Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

hotaks

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Hello दोस्तों मैं एक बार फिर हाजिर हु

आपकी सेवा में

मेरी पिछली कुछ कहानिया पूरी नहीं हो पायी

अब आप इसे समय का खेल कहे या कुछ और पर मेरा टाइम थोड़ा खराब था

इस लिए मैं अपनी पिछली कहानी पूरी नहीं कर पाया

वैसे अगर आप लोग मुझे गली देना कहे तो दे सकते है

पर में वडा करता हु की ये स्टोरी मैं पूरी करूंगा

काम की वजह से हो सकता ह की अपडेट थोड़ा लेत मिले पर रेगुलर उपदटेस देने की कोशिश करूंगा

और मैं था मोबाइल से तयप कर रहा हु तो कहि वर्ड्स की कुछ मिस्टेक हो तो माफ़ करना

उम्मीद है की आप सबने पहले जो प्यार दिया था मैं वो वापस पा स्कू

जल्द hi अपडेट आएगा

बस आपलोग सपोर्ट करते रहना
 
अपडेट-1

उत्तर प्रदेश के किसी कोने में एक गाओं था जिसका नाम था जमुनिया.

वैसे गाओं की ज्यादा आबादी नहीं थी क्योंकि बहुत सालो पहले hi गाओं के बहुत से लोग गाओं छोड़ कर रोजीरोटी के चक्कर में गाओं छोड़ कर सेहर की और चले गए थे जो कभी लौट कर वापस न आये

इसका एक कारन ये भी था की ये गाओं चारो तरफ से पहाड़ो से घिरा हुआ था तो गाओं में बहार के लोग बहुत काम hi आते थे

गाओं में hi एक प्राइमरी स्कूल था तो गाओं के बच्चे उसी में पढ़ते थे और 8रह क्लास पास होने के बाद ज्यादा तर लोग पढ़ाई छोड़ देते थे

क्योंकि आगे की पढ़ाई करने के लिए उन्हें सेहर जाना पड़ता

गाओं में कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हे अपने गाओं से बहुत प्रेम था

इसलिए वो लोग कभी बहार पढ़ाई करने नहीं गए
 
अपडेट-2

रवि- दीदी खा है मेरी धोती कबसे धुंध रहा हु पर मिल hi रही

मुझे खेत पर जाना है

रेखा- अरे रुक तू अभी देती हु .

रेखा अपने मन में बुदबुदाते हुए( सब घोड़े जैसे बड़े हो गए है पर इन सबका काम मुझे hi करना होगा )

तभी उसे रवि की आवाज दुबारा से सुनाई देती है दीदी मिल गयी रहने दो.

और अपनी धोती पेहेन कर रवि जड़ली से खेतो की और निकल जाता है

इंट्रो- रवि एक 18 सल्ल का हटता कट्टा लड़का है

यु तो उम्र छोटी है पर समय ने उसे वक़्त से पहले hi मर्द बना दिया

बचपन में hi माँ बाप मर गए तबसे hi रवि को अपने खेतो और घर का ध्यान रखना पड़ता था

वैसे रवि का एक भाई भी है केशव

केशव उन्ही लोगो में से एक है जो कुछ लोग पढ़ाई के लिए गाओं छोड़ देते है

आज से 8 सल्ल पहले केशव भी अपने माँ बाप के मरने के बाद सेहर गया पढ़ने

पर वो कभी दुबारा लौट के नहीं आया

सब लोग जानते थे की जो एक बार सेहर जाता है वही का होकर रह जाता है

खैर केशव की बात समय आने पर करेंगे

कोमल रवि की सबसे बड़ी बेहेन

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इनकी उम्र है 36 सल्ल

कोमल की सदी पड़ोसी की hi एक गाओं में हुई है

कमाल का बदन है इसका

38-34-40

बदन के जिस हिस्से में जितना भराव चाहिए उतना इसके पास है

कुल मिलकर गदराई हुई है

इनके पति और बच्चो के बारे में बाद में बात करेंगे

रेखा- ये दूसरे नंबर पर आती है

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इनकी जितनी तारीफ की जाये काम है

कोई भी इन्हे एक बार डेल्ह ले तो यही कहेगा की कामदेवी खुद hi धरती पर आ गयी है

रेखा थोड़ी सावली है

थोड़ी नहीं बल्कि थोड़ी ज्यादा hi सावली है

इसी वजह से उसे लगता है की उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं देता

पर उसे क्या पता की बुड्ढे भी रेखा को देख कर धोती के ऊपर से hi अपना लुंड पकड़ लेते है

कमल का फिगर

36-34-42

रेखा का मुख्या आकर्षण उसकी बहार को आती हुई गांड है

पैसो की तंगी के कारन रेखा की शादी नहीं हो पायी

और रेखा ने इसकी वजह अपनी सूरत को समझती थी

पर उसे क्या पता था की किसी कामुक काली गदराई लड़की को देख कर आदमियों का क्या हाल होता है

खैर ये तो वक़्त hi बताएगा

अब 3रद नंबर पर केशव आता है

वो 26 सल्ल का है अभी उसका कोई रोले नहीं है तो इसके बारे में बाद में बात करेंगे

4तह

काम्य

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काम्य 23 सल्ल की है

जवानी से पूरी तरह भरी हुई

रंग रूप एक दम गोरा अगर कोई रेखा और काम्य को एक साथ खड़ा करदे तो कोई नहीं कह सकता की दोनों बहने है

कबीर काम्य का मुख्या आकर्षण उसकी उठी हुई गुदाज चूचिया थी जो हमेशा तानी रहती थी

और उसके निप्पल्स हमेशा से ब्रा के अंदर से उभर कर बहार साफ़ दिखाई देते थे

और काम्य को अपनी इसी चीज़ का घमंड था

रेखा मन hi मन काम्य से जलती थी

वो थी सोचती की वो किस बेकार घड़ी में पैदा हुई काम्य को देख क्र उसे अपने ऊपर शर्म आती थी .........
 
