Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 9 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane



अपडेट-69





सरिता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मामयिययियीय hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Maaaaaaaaaarrrrrrrrrrrr gaaaaaaaaaaaai माहाऎणंन्न.



मेरे इस हमले से दीदी ने चीखते हुवे मुझे धक्का देखर पीछे किया और मेरे कमरे से निकल कर निचे चली गई.



अब आगे



सरिता दीदी के निचे जाने के बाद मैं भी बाथरूम में गया. अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत किया. और तैयार होकर अपने काम पर निकल गया. वह से 1 हॉर्स में अपना काम समेत कर मैं घर चला आया. मैंने बेल्ल बजे तो मनीषा ने दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलकर वो तुरंत अपने कमरे में चली गई. जब मैं घर में एंटर हुवा तो उस समय हॉल में कोई नहीं था. अभी मैं ऊपर जाने के लिए सीधी के पहले स्टेप पर पेअर रखा hi था की बगल वाले बाथरूम का दरवाज़ा खुला और उसमे से सरिता दीदी बहार निकली.



दीदी अभी अभी नहाकर बहार आई थी. उन्होंने अपने जिस्म पर एक टॉवल लपेटा हुवा था जो उनकी आधी चूचियों से शुरू होकर उनकी गांड तक आता था. जब दीदी ने मुझे देखा तो वही रुक गई और मेरी तरफ एक ऐडा से देखने लगी.



मैं बस दीदी की अधनंगी चूचियों के देखे जा रहा था. दीदी के बालो से पानी उनके कंधो पर गिरकर निचे सरकते हुवे उनकी चूचियों की घाटी में गम हो रहा था. मैं दीदी के इस अनुपम सौंदर्य को अपनी आँखों से पि रहा था. मैंने एक नजर उनकी चूचियों से उठाकर दीदी के चेहरे की तरफ देखा तो दीदी मुस्कुरा रही थी. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.

सरिता दी- ऐसे आँखे पहाड़ पहाड़ कर क्या देख रहा है. कभी कोई लड़की नहीं देखि क्या.

मैं- लड़की तो बहुत देखि है. लेकिन ऐसी लड़की कही नहीं देखि दीदी. आप इतनी ज्यादा सुन्दर हैं की मैं आपको देखने के बाद अपनी पलके झपकना भूल गया हूँ.

सरिता दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई और शरमाते हुवे बोली

सरिता दी- चल हैट मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ. जितनी तू तारीफ कर रहा है.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ दीदी मैंने आप के जैसी खूबसूरत लड़की आज तक नहीं देखि. आप खूबसूरत भी हो और……………………… (रुक गया)

सरिता दी- खूबसूरत भी हूँ और. आगे बोल न.

मैं- अरे दीदी. कुछ नहीं जाने दीजिए न.

सरिता दी- अरे बता न. शर्मा क्यों रहा है.

मैं- दीदी वो आप न वो खूबसूरत होने के साथ साथ बहुत हॉट भी हैं.



सरिता दीदी- चुप कर बेशरम अपनी बहन को हॉट बोलता है.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ. आप बहुत खूबसूरत और हॉट हो. अगर आप मेरी बहन न होती हो मैं आपको apni………….(ruk गया)

सरिता दी- अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता तू.

मैं- कुछ नहीं दीदी. आप बहन हो न मेरी. वो गलती से निकल गया मुंह से.

सरिता दी- हाँ पता है तेरे मुंह से सब गलती से निकलते है. अच्छा बता न अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता.

मैं- जाने दो न दी. आप नाराज़ हो जाओगी.

सरिता दी- मैं नाराज़ नहीं होउंगी तू बोल.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड बना लेता और बहुत प्यार करता.

सरिता दी- चल हैट बेशरम. तू कितना कमीना हो गया है अपनी बहन को गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है.

मैं- अगर आप मेरी बहन न होती तो पक्का आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनता. लेकिन अगर आप मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हैं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

सरिता दी- (मुस्कुराते हुवे) चल हैट बेशरम तेरी गिर्ल्फ्रेंड बने मेरी जुटती.

इतना कहकर वो कपडे चेंज करने के लिए कमरे में जाने लगी. मेरा लुंड जो अब तक दीदी की गरम जवानी देखकर पंत में तन गया था मैंने उसपे अपना हाथ रख दिया और दीदी के मटकती गांड को देखने लगा. दरवाज़े पे पहुंचकर दीदी ने मेरी तरफ dekha.unki नज़र मेरे लुंड पर चली गई. उन्होंने मेरे लुंड को देखते हुवे अपने टॉवल को दोनों तरफ से पकड़का फैला दिया. और हंसती हुई कमरे में चली गई. मैं बस आँखे फाडे लुंड को सहलाते हुवे उनकी मटकती गांड को देखता रहा.



कुछ देर तक वही खड़े रहने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और अपना काम करने लगा. अपना काम फिनिश करने के बाद मुझे सविता दीदी का ध्यान आया. मैंने आज सुबह से उनसे बात नहीं की थी. तो मैंने अपना फ़ोन निकला और सविता दीदी को मश्ग किया. थोड़ी देर बाद रपल्य आ गया.

मैं- Hello दीदी. कैसी हो.

सविता दीदी- मैं ठीक हूँ. अभी टाइम मिला तुम्हे मुझको याद करने का.

मैं- सॉरी सविता. वो सुबह से बिजी था इसलिए समय नहीं मिल पाया.

सविता दीदी- चल कोई बात नहीं. और क्या कर रहे हो.

मैं- कुछ नहीं सविता. तुम्हारे पास आ जाऊ.

सविता दी- नहीं. अभी सरिता और मनीषा दोनों घर में हैं और तुम किओ न कोई उलटी सीधी हरकत जर्रूर करोगे. अगर उन्होंने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी.

मैं- कुछ नहीं करूँगा सविता. बस तुमको देखना था.

सविता दी- तू समझा कर अभी. किसी ने ने देख लिया तो मेरी क्या इज़्ज़त रहेगी फिर.

मैं- अच्छा ठीक है. तो रात में आ जाना फिर ऊपर.

सविता दी- मन तो मेरा भी है लेकिन अभी कल पकडे जाने से बचे थे, तो कैसे औ.

मैं- आ जाना सविता और आते समय सीधी वाला गेट बंद करके आना.

सविता दी- चल देखती हूँ. क्या हो सकता है.

मैं- तुमको देखने था तो अपनी फोटो भेजो न सविता.

सविता दी- रात में आउंगी तब देख लेना.

मैं- रात को तो देखूंगा hi. लेकिन अभी भी देखना है. और थोड़ा उस तरह की.

सविता दी- नौगहत्य. अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद सविता दीदी ने एक फोटो भेजी. इसमें दीदी ने सदी पहनी हुई थी. ब्लाउज नहीं पहना था दीदी ने. और सदी का पल्लू ब्रा के ऊपर अपनी चूचियों पर डाला हुवा था.



मैं- ये क्या सविता. अपना पल्लू हककर भेजो न.

सविता दी- तू बहुत बदमाश हो गया है. अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे वो ब्रा में थी. ब्रा में दीदी की चूचिया एकदम पहाड़ की छोटी की तरह तानी हुई थी. मेरा तो लुंड टनटनाने लगा दीदी की चूचिया देखकर.



Main-waah सविता क्या जन्मऋ चूचिया हैं तुम्हारी. एकदम तानी हुई. इन्हे तो मैं मसल मसल कर ढीला करूँगा. देखना तुम. अच्छा एक फोटो ब्रा को उतर कर भी भेज दो.

सरिता दी- चल हैट. अब मैं कोई फोटो नहीं भेजने वाली. अब जो होना होगा वो रात में आने के बाद hi होगा. अब फ़ोन रखो मुझे कुछ काम है.

मैंने अपना फ़ोन साइड में रख दिया और सो गया. शाम को मैं सोकर उठा तो मां पापा घर आ गए थे. मैं जब हॉल में आया तो सरिता दीदी तैयार बैठी थी. मुझे देखते hi कहा.

सरिता दी- मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी. चलो चलते हैं अब.

मैं- अब 5 मिनट दीदी. थोड़ा पानी तो पिने दो.

फिर पानी पीकर मैं और सरिता दी गाड़ी में बैठकर मैदान की तरफ चलर गए. गाड़ी में बैठने के बाद दीदी ने अपना शॉल अपने जिस्म से उतर दिया. दीदी ने एक t-shirt और लेग्गी पहनी हुई थी. T-shirt से दीदी की आधी चूचिया बहार दिख रही थी. दीदी ने शॉल कार के पीछे रख दिया और मेरी तरफ देखने लगी. मैंने उनकी चूचियों के देखकर कहा.



मैं- यू अरे दम्म सेक्सी दीदी. बहुत hi खूबसूरत.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और सामने की तरफ देखने लगी. कुछ देर में हम मैदान में पहुंच गए. वह आकर मैंने दीदी को कुछ समझाया और ड्राइविंग शीट से उतर गया. दीदी ड्राइविंग शीट पर बैठ गई और कार चलने लगी. लेकिन दीदी बार बार गलतिया कर रही थी. अब ये गलती वो जानबूझकर कर रही थी या सच में उनसे गलती हो रही थी. ये नहीं पता. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- इस तरह तो आप कभी भी कार चलना नहीं सिख पाएंगी.

सरिता दी- तो क्या करू मैं. कोशिश तो कर रही हूँ मैं.

मैं- अच्छा एक काम करता हूँ. मैं ड्राइविंग शीट पर बैठ जाता हूँ और आप मेरी गॉड में बैठ जाना. उसके बाद आप कार चलना. मैं आपको बताता भी चलूँगा. कैसे चलना है और कुछ गलती होने पर संभल भी लूंगा. दीदी ने कुछ देर सोचा. उसके बाद उन्होंने हाँ कर दिया.

सरिता दी- तू ठीक कर रहा है. ऐसा hi करते हैं.

इतना कहकर दीदी ड्राइविंग शीट से उतर गई और मैं ड्राइविंग शीट पर जाकर बैठ गया. दीदी की अधनंगी चूचिया देख कर मेरा लुंड पहले से hi खड़ा था. ऊपर से ये सोचकर की दीदी मेरी गॉड में बैठेंगी. और ज्यादा तीते हो गया. मैं ड्राइविंग शीट पर बैठते टाइम अपने लुंड को अर्जेस्ट किया. और जब बैठा तो लोअर में एक तम्बू बन गया. दीदी जब मेरी गॉड में बैठने के लिए आई तो उनकी नज़र सीधे मेरे खड़े लुंड पर पड़ी. तो वो रुक गई और मेरे लुंड को देखने लगी.

दीदी के सर गाड़ी के अंदर था. और वह झुकी हुई थी. जिसके कारन उनकी ृषभरी चूचिया कपडे फाड़कर बहार आने को हो रही थी. मैं भी उनकी चूचियों के देख रहा था. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़र ऊपर उठाई तो मुझे अपनी चूचियों को देखते पाया. मैंने भी अपनी नज़र ऊपर उठाई. हम दोनों की नज़ारे मिली. कुछ देर तक मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी अंदर आई और मेरे खड़े लुंड पर बैठ गई. दीदी की गद्देदार गांड मेरे लुंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से और उनकी गांड के दरार में मेरा लुंड घुसने से दोनों के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

फिर दीदी ने कार सम्बल ली. तो मैंने उनके दोनों पेअर के ऊपर अपने पेअर रख दिए. गियर वाले हाँथ पर एक हाँथ रख दिया और स्टेरिंग पर उनके हाँथ पर अपना हाँथ रखा. फिर दीदी ने गाड़ी स्टार्ट की और चलने लगी. मैंने भी उनका सहयोग करता रहा जब मैंने देखा की दीदी अब गाड़ी संभल चुकी हैं तो मैंने स्टेरिंग और गियर वाला हाँथ उठाकर दीदी के पेट पर रख लिया और सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपने पेट पर लगते hi दीदी का शरीर लहरा गया. मगर दीदी गाड़ी चलती रही.

कुछ देर पेट सहलाने के बाद मैंने अपने दोनों हाँथ को ऊपर करते हुवे उनकी बड़ी बड़ी बहार निकली हुई चूचियों पर रख दिया. मेरा हाँथ अपनी चूचियों पर लगते hi दीदी ने एक झटके में गाड़ी रोक दी. मैंने उन्हें बचने के लिए उनकी चूचियों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. गाड़ी रुकने के बाद दीदी ने पीछे घूमकर मेरी आँखों में देखा और फिर से आगे देखने लगी. दीदी ने फिर गाड़ी स्टार्ट की और चलने लगी.

जब दीदी फिर से गाड़ी चलने लगी तो मैं उनकी चूचियों को हलके हलके दबाने लगा. मेरा लुंड दीदी की गांड पैर ठीकर मार रहा था. चूचिया दबाते दबाते मैंने अपने होंठ दीदी के कंडे पर रख दिए. मेरे होंठो का स्पर्श पाकर दीदी के मुंह से एक aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh निकल गई. कुछ देर तक चूचिया धीरे धीरे दबाने के बाद मैंने दीदी की दोनों चूचियों का अपनी हथेली में रखा और जीभ निकल कर कंधे को चाटते हुवे उनकी चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई और गाड़ी फिर से बंद हो गई.



सरिता दी- AAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh AAAbhiiiiiiiiiii oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मत कर न. ऐसी गायआदिई कैसी चलाऊंगी.

मैं- अगर मेरे कहे अनुसार आप चलेंगी तो आप हर गाड़ी की सवारी कर सकती हैं वो भी बड़े आराम से.

मेरी बात सुनकर दीदी ने चेहरा मेरी तरफ किया और मेरी तरफ देखने लगी मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे. अपनी जीभ उनके गलो पर फेरने लगा. दीदी ने अपना चेहरा घुमा लिया. तो मैंने एक हाँथ उनकी एक चुकी से हटाकर उनके चेहरे को पकड़ा और अपनी तरफ घुमा लिया. दीदी फिर से मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखे वासना के कारन सुर्ख हो गाइट hi. उनके होंठ फड़फड़ा रहे थे और साँस तेज़ी से चल रही थी. मैंने एक हाथ से उनकी चूचिय को बढ़ाते हुवे अपने होंठ बढाकर दीदी के होंठो पर रख दिया. मेरे होंठ का स्पर्श पाकर दीदी का शरीर कैंप गया और उन्होंने अपने होंठ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उनके होंठो को आज़ाद नहीं किया.



3 मिनट तक उनके होंठो को चूसने के बाद दीदी ने भी थोड़ा रिस्पांस देना शुरू किया और वो भी अब मेरे होंठ को थोड़ा बहुत चूसने लगी थी. मैं लगातार उनकी चूचियों को बदल बदल कर दबा रहा था. कुछ देर तक चूचियों को दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी t-shirt में हाँथ डालने की कोशिश की तो दीदी ने मेरा हाँथ पकड़ लिया. और मेरी आँखों में देखते हुवे न का इशारा करने लगी. फिर मैंने उनके चेहरे वाला हाँथ हटा लिया और उसे उनके पेट पर रख दिया. मेरे हाँथ हटाने के बाद भी दीदी ने अपना चेहरा आगे नहीं घुमाया.

कार अभी भी बंद hi थी. और दीदी मेरी गॉड में बैठकर मेरे होंठो को चूस रही thi.maine फिर से t-shirt के अंदर जोर लगाकर हाँथ डालने की कोशिश की और थोड़ी देर में मैं कामयाब हो गया. अब दीदी की चुकी ब्रा के ऊपर से मेरे हाँथ में थी. मैं उनकी चुकी को मसलने लगा और अपना पेट वाला हाँथ हटाकर लेग्गी के ऊपर से उनकी छूट पर रख दिया. छूट पर हाँथ पड़ते hi दीदी का शरीर अकड़ गया उन्होंने किश तोड़ी और मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रक् दिया. लेकिन मैं उनके हाँथ रखने के बावजूद दीदी की छूट को सहलाने लगा दीदी के मुंह से ssssssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी.

दीदी की लेग्गी छूट के पास एकदम गीली हो गई thi.didi की छूट ने बहुत राश छोड़ा था. थोड़ी देर तक जब उनकी छूट और चुकी के रगड़े से दीदी एकदम गरम हो गई और अपना मुंह पीछे घुमाकर मुझे किश करने लगी. मैंने भी किश में दीदी का साथ देने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की छूट और चुकी को अपनी मुठी में भरा और किश करते हुवे उन्हें जोर से दबा दिया. दीदी मादकता से चीख पड़ी.

सरिता दीदी- AAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyyyyyy ाबबबबबभीइइइइइइ oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh डीईईडी बबबबभाआईईईईई दरररररडडडडडडड हुओटाआ हैईईई.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-70



जब मैंने दीदी की चुकी और छूट जोर से दबायी तो दीदी मादकता से चीख पड़ी तो मैंने दीदी से पूछा.

मैं- क्या हुवा दीदी. आपको अच्छा नहीं लग रहा है क्या.

सरिता दी ने मेरी बातो का कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने फिर से उनको किश करते हुवे उनकी छूट और चुकी को मुठी में भरकर दबा दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.

सरिता दी- AAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मायआमम्मीयीय माआआर गाआआआई मइईईईन्न्न. ददददददहरररररररे अअअअअअभीइइइइ दाआरड़ड़ड़ड़ड़ड़ होताआआआ हीीीं.

Main-bataiye न दीदी आपको मज़ा नहीं आ रहा है क्या.

सरिता दी- (दीदी मदहोशी में बिली) तू इतनी तेज़ दबाता है. बहुत दर्द होता है. मज़ा कैसे आएगा.

मैं- (दीदी की छूट को दबाते हुवे)- लेकिन आपकी ये तो मज़े ले लेकर पानी छोड़ रही थी.

सरिता दी- एक तो तू मुझे दर्द देता है और ऊपर से मुझे परेशां भी कर रहा है.

मैं- अभी कहा दर्द दिया आपको. ये तो बस एक ट्रेलर था. पूरी फिल्म तो अभी बाकि है.

इतना बोलने के बाद मैंने अपने दन्त से दीदी के गार्डन के पास पकड़ा और जोर से दन्त काट लिया और अपने हांथो से दीदी की छूट और चुकी को जोर से मसल दिया. दीदी सिसक पड़ी और एक थप्पड़ मेरे गाल पर धीरे से मार दिया.

सरिता दी- AAAAAAAAAAaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh. तू जानवर है kyaaaaaaaaaa. क्यों मीरीईईई जाआआं lennnnnnnnnna चाहता है. मुझीऐ नाहीइ सीखना अअअअअअब गाड़ी चलना. चल अब घर चल. कोई इतनी तेज़ी से दबाता है क्या. बहनन हूँ तेरी कुछ तो रहम करना चाहिए.

मैं- अच्छा सॉरी दीदी. मैंने जानबूझकर नहीं किया वो गलती से हो gaya.(masum चेहरा बनाकर)

सरिता दी- है तू कुछ भी जानबूझकर नहीं करता सब गलती से हो जाता है न.

उसके बाद हम घर की तरफ चल पड़े. रस्ते में दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- अच्छा अभी ये बता. तेरी कोई गिर्ल्फ्रेंड है.

मैं- कहाँ दीदी कोई नहीं है. और जिसको मैं गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता हूँ वो बनती hi नहीं है.

सरिता दी- अच्छा. कौन है जो मेरे इतने प्यारे भाई को मन कर रही है.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) सरिता नाम है उसका. मुझसे 2 साल बड़ी है. लेकिन देखने में बहुत सुन्दर और सेक्सी है. इसीलिए तो मैं उसपर मर मिटा हूँ. लेकिन वो समझ hi नहीं रही है.

सरिता di(Apni तारीफ सुनकर ख़ुशी से शरमाते हुवे). हो सकता है की वो भी तेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हो लेकिन कह नहीं प् रही हो.

मैं- अच्छा अगर वो कह नहीं प् रही है तो इशारे में hi बता दी. अच्छा याद आया. (उनकी चूचियों की तरफ इशारा करके) उसके इन दोनों पर टिल है. अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती है तो वो बिना t-shirt के मुझे उनकी फोटो भेज दे. मैं समझ जाऊंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई और मुस्कुराते हुवे बहार देखने लगी. थोड़ी देर में हम घर आ गए. गाड़ी कड़ी करके मैं अपने कमरे में चला गया. खाना खाने के समय मैंने खाना खाया. कुछ देर मम्मी पापा से बात की और वापस अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर बाद मीरा वाली ईद पर मश्ग आया. मैंने रपल्य किया.

म- ही सेक्सी कैसी हो.

सरिता दी- एकदम मस्त आप बताओ.

म- मैं भी ठीक हूँ. और बताइये कुछ बात आगे बढ़ी.

मेरे ये पूछने पर दीदी ने आज दिन भर में जो कुछ भी हुवा उसको बता दिया. जो मैं जनता hi था. सब कुछ सुनाने के बाद मैंने दीदी से कहा.

म- क्या बात है यार बहुत फ़ास्ट जा रही हो. लगता है हफ्ते 10 दिन के अंदर अपने भाई से अपनी छूट छुड़वा हो लोगी.

सरिता दी- चाल हैट. वो सब तो ठीक है लेकिन एक प्रॉब्लम हो रही है मुझे.

म-( थोड़ा दर कर की कही इनका मन तो नहीं बदल गया) कैसी प्रॉब्लम.

सरिता दी- यार अभी बिलकुल जानवर है. बहुत जोर जोर से दबाता है. बहुत दर्द होता है.

म- (मेरी जान में जान आई) अरे ये भी कोई प्रॉब्लम है. इसी दर्द में तो मज़ा है. मर्द जितनी जोर जोर से गांड और चूचिया दबाता है उतना hi ज्यादा मज़ा आता है.

सरिता दी- लेकिन जो दर्द होता है उसका क्या.

