Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 9 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-75

सरिता दी- अच्छा ठीक हाइट तू चेक कर ले लेकिन मुझे ज्यादा परेशां मत करना.

इतना सुनते hi मैंने दोनों हांथो से दीदी की चूचिया पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा. पीछे से मेरा लुंड उनकी गांड में पहले से hi फंसा था. मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुवे कहा.

मैं- दीदी आपकी चूचिया तो बहुत सख्त हैं बस थोड़ी और एक्सेरसीज़े की जरूरत है. उसके बाद आपकी चूचिया हमेशा तानी तानी रहेंगी.

अब आगे..

इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से दीदी की चुकी पकड़ा और एक हाँथ से दीदी का डम्बल वाला हाँथ पकड़कर उन्हें एक्सेरसीज़े करवाने लगा. दीदी को एक्सेरसीज़े करवाते हुवे मैंने दीदी की दोनों चूचिया बदल बदल कर खूब दबाई और अपने लुंड को दीदी की गांड में खूब रगड़ा. फिर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अगर आप अपनी t-shirt उतर दे तो मैं और अचे से चेक कर सकता हूँ.

मैंने ये बात दीदी की गार्डन को चूमते हुवे कहा. मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने गार्डन पीछे की और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता di-nahi अभी तू t-shirt के ऊपर ऊपर से hi चेक कर लो. मुझे बहुत शर्म आएगी t-shirt उतरने में.

ये बात कहते हुवे दीदी की आँखे लज्जत से लाल हो गई थी. लफ्ज़ उनके मुंह से बड़ी मुश्किल से निकल रहे थे. दीदी अब बहुत गरम हो गई थी. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

मैं- चलो दीदी अब आपकी चूचियों की एक्सेरसीज़े करते हैं.

इतना कहकर मैं चेस्ट के स्टैंड पर बैठ गया जिससे मेरा लुंड एकदम तम्बू बैंकर खड़ा नजर आने लगा. जिसको दीदी बड़े ध्यान से देख रही थी. कुछ देर तक दीदी लुंड को देखती रही और अपनी जीभ अपनों होंठो पर फिरने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- अगर देखकर मन भर गया हो तो एक्सेरसीज़े शुरू करे.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा कर इधर उधर देखने लगी. उसके बाद मैंने दीदी को अपनी गॉड में बैठने के लिए कहा. तो दीदी फिर से मेरा लुंड देखने लगी. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद मेरी आँखों में देखते हुवे दीदी मेरे पास आई और मेरी तरफ पीठ करके मेरी गॉड में बैठ गई. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड में धस गया. दीदी ने गांड हिलाकर मेरे लुंड को अपनी गांड की दरार में एडजस्ट किया और बैठ गई. मैंने भी दीदी के कंधे को पकड़कर अपने लुंड पर दबा दिया और उनकी दोनों बगलो से हाँथ डालकर उनकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा. और चूचियों को पकडे पकडे दीदी को अपने से पूरा सत्ता लिया. कुछ देर बाद मैंने दीदी की चूचियों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर दी और निचे कमर ऊपर उछलने लगा और दीदी को चुकी को जोर जोर से निचोड़ने लगा. दीदी की मुंह से कराह निकल रही थी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Ddhiiiiiiiiireeeeeeeeee karrrrrrrrrr mereeeeeeeeee भाआईईईईई dardddddddddd हूँ राहाआआ haiiiiiiiiiiii hhhhhhheeeeeeyyyyyyyyyyyyy. ाराआआआंममममम से.

उसके बाद मैंने मैंने दीदी से वाइट उठाने के लिए कहा और अपने हाँथ दीदी की चूचियों से उठाकर उन्हें सहारा देने लगा और दीदी सेट लगाने लगी 5 सेट लगाने के बाद मैंने वाइट रखने को कहा और दीदी को पकड़कर वैसे hi उठा और उन्हें गॉड में लेकर बैत गया और उनकी चूचियों को दोनों हांथो में भरकर डैम लगा कर मसलने लगा. और निचे से लुंड को उनकी गांड में पेलने लगा. जिससे दीदी छटपटाने लगी और बोलने लगी.

सरिता दी- oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhh sssssssssssssssssssss munmmmyyyyyyyyyyyyy ढ़हिरीई सीएएएएएएए aahhhhhhhhhhh बहुत्तट्ट्ट्ट

डाआआअआर्ड्ढड्डड्डड़ हो राहाआआआह हैईईई Bhaiiiiiiiiii maiiiiiiiiiin marrrrrrrrrr जाआआआंगियईईई aaaaaaaaaaaaaaooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाआराममममममममम से दाबाआआ अभीइइइइइ. आह्हः आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की नरम गांड मुझे पागल बना रही थी. कुछ देर तक दीदी की चूचिया दबाने और गांड में लुंड पेलने के बाद मैंने दीदी को अपनी गॉड से उतर दिया और दीदी से कहा.

मैं- क्यों दीदी मज़ा आ रहा है न मेरे साथ.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhh भाआआआईईई बहुत तीज दबायीय तुमनेई ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैं.

मैं- अच्छा अब धीरे धीरे दबाऊंगा. चलो अब आपके पैट की एक्सेरसीज़े करते हैं.

सरिता दी- आज बस करते हैं अभी मैं बहुत थक गई हूँ.

मैं- बस दीदी ये एक और कर लो उसके बाद चली जाना.

इतना कहकर मैं अपनी टंगे खोलकर जमीन में लेट गया और दीदी से कहा.

मैं- आओ दीदी अब मेरी थिंगस पर बैठ जाओ.

सरिता दी- ये कैसी कसरत है अभी.

मैं- यार दीदी तुम सवाल बहुत करती हैं, तुम आओ तो सही. इसको करने से तुम्हारा पेट बहार नहीं निकलेगा.

मैंने दीदी की अबकी बार तुम बोलकर कहा लेकिन दीदी इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया.

मेरे लेटने से मेरा लुंड लोअर में एकदम टैंकर खड़ा नज़र आ रहा था जिसे दीदी बड़े ध्यान से देख रही थी. जब से दीदी आई थी तब से मेरे लुंड को देख देख कर दीदी एकदम पागल हो गई थी. दीदी की आँखे बहुत नशीली हो गई थी. मेरे लुंड को देखकर दीदी अपने होंठो को जीब से चाटने लगी. दीदी कुछ देर मेरे लुंड को देखती रही और अपने होंठो पर जीभ फिरती रही. फिर आकर मेरे थिंगस पर बैठ गई. मैंने दीदी को और आगे बैठने के लिए कहा. तो दीदी और आगे आ गई जिससे दीदी की गरम छूट जो इतना पानी बहा चुकी थी की उनकी लोअर गीली हो गई थी वो मेरी गोटियों से टकरा गई. जिससे मेरे मुंह sssssssssssss सरिता निकल गया. दीदी ने मेरी तरफ मुस्कुराकर नशीली नजरो से देखा. लेकिन कहा कुछ नहीं.

मैं- अब आप भी मेरी तरह अपनी तंग खोलकर मेरे ऊपर लेट जाओ और जैसे hi मैं 1 कहूंगा हम दोनों एक साथ अपने शरीर को ऊपर उठाएंगे और एक दूसरे को कसकर पकड़ लेने और जब मैं 2 कहु तो फिर से पहले जैसे hi लेट जाएंगे.

सरिता दी- ये कैसे एक्सेरसीज़े है यार. चलो ठीक है करो.

मैं- 1

इतना कहकर हम दोनों ने एक दूसरे की टैंगो में तंग फसकर तेज़ी से उठे और एक दूसरे को कसकर बहो में भर लिया जिससे दोनों के मुंह सा aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh sssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

इस एक्सेरसीज़े को करके दीदी का तो पता नहीं मगर मुझे बहुत मज़ा आया था. ये एक ओरिजिनल चुदाई सन था और मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मैं सरिता दीदी को छोड़ रहा हूँ. दीदी इतनी ज्यादा छुडासी हो गाइट hi की वो अपनी इसी छुडास में मेरे साथ ये उलटी शिधि एक्सेरसीज़े कर रही थी. कुछ देर एक दूसरे से इसी तरह चिपके रहने के बाद मैंने कहा.

मैं-2

इतना कहकर हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर लेट गए. इसी तरह से मैंने और दीदी ने 5 बार ये एक्सेरसीज़े की और जब 6वि बार मैंने 2 बोलै तो दीदी ने मेरे जिस्म को नहीं चूड़ा मैंने दोबारा 2 बोलै फिर भी दीदी ने मुझे नहीं छोड़ा मेरा लुंड पुरे उफान पर था और दीदी की छूट के मुंह से सत्ता हुवा था जिसे दीदी भी फील कर रही थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या हुवा दीदी.

सरिता दी- अब मेरे शरीर में तनिक भी जान नहीं है अभी. मैं नहीं उठ पाऊँगी.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को और जोर से अपने शरीर से सत्ता लिया और निचे से अपनी कमर उठाकर एक जोरदार झटका दीदी की छूट पर मर दिया. दीदी सिसक कर चीख पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhh sssssssssssss अभीइइइइइइ माहाआर gaiiiiiiiiii मैनेईईईई डीईएडीई सीईई.

दीदी की बात सुनकर मन कर रहा था की अभी के अभी दीदी की कपडे पहाड़ दालु और हचक हचक कर दीदी की छूट को छोड़कर उसकी धज्जिया उदा दू. लेकिन मैंने कूद को कण्ट्रोल kiya.abhi मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था. शायद यही हाल इस समय दीदी का भी था. कुछ देर बाद दीदी मेरे शरीर से लुढ़क कर साइड में लेट गई. मेरी लुंड से प्रेकमे की कुछ बूंदे निकल कर मेरे लोअर में डेग बना गई थी और दीदी की लोअर की तो पूछो hi मत. दीदी की छूट ने इतना पानी छोड़ा था की उनकी लोअर में लगभग 6”का गोल धब्बा बन गया tha.kuchh देर बाद हम दोनों उठकर बैत गए तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी अब हो गई कसरत अब मैं जाओ.

मैं- नहीं दीदी बस एक और कर लेते हैं उसके बाद चली जाना. अगर आपको मेरे साथ करने में मज़ा नहीं आ रहा है तो आप जा सकती हैं.

दीदी भी शायद अभी और मज़ा लेना चाहती थी तभी तो मेरे एकबार कहने पर रुक गई और बोली और बोली.

सरिता दी- मैंने ऐसा तो नहीं कहा अभी. तू कहता है तो एक और कसरत कर लेते हैं.

मैं एकबार फिर से निचे जमीन पर लेट गया और और दीदी को अपनी थिंगस पर फिर से बैठने के लिए कहा. दीदी आकर मेरी थिंगस पर बैठ गई. दीदी के बैठने के बाद मैंने अपने घुटने ऊपर उठा लिए जिससे दीदी अपनी गद्देदार गांड लेकर सरक कर निचे मेरे लुंड पर आ giri.ham दोनों के मुंह से आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. मैंने दीदी को उनके हाँथ कमर पर रखने के लिए कहा. जिससे दीदी की चूचिया सामने की तरफ निकल gai.maine दीदी से कहा.



मैं- अब आप आगे की तरफ झुककर अपनी चूचिया मेरे साइन से रगड़ो और फिर सीधी हो जाओ. इसी तरह काम से काम 20 बार करो.

मेरी बात सुनकर दीदी झुककर अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ने लगी और लगभग 20 सेकंड तक अपनी चूचिया रगड़ने के बाद शिधि हो गई. दीदी इसी तरह झुक झुक कर अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ती रही. झुकने की वजह से दीदी की चूचिया बहुत अंदर तक ब्रा में कैद नज़र आ रही थी.



चूचियों को मेरे साइन में रगड़ते हुवे दीदी की साँस उखाड़ने लगी. दीदी का चेहरा लाल हो गया. और आँखे बंद होने लगी.

दीदी लगातार झुक झुक कर अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ती रही और निचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लुंड पर पटकती रही जिससे मैं बेकाबू हो गया और मैंने दीदी को पकड़ कर अपने ऊपर खींचा और t-shirt के ऊपर से hi दीदी की एक चुकी अपने मुंह में ले ली और दबा दबा कर चूसने लगा. दीदी भी अब अपनी चरम पर थी इस्लीय वह मेरा बालो पर अपना हाँथ फिरने लगी. मैंने दोनों हांथो को दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिया और मसलने लगा. कभी कभी मसलते हुवे उनकी गांड पर थप्पड़ भी लगाना शुरू कर दिया. जिससे दीदी के मुंह से aaahhhhhhhhhh ाभीइइइइइइइ ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई ssssssssssss ाभीईई की आवाज़ निकलने लगी. थोड़ी देर तक दीदी की चुकी चूसने और गांड रगड़ने और गांड पर थप्पड़ मरने से दीदी का जिस्म अकड़ने लगा और वो छीलते हुवे झड़ने लगी.

सरिता दीदी- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh AAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyy. Oooooooooooohhhhhhhhh मुझीीीी क्याआ हो राहाआआआआ हिअआआअ. मरीईईई वहह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत खुऊजली होओओओओ रहीइइइइइइइ hiaaaaaaaaaa aaaaaaaaaahhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiii बाछआआआआआआआओ मुझेईईईई mainnnnnnnnnn गइईईईइर्र रहीइइइइइइइइ होऊणननननन aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

इतना बोलकर दीदी निढाल हो गई. मैं भी अब छूटने वाला था इसीलिए मैंने दीदी की चुकी को मुंह में भर लिया. और दोनों हांथो से उनकी गांड पर थप्पड़ मरने लगा और चुकी को दन्त से दबाकर खींच लिया और गांड को जोर से मसल दिया. मैं और बर्दास्त नहीं कर पाया और मेरे लुंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा.

मैं- AAAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh Ooooooooooooooohhhhhhhhhh सरिता मैं भी गयाए. Teeeeeeeeeeeereeeee जिससससससससमममममम नई मेरेईईई लुँड्ढड्डड़ को पिघलाआआआ दियाआआआ सविताआआआ. तेराआआआ जिसमममममममम बहुत्तट्ट्ट्ट गराआआआआम हैईईईई. टूउऊउउउउउ भठियईईई बहहहहहहहहउतत्तत्त चूड्डड्डड्डकहाआद haiiiiiiiiiiii. तू भीईई बहुत्तट्ट्ट्ट पयासीइइइइइइ है. tuneeeeeeeeeee mujheeeeeeeeee निचोड्ड्ढड्डड़ liyaaaaaaaaaaa सलीईईईई. Mainnnnnnnnnn gayaaaaaaaaaaa.oohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

झड़ते समय मैंने दीदी की चुकी दन्त से खींच ली थी और उनकी गण्ड को मसल दिया था जिससे दीदी भी चीख पड़ी थी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii Dhireeeeeeeeee भाआईईईईई डरडडडडडड होताआआआ hiaaaaaaaaaa. Aaraammmmmmmmmmmm सीईई.

दीदी झाड़कर मेरे मेरे ऊपर hi पड़ी लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी. झड़ने के बाद मैंने भी दीदी को अपने से लिपटकर गहरी साँस ले रहा था. जब हम दोनों की साँस दुरुस्त हो गई तो दीदी को होश आया और वह मेरे ऊपर से उतारकर कड़ी हो गई और अपना हुलिया ठीक करने लगी. झड़ने के बाद हम दोनों को लोअर गीली हो गई थी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से पूछा.

मैं- तो कैसा लगा दीदी मेरे साथ एक्सेरसीज़े करने में. अगर अच्छा लगा हो तो कल इससे भी अच्छी एक्सेरसीज़े सिखाऊंगा आपको.

दीदी मेरी बात सुनकर शर्माने लगी और निचे जाने लगी तो मैं दीदी की मटकती गांड को घूरने लगा. दरवाज़े पर पहुंचकर उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और अपनी गांड को घूरता पाकर मुस्कुराने लगी और जीभ दिखाकर बोली.



सरिता दी- तू बहुत कमीना है. तू कभी नहीं सुधर सकता.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-76

इतना कहकर दीदी निचे चली गई तो मैं भी सीधा बाथरूम में घुस गया और लोअर उतर कर धुलने के लिए दाल दिया और फ्रेस होकर अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर बाद मैं निचे आया तो निचे सभी बैठे हुवे थे और सविता दीदी किचन में नाश्ता और खाना बना रही थी मैं भी सीधे किचन में चला गया और दरवाज़े पर खड़ा होकर दीदी को देखने लगा. दीदी ने नहाकर सदी और ब्लाउज पहन रखा था. थोड़ी देर बाद मैं दीदी के पीछे जाकर उनसे सर्कार खड़ा हो गया. दीदी इस अपर्यासित हमले से चौक गई और तुरंत पीछे मुड़कर देखा तो और मुझे देखकर शांत हुई और बोली.



सविता दी- क्या करता है अभी. तूने तो मुझे डरा दिया था.

मैं- अरे सविता मैं तुमको डरा कहा रहा हूँ मैं तो तुम्हे प्यार कर रहा हूँ.

और इतना बोलकर मैंने उनके दादी के पल्लू को कंडे से हटाकर दीदी को अपनी बहो में भर लिया. मैंने अपना हाँथ दीदी की छूछीयो पर रख दिया और हल्का सा दबा दिया जिससे के मुंह से ssssssssssssss की आवाज़ निकल पड़ी. दीदी उछाल पड़ी और मुझसे कहने लगी.



सविता दी- क्या करता है अभी. सभी बहार बैठे हैं किसी ने देख लिया तो बहुत बुरा होगा.

मैं- कुछः नहीं होगा दीदी. तुम चिंता न करे.

इतना बोलकर मैं दीदी की चूचिया हल्का हल्का दबाने लगा और उनकी गार्डन को किश करने लगा. दीदी भी अब काम करना बंद कर चुपचाप कड़ी हो गई और मेरी हरकतों का आनंद उठाने लगी. मैं हलके हलके दीदी की चूचियों को दबाता हुवा उनकी पीठ चूमने लगा.



दीदी आआआआहहहहहहह ooooooooooohhhhhhhhh आहे भरने लगी फिर मैंने दीदी की चूचियों को जोर से दबा दिया तो दीदी हलकी सी चीख पड़ी और मुझसे बोली.

सविता दी- क्या कर रहा है अभी दबा क्यों रहा है बहार सब बैठे हुवे है. किसी ने सुनलिया तो हम पकडे जाएंगे.

मैं- तो फिर चीख क्यों रही हो. थोड़ी देर शांति से नहीं कड़ी रह सकती हो क्या.

मेरे ये कहने पर दीदी पलटकर खडी हो गई और मेरी तरफ देखने लगी. तो मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे उन्हें किचन के स्लैप पर बैठा दिया और उनके होंठो को चूमने लगा.



थोड़ी देर तक होंठ चूमने के बाद मने हाँथ उनकी सदी के अंदर डालने लगा तो दीदी ने मेरे हाँथ पकड़ कर रोक दिया. तभी मनीषा की आवाज़ सुनाई दी जो दीदी से नाश्ते के लिए पूछ रही थी. दीदी तुरंत मुझे दूर धकेलकर गैस के पास चली गई. जब मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो मनीषा वह कड़ी थी.

मनीषा की दरवाज़े के पास देखकर तो मेरी हालत ख़राब हो गई. वो मुझे hi देख रही थी. मुझे दर लग रहा था की कही मनीषा ने कुछ देख तो नहीं लिया. थोड़ी देर बाद वह बहार चली गई तो मैं भी फ्रीज़ से पानी निकलकर बहार चला गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद सविता दीदी नाश्ता लेकर आ गई. सभी ने मिलकर नाश्ता किया. इस दौरान मैं मनीषा को hi देख रहा था. लेकिन उसके हाव भाव से मुझे ऐसा तनिक भी नहीं लगा की उसने कुछ देखा होगा. नाश्ता करने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया. चूँकि आज छुट्टी थी तो मां पापा आज घर पर hi रहने वाले थे. तो मैंने सोचा की थोड़ा बहार घूमकर औ. तो मैं तैयार होकर पापा को बोलकर बहार मार्किट की तरफ चला गया और लगभग 2 हॉर्स बाद घर आया.

जैसे hi मैं घर में एंटर हुवा तो पता चला जीजा जी पधारे हैं दीदी को ले जाने के लिए. मुझे ये जानकर बहुत दुःख हुवा और जीजा पर बहुत गुस्सा आ रहा था. महीनो की म्हणत और काफी प्रयासों की बाद तो मुझे छूट मिली थी और वो भी जीजा मुझसे दूर करने के लिए आये हैं. लेकिन मैं क्या कर सकता था. दीदी उनकी पत्नी थी तो कुछ बोल भी नहीं सकता था. फिर मैंने जाकर जीजा जी के पांव चुवे और उनसे बातचीत करने लगा. थोड़ी देर बातचीत करने के बाद मैं दीदी के कमरे में चला गया तो वह पर मनीषा भी बैठी थी. दीदी का चेहरा जीजा के आने से उतर गया था. वो भी दुखी थी लेकिन ख़ुशी जाहिर कर रही थी. आखिर दुक्खी हो भी क्यों न. अब्भी ाभ्ही तो दीदी की बंजर जमीन में बरसात होनी शुरू हुई थी. मैंने मनीषा को किसी बहाने से बहार भेज दिया और दीदी से कहा.

मैं- अब क्या होगा दीदी. आप जाने से मन कर दो न. अभी तो हमने ठीक से मज़े भी नहीं किये हैं. और आप जा रही हो.

सविता दी- मन तो मेरा भी नहीं है जाने का. लेकिन मैं मजबूर hoon.mana भी नहीं कर सकती. क्योंकि मन करने का कोई बहाना भी नहीं है.

इतनी देर में मनीषा वापस आ गई. मैं फिर निचे आ गया. बातो बातो में पता चला की अभी 1 हॉर्स में hi जीजा जी को निकलना है. ये सुनकर मुझे और ज्यादा गुस्सा आने लगा. मैंने सोचा था की एक दो दिन बाद जीजा जाएंगे तो किसी भी तरह से समय निकल कर मैं सविता दीदी को 2-4 बार और छोड़ सकता था. लेकिन इनको तो तुरंत निकलना है. फिर मैं ऊपर देखकर मन में कहा की आपने मेरी किस्मत नरकट के पेन से लिखी है क्या. जो बिच बिच में मिट गई है.