अपडेट-3

दोपहर के 12 बज चुके थे

सूरज सर पर था और गरमी अपने चरम पर

रवि अपने खेतो में काम कर रहा था उसके खेत के आस पास सिर्फ बंजर जमीन थी पर रवि ने म्हणत कर -2 के अपनी जमीन को उपजाऊ बना दिया था

और इसी कारन उसका शरीर भी काम उम्र में hi ज्यादा म्हणत करने के कारन गठीला हो गया था

रवि अपनी बनियान उतर कर सिर्फ एक धोती में अपने खेतो में हल चला रहा था

दूसरी तरफ

रेखा अपनी दोनों टंगे पसरे रोटियां बना रही थी

गरमी के कारन उसका ब्लाउज पूरी तरफ से भीग चूका था पसीना उसकी बगलो से बहते हुए उसके हाथ से होता हुआ निचे आ रहा था यही हॉल उसकी चूचियों का था

रेखा ब्रा नहीं पहनती थी

उसका बलोसुए गिला होने के कारन उसके निप्पल्स साफ दिख रहे थे

रेखा के चुचो पर जो निप्पल्स का सिरसेल था वो कुछ ज्यादा hi फैला हुआ था और उसका निप्पल भी काफी बड़ा था

किसी जमुन की तरह

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घर में वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में रहती थी ज्यादा वो कहि बहार जाती नहीं थी

रेखा- अरे काम्य जा रवि को खाना दे कर आजा

काम्य अपनी hi दुनिया में मगन थी वो बहार बैठ कर पता नहीं ज़मीन पर कोनसी चित्रकारी बना रही थी

काम्य खत पर बैठ कर निचे की और झुकी हुई थी जिस कारन उसकी चूचियां काफी हद तक बहार आ गयी थी

रेखा को जब काम्य का कोई जवाब नहीं मिलता तो वो खुद hi रसोई से बहार आकर देखने लगती है

उसे गेट के सामने hi काम्य बटिहि हुई मिलती ह

उसे देल्हते hi रेखा की नजर सीधा उसकी चूचियों पर जाती है

रेखा अपने मन में

( पता नहीं इसको माँ ने क्या लहै कर पैदा किया कोई इसे इस हालत में देख लेगा तो इसी खत पर पटक कर छोड़ देगा पर इसे कोई परवाह hi नहीं है

घोड़ी हो गयी है पर इसे कोई शर्म नहीं है )

रेखा- में तुझे कब से बुला रही हु

और तू यह घोड़ी बन कर चित्रकारी क्र रही है

जा जल्दी से रवि को खाना देकर आ

काम्य रेखा की बात सुनकर एक दम से खड़ी हो जाती है

काम्य- क्या दीदी आप कोई भी काम पूरा नहीं करने देती

डेल्हो कितना अच्छा चित्र बनाया है मेने

रेखा- देख ये सब छोड़ और पहले रवि को लहना देकर आजा फिर बना लेना

काम्य- दीदी तब तक तो मेरा चित्र गायब हो जायेगा

काम्य का बर्ताव किसी छोटी बच्ची जैसा था

रेखा उसकी मासूमियत को देख कर मन में सोचती है

( अब तो पूरी औरत हो गयी है इसकी चूचिया तो पहाड़ जैसी हो गयी है इतनी सी उम्र में hi

और देखो कितनी मासूम बनती है )

रेखा- एक काम क्र तू रवि को खाना देकर वही रुक जाना और चित्र बना लेना खेत में तो मिटटी भी बहुत साडी है

काम्य- ठीक है दीदी लाओ खाना दो

मैं जाती हु रवि को लहना देने

अंदर से रेखा काम्य को खाना लेकर देती ह

रेखा के हाथ से खाने का डब्बा लेकर काम्य अपनी मंजिल की और चल पड़ती है

रेखा( कहि ये वह जाकर भी ऐसे hi न अपनी आधी चूचियां बहार निकल दे खैर वह तो वैसे भी रवि hi है तो डरने की कोई बात नहीं )

यही सोचते हुए रेखा भी घर के अंदर चली जाती है और अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है ....
 
अपडेट-4

काम्य खाना लेकर थोड़ी hi देर में खेतो पर पहुंच जाती है

वो जाकर अपनी झोपडी में खाना रख देती है

उसकी नजरे इधर उधर दौड़ने लगती है

पर रवि कहि भी दिखाई नहीं देता

काम्य खेतो में इधर उधर घूम कर देखती है पर उसे रवि नहीं मिलता

उसे दूर किसी कोने में फावड़ा रखा हुआ दिखाई देता है वो समख जाती है की रवि उधर hi होगा

