैंने अपने होंठ दीदी के कंडे से उठाकर दीदी के होंठो पर रख दिया और उनके होंठो को चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. कुछ देर हम दोनों किसिंग करते रहे उनसे बाद मैं दीदी की होंठो पर जीभ फिरना लगा. मेरा इशारा समझ कर दीदी ने अपना मुंह खोल दिया और मेरी जुबान को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. थोड़ी देर हम दोनों एक दूसरे की जीभ बदल बदल कर चूसते रहे.

इस चूसै से दीदी की गरम हो गाइट hi. जिससे उनकी गरम सांसे मेरे चेहरे पर पद रही थी. थोड़ी देर जीभ चूसने के बाद मैं अपनी जीब से दीदी के पुरे चेहरे को चाटने लगा और अपना एक सदी के अंदर दीदी की पेट पर रख दिया और सहलाने लगा. पेट सहलाते सहलाते मैंने दीदी नई नाभि में ऊँगली करने लगा दीदी की नाभि बहुत गहरी थी. थोड़ी देर नाभि में ऊँगली करने के बाद मैंने एक ऊँगली नाभि में पेल दी और अंदर बहार करने लगा. साथ hi साथ उनकी कंडे और गार्डन को चाटने लगा. दीदी के मुंह से sssssssssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. दीदी ने अपनी बांह मेरे गले में दाल ली और मेरे बालो पर हाँथ फेरने लगी. मैं दीदी की नाभि में ऊँगली करते हुवे कहा.

मैं- तुम्हारी नाभि तो बहुत गहरी है सविता एकदम छूट की तरह.

सविता दी- तू कुछ भी बोलता रहता है आजकल. अब क्या इसे भी छोड़ने का मन कर रहा है क्या.

मैं- मन तो बहुत कर रहा है सविता लेकिन मेरा हथियार इतना तगड़ा है की कही तेरा पेट न पहात जाये.

सविता दी- हाँ तू सही कह रहा है. तेरे हथियार की तो मैं दीवानी हो गई हूँ. अगर तेरा मन हो तो इसे भी छोड़ ले.

मैं- अरे दीदी मई तो मज़ाक कर रहा था.

सविता दी- हाँ पता है मुझे. और ऐसे hi मज़ाक करते करते तूने मुझे छोड़ भी दिया. है न

मैं दीदी की बात सुनकर मुस्कुराने लगा. फिर मैंने अपना हाथ बढाकर दीदी का ब्लाउज उनके जिस्म से उतर दिया. जैसे hi ब्लाउज उतरा दीदी ने मुझे पीछे धकेला और अपने पल्लू को अपनी चूचियों पर दाल लिया. मुझे दीदी की हरकत देखकर हंसी आ गई और मैंने कहा.



मैं- कल तो बेशरम बैंकर उछाल उछाल कर अपनी छूट छुड़वा रही थी रंडी और आज देखो तो कैसे शर्मा रही है. हीी रे तिरिया चरित्र.

सविता दी- मैं नहीं छुड़वा रही टी तुझसे तूने hi मुझे पहले बहला फुसला कर बेशरम बनाया और मुझे छोड़ दिया.

मैं- चलो मन लेता हूँ की मैंने तुम्हे बहलाया फुसलाया . लेकिन ये बताओ चुदाई में मज़ा आया था या नहीं.

सविता दी- चल हैट. मैं नहीं बताने वाली. एक तो बहन को छोड़ता है और पूछता है मज़ा आया की नहीं.

मैंने दीदी की बात सुनकर मुस्कुराते हुवे दीदी के पीछे आकर खड़ा हो गया और उनके कंधे से उनका पल्लू निचे कर दिया और अपने होंठ उनके कंधे पर रख दिए. फिर मैंने अपने एक हाँथ को दीदी की चुकी पर रखा और एक हाँथ से दीदी के पेट को सहलाने लगा. मैं दीदी के कंधे और गार्डन को चूमने लगा. जिससे दीदी ने माधोसी में अपने हाथ पीछे मेरे गले में दाल दिए. एक हाँथ से दीदी की चुकी को तेज़ तेज़ से दबाने लगा दीदी के मुंह से ssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने दीदी का पेट सहलाते हुवे मैंने अपने हाथ से दीदी की सदी खोलने लगा. दीदी की सदी खोलकर मैंने उसे बीएड पर रख दिया. अब दीदी के जिस्म पर मात्र एक पंतय बची हुई थी.



मैंने दीदी के कंधे को चूमते चुकी को दबाते हुवे अपना हाँथ दीदी की पंतय के ऊपर से दीदी की छूट सहलाने लगा. जिससे दीदी मचलने लगी. फिर मैंने अपने मुंह में दीदी के कंधे को भरा. चुकी और छूट को मुठी में भरकर एक साथ दन्त कटा और छूट और चुकी को डैम लगाकर दबा दिया. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh अभी. धीरीईए कररररररर मरीईईई भाआआईईईई. डरडडडडडड होताआआ हैईईईई.

मैं दीदी की चीख की परवाह किये बिना फिर से उनके कंधे को दन्त कटा और चुकी व छूट कसकर मसल दिया. जिससे दीदी फिर से चीख पड़ी.

सविता di-Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh सलीईई भाआद्वेइये oooooooohhhhhhhhhhhhhh धीरीईई सीईए नहहहहहहिं dabaaaaaaaaaa सकककककककककताआए. मुफ्फ़्ततततततत काआआआ माललललललल सअअअअअजहाआआ है क्याआआआ.

मैंने अपना हाँथ उनकी छूट से उठा कर पंतय के अंदर डालने लगा. जिससे दीदी ने अपना हाँथ मेरे हाँथ पर रख दिया. लेकिन मैं रुका नहीं. मैंने अपने हांथो से दबाव बनाकर पंतय के अंदर हाँथ दाल दिया और ुकि छूट को मुठी में भर लिया. दीदी की छूट पानी छोड़ रही थी. मैं अपना मुंह दीदी के कण के पास लेकर कहा.



मैं- क्या बात है सविता बड़ी छुडासी हो रही हो. तेरी छूट तो पानी छोड़ रही है. ये देख मेरी मुट्ठी एकदम भीग गई है.

इतना कहकर मैंने अपना हाँथ दीदी की पंतय से निकलकर अपनी हथेली दीदी के सामने कर दी. मेरी हथेली पर अपनी छूट का पानी देखकर दीदी शर्म से लाल हो गई और मेरी आँखों में देखती हुवे बोली.

सविता दी- ये सब तेरी वजह से हुवा है. मैं इतनी शिधि सदी थी. लेकिन तूने मेने मुझे गन्दा बना दिया. और देख अब. मेरी क्या हालत हो गई है.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ फिर से दीदी की पंतय में घुसा दिया और उनकी छूट को दबोच दबोच कर मसलने लगा. एक हाँथ से चुकी को दबाता रहा और अपनी कमर को पीछे कर के उनकी गार्डन को चूमते हुवे एक धक्का मारा. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड में घुस गया. दीदी के मुंह से सिसकी निकल गई

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssss ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyy अभी.

फिर दीदी ने अपना एक हाँथ मेरी गार्डन से उठाया और पीछे ले जाकर मेरे लुंड को लोअर सहित पकड़ लिया और मसलने लगी. दीदी का हाँथ लुंड पर लगते hi मेरे मुंह से ssssssssss aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. मैं भी एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाता रहा और एक हाँथ की दो ऊँगली दीदी की छूट में घुसेड़ दी और अंदर बहार करने लगा. दीदी और मेरे मुंह से sssssssssssssssss aaaaaaaaaahhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी. लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे के लुंड और छूट से खेलते रहे और aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssss की आवाज़ करते रहे

5 मिनट बाद मैंने अपना हाथ दीदी की छूट से निकल लिया और अपने लुंड को छुड़ा कर दीदी को जमीन पर बैठा दिया और और अपना लोअर उतर कर फेक दिया और अपना लुंड उनके मुंह पर मरने लगा. दीदी ने भी मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी. कुछ देर तक लुंड सहलाने के बाद दीदी ने जीभ निकलकर मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया.



दीदी की जीब लुंड पर लगते हम एरा शरीर सिहर उठा. थोड़ी देर लुंड को चाटने के बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं तो मस्ती में पाउच गया था. मैंने दीदी से कहा.

