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अपडेट-69
सरिता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मामयिययियीय hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Maaaaaaaaaarrrrrrrrrrrr gaaaaaaaaaaaai माहाऎणंन्न.
मेरे इस हमले से दीदी ने चीखते हुवे मुझे धक्का देखर पीछे किया और मेरे कमरे से निकल कर निचे चली गई.
अब आगे
सरिता दीदी के निचे जाने के बाद मैं भी बाथरूम में गया. अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत किया. और तैयार होकर अपने काम पर निकल गया. वह से 1 हॉर्स में अपना काम समेत कर मैं घर चला आया. मैंने बेल्ल बजे तो मनीषा ने दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलकर वो तुरंत अपने कमरे में चली गई. जब मैं घर में एंटर हुवा तो उस समय हॉल में कोई नहीं था. अभी मैं ऊपर जाने के लिए सीधी के पहले स्टेप पर पेअर रखा hi था की बगल वाले बाथरूम का दरवाज़ा खुला और उसमे से सरिता दीदी बहार निकली.
दीदी अभी अभी नहाकर बहार आई थी. उन्होंने अपने जिस्म पर एक टॉवल लपेटा हुवा था जो उनकी आधी चूचियों से शुरू होकर उनकी गांड तक आता था. जब दीदी ने मुझे देखा तो वही रुक गई और मेरी तरफ एक ऐडा से देखने लगी.
मैं बस दीदी की अधनंगी चूचियों के देखे जा रहा था. दीदी के बालो से पानी उनके कंधो पर गिरकर निचे सरकते हुवे उनकी चूचियों की घाटी में गम हो रहा था. मैं दीदी के इस अनुपम सौंदर्य को अपनी आँखों से पि रहा था. मैंने एक नजर उनकी चूचियों से उठाकर दीदी के चेहरे की तरफ देखा तो दीदी मुस्कुरा रही थी. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.
सरिता दी- ऐसे आँखे पहाड़ पहाड़ कर क्या देख रहा है. कभी कोई लड़की नहीं देखि क्या.
मैं- लड़की तो बहुत देखि है. लेकिन ऐसी लड़की कही नहीं देखि दीदी. आप इतनी ज्यादा सुन्दर हैं की मैं आपको देखने के बाद अपनी पलके झपकना भूल गया हूँ.
सरिता दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई और शरमाते हुवे बोली
सरिता दी- चल हैट मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ. जितनी तू तारीफ कर रहा है.
मैं- मैं सच कह रहा हूँ दीदी मैंने आप के जैसी खूबसूरत लड़की आज तक नहीं देखि. आप खूबसूरत भी हो और……………………… (रुक गया)
सरिता दी- खूबसूरत भी हूँ और. आगे बोल न.
मैं- अरे दीदी. कुछ नहीं जाने दीजिए न.
सरिता दी- अरे बता न. शर्मा क्यों रहा है.
मैं- दीदी वो आप न वो खूबसूरत होने के साथ साथ बहुत हॉट भी हैं.
सरिता दीदी- चुप कर बेशरम अपनी बहन को हॉट बोलता है.
मैं- मैं सच कह रहा हूँ. आप बहुत खूबसूरत और हॉट हो. अगर आप मेरी बहन न होती हो मैं आपको apni………….(ruk गया)
सरिता दी- अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता तू.
मैं- कुछ नहीं दीदी. आप बहन हो न मेरी. वो गलती से निकल गया मुंह से.
सरिता दी- हाँ पता है तेरे मुंह से सब गलती से निकलते है. अच्छा बता न अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता.
मैं- जाने दो न दी. आप नाराज़ हो जाओगी.
सरिता दी- मैं नाराज़ नहीं होउंगी तू बोल.
मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड बना लेता और बहुत प्यार करता.
सरिता दी- चल हैट बेशरम. तू कितना कमीना हो गया है अपनी बहन को गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है.
मैं- अगर आप मेरी बहन न होती तो पक्का आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनता. लेकिन अगर आप मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हैं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.
सरिता दी- (मुस्कुराते हुवे) चल हैट बेशरम तेरी गिर्ल्फ्रेंड बने मेरी जुटती.