म- मैं आज एक बात आपको बता रही हूँ उसे ध्यान से सुनो. अगर अपने भाई से चुदाई का असली आनंद उठाना है तो उसे रोकना मत. वो जितनी जोर से दबाएगा पहले तो आपको दर्द होगा, लेकिन आपको बहुत मज़ा आएगा. और मर्द लोग छोड़ते समय गालिया भी खूब देते हैं. तो अगर तुम्हारा भाई भी तुम्हे छोड़ते समय गालिया दे तो आप भी उसको गली देना. जिससे चुदाई का मज़ा दुगुना हो जाएगा. उसके बाद तुम खुद फील करोगी की मैंने गलत नहीं कहा.

सरिता दी- लेकिन गन्दी गन्दी गली मैं कैसे दे पाऊँगी.

म- क्यों नहीं दे पाओगी. कोई बचपन से नहीं खिख लेता. और कुछ मर्द बहुत रगड़ रगड़ के छोड़ते हैं. छोड़ते समय गांड पर चूचियों पर और गाल पर थप्पड़ भी मरते हैं. जिससे चुदाई में बहुत मज़ा आता है. तुम्हारा भाई भी इसी केटेगरी का लग रहा है. तो मैं तुम्हे पहले hi बता देती हूँ की अगर तुम्हारे भाई ने तुमको खूब रगड़ रगड़ के छोड़ा तो उससे नाराज़ मत हो जाना. क्योंकि पहले तुमको अच्छा नहीं लगेगा. लेकिन जैसे जैसे चुदाई आगे बढ़ती जाएगी. तुमको वो मज़ा आएगा जो तुमने सोचा भी नहीं होगा.

सरिता दीदी- लेकिन मैं ये सब कैसे कर पाऊँगी. ये सब मुझसे नहीं होगा. मैं गन्दी गन्दी गालिया नहीं सुन पाऊँगी. और चुड़ै के समय दर्द बर्दास्त नहीं कर पाऊँगी.

म- तुम सब कर लोगी, बस थोड़ा हौसला रखना पड़ेगा तुमको. मैं फिर से तुमको बता रही हूँ की ज़िन्दगी का जो मज़ा रफ़ चुदाई में आता है. वो नार्मल चुदाई में नहीं आता. अगर अपने भाई से चुदाई का पूरा आनंद लेना है तो जैसा मैं कहती हूँ वैसे hi करना.

सरिता दी- मुझे बहुत दर लग रहा है. कैसे कर पाऊँगी मैं ये सब.

म- (हँसते हुवे). अरे तुम्हारी छूट में तो इतनी आग लगी हुई है की तुम गधे का भी लुंड ले लो. और भाई का लुंड लेने में नखरे कर रही हो.

सरिता दी- तुम बहुत बकवास करती हो यार. मैंने कब कहा की मैं भाई का लुंड नहीं लुंगी. लेकिन वो गली वाली. मैं कैसे मैनेज कर पाऊँगी.

म- तुम सब कर लोगी. और मेरी बात मनो तो जैसा मैंने कहा है वैसे hi करो.

सरिता दी- एक बात और सुनो. अभी इंदिरेक्टली मुझसे बोल रहा था की वो मुझे अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है.

म- अरे वाह ये तो बहुत hi ख़ुशी की बात है. इसका मतलब ये है की वो तुम्हे हर हॉल में छोड़ना चाहता है. मेरी मान तो हाँ कर दे. तेरी मंज़िल और भी आसान हो जाएगी.

सरिता दी- मैं उससे ये नहीं बोल पाऊँगी की मैं उसकी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हूँ.

म- (मैं कुछ सोचने का नाटक करते हुवे). अगर सामने से नहीं बोल प् रही हो तो कोई इशारा hi दे दो जिससे वो समझ जाये की आप उसकी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हो.

सरिता दी- उसने कहा है की अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनने के लिए मान गई है तो अपनी चूचियों की फोटो भेजे ब्रा में.

म- तो देर किस बात की है. शुभ काम में देरी नहीं करनी चाहिए. मेरी मनो तो तुरंत 2-4 फोटो भेज दो. फिर देखना वो तुम्हारी छूट सूंघते हुवे तुम्हारे आगे पीछे घूमेगा.

सरिता दी- तुम बहुत कामिनी हो. यही बात अचे से नहीं कर सकती हो.

M-tumse गन्दी बात करने में बहुत मज़ा आता है.

सरिता दी- तुम तो बेशर्म थी hi मुझे भी अपनी तरह बना रही हो.

म- अगर अपनी तरह तुमको बेशर्म नहीं बनाउंगी तो तुम अपने भाई से चुड़ोगी कैसे. अच्छा अब मैं जा रही हूँ.

सरिता di-Haan जाइये. भाई जो बुला रहा होगा. हाहाहाहा. गुड़ नाईट.

उसके बाद मैंने मोबाइल मैंने मोबाइल साइड में रख दिया. अभी थोड़ी देर hi हुई थी की सरिता दीदी का मश्ग व्हाट्सप्प पर मेरे पास आया.

सरिता दी- ही अभी.

मैं- ही दीदी.

सरिता दी- क्या कर रहा है तू.

मैं- कुछ नहीं दीदी बस लेता हुआ था और मूवी देख रहा था.

सरिता दी- कही कल की तरह वो वाली मूवी तो नहीं देख रहा है. तू कितना गन्दा हो गया है अभी.

मैं- अब क्या करू दीदी. मेरी जो गिर्ल्फ्रेंड थी नताशा. वो थो मुझे छोड़कर चली गयी. तो क्या करू मैं. इसी से काम चला रहा हूँ.

सरिता दी- क्यों तेरी वो नै गिर्ल्फ्रेंड है न सरिता उसने तुझे कुछ जवाब दिया की वो तेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती हैं या नहीं.

मैं- कहा दीदी. उसने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया. अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बन जाये तो मैं ये मूवी देखना बंद कर दूंगा.

सरिता दी- उसके गिर्ल्फ्रेंड बनने के बाद ये मूवी देखना क्यों बंद कर देगा तू.

मैं- क्योंकि जो कुछ देखने के लिए मैं ये मूवी देखता हूँ. वो सब मैं अपनी गिर्ल्फ्रेंड में देखूंगा.

सरिता दी- केवल देखेगा hi बस.

मैं- नहीं दीदी. अगर मेरी गिर्ल्फ्रेंड की मर्जी होगी तो मैं उसके साथ वो सब करूँगा जो इन फिल्मो में दिखाया जाता है. लेकिन ये तभी होगा जब वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनेगी.

सरिता दी- बड़ा उतावला हो रहा है गिर्ल्फ्रेंड बनाना के लिए.

मैं- अब क्या करू दीदी. वो मेरे दिलो दिमाग में बस गई है. सोते जागते बस उसका hi चेहरा नज़रो के सामने घूमता रहता है.

दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई और शर्म भी आई उनको. लेकिन आखिर ठहरी एक लड़की hi. तो अपनी और तारीफ सुनने के लिए मुझसे कहा.

सरिता di-Itni पसंद है वो तुझको. ऐसा क्या खास है उसमे जो तू उसके पीछे पागल है.

मैं - ये पूछो दीदी की क्या नहीं है उसमे. उसके बाल इतने मुलायम हैं जैसे कोई रेशम हो. उसके गाल एकदम सेब जैसे लाल लाल हैं. उसकी आँखे एकदम हिरणी के जैसी काली काली है. उनके होंठो का तो पूछो hi मत. एकदम गुलाब की पंखुड़ी की तरह मुलायम. उसकी सुराहीदार गार्डन और…………………



दीदी अपनी तारीफ सुनकर ख़ुशी से झूम उठी. लेकिन मैंने और वाक्य अधूरे छोड़े तो दीदी तुरंत बोल उठी.

सरिता दीदी- उसकी सुराहीदार गार्डन और………………….. आगे क्या है वो तो बोल.

मैं- बस हो गया दीदी. उसकी तारीफ बहुत हो गई. अब सो जाइये.

सरिता दी- नहीं मुझे जानना है. तू बोलता है या मार खायेगा मुझसे.

मैं- यार दीदी आप हर समय मुझे मरने की धमकी देखर सब कुछ जान लेती है और फिर मुझसे नाराज़ हो जाती है. अब मैं नहीं बताउगा. इसके आगे के शब्द थोड़ा बोल्ड टाइप के हैं इसलिए.

सरिता दी- जैसे भी हो. तू बता मुझे सुन्ना है.

मैं- लेकिन आप नाराज़ हो जाओगी उसका क्या.

सरिता दी- चल नहीं नाराज़ होउंगी प्रॉमिस. अब बोल

मैं- लेकिन मैं एकदम खुलकर बोलूंगा. और अगर आप मेरी बात से नाराज़ हो गई तो मैं आपको आज के बाद कुछ भी नहीं बताऊंगा.

सरिता दी- चल ठीक है नहीं होउंगी नाराज़. प्रॉमिस. अब तू बोल.

मैं- उसकी सुराही दर गार्डन. उसकी बड़ी बड़ी और पर्वत की छोटी के सामान उन्नत चूचिया. उसकी चूचिया कपडे के ऊपर से hi इतनी बड़ी और ठोस लगती हैं की मेरा मन उन्हें देखकर मचल जाता है. उसकी चूचियों को देखकर ऐसा लगता है की उसमे बहुत राश भरा है. मन तो करता है की उसको पकड़कर बिस्तर पर पटक दू और उसके कपडे फाड़कर उसकी चूचियों का सारा राश निचोड़ लू. उसकी चूचिया कपडे के ऊपर से देखकर मेरा ये हॉल है तो उसकी नंगी चूचिया देखकर तो मैं मर hi जाऊंगा. उसकी चूचिया ऐसे है जैसे कोई दसहरी आम हो. एकदम राश से भरपूर है उसकी चूचियां



मेरे इतने खुले लफ्जो में अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर दीदी का चेहरा शर्म से लाल हो गया. और उनके चेहरे पर हाय दिखाई देने लगी. मैंने आगे कहना शुरू किया.

मैं- उसकी केले के तने सामान चिकनी टंगे. एक भी बाल नहीं. ऊपर से उसकी गद्देदार कातिल गांड. एकदम कहर ढाती है. जब वो चलती है तो उसकी गांड ऐसे मटकती है जैसे घडी का पेंडुलम. उसकी गांड को देखकर मन करता है की उसको थप्पड़ मर मर कर लाल कर दू.



मेरी अपने शरीर के अंगो के बारे में ऐसी खुली बात सुनकर दीदी की सांसे तेज़ चलने लगी. और यहाँ मेरा लुंड भी दीदी की खुली तारीफ करके लोअर में तम्बू बन गया था .कुछ देर बाद उन्होंने अपनी सांसे संयत करने के बाद कहा.

सरिता दी- छी अभी तू कितनी गन्दी बाते करता है अपनी होनेवाली गिर्ल्फ्रेंड के बारे में.

मैं- देखा आप फिर नाराज़ हो गई. इसीलिए मैं नहीं बता रहा था.

सरिता दी- मैं नाराज़ नहीं हूँ. लेकिन तू उसकी तारीफ अच्छी लैंग्वेज में भी तो कर सकता था.

मैं- उसकी हरेक अंग की तारीफ करने के लिए अच्छी लैंग्वेज में शब्द hi नहीं हैं दीदी. इसीलिए मुझे उस लैंग्वेज में उसकी तारीफ करनी पड़ी लेकिन क्या फायदा उसने अभी तक कोई इशारा hi नहीं दिया है की वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनना चाहती है या नहीं.

सरिता दी- तुझे बड़ी जल्दी है उसके इशारे की. एक बात बताऊ वो तैयार है तेरी गिर्ल्फ्रेंड बनने के लिए.

मैं- मैं आपके बताने से कैसे मान की वो तैयार है. अगर वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड बनने के लिए तैयार है तो वो मुझे इशारा करे. आपके कहने से थोड़ी होता है.

सरिता दी- अच्छा रुक अभी तुझे प्रूफ देती हूँ.



उसके बाद दीदी ने अपने एक फोटो भेजी जिसमे t-shirt से आधी बहार झांक अपनी चूचियों की फोटो भेजी जिसे देखकर मेरा लुंड और तन गया. उनकी फोटो में उनकी चूचियों के ऊपरी भाग में जो टिल था वो भी दिख रहा था उसको देखकर मैंने दीदी से कहा.

मैं- मैंने उसको सिर्फ ब्रा में चूचियों की फोटो इशारे के रूप में भेजने के लिए कहा था. लेकिन लगता है वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड नहीं बनना चाहती. आप क्यों परेशां हो रही हैं.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने ब्रा में कई अपनी चूचियों की 2 फोटो एकसाथ भेजी. और कैप्शन में लिखा.

सरिता दी- अब तो तुझे यकीं हो गया न की सरिता तुझे अपना बॉयफ्रंड बनाना चाहती है.





उनकी बात सुनकर मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता डार्लिंग. इस ख़ुशी के मौके पर अपनी सेक सेक्सी वाली फोटो और भेज दो.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मुस्कुराते हुवे अपनी बहुत hi कामुक एक और फोटो भेज दी. फोटो भेजने के थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- अच्छा अब बहुत रात हो गई है अब मैं सोने जा रही हूँ. गुड़ नाईट.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-71

मैं- सरिता डार्लिंग. इस ख़ुशी के मौके पर अपनी सेक सेक्सी वाली फोटो और भेज दो.



मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मुस्कुराते हुवे अपनी बहुत hi कामुक एक और फोटो भेज दी. फोटो भेजने के थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अच्छा अब बहुत रात हो गई है अब मैं सोने जा रही हूँ. गुड़ नाईट.



अब आगे

फ़ोन रख कर मैं बिस्तर पर लेट गया और सोचने लगा. अगर आज कोई रूकावट नहीं हुई तो सविता दीदी को तो आज फिर से छोड़ दूंगा. सरिता दीदी भी अब मुझसे पूरी तरह खुल गई हैं. तो हफ्ते 10 दिन में ये भी मेरे लुंड के निचे होंगी. अब बची मनीषा. लेकिन वो तो बहुत प्यारी और मासूम है. और मुझसे शुरू से hi कितना प्यार करती है. तो उसके साथ मैं कैसे ये सब कर पाउगा. लेकिन अगर दोनों दीदियो की चुदाई हमेशा करनी है तो मनीषा को भी छोड़ना hi पड़ेगा. वार्ना किसी दिन उसने देख लिया तो बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा कर देगी.

अभी मैं यही सब सोच रहा था की मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और सविता दीदी कमरे में आई. उनके चेहरे से hi लग रहा था की वो बहुत छुडासी हैं. उन्होंने कल की hi तरह अपने बदन पर लबेदा डाला हुवा था. इसका मतलब था की लबेदा के निचे जरूर कुछ सेक्सी नज़ारा होगा. मैंने दीदी को देखते हुवे हँसते हुवे कहा.

मैं- आ गई मेरी छुडासी सविता डार्लिंग.

सविता दी- तू कभी अचे से बात नहीं कर सकता है क्या.

मैं- मैं तो ऐसा hi हूँ और अब तुम भी ये सब सुनाने की आदत दाल लो.

सविता दी- लगता है तू मुझे बेशरम बना कर hi छोड़ेगा.

मैं- उसी में तो मज़ा है सविता.

दीदी चलते हुवे मेरे बीएड के पास आकर कड़ी हो गई और अपने शरीर ले लबेदा उतारकर फ़ेंक दिया. लबेदा शरीर से उतारते hi मैंने देखा की दीदी सज संवर कर आई थीं उन्होंने कानो में झुमके पहने हुवे थे. गले में एक बड़ा सा हार था जो उनकी चूचियों तक जाता था. मांग में सिन्दूर लगा हुवा था. आँखों में काजल. होंठो पर लाली गली थी, लेकिन दीदी ने अपने जिस्म पर केवल सदी पहनी हुई थी.



उसके निचे जो ब्लाउज था उसके पुरे बटन खुले हुवे था और वह उनकी कमर के पीछे लटक रहा था. दीदी के इस कातिल और मदमस्त रूप को मैं आँखे फाड़कर देख रहा था. दीदी ने जब मुझे इस तरह अपने शरीर को देखता हुवा पाया तो दीदी की हंसी निकल गई और वो हँसते हुवे बोली.

सविता दी- अभी तू तो मुझे ऐसे देख रहा है. जैसे पहली बात मुझे इस अवस्था में देखा है.

मैं- कसम से सविता आज तक मैंने तुम्हरा यह रूप नहीं देखा था. कसम से आज तुम एकदम चुड़क्कड़ लग रही हो. क्या चूचिया हैं तुम्हारी. देखो तुम्हारी चूचियों को सदी के अंदर hi देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया है.

सविता di-tu नहीं सुधर सकता. कुछ तो लिहाज़ कर बड़ी बहन हूँ तेरी. और तू मुझे चुड़क्कड़ बोल रहा है.

मैं- हाँ मैं जनता हूँ की मेरी चुड़क्कड़ा सविता हो.

इतना बोलकर मैंने दीदी को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया .जिससे दीदी सीधा मेरे साइन पर गिर पड़ी. मैंने दीदी को अपने साथ चिपका लिया और उनके होंठो को चूसने लगा. दीदी मुझसे छूटने के लिए कसमसाने लगी. कुछ देर मैंने दीदी के होंठ चूसने के बाद उन्हें छोड़ दिया. दीदी उठकर खड़ी हो गई और बोली.

सविता दी- तू इतना उतावला क्यों रहता है. मैं कही भागी थोड़ी hi जा रही हूँ.

मैं- अब इसमें मेरा क्या दोष. जब तुम्हारी जवानी hi इतनी कातिल है की तुम्हे देखने के बाद मुझसे बर्दास्त hi नहीं होता. मेरा मन तो करता है की मैं तुम्हे घर पर सारा दिन नंगा hi राखु और जब भी मेरा लुंड खड़ा हो उसे तुम्हारी छूट में पेल दू.

सविता दी- तू din-ba-din ठरकी होता जा रहा है. मैं बहन हूँ तेरी कुछ तो इज़्ज़त किया कर.

मैं- इज़्ज़त की बात क्यों कर रही हो (अपने लुंड की तरफ इशारा करके). कल तुम्हारी उसी इज़्ज़त को अपने हथियार से मैंने उतारकर तुम्हे बेशरम बहा दिया था. इतनी जल्दी भूल गई क्या.

सविता दी- (मुस्कुराते हुवे). तुझसे तो बातो में कोई जीत hi नहीं सकता.

दीदी की बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा. मैंने बिस्टेर से उठकर दीदी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखने लगा. उनके कंधो को चूमने लगा. मैंने उनके कंधे से उनकी सदी उतर दी और ब्लाउज को आगे कर दिया. जिससे दीदी का रूप और भी कनक हो गया.



मैंने अपने होंठ दीदी के कंडे से उठाकर दीदी के होंठो पर रख दिया और उनके होंठो को चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. कुछ देर हम दोनों किसिंग करते रहे उनसे बाद मैं दीदी की होंठो पर जीभ फिरना लगा. मेरा इशारा समझ कर दीदी ने अपना मुंह खोल दिया और मेरी जुबान को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. थोड़ी देर हम दोनों एक दूसरे की जीभ बदल बदल कर चूसते रहे.

इस चूसै से दीदी की गरम हो गाइट hi. जिससे उनकी गरम सांसे मेरे चेहरे पर पद रही थी. थोड़ी देर जीभ चूसने के बाद मैं अपनी जीब से दीदी के पुरे चेहरे को चाटने लगा और अपना एक सदी के अंदर दीदी की पेट पर रख दिया और सहलाने लगा. पेट सहलाते सहलाते मैंने दीदी नई नाभि में ऊँगली करने लगा दीदी की नाभि बहुत गहरी थी. थोड़ी देर नाभि में ऊँगली करने के बाद मैंने एक ऊँगली नाभि में पेल दी और अंदर बहार करने लगा. साथ hi साथ उनकी कंडे और गार्डन को चाटने लगा. दीदी के मुंह से sssssssssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. दीदी ने अपनी बांह मेरे गले में दाल ली और मेरे बालो पर हाँथ फेरने लगी. मैं दीदी की नाभि में ऊँगली करते हुवे कहा.

मैं- तुम्हारी नाभि तो बहुत गहरी है सविता एकदम छूट की तरह.

सविता दी- तू कुछ भी बोलता रहता है आजकल. अब क्या इसे भी छोड़ने का मन कर रहा है क्या.

मैं- मन तो बहुत कर रहा है सविता लेकिन मेरा हथियार इतना तगड़ा है की कही तेरा पेट न पहात जाये.

सविता दी- हाँ तू सही कह रहा है. तेरे हथियार की तो मैं दीवानी हो गई हूँ. अगर तेरा मन हो तो इसे भी छोड़ ले.

मैं- अरे दीदी मई तो मज़ाक कर रहा था.

सविता दी- हाँ पता है मुझे. और ऐसे hi मज़ाक करते करते तूने मुझे छोड़ भी दिया. है न

मैं दीदी की बात सुनकर मुस्कुराने लगा. फिर मैंने अपना हाथ बढाकर दीदी का ब्लाउज उनके जिस्म से उतर दिया. जैसे hi ब्लाउज उतरा दीदी ने मुझे पीछे धकेला और अपने पल्लू को अपनी चूचियों पर दाल लिया. मुझे दीदी की हरकत देखकर हंसी आ गई और मैंने कहा.



मैं- कल तो बेशरम बैंकर उछाल उछाल कर अपनी छूट छुड़वा रही थी रंडी और आज देखो तो कैसे शर्मा रही है. हीी रे तिरिया चरित्र.

सविता दी- मैं नहीं छुड़वा रही टी तुझसे तूने hi मुझे पहले बहला फुसला कर बेशरम बनाया और मुझे छोड़ दिया.

मैं- चलो मन लेता हूँ की मैंने तुम्हे बहलाया फुसलाया . लेकिन ये बताओ चुदाई में मज़ा आया था या नहीं.

सविता दी- चल हैट. मैं नहीं बताने वाली. एक तो बहन को छोड़ता है और पूछता है मज़ा आया की नहीं.