हम सब बाते कर रहे थे. तभी सविता दीदी तैयार होकर बहार आयी. आज दीदी जैसे तैयार हुई थी. वो बहुत hi ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. दीदी को देखकर ऐसा लगता था जैसे वो एकदम पतिव्रता स्त्री हैं. दीदी और जीजा को छोड़ने के लिए सब लोग बहार तक आए. मैं दोनों को छोड़ने स्टेशन जाना चाहता था लेकिन पापा ने मन कर दिया और खुद जाने लगे. बहार आकर दीदी ने मुझे एकतरफ बुलाया. मैं उनके पास गया तो दीदी ने मुझे कसकर बहो में भर लिया. और धीरे से मेरे कान में बोली.

सविता दी- अभी मैं तेरे बिन कैसे रहूंगी. मुझे तेरी बहुत याद आएगी. तू कुछ भी करके मुझे जल्दी से यहाँ फिर से बुला लेना.

मैं-( मस्ती में शरारत के साथ). मेरी याद आएगी या मेरे लुंड की.

सविता दी- तू बहुत ख़राब है अभी. यहाँ मेरी हालत ख़राब है और तुझे मस्ती सूझ रही है.

मैं- अच्छा ठीक है. अच्छा सुनो तुम hi कोई बहाना बनाकर मुझे कुछ दिन के लिए वह बुला लेना. फिर जीजा के ऑफिस जाने के बाद हम दोनों खूब धामा चौकड़ी मचाएंगे.

मैंने इतना कहकर अपनी नज़र चारो तरफ घुमाई और जब मैंने देखा की हमें कोई नहीं देख रहा है तो मैंने जल्दी से दीदी के गलो को चुम लिया और अपने हाँथ से दीदी की गांड दबा दी. जिससे दीदी आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ के साथ मुझसे अलग हो गई. तो हम दोनों सबके पास आ गए.



दीदी की आँखों में आंसू आ गए थे. तो सभी ने सोचा की ये हम दोनों का प्यार है जो बिछड़ने के कारन दीदी की आँखों में दिख रहा है लेकिन ये तो हम दोनों hi जानते थे की ये आँशु किस कारन हैं.

(जब मैंने दीदी को चूमा था और उनकी गांड दबाई थी तो मेरी जानकारी में ये था की मुझे कोई नहीं देख रहा है. लेकिन मैं गलत था. क्योंकि कोई था जिसने मुझे ये करते हुवे देख लिया था.).

खैर जीजा के चले जाने के बाद हम घर के अंदर आ गए. दीदी के जाने से सभी के चेहरे पर दुःख था. लेकिन सबसे ज्यादा दुखी मैं था. क्योंकि कुछ दिन फिर मेरे लुंड को भूखा hi रहना था. थोड़ी देर बाद मैं अपने कमरे में चला गया और सो गया. अभी मुझे सोये 1 हॉर्स hi हुवा था की मनीषा ने आकर मुझे जगाया. जब मैं उठ गया तो उसने मुझसे कहा.

महिषा- क्या भैया रात को नहीं सोएथे क्या जो अभी सो रहे हो.

मुझे उसकी बातो में शरारत के साथ साथ व्यंग भी नजर आ रही थी. लेकिन मैं समझ नहीं paya.To मैंने भी उसे जवाब दिया.

मैं- हाँ प्यारी बहन. एक जंगली बिल्ली ने मुझे सोने नहीं दिया. इसलिए अभी नींद पूरी कर रहा हूँ.

मनीषा- आप ऐसी जंगली बिल्लियों से दूर रहिये नहीं तो किसी दिन आपको काट लेगी.

उसकी बात पर हम दोनों हंसने लगे तो थोड़ी देर हंसने के बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- चलो भैया मेरे काम में मेरी हेल्प करवाओ.

मैं- तू तो कोई काम करती नहीं है तो आज तुझे कौन सा काम पद गया.

मनीषा- वो क्या है न की सविता दी ने सुबह कपडे भिगोये थे धोने के लिए. लेकिन वो तो चली गई. और सरिता दीदी बोल रही हैं की वो कपडे नहीं ढोएंगी. और मुझे धोने के लिए कहा. तो आप मेरी हेल्प कर दो तो मैं कपडे दो लू.

मैं- अच्छा चल मैं आता हूँ तेरी हेल्प करने.

थोड़ी देर बाद मैं कमरे से बहार आया और मनीषा के साथ बैठ कर कपडे धोने में उसकी हेल्प करने लगा. मैं तो अपनी धुन में कपडे धो रहा था और मनीषा से बिच बिच में बात भी कर रहा था. और ऐसे hi बात करते हुवे मैंने अपनी नज़र मनीषा की तरफ उठाई और फिर अपने कपडे धोने में व्यस्त हो गया.

लेकिन इन 2-3 सेकंड में मुझे कुछ ऐसा दिख गया की मैं अपनी नज़ारे फिर से उठाने के लिए मज़बूर हो गया. मनीषा ने पानी भरने के लिए नल खोला था और वो नल के पास hi बैठी थी तो पानी गिरते समय टोटी से कुछ पानी की फुहार मनीषा के ऊपर भी गिर रही थी. और कुछ कपडे उठा उठा कर पटकने से पानी उसके ऊपर गिर जाता था जिससे उसके कपडे गीले हो गए थे. कुछ मुझे इन सब की कोई खबर नहीं थी. जब मैंने दोबारा नज़र उठा कर उसकी तरफ देखा तो कपडे गीले होकर उसके जिस्म से चिपक गए थे. जिससे उसकी चूचिया हलकी हलकी नज़र आ रही थी. शायद उसने ब्रा नहीं पहनी थी. मनीषा की चूचियों की झलक देखकर मेरे लुंड सर उठाने लगा था.



मैंने अपनी नज़र उठाकर उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो कपडे धोने में व्यस्त थी. पानी की बूंदो से उसके बाल भी गीले हो गए थे जो कपडे धोते समय बार बार उसके चेहरे पर आ रहे थे. मैं तो कपडे द्यूंला भूलकर बस उसकी चुहियों को hi देखने में व्यस्त हो गया. जब उसने देखा की मैंने कपडे धोना बंद कर दिया है तो उसने मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

मनीषा- कहा खो गए भैया कपडे नहीं धोना है क्या.

मैं- धोना है. मैं तो तुझे देख रहा था.

मनीषा- वो तो आप मुझे हमेशा देखते हैं

मैं- वो तो है, लेकिन कपडे धोते हुवे पहली बार देख रहा हूँ. और देख रहा हूँ किट ु अपने बालो की वजह से ठीक से कपडे नहीं धो प् रही है.

मनीषा- हाँ भैया ये बार बार मेरे चेहरे पर आ रहे हैं.

इतना बोलकर मनीषा फिर से कपडे धोने में व्यस्त हो गई. अब तक उन्स्की चूचियों को देखकर मेरा लुंड चढी में पूरी तरह खड़ा हो गया था जिसका उभर लोअर में भी नज़र आ रहा था. थोड़ी देर मनीषा की चूचिया देखने के बाद मैंने और पास से उसकी चूचिया देखने की सोची इसलिए मैं उठा और उसके सामने जाकर बैठ गया. मेरे पास बैठने पर उसने मेरी तरफ देखा और मुझसे पूछा.

मनीषा- क्या हुवा भैया.

मैं- अरे यार तुम कपडा धो रही हो तो बार बार तुम्हारे बाल तुम्हारे चेहरे पर आ रहे हैं जिसे तुम बार बात पीछे कर रही हो इसलिए तुम्हे कपडे धोने में दिक्कत हो रही है. तो मैंने सोचा की तुम कपडे डोवो और मैं तुम्हारे बालो को पीछे कर दूंगा.

मेरी बात सुनकर महिषा मुस्कुराने लगी और फिर कपडे धोने लगी. मैं नजदीक से उसकी चूचियों को देखने लगा. नजदीक से देखने पर पता चल रहा था की उसने ब्रा नहीं पहनी है. जिससे उसकी चूचियों के निप्पल भी गीले कपडे के ऊपर से दिखाई पद रहे the.tabhi उसके बाल फिर आगे की तरार आये तो मैंने उसके चेहरे पर से बालो को न पकड़कर उन्स्की ठुड्डी की पास से बालो को पकड़कर पीछे किया. यह देख कर मनीषा मुस्कुराने लगी.



उसके बाल कपडे को उठा उठा कर पटकते समय बार बार आगे आ रहे थे और कपडे पटकने से उसकी चूचिया भी हिल जाती थी. कुल मिलकर बहुत hi कामुक नजारा था ये. थोड़े देर उसकी ठुड्डी से बाल हटाने के बाद मैंने और आगे बढ़ने की सोची और जब अबकी बार उसके बाल सामने आये तो मैंने उसकी चूचियों के उभर जहा से शुरू होते हैं वह से उसके बाल पकड़कर पीछे किया. मेरे ऐसा करने से उसने मेरी तरफ देखा. लेकिन मैंने अपने आपको अनजान शो किया तो वो फिर से कपडे धोने लगी. अब मैं बार बार उसकी चूचियों के ऊपरी भाग से उसकी बाल पकड़कर पीछे करता रहा. और वो अपनी चूचिया हिला हिलाकर कपडे धोती रही. थोड़ी देर बाद मैंने उसके बालो को हटाने के लिए उसकी चूचियों के ऊपर अपना हाँथ बालो को पकड़कर हटाया. मेरा हाँथ अपनी चूचियों पर छूटे hi उसकी aaahhhhhhhhhhh ssssssssssssss निकल गई. जब मैं उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो निचे देख रही थी. फिर मैंने उसकी नज़रो का पीछा किया तो वो मेरे लुंड को देख रही थी. जो पानी से गिला होने के कारन लोअर और चड्ढी से चिपक गया था और उसका उभर भरपूर नज़र आ रहा था. थोड़ी देर बाद उसने मेरी तरफ देखा तो मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वो शर्मा गई. तो मैंने उससे कहा.

मैं- वाह मनीषा. तू तो बहुत अच्छा कपडा धोती है. चल अब इसको खंगाल कर सूखने के लिए दाल देते हैं.

इतना कहकर मैं खड़ा हो गया तो मेरा लुंड एकदम तम्बू बैंकर आगे की तरफ निकल गया. जिसे मनीषा देख रही थी. कुछ देर लुंड को देखने के बाद वह कपडे पानी में डालकर धोने लगी. उसके झुकने से उसकी चूचिया अंदर तक दिखाई देने लगी.



मैं उसके पास खड़ा उसकी चूचियों को देखने लगा और वो मेरे लुंड को देखते हुवे कपडे पानी में डूबकर निकलने लगी. थोड़ी देर बाद उसने कपडे धो लिया और उसे सूखने के लिए तर पर डालने जाने लगी. उसके कपडे गीले हो जाने के कारन उसकी चौड़ी गांड भी कपड़ो में चिपक गाइट hi. जिससे बहुत दिलकश नज़ारा नज़र आ रहा था. जब तक वो कपडे सूखने के लिए डालती रही तब तक मैं उसकी गांड को घूरता रहा. लेकिन उसके आने से पहले hi मैं अपने कमरे में आ गया और मनीषा कपडे डालकर निचे चली गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-77

मैं- वाह मनीषा. तू तो बहुत अच्छा कपडा धोती है. चल अब इसको खंगाल कर सूखने के लिए दाल देते हैं.

इतना कहकर मैं खड़ा हो गया तो मेरा लुंड एकदम तम्बू बैंकर आगे की तरफ निकल गया. जिसे मनीषा देख रही थी. कुछ देर लुंड को देखने के बाद वह कपडे पानी में डालकर धोने लगी. उसके झुकने से उसकी चूचिया अंदर तक दिखाई देने लगी. मैं उसके पास खड़ा उसकी चूचियों को देखने लगा और वो मेरे लुंड को देखते हुवे कपडे पानी में डूबकर निकलने लगी. थोड़ी देर बाद उसने कपडे धो लिया और उसे सूखने के लिए तर पर डालने जाने लगी. उसके कपडे गीले हो जाने के कारन उसकी चौड़ी गांड भी कपड़ो में चिपक गाइट hi. जिससे बहुत दिलकश नज़ारा नज़र आ रहा था. जब तक वो कपडे सूखने के लिए डालती रही तब तक मैं उसकी गांड को घूरता रहा. लेकिन उसके आने से पहले hi मैं अपने कमरे में आ गया और मनीषा कपडे डालकर निचे चली गई.

अब आगे.

मनीषा के साथ कपडा धोने के बाद मेरे मंद जो सविता दीदी के जाने के बाद थोड़ा अपसेट था ो ठीक हो गया था. शाम को सरिता दीदी मुझे बुलाने आई क्योंकि गाड़ी सिखने का समय हो गया था. तो मैंने केवल एक लोअर t-shirt पहनकर उनके साथ चल दिया. कार निकलकर हम दोनों मैदान की तरफ चल दिए. रस्ते में दीदी ने अपने शरीर पर लिया शॉल उतर दिया. दीदी को देखते hi मेरे मुंह से अनायास hi निकल गया.

मैं- ो तेरी माँ की.

क्योंकि दीदी ने कपडे hi कुछ ऐसे पहने थे. आज दीदी ने एक t-shirt पहनी थी वो भी बिना ब्रा के और तो और t-shirt थोड़ी ट्रांसपेरेंट थी. जिससे उनकी चूचिया और चूचियों के निप्पल साफ नज़र आ रहे थे.



मेरा लुंड तो ऐसा नज़ारा देखने के बाद तुरंत टैंकर खड़ा हो गया. निचे दीदी ने लेग्गी पहनी हुई थी. वो भी हलकी सी ट्रांसपरेंट्स थी. दीदी का ऐसा छुडासी रूप देखकर मैंने ब्रेक मार दी और गाड़ी रोककर दीदी को देखने लगा. दीदी मुझसे छोड़ने के लिए इतनी आतुर थी की din-b-din वो मुझे अपने नंगे जिस्म के दर्शन कराती जा रही थी. मैं तो बस आँखे फाड़े दीदी की चूचियों को घूरे जार अहा था. दीदी ने जब मुझे अपनी चूचियों को यू घूरता पाया तो उनको हंसी आ गई और उन्होंने हँसते हुवे मुझसे पूछा.

सरिता दीदी- क्या हुवा अभी ऐसे मुंह फाड़े ख्य देख रहा है. क्या मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ.

मैं- क्या बात कर रही हो. तुम अच्छी लगने की बात कर रही हो. तुम तो ऐसी लग रही हो की मैं क्या बताऊ.

सरिता दी- वो तो ठीक है है लेकिन तू मुझे तुम क्यों कह रहा है.

Main-Kya यार दीदी. अब हम दोनों का रिश्ता बदल गया है तो अब तुम्हे तुम की बोलूंगा मैं.

सरिता दी- अच्छा और वो रिश्ता बदला कैसे.

मैं- अब जब तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड बन गई हो तो रिश्ता तो बदल hi जाएगा. (और धीरे से) और बहुत जल्दी एक और रिश्ता बनने वाला है.

सरिता दी. अच्छा तो बहन को गिर्ल्फ्रेंड बना लिया. चलो तुम भी क्या याद करोगे की कैसे दिलदार बहन से पला पड़ा था तुम्हारा. अच्छा वो सब chhod.tune ठीक से बताया नहीं की मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं- अब कैसे बताऊ तुम्हे की तुम बहुत hi सेक्सी & हॉट तो पहले से hi हो और आज इन कपड़ो में एकदम मॉल लग रही हो.

सरिता दी- अच्छा बीटा. पहले गिर्ल्फ्रेंड अब मॉल. और आगे पता नहीं क्या क्या बनाएगा मुझको (हंसकर और शर्माकर)

मैं- बनाना तो मुझे तुमको बहुत कुछ है लेकिन उसमे अभी समय है. अभी जितना बन गई हो उसे तो मान लो.

सरिता दी- अच्छा बाबा ठीक है मान लेती हूँ. तो अब यही खड़े रहने के इरादा है या मैदान में चले.

दीदी की बात सुनकर मैं मुस्कुराया और गाड़ी स्टार्ट कर मैदान की तरफ चल पड़ा. मैदान में पहुंचकर मैंने कार रो दी तो दीदी ने तुरंत अपनी तरफ का दरवाज़ा खोलकर ड्राइविंग शीट की तरफ आकर कड़ी हो गई और जब मैं उतरने लगा तो उन्होंने मुझे बैठे रहने का इशारा किया. दीदी ड्राइविंग साइड का गाठ खोलकर अंदर आने लगी और मेरे खड़े लुंड को देखने लगी तो मैं अपना लुंड सहलाने लगा.



जिसे दीदी देखने लगी. दीदी झुकी हुई थी तो मेरा चेहरा दीदी के चेहरे के पास था. तो उनकी सांसे मुझे सुनाई पद रही थी जो बढ़ी हुई थी थोड़ी देर लुंड देखने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखा और मुझसे कहा.

सरिता दीदी- अब मैं बैठ जाओ.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनकी कमर में हाँथ डालकर उन्हें खिछ्कर अपने खड़े लुंड पर बैठा लिया. दीदी ने कुछ देर अपनी गांड इधर उधर करके मेरे लुंड को अपनी गांड की दरार में एडजस्ट किया और चुपचाप बैठ गई. कुछ देर बैठे रहने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अब गाड़ी स्टार्ट करनी है या ऐसे hi बैठे रहना है.

मैं- हाँ सरिता क्यों नहीं. लेकिन मैं आज क्लुछ और एक्सेलेटर और ब्रेक में तुम्हारी हेल्प नहीं करूँगा मैं तो बस स्टेरिंग hi पकडूँगा.

ितं कहकर मैंने अपने दोनों हाँथ उठाकर दीदी की चूचियों पर रखा और दबा दिया और दबाकर अपना हाँथ उनकी चूचियों पर hi रहने दिया. दीदी ने asssssssssaaaaaaaaaaassssssssss करके मुझे देखा और कहा.

सरिता दी- क्या बात है अभी. बड़े फ़ास्ट जा रहे हो. पहले आप से तुम. फिर तुम से तू और अब दीदी से सीधे सरिता. और ये जो तूने पकड़ा है वो स्टेरिंग नहीं है. अपना हाँथ हटा वह से.

मैं- अब मैं क्या करू. जो काम मुझे करना है. वो मैं तुम्हे दीदी और आप बोलकर नहीं कर पाउँगा. इसलिए इसे तुम मेरी मजबूरी hi समझ लो. और मुझे पता है की मैंने जिसपर हाँथ रखा है वो स्टेरिंग नहीं है. लेकिन अगर मने अपने हाँथ निचे रखे तो अचानक जरुरत पड़ने पर मैंने स्टेरिंग जल्दी नहीं पकड़ पाउगा. इसलिए मैंने तुम्हारे हॉर्न को पकड़ा है. जिससे अचानक जरुरत पड़ने पर मैं स्टेरिंग संभल सकू.

मेरे मुंह से अपनी चूचियों का नाम हॉर्न सुनकर दीदी हंसने लगी और हँसते हुवे बोली.

सरिता दी- तू भी न पता नहीं कहा कहा से अजीब नाम खोजकर लता है तेरा बस चले तो तू मेरे जिस्म को गाड़ियों के part बना दे.

मैं- Part नहीं सरिता तुम खुद एक गाड़ी हो. जिसकी सवारी मैं बहुत जल्द करने वाला हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरे हाँथ पर एक झापड़ मारा और गाड़ी स्टार्ट कर ली. अब दीदी गाड़ी चलने लगी और मैं उनका हॉर्न मतलब चूचिया दबाने लगा. दीदी अब तक बहुत गरम हो गाइट hi तभी तो उनके निप्पल एकदम तीर के सामान तन गए थे जो. एकदम अंगूर के डेन की तरह लग रहे थे. मैं दीदी की चूचिया दबाने के साथ hi अपने जीभ से दीदी की गार्डन चाटने लगा. जिससे दीदी की सिसकिया निकलने लगी. मैं कभी दीदी की चूचियों को दबाता तो कभी निप्पल को ऊँगली और अंगूठे से मसल देता जिससे दीदी कम्पनी लगती और sssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh करने लगती. फिर मैंने दीदी की गार्डन को दांतो में पकड़ा और दीदी की चूचियों की घुंडियो को अंगुली और अंगूठे में लेकर जोर से मसल दिया और गार्डन पर काट लिया जिससे दीदी की चीख निकल गई.



सरिता दी- aAaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. दंत्ततत्तत्त क्यूऊँऊं जादा रहा ही uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyy मरररररर गाइइइइइइइ रईईईई. क्याआआआ करररररररर राहाआआआ हिअआआअ bhaaiiiiiiiiiiii. Dhireeeeeeeeeeeee dabaaaaaaaaaa नाआआ. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैईईई.

मैं- क्या करू सरिता तुम्हारी चूचिया इतनी टाइट हैं की धीरे धीरे दबती hi नहीं. जोर लगाने पर hi थोड़ा बहुत दबती हैं. और आपकी गार्डन दन्त गाड़ने के लिए मजबूर कर देती हैं.

इतना बोलकर मैंने फिर से दीदी की चूचियों को फिर से दोनों हांथो में भर दिया और गार्डन को दांतो से पकड़कर काट लिया और चूचियों को जोर लगकर दबा दिया. जिससे दीदी की चीख फिर से निकल गई.



सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ह्ह्ह्हह्ह्ह्हहीीीैय्यियय Aahhiiiiiiiiii मीरीईईईई भाआआईईई धीरररररररी seeeeeeeeeee. मुझीीी डरडडडडडडड होताआ हिअआआअ. एई टेरीए बहनणननणणन का शरीरररररर haiiiiiii.aaaraaaaammm सी.

दीदी की सिसकारी सुनकर मैं फिर से उनके गार्डन को चाटने लगा और अपने एक हाँथ उनकी चुकी से उठाकर उनके पेट को सहलाते हुवे निचे की तरफ बढ़ने लगा और अपना हाँथ दीदी की लेग्गी पर रख दिया जो छूट के रास से पूरी गीली हो गई थी. मेरा हाँथ छूट पर लगते hi दीदी ने ब्रेक लगा दिया जिससे दीदी आगे की तरफ गिरने लगी तो मैंने एक हाँथ से उनकी चुकी और लेग्गी के ऊपर से उनकी चूचिय को मुट्ठी में भर लिया और पाने साथ दबा लिया. जिससे दीदी के फिर से चीख निकल गई.