मैं- वाह सविता. क्या लुंड चुस्ती हो तुम. कहा से सीखा इतना अच्छा लुंड चूसना.

सविता di-(munh से लुंड निकलकर) कल तुमने hi तो सिखाया था.

इतना बोलकर दीदी ने फिर से मेरा लुंड मुंह में ले लिया और चूसने lagi.thodi देर तक दीदी से लुंड चुसवाने के बाद मैंने दीदी के सर को पीछे से पकड़ लिया और एक hi झटके में अपने लुंड दीदी के मुंह में पूरा पेल दिया और बिना रुके ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा. जिससे दीदी की साँस अटकने लगी. उनके मुंह से guuuuuuuuuuuu guuuuuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी. लेकिन मैंने दीदी पर कोई रहम नहीं किया और ताबड़तोड़ धक्के लगाकर दीदी के मुंह को पेलता रहा. और दीदी से कहने लगा.

मैं- Waaaaaaahhhhhhhhhh सविता क्या गरम मुंह है तेरा मेरी रंडी. तू बहुत छुडासी है. ले मेरा लुंड अपने मुंह में और अंदर तक ले. तू बहुत अच्छा लुंड चुस्ती है एकदम रंडी की tarah.le भोसड़ीवाली और अंदर तक ले मेरा लुंड और चूस चूस कर इसका सारा रास पि जा साली.

मैं दीदी को गली देते हुवे हचक हचक कर दीदी का मुंह छोड़ा तहा और guuuuuuuuuuuuu gggggggggguuuuuuuuuu की आवाज़ निकलती हुई मेरा लुंड चुस्ती रही. लगभग 5 मिनट तक मैंने दीदी का मुंह बहुत बेदर्दी से पेलता रहा. फिर आखिरी धक्का लगा कर अपना लुंड दीदी के मुंह में पेलकर वही रुक गया. जिससे कुछ hi सेकेंडो में दीदी की साँस फूलने लगाई और वो मेरे जांघो को पकड़कर पीछे की तरफ धकेलने लगी. जब मुझे लगा की दीदी का डैम घुट रहा है तो मैंने एक झटके में अपने लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया. लुंड निकलते hi दीदी खांसी लगी. मेरा लुंड दीदी के थूक से सना हुवा था जिसे वो खांसते हुवे देख रही थी. जब दीदी की सांसे दुरुस्त हो गई तो दीदी ने कहा.



सविता दी- अभी तू सच में जानवर है. किसी दिन तू मेरी जान लेकर hi मानेगा.

मैंने दीदी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और दीदी को उठाकर बितर पर फेंक दिया और इनकी टंगे पकड़कर उन्हें घसीट कर बिस्तर के किनारे कर दिया. मैं बिस्टेर के निचे खड़ा था जिससे दीदी की छूट पंतय में एकदम मेरे सामने आ गयी. मैं उनकी छूट पर पैंटी के ऊपर से हाँथ रखा और सहलाने लगा. थोड़ी देर सहलाने के बाद मैंने दीदी की पंतय की एक झटके में खींचकर दीदी के बदन से अलग कर दिया. अब दीदी एकदम नंगी मेरे बीएड पर मेरे सामने थी. मैंने झुककर अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और चाटने लगा. मेरा मुंह अपनी छूट पर महसूस करके दीदी कसमसाने लगी. अब दीदी के ऊपर भी वासना हावी हो चुकी थी तभी दीदी ने अपने होंठ को मेरे सर पर रखकर उसे अपनी छूट की तरफ दबाने लगी.

मैंने भी अपना दोनों हाँथ बढाकर दीदी की चुहियों को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा. और अपनी जीभ की नोक बनाकर दीदी की छूट को छोड़ने लगा. मैं कभी उनकी छूट के ऊपरी भाग को चुस्त तो कबि अपनी जीब दीदी की छूट में पेल देता. मेरी छूट चूसै और चुकी दबाने के कारन दीदी एकदम बावली हो गई और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- Aaaaaaaaaahhhhhhhhh aAbbbbbhhhiiiiiiiiii कुटटी क्या छूट चुस्स्ता है टूउऊउउउ. और तीज chussssssssss. कहा जायआ मेरी छुट्ट्ट्ट को.. बहुत्तत्त aaagggggggggg लगइईईईई है इस्मीीी. चुस्स्सस्स्स्सस्स लेईईईई ीसीएएएएए ऑरररररररर पुराआ रससससससससस निकाळ डीएई िस्कआआआआ.

मैंने पाने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को मसलते हुवे दीदी की छूट चुस्त रहा फिर मैंने अपने एक हाँथ की दीदी की चुकी से हटाकर दीदी की छूट पर रखा और सहलाने लगा कुछ देर सहलाने के बाद मैंने अपनी 2 ऊँगली दीदी की छूट में घुसेड़ दी और छूट चाटते हुवे अपनी उंगली से दीदी की छूट पेलने लगा. और दीदी मस्ती में मदहोश हो गई और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मार डायलाआआ सल्ल्ल्लीीी oooooooooooohhhhhhhhhh क्याआ चूऊउउउउउस्ताहा हैईईई तू. Teriiiiiiiiii छूट चुस्स्सस्स्स्साआआअइ सीईई मेंननननन आईईएई वालीइइइइइ होओओओओओओओओ. सममममममममभआआआआ मुझेईई मेरेईईईई भाआआआआई तुम्हाररररररीीी बहनणननणणन की चूत्तत्ततत्तत जहाआआअआद रहीइइइइइइ हैईईई.

इतना कहते hi दीदी का बदन अकड़ने लगा. उनके पेअर कम्पनी लगे और शरीर मचलने लगा और एक तेज़ धार मार्कर दीदी चिल्लाकर बालभालकर झड़ने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhhh मेंनननननननन गईइइइइइइइ bhaiiiiiiiiiii. पीईई ली मेरररररररररी चूऊउउउउउत्तत्ततत्तत्त काआआ पणीइइइइइइइ बआहँणणणणचूऊऊऊडद. पुराआआ छाअअअअअअत jaaaaaaaaaaaa सलेईईईई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 72

झड़ने के बाद दीदी शांत हो गई और निढाल बिस्टेर पर पद गई. मैं कुछः दरररर दीदी की छूट को चाटता रहा. जब दीदी की छूट साफ हो गई तो मैंने अपना मुंह दीदी की छूट से हटा लिया और दीदी के बदन पर लेट गया और अपना जो ऊँगली दीदी की छूट में डाली थी उसे दीदी के होंठो पर फेरने लगा और दीदी से कहा.

मैं- क्या सविता डार्लिंग. मज़ा आया छूट चुसवाकर अपने भाई से.

सविता दी- हाँ अभी बहुत मज़ा आया. ऐसा लग रहा है जैसे मेरा बदन हल्का हो गया है.

मैं- सच में सविता तुम्हारी छूट का पानी बहुत स्वादिस्ट है. मज़ा आ गया चूसकर. चलो अपना मुंह खोलो और अपनी छूट के स्वादिष्ट पानी का स्वाद लो.

मेरे इतना कहने पर दीदी ने अपना मुंह खोल diya.maine अपनी चलो ऊँगली दीदी के मुंह में घुसा दी और दीदी का मुंह हाँथ से छोड़ने लगा.



दीदी भी मेरी उंगलियों को ऐसे चूस रही थी जैसे मेरा लुंड चूस रही हो. कुछ देर अपनी ऊँगली चूसने के बाद मैंने अपनी ऊँगली उनके मुंह से बहार निकली और एक जोरदार किश उनके होंठो पर किया और कहा.

मैं- चलो सविता अब मैं तुम्हारी अलग तरीके से चुदाई करने वाला हूँ. जिसका आनंद तुमने आजतक नहीं उठाया होगा.

सविता दी- (कंफ्यूज होते हुवे). कही तुंहारी नज़र मेरी गांड पर तो नहीं है अगर ऐसा है तो मैं बता दू की इससे दूर रहना नहीं तो तुम्हारा मुंह नोच लुंगी.