मैंने दीदी की बात सुनकर मुस्कुराते हुवे दीदी के पीछे आकर खड़ा हो गया और उनके कंधे से उनका पल्लू निचे कर दिया और अपने होंठ उनके कंधे पर रख दिए. फिर मैंने अपने एक हाँथ को दीदी की चुकी पर रखा और एक हाँथ से दीदी के पेट को सहलाने लगा. मैं दीदी के कंधे और गार्डन को चूमने लगा. जिससे दीदी ने माधोसी में अपने हाथ पीछे मेरे गले में दाल दिए. एक हाँथ से दीदी की चुकी को तेज़ तेज़ से दबाने लगा दीदी के मुंह से ssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने दीदी का पेट सहलाते हुवे मैंने अपने हाथ से दीदी की सदी खोलने लगा. दीदी की सदी खोलकर मैंने उसे बीएड पर रख दिया. अब दीदी के जिस्म पर मात्र एक पंतय बची हुई थी.



मैंने दीदी के कंधे को चूमते चुकी को दबाते हुवे अपना हाँथ दीदी की पंतय के ऊपर से दीदी की छूट सहलाने लगा. जिससे दीदी मचलने लगी. फिर मैंने अपने मुंह में दीदी के कंधे को भरा. चुकी और छूट को मुठी में भरकर एक साथ दन्त कटा और छूट और चुकी को डैम लगाकर दबा दिया. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh अभी. धीरीईए कररररररर मरीईईई भाआआईईईई. डरडडडडडड होताआआ हैईईईई.

मैं दीदी की चीख की परवाह किये बिना फिर से उनके कंधे को दन्त कटा और चुकी व छूट कसकर मसल दिया. जिससे दीदी फिर से चीख पड़ी.

सविता di-Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh सलीईई भाआद्वेइये oooooooohhhhhhhhhhhhhh धीरीईई सीईए नहहहहहहिं dabaaaaaaaaaa सकककककककककताआए. मुफ्फ़्ततततततत काआआआ माललललललल सअअअअअजहाआआ है क्याआआआ.

मैंने अपना हाँथ उनकी छूट से उठा कर पंतय के अंदर डालने लगा. जिससे दीदी ने अपना हाँथ मेरे हाँथ पर रख दिया. लेकिन मैं रुका नहीं. मैंने अपने हांथो से दबाव बनाकर पंतय के अंदर हाँथ दाल दिया और ुकि छूट को मुठी में भर लिया. दीदी की छूट पानी छोड़ रही थी. मैं अपना मुंह दीदी के कण के पास लेकर कहा.



मैं- क्या बात है सविता बड़ी छुडासी हो रही हो. तेरी छूट तो पानी छोड़ रही है. ये देख मेरी मुट्ठी एकदम भीग गई है.

इतना कहकर मैंने अपना हाँथ दीदी की पंतय से निकलकर अपनी हथेली दीदी के सामने कर दी. मेरी हथेली पर अपनी छूट का पानी देखकर दीदी शर्म से लाल हो गई और मेरी आँखों में देखती हुवे बोली.

सविता दी- ये सब तेरी वजह से हुवा है. मैं इतनी शिधि सदी थी. लेकिन तूने मेने मुझे गन्दा बना दिया. और देख अब. मेरी क्या हालत हो गई है.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ फिर से दीदी की पंतय में घुसा दिया और उनकी छूट को दबोच दबोच कर मसलने लगा. एक हाँथ से चुकी को दबाता रहा और अपनी कमर को पीछे कर के उनकी गार्डन को चूमते हुवे एक धक्का मारा. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड में घुस गया. दीदी के मुंह से सिसकी निकल गई

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssss ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyy अभी.

फिर दीदी ने अपना एक हाँथ मेरी गार्डन से उठाया और पीछे ले जाकर मेरे लुंड को लोअर सहित पकड़ लिया और मसलने लगी. दीदी का हाँथ लुंड पर लगते hi मेरे मुंह से ssssssssss aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. मैं भी एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाता रहा और एक हाँथ की दो ऊँगली दीदी की छूट में घुसेड़ दी और अंदर बहार करने लगा. दीदी और मेरे मुंह से sssssssssssssssss aaaaaaaaaahhhhhhhh की आवाज़ निकलने लगी. लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे के लुंड और छूट से खेलते रहे और aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssss की आवाज़ करते रहे

5 मिनट बाद मैंने अपना हाथ दीदी की छूट से निकल लिया और अपने लुंड को छुड़ा कर दीदी को जमीन पर बैठा दिया और और अपना लोअर उतर कर फेक दिया और अपना लुंड उनके मुंह पर मरने लगा. दीदी ने भी मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी. कुछ देर तक लुंड सहलाने के बाद दीदी ने जीभ निकलकर मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया.



दीदी की जीब लुंड पर लगते हम एरा शरीर सिहर उठा. थोड़ी देर लुंड को चाटने के बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं तो मस्ती में पाउच गया था. मैंने दीदी से कहा.

मैं- वाह सविता. क्या लुंड चुस्ती हो तुम. कहा से सीखा इतना अच्छा लुंड चूसना.

सविता di-(munh से लुंड निकलकर) कल तुमने hi तो सिखाया था.

इतना बोलकर दीदी ने फिर से मेरा लुंड मुंह में ले लिया और चूसने lagi.thodi देर तक दीदी से लुंड चुसवाने के बाद मैंने दीदी के सर को पीछे से पकड़ लिया और एक hi झटके में अपने लुंड दीदी के मुंह में पूरा पेल दिया और बिना रुके ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा. जिससे दीदी की साँस अटकने लगी. उनके मुंह से guuuuuuuuuuuu guuuuuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी. लेकिन मैंने दीदी पर कोई रहम नहीं किया और ताबड़तोड़ धक्के लगाकर दीदी के मुंह को पेलता रहा. और दीदी से कहने लगा.

मैं- Waaaaaaahhhhhhhhhh सविता क्या गरम मुंह है तेरा मेरी रंडी. तू बहुत छुडासी है. ले मेरा लुंड अपने मुंह में और अंदर तक ले. तू बहुत अच्छा लुंड चुस्ती है एकदम रंडी की tarah.le भोसड़ीवाली और अंदर तक ले मेरा लुंड और चूस चूस कर इसका सारा रास पि जा साली.

मैं दीदी को गली देते हुवे हचक हचक कर दीदी का मुंह छोड़ा तहा और guuuuuuuuuuuuu gggggggggguuuuuuuuuu की आवाज़ निकलती हुई मेरा लुंड चुस्ती रही. लगभग 5 मिनट तक मैंने दीदी का मुंह बहुत बेदर्दी से पेलता रहा. फिर आखिरी धक्का लगा कर अपना लुंड दीदी के मुंह में पेलकर वही रुक गया. जिससे कुछ hi सेकेंडो में दीदी की साँस फूलने लगाई और वो मेरे जांघो को पकड़कर पीछे की तरफ धकेलने लगी. जब मुझे लगा की दीदी का डैम घुट रहा है तो मैंने एक झटके में अपने लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया. लुंड निकलते hi दीदी खांसी लगी. मेरा लुंड दीदी के थूक से सना हुवा था जिसे वो खांसते हुवे देख रही थी. जब दीदी की सांसे दुरुस्त हो गई तो दीदी ने कहा.



सविता दी- अभी तू सच में जानवर है. किसी दिन तू मेरी जान लेकर hi मानेगा.

मैंने दीदी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और दीदी को उठाकर बितर पर फेंक दिया और इनकी टंगे पकड़कर उन्हें घसीट कर बिस्तर के किनारे कर दिया. मैं बिस्टेर के निचे खड़ा था जिससे दीदी की छूट पंतय में एकदम मेरे सामने आ गयी. मैं उनकी छूट पर पैंटी के ऊपर से हाँथ रखा और सहलाने लगा. थोड़ी देर सहलाने के बाद मैंने दीदी की पंतय की एक झटके में खींचकर दीदी के बदन से अलग कर दिया. अब दीदी एकदम नंगी मेरे बीएड पर मेरे सामने थी. मैंने झुककर अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और चाटने लगा. मेरा मुंह अपनी छूट पर महसूस करके दीदी कसमसाने लगी. अब दीदी के ऊपर भी वासना हावी हो चुकी थी तभी दीदी ने अपने होंठ को मेरे सर पर रखकर उसे अपनी छूट की तरफ दबाने लगी.

मैंने भी अपना दोनों हाँथ बढाकर दीदी की चुहियों को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा. और अपनी जीभ की नोक बनाकर दीदी की छूट को छोड़ने लगा. मैं कभी उनकी छूट के ऊपरी भाग को चुस्त तो कबि अपनी जीब दीदी की छूट में पेल देता. मेरी छूट चूसै और चुकी दबाने के कारन दीदी एकदम बावली हो गई और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- Aaaaaaaaaahhhhhhhhh aAbbbbbhhhiiiiiiiiii कुटटी क्या छूट चुस्स्ता है टूउऊउउउ. और तीज chussssssssss. कहा जायआ मेरी छुट्ट्ट्ट को.. बहुत्तत्त aaagggggggggg लगइईईईई है इस्मीीी. चुस्स्सस्स्स्सस्स लेईईईई ीसीएएएएए ऑरररररररर पुराआ रससससससससस निकाळ डीएई िस्कआआआआ.

मैंने पाने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को मसलते हुवे दीदी की छूट चुस्त रहा फिर मैंने अपने एक हाँथ की दीदी की चुकी से हटाकर दीदी की छूट पर रखा और सहलाने लगा कुछ देर सहलाने के बाद मैंने अपनी 2 ऊँगली दीदी की छूट में घुसेड़ दी और छूट चाटते हुवे अपनी उंगली से दीदी की छूट पेलने लगा. और दीदी मस्ती में मदहोश हो गई और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मार डायलाआआ सल्ल्ल्लीीी oooooooooooohhhhhhhhhh क्याआ चूऊउउउउउस्ताहा हैईईई तू. Teriiiiiiiiii छूट चुस्स्सस्स्स्साआआअइ सीईई मेंननननन आईईएई वालीइइइइइ होओओओओओओओओ. सममममममममभआआआआ मुझेईई मेरेईईईई भाआआआआई तुम्हाररररररीीी बहनणननणणन की चूत्तत्ततत्तत जहाआआअआद रहीइइइइइइ हैईईई.

इतना कहते hi दीदी का बदन अकड़ने लगा. उनके पेअर कम्पनी लगे और शरीर मचलने लगा और एक तेज़ धार मार्कर दीदी चिल्लाकर बालभालकर झड़ने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhhh मेंनननननननन गईइइइइइइइ bhaiiiiiiiiiii. पीईई ली मेरररररररररी चूऊउउउउउत्तत्ततत्तत्त काआआ पणीइइइइइइइ बआहँणणणणचूऊऊऊडद. पुराआआ छाअअअअअअत jaaaaaaaaaaaa सलेईईईई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 72

झड़ने के बाद दीदी शांत हो गई और निढाल बिस्टेर पर पद गई. मैं कुछः दरररर दीदी की छूट को चाटता रहा. जब दीदी की छूट साफ हो गई तो मैंने अपना मुंह दीदी की छूट से हटा लिया और दीदी के बदन पर लेट गया और अपना जो ऊँगली दीदी की छूट में डाली थी उसे दीदी के होंठो पर फेरने लगा और दीदी से कहा.

मैं- क्या सविता डार्लिंग. मज़ा आया छूट चुसवाकर अपने भाई से.

सविता दी- हाँ अभी बहुत मज़ा आया. ऐसा लग रहा है जैसे मेरा बदन हल्का हो गया है.

मैं- सच में सविता तुम्हारी छूट का पानी बहुत स्वादिस्ट है. मज़ा आ गया चूसकर. चलो अपना मुंह खोलो और अपनी छूट के स्वादिष्ट पानी का स्वाद लो.

मेरे इतना कहने पर दीदी ने अपना मुंह खोल diya.maine अपनी चलो ऊँगली दीदी के मुंह में घुसा दी और दीदी का मुंह हाँथ से छोड़ने लगा.



दीदी भी मेरी उंगलियों को ऐसे चूस रही थी जैसे मेरा लुंड चूस रही हो. कुछ देर अपनी ऊँगली चूसने के बाद मैंने अपनी ऊँगली उनके मुंह से बहार निकली और एक जोरदार किश उनके होंठो पर किया और कहा.

मैं- चलो सविता अब मैं तुम्हारी अलग तरीके से चुदाई करने वाला हूँ. जिसका आनंद तुमने आजतक नहीं उठाया होगा.

सविता दी- (कंफ्यूज होते हुवे). कही तुंहारी नज़र मेरी गांड पर तो नहीं है अगर ऐसा है तो मैं बता दू की इससे दूर रहना नहीं तो तुम्हारा मुंह नोच लुंगी.

मैं- तुम्हारी गांड तो मैं जरूर मरूंगा सविता, लेकिन अभी मैं तेरी गांड नहीं तेरी चूचिया छोड़ना चाहता हूँ. अब ज्यादा नाटक मत कर और चल निचे बैठ जा.

इतना बोलकर मैं दीदी के ऊपर से उठ गया और दीदी को उठाकर जमीन पर घुटनो के बल बैठा दिया. दीदी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की मैं करने क्या वाला हूँ. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- इतना परेशां क्यों हो रही हो. बस देखती जाओ मैं क्या करता हूँ तुम्हे बहुत मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने अपने लुंड को दीदी की दोनों चूचियों जे बिच रख दिया और दीदी से कहा.

मैं- सविता अब तुम अपने दोनों हांथो से अपनी चूचिया मेरा लुंड पर दबाओ और थोड़ा थूक अपनी चूचियों की घाटी में गिराओ. फिर मैं तुम्हारी चूचियों की चुदाई शुरू करता हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने दोनों हांथो से अपनी चूचियों को पकड़कर लुंड पर दया और अपनी चूचियों की घाटी में थूक दिया. तो मैंने अपने लुंड को हारकर दी और आगे पीछे करना शुरू कर दिया.



दीदी मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी दीदी की आँखों में देख्छ्ते हुवे लुंड आगे पीछे करना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद दीदी no ढेर सारा थूक अपनी चूचियों की घाटी में फिर से थूक दिया और मेरी आँखों के देखते हुवे बोली.

सविता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मेरे भाई बहुत मज़ा आ रहा है. और छोड़ मेरी चूचियों को. ऐसा मज़ा मुझे पहली बार मिला है. तू सच में पक्का चुड़क्कड़ है तुझे अच्छी तरह मालूम कई की एक लड़की को कैसे खुश किया जाता है. छोड़ अभी और तेज़ी से छोड़.

मैं- हाँ साली सविता. तू भी बहुत चुड़क्कड़ है. तभी तो अपने भाई के लुंड से अपनी चुकी छुड़वा रही है. तू अपनी जीभ बहार निकल और मेरे लुंड को चुस्ती भी रह.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने अपनी जीभ बहार निकल ली. तो मैं और तेज़ तेज़ दीदी की चूचियों को छोड़ने लगा. जिससे मेरे लुंड चूचियों के उपर दीदी के मुंह में घर जाता था जिसे दीदी चाट और चूस लेती थी. मैं उनकी चूचियों को छोड़ते हुवे कहा.

मैं- AAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhh सविता कातिल चूचिया है तेरी कुटिया. एकदम ृषभरी और ठोस है. तेरा तो पूरा जिस्म की छोड़ने लायक है. तेरा पूरा शरीर मक्खन जैसा है. मन तो करता है की तेरे पुरे शरीर में लुंड रगड़ रगड़ के तुझे रुंडी की तरह छोड़ू सविता.

सविता दी- तो छोड़ न भड़वे तुझे रोका किसने है. तेरा लुंड बहुत दमदार है और तुझसे छोड़ने के लिए मैं तेरी रंडी भी बन सकती हूँ. छोड़ मेरी चुकी को और बना ले मुझे अपनी रंडी. छोड़ बहनचोद और जोर जोर से छोड़.

मैं- हाँ रंडी छोड़ता हूँ तुझे. छोड़ छोड़ कर तेरी चुकी आज लाल कर दूंगा. तू सच में एक रंडी है. जो अपने भाई से छोड़ने के लिए आधी रत को उसके कमरे में आई है.

मैंने इतना कहकर तेज़ तेज़ धक्के दीदी की चुकी में मरने लगा. थोड़ी देर चुकी छोड़ने के बाद मुझे लगा की बहुत hi जल्द मेरा पानी निकल जाएगा तो मैंने उनकी चूचियों से लैंड निकल कर उनके मुंह में पेल दिया और हचक हचक के दीदी का मुंह छोड़ने लगा. मेरा हरेक धक्का उतना ताकतवर तहा की दीदी एकदम हिल जाती थी. फिर मैंने दीदी को मुंह को अपने लुंड से दबाकर उनका सर बीएड पर टिका दिया और जोर जोर से मुंह छोड़ने लगा और बड़बड़ाने लगा.



Main-aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh रअंदड्डड्डड्डड़ईईईई Savitaaaaaaaaaaaa ले मेरा लुंड और अंदर अपने मुंह में. तेरा मुंह बहुत गरम हैईईईई टेररीईई चूऊउउउऊट की तरहहहहहहह ले रुंडी. तू बहुत्तत्ततत्तत मास्स्सस्स्स्सस्स्त माआल हैईईईई aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh मीरीईई जाआआआं कहा जाआआआ मेररररररे लुँड्ड़डडडडडड koooooooooo निचोड्ड्ढ लोओओओओओओओ iseeeeeeeeeee. मेंनननननननन gaayyyyyyyyyyyaaaaaa SAaviiiiiiiiiitaaaa tereeeeeeeeee मुह्हह्हह्ह्ह्ह में गयाआ..

और इतना कहकर मैं दीदी के मुंह में फ्रीज हो गया. दीदी मेरा पानी पिने लगी लेकिन मेरे लुंड ने इतना ज्यादा पानी छोड़ा था की दीदी के मुंह से कुछ स्पर्म बहार निकल कर उनकी चुकी पर गिर गया. मैं झाड़कर बिस्टेर पर बैठ गया और दीदी को देखने लगा जो अपनी जीभ को अपने मुंह में घुमा घुमा कर मेरा स्पर्म चाट रही थी. मैं दीदी को देखकर मुस्कुराने लगा. जब दिदिने मुझे मुस्कुराते हुवे देखा तो उन्होंने कहा.

सविता दी- ऐसे मुंह फाड् कर हंस क्यों रहा है.

मैं- तुम मेरा स्पर्म पीती हुई एकदम रंडी लग रही हो सविता.

सविता दी- तो मुझको रंडी बनाया किसने है. तूने न.

मैं दीदी की बात सुनकर हंसने लगा. तो दीदी भी मुस्कुराने लगी. 5 मिनट बाद दीदी उठकर मेरे पास आई और मेरी आँखों में देखती हुई बोली.

सविता दी- अभी तू मुझे हमेशा इसी तरह प्यार करेगा न. मुझे छोड़कर जाएगा तो नहीं. अब मैं तेरे बिना नहीं रह सकती.

मैं- तो सीधे शिंदे बोलो न की तू मुझे हमेशा इसी तरह छोड़ेगा न. और तुम बिना मुझसे छुड़वाए नहीं रह पाओगी.

सविता दी- (मेरी आँखों में देखकर) हाँ हाँ मई यही चाहती हूँ किट ु मुझे हमेशा चोदे. अब मैं तेरे लुंड के बिना अधूरी हूँ.

इतना बोलकर दीदी ने मेरे होंठो को चूसते को चूसने लगी और अपने एक हाँथ से मेरा लुंड पकड़कर मुठियाने लगी. दीदी के होंठ चूसने और लुंड मुठियाने से मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया. फिर दीदी मेरे होंठो को छोड़कर मेरे साइन को चूमते हुवे निचे आने लगी. और निचे आकर मेरे लुंड को मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी मेरे मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मैंने भी बिस्टेर पर बैठे बैठे दीदी के सर को पकड़ लिया और लुंड को दीदी के मुंह में पेलने लगा. जिससे दीदी के मुंह से gggggggggguuuuuuuuuuuuuu गगगगगगगगूउऊउउउ की आवाज़ निकलने लगी.

थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद दीदी ने अपने मुंह से लुंड बहार निकल लिया. फिर मैंने दीदी को उठाकर बीएड पर लिटा दिया और झुक कर दीदी की छूट को चुम लिया. दीदी के मुंह से sssssssssssssss आआआआहहहहहहह की आवाज़ आई. फिर मैंने अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाटने लगा. बिच बिच में जीभ की नोक छूट में डालने लगा. जिससे दीदी मस्त हो गई और बोलने लगी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh अभी haaaaaaaaaaa ooooooooohhhhhhhhhhhh बस्स्स ऐसी hi चाहाआटवूऊऊ अपनी didiiiiiiiiiiii की छुट्ट्ट्ट्ट को. हाआआआं bhaaaaaaaaaaaaaai ऐसे हीइइइइइइइ ohhhhhhhhhhhhhhh heeeeeeeeyyyyyyyyyyy.

जब मैंने देखा की दीदी एकदम गरम हो गई हैं तो मैं भी दीदी की बगल में जाकर लेट गया और उनकी एक तंग को उठाकर लुंड दीदी की छूट पर सेट किया और एक धक्का लगा दिया. दीदी की हलकी सी चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii dhireeeeeeeeeeee सीएएएएएएए.

मैंने दीदी की बात को अनसुना करते हुवे एक हाँथ उनकी गार्डन के निचे से डालकर एक चुकी को कसकर पकड़ लिया और एक तेज़ का धक्का दीदी की छूट में लगाया. इस बात मेरा लुंड जड़ तक दीदी की छूट में समां गया. दीदी के मुंह से चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Saleeeeeeeeeeeeee बोललललललललल रहीइइइइइइहूंणणन्न की धीरीई कार. लेकिनननननन तू बाहाआंछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ ekdammmmmmmmmm जाननवारररररररर बाआआआं जाताआआ है ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाराआमंमममममम सी कररररररर मेंननम्ननननन अब teriiiiiiiiii hiiiiiiiiii hoonnnnnnnnnnn.

Main-(didi की छूट में धक्के लगते हुवे). Aaaaaaaaahhhhhhhhhh सविता मैंनं क्याआ करूऊऊऊ मेंनननन हर बार सोच्छ्हःता हूणंण की तुझीीी आराममममम आराम से छोडूंगा लेकिन जैसे होई मेरा लुंड तेरी छूट को छूटा है मुझसे बर्दास्त नहीं होऊता.