सरिता दी- AAAAAAAAAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii मरीईई bhaaiiiiiiiiiiiiii. मुझेईईईई क्याआआआ होऊ राहाआआ हैईईईई. मेरा शाआअहारीर मरीईईई क़ाबूउउउउ मीटीई नाहीईई हिआआआआ. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh abhiiiiiiiiiiii.

कार रुकते hi दीदी ने चीखकर अपना एक हाँथ स्टेरिंग से उठाकर मेरे हाँथ पर रख लिया और मेरा हाँथ हटाने लगी. लेकिन उनके हाँथ में कोई ताकत नहीं थी. तो मैंने फिर से उनकी गार्डन चुनी और चटनी शुरू कर दी और चूचियों को दबाने लगा और दीदी के हाँथ के निचे से अपने हाँथ को उनकी छूट को मुठी में भरकर भिज्ने लगा. दीदी बस sssssssssssssss ooooooooooohhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh कर रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे हाँथ से अपने हाँथ उठाकर मेरी गार्डन पर दाल दिया और अपना सर मेरी गार्डन पर टीकाकार बैठ गई. जब मैं दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखे बंद हो गाइट hi. और चेहरा लाल हो गया था. मैं उनकी चूचियों और छूट को दबाते हुवे अपना मुंह दीदी के कण के पास लेजाकर धीरे से कहा.



मैं- तुम्हे अच्छा लग रहा है मेरे साथ कार सीखना.

सरिता di-(madhsi में). Hhhhhhhhhhhh

मैं- तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा है मेरे साथ कार सीखना

सरिता दी- (माधोसी में) hhhhhhhhhhhhh

दीदी का जवाब सुनकर मैंने अपना हाँथ उनकी चुकी अउ छूट से हटा लिया और दीदी को अपने से दूर कर दिया तो दीदी होश में आई और मेरी तरफ देखने लगी. जैसे जानना छह रही हो की मैंने उन्हें दूर क्यों किया. थोड़ी देर बाद दीदी ने पूछा.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. तू नाराज़ लग रहा है.

मैं- नाराज़ है हो तो और क्या करू. तुम मेरे किसी सवाल का ठीक से जवाब देती hi नहीं हो.

सरिता दी- मैंने ऐसा क्या किया. तूने तो खुद मुझे अपने से दूर किया.

मैं- मैंने तुम से पूछा था की लग रहा है तो तुमने बोलै हां और जब मैंने पूछा अच्छा नहीं लग रहा है तो तुमने बोलै हां. तो इसका क्या मतलब समझू मैं.

सरिता दी- अब ये खुलकर बोलना जरुरी है क्या तू मेरे साथ इतना सबकुछ कर रहा है तो तू समझ जा न की मेरी हाँ है या न है.

मैं- मैं इतना समझदार नहीं हूँ की मैं इशारे समझ जाऊ. जो भी हो साफ साफ बता दो. अगर अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं कुछ नहीं करूँगा आगे से.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने कोई जवाब नहीं दिया. बस मेरे हाँथ को पकड़ कर अपनी चुकी पर रख लिया और अपना सर मेरे कंडे पर रख लिया. मैंने भी अब ज्यादा नखरे न करते हुवे दीदी के गलो को चाटने लगा और उनकी चूचियों को दबाने लगा. और एक हाँथ उठाकर सीधे दीदी की छूट पर रख दिया और मसलने लगा. दीदी ssssssssssssssssssssss aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ करने लगी लेकिन इस बार मेरे छूट वाले हाँथ को हटाने की कोशिश नहीं ki.kuchh देर तक छूट लेग्गी के ऊपर से सहलाने के बाद मैं अपना हाँथ में डालने लगा. कुछ देर मसक्कत के बाद मैं अपना हाँथ लेग्गी में डालकर दीदी की छूट पर रख दिया. एआईईई तेरी की. साली ने तो पंतय hi नहीं पहनी थी. मेरा हाँथ दीदी की छूट के राश से सं गया था. मेरा हाँथ छूट पर पड़ते hi दीदी aaaaaaaaaaaaaahhhhhh sssssssssssssss करके कसमसाने लगी. फिर मैंने दीदी की छूट को मुठी में भर लिया और उनकी एक चुकी की घुँगी को पकड़ कर छूट और चुकी दोनों एकसाथ मसल दिया. दीदी आनंद से चीख पड़ी.

सरिता दी- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii… Aaaaaaaaaaraammmmmmmmmm seeeeeeeeee. मुझीीीी darddddddddddd होता हैईईईई. Ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hjhhhhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyyyyy.

दीदी की आनंद युक्त चीख सुनकर मैंने उनके गाल को अपने मुंह में भरा. उनकी चुकी और छूट को मुठी में भरकर इस बार बहुत जोर से दबा दिया और गाल को काट लिया. दीदी फिर से चीख पड़ी

सरिता di-Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh साहाआईईईईई kaamineeeeeeeeeee. Ooooooooooohhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmuuuuuuuummyyyyyyyyy बचाआंआऊऊऊओ mujheeeeeeeeeeee. माईईईईईन्न्न maarrrrrrrrrr jaauungiiiiiiiiiiii. Tumhaaaaaaaaraaaaaaaaaa bettttttttttaaaaa जालीमंममममममम haiiiiiiiiiiii. साआआअआईईईई को aaappppppppppniiiii बाहाआआआंत्र पररररररररर भीइइइइइइ राहाआम नाहीइइइइइइ आआआआआ रह्हह्ह्हह्हआआ हैईईई. Oooooyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeee.

मैंने दीदी की चीख सुनकर अपनी पकड़ ढीली कर दी और दीदी को थोड़ा सा अपनी गॉड से उठाकर अपना लोअर निचे खिसका दिया और दीदी को फिर अपनी गॉड में बैठ लिया और दीदी का एक हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया. लुंड पर हाँथ रखते hi जैसे दीदी को करंट लगा. उन्होंने झट से अपना हाँथ वापस खींच लिया और आँख खोलकर मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनका हाँथ फिर से पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया और उनके हाँथ को अपने लुंड पर ऊपर निचे फेरने लगा.



दीदी अभी भी मेरी आँखों में देख रही थी. दीदी की आँख इस समय बहुत नशीली थी. चेहरा सुर्ख लाल हो गया था होंठ जैसे फड़फड़ा रहे थे. थोड़ी देर बाद मैंने अपने हाँथ को दीदी के हाँथ से हटा लिया लेकिन दीदी ने मेरा लुंड सहलाना बंद नहीं किया. मैंने फिर से अपना हाँथ दीदी की लेग्गी में डालकर दीदी की छूट के डेन को सहलाने लगा और दीदी की आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- कैसा लग रहा है तुमको सरिता.

सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhhhhhh अछ्हाआअ लाआएग गगगगगगग रहा हिअआआअ( लड़खड़ाती हुई आवाज़ में दीदी ने जवाब दिया क्योंकि दीदी अपनी चरम पर पहुंच गाइट hi.)

थोड़ी देर तक उनकी छूट सहलाने के बाद मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी छूट में डालने की कोसिस की लेकिन उनकी छूट टाइट थी. जिसके लिए मुझे डैम लगाना पड़ा और मैंने एक झटके में उनकी छूट में एक ऊँगली पूरी पेल दी. दीदी दर्द से दोहरी हो गई. जिसके कारन उनकी पकड़ मेरे लुंड पर सख्त हो गई. मेरे मुंह से ssssssssssssss की आवाज़ निकल गई और दीदी दर्द से चीख पड़ी.

सरिता दी- ooooooooooooooooooooooohhhhhhh ममममयी. मर्डर गइईईई मैंनं. बहररररररर निकललललललल अभीयी. ड़ड़ड़ड़ड़ हो राहाआआ हैईईईई.

मैंने दीदी की बात की परवाह किये बगैर अपनी उंगली उनकी छूट में पैनी जारी राखी. दीदी बार बार अपनी कमर इधर उधर करके ऊँगली निकलने की कोशिश कर रही थी और ऊँगली बहार निकलने के लिए भी बोल रही थी. लेकिन मैंने उनकी बात को अनसुना करते हुवे तेज़ तेज़ उनकी छूट में एक ऊँगली पेलता रहा. दर्द होने के कारन दीदी ने मेरे लुंड को सख्ती से दबाकर आगे पीछे कर रही थी जिसके कारन मैं झड़ने के करीब पहुच गया था. मैं अब एक हाँथ से दीदी की चुकी को दबाने लगा और ऊँगली से उनकी छूट को रहा था और साथ hi अब अंगूठे से उनकी क्लीट को भी मसलने लगा. जो दीदी बर्दास्त नहीं कर पाई और बड़बड़ाते हुवे झरने लगी. झरते हुवे दीदी ने मेरे लुंड को सख्ती से 3 बार आगे पीछे किया तो मेरे लुंड ने भी पानी छोड़ दिया. जो कुछ दीदी की लेग्गी पर कुछ उनके हांथो में तो कुछ कार में गिरा. झड़ते समय हम दोनों hi मदहोशी में बड़बड़ाने लगे.

सरिता दी- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaahhhhhhhhh अभीइइइइइ. मेरी भाईईई. मुझीऐ क्याआआआ हो राहाआआआ हैईईईई maiiiiiiiiiii हाआआआआआ मीटीई उड़द रहीइइइइइइ होओओओओ. मुझीीी साम्भलो aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सल्ल्ल्लेबीए. मेंननननन गाइइइइइइइइइ maiiiiiiiiii jaaaaaaaaaaa raaaaaaaahiiiiiiiiiiiii हूऊऊऊऊणणणन्न koiiiiiiiiiii सममममममबॉलीबीएए मुझीीीी. Ohhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ कमीनेईईईई.

मैं- ooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh Saritaaaaaaaaaaaaa heeeeeeeeyyyyyyyyyy maiiiiiiiiiiiin गयाआआ Salllllliiiiiiiiiii क्याआआआआ गारररररमममममममम हैईईईई टूउऊउउउउउ teerrrrrrrrrrreeeeeeeee हानःतूऊऊऊ मीटी जादूऊऊऊओ haiiiiiiiiiiii. Tereeeeeeeeeeee जिश्मममममम मीटी जड़ूऊऊऊ हिअआआअ. मेंननननननन गयाआआआ सरिताआ मेरा लुँड्ढड्डड़ पनीईई छूऊँऊंड रहा haiiiiiiiiii सॉललललललललीईई सरिताआआआ.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-78

हम दोनों झाड़ कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगे. थोड़ी देर बाद जब हम दोनों की सांसे दुरुस्त हुई तो मैंने अपना हाँथ दीदी की लेग्गी से बहार निकला. दीदी अभी भी वैसी hi बैठी हुई थी. मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे छूट के रास रास से भीगी ऊँगली अपने मुंह में दाल ली और चूसने लगा. दीदी ने मुझे ऐसे करते हुवे देखा तो शर्मा गई और मेरी गॉड से उतारकर गाड़ी से बहार निकल गई. फिर मैंने गाड़ी में रखे कपडे से अपना हाँथ पोछा और अपने वीर्य जो गाड़ी में गिरे से उसको साफ किया. और वही कपडा दीदी को दे दिया. दीदी ने भी अपना हाथ और लेग्गी पर लगा मेरा वीर्य साफ किया और दूसरी तरफ आकर बैठ गई. अब वो एकदम चुपचाप बैठी थी. थोड़ी देर बाद मैंने उनसे कहा.

Main-Kya हुवा सरिता. इतनी चुपचाप बैठी हो. क्या बात है.

सरिता दी- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.

मैं- तुम्हे अच्छा नहीं लगा क्या. क्या तुमको मज़ा नहीं आया क्या.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मुझे देखा और कहा.

सरिता दी- अभी तुमने ये अच्छा नहीं किया. मैं तुम्हारी बहन हूँ.

मैं- अच्छा जब तुम मज़ा ले रही थी तो आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइ ोुह्ह्हह्ह अभी कर रही थी.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया बस निचे देखती रही. शायद उनको शर्म आ रही थी या हो सकता है वो गिल्टी फील कर रही हो. क्योंकि कुछ भी हो मैं भाई था उनका. तो मैंने उनसे कहा.

मैं- क्या यार तुम्हारी पॉब्लम क्या है. किसी बात का ठिक्क से जवाब नहीं देती हो. लगता है तुम्हे ये सब अच्छा नहीं लगा. सॉरी आज के बाद मैं तुमको टच नहीं करूँगा. भूल जाओ ये सब. आगे से ऐसा नहीं होगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ देखा. लेकिन बोलै कुछ नहीं तो मैंने भी अब उन्हें थोड़ा अवॉयड करने की सोचा. ये भी मेरे प्लान का एक हिस्सा था. जिससे दीदी पूरी तरह मेरे कब्जे में आ सकती थी. फिर मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी और घर के लिए निकल गया. रस्ते भर हम दोनों ने कोई बात नहीं की. घर पहुंच कर मैं सीधा अपने कमरे में चला गया और दीदी अपने कमरे में. और सबसे पहले मैंने चेंज किया और निचे आकर सब के साथ हॉल में बैठ गया और T.V. देखने लगा. खाना खाने के समय सबने खाना खाया खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया.

कमरे में आने के बाद लगभग 10.30 पर मैंने सविता दीदी को मश्ग किया तो पता चला की अभी वो घर नहीं पहुंची है. उनकी बुकिंग एक-1 टायर में थी. मैंने दीदी से जीजा जी के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की वो सो गए हैं तो मैंने दीदी से चाट शुरू कर दी.

मैं- कैसी हो सविता.

सविता दी- तुम्हारे बिन कैसी हो सकती हूँ.

मैं- मेरी इतनी याद आ रही है तुमको.

सविता दी- बहुत ज्यादा. लेकिन क्या कर सकती हूँ.

मैं- मेरी याद आ रही है या मेरे लुंड की.

सविता दी- दोनों की याद आ रही है. अगर अभी घर पर होती तो अब तक तेरे कमरे में आ जाती. लेकिन अब पता नहीं वो दिन कब नसीब होगा.

मैं- तुम चिंता मत करो. मैं बहुत जल्द तुम्हारे पास आऊंगा और तुम्हारे बीएड पर तुम्हे अपनी दुल्हन बनाकर छोडूंगा. तैयार रहना.

सविता दी- मैं तो हमेशा तैयार हूँ तू बस जल्दी से आजा.

मैं- बहुत जल्द. अच्छा अपनी फोटो भेजो न कुछ सेक्सी वाली.

सविता दी- लेकिन अभी कैसे. ट्रैन में हूँ किसी ने देख लिया तो.

मैं- कोई नहीं देखेगा. फोटो भेज दो न.

सविता दी- अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद दीदी ने अपनी चूचियों की फोटो एक भेजी जिसमे उन्होंने अपने हाँथ से अपना ब्लाउज खींचकर निचे किया हुवा था.



मैं- थोड़ा और भेजो na.koi अच्छी सी सेक्सी और हॉट फोटो.

मेरी बात सुनकर दीदी बाथरूम में चली गई और कुछ देर बाद उन्होंने एक फोटो भेजी अपने ब्रा में.



मैं- क्या बात है दीदी तुम्हारी चूचिया तो din-b-din कड़क होती जा रही हैं. और भेजो न.

सविता दी- बस अब नहीं. तुम बहुत शरारती हो गए हो.

मैं- बस एक और वो भी नंगी चूचियों की.

कुछ देर बाद दीदी ने एक फोटो भेजी जिसमे उन्होंने ब्रा उतारकर अपने दांतो में फसकर एक सेक्सी ऐडा के साथ देख रही थी. क्या लग रहे थे दीदी की नंगी चूचिया थोड़ी छुपी हुई



मैं- क्या बात है सविता. जड़ी जालिम चूचिया हैं तेरी और तेरी ये ऐडा. हे मेरी जान न लेले. अच्छा अब एक और फोटो भेजो प्ल्ज़.

कुछ देर बाद दीदी ने एक फोटो भेजी बिना ब्रा के. क्या लग रहे थे दीदी की नंगी चूचिया.



मैं- वह सविता क्या चूचिया हैं तेरी एकदम कड़क. एकदम मॉल लग रही हो तुम. अच्छा ये बताओ तुम किसकी माल हो. मेरी या जीजा जी की.

सविता दी- ये कैसा सवाल है ओफ़्कौर्से मैं राघवेंद्र की पत्नी हूँ तो उसी की मॉल हुई न.

मैं- (नाराज़गी के साथ)- तो फिर ठीक है. अपना फ़ोन रखो अब मुझे नींद आ रही है.

इतना कहकर मैंने फ़ोन रख दिया. कुछ देर बाद मश्ग टोन बजी तो मैंने देखा सविता दीदी का मश्ग था. तो मैंने इग्नोर कर दिया. थोड़ी देर बाद दीदी ने एक और मश्ग भेजा. तो मैंने खोलकर देखा तो दीदी ने दोनों मश्ग में अपनी फोटो भेजी थी. एक में कैप्शन था

मैं अपने भाई की गरम मॉल हूँ.



दूसरी फोटो में कैप्शन था.

मैं अभी की चुड़क्कड़ मॉल हूँ.



ये मश्ग देखकर मैं बहुत खुस हुआ. क्योंकि अब सविता दीदी मेरे पुरे कण्ट्रोल में थी. मेरी गुलाम बन चुकी थी. अब जल्द से जल्द मैं दीदी के पास आगरा जाना चाहता था. क्योंकि मैंने सोच रखा था की मैं दीदी की गांड का उद्घाटन दुल्हन के रूप में उनके hi बीएड पर करूँगा. मैंने दीदी को मश्ग किया.

Main-kya बात है सविता. आखिर तुम मेरी गुलाम बन hi गई.

सविता दी- मैं तेरी गुलाम बन नहीं गई हूँ बल्कि तूने मुझे छोड़ छोड़ कर अपनी गुलाम बना लिया है. अब तू जल्दी से मेरे पास आजा. क्योंकि मैं ज्यादा दिन ये जुदाई बर्दास्त नहीं कर पाऊँगी.

मैं- ठीक है सविता. बहुत hi जल्द मैं आगरा आऊंगा. अच्छा अब फ़ोन रखता हूँ. फिर बात करेंगे.

उसके बाद मैंने मोबाइल बीएड पर रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा. कुछ देर बाद फिर से मश्ग टोन बजी तो मैंने मोबाइल देखा तो मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग था. मुझे मालूम था की ये आज दिन भर में जो कुछ भी हुवा है उसे बताने के लिए उतावली हो रही हैं लेकिन मैं सरिता दीदी को और तड़पना चाहता था. इसलिए मैंने कोई रपल्य नहीं दिया. कुछ देर बाद सरिता दीदी का मश्ग मेरे पास आया मैंने मश्ग रीड किया लेकिन कोई रपल्य नहीं दिया. और मोबाइल सिळान्त में कर दिया. मां पापा जल्दी छत पर नहीं आते थे वो भी सुबह सुबह इसलिए और मनीषा भी इतनी सुबह उठती नहीं थी तो मैंने अपनी लोअर और ुंडेरवेरे उतरी और सो गया.

सुबह मैं जल्दी से उठकर मैंने सविता दीदी की फोटो देखकर अपना लुंड खड़ा कर लिया और सरिता दीदी के आने का इंतेज़ार करने लगा, थोड़ी देर बाद मुझे किसी के आने की आहात हुई तो मैं लेकिन उस दिन मेरी किस्मत ख़राब थी जो सरिता दी नहीं बल्कि मनीषा कमरे में आ गई. अब मैं क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उठ भी नहीं सकता था. इसलिए मैं सोता बना रहा. मनीषा एक झटके में कमरे में आई और उसने मुझे बोलै.

मनीषा- भैया उठो मुझे कुछ……………………

बाकि से शब्द उसके मुंह में hi रही गए. उसकी नज़र सीधे मेरे खड़े लुंड पर पद गई. वो एकदम सोक होकर मेरे नंगे लुंड को देख रही थी. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद वो वापस जाने केलिए मुद गई. फिर बहार जाने से से पहले पीछे मुड़कर एकक नज़र फिर से मेरे लुंड को देखा और बहार चली गई और हलके से दरवाज़ा बंद कर लिया. बहार जाकर उसने जोर से आवाज़ लगाई.

मनीषा- भैया उठ जाओ. मुझे आपसे कुछ काम था. जल्दी निचे आओ.

इतना बोलकर वो निचे चली गई. मेरा खड़ा लुंड इस अप्रत्याशित घटना से बैठ गया. उसके जाने के बाद मैं तुरंत उठकर अपनी ुन्दरवरे, लोअर t-shirt पहन ली. मैंने क्या सोचा था और ये क्या हो गया. कहा तो मैं सरिता दीदी को अपना नंगा लुंड दिखाकर और तड़पना चाहता था और कहा इसे मनीषा ने देख लिया. अब पता नहीं उसका कैसा रिएक्शन होगा. अगर उसने मां पापा को बता दिया तो क्या होगा. फिर मैंने सोचा की मैं तो अपने कमरे में था. वही आई थी यहाँ. अभी मैं यही सब सोच रहा था की सरिता दीदी कमरे में एंटर हुई. अरे यार क्या बताऊ. सरिता दीदी छोड़ने के लिए इतनी बेताब थी की आज तो उन्होंने एकदम फिटिंग की केप्री पहनी हुई थी. जिसमे से दीदी के हरेक अंग का उतर चढाव पता चल रहा था. दीदी की चूचिया एकदम बहार पहाड़ को छोटी की तरह निकली हुई थी.



क्लीवेज तो नहीं दिख रहा था लेकिन चूचियों की घुंडीया साफ साफ नज़र आ रही थी. उनकी केप्री उनके घुटने तक थी लेकिन एकदम जांघो से चिपकी हुई थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया लेकिन मैंने खुद पर काबू किया और अपना मोबाइल उठाकर दीदी को इग्नोर करते हुवे बहार जाने लगा तो सरिता दीदी ने कहा.

सविता दी- कहा जा रहे हो अभी. मुझे एक्सेरसीज़े नहीं करवाओगे.

मैं- मैं बहार जार अहा हूँ मॉर्निंग वाक पर. कल जो एक्सेरसीज़े बताई थी वही कंटिन्यू करो आप.