काम्य बेपरवाह उस और धोड़ी चली जाती है

उसे आगे होने वाली घटनाओ के बारे में कोई भी आईडिया नहीं था

जैसे hi वो खेत के अंतिम चोर पर पहुँचती है रवि उसे वही थोड़ा दूर लहड़ा दिखाई देता

काम्य अपने मन में सोचती है की ये रवि वह खड़ा होकर क्या कर रहा है

अपने आप hi काम्य के कदम रवि की और बढ़ने लगती है

रवि इस बात से अनजान था की उसकी दीदी उसकी तरफ बढ़ रही है

जैसे hi काम्य रवि के थोड़ा नजदीक पहुँचती है उसके पेअर वही थम जाते है

रवि अपना 12". का कला मोटा लुंड हाथ में लेकर बहुत दूर तक धार मर रहा था

काम्य की हालत तो उसे समय ऐसी थी की काटो तो खून न निकले उसके पेअर वही थम से गए और सांसो के साथ साथ उसकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी

दरअसल रवि का लुंड पूरी तरह से खड़ा था

और रवि अपनी hi मस्ती में अपने लोडे को हाथ में पड़के यह से वह लहरा रहा था

भले hi रवि समय से पहले बड़ा हो गया था पर वो था तो अभी बच्चा hi

और उसका कोई दोस्त नहीं था तो वो काम के साथ साथ अपनी hi मस्ती में डूबा रहता था

पर काम्य तो जवान हो गयी थी वो भी भरपूर

अब उससे अपनी जवानी पर कण्ट्रोल करना मुश्किल था पर घर की आर्थिक तंगी के कारन वो अपनी शादी के लिए किसी से नहीं बोल सकती थी

जैसे तैसे दो जून की रोटी मिल जाती थी

काम्य को अब ज्यादा देर तक वह रुकना ठीक नहीं लगा और वो मुद जाती है

और अपने कदम वापस से झोपडी की तरफ उठती है

जैसे hi उसका एक पेअर उठता है फिर से रुक जाती है और न जाने उसके मन में क्या आता है

वो एक बार फिर से पलट क्र रवि की और देखती है

और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो वापस जाकर अपनी झोपडी के पास hi राल्हि खत पर बैठ जाती है और रवि के आने का इन्तजार करने लगती है

पर अब काम्य के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी जैसे उसने कुछ हासिल क्र लिया हो

पर वो क्या था ये तो आने वाला वक़्त hi बताने वाला था .

दूसरी तरफ काम्य के खेतो में जाते hi रेखा घर का दरवाजा बंद कर देती है और जल्दी जड़ली अपनी ब्लाउज को अपने शरीर से अलग कर देती है

उसका बलोसुए पूरी तरह से भीग चूका था

कोमल अपने दोनों हाथो को उठाते हुए अंगड़ाई लेती है और जैसे hi उसकी नजर अपनी बगल पर जाती है वो एकदम से शर्मा जाती है

रेखा की बगल में हलके-2 बाल थे जो पूरी तरह भीग गए थे

रेखा अपनी बगल को हल्का से सूंघ कर खुद hi शर्मा जाती है

रेखा- हे भगवान् कब तक जलती रहूंगी मैं इस आग में अब तो बर्दास्त भी नहीं होता

कहि मैं अपनी इस बदन की गर्मी में खुद hi न जल जाऊ

मन में सोचती है( भगवन से विनती करके भी क्या फायदा अब तो जिंदगी भर मुझे ऐसे hi तड़पना है और खुद hi कुछ उपाय करना होगा फ्यूचर क लिए )

उसके मन यही सब सोच क्र उदास होता जा रहा था क्योंकि रेखा को कहि से भी कोई रौशनी नजर नहीं आ रही थी

पर आज रेखा के पास एक मौका था अपनी प्यास को थोड़ा कण्ट्रोल करने का वो बिना वक़्त गवाए अपना एक हाथ अपनी चुकी पर रलह कर मसल देती है और अपना दूसरा हाथ अपने पेटीकोट के नदी पर रख के एक hi झटके में नाडा खोल देती है और नाडा उसके पैरो से गिरता हुआ सीधा जमीन पर जाकर रुकता है

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रेखा बिना वक़्त गवाए सब्जी की टोकरी से एक लम्बा बैगन उठा लेती है और साथ में पड़ी चारपाई पर गिर जाती है और अपने पॉ घुटनो से मोड़ कर हटा में उठा देती है

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(माफ़ करना भाई लोग रेखा सावली है और मैं गोरी गोरी लड़कियों की फोटो दे रहा हु

आप लोग रेखा को नाम से hi इमेजिन कर लेना पहली पिछ देखकर)

अब रेखा बैगन पर पहले तो जीभ फेरती है उसे गिला करने के लिए

रेखा का एक हाथ बैगन पकडे हुए था और दूसरे हाथ से वो अपनी चुकी के ऊपर लगे जामुन को पकड़ कर खींच रही थी कभी उसे घुमा कर मोड़ रही थी

कुल मिलकर रेखा के ऊपर उसकी हवस अब भरी हो गयी थी

रेखा अच्चानक से अपना मुँह खोल कर एक hi बार में 7" तक बैगन मुँह में भर लेती है

और तेजी के साथ वो बैगन से अपने मुँह को छोड़ रही थी रेखा का गला देख कर साफ़ पता चल रहा था की बैगन मुँह में काम और गले में ज्यादा था पर अब रेखा की गर्मी साडी हदे पार कर गयी थी

अब वो बैगन को मुँह से निकाल कर अपनी छूट में थुश देती है और बड़ी तेजी के साथ अंदर बहार करने लगती है

रेखा ये सब करते हुए बहुत hi बुरी तरह से चिल्ला थी थी और उसका पूरा बदन पसीने से भीग चूका था

रेखा- ahhh......Hhhhhhh.....ma

क्या करूउऊउउउ ःझःजजज्जज मेरी इस्स्स्सस्स्स्स buuuurrr4rrr का

है अबतो गर्मी बढ़ती hi जा रही है

( गर्मी बढ़ने का सबूत ये था की आजसे 4-5 सल्ल पहले hi रेखा ने ये सब शुरू किया था पहले तो ऊँगली डालती फिर कोई छोटी चीज़ फिर सब्ज़ियां फिर धीरे धीरे सब्ज़ियों के साइज बढ़ते गए और अब इस समय बैगन...)