मैं- तुम्हारी गांड तो मैं जरूर मरूंगा सविता, लेकिन अभी मैं तेरी गांड नहीं तेरी चूचिया छोड़ना चाहता हूँ. अब ज्यादा नाटक मत कर और चल निचे बैठ जा.

इतना बोलकर मैं दीदी के ऊपर से उठ गया और दीदी को उठाकर जमीन पर घुटनो के बल बैठा दिया. दीदी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की मैं करने क्या वाला हूँ. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- इतना परेशां क्यों हो रही हो. बस देखती जाओ मैं क्या करता हूँ तुम्हे बहुत मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने अपने लुंड को दीदी की दोनों चूचियों जे बिच रख दिया और दीदी से कहा.

मैं- सविता अब तुम अपने दोनों हांथो से अपनी चूचिया मेरा लुंड पर दबाओ और थोड़ा थूक अपनी चूचियों की घाटी में गिराओ. फिर मैं तुम्हारी चूचियों की चुदाई शुरू करता हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने दोनों हांथो से अपनी चूचियों को पकड़कर लुंड पर दया और अपनी चूचियों की घाटी में थूक दिया. तो मैंने अपने लुंड को हारकर दी और आगे पीछे करना शुरू कर दिया.



दीदी मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी दीदी की आँखों में देख्छ्ते हुवे लुंड आगे पीछे करना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद दीदी no ढेर सारा थूक अपनी चूचियों की घाटी में फिर से थूक दिया और मेरी आँखों के देखते हुवे बोली.

सविता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मेरे भाई बहुत मज़ा आ रहा है. और छोड़ मेरी चूचियों को. ऐसा मज़ा मुझे पहली बार मिला है. तू सच में पक्का चुड़क्कड़ है तुझे अच्छी तरह मालूम कई की एक लड़की को कैसे खुश किया जाता है. छोड़ अभी और तेज़ी से छोड़.

मैं- हाँ साली सविता. तू भी बहुत चुड़क्कड़ है. तभी तो अपने भाई के लुंड से अपनी चुकी छुड़वा रही है. तू अपनी जीभ बहार निकल और मेरे लुंड को चुस्ती भी रह.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने अपनी जीभ बहार निकल ली. तो मैं और तेज़ तेज़ दीदी की चूचियों को छोड़ने लगा. जिससे मेरे लुंड चूचियों के उपर दीदी के मुंह में घर जाता था जिसे दीदी चाट और चूस लेती थी. मैं उनकी चूचियों को छोड़ते हुवे कहा.

मैं- AAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhh सविता कातिल चूचिया है तेरी कुटिया. एकदम ृषभरी और ठोस है. तेरा तो पूरा जिस्म की छोड़ने लायक है. तेरा पूरा शरीर मक्खन जैसा है. मन तो करता है की तेरे पुरे शरीर में लुंड रगड़ रगड़ के तुझे रुंडी की तरह छोड़ू सविता.

सविता दी- तो छोड़ न भड़वे तुझे रोका किसने है. तेरा लुंड बहुत दमदार है और तुझसे छोड़ने के लिए मैं तेरी रंडी भी बन सकती हूँ. छोड़ मेरी चुकी को और बना ले मुझे अपनी रंडी. छोड़ बहनचोद और जोर जोर से छोड़.

मैं- हाँ रंडी छोड़ता हूँ तुझे. छोड़ छोड़ कर तेरी चुकी आज लाल कर दूंगा. तू सच में एक रंडी है. जो अपने भाई से छोड़ने के लिए आधी रत को उसके कमरे में आई है.

मैंने इतना कहकर तेज़ तेज़ धक्के दीदी की चुकी में मरने लगा. थोड़ी देर चुकी छोड़ने के बाद मुझे लगा की बहुत hi जल्द मेरा पानी निकल जाएगा तो मैंने उनकी चूचियों से लैंड निकल कर उनके मुंह में पेल दिया और हचक हचक के दीदी का मुंह छोड़ने लगा. मेरा हरेक धक्का उतना ताकतवर तहा की दीदी एकदम हिल जाती थी. फिर मैंने दीदी को मुंह को अपने लुंड से दबाकर उनका सर बीएड पर टिका दिया और जोर जोर से मुंह छोड़ने लगा और बड़बड़ाने लगा.



Main-aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh रअंदड्डड्डड्डड़ईईईई Savitaaaaaaaaaaaa ले मेरा लुंड और अंदर अपने मुंह में. तेरा मुंह बहुत गरम हैईईईई टेररीईई चूऊउउउऊट की तरहहहहहहह ले रुंडी. तू बहुत्तत्ततत्तत मास्स्सस्स्स्सस्स्त माआल हैईईईई aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh मीरीईई जाआआआं कहा जाआआआ मेररररररे लुँड्ड़डडडडडड koooooooooo निचोड्ड्ढ लोओओओओओओओ iseeeeeeeeeee. मेंनननननननन gaayyyyyyyyyyyaaaaaa SAaviiiiiiiiiitaaaa tereeeeeeeeee मुह्हह्हह्ह्ह्ह में गयाआ..

और इतना कहकर मैं दीदी के मुंह में फ्रीज हो गया. दीदी मेरा पानी पिने लगी लेकिन मेरे लुंड ने इतना ज्यादा पानी छोड़ा था की दीदी के मुंह से कुछ स्पर्म बहार निकल कर उनकी चुकी पर गिर गया. मैं झाड़कर बिस्टेर पर बैठ गया और दीदी को देखने लगा जो अपनी जीभ को अपने मुंह में घुमा घुमा कर मेरा स्पर्म चाट रही थी. मैं दीदी को देखकर मुस्कुराने लगा. जब दिदिने मुझे मुस्कुराते हुवे देखा तो उन्होंने कहा.

सविता दी- ऐसे मुंह फाड् कर हंस क्यों रहा है.

मैं- तुम मेरा स्पर्म पीती हुई एकदम रंडी लग रही हो सविता.

सविता दी- तो मुझको रंडी बनाया किसने है. तूने न.

मैं दीदी की बात सुनकर हंसने लगा. तो दीदी भी मुस्कुराने लगी. 5 मिनट बाद दीदी उठकर मेरे पास आई और मेरी आँखों में देखती हुई बोली.

सविता दी- अभी तू मुझे हमेशा इसी तरह प्यार करेगा न. मुझे छोड़कर जाएगा तो नहीं. अब मैं तेरे बिना नहीं रह सकती.

मैं- तो सीधे शिंदे बोलो न की तू मुझे हमेशा इसी तरह छोड़ेगा न. और तुम बिना मुझसे छुड़वाए नहीं रह पाओगी.

सविता दी- (मेरी आँखों में देखकर) हाँ हाँ मई यही चाहती हूँ किट ु मुझे हमेशा चोदे. अब मैं तेरे लुंड के बिना अधूरी हूँ.

इतना बोलकर दीदी ने मेरे होंठो को चूसते को चूसने लगी और अपने एक हाँथ से मेरा लुंड पकड़कर मुठियाने लगी. दीदी के होंठ चूसने और लुंड मुठियाने से मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया. फिर दीदी मेरे होंठो को छोड़कर मेरे साइन को चूमते हुवे निचे आने लगी. और निचे आकर मेरे लुंड को मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी मेरे मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मैंने भी बिस्टेर पर बैठे बैठे दीदी के सर को पकड़ लिया और लुंड को दीदी के मुंह में पेलने लगा. जिससे दीदी के मुंह से gggggggggguuuuuuuuuuuuuu गगगगगगगगूउऊउउउ की आवाज़ निकलने लगी.

थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद दीदी ने अपने मुंह से लुंड बहार निकल लिया. फिर मैंने दीदी को उठाकर बीएड पर लिटा दिया और झुक कर दीदी की छूट को चुम लिया. दीदी के मुंह से sssssssssssssss आआआआहहहहहहह की आवाज़ आई. फिर मैंने अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाटने लगा. बिच बिच में जीभ की नोक छूट में डालने लगा. जिससे दीदी मस्त हो गई और बोलने लगी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh अभी haaaaaaaaaaa ooooooooohhhhhhhhhhhh बस्स्स ऐसी hi चाहाआटवूऊऊ अपनी didiiiiiiiiiiii की छुट्ट्ट्ट्ट को. हाआआआं bhaaaaaaaaaaaaaai ऐसे हीइइइइइइइ ohhhhhhhhhhhhhhh heeeeeeeeyyyyyyyyyyy.