सविता दी- लेकिन अभी तू रहता तो मेरी हेल्प हो जाती. जहा कही भी कुछ कमी रहती हो.

लेकिन मैं उनकी बात को सनटैन हुवा निचे चला गया और घर से बहार निकल गया. लगभग 7 बजे मैं बहार से घूमकर घर आया और अपने कमरे में चला gaya.waha पहुंच कर वह के हालत से पता चल गया की सरिता दीदी ने कसरत नहीं की और वैसे hi चली गई. थोड़ी देर बाद मैं फ्रेश होकर निचे आया तो मां पापा हॉल में hi बैठे थे. उनके साथ मनीषा भी बैठी थी. मैं भी जाकर वही बैठ गया और मनीषा की तरफ देखा. तो वो मुझे अजीब नज़रो से देख रही थी. लेकिन उसने मम्मी पापा से कुछ नहीं बताया था. मैंने महिषा को देखते हुवे पूछा.

मैं- हाँ मनीषा कहो क्या काम था जो मुझे सोते हुवे hi जगा दिया.

Manisha-(mammy पापा की मौजूदगी में बात बदलते हुवे) वो तो छत पर घूमने गई तो आपको आवाज़ देदी और कुछ नहीं.

थोड़ी देर में सरिता दीदी नाश्ता लेकर आ गई. सब ने मिलकर नाश्ता किया. नाश्ता करते हुवे मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. लेकिन जब मैंने मनीषा की तरफ देखा तो वो सरिता दीदी को देख रही थी. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है. लेकिन इतना तो समझ में आ गया था की मनीषा को कुछ न कुछ डाउट तो है. खैर नाश्ता करने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद सरिता दी कमरे की सफाई के लिए आई तो मैं उन्हें इग्नोर कर के निचे चला आया. और हॉल में बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा जॉब पर निकल गए तो मनीषा ने मुझसे कहा.

मनीषा- भैया मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

मैं- कुछ देर पहले तो तुमने बोलै था की कोई बात नहीं करनी. तो अभी क्या है.

मनीषा बात करते हुवे सोफे पर इस तरह से बैठ गई की मुझे उसकी गांड का एक part टाइट लेग्गी में नजर आने लगा. मैं उसकी गांड को एक नज़र देखा फिर उसकी तरफ देखने लगा. उसने भी मुझे अपनी गांड को देखते हुवे देख लिया था. तभी सरिता दीदी निचे आई तो मनीषा ने कहा की कहा.

मनीषा- भैया थोड़ी देर बाद मेरे कमरे में आइये तो बात करते हैं.

और इतना कहकर वो अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर बाद मैं उसके कमरे में गया तो मैं उसे देखता hi रह गया. वो कमरे में तैयार होकर बैठी थी. उनसे सलवार और शट पहना हुवा था जिसमे वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. उसने अपना दुपट्टा अपने गले में लिया हुवा था जिससे उसके गले उसकी चूचियों का कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था. मैं उसकी चूचियों को देखने लगा. उसकी चूचियों को देखते hi मेरा लुंड हरकत करने लगा. कुछ देर तक जब मैं उसकी चूचियों को hi देखता रहा तो उसने कहा.



मनीषा- क्या हुवा भैया कहा खो गए.

मैं- अरे महिषा तुम बहुत hi खूबसूरत लग रही हो.

मनीषा- वो तो मैं बचपन से hi हूँ.

मैं- लेकिन मैंने कभी तुम्हारी खूबसूरती पर ध्यान hi नहीं दिया था.

मनीषा- आपने तो हमेशा सविता दी और सरिता दी से hi चिपके रहते हो तो आपको कैसे पता चलेगा.

मैं उसकी बात सुनकर सोच में पद गया की आज इसको हो क्या गया है. कही इसने कुछ देख तो नहीं लिया. पिछले 2-3 दिन से इसके अंदर कुछ बदलाव आ गया है. फिर मैंने अपने दिमाग को झटका दिया और उससे पूछा.

मैं- क्या बात है. बड़ी तैयार शेयर हो कही जा रही हो क्या.

मनीषा- हाँ आज फिल्म देखने जा रही हूँ.

मैं- अरे वाह. दोस्तों के साथ जा रही हो.

मनीषा- नहीं आपके साथ जा रही हूँ. जाओ आप भी तैयार हो जाओ. फिर निकलते हैं.

मैं- अरे मुझे नहीं जाना फिल्म विलम देखने. तू चली जा.

मनीषा- (मुंह बनाकर) मैं जानती थी आप सिर्फ दोनों दीदी से hi प्यार करते हैं मुझसे तो आप प्यार hi नहीं करते. ठीक है मैं भी नहीं जा रही हूँ (और मुंह फुलाकर बैठ गई)

मैं- लो अब नाराज़ हो गई तुम. अच्छा ठीक है तुम रुको मैं तैयार होकर आता हूँ.

उसको बोलकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए आ गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-79

मनीषा- (मुंह बनाकर) मैं जानती थी आप सिर्फ दोनों दीदी से hi प्यार करते हैं मुझसे तो आप प्यार hi नहीं करते. ठीक है मैं भी नहीं जा रही हूँ (और मुंह फुलाकर बैठ गई)

मैं- लो अब नाराज़ हो गई तुम. अच्छा ठीक है तुम रुको मैं तैयार होकर आता हूँ.

उसको बोलकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए आ गया.

अब आगे.

मैं अपने कमरे में आकर अभी तैयार हो hi रहा था की मनीषा मेरे कमरे में आ गई. जिस समय वह कमरे में उसी समय मैं बाथरूम से सिर्फ चढी में आया था. मेरे आने पर वह उठकर जाने को हुई तो मैंने उसे बैठने के लिए बोल दिया. अब मुझे मनीषा के साथ भी थोड़ा खुलना था. इसलिए मैं उसके सामने hi कपडे पहनने लगा. वो एक तक मेरे मस्कुलर बॉडी को देखे जा रही थी. तो मैंने उससे पूछा.

मैं- क्या हुवा मनीषा ऐसे क्यों देख रही हो.

मनीषा- कसम से भैया क्या मस्त बॉडी बनाई हुई है आपने.

मैं- (मेरे मुंह से अचानक निकल gaya)Mast बॉडी तो तेरी भी है.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.

मनीषा- क्या भइया आप भी न मेरी तंग खींच रहे हैं.

मैं- नहीं मैं सच कह रहा हूँ. सच में तेरी भी बॉडी मस्त है.

इन बातो के दौरान मनीषा लगातार मेरी बॉडी hi देख रही थी. जब मैं तैयार हो गया तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- मेरा भाई तो बड़ा हैंडसम लग रहा है.

इतना कहकर वो मेरे गले लग गई उसके गले लगते hi उसकी तानी हुई चूचिया सीधे मेरे साइन में धंस गई. उसकी चूचियों के स्पर्श से मेरे बदन में एक सनसनी दौड़ गई तो मैंने भी उसे कसकर अपने साइन से चिपका लिया और उसकी पीठ पर हाँथ फेरने लगा. मुझे उसकी पीठ पर उसकी ब्रा स्पस्ट फील हो रही थी. फिर मैंने अपने हाँथ निचे लेजाकर अपने एक हाँथ को उसकी गांड पर ऐसे फिराया जैसे ये सब अनजाने में हुवा हो. और उससे बोलै.

मैं- अरे यार अब चलना भी है या इसी पॉश में फिल्म बनानी है.

मनीषा मेरी बात सुनकर वो मुझसे अलग हुई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.

मनीषा- थैंक यू भैया मेरे साथ फिल्म देखने जाने के लिया.

Main-(hanste हुवे) मैं नहीं जा रहा हूँ. मुझको ले जाया जा रहा है. अब चल और जाने से पहले सरिता दी को जाकर बता दो की हम दोनों बहार जा रहे हैं.

इतना बोलकर मैं घर से बहार निकल गया. थोड़ी देर बाद मनीषा भी बहार आ गई. तो मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और मनीषा दोनों तरफ पेअर करके बैठ गई और मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. थोड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा.

मैं- अच्छा ये बताओ मनीषा. आज तुम्हारा फिल्म देखने का प्लान कैसे बन गया.

मिनिषा- वो तो मैं आपके साथ तोडा वक्त गुजरना चाहती थी इसलिए फिल्म देखने का प्लान बनाया.

मैं- लेकिन मेरे साथ क्यों. तुम्हे तो अपने दोस्तों के साथ जाना चाहिए.

मनीषा- वो इसलिए की आप अब मुझको बिलकुल भी समय नहीं देते. हर समय या तो सविता दीदी के साथ या सरिता दीदी के साथ समय बिताते हो. आप तो मुझसे प्यार भी नहीं करते आप तो अपना सारा प्यार दोनों दीदी को hi देते हो. इसीलिए मैंने आज फिल्म देखने का प्लान बनाया है.

उसकी बात सुनकर तो मेरा दिमाग hi झन्ना गया और मैंने गाड़ी रोक दी. और उसकी तरफ देखने लगा. मुझे अब लगने लगा था की इसको जरूर कुछ न कुछ पता है. लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की अगर इसे कुछ पता है तो इसने मम्मी पापा को अभी तक क्यों नहीं बताया. फिर मैंने उससे कहा.

मैं- क्या मतलब है की सारा प्यार दोनों दीदी को दे रहा हूँ.

मनीषा- अरे भैया मेरे कहने का मतलब ये है की आप दोनों दीदी को ज्यादा प्यार करते हैं मेरे मुकाबले. अब गाड़ी चलाइये.

मैंने दोबारा से बाइक स्टार्ट कर दी और चल दिया. अब मनीषा मुझसे सत्कार बैठ गई जिससे उसकी चूचिया मेरी पीठ पर टकराने लगी. लेकिन मेरे ध्यान कही और था मैं इस सोच में गम था की हो न हो मनीषा कुछ न कुछ तो जरूर जानती है तभी तो कुछ दिन से इसका व्यव्हार कुछ बदला बदला लग रहा है. थोड़ी देर बाद मुझे उसने गाड़ी रोकने के लिए कहा. मैंने बाइक रोक दी और देखा तो थिएटर आ गया था. तो मैं और मनीषा बाइक पार्क करके टिकट लेने गए तो वह जुली-2 मूवी लगी हुई थी. तो मैंने उसे किसी दूसरी मूवी के लिए कहा. लेकिन वह नहीं मणि और यही मूवी देखनी है यही जिद करने लगी तो मैंने दो टिकट ली और थिएटर के अंदर आ गया.

थिएटर लगभग पूरा खली था बस इक्का दुक्का लोग hi थिएटर में बैठे थे वो भी सुप्ले. हम दोनों भी एक जगह बैठ गए. थोड़ी देर बाद फिल्म शुरू हो गई. फिल्म बहुत hi बोल्ड थी. कई जगह सेक्सी स्कीन थे. जिसे देखकर मैं गरम हो गया. मैंने मनीषा को देखा तो उसकी भी सांसे सामान्य से तेज़ चल रही थी. मैंने सोचा क्यों ने मनीषा के साथ भी तरय किया जाये. तो मैंने अपने एक हाँथ उसके गार्डन से घुमाकर उसके कंडे पर रख दिया. कंधे पर हाँथ रखने पर उसने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं और सामने देखते हुवे फिल्म देखने लगी.

मैं अपने हाँथ से उसके कंधे को सहलाने laga.thodi देर कंधे को सहलाने के बाद मैंने अपने हाँथ उसके कंधे से सरकते हुवे उसकी चूचियों की तरफ ले जाने लगा. जिससे मनीषा की शरीर में झुरझुरी दौड़ने लगी थी. थोड़ी देर में मैंने अपने हाँथ सरकते हुवे महिषा की चूचियों पर रख दिया और अपना दूसरा हाँथ उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाता रहा. थोड़ी देर तक उसकी जांघ और चुकी सहलाने के बाद मैंने उसकी चुकी को मुठी में भर लिया और जांघ को कपडे के ऊपर से मुट्ठी में लिया और दोनों को जोर से मसल दिया. मनीषा हलके से चीख पड़ी और मेरे दोनों हाँथ को झटक कर मुझको घूरने लगी. उसके इस बदले हुवे रूप को देखकर मैंने उससे पूछा.



मैं- क्या हुवा मनीषा.

मनीषा- मुझे आप सरिता दीदी या सविता दीदी न hi समझे तो ज्यादा अच्छा है आपके लिए.

उसकी बात सुनकर मुझे पक्का यकीं हो गया की इसको हम तीनो की रासलीला के बारे में सब पता चल गया है. ये जानकर तो मेरी हालत ख़राब हो गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो फिल्म नहीं बल्कि मुझे देख रही थी उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था. तो मैंने उसका हाँथ पकड़कर उसे बहार ले जाने लगा. वो भी चुपचाप मेरे साथ चल पड़ी. मैं उसे लेकर एक पार्क में गया और गाड़ी पार्क करके उसे अंडाल ले जाकर एक सुनसान जगह पर बैठ गया और मनीषा से कहा.

मैं- ये तुम वह क्या बोल रही थी.

मनीषा- मैंने क्या कहा. मैंने तो बस इतना hi कहा की जैसे अआप दोनों दीदियो के साथ छेड़खानी करते हैं वैसे मेरे साथ मत किया कीजिये. मुझे गुदगुदी होती है.

मैं- नहीं तुम कोई और बात कह रही थी. जो भी बात है साफ साफ कहो.

मनीषा- कोई बात नहीं है भैया. आप पता नहीं क्या क्या सोच रहे हो. मुझे गुदगुदी होती है इसलिए मैंने आपको मन किया.

मैं- पक्का कोई बात नहीं है न. अगर है तो अभी बता दे.

मनीषा- अरे मेरे बाप. कोई बात नहीं है. जो भी था बता तो दिया.

मैं- लेकिन तुम गुस्सा किस बात पर हो गाइट hi.

मनीषा- क्या कृ भैया आप मुझे गुदगुदी कर रहे था और मेरी जांघो को आपने दबा दिया. जिससे मुझे दर्द हुवा इसलिए थोड़ा गुस्सा आ गया. बस.

मैं- अच्छा चल घर चलते हैं. तूने बहुत बेकार मूवी सेलेक्ट की देखने के लिए.

मनीषा- हां भैया फिल्म वाकई बहुत ख़राब थी. वो दोस्तों ने कहा अच्छी है इसलिए देखने के लिए आई.

मैं- चल फिर अब घर चलते हैं.

उसके बाद हम दोनों घर वापस आ गए. उस दिन और कुछ खास नहीं हुवा. हम को मां पापा जॉब से घर आ गए. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी भी आ गई और मैदान में चलने के लिए बोली. लेकिन मैंने बहाना बनाकर मन कर दिया. जिससे उनका चेहरा उतर गया. फिर रात के खाने की तयारी होने लगी. खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद मेरे व्हाट्सअप पर सविता दीदी का मश्ग आया. दीदी से दिन में फ़ोन पर बात हो गयी थी इसलिए अब वत्स अप्प से बात शुरू हो गयी थी.

सविता दी- ही अभी.

मैं- ही सविता डार्लिंग.

सविता दी- कैसा है तू

मैं- मैं ठीक हूँ. तुम कैसी हो.

सविता दी- ठीक hi हूँ. और घर में सब कैसे हैं.

मैं- सब ठीक हैं. क्या कर रही हो तुम.

सविता दी- कुछ नहीं बस सोने की तयारी कर रही हूँ.

Main-(shararat से)- क्यों जीजा के साथ चुदाई नहीं करनी है क्या.

सविता दी- वो हो गई और वो सो भी गए.

मैं- अच्छा. एक अच्छी सी फोटो भेजो अपनी. बड़ी जल्दी सो गए. कितने बजे शुरू हो गए थे.

दीदी ने अपनी एक बहुत hi सुन्दर सी फोटो सलवार कमीज़ में भेजी. दीदी उस फोटो में बहुत प्यारी लग रही थी. उनकी चूचियों का ऊपरी भाग थोड़ा थोड़ा नज़र आ रहा था.



सविता दी- कितने बजे क्या. अभी 15 मिनट पहले शुरू किया था. इतनी देर में इनका काम तमाम हो गया.

मैं- 15 मिनट में तुम्हारी प्यास कैसे बुझी होगी. तुम्हे तो काम से काम 1 घंटा रगड़ के चुदाई चाहिए. तब तुम्हारी प्यास बुझेगी. इसीलिए तुम बहुत छुडासी रहती हो.

सविता दी- तू फिर से शुरू हो गया. कभी तो ढंग से बात कर लिया कर.

मैं- देखो सविता मैं तो ऐसे hi बात करूँगा. और तुमको करना है बात या नहीं ये तुम डीडे करो. और एक सेक्सी और हॉट सी फोटो भेजो. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो जाये.

सविता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है तू कभी नहीं सुधर सकता.

इतना कहकर दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे दीदी की शट से उनकी चुकी का एक निप्पल दिख रहा था. उस फोटो को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया.



मैं- वह सविता डार्लिंग. क्या फोटो भेजी है तुमने एकदम हॉट. मेरा तो खड़ा हो गया. और बताओ जीजा ने तुम्हारी प्यास बुझाई ठीक से या नहीं.

सविता दी- तेरा से छोड़ने के बाद अब तो पता hi नहीं चला मुझे की कब इनका हथियार अंदर गया और कब बहार आया. तूने इनके काबिल hi नहीं छोड़ा.

मैं- जीजा को कुछ आता hi नहीं की अपनी बीबी को कैसे छोड़ते हैं. तेरी छूट तो ऐसी है की उसमे दिन रत लुंड डालकर पड़ा रहना चाहिए.

सविता दी- चुप बदमाश. बहन हूँ मैं तेरी.

मैं- अच्छा सविता ब्रा में अपनी फोटो भेजो न. बड़ा मन कर रहा है तुम्हारी चूचिया देखने का.

सविता दी- तू तो बड़ा कमीना है. अपनी दीदी को बोल रहा है की अपनी चूचिया दिखा दे. शर्म कर.

मैं- अब ज्यादा नखरा मत दिखाओ यार फोटो भेजो न.

सविता दी- तू मैंने वाला तो है नहीं. अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो ब्रा में भेजी. दीदी एकदम सज संवर कर अपनी फोटो भेज रही थी. आँखों में काजल. गलो पर हलकी लाली. होंठो पर लाल लिपस्टिक. दीदी फोटो में बहुत hi कामुक लग रही थी. मैंने दीदी से फिर कहा.



मैं- सविता ब्रा में अपनी चूचियों को बहार करके कोई फोटो भेजो बड़ा मन कर रहा है देखने का.

मेरे कहने पर सविता दीदी ने एक फोटो भेजी जिसमे उनकी दोनों घुंडीया ब्रा से बहार निकली हुई थी. मेरा लुंड दीदी का ये रूप देखकर झटके मरने लगा. मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या बात है सविता सच में तेरी चूचियों का कोई जवाब नहीं. एकदम ृषभरी और कदम चूचिया हैं तुम्हारी. एक और फोटो भेजो एकदम ऐडा के साथ.

मेरे कहने के कुछ देर बाद hi दीदी ने एक और फोटो भेजी. ये फोटो तो पिछली वाली फोटो से भी ज्यादा सेक्सी थी. इस फोटो में भी दीदी की दोनों घुंडीया ब्रा से बहार थी लेकिन दीदी ने एक ऐडा के साथ ये फोटो भेजी थी. जिसमे वो अपना मुंह गोल करके मुझे चिढ़ा रही थी. मेरा लुंड तो झटके खाने लगा था.



उनकी फोटो देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है सविता. इन दोनों फोटो में तू एकदम रंडी लग रही है. जैसे रंडिया सजती हैं अपने ग्राहकों को रिझाने के लिए. ठीक उसी तरह तेरी फोटो मुझे रिझा रही है. सच में तू किसी रंडी से काम नहीं है. काश मैं वह होता तो तेरी चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर इसका सारा राश पि गया होता. एक और फोटो भेज न वो भी बिना ब्रा के.

सविता दी- बस अब बहुत हो गया. अब कुछ नहीं मिलेगा देखने को. तू फोटो देखकर गन्दी गन्दी बाते करने लगता है. अब मैं नहीं भेजने वाली कोई फोटो वोटो.

मैं- अच्छा सॉरी सविता डार्लिंग. लेकिन मैं क्या करू. तू सच में वैसी hi लग रही है उन फोटो में. अच्छा बस एक फोटो लास्ट और भेज दो.

उसके बात दीदी ने अपनी एक बिना ब्रा की फोटो भेजी. लेकिन ये फोटो उतनी अच्छी नहीं लगी मुझे जितनी अच्छी इसके पहले की दो फोटो थी. मैंने दीदी से कहा.



मैं- तुम्हारी फोटो देखकर अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मैं बहुत जल्दी आने वाला हूँ तुम्हारे पास दीदी.

सविता दी- मैं इंतज़ार करुँगी पता नहीं वो दिन कब आएगा. अच्छा अब तू सो जा. गुड़ नाईट.

उसके बाए मैंने मोबाइल साइड में रख दिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-80

अभी मुझे मोबाइल रखे थोड़ी hi देर हुई थी की मेरे no. पर सरिता दीदी का फ़ोन आ गया. मैंने फ़ोन रिसीव किया तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- ये क्या है अभी तू मुझसे दूर दूर क्यों भाग रहा है. मुझसे ठीक से बात भी नहीं कर रहा है.

मैं- नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है. बस थोड़ा व्यस्त हूँ और कुछ नहीं. अच्छा फ़ोन रखो मुझे सोना है.

इतना बोलकर मैंने फ़ोन रख दिया. कुछ देर बाद दीदी ने फिर फ़ोन किया लेकिन मैंने नहीं उठाया और मोबाइल साइलेंट में कर दिया. थोड़ी देर बाद दीदी का मश्ग मीरा वाली ईद पर आया. लेकिन मैंने उसका भी रपल्य नहीं किया. मेरे ऐसे इग्नोर करने से दीदी को अच्छा नहीं लग रहा था. लेकिन मैंने अभी उनको इग्नोर करना hi ठीक समझा. मैंने अपना मोबाइल साइड में रखा और सो गया.

सुबह मैं अपने समय से उठा और जिम करने लगा. कुछ देर बाद सरिता दीदी कमरे में आ गई. मैंने उनसे कोई बात नहीं की और बहार आने लगा तो दीदी ने कहा.’