ये सब बोलते हुए वो तेजी से बैगन को अंदर बहार कर रही थी

रेखा- ही भगवाननननन.

मेरे इस भोसड़े का कुछ कर नहीं तो मैं मर जाउंगी

ये बोलते हुए रेखा का बदन अकड़ने लगा अब वो अपनी चुकी को बहुत hi बेरहमी से मरोड़ रही थी

और थोड़े hi देर में अपने आपको ऊपर निचे करते हुए अपनी रसीली छूट से पानी छोड़ने लगती है

अब वो अपने अआप्को काफी हल्का महसूस क्र रही थी

कोई अगर उस समय रेखा को देख लेता तो यही सोचता की ये साली पागल हो गयी है

पर ये गर्मी तो जिस्म की थी जोकि काम होने की जगह बढ़ती hi जा रही

अब देखना ये था की रेखा की छूट में क्या क्या घुसने वाला है

आप लोगो से अनुरोध है की लहनि अच्छी लगे तो भी बताये और गलत लगे तो भी बताये पर कमैंट्स जरूर दे

आपके कमैंट्स हम रइटर्स और अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करते है

कोई गलती हो तो माफ़ करे....
 
अपडेट-5

इधर अपनी टंकी पूरी खली करने क बाद रवि अपने झोपडी की तरफ बढ़ता है

उसे अंदाजा नहीं था की आगे जो होने वाला है उस के hi साथ रवि की जिंदगी भी बदल जाएगी जैसे धरती से सीधा आसमान

रवि अपना फावड़ा हाथ में लिए लगभग नंगा पसीने से लटपट जैसे hi झोपडी क पास पहुँचता है

उसके पेअर वही रुक जाते है

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काम्य फिर से चित्रकारी में मगन थी बिना ये जाने की उसका छोटा भाई उसकी ब्लाउज से बहार लटकी हुई चूचिया देख रहा ह

रवि ने पहले भी कई बार देखा था पर आ न जाने क्यों उसकी नजरो के साथ आज कुछ और भी हरकत कर रहा था

रवि को समझ नहीं आता की क्यों अच्छा उसका लुंड खड़ा हो गया

आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ

रवि ने जो देखा वो उसकी धोती में साफ़ नजर आ रहा था

उधर काम्य की नजर रवि पर पड़ती है

काम्य- रवि. ऊऊऊ रवि क्या क्र रहा ह तू खाना नहीं खाना क्या तुझे

रवि एक दम से ख्यालो की दुनिआ से बहार आता है

रवि- है दीदी यही हु देख रहा था कहि साप तो नहीं

जल्दी अजा खाना खले वैसे भी शाम होने वाली ह हमे घर भी तो जाना है

रवि- दीदी अब म सीधा रात को hi खाना खाऊंगा

रवि काम्य के सामने खड़े होकर बात क्र रहा था पर उसे अंदाजा नहीं था उसका लुंड अभी पूरी तरह से बैठा नहीं है उसे पर उसकी दीदी की नजर है

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आज रवि का लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था

काम्य लहै जाने वाली नजरो से रवि को डेल्ह रही थी

ु तो रवि था बहुत hi हटता कट्टा गबरू पर था तो बच्चा hi

या बात काम्य भी जानती थी इसलिए वो जल्द बजी नहीं करना कहती थी

क्योंकि वो समझ चुकी थी की शादी होने से तो रही काम से काम अपनी छूट का इंतजाम तो करदु

काम्य - रवि तू वैसे क्या करता है वह कोने में जाकर

रवि- दीदी म तो अपने खेत जोट रहा था

काम्य- तुझे तेरे सरे खेत पता ह की खा खा ह

रवि - है दीदी

काम्य- मतलब जिस पर तेरा क़ानूनी अधिकार हो

रवि- है दीदी पर आप अब मुझे घुमा रही हो

काम्य- पर मुझे नहीं लगता की तुझे पता ह की तेरे पास कितने खेत ह

और तू अपने सरे खेत जोट रहा ह

रवि- दीदी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा

की आप क्या कह रही ह

काम्य तो सोच रही थी की अभी अपना घाघरा ऊपर करके अपने छोटे भाई के सामने अपनी पहली हुई बुर परोस दे पर वो कोई भी जल्द बजी नहीं करना कहती थी

काम्य- जल्दी कर और खाना यही दाल दे कुत्ते खा लेंगे

और दीदी को मत बताना की तूने खाना नहीं खाया

नहीं तो मेरी भी खैर नहीं

और काम्य अपनी मोती गांड मटकते हुए आगे चलने लसगती hi और पीछे से रवि भी चल देता ह अपनी दीदी क पीछे

आज रवि को अजीब सा महसूस हो रहा था न जाने क्यों आज उसका लुंड पहले चुकी और अब दीदी की गांड देख कर खड़ा हो रहा ह