जब मैंने देखा की दीदी एकदम गरम हो गई हैं तो मैं भी दीदी की बगल में जाकर लेट गया और उनकी एक तंग को उठाकर लुंड दीदी की छूट पर सेट किया और एक धक्का लगा दिया. दीदी की हलकी सी चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii dhireeeeeeeeeeee सीएएएएएएए.

मैंने दीदी की बात को अनसुना करते हुवे एक हाँथ उनकी गार्डन के निचे से डालकर एक चुकी को कसकर पकड़ लिया और एक तेज़ का धक्का दीदी की छूट में लगाया. इस बात मेरा लुंड जड़ तक दीदी की छूट में समां गया. दीदी के मुंह से चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Saleeeeeeeeeeeeee बोललललललललल रहीइइइइइइहूंणणन्न की धीरीई कार. लेकिनननननन तू बाहाआंछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ ekdammmmmmmmmm जाननवारररररररर बाआआआं जाताआआ है ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाराआमंमममममम सी कररररररर मेंननम्ननननन अब teriiiiiiiiii hiiiiiiiiii hoonnnnnnnnnnn.

Main-(didi की छूट में धक्के लगते हुवे). Aaaaaaaaahhhhhhhhhh सविता मैंनं क्याआ करूऊऊऊ मेंनननन हर बार सोच्छ्हःता हूणंण की तुझीीी आराममममम आराम से छोडूंगा लेकिन जैसे होई मेरा लुंड तेरी छूट को छूटा है मुझसे बर्दास्त नहीं होऊता.

िस्टना बोलकर मैं दीदी की चूचियों को कसकर दबाते हुवे ताबड़तोड़ धक्के लगाकर दीदी को छोड़ने लगा. साथ hi साथ उनकी गांड पर ठप्प्दाद भी मरने laga.mere धक्के इतने जोरदार थे की बीएड चुरुर चुरुर करने लगा मेरे हर धक्के के साथ दीदी की चीख निकल जाती. और वो मस्ती में बड़बड़ाने लगती



सविता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मइईईई मररररर गइईईई, माआआर डाललललललललाहा तूंबीएए अपनीईई बहन को. चू एकककड़ाम बाहाआंछूऊऊद ही. इतनेईईई बड़ी लुँड्ड्ड से appppppppppni शाआडीईईईई शुड्ड्ढडा बाआआअह्न को छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ rahaaaaaaaaaaaaa हीी. Ooooooooooohhhhhhhhhhh mummmmmmmmmmyy बचाआंआऊऊऊओ mujheeeeeeeeeeee इस भाआआअदवीईई सीईए. नहीं तो yeeeeeeeeee aajjjjjjjjjj merrrrrrrrrrriiiiiii छुटटटटटट फाड्ड़डडडडड डेगाआआ.

मैं लगभग 15 मिनट तक दीदी को उसी पोजीशन में हचक हचक कर छोड़ता रहा जिससे दीदी का शरीर कपङे लगा और उनकी छूट ने पानी छोड़ दिया. लेकिन मैंने अपनी स्पीड काम नहीं की. और उनको छोड़ता रहा. झड़ने के बाद दीदी की छूट एकदम गीली हो गाइट hi जिससे मेरा लुंड फिसल फिसल कर अंदर बहार हो रहा था.

फिर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार निकला और दीदी को उठाकर जमीन में कुटिया बना दिया. और अपना लुंड उनकी छूट पर सेट करके एक hi झटके में जड़ तक पेल दिया. दीदी आगे की और गिरने लगी और अपने ाको छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उनके कंधे को मजबूती के साथ पकड़ रखा था. मेरे इस धक्के से दीदी फिर से चीख पड़ी.



सविता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh भोसडीइइइइइइ वाली. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh मरररररर dalaaaaaaaaaaaa रईईईई ohhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyy तुमराआआआ betaaaaaaaaaaaa एककककककककदमममम बेरहाम हो गयाआआआ हिअआआअ अपनी बहानंन्न पर भीईई तराआआस्स नाहाहीइइइइइइइआआआआआआआआ ीसीईईई faadddddddddddd डीई मेरिइइइइइइइइ छूट को. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh बहुतत्त डरडडडडडडडडड कररररर राहाआआ हिअआआअ. कोइइइइइइइइइ बच्चाआआअऊऊऊऊओ मुझेईईई इस्स्स्सस्स्स्स जालीमंममम सीईई.

मैं- aahhhhhhhhhhhh राणडीइइइइइइइ औरर चिल्लाआआआ और जोरररररर से चिल्लाआआ कोई नाही ाएगाआआ तुझे बचनीयी. Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh सलीईई छिनाआआलललललललल कुटियाआआआआ बहुत्त तड़पाया है तुंबीईई मुझेईईईई अपनाआ बड़ाआआं दिखाआआआआ के रनडीईईईई ले और ले. टूउउउ बहुत्तत्ततत्तत बडीइइइइइइइ चुड़क्कड़ हैईईईई. तुझेईईई मैं रोजजजजजजज कुटियाआ बनाकर छोड़ूंगा.

मेरी इतने ताबड़तोड़ चुदाई से दीदी बहुत गरम हो गई थी और अंत संत बड़बड़ाने लगी और गली देने लगी.

सविता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhh मादररररर छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ ाभीईई. बहनणनननन के लौडी, हराममममी saleeeeeeeeee छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुझेईईई हचक हचाहाआक के chodddddddd.oooooooooohhhhhhhhhhh हरामममममममममजादीये जोर से पेलललललल अपना लॉडायआ मेरिइइइ छुट्ट्ट्ट मेई. मेराआआआआ होंईईईई वालाआआआ हिअआआअ भावःछोड़ड़ड़ड़. और तेज़ पीएएलललललल. Faaddddddddddd डीएई मेरिइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट्ट को. Ohhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हरामीईई मैईयिन gaiiiiiiiiiii सममममममभललल मुझेईई.. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh gaiiiiiiiiii mainnnnnnnnnn.

इतना बोलकर दीदी झाड़ गई. मेरा भी अब निकलने वाला था इसीलिए मैंने दीदी को सीधा करके बीएड के सहारे बैठा दिया और उनके मुंह में अपना लुंड पेल दिया और झड़ने लगा.



दीदी मेरा पूरा वीर्य पि गई और निढाल होकर जमीन ले लेट गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-73

सविता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhh मादररररर छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ ाभीईई. बहनणनननन के लौडी, हराममममी saleeeeeeeeee छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुझेईईई हचक हचाहाआक के chodddddddd.oooooooooohhhhhhhhhhh हरामममममममममजादीये जोर से पेलललललल अपना लॉडायआ मेरिइइइ छुट्ट्ट्ट मेई. मेराआआआआ होंईईईई वालाआआआ हिअआआअ भावःछोड़ड़ड़ड़. और तेज़ पीएएलललललल. Faaddddddddddd डीएई मेरिइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट्ट को. Ohhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हरामीईई मैईयिन gaiiiiiiiiiii सममममममभललल मुझेईई.. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh gaiiiiiiiiii mainnnnnnnnnn.

इतना बोलकर दीदी झाड़ गई. मेरा भी अब निकलने वाला था इसीलिए मैंने दीदी को सीधा करके बीएड के सहारे बैठा दिया और उनके मुंह में अपना लुंड पेल दिया और झड़ने लगा. दीदी मेरा पूरा वीर्य पि गई और निढाल होकर जमीन ले लेट गई.

अब आगे

झड़ने के बाद दीदी निढाल होकर जमीन पर लेट गई और मैं दीवाल से तक लगाकर बैठ गया और अपनी अपनी उखड़ी हुई शैशे दुरुस्त करने लगे. हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे. दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.

सविता दी- ऐसा देख देख के क्यों मुस्कुरा रहा है.

मैं- आपको hi देखकर मुस्कुरा रहा हूँ.

सविता दी- मुझे ऐसे देखकर क्यों मुस्कुरा रहा है.