सरिता दी- कहा जा रहा है अभी. मुझे प्रैक्टिस तो करवा.

मैं- मैं जा रहा हूँ मॉर्निंग वाक पर. आपको जो वर्कआउट बताया था वही करिये आप.

इतना बोलकर मैं निचे चला गया. मेरे इग्नोर करने से दीदी का चेहरा एकदम उदास हो गया था. मैं बहार जाकर 1 घंटे बाद वापस आया और अपने कमरे में चला गया. नास्ते के समय निचे आया और मां पापा के साथ मिलकर नाश्ता किया और मम्मी पापा जॉब पर चले गए तो मैं भी बहार जाने के लिया रेडी होने लगा तभी सरिता दीदी सफाई के लिए कमरे में आई. तो मैं बहार जाने लगा तो उन्होंने मेरा हाँथ पकड़ लिया और एकदम धीमे आवाज़ में बोली.

सरिता दी- क्या हुवा अभी तू मुझसे नाराज़ है. मुझसे कोई गलती हुई है क्या.

मैं- नहीं मैं आपसे क्यों नाराज़ होऊंगा. आपसे कोई गलती नहीं हुई है. गलती तो मुझसे हुई है.

सरिता दी- तो तू मुझद ऐसे इग्नोर क्यों कर रहा है.

मैं- मैं कहा इग्नोर कर रहा हूँ. बस मुझे कुछ काम है इसलिए मैंबाहर जार अहा हूँ.

इतना कहकर मैं बिना उनकी बात सुने बहार चला गया. मैं अपने काम पर गया और कुछ देर में काम समेत कर वापस घर आ गया और अपने कमरे में बैठकर काम करने लगा. जब मैं अपना काम पूरा कर चुक्का तो मैं बाथरूम में चला गया. लगभग 15 मिनट बाद जब मैं कमरे में पंहुचा तो मनीषा कमरे में बैठी हुई थी. मैंने उससे आने का करना पूछा तो उसने कहा.

मैं- हाँ मनीषा कुछ काम था.

मनीषा- हां भैया वो क्या है न मेरी कमर में बहुत दर्द हो रहा है. मैं सोने की कोशिश कर रही हूँ पर नींद नहीं आ रही है.

मैं- अच्छा चल मैं तुझे डॉक्टर के पास लेकर चलता हूँ.

मनीषा- नहीं भाइये मैं डॉक्टर के पास नहीं जाउंगी. मुझे सुई से बहुत दर लगता है.

मैं- जब डॉक्टर के पास नहीं जाएगी तो तेरा कमर दर्द कैसे ठीक होगा.

मनीषा- वो ठीक हो जाएगा अगर आप मेरी कमर की मालिश कर दे तो.

मैं- मैं कैसे कर सकता हूँ. सरिता दीदी से बोल दे वो कर देंगी.

मनीषा- वो तो सो रही हैं. प्ल्ज़ भैया मालिश कर दो न.

मैं- तू समझ नहीं रही है. में तुझे मालिश कैसे करू. तू मेरी बहन है.

Manisha-mujhe आप सच में प्यार नहीं करते. दोनों दीदियो की सेवा के लिए तो आप हमेशा तैयार रहते हैं. लेकिन मेरी मालिश नहीं कर सकते.

मनीषा का बात बात पर सविता दीदी और सरिता दीदी को बिच में लाना मुझे खटक रहा था. कुछ न कुछ तो था. जो इसको पता था. लेकिन क्या ये पता नहीं था. मुझे सोच में डूबा देखकर उसने कहा.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप मेरी मालिश करेंगे न.

मैं- अच्छा मेरी माँ. चल मैं आता हूँ तेरे कमरे में.

मनीषा- नहीं भैया मैं यही आती हूँ तेल लेकर आपके कमरे में.

इतना बोलकर वो अपनी गांड मटकती निचे चली गई. थोड़ी देर बाद वो वापस आई तो उसने कपडे बदल लिए थे. उसने अपनी 2 साल पहले जो t-shirt तीते होने के कारन पहनना छोड़ दी थी वो पहनकर आई थी. जिसमे से उसकी चूचिया बहार की और t-shirt फाड़कर निकलने के लिए तैयार थी. निचे उसने लेग्गी पहना था जो एकदम उसकी टैंगो से चिपका हुवा था. मैं तो बस उसकी चूचियों को हे देखता रहा. और कुछ देर बाद कहा.



मैं- ये क्या पहनकर आई हो. इसमें कैसे मालिश होगी. जाओ कोई लूसे कपड़ा पहनकर आओ.

मनीषा- नहीं भैया ये कपडा पुराण है तो इसमें तेल लग भी जाएगा तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी दूसरे कपडे तेल लगने से ख़राब भी हो सकते हैं.

इतना कहकर वो मेरे बिस्टेर पर पेट के बल लेट गई. उसके लेटने से उसकी बड़ी बड़ी गांड ऊपर की तरफ निकल आई थी. मैं अब उसकी गांड को देखने लगा. थोड़ी देर तक उसकी गांड को देखने के बाद मैं भी उसकी गांड के पास बैठ गया और अनजान बनते हुवे उसकी गांड पर अपना हाँथ रख दिया और उसके बोलै.

Main-kya तुझे बहुत दर्द हो रहा है. अगर ज्यादा दर्द न हो रहा हो तो बाद में दीदी या मम्मी से मालिश करवा लेना.

मेंशा- नहीं भैया बहुत दर्द हो रहा है. आप hi कर दीजिये न मालिश.

मेरा हाँथ उसकी गांड पर था लेकिन अभी तक उसने हाँथ हटाने के लिए नहीं कहा था. ये देखकर मेरा हौसला बढ़ा और मैं एक हाँथ से उसकी गांड सहलाने लगा और दूसरे हाँथ से उसकी t-shirt कमर से ऊपर करने लगा. थोड़ी देर मैं ऐसे hi उसकी गांड को सहलाता रहा फिर अपना हाँथ उसकी गांड से उठा लिया. फिर मैंने कटोरी उठाई और उसकी कमर पर तेल लगाने लगा. तेल लगते हुवे मैंने उससे थोड़ा खुलकर बात करने की सोची इसलिए मैंने उससे कहा.’

मैं- और बताओ मनीषा तुम्हारी पढाई कैसी चल रही है.

मनीषा- अच्छी चल रही है भैया.

मैं- अच्छा ये बताओ. सोल्लगे सिर्फ पढ़ने के लिए hi जाती हो या थोड़ी मौजमस्ती भी करती हो.

मनीषा- नहीं भैया. मैंने सोल्लगे सिर्फ पढ़ने के लिए hi जाती हूँ.

मैं- अच्छी बात है. अच्छा ये बताओ कोई बर्फ बनाया अभी तक या नहीं.

मनीषा- क्या भैया. मैं आपको ऐसी देखती हूँ जो बर्फ बनती फिरू.

मैं- अरे नहीं मनीषा. मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था. अच्छा ये t-shirt तुम्हारे पेट के निचे फांसी हुई है इसको थोड़ा ऊपर करो तभी तो ठीक से मालिश करूँगा.

मेरे ऐसा कहने पर मनीषा ने अपने t-shirt पेट उठाकर अपनी चूचियों तक कर ली और फिर लेट गई. मैंने फिर उसके t-sirt को उसकी पीठ पर बंधी ब्रा की पत्तियों तक खिसका दिया और मालिश करने लगा. मनीषा का शरीर गोरा था. उसकी पीठ एकदम साफ थी. कोई दाग कोई टिल का नामोनिशान नहीं था. मैंने उसकी पीठ की मालिश करता हुवा गरम होने laga.fir मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मैं- तुमने बताया नहीं मनीषा की तुम्हारा कोई बर्फ है या नहीं है.

मनीषा- मेरा कोई बर्फ नहीं है भैया.

मैं- मैं मान hi नहीं सकता की तुम्हारा कोई बर्फ नहीं है. तुम झूठ बोल रही हो.

मनीषा- नहीं भैया मई सच बोल रही हूँ. कसम से मेरा कोई बर्फ नहीं है.

मैं- विश्वास नहीं होता मनीषा की तुम्हरी जैसी खूबसूरत लड़की का कोई बर्फ नहीं है.

मनीषा- (अपनी तारीफ सुनकर सहरमाने लगी) सच में नहीं है. अच्छा आप बताइये आप को तो 2-4 गफ जरूर होंगी.

मैं- कहा मनीषा. मेरी भी कोई गफ नहीं है.

मनीषा- लेकिन मुझे तो ऐसा नहीं लगता.

मैं- क्यों तुझे फिर कैसा लगता है.

मनीषा- मुझे तो लगता है की आपकी 2 गफ हैं.

उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग फिर सरिता दीदी और सविता दीदी की तरफ चला गया. ये मनीषा कुछ तो जानती है. इसलिलिये ये बात बात तो उन्ही तरफ इशारा करती है. लेकिन अभी मैं षुरे नहीं था इसलिए मैंने कहा.

मैं- अच्छा मनीषा अगर तू कहे तो मैंने तेरे पुरे पीठ की मालिश कर दूँ.

मनीषा- नहीं भैया. बस कमर की hi कर दो.

मैं- देख मनीषा मैं बहुत अच्छी मालिश करता हूँ. मैं तेरे पुरे शरीर का दर्द मिटा दूंगा. एक बार मुझे मालिश तो करने दे.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कुछ देर सोचा फिर कहा.

मनीषा- ठीक है भैया. अब आप इतना कह रहे हैं तो कर दीजिए मालिश.

मैं- लेकिन उसके लिए तुझे अपनी t-shirt और ऊपर करनी पड़ेगी.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी तरफ देखा और फिर पेट उठाकर अपनी t-shirt आगे से चूचियों से उठाकर गले तक कर ली. जिससे साइड से उसकी चूचिया ब्रा में दिखने लगी. मैं भी अब थोड़ा थोड़ा गरम होने लगा. मेरा लुंड तो पहले से hi खड़ा हो चुक्का था. मैंने ाहिष्ता से मनीषा की t-shirt सरकते हुवे उसकी गार्डन तक कर दिया. अब मनीषा की पीठ एकदम नंगी मेरे सामने थी जिसपर ब्रा की पत्तिया नजर आ रही थी.



फिर मैंने अपने हांथो में तेल लिया और उसकी पीठ की मालिश करने लगा. उसकी पीठ की मालिश करते समय जब मेरा हाँथ उसकी ब्रा की पत्तियों को छूटा तो उसके शरीर में एक सनसनी सी दौड़ जाती.

मनीषा की साँस भी अब भरी हो रही थी. वो भी अब गरम हो रही थी. थोड़ी देर तक उसकी पीठ की मालिश करने के बाद मैंने उससे कहा.

मैं- मनीषा बगल से बैठकर ठिक्क से तुम्हारी पीठ की मालिश नहीं कर प् रहा हूँ. अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे पेअर पर बैठ कर तुम्हारी पीठ की मालिश कर दूँ.

मनीषा जो अब तक इस मालिश के कारन गरम हो गई थी. उसकी तेज़ सांसे मुझे साफ सुनाई पद रही थी. उसने काना.

मनीषा- ठीक है बैठ जाइये. लेकिन अपना पूरा वजन मत रखना नहीं तो मेरे पेअर टूट जाएंगे.

उसकी बात सुनकर मैं उसके दोनों तरफ पेअर करके उसकी जांघो पर बैठ गया. और उसकी मालिश करने लगा. मैंने पहले उसकी कमर की मालिश की. उसके बाद धीरे धीरे ऊपर की तरफ मालिश करने लगा. पीठ की मालिश करने के लिए मुझे थड़ा झुकना पड़ता था जीसस मेरे खड़ा लुंड उसकी गांड पर चुभ रहा था. मनीषा को भी मेरे लुंड की चुभन अपने गांड पर महसूस हो रही थी. तभी तो उसने 4-5 बार अपनी गांड हिला कर मेरे लुंड को अपनी गांड से टच होने से रोका. लेकिन जब वो रोक नहीं पाई तो उसने अपनी उखड़ी सांसो को दुरुस्त करते हुवे मुझसे कहा.

मनीषा- भैया ुतो मेरे ऊपर से. मुझे आने दबा रखा है बहुत दर्द हो रहा है.

मैं- लेकिन अभी मालिश नहीं हो पाई है पूरी.

मनीषा (थोड़ा गुस्से में). उठो भैया. यहाँ मेरा डैम घुट रहा है और आपको मालिश की पड़ी है.

मनीषा के गुस्सा करने पर मैं उसके ऊपर से उठ गया. लेकिन मेरे उठ जाने से मेरा खड़ा लुंड लोअर में साफ़ दिख रहा था. मनीषा भी अपनी t-shirt को निचे करने के बाद बिस्टेर पर बैठ गई. लेकिन उसके बैठते hi उसकी नजर मेरे लुंड पर पड़ी तो वो जैसे मन्त्र मुग्ध होकर उसे देखने लगी. मैं भी कभी मनीषा को देखता तो कभी अपने लुंड को. जब मनीषा ने भरपूर दीदार मेरे लैंड का कर लिया तो उसने कहा.

मनीषा- आप कितने गंदे हो भैया. मुझे मर डालने का इरादा था क्या. मैंने आपको कहा था की पूरा वजन मत डालना. लेकिन आप तो मेरे ऊपर बैठ गए. आपको पता है मुझे कितना दर्द हुवा था यहाँ पर.

इतना कहकर वो अपनी गांड को सहलाने लगी और मेरी तरफ देखने लगी. उसने ये बात इतनी मासूमियत से बोली थी की मैं फिर से कंफ्यूज हो गया और मनीषा में आये इस बदलाव को मैं समझ नहीं पाया. वो देखने में इतनी मासूम थी की कोई कह नहीं सकता था की वो चुदाई चूसै के बार में कुछ जानती होगी. लेकिन उसकी कुछ दिन की हरकतों के कारन मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये मेरी सोच का धोखा है या सच में उसे कुछ पता है

Main-Are सॉरी मनीषा मैंने जानबूझकर ये सब नहीं किया वो मेरे पेअर दर्द होने लगा था इसलिए मैंने थोड़ा वजन दाल दिया था तुम्हारे ऊपर.

मनीषा- हाँ भैया आपसे सरे काम गलती से hi हो जाते हैं. आप कुछ जानबूझकर करते hi कहा हैं.

ये बात उसने फिर से बड़ी मासूमियत से बोली थी. उसकी बात सुनकर मैं उसकी आँखों में देखने लगा और कुछ पढ़ने की कोशिश करने लगा. लेकिन मुझे उसकी आँखों में बस मासूमियत hi नज़र आई लेकिनउसकी कही गई बात सुनकर मैं फिर से कंफ्यूज हो गया. क्योंकि ये बात तो सविता दीदी ने मुझसे कई बार कही थी. तो मनीषा ऐसी बात क्यों बोल रही है. मेरे दिमाग में अब उथल पुथल मची हुई थी. मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. तभी मनीषा की बात से मेरी तन्द्रा टूटी.

मनीषा- अच्छा भैया मैं जा रही हूँ. थैंक यू भैया. इतनी अच्छी मालिश करने के लिए.

मैं- कोई बात नहीं मनीषा. ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

ये सुनकर मनीषा बहार जाने लगी. तो मैं भी दरवाज़े के पास आकर खड़ा हो गया. जब मनीषा निचे उतर गई तो उसने पलटकर मुझे देखा और एक स्माइल देकर अपने कमरे में चली गई.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-81

मनीषा- अच्छा भैया मैं जा रही हूँ. थैंक यू भैया. इतनी अच्छी मालिश करने के लिए.

मैं- कोई बात नहीं मनीषा. ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

ये सुनकर मनीषा बहार जाने लगी. तो मैं भी दरवाज़े के पास आकर खड़ा हो गया. जब मनीषा निचे उतर गई तो उसने पलटकर मुझे देखा और एक स्माइल देकर अपने कमरे में चली गई.

अब आगे.

मनीषा के जाने के बाद मैंने अपने दिमाग को रिलैक्स करने के लिए सोना hi बेहतर समझा. इसलिए मैं सो गया. जब मैं सोकर उठा तो मम्मी पापा घर आ चुके the.main भी फ्रेस होकर निचे आ गया था. आज सरिता दीदी को इग्नोर करते हुवे मुझे 3 दिन हो चुके थे. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी आई और मैदान में चलने के लिए कहने लगी तो मैंने मन कर दिया की मेरा मूड नहीं है तो सरिता दीदी पापा से शिकायत लगाने लगी.

सरिता दी- पापा देखो अभी 3 दिन हो गए हैं न तो मुझे जिम की एक्सेरसीज़े करवा रहा है और न hi कार चलना सीखा रहा है.

पापा- क्यों अभी तुम्हारी दीदी ये क्या बोल रही है.

मैं- हां पापा अब मैं इनको कुछ नहीं सिखाऊंगा.

पापा- लेकिन क्यों नहीं सिखाएगा. जब वो सीखना चाहती है तो तू क्यों मन कर रहा है.

मैं- तो और क्या करू पापा. दीदी मेरी बात मानती hi नहीं है. ऊपर से ये मुझे hi सीखने लगती हैं. जब मैं बताता हूँ की इसे ऐसे करो. वो ये करती hi नहीं हैं. जब मैं इनसे पूछता हूँ की मेरे साथ एक्सेरसीज़े करना अच्छा लग रहा है. आप मुझे सुपरटे करो तो ये कोई जवाब hi नहीं देती. जब कार सिखाते समय इनको बताता हूँ की कैसे चलनी है. क्लुछ एक्सेलेटर कैसे उसे करना है तो ये उसपर ध्यान hi नहीं देती. तो मैं इन्हे क्यों सिखौ. जब ये मेरे साथ सुपरटे नहीं करेंगी तब तक मैं इन्हे कैसे सिखाऊंगा

पापा- क्यों सरिता अभी ये क्या बोल रहा है.

सरिता दी- नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है.

मैं- पापा आप दीदी को बोल दीजिये की जब तक ये मेरी बात नहीं मानती और मुझे सूपरस्त नहीं करती तब तक मैं इन्हे कुछ नहीं सिखाऊंगा.

पापा- अभी ठीक hi तो कह रहा है. जब तुम उसको किसी काम में सुपरटे hi नहीं करोगी तब तक ये तुम्हे कैसे सिखाएगा.

थोड़ी देर तक जब दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने फिर से कहा.

मैं- देखा पापा जब आप कह रहे है तब भी ये कोई जवाब नहीं दे रही हैं. तो सोचिये में तो इनसे छोटा हूँ तो ये मेरी बात कितना सुनेंगी, कितना मानेंगे और जवाब देंगी.

पापा- ठीक है. रहने दो फिरर शायद अभी उसका मन नहीं है तो फालतू का टाइम वेस्ट मत करो. जब उसे सिखने होगा तो खुद hi तुझसे बोल देगी.

इतना कहकर पापा अपने कमरे में चले गया. तो मैं भी अपने कमरे में चला गया. दीदी और मनीषा रत के खाने की तयारी करने लगे. थोड़ी देर बाद मैं भी निचे आ गया. सब लोग खाना खाने के लिए बैठ गए और खाना खाने लगे. मैंने खाना कहते समय सरिता दीदी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. जब मनीषा को देखा तो वो खाना खाने में व्यस्त थी और कभी कभी मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी. खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया बिस्टेर पर लेटकर सविता दीदी से फ़ोन पर बात करने लगा. थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने उन्हें गुड नाईट बोलकर फ़ोन रख दिया और एक किताब निकलकर पढ़ने लगा. थोड़ी देर बाद मुझे मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग आया तो आज मैंने बात करने की सोची और उन्हें रपल्य किया.

म- ही

सरिता दी- ही की बच्ची. इतने दिन कहा थी. मुझसे मन भर गया है क्या तुम्हारा जो अब बात नहीं करना चाहती हो.

म- अरे अरे रुको तो मेरी बात तो सुन लो. आते hi शुरू हो गई.

सरिता दी- हां बोलो क्या बात थी जो मुझसे बात नहीं कर रही थी.

म- अरे यार मां पापा तीन दिन के लिए बहार गए थे तो घर में मैं और भाई hi थे. तो तुम समझ सकती हो. इसलिए बात नहीं की.

सरिता दी- अरे यार थोड़ी देर समय नीलालकर बात तो कर सकती थी न.

म- अरे यार तुम समझ नहीं रही हो. भाई ने इन तीन दिनों में छोड़ छोड़ कर मेरी कचूमर निकल दिया. 3 दिन न वो घर से बहार गया और न मुझे जाने दिया. पुरे तीन दिन हम दोने नंगे hi रहे. घर का कोई भी ऐसा कोना नहीं बचा जहा उसने मुझे कुटिया की तरह न छोड़ा हो. बहुत मज़ा आया. लाइफ में ऐसा मौका पहली बार मिला था इसलिए मैं भी ये मौका हाँथ से नहीं जाने देना चाहती थी. इसलिए तीन दिन तक no टॉक ओनली चुदाई. लेकिन तुम्हे क्या हुवा. तुम मुझपर इतनी भड़क क्यों रही हो. सब ठीक तो है न.

सरिता दी- क्या खाक ठीक है. कुछ भी ठीक नहीं है मेरे साथ.

म- क्यों क्या हो गया मुझे भी तो बताओ

सरिता दी- अरे यार भाई मुझसे नाराज़ हो गया है. तीन दिन से ठीक से बायत नहीं कर रहा है.

म- आखिर ऐसा क्या हुवा जो उसने बात बंद कर दी तुमसे.

फिर सरिता दी ने पूरी कहानी बता दी. जिसे सुनाने के बाद मैंने कहा.

म- मैंने कहा था तुमसे की अगर चुदाई का मज़ा लेना है तो खुलकर अपने भाई का साथ दो. लेकिन तुमने मेरी बात नहीं माहि. तो अब क्यों परेशां हो रही हो. तुम भी तो यही चाहती थी.

सरिता दी- अरे यार मुझे थोड़ी पता था की वो नाराज़ हो जाएगा. तुम्हे पता नहीं है की इन तीन दिनों में मेरी क्या हालत हो गई है. एक एक पल काटना कितना मुश्किल भरा रहा मेरे लिए.

म- अच्छा इतना पसंद आ गया तुमको तुम्हारा भाई की उसके बिना तुम्हारा समय नहीं काट रहा है.