िस्टना बोलकर मैं दीदी की चूचियों को कसकर दबाते हुवे ताबड़तोड़ धक्के लगाकर दीदी को छोड़ने लगा. साथ hi साथ उनकी गांड पर ठप्प्दाद भी मरने laga.mere धक्के इतने जोरदार थे की बीएड चुरुर चुरुर करने लगा मेरे हर धक्के के साथ दीदी की चीख निकल जाती. और वो मस्ती में बड़बड़ाने लगती



सविता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मइईईई मररररर गइईईई, माआआर डाललललललललाहा तूंबीएए अपनीईई बहन को. चू एकककड़ाम बाहाआंछूऊऊद ही. इतनेईईई बड़ी लुँड्ड्ड से appppppppppni शाआडीईईईई शुड्ड्ढडा बाआआअह्न को छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ rahaaaaaaaaaaaaa हीी. Ooooooooooohhhhhhhhhhh mummmmmmmmmmyy बचाआंआऊऊऊओ mujheeeeeeeeeeee इस भाआआअदवीईई सीईए. नहीं तो yeeeeeeeeee aajjjjjjjjjj merrrrrrrrrrriiiiiii छुटटटटटट फाड्ड़डडडडड डेगाआआ.

मैं लगभग 15 मिनट तक दीदी को उसी पोजीशन में हचक हचक कर छोड़ता रहा जिससे दीदी का शरीर कपङे लगा और उनकी छूट ने पानी छोड़ दिया. लेकिन मैंने अपनी स्पीड काम नहीं की. और उनको छोड़ता रहा. झड़ने के बाद दीदी की छूट एकदम गीली हो गाइट hi जिससे मेरा लुंड फिसल फिसल कर अंदर बहार हो रहा था.

फिर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार निकला और दीदी को उठाकर जमीन में कुटिया बना दिया. और अपना लुंड उनकी छूट पर सेट करके एक hi झटके में जड़ तक पेल दिया. दीदी आगे की और गिरने लगी और अपने ाको छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उनके कंधे को मजबूती के साथ पकड़ रखा था. मेरे इस धक्के से दीदी फिर से चीख पड़ी.



सविता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh भोसडीइइइइइइ वाली. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh मरररररर dalaaaaaaaaaaaa रईईईई ohhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyy तुमराआआआ betaaaaaaaaaaaa एककककककककदमममम बेरहाम हो गयाआआआ हिअआआअ अपनी बहानंन्न पर भीईई तराआआस्स नाहाहीइइइइइइइआआआआआआआआ ीसीईईई faadddddddddddd डीई मेरिइइइइइइइइ छूट को. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh बहुतत्त डरडडडडडडडडड कररररर राहाआआ हिअआआअ. कोइइइइइइइइइ बच्चाआआअऊऊऊऊओ मुझेईईई इस्स्स्सस्स्स्स जालीमंममम सीईई.

मैं- aahhhhhhhhhhhh राणडीइइइइइइइ औरर चिल्लाआआआ और जोरररररर से चिल्लाआआ कोई नाही ाएगाआआ तुझे बचनीयी. Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh सलीईई छिनाआआलललललललल कुटियाआआआआ बहुत्त तड़पाया है तुंबीईई मुझेईईईई अपनाआ बड़ाआआं दिखाआआआआ के रनडीईईईई ले और ले. टूउउउ बहुत्तत्ततत्तत बडीइइइइइइइ चुड़क्कड़ हैईईईई. तुझेईईई मैं रोजजजजजजज कुटियाआ बनाकर छोड़ूंगा.

मेरी इतने ताबड़तोड़ चुदाई से दीदी बहुत गरम हो गई थी और अंत संत बड़बड़ाने लगी और गली देने लगी.

सविता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhh मादररररर छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ ाभीईई. बहनणनननन के लौडी, हराममममी saleeeeeeeeee छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुझेईईई हचक हचाहाआक के chodddddddd.oooooooooohhhhhhhhhhh हरामममममममममजादीये जोर से पेलललललल अपना लॉडायआ मेरिइइइ छुट्ट्ट्ट मेई. मेराआआआआ होंईईईई वालाआआआ हिअआआअ भावःछोड़ड़ड़ड़. और तेज़ पीएएलललललल. Faaddddddddddd डीएई मेरिइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट्ट को. Ohhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हरामीईई मैईयिन gaiiiiiiiiiii सममममममभललल मुझेईई.. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh gaiiiiiiiiii mainnnnnnnnnn.

इतना बोलकर दीदी झाड़ गई. मेरा भी अब निकलने वाला था इसीलिए मैंने दीदी को सीधा करके बीएड के सहारे बैठा दिया और उनके मुंह में अपना लुंड पेल दिया और झड़ने लगा.



दीदी मेरा पूरा वीर्य पि गई और निढाल होकर जमीन ले लेट गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-73

सविता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhh मादररररर छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ ाभीईई. बहनणनननन के लौडी, हराममममी saleeeeeeeeee छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुझेईईई हचक हचाहाआक के chodddddddd.oooooooooohhhhhhhhhhh हरामममममममममजादीये जोर से पेलललललल अपना लॉडायआ मेरिइइइ छुट्ट्ट्ट मेई. मेराआआआआ होंईईईई वालाआआआ हिअआआअ भावःछोड़ड़ड़ड़. और तेज़ पीएएलललललल. Faaddddddddddd डीएई मेरिइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट्ट को. Ohhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हरामीईई मैईयिन gaiiiiiiiiiii सममममममभललल मुझेईई.. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh gaiiiiiiiiii mainnnnnnnnnn.

इतना बोलकर दीदी झाड़ गई. मेरा भी अब निकलने वाला था इसीलिए मैंने दीदी को सीधा करके बीएड के सहारे बैठा दिया और उनके मुंह में अपना लुंड पेल दिया और झड़ने लगा. दीदी मेरा पूरा वीर्य पि गई और निढाल होकर जमीन ले लेट गई.

अब आगे

झड़ने के बाद दीदी निढाल होकर जमीन पर लेट गई और मैं दीवाल से तक लगाकर बैठ गया और अपनी अपनी उखड़ी हुई शैशे दुरुस्त करने लगे. हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे. दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.

सविता दी- ऐसा देख देख के क्यों मुस्कुरा रहा है.

मैं- आपको hi देखकर मुस्कुरा रहा हूँ.

सविता दी- मुझे ऐसे देखकर क्यों मुस्कुरा रहा है.

मैं- मैं इसलिए मुस्कुरा रहा हूँ की एक 2 महीने पहले तक हम दोनों में बिलकुल भी नहीं बनती थी और तुम हमेशा मुझसे लड़ती रहती थी और पापा से मार भी पद्वति थी और आज देखो सब कुछ कितना बदल गया है. पहले हम दोनों लड़ते रहते थे और आज तुम्हारी छूट और मेरा लुंड लड़ झगड़ रहे हैं. पहले तुम मुझे मार खिलवाती थी पापा से और आज देखो. मैं तुम्हारी छूट मर्डर रहा हूँ अपने लौड़े से.

सविता दी- (हँसते हुवे.) तेरे दिमाग बहुत खतरनाक है . किसी भी बात को जोड़ तोड़ कर उसे गन्दा रुख देना. कहा से आता है ये सब तेरे दिमाग में. और अब तू पुराणी बातो का बदला लेगा मुझसे.

मैं- हाँ मैं बदला लूंगा तुमसे.

सविता दी- लेकिन इतना सब कुछ तो कर लिया मेरे साथ. तेरा बदला अभी पूरा नहीं हुवा.

मैं- मेरा बदला तो उस दिन पूरा होगा जिस दिन मैं तेरी ये कातिल और गद्देदार गांड मरूंगा.

सविता दी- सपने देकना बंद कर दे. वो तुझे कभी नहीं मिलने वाली.

मैं- अरे यार सविता मैं तो मज़ाक कर रहा था. क्या तुझे लगता है की तेरा भाई तुझसे बदला ले सकता है.

सविता दी- मुझे पता है की तू मज़ाक कर रहा है. मुझे अपने भाई पर पूरा भरोषा है. तू मुझसे बहुत प्यार करता है. तू मेरे साथ कुछ गलत नहीं करेगा. लेकिन एक बात सच सच बता. क्या तू सच में मेरी गांड मरेगा.

मैं- सच कहु तो मैं तुम्हारी गांड मरना चाहता हूँ.

सविता दी- ऐसा क्या है इसमें जो तू इसके पीछे पद गया है.

मैं- अरे ये पूछो की क्या नहीं है इसमें. तुम कभी खुद आईने के सामने कड़ी होकर अपनी गांड को नंगी करके देखना. इतनी गदराई और करतील गांड है तुम्हारी की पूछो hi मत. तुम्हारी गांड इतना कातिल है की जब भी मैं इन्हे देखता हूँ तो मुझसे कण्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. जब तुम चलती हो तो हमारी गांड ऐसे हिलती है जैसे चक्की के दो पैट हो. तुम्हारी गांड अगर मुझे मिल जाये तो मैं दिन रात तुम्हारी गांड मरता रहूँ.

सविता दी अपनी गांड की इतनी ज्यादा तारीफ सुनकर खुश हो गई और एक ऐडा से बोली.

सविता दी- तू बस सपने देख. ये तुझे कभी नहीं मिलेगी.

मैं- ये मुझे मिलेगी भी और मैं आपकी गांड मरूंगा भी. और ये आप खुद मुझसे कहेंगी की भाई मेरी गांड मर ले.

सविता दी- ऐसा कभी नहीं होगा. तेरा इतना बड़ा लुंड है. मेरी तो फाड़ hi देगा. मैं कभी ऐसा नहीं कहूँगी.

मैं- देखेंगे.

सविता दी- देख लेना.

इतनी बात करके हम दोनों मुस्कुराने लगे. फिर दीदी उठी और अपने नाम मात्र के कपडे पहनने लगी. कपडे पहनने के बाद दीदी बहार जाने लगी. मैं भी खड़ा हो गया. दीदी दरवाज़े तक पहुंच कर रुकी और पलटकर मेरी तरफ देखा और भागकर मेरे गले लग गई और बोली.

सविता दी- थैंक यू अभी. मुझे इतना प्यार देने के लिए. जिसके लिए मैं इतने सालो तक तड़पती रही. थैंक यू थैंक यू मेरे भाई.

और इतना बोलकर दीदी ने मेरे होंठो को किश किया और बहार जाने लगी. मैं पीछे से दीदी की गांड को घूरने लगा. दरवाज़े पर पहुंचकर दीदी ने पीछे मुड़कर देखा और अपनी गांड को घूरता पाकर हंसकर कहा कहा और निचे चली गई

सविता दी- अभी तू सचमुच बहुत कमीना है. तू कभी नहीं सुधर सकता. दीदी के जाने के बाद मैं भी ऐसे hi बिस्टेर पर लेट गया और थकन के कारन मुझे नींद आ गई.

मैं रात में गलती से नंगा हो सो गया था. सुबह जिम के समय सरिता दी छत पर आई और जैसे hi वो दरवाज़ा खोलकर अंदर घुसी. उनको एक मीठा झटका सा लगा. क्योंकि मेरा लुंड सुबह के समय एकदम छत की तरफ तना हुवा था. दीदी आँखे फाडे मेरे लुंड को देखने लगी. उन्होंने आज शायद पहली बार इतना बड़ा लुंड नंगा देखा था इसलिए उन्होंने अपना हाँथ अपने मुंह पर रख लिया और मन hi मन कहा इतना बड़ा.



मैंने तो उन सब से बेखबर आराम से सो रहा था. थोड़ी देर तक दीदी ने दरवाज़े के पास से hi मेरे लुंड को देखा फिर वो हिम्मत करके मेरे बीएड के पास आ गई और करीब से मेरे लुंड को देखने लगी. लुंड को देखकर hi दीदी का मुंह सुख गया. जिसके कारन वह अपने होंठो पर जीभ फिरने लगी. इतने बड़े लुंड को देखकर दीदी की साँस तेज़ तेज़ चलने लगी. जिससे उनकी रसभरी चूचिया ऊपर निचे होने लगी. दीदी ने करीब 5 मिनट तक मेरे लुंड को भरपूर नज़ारा करने के बाद दीदी धड़कते दिल के साथ कमरे से बहार चली गई और ाहिष्ता से दरवाज़ा बंद कर लिया.(ये साडी बाते जब सरिता दीदी ने मीरा वाली ईद पर अभी से बात की तब बताई थी. लेकिन इस बात का औचित्य अभी है इसलिए इस बात को मैं पहले अभी की जुबानी मेंशन कर रही हूँ)

सरिता दीदी कमरे से बहार जाने के 5 मिनट बाद मेरे मोबाइल पर फ़ोन किया. फ़ोन की आवाज़ सुनकर मैंने फ़ोन उठाया और सरिता दी का no. देखकर कॉल रिसीव किया. और बोलै.

मैं- हां दी.

सरिता दी- तू अभी तक सो रहा है. मुझे पता था की तू अभी नहीं उठा होगा इसलिए मैंने तुझे फ़ोन किया उठाने के लिए ताकि कल की तरह मुझे तुझको हिला हिला कर उठाना न पड़े.

मैं- (हिला हिला कर सुनने के बाद मेरी आँख खुल gai)-Kya हिला हिला कर.

सरिता दी- अभी सुबह सुबह hi तेरे दिमाग में उलटे सीधे ख्याल आने शुरू हो गए. अरे मैं बोल रही थी की कल मैंने तुझे कंधे से पकड़कर कई बार हिलाया तब जाकर तेरी नींद खुली. इसीलिए मैंने तुझे आज फ़ोन किया है उठाने के लिए. समझा या नहीं.

मैं- समझ गया मेरी मान. समझ गया. आप 5 मिनट में आ जाओ.

मैंने उठकर लोअर पहनी और बाथरूम में चला गया फ्रेस होने के लिए. और जब फ्रेश होकर बहार आया तो सरिता दीदी कमरे में बैठी हुई थी. मैं तो दीदी को देखकर बस उन्हें देखता hi जा रहा था. दीदी ने एक t-shirt और और लोअर पहनी हुई थी जो स्किन फिट थी और t-shirt का गाला बहुत बड़ा था. उनकी कपडे स्कीनफिट होने के कारन उनकी शरीर का हर कटाव उसमे नज़र आ रहा था. खासकर उनकी गद्देदार गांड और उनकी ृषभरी चूचिया जो आधी बहार निकली हुई थी. मैं बस एक तक दीदी को देखता रहा. दीदी ने जब मुझे अपनी चूचियों को देखते हुवे पाया तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और वो मुझसे बोली.



सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है अभी. अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या.

मैं- आज आप बहुत सेक्सी लग रही हो. और आपके कपडे तो बहुत hi अचे हैं.

सरिता दी- अच्छा बहन को सेक्सी बोलता है. शर्म नहीं आती. और ऐसे कपडे तो मैं हमेशा पहनती थी. मगर तूने कभी दयँ hi नहीं दिया.

मैं- (मैं दीदी की चूचियों को घूरते हुवे) मैं अपनी गिर्ल्फ्रेंड को सेक्सी बोल रहा हूँ. मैं पागल था दी जो अभी तक आपकी जवानी की तरफ मेरा ध्यान hi नहीं गया. मुझे तो अब पता चल रहा है की मेरी बहन कितनी जवान हो गई है.

सरिता didi-(muskura कर) तू कितना कमीना है. अपनी बहन की जवानी पर नज़र रखता है.

मैं- नज़र तो रखनी hi पड़ेगी. नहीं तो किसी और ने मेरी बहन की जवानी को लूट लिया तो.

सरिता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है. तू कभी नहीं सुधर सकता.

मैं- अच्छा ये सब छोडो चलो प्रैक्टिस शुरू करते हैं. तो पहले आप अपने शरीर को थोड़ा लूसे कर लो. उसके बाद जिम करना. तो यहाँ मेरे सामने कड़ी हो जाओ और मैं जैसा जैसा करता हूँ आप मेरे साथ साथ दोहराते जाइएगा.

मैंने दीदी को समझकर अपनी कमर पर अपने हाँथ रखे और पंजो के बल उछालने लगा. मैंने दीदी से भी वैसे करने के लिए कहा. तो दीदी भी अपने हाँथ अपनी कमर पे रखकर पंजो के बल उछलने लगी. जिससे दीदी के बड़ी बड़ी चूचिया बुरी तरह ऊपर निचे होने लगी.



दीदी की उछलती चूचियों को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया था. मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी. लगभग 10 मिनट में hi दीदी पसीने से एकदम भीग गई जिससे दीदी की t-shirt गीली हो गई. t-shirt गीली होकर उनके शरीर से चिपक गई. जिससे दीदी की चूचिया लाल रंग की ब्रा में उछलती हुई मुझे दिख रही थी. फिर दीदी थक कर रुक गई. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या हुआ दीदी. थक गई क्या.

सरिता दीदी- हाँ भाई. बस थोड़ी देर साँस ले लू फिर शुरी करती हूँ.

मैं- रुकिए दीदी मैं आपको बताता हूँ की कैसे अच्छी तरीके से साँस लेनी है ताकि आप की कसरत भी हो जाए और आपको थकन भी न लगे.

इतना कहकर मैं दीदी के एकदम करीब जाकर खड़ा हो गया और उनकी चूचियों के देखने लगा. मेरा सीना दीदी की चूचियों से हल्का सा टच हो रहा था. दीदी की चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे हो रही थी. जिससे उनकी चूचियों की हलकी सी रगड़ मेरे साइन पर पद रही थी. फिर मैं दीदी से और सत्कार खड़ा हो गया और उनका दोनों हाँथ पकड़कर पीछे उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया. दीदी से और सात जाने के कारन मेरा लुंड हल्का सा दीदी की छूट पर टच हो रहा tha.didi का हाँथ उनकी गांड पर रखने ने बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- हाँ दीदी अब आप लाभ साँस अंदर खींचो, थोड़ी देर साँस रोको और धीरे धीरे साँस को बहार छोडो.

मेरे ऐसा कहने के बाद दी ने एक जोर की साँस अंदर खींची. जिससे दीदी की चूचिया बहार की तरफ निकल आयी और मेरे साइन में धसने लगी. कुछ देर इसी तरह रहने के बाद दीदी धीरे धीरे अपनी साँस छोड़ने लगी.

मैं- हाँ दीदी बस ऐसे hi करो. थोड़ी देर में आपि साँस भी दुरुस्त हो जाएगी और साथ साथ आपकी एक एक्सेरसीज़े भी हो जाएगी.

कुछ देर तक दीदी ऐसा hi करती रही. जब दीदी साँस खींचती तो उनकी छतिया मेरे साइन में धस जाती. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर बाद मैं आगे से हटकर दीदी के पीछे जाकर उनसे सत्कार खड़ा हो गया. जिससे मेरे लुंड दीदी की गांड में टच होने लगा. दीदी ने पलटकर एक बार मेरी आँखों में देखा फिर अपनी गार्डन सीधी करके एक्सेरसीज़े करने लगी. थोड़ी देर खड़ा रहने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी बगल से डालकर चूचियों को रगड़ते हुवे उनके पेट पर रख दिया. चूचियों पर हाँथ की रगड़ से दी के मुंह से ssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. फिर मैंने दीदी कहा



मैं- अब आप अपना हाँथ कमर से हटा लीजिए और आगे की तरफ झुकिए.

मेरे कहने के बाद दीदी ने अपने हाँथ कमर से हटाए और आगे की तरफ झुकती चली गई. जिससे दीदी की गांड खुल गई और मेरा लुंड कपडे के ऊपर से उनकी गांड की दरार में फास गया. फिर मैंने अपना एक हाँथ उनकी दोनों चुहियों पर रखा और उनकी एक चुकी को मुट्ठी में भरकर दबाने लगा और एक हाँथ उठाकर उनकी पीठ पर रख लिया और सहलाने लगा. कुछ देर तक पीठ सहलाने और चूचिया दबाने के बाद मैंने उनकी चूचियों को मुठी में भरकर जोर से दबा दिया और अपनी कमर को एक झटका देकर उनकी गांड में कपडे के ऊपर से hi लुंड पेल दिया. जिससे दीदी के मुंह से सिसकारी भरी चीख निकल गई.

सरिता दीदी- ooooooooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii. आराममममममममम सीई सिखाआऊऊऊ bhaaaaaaaaiiiiiiiiii.

मैंने दीदी की गांड में लुंड का धक्का लगते हुवे और उनकी छूट दबाते हुवे कहा.

मैं- आप बहुत अच्छा कर रही हैं. इसी तरह करते रहिये. अब थोड़ा झुके झुके hi अपने घुटनो पर बैठने की कोशिश कीजिए.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने घुटने मोड़ diye.jisase उनकी गांड मेरे लुंड पर घिसती हुई निचे टी तरफ चली गई. मुझे तो दीदी की गांड लुंड पर घिसने से बहुत मज़ा आया. मैंने दीदी से कहा.

मैं- वाह दीदी आप बहुत hi जल्दी सब कुछ सीख जाओगी. अब घुटने को सीधा करते हुवे अपनी पूर्व अवशता में वापस आ जाओ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने घुटने सीधी करते हुवे वापस पहले वाली अवस्था में आ गई जिससे मेरा लुंड फिर से दीदी की गांड में घुस गया.

मैं- क्या बात है दीदी आपने बहुत अचे से किया. मज़ा आया आपको. अब ऐसे hi 10 बार और करो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा. कुछ देर मुझे देखने के बाद दीदी वैसे hi करने लगी. अब तक दीदी भी गरम हो गाइट hi. हर बार ऊपर निचे होने पर दीदी के मुंह से सससससस ससस आआआआअह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी. मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था मैं बस उनकी पीठ पर हाँथ रखकर उसे सहला रहा था. 10 की गिनती पता नहीं कब पार हो चुकी थी. लेकिन दीदी मस्ती में सब भूलकर करती जा रही थी. थोड़ी देर बाद जब दीदी थक गई तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- हो गया अभी 10 बार.