रवि क लुंड म तनाब बढ़ रहा था वो सोच रहा था की दीदी क पास जाकर उसको बताये

रवि- दीदी आप. चलो म पिशाब करके आता हु

काम्य- तो करले न म रुकी हु

रवि- नहीं दीदी आप चलो म आटा हु

काम्य समझ गयी की अब उसका छोटा भाई

अपने लुंड से तलवारबाजी करेगा

काम्य आगे की और चल देती ह और रवि जड़ी म घुस क्र मूतने का नस्ताक करने लगता ह

काम्य कुछ दूर जा चुकी थी अब रवि बहार निकल क्र घर की और जाने लगता है

रवि नहीं जनता था की जिस लुंड को वो अपनी दीदी से छुपा रहा ह वो उसे खाने के लिए तड़प रही है

पर फिर भी रवि क मन म अभी गंदे ख्याल नहीं थे

काम्य और फिर रवि दोनों घर पहुंच जाते है

स्टोरी कैसे है जरूर बताये
 
अपडेट-6

रवि और काम्य घर पहुंच गए थे

रवि का मन आज बहुत बैचैन था आज वो सही मैनो में मर्द बन गया था उसका लंग उसी दीदी को देख क्र खड़ा हो रहा था

रवि घर में घुसते hi - रेखा दीदी खाना बन गया क्या

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रखा पसीने से लटपट कूल्हे के पास बैठी हुई रोटियां सेक रही थी

उसने अभी सुबह hi एक अच्छा सा बैगन दल क्र अपनी छूट की गर्मी शांत की थी पर अब उसकी गर्मी दुबारा से चरम पर थी

रेखा के ब्लाउज का ऊपर 1 और निचे 1 हुक खोल रखा था

जिस वजह से लगभग आधी चूचिया साफ़ नजर आ रही थी

रवि आकर रेखा के पास बैठ जाता है

रवि - दीदी क्या बनाया है

रेखा- आ गया मेरा भाई

आज मेने तेरे लिए बैगन की सब्जी बनाई है

बैगन का नाम अपनी जुबान से निकलते hi रेखा खुद hi शर्मा जाती ह

अब वो अपने छोटे भाई को क्या बताती की ये वही बैगन की सब्जी है जिसे सुबह उसकी दीदी अपनी छूट में दल कर चुदाई कर रही थी

रवि- दीदी बैगन तो मुझे बहुत पसंद है

रेखा- है मुझे पता है इसीलिए मेने तेरी पसंद की सब्जी बनाई है

रवि- दीदी गर्मी तो बढ़ती hi जा रही है

देखो कितना पसीना निकल रहा ह

और रेखा अपनी नजर एक बार रवि के जिस्म पर डालती है

रेखा- है भाई तू तो पूरा भीग गया है

एक काम क्र जब तक मैं रोटी बनती हु तू नहले

रवि- दीदी भीग तो आप भी गयी है

रेखा को रवि की बात सुनकर अपनी स्थिति का अंदाजा होता है

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रेखा की चुकिया बलोसुए फाड् क्र बहार आना कहती थी

रवि इतना बोलकर नहाने चला गया और रेखा भी अब अपनी रोटियां बना चुकी थी

रेखा- काम्य चल खाना खा ले

और रवि को भी आवाज मर दे की जल्दी hi नहा कर आ जाये खाना तैयार है

काम्य आँगन में लेती हुई थी वो रेखा की बात सुन कर बहार की और चल देती है

घर के बहार hi एक पुराण हेण्डपम्प लगा था रवि अकसर वही नहाता था

काम्य थोड़ी आगे hi पहुंची थी की वो अच्चानक रुक जाती है

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रवि का लुंड झटके खता हुआ हवा में तैर रहा था और रवि खड़े खड़े hi अपने नंगे शरीर पर पानी दाल रहा था

काम्य अपने मन में सोचती है

( ये रवि का लुंड हमेशा खड़ा क्यों रहता है जब मुतता है तो भी लहड़ा और जब नहाता है तो भी खड़ा )

काम्य को अब कुछ नहीं सूझ रहा था

वो एक तक अपनी नजरो से अपने छोटे भाई के लुंड को निहारे जा रही थी

काम्य का बस चलता तो वो अभी जाकर उसका लुंड अपने हाथो म पकड़ लेती पर सब्र का फल मीठा होता है ये उसे पता था

काम्य का हाथ अपने आप hi अपने ऊपर निचे हो रही चुचो पर आ जाता है

और वो अपने हाथ से अपनी hi एक चुकी पकड़ कर मसल देती है

काम्य- हैईईई रवि कितना बड़ा लुंड है रे तेरा

देख तेरी दीदी का शरीर तुझे देख कर अपना आप खो रहा है

काम्य को तो जैसा अब उसकी साडी इच्छाएं पूरी होती हुई दिख रही थी

काम्य रवि को दूर से hi आवाज देकर घर के अंदर आ जाती है रवि भी जल्दी से नहा कर अपनी एक धोती पेहेन कर घर में आ जाता है और तीनो भाई बेहेन बैठ क्र खाना झाने लगते है

खाना कहते कहते रवि की नजर न कहते हुए भी बार बार काम्य की चोली पर जा रही थी

जिसे काम्य देख चुकी

रवि के चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की वो बैचैन है

उसे समझ नहीं अस रहा था की उसके साथ क्या हो रहा है

इधर काम्य अपनी तिरछी नजरो से रवि को डेल्ह रही थी की कैसे उसका छोटा भाई उसका गदराया हुआ बदन निहार रहा है

पर काम्य कोई जल्दी बजी नहीं करना कहती थी उसे पता था की कैसे भी करके एक बार वो रवि के लुंड को अपनी छूट में लेलेगी तो उसके बाद खुद रवि hi दिन भर लुंड को छूट में डेल पड़ा रहेगा

खैर खाना ख़तम हो गया और काम्य बर्तन धोने लगी और रेखा को गर्मी बर्दास्त नहीं हो रही थी तो वो नहाने चली गयी

रेखा भी बहार लगे हेण्डपम्प पर नहाने चली जाती है

रात को किसी के आने का दर नहीं था तो वो अपने सरे कपड़े उतर क्र अपने बदन से अलग क्र देती है

और लोटे में पानी लेकर अपने सर के ऊपर डालने लगती है

अब रेखा को थोड़ा अच्छा फील हो रहा था

उसका बदन दिन बी दिन उसे और परेशान क्र रहा था अब रेखा के लिए अपनी छूट को काबू रल्हन मुश्किल हो रहा था

पर बेचारी करती भी क्या अपनी किस्मत को कोसते हुए वो नहाने लगती है और जल्दी hi नहा कर एक पेटीकोट ब्लाउज दल कर घर के अंदर आ जाती है

अब यह घर ज्यादा बड़ा तो था नहीं एक बरामदा था और एक छोटा सा रूम

काम्य को शुरू से hi अकेले सोने की आदत रही

तो वो आंगन में राखी खत पर सोती थी और रवि और रेखा कमरे में एक दृ बिछा कर सोते थे

रेखा घर में आकर देखती है को काम्य सो चुकी है रवि अपना और अपनी दीदी का बिस्तर लगा रहा है

रेखा- अरे रवि रुक जाता मैं आकर बिस्तर लगा देती

तू क्यों परेशान हो रहा ह

रवि- दीदी काम आप करो या मैं बात तो एक hi है

रेखा आकर रवि के बगल में लेत जाती है

रवि सिर्फ एक धोती बंधे हुए लेता था और रेखा पेटीकोट और ब्लाउज में

दरअसल रेखा ने जो ब्लाउज पहना था वो जगह जगह से फैट चूका था

और उसके हुक भी टूट चुके थे बस रेखा कभी -2 उसे रात को पहना करती थी

रेखा और रवि दोनों एक दूसरे को लेते लेते देख रहे थे

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रवि की नजर बार बार न कहते हुए भी रेखा की चूचियों की तरफ जा रही थी उसे सेक्स के बारे म कुछ मालूम तो नहीं था पर अब उसे इस खेल में मजा आने लगा था

रेखा को कोई अंदाजा नहीं था की उसका भाई उसकी चूचियों को घर रहा है

रेखा- रवि खेतो म कैसा काम चल रहा है

रवि- दीदी बस अब गर्मी बढ़ रही है फसल सुख जाएगी तो कतई होगी

रेखा- है रे भाई गरमी तो सच म बढ़ रही है

देख न क्या हाल है

रेखा की बात सुनकर रवि एकदम से रेखा की चुकियो की और देखता है

अब रेखा का ये आलम था की वो अभी नहा कर आयी थी पर उसका ब्लाउज इतनी hi देर में भीग गया था वो लगभग उसके निप्पल्स नजर आ रहे थे

रवि- है दीदी आपको तो कुछ ज्यादा hi गर्मी लग रही है देखो आपका पूरा ब्लाउज भीग गया

ये बोलकर रवि अच्चानक से अपना हाथ उठा कर रेखा की चुकी पर ले जाता है और अपनी ेल ऊँगली से रेखा की दोनों चुकियो के बिच में ऊँगली दल कर वापस खींच लेता है

रवि तो सिर्फ दीदी की गर्मी का जायजा ले रहा था अभी तक उसके मन में को गंदा ख्याल नहीं आया था अपनी दीदी को देख कर

पर रवि का हाथ लगते hi रेखा के बदन में अजीब सी हलचल होती है

रेखा दूसरी तरफ घूम कर लेत जाती है

रेखा- चल तिल है रवि सजा कल बहुत काम है

रवि- ठीक ह दीदी

रेखा को तो जल्दी hi नींद आ जाती है पर रवि की हालत खराब थी एक तो सुबह से वो काम्य को देख कर बैचैन था और अब उसका हाथ गलती से hi सही पर जैसे hi रेखा की चुकियो पर पड़ा था उसे अब अच्छा लग रहा था

और रवि अपनी बड़ी दीदी की बड़ी गांड को देल्हते हुए जल्दी hi नींद की आगोश में चला जाता है ....

भाई लोग स्टोरी कैसी है

कमेंट जरूर करना
 
अपडेट-7

सुबह रेखा की नींद आज जल्दी hi खुल जाती है

रेखा लेती लेती अभी कुछ सोच hi रही थी और जैसे hi उठ कर खड़ी होती है और अपने हथो को ऊपर करके एक मस्त सी अंगड़ाई लेती है

रेखा के बदन से अति हुई पसीने की खुसबू उसके नाक में जाती है वो हल्का सा तड़प जाती है

और जैसे hi पलट कर दरवाजे से बहार जाने को होती है उसकी नजर सीधा रवि के ऊपर पड़ती है

रेखा को तो मनो खड़े खड़े कोई साप काट गया हो

उसकी नाक के नथुने फूलने लगते है

चूचिया ऊपर निचे होने लगती है

दरससल आज रेखा की नजर पहले बार रवि के लुंड पर पड़ी थी

रेखा बेसुध सी खड़ी एकटक रवि के लुंड को डेल्ह रही थी और रवि पीठ के बल सोया हुआ था और उसकी धोती में बहुत बड़ा तम्बू बना हुआ था

रेखा को यकीन नहीं हो रहा था ली उसके छोटे भाई जिसे अभी वो बच्चा समझती थी उसका लुंड किसी गधे के लुंड से भी बड़ा है

रेखा मन में सोचती है ( होई कितना बड़ा लुंड है रवि का ये जिसे छोड़ेगा वो तो गुलाम बन जाएगी इसकी कैसे घोड़े की तरह सोया हुआ है )


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रेखा यही सब सोचती सोचती नहाने के लिए चली जाती है इधर जैसे hi रेखा घर के बहार निकल जाती है काम्य जल्दी से आंगन में से उठ कर कमरे की तरफ जाती है

जैसे hi काम्य कमरे के अंदर आती है

उसके पेअर वही जाम हो जाते है

काम्य जो देखने के लिए आयी थी वो उसकी आँखों के सामने था

रवि का लुंड हवा में लहरा रहा था उसके ऊपर बस एक पतली सी धोती थी

काम्य जाकर रवि के पास बैठ जाती है और न कहते हुए भी काम्य के हाथ रवि के लुंड की और बढ़ने लगते है

काम्य की सांसे बहुत तेजी के साथ फूल रही थी

वो जानती थी की वो जो क्र रही ह वो गलत है पर छूट की गर्मी न जाने क्या क्या करवा दे

जैसे hi काम्य है हाथ रवि के लुंड पर टच होता ह काम्य का शरीर एक झटका खता है

वो फिरसे अपना हाथ हटा लेती है

और थोड़ा झुक कर अपनी मुँह को रवि के लुंड के ऊपर ले जाती है और अपनी नाक से रवि के लुंड को दूर से hi सूंघने लगती है

गर्मी की वजह से अभी भी रवि पसीने में भीगा हुआ था

उसकी पसीने की महक अब काम्य को पागल कर रही थी

काम्य की आँखे बिलकुल लाल हो चुकी थी

वो अपने सर को वापस से ऊपर करती है और रवि को खा जाने वाली नजरो से देखते हुए बहार की और जाने लगती है और फिर दरवाजे पर पहुंच कर एक बार और पलट क्र देखती है

काम्य मन में ( कितना बड़ा है रे सेल का लुंड हमेशा खड़ा hi रहता है कैसे जायेगा ये मेरी छूट में फाड़ कर रख देगा ये तो मुझे )

यही सब सोचते सोचते काम्य अपने कामो में लग जाती है

दूसरी तरफ रेखा नहाने के लिए बहार वाले हेण्डपम्प पर आ जाती है और अपने सरे कपड़े उतर कर बैठ जाती है

अभी ज्यादा उजाला नहीं हुआ था और न hi इस तरफ कोई आता था तो रेखा को कोई चिंता नहीं थी

रेखा अपने ऊपर पानी डालने लगती है

पर आज सुबह रेखा ने जो देखा था वो बार बार उसकी नजरो के सामने आ रहा था

क्या सच में उसका छोटा भाई जिसे वो बच्चा समझती थी वो बड़ा होगया ह

रेखा रवि के लुंड के बारे में hi सोच रही थी की उसका एक हाथ अपनी चुकी पर चला जाता है और वो धीरे धीरे दबाने लगती है

रेखा को समझ नहीं आ रहा था की वो अपने भाई के hi लुंड को देख कर क्यों गरम हो रही ह

रेखा को अचानक से होश आता है

वो अपना हाथ अपनी चुकी से हटती है और अपने आप को समझने लगती है की नहीं ये गलत ह रवि उसका छोटा भाई हे

पर रेखा जितना अपने आपको समझा रही थी वो उतना hi गरम हो रही थी

उसका शरीर उसके दिमाग का साथ नहीं देना कहता था

अच्चानक से रेखा जल्दी जल्दी पानी दल कर घर की और भगति है इस वक़्त उसने एक पेटीकोट को अपने शरीर पर बंधा हुआ था

जैसे hi वो कमरे के अंदर आती है रवि उसे उसी हालत में सोया हुआ मिलता है

रेखा रवि के लुंड को देख कर अह्ह्ह भर्ती है

हैईईई कितना बड़ा लुंड है मेरे छोटे भाई का

अच्चानक उसकी नजर रसोई में काम क्र रही काम्य पर पड़ती है

रेखा कोई भी रिस्क नहीं लेना कहती थी वो बहार से hi रवि को आवाज देती है और आँगन में hi कपडे पेहेन लेती है

काम्य और रेखा दोनों hi अब अपने भाई के विशाल लुंड को देख चुके थे

अब देखना ये था की इनसब चीज़ो का फ्यूचर में क्या असर होता है .....
 
अपडेट-8

आअज खेतो पर कोई काम नहीं था तो रवि खेतो पर नहीं गया और घर में hi आँगन में डाली खत पर बैठे बैठे काम्य की उछलती हुई चूचियों को देख देख कर अनादित हो रहा था

काम्य को भी पता था की उसका भाई क्या देख रहा है वो भी बार बार झुक कर रवि को अपनी चूचियों के दर्शन करवा नहीं थी

जिसका असर सीधा रवि की धोती के अंदर हो रहा था

रवि अपने एक हाथ से अपने विशाल लुंड को दबा कर बैठा हुआ था

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सुबह के 9 बज गए थे 3no भाई बेहेन नाश्ता क्र चुके थे

रेखा- रवि आज तू खेत में नहीं जायेगा क्या

रवि- दीदी आज कोई काम नहीं है खेत में गर्मी भी ज्यादा है इसलिए आज नहीं जाऊंगा

रेखा- ठीक है तू आराम कर मैं अपनी शैली नीलम के पास होकर आती हु

सुना है उसे देखने लड़के वाले आये थे पता नहीं क्या हुआ

रेखा अभी तक पेटीकोट और ब्लाउज में थी वो अंदर जाकर एक सदी लती है और वही आंगन में खड़ी होकर पहन लेती है

रेखा- काम्य म आती हु थोड़ी देर में तू खाना बना लेना

काम्य - ठीक ह दीदी जाओ तुम

ये बोलकर रेखा घर से निकल जाती है

इंट्रो टाइम----

हरिया

हटता काटता 52 सल्ल का एक मुस्टंडा आदमी

हरिया बहुत hi म्हणत काश आदमी था

इसलिए उसका शरीर भी किसी पहलवान जैसा hi था

नीलम

उम्र 29 सल्ल

ये रेखा की बचपन की शैली है

ये भी रेखा के hi जैसी सावली बल्कि उससे भी थोड़ी ज्यादा कल है

36-34-40 भरा पूरा बदन बीएस एक यही दिलक़त है की बेचारी की शादी नहीं हो प् रही है रंग की वजह से

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अब नीलम भी रेखा की hi तरह अपनी जवानी की आग में जलने को मजबूर है

रामु नीलम का छोटा भाई है

उम्र 20 सल्ल

ये बहुत hi हरामी किसम का लड़का है

रामु अक्सर सेंगर आता जाता रहता है

मतलब वो वह जाकर रंडियों को भी छोड़ चूका है

लुंड- 10 इंच

ये भी अपनी दीदी की तरह ब्लैक स्किन है

अब रेखा अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकते हुए नीलम के घर की और चल देती ह

घर के बहार hi हरिया बैठा हुआ मिल जाता है

रेखा- काका नमस्ते

हरिया- अरे रेखा बेटी तू बहुत दिनों बाद आयी सब अच्छा तो है न

रेखा- अब आप तो जानते hi हो काका की कितनी दिक्कत चल रही ह

हरिया- बेटी वो तो सब चलता रहता है

पर जिंदगी तो नहीं रूकती न

रेखा- काका सब सही हो जायेगा वक़्त के साथ साथ

अच्छा ये बताइये की नीलम खा है

हरिया रेखा को घर की और इशारा करता है और रेखा अपनी गांड मटकती हुई घर के अंदर चल देती है

रेखा की बड़ी गांड देख क्र हरिया के मुँह से एक आह निकल जाती है और उसका हाथ खुद बी खुद अपनी धोती के ऊपर जाकर अपने लुंड को मसल देता है

अंदर नीलम जैसे hi रेखा को देल्हती है भागते हुए आकर उसके गले लग जाती है और फुट फुट कर रोने लगती है

रेखा- अरे पगली रो क्यों रही ह बता न क्या हुआ

नीलम- तुझे बताया था न की लड़के वाले आने वाले है

रेखा- है आगे तो बता

नीलम फिर से रोने लगती है

नीलम- उनलोगो ने भी मेरा कला रंग देख क्र राते से मना क्र दिया

रेखा भी नीलम की बात सुनकर रोने लगती है

रेखा- तू चिंता मत कर मुझे लगता है की भगवान ने हमारे लिए कुछ बहुत hi अच्छा सोच रखा है

नीलम- क्या खाक सोच रखा है 30 सल्ल की हो गयी हु पर अब तक जवानी की आग में जल रही हु

रेखा- तेरे जैसा हॉल मेरा भी तो है

नीलम- अब बर्दास्त नहीं होती रे रेखा ये गर्मी

अब तो मन करता है की पहाड़ से कूद कर जान देदू

रेखा- पागल हो गयी ह क्या जितनी गर्मी तेरे अंदर ह न उससे कहि ज्यादा मेरे अंदर ह पर में तो मरने की बात नहीं करती

नीलम- तो तू hi बता न क्या कृ अपनी छूट को जितना रगड़ती हु वो साली उतनी hi गरम होती जा रही ह

दिन बी दिन मेरा बदन मुझे प्रहसन कर रहा ह

रेखा- तू चिंता न क्र भगवान ने कहा तो सब सही हो जायेगा

और ये बोलकर रेखा नीलम के गले लगा लेती ह

और बता रामु खा ह

नीलम- वो तो कल का hi सेहर गया हुआ ह

आज शाम तक आजायेगा

रेखा- अच्छा ठीक ह चल चाय बना

इधर दोनों सहेलियों की बाटे शुरू हो जाती hi

दूसरी तरफ

रेखा के जाते hi काम्य को मौका मिल जाता है रवि के और नजदीक आने का

रवि आंगन में पड़ी खत पर लेता हुआ था

काम्य उसके पास आकर बैठ जाती है

काम्य- रवि गर्मी कितनी बढ़ गयी ह न

रवि- दीदी अभी तो और भी बढ़ेगी गर्मी

काम्य- हाय दिया इतनी गर्मी में ये हाल हे और बढ़ेगी तो क्या होगा

रवि- होगा क्या दीदी हर सल्ल की तरह इस सल्ल भी गर्मी निकल जाएगी

काम्य- तुझे तो पता ह न की मुझे कितनी गर्मी लगती है

रवि- दीदी गर्मी तो सबको लगती है

काम्य- ऐसा