सरिता दी- हाँ यार 3 दिन से उसने मेरे जिस्म को हाँथ तक नहीं लगाया. मेरा जिस्म उसकी छुवन के लिए तरस रहा hai.main कितनी बार उसके सामने गई. की वो मुझे छुवे. मुझे सहलाये. मेरे अंगो को सहलाये. इनके साथ खेले. लेकिन उसने मुझे छूना तो दूर सीधे मुंह बात नहीं की.

म- लेकिन अब तो वो नाराज़ हो गया है. तुम उसे छोड़ दो और किसी दूसरे को पटाने की कोशिश करो.

सरिता दी- तुम ये कैसी बाते कर रही हो. मुझे अब अपने भाई से hi छोड़ना है. अगर वो मुझसे नाराज़ न हुवा होता तो अब तक मैं उससे छुड़वा भी लेती. मुझे उसका लुंड अपनी छूट में लेना है किसी भी कीमत पर. उसने मुझपर पता नहीं कैसा जादू कर दिया है की अब मेरा तन और मन उसका हो गया है.

म- लेकिन तुम्हारा भाई को तो गन्दी चुदाई पसंद है और तुम्हे तो गन्दी चुदाई पसंद hi नहीं है. अगर वो चुदाई के टाइम गली देने लगा. तुम्हारी गांड और चूचियों पर थप्पड़ मरने लगा तो तुम क्या करोगी.

सरिता दी- मुझे बस उससे छुड़वाना है. उसका जैसे मन करे मुझे वैसे चोदे. गली देखर चोदे, मार मार कर चोदे. लेकिन मुझे चोदे. मेरा शरीर जल रहा है. अब मुझसे अपने जिस्म की प्यास बर्दास्त नहीं होती. तू कुछ उपाय बता न. मैं उसे कैसे मनौ.

दीदी ऐसी गन्दी गन्दी बाते करके एकदम गरम हो गई थी इसलिए मैंने सोचा की आज दीदी को एकदम खोलकर रख दू. ताकि मैं जैसा चहु वैसा दीदी को छोड़ पाउ. तो मैंने दीदी से कहा.

म- चलो थोड़ा सा कुछ रोमांटिक सा गेम खेलते हैं. मैं तुम्हारे बारे में अनुमान लगाती हूँ. और तुम्हे मज़ा करवाती हूँ. तुम मान लो की तुम किसी की दुल्हन बन चुकी हो. लेकिन तुम्हारे पति तुमपर काम और अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते हैं. और उनका लुंड छोटा सा है. जस्ट िमागिन फॉर फन

सरिता दीदी- कैसा मज़ा और किसकी दुल्हन. तुम क्या करने वाली हो.

म- बस देखती जाओ तुम मेरा साथ खुलकर देती जाना तुम्हे बहुत मज़ा आएगा. विश्वास करो.

सरिता दी- ठीक है मैं तुम्हारा पूरा साथ दूंगी.

म- ोकक तुम्हारी उम्र के हिसाब से मेरे मन में तुम्हारी एक तस्वीर बन रही है.

सरिता दी- कैसी तस्वीर बन रही है.

म- मेरे हिसाब से आपके काळा घने लम्बे बाल होंगे. जिसकी महक किसी गुलाब के फूल से काम नै होगी. ये जब उड़ते होंगे तो ऐसा लगता होगा जैसे आसमान में काली घटा छ गई है.

सरिता दीदी मीरा की अपने काल्पनिक छवि की तारीफ सुनकर बोली.

सरिता दी- अच्छा और कुछ.

म- तुम्हारे चेहरे का नूर. तुम्हारी पूरी मांग में हल्का हल्का सिन्दूर, तुम्हारे माथे पर चाँद सितारों की तरह चमकती बिंदी. और तुम्हारी कजरारी काली आँखे. जिनमे एक अलग तरह का नशा होगा किसी को भी घायल करने के लिए.

कोई भी लड़की अपनी तारीफ सुनकर खुश हो जाती है. मीरा से अपने लिए ऐसी तारीफ सुनकर सरिता दीदी के मन में गुदगुदी होने लगी. मेरी बातो का असर दीदी पर होने लगा. दीदी मुस्कुरा कर कहा.

सरिता दी- हाँ बात तो तुम ठीक कह रही हो. और आगे बताओ.

M-tumhare लरजते गुलाब की पंखुड़ियों जैसे रसीले होंठ. जिन्हे देखकर हर मर्द की ख्वाशीष इन रसीले होंठो के जैम पिने की होती होगी.

सरिता दी पर म की कामुक और सेक्सी बातो का असर दिखने लगा था. आज तक किसी ने भी उनकी इतनी तारीफ नहीं किट hi. वो चाहे लड़की hi क्यों न हो. म से अपनी इस तारीफ को सुनकर दीदी उन्मादित होने लगी थी. लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओ को छिपाते हुवे कहा.

सरिता दी- अरे यार मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ जितनी तुम तारीफ कर रही हो.

म- अभी तो मैंने तुम्हारी सुंदरता के बारे में ये तो एक ट्रेलर था. पूरी फिल्म तो अभी बाकी है अगर तुम कहो तो पूरा खुलकर और विस्तार से बताऊ.

सरिता di(apni तारीफ और सुनने के लिए) हाँ बताओ.

म- तुम आजकल जो कपडे पहनती हो उसका गाला बड़ा होता होगा. जिसमे से तुम्हारी जालिम चूचिया बहार निकलने के लिए बेताब रहती होंगी. जिससे तुम्हारी गोरी और ठोस चूचिया तुम्हे और ज्यादा सेक्सी और हॉट बनती होंगी.



सरिता दी वाकई ऐसी hi थी. एक अनजान लड़की जिससे वो कभी मिली भी नहीं थी. उसके मुंह से अपनी काल्पनिक तस्वीर की काल्पनिक तारीफ सुनकर वो हैरान थी की ये काल्पनिक तस्वीर हूबहू उसी की है. पर दीदी को नहीं पता था की जो उनके हुस्न की तारीफ कर रहा है उसकी सामने वो रोज अधनंगी घूमती रहती हैं. दीदी अपने हुस्न की तारीफ सुनकर गरम होने लगी और बोली.

सरिता दी- तुम तो मेरी तारीफ ऐसे कर रही हो. जो हकीकत है. और जैसे मैं तुम्हारे सामने कड़ी हूँ

म- अरे अभी कहाँ. अभी तो मैं तुम्हे कुछ ऐसी बाते भी बताऊंगा. जो सिर्फ तुमको hi पता होगी.

सरिता दी- अच्छा देखती हूँ. आगे बताइये.

M-achha पहले ये बताइये की तुम्हारी तारीफ कहाँ से सुरु करू. आगे से या पीछे से.

सरिता दी- जहा से करने का तुम्हारा मन करे.

म- यही सब बाते तुम्हे अपने भाई से भी बोलनी है की भाई तुम्हारा जहा से मन करे वह से करो.

सरिता दी- तुम अभी उसकी बात छोडो और आगे बताओ.

म- ठीक है फिर मैं आगे से शुरू करती हूँ. मुझे लगता है की ज्यादा तर तुम डीपनैक क्लॉथ hi उसे करती हो जो पीछे से भी डीप होता होगा. जिसमे से तुम्हारी गोरी मांसल चिकनी पीठ और कातिल दिखती होगी. जब किसी मर्द की नज़र तुम्हारी सेक्सी पीठ पर पड़ती होगी तो उसके मुंह से सिसकारी निकल जाती होगी और वो अपनी कल्पना में तुम्हारी नरम, मिलायम और चिकनी पीठ को अपने गरम होंठो से चूमने लगता होगा.



मीरा की बात सुनकर दीदी के जिस्म में चीटिया सी रंगने लगी, उनकी साँस भरी होने लगी उनके शरीर का सारा खून उनकी चूचियों में जमा होने लगा. उनकस जिस्म वासना के कारन सुलगने लगा.

सरिता दी- ये तुम क्या कह रही हो. क्या लोग मेरे बारे में सचमुच ऐसा hi सोचते होंगे.

म- और नहीं तो क्या. तुम कभी अपने आपको ठीक से आईने में देखो तब तुम्हे पता चलेगा की तुम्हारी जवानी कितनी कातिल है. और ये तो कुछ भी नहीं तुम्हारे बारे में तो लोग और बहुत कुछ सोचते होंगे. कई मर्द तो तुम्हारी गोरी, मांसल और चिकनी पीठ को तो मुंह में भरकर दांतो से काटते भी होंगे.

मीरा की बात सुनकर दीदी के मुंह से सिसकारी निकलने लगी की लोग उसके बारे में ऐसा सोचते हैं. दीदी का हाँथ अब खुद hi अपनी चूचियों पर चला गया और उसे हलके हलके मसलने लगी और बोली

(सभी पाठको को एक बार फिर से ये बता देना चाहती हूँ की अभी अपनी मीरा वाली ईद से सरिता दीदी से चाट पर बात कर रहा है, लेकिन कहानी को और कामुक और सेक्सी बनाना के लिए आप ये सोचकर कहानी पढ़िए की दोनों में कॉल पर बात हो रही है तो ज्यादा आनंद आएगा.)

सरिता दी- तुम्हारी बाते तो मदहोश करने वाली हैं मीरा.

म- मेरी बाते नहीं. मदहोश तो वो लोग हो जाते हैं जब उनकी नज़र तुम्हारी कमर के निचे तुम्हारी सुडौल, गद्देदार, फैली हुई कातिल गांड पर जाती है, तुम्हारी कातिल और गद्देदार गांड को देखकर उनकी आँखे फटी की फटी रह जाती होंगी. तुम्हारी कूल्हे उनकी आँखों में नहीं समां पते होंगे.



मीरा की बात सुनकर दीदी बहुत गरम हो गई थी वो अपने हांथो से अपनी चूचिया दबती हुई बोली.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ये तुम क्या कह रही हो

M-kyon, मैंने कुछ गलत कहा क्या, क्या मैंने जैसे बताया वैसी गांड नहीं है तुम्हारी.

सरिता di-(madhosi में). नहीं तुम बिलकुल सही कह रही हो. मेरी उससे थोड़ी सी बड़ी हो होगी जैसा तुमने बताया है.

म- तो क्या हुवा जो बड़े हैं. आजकल के मर्दो को बड़े बड़े ज्यादा पसंद हैं और जहा तक मुझे लगता है तुमको भी बड़े hi पसंद हैं.

सरिता दी- (गरम होकर मदहोशी में) uuuuuuuuuuuufffffffffffff ohhhhhhhhhhhhhh तुम कितनी मदहोश और गरम करने वाली बाते करती हो.

इतना कहते हुवे दीदी एक हाँथ से अपनी चूचियों को दबाते हुवे दूसरा हाँथ अपनी छूट पर लोअर के ऊपर से रख लिया और दबाने लगी.

म- सच कहु तो मदहोश तो तुम लोगो को करती होगी मर्दो को. उनकी नज़र जब सामने से तुम्हारे उपाद पड़ती होगी तो तुम्हारी दीब गले के कपडे से बहार झांकती तुम्हारी जालिम और गोरी चूचियों के बिच की गहराई में hi उलझकर रह जाती होगी.



सरिता di-AAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhh साछहहह मीटी क्या ऐसा होता होगाआआ. मुझे तो विश्वास hi नहीं होता.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-82

दीदी मीरा की बातो से इतनी ज्यादा गरम हो गई थी की उनका हाँथ तेज़ी से अपनी चुकी और छूट पर चलने लगा था. जिससे दीदी की छूट गीली हो गई थी. दीदी को अपने शरीर पर अपने कपडे बोझ लगने लगे थे. इसलिए दीदी ने अपनी t-shirt उतर फेकि. दीदी ने अंदर ब्रा पहनी हुई थी. उनकी छूट पानी छोड़ने लगी थी. जिसका धब्बा उनकी लोअर में बन गया था. दीदी ने अपनी चूचिया जोर जोर से मसलते हुवे अपने लोअर में हाँथ डालकर अपनी छूट को भी रगड़ने लगी. दीदी अब एकदम छुडासी हो चुकी थी. इस समय दीदी की कंडीशन ऐसी हो गई थी की वो किसी का भी लुंड अपनी छूट में डलवा सकती थी. दीदी से ऐसे बात करके मैं भी गरम हो गया था जिसके कारन मेरा लुंड भी एकदम तन गया था, इसलिए मैंने भी अपनी लोअर उतर फेकि और अपने लुंड को बहार निकल लिया. मैं अच्छी तरह जनता था की किसी भी लड़की या औरत के गरम हो जाने के बाद उसके शर्म के परदे को उतरना बहुत आसान हो जाता है. इसलिए आज मैं दीदी के शर्म के परदे को पूरी तरह से उतर देना चाहता था. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

M-waise एक बार कहूँ डार्लिंग.

सरिता दी- हम्मम्मम्मम्म

म- तुम्हारा पति तो तुमको अचे से छोड़ता hoga.pura मज़ा लेके.

सरिता di-Haa. छोड़ता तो है लेकिन उनके पास ज्यादा समय नहीं रहता अक्सर काम में hi व्यस्त रहते हैं.

म- हाँ लेकिन जब छोड़ते होंगे तो जबरदस्त तरीके से छोड़ते होंगे. तुम्हारा अंजार पंजर ढीला कर देते होंगे.

सरिता दी- हैं ठिक्क ठाक कर लेते हैं. (दीदी ने दबे मन से कहा)

म- मतलब तुम्हारे मुताबिक नहीं करते. जैसा तुम छुड़वाना चाहती हो.

मीरा की बातो का दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. लेकिन मदहोशी की वजह से साँस ऊपर निचे हो रही थी.

म- अच्छा एक बात बताओ. पति से चुदाई करते समय तुमको कभी ऐसा नहीं लगा की तुम्हारे पति का लुंड थोड़ा और लम्बा और मोटा होता तो ज्यादा अच्छा होता और पति देर तक करते तो ज्यादा अच्छा लगता.

मैंने ये बात दीदी को बड़े लुंड की तरफ यही अपनी तरफ और ज्यादा घूमने के लिए कही थी.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmm

म- मतलब तुम्हारी मन लम्बे चौड़े लुंड से छुड़वाने का करता है.

दीदी मीरा की बातो से और भी ज्यादा गरम हो रही थी. जिसके कारन उन्होंने अपनी ब्रा और लोअर भी निकल कर फेक दी. ये बस एक कल्पना मात्र थी. लेकिन दीदी ऐसी बात पहली बार कर रही थी और िमागिन कर रही थी इसलिए वह अपनी छूट को रगड़ने लगी और बोली.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmm

म- अब तुम ये मान लो की मैं कोई मर्द हूँ. और मुझसे ऐसे hi सेक्सी और कामुक बाटे खुलकर करनी है.

सरिता दी- ठीक है जो भी करना है करो.

(मैं) मीरा अब यहाँ एक मर्द का रोले प्ले करनी वाली है इसलिए अब यहाँ से इस को एक मर्द के रूप में देखे और कहानी का आनंद ले)

म (अपने लुंड को मसलते हुवे) जानती हो सरिता तुम्हारी ख़ूबसूरती देखकर मेरा लुंड या यूं कह लो की मेरा घोडा एकदम खड़ा हो गया है और कैसे हिनहिना रहा है

सरिता दी- तो तुम अपने घोड़े को अस्तबल से बहार निकालो. (दीदी ने मस्ती में कहा)

म- अरे सरिता मेरे घोड़े को तुम अपनी हरी हरी जवानी दिखाओ फिर देखो वो कूदते हुवे बहार आ जाएगा.

दीदी इतनी गरम हो गाइट hi की मेरे इतना कहते hi दीदी ने अपनी गार्डन से निचे की अपनी चूचियों की एक फोटो खींचकर भेज दी. दीदी की चूचियों को मैंने पहली बहार नंगा देखा था. जो आज फोटो में मेरे सामने अपना जलवा दिखा रहे थे. जितनी मैं दीदी की चूचियों की कल्पना करता था. उसके हिसाब से दीदी की चूचिया कही ज्यादा बेहतर थी. उनकी चूचिया बहुत मोती मोती थी ऊपर से चूचियों के ऊपर अंगूर के डेन जैसे nippal.jise देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा.



म- आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह क्या मस्त चूचिया हैं तुम्हारी. ऐसा लग रहा है जैसे दूध के दो टैंकर हो ये. तुम तो इतनी मस्त और दुधारू लग रही हो जिसका दूध हर मर्द चूस चूस कर पीना चाहता होगा. और ऊपर से ये काळा काळा निप्पल, ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने बर्फ के बड़े बड़े सफ़ेद गोलों पर बड़े बड़े काळा काळा अंगूर के डेन रख दिए हो. और उस अंगूर का रास दुनिया का सारा मर्द पीना चाहता है.

मीरा के मुंह अपनी चूचियों की इतनी खुली तारीफ सुनकर दीदी बहुत उत्तेजित हो गाइट hi. उनकी सांसे तेज़ चलने लगी थी. उनके हाँथ लगातार अपनी चुकी और छूट मसल रहे थे. दीदी की छूट फिर से धीरे धीरे बहने लगी थी.

दीदी की छूट से निकले पानी से निकला पानी उनकी जांघो तक बाह कर आ गया था जो तुबे लाइट की रौशनी में चमक रहा था. आज तक उसके बदन की इतनी कामुक तारीफ किसी ने नहीं की थी. और न hi किसी ने उसके ऊपर ऐसे कमेंट किया था. सरिता दीदी अपने जिस्म की गर्मी के आगे मजबूर होकरल अपनी अपनी पंतय भी उतर कर फेक दी और एकदम नंगी हो गई और अपनी फूली हुई छूट की फैंको के बिच में ऊँगली डालकर मसलने लगी दीदी की ऊँगली अपने आप छूट के अंदर बहार होने लगी और उनके मुंह से sssssssssssssshhhhhhh आआआहहहहहहह की कामुक सिसकारियां निकलने लगी. दीदी की ऐसी सिसकारी सुनकर मैं दीदी की दशा समझ गया और अपने लुंड को जिसने अब तक विकराल रूप धारण कर लिया था उसे सहलाने लगा. और दीदी से कहा.

म- यकीन मनो सरिता. तुम्हारे जिस्म की हरियाली देखकर मेरा घोडा बेकाबू होने लगा है.

मेरी बात सुनकर दीदी अपने जिस्म को बिस्टेर पर रगड़ने लगी. उनकी आँखे एकदम लाल हो गई थी आँखों में हवस के लाल डोरे तैरने लगे थे. दीदी अपनी छूट में अपनी ऊँगली अंदर बहार करते हुवे कहा.

सरिता दी- मुझे ऐसा आभास हो रहा है की तुम्हारा घोडा बहुत hi मज़बूत है. लेकिन उसमे स्टैमिना कितना है उसके बारे में पता नहीं.

म- अरे सरिता. एक बार तुम मेरे घोड़े की सवारी कर लोगी तो तुम्हे इतना मज़ा आएगा की तुम हमेशा मेरे घोड़े की सवारी करना चाहोगी.

दीदी मेरी कामुक बाटे सुनकर आनंद लेती हुई बोली.

सरिता दी- मुझे तो काफी देर तक घोड़े की सवारी करनी है और वो भी पूरी स्पीड के साथ.

म- अरे सरिता. इसके स्पीड की चिंता तो तुम बिलकुल hi मत करो. लेकिन एक बात यद् रखना की मेरा घोडा तेज़ स्पीड के साथ बहुत जोर जोर के झटके भी देता है. हर झटके के साथ तुम्हारे शरीर का पुर्जा ढीला होता जाएगा.

सरिता दी- मुझे भी तेज झटके खाना बहुत पसंद है, घोड़े की सवारी करने का मज़ा hi तभी आता है जब झटका तेज़ हो. अब तुम बाते hi करोगे या अपने घोड़े को दिखाओगे भी.

म- मैं अपने घोड़े की जगह अपने नेट से फोटो भेज रही हूँ. तुम उसे hi मेरा लुंड समझकर इमेजिन कर लेना.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड की 3-4 फोटो कीचकर दीदी को भेज दी. और कहा.



म- अरे सरिता मेरा लुंड तो दौड़ने के लिए एकदम तैयार है. लेकिन जिस मैदान पर तुम इसे दौड़ना चाहती हो. जरा उस मैदान का दीदार तो करवाओ.

मेरी इतनी कामुक और हवस से भरी बातो की सरिता दीदी एक डैम गुलाम बन चुकी थी. उन्हें आजतक ऐसा मज़ा लाइफ में कभी नहीं आया था. जितना मेरे साथ कामुक और सस्य बाटे करके उन्हें आ रहा था. मेरी बार सुनकर दीदी ने अपने गदराई और जालिम चूचियों की, अपने मांसल पेट की और अपनी कातिल और गद्देदार गांड की की कई फोटो खींचकर मेरे पास भेज दी.



दीदी ने अपने चेहरा को बालो से ढककर अपने पुरे शरीर की नंगी फोटो देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा. दीदी की कातिल गांड कपडे के अंदर जितनी बड़ी लगती थी. उससे कही ज्यादा बड़ी उनकी नंगी गांड लग रही थी. दीदी की गांड का हर कटाव बहुत hi मादक लग रहा था, मैंने अपने लुंड को दबाते हुवे कहा.

M-ooooooofffffffffffffffff aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या मस्त मैदान है तुम्हारा. एकदम चिकना और इसके उतर चढाव और कटाव का क्या कहना. और तुम्हारे इस मस्त मैदान के बिच की गहरी दरार वाली इस खाई में जाने के लिए कितने घोड़े बेताब होते होंगे. सच कहूँ तो बहुत hi मस्त और बड़ा मैदान है तुम्हारा.

सरिता दी- (माधोसी में)- लम्बी रास तो अक्सर बड़े मैदानों में hi होती है. कही तुम्हारा घोडा मेरे बड़े मैदान पर दौड़ते दौड़ते थक कह रेस पूरी होने से पहले hi अपने मुंह से सफ़ेद झाग तो नहीं फेंक देगा न.

म- अरे सरिता मेरा घोडा तुम्हारी मैदान पर बहुत तेज़ी से दौड़ते हुवे तुम्हारी गहरी खाई के अंदर तक जाएगा और गुफा के अंदर के पानी से नहाकर hi वापस आएगा.