मैं- मैं इसलिए मुस्कुरा रहा हूँ की एक 2 महीने पहले तक हम दोनों में बिलकुल भी नहीं बनती थी और तुम हमेशा मुझसे लड़ती रहती थी और पापा से मार भी पद्वति थी और आज देखो सब कुछ कितना बदल गया है. पहले हम दोनों लड़ते रहते थे और आज तुम्हारी छूट और मेरा लुंड लड़ झगड़ रहे हैं. पहले तुम मुझे मार खिलवाती थी पापा से और आज देखो. मैं तुम्हारी छूट मर्डर रहा हूँ अपने लौड़े से.

सविता दी- (हँसते हुवे.) तेरे दिमाग बहुत खतरनाक है . किसी भी बात को जोड़ तोड़ कर उसे गन्दा रुख देना. कहा से आता है ये सब तेरे दिमाग में. और अब तू पुराणी बातो का बदला लेगा मुझसे.

मैं- हाँ मैं बदला लूंगा तुमसे.

सविता दी- लेकिन इतना सब कुछ तो कर लिया मेरे साथ. तेरा बदला अभी पूरा नहीं हुवा.

मैं- मेरा बदला तो उस दिन पूरा होगा जिस दिन मैं तेरी ये कातिल और गद्देदार गांड मरूंगा.

सविता दी- सपने देकना बंद कर दे. वो तुझे कभी नहीं मिलने वाली.

मैं- अरे यार सविता मैं तो मज़ाक कर रहा था. क्या तुझे लगता है की तेरा भाई तुझसे बदला ले सकता है.

सविता दी- मुझे पता है की तू मज़ाक कर रहा है. मुझे अपने भाई पर पूरा भरोषा है. तू मुझसे बहुत प्यार करता है. तू मेरे साथ कुछ गलत नहीं करेगा. लेकिन एक बात सच सच बता. क्या तू सच में मेरी गांड मरेगा.

मैं- सच कहु तो मैं तुम्हारी गांड मरना चाहता हूँ.

सविता दी- ऐसा क्या है इसमें जो तू इसके पीछे पद गया है.

मैं- अरे ये पूछो की क्या नहीं है इसमें. तुम कभी खुद आईने के सामने कड़ी होकर अपनी गांड को नंगी करके देखना. इतनी गदराई और करतील गांड है तुम्हारी की पूछो hi मत. तुम्हारी गांड इतना कातिल है की जब भी मैं इन्हे देखता हूँ तो मुझसे कण्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. जब तुम चलती हो तो हमारी गांड ऐसे हिलती है जैसे चक्की के दो पैट हो. तुम्हारी गांड अगर मुझे मिल जाये तो मैं दिन रात तुम्हारी गांड मरता रहूँ.

सविता दी अपनी गांड की इतनी ज्यादा तारीफ सुनकर खुश हो गई और एक ऐडा से बोली.

सविता दी- तू बस सपने देख. ये तुझे कभी नहीं मिलेगी.

मैं- ये मुझे मिलेगी भी और मैं आपकी गांड मरूंगा भी. और ये आप खुद मुझसे कहेंगी की भाई मेरी गांड मर ले.

सविता दी- ऐसा कभी नहीं होगा. तेरा इतना बड़ा लुंड है. मेरी तो फाड़ hi देगा. मैं कभी ऐसा नहीं कहूँगी.

मैं- देखेंगे.

सविता दी- देख लेना.

इतनी बात करके हम दोनों मुस्कुराने लगे. फिर दीदी उठी और अपने नाम मात्र के कपडे पहनने लगी. कपडे पहनने के बाद दीदी बहार जाने लगी. मैं भी खड़ा हो गया. दीदी दरवाज़े तक पहुंच कर रुकी और पलटकर मेरी तरफ देखा और भागकर मेरे गले लग गई और बोली.

सविता दी- थैंक यू अभी. मुझे इतना प्यार देने के लिए. जिसके लिए मैं इतने सालो तक तड़पती रही. थैंक यू थैंक यू मेरे भाई.

और इतना बोलकर दीदी ने मेरे होंठो को किश किया और बहार जाने लगी. मैं पीछे से दीदी की गांड को घूरने लगा. दरवाज़े पर पहुंचकर दीदी ने पीछे मुड़कर देखा और अपनी गांड को घूरता पाकर हंसकर कहा कहा और निचे चली गई

सविता दी- अभी तू सचमुच बहुत कमीना है. तू कभी नहीं सुधर सकता. दीदी के जाने के बाद मैं भी ऐसे hi बिस्टेर पर लेट गया और थकन के कारन मुझे नींद आ गई.

मैं रात में गलती से नंगा हो सो गया था. सुबह जिम के समय सरिता दी छत पर आई और जैसे hi वो दरवाज़ा खोलकर अंदर घुसी. उनको एक मीठा झटका सा लगा. क्योंकि मेरा लुंड सुबह के समय एकदम छत की तरफ तना हुवा था. दीदी आँखे फाडे मेरे लुंड को देखने लगी. उन्होंने आज शायद पहली बार इतना बड़ा लुंड नंगा देखा था इसलिए उन्होंने अपना हाँथ अपने मुंह पर रख लिया और मन hi मन कहा इतना बड़ा.



मैंने तो उन सब से बेखबर आराम से सो रहा था. थोड़ी देर तक दीदी ने दरवाज़े के पास से hi मेरे लुंड को देखा फिर वो हिम्मत करके मेरे बीएड के पास आ गई और करीब से मेरे लुंड को देखने लगी. लुंड को देखकर hi दीदी का मुंह सुख गया. जिसके कारन वह अपने होंठो पर जीभ फिरने लगी. इतने बड़े लुंड को देखकर दीदी की साँस तेज़ तेज़ चलने लगी. जिससे उनकी रसभरी चूचिया ऊपर निचे होने लगी. दीदी ने करीब 5 मिनट तक मेरे लुंड को भरपूर नज़ारा करने के बाद दीदी धड़कते दिल के साथ कमरे से बहार चली गई और ाहिष्ता से दरवाज़ा बंद कर लिया.(ये साडी बाते जब सरिता दीदी ने मीरा वाली ईद पर अभी से बात की तब बताई थी. लेकिन इस बात का औचित्य अभी है इसलिए इस बात को मैं पहले अभी की जुबानी मेंशन कर रही हूँ)

सरिता दीदी कमरे से बहार जाने के 5 मिनट बाद मेरे मोबाइल पर फ़ोन किया. फ़ोन की आवाज़ सुनकर मैंने फ़ोन उठाया और सरिता दी का no. देखकर कॉल रिसीव किया. और बोलै.

मैं- हां दी.

सरिता दी- तू अभी तक सो रहा है. मुझे पता था की तू अभी नहीं उठा होगा इसलिए मैंने तुझे फ़ोन किया उठाने के लिए ताकि कल की तरह मुझे तुझको हिला हिला कर उठाना न पड़े.

मैं- (हिला हिला कर सुनने के बाद मेरी आँख खुल gai)-Kya हिला हिला कर.

सरिता दी- अभी सुबह सुबह hi तेरे दिमाग में उलटे सीधे ख्याल आने शुरू हो गए. अरे मैं बोल रही थी की कल मैंने तुझे कंधे से पकड़कर कई बार हिलाया तब जाकर तेरी नींद खुली. इसीलिए मैंने तुझे आज फ़ोन किया है उठाने के लिए. समझा या नहीं.

मैं- समझ गया मेरी मान. समझ गया. आप 5 मिनट में आ जाओ.

मैंने उठकर लोअर पहनी और बाथरूम में चला गया फ्रेस होने के लिए. और जब फ्रेश होकर बहार आया तो सरिता दीदी कमरे में बैठी हुई थी. मैं तो दीदी को देखकर बस उन्हें देखता hi जा रहा था. दीदी ने एक t-shirt और और लोअर पहनी हुई थी जो स्किन फिट थी और t-shirt का गाला बहुत बड़ा था. उनकी कपडे स्कीनफिट होने के कारन उनकी शरीर का हर कटाव उसमे नज़र आ रहा था. खासकर उनकी गद्देदार गांड और उनकी ृषभरी चूचिया जो आधी बहार निकली हुई थी. मैं बस एक तक दीदी को देखता रहा. दीदी ने जब मुझे अपनी चूचियों को देखते हुवे पाया तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और वो मुझसे बोली.



सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है अभी. अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या.