इतना कहकर वो कपडे चेंज करने के लिए कमरे में जाने लगी. मेरा लुंड जो अब तक दीदी की गरम जवानी देखकर पंत में तन गया था मैंने उसपे अपना हाथ रख दिया और दीदी के मटकती गांड को देखने लगा. दरवाज़े पे पहुंचकर दीदी ने मेरी तरफ dekha.unki नज़र मेरे लुंड पर चली गई. उन्होंने मेरे लुंड को देखते हुवे अपने टॉवल को दोनों तरफ से पकड़का फैला दिया. और हंसती हुई कमरे में चली गई. मैं बस आँखे फाडे लुंड को सहलाते हुवे उनकी मटकती गांड को देखता रहा.
कुछ देर तक वही खड़े रहने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और अपना काम करने लगा. अपना काम फिनिश करने के बाद मुझे सविता दीदी का ध्यान आया. मैंने आज सुबह से उनसे बात नहीं की थी. तो मैंने अपना फ़ोन निकला और सविता दीदी को मश्ग किया. थोड़ी देर बाद रपल्य आ गया.
मैं- Hello दीदी. कैसी हो.
सविता दीदी- मैं ठीक हूँ. अभी टाइम मिला तुम्हे मुझको याद करने का.
मैं- सॉरी सविता. वो सुबह से बिजी था इसलिए समय नहीं मिल पाया.
सविता दीदी- चल कोई बात नहीं. और क्या कर रहे हो.
मैं- कुछ नहीं सविता. तुम्हारे पास आ जाऊ.
सविता दी- नहीं. अभी सरिता और मनीषा दोनों घर में हैं और तुम किओ न कोई उलटी सीधी हरकत जर्रूर करोगे. अगर उन्होंने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी.
मैं- कुछ नहीं करूँगा सविता. बस तुमको देखना था.
सविता दी- तू समझा कर अभी. किसी ने ने देख लिया तो मेरी क्या इज़्ज़त रहेगी फिर.
मैं- अच्छा ठीक है. तो रात में आ जाना फिर ऊपर.
सविता दी- मन तो मेरा भी है लेकिन अभी कल पकडे जाने से बचे थे, तो कैसे औ.
मैं- आ जाना सविता और आते समय सीधी वाला गेट बंद करके आना.
सविता दी- चल देखती हूँ. क्या हो सकता है.
मैं- तुमको देखने था तो अपनी फोटो भेजो न सविता.
सविता दी- रात में आउंगी तब देख लेना.
मैं- रात को तो देखूंगा hi. लेकिन अभी भी देखना है. और थोड़ा उस तरह की.
सविता दी- नौगहत्य. अच्छा रुक भेजती हूँ.
उसके बाद सविता दीदी ने एक फोटो भेजी. इसमें दीदी ने सदी पहनी हुई थी. ब्लाउज नहीं पहना था दीदी ने. और सदी का पल्लू ब्रा के ऊपर अपनी चूचियों पर डाला हुवा था.
मैं- ये क्या सविता. अपना पल्लू हककर भेजो न.
सविता दी- तू बहुत बदमाश हो गया है. अच्छा रुक भेजती हूँ.
उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे वो ब्रा में थी. ब्रा में दीदी की चूचिया एकदम पहाड़ की छोटी की तरह तानी हुई थी. मेरा तो लुंड टनटनाने लगा दीदी की चूचिया देखकर.
Main-waah सविता क्या जन्मऋ चूचिया हैं तुम्हारी. एकदम तानी हुई. इन्हे तो मैं मसल मसल कर ढीला करूँगा. देखना तुम. अच्छा एक फोटो ब्रा को उतर कर भी भेज दो.
सरिता दी- चल हैट. अब मैं कोई फोटो नहीं भेजने वाली. अब जो होना होगा वो रात में आने के बाद hi होगा. अब फ़ोन रखो मुझे कुछ काम है.
मैंने अपना फ़ोन साइड में रख दिया और सो गया. शाम को मैं सोकर उठा तो मां पापा घर आ गए थे. मैं जब हॉल में आया तो सरिता दीदी तैयार बैठी थी. मुझे देखते hi कहा.
सरिता दी- मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी. चलो चलते हैं अब.
मैं- अब 5 मिनट दीदी. थोड़ा पानी तो पिने दो.
फिर पानी पीकर मैं और सरिता दी गाड़ी में बैठकर मैदान की तरफ चलर गए. गाड़ी में बैठने के बाद दीदी ने अपना शॉल अपने जिस्म से उतर दिया. दीदी ने एक t-shirt और लेग्गी पहनी हुई थी. T-shirt से दीदी की आधी चूचिया बहार दिख रही थी. दीदी ने शॉल कार के पीछे रख दिया और मेरी तरफ देखने लगी. मैंने उनकी चूचियों के देखकर कहा.
मैं- यू अरे दम्म सेक्सी दीदी. बहुत hi खूबसूरत.
मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और सामने की तरफ देखने लगी. कुछ देर में हम मैदान में पहुंच गए. वह आकर मैंने दीदी को कुछ समझाया और ड्राइविंग शीट से उतर गया. दीदी ड्राइविंग शीट पर बैठ गई और कार चलने लगी. लेकिन दीदी बार बार गलतिया कर रही थी. अब ये गलती वो जानबूझकर कर रही थी या सच में उनसे गलती हो रही थी. ये नहीं पता. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.
मैं- इस तरह तो आप कभी भी कार चलना नहीं सिख पाएंगी.
सरिता दी- तो क्या करू मैं. कोशिश तो कर रही हूँ मैं.
मैं- अच्छा एक काम करता हूँ. मैं ड्राइविंग शीट पर बैठ जाता हूँ और आप मेरी गॉड में बैठ जाना. उसके बाद आप कार चलना. मैं आपको बताता भी चलूँगा. कैसे चलना है और कुछ गलती होने पर संभल भी लूंगा. दीदी ने कुछ देर सोचा. उसके बाद उन्होंने हाँ कर दिया.
सरिता दी- तू ठीक कर रहा है. ऐसा hi करते हैं.
इतना कहकर दीदी ड्राइविंग शीट से उतर गई और मैं ड्राइविंग शीट पर जाकर बैठ गया. दीदी की अधनंगी चूचिया देख कर मेरा लुंड पहले से hi खड़ा था. ऊपर से ये सोचकर की दीदी मेरी गॉड में बैठेंगी. और ज्यादा तीते हो गया. मैं ड्राइविंग शीट पर बैठते टाइम अपने लुंड को अर्जेस्ट किया. और जब बैठा तो लोअर में एक तम्बू बन गया. दीदी जब मेरी गॉड में बैठने के लिए आई तो उनकी नज़र सीधे मेरे खड़े लुंड पर पड़ी. तो वो रुक गई और मेरे लुंड को देखने लगी.
दीदी के सर गाड़ी के अंदर था. और वह झुकी हुई थी. जिसके कारन उनकी ृषभरी चूचिया कपडे फाड़कर बहार आने को हो रही थी. मैं भी उनकी चूचियों के देख रहा था. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़र ऊपर उठाई तो मुझे अपनी चूचियों को देखते पाया. मैंने भी अपनी नज़र ऊपर उठाई. हम दोनों की नज़ारे मिली. कुछ देर तक मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी अंदर आई और मेरे खड़े लुंड पर बैठ गई. दीदी की गद्देदार गांड मेरे लुंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से और उनकी गांड के दरार में मेरा लुंड घुसने से दोनों के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई.
फिर दीदी ने कार सम्बल ली. तो मैंने उनके दोनों पेअर के ऊपर अपने पेअर रख दिए. गियर वाले हाँथ पर एक हाँथ रख दिया और स्टेरिंग पर उनके हाँथ पर अपना हाँथ रखा. फिर दीदी ने गाड़ी स्टार्ट की और चलने लगी. मैंने भी उनका सहयोग करता रहा जब मैंने देखा की दीदी अब गाड़ी संभल चुकी हैं तो मैंने स्टेरिंग और गियर वाला हाँथ उठाकर दीदी के पेट पर रख लिया और सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपने पेट पर लगते hi दीदी का शरीर लहरा गया. मगर दीदी गाड़ी चलती रही.
कुछ देर पेट सहलाने के बाद मैंने अपने दोनों हाँथ को ऊपर करते हुवे उनकी बड़ी बड़ी बहार निकली हुई चूचियों पर रख दिया. मेरा हाँथ अपनी चूचियों पर लगते hi दीदी ने एक झटके में गाड़ी रोक दी. मैंने उन्हें बचने के लिए उनकी चूचियों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. गाड़ी रुकने के बाद दीदी ने पीछे घूमकर मेरी आँखों में देखा और फिर से आगे देखने लगी. दीदी ने फिर गाड़ी स्टार्ट की और चलने लगी.
जब दीदी फिर से गाड़ी चलने लगी तो मैं उनकी चूचियों को हलके हलके दबाने लगा. मेरा लुंड दीदी की गांड पैर ठीकर मार रहा था. चूचिया दबाते दबाते मैंने अपने होंठ दीदी के कंडे पर रख दिए. मेरे होंठो का स्पर्श पाकर दीदी के मुंह से एक aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh निकल गई. कुछ देर तक चूचिया धीरे धीरे दबाने के बाद मैंने दीदी की दोनों चूचियों का अपनी हथेली में रखा और जीभ निकल कर कंधे को चाटते हुवे उनकी चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई और गाड़ी फिर से बंद हो गई.
सरिता दी- AAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh AAAbhiiiiiiiiiii oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मत कर न. ऐसी गायआदिई कैसी चलाऊंगी.
मैं- अगर मेरे कहे अनुसार आप चलेंगी तो आप हर गाड़ी की सवारी कर सकती हैं वो भी बड़े आराम से.
मेरी बात सुनकर दीदी ने चेहरा मेरी तरफ किया और मेरी तरफ देखने लगी मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे. अपनी जीभ उनके गलो पर फेरने लगा. दीदी ने अपना चेहरा घुमा लिया. तो मैंने एक हाँथ उनकी एक चुकी से हटाकर उनके चेहरे को पकड़ा और अपनी तरफ घुमा लिया. दीदी फिर से मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखे वासना के कारन सुर्ख हो गाइट hi. उनके होंठ फड़फड़ा रहे थे और साँस तेज़ी से चल रही थी. मैंने एक हाथ से उनकी चूचिय को बढ़ाते हुवे अपने होंठ बढाकर दीदी के होंठो पर रख दिया. मेरे होंठ का स्पर्श पाकर दीदी का शरीर कैंप गया और उन्होंने अपने होंठ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उनके होंठो को आज़ाद नहीं किया.
3 मिनट तक उनके होंठो को चूसने के बाद दीदी ने भी थोड़ा रिस्पांस देना शुरू किया और वो भी अब मेरे होंठ को थोड़ा बहुत चूसने लगी थी. मैं लगातार उनकी चूचियों को बदल बदल कर दबा रहा था. कुछ देर तक चूचियों को दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी t-shirt में हाँथ डालने की कोशिश की तो दीदी ने मेरा हाँथ पकड़ लिया. और मेरी आँखों में देखते हुवे न का इशारा करने लगी. फिर मैंने उनके चेहरे वाला हाँथ हटा लिया और उसे उनके पेट पर रख दिया. मेरे हाँथ हटाने के बाद भी दीदी ने अपना चेहरा आगे नहीं घुमाया.
कार अभी भी बंद hi थी. और दीदी मेरी गॉड में बैठकर मेरे होंठो को चूस रही thi.maine फिर से t-shirt के अंदर जोर लगाकर हाँथ डालने की कोशिश की और थोड़ी देर में मैं कामयाब हो गया. अब दीदी की चुकी ब्रा के ऊपर से मेरे हाँथ में थी. मैं उनकी चुकी को मसलने लगा और अपना पेट वाला हाँथ हटाकर लेग्गी के ऊपर से उनकी छूट पर रख दिया. छूट पर हाँथ पड़ते hi दीदी का शरीर अकड़ गया उन्होंने किश तोड़ी और मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रक् दिया. लेकिन मैं उनके हाँथ रखने के बावजूद दीदी की छूट को सहलाने लगा दीदी के मुंह से ssssssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी.
दीदी की लेग्गी छूट के पास एकदम गीली हो गई thi.didi की छूट ने बहुत राश छोड़ा था. थोड़ी देर तक जब उनकी छूट और चुकी के रगड़े से दीदी एकदम गरम हो गई और अपना मुंह पीछे घुमाकर मुझे किश करने लगी. मैंने भी किश में दीदी का साथ देने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की छूट और चुकी को अपनी मुठी में भरा और किश करते हुवे उन्हें जोर से दबा दिया. दीदी मादकता से चीख पड़ी.
सरिता दीदी- AAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyyyyyy ाबबबबबभीइइइइइइ oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh डीईईडी बबबबभाआईईईईई दरररररडडडडडडड हुओटाआ हैईईई.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..