दीदी मेरी बात का मतलब बहुत अच्छी तरह से समझ रही थी. 2 महीने पहले का समय होता तो दीदी को मेरी ये साडी बाते 10 % भी न समझ में आती, लेकिन भाई बहन की चुदाई वाली कहानिया पढ़ पढ़ कर और पोर्न मूवी देख देख कर उनको चुदाई से सम्बंधित सभी बातो की जानकारी हो गाइट hi. दीदी से इतनी छुडास वाली बाटे करने के कारन मेरा लुंड बहुत टाइट हो गया था और अपने पुरे आकर में लहरा रहा था. मैंने फिर 2-3 फोटो अपने लुंड की खींचकर दीदी को भेज दी. मेरे लुंड की फोटो देखकर दीदी की आँखे फटी की फटी रह गई. मैं अपना लुंड सहलाते हुवे बोलै.

म- ाचा सरिता ये इस घोड़े को देखकर इसकी सवारी करने का तुम्हारा मन है.

सरिता दी- (नशे में) Hhhhhhmmmmmmmmmmmmm

म- लगता है तुमने आज तक कभी किसी के घोड़े की सवारी की है.

सरिता दी- नहीं कभी नहीं की.

म- अगर तुम बुरा न मनो तो एक बायत पुछु.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmm

म- तुम्हारा मन तो करता होगा न ऐसे लम्बे और ताकतवर घोड़े की सवारी करने का.’

सरिता दी- हाँ मन तो बहुत करता है.

म- कभी तुमने इस घोड़े जैसे घोडा कही देखा है.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी मेरे लुंड की फोटो को गौर दे देखने लगी. लुंड की फोटो देखने के बाद दीदी को ऐसा लग रहा था की उन्होंने इस लुंड को कही देखा है. वो दिमाग पर जोर डालकर सोचने लगी तभी दीदी के दिमाग में मेरा लुंड उभरने लगा दीदी को फोटो वाले लुंड को देखकर मेरा लुंड याद आने लगा. वही रंगा, वही लम्बाई, साइज में इससे बड़ा था क्योंकि वो लाइव देखा था और ये फोटो में. एक लुंड फोटो में था और दूसरा लुंड दीदी के दिमाग में. दोनों लुंड की कल्पना और उसके बारे में सोचने से दीदी फिर से उन्माद से भर गई. उनकी धीमी पड़ी उंगलियों की स्पीड उनकी छूट पर फिर से तेज़ हो गई. वो अपनी उंगलियों को तेज़ी से अंदर बहार करती हुई बोली.

सरिता दी- हाँ मैंने इसके पहले भी देखा है घोडा.

दीदी की ये बात सुनकर अब चुकने की बरी मेरी थी. मैं अपने लुंड को तेज़ी से ऊपर निचे करने लगा, मेरा लुंड पूरी तरह तन चुक्का था. मेरी लुंड पर नसे उभर आई थी जो हरे रंग की दिख रही थी. मैं सोचने लगा की दीदी ने किसका लुंड देखा है. मेरा लुंड तो उन्होंने कई बार देख है लेकिन वो या तो लोअर में तना हुवा होता था या तो ुंडेरवेरे में. एक बार मैंने अपने नंगा लुंड दीदी के हाँथ में दिया था. लेकिन उस समय दीदी ने लुंड को देखा hi नहीं था और जब देखा तो वो झाड़कर मुरझा गया था. मैंने अपनी सोच को विराम देता बहुत उत्सुकता से पूछा.

म- किसका घोडा देखा है तुमने

सरिता दी( अपनी छूट में ऊँगली करते हुवे) अभिषेक का.

दीदी का ये जवाब सुनकर मैं चौक गया और साथ में मेरा शरीर भी रोमांचित हो गया. मैं जनता था की घर में मेरे आलावा सिर्फ पापा हैं. लेकिन दीदी ने मेरा लुंड देखा है लेकिन कब और कैसे. मुझे तो ऐसा कोई भी वाक्य याद नहीं आ रहा था जिससे मुझे अंदाज़ा हो की दीदी ने मेरा नंगा लुंड देखा है. कही ऐसा तो नहीं की दीदी किसी और अभिषेक की बात कर रही हो. क्योंकि दी तो मुझे अभिषेक कहती hi नहीं थी. ऐसे न जाने कितने सवाल मेरे दिमाग में चल रहे थे. संसय और जिज्ञाषा से मेरा दिमाग फटने लगा. दीदी का स्पस्ट जवाब hi अब मेरी जिज्ञाषा को शांत कर सकता था. इसलिए मैंने दीदी से पूछा.

M-to क्या तुमने कभी अभिषेक के घोड़े की सवारी की है क्या.

सरिता दी- अरे नहीं बस एक बार देखा था मैंने.

M-to कैसा लगा तुमको उसका घोडा.

सरिता di(Masti भरी आवाज़ में बोली)- एकदम मस्त

म- अगर उसके घोड़े पर तुमको सवारी करने का मौका मिले तो क्या तुम उसके घोड़े की सवारी करोगी.

सरिता दी- सच बोलू तो मैं कब से उसके घोड़े की सवारी करना चाहती हूँ.

म- मतलब अभिषेक के घोड़े पर बैठने के लिए तुम तैयार हो.

सरिता दी- हाँ

दीदी का जवाब सुनकर मैं तो कंफ्यूज हो गया. मुझे अब खुदपर काबू करना मुश्किल होता जार अहा था. मैं जल्द से जल्द जानना चाहता था की ये अभिषेक मैं हूँ या कोई और, मुझे 99% उम्मीद थी की दीदी मेरी hi बात कर रही हैं लेकिन जो 1% संसय था उसको दूर करने के लिए दीदी से स्पस्ट रूप से सुन्ना चाहता था.

म- मतलब अभिशेख तुम्हारा भाई नहीं है फिर भी तुम उसके घोड़े की सवारी करोगी.

मेरी बात सुनकर दीदी हंसने लगी और अपनी छूट को मसलती हुई बोली.

सरिता दी- वो अभिषेक मेरा भाई है अभी.

दीदी की बात सुनकर मेरे लुंड ने इतनी तेज़ झटका मारा की सीधा आकर मेरे पेट से टकराया. मैं ये जानकर की दीदी ने मेरा नंगा लुंड देख लिया है बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया और पाने लैंड को तेज़ी से दबाने लगा.

म- तुमने अपने भाई का घोडा कब और कैसे देख लिए.

सरिता दी- एक रात वो नंगा hi अपने कमरे में सो गया था. सुबह जब मैं उसे उठाने उसके कमरे में गई तो उसका घोडा एकदम खड़ा था. मैंने उसे एकदम पास जाकर बहुत अचे से देखा. लेकिन अभी को इसके बार में कुछ भी पता नहीं, क्योनी वो गहरी नींद में सो रहा था.



( जो दीदी ने मेरे नंगा सो जाने पर देखा था जिसका जिक्र मैंने 73वे भाग में किया है)

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-83

म- तुमने अपने भाई का घोडा कब और कैसे देख लिए.

सरिता दी- एक रात वो नंगा hi अपने कमरे में सो गया था. सुबह जब मैं उसे उठाने उसके कमरे में गई तो उसका घोडा एकदम खड़ा था. मैंने उसे एकदम पास जाकर बहुत अचे से देखा. लेकिन अभी को इसके बार में कुछ भी पता नहीं, क्योनी वो गहरी नींद में सो रहा था.

( जो दीदी ने मेरे नंगा सो जाने पर देखा था जिसका जिक्र मैंने 73वे भाग में किया है)

अब आगे.

म- तो क्या तुम चाहती हो की तुम्हारा भाई तुम्हे अपने काळा मोठे घोड़े पर बिठाकर स्पीड से दौड़ते हुव ज़ोर ज़ोर से झटके मरे और तुम्हे बहुत देर तक अपने घोड़े पर बैठकर रखे.

मेरे और अपने बारे में ऐसी गरम और कामुक बाते सुनकर दीदी उत्तेजना के आसमान पर पहुंच गई और अपनी छूट में ऊँगली और तेज़ी से अंदर बहार करती हुई बोली.

सरिता दी- iiiiiiiiiiiiissssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhh हाँ मैं यही चाहती हूँ.

म- तुम्हारी भाई तुम्हे अपने घोड़े पर बैठकर जब तेज़ी से दौड़ेगा तो स्पीड के साथ तुमको जोर जोर से झटका लगेगा और तुम्हारा बैलेंस बिगड़ने लगाएगा. तो तुम्हारे भाई को तुम्हे अचे से थमने के लिए तुम्हारी चूचिया पकड़नी पड़ेगी.

सरिता di-(madhoshi में)- मैं खुद उसके हांथो में अपनी चूचिया पकड़ा दूंगी और बोलूंगी की मेरी चूचियों को अचे से पकड़कर घोड़े की स्पीड और तेज़ कर दे.

मेरी इतनी गरम और नशीली बाते और दीदी के दिमाग में घूमता मेरा लुंड दीदी को कामवासना की दुनिया में डुबो रहा था.

म- तुम्हारे भाई का घोडा दौड़ते हुवे तुम्हारी गुफा को चूमेगा और तुम्हारी गुफा में जोर जोर से स्पीड के साथ अंदर बहार होगा.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ऑरररर तेज़्ज़ उउउउउछालनीीी दोऊ भाआआई अपनीईई घोड़े को.

सरिता दीदी कामुकता में सीधे सीधे अब मुझे hi इमेजिन कर रही थी. मैंने दीदी इस मंद गेम में दीदी के दिमाग पर अपनी गहरी छाप छोड़ रहा था. जिससे मैं उनको बेशरम बनाना में कामयाब भी हो रहा था. मैं दीदी को और बेशरम बनाना चाहता था. इसलिए मैंने बात को आगे बढ़ाते हुवे कहा.

म- उसके बाद तुम्हारा भाई तुम्हे अपने बिस्टेर पर पीठ के बल लिटाकर तुम्हारी दोनों टैंगो को फैलाकर तुम्हारी दोनों टैंगो को उठाकर अपने कंडे पर रख kar……………(baat अधूरी छोड़ दी)

मेरी इतनी गरम बाते सुनकर दीदी इस कदर मदहोश हो गई थी की वो मेरी हर एक बात को इमेजिन कर रही थी जो दीदी की उत्तेजना को बढ़ा रहा था.

सरिता दी- Aahhhhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

म- फिर तुम्हारा भाई तुम्हारी इस ज़ालिम छूट को मोती फैंको को फैलाकर………

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhh

म- अपने मोठे घोडा का फुला हुवा सूपड़ा तुम्हारी छूट के मुंह पर रख कर…….

सरिता di-Ohhhhhhhhhhh Bhaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiii अब अंदर भी डाल दोऊ. (दीदी एक डैम छुडासी होकर बोली)

M-Kya अंदर दाल दू सरिता.

सरिता दी- मेरे भाई अपना घोडा दाल दो अंदर.

म- नहीं ऐसे नहीं. पहले इसका असली नाम बताओ तब.

सरिता दी- ओह्ह्ह्ह भाईईईई और मत तड़पाओ अपनी दीदी को दाल दो अंदर (अपनी छूट और चुकियो को रगड़ती हुई)

म- नहीं पहले नाम बताओ की क्या अंदर लेना है.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अपना लुंड अंदर डालो.

म- अच्छा. फिर तुम्हारा भाई अपना लुंड तुम्हारी रास छोड़ती छुडासी छूट पर रखकर तुम्हारी दोनों गदराई हुई जालिम चूचियों को अपने दोनों हथेलियों में भरकर जोर जोर से मसलते हुवे और जोर जोर से थप्पड़ मरते हुवे एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लुंड एक hi बार में तुम्हारी छुडासी छूट में पेल देगा.



मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने हांथो से अपनी छूट और चीची को जोर जोर से मसलते हुवे बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दी अपनीईई बाहाआनंनंन्न कोऊ. मेंननननननन कबबबबबबबबब सीईई तूझसेएईईए चूड्डड्डड्डड्डनीीे के लिएईईई तदाआआपपपप रहीइइइइइइइइ हूऊऊऊऊणणंन्न बबबबबबूझहा दे मेरी चुउत्त्तत्त कोई प्याआआस्स्स्सस्स अपनीईई लुँड्ड्ड सीई आह्ह्हह्ह्ह्ह भाईईई.

म- क्यों सरिता डार्लिंग कैसा लग रहा है अपने भाई का लुंड अपनी छूट में लेकर.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh पुछहःछःहूऊओ मात्तत्त. बहुत हीईई ाआअच्छाआआ लगगगगग रहा हैई. मुझीीी अपपपपपपपपनीई भायी से चूड्डड्डद्द्वाती हुवेई.

M-Fir तुम्हारा भाई तुम्हे पटल कर कुटिया बनाकर तुम्हारी गांड पर थप्पड़ मर मर कर तुम्हारी मखमली गांड को लाल कर देगा और अपना लुंड तुम्हारी गांड के छेड़ पर टखकर हाँथ बढाकर तुम्हारी दोनों ृषभरी चूचियों को पकड़कर एक hi धक्के में तुम्हारी गांड को फाड़ देगा. और तुम्हे जन्नत का मज़ा देगा.



इतना कहकर दीदी और जोर जोर से अपनी चुकी मसलने लगी और अपनी छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगी. जिससे दीदी का शरीर अकड़ने लगा. और वो बड़बड़ाते हुवे पानी छोड़ने लगी.

सरिता दी- mmmaaaaaaaaaaaaroo मीटीररीईईई gaaandddddddddd. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईईईईई oooooooooooohhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhh मैंन आए राहीईई होऊणननननन और जोररर सी छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ूऊ मुझीीी भाआईईई. मेरररररीईई प्याआआअस बुझाआआ दोऊ. मेंनननन तुमममममहरिइइइइ गुलाआआमममममममम होऊणन्न. Mujheeeeeeeeee रोजजज्जज आईसीईई hiiiiiiiiii छोड़ड़ड़ड़ना. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेंननननन गइईईई.

इतना कहकर दीदी झाड़ गई. दीदी के झड़ने के बाद दोनों तरफ कुछ देर ता शांति चाय रही. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

म- तो कैसा रहा सरिता डार्लिंग. मज़ा आया इस खेल में.

सरिता दी- पूछो मत यार. बहुत मज़ा आया. मैंने तो सोचा भी नहीं था की इस खेल में इतना मज़ा आएगा.

म- अब तुम सोचो की इमेजिनेशन में hi तुमको अपने भाई से छुड़वाने में इतना मज़ा आया तो जब हकीकत में तुम्हारा भाई तुम्हे छोड़ेगा तो तुम्हे कितना मज़ा आएगा. लेकिन तुमने बेवजह hi उसे नाराज़ कर दिया. जब तुम अपने भाई से छोड़ना चाहती hi हो तो इतने नखरे क्यों करती हो. तुम उसका साथ डौगी तभी तुम्हे चुदाई का असली आनंद मिलेगा.

सरिता दी- हाँ यार वो तो है. लेकिन वो तो नाराज़ है मुझसे. अब कैसे मनौ मैं उसे.

म- एक काम करो. अभी उसके पास कोई बहाना बनाकर चली जाओ. और जाते समय ऐसे कपडे पहनकर जाना जिसमे से तुम्हारा जिस्म छुपे काम और दिखाए ज्यादा. एक बात और. अब जितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा उसकी बात मन्ना. तभी लाइफ अचे से एन्जॉय कर पाओगी.

सरिता दी- ठीक है अब मैं उसकी हर बात मानूंगी. उसको नाराज़ नहीं करुँगी.

म- तो अब तुम जाओ और उसे अपनी चूचिया की झलक दिखाकर मनाओ. मैं अब जा रही हूँ भाई के पास. गुड नाईट.

इतना बोलकर मैं मोबाइल को साइड मैंने रख दिया. और लोअर पहनकर मोबाइल में फिल्म देखते हुवे दीदी का इंतज़ार करने लगा. मेरा लुंड अभी भी खड़ा था. थोड़ी देर बाद दीदी दूध का गिलास लेकर मेरे कमरे में आयी. दीदी सभ में आज एकदम क़यामत बैंकर आई थी. उन्होंने एक निघ्त्य पहनी हुई थी जो उनकी चूचियों के निप्पल तक hi थी. उनकी आधी चूचिया निघ्त्य से बहार दिख रही थी. दीदी ने जो निघ्त्य पहनी थी वह उनके घुटनो तक थी. जिसमे से दीदी की गोरी गोरी बाल रहित खूबसूरत टंगे नज़र आ रही थी.



दीदी को देखते hi मेरा लुंड झटके मरने लगा. मैं दीदी की चूचियों को देखने लगा. जिसे दीदी ने देख लिया और उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई दीदी आकर बीएड में मेरे पास बैठ गई और मेरे लुंड को देखते हुवे मुझसे बोली

सरिता दी- क्या हुवा अभी तुम नाराज़ हो मुझसे.

मैं- मैं क्यों नाराज़ होऊंगा आपसे. आप जाओ मुझे सोना है.

सरिता दी- मैं जानती हूँ की तुम नाराज़ हो मुझसे. सॉरी अभी. मुझसे गलती हो गई. तू जो बोलेगा मैं करुँगी. लेकिन तू मुझसे नाराज़ मत हो.

मैं- मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ दीदी. वो तो बस मैं देखना चाहता था की मेरी दीदी मुझसे कितना प्यार करती हैं.

सरिता दी- सच में तू मुझसे नाराज़ नहीं है. मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ. और तेरी खुसी के लिए मैं कुछ भी करुँगी.

मैं- (उनकी चूचियों को देखकर उनकी आँखों में देखते हुवे)- कुछ भी.

सरिता दी- हाँ और इसीलिए मैं तेरे लिए दूध लाइ हूँ. अगर इस दूध को तुमने पि लिया तो मैं समझूंगी की तू मुझसे नाराज़ नहीं है.

मैं- (उनकी चूचियों को देखकर) मुझे तो एकदम ताज़ा दूध पीना था. और ताज़ा दूध मीठा होता है. लेकिन आप ताज़ा दूध नहीं पिलाएंगी. तो ऐसा करिये की इस दूध को पीकर आप इसे मीठा कर दीजिए.

दीदी मेरी बातो को अच्छी तरह समझ रही थी. की मैं क्या कह रहा हूँ तो वो मुस्कुराती हुई उठी और गिलास मुंह में लगाकर एक घुट दूध पिया और फिर झुक कर मुझे दूध का गिलास तकदने लगी. झुकने की वजह से निघ्त्य में से दीदी के निप्पल ऑलमोस्ट दिखने लगे थे.



मैं आँख फाडे दीदी की चूचिया देखने लगा. दीदी की चूचिया और अंदर तक देखकर मेरे लुंड झटके खा तहा था. दीदी अभी तक झुकी हुई थी और वो भी मेरे लुंड को hi देख रही थी मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे एक हाँथ को अपने लुंड पर रखकर सहलाने लगा. दीदी भी अब गरम हो रही थी. और अपने होंठ को काट रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी सीधी कड़ी हो गई और बोली.

सरिता दी- हाँ अभी तो बताओ तुम्हे कैसा लगा.

मैं- बहुत hi अच्छा दीदी और बहुत बड़े बड़े हैं आपके.

सरिता दी- मैं दूध की बात कर रही हूँ की तुम्हे कैसा लगा.

मैं- मैं भी तो दूध की hi बात कर रहा हूँ की बहुत बड़े बड़े और मस्त हैं दूध.



मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी. और गिलास लेकर जाने लगी तो मैंने कहा.

मैं- दीदी अभी मेरा और मीठा चखने का मन है. आप चखा डौगी.

सरिता दी- अब मैं इतनी रात को और मीता कहा से लौ. कल सुबह तुन्हे ताज़ा दूध और मीठा दोनों मिलेगा.

Main-taza दूध आप मुझे कल दे देना. लेकिन मीता तो मुझे अभी चाहिए. और वो आप hi मुझे दे सकती हैं.

सरिता दी- मेरे पास कहा हैं जो मैं तुझे दू.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके हाँथ को पकड़कर एक झटके से खींच लिया जिससे दीदी सीधा आकर मेरे साइन पर गिर पड़ी. जिससे दीदी की बड़ी बड़ी चूचिया मेरे साइन से जोर से टकराई. जिससे मेरे मुंह से ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई.

दीदी मेरे साइन पर गिरी हुई मेरी आँखों में देखने लगी. मैं भी दीदी की आँखों में देखने लगा और अपने हाँथ का घेरा दीदी की पीठ पर कर लिया जिससे दीदी उठकर भाग न जाये. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- सरिता डार्लिंग. मुंह मीठा कराओ न.

सरिता दी- मैं कैसे करौ मुंह मीठा. मिठाई तो है hi नहीं.

दीदी ने अभी इतना hi बोलै था की मैंने अपने होंठ सीधे दीदी के होंठो पर टिका दिए और जोर जोर से उन्हें किश करने लगा. और अपने हाँथ से उनकी पीठ को सहलाने लगा. दीदी ने छूटने की कोसिस की लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाई. थोड़ी देर बाद दीदी ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मैंने अपना होंठ उनके होंठो से उठाया और उनके क्लीवेज में रख दिया और उसे चाटने लगा.



थोड़ी देर तक दीदी को किश करने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी पीठ से सरकते हुवे दीदी की कातिल गांड पर रख दिया और उसे मसलने लगा. जिससे दीदी ssssssssssssssss ahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ करने लगी. लगभग 10 मिनट तक जबरदस्त किश करने के बाद मैंने दीदी के जिस्म से अपना हाँथ हटाकर दीदी को आज़ाद कर दिया. लेकिन दीदी किस में एकदम डूब चुकी थी. इसलिए उन्होंने उठने की कोई कोशिश नहीं की और मुझे किश करती रही. तो मैंने दीदी की बांह पकड़कर उन्हें हटाया और उठकर बैठ गया.

दीदी भी उठकर बैठ गई और मेरी तरफ देखकर शर्माने लगी. मैंने दीदी से कहा

मैं- कैसा लगा डार्लिंग तुमको.

सरिता दी- तू बहुत ख़राब है. कोई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है क्या.

मैं- मैं तो तुम्हारे साथ इसके आलावा भी बहुत कुछ करना चाहता हूँ. लेकिन तुम करने hi नहीं दे रही हो.