मैं- आज आप बहुत सेक्सी लग रही हो. और आपके कपडे तो बहुत hi अचे हैं.

सरिता दी- अच्छा बहन को सेक्सी बोलता है. शर्म नहीं आती. और ऐसे कपडे तो मैं हमेशा पहनती थी. मगर तूने कभी दयँ hi नहीं दिया.

मैं- (मैं दीदी की चूचियों को घूरते हुवे) मैं अपनी गिर्ल्फ्रेंड को सेक्सी बोल रहा हूँ. मैं पागल था दी जो अभी तक आपकी जवानी की तरफ मेरा ध्यान hi नहीं गया. मुझे तो अब पता चल रहा है की मेरी बहन कितनी जवान हो गई है.

सरिता didi-(muskura कर) तू कितना कमीना है. अपनी बहन की जवानी पर नज़र रखता है.

मैं- नज़र तो रखनी hi पड़ेगी. नहीं तो किसी और ने मेरी बहन की जवानी को लूट लिया तो.

सरिता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है. तू कभी नहीं सुधर सकता.

मैं- अच्छा ये सब छोडो चलो प्रैक्टिस शुरू करते हैं. तो पहले आप अपने शरीर को थोड़ा लूसे कर लो. उसके बाद जिम करना. तो यहाँ मेरे सामने कड़ी हो जाओ और मैं जैसा जैसा करता हूँ आप मेरे साथ साथ दोहराते जाइएगा.

मैंने दीदी को समझकर अपनी कमर पर अपने हाँथ रखे और पंजो के बल उछालने लगा. मैंने दीदी से भी वैसे करने के लिए कहा. तो दीदी भी अपने हाँथ अपनी कमर पे रखकर पंजो के बल उछलने लगी. जिससे दीदी के बड़ी बड़ी चूचिया बुरी तरह ऊपर निचे होने लगी.



दीदी की उछलती चूचियों को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया था. मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी. लगभग 10 मिनट में hi दीदी पसीने से एकदम भीग गई जिससे दीदी की t-shirt गीली हो गई. t-shirt गीली होकर उनके शरीर से चिपक गई. जिससे दीदी की चूचिया लाल रंग की ब्रा में उछलती हुई मुझे दिख रही थी. फिर दीदी थक कर रुक गई. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या हुआ दीदी. थक गई क्या.

सरिता दीदी- हाँ भाई. बस थोड़ी देर साँस ले लू फिर शुरी करती हूँ.

मैं- रुकिए दीदी मैं आपको बताता हूँ की कैसे अच्छी तरीके से साँस लेनी है ताकि आप की कसरत भी हो जाए और आपको थकन भी न लगे.

इतना कहकर मैं दीदी के एकदम करीब जाकर खड़ा हो गया और उनकी चूचियों के देखने लगा. मेरा सीना दीदी की चूचियों से हल्का सा टच हो रहा था. दीदी की चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे हो रही थी. जिससे उनकी चूचियों की हलकी सी रगड़ मेरे साइन पर पद रही थी. फिर मैं दीदी से और सत्कार खड़ा हो गया और उनका दोनों हाँथ पकड़कर पीछे उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया. दीदी से और सात जाने के कारन मेरा लुंड हल्का सा दीदी की छूट पर टच हो रहा tha.didi का हाँथ उनकी गांड पर रखने ने बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- हाँ दीदी अब आप लाभ साँस अंदर खींचो, थोड़ी देर साँस रोको और धीरे धीरे साँस को बहार छोडो.

मेरे ऐसा कहने के बाद दी ने एक जोर की साँस अंदर खींची. जिससे दीदी की चूचिया बहार की तरफ निकल आयी और मेरे साइन में धसने लगी. कुछ देर इसी तरह रहने के बाद दीदी धीरे धीरे अपनी साँस छोड़ने लगी.

मैं- हाँ दीदी बस ऐसे hi करो. थोड़ी देर में आपि साँस भी दुरुस्त हो जाएगी और साथ साथ आपकी एक एक्सेरसीज़े भी हो जाएगी.

कुछ देर तक दीदी ऐसा hi करती रही. जब दीदी साँस खींचती तो उनकी छतिया मेरे साइन में धस जाती. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर बाद मैं आगे से हटकर दीदी के पीछे जाकर उनसे सत्कार खड़ा हो गया. जिससे मेरे लुंड दीदी की गांड में टच होने लगा. दीदी ने पलटकर एक बार मेरी आँखों में देखा फिर अपनी गार्डन सीधी करके एक्सेरसीज़े करने लगी. थोड़ी देर खड़ा रहने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी बगल से डालकर चूचियों को रगड़ते हुवे उनके पेट पर रख दिया. चूचियों पर हाँथ की रगड़ से दी के मुंह से ssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. फिर मैंने दीदी कहा



मैं- अब आप अपना हाँथ कमर से हटा लीजिए और आगे की तरफ झुकिए.

मेरे कहने के बाद दीदी ने अपने हाँथ कमर से हटाए और आगे की तरफ झुकती चली गई. जिससे दीदी की गांड खुल गई और मेरा लुंड कपडे के ऊपर से उनकी गांड की दरार में फास गया. फिर मैंने अपना एक हाँथ उनकी दोनों चुहियों पर रखा और उनकी एक चुकी को मुट्ठी में भरकर दबाने लगा और एक हाँथ उठाकर उनकी पीठ पर रख लिया और सहलाने लगा. कुछ देर तक पीठ सहलाने और चूचिया दबाने के बाद मैंने उनकी चूचियों को मुठी में भरकर जोर से दबा दिया और अपनी कमर को एक झटका देकर उनकी गांड में कपडे के ऊपर से hi लुंड पेल दिया. जिससे दीदी के मुंह से सिसकारी भरी चीख निकल गई.

सरिता दीदी- ooooooooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii. आराममममममममम सीई सिखाआऊऊऊ bhaaaaaaaaiiiiiiiiii.

मैंने दीदी की गांड में लुंड का धक्का लगते हुवे और उनकी छूट दबाते हुवे कहा.

मैं- आप बहुत अच्छा कर रही हैं. इसी तरह करते रहिये. अब थोड़ा झुके झुके hi अपने घुटनो पर बैठने की कोशिश कीजिए.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने घुटने मोड़ diye.jisase उनकी गांड मेरे लुंड पर घिसती हुई निचे टी तरफ चली गई. मुझे तो दीदी की गांड लुंड पर घिसने से बहुत मज़ा आया. मैंने दीदी से कहा.

मैं- वाह दीदी आप बहुत hi जल्दी सब कुछ सीख जाओगी. अब घुटने को सीधा करते हुवे अपनी पूर्व अवशता में वापस आ जाओ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने घुटने सीधी करते हुवे वापस पहले वाली अवस्था में आ गई जिससे मेरा लुंड फिर से दीदी की गांड में घुस गया.

मैं- क्या बात है दीदी आपने बहुत अचे से किया. मज़ा आया आपको. अब ऐसे hi 10 बार और करो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा. कुछ देर मुझे देखने के बाद दीदी वैसे hi करने लगी. अब तक दीदी भी गरम हो गाइट hi. हर बार ऊपर निचे होने पर दीदी के मुंह से सससससस ससस आआआआअह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी. मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था मैं बस उनकी पीठ पर हाँथ रखकर उसे सहला रहा था. 10 की गिनती पता नहीं कब पार हो चुकी थी. लेकिन दीदी मस्ती में सब भूलकर करती जा रही थी. थोड़ी देर बाद जब दीदी थक गई तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- हो गया अभी 10 बार.

मैं- इतनी जल्दी कैसे हो गया दीदी अभी तो सिर्फ 5 बार hi हुआ है.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई और दीदी ने फिर से अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ते हुवे ऊपर निचे करनी शुरू कर दी. मुझे तो जैसे जन्नत का मज़ा मिल रहा था. दीदी भी जब बूझकर अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ रही थी. मेरा मन तो कर रहा था की अभी यही पर पटक कर इनकी गांड में लुंड पेल दू, लेकिन मैंने खुद पर काबू रखा. इसी तरह करीब 20-25 बार दीदी अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ती रही फिर उसके बाद मुझसे अलग होकर टेबल के पास चली गई और पानी का गिलास उठाकर पानी पिने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-74

पानी पि कर सरिता दीदी वापस मेरे पास आकर कड़ी हो गई तो मैंने दीदी से पूछा.

