Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 10 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-79

मनीषा- (मुंह बनाकर) मैं जानती थी आप सिर्फ दोनों दीदी से hi प्यार करते हैं मुझसे तो आप प्यार hi नहीं करते. ठीक है मैं भी नहीं जा रही हूँ (और मुंह फुलाकर बैठ गई)

मैं- लो अब नाराज़ हो गई तुम. अच्छा ठीक है तुम रुको मैं तैयार होकर आता हूँ.

उसको बोलकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए आ गया.

अब आगे.

मैं अपने कमरे में आकर अभी तैयार हो hi रहा था की मनीषा मेरे कमरे में आ गई. जिस समय वह कमरे में उसी समय मैं बाथरूम से सिर्फ चढी में आया था. मेरे आने पर वह उठकर जाने को हुई तो मैंने उसे बैठने के लिए बोल दिया. अब मुझे मनीषा के साथ भी थोड़ा खुलना था. इसलिए मैं उसके सामने hi कपडे पहनने लगा. वो एक तक मेरे मस्कुलर बॉडी को देखे जा रही थी. तो मैंने उससे पूछा.

मैं- क्या हुवा मनीषा ऐसे क्यों देख रही हो.

मनीषा- कसम से भैया क्या मस्त बॉडी बनाई हुई है आपने.

मैं- (मेरे मुंह से अचानक निकल gaya)Mast बॉडी तो तेरी भी है.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.

मनीषा- क्या भइया आप भी न मेरी तंग खींच रहे हैं.

मैं- नहीं मैं सच कह रहा हूँ. सच में तेरी भी बॉडी मस्त है.

इन बातो के दौरान मनीषा लगातार मेरी बॉडी hi देख रही थी. जब मैं तैयार हो गया तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- मेरा भाई तो बड़ा हैंडसम लग रहा है.

इतना कहकर वो मेरे गले लग गई उसके गले लगते hi उसकी तानी हुई चूचिया सीधे मेरे साइन में धंस गई. उसकी चूचियों के स्पर्श से मेरे बदन में एक सनसनी दौड़ गई तो मैंने भी उसे कसकर अपने साइन से चिपका लिया और उसकी पीठ पर हाँथ फेरने लगा. मुझे उसकी पीठ पर उसकी ब्रा स्पस्ट फील हो रही थी. फिर मैंने अपने हाँथ निचे लेजाकर अपने एक हाँथ को उसकी गांड पर ऐसे फिराया जैसे ये सब अनजाने में हुवा हो. और उससे बोलै.

मैं- अरे यार अब चलना भी है या इसी पॉश में फिल्म बनानी है.

मनीषा मेरी बात सुनकर वो मुझसे अलग हुई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.

मनीषा- थैंक यू भैया मेरे साथ फिल्म देखने जाने के लिया.

Main-(hanste हुवे) मैं नहीं जा रहा हूँ. मुझको ले जाया जा रहा है. अब चल और जाने से पहले सरिता दी को जाकर बता दो की हम दोनों बहार जा रहे हैं.

इतना बोलकर मैं घर से बहार निकल गया. थोड़ी देर बाद मनीषा भी बहार आ गई. तो मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और मनीषा दोनों तरफ पेअर करके बैठ गई और मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. थोड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा.

मैं- अच्छा ये बताओ मनीषा. आज तुम्हारा फिल्म देखने का प्लान कैसे बन गया.

मिनिषा- वो तो मैं आपके साथ तोडा वक्त गुजरना चाहती थी इसलिए फिल्म देखने का प्लान बनाया.

मैं- लेकिन मेरे साथ क्यों. तुम्हे तो अपने दोस्तों के साथ जाना चाहिए.

मनीषा- वो इसलिए की आप अब मुझको बिलकुल भी समय नहीं देते. हर समय या तो सविता दीदी के साथ या सरिता दीदी के साथ समय बिताते हो. आप तो मुझसे प्यार भी नहीं करते आप तो अपना सारा प्यार दोनों दीदी को hi देते हो. इसीलिए मैंने आज फिल्म देखने का प्लान बनाया है.

उसकी बात सुनकर तो मेरा दिमाग hi झन्ना गया और मैंने गाड़ी रोक दी. और उसकी तरफ देखने लगा. मुझे अब लगने लगा था की इसको जरूर कुछ न कुछ पता है. लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की अगर इसे कुछ पता है तो इसने मम्मी पापा को अभी तक क्यों नहीं बताया. फिर मैंने उससे कहा.

मैं- क्या मतलब है की सारा प्यार दोनों दीदी को दे रहा हूँ.

मनीषा- अरे भैया मेरे कहने का मतलब ये है की आप दोनों दीदी को ज्यादा प्यार करते हैं मेरे मुकाबले. अब गाड़ी चलाइये.

मैंने दोबारा से बाइक स्टार्ट कर दी और चल दिया. अब मनीषा मुझसे सत्कार बैठ गई जिससे उसकी चूचिया मेरी पीठ पर टकराने लगी. लेकिन मेरे ध्यान कही और था मैं इस सोच में गम था की हो न हो मनीषा कुछ न कुछ तो जरूर जानती है तभी तो कुछ दिन से इसका व्यव्हार कुछ बदला बदला लग रहा है. थोड़ी देर बाद मुझे उसने गाड़ी रोकने के लिए कहा. मैंने बाइक रोक दी और देखा तो थिएटर आ गया था. तो मैं और मनीषा बाइक पार्क करके टिकट लेने गए तो वह जुली-2 मूवी लगी हुई थी. तो मैंने उसे किसी दूसरी मूवी के लिए कहा. लेकिन वह नहीं मणि और यही मूवी देखनी है यही जिद करने लगी तो मैंने दो टिकट ली और थिएटर के अंदर आ गया.

थिएटर लगभग पूरा खली था बस इक्का दुक्का लोग hi थिएटर में बैठे थे वो भी सुप्ले. हम दोनों भी एक जगह बैठ गए. थोड़ी देर बाद फिल्म शुरू हो गई. फिल्म बहुत hi बोल्ड थी. कई जगह सेक्सी स्कीन थे. जिसे देखकर मैं गरम हो गया. मैंने मनीषा को देखा तो उसकी भी सांसे सामान्य से तेज़ चल रही थी. मैंने सोचा क्यों ने मनीषा के साथ भी तरय किया जाये. तो मैंने अपने एक हाँथ उसके गार्डन से घुमाकर उसके कंडे पर रख दिया. कंधे पर हाँथ रखने पर उसने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं और सामने देखते हुवे फिल्म देखने लगी.

मैं अपने हाँथ से उसके कंधे को सहलाने laga.thodi देर कंधे को सहलाने के बाद मैंने अपने हाँथ उसके कंधे से सरकते हुवे उसकी चूचियों की तरफ ले जाने लगा. जिससे मनीषा की शरीर में झुरझुरी दौड़ने लगी थी. थोड़ी देर में मैंने अपने हाँथ सरकते हुवे महिषा की चूचियों पर रख दिया और अपना दूसरा हाँथ उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाता रहा. थोड़ी देर तक उसकी जांघ और चुकी सहलाने के बाद मैंने उसकी चुकी को मुठी में भर लिया और जांघ को कपडे के ऊपर से मुट्ठी में लिया और दोनों को जोर से मसल दिया. मनीषा हलके से चीख पड़ी और मेरे दोनों हाँथ को झटक कर मुझको घूरने लगी. उसके इस बदले हुवे रूप को देखकर मैंने उससे पूछा.



मैं- क्या हुवा मनीषा.

मनीषा- मुझे आप सरिता दीदी या सविता दीदी न hi समझे तो ज्यादा अच्छा है आपके लिए.

उसकी बात सुनकर मुझे पक्का यकीं हो गया की इसको हम तीनो की रासलीला के बारे में सब पता चल गया है. ये जानकर तो मेरी हालत ख़राब हो गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो फिल्म नहीं बल्कि मुझे देख रही थी उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था. तो मैंने उसका हाँथ पकड़कर उसे बहार ले जाने लगा. वो भी चुपचाप मेरे साथ चल पड़ी. मैं उसे लेकर एक पार्क में गया और गाड़ी पार्क करके उसे अंडाल ले जाकर एक सुनसान जगह पर बैठ गया और मनीषा से कहा.

मैं- ये तुम वह क्या बोल रही थी.

मनीषा- मैंने क्या कहा. मैंने तो बस इतना hi कहा की जैसे अआप दोनों दीदियो के साथ छेड़खानी करते हैं वैसे मेरे साथ मत किया कीजिये. मुझे गुदगुदी होती है.

मैं- नहीं तुम कोई और बात कह रही थी. जो भी बात है साफ साफ कहो.

मनीषा- कोई बात नहीं है भैया. आप पता नहीं क्या क्या सोच रहे हो. मुझे गुदगुदी होती है इसलिए मैंने आपको मन किया.

मैं- पक्का कोई बात नहीं है न. अगर है तो अभी बता दे.

मनीषा- अरे मेरे बाप. कोई बात नहीं है. जो भी था बता तो दिया.

मैं- लेकिन तुम गुस्सा किस बात पर हो गाइट hi.

मनीषा- क्या कृ भैया आप मुझे गुदगुदी कर रहे था और मेरी जांघो को आपने दबा दिया. जिससे मुझे दर्द हुवा इसलिए थोड़ा गुस्सा आ गया. बस.

मैं- अच्छा चल घर चलते हैं. तूने बहुत बेकार मूवी सेलेक्ट की देखने के लिए.

मनीषा- हां भैया फिल्म वाकई बहुत ख़राब थी. वो दोस्तों ने कहा अच्छी है इसलिए देखने के लिए आई.

मैं- चल फिर अब घर चलते हैं.

उसके बाद हम दोनों घर वापस आ गए. उस दिन और कुछ खास नहीं हुवा. हम को मां पापा जॉब से घर आ गए. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी भी आ गई और मैदान में चलने के लिए बोली. लेकिन मैंने बहाना बनाकर मन कर दिया. जिससे उनका चेहरा उतर गया. फिर रात के खाने की तयारी होने लगी. खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद मेरे व्हाट्सअप पर सविता दीदी का मश्ग आया. दीदी से दिन में फ़ोन पर बात हो गयी थी इसलिए अब वत्स अप्प से बात शुरू हो गयी थी.

सविता दी- ही अभी.

मैं- ही सविता डार्लिंग.

सविता दी- कैसा है तू

मैं- मैं ठीक हूँ. तुम कैसी हो.

सविता दी- ठीक hi हूँ. और घर में सब कैसे हैं.

मैं- सब ठीक हैं. क्या कर रही हो तुम.

सविता दी- कुछ नहीं बस सोने की तयारी कर रही हूँ.

Main-(shararat से)- क्यों जीजा के साथ चुदाई नहीं करनी है क्या.

सविता दी- वो हो गई और वो सो भी गए.

मैं- अच्छा. एक अच्छी सी फोटो भेजो अपनी. बड़ी जल्दी सो गए. कितने बजे शुरू हो गए थे.

दीदी ने अपनी एक बहुत hi सुन्दर सी फोटो सलवार कमीज़ में भेजी. दीदी उस फोटो में बहुत प्यारी लग रही थी. उनकी चूचियों का ऊपरी भाग थोड़ा थोड़ा नज़र आ रहा था.



सविता दी- कितने बजे क्या. अभी 15 मिनट पहले शुरू किया था. इतनी देर में इनका काम तमाम हो गया.

मैं- 15 मिनट में तुम्हारी प्यास कैसे बुझी होगी. तुम्हे तो काम से काम 1 घंटा रगड़ के चुदाई चाहिए. तब तुम्हारी प्यास बुझेगी. इसीलिए तुम बहुत छुडासी रहती हो.

सविता दी- तू फिर से शुरू हो गया. कभी तो ढंग से बात कर लिया कर.

मैं- देखो सविता मैं तो ऐसे hi बात करूँगा. और तुमको करना है बात या नहीं ये तुम डीडे करो. और एक सेक्सी और हॉट सी फोटो भेजो. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो जाये.

सविता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है तू कभी नहीं सुधर सकता.

इतना कहकर दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे दीदी की शट से उनकी चुकी का एक निप्पल दिख रहा था. उस फोटो को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया.



मैं- वह सविता डार्लिंग. क्या फोटो भेजी है तुमने एकदम हॉट. मेरा तो खड़ा हो गया. और बताओ जीजा ने तुम्हारी प्यास बुझाई ठीक से या नहीं.

सविता दी- तेरा से छोड़ने के बाद अब तो पता hi नहीं चला मुझे की कब इनका हथियार अंदर गया और कब बहार आया. तूने इनके काबिल hi नहीं छोड़ा.

मैं- जीजा को कुछ आता hi नहीं की अपनी बीबी को कैसे छोड़ते हैं. तेरी छूट तो ऐसी है की उसमे दिन रत लुंड डालकर पड़ा रहना चाहिए.

सविता दी- चुप बदमाश. बहन हूँ मैं तेरी.

मैं- अच्छा सविता ब्रा में अपनी फोटो भेजो न. बड़ा मन कर रहा है तुम्हारी चूचिया देखने का.

सविता दी- तू तो बड़ा कमीना है. अपनी दीदी को बोल रहा है की अपनी चूचिया दिखा दे. शर्म कर.

मैं- अब ज्यादा नखरा मत दिखाओ यार फोटो भेजो न.

सविता दी- तू मैंने वाला तो है नहीं. अच्छा रुक भेजती हूँ.

उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो ब्रा में भेजी. दीदी एकदम सज संवर कर अपनी फोटो भेज रही थी. आँखों में काजल. गलो पर हलकी लाली. होंठो पर लाल लिपस्टिक. दीदी फोटो में बहुत hi कामुक लग रही थी. मैंने दीदी से फिर कहा.



मैं- सविता ब्रा में अपनी चूचियों को बहार करके कोई फोटो भेजो बड़ा मन कर रहा है देखने का.

मेरे कहने पर सविता दीदी ने एक फोटो भेजी जिसमे उनकी दोनों घुंडीया ब्रा से बहार निकली हुई थी. मेरा लुंड दीदी का ये रूप देखकर झटके मरने लगा. मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या बात है सविता सच में तेरी चूचियों का कोई जवाब नहीं. एकदम ृषभरी और कदम चूचिया हैं तुम्हारी. एक और फोटो भेजो एकदम ऐडा के साथ.

मेरे कहने के कुछ देर बाद hi दीदी ने एक और फोटो भेजी. ये फोटो तो पिछली वाली फोटो से भी ज्यादा सेक्सी थी. इस फोटो में भी दीदी की दोनों घुंडीया ब्रा से बहार थी लेकिन दीदी ने एक ऐडा के साथ ये फोटो भेजी थी. जिसमे वो अपना मुंह गोल करके मुझे चिढ़ा रही थी. मेरा लुंड तो झटके खाने लगा था.



उनकी फोटो देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है सविता. इन दोनों फोटो में तू एकदम रंडी लग रही है. जैसे रंडिया सजती हैं अपने ग्राहकों को रिझाने के लिए. ठीक उसी तरह तेरी फोटो मुझे रिझा रही है. सच में तू किसी रंडी से काम नहीं है. काश मैं वह होता तो तेरी चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर इसका सारा राश पि गया होता. एक और फोटो भेज न वो भी बिना ब्रा के.

सविता दी- बस अब बहुत हो गया. अब कुछ नहीं मिलेगा देखने को. तू फोटो देखकर गन्दी गन्दी बाते करने लगता है. अब मैं नहीं भेजने वाली कोई फोटो वोटो.

मैं- अच्छा सॉरी सविता डार्लिंग. लेकिन मैं क्या करू. तू सच में वैसी hi लग रही है उन फोटो में. अच्छा बस एक फोटो लास्ट और भेज दो.

उसके बात दीदी ने अपनी एक बिना ब्रा की फोटो भेजी. लेकिन ये फोटो उतनी अच्छी नहीं लगी मुझे जितनी अच्छी इसके पहले की दो फोटो थी. मैंने दीदी से कहा.



मैं- तुम्हारी फोटो देखकर अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मैं बहुत जल्दी आने वाला हूँ तुम्हारे पास दीदी.

सविता दी- मैं इंतज़ार करुँगी पता नहीं वो दिन कब आएगा. अच्छा अब तू सो जा. गुड़ नाईट.

उसके बाए मैंने मोबाइल साइड में रख दिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-80

अभी मुझे मोबाइल रखे थोड़ी hi देर हुई थी की मेरे no. पर सरिता दीदी का फ़ोन आ गया. मैंने फ़ोन रिसीव किया तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- ये क्या है अभी तू मुझसे दूर दूर क्यों भाग रहा है. मुझसे ठीक से बात भी नहीं कर रहा है.

मैं- नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है. बस थोड़ा व्यस्त हूँ और कुछ नहीं. अच्छा फ़ोन रखो मुझे सोना है.

इतना बोलकर मैंने फ़ोन रख दिया. कुछ देर बाद दीदी ने फिर फ़ोन किया लेकिन मैंने नहीं उठाया और मोबाइल साइलेंट में कर दिया. थोड़ी देर बाद दीदी का मश्ग मीरा वाली ईद पर आया. लेकिन मैंने उसका भी रपल्य नहीं किया. मेरे ऐसे इग्नोर करने से दीदी को अच्छा नहीं लग रहा था. लेकिन मैंने अभी उनको इग्नोर करना hi ठीक समझा. मैंने अपना मोबाइल साइड में रखा और सो गया.

सुबह मैं अपने समय से उठा और जिम करने लगा. कुछ देर बाद सरिता दीदी कमरे में आ गई. मैंने उनसे कोई बात नहीं की और बहार आने लगा तो दीदी ने कहा.’

सरिता दी- कहा जा रहा है अभी. मुझे प्रैक्टिस तो करवा.

मैं- मैं जा रहा हूँ मॉर्निंग वाक पर. आपको जो वर्कआउट बताया था वही करिये आप.

इतना बोलकर मैं निचे चला गया. मेरे इग्नोर करने से दीदी का चेहरा एकदम उदास हो गया था. मैं बहार जाकर 1 घंटे बाद वापस आया और अपने कमरे में चला गया. नास्ते के समय निचे आया और मां पापा के साथ मिलकर नाश्ता किया और मम्मी पापा जॉब पर चले गए तो मैं भी बहार जाने के लिया रेडी होने लगा तभी सरिता दीदी सफाई के लिए कमरे में आई. तो मैं बहार जाने लगा तो उन्होंने मेरा हाँथ पकड़ लिया और एकदम धीमे आवाज़ में बोली.

सरिता दी- क्या हुवा अभी तू मुझसे नाराज़ है. मुझसे कोई गलती हुई है क्या.

मैं- नहीं मैं आपसे क्यों नाराज़ होऊंगा. आपसे कोई गलती नहीं हुई है. गलती तो मुझसे हुई है.

सरिता दी- तो तू मुझद ऐसे इग्नोर क्यों कर रहा है.

मैं- मैं कहा इग्नोर कर रहा हूँ. बस मुझे कुछ काम है इसलिए मैंबाहर जार अहा हूँ.

इतना कहकर मैं बिना उनकी बात सुने बहार चला गया. मैं अपने काम पर गया और कुछ देर में काम समेत कर वापस घर आ गया और अपने कमरे में बैठकर काम करने लगा. जब मैं अपना काम पूरा कर चुक्का तो मैं बाथरूम में चला गया. लगभग 15 मिनट बाद जब मैं कमरे में पंहुचा तो मनीषा कमरे में बैठी हुई थी. मैंने उससे आने का करना पूछा तो उसने कहा.

मैं- हाँ मनीषा कुछ काम था.

मनीषा- हां भैया वो क्या है न मेरी कमर में बहुत दर्द हो रहा है. मैं सोने की कोशिश कर रही हूँ पर नींद नहीं आ रही है.

मैं- अच्छा चल मैं तुझे डॉक्टर के पास लेकर चलता हूँ.

मनीषा- नहीं भाइये मैं डॉक्टर के पास नहीं जाउंगी. मुझे सुई से बहुत दर लगता है.

मैं- जब डॉक्टर के पास नहीं जाएगी तो तेरा कमर दर्द कैसे ठीक होगा.

मनीषा- वो ठीक हो जाएगा अगर आप मेरी कमर की मालिश कर दे तो.

मैं- मैं कैसे कर सकता हूँ. सरिता दीदी से बोल दे वो कर देंगी.

मनीषा- वो तो सो रही हैं. प्ल्ज़ भैया मालिश कर दो न.

मैं- तू समझ नहीं रही है. में तुझे मालिश कैसे करू. तू मेरी बहन है.

Manisha-mujhe आप सच में प्यार नहीं करते. दोनों दीदियो की सेवा के लिए तो आप हमेशा तैयार रहते हैं. लेकिन मेरी मालिश नहीं कर सकते.

मनीषा का बात बात पर सविता दीदी और सरिता दीदी को बिच में लाना मुझे खटक रहा था. कुछ न कुछ तो था. जो इसको पता था. लेकिन क्या ये पता नहीं था. मुझे सोच में डूबा देखकर उसने कहा.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप मेरी मालिश करेंगे न.

मैं- अच्छा मेरी माँ. चल मैं आता हूँ तेरे कमरे में.

मनीषा- नहीं भैया मैं यही आती हूँ तेल लेकर आपके कमरे में.

इतना बोलकर वो अपनी गांड मटकती निचे चली गई. थोड़ी देर बाद वो वापस आई तो उसने कपडे बदल लिए थे. उसने अपनी 2 साल पहले जो t-shirt तीते होने के कारन पहनना छोड़ दी थी वो पहनकर आई थी. जिसमे से उसकी चूचिया बहार की और t-shirt फाड़कर निकलने के लिए तैयार थी. निचे उसने लेग्गी पहना था जो एकदम उसकी टैंगो से चिपका हुवा था. मैं तो बस उसकी चूचियों को हे देखता रहा. और कुछ देर बाद कहा.



मैं- ये क्या पहनकर आई हो. इसमें कैसे मालिश होगी. जाओ कोई लूसे कपड़ा पहनकर आओ.

मनीषा- नहीं भैया ये कपडा पुराण है तो इसमें तेल लग भी जाएगा तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी दूसरे कपडे तेल लगने से ख़राब भी हो सकते हैं.

इतना कहकर वो मेरे बिस्टेर पर पेट के बल लेट गई. उसके लेटने से उसकी बड़ी बड़ी गांड ऊपर की तरफ निकल आई थी. मैं अब उसकी गांड को देखने लगा. थोड़ी देर तक उसकी गांड को देखने के बाद मैं भी उसकी गांड के पास बैठ गया और अनजान बनते हुवे उसकी गांड पर अपना हाँथ रख दिया और उसके बोलै.

Main-kya तुझे बहुत दर्द हो रहा है. अगर ज्यादा दर्द न हो रहा हो तो बाद में दीदी या मम्मी से मालिश करवा लेना.

मेंशा- नहीं भैया बहुत दर्द हो रहा है. आप hi कर दीजिये न मालिश.

मेरा हाँथ उसकी गांड पर था लेकिन अभी तक उसने हाँथ हटाने के लिए नहीं कहा था. ये देखकर मेरा हौसला बढ़ा और मैं एक हाँथ से उसकी गांड सहलाने लगा और दूसरे हाँथ से उसकी t-shirt कमर से ऊपर करने लगा. थोड़ी देर मैं ऐसे hi उसकी गांड को सहलाता रहा फिर अपना हाँथ उसकी गांड से उठा लिया. फिर मैंने कटोरी उठाई और उसकी कमर पर तेल लगाने लगा. तेल लगते हुवे मैंने उससे थोड़ा खुलकर बात करने की सोची इसलिए मैंने उससे कहा.’

मैं- और बताओ मनीषा तुम्हारी पढाई कैसी चल रही है.

मनीषा- अच्छी चल रही है भैया.

मैं- अच्छा ये बताओ. सोल्लगे सिर्फ पढ़ने के लिए hi जाती हो या थोड़ी मौजमस्ती भी करती हो.

मनीषा- नहीं भैया. मैंने सोल्लगे सिर्फ पढ़ने के लिए hi जाती हूँ.

मैं- अच्छी बात है. अच्छा ये बताओ कोई बर्फ बनाया अभी तक या नहीं.

मनीषा- क्या भैया. मैं आपको ऐसी देखती हूँ जो बर्फ बनती फिरू.

मैं- अरे नहीं मनीषा. मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था. अच्छा ये t-shirt तुम्हारे पेट के निचे फांसी हुई है इसको थोड़ा ऊपर करो तभी तो ठीक से मालिश करूँगा.

मेरे ऐसा कहने पर मनीषा ने अपने t-shirt पेट उठाकर अपनी चूचियों तक कर ली और फिर लेट गई. मैंने फिर उसके t-sirt को उसकी पीठ पर बंधी ब्रा की पत्तियों तक खिसका दिया और मालिश करने लगा. मनीषा का शरीर गोरा था. उसकी पीठ एकदम साफ थी. कोई दाग कोई टिल का नामोनिशान नहीं था. मैंने उसकी पीठ की मालिश करता हुवा गरम होने laga.fir मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मैं- तुमने बताया नहीं मनीषा की तुम्हारा कोई बर्फ है या नहीं है.

मनीषा- मेरा कोई बर्फ नहीं है भैया.

मैं- मैं मान hi नहीं सकता की तुम्हारा कोई बर्फ नहीं है. तुम झूठ बोल रही हो.

मनीषा- नहीं भैया मई सच बोल रही हूँ. कसम से मेरा कोई बर्फ नहीं है.

मैं- विश्वास नहीं होता मनीषा की तुम्हरी जैसी खूबसूरत लड़की का कोई बर्फ नहीं है.

मनीषा- (अपनी तारीफ सुनकर सहरमाने लगी) सच में नहीं है. अच्छा आप बताइये आप को तो 2-4 गफ जरूर होंगी.

मैं- कहा मनीषा. मेरी भी कोई गफ नहीं है.

मनीषा- लेकिन मुझे तो ऐसा नहीं लगता.

मैं- क्यों तुझे फिर कैसा लगता है.

मनीषा- मुझे तो लगता है की आपकी 2 गफ हैं.

उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग फिर सरिता दीदी और सविता दीदी की तरफ चला गया. ये मनीषा कुछ तो जानती है. इसलिलिये ये बात बात तो उन्ही तरफ इशारा करती है. लेकिन अभी मैं षुरे नहीं था इसलिए मैंने कहा.

मैं- अच्छा मनीषा अगर तू कहे तो मैंने तेरे पुरे पीठ की मालिश कर दूँ.

मनीषा- नहीं भैया. बस कमर की hi कर दो.

मैं- देख मनीषा मैं बहुत अच्छी मालिश करता हूँ. मैं तेरे पुरे शरीर का दर्द मिटा दूंगा. एक बार मुझे मालिश तो करने दे.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कुछ देर सोचा फिर कहा.

मनीषा- ठीक है भैया. अब आप इतना कह रहे हैं तो कर दीजिए मालिश.

मैं- लेकिन उसके लिए तुझे अपनी t-shirt और ऊपर करनी पड़ेगी.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी तरफ देखा और फिर पेट उठाकर अपनी t-shirt आगे से चूचियों से उठाकर गले तक कर ली. जिससे साइड से उसकी चूचिया ब्रा में दिखने लगी. मैं भी अब थोड़ा थोड़ा गरम होने लगा. मेरा लुंड तो पहले से hi खड़ा हो चुक्का था. मैंने ाहिष्ता से मनीषा की t-shirt सरकते हुवे उसकी गार्डन तक कर दिया. अब मनीषा की पीठ एकदम नंगी मेरे सामने थी जिसपर ब्रा की पत्तिया नजर आ रही थी.



फिर मैंने अपने हांथो में तेल लिया और उसकी पीठ की मालिश करने लगा. उसकी पीठ की मालिश करते समय जब मेरा हाँथ उसकी ब्रा की पत्तियों को छूटा तो उसके शरीर में एक सनसनी सी दौड़ जाती.

मनीषा की साँस भी अब भरी हो रही थी. वो भी अब गरम हो रही थी. थोड़ी देर तक उसकी पीठ की मालिश करने के बाद मैंने उससे कहा.

मैं- मनीषा बगल से बैठकर ठिक्क से तुम्हारी पीठ की मालिश नहीं कर प् रहा हूँ. अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे पेअर पर बैठ कर तुम्हारी पीठ की मालिश कर दूँ.

मनीषा जो अब तक इस मालिश के कारन गरम हो गई थी. उसकी तेज़ सांसे मुझे साफ सुनाई पद रही थी. उसने काना.

मनीषा- ठीक है बैठ जाइये. लेकिन अपना पूरा वजन मत रखना नहीं तो मेरे पेअर टूट जाएंगे.

उसकी बात सुनकर मैं उसके दोनों तरफ पेअर करके उसकी जांघो पर बैठ गया. और उसकी मालिश करने लगा. मैंने पहले उसकी कमर की मालिश की. उसके बाद धीरे धीरे ऊपर की तरफ मालिश करने लगा. पीठ की मालिश करने के लिए मुझे थड़ा झुकना पड़ता था जीसस मेरे खड़ा लुंड उसकी गांड पर चुभ रहा था. मनीषा को भी मेरे लुंड की चुभन अपने गांड पर महसूस हो रही थी. तभी तो उसने 4-5 बार अपनी गांड हिला कर मेरे लुंड को अपनी गांड से टच होने से रोका. लेकिन जब वो रोक नहीं पाई तो उसने अपनी उखड़ी सांसो को दुरुस्त करते हुवे मुझसे कहा.

मनीषा- भैया ुतो मेरे ऊपर से. मुझे आने दबा रखा है बहुत दर्द हो रहा है.

मैं- लेकिन अभी मालिश नहीं हो पाई है पूरी.

मनीषा (थोड़ा गुस्से में). उठो भैया. यहाँ मेरा डैम घुट रहा है और आपको मालिश की पड़ी है.

मनीषा के गुस्सा करने पर मैं उसके ऊपर से उठ गया. लेकिन मेरे उठ जाने से मेरा खड़ा लुंड लोअर में साफ़ दिख रहा था. मनीषा भी अपनी t-shirt को निचे करने के बाद बिस्टेर पर बैठ गई. लेकिन उसके बैठते hi उसकी नजर मेरे लुंड पर पड़ी तो वो जैसे मन्त्र मुग्ध होकर उसे देखने लगी. मैं भी कभी मनीषा को देखता तो कभी अपने लुंड को. जब मनीषा ने भरपूर दीदार मेरे लैंड का कर लिया तो उसने कहा.

मनीषा- आप कितने गंदे हो भैया. मुझे मर डालने का इरादा था क्या. मैंने आपको कहा था की पूरा वजन मत डालना. लेकिन आप तो मेरे ऊपर बैठ गए. आपको पता है मुझे कितना दर्द हुवा था यहाँ पर.

इतना कहकर वो अपनी गांड को सहलाने लगी और मेरी तरफ देखने लगी. उसने ये बात इतनी मासूमियत से बोली थी की मैं फिर से कंफ्यूज हो गया और मनीषा में आये इस बदलाव को मैं समझ नहीं पाया. वो देखने में इतनी मासूम थी की कोई कह नहीं सकता था की वो चुदाई चूसै के बार में कुछ जानती होगी. लेकिन उसकी कुछ दिन की हरकतों के कारन मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये मेरी सोच का धोखा है या सच में उसे कुछ पता है

Main-Are सॉरी मनीषा मैंने जानबूझकर ये सब नहीं किया वो मेरे पेअर दर्द होने लगा था इसलिए मैंने थोड़ा वजन दाल दिया था तुम्हारे ऊपर.

मनीषा- हाँ भैया आपसे सरे काम गलती से hi हो जाते हैं. आप कुछ जानबूझकर करते hi कहा हैं.

ये बात उसने फिर से बड़ी मासूमियत से बोली थी. उसकी बात सुनकर मैं उसकी आँखों में देखने लगा और कुछ पढ़ने की कोशिश करने लगा. लेकिन मुझे उसकी आँखों में बस मासूमियत hi नज़र आई लेकिनउसकी कही गई बात सुनकर मैं फिर से कंफ्यूज हो गया. क्योंकि ये बात तो सविता दीदी ने मुझसे कई बार कही थी. तो मनीषा ऐसी बात क्यों बोल रही है. मेरे दिमाग में अब उथल पुथल मची हुई थी. मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. तभी मनीषा की बात से मेरी तन्द्रा टूटी.

मनीषा- अच्छा भैया मैं जा रही हूँ. थैंक यू भैया. इतनी अच्छी मालिश करने के लिए.

मैं- कोई बात नहीं मनीषा. ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

ये सुनकर मनीषा बहार जाने लगी. तो मैं भी दरवाज़े के पास आकर खड़ा हो गया. जब मनीषा निचे उतर गई तो उसने पलटकर मुझे देखा और एक स्माइल देकर अपने कमरे में चली गई.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

आपकी बात सही है, लेकिन कहानी के हिसाब से सविता और सरिता का चरित्र ऐसे दिखाना जरूरी था। ऐसा मुझे लगता है।

बाकी रही मनीषा की बात तो आपका सुझाव बिल्कुल सही है। मनीषा के जरूर ऐसा ही होगा, लेकिन जब तीनों बहनें साथ में होंगी अभी के बिस्तर पर। तो उसके बारे में फिलहाल अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

साथ बने रहिये।
 
अपडेट-81

मनीषा- अच्छा भैया मैं जा रही हूँ. थैंक यू भैया. इतनी अच्छी मालिश करने के लिए.

मैं- कोई बात नहीं मनीषा. ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

ये सुनकर मनीषा बहार जाने लगी. तो मैं भी दरवाज़े के पास आकर खड़ा हो गया. जब मनीषा निचे उतर गई तो उसने पलटकर मुझे देखा और एक स्माइल देकर अपने कमरे में चली गई.

अब आगे.

मनीषा के जाने के बाद मैंने अपने दिमाग को रिलैक्स करने के लिए सोना hi बेहतर समझा. इसलिए मैं सो गया. जब मैं सोकर उठा तो मम्मी पापा घर आ चुके the.main भी फ्रेस होकर निचे आ गया था. आज सरिता दीदी को इग्नोर करते हुवे मुझे 3 दिन हो चुके थे. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी आई और मैदान में चलने के लिए कहने लगी तो मैंने मन कर दिया की मेरा मूड नहीं है तो सरिता दीदी पापा से शिकायत लगाने लगी.

सरिता दी- पापा देखो अभी 3 दिन हो गए हैं न तो मुझे जिम की एक्सेरसीज़े करवा रहा है और न hi कार चलना सीखा रहा है.

पापा- क्यों अभी तुम्हारी दीदी ये क्या बोल रही है.

मैं- हां पापा अब मैं इनको कुछ नहीं सिखाऊंगा.

पापा- लेकिन क्यों नहीं सिखाएगा. जब वो सीखना चाहती है तो तू क्यों मन कर रहा है.

मैं- तो और क्या करू पापा. दीदी मेरी बात मानती hi नहीं है. ऊपर से ये मुझे hi सीखने लगती हैं. जब मैं बताता हूँ की इसे ऐसे करो. वो ये करती hi नहीं हैं. जब मैं इनसे पूछता हूँ की मेरे साथ एक्सेरसीज़े करना अच्छा लग रहा है. आप मुझे सुपरटे करो तो ये कोई जवाब hi नहीं देती. जब कार सिखाते समय इनको बताता हूँ की कैसे चलनी है. क्लुछ एक्सेलेटर कैसे उसे करना है तो ये उसपर ध्यान hi नहीं देती. तो मैं इन्हे क्यों सिखौ. जब ये मेरे साथ सुपरटे नहीं करेंगी तब तक मैं इन्हे कैसे सिखाऊंगा

पापा- क्यों सरिता अभी ये क्या बोल रहा है.

सरिता दी- नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है.

मैं- पापा आप दीदी को बोल दीजिये की जब तक ये मेरी बात नहीं मानती और मुझे सूपरस्त नहीं करती तब तक मैं इन्हे कुछ नहीं सिखाऊंगा.

पापा- अभी ठीक hi तो कह रहा है. जब तुम उसको किसी काम में सुपरटे hi नहीं करोगी तब तक ये तुम्हे कैसे सिखाएगा.

थोड़ी देर तक जब दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने फिर से कहा.

मैं- देखा पापा जब आप कह रहे है तब भी ये कोई जवाब नहीं दे रही हैं. तो सोचिये में तो इनसे छोटा हूँ तो ये मेरी बात कितना सुनेंगी, कितना मानेंगे और जवाब देंगी.

पापा- ठीक है. रहने दो फिरर शायद अभी उसका मन नहीं है तो फालतू का टाइम वेस्ट मत करो. जब उसे सिखने होगा तो खुद hi तुझसे बोल देगी.

इतना कहकर पापा अपने कमरे में चले गया. तो मैं भी अपने कमरे में चला गया. दीदी और मनीषा रत के खाने की तयारी करने लगे. थोड़ी देर बाद मैं भी निचे आ गया. सब लोग खाना खाने के लिए बैठ गए और खाना खाने लगे. मैंने खाना कहते समय सरिता दीदी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. जब मनीषा को देखा तो वो खाना खाने में व्यस्त थी और कभी कभी मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी. खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया बिस्टेर पर लेटकर सविता दीदी से फ़ोन पर बात करने लगा. थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने उन्हें गुड नाईट बोलकर फ़ोन रख दिया और एक किताब निकलकर पढ़ने लगा. थोड़ी देर बाद मुझे मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग आया तो आज मैंने बात करने की सोची और उन्हें रपल्य किया.

म- ही

सरिता दी- ही की बच्ची. इतने दिन कहा थी. मुझसे मन भर गया है क्या तुम्हारा जो अब बात नहीं करना चाहती हो.

म- अरे अरे रुको तो मेरी बात तो सुन लो. आते hi शुरू हो गई.

सरिता दी- हां बोलो क्या बात थी जो मुझसे बात नहीं कर रही थी.

म- अरे यार मां पापा तीन दिन के लिए बहार गए थे तो घर में मैं और भाई hi थे. तो तुम समझ सकती हो. इसलिए बात नहीं की.

सरिता दी- अरे यार थोड़ी देर समय नीलालकर बात तो कर सकती थी न.

म- अरे यार तुम समझ नहीं रही हो. भाई ने इन तीन दिनों में छोड़ छोड़ कर मेरी कचूमर निकल दिया. 3 दिन न वो घर से बहार गया और न मुझे जाने दिया. पुरे तीन दिन हम दोने नंगे hi रहे. घर का कोई भी ऐसा कोना नहीं बचा जहा उसने मुझे कुटिया की तरह न छोड़ा हो. बहुत मज़ा आया. लाइफ में ऐसा मौका पहली बार मिला था इसलिए मैं भी ये मौका हाँथ से नहीं जाने देना चाहती थी. इसलिए तीन दिन तक no टॉक ओनली चुदाई. लेकिन तुम्हे क्या हुवा. तुम मुझपर इतनी भड़क क्यों रही हो. सब ठीक तो है न.

सरिता दी- क्या खाक ठीक है. कुछ भी ठीक नहीं है मेरे साथ.

म- क्यों क्या हो गया मुझे भी तो बताओ

सरिता दी- अरे यार भाई मुझसे नाराज़ हो गया है. तीन दिन से ठीक से बायत नहीं कर रहा है.

म- आखिर ऐसा क्या हुवा जो उसने बात बंद कर दी तुमसे.

फिर सरिता दी ने पूरी कहानी बता दी. जिसे सुनाने के बाद मैंने कहा.

म- मैंने कहा था तुमसे की अगर चुदाई का मज़ा लेना है तो खुलकर अपने भाई का साथ दो. लेकिन तुमने मेरी बात नहीं माहि. तो अब क्यों परेशां हो रही हो. तुम भी तो यही चाहती थी.

सरिता दी- अरे यार मुझे थोड़ी पता था की वो नाराज़ हो जाएगा. तुम्हे पता नहीं है की इन तीन दिनों में मेरी क्या हालत हो गई है. एक एक पल काटना कितना मुश्किल भरा रहा मेरे लिए.

म- अच्छा इतना पसंद आ गया तुमको तुम्हारा भाई की उसके बिना तुम्हारा समय नहीं काट रहा है.

सरिता दी- हाँ यार 3 दिन से उसने मेरे जिस्म को हाँथ तक नहीं लगाया. मेरा जिस्म उसकी छुवन के लिए तरस रहा hai.main कितनी बार उसके सामने गई. की वो मुझे छुवे. मुझे सहलाये. मेरे अंगो को सहलाये. इनके साथ खेले. लेकिन उसने मुझे छूना तो दूर सीधे मुंह बात नहीं की.

म- लेकिन अब तो वो नाराज़ हो गया है. तुम उसे छोड़ दो और किसी दूसरे को पटाने की कोशिश करो.

सरिता दी- तुम ये कैसी बाते कर रही हो. मुझे अब अपने भाई से hi छोड़ना है. अगर वो मुझसे नाराज़ न हुवा होता तो अब तक मैं उससे छुड़वा भी लेती. मुझे उसका लुंड अपनी छूट में लेना है किसी भी कीमत पर. उसने मुझपर पता नहीं कैसा जादू कर दिया है की अब मेरा तन और मन उसका हो गया है.

म- लेकिन तुम्हारा भाई को तो गन्दी चुदाई पसंद है और तुम्हे तो गन्दी चुदाई पसंद hi नहीं है. अगर वो चुदाई के टाइम गली देने लगा. तुम्हारी गांड और चूचियों पर थप्पड़ मरने लगा तो तुम क्या करोगी.

सरिता दी- मुझे बस उससे छुड़वाना है. उसका जैसे मन करे मुझे वैसे चोदे. गली देखर चोदे, मार मार कर चोदे. लेकिन मुझे चोदे. मेरा शरीर जल रहा है. अब मुझसे अपने जिस्म की प्यास बर्दास्त नहीं होती. तू कुछ उपाय बता न. मैं उसे कैसे मनौ.

दीदी ऐसी गन्दी गन्दी बाते करके एकदम गरम हो गई थी इसलिए मैंने सोचा की आज दीदी को एकदम खोलकर रख दू. ताकि मैं जैसा चहु वैसा दीदी को छोड़ पाउ. तो मैंने दीदी से कहा.

म- चलो थोड़ा सा कुछ रोमांटिक सा गेम खेलते हैं. मैं तुम्हारे बारे में अनुमान लगाती हूँ. और तुम्हे मज़ा करवाती हूँ. तुम मान लो की तुम किसी की दुल्हन बन चुकी हो. लेकिन तुम्हारे पति तुमपर काम और अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते हैं. और उनका लुंड छोटा सा है. जस्ट िमागिन फॉर फन

सरिता दीदी- कैसा मज़ा और किसकी दुल्हन. तुम क्या करने वाली हो.

म- बस देखती जाओ तुम मेरा साथ खुलकर देती जाना तुम्हे बहुत मज़ा आएगा. विश्वास करो.

सरिता दी- ठीक है मैं तुम्हारा पूरा साथ दूंगी.

म- ोकक तुम्हारी उम्र के हिसाब से मेरे मन में तुम्हारी एक तस्वीर बन रही है.

सरिता दी- कैसी तस्वीर बन रही है.

म- मेरे हिसाब से आपके काळा घने लम्बे बाल होंगे. जिसकी महक किसी गुलाब के फूल से काम नै होगी. ये जब उड़ते होंगे तो ऐसा लगता होगा जैसे आसमान में काली घटा छ गई है.

सरिता दीदी मीरा की अपने काल्पनिक छवि की तारीफ सुनकर बोली.

सरिता दी- अच्छा और कुछ.

म- तुम्हारे चेहरे का नूर. तुम्हारी पूरी मांग में हल्का हल्का सिन्दूर, तुम्हारे माथे पर चाँद सितारों की तरह चमकती बिंदी. और तुम्हारी कजरारी काली आँखे. जिनमे एक अलग तरह का नशा होगा किसी को भी घायल करने के लिए.

कोई भी लड़की अपनी तारीफ सुनकर खुश हो जाती है. मीरा से अपने लिए ऐसी तारीफ सुनकर सरिता दीदी के मन में गुदगुदी होने लगी. मेरी बातो का असर दीदी पर होने लगा. दीदी मुस्कुरा कर कहा.

सरिता दी- हाँ बात तो तुम ठीक कह रही हो. और आगे बताओ.

M-tumhare लरजते गुलाब की पंखुड़ियों जैसे रसीले होंठ. जिन्हे देखकर हर मर्द की ख्वाशीष इन रसीले होंठो के जैम पिने की होती होगी.

सरिता दी पर म की कामुक और सेक्सी बातो का असर दिखने लगा था. आज तक किसी ने भी उनकी इतनी तारीफ नहीं किट hi. वो चाहे लड़की hi क्यों न हो. म से अपनी इस तारीफ को सुनकर दीदी उन्मादित होने लगी थी. लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओ को छिपाते हुवे कहा.

सरिता दी- अरे यार मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ जितनी तुम तारीफ कर रही हो.

म- अभी तो मैंने तुम्हारी सुंदरता के बारे में ये तो एक ट्रेलर था. पूरी फिल्म तो अभी बाकी है अगर तुम कहो तो पूरा खुलकर और विस्तार से बताऊ.

सरिता di(apni तारीफ और सुनने के लिए) हाँ बताओ.

म- तुम आजकल जो कपडे पहनती हो उसका गाला बड़ा होता होगा. जिसमे से तुम्हारी जालिम चूचिया बहार निकलने के लिए बेताब रहती होंगी. जिससे तुम्हारी गोरी और ठोस चूचिया तुम्हे और ज्यादा सेक्सी और हॉट बनती होंगी.



सरिता दी वाकई ऐसी hi थी. एक अनजान लड़की जिससे वो कभी मिली भी नहीं थी. उसके मुंह से अपनी काल्पनिक तस्वीर की काल्पनिक तारीफ सुनकर वो हैरान थी की ये काल्पनिक तस्वीर हूबहू उसी की है. पर दीदी को नहीं पता था की जो उनके हुस्न की तारीफ कर रहा है उसकी सामने वो रोज अधनंगी घूमती रहती हैं. दीदी अपने हुस्न की तारीफ सुनकर गरम होने लगी और बोली.

सरिता दी- तुम तो मेरी तारीफ ऐसे कर रही हो. जो हकीकत है. और जैसे मैं तुम्हारे सामने कड़ी हूँ

म- अरे अभी कहाँ. अभी तो मैं तुम्हे कुछ ऐसी बाते भी बताऊंगा. जो सिर्फ तुमको hi पता होगी.

सरिता दी- अच्छा देखती हूँ. आगे बताइये.

M-achha पहले ये बताइये की तुम्हारी तारीफ कहाँ से सुरु करू. आगे से या पीछे से.

सरिता दी- जहा से करने का तुम्हारा मन करे.

म- यही सब बाते तुम्हे अपने भाई से भी बोलनी है की भाई तुम्हारा जहा से मन करे वह से करो.

सरिता दी- तुम अभी उसकी बात छोडो और आगे बताओ.

म- ठीक है फिर मैं आगे से शुरू करती हूँ. मुझे लगता है की ज्यादा तर तुम डीपनैक क्लॉथ hi उसे करती हो जो पीछे से भी डीप होता होगा. जिसमे से तुम्हारी गोरी मांसल चिकनी पीठ और कातिल दिखती होगी. जब किसी मर्द की नज़र तुम्हारी सेक्सी पीठ पर पड़ती होगी तो उसके मुंह से सिसकारी निकल जाती होगी और वो अपनी कल्पना में तुम्हारी नरम, मिलायम और चिकनी पीठ को अपने गरम होंठो से चूमने लगता होगा.



मीरा की बात सुनकर दीदी के जिस्म में चीटिया सी रंगने लगी, उनकी साँस भरी होने लगी उनके शरीर का सारा खून उनकी चूचियों में जमा होने लगा. उनकस जिस्म वासना के कारन सुलगने लगा.

सरिता दी- ये तुम क्या कह रही हो. क्या लोग मेरे बारे में सचमुच ऐसा hi सोचते होंगे.

म- और नहीं तो क्या. तुम कभी अपने आपको ठीक से आईने में देखो तब तुम्हे पता चलेगा की तुम्हारी जवानी कितनी कातिल है. और ये तो कुछ भी नहीं तुम्हारे बारे में तो लोग और बहुत कुछ सोचते होंगे. कई मर्द तो तुम्हारी गोरी, मांसल और चिकनी पीठ को तो मुंह में भरकर दांतो से काटते भी होंगे.

मीरा की बात सुनकर दीदी के मुंह से सिसकारी निकलने लगी की लोग उसके बारे में ऐसा सोचते हैं. दीदी का हाँथ अब खुद hi अपनी चूचियों पर चला गया और उसे हलके हलके मसलने लगी और बोली

(सभी पाठको को एक बार फिर से ये बता देना चाहती हूँ की अभी अपनी मीरा वाली ईद से सरिता दीदी से चाट पर बात कर रहा है, लेकिन कहानी को और कामुक और सेक्सी बनाना के लिए आप ये सोचकर कहानी पढ़िए की दोनों में कॉल पर बात हो रही है तो ज्यादा आनंद आएगा.)

सरिता दी- तुम्हारी बाते तो मदहोश करने वाली हैं मीरा.

म- मेरी बाते नहीं. मदहोश तो वो लोग हो जाते हैं जब उनकी नज़र तुम्हारी कमर के निचे तुम्हारी सुडौल, गद्देदार, फैली हुई कातिल गांड पर जाती है, तुम्हारी कातिल और गद्देदार गांड को देखकर उनकी आँखे फटी की फटी रह जाती होंगी. तुम्हारी कूल्हे उनकी आँखों में नहीं समां पते होंगे.



मीरा की बात सुनकर दीदी बहुत गरम हो गई थी वो अपने हांथो से अपनी चूचिया दबती हुई बोली.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ये तुम क्या कह रही हो

M-kyon, मैंने कुछ गलत कहा क्या, क्या मैंने जैसे बताया वैसी गांड नहीं है तुम्हारी.

सरिता di-(madhosi में). नहीं तुम बिलकुल सही कह रही हो. मेरी उससे थोड़ी सी बड़ी हो होगी जैसा तुमने बताया है.

म- तो क्या हुवा जो बड़े हैं. आजकल के मर्दो को बड़े बड़े ज्यादा पसंद हैं और जहा तक मुझे लगता है तुमको भी बड़े hi पसंद हैं.

सरिता दी- (गरम होकर मदहोशी में) uuuuuuuuuuuufffffffffffff ohhhhhhhhhhhhhh तुम कितनी मदहोश और गरम करने वाली बाते करती हो.

इतना कहते हुवे दीदी एक हाँथ से अपनी चूचियों को दबाते हुवे दूसरा हाँथ अपनी छूट पर लोअर के ऊपर से रख लिया और दबाने लगी.

म- सच कहु तो मदहोश तो तुम लोगो को करती होगी मर्दो को. उनकी नज़र जब सामने से तुम्हारे उपाद पड़ती होगी तो तुम्हारी दीब गले के कपडे से बहार झांकती तुम्हारी जालिम और गोरी चूचियों के बिच की गहराई में hi उलझकर रह जाती होगी.



सरिता di-AAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhh साछहहह मीटी क्या ऐसा होता होगाआआ. मुझे तो विश्वास hi नहीं होता.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-82

दीदी मीरा की बातो से इतनी ज्यादा गरम हो गई थी की उनका हाँथ तेज़ी से अपनी चुकी और छूट पर चलने लगा था. जिससे दीदी की छूट गीली हो गई थी. दीदी को अपने शरीर पर अपने कपडे बोझ लगने लगे थे. इसलिए दीदी ने अपनी t-shirt उतर फेकि. दीदी ने अंदर ब्रा पहनी हुई थी. उनकी छूट पानी छोड़ने लगी थी. जिसका धब्बा उनकी लोअर में बन गया था. दीदी ने अपनी चूचिया जोर जोर से मसलते हुवे अपने लोअर में हाँथ डालकर अपनी छूट को भी रगड़ने लगी. दीदी अब एकदम छुडासी हो चुकी थी. इस समय दीदी की कंडीशन ऐसी हो गई थी की वो किसी का भी लुंड अपनी छूट में डलवा सकती थी. दीदी से ऐसे बात करके मैं भी गरम हो गया था जिसके कारन मेरा लुंड भी एकदम तन गया था, इसलिए मैंने भी अपनी लोअर उतर फेकि और अपने लुंड को बहार निकल लिया. मैं अच्छी तरह जनता था की किसी भी लड़की या औरत के गरम हो जाने के बाद उसके शर्म के परदे को उतरना बहुत आसान हो जाता है. इसलिए आज मैं दीदी के शर्म के परदे को पूरी तरह से उतर देना चाहता था. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

M-waise एक बार कहूँ डार्लिंग.

सरिता दी- हम्मम्मम्मम्म

म- तुम्हारा पति तो तुमको अचे से छोड़ता hoga.pura मज़ा लेके.

सरिता di-Haa. छोड़ता तो है लेकिन उनके पास ज्यादा समय नहीं रहता अक्सर काम में hi व्यस्त रहते हैं.

म- हाँ लेकिन जब छोड़ते होंगे तो जबरदस्त तरीके से छोड़ते होंगे. तुम्हारा अंजार पंजर ढीला कर देते होंगे.

सरिता दी- हैं ठिक्क ठाक कर लेते हैं. (दीदी ने दबे मन से कहा)

म- मतलब तुम्हारे मुताबिक नहीं करते. जैसा तुम छुड़वाना चाहती हो.

मीरा की बातो का दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. लेकिन मदहोशी की वजह से साँस ऊपर निचे हो रही थी.

म- अच्छा एक बात बताओ. पति से चुदाई करते समय तुमको कभी ऐसा नहीं लगा की तुम्हारे पति का लुंड थोड़ा और लम्बा और मोटा होता तो ज्यादा अच्छा होता और पति देर तक करते तो ज्यादा अच्छा लगता.

मैंने ये बात दीदी को बड़े लुंड की तरफ यही अपनी तरफ और ज्यादा घूमने के लिए कही थी.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmm

म- मतलब तुम्हारी मन लम्बे चौड़े लुंड से छुड़वाने का करता है.

दीदी मीरा की बातो से और भी ज्यादा गरम हो रही थी. जिसके कारन उन्होंने अपनी ब्रा और लोअर भी निकल कर फेक दी. ये बस एक कल्पना मात्र थी. लेकिन दीदी ऐसी बात पहली बार कर रही थी और िमागिन कर रही थी इसलिए वह अपनी छूट को रगड़ने लगी और बोली.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmm

म- अब तुम ये मान लो की मैं कोई मर्द हूँ. और मुझसे ऐसे hi सेक्सी और कामुक बाटे खुलकर करनी है.

सरिता दी- ठीक है जो भी करना है करो.

(मैं) मीरा अब यहाँ एक मर्द का रोले प्ले करनी वाली है इसलिए अब यहाँ से इस को एक मर्द के रूप में देखे और कहानी का आनंद ले)

म (अपने लुंड को मसलते हुवे) जानती हो सरिता तुम्हारी ख़ूबसूरती देखकर मेरा लुंड या यूं कह लो की मेरा घोडा एकदम खड़ा हो गया है और कैसे हिनहिना रहा है

सरिता दी- तो तुम अपने घोड़े को अस्तबल से बहार निकालो. (दीदी ने मस्ती में कहा)

म- अरे सरिता मेरे घोड़े को तुम अपनी हरी हरी जवानी दिखाओ फिर देखो वो कूदते हुवे बहार आ जाएगा.

दीदी इतनी गरम हो गाइट hi की मेरे इतना कहते hi दीदी ने अपनी गार्डन से निचे की अपनी चूचियों की एक फोटो खींचकर भेज दी. दीदी की चूचियों को मैंने पहली बहार नंगा देखा था. जो आज फोटो में मेरे सामने अपना जलवा दिखा रहे थे. जितनी मैं दीदी की चूचियों की कल्पना करता था. उसके हिसाब से दीदी की चूचिया कही ज्यादा बेहतर थी. उनकी चूचिया बहुत मोती मोती थी ऊपर से चूचियों के ऊपर अंगूर के डेन जैसे nippal.jise देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा.



म- आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह क्या मस्त चूचिया हैं तुम्हारी. ऐसा लग रहा है जैसे दूध के दो टैंकर हो ये. तुम तो इतनी मस्त और दुधारू लग रही हो जिसका दूध हर मर्द चूस चूस कर पीना चाहता होगा. और ऊपर से ये काळा काळा निप्पल, ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने बर्फ के बड़े बड़े सफ़ेद गोलों पर बड़े बड़े काळा काळा अंगूर के डेन रख दिए हो. और उस अंगूर का रास दुनिया का सारा मर्द पीना चाहता है.

मीरा के मुंह अपनी चूचियों की इतनी खुली तारीफ सुनकर दीदी बहुत उत्तेजित हो गाइट hi. उनकी सांसे तेज़ चलने लगी थी. उनके हाँथ लगातार अपनी चुकी और छूट मसल रहे थे. दीदी की छूट फिर से धीरे धीरे बहने लगी थी.

दीदी की छूट से निकले पानी से निकला पानी उनकी जांघो तक बाह कर आ गया था जो तुबे लाइट की रौशनी में चमक रहा था. आज तक उसके बदन की इतनी कामुक तारीफ किसी ने नहीं की थी. और न hi किसी ने उसके ऊपर ऐसे कमेंट किया था. सरिता दीदी अपने जिस्म की गर्मी के आगे मजबूर होकरल अपनी अपनी पंतय भी उतर कर फेक दी और एकदम नंगी हो गई और अपनी फूली हुई छूट की फैंको के बिच में ऊँगली डालकर मसलने लगी दीदी की ऊँगली अपने आप छूट के अंदर बहार होने लगी और उनके मुंह से sssssssssssssshhhhhhh आआआहहहहहहह की कामुक सिसकारियां निकलने लगी. दीदी की ऐसी सिसकारी सुनकर मैं दीदी की दशा समझ गया और अपने लुंड को जिसने अब तक विकराल रूप धारण कर लिया था उसे सहलाने लगा. और दीदी से कहा.

म- यकीन मनो सरिता. तुम्हारे जिस्म की हरियाली देखकर मेरा घोडा बेकाबू होने लगा है.

मेरी बात सुनकर दीदी अपने जिस्म को बिस्टेर पर रगड़ने लगी. उनकी आँखे एकदम लाल हो गई थी आँखों में हवस के लाल डोरे तैरने लगे थे. दीदी अपनी छूट में अपनी ऊँगली अंदर बहार करते हुवे कहा.

सरिता दी- मुझे ऐसा आभास हो रहा है की तुम्हारा घोडा बहुत hi मज़बूत है. लेकिन उसमे स्टैमिना कितना है उसके बारे में पता नहीं.

म- अरे सरिता. एक बार तुम मेरे घोड़े की सवारी कर लोगी तो तुम्हे इतना मज़ा आएगा की तुम हमेशा मेरे घोड़े की सवारी करना चाहोगी.

दीदी मेरी कामुक बाटे सुनकर आनंद लेती हुई बोली.

सरिता दी- मुझे तो काफी देर तक घोड़े की सवारी करनी है और वो भी पूरी स्पीड के साथ.

म- अरे सरिता. इसके स्पीड की चिंता तो तुम बिलकुल hi मत करो. लेकिन एक बात यद् रखना की मेरा घोडा तेज़ स्पीड के साथ बहुत जोर जोर के झटके भी देता है. हर झटके के साथ तुम्हारे शरीर का पुर्जा ढीला होता जाएगा.

सरिता दी- मुझे भी तेज झटके खाना बहुत पसंद है, घोड़े की सवारी करने का मज़ा hi तभी आता है जब झटका तेज़ हो. अब तुम बाते hi करोगे या अपने घोड़े को दिखाओगे भी.

म- मैं अपने घोड़े की जगह अपने नेट से फोटो भेज रही हूँ. तुम उसे hi मेरा लुंड समझकर इमेजिन कर लेना.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड की 3-4 फोटो कीचकर दीदी को भेज दी. और कहा.



म- अरे सरिता मेरा लुंड तो दौड़ने के लिए एकदम तैयार है. लेकिन जिस मैदान पर तुम इसे दौड़ना चाहती हो. जरा उस मैदान का दीदार तो करवाओ.

मेरी इतनी कामुक और हवस से भरी बातो की सरिता दीदी एक डैम गुलाम बन चुकी थी. उन्हें आजतक ऐसा मज़ा लाइफ में कभी नहीं आया था. जितना मेरे साथ कामुक और सस्य बाटे करके उन्हें आ रहा था. मेरी बार सुनकर दीदी ने अपने गदराई और जालिम चूचियों की, अपने मांसल पेट की और अपनी कातिल और गद्देदार गांड की की कई फोटो खींचकर मेरे पास भेज दी.



दीदी ने अपने चेहरा को बालो से ढककर अपने पुरे शरीर की नंगी फोटो देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा. दीदी की कातिल गांड कपडे के अंदर जितनी बड़ी लगती थी. उससे कही ज्यादा बड़ी उनकी नंगी गांड लग रही थी. दीदी की गांड का हर कटाव बहुत hi मादक लग रहा था, मैंने अपने लुंड को दबाते हुवे कहा.

M-ooooooofffffffffffffffff aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या मस्त मैदान है तुम्हारा. एकदम चिकना और इसके उतर चढाव और कटाव का क्या कहना. और तुम्हारे इस मस्त मैदान के बिच की गहरी दरार वाली इस खाई में जाने के लिए कितने घोड़े बेताब होते होंगे. सच कहूँ तो बहुत hi मस्त और बड़ा मैदान है तुम्हारा.

सरिता दी- (माधोसी में)- लम्बी रास तो अक्सर बड़े मैदानों में hi होती है. कही तुम्हारा घोडा मेरे बड़े मैदान पर दौड़ते दौड़ते थक कह रेस पूरी होने से पहले hi अपने मुंह से सफ़ेद झाग तो नहीं फेंक देगा न.

म- अरे सरिता मेरा घोडा तुम्हारी मैदान पर बहुत तेज़ी से दौड़ते हुवे तुम्हारी गहरी खाई के अंदर तक जाएगा और गुफा के अंदर के पानी से नहाकर hi वापस आएगा.

दीदी मेरी बात का मतलब बहुत अच्छी तरह से समझ रही थी. 2 महीने पहले का समय होता तो दीदी को मेरी ये साडी बाते 10 % भी न समझ में आती, लेकिन भाई बहन की चुदाई वाली कहानिया पढ़ पढ़ कर और पोर्न मूवी देख देख कर उनको चुदाई से सम्बंधित सभी बातो की जानकारी हो गाइट hi. दीदी से इतनी छुडास वाली बाटे करने के कारन मेरा लुंड बहुत टाइट हो गया था और अपने पुरे आकर में लहरा रहा था. मैंने फिर 2-3 फोटो अपने लुंड की खींचकर दीदी को भेज दी. मेरे लुंड की फोटो देखकर दीदी की आँखे फटी की फटी रह गई. मैं अपना लुंड सहलाते हुवे बोलै.

म- ाचा सरिता ये इस घोड़े को देखकर इसकी सवारी करने का तुम्हारा मन है.

सरिता दी- (नशे में) Hhhhhhmmmmmmmmmmmmm

म- लगता है तुमने आज तक कभी किसी के घोड़े की सवारी की है.

सरिता दी- नहीं कभी नहीं की.

म- अगर तुम बुरा न मनो तो एक बायत पुछु.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmm

म- तुम्हारा मन तो करता होगा न ऐसे लम्बे और ताकतवर घोड़े की सवारी करने का.’

सरिता दी- हाँ मन तो बहुत करता है.

म- कभी तुमने इस घोड़े जैसे घोडा कही देखा है.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी मेरे लुंड की फोटो को गौर दे देखने लगी. लुंड की फोटो देखने के बाद दीदी को ऐसा लग रहा था की उन्होंने इस लुंड को कही देखा है. वो दिमाग पर जोर डालकर सोचने लगी तभी दीदी के दिमाग में मेरा लुंड उभरने लगा दीदी को फोटो वाले लुंड को देखकर मेरा लुंड याद आने लगा. वही रंगा, वही लम्बाई, साइज में इससे बड़ा था क्योंकि वो लाइव देखा था और ये फोटो में. एक लुंड फोटो में था और दूसरा लुंड दीदी के दिमाग में. दोनों लुंड की कल्पना और उसके बारे में सोचने से दीदी फिर से उन्माद से भर गई. उनकी धीमी पड़ी उंगलियों की स्पीड उनकी छूट पर फिर से तेज़ हो गई. वो अपनी उंगलियों को तेज़ी से अंदर बहार करती हुई बोली.

सरिता दी- हाँ मैंने इसके पहले भी देखा है घोडा.

दीदी की ये बात सुनकर अब चुकने की बरी मेरी थी. मैं अपने लुंड को तेज़ी से ऊपर निचे करने लगा, मेरा लुंड पूरी तरह तन चुक्का था. मेरी लुंड पर नसे उभर आई थी जो हरे रंग की दिख रही थी. मैं सोचने लगा की दीदी ने किसका लुंड देखा है. मेरा लुंड तो उन्होंने कई बार देख है लेकिन वो या तो लोअर में तना हुवा होता था या तो ुंडेरवेरे में. एक बार मैंने अपने नंगा लुंड दीदी के हाँथ में दिया था. लेकिन उस समय दीदी ने लुंड को देखा hi नहीं था और जब देखा तो वो झाड़कर मुरझा गया था. मैंने अपनी सोच को विराम देता बहुत उत्सुकता से पूछा.

म- किसका घोडा देखा है तुमने

सरिता दी( अपनी छूट में ऊँगली करते हुवे) अभिषेक का.

दीदी का ये जवाब सुनकर मैं चौक गया और साथ में मेरा शरीर भी रोमांचित हो गया. मैं जनता था की घर में मेरे आलावा सिर्फ पापा हैं. लेकिन दीदी ने मेरा लुंड देखा है लेकिन कब और कैसे. मुझे तो ऐसा कोई भी वाक्य याद नहीं आ रहा था जिससे मुझे अंदाज़ा हो की दीदी ने मेरा नंगा लुंड देखा है. कही ऐसा तो नहीं की दीदी किसी और अभिषेक की बात कर रही हो. क्योंकि दी तो मुझे अभिषेक कहती hi नहीं थी. ऐसे न जाने कितने सवाल मेरे दिमाग में चल रहे थे. संसय और जिज्ञाषा से मेरा दिमाग फटने लगा. दीदी का स्पस्ट जवाब hi अब मेरी जिज्ञाषा को शांत कर सकता था. इसलिए मैंने दीदी से पूछा.

M-to क्या तुमने कभी अभिषेक के घोड़े की सवारी की है क्या.

सरिता दी- अरे नहीं बस एक बार देखा था मैंने.

M-to कैसा लगा तुमको उसका घोडा.

सरिता di(Masti भरी आवाज़ में बोली)- एकदम मस्त

म- अगर उसके घोड़े पर तुमको सवारी करने का मौका मिले तो क्या तुम उसके घोड़े की सवारी करोगी.

सरिता दी- सच बोलू तो मैं कब से उसके घोड़े की सवारी करना चाहती हूँ.

म- मतलब अभिषेक के घोड़े पर बैठने के लिए तुम तैयार हो.

सरिता दी- हाँ

दीदी का जवाब सुनकर मैं तो कंफ्यूज हो गया. मुझे अब खुदपर काबू करना मुश्किल होता जार अहा था. मैं जल्द से जल्द जानना चाहता था की ये अभिषेक मैं हूँ या कोई और, मुझे 99% उम्मीद थी की दीदी मेरी hi बात कर रही हैं लेकिन जो 1% संसय था उसको दूर करने के लिए दीदी से स्पस्ट रूप से सुन्ना चाहता था.

म- मतलब अभिशेख तुम्हारा भाई नहीं है फिर भी तुम उसके घोड़े की सवारी करोगी.

मेरी बात सुनकर दीदी हंसने लगी और अपनी छूट को मसलती हुई बोली.

सरिता दी- वो अभिषेक मेरा भाई है अभी.

दीदी की बात सुनकर मेरे लुंड ने इतनी तेज़ झटका मारा की सीधा आकर मेरे पेट से टकराया. मैं ये जानकर की दीदी ने मेरा नंगा लुंड देख लिया है बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया और पाने लैंड को तेज़ी से दबाने लगा.

म- तुमने अपने भाई का घोडा कब और कैसे देख लिए.

सरिता दी- एक रात वो नंगा hi अपने कमरे में सो गया था. सुबह जब मैं उसे उठाने उसके कमरे में गई तो उसका घोडा एकदम खड़ा था. मैंने उसे एकदम पास जाकर बहुत अचे से देखा. लेकिन अभी को इसके बार में कुछ भी पता नहीं, क्योनी वो गहरी नींद में सो रहा था.



( जो दीदी ने मेरे नंगा सो जाने पर देखा था जिसका जिक्र मैंने 73वे भाग में किया है)

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-83

म- तुमने अपने भाई का घोडा कब और कैसे देख लिए.

सरिता दी- एक रात वो नंगा hi अपने कमरे में सो गया था. सुबह जब मैं उसे उठाने उसके कमरे में गई तो उसका घोडा एकदम खड़ा था. मैंने उसे एकदम पास जाकर बहुत अचे से देखा. लेकिन अभी को इसके बार में कुछ भी पता नहीं, क्योनी वो गहरी नींद में सो रहा था.

( जो दीदी ने मेरे नंगा सो जाने पर देखा था जिसका जिक्र मैंने 73वे भाग में किया है)

अब आगे.

म- तो क्या तुम चाहती हो की तुम्हारा भाई तुम्हे अपने काळा मोठे घोड़े पर बिठाकर स्पीड से दौड़ते हुव ज़ोर ज़ोर से झटके मरे और तुम्हे बहुत देर तक अपने घोड़े पर बैठकर रखे.

मेरे और अपने बारे में ऐसी गरम और कामुक बाते सुनकर दीदी उत्तेजना के आसमान पर पहुंच गई और अपनी छूट में ऊँगली और तेज़ी से अंदर बहार करती हुई बोली.

सरिता दी- iiiiiiiiiiiiissssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhh हाँ मैं यही चाहती हूँ.

म- तुम्हारी भाई तुम्हे अपने घोड़े पर बैठकर जब तेज़ी से दौड़ेगा तो स्पीड के साथ तुमको जोर जोर से झटका लगेगा और तुम्हारा बैलेंस बिगड़ने लगाएगा. तो तुम्हारे भाई को तुम्हे अचे से थमने के लिए तुम्हारी चूचिया पकड़नी पड़ेगी.

सरिता di-(madhoshi में)- मैं खुद उसके हांथो में अपनी चूचिया पकड़ा दूंगी और बोलूंगी की मेरी चूचियों को अचे से पकड़कर घोड़े की स्पीड और तेज़ कर दे.

मेरी इतनी गरम और नशीली बाते और दीदी के दिमाग में घूमता मेरा लुंड दीदी को कामवासना की दुनिया में डुबो रहा था.

म- तुम्हारे भाई का घोडा दौड़ते हुवे तुम्हारी गुफा को चूमेगा और तुम्हारी गुफा में जोर जोर से स्पीड के साथ अंदर बहार होगा.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ऑरररर तेज़्ज़ उउउउउछालनीीी दोऊ भाआआई अपनीईई घोड़े को.

सरिता दीदी कामुकता में सीधे सीधे अब मुझे hi इमेजिन कर रही थी. मैंने दीदी इस मंद गेम में दीदी के दिमाग पर अपनी गहरी छाप छोड़ रहा था. जिससे मैं उनको बेशरम बनाना में कामयाब भी हो रहा था. मैं दीदी को और बेशरम बनाना चाहता था. इसलिए मैंने बात को आगे बढ़ाते हुवे कहा.

म- उसके बाद तुम्हारा भाई तुम्हे अपने बिस्टेर पर पीठ के बल लिटाकर तुम्हारी दोनों टैंगो को फैलाकर तुम्हारी दोनों टैंगो को उठाकर अपने कंडे पर रख kar……………(baat अधूरी छोड़ दी)

मेरी इतनी गरम बाते सुनकर दीदी इस कदर मदहोश हो गई थी की वो मेरी हर एक बात को इमेजिन कर रही थी जो दीदी की उत्तेजना को बढ़ा रहा था.

सरिता दी- Aahhhhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

म- फिर तुम्हारा भाई तुम्हारी इस ज़ालिम छूट को मोती फैंको को फैलाकर………

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhh

म- अपने मोठे घोडा का फुला हुवा सूपड़ा तुम्हारी छूट के मुंह पर रख कर…….

सरिता di-Ohhhhhhhhhhh Bhaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiii अब अंदर भी डाल दोऊ. (दीदी एक डैम छुडासी होकर बोली)

M-Kya अंदर दाल दू सरिता.

सरिता दी- मेरे भाई अपना घोडा दाल दो अंदर.

म- नहीं ऐसे नहीं. पहले इसका असली नाम बताओ तब.

सरिता दी- ओह्ह्ह्ह भाईईईई और मत तड़पाओ अपनी दीदी को दाल दो अंदर (अपनी छूट और चुकियो को रगड़ती हुई)

म- नहीं पहले नाम बताओ की क्या अंदर लेना है.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अपना लुंड अंदर डालो.

म- अच्छा. फिर तुम्हारा भाई अपना लुंड तुम्हारी रास छोड़ती छुडासी छूट पर रखकर तुम्हारी दोनों गदराई हुई जालिम चूचियों को अपने दोनों हथेलियों में भरकर जोर जोर से मसलते हुवे और जोर जोर से थप्पड़ मरते हुवे एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लुंड एक hi बार में तुम्हारी छुडासी छूट में पेल देगा.



मेरी बात सुनकर दीदी ने अपने हांथो से अपनी छूट और चीची को जोर जोर से मसलते हुवे बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दी अपनीईई बाहाआनंनंन्न कोऊ. मेंननननननन कबबबबबबबबब सीईई तूझसेएईईए चूड्डड्डड्डड्डनीीे के लिएईईई तदाआआपपपप रहीइइइइइइइइ हूऊऊऊऊणणंन्न बबबबबबूझहा दे मेरी चुउत्त्तत्त कोई प्याआआस्स्स्सस्स अपनीईई लुँड्ड्ड सीई आह्ह्हह्ह्ह्ह भाईईई.

म- क्यों सरिता डार्लिंग कैसा लग रहा है अपने भाई का लुंड अपनी छूट में लेकर.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh पुछहःछःहूऊओ मात्तत्त. बहुत हीईई ाआअच्छाआआ लगगगगग रहा हैई. मुझीीी अपपपपपपपपनीई भायी से चूड्डड्डद्द्वाती हुवेई.

M-Fir तुम्हारा भाई तुम्हे पटल कर कुटिया बनाकर तुम्हारी गांड पर थप्पड़ मर मर कर तुम्हारी मखमली गांड को लाल कर देगा और अपना लुंड तुम्हारी गांड के छेड़ पर टखकर हाँथ बढाकर तुम्हारी दोनों ृषभरी चूचियों को पकड़कर एक hi धक्के में तुम्हारी गांड को फाड़ देगा. और तुम्हे जन्नत का मज़ा देगा.



इतना कहकर दीदी और जोर जोर से अपनी चुकी मसलने लगी और अपनी छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगी. जिससे दीदी का शरीर अकड़ने लगा. और वो बड़बड़ाते हुवे पानी छोड़ने लगी.

सरिता दी- mmmaaaaaaaaaaaaroo मीटीररीईईई gaaandddddddddd. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईईईईई oooooooooooohhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhh मैंन आए राहीईई होऊणननननन और जोररर सी छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ूऊ मुझीीी भाआईईई. मेरररररीईई प्याआआअस बुझाआआ दोऊ. मेंनननन तुमममममहरिइइइइ गुलाआआमममममममम होऊणन्न. Mujheeeeeeeeee रोजजज्जज आईसीईई hiiiiiiiiii छोड़ड़ड़ड़ना. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेंननननन गइईईई.

इतना कहकर दीदी झाड़ गई. दीदी के झड़ने के बाद दोनों तरफ कुछ देर ता शांति चाय रही. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

म- तो कैसा रहा सरिता डार्लिंग. मज़ा आया इस खेल में.

सरिता दी- पूछो मत यार. बहुत मज़ा आया. मैंने तो सोचा भी नहीं था की इस खेल में इतना मज़ा आएगा.

म- अब तुम सोचो की इमेजिनेशन में hi तुमको अपने भाई से छुड़वाने में इतना मज़ा आया तो जब हकीकत में तुम्हारा भाई तुम्हे छोड़ेगा तो तुम्हे कितना मज़ा आएगा. लेकिन तुमने बेवजह hi उसे नाराज़ कर दिया. जब तुम अपने भाई से छोड़ना चाहती hi हो तो इतने नखरे क्यों करती हो. तुम उसका साथ डौगी तभी तुम्हे चुदाई का असली आनंद मिलेगा.

सरिता दी- हाँ यार वो तो है. लेकिन वो तो नाराज़ है मुझसे. अब कैसे मनौ मैं उसे.

म- एक काम करो. अभी उसके पास कोई बहाना बनाकर चली जाओ. और जाते समय ऐसे कपडे पहनकर जाना जिसमे से तुम्हारा जिस्म छुपे काम और दिखाए ज्यादा. एक बात और. अब जितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा उसकी बात मन्ना. तभी लाइफ अचे से एन्जॉय कर पाओगी.

सरिता दी- ठीक है अब मैं उसकी हर बात मानूंगी. उसको नाराज़ नहीं करुँगी.

म- तो अब तुम जाओ और उसे अपनी चूचिया की झलक दिखाकर मनाओ. मैं अब जा रही हूँ भाई के पास. गुड नाईट.

इतना बोलकर मैं मोबाइल को साइड मैंने रख दिया. और लोअर पहनकर मोबाइल में फिल्म देखते हुवे दीदी का इंतज़ार करने लगा. मेरा लुंड अभी भी खड़ा था. थोड़ी देर बाद दीदी दूध का गिलास लेकर मेरे कमरे में आयी. दीदी सभ में आज एकदम क़यामत बैंकर आई थी. उन्होंने एक निघ्त्य पहनी हुई थी जो उनकी चूचियों के निप्पल तक hi थी. उनकी आधी चूचिया निघ्त्य से बहार दिख रही थी. दीदी ने जो निघ्त्य पहनी थी वह उनके घुटनो तक थी. जिसमे से दीदी की गोरी गोरी बाल रहित खूबसूरत टंगे नज़र आ रही थी.



दीदी को देखते hi मेरा लुंड झटके मरने लगा. मैं दीदी की चूचियों को देखने लगा. जिसे दीदी ने देख लिया और उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई दीदी आकर बीएड में मेरे पास बैठ गई और मेरे लुंड को देखते हुवे मुझसे बोली

सरिता दी- क्या हुवा अभी तुम नाराज़ हो मुझसे.

मैं- मैं क्यों नाराज़ होऊंगा आपसे. आप जाओ मुझे सोना है.

सरिता दी- मैं जानती हूँ की तुम नाराज़ हो मुझसे. सॉरी अभी. मुझसे गलती हो गई. तू जो बोलेगा मैं करुँगी. लेकिन तू मुझसे नाराज़ मत हो.

मैं- मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ दीदी. वो तो बस मैं देखना चाहता था की मेरी दीदी मुझसे कितना प्यार करती हैं.

सरिता दी- सच में तू मुझसे नाराज़ नहीं है. मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ. और तेरी खुसी के लिए मैं कुछ भी करुँगी.

मैं- (उनकी चूचियों को देखकर उनकी आँखों में देखते हुवे)- कुछ भी.

सरिता दी- हाँ और इसीलिए मैं तेरे लिए दूध लाइ हूँ. अगर इस दूध को तुमने पि लिया तो मैं समझूंगी की तू मुझसे नाराज़ नहीं है.

मैं- (उनकी चूचियों को देखकर) मुझे तो एकदम ताज़ा दूध पीना था. और ताज़ा दूध मीठा होता है. लेकिन आप ताज़ा दूध नहीं पिलाएंगी. तो ऐसा करिये की इस दूध को पीकर आप इसे मीठा कर दीजिए.

दीदी मेरी बातो को अच्छी तरह समझ रही थी. की मैं क्या कह रहा हूँ तो वो मुस्कुराती हुई उठी और गिलास मुंह में लगाकर एक घुट दूध पिया और फिर झुक कर मुझे दूध का गिलास तकदने लगी. झुकने की वजह से निघ्त्य में से दीदी के निप्पल ऑलमोस्ट दिखने लगे थे.



मैं आँख फाडे दीदी की चूचिया देखने लगा. दीदी की चूचिया और अंदर तक देखकर मेरे लुंड झटके खा तहा था. दीदी अभी तक झुकी हुई थी और वो भी मेरे लुंड को hi देख रही थी मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे एक हाँथ को अपने लुंड पर रखकर सहलाने लगा. दीदी भी अब गरम हो रही थी. और अपने होंठ को काट रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी सीधी कड़ी हो गई और बोली.

सरिता दी- हाँ अभी तो बताओ तुम्हे कैसा लगा.

मैं- बहुत hi अच्छा दीदी और बहुत बड़े बड़े हैं आपके.

सरिता दी- मैं दूध की बात कर रही हूँ की तुम्हे कैसा लगा.

मैं- मैं भी तो दूध की hi बात कर रहा हूँ की बहुत बड़े बड़े और मस्त हैं दूध.



मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी. और गिलास लेकर जाने लगी तो मैंने कहा.

मैं- दीदी अभी मेरा और मीठा चखने का मन है. आप चखा डौगी.

सरिता दी- अब मैं इतनी रात को और मीता कहा से लौ. कल सुबह तुन्हे ताज़ा दूध और मीठा दोनों मिलेगा.

Main-taza दूध आप मुझे कल दे देना. लेकिन मीता तो मुझे अभी चाहिए. और वो आप hi मुझे दे सकती हैं.

सरिता दी- मेरे पास कहा हैं जो मैं तुझे दू.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके हाँथ को पकड़कर एक झटके से खींच लिया जिससे दीदी सीधा आकर मेरे साइन पर गिर पड़ी. जिससे दीदी की बड़ी बड़ी चूचिया मेरे साइन से जोर से टकराई. जिससे मेरे मुंह से ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई.

दीदी मेरे साइन पर गिरी हुई मेरी आँखों में देखने लगी. मैं भी दीदी की आँखों में देखने लगा और अपने हाँथ का घेरा दीदी की पीठ पर कर लिया जिससे दीदी उठकर भाग न जाये. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- सरिता डार्लिंग. मुंह मीठा कराओ न.

सरिता दी- मैं कैसे करौ मुंह मीठा. मिठाई तो है hi नहीं.

दीदी ने अभी इतना hi बोलै था की मैंने अपने होंठ सीधे दीदी के होंठो पर टिका दिए और जोर जोर से उन्हें किश करने लगा. और अपने हाँथ से उनकी पीठ को सहलाने लगा. दीदी ने छूटने की कोसिस की लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाई. थोड़ी देर बाद दीदी ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मैंने अपना होंठ उनके होंठो से उठाया और उनके क्लीवेज में रख दिया और उसे चाटने लगा.



थोड़ी देर तक दीदी को किश करने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी पीठ से सरकते हुवे दीदी की कातिल गांड पर रख दिया और उसे मसलने लगा. जिससे दीदी ssssssssssssssss ahhhhhhhhhhhhh की आवाज़ करने लगी. लगभग 10 मिनट तक जबरदस्त किश करने के बाद मैंने दीदी के जिस्म से अपना हाँथ हटाकर दीदी को आज़ाद कर दिया. लेकिन दीदी किस में एकदम डूब चुकी थी. इसलिए उन्होंने उठने की कोई कोशिश नहीं की और मुझे किश करती रही. तो मैंने दीदी की बांह पकड़कर उन्हें हटाया और उठकर बैठ गया.

दीदी भी उठकर बैठ गई और मेरी तरफ देखकर शर्माने लगी. मैंने दीदी से कहा

मैं- कैसा लगा डार्लिंग तुमको.

सरिता दी- तू बहुत ख़राब है. कोई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है क्या.

मैं- मैं तो तुम्हारे साथ इसके आलावा भी बहुत कुछ करना चाहता हूँ. लेकिन तुम करने hi नहीं दे रही हो.

सरिता दी- और क्या करना चाहता है तू मेरे साथ.

मैं- जो एक बॉयफ्रंड अपनी गिर्ल्फ्रेंड के साथ करता है. जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है. वही सब मई तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी शमा गई और अपना सर झुका लिया लेकिन उनके झुके हुवे चेहरे पर मुस्कान थी. थोड़ी देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अच्छा अब मैं जा रही हूँ कल सुबह आउंगी एक्सेरसीज़े करने तुम तैयार रहना.

मैं- ठीक है दीदी. कल आपको ऐसे एक्सेरसीज़े करवाऊंगा. जिसे आप साडी ज़िन्दगी नहीं भूल पाएंगी.

सरिता दी- देख अभी मैं कोई ऐसी वैसी एक्सेरसीज़े नहीं करने वाली पहले से hi बोल दे रही हूँ.

मैं- वो तो कल hi पता चलेगा की आप वो एक्सेरसीज़े करती हैं या नहीं.

और इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से दीदी की गांड को जोर से दबा दिया. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सरिता di-ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh अभी क्या करता है. मुझे दर्द होता hi.

मैं- अब तो ऐसा दर्द मैं तुम्हे रोज़ दूंगा.

सरिता दी- चाल हट बड़ा आया दर्द देने वाला.

इतना कहकर दीदी उठकर बहार जाने लगी मैं मन में सोचने लगा की लड़कियों के नखरे बहुत होते हैं. वो चुदती भी हैं तो नखरा दिखा दिखा कर. और वही हाल दीदी का भी था. वो भी मुझसे छुड़वाने के लिया तड़प रही थी. लेकिन उनके नखरे काम नहीं हो रहे थे. मैं यही सब सोचता हुवा अपना लुंड सहलाते दीदी की गांड को देख रहा था जो बहार जाते हुवे मटक रही थी. दीदी दरवाज़े के पास पहुंचकर मेरी तरफ मुड़ी. कुछ देर मेरे लुंड की तरफ देखा फिर मेरी आँखों में देखकर बोली.



सरिता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है अभी.

और इतना कहकर वो हँसते हुवे निचे चली गई और मैं बिस्तर पर लेटकर सो गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-84

सुबह मैं सो कर उठा और फ्रेस होकर कमरे में आ गया और सरिता दीदी का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद किसी के कदमो की आहात सुनाई पड़ी. मैंने दरवाज़े पर देखा तो सरिता दीदी थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड खड़ा हो गया. क्या सजधज कर आई थी दीदी. और कपड़ो के तो क्या कहने. उन्होंने जो कपडे पहने थे उसमे से दीदी की आधी चूचिया बहार नज़र आ रही थी. ऊपर से उन्होंने एक पारदर्शी दुपट्टा गले में लिया हुवा था जो दीदी की चूचियों को और भी कामुक बना रहा था. मुझे अपनी चूचियों की तरफ घोरते देखकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. और वो बोली.



सरिता दी- क्या देख रहा है तू.

मैं- मैं देख रहा हूँ की मेरी गिर्ल्फ्रेंड din-b-din हॉट & सेक्सी होती जा रही है.

सरिता दी- वो तो मैं हूँ hi. कुछ नया हो तो वो बता.

मैं- नया तो है. लेकिन कैसे काहू समझ में नहीं आ रहा है.

सरिता di(hanskar) अपने मुंह से कह और कैसे कहेगा.

मैं- ठीक है मुंह से hi बोलता हूँ. जब से तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड बानी हो तब से din-b-din गडराती जा रही हो. तुम्हे देखकर तो मुझसे कण्ट्रोल करना मुश्किल होता जा रहा है.

सरिता दी- तू बहुत ख़राब है अभी. अपनी बहन पर गन्दी नज़र रखता है. तुझे शर्म नहीं आती.

मैं- अगर मैं शर्म करूँगा तो तुम्हारा मीठा मीठा दूध कैसे पिऊंगा जो तुम आज मुझे पिलाना चाहती हो.

सरिता दी- मैं कोई दूध वूध नहीं पिलाने वाली. थोड़ी देर बाद किचन में आकर खुद पि लेना.

मैं- अच्छा. चलो तुम्हारी इच्छा किचन में hi अपना दूध पिकने की हो रही है तो मैं वही आकर तुम्हारा दूध पि लूंगा.

सरिता दी- चाल हैट बद्तमीज़. आज बड़ी जल्दी जग गया और मेरे आने से पहले hi शुरू कर दिया.

मैं- अभी कहा शुरू किया है. तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था.

सरिता दी- मेरा इंतज़ार क्यों कर रहे थे.

मैं- जो एक्सेरसीज़े आज करनी है उसे अकेले नहीं किये जाता इसीलिए सोचा की एकसाथ करते हैं.

सरिता दी- अच्छा चलो ठीक है फिर एकसाथ hi शुरू करते हैं.

इतना कहकर दीदी मेरे पास आ गई. तो मैं दीदी की छूछीयो को देखते हुवे अपनी t-shirt उतर कर बीएड पर रख दी. t-shirt उतरने के बाद मैं ऊपर से नंगा हो गया. जब दीदी की नज़र मेरी मस्कुलर बॉडी पर पड़ी तो वो एक तक मेरे जिस्म को देखने लगी. मैंने अपनी लोअर काफी निचे पहनी नई थी. ये समझ लीजिए की जहा से लुंड शुरू होता है वह से. मेरे जिस्म को देखकर दीदी की आँखे नशीली होने लगी. जो मैं दीदी की आँखों में देख रहा था. मैंने दीदी से कहा..

मैं- सरिता ऐसा करो की मेरे सामने आकर कड़ी हो जाओ.

दीदी मेरी बात सुनकर मेरे सामने आकर कड़ी हो गई मैंने दीदी का दुपट्टा उतारकर बीएड पर रख दिया. दीदी ने मेरी आँखों में देखा लेकिन कहा कुछ नहीं. दुपट्टा उतरने के बाद दीदी के अधनंगी चूचिया मेरी नज़रो से 1 फुट की दुरी पर थी.

मैं थोड़ा सा और आगे बढ़ा और दीदी के साथ जुड़ कर खड़ा हो गया और अपने बाज़ू एकदम सीधा दीदी के कंडे के लेवल में फैला दिया और दीदी को भी वैसे hi करने के लिए कहा. मेरी बात सुनकर दीदी ने भी अपने बाज़ू मेरे कंधे के लेवल पर फैला दिए. फिर मैं थोड़ा सा और आगे हुआ और दीदी से पूरी तरह से चिपक कर खड़ा हो गया जिससे दीदी की पर्वत सामान चूचियां मेरे साइन में धस गई और मेरा लुंड सीधे दीदी की दोनों टैंगो के बिच घुस गया. जिससे दीदी और मेरे मुंह से ssssssssssssssssssss की सिसकी निकल गई. फिर मैंने अपने बाज़ू दीदी की बाज़ू में फंसा दिया और ऊपर निचे घूमने लगा (क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज घूमने लगा) ऐसा करते हुवे मेरा लुंड दीदी की छूट पर घिसने लगा. जिससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

ऐसे hi लगभग 10 मिनट तक एक्सेरसीज़े करने के बाद हम दोनों को बहुत पसीना आने लगा. एक तो आज सुबह का मौसम भी थोड़ा गरम था और ऊपर से हम दोनों के जिस्म की गर्मी. पसीने के रूप में बहार निकल रही थी. मेरे लुंड की 10 मिनट से लगातार रगड़ अपने छूट पर पड़ने के कारन दीदी भी गरम हो गाइट hi. 10 मिनट बाद मैंने अपने बाज़ू दीदी के बाज़ू से अलग किये और उन्हें पलटकर खड़े होने के लिए कहा. मेरी बात मानकर दीदी पलटकर कड़ी हो गयी तो मैंने उनसे सत्कार खड़ा हो गया लेकिन अपने लुंड को दीदी की गांड से नहीं सताया था. थोड़ी देर तक ऐसे hi खड़ा रहने के बाद मैंने अपनी कमर को जोर से दीदी की गांड पर चिपका दिया जिससे दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. और मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में घुस गया. मैंने अपना हाँथ बढाकर दीदी के कमर पर रख कर दबा दिया और और अपने लुंड को उनकी गांड में अचे से एडजस्ट किया. मेरे ऐसा करने पर दीदी ने पलटकर मेरी तरफ देखा. कुछ देर तक मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी आगे देखने लगी तो मैंने दीदी के कंधे को चूमकर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.



मैं- सरिता अब तुम आगे की तरफ झुको.

मेरी बात सुनकर दीदी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा और थोड़ी देर मुझे देखती रही फिर अपनी गार्डन सीधी करके आगे की तरफ झुकती चली गई झुकने की वजह से दीदी के हाँथ उनके पांव तक पहुंच गए. झुकने की वजह से दीदी की गांड की दरार खुल गई तो मैंने दीदी की कमर पर पकड़ मज़बूत करते हुवे अपनी कमर को थोड़ा सा पीछे करके एक जोरदार धक्का दीदी की गांड पर लगा दिया. जिससे मेरा लुंड मेरी लोअर और उनकी लोअर समेत उनकी गांड के छेड़ से टकरा गया. जिससे दीदी के मुंह aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooohhhhhhhhhh की सिसकारी निकल गई. मैंने फिर से अपनी कमर पीछे की और पहले से तेज़ धक्का दीदी की गांड पर मारा. इस धक्के से दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh अअअअअअअअभीइइइइइइइ Ooooooohhhhhhhhhhhhhhh धीरे bhaaiiiiiiiiii. Hhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy.

मैं- अब तुम फिर से सीधी कड़ी हो जाओ. मेरी बात सुनकर दीदी सीधी कड़ी हो गयी. कुछ देर बाद मैंने दीदी को फिर से झुकने के लिए कहा और झुकने के बाद उनकी कमर को मज़बूती से पकड़ कर अपना लुंड उनकी गांड में पेलने लगा. जिससे दीदी सिसकारी भरने लगी.

सरिता दी- AAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhhiiiiiiiiiiii kkkyaaaaaaaaaaa ककककरररररररर रहहा hiaaaaaaaiiiiiiiiii. Yeeeeeeeeee भीई कोइइइइइइइ एक्सेरसिज़्ज़्ज़्ज़्ज़े है…..

मैं- हाँ सरिता इस एक्सेरसीज़े से तुम्हारे पेट बहार नहीं निकालेंगे.

फिर मैंने इसी तरह दीदी से 10 बार झुकने को कहा और हर बार मैं दीदी की गांड को ऐसे hi पलटा रहा और दीदी कभी सिसकी लेती तो कभी चीख पड़ती. इस एक्सेरसीज़े से दीदी गरम हो गई थी. अब वह जोर जोर से साँस ले रही थी. दीदी के कपडे पसीने से एकदम भीग गए थे जिससे दीदी की ब्रा साफ साफ दिखाई देने लगी.

फिर मैंने दीदी को खड़ा कर दिया और रेस्ट करने के लिए बोल दिया. थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद मैंने दीदी को जमीन पर डोगग्य स्टाइल में होने के लिए कहा. मेरी बात सुनकर दीदी हैरानी से मुझे देखने लगी. उन्हें इस तरह अपनी तरफ देखता पाकर मैंने उनसे कहा.

Main-Kya हुवा सरिता. चलो मैं करके तुमको बताता हूँ.

फिर मैंने अपने घुटने और हाँथ जमीन पर रखे और डोगग्य स्टाइल के हो गया. मुझे देखकर दीदी भी डोगग्य स्टाइल में कड़ी हो गई तो मैं उठकर दीदी के पीछे आकर घुटनो के बल बैठ गया और अपने लुंड दीदी की गांड के दरार में फंसा दिया. ऐसा करने पर दीदी ने पलटकर मुझे हैरानी से देखने लगी. दीदी को ऐसा लग रहा था की मैं उनकी गांड मरने वाला हूँ. तो दीदी ने जैसे hi कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला hi था की मैं बोल पड़ा.

मैं- सरिता अब अपना एक हाँथ जमीन से उठाकर सामने की तरफ सीधा करो और जितनी देर हो सके अपने एक हाँथ पर hi अपना वजन रखो. इससे तुम्हारी कलाई मज़बूत होगी.

मेरी बात सुनकर दीदी ने चैन की सनस ली. वर्ण उन्हें लग रहा था की मैं बिना उनको बताये उनकी गांड मरने जा रहा था. इतना तो मुझे पता था की अगर मैं दीदी को अभी छोड़ना चाहू तो वो मन नहीं करेंगी और मेरे लंच पर उछाल उछाल कर मुझसे छुडवाएंगी. लेकिन मैं दीदी को और ज्यादा गरम करना चाहता था. इसलिए मैंने दीदी की करार को अपने हांथो से ऐसे पकड़ी जैसे मैं दीदी की गांड मरने जा रहा हूँ. दीदी ने अपने एक हाँथ पर अपना वजन रख कर एक हाँथ आगे फैला दिया और बोली.

सरिता दी- ये कैसे उलटी सीधी एक्सेरसीज़े करवा रहे हो.

मैं- अरे सरिता ये एक्सरसीज़े बहुत hi फायदेमंद है. इससे कलाई तो मज़बूत होती hi है. साथ hi साथ इससे तंग और पेट पर जो एक्स्ट्रा चर्बी रहती है वो भी ख़तम हो जाती है. तुमने देखा होगा की कुछ औरते 40 की उम्र की होकर भी 25-26 की लगती हैं. वो सब यही एक्सेरसीज़े करती हैं. इस एक्सेरसीज़े करने पर तुम और भी गदराई हुई मॉल बन जाओगी. और ुम्हे जो भी देखेगा उसका खड़ा हो जाएगा.

सरिता दी- सच्ची में अभी, लेकिन तू मुझसे ऐसी गन्दी गन्दी बाटे मत कर.

मैं- अब जो सही है वही तो बोल रहा हूँ. तुम सच में ये एक्सेरसीज़े करके गदराई मॉल बन जाओगी.

मेरी बातो ने दीदी के ऊपर नशे के रूप में असर किया था. मैंने देखा की एक्सेरसीज़े करते हुवे दीदी की कमीज़े उनकी कमर से थोड़ी सी ऊपर उठ गई है. जिससे उनकी कमर का कुछ हिस्सा नंगा नजर आ रहा था और निचे से टाइट लोअर में दीदी की गांड फांसी हुई थी. जिससे दीदी की कातिल गांड का एक एक उतर चढाव और कटाव नज़र आ रहा था.

मैं दीदी की कातिल गांड को देखकर बहुत मुश्किल से अपने आपको कण्ट्रोल में किया हुवा था. उनकी गांड को देखकर मेरा मन कर रहा था की अभी दीदी का लोअर फाड् डालो और पटक कर एक जी झटके में अपना पूरा लुंड एक hi बार में दीदी की गांड में पेल दू और इन्हे कुटिया की तरह छोड़ू.

फिर मैंने अपना हाँथ दीदी की t-shirt में ाशिस्टा से घुसा दिया और उनकी कमर नंगी कमर सहलाने लगा. जिससे दीदी के शरीर ने एक झटका खाया. फिर मैंने अपने हाँथ को कमर से फेरते हुवे उनके चिकने पेट पर ले गया और सहलाने लगा. कुछ देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी अब मैं थक गई हूँ.

लेकिन मैं तो दीदी की गांड मरने की कल्पना में खोया हुवा था. मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई hi नहीं पड़ी तो दीदी ने फिर से कहा.

सरिता दी- अभी मैं अब थक गई हूँ यार कहाँ गम हो.

Main(hadbada कर) ोहः अच्छा ठीक है.

लेकिन मैं पीछे नहीं हटा और अपना लुंड दीदी की गांड पर सत्ता दिया और दबाव बनाने लगा. तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी पीछे तो हैट जाओ.

मैं दीदी की बात सुनकर पीछे हैट गया. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैं जितनी जल्दी हो सके दीदी की छूट मर लेना चाहता था. दीदी भी अब पूरी गरम हो चुकी थी. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता. अब तुम जाओ. आज की एक्सेरसीज़े हो गई.

सरिता दी- इतनी जल्दी. अभी तो एक्सरसीज़े शुरू हुई थी. अभी तो मेरा जिस्म गरम होवा था और मज़ा आना शुरू हुआ था और तुम जाने को बोल रहे हो.

मैं- क्या करू सरिता. आगे की जो एक्सेरसीज़े है वो तुम नहीं कर पाओगी. इसलिए तुम्हे जाने के लिए बोलै.

सरिता दी- ऐसी कौन सी एक्सेरसीज़े है जो मैं नहीं कर पाऊँगी. जब इतनी उलटी सीधी एक्सेरसीज़े कर ली तो वो भी कर लुंगी. तुम बताओ.

मैं- आगे की जो एक्सेरसीज़े है उसके लिए तुमको अपनी t-shirt उतरनी पड़ेगी.

सरिता दी- लेकिन T-shirt क्यों उतरनी पड़ेगी. पहन कर भी तो कर सकती हूँ.

मैं- नहीं सरिता. उस एक्सेरसीज़े के लिए कपडे उतरने hi पड़ते हैं.

सरिता दी- नहीं यार कोई कपडे वाली hi करो.

मैं- अरे सरिता एक बार कपडे उतारकर वो एक्सेरसीज़े करो तो. बहुत मज़ा आएगा तुमको.

मेरी बात सुनकर भी सरिता दीदी ने कुछ नहीं कहा तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- ठीक है दीदी अगर आप अपने कपडे नहीं उतरना चाहती तो मैं तो उतर hi सकता हूँ अपने कपडे.

सरिता दी- लेकिन तुम मेरे सामने कपडे उतरोगे. मुझे बहुत शर्म आएगी.

मैं- अच्छा ठीक है. आप अपना मुंह दूसरी तरफ कर के कड़ी हो जाओ. मैं तब तक अपनी एक्सेरसीज़े कर लूंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपना मुंह दोस्ती तरफ कर लिया तो मैंने अपना लोअर उतर कर बीएड पर रख दिया. अब मैं अपने कमरे में दीदी की मौजूदगी में एकदम नंगा खड़ा था. मेरा लुंड हवा में लहराते हुवे फनफना रहा था. दीदी थोड़ा मुड़कर चोर नज़रो से मेरे लुंड को देख रही थी. मेरे लुंड को देखकर दीदी की सांसे तेज़ तेज़ चलने लगी. उनके चेहरे और आँखों में हवस साफ़ नज़र आ रही थी. लोअर उतारकर मैंने अपने लुंड को मुट्ठी में पकड़कर ज़ोर से दबाया जिससे मुझे बहुत मज़ा आया. मुझे मज़ा आने का एक कारन ये भी था की दीदी अड़ंगी चूचिया और लोअर में फांसी कातिल गांड लेकर मेरे कमरे में कड़ी थी. मैं चलता हुवे दीदी के पास जाकर खड़ा हो गया और दीदी से बोलै.

मैं- सरिता. इस एक्सेरसीज़े में तुमको मेरी हेल्प करनी पड़ेगी.

सरिता दी- लेकिन मैं हेल्प कैसे करुँगी तुम तो पुरे नंगे हो.

मैं- नंगा हु तो क्या हुवा सरिता. तुम्हारा भाई हूँ और अब तो तुम्हारा बर्फ भी हूँ. मैं कोई गैर थोड़ी हूँ.

सरिता दी- लेकिन मुझे शर्म आ रही है

मैं- लो कर लो बात. नंगा यहाँ मैं खड़ा हूँ और शर्म तुमको आ रही है सरिता. मुझसे कैसी शर्म.

सरिता दी- और क्या शर्म तो आएगी hi न.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी के कंधे पर अपना हाँथ रख दिया और अपनी तरफ गुमा लिया. गुमने के बाद दीदी कोई 5 सेकंड तक मेरे खड़े लैंड को देखती रही फिर अपनी आँखे बंद कर ली.

मैं- सरिता अपनी आंके खोलो. और अपने भाई की तरफ देखो.

सरिता दी- नहीं अभी मुझे शर्म आ रही है.

मैं- देखो सरिता आखिरी बार कह रहा हूँ अपनी आँखे खोलो नहीं तो मैं तुम्हारे साथ कुछ उल्टा सीधा कर दूंगा तो मुझको दोष मत देना.

मेरी बात सुनकर दीदी को हंसी आ गई और उन्होंने हँसते हुवे अपनी आँखे खोल दी और आँखे खोलने के बाद दीदी मेरी तरफ न देखकर मेरे लुंड को देखने लगी. दीदी ने मेरे नंगे लुंड को पहले भी देखा था लेकिन इस बार मेरी जानकारी में मेरा नंगा लुंड देख रही थी वो भी मेरे सामने खड़े होकर मेरे लुंड को देखकर दीदी की आँखे नशीली हो गई. उनको होंठ सुख गए. जिसपर वो अपनी जीभ घूमते हुवे बोली.

सरिता दी- अभी तू सच में बहुत बेशरम है.

मैं- अब इसमें बेशर्मी कैसे आ गई. चलो छोडो इन बातो को अब मैं निचे लेटते हूँ और आप मेरे ऊपर टंगे दोनों तरफ फैलाकर कड़ी हो जाओ. ये कहकर मैं जमीन पर कमर के बल लेट गया जिससे मेरा लुंड टैंकर तम्बू की तरह खड़ा हो गया. दीदी मेरे लुंड को देखती हुई पेट के दोनों तरफ अपने पेअर रखकर कड़ी हो गई फिर मैंने दीदी का हाँथ पकड़ लिया और कहा.

मैं- सरिता अब मैं तुम्हारे हाँथ के सहारे अपने जिस्म को कमर से ऊपर उठाऊंगा तो तुम अपने आप को संभालना.

सरिता दी- ठीक है.

दीदी की हाँ सुनकर मैंने दीदी के हाँथ को पकड़कर अपने जिस्म को जोर देखर आधा शरीर कमर से ऊपर उठाया जिससे मरे लुंड सीधा दीदी की गांड से टकरा गया. 2 सेकंड तक लुंड गांड पर टच करने के बाद मैं नीचे वापस आ गया. मैं लगभग 3 मिनट तक ये एक्सेरसीज़े करने के बाद उठकर खड़ा हो गया. अब दीदी एकदम बेशर्म बैंकर मेरे नंगे लुंड को घोर घोर कर देख रही थी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-85

मैं- सरिता अब मैं तुम्हारे हाँथ के सहारे अपने जिस्म को कमर से ऊपर उठाऊंगा तो तुम अपने आप को संभालना.

सरिता दी- ठीक है.

दीदी की हाँ सुनकर मैंने दीदी के हाँथ को पकड़कर अपने जिस्म को जोर देखर आधा शरीर कमर से ऊपर उठाया जिससे मरे लुंड सीधा दीदी की गांड से टकरा गया. 2 सेकंड तक लुंड गांड पर टच करने के बाद मैं नीचे वापस आ गया. मैं लगभग 3 मिनट तक ये एक्सेरसीज़े करने के बाद उठकर खड़ा हो गया. अब दीदी एकदम बेशर्म बैंकर मेरे नंगे लुंड को घोर घोर कर देख रही थी.

अब आगे.

फिर मैं नंगा hi जिम स्ट्रेचर पर लेट गया और दीदी से वाइट उठाने में हेल्प मांगी. दीदी ने मेरी हेल्प की वाइट उठाने में. कुछ देर एक्सेरसीज़े करने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब मुझे कमजोरी महसूस हो रही है.

सरिता दी- तो अब एक्सेरसीज़े बंद कर दो और आराम करो.

मैं- लेकिन मैं और कसरत करना चाहता हूँ. तुम मेरी हेल्प कर दो.

सरिता di-ab इसमें मैं तुम्हारी क्या मैडम कर सकता हूँ.

मैं- मुझे दूध पीला दो तो मुझे ताकत आ जाएगी.

सरिता दी- लेकिन अभी तो दूधवाले के आने में बहुत समय है. अभी कहा से तुझको दूध दू.

मैं- सरिता तुम्हे दूध के लिए दूधवाले का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है (उनकी चुकी को घोरकर) दूध तो तुम्हारे पास hi है मैं इसी से काम चला लूंगा.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी और बोली.

सरिता दी- हाट बेशरम. बहन का ढूढ़ पीना चाहता है. तुझे शर्म नहीं आती.

मैं- कैसी शर्म सरिता. यहाँ मुझे कमजोरी हो रही है और तुम्हे शर्म की पड़ी है.

सरिता दी- लेकिन मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैं नहीं पिलाऊंगी अपने दूध.

लेकिन मैं दीदी को इतने आसानी से छोड़ने वाला नहीं था. उनकी बातो से लग रहा था की वो तैयार हैं लेकिन लड़की ठहरी तो थोड़ा नखरा लाज़िमी बनता है करना. मैं दीदी से लगातार कहता रहा तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- लो गई ये भी कोई बात हुई की कसरत करने औ तो तुम्हे दूध पुलाव.

मैं- तो क्या हुवा सरिता. भाई हूँ तुम्हारा और अपनी बहनो के दूध पर भाइयो का भी हक़ होता है.

सरिता दी- अच्छा ऐसा हक़ तो मैं पहली बार सुन रही हूँ.

मैं- लेकिन मैंने तो पहली बार नहीं सुना है ऐसा. बहुत से भाई हैं जो अपनी बहनो का दूध पिटे हैं सीधे चूचियों में मुंह लगाकर. और तुम्हारी चूचियों को देखकर लगता है की मुझे बहुत जल्दी ताकत आ जाएगी तुम्हारे दूध पीकर.

सरिता दी- (शर्माकर) ऐसा क्या है मेरे दूध में जो तू इन्हे पीना चाहता है.

मैं- अभी तो तुमने मुझे अपना दूध पिलाया hi नहीं है तो कैसे बता सकता हूँ, लेकिन मुझे ऐसा लगता है की तुम्हारा दूध बहुत मीठा है. एकदम रसीला है. थोड़ा पीला दो न.

हम दोनों ऐसे हॉट कन्वर्सेशन के कारन बहुत गरम हो गए थे. दीदी की चूचिया हवस के कारन एकदम तन गई थी जिससे उनके निप्पल t-shirt के ऊपर से hi नज़र आ रहे थे. और मेरा लुंड तो झटके मार रहा था जिसे मैं अपने हांथो से पकडे हुवे था और दीदी मेरे लुंड को hi देख रही थी.



सरिता di-(thoda न नुकुर करते हुवे) ठीक है. लेकिन मैं कपडे नहीं उतरूंगी. अगर कपडे के ऊपर से पीना चाहो तो पि सकते हो.

मैं- कपडे के ऊपर से पिने में क्या मज़ा आएगा.

इतना कहकर मैं दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनके कंधे को चूमने लगा और हाँथ आगे बढ़ा कर उनकी दोनों चूचियों को दबाने लगा और लुंड को उनकी गांड की दरार में घुसेड़ दिया. दीदी तो पहले hi गरम थी. मेरे ऐसा करने से और भी गरम हो gai.main उनकी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा जिससे दीदी ssssssssssssshhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhh करने लगी और अपने दोनों हाथ उठाकर मेरी गार्डन में लप्पेट लिया मैं अपनी जीब निकलकर उनके कण को चाटने लगा और दीदी से कहा.

मैं- सरिता मुझे कमजोरी हो रही है. अपना दूध पिलाओ न.

Didi(Madhosi में) थोड़ी देर रुक जाए अभी. दूधवाला आता hi होगा.

मैं- नहीं सरिता मुझे दूधवाले का दूध नहीं पीना. मुझे दो दूधवाली का मीठा मीता और ताज़ा गरम दूध पीना है. पिलाओगी न मुझे अपना दूध.

इतना बोलकर मैंने दोनों हाँथ से दीदी की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और कमर को थोड़ा पीछे करके खड़ा हो गया. कुछ सेकंड ऐसा खड़ा रहने के बाद मैंने उनकी चूचियों को कसकर मसलते हुवे अपने कमर को झटका दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में समां गया. दीदी की आनंद से आँख बंद हो गई और एक सिसकी उनके मुंह से निकली.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय धीरीईईए सीईई. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeyyyyyyy.

मैंने फिर से दीदी के कण और गार्डन चाटते हुवे दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब तो मुझे भूख भी लग रही है. अपना दूध पिलाओगी अपने इस भूखे भाई को.

मेरी बात सुनकर दीदी ने गार्डन घुमाकर मेरी आँखों में देखा उनकी आँखे एकदम लाल हो गई थी. दोनों गाल गुलाबी हो गए थे. होंठ कैंप रहे थे. जब दीदी मेरी आँखों में देख रही थी तो मैंने उनकी चूचियों को जोर से दबाया. तो दीदी ने ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh की सिसकी ली और अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. और मेरे होंठो को चूसने लगी.



मैं भी दीदी का साथ देने लगा और उनकी चूचियों को दबाते हुवे निचे से अपनी कमर को हल्का हल्का धक्का देता रहा. थोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को मसलने के बाद मैंने उनकी चूचियों को जोर से मसल दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मरीईई भाईईईईई. धीरीई से ooooooooohhhhhhhhhhhhhhh धारड़ड़ड़ड़ होताआ हिअआअ.

मैं- अपना दूध पिलाओ सरिता मैं तुम्हारे सरे दर्द दूर कर दूंगा. पि लू तुम्हारा दूध.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmm

दीदी की बात सुनकर मैं उनको छोड़कर पीछे हैट गया और चेस्ट स्टैंड पर जाकर बैठ गया. मैं अभी भी नंगा hi था. स्टैंड पर बैठने से मेरा लुंड ऊपर की तरफ तम्बू बनाकर खड़ा हो गया. दीदी मेरे लुंड को हवस भरी नज़रो से देखने लगी. मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे कहा.

मैं- सरिता यहाँ आओ और मेरी गॉड में बैठो.

Main-Aise कैसे. अपनी लोअर तो पहन लो.

मैं- नहीं सरिता मुझे तुम्हारा दूध ऐसे hi पीना है. कुछ नहीं होता यार आओ मेरी गॉड में बैठो.

दीदी भी अब पूरी गरम हो hi गाइट hi. मेरी बातो को सुनकर दीदी मेरे लुंड को देखती रही कुछ देर लुंड को देखने के बाद दीदी मेरे पास आई और आराम से अपनी गांड मेरे लुंड पर रखकर बैठ गई. मेरा लुंड दीदी की गांड के निचे डाब गया तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- मैं ऐसे कैसे तुम्हारा दूध पि पाउँगा सरिता.

सरिता दी- तुम खुद hi कह रहे हो मेरी गॉड में बैठो.

मैं- हाँ सरिता लेकिन मेरी तरफ मुंह करके बैठो तभी तो पिऊंगा.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी कड़ी हो गई और अपने दोनों टंगे फैलाकर अपनी मोती मोती और गद्देदार गांड मेरी जांधो पर राखी और अपनी छूट से मेरा लुंड फसकर आगे की तरफ खिसक आगि. अब सेतुएशन ये थी की अगर कोई हमें देख लेता तो उसको यही लगता की हम दोनों चुदाई कर रहे हैं. मैंने दीदी की नशीली और हवस भरी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तो बताओ सरिता रानी. अपने भाई को अपने दूध कैसे पिलाना पसंद करेंगी.

सरिता di(meri आँखों में देखकर) पीना तो तुझको है जैसे तुझे पीना हो वैसे पि ले.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की t-shirt निचे से पकड़ ली और उसे ऊपर खिसकने लगा. दीदी ने भी अपने हाँथ ऊपर कर t-shirt उतरने में मेरी मदद की. अब दीदी के मखमली शरीर पर ऊपर ब्रा थी. दीदी की ब्रा उनकी दोनों चूचियों को संभल पाने में असमर्थ थी.



तभी तो दीदी की चूचिया आधे से ज्यादा ब्रा से बहार झांक रही थी. दीदी तो दिखने में वैसे भी बहुत सेक्सी थी. लेकिन ब्रा में दीदी की जिस्म और भी जानलेवा था.

मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे अपना मुंह निचे झेककर उनकी चूचियों की घाटियों में घुसा दिया और उसकी नर्माहट का मज़ा लेने लगा. मेरे होंठ अपनी क्लीवेज पर लगते hi दीदी की मुंह से ssssssssssssssaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ssssssssshhhhhhhhhh की आवाज़ निकली और दीदी ने अपनी गोरी और मखमली बहे मेरे गले में दाल दी और मेरे सर को अपनी ृषभरी चूचियों पर बढ़ाने लगी. दीदी के जिस्म से निकलती पसीने की दुर्गंद और दीदी के गदराये जिस्म की सुगंद दोनों मिलकर मेरे शरीर में एक नया रोमांच पैदा कर रही थी

मैंने अपना हाँथ दीदी की गांड से थोड़ा ऊपर रखकर सहलाने लगा और दीदी की चूचियों के बिच अपने चेहरे को रगड़ने लगा. कुछ देर अपना चेहरा रगड़ने के बाद मैंने जीभ निकली और उनकी चूचियों की घाटी को चाटने लगा. और निचे से अपनी कमर को मूवमेंट देकर अपना लुंड दीदी की छूट पर घिसने लगा. दीदी तो मज़े के सातवे आसमान में उड़ रही थी.

मेरे छूट पर लुंड रगड़ने से दीदी भी मस्ती में अपनी छूट का प्रेसर मेरे लुंड पर बढ़ने लगी और मेरी जीभ को अपनी चूचियों के इर्द गिर्द महसूस करके sssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh आआआआअह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मैंने भी अब दीदी की चूचियों की घाटी से मुंह उठाकर ब्रा में कैद दीदी की चूचियों को चाटने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचियों को चाटने के बाद मैं अपने हाँथ ऊपर की तरफ सरकने लगा और ब्रा के हुक में फसकर ब्रा का हुक खोल दिया. जिससे दीदी की चूचिया किसी बॉल की तरह ब्रा से निकलकर बहार आ गयी. और मेरी आँखों के सामने थिरकने लगे. मैं तो दीदी की चूचिया देखकर जैसे खो सा गया. और दीदी से बोलै.



मैं- वह सरिता क्या नशीला हुस्न है तेरा. ये तेरी भरी भरी और बड़ी बड़ी चूचिया एकदम तानी हुई हैं. तनिक भी ढीलापन नहीं है इनमे. और तुम्हारी चूचियों में बहुत रास भरा है जिसे पिने में बहुत मज़ा आएगा.

इतना कहकर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंठ दीदी के छुडास से लाल हो चुके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. और अपने हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी भी मेरा होंठ चूसने में साथ देने लगी. लगभग 3 मिनट तक एक दूसरे के होंठ चूसने और उनकी चूचिया दबाने के बाद हम दोनों अलग हुवे. थोड़ी देर बाद मैंने अपने होंठो से दीदी की नंगी चूचिया चूमने लगा. चूचिया चूमते चूमते मैंने दीदी के एक निप्पल को मुंह में भर लिया और चूसने लगाई. निप्पल मुंह में लेते hi दीदी की मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ssssssssssssss sssssssssssssss की आवाज़ निकल गई और दीदी ने अपना हाँथ मेरे सर पर रखकर मेरे बालो को सहलाने लगी.

मैं दीदी के निप्पल को दबा दबा के चूस रहा था और निचे से अपने लुंड का झटका दीदी की छूट पर मार रहा था. मैंने कभी देर एक निप्पल को चूसा फिर उसे छोड़कर दूसरे निप्पल को चूसने लगा. मैं पूरा मुंह खोलकर दीदी की चूचियों को जितना हो सकता था मुंह में लेकर चूस रहा था. जिससे दीदी को भी बहुत मज़ा आने लगा था और वो कहने लगी.



सरिता दी- Aaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ माज़आआआ आए राहाआआ हैआईई. ऐसे हीई चूऊउउउउसस्स्सस्स मेरी भाआआअआइई अपनीईई सरिता कीईई छूछीयोओओओओओ कोऊ.

मैं दीदी की बात सुनकर और जोर जोर से दीदी की चूचियों को चूसने लगा. दीदी की चूचियों में जैसे एक नशा सा था. जिसको चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं चूचियों को चूसकर जैसे पागल सा हो गया और दीदी भी अपनी चूचिया चूसा चूसा कर पागल हो रही थी, तभी तो मस्ती में दीदी अपनी छूट को मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ घिस रही थी. मैं दीदी की चूचियों को चूसते चूसते दीदी की अपने गॉड में उठाकर खड़ा हो गया और और निचे से अपना लुंड उनकी गांड में सटाकर दीदी को उसपर बैठा दिया जिससे दीदी की गांड की दरार में मेरा लुंड घुसकर सीधे उनके ासशोले पर लगा. दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaasssssssss sssssssssss की आवाज़ निकल गई.

थोड़ी देर दीदी को अपनी गॉड में उठाकर अपने लुंड पर बैठने के बाद मैं दीदी को अपनी गॉड में ऊपर निचे करने लगा और दीदी की चूचियों को चूसने लगा. ऐसा लग रहा था की मैं दीदी को छोड़ रहा हूँ. मेरे लुंड की ठोकर अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी कैंप जाती थी. दीदी की लोअर पूरी गीली हो गई थी. मैंने दीदी की छूट पर अपने लुंड की एक तेज़ ठोकर मरी और दीदी की चूचियों को काट लिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii क्याआआआआ कारररररररर रहा हैईईई. दांत्तत्ततत्तत क्योनंन्नं गाडायआ राहाआआआआ हैईईईई. कीसीईईईइनी देख लियाआआ तो क्याआ जाआआआआआब दूंणणणगीीीी. धीरीईए चूस्स्स्सस्स्स्स मेरेईईईई bhaaiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ अच्छाआ लगगगगगगगग राहाआआआ हैईईई.

मैंने कुछ देर दीदी को गॉड में उठाये उनकी छूट पर लुंड रगड़ते और उनकी चूचिया पिटे खड़ा रहा. फिर मैंने दीदी को चेस्ट स्टैंड पर लिटा दिया और दीदी की चूचिया पिटे हुवे दीदी के ऊपर लेट गया और अपना लुंड उनकी छूट पर लोअर के ऊपर से रगड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyy Abhhiiiiiiiiiiiii Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh तू कीटनाआआआ ाआअच्छाआ haiiiiiiiiii. तू मेराआआआआ कीटनाआआआ ख्याहाल रखता हीी. मुझेईईई कुछःह होओओओ रहहाआआ हिअआआअ भीआइइइइइइइइइ मेरी ाण्ड्डड्डड्डड़ररररररर जैईईईसीएएएएएएए चीटीईईईई रेंगगगगगगगग राहीईई हाईंण्णन मेंनननननननन बहुत्तत्त pyaasiiiiiiiiii होऊणणन्न अभीइइइइइइ मेरीए अछ्हीईईईई भाईईईईई मेरिइइइइइइइ प्याआआस्स्सस्स्स्स बुझायआ दी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-86

दीदी की बात सुनकर मुझे यकीन हो गया की दीदी अब छोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. और इस सेतुएशन में दीदी मुझे किसी बात के लिए मन नहीं करेंगी. मैं दीदी को अभी hi छोड़ सकता था लेकिन दीदी कुंवारी थी. और मेरे लुंड को झेलना दीदी के बस की बात नहीं थी. क्योंकि लुंड के छूट में घुसते hi वो चिल्ला चिल्ला कर सारा घर सर पे उठा लेती. और इस समय घर में सभी मौजूद थे. मुझे दीदी की चुदाई करने के लिए कुछ तिकड़म भिड़ानी थी. और उसके लिए मुझे समय चाहिए था लेकिन उसके पहले मैं दीदी को पूरी तरह खोल देना चाहता था इसलिए मैं दीदी को और तड़पने के दीदी की चूचियों से मुंह हटाकर कहा.

मैं- रुको सरिता मैं अभी तुम्हे पानी देता हूँ.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiii ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मुझेईईई पनीइ कीई pyaasssssssssss nahiiiiiiiiiii haiiiiiiiiiiii. टूउऊउउउ समझहहहहहह रहा haiiiiiiiiiii नाहा मैंण्ण्ण्ण्ण्ण्क्याआ काआहंआआआ चाहाहति हूँण.

मैं- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है सरिता अगर तुम पानी नहीं पियोगी तो तुम्हारी प्यास कैसे बुझेगी.

इतना कहकर मैं फिर से दीदी की चूचियों को चूसने लगा और अपना लुंड दीदी की छूट पर रगड़ता रहा. तो दीदी फिर से तड़पते हुवे बोली.

सरिता di-oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ाभीईई क्यूओ तडपाआआआ रहा हैईईईई मुझेईई पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ भाईईईई मेरिइइइइइइ पयास्सस्सस्स बुझाआआआ दिए. दललललल दे apnaaaaaaaaaaa मेरेईईई अंडररररररर और भुजाआए डीएई मेरिइइइइ प्यास.

मैं- तुम क्या कह रही हो क्या दालु में तुम्हारे अंदर और कहा दालु मैं. साफ साफ कहो जो कहना है.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiii दलललल्ल दी नाहा क्यों तडपाआआ राहाआआ हैईईई. टूउउ समाआजहठ्ठ जायआ. मेंनननन नाहीई कहहहहहहह पाऊउउउउग्नीी.

दीदी की ये बात सुनकर मैंने उनकी चूचियों से मुंह हटा लिया और उनके ऊपर से उठ गया और बोलै.

मैं- जब तुम नहीं कह पाओगी तो मैं कुछ नहीं कर पाउँगा. अगर तुम्हे मुझसे अपनी प्यास बुझवानी है तो एकदम बेशर्म बैंकर खुलकर बोलो की क्या दालु मैं और कहा दालु.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखा दीदी की आँखे एकदम लाल हो चुकी थी. उनकी चूचिया जोर से साँस लेने के कारन ऊपर निचे हो रही थी. उनकी आँखों में मुझे छुडास साफ दिख रही थी. मेरे ऐसे उठ जाने से दीदी का मज़ा ख़राब हो गया था. दीदी एकदम कटी पतंग की तरह हो गई थी. कुछ देर तक दीदी ने कुछ नहीं कहा और आँखों से मुझसे मिन्नत करती रही. लेकिन जब मैंने कोई रिस्पांस नहीं किया तो दीदी ने भी अब बेशरम बनते मेरे हाँथ को पकड़कर अपने ऊपर खींचते हुवे तड़पकर कहा.

सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhh अभीइइइइइइइ मेरी भाईईईई मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट मीटी बहुत्तट्ठ आग लगइईईई हैईईईई. मुझीीी छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ दे. मेरिइइइइइइ पयास्सस्स बुझायआ दी. डाललललललललल डीई अपनाआआ ताआएगाआडा लुँड्ड्ड मेरिइइइइइइ गरममममममम छुट्ट्ट्ट मीटीए. और बणायआ ली मुझीीी अपनीईई हमेशाआ की लिएईईए.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की चूचियों को बेरहमी से मसलने लगा और अपने लुंड को उनकी छूट पर घिसते हुवे बोलै.

मैं- तुम मेरी बहन हो मैं तुम्हे नहीं छोड़ सकता.

सरिता दी( मेरी आँखों में देखकर) मैं तेरी बहन पहले थी लेकिन अब मैं तेरी बहन नहीं रह गई हूँ. तूने अब मुझे अपनी बहन रहने कहा दिया है. तूने मुझे अपनी गफ बना लिया है.

मैं- हाँ अब तुम मेरी गफ हो. तुम मेरी चुड़क्कड़ मॉल हो. बोलो सरिता तुम और क्या हो मेरी.

सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ. तू मुझेईई जोऊ भीईईई बनाना छाअहीए बनाए leeee.lekin अभी मेरिइइइइ प्यासस्सस्स बुझाआआआ डीएई. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhh.

मैं- तेरी प्यास बुझाने से पहले मैं तुझे बता तो दू की मैं तुझे अपनी क्या बनाना चाहता हूँ. अज्ज से तू मेरी गुलाम बैंकर रहेगी. मैं जो कहूंगा तू सब मानेगी. मैं तुझे अपनी पर्सनल रखैल बनाना चाहता हूँ. तुझे मैं रंडी की तरह छोड़ना चाहता हूँ. बोल बनेगी तू मेरी रखैल. छुडवायेगी तू मुझसे रंडी बैंकर. बोल जल्दी बोल.

इतना कहकर मैंने दीदी की चूचियों को जोर जोर से मसल मसल कर चूसने लगा और अपने लुंड को तेज़ तेज़ दीदी की छूट पर घिसने लगा. जिससे दीदी एकदम बेकाबू हो गई और अंत संत बकने लगी.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सलीबी. अपनी बहनणनननन को अपनी रखईईईईईललल बनानाआ चाहाहता हैईईईई. चू बहुत्तट्ठ कमीना हिअआ सलेटी कुट्टीीी. लेकिनन्ननननन मुझेईई टीड़ीए साथःहःहः बहुत्त मज़ाआ ाताआ हिअआअ. तुझको जोऊ करन्ना हैईईई मरीईई सठह तू कर. मुझीऐ रनडीईईईई बनाए, कुटिया बणायआ, रखैललललल बनाए. जूऊऊऊ भीईई मर्जज़्ज़्ज़्ज़िइइइइइइ वोऊ बनाआआआ लेकिननननन अब्ब मिझीीे चुड़ डीएई मेरेईईई बुर्र मीटी बहुत्त आगआआआ लागीयी haiiiiiii.mainnnnnnnmaarrrrrrrrr ज्जाआँआंग़ीीीी. छोड़ड़ड़ड़ड़ मुझेईईई ooooooooooooohhhhhhhh.

दीदी की बात सुनकर मैं उनके ऊपर से उठकर निचे बैठ गया और उनकी चूचियों को चुसते हुवे काटते हुवे एक हाँथ दीदी की छूट पर लोअर के ऊपर से रख दिया. जिसपर दीदी फिर कम्प उठी. मैंने अपना हाँथ दीदी की लोअर में डाला और उनकी पंतय को साइड करके सीधे उनकी छूट को सहलाने लगा. दीदी मचलने लगी. फिर मैंने अपनी एक ऊँगली दीदी की छूट में एक झटके के साथ दाल दी जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- ooooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh AAAAbhiiiiiiiiiiiii Dhireeeeeeeeee कररररररर कुत्त्तीीी. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh hhhhhhhheyyyyyyyyyyyyy मेंननननननन अभीयी कुंआरीईई हूंणणंन्न. थोड़द्दाआआआ प्यार सी भाईईई.

मैंने दीदी की बात की परवाह किये बगैर तेज़ी से अपनी ऊँगली उनकी छूट में अंदर बहार करने लगा और अंगूठे से उनकी क्लीट को सहलाने लगी. और दीदी की चूचिय को एक हाँथ से मसलते हुवे चूसने लगा. जिससे दीदी का शरीर अकड़ने लगा और वो अंत संत बकते हुवे झड़ने लगी.

सरिता di-oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्यययय मैंनं gaaiiiiiiiiiiii. मेंननननननन गिरररररर रहीए हूंणन्नन्नन्न मम्मीयिययियीय देखहहह टेरी बीटीईए नईईईई टेरिइइइइइइइइ betiiiiiiiiiii कुओ अपनीईई रखैललललललल बनाए लियाआआ. Ohhhhhhhhhhhhhh Saleeeeeeeeee Abhiiiiiiiiiii मैईयीं गिररररररर jaauggiiiiiiiiiiii मेंननननन झाड़ राहीईई हूंणंन्न मुझेईई सँभाललललललललल ले कुट्ट्टीीीे. मेंननननननन gaaiiiiiiiiiii.

इतना बोलकर दीदी झाड़ गई और चेस्ट शीट पर लेती लेती हांफने लगी. थोड़ी देर बाद जब दीदी की सांसे दुरुस्त हुई तो वो मुझे देखकर शर्माने लगी. मेरा लुंड अभी तक खड़ा हुवा था. दीदी ने जब मेरे लुंड को देखा तो नज़ारे झुका ली. मैंने दीदी को छेड़ते हुवे कहा.

मैं- क्यों सरिता मज़ा आया एक्सेरसीज़े करके.

दीदी मेरी बात सुनकर मंद मंद मुस्कुराने लगी. तो मैं दीदी के पास गया और उनकी ठुड्डी से पकड़कर उनके सर को ऊपर उठाया और उनकी आँखों में देखने लगा.



दीदी की आँखे अभी भी लाल थी लेकिन अब उसमे एक संतुस्ती झलक रही थी. दीदी के होंठ अभी भी कैंप रहे थे. मेरे इस तरह देखने से दीदी के गलो पर हाय की लाली छ गई. कुछ देर दीदी की आँखों में देखने के बाद मैंने अपने होंठ बढाकर दीदी के होंठ पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. मैंने अपने हाँथ से दीदी की चूचिया पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा. कुछ देर ऐसा करने के बाद दीदी की शर्म अब थोड़ी काम हो गई तो मैंने उन्हें छोड़ दिया और उनसे कहा.



मैं- तुमने बताया नहीं सरिता तुम्हे मज़ा आया की नहीं.

सरिता दीदी- hhhhhmmmmmmmmmmmmmmmm.

मैं- तुम्हारा काम तो हो गया तुम थो ठंडी हो गई लेकिन अभी मैं ठंडा नहीं हुवा हूँ. तुम मुझे भी ठंडा कर दो.

अब तक दीदी ने अपने कपडे पहन लिए थे. तो वो उठी और मुस्कुराते हुवे, थोड़ा शरमाते हुवे एक ऐडा के साथ बोली.

सरिता दी- तुझे ठंडा करे मेरी जुटी. चल भाग यहाँ से. बड़ा आया.

दीदी इतना कहकर निचे जाने लगी तो मैंने उन्हें आवाज़ देखर रोका तो दीदी रुक गई. तो मैंने चुदाई के लिए सविता दीदी और सरिता दीदी के लिए जो शामे ड्रेस ली थी. उसको निकल कर दीदी को देते हुवे कहा.

मैं- ये तुम्हारे लिए मेरी तरफ से गिफ्ट है सरिता. और मैं चाहता हूँ की तुम जब छुड़वाने के लिए मेरे पास आओ तो यही कपडे पहनकर आओ.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों में देखते हुवे बेशर्मी से कहा.

मैं- तुम कितने बड़े कमीने हो. इतना छोटा सा गिफ्ट देखर अपनी बड़ी बहन की कुंवारी छूट छोड़ना चाहते हो. तुम्हे शर्म नहीं आती.

मैं- सरिता ये तो उस गिफ्ट का एक छोटा सा नमूना था. जब तुम ये कपडे पहन कर छुड़वाने के लिए मेरे पास आओगी तब मैं तुमको असली और बड़ा गिफ्ट दूंगा.

ये बात मैंने अपने लुंड को सहलाते हुवे दीदी की आँखों में देख कर इशारे करते हुवे कहा. मेरा इशारा समझकर दीदी ने मेरे लुंड की तरफ देखा और अपने होंटो पर जीभ फिरती हुई बोली.



सरिता दी- खुली आँखों से सपने देखना बंद कर दे. मैं तेरे हाँथ नहीं आने वाली. और मैं तेरा ये गिफ्ट भी नहीं पहनूंगी.

मैं- तुम्हारे कहने से क्या होता है. मुझे पूरा भरोषा है अपनी दीदी पर की वो अपनी जिस्म की प्यास अपने भाई से शांत करवाने के लिए ये गिफ्ट पहनकर जरूर आएगी और कहेगी की भाई मुझे छोड़ दो.

सरिता दी- ऐसा कुछ भी नहीं होगा.

मैं- देखते हैं.

सरिता दी- देख लेना.

इतना बोलकर दीदी निचे जाने लगी. तो मैं भी अपनी लोअर पहनने लग. तभी मुझे मनीषा की आवाज़ सुनाई दी जो दीदी से बाते कर रही थी. मैं भी उनकी बाटे सुनने लगा.

मनीषा- गुड मॉर्निंग दीदी.

सरिता दी- गुड मॉर्निंग मनीषा.

मनीषा- हो गई आज की एक्सेरसीज़े. खूब मज़ा आता होगा न दीदी.

सरिता दी- हाँ हो गई. हाँ मज़ा तो बहुत आता है.

मनीषा- हाँ दीदी भाई के साथ करती हो इसलिए ज्यादा मज़ा आता है.

सरिता दी उसकी बात सुनकर उसकी तरफ क्वेश्चन वाली नज़रो से देखा और कहा और थोड़ा नाराज़गी से कहा

सरिता दी- मतलब क्या है तुम्हारा मनीषा.

मनीषा- क्या दीदी आप तो गुस्सा हो गई. मैं ये कह रही थी की कही बहार अगर आप जिम ज्वाइन करती तो वह आपको रोज स्पोर्ट क्लॉथ पहनकर जाना पड़ता. और वह कैसे कैसे लोग आते हैं वो बताने की जरुरत नहीं है. आपको जिम सीखने के बहाने यहाँ वह टच भी कर सकते थे. मेरी इतनी प्यारी दीदी के साथ गलत हारकर कर सकते थे वो लोग. लेकिन घर में सिखने से भैया आपको बहुत प्यार से सिखाते होंगे. आपकी हर जरुरत को पूरी करते होंगी. यहाँ आप अपने हिसाब से सीखती हैं. जब मन चाहा आराम भी कर लेती हैं. और भैया सब कुछ बहुत प्यार से करते होंगे. है न दीदी.

मनीषा ने जो बात कही थी. उसको सुनकर मेरा दिमाग फिर से उन्ही बातो में उलझ गया की शायद मनीषा कुछ जानती है. लेकिन मनीषा ने सरिता दीदी को अपनी गोल गोल बातो में ऐसे उलझाया की वो एकदम खुश हो गई और उसका गाल सहलाकर बोली.

सरिता दी- तू सही कह रही है मनीषा अभी बहुत प्यार से सिखाता है. और वो बोल भी रहा था की मैं जैसे भी सीखना चहु और मेरी जैसी भी जरुरत होगी तो मेरी हर जरूरत को पूरी करेगा. अभी बहुत अच्छा है मनीषा.

मैं- मैं भी तो वही कह रही थी की भैया के साथ करने में ज्यादा मज़ा आता है लेकिन आप तो गुस्सा हो गई मुझसे.

सरिता दी- सॉरी मनीषा. मुझे समझ में नहीं आया की तू क्या बोल रही है इसलिए थोड़ा गुस्सा आ गया सॉरी यार.

मनीषा- कोई बात नहीं दीदी. वैसे ये आपकी लोअर कैसे भीग गई दीदी.

मनीषा की बात सुनकर मुझे और सरिता दीदी को झटका सा लगा. मैं तो खैर कमरे में था लेकिन दीदी तो मनीषा के सामने थी. उसकी बात सुनकर वो हड़बड़ा गई और इधर उधर देखने लगी. उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था की वो उसे क्या जवाब दे. लेकिन जवाब तो देना hi था तो सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- वो क्या है मनीषा एक तो आज रोज के बनस्पत गर्मी ज्यादा है और आज अभी ने ज्यादा hi जी जान लगा दी कसरत करवाने में मेरी संतुस्ती के लिए. इसलिए पसीना बहुत आ गया. ये देख मेरी t-shirt भी गीली हो गई है. अच्छा ये सब छोड़ तू बता. आज सुबह सुबह छत पर किसलिए जा रही है.

मिनिषा- वो आज मेरा मन किया की छत पर चलकर ठंडी हवा खा ली जाये इसलिए मैं छत पर जा रही हूँ. और आप के हाँथ में ये पैकेट कैसा.

सरिता दी- वो क्या है मनीषा की आज मैंने इतनी म्हणत और लगन से कसरत की. की अभी ने खुश होकर मुझे ये गिफ्ट दिया है.

मनीषा- वाओ दीदी. मुझे भी तो दिखाओ क्या है इसमें.

मनीषा की बात सुनकर मेरी गांड फैट गई. क्योंकि मैंने जो गिफ्ट दीदी को दिया था उसमे एकदम ट्रांसपरेंट्स ड्रेस थी. जिसको पहनना और न पहनना दोनों बराबर था और अगर मनीषा ने वो ड्रेस देख ली तो उसे अगर थोड़ा बहुत शक होगा तो वो यकीन में बदल जाएगा इसलिए मैंने खुद आगे बढ़कर बात करने की ठानी. क्योंकि सरिता दीदी मनीषा को मन नहीं कर पाएंगी ये मैं जनता था इसलिए मैं कमरे से बहार आया और मनीषा से कहा.

मैं- मनीषा मैंने ये गिफ्ट दीदी को दिया है. किसी का दिया हुवा गिफ्ट देखा नहीं करते. मैं इससे भी बढ़िया गिफ्ट तुम्हे लेकर दूंगा.

मनीषा- ठीक है भैया. लेकिन मुझे 2 दिन के अंदर hi गिफ्ट मिल जाना चाहिए नहीं तो मैं दीदी से ये गिफ्ट चीन लुंगी. बता दे रही हूँ.

मैं- ठीक है मेरी मान. जैसा तू कहे. अब आजा छत पर और ठंडी हवा खा और दिमाग को शांत रख.

मेरी बात सुनकर मनीषा छत पर आ गई टहलने के लिए और सरिता दीदी अपने कमरे में चली गई. मैं भी फ्रेस होने बाथरूम में चला गया और अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत करने लगा और सोचने लगा आज तो बाल बाल बच गए अगर कुछ देर और हो जाती तो पकड़ा जाना तय था. लेकिन ये आजकर कुछ ज्यादा हो ऑब्सेर्वे करने लगी है. में तो इसे कितना सीधा समझता था. ये तो बहुत शातिर है. इससे तबतक बचकर रहना पड़ेगा जबतक मैं इसको पता नही लेता. नहीं तो ये कुछ भी कर सकती है. हो सकता है पापा को hi बता दे. इन्ही सब बातो को सोचते हुवे मुझे 30 मिनट बिट गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-87

मैं- ठीक है मेरी मान. जैसा तू कहे. अब आजा छत पर और ठंडी हवा खा और दिमाग को शांत रख.

मेरी बात सुनकर मनीषा छत पर आ गई टहलने के लिए और सरिता दीदी अपने कमरे में चली गई. मैं भी फ्रेस होने बाथरूम में चला गया और अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत करने लगा और सोचने लगा आज तो बाल बाल बच गए अगर कुछ देर और हो जाती तो पकड़ा जाना तय था. लेकिन ये आजकर कुछ ज्यादा हो ऑब्सेर्वे करने लगी है. में तो इसे कितना सीधा समझता था. ये तो बहुत शातिर है. इससे तबतक बचकर रहना पड़ेगा जबतक मैं इसको पता नही लेता. नहीं तो ये कुछ भी कर सकती है. हो सकता है पापा को hi बता दे. इन्ही सब बातो को सोचते हुवे मुझे 30 मिनट बिट गए.

अब आगे..

मैं 30 मिनट बाद जब बाथरूम से बहार आया तो मैंने जो लुंड पर ठंडा पानी डालकर अपने लुंड को ठंडा किया था वह फिर से खड़ा हो गया. वजह थी मनीषा की चूचिया. मनीषा बाथरूम से थोड़ी दूर पर दिप मार रही थी. जिसके कारन चाट के पैरलर होने के कारन उसकी चूचिया बहुत गहराई तक बहार दिख रही थी.



मैं तो बाथरूम के दरवाज़े के पास hi खड़ा होकर उसकी चूचियों को देखता रहा. मनीषा ने भी मुझे अपनी चूचिया देखते हुवे देख लिया लेकिन वो सीधी नहीं हुई और दिप मरती रही. थोड़ी देर दिप मरने के बाद उसने कहा.

मनीषा- अच्छा है न.

मैं- हाँ बहुत hi मस्त. लेकिन क्या अच्छा है.

मनीषा- मैंने अच्छी तरह से कर रही हूँ या नहीं. यही पूछा था की ाचा है.

मैं- मैंने भी तो वही कहा की अच्छा है.

मनीषा- अच्छा भैया मुझे भी थोड़ा सिखाओ न. मुझे कमर को जो लेफ्ट राइट करके झुककर अपने हाँथ से अपने पांव को जो छूटे हैं वो करने में मुझको दिक्कत आ रही है. मुझे थोड़ा गाइड कर दीजिए.

इतना कहकर वो उठ कड़ी हुई और मेरी तरफ देखने लगी. मैं उसकी तरफ देखते हुवे अपने हाँथ से एक बार अपने लुंड को मसल कर छोड़ दिया जिसे उसने देख लिया.



फिर मैं उसके पास चला गया और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी कमर पर हाँथ रख दिया. और उससे कहा.

मैं- कोई भी एक्सेरसीज़े करने के लिए सबसे जरुरी बात ये है की कमर में लचक होनी चाहिए. ताकि उसकी मूवमेंट स्मूथली हो सके.

इतना कहकर मैं उसकी कमर को सहलाने लगा और उससे बोलै.

मैं- लेकिन तुम्हारी कमर में लोच बिलकुल नहीं है इसलिए तुमको दिक्कत हो रही है. चलो मैं बताता हूँ.

इतना बोलकर मैं उससे सत्कार खड़ा हो गया जिससे मेरा लुंड मनीषा की गांड से टकरा गया. जिससे मनीषा का शरीर कैंप गया. थोड़ी देर उसके कमर को सहलाने के बाद मैंने उससे कहा.

मैं- चलो अब अपनी कमर को बेंड करके अपने एक हाँथ को ऊपर उठाओ और दूसरे हाँथ को अपने पांव के पास रखने की कोशिश करो मैं तुम्हारी हेल्प करता हूँ.

इतना कहकर मैं उससे एकदम चिपक कर खड़ा हो गया और अपना हाँथ आगे बढाकर उसके पेट पर रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा की साँस तेज़ चलने लगी. फिर वो अपनी कमर को बेंड कर अपने एक हाँथ को ऊपर उठाकर एक हाँथ को निचे अपने पांव के पास रखा. जिससे उसकी चूचिया फिर से बहार की तरफ निकल गई.



और उसकी गांड मेरे लुंड पर एकदम से सात गई. वो कुछ देर इसी पोजीशन में बानी रही तो मैंने अपनी कमर को पीछे करके एक जोरदार झटका उसकी गांड पर मर दिया जिससे मेरा लुंड उसकी गांड की दरार में घुस गया. मेरे इस धक्के से वो आगे की तरफ गिरना लगी तो उसे ठीक से पकड़ने के चक्कर में मेरे दोनों हाँथ उसकी चूचियों पर पहुंच गए. जिसे मैंने दबाकर उसे अपनी तरफ खींचा तो उसके मुंह से चीख निकल गई.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या कर रहे हो भैया छोडो मुझे.

मैंने उसकी बात अनसुना करते हुवे उसे और कसकर अपने आप से चिपका लिया और अपने होंठ उसकी गार्डन पर रख दिए. तो वो एकदम से सिहर गई और पूरा जोर लगाकर मुझसे छोटकर दूर कड़ी हो गई. जब मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर गुस्सा था. वो गुस्से में मुझसे बोली.

मनीषा- या क्या कर रहे थे आप मेरे साथ. मैं बहन हूँ आपकी कोई गफ नहीं जो आप मेरे साथ ऐसा कर रहे है.

उसके तेवर देखकर तो मैं दर hi गया. उसका बेहेवियर मुझे समझ में hi नहीं आ रहा था. कभी मुझे लगता है की वो भी राज़ी है तो कभी दूसरा रूप नज़र आता है. मैंने बात को सँभालते हुवे उससे कहा.

मैं- सॉरी मनीषा वो गलती से हो गया. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं हिय.

मनीषा- हाँ. आपसे हर काम गलती से hi हो जाता है. आप कहाँ कुछ जानबूझकर करते हैं.

मनीषा ने वही बात कही जो सविता दीदी मुझसे कहती थी. अब मुझे पूरा यकीं हो गया था की मनीषा कुछ न कुछ तो जरूर पता है. लेकिन कितना पता है ये एक सवाल था. मेरे चुप रहने पर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अब चुप क्यों हो भैया. आपको ऐसे हरकत मेरे साथ करते हुवे शर्म नहीं आई. मैं बहन हूँ आपकी.

मैं- नहीं मनीषा मैंने कुछ नहीं किया वो तो मैंने तुमको निचे गिरने से बचने के लिए पकड़ा था.

मनीषा- (मेरे पास आकर) लेकिन धक्का तो आपने hi दिया था. मुझे गिराने के लिए.

मैं- वो तो बस ऐसे hi मने सोचा मैं भी तुम्हारे साथ एक दो स्टेप कर लू एक्सेरसीज़े.

मनीषा- मैं सब समझती हूँ भैया. मैं कोई बच्ची नहीं हूँ अब.

उसकी बात सुनकर मैंने वह से जाना hi मुनासिब समझा इसलिए मैंने उसकी बायत का कोई जवाब दिए बगैर अपने कामे में चला गया. कमर में आकर मैं सोचने लगा की मनीषा तो बहुत खतरनाक है. इसके होते हुवे मैं सरिता दीदी को नहीं छोड़ पाउँगा. इसका कुछ न कुछ तो करना hi पड़ेगा. यही सब सोचकर मैं कपडा पहनकर निचे आ गया. थोड़ी देर बाद मां पापा भी आ गए. मैंने नाश्ता किया और अपने कमरे में आकर तैयार होने लगा बहार जाने के लिए.

तैयार होकर निचे आया तो मम्मी पापा जा चुके थे. मैं भी अपने काम पर चला गया. 2 हॉर्स बाद अपना काम समेटकर मैं घर के लिए निकल pada.Raste में मैं अपने एक जान पहचान वाले दोस्त के पास चला गया. उसकी मेडिकल की फार्मेसी थी. मैंने उससे नींद न आने का बहाना बनाकर नींद की गोलिये मांगी. उससे गोली लेकर मैं एक शॉपिंग काम्प्लेक्स में गया और मनीषा के लिए एक ड्रेस ली और घर के लिए निकल पड़ा. घर पहुंचकर मैंने कुछ देर अपना काम फिनिश किया फिर मैंने दवा ली और दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. जब मैं दवाज़ा नॉक करके आवाज़ लगाई तो दीदी ने दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खुलते hi मैं तो बस दीदी को hi देखने लगा. दीदी ने क्या कपडे पहने थे. दीदी बहुत hi खूबसूरत लग रही थी और सेक्सी भी क्योंकि उनका ड्रेससुप hi ऐसा था. उन्होंने एक शर्ट और लोअर पहनी हुई थी. शर्ट के ऊपर के 4 बटन खुले हुवे थे. जिससे दीदी की जालिम चूचिया ब्रा में नज़र आ रही थी. दीदी को देखकर मेरा लुंड फिर से खड़ा होना लगा. मैंने तुरंत कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद किया और दीदी को अपनी बहो में भर लिया और उनसे कहा.



मैं- क्या बात है Sarita.Abhi से hi प्रैक्टिस शुरू कर दी है क्या रात वाली.

सरिता दी- चल हैट ऐसा कुछ नहीं है. वो तो मेरा मन हुवा इसलिए इसलको पहन लिया. वैसे कैसी लग रही हूँ.

मैं- वैसे तुम चाहे जो कपडे पहनो तुम चुड़क्कड़ hi लगती हो. लेकिन इस कपडे में तुम बहुत छुडासी लग रही हो.

सरिता दी- तू बहुत कमीना है. अपनी बहन को छुडासी बोल रहा है.

मैं- मेरे बोलने से क्या होता है सरिता छुडासी तो तुम हो hi. और आज के बाद तुम मेरी पर्सनल गुलाम बन जाओगी.

इतना कहकर मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए और उनके होंठ चूसने लगा. दीदी तो पहले से hi छुडासी थी. मेरे होंठ चूसने से वो गरम होने लगी और मेरा साथ देने लगी. मैं उनके होंठ चूसते हुवे अपने जीभ उनके होंठो पर भी फिरने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद दीदी ने अपने मुंह खोल दिया तो मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी जिसको दीदी चूसने लगी. काफी देर तक मेरी जुबान चूसने के बाद दीदी ने अपनी जीभ से मेरी जुबान को प्रेशर देकर बहार निकला और अपनी जुबान मेरे होंठो पर फेरने लगी.

मैंने भी दीदी की जुबान पर अपनी जुबान चलने laga.thodi देर ऐसा करने के बाद मैंने उनकी जुबान अपने मुंह में ले ली और चूसने लगा. अब मैंने उनकी जुबान चूसने के साथ साथ अपने हांथो को भी हरकत देते हुवे उसे दीदी की गांड पर रख दिया और उसे दबाने लगा. थोड़ी देर उनकी जीभ चूसने के बाद दीदी ने अपनी जुबान मेरे मुंह से निकली और अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुवे कहा.



सरिता दी- बहुत हो गया ab.tu जा अब. मनीषा भी है घर में.

मैं- अरे वो तो अपने कमरे में है. तुम चिंता मत करो.

सरिता दी- मैंने कहा न की अभी तू अपने कमरे में जा.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके एक हाँथ को पकड़कर उन्हें धकेलते हुवे दिवार के पास ले गया और उनके हाँथ को मोड़कर उन्हें दीवाल की तरफ गुमा दिया. और धक्का देखर दीवाल से सटाकर खड़ा कर दिया और अपना मुंह उनके कण के पास ले जाकर बोलै.

मैं- कितने नखरे करती है तू साली. बोल रहा हूँ न की मनीषा अपने कमरे में है. थोड़ी देर में मैं चला जाउगा.

इतना बोलकर मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिए और उनकी गार्डन को चाटने लगा. और अपने एक हाँथ से दीदी की गांड को दबाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने पर दीदी फिर से मस्त होने लगी और लम्बी लम्बी साँस छोड़ने लगी. मैंने अपना मुंह उनके कण के पास लेकर कहा.



मैं- सरिता तू सच में एकदम तूंच मॉल है. ऊपर से तेरी ये कातिल गांड. बहुत मज़ा आएगा तुझे छोड़ने में.

इतना कहकर मैंने दीदी को दीवाल के सहारे थोड़ा सा झुका दिया. जिससे दीदी की गांड बहार की तरफ निकल आई तो मैं दीदी की गांड सहलाने लगा. थोड़ी देर गांड सहलाने के बाद मैंने एक थप्पड़ दीदी की गांड पर जमा दिया. Chataakkkkkkkkkkkkkkkkkk. जिससे दीदी उछलकर सीधी हो गई और बोली.

सरिता di-aaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhh. क्या कर रहा है अभी. मुझे मार क्यों रहा है.

मैं- सरिता तेरी गांड इतनी जबरदस्त है की मेरे हाँथ अपने कण्ट्रोल से बहार हो गया हैं. थोड़ी देर तुझे बर्दास्त करना hi होगा अब.

इतना कहकर मैंने दीदी को फिर से झुकाने के लिए कहा थो दीदी फिर से पहले की तरह झुक गई तो मैंने दीदी की गांड पर थप्पड़ मरना शुरू किया पहले धीरे धीरे, फिर तेज़, और तेज़, और तेज़ थप्पड़ मरने लगा, हर थप्पड़ के साथ chaaaataaaaakkkkkkkkkkkk chaataaaaaaaaakkkkkkkkkkkk की आवाज़ आते और दीदी सिसकते हुवे कराहने लगती.



सरिता दी- aaaaaaaauuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhh. Oohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaooooooooohhhhhhhhhhhhhh मत कर अभी दर्द हो रहा है. छोड़ दे मुझे.

थोड़ी देर दीदी की गांड पर थप्पड़ मरने के बाद मैंने दीदी को दीवार से हटाया और अपनी तरफ घुमा कर उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आँख माधोसी के कारन लाल हो गाइट hi. उनके गाल सुर्ख हो गए थे. मैंने अपने होंठ आगे बढाकर दीदी की दोनों आँखों और गलो पर किश करते हुवे पूछा.

मैं- सरिता. क्या मैं जो कुछ तुम्हारे साथ कर रहा हूँ वो तुम्हे बुरा लगता है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी आँखों में देखा फिर अपना सर झुककर धीरे से कहा.

सरिता दी- नहीं

मैं- तो क्यात ुम सच में मुझसे छुड़वाना चाहती हो.

सरिता दी- hhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmm

मैं- लेकिन मैं छोड़ते समय बहुत गन्दी गन्दी बाटे करता हूँ. बहुत रगड़ रगड़ के छोड़ता हूँ. तुम नाराज़ तो नही होगी मुझसे.

सरिता दी ने फिर से नज़र उठाकर मेरी आँखों में देखा. दीदी के ऊपर मेरी बातो का भी असर हो रहा था. उनकी सांसे तेज़ चलने लगी थी. मेरी बात सुनकर दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और निचे देखना लगी.

मैं- बताओ न सरिता अगर मैं तुम्हे रगड़ रगड़ कर छोडूंगा तो तुम नाराज़ तो नहीं होगी मुझसे.

सरिता दी- (धीरे से) नहीं होउंगी.

मैं- तुम बहुत छुडासी हो न सविता. एकदम सच सच बताना.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. दीदी की सहमति देख कर मैंने भी जोश में आकर दीदी की दोनों चूचियों को अपनी मुठी में भरकर जोर से मसल दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. बहुत्तत्ततत्तत्त दररररडडडडडडडड हूँ rahaaaaaaaaaa haiiiiiiiiii bhaaaaaaaaaiiiiiiiiii. Dhireeeeeeeeeeeee dabaaaaaaaaoooooooooooo uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं- क्या तुमको ाचा नहीं लगता क्या सविता. जब मैं जोर से दबाता हूँ.

सरिता दी- (धीरे से) अच्छा तो लगता है लेकिन बहुत दर्द होता है.

मैं- इसी दर्द में तो मज़ा है सरिता. और तुम इतनी ज्यादा छुडासी हो की तुम्हे नार्मल चुदाई में बिलकुल भी मज़ा नहीं आएगा. तुम्हे तो रफ़ तरीके से छोड़ना पड़ेगा.

दीदी मेरी बात सुनकर मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखों में मुझे इस समय हवस hi हवस नज़र आ रही थी. मैं दीदी की आग को और भड़काना चाहता था. इसलिए मैंने उनके अपने साइन से सत्ता लिया और उनकी गार्डन को चूमने चाटने लगा. साथ hi अपना हाँथ दीदी की गांड पर रखकर उसे दबाने लगा. दीदी मेरे गले लगे हुवे लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. थोड़ी देर तक उनकी गार्डन को चूमने चाटने के बाद मैंने अपना होंठ उठाकर उनके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. अपने हाँथ से उनकी गांड भी दबाता रहा. फिर मैंने अपने एक हाँथ को उठाकर उनकी गांड पर एक थप्पड़ मर दिया.



दीदी aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuucccccccchhhhhhhh की आवाज़ दे साथ मेरे सर को पकड़कर रोगलय तरीके से किस करना शुरू कर दिया. मैं भी दीदी का साथ देने लगा लगभग 10 मिनट दीदी मुझे किश करती रही और अपनी गांड एक हाँथ से दबवाती रही और एक हाँथ से थप्पड़ कहती रही. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे होंठो से अपना होंठ हटा लिया.

मैंने एक हाथ उनकी गांड से उठाकर आगे लेकर दीदी की छूट पर लोअर के ऊपर से रख दिया और दबाने लगा. दीदी का लोअर गिला हो गया था. थोड़ी देर छूट दबाने के बाद मैंने दीदी की छूट मुठी में भर भर कर दबाने लगा. दीदी बस sssssssssssssssssssssssssss sssssssssssssssssssssss सीसियति रही. कुछ देर बाद मैंने अपना हाँथ उठाकर दीदी की चुकी पर रख और दीदी के सर को पीछे की तरफ झुककर अपने लुंड को छूट के पास एडजस्ट कर उनकी चूचियों को जोर से मसलते हुवे अपने लुंड को उनकी छूट पर थोक दिया दीदी चिल्ला उठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii धीरीईईई कररररररररर मुझेईईई डरडडडडडडड होताआआआ हैईईईई. तुझेईईई जोऊ करनाआए hiaaaaaaaaaaaa आराममममममममम से करररररर ooooooooooohhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyyyyy.

अभी दीदी ने इतना hi कहा था की मुझे बहार किसी के कदमो की आहात सुनाई पड़ी. मैंने तुरंत दीदी को छोड़ दिया और दिया और अलग होकर खड़ा हो गया. मेरे इस तरह अचानक अलग होने से दीदी ने मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. तू मुझसे दूर क्यों हैट गया.

मैं- कुछ नहीं दीदी वो मुझे कुछ काम याद आ गया अचानक.

इतना बोलकर मैंने कमरे का दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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