मैं- इतनी जल्दी कैसे हो गया दीदी अभी तो सिर्फ 5 बार hi हुआ है.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई और दीदी ने फिर से अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ते हुवे ऊपर निचे करनी शुरू कर दी. मुझे तो जैसे जन्नत का मज़ा मिल रहा था. दीदी भी जब बूझकर अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ रही थी. मेरा मन तो कर रहा था की अभी यही पर पटक कर इनकी गांड में लुंड पेल दू, लेकिन मैंने खुद पर काबू रखा. इसी तरह करीब 20-25 बार दीदी अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ती रही फिर उसके बाद मुझसे अलग होकर टेबल के पास चली गई और पानी का गिलास उठाकर पानी पिने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-74

पानी पि कर सरिता दीदी वापस मेरे पास आकर कड़ी हो गई तो मैंने दीदी से पूछा.

मैं- कैसे लगा दीदी. मज़ा आया एक्सेरसीज़े करके.

सरिता दीदी- हाँ अभी बहुत मज़ा आया.

मैं- ठीक है दीदी अब दूसरी एक्सेरसीज़े शुरू करते हैं. आप ऐसे करिये कमर के बल यहाँ जमीन पर लेट जाइये.

मेरी बात सुनकर दीदी जमीन पर कमर के बल लेट गई मैं उनके पेअर के पास आकर बैठ गया और बोलै.

मैं- दीदी अब मैं आपके दोनों पेअर को आगे की तरफ प्रेस काऊंगा फिर आप अपना जोर लगाकर वापस पीछे की तरफ पुश करना.

इतना बोलकर मैंने उनके पांव को घुटने से मोड़ कर अपने साइन पर रख लिया और उनके पैसे को आगे के तरफ पुश करने लगा. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट से टकराने लगा. और जब मैंने दीदी के पेअर उनकी चूचियों तक पुश करके ले गया तो मेरे लुंड सीधा दीदी की छूट के ऊपर रगड़ गया. जिससे दीदी के मुंह से ssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. फिर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अब आप मुझे पीछे की तरफ पुश करो.

फिर दीदी ने मुझे पुश करना शुरू किया. अब दीदी ये सब जानबूझ कर कर रही थी या वाकई उनसे मैं पीछे पुश नहीं हो प् रहा था वो तो दीदी hi जाने मगर दीदी थोड़ा सा दबाव मेरे साइन पर डालती और वापस दबाव काम कर देती. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट पर कपड़ो के ऊपर से घिसने लगा. दीदी ऐसे बार बार करती और मेरा लुंड बार बार उनकी छूट पर घिसता. जब मैंने ये देखा तो मैंने भाई मौके का फायदा उठाते हुवे अपने लुंड का दबाव उनकी छूट पर देने लगा. अगर कोई दूर से देख ले तो वो यही समझेगा की हम दोनों चुदाई कर रहे हैं. मेरे और दीदी की मुंह से sssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeee ohhhhhhhhhhhhhhhhh की आवाज निकल रही थी. थोड़ी देर लुंड घिसाई से दीदी की छूट से पानी निकलना शुरू हो गया और उनकी लोअर गीली होने लगी.

लगभग 10 मिनट तक दीदी कसरत के बहाने मेरा लुंड अपनी छूट पर घिसवाती रही. और मैं मज़ा लेता रहा. थोड़ी देर बाद मैंने अपने लुंड को अपने हाँथ में पकड़ कर सीधा किया अउ इस बार जब दीदी ने अपने पेअर का दबाव काम किया तो मेरा लुंड सीधा लोअर के ऊपर से दीदी की छूट की छेड़ से जा टकराया. जिससे दीदी का शरीर कैंप गया. दीदी थोड़ी देर के लिए रुकी और मेरी आँखों में देखा. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी फिर जोर जोर से मेरे साइन को आगे पीछे करने लगी तो मैं भी अपने हाँथ से अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट के मुंह पर पेलने लगा. कुछ देर बाद जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुवा तो मैंने निचे होते समय अपनी कमर को एक जोर का झटका दिया जिससे मेरा लुंड कपडे समेत दीदी की छूट में घुसने की कोशिश करने लगा. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाआसससस अभीयी हूँ गया.

अब ये सिसकी दीदी ने आनंद में ली थी या दर्द में ली थी पता नहीं. फिर मैंने दीदी के पेअर को अपने साइन से हटते हुवे सीधा कर दिया और दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने लुंड को उनकी छूट में दबाते हुवे उनपर लेट गया. अब जमीन पर एकदम चुदाई वाला शीन था. जैसे मैं दीदी की छूट मर रहा हूँ. कुछ देर तक ऐसे लेटने के बाद मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने शरीर को उनके शरीर पर घिसने लगा. दीदी बस मेरी आँखों में देखती रही लेकिन बोली कुछ नहीं.

अब तक दीदी एकदम गरम हो गई थी और जल्दी जल्दी सनस ले रही थी. कुछ देर तक दीदी को देखने के बाद मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. दीदी ने अपना सर इधर उधर करने की कोशिश की लेकिन मैंने अपने हांथो से उनके सर को पकड़ रखा था तो दीदी अपना सर नहीं हटा पाई. मने दीदी को बहुत जोर जोर से किस कर रहा था. और अपने शरीरी की दीदी के शरीर पर घिस रहा tha.thodi देर बाद मैंने अपने लुंड को छूट पर सेट किया. उनके सर को छोड़कर अपने दोनों हांथो में दीदी की चूचियों को पकड़कर जोर से दबा दिया और उनकी छूट पर एक धक्का मर दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Kamineeeeeeeeeeee माआर गइईईई मन्न्नन्न्न्नन क्याआ कर राहाआआआ ह्हैई. धीरीईई करररर ड़ड़ड़ड़ड़ होता haiiiiiiiiiii

फिर मैं दीदी को एक किश करके उनके ऊपर से उतारकर उनके बगल लेट गया और दीदी की आँखों में देखा तो वो एकदम नशीली हो गयी थी. नथुने फूल पाचक रहे थे. उनकी साँस चढ़ी हुई थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.

Main-didi अब आप भी मेरी वैसी hi एक्सेरसीज़े करवाइये जैसे मैंने आपकी करवाई.

दीदी मेरी बात सुनकर सरमने लगी और न में सर हिलने लगी. फिर मैंने साद सा फेस बनाया तो दीदी के चेहरे पर स्माइल आ गई. दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी तुझे नहीं लगता की ये अजीब तरह की एक्सेरसीज़े है.

मैं- हाँ दीदी है तो अजीब तरह की लेकिन इसे करने के बाद बहुत सुकून मिलता है.

फिर दीदी ने मेरे दोनों पांव पाकर कर घुटने से मोड़ दिया और मेरे पांव को अपने पेट पर रख लिया तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- यार दीदी ये तो चीटिंग है. अपने पेअर यहाँ न रखो. जैसे मैंने रखा था वैसे आप भी रखो.

सरिता दीदी- यहाँ न राखु तो फिर कहाँ राखु.

मैं- (उनकी चूचियों को देख कर). अपनी चूचियों पर रखो जैसे मैंने पाने साइन पर रखा था आपके पेअर.

सविता दी- तू तो बड़ा बेशरम है. अपनी दीदी से ऐसी बात करता है. और ये एक्सेरसीज़े बड़ी अजीब है.

मैं- मैं ये सब अपनी दीदी से नहीं अपनी गिर्ल्फ्रेंड के साथ कर रहा हूँ. आप शायद भूल गई की कल से हम दोनों गफ बर्फ बन गए हैं.

सविता दी- गफ बने मेरी जुटती. बड़ा आया बर्फ बनने वाला. और कोई अपनी गफ के साथ ऐसा करता है क्या.

मैं- मैं तो बस एक्सेरसीज़े कर रहा हूँ. लोग तो पता नहीं अपनी गफ के साथ क्या क्या करते हैं. अब शुरू करो न दी. आप नखरे बहुत करती हो.

दीदी से इतनी खुलकर बात करते हुवे मेरा लुंड टैंकर लोअर में तम्बू बना हुवा था जिसे दीदी भी कनखियों से देख रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे पांव पकड़कर अपनी चूचियों पर रख दिया जिससे दीदी का शरीर हिल गया और एक मज़े की लहार मेरे शरीर में भी दौड़ गई. फिर दीदी ने अपनी चूचियों से मेरे पांव को दबाकर मेरे साइन तक ले आयी. जिससे दीदी की छूट मेरे लुंड पर टच हो गई. दीदी मुंह से सिसकी निकल गई. फिर मैंने दीदी की चिचियो पर अपने पेअर से दबाव डालकर उन्हें पीछे किया.

दीदी की गुदाज चूचिया मुझे बहुत मज़ा दे रही थी. जिससे मेरे शरीर में मस्ती दौर रही थी. दीदी ने फिर अपनी चूचियों का दबाव मेरे पैरो में डालकर मेरे साइन तक ले आई और मैं फिर से दीदी की चूचियों को दबाव डालकर उन्हें पीछे किया. दीदी भी अब इस खेल का मज़ा ले रही थी और मेरे खड़े लुंड को बिच बिच में देख रही थी. 8-10 बार ऐसा करने पर भी मेरा लुंड सीधा खड़ा होने के कारन ठीक से दीदी की छूट को नहीं टच हो प् रहा था. इसलिए जब मैंने देखा की दीदी ऊपर निचे होते हुवे मेरे लुंड को देख रही हैं तो मैंने अपने लुंड को अपनी हाँथ से पकड़ा और उसे अपने जांघ की तरफ दबा दिया जिससे मेरा लुंड तिरछा हो गया जिसे दीदी देख रही थी. फिर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे पांव को दबाकर मेरे साइन तक किया जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट की फैंको के बिच टकराया. और दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh अभी. की आवाज़ निकल गई.

मैंने दीदी को वापस पुश नहीं किया और दीदी की चूचियों से अपना पेअर हटा लिया जिससे दीदी धड़ाम से मेरे साइन पर गिर पड़ी और मेरा लुंड बहुत जोर से दीदी की छूट पर टकराया. दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mammmmmmmmmmmmyyyyyyyyy marrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiii maiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. Ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii.

जब दीदी मेरे ऊपर गिरी तो मैंने उनको कसकर अपने साइन से चिपका लिया और तेज़ तेज़ से दीदी के शरीर को अपने शरीर में रगड़ने लगा. ऐसे लग रहा था जैसे हम दोनों चुदाई कर रहे हो. दीदी भी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii ohhhhhhhhhhhhhhh क्या कर राहाआआआ hiaaaaaaaaaa. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई mujheeeeeeeeeee aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आआआआहहहहह क्याआआ जाड्डड्डड्डड्डू हैईईईई tujhmeeeeeeeeeee. टूउऊउउउ bahutttttttttt अछिइइइइइइ कसरतततततत कररररवता haiiiiiiiiiiiiii oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhn भाआईईई.

थोड़ी देर बाद इसी तरह दीदी के शरीर को अपने शरीर से रगड़ने के बाद मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- क्यों दीदी मज़ा आया मेरे साथ एक्सेरसीज़े करके.

सरिता दी- हांण बहुत मज़ा आया. अभी और करेगा एक्सेरसीज़े या बस. (यथा कहकर दीदी मेरे ऊपर से उठ गई.)

मैं- मैं तो करना चाहता हूँ आप के साथ. आप बताओ क्या आप करवाऊंगी मेरे साथ. अभी तो ये बस शुरुवात है. अभी तो आपके साथ बहुत कुछ करूँगा.

मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी. मैं ये कहकर एक डम्बल उठा लिया और दीदी के पीछे आ कर खा हो गया और पीछे से झप्पी डालकर डम्बल उनके हाँथ में पकड़ा दिया और खुद उनके हाँथ को निचे से पकड़कर बी छेप करने लगा. डम्बल उठाते समय मैं उनको पीछे से धक्का देता और अपने लुंड को दीदी की गांड पर रगड़ देता. जिससे दीदी ssssssssssssssssssssssss sssssssssssssssssssssss करने लगती. दीदी की गांड बहुत नरम thi.Fir मैंने दूसरा डम्बल भी उठाकर दीदी के दूसरे हाँथ में दे दिया और पीछे जाकर फिर से उसी तरह खड़ा हो गया. और उन्हें एक्सेरसीज़े करवाने लगा और अपने लुंड को झटके मर मर कर उनकी गांड में लोअर के ऊपर से रगड़ता रहा. मेरा लुंड तो जैसे फटने को हो रहा था. थोड़ी देर बाद मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई दी.

सरिता दी- अभी तक कितनो को ऐसे एक्सेरसीज़े कराइ है तुमने.

मैं- अभी तक तो केवल नताशा को hi ऐसी एक्सेरसीज़े कराइ थी. और वो बहुत खुश हो जाती थी मेरी एक्सेरसीज़े से. और अब आपको सीखा रहा हूँ.

सरिता दी- वो तो ठीक है लेकिन मुझे ऐसी एक्सेरसीज़े करने में बड़ी शर्म आ रही है.

मैं- इसमें शर्म कैसी. जिमखाने में तो लड़किया गैर मर्दो के साथ ऐसे एक्सेरसीज़े करती हैं. वो तो आपने t.v. पर देखा hi होगा.

सरिता दी- हाँ देखा तो है लेकिन………

मैं- लेकिन क्या. मैं तो आपका छोटा भाई हूँ तो गैर मर्द के साथ ऐसी एक्सेरसीज़े करने सा तो अच्छा है की आप ऐसे एक्सेरसीज़े अपने भाई के साथ करे. और वैसे भी गैरमर्द के साथ ऐसे एक्सेरसीज़े करने सा ज्यादा मज़ा भाई के साथ आता है ऐसी एक्सेरसीज़े करने में.

सरिता दी- ह्ह्ह्हह्ह्ह्हम्मम्मम्मम्मम. लेकिन ये बता ये किस चीज़ की एक्सेरसीज़े है.

मैं- (दीदी की गांड में अपना लौड़ा रगड़ते हुवे)- ये डोला बनाना के एक्सेरसीज़ है लेकिन डोले के साथ साथ इसको करने से चूचिया भी सख्त होती हैं.

सरिता दी- तू कितना गन्दा है अभी.

मैं- अब इसमें गन्दा क्या हो गया. आखिर आपकी चुकी को चुकी नहीं बोलेंगे तो फिर क्या बोलेंगे.

दीदी मेरे मुंह से अपनी चुकी सुनकर शर्माने लगी. और धीरे से बोली.

सरिता दी- इसको ब्रैस्ट बोल सकता है. बूब्स बोल सकता है.

मैं- बोल तो सकता हूँ लेकिन बूब्स और ब्रैस्ट बोलने में वो मज़ा नहीं आता जो मज़ा चुकी बोलने में आता है.

सरिता दी- तुझे तो हर वक़्त मज़ा लेने की पड़ी रहती है.

मैं- इस एक्सेरसीज़े का एक और फायदा है दीदी.

सरिता दी- मैं जानती हूँ तू फिर कुछ गन्दा hi बोलेगा, लेकिन जब तू इतना बता चुक्का है तो ये भी बता दे की और क्या फायदा होता है इससे

Main-(didi की गांड पर धक्का मरते हुवे) इस एक्सेरसीज़े से लड़कियों की चुकी कभी लटकती नहीं हैं. लड़किया जिम इसीलिए जाती हैं ताकि उनकी चुकी हमेशा तानी तानी रहे. उनमे ढीलापन न आये. इसीलिए मैं आपको ये एक्सेरसीज़े करवा रहा हूँ, जिससे आपकी चूचिया भी हमेशा तानी तानी रहे. वैसे एक बात कहूँ आप बुरा न मने तो.

सरिता दी- हाँ कहो.

मैं- आप ने दो दिन एक्सेरसीज़े की है तो क्या मैं अपनी चूचियों को चेक कर लू. की अगर उनमे कही ढीलापन हो तो मैं उसी हिसाब से आपकी एक्सेरसीज़े करौ.

सरिता दी- ये तू क्या बोल रहा है. तू मेरे इनको छूना चाहता है. तुझे शर्म नहीं आएगी अपनी बहन के बूब्स छूने में.

मैं- ये तो मैं आपके फायदे के hi लिए बोल रहा हूँ. अगर आपको नहीं चेक करवाने तो कोई बात नहीं.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने कुछ देर सोचा और उसके बाद बोली.

सरिता दी- अच्छा ठीक हाइट तू चेक कर ले लेकिन मुझे ज्यादा परेशां मत करना.

इतना सुनते hi मैंने दोनों हांथो से दीदी की चूचिया पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा. पीछे से मेरा लुंड उनकी गांड में पहले से hi फंसा था. मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुवे कहा.



मैं- दीदी आपकी चूचिया तो बहुत सख्त हैं बस थोड़ी और एक्सेरसीज़े की जरूरत है. उसके बाद आपकी चूचिया हमेशा तानी तानी रहेंगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-75

सरिता दी- अच्छा ठीक हाइट तू चेक कर ले लेकिन मुझे ज्यादा परेशां मत करना.

इतना सुनते hi मैंने दोनों हांथो से दीदी की चूचिया पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा. पीछे से मेरा लुंड उनकी गांड में पहले से hi फंसा था. मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुवे कहा.

मैं- दीदी आपकी चूचिया तो बहुत सख्त हैं बस थोड़ी और एक्सेरसीज़े की जरूरत है. उसके बाद आपकी चूचिया हमेशा तानी तानी रहेंगी.

अब आगे..

इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से दीदी की चुकी पकड़ा और एक हाँथ से दीदी का डम्बल वाला हाँथ पकड़कर उन्हें एक्सेरसीज़े करवाने लगा. दीदी को एक्सेरसीज़े करवाते हुवे मैंने दीदी की दोनों चूचिया बदल बदल कर खूब दबाई और अपने लुंड को दीदी की गांड में खूब रगड़ा. फिर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अगर आप अपनी t-shirt उतर दे तो मैं और अचे से चेक कर सकता हूँ.

मैंने ये बात दीदी की गार्डन को चूमते हुवे कहा. मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने गार्डन पीछे की और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता di-nahi अभी तू t-shirt के ऊपर ऊपर से hi चेक कर लो. मुझे बहुत शर्म आएगी t-shirt उतरने में.

ये बात कहते हुवे दीदी की आँखे लज्जत से लाल हो गई थी. लफ्ज़ उनके मुंह से बड़ी मुश्किल से निकल रहे थे. दीदी अब बहुत गरम हो गई थी. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

मैं- चलो दीदी अब आपकी चूचियों की एक्सेरसीज़े करते हैं.

इतना कहकर मैं चेस्ट के स्टैंड पर बैठ गया जिससे मेरा लुंड एकदम तम्बू बैंकर खड़ा नजर आने लगा. जिसको दीदी बड़े ध्यान से देख रही थी. कुछ देर तक दीदी लुंड को देखती रही और अपनी जीभ अपनों होंठो पर फिरने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- अगर देखकर मन भर गया हो तो एक्सेरसीज़े शुरू करे.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा कर इधर उधर देखने लगी. उसके बाद मैंने दीदी को अपनी गॉड में बैठने के लिए कहा. तो दीदी फिर से मेरा लुंड देखने लगी. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद मेरी आँखों में देखते हुवे दीदी मेरे पास आई और मेरी तरफ पीठ करके मेरी गॉड में बैठ गई. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड में धस गया. दीदी ने गांड हिलाकर मेरे लुंड को अपनी गांड की दरार में एडजस्ट किया और बैठ गई. मैंने भी दीदी के कंधे को पकड़कर अपने लुंड पर दबा दिया और उनकी दोनों बगलो से हाँथ डालकर उनकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा. और चूचियों को पकडे पकडे दीदी को अपने से पूरा सत्ता लिया. कुछ देर बाद मैंने दीदी की चूचियों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर दी और निचे कमर ऊपर उछलने लगा और दीदी को चुकी को जोर जोर से निचोड़ने लगा. दीदी की मुंह से कराह निकल रही थी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Ddhiiiiiiiiireeeeeeeeee karrrrrrrrrr mereeeeeeeeee भाआईईईईई dardddddddddd हूँ राहाआआ haiiiiiiiiiiii hhhhhhheeeeeeyyyyyyyyyyyyy. ाराआआआंममममम से.

उसके बाद मैंने मैंने दीदी से वाइट उठाने के लिए कहा और अपने हाँथ दीदी की चूचियों से उठाकर उन्हें सहारा देने लगा और दीदी सेट लगाने लगी 5 सेट लगाने के बाद मैंने वाइट रखने को कहा और दीदी को पकड़कर वैसे hi उठा और उन्हें गॉड में लेकर बैत गया और उनकी चूचियों को दोनों हांथो में भरकर डैम लगा कर मसलने लगा. और निचे से लुंड को उनकी गांड में पेलने लगा. जिससे दीदी छटपटाने लगी और बोलने लगी.

सरिता दी- oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhh sssssssssssssssssssss munmmmyyyyyyyyyyyyy ढ़हिरीई सीएएएएएएए aahhhhhhhhhhh बहुत्तट्ट्ट्ट

डाआआअआर्ड्ढड्डड्डड़ हो राहाआआआह हैईईई Bhaiiiiiiiiii maiiiiiiiiiin marrrrrrrrrr जाआआआंगियईईई aaaaaaaaaaaaaaooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाआराममममममममम से दाबाआआ अभीइइइइइ. आह्हः आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की नरम गांड मुझे पागल बना रही थी. कुछ देर तक दीदी की चूचिया दबाने और गांड में लुंड पेलने के बाद मैंने दीदी को अपनी गॉड से उतर दिया और दीदी से कहा.

मैं- क्यों दीदी मज़ा आ रहा है न मेरे साथ.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhh भाआआआईईई बहुत तीज दबायीय तुमनेई ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैं.

मैं- अच्छा अब धीरे धीरे दबाऊंगा. चलो अब आपके पैट की एक्सेरसीज़े करते हैं.

सरिता दी- आज बस करते हैं अभी मैं बहुत थक गई हूँ.

मैं- बस दीदी ये एक और कर लो उसके बाद चली जाना.

इतना कहकर मैं अपनी टंगे खोलकर जमीन में लेट गया और दीदी से कहा.

मैं- आओ दीदी अब मेरी थिंगस पर बैठ जाओ.

सरिता दी- ये कैसी कसरत है अभी.

मैं- यार दीदी तुम सवाल बहुत करती हैं, तुम आओ तो सही. इसको करने से तुम्हारा पेट बहार नहीं निकलेगा.

मैंने दीदी की अबकी बार तुम बोलकर कहा लेकिन दीदी इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया.

मेरे लेटने से मेरा लुंड लोअर में एकदम टैंकर खड़ा नज़र आ रहा था जिसे दीदी बड़े ध्यान से देख रही थी. जब से दीदी आई थी तब से मेरे लुंड को देख देख कर दीदी एकदम पागल हो गई थी. दीदी की आँखे बहुत नशीली हो गई थी. मेरे लुंड को देखकर दीदी अपने होंठो को जीब से चाटने लगी. दीदी कुछ देर मेरे लुंड को देखती रही और अपने होंठो पर जीभ फिरती रही. फिर आकर मेरे थिंगस पर बैठ गई. मैंने दीदी को और आगे बैठने के लिए कहा. तो दीदी और आगे आ गई जिससे दीदी की गरम छूट जो इतना पानी बहा चुकी थी की उनकी लोअर गीली हो गई थी वो मेरी गोटियों से टकरा गई. जिससे मेरे मुंह sssssssssssss सरिता निकल गया. दीदी ने मेरी तरफ मुस्कुराकर नशीली नजरो से देखा. लेकिन कहा कुछ नहीं.

मैं- अब आप भी मेरी तरह अपनी तंग खोलकर मेरे ऊपर लेट जाओ और जैसे hi मैं 1 कहूंगा हम दोनों एक साथ अपने शरीर को ऊपर उठाएंगे और एक दूसरे को कसकर पकड़ लेने और जब मैं 2 कहु तो फिर से पहले जैसे hi लेट जाएंगे.

सरिता दी- ये कैसे एक्सेरसीज़े है यार. चलो ठीक है करो.

मैं- 1

इतना कहकर हम दोनों ने एक दूसरे की टैंगो में तंग फसकर तेज़ी से उठे और एक दूसरे को कसकर बहो में भर लिया जिससे दोनों के मुंह सा aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh sssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

इस एक्सेरसीज़े को करके दीदी का तो पता नहीं मगर मुझे बहुत मज़ा आया था. ये एक ओरिजिनल चुदाई सन था और मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मैं सरिता दीदी को छोड़ रहा हूँ. दीदी इतनी ज्यादा छुडासी हो गाइट hi की वो अपनी इसी छुडास में मेरे साथ ये उलटी शिधि एक्सेरसीज़े कर रही थी. कुछ देर एक दूसरे से इसी तरह चिपके रहने के बाद मैंने कहा.

मैं-2

इतना कहकर हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर लेट गए. इसी तरह से मैंने और दीदी ने 5 बार ये एक्सेरसीज़े की और जब 6वि बार मैंने 2 बोलै तो दीदी ने मेरे जिस्म को नहीं चूड़ा मैंने दोबारा 2 बोलै फिर भी दीदी ने मुझे नहीं छोड़ा मेरा लुंड पुरे उफान पर था और दीदी की छूट के मुंह से सत्ता हुवा था जिसे दीदी भी फील कर रही थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या हुवा दीदी.

सरिता दी- अब मेरे शरीर में तनिक भी जान नहीं है अभी. मैं नहीं उठ पाऊँगी.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को और जोर से अपने शरीर से सत्ता लिया और निचे से अपनी कमर उठाकर एक जोरदार झटका दीदी की छूट पर मर दिया. दीदी सिसक कर चीख पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhh sssssssssssss अभीइइइइइइ माहाआर gaiiiiiiiiii मैनेईईईई डीईएडीई सीईई.

दीदी की बात सुनकर मन कर रहा था की अभी के अभी दीदी की कपडे पहाड़ दालु और हचक हचक कर दीदी की छूट को छोड़कर उसकी धज्जिया उदा दू. लेकिन मैंने कूद को कण्ट्रोल kiya.abhi मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था. शायद यही हाल इस समय दीदी का भी था. कुछ देर बाद दीदी मेरे शरीर से लुढ़क कर साइड में लेट गई. मेरी लुंड से प्रेकमे की कुछ बूंदे निकल कर मेरे लोअर में डेग बना गई थी और दीदी की लोअर की तो पूछो hi मत. दीदी की छूट ने इतना पानी छोड़ा था की उनकी लोअर में लगभग 6”का गोल धब्बा बन गया tha.kuchh देर बाद हम दोनों उठकर बैत गए तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी अब हो गई कसरत अब मैं जाओ.

मैं- नहीं दीदी बस एक और कर लेते हैं उसके बाद चली जाना. अगर आपको मेरे साथ करने में मज़ा नहीं आ रहा है तो आप जा सकती हैं.

दीदी भी शायद अभी और मज़ा लेना चाहती थी तभी तो मेरे एकबार कहने पर रुक गई और बोली और बोली.

सरिता दी- मैंने ऐसा तो नहीं कहा अभी. तू कहता है तो एक और कसरत कर लेते हैं.

मैं एकबार फिर से निचे जमीन पर लेट गया और और दीदी को अपनी थिंगस पर फिर से बैठने के लिए कहा. दीदी आकर मेरी थिंगस पर बैठ गई. दीदी के बैठने के बाद मैंने अपने घुटने ऊपर उठा लिए जिससे दीदी अपनी गद्देदार गांड लेकर सरक कर निचे मेरे लुंड पर आ giri.ham दोनों के मुंह से आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. मैंने दीदी को उनके हाँथ कमर पर रखने के लिए कहा. जिससे दीदी की चूचिया सामने की तरफ निकल gai.maine दीदी से कहा.



मैं- अब आप आगे की तरफ झुककर अपनी चूचिया मेरे साइन से रगड़ो और फिर सीधी हो जाओ. इसी तरह काम से काम 20 बार करो.

मेरी बात सुनकर दीदी झुककर अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ने लगी और लगभग 20 सेकंड तक अपनी चूचिया रगड़ने के बाद शिधि हो गई. दीदी इसी तरह झुक झुक कर अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ती रही. झुकने की वजह से दीदी की चूचिया बहुत अंदर तक ब्रा में कैद नज़र आ रही थी.



चूचियों को मेरे साइन में रगड़ते हुवे दीदी की साँस उखाड़ने लगी. दीदी का चेहरा लाल हो गया. और आँखे बंद होने लगी.

दीदी लगातार झुक झुक कर अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ती रही और निचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लुंड पर पटकती रही जिससे मैं बेकाबू हो गया और मैंने दीदी को पकड़ कर अपने ऊपर खींचा और t-shirt के ऊपर से hi दीदी की एक चुकी अपने मुंह में ले ली और दबा दबा कर चूसने लगा. दीदी भी अब अपनी चरम पर थी इस्लीय वह मेरा बालो पर अपना हाँथ फिरने लगी. मैंने दोनों हांथो को दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिया और मसलने लगा. कभी कभी मसलते हुवे उनकी गांड पर थप्पड़ भी लगाना शुरू कर दिया. जिससे दीदी के मुंह से aaahhhhhhhhhh ाभीइइइइइइइ ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई ssssssssssss ाभीईई की आवाज़ निकलने लगी. थोड़ी देर तक दीदी की चुकी चूसने और गांड रगड़ने और गांड पर थप्पड़ मरने से दीदी का जिस्म अकड़ने लगा और वो छीलते हुवे झड़ने लगी.

सरिता दीदी- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh AAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyy. Oooooooooooohhhhhhhhh मुझीीीी क्याआ हो राहाआआआआ हिअआआअ. मरीईईई वहह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत खुऊजली होओओओओ रहीइइइइइइइ hiaaaaaaaaaa aaaaaaaaaahhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiii बाछआआआआआआआओ मुझेईईईई mainnnnnnnnnn गइईईईइर्र रहीइइइइइइइइ होऊणननननन aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

इतना बोलकर दीदी निढाल हो गई. मैं भी अब छूटने वाला था इसीलिए मैंने दीदी की चुकी को मुंह में भर लिया. और दोनों हांथो से उनकी गांड पर थप्पड़ मरने लगा और चुकी को दन्त से दबाकर खींच लिया और गांड को जोर से मसल दिया. मैं और बर्दास्त नहीं कर पाया और मेरे लुंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा.

मैं- AAAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh Ooooooooooooooohhhhhhhhhh सरिता मैं भी गयाए. Teeeeeeeeeeeereeeee जिससससससससमममममम नई मेरेईईई लुँड्ढड्डड़ को पिघलाआआआ दियाआआआ सविताआआआ. तेराआआआ जिसमममममममम बहुत्तट्ट्ट्ट गराआआआआम हैईईईई. टूउऊउउउउउ भठियईईई बहहहहहहहहउतत्तत्त चूड्डड्डड्डकहाआद haiiiiiiiiiiii. तू भीईई बहुत्तट्ट्ट्ट पयासीइइइइइइ है. tuneeeeeeeeeee mujheeeeeeeeee निचोड्ड्ढड्डड़ liyaaaaaaaaaaa सलीईईईई. Mainnnnnnnnnn gayaaaaaaaaaaa.oohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

झड़ते समय मैंने दीदी की चुकी दन्त से खींच ली थी और उनकी गण्ड को मसल दिया था जिससे दीदी भी चीख पड़ी थी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii Dhireeeeeeeeee भाआईईईईई डरडडडडडड होताआआआ hiaaaaaaaaaa. Aaraammmmmmmmmmmm सीईई.

दीदी झाड़कर मेरे मेरे ऊपर hi पड़ी लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी. झड़ने के बाद मैंने भी दीदी को अपने से लिपटकर गहरी साँस ले रहा था. जब हम दोनों की साँस दुरुस्त हो गई तो दीदी को होश आया और वह मेरे ऊपर से उतारकर कड़ी हो गई और अपना हुलिया ठीक करने लगी. झड़ने के बाद हम दोनों को लोअर गीली हो गई थी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से पूछा.

मैं- तो कैसा लगा दीदी मेरे साथ एक्सेरसीज़े करने में. अगर अच्छा लगा हो तो कल इससे भी अच्छी एक्सेरसीज़े सिखाऊंगा आपको.

दीदी मेरी बात सुनकर शर्माने लगी और निचे जाने लगी तो मैं दीदी की मटकती गांड को घूरने लगा. दरवाज़े पर पहुंचकर उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और अपनी गांड को घूरता पाकर मुस्कुराने लगी और जीभ दिखाकर बोली.



सरिता दी- तू बहुत कमीना है. तू कभी नहीं सुधर सकता.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-76

इतना कहकर दीदी निचे चली गई तो मैं भी सीधा बाथरूम में घुस गया और लोअर उतर कर धुलने के लिए दाल दिया और फ्रेस होकर अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर बाद मैं निचे आया तो निचे सभी बैठे हुवे थे और सविता दीदी किचन में नाश्ता और खाना बना रही थी मैं भी सीधे किचन में चला गया और दरवाज़े पर खड़ा होकर दीदी को देखने लगा. दीदी ने नहाकर सदी और ब्लाउज पहन रखा था. थोड़ी देर बाद मैं दीदी के पीछे जाकर उनसे सर्कार खड़ा हो गया. दीदी इस अपर्यासित हमले से चौक गई और तुरंत पीछे मुड़कर देखा तो और मुझे देखकर शांत हुई और बोली.



सविता दी- क्या करता है अभी. तूने तो मुझे डरा दिया था.

मैं- अरे सविता मैं तुमको डरा कहा रहा हूँ मैं तो तुम्हे प्यार कर रहा हूँ.

और इतना बोलकर मैंने उनके दादी के पल्लू को कंडे से हटाकर दीदी को अपनी बहो में भर लिया. मैंने अपना हाँथ दीदी की छूछीयो पर रख दिया और हल्का सा दबा दिया जिससे के मुंह से ssssssssssssss की आवाज़ निकल पड़ी. दीदी उछाल पड़ी और मुझसे कहने लगी.



सविता दी- क्या करता है अभी. सभी बहार बैठे हैं किसी ने देख लिया तो बहुत बुरा होगा.

मैं- कुछः नहीं होगा दीदी. तुम चिंता न करे.

इतना बोलकर मैं दीदी की चूचिया हल्का हल्का दबाने लगा और उनकी गार्डन को किश करने लगा. दीदी भी अब काम करना बंद कर चुपचाप कड़ी हो गई और मेरी हरकतों का आनंद उठाने लगी. मैं हलके हलके दीदी की चूचियों को दबाता हुवा उनकी पीठ चूमने लगा.



दीदी आआआआहहहहहहह ooooooooooohhhhhhhhh आहे भरने लगी फिर मैंने दीदी की चूचियों को जोर से दबा दिया तो दीदी हलकी सी चीख पड़ी और मुझसे बोली.

सविता दी- क्या कर रहा है अभी दबा क्यों रहा है बहार सब बैठे हुवे है. किसी ने सुनलिया तो हम पकडे जाएंगे.

मैं- तो फिर चीख क्यों रही हो. थोड़ी देर शांति से नहीं कड़ी रह सकती हो क्या.

मेरे ये कहने पर दीदी पलटकर खडी हो गई और मेरी तरफ देखने लगी. तो मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे उन्हें किचन के स्लैप पर बैठा दिया और उनके होंठो को चूमने लगा.



थोड़ी देर तक होंठ चूमने के बाद मने हाँथ उनकी सदी के अंदर डालने लगा तो दीदी ने मेरे हाँथ पकड़ कर रोक दिया. तभी मनीषा की आवाज़ सुनाई दी जो दीदी से नाश्ते के लिए पूछ रही थी. दीदी तुरंत मुझे दूर धकेलकर गैस के पास चली गई. जब मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो मनीषा वह कड़ी थी.

मनीषा की दरवाज़े के पास देखकर तो मेरी हालत ख़राब हो गई. वो मुझे hi देख रही थी. मुझे दर लग रहा था की कही मनीषा ने कुछ देख तो नहीं लिया. थोड़ी देर बाद वह बहार चली गई तो मैं भी फ्रीज़ से पानी निकलकर बहार चला गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद सविता दीदी नाश्ता लेकर आ गई. सभी ने मिलकर नाश्ता किया. इस दौरान मैं मनीषा को hi देख रहा था. लेकिन उसके हाव भाव से मुझे ऐसा तनिक भी नहीं लगा की उसने कुछ देखा होगा. नाश्ता करने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया. चूँकि आज छुट्टी थी तो मां पापा आज घर पर hi रहने वाले थे. तो मैंने सोचा की थोड़ा बहार घूमकर औ. तो मैं तैयार होकर पापा को बोलकर बहार मार्किट की तरफ चला गया और लगभग 2 हॉर्स बाद घर आया.

जैसे hi मैं घर में एंटर हुवा तो पता चला जीजा जी पधारे हैं दीदी को ले जाने के लिए. मुझे ये जानकर बहुत दुःख हुवा और जीजा पर बहुत गुस्सा आ रहा था. महीनो की म्हणत और काफी प्रयासों की बाद तो मुझे छूट मिली थी और वो भी जीजा मुझसे दूर करने के लिए आये हैं. लेकिन मैं क्या कर सकता था. दीदी उनकी पत्नी थी तो कुछ बोल भी नहीं सकता था. फिर मैंने जाकर जीजा जी के पांव चुवे और उनसे बातचीत करने लगा. थोड़ी देर बातचीत करने के बाद मैं दीदी के कमरे में चला गया तो वह पर मनीषा भी बैठी थी. दीदी का चेहरा जीजा के आने से उतर गया था. वो भी दुखी थी लेकिन ख़ुशी जाहिर कर रही थी. आखिर दुक्खी हो भी क्यों न. अब्भी ाभ्ही तो दीदी की बंजर जमीन में बरसात होनी शुरू हुई थी. मैंने मनीषा को किसी बहाने से बहार भेज दिया और दीदी से कहा.

मैं- अब क्या होगा दीदी. आप जाने से मन कर दो न. अभी तो हमने ठीक से मज़े भी नहीं किये हैं. और आप जा रही हो.

सविता दी- मन तो मेरा भी नहीं है जाने का. लेकिन मैं मजबूर hoon.mana भी नहीं कर सकती. क्योंकि मन करने का कोई बहाना भी नहीं है.

इतनी देर में मनीषा वापस आ गई. मैं फिर निचे आ गया. बातो बातो में पता चला की अभी 1 हॉर्स में hi जीजा जी को निकलना है. ये सुनकर मुझे और ज्यादा गुस्सा आने लगा. मैंने सोचा था की एक दो दिन बाद जीजा जाएंगे तो किसी भी तरह से समय निकल कर मैं सविता दीदी को 2-4 बार और छोड़ सकता था. लेकिन इनको तो तुरंत निकलना है. फिर मैं ऊपर देखकर मन में कहा की आपने मेरी किस्मत नरकट के पेन से लिखी है क्या. जो बिच बिच में मिट गई है.

हम सब बाते कर रहे थे. तभी सविता दीदी तैयार होकर बहार आयी. आज दीदी जैसे तैयार हुई थी. वो बहुत hi ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. दीदी को देखकर ऐसा लगता था जैसे वो एकदम पतिव्रता स्त्री हैं. दीदी और जीजा को छोड़ने के लिए सब लोग बहार तक आए. मैं दोनों को छोड़ने स्टेशन जाना चाहता था लेकिन पापा ने मन कर दिया और खुद जाने लगे. बहार आकर दीदी ने मुझे एकतरफ बुलाया. मैं उनके पास गया तो दीदी ने मुझे कसकर बहो में भर लिया. और धीरे से मेरे कान में बोली.

सविता दी- अभी मैं तेरे बिन कैसे रहूंगी. मुझे तेरी बहुत याद आएगी. तू कुछ भी करके मुझे जल्दी से यहाँ फिर से बुला लेना.

मैं-( मस्ती में शरारत के साथ). मेरी याद आएगी या मेरे लुंड की.

सविता दी- तू बहुत ख़राब है अभी. यहाँ मेरी हालत ख़राब है और तुझे मस्ती सूझ रही है.

मैं- अच्छा ठीक है. अच्छा सुनो तुम hi कोई बहाना बनाकर मुझे कुछ दिन के लिए वह बुला लेना. फिर जीजा के ऑफिस जाने के बाद हम दोनों खूब धामा चौकड़ी मचाएंगे.

मैंने इतना कहकर अपनी नज़र चारो तरफ घुमाई और जब मैंने देखा की हमें कोई नहीं देख रहा है तो मैंने जल्दी से दीदी के गलो को चुम लिया और अपने हाँथ से दीदी की गांड दबा दी. जिससे दीदी आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ के साथ मुझसे अलग हो गई. तो हम दोनों सबके पास आ गए.



दीदी की आँखों में आंसू आ गए थे. तो सभी ने सोचा की ये हम दोनों का प्यार है जो बिछड़ने के कारन दीदी की आँखों में दिख रहा है लेकिन ये तो हम दोनों hi जानते थे की ये आँशु किस कारन हैं.

(जब मैंने दीदी को चूमा था और उनकी गांड दबाई थी तो मेरी जानकारी में ये था की मुझे कोई नहीं देख रहा है. लेकिन मैं गलत था. क्योंकि कोई था जिसने मुझे ये करते हुवे देख लिया था.).

खैर जीजा के चले जाने के बाद हम घर के अंदर आ गए. दीदी के जाने से सभी के चेहरे पर दुःख था. लेकिन सबसे ज्यादा दुखी मैं था. क्योंकि कुछ दिन फिर मेरे लुंड को भूखा hi रहना था. थोड़ी देर बाद मैं अपने कमरे में चला गया और सो गया. अभी मुझे सोये 1 हॉर्स hi हुवा था की मनीषा ने आकर मुझे जगाया. जब मैं उठ गया तो उसने मुझसे कहा.

महिषा- क्या भैया रात को नहीं सोएथे क्या जो अभी सो रहे हो.

मुझे उसकी बातो में शरारत के साथ साथ व्यंग भी नजर आ रही थी. लेकिन मैं समझ नहीं paya.To मैंने भी उसे जवाब दिया.

मैं- हाँ प्यारी बहन. एक जंगली बिल्ली ने मुझे सोने नहीं दिया. इसलिए अभी नींद पूरी कर रहा हूँ.

मनीषा- आप ऐसी जंगली बिल्लियों से दूर रहिये नहीं तो किसी दिन आपको काट लेगी.

उसकी बात पर हम दोनों हंसने लगे तो थोड़ी देर हंसने के बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- चलो भैया मेरे काम में मेरी हेल्प करवाओ.

मैं- तू तो कोई काम करती नहीं है तो आज तुझे कौन सा काम पद गया.

मनीषा- वो क्या है न की सविता दी ने सुबह कपडे भिगोये थे धोने के लिए. लेकिन वो तो चली गई. और सरिता दीदी बोल रही हैं की वो कपडे नहीं ढोएंगी. और मुझे धोने के लिए कहा. तो आप मेरी हेल्प कर दो तो मैं कपडे दो लू.

मैं- अच्छा चल मैं आता हूँ तेरी हेल्प करने.

थोड़ी देर बाद मैं कमरे से बहार आया और मनीषा के साथ बैठ कर कपडे धोने में उसकी हेल्प करने लगा. मैं तो अपनी धुन में कपडे धो रहा था और मनीषा से बिच बिच में बात भी कर रहा था. और ऐसे hi बात करते हुवे मैंने अपनी नज़र मनीषा की तरफ उठाई और फिर अपने कपडे धोने में व्यस्त हो गया.

लेकिन इन 2-3 सेकंड में मुझे कुछ ऐसा दिख गया की मैं अपनी नज़ारे फिर से उठाने के लिए मज़बूर हो गया. मनीषा ने पानी भरने के लिए नल खोला था और वो नल के पास hi बैठी थी तो पानी गिरते समय टोटी से कुछ पानी की फुहार मनीषा के ऊपर भी गिर रही थी. और कुछ कपडे उठा उठा कर पटकने से पानी उसके ऊपर गिर जाता था जिससे उसके कपडे गीले हो गए थे. कुछ मुझे इन सब की कोई खबर नहीं थी. जब मैंने दोबारा नज़र उठा कर उसकी तरफ देखा तो कपडे गीले होकर उसके जिस्म से चिपक गए थे. जिससे उसकी चूचिया हलकी हलकी नज़र आ रही थी. शायद उसने ब्रा नहीं पहनी थी. मनीषा की चूचियों की झलक देखकर मेरे लुंड सर उठाने लगा था.



मैंने अपनी नज़र उठाकर उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो कपडे धोने में व्यस्त थी. पानी की बूंदो से उसके बाल भी गीले हो गए थे जो कपडे धोते समय बार बार उसके चेहरे पर आ रहे थे. मैं तो कपडे द्यूंला भूलकर बस उसकी चुहियों को hi देखने में व्यस्त हो गया. जब उसने देखा की मैंने कपडे धोना बंद कर दिया है तो उसने मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

मनीषा- कहा खो गए भैया कपडे नहीं धोना है क्या.

मैं- धोना है. मैं तो तुझे देख रहा था.

मनीषा- वो तो आप मुझे हमेशा देखते हैं

मैं- वो तो है, लेकिन कपडे धोते हुवे पहली बार देख रहा हूँ. और देख रहा हूँ किट ु अपने बालो की वजह से ठीक से कपडे नहीं धो प् रही है.

मनीषा- हाँ भैया ये बार बार मेरे चेहरे पर आ रहे हैं.

इतना बोलकर मनीषा फिर से कपडे धोने में व्यस्त हो गई. अब तक उन्स्की चूचियों को देखकर मेरा लुंड चढी में पूरी तरह खड़ा हो गया था जिसका उभर लोअर में भी नज़र आ रहा था. थोड़ी देर मनीषा की चूचिया देखने के बाद मैंने और पास से उसकी चूचिया देखने की सोची इसलिए मैं उठा और उसके सामने जाकर बैठ गया. मेरे पास बैठने पर उसने मेरी तरफ देखा और मुझसे पूछा.

मनीषा- क्या हुवा भैया.

मैं- अरे यार तुम कपडा धो रही हो तो बार बार तुम्हारे बाल तुम्हारे चेहरे पर आ रहे हैं जिसे तुम बार बात पीछे कर रही हो इसलिए तुम्हे कपडे धोने में दिक्कत हो रही है. तो मैंने सोचा की तुम कपडे डोवो और मैं तुम्हारे बालो को पीछे कर दूंगा.

मेरी बात सुनकर महिषा मुस्कुराने लगी और फिर कपडे धोने लगी. मैं नजदीक से उसकी चूचियों को देखने लगा. नजदीक से देखने पर पता चल रहा था की उसने ब्रा नहीं पहनी है. जिससे उसकी चूचियों के निप्पल भी गीले कपडे के ऊपर से दिखाई पद रहे the.tabhi उसके बाल फिर आगे की तरार आये तो मैंने उसके चेहरे पर से बालो को न पकड़कर उन्स्की ठुड्डी की पास से बालो को पकड़कर पीछे किया. यह देख कर मनीषा मुस्कुराने लगी.



उसके बाल कपडे को उठा उठा कर पटकते समय बार बार आगे आ रहे थे और कपडे पटकने से उसकी चूचिया भी हिल जाती थी. कुल मिलकर बहुत hi कामुक नजारा था ये. थोड़े देर उसकी ठुड्डी से बाल हटाने के बाद मैंने और आगे बढ़ने की सोची और जब अबकी बार उसके बाल सामने आये तो मैंने उसकी चूचियों के उभर जहा से शुरू होते हैं वह से उसके बाल पकड़कर पीछे किया. मेरे ऐसा करने से उसने मेरी तरफ देखा. लेकिन मैंने अपने आपको अनजान शो किया तो वो फिर से कपडे धोने लगी. अब मैं बार बार उसकी चूचियों के ऊपरी भाग से उसकी बाल पकड़कर पीछे करता रहा. और वो अपनी चूचिया हिला हिलाकर कपडे धोती रही. थोड़ी देर बाद मैंने उसके बालो को हटाने के लिए उसकी चूचियों के ऊपर अपना हाँथ बालो को पकड़कर हटाया. मेरा हाँथ अपनी चूचियों पर छूटे hi उसकी aaahhhhhhhhhhh ssssssssssssss निकल गई. जब मैं उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो निचे देख रही थी. फिर मैंने उसकी नज़रो का पीछा किया तो वो मेरे लुंड को देख रही थी. जो पानी से गिला होने के कारन लोअर और चड्ढी से चिपक गया था और उसका उभर भरपूर नज़र आ रहा था. थोड़ी देर बाद उसने मेरी तरफ देखा तो मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वो शर्मा गई. तो मैंने उससे कहा.

मैं- वाह मनीषा. तू तो बहुत अच्छा कपडा धोती है. चल अब इसको खंगाल कर सूखने के लिए दाल देते हैं.

इतना कहकर मैं खड़ा हो गया तो मेरा लुंड एकदम तम्बू बैंकर आगे की तरफ निकल गया. जिसे मनीषा देख रही थी. कुछ देर लुंड को देखने के बाद वह कपडे पानी में डालकर धोने लगी. उसके झुकने से उसकी चूचिया अंदर तक दिखाई देने लगी.



मैं उसके पास खड़ा उसकी चूचियों को देखने लगा और वो मेरे लुंड को देखते हुवे कपडे पानी में डूबकर निकलने लगी. थोड़ी देर बाद उसने कपडे धो लिया और उसे सूखने के लिए तर पर डालने जाने लगी. उसके कपडे गीले हो जाने के कारन उसकी चौड़ी गांड भी कपड़ो में चिपक गाइट hi. जिससे बहुत दिलकश नज़ारा नज़र आ रहा था. जब तक वो कपडे सूखने के लिए डालती रही तब तक मैं उसकी गांड को घूरता रहा. लेकिन उसके आने से पहले hi मैं अपने कमरे में आ गया और मनीषा कपडे डालकर निचे चली गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-77

मैं- वाह मनीषा. तू तो बहुत अच्छा कपडा धोती है. चल अब इसको खंगाल कर सूखने के लिए दाल देते हैं.

इतना कहकर मैं खड़ा हो गया तो मेरा लुंड एकदम तम्बू बैंकर आगे की तरफ निकल गया. जिसे मनीषा देख रही थी. कुछ देर लुंड को देखने के बाद वह कपडे पानी में डालकर धोने लगी. उसके झुकने से उसकी चूचिया अंदर तक दिखाई देने लगी. मैं उसके पास खड़ा उसकी चूचियों को देखने लगा और वो मेरे लुंड को देखते हुवे कपडे पानी में डूबकर निकलने लगी. थोड़ी देर बाद उसने कपडे धो लिया और उसे सूखने के लिए तर पर डालने जाने लगी. उसके कपडे गीले हो जाने के कारन उसकी चौड़ी गांड भी कपड़ो में चिपक गाइट hi. जिससे बहुत दिलकश नज़ारा नज़र आ रहा था. जब तक वो कपडे सूखने के लिए डालती रही तब तक मैं उसकी गांड को घूरता रहा. लेकिन उसके आने से पहले hi मैं अपने कमरे में आ गया और मनीषा कपडे डालकर निचे चली गई.

अब आगे.

मनीषा के साथ कपडा धोने के बाद मेरे मंद जो सविता दीदी के जाने के बाद थोड़ा अपसेट था ो ठीक हो गया था. शाम को सरिता दीदी मुझे बुलाने आई क्योंकि गाड़ी सिखने का समय हो गया था. तो मैंने केवल एक लोअर t-shirt पहनकर उनके साथ चल दिया. कार निकलकर हम दोनों मैदान की तरफ चल दिए. रस्ते में दीदी ने अपने शरीर पर लिया शॉल उतर दिया. दीदी को देखते hi मेरे मुंह से अनायास hi निकल गया.

मैं- ो तेरी माँ की.

क्योंकि दीदी ने कपडे hi कुछ ऐसे पहने थे. आज दीदी ने एक t-shirt पहनी थी वो भी बिना ब्रा के और तो और t-shirt थोड़ी ट्रांसपेरेंट थी. जिससे उनकी चूचिया और चूचियों के निप्पल साफ नज़र आ रहे थे.



मेरा लुंड तो ऐसा नज़ारा देखने के बाद तुरंत टैंकर खड़ा हो गया. निचे दीदी ने लेग्गी पहनी हुई थी. वो भी हलकी सी ट्रांसपरेंट्स थी. दीदी का ऐसा छुडासी रूप देखकर मैंने ब्रेक मार दी और गाड़ी रोककर दीदी को देखने लगा. दीदी मुझसे छोड़ने के लिए इतनी आतुर थी की din-b-din वो मुझे अपने नंगे जिस्म के दर्शन कराती जा रही थी. मैं तो बस आँखे फाड़े दीदी की चूचियों को घूरे जार अहा था. दीदी ने जब मुझे अपनी चूचियों को यू घूरता पाया तो उनको हंसी आ गई और उन्होंने हँसते हुवे मुझसे पूछा.

सरिता दीदी- क्या हुवा अभी ऐसे मुंह फाड़े ख्य देख रहा है. क्या मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ.

मैं- क्या बात कर रही हो. तुम अच्छी लगने की बात कर रही हो. तुम तो ऐसी लग रही हो की मैं क्या बताऊ.

सरिता दी- वो तो ठीक है है लेकिन तू मुझे तुम क्यों कह रहा है.

Main-Kya यार दीदी. अब हम दोनों का रिश्ता बदल गया है तो अब तुम्हे तुम की बोलूंगा मैं.

सरिता दी- अच्छा और वो रिश्ता बदला कैसे.

मैं- अब जब तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड बन गई हो तो रिश्ता तो बदल hi जाएगा. (और धीरे से) और बहुत जल्दी एक और रिश्ता बनने वाला है.

सरिता दी. अच्छा तो बहन को गिर्ल्फ्रेंड बना लिया. चलो तुम भी क्या याद करोगे की कैसे दिलदार बहन से पला पड़ा था तुम्हारा. अच्छा वो सब chhod.tune ठीक से बताया नहीं की मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं- अब कैसे बताऊ तुम्हे की तुम बहुत hi सेक्सी & हॉट तो पहले से hi हो और आज इन कपड़ो में एकदम मॉल लग रही हो.

सरिता दी- अच्छा बीटा. पहले गिर्ल्फ्रेंड अब मॉल. और आगे पता नहीं क्या क्या बनाएगा मुझको (हंसकर और शर्माकर)

मैं- बनाना तो मुझे तुमको बहुत कुछ है लेकिन उसमे अभी समय है. अभी जितना बन गई हो उसे तो मान लो.

सरिता दी- अच्छा बाबा ठीक है मान लेती हूँ. तो अब यही खड़े रहने के इरादा है या मैदान में चले.

दीदी की बात सुनकर मैं मुस्कुराया और गाड़ी स्टार्ट कर मैदान की तरफ चल पड़ा. मैदान में पहुंचकर मैंने कार रो दी तो दीदी ने तुरंत अपनी तरफ का दरवाज़ा खोलकर ड्राइविंग शीट की तरफ आकर कड़ी हो गई और जब मैं उतरने लगा तो उन्होंने मुझे बैठे रहने का इशारा किया. दीदी ड्राइविंग साइड का गाठ खोलकर अंदर आने लगी और मेरे खड़े लुंड को देखने लगी तो मैं अपना लुंड सहलाने लगा.



जिसे दीदी देखने लगी. दीदी झुकी हुई थी तो मेरा चेहरा दीदी के चेहरे के पास था. तो उनकी सांसे मुझे सुनाई पद रही थी जो बढ़ी हुई थी थोड़ी देर लुंड देखने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखा और मुझसे कहा.

सरिता दीदी- अब मैं बैठ जाओ.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनकी कमर में हाँथ डालकर उन्हें खिछ्कर अपने खड़े लुंड पर बैठा लिया. दीदी ने कुछ देर अपनी गांड इधर उधर करके मेरे लुंड को अपनी गांड की दरार में एडजस्ट किया और चुपचाप बैठ गई. कुछ देर बैठे रहने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अब गाड़ी स्टार्ट करनी है या ऐसे hi बैठे रहना है.

मैं- हाँ सरिता क्यों नहीं. लेकिन मैं आज क्लुछ और एक्सेलेटर और ब्रेक में तुम्हारी हेल्प नहीं करूँगा मैं तो बस स्टेरिंग hi पकडूँगा.

ितं कहकर मैंने अपने दोनों हाँथ उठाकर दीदी की चूचियों पर रखा और दबा दिया और दबाकर अपना हाँथ उनकी चूचियों पर hi रहने दिया. दीदी ने asssssssssaaaaaaaaaaassssssssss करके मुझे देखा और कहा.

सरिता दी- क्या बात है अभी. बड़े फ़ास्ट जा रहे हो. पहले आप से तुम. फिर तुम से तू और अब दीदी से सीधे सरिता. और ये जो तूने पकड़ा है वो स्टेरिंग नहीं है. अपना हाँथ हटा वह से.

मैं- अब मैं क्या करू. जो काम मुझे करना है. वो मैं तुम्हे दीदी और आप बोलकर नहीं कर पाउँगा. इसलिए इसे तुम मेरी मजबूरी hi समझ लो. और मुझे पता है की मैंने जिसपर हाँथ रखा है वो स्टेरिंग नहीं है. लेकिन अगर मने अपने हाँथ निचे रखे तो अचानक जरुरत पड़ने पर मैंने स्टेरिंग जल्दी नहीं पकड़ पाउगा. इसलिए मैंने तुम्हारे हॉर्न को पकड़ा है. जिससे अचानक जरुरत पड़ने पर मैं स्टेरिंग संभल सकू.

मेरे मुंह से अपनी चूचियों का नाम हॉर्न सुनकर दीदी हंसने लगी और हँसते हुवे बोली.

सरिता दी- तू भी न पता नहीं कहा कहा से अजीब नाम खोजकर लता है तेरा बस चले तो तू मेरे जिस्म को गाड़ियों के part बना दे.

मैं- Part नहीं सरिता तुम खुद एक गाड़ी हो. जिसकी सवारी मैं बहुत जल्द करने वाला हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरे हाँथ पर एक झापड़ मारा और गाड़ी स्टार्ट कर ली. अब दीदी गाड़ी चलने लगी और मैं उनका हॉर्न मतलब चूचिया दबाने लगा. दीदी अब तक बहुत गरम हो गाइट hi तभी तो उनके निप्पल एकदम तीर के सामान तन गए थे जो. एकदम अंगूर के डेन की तरह लग रहे थे. मैं दीदी की चूचिया दबाने के साथ hi अपने जीभ से दीदी की गार्डन चाटने लगा. जिससे दीदी की सिसकिया निकलने लगी. मैं कभी दीदी की चूचियों को दबाता तो कभी निप्पल को ऊँगली और अंगूठे से मसल देता जिससे दीदी कम्पनी लगती और sssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh करने लगती. फिर मैंने दीदी की गार्डन को दांतो में पकड़ा और दीदी की चूचियों की घुंडियो को अंगुली और अंगूठे में लेकर जोर से मसल दिया और गार्डन पर काट लिया जिससे दीदी की चीख निकल गई.



सरिता दी- aAaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. दंत्ततत्तत्त क्यूऊँऊं जादा रहा ही uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyy मरररररर गाइइइइइइइ रईईईई. क्याआआआ करररररररर राहाआआआ हिअआआअ bhaaiiiiiiiiiiii. Dhireeeeeeeeeeeee dabaaaaaaaaaa नाआआ. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैईईई.

मैं- क्या करू सरिता तुम्हारी चूचिया इतनी टाइट हैं की धीरे धीरे दबती hi नहीं. जोर लगाने पर hi थोड़ा बहुत दबती हैं. और आपकी गार्डन दन्त गाड़ने के लिए मजबूर कर देती हैं.

इतना बोलकर मैंने फिर से दीदी की चूचियों को फिर से दोनों हांथो में भर दिया और गार्डन को दांतो से पकड़कर काट लिया और चूचियों को जोर लगकर दबा दिया. जिससे दीदी की चीख फिर से निकल गई.



सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ह्ह्ह्हह्ह्ह्हहीीीैय्यियय Aahhiiiiiiiiii मीरीईईईई भाआआईईई धीरररररररी seeeeeeeeeee. मुझीीी डरडडडडडडड होताआ हिअआआअ. एई टेरीए बहनणननणणन का शरीरररररर haiiiiiii.aaaraaaaammm सी.

दीदी की सिसकारी सुनकर मैं फिर से उनके गार्डन को चाटने लगा और अपने एक हाँथ उनकी चुकी से उठाकर उनके पेट को सहलाते हुवे निचे की तरफ बढ़ने लगा और अपना हाँथ दीदी की लेग्गी पर रख दिया जो छूट के रास से पूरी गीली हो गई थी. मेरा हाँथ छूट पर लगते hi दीदी ने ब्रेक लगा दिया जिससे दीदी आगे की तरफ गिरने लगी तो मैंने एक हाँथ से उनकी चुकी और लेग्गी के ऊपर से उनकी चूचिय को मुट्ठी में भर लिया और पाने साथ दबा लिया. जिससे दीदी के फिर से चीख निकल गई.

सरिता दी- AAAAAAAAAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii मरीईई bhaaiiiiiiiiiiiiii. मुझेईईईई क्याआआआ होऊ राहाआआ हैईईईई. मेरा शाआअहारीर मरीईईई क़ाबूउउउउ मीटीई नाहीईई हिआआआआ. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh abhiiiiiiiiiiii.

कार रुकते hi दीदी ने चीखकर अपना एक हाँथ स्टेरिंग से उठाकर मेरे हाँथ पर रख लिया और मेरा हाँथ हटाने लगी. लेकिन उनके हाँथ में कोई ताकत नहीं थी. तो मैंने फिर से उनकी गार्डन चुनी और चटनी शुरू कर दी और चूचियों को दबाने लगा और दीदी के हाँथ के निचे से अपने हाँथ को उनकी छूट को मुठी में भरकर भिज्ने लगा. दीदी बस sssssssssssssss ooooooooooohhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh कर रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे हाँथ से अपने हाँथ उठाकर मेरी गार्डन पर दाल दिया और अपना सर मेरी गार्डन पर टीकाकार बैठ गई. जब मैं दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखे बंद हो गाइट hi. और चेहरा लाल हो गया था. मैं उनकी चूचियों और छूट को दबाते हुवे अपना मुंह दीदी के कण के पास लेजाकर धीरे से कहा.



मैं- तुम्हे अच्छा लग रहा है मेरे साथ कार सीखना.

सरिता di-(madhsi में). Hhhhhhhhhhhh

मैं- तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा है मेरे साथ कार सीखना

सरिता दी- (माधोसी में) hhhhhhhhhhhhh

दीदी का जवाब सुनकर मैंने अपना हाँथ उनकी चुकी अउ छूट से हटा लिया और दीदी को अपने से दूर कर दिया तो दीदी होश में आई और मेरी तरफ देखने लगी. जैसे जानना छह रही हो की मैंने उन्हें दूर क्यों किया. थोड़ी देर बाद दीदी ने पूछा.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. तू नाराज़ लग रहा है.

मैं- नाराज़ है हो तो और क्या करू. तुम मेरे किसी सवाल का ठीक से जवाब देती hi नहीं हो.

सरिता दी- मैंने ऐसा क्या किया. तूने तो खुद मुझे अपने से दूर किया.

मैं- मैंने तुम से पूछा था की लग रहा है तो तुमने बोलै हां और जब मैंने पूछा अच्छा नहीं लग रहा है तो तुमने बोलै हां. तो इसका क्या मतलब समझू मैं.

सरिता दी- अब ये खुलकर बोलना जरुरी है क्या तू मेरे साथ इतना सबकुछ कर रहा है तो तू समझ जा न की मेरी हाँ है या न है.

मैं- मैं इतना समझदार नहीं हूँ की मैं इशारे समझ जाऊ. जो भी हो साफ साफ बता दो. अगर अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं कुछ नहीं करूँगा आगे से.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने कोई जवाब नहीं दिया. बस मेरे हाँथ को पकड़ कर अपनी चुकी पर रख लिया और अपना सर मेरे कंडे पर रख लिया. मैंने भी अब ज्यादा नखरे न करते हुवे दीदी के गलो को चाटने लगा और उनकी चूचियों को दबाने लगा. और एक हाँथ उठाकर सीधे दीदी की छूट पर रख दिया और मसलने लगा. दीदी ssssssssssssssssssssss aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ करने लगी लेकिन इस बार मेरे छूट वाले हाँथ को हटाने की कोशिश नहीं ki.kuchh देर तक छूट लेग्गी के ऊपर से सहलाने के बाद मैं अपना हाँथ में डालने लगा. कुछ देर मसक्कत के बाद मैं अपना हाँथ लेग्गी में डालकर दीदी की छूट पर रख दिया. एआईईई तेरी की. साली ने तो पंतय hi नहीं पहनी थी. मेरा हाँथ दीदी की छूट के राश से सं गया था. मेरा हाँथ छूट पर पड़ते hi दीदी aaaaaaaaaaaaaahhhhhh sssssssssssssss करके कसमसाने लगी. फिर मैंने दीदी की छूट को मुठी में भर लिया और उनकी एक चुकी की घुँगी को पकड़ कर छूट और चुकी दोनों एकसाथ मसल दिया. दीदी आनंद से चीख पड़ी.

सरिता दी- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii… Aaaaaaaaaaraammmmmmmmmm seeeeeeeeee. मुझीीीी darddddddddddd होता हैईईईई. Ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hjhhhhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyyyyy.

दीदी की आनंद युक्त चीख सुनकर मैंने उनके गाल को अपने मुंह में भरा. उनकी चुकी और छूट को मुठी में भरकर इस बार बहुत जोर से दबा दिया और गाल को काट लिया. दीदी फिर से चीख पड़ी

सरिता di-Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh साहाआईईईईई kaamineeeeeeeeeee. Ooooooooooohhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmuuuuuuuummyyyyyyyyy बचाआंआऊऊऊओ mujheeeeeeeeeeee. माईईईईईन्न्न maarrrrrrrrrr jaauungiiiiiiiiiiii. Tumhaaaaaaaaraaaaaaaaaa bettttttttttaaaaa जालीमंममममममम haiiiiiiiiiiii. साआआअआईईईई को aaappppppppppniiiii बाहाआआआंत्र पररररररररर भीइइइइइइ राहाआम नाहीइइइइइइ आआआआआ रह्हह्ह्हह्हआआ हैईईई. Oooooyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeee.

मैंने दीदी की चीख सुनकर अपनी पकड़ ढीली कर दी और दीदी को थोड़ा सा अपनी गॉड से उठाकर अपना लोअर निचे खिसका दिया और दीदी को फिर अपनी गॉड में बैठ लिया और दीदी का एक हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया. लुंड पर हाँथ रखते hi जैसे दीदी को करंट लगा. उन्होंने झट से अपना हाँथ वापस खींच लिया और आँख खोलकर मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनका हाँथ फिर से पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया और उनके हाँथ को अपने लुंड पर ऊपर निचे फेरने लगा.



दीदी अभी भी मेरी आँखों में देख रही थी. दीदी की आँख इस समय बहुत नशीली थी. चेहरा सुर्ख लाल हो गया था होंठ जैसे फड़फड़ा रहे थे. थोड़ी देर बाद मैंने अपने हाँथ को दीदी के हाँथ से हटा लिया लेकिन दीदी ने मेरा लुंड सहलाना बंद नहीं किया. मैंने फिर से अपना हाँथ दीदी की लेग्गी में डालकर दीदी की छूट के डेन को सहलाने लगा और दीदी की आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- कैसा लग रहा है तुमको सरिता.

सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhhhhhh अछ्हाआअ लाआएग गगगगगगग रहा हिअआआअ( लड़खड़ाती हुई आवाज़ में दीदी ने जवाब दिया क्योंकि दीदी अपनी चरम पर पहुंच गाइट hi.)

थोड़ी देर तक उनकी छूट सहलाने के बाद मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी छूट में डालने की कोसिस की लेकिन उनकी छूट टाइट थी. जिसके लिए मुझे डैम लगाना पड़ा और मैंने एक झटके में उनकी छूट में एक ऊँगली पूरी पेल दी. दीदी दर्द से दोहरी हो गई. जिसके कारन उनकी पकड़ मेरे लुंड पर सख्त हो गई. मेरे मुंह से ssssssssssssss की आवाज़ निकल गई और दीदी दर्द से चीख पड़ी.

सरिता दी- ooooooooooooooooooooooohhhhhhh ममममयी. मर्डर गइईईई मैंनं. बहररररररर निकललललललल अभीयी. ड़ड़ड़ड़ड़ हो राहाआआ हैईईईई.

मैंने दीदी की बात की परवाह किये बगैर अपनी उंगली उनकी छूट में पैनी जारी राखी. दीदी बार बार अपनी कमर इधर उधर करके ऊँगली निकलने की कोशिश कर रही थी और ऊँगली बहार निकलने के लिए भी बोल रही थी. लेकिन मैंने उनकी बात को अनसुना करते हुवे तेज़ तेज़ उनकी छूट में एक ऊँगली पेलता रहा. दर्द होने के कारन दीदी ने मेरे लुंड को सख्ती से दबाकर आगे पीछे कर रही थी जिसके कारन मैं झड़ने के करीब पहुच गया था. मैं अब एक हाँथ से दीदी की चुकी को दबाने लगा और ऊँगली से उनकी छूट को रहा था और साथ hi अब अंगूठे से उनकी क्लीट को भी मसलने लगा. जो दीदी बर्दास्त नहीं कर पाई और बड़बड़ाते हुवे झरने लगी. झरते हुवे दीदी ने मेरे लुंड को सख्ती से 3 बार आगे पीछे किया तो मेरे लुंड ने भी पानी छोड़ दिया. जो कुछ दीदी की लेग्गी पर कुछ उनके हांथो में तो कुछ कार में गिरा. झड़ते समय हम दोनों hi मदहोशी में बड़बड़ाने लगे.

सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaahhhhhhhhh अभीइइइइइ. मेरी भाईईई. मुझीऐ क्याआआआ हो राहाआआआ हैईईईई maiiiiiiiiiii हाआआआआआ मीटीई उड़द रहीइइइइइइ होओओओओ. मुझीीी साम्भलो aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सल्ल्ल्लेबीए. मेंननननन गाइइइइइइइइइ maiiiiiiiiii jaaaaaaaaaaa raaaaaaaahiiiiiiiiiiiii हूऊऊऊऊणणणन्न koiiiiiiiiiii सममममममबॉलीबीएए मुझीीीी. Ohhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ कमीनेईईईई.

मैं- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh Saritaaaaaaaaaaaaa heeeeeeeeyyyyyyyyyy maiiiiiiiiiiiin गयाआआ Salllllliiiiiiiiiii क्याआआआआ गारररररमममममममम हैईईईई टूउऊउउउउउ teerrrrrrrrrrreeeeeeeee हानःतूऊऊऊ मीटी जादूऊऊऊओ haiiiiiiiiiiii. Tereeeeeeeeeeee जिश्मममममम मीटी जड़ूऊऊऊ हिअआआअ. मेंननननननन गयाआआआ सरिताआ मेरा लुँड्ढड्डड़ पनीईई छूऊँऊंड रहा haiiiiiiiiii सॉललललललललीईई सरिताआआआ.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-78

हम दोनों झाड़ कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगे. थोड़ी देर बाद जब हम दोनों की सांसे दुरुस्त हुई तो मैंने अपना हाँथ दीदी की लेग्गी से बहार निकला. दीदी अभी भी वैसी hi बैठी हुई थी. मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे छूट के रास रास से भीगी ऊँगली अपने मुंह में दाल ली और चूसने लगा. दीदी ने मुझे ऐसे करते हुवे देखा तो शर्मा गई और मेरी गॉड से उतारकर गाड़ी से बहार निकल गई. फिर मैंने गाड़ी में रखे कपडे से अपना हाँथ पोछा और अपने वीर्य जो गाड़ी में गिरे से उसको साफ किया. और वही कपडा दीदी को दे दिया. दीदी ने भी अपना हाथ और लेग्गी पर लगा मेरा वीर्य साफ किया और दूसरी तरफ आकर बैठ गई. अब वो एकदम चुपचाप बैठी थी. थोड़ी देर बाद मैंने उनसे कहा.

Main-Kya हुवा सरिता. इतनी चुपचाप बैठी हो. क्या बात है.

सरिता दी- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.

मैं- तुम्हे अच्छा नहीं लगा क्या. क्या तुमको मज़ा नहीं आया क्या.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मुझे देखा और कहा.

सरिता दी- अभी तुमने ये अच्छा नहीं किया. मैं तुम्हारी बहन हूँ.

मैं- अच्छा जब तुम मज़ा ले रही थी तो आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइ ोुह्ह्हह्ह अभी कर रही थी.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया बस निचे देखती रही. शायद उनको शर्म आ रही थी या हो सकता है वो गिल्टी फील कर रही हो. क्योंकि कुछ भी हो मैं भाई था उनका. तो मैंने उनसे कहा.

मैं- क्या यार तुम्हारी पॉब्लम क्या है. किसी बात का ठिक्क से जवाब नहीं देती हो. लगता है तुम्हे ये सब अच्छा नहीं लगा. सॉरी आज के बाद मैं तुमको टच नहीं करूँगा. भूल जाओ ये सब. आगे से ऐसा नहीं होगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ देखा. लेकिन बोलै कुछ नहीं तो मैंने भी अब उन्हें थोड़ा अवॉयड करने की सोचा. ये भी मेरे प्लान का एक हिस्सा था. जिससे दीदी पूरी तरह मेरे कब्जे में आ सकती थी. फिर मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी और घर के लिए निकल गया. रस्ते भर हम दोनों ने कोई बात नहीं की. घर पहुंच कर मैं सीधा अपने कमरे में चला गया और दीदी अपने कमरे में. और सबसे पहले मैंने चेंज किया और निचे आकर सब के साथ हॉल में बैठ गया और T.V. देखने लगा. खाना खाने के समय सबने खाना खाया खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया.

कमरे में आने के बाद लगभग 10.30 पर मैंने सविता दीदी को मश्ग किया तो पता चला की अभी वो घर नहीं पहुंची है. उनकी बुकिंग एक-1 टायर में थी. मैंने दीदी से जीजा जी के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की वो सो गए हैं तो मैंने दीदी से चाट शुरू कर दी.

मैं- कैसी हो सविता.

सविता दी- तुम्हारे बिन कैसी हो सकती हूँ.

मैं- मेरी इतनी याद आ रही है तुमको.

सविता दी- बहुत ज्यादा. लेकिन क्या कर सकती हूँ.

मैं- मेरी याद आ रही है या मेरे लुंड की.

सविता दी- दोनों की याद आ रही है. अगर अभी घर पर होती तो अब तक तेरे कमरे में आ जाती. लेकिन अब पता नहीं वो दिन कब नसीब होगा.

मैं- तुम चिंता मत करो. मैं बहुत जल्द तुम्हारे पास आऊंगा और तुम्हारे बीएड पर तुम्हे अपनी दुल्हन बनाकर छोडूंगा. तैयार रहना.

सविता दी- मैं तो हमेशा तैयार हूँ तू बस जल्दी से आजा.

मैं- बहुत जल्द. अच्छा अपनी फोटो भेजो न कुछ सेक्सी वाली.

सविता दी- लेकिन अभी कैसे. ट्रैन में हूँ किसी ने देख लिया तो.

मैं- कोई नहीं देखेगा. फोटो भेज दो न.

सविता दी- अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद दीदी ने अपनी चूचियों की फोटो एक भेजी जिसमे उन्होंने अपने हाँथ से अपना ब्लाउज खींचकर निचे किया हुवा था.



मैं- थोड़ा और भेजो na.koi अच्छी सी सेक्सी और हॉट फोटो.

मेरी बात सुनकर दीदी बाथरूम में चली गई और कुछ देर बाद उन्होंने एक फोटो भेजी अपने ब्रा में.



मैं- क्या बात है दीदी तुम्हारी चूचिया तो din-b-din कड़क होती जा रही हैं. और भेजो न.

सविता दी- बस अब नहीं. तुम बहुत शरारती हो गए हो.

मैं- बस एक और वो भी नंगी चूचियों की.

कुछ देर बाद दीदी ने एक फोटो भेजी जिसमे उन्होंने ब्रा उतारकर अपने दांतो में फसकर एक सेक्सी ऐडा के साथ देख रही थी. क्या लग रहे थे दीदी की नंगी चूचिया थोड़ी छुपी हुई



मैं- क्या बात है सविता. जड़ी जालिम चूचिया हैं तेरी और तेरी ये ऐडा. हे मेरी जान न लेले. अच्छा अब एक और फोटो भेजो प्ल्ज़.

कुछ देर बाद दीदी ने एक फोटो भेजी बिना ब्रा के. क्या लग रहे थे दीदी की नंगी चूचिया.



मैं- वह सविता क्या चूचिया हैं तेरी एकदम कड़क. एकदम मॉल लग रही हो तुम. अच्छा ये बताओ तुम किसकी माल हो. मेरी या जीजा जी की.

सविता दी- ये कैसा सवाल है ओफ़्कौर्से मैं राघवेंद्र की पत्नी हूँ तो उसी की मॉल हुई न.

मैं- (नाराज़गी के साथ)- तो फिर ठीक है. अपना फ़ोन रखो अब मुझे नींद आ रही है.

इतना कहकर मैंने फ़ोन रख दिया. कुछ देर बाद मश्ग टोन बजी तो मैंने देखा सविता दीदी का मश्ग था. तो मैंने इग्नोर कर दिया. थोड़ी देर बाद दीदी ने एक और मश्ग भेजा. तो मैंने खोलकर देखा तो दीदी ने दोनों मश्ग में अपनी फोटो भेजी थी. एक में कैप्शन था

मैं अपने भाई की गरम मॉल हूँ.



दूसरी फोटो में कैप्शन था.

मैं अभी की चुड़क्कड़ मॉल हूँ.



ये मश्ग देखकर मैं बहुत खुस हुआ. क्योंकि अब सविता दीदी मेरे पुरे कण्ट्रोल में थी. मेरी गुलाम बन चुकी थी. अब जल्द से जल्द मैं दीदी के पास आगरा जाना चाहता था. क्योंकि मैंने सोच रखा था की मैं दीदी की गांड का उद्घाटन दुल्हन के रूप में उनके hi बीएड पर करूँगा. मैंने दीदी को मश्ग किया.

Main-kya बात है सविता. आखिर तुम मेरी गुलाम बन hi गई.

सविता दी- मैं तेरी गुलाम बन नहीं गई हूँ बल्कि तूने मुझे छोड़ छोड़ कर अपनी गुलाम बना लिया है. अब तू जल्दी से मेरे पास आजा. क्योंकि मैं ज्यादा दिन ये जुदाई बर्दास्त नहीं कर पाऊँगी.

मैं- ठीक है सविता. बहुत hi जल्द मैं आगरा आऊंगा. अच्छा अब फ़ोन रखता हूँ. फिर बात करेंगे.

उसके बाद मैंने मोबाइल बीएड पर रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा. कुछ देर बाद फिर से मश्ग टोन बजी तो मैंने मोबाइल देखा तो मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग था. मुझे मालूम था की ये आज दिन भर में जो कुछ भी हुवा है उसे बताने के लिए उतावली हो रही हैं लेकिन मैं सरिता दीदी को और तड़पना चाहता था. इसलिए मैंने कोई रपल्य नहीं दिया. कुछ देर बाद सरिता दीदी का मश्ग मेरे पास आया मैंने मश्ग रीड किया लेकिन कोई रपल्य नहीं दिया. और मोबाइल सिळान्त में कर दिया. मां पापा जल्दी छत पर नहीं आते थे वो भी सुबह सुबह इसलिए और मनीषा भी इतनी सुबह उठती नहीं थी तो मैंने अपनी लोअर और ुंडेरवेरे उतरी और सो गया.

सुबह मैं जल्दी से उठकर मैंने सविता दीदी की फोटो देखकर अपना लुंड खड़ा कर लिया और सरिता दीदी के आने का इंतेज़ार करने लगा, थोड़ी देर बाद मुझे किसी के आने की आहात हुई तो मैं लेकिन उस दिन मेरी किस्मत ख़राब थी जो सरिता दी नहीं बल्कि मनीषा कमरे में आ गई. अब मैं क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उठ भी नहीं सकता था. इसलिए मैं सोता बना रहा. मनीषा एक झटके में कमरे में आई और उसने मुझे बोलै.

मनीषा- भैया उठो मुझे कुछ……………………

बाकि से शब्द उसके मुंह में hi रही गए. उसकी नज़र सीधे मेरे खड़े लुंड पर पद गई. वो एकदम सोक होकर मेरे नंगे लुंड को देख रही थी. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद वो वापस जाने केलिए मुद गई. फिर बहार जाने से से पहले पीछे मुड़कर एकक नज़र फिर से मेरे लुंड को देखा और बहार चली गई और हलके से दरवाज़ा बंद कर लिया. बहार जाकर उसने जोर से आवाज़ लगाई.

मनीषा- भैया उठ जाओ. मुझे आपसे कुछ काम था. जल्दी निचे आओ.

इतना बोलकर वो निचे चली गई. मेरा खड़ा लुंड इस अप्रत्याशित घटना से बैठ गया. उसके जाने के बाद मैं तुरंत उठकर अपनी ुन्दरवरे, लोअर t-shirt पहन ली. मैंने क्या सोचा था और ये क्या हो गया. कहा तो मैं सरिता दीदी को अपना नंगा लुंड दिखाकर और तड़पना चाहता था और कहा इसे मनीषा ने देख लिया. अब पता नहीं उसका कैसा रिएक्शन होगा. अगर उसने मां पापा को बता दिया तो क्या होगा. फिर मैंने सोचा की मैं तो अपने कमरे में था. वही आई थी यहाँ. अभी मैं यही सब सोच रहा था की सरिता दीदी कमरे में एंटर हुई. अरे यार क्या बताऊ. सरिता दीदी छोड़ने के लिए इतनी बेताब थी की आज तो उन्होंने एकदम फिटिंग की केप्री पहनी हुई थी. जिसमे से दीदी के हरेक अंग का उतर चढाव पता चल रहा था. दीदी की चूचिया एकदम बहार पहाड़ को छोटी की तरह निकली हुई थी.



क्लीवेज तो नहीं दिख रहा था लेकिन चूचियों की घुंडीया साफ साफ नज़र आ रही थी. उनकी केप्री उनके घुटने तक थी लेकिन एकदम जांघो से चिपकी हुई थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया लेकिन मैंने खुद पर काबू किया और अपना मोबाइल उठाकर दीदी को इग्नोर करते हुवे बहार जाने लगा तो सरिता दीदी ने कहा.

सविता दी- कहा जा रहे हो अभी. मुझे एक्सेरसीज़े नहीं करवाओगे.

मैं- मैं बहार जार अहा हूँ मॉर्निंग वाक पर. कल जो एक्सेरसीज़े बताई थी वही कंटिन्यू करो आप.

सविता दी- लेकिन अभी तू रहता तो मेरी हेल्प हो जाती. जहा कही भी कुछ कमी रहती हो.

लेकिन मैं उनकी बात को सनटैन हुवा निचे चला गया और घर से बहार निकल गया. लगभग 7 बजे मैं बहार से घूमकर घर आया और अपने कमरे में चला gaya.waha पहुंच कर वह के हालत से पता चल गया की सरिता दीदी ने कसरत नहीं की और वैसे hi चली गई. थोड़ी देर बाद मैं फ्रेश होकर निचे आया तो मां पापा हॉल में hi बैठे थे. उनके साथ मनीषा भी बैठी थी. मैं भी जाकर वही बैठ गया और मनीषा की तरफ देखा. तो वो मुझे अजीब नज़रो से देख रही थी. लेकिन उसने मम्मी पापा से कुछ नहीं बताया था. मैंने महिषा को देखते हुवे पूछा.

मैं- हाँ मनीषा कहो क्या काम था जो मुझे सोते हुवे hi जगा दिया.

Manisha-(mammy पापा की मौजूदगी में बात बदलते हुवे) वो तो छत पर घूमने गई तो आपको आवाज़ देदी और कुछ नहीं.

थोड़ी देर में सरिता दीदी नाश्ता लेकर आ गई. सब ने मिलकर नाश्ता किया. नाश्ता करते हुवे मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. लेकिन जब मैंने मनीषा की तरफ देखा तो वो सरिता दीदी को देख रही थी. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है. लेकिन इतना तो समझ में आ गया था की मनीषा को कुछ न कुछ डाउट तो है. खैर नाश्ता करने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद सरिता दी कमरे की सफाई के लिए आई तो मैं उन्हें इग्नोर कर के निचे चला आया. और हॉल में बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा जॉब पर निकल गए तो मनीषा ने मुझसे कहा.

मनीषा- भैया मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

मैं- कुछ देर पहले तो तुमने बोलै था की कोई बात नहीं करनी. तो अभी क्या है.

मनीषा बात करते हुवे सोफे पर इस तरह से बैठ गई की मुझे उसकी गांड का एक part टाइट लेग्गी में नजर आने लगा. मैं उसकी गांड को एक नज़र देखा फिर उसकी तरफ देखने लगा. उसने भी मुझे अपनी गांड को देखते हुवे देख लिया था. तभी सरिता दीदी निचे आई तो मनीषा ने कहा की कहा.

मनीषा- भैया थोड़ी देर बाद मेरे कमरे में आइये तो बात करते हैं.

और इतना कहकर वो अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर बाद मैं उसके कमरे में गया तो मैं उसे देखता hi रह गया. वो कमरे में तैयार होकर बैठी थी. उनसे सलवार और शट पहना हुवा था जिसमे वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. उसने अपना दुपट्टा अपने गले में लिया हुवा था जिससे उसके गले उसकी चूचियों का कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था. मैं उसकी चूचियों को देखने लगा. उसकी चूचियों को देखते hi मेरा लुंड हरकत करने लगा. कुछ देर तक जब मैं उसकी चूचियों को hi देखता रहा तो उसने कहा.



मनीषा- क्या हुवा भैया कहा खो गए.

मैं- अरे महिषा तुम बहुत hi खूबसूरत लग रही हो.

मनीषा- वो तो मैं बचपन से hi हूँ.

मैं- लेकिन मैंने कभी तुम्हारी खूबसूरती पर ध्यान hi नहीं दिया था.

मनीषा- आपने तो हमेशा सविता दी और सरिता दी से hi चिपके रहते हो तो आपको कैसे पता चलेगा.

मैं उसकी बात सुनकर सोच में पद गया की आज इसको हो क्या गया है. कही इसने कुछ देख तो नहीं लिया. पिछले 2-3 दिन से इसके अंदर कुछ बदलाव आ गया है. फिर मैंने अपने दिमाग को झटका दिया और उससे पूछा.

मैं- क्या बात है. बड़ी तैयार शेयर हो कही जा रही हो क्या.

मनीषा- हाँ आज फिल्म देखने जा रही हूँ.

मैं- अरे वाह. दोस्तों के साथ जा रही हो.

मनीषा- नहीं आपके साथ जा रही हूँ. जाओ आप भी तैयार हो जाओ. फिर निकलते हैं.

मैं- अरे मुझे नहीं जाना फिल्म विलम देखने. तू चली जा.

मनीषा- (मुंह बनाकर) मैं जानती थी आप सिर्फ दोनों दीदी से hi प्यार करते हैं मुझसे तो आप प्यार hi नहीं करते. ठीक है मैं भी नहीं जा रही हूँ (और मुंह फुलाकर बैठ गई)

मैं- लो अब नाराज़ हो गई तुम. अच्छा ठीक है तुम रुको मैं तैयार होकर आता हूँ.

उसको बोलकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए आ गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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