मैं- कैसे लगा दीदी. मज़ा आया एक्सेरसीज़े करके.

सरिता दीदी- हाँ अभी बहुत मज़ा आया.

मैं- ठीक है दीदी अब दूसरी एक्सेरसीज़े शुरू करते हैं. आप ऐसे करिये कमर के बल यहाँ जमीन पर लेट जाइये.

मेरी बात सुनकर दीदी जमीन पर कमर के बल लेट गई मैं उनके पेअर के पास आकर बैठ गया और बोलै.

मैं- दीदी अब मैं आपके दोनों पेअर को आगे की तरफ प्रेस काऊंगा फिर आप अपना जोर लगाकर वापस पीछे की तरफ पुश करना.

इतना बोलकर मैंने उनके पांव को घुटने से मोड़ कर अपने साइन पर रख लिया और उनके पैसे को आगे के तरफ पुश करने लगा. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट से टकराने लगा. और जब मैंने दीदी के पेअर उनकी चूचियों तक पुश करके ले गया तो मेरे लुंड सीधा दीदी की छूट के ऊपर रगड़ गया. जिससे दीदी के मुंह से ssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. फिर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अब आप मुझे पीछे की तरफ पुश करो.

फिर दीदी ने मुझे पुश करना शुरू किया. अब दीदी ये सब जानबूझ कर कर रही थी या वाकई उनसे मैं पीछे पुश नहीं हो प् रहा था वो तो दीदी hi जाने मगर दीदी थोड़ा सा दबाव मेरे साइन पर डालती और वापस दबाव काम कर देती. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट पर कपड़ो के ऊपर से घिसने लगा. दीदी ऐसे बार बार करती और मेरा लुंड बार बार उनकी छूट पर घिसता. जब मैंने ये देखा तो मैंने भाई मौके का फायदा उठाते हुवे अपने लुंड का दबाव उनकी छूट पर देने लगा. अगर कोई दूर से देख ले तो वो यही समझेगा की हम दोनों चुदाई कर रहे हैं. मेरे और दीदी की मुंह से sssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeee ohhhhhhhhhhhhhhhhh की आवाज निकल रही थी. थोड़ी देर लुंड घिसाई से दीदी की छूट से पानी निकलना शुरू हो गया और उनकी लोअर गीली होने लगी.

लगभग 10 मिनट तक दीदी कसरत के बहाने मेरा लुंड अपनी छूट पर घिसवाती रही. और मैं मज़ा लेता रहा. थोड़ी देर बाद मैंने अपने लुंड को अपने हाँथ में पकड़ कर सीधा किया अउ इस बार जब दीदी ने अपने पेअर का दबाव काम किया तो मेरा लुंड सीधा लोअर के ऊपर से दीदी की छूट की छेड़ से जा टकराया. जिससे दीदी का शरीर कैंप गया. दीदी थोड़ी देर के लिए रुकी और मेरी आँखों में देखा. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी फिर जोर जोर से मेरे साइन को आगे पीछे करने लगी तो मैं भी अपने हाँथ से अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट के मुंह पर पेलने लगा. कुछ देर बाद जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुवा तो मैंने निचे होते समय अपनी कमर को एक जोर का झटका दिया जिससे मेरा लुंड कपडे समेत दीदी की छूट में घुसने की कोशिश करने लगा. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाआसससस अभीयी हूँ गया.

अब ये सिसकी दीदी ने आनंद में ली थी या दर्द में ली थी पता नहीं. फिर मैंने दीदी के पेअर को अपने साइन से हटते हुवे सीधा कर दिया और दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने लुंड को उनकी छूट में दबाते हुवे उनपर लेट गया. अब जमीन पर एकदम चुदाई वाला शीन था. जैसे मैं दीदी की छूट मर रहा हूँ. कुछ देर तक ऐसे लेटने के बाद मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने शरीर को उनके शरीर पर घिसने लगा. दीदी बस मेरी आँखों में देखती रही लेकिन बोली कुछ नहीं.

अब तक दीदी एकदम गरम हो गई थी और जल्दी जल्दी सनस ले रही थी. कुछ देर तक दीदी को देखने के बाद मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. दीदी ने अपना सर इधर उधर करने की कोशिश की लेकिन मैंने अपने हांथो से उनके सर को पकड़ रखा था तो दीदी अपना सर नहीं हटा पाई. मने दीदी को बहुत जोर जोर से किस कर रहा था. और अपने शरीरी की दीदी के शरीर पर घिस रहा tha.thodi देर बाद मैंने अपने लुंड को छूट पर सेट किया. उनके सर को छोड़कर अपने दोनों हांथो में दीदी की चूचियों को पकड़कर जोर से दबा दिया और उनकी छूट पर एक धक्का मर दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Kamineeeeeeeeeeee माआर गइईईई मन्न्नन्न्न्नन क्याआ कर राहाआआआ ह्हैई. धीरीईई करररर ड़ड़ड़ड़ड़ होता haiiiiiiiiiii

फिर मैं दीदी को एक किश करके उनके ऊपर से उतारकर उनके बगल लेट गया और दीदी की आँखों में देखा तो वो एकदम नशीली हो गयी थी. नथुने फूल पाचक रहे थे. उनकी साँस चढ़ी हुई थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.

Main-didi अब आप भी मेरी वैसी hi एक्सेरसीज़े करवाइये जैसे मैंने आपकी करवाई.

दीदी मेरी बात सुनकर सरमने लगी और न में सर हिलने लगी. फिर मैंने साद सा फेस बनाया तो दीदी के चेहरे पर स्माइल आ गई. दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी तुझे नहीं लगता की ये अजीब तरह की एक्सेरसीज़े है.

मैं- हाँ दीदी है तो अजीब तरह की लेकिन इसे करने के बाद बहुत सुकून मिलता है.

फिर दीदी ने मेरे दोनों पांव पाकर कर घुटने से मोड़ दिया और मेरे पांव को अपने पेट पर रख लिया तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- यार दीदी ये तो चीटिंग है. अपने पेअर यहाँ न रखो. जैसे मैंने रखा था वैसे आप भी रखो.

सरिता दीदी- यहाँ न राखु तो फिर कहाँ राखु.

मैं- (उनकी चूचियों को देख कर). अपनी चूचियों पर रखो जैसे मैंने पाने साइन पर रखा था आपके पेअर.

सविता दी- तू तो बड़ा बेशरम है. अपनी दीदी से ऐसी बात करता है. और ये एक्सेरसीज़े बड़ी अजीब है.

मैं- मैं ये सब अपनी दीदी से नहीं अपनी गिर्ल्फ्रेंड के साथ कर रहा हूँ. आप शायद भूल गई की कल से हम दोनों गफ बर्फ बन गए हैं.

सविता दी- गफ बने मेरी जुटती. बड़ा आया बर्फ बनने वाला. और कोई अपनी गफ के साथ ऐसा करता है क्या.

मैं- मैं तो बस एक्सेरसीज़े कर रहा हूँ. लोग तो पता नहीं अपनी गफ के साथ क्या क्या करते हैं. अब शुरू करो न दी. आप नखरे बहुत करती हो.

दीदी से इतनी खुलकर बात करते हुवे मेरा लुंड टैंकर लोअर में तम्बू बना हुवा था जिसे दीदी भी कनखियों से देख रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे पांव पकड़कर अपनी चूचियों पर रख दिया जिससे दीदी का शरीर हिल गया और एक मज़े की लहार मेरे शरीर में भी दौड़ गई. फिर दीदी ने अपनी चूचियों से मेरे पांव को दबाकर मेरे साइन तक ले आयी. जिससे दीदी की छूट मेरे लुंड पर टच हो गई. दीदी मुंह से सिसकी निकल गई. फिर मैंने दीदी की चिचियो पर अपने पेअर से दबाव डालकर उन्हें पीछे किया.

दीदी की गुदाज चूचिया मुझे बहुत मज़ा दे रही थी. जिससे मेरे शरीर में मस्ती दौर रही थी. दीदी ने फिर अपनी चूचियों का दबाव मेरे पैरो में डालकर मेरे साइन तक ले आई और मैं फिर से दीदी की चूचियों को दबाव डालकर उन्हें पीछे किया. दीदी भी अब इस खेल का मज़ा ले रही थी और मेरे खड़े लुंड को बिच बिच में देख रही थी. 8-10 बार ऐसा करने पर भी मेरा लुंड सीधा खड़ा होने के कारन ठीक से दीदी की छूट को नहीं टच हो प् रहा था. इसलिए जब मैंने देखा की दीदी ऊपर निचे होते हुवे मेरे लुंड को देख रही हैं तो मैंने अपने लुंड को अपनी हाँथ से पकड़ा और उसे अपने जांघ की तरफ दबा दिया जिससे मेरा लुंड तिरछा हो गया जिसे दीदी देख रही थी. फिर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे पांव को दबाकर मेरे साइन तक किया जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट की फैंको के बिच टकराया. और दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh अभी. की आवाज़ निकल गई.

मैंने दीदी को वापस पुश नहीं किया और दीदी की चूचियों से अपना पेअर हटा लिया जिससे दीदी धड़ाम से मेरे साइन पर गिर पड़ी और मेरा लुंड बहुत जोर से दीदी की छूट पर टकराया. दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mammmmmmmmmmmmyyyyyyyyy marrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiii maiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. Ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii.

जब दीदी मेरे ऊपर गिरी तो मैंने उनको कसकर अपने साइन से चिपका लिया और तेज़ तेज़ से दीदी के शरीर को अपने शरीर में रगड़ने लगा. ऐसे लग रहा था जैसे हम दोनों चुदाई कर रहे हो. दीदी भी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii ohhhhhhhhhhhhhhh क्या कर राहाआआआ hiaaaaaaaaaa. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई mujheeeeeeeeeee aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आआआआहहहहह क्याआआ जाड्डड्डड्डड्डू हैईईईई tujhmeeeeeeeeeee. टूउऊउउउ bahutttttttttt अछिइइइइइइ कसरतततततत कररररवता haiiiiiiiiiiiiii oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhn भाआईईई.

थोड़ी देर बाद इसी तरह दीदी के शरीर को अपने शरीर से रगड़ने के बाद मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- क्यों दीदी मज़ा आया मेरे साथ एक्सेरसीज़े करके.

सरिता दी- हांण बहुत मज़ा आया. अभी और करेगा एक्सेरसीज़े या बस. (यथा कहकर दीदी मेरे ऊपर से उठ गई.)

मैं- मैं तो करना चाहता हूँ आप के साथ. आप बताओ क्या आप करवाऊंगी मेरे साथ. अभी तो ये बस शुरुवात है. अभी तो आपके साथ बहुत कुछ करूँगा.

मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी. मैं ये कहकर एक डम्बल उठा लिया और दीदी के पीछे आ कर खा हो गया और पीछे से झप्पी डालकर डम्बल उनके हाँथ में पकड़ा दिया और खुद उनके हाँथ को निचे से पकड़कर बी छेप करने लगा. डम्बल उठाते समय मैं उनको पीछे से धक्का देता और अपने लुंड को दीदी की गांड पर रगड़ देता. जिससे दीदी ssssssssssssssssssssssss sssssssssssssssssssssss करने लगती. दीदी की गांड बहुत नरम thi.Fir मैंने दूसरा डम्बल भी उठाकर दीदी के दूसरे हाँथ में दे दिया और पीछे जाकर फिर से उसी तरह खड़ा हो गया. और उन्हें एक्सेरसीज़े करवाने लगा और अपने लुंड को झटके मर मर कर उनकी गांड में लोअर के ऊपर से रगड़ता रहा. मेरा लुंड तो जैसे फटने को हो रहा था. थोड़ी देर बाद मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई दी.

सरिता दी- अभी तक कितनो को ऐसे एक्सेरसीज़े कराइ है तुमने.

मैं- अभी तक तो केवल नताशा को hi ऐसी एक्सेरसीज़े कराइ थी. और वो बहुत खुश हो जाती थी मेरी एक्सेरसीज़े से. और अब आपको सीखा रहा हूँ.

सरिता दी- वो तो ठीक है लेकिन मुझे ऐसी एक्सेरसीज़े करने में बड़ी शर्म आ रही है.

मैं- इसमें शर्म कैसी. जिमखाने में तो लड़किया गैर मर्दो के साथ ऐसे एक्सेरसीज़े करती हैं. वो तो आपने t.v. पर देखा hi होगा.

सरिता दी- हाँ देखा तो है लेकिन………

मैं- लेकिन क्या. मैं तो आपका छोटा भाई हूँ तो गैर मर्द के साथ ऐसी एक्सेरसीज़े करने सा तो अच्छा है की आप ऐसे एक्सेरसीज़े अपने भाई के साथ करे. और वैसे भी गैरमर्द के साथ ऐसे एक्सेरसीज़े करने सा ज्यादा मज़ा भाई के साथ आता है ऐसी एक्सेरसीज़े करने में.

सरिता दी- ह्ह्ह्हह्ह्ह्हम्मम्मम्मम्मम. लेकिन ये बता ये किस चीज़ की एक्सेरसीज़े है.

मैं- (दीदी की गांड में अपना लौड़ा रगड़ते हुवे)- ये डोला बनाना के एक्सेरसीज़ है लेकिन डोले के साथ साथ इसको करने से चूचिया भी सख्त होती हैं.

सरिता दी- तू कितना गन्दा है अभी.

मैं- अब इसमें गन्दा क्या हो गया. आखिर आपकी चुकी को चुकी नहीं बोलेंगे तो फिर क्या बोलेंगे.

दीदी मेरे मुंह से अपनी चुकी सुनकर शर्माने लगी. और धीरे से बोली.

सरिता दी- इसको ब्रैस्ट बोल सकता है. बूब्स बोल सकता है.

मैं- बोल तो सकता हूँ लेकिन बूब्स और ब्रैस्ट बोलने में वो मज़ा नहीं आता जो मज़ा चुकी बोलने में आता है.

सरिता दी- तुझे तो हर वक़्त मज़ा लेने की पड़ी रहती है.

मैं- इस एक्सेरसीज़े का एक और फायदा है दीदी.

सरिता दी- मैं जानती हूँ तू फिर कुछ गन्दा hi बोलेगा, लेकिन जब तू इतना बता चुक्का है तो ये भी बता दे की और क्या फायदा होता है इससे

Main-(didi की गांड पर धक्का मरते हुवे) इस एक्सेरसीज़े से लड़कियों की चुकी कभी लटकती नहीं हैं. लड़किया जिम इसीलिए जाती हैं ताकि उनकी चुकी हमेशा तानी तानी रहे. उनमे ढीलापन न आये. इसीलिए मैं आपको ये एक्सेरसीज़े करवा रहा हूँ, जिससे आपकी चूचिया भी हमेशा तानी तानी रहे. वैसे एक बात कहूँ आप बुरा न मने तो.

सरिता दी- हाँ कहो.

मैं- आप ने दो दिन एक्सेरसीज़े की है तो क्या मैं अपनी चूचियों को चेक कर लू. की अगर उनमे कही ढीलापन हो तो मैं उसी हिसाब से आपकी एक्सेरसीज़े करौ.

सरिता दी- ये तू क्या बोल रहा है. तू मेरे इनको छूना चाहता है. तुझे शर्म नहीं आएगी अपनी बहन के बूब्स छूने में.

मैं- ये तो मैं आपके फायदे के hi लिए बोल रहा हूँ. अगर आपको नहीं चेक करवाने तो कोई बात नहीं.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने कुछ देर सोचा और उसके बाद बोली.

सरिता दी- अच्छा ठीक हाइट तू चेक कर ले लेकिन मुझे ज्यादा परेशां मत करना.

इतना सुनते hi मैंने दोनों हांथो से दीदी की चूचिया पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा. पीछे से मेरा लुंड उनकी गांड में पहले से hi फंसा था. मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुवे कहा.



मैं- दीदी आपकी चूचिया तो बहुत सख्त हैं बस थोड़ी और एक्सेरसीज़े की जरूरत है. उसके बाद आपकी चूचिया हमेशा तानी तानी रहेंगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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