सरिता दी- और क्या करना चाहता है तू मेरे साथ.

मैं- जो एक बॉयफ्रंड अपनी गिर्ल्फ्रेंड के साथ करता है. जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है. वही सब मई तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी शमा गई और अपना सर झुका लिया लेकिन उनके झुके हुवे चेहरे पर मुस्कान थी. थोड़ी देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अच्छा अब मैं जा रही हूँ कल सुबह आउंगी एक्सेरसीज़े करने तुम तैयार रहना.

मैं- ठीक है दीदी. कल आपको ऐसे एक्सेरसीज़े करवाऊंगा. जिसे आप साडी ज़िन्दगी नहीं भूल पाएंगी.

सरिता दी- देख अभी मैं कोई ऐसी वैसी एक्सेरसीज़े नहीं करने वाली पहले से hi बोल दे रही हूँ.

मैं- वो तो कल hi पता चलेगा की आप वो एक्सेरसीज़े करती हैं या नहीं.

और इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से दीदी की गांड को जोर से दबा दिया. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सरिता di-ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh अभी क्या करता है. मुझे दर्द होता hi.

मैं- अब तो ऐसा दर्द मैं तुम्हे रोज़ दूंगा.

सरिता दी- चाल हट बड़ा आया दर्द देने वाला.

इतना कहकर दीदी उठकर बहार जाने लगी मैं मन में सोचने लगा की लड़कियों के नखरे बहुत होते हैं. वो चुदती भी हैं तो नखरा दिखा दिखा कर. और वही हाल दीदी का भी था. वो भी मुझसे छुड़वाने के लिया तड़प रही थी. लेकिन उनके नखरे काम नहीं हो रहे थे. मैं यही सब सोचता हुवा अपना लुंड सहलाते दीदी की गांड को देख रहा था जो बहार जाते हुवे मटक रही थी. दीदी दरवाज़े के पास पहुंचकर मेरी तरफ मुड़ी. कुछ देर मेरे लुंड की तरफ देखा फिर मेरी आँखों में देखकर बोली.



सरिता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है अभी.

और इतना कहकर वो हँसते हुवे निचे चली गई और मैं बिस्तर पर लेटकर सो गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-84

सुबह मैं सो कर उठा और फ्रेस होकर कमरे में आ गया और सरिता दीदी का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद किसी के कदमो की आहात सुनाई पड़ी. मैंने दरवाज़े पर देखा तो सरिता दीदी थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड खड़ा हो गया. क्या सजधज कर आई थी दीदी. और कपड़ो के तो क्या कहने. उन्होंने जो कपडे पहने थे उसमे से दीदी की आधी चूचिया बहार नज़र आ रही थी. ऊपर से उन्होंने एक पारदर्शी दुपट्टा गले में लिया हुवा था जो दीदी की चूचियों को और भी कामुक बना रहा था. मुझे अपनी चूचियों की तरफ घोरते देखकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. और वो बोली.



सरिता दी- क्या देख रहा है तू.

मैं- मैं देख रहा हूँ की मेरी गिर्ल्फ्रेंड din-b-din हॉट & सेक्सी होती जा रही है.

सरिता दी- वो तो मैं हूँ hi. कुछ नया हो तो वो बता.

मैं- नया तो है. लेकिन कैसे काहू समझ में नहीं आ रहा है.

सरिता di(hanskar) अपने मुंह से कह और कैसे कहेगा.

मैं- ठीक है मुंह से hi बोलता हूँ. जब से तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड बानी हो तब से din-b-din गडराती जा रही हो. तुम्हे देखकर तो मुझसे कण्ट्रोल करना मुश्किल होता जा रहा है.

सरिता दी- तू बहुत ख़राब है अभी. अपनी बहन पर गन्दी नज़र रखता है. तुझे शर्म नहीं आती.

मैं- अगर मैं शर्म करूँगा तो तुम्हारा मीठा मीठा दूध कैसे पिऊंगा जो तुम आज मुझे पिलाना चाहती हो.

सरिता दी- मैं कोई दूध वूध नहीं पिलाने वाली. थोड़ी देर बाद किचन में आकर खुद पि लेना.

मैं- अच्छा. चलो तुम्हारी इच्छा किचन में hi अपना दूध पिकने की हो रही है तो मैं वही आकर तुम्हारा दूध पि लूंगा.

सरिता दी- चाल हैट बद्तमीज़. आज बड़ी जल्दी जग गया और मेरे आने से पहले hi शुरू कर दिया.

मैं- अभी कहा शुरू किया है. तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था.

सरिता दी- मेरा इंतज़ार क्यों कर रहे थे.

मैं- जो एक्सेरसीज़े आज करनी है उसे अकेले नहीं किये जाता इसीलिए सोचा की एकसाथ करते हैं.

सरिता दी- अच्छा चलो ठीक है फिर एकसाथ hi शुरू करते हैं.

इतना कहकर दीदी मेरे पास आ गई. तो मैं दीदी की छूछीयो को देखते हुवे अपनी t-shirt उतर कर बीएड पर रख दी. t-shirt उतरने के बाद मैं ऊपर से नंगा हो गया. जब दीदी की नज़र मेरी मस्कुलर बॉडी पर पड़ी तो वो एक तक मेरे जिस्म को देखने लगी. मैंने अपनी लोअर काफी निचे पहनी नई थी. ये समझ लीजिए की जहा से लुंड शुरू होता है वह से. मेरे जिस्म को देखकर दीदी की आँखे नशीली होने लगी. जो मैं दीदी की आँखों में देख रहा था. मैंने दीदी से कहा..

मैं- सरिता ऐसा करो की मेरे सामने आकर कड़ी हो जाओ.

दीदी मेरी बात सुनकर मेरे सामने आकर कड़ी हो गई मैंने दीदी का दुपट्टा उतारकर बीएड पर रख दिया. दीदी ने मेरी आँखों में देखा लेकिन कहा कुछ नहीं. दुपट्टा उतरने के बाद दीदी के अधनंगी चूचिया मेरी नज़रो से 1 फुट की दुरी पर थी.

मैं थोड़ा सा और आगे बढ़ा और दीदी के साथ जुड़ कर खड़ा हो गया और अपने बाज़ू एकदम सीधा दीदी के कंडे के लेवल में फैला दिया और दीदी को भी वैसे hi करने के लिए कहा. मेरी बात सुनकर दीदी ने भी अपने बाज़ू मेरे कंधे के लेवल पर फैला दिए. फिर मैं थोड़ा सा और आगे हुआ और दीदी से पूरी तरह से चिपक कर खड़ा हो गया जिससे दीदी की पर्वत सामान चूचियां मेरे साइन में धस गई और मेरा लुंड सीधे दीदी की दोनों टैंगो के बिच घुस गया. जिससे दीदी और मेरे मुंह से ssssssssssssssssssss की सिसकी निकल गई. फिर मैंने अपने बाज़ू दीदी की बाज़ू में फंसा दिया और ऊपर निचे घूमने लगा (क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज घूमने लगा) ऐसा करते हुवे मेरा लुंड दीदी की छूट पर घिसने लगा. जिससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

ऐसे hi लगभग 10 मिनट तक एक्सेरसीज़े करने के बाद हम दोनों को बहुत पसीना आने लगा. एक तो आज सुबह का मौसम भी थोड़ा गरम था और ऊपर से हम दोनों के जिस्म की गर्मी. पसीने के रूप में बहार निकल रही थी. मेरे लुंड की 10 मिनट से लगातार रगड़ अपने छूट पर पड़ने के कारन दीदी भी गरम हो गाइट hi. 10 मिनट बाद मैंने अपने बाज़ू दीदी के बाज़ू से अलग किये और उन्हें पलटकर खड़े होने के लिए कहा. मेरी बात मानकर दीदी पलटकर कड़ी हो गयी तो मैंने उनसे सत्कार खड़ा हो गया लेकिन अपने लुंड को दीदी की गांड से नहीं सताया था. थोड़ी देर तक ऐसे hi खड़ा रहने के बाद मैंने अपनी कमर को जोर से दीदी की गांड पर चिपका दिया जिससे दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. और मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में घुस गया. मैंने अपना हाँथ बढाकर दीदी के कमर पर रख कर दबा दिया और और अपने लुंड को उनकी गांड में अचे से एडजस्ट किया. मेरे ऐसा करने पर दीदी ने पलटकर मेरी तरफ देखा. कुछ देर तक मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी आगे देखने लगी तो मैंने दीदी के कंधे को चूमकर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.



मैं- सरिता अब तुम आगे की तरफ झुको.

मेरी बात सुनकर दीदी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा और थोड़ी देर मुझे देखती रही फिर अपनी गार्डन सीधी करके आगे की तरफ झुकती चली गई झुकने की वजह से दीदी के हाँथ उनके पांव तक पहुंच गए. झुकने की वजह से दीदी की गांड की दरार खुल गई तो मैंने दीदी की कमर पर पकड़ मज़बूत करते हुवे अपनी कमर को थोड़ा सा पीछे करके एक जोरदार धक्का दीदी की गांड पर लगा दिया. जिससे मेरा लुंड मेरी लोअर और उनकी लोअर समेत उनकी गांड के छेड़ से टकरा गया. जिससे दीदी के मुंह aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooohhhhhhhhhh की सिसकारी निकल गई. मैंने फिर से अपनी कमर पीछे की और पहले से तेज़ धक्का दीदी की गांड पर मारा. इस धक्के से दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh अअअअअअअअभीइइइइइइइ Ooooooohhhhhhhhhhhhhhh धीरे bhaaiiiiiiiiii. Hhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy.

मैं- अब तुम फिर से सीधी कड़ी हो जाओ. मेरी बात सुनकर दीदी सीधी कड़ी हो गयी. कुछ देर बाद मैंने दीदी को फिर से झुकने के लिए कहा और झुकने के बाद उनकी कमर को मज़बूती से पकड़ कर अपना लुंड उनकी गांड में पेलने लगा. जिससे दीदी सिसकारी भरने लगी.

सरिता दी- AAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhhiiiiiiiiiiii kkkyaaaaaaaaaaa ककककरररररररर रहहा hiaaaaaaaiiiiiiiiii. Yeeeeeeeeee भीई कोइइइइइइइ एक्सेरसिज़्ज़्ज़्ज़्ज़े है…..

मैं- हाँ सरिता इस एक्सेरसीज़े से तुम्हारे पेट बहार नहीं निकालेंगे.

फिर मैंने इसी तरह दीदी से 10 बार झुकने को कहा और हर बार मैं दीदी की गांड को ऐसे hi पलटा रहा और दीदी कभी सिसकी लेती तो कभी चीख पड़ती. इस एक्सेरसीज़े से दीदी गरम हो गई थी. अब वह जोर जोर से साँस ले रही थी. दीदी के कपडे पसीने से एकदम भीग गए थे जिससे दीदी की ब्रा साफ साफ दिखाई देने लगी.

फिर मैंने दीदी को खड़ा कर दिया और रेस्ट करने के लिए बोल दिया. थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद मैंने दीदी को जमीन पर डोगग्य स्टाइल में होने के लिए कहा. मेरी बात सुनकर दीदी हैरानी से मुझे देखने लगी. उन्हें इस तरह अपनी तरफ देखता पाकर मैंने उनसे कहा.

Main-Kya हुवा सरिता. चलो मैं करके तुमको बताता हूँ.

फिर मैंने अपने घुटने और हाँथ जमीन पर रखे और डोगग्य स्टाइल के हो गया. मुझे देखकर दीदी भी डोगग्य स्टाइल में कड़ी हो गई तो मैं उठकर दीदी के पीछे आकर घुटनो के बल बैठ गया और अपने लुंड दीदी की गांड के दरार में फंसा दिया. ऐसा करने पर दीदी ने पलटकर मुझे हैरानी से देखने लगी. दीदी को ऐसा लग रहा था की मैं उनकी गांड मरने वाला हूँ. तो दीदी ने जैसे hi कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला hi था की मैं बोल पड़ा.

मैं- सरिता अब अपना एक हाँथ जमीन से उठाकर सामने की तरफ सीधा करो और जितनी देर हो सके अपने एक हाँथ पर hi अपना वजन रखो. इससे तुम्हारी कलाई मज़बूत होगी.

मेरी बात सुनकर दीदी ने चैन की सनस ली. वर्ण उन्हें लग रहा था की मैं बिना उनको बताये उनकी गांड मरने जा रहा था. इतना तो मुझे पता था की अगर मैं दीदी को अभी छोड़ना चाहू तो वो मन नहीं करेंगी और मेरे लंच पर उछाल उछाल कर मुझसे छुडवाएंगी. लेकिन मैं दीदी को और ज्यादा गरम करना चाहता था. इसलिए मैंने दीदी की करार को अपने हांथो से ऐसे पकड़ी जैसे मैं दीदी की गांड मरने जा रहा हूँ. दीदी ने अपने एक हाँथ पर अपना वजन रख कर एक हाँथ आगे फैला दिया और बोली.

सरिता दी- ये कैसे उलटी सीधी एक्सेरसीज़े करवा रहे हो.

मैं- अरे सरिता ये एक्सरसीज़े बहुत hi फायदेमंद है. इससे कलाई तो मज़बूत होती hi है. साथ hi साथ इससे तंग और पेट पर जो एक्स्ट्रा चर्बी रहती है वो भी ख़तम हो जाती है. तुमने देखा होगा की कुछ औरते 40 की उम्र की होकर भी 25-26 की लगती हैं. वो सब यही एक्सेरसीज़े करती हैं. इस एक्सेरसीज़े करने पर तुम और भी गदराई हुई मॉल बन जाओगी. और ुम्हे जो भी देखेगा उसका खड़ा हो जाएगा.

सरिता दी- सच्ची में अभी, लेकिन तू मुझसे ऐसी गन्दी गन्दी बाटे मत कर.

मैं- अब जो सही है वही तो बोल रहा हूँ. तुम सच में ये एक्सेरसीज़े करके गदराई मॉल बन जाओगी.

मेरी बातो ने दीदी के ऊपर नशे के रूप में असर किया था. मैंने देखा की एक्सेरसीज़े करते हुवे दीदी की कमीज़े उनकी कमर से थोड़ी सी ऊपर उठ गई है. जिससे उनकी कमर का कुछ हिस्सा नंगा नजर आ रहा था और निचे से टाइट लोअर में दीदी की गांड फांसी हुई थी. जिससे दीदी की कातिल गांड का एक एक उतर चढाव और कटाव नज़र आ रहा था.

मैं दीदी की कातिल गांड को देखकर बहुत मुश्किल से अपने आपको कण्ट्रोल में किया हुवा था. उनकी गांड को देखकर मेरा मन कर रहा था की अभी दीदी का लोअर फाड् डालो और पटक कर एक जी झटके में अपना पूरा लुंड एक hi बार में दीदी की गांड में पेल दू और इन्हे कुटिया की तरह छोड़ू.

फिर मैंने अपना हाँथ दीदी की t-shirt में ाशिस्टा से घुसा दिया और उनकी कमर नंगी कमर सहलाने लगा. जिससे दीदी के शरीर ने एक झटका खाया. फिर मैंने अपने हाँथ को कमर से फेरते हुवे उनके चिकने पेट पर ले गया और सहलाने लगा. कुछ देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी अब मैं थक गई हूँ.

लेकिन मैं तो दीदी की गांड मरने की कल्पना में खोया हुवा था. मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई hi नहीं पड़ी तो दीदी ने फिर से कहा.

सरिता दी- अभी मैं अब थक गई हूँ यार कहाँ गम हो.

Main(hadbada कर) ोहः अच्छा ठीक है.

लेकिन मैं पीछे नहीं हटा और अपना लुंड दीदी की गांड पर सत्ता दिया और दबाव बनाने लगा. तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी पीछे तो हैट जाओ.

मैं दीदी की बात सुनकर पीछे हैट गया. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैं जितनी जल्दी हो सके दीदी की छूट मर लेना चाहता था. दीदी भी अब पूरी गरम हो चुकी थी. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता. अब तुम जाओ. आज की एक्सेरसीज़े हो गई.

सरिता दी- इतनी जल्दी. अभी तो एक्सरसीज़े शुरू हुई थी. अभी तो मेरा जिस्म गरम होवा था और मज़ा आना शुरू हुआ था और तुम जाने को बोल रहे हो.

मैं- क्या करू सरिता. आगे की जो एक्सेरसीज़े है वो तुम नहीं कर पाओगी. इसलिए तुम्हे जाने के लिए बोलै.

सरिता दी- ऐसी कौन सी एक्सेरसीज़े है जो मैं नहीं कर पाऊँगी. जब इतनी उलटी सीधी एक्सेरसीज़े कर ली तो वो भी कर लुंगी. तुम बताओ.

मैं- आगे की जो एक्सेरसीज़े है उसके लिए तुमको अपनी t-shirt उतरनी पड़ेगी.

सरिता दी- लेकिन T-shirt क्यों उतरनी पड़ेगी. पहन कर भी तो कर सकती हूँ.

मैं- नहीं सरिता. उस एक्सेरसीज़े के लिए कपडे उतरने hi पड़ते हैं.

सरिता दी- नहीं यार कोई कपडे वाली hi करो.

मैं- अरे सरिता एक बार कपडे उतारकर वो एक्सेरसीज़े करो तो. बहुत मज़ा आएगा तुमको.

मेरी बात सुनकर भी सरिता दीदी ने कुछ नहीं कहा तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- ठीक है दीदी अगर आप अपने कपडे नहीं उतरना चाहती तो मैं तो उतर hi सकता हूँ अपने कपडे.

सरिता दी- लेकिन तुम मेरे सामने कपडे उतरोगे. मुझे बहुत शर्म आएगी.

मैं- अच्छा ठीक है. आप अपना मुंह दूसरी तरफ कर के कड़ी हो जाओ. मैं तब तक अपनी एक्सेरसीज़े कर लूंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपना मुंह दोस्ती तरफ कर लिया तो मैंने अपना लोअर उतर कर बीएड पर रख दिया. अब मैं अपने कमरे में दीदी की मौजूदगी में एकदम नंगा खड़ा था. मेरा लुंड हवा में लहराते हुवे फनफना रहा था. दीदी थोड़ा मुड़कर चोर नज़रो से मेरे लुंड को देख रही थी. मेरे लुंड को देखकर दीदी की सांसे तेज़ तेज़ चलने लगी. उनके चेहरे और आँखों में हवस साफ़ नज़र आ रही थी. लोअर उतारकर मैंने अपने लुंड को मुट्ठी में पकड़कर ज़ोर से दबाया जिससे मुझे बहुत मज़ा आया. मुझे मज़ा आने का एक कारन ये भी था की दीदी अड़ंगी चूचिया और लोअर में फांसी कातिल गांड लेकर मेरे कमरे में कड़ी थी. मैं चलता हुवे दीदी के पास जाकर खड़ा हो गया और दीदी से बोलै.

मैं- सरिता. इस एक्सेरसीज़े में तुमको मेरी हेल्प करनी पड़ेगी.

सरिता दी- लेकिन मैं हेल्प कैसे करुँगी तुम तो पुरे नंगे हो.

मैं- नंगा हु तो क्या हुवा सरिता. तुम्हारा भाई हूँ और अब तो तुम्हारा बर्फ भी हूँ. मैं कोई गैर थोड़ी हूँ.

सरिता दी- लेकिन मुझे शर्म आ रही है

मैं- लो कर लो बात. नंगा यहाँ मैं खड़ा हूँ और शर्म तुमको आ रही है सरिता. मुझसे कैसी शर्म.

सरिता दी- और क्या शर्म तो आएगी hi न.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी के कंधे पर अपना हाँथ रख दिया और अपनी तरफ गुमा लिया. गुमने के बाद दीदी कोई 5 सेकंड तक मेरे खड़े लैंड को देखती रही फिर अपनी आँखे बंद कर ली.

मैं- सरिता अपनी आंके खोलो. और अपने भाई की तरफ देखो.

सरिता दी- नहीं अभी मुझे शर्म आ रही है.

मैं- देखो सरिता आखिरी बार कह रहा हूँ अपनी आँखे खोलो नहीं तो मैं तुम्हारे साथ कुछ उल्टा सीधा कर दूंगा तो मुझको दोष मत देना.

मेरी बात सुनकर दीदी को हंसी आ गई और उन्होंने हँसते हुवे अपनी आँखे खोल दी और आँखे खोलने के बाद दीदी मेरी तरफ न देखकर मेरे लुंड को देखने लगी. दीदी ने मेरे नंगे लुंड को पहले भी देखा था लेकिन इस बार मेरी जानकारी में मेरा नंगा लुंड देख रही थी वो भी मेरे सामने खड़े होकर मेरे लुंड को देखकर दीदी की आँखे नशीली हो गई. उनको होंठ सुख गए. जिसपर वो अपनी जीभ घूमते हुवे बोली.

सरिता दी- अभी तू सच में बहुत बेशरम है.

मैं- अब इसमें बेशर्मी कैसे आ गई. चलो छोडो इन बातो को अब मैं निचे लेटते हूँ और आप मेरे ऊपर टंगे दोनों तरफ फैलाकर कड़ी हो जाओ. ये कहकर मैं जमीन पर कमर के बल लेट गया जिससे मेरा लुंड टैंकर तम्बू की तरह खड़ा हो गया. दीदी मेरे लुंड को देखती हुई पेट के दोनों तरफ अपने पेअर रखकर कड़ी हो गई फिर मैंने दीदी का हाँथ पकड़ लिया और कहा.

मैं- सरिता अब मैं तुम्हारे हाँथ के सहारे अपने जिस्म को कमर से ऊपर उठाऊंगा तो तुम अपने आप को संभालना.

सरिता दी- ठीक है.

दीदी की हाँ सुनकर मैंने दीदी के हाँथ को पकड़कर अपने जिस्म को जोर देखर आधा शरीर कमर से ऊपर उठाया जिससे मरे लुंड सीधा दीदी की गांड से टकरा गया. 2 सेकंड तक लुंड गांड पर टच करने के बाद मैं नीचे वापस आ गया. मैं लगभग 3 मिनट तक ये एक्सेरसीज़े करने के बाद उठकर खड़ा हो गया. अब दीदी एकदम बेशर्म बैंकर मेरे नंगे लुंड को घोर घोर कर देख रही थी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
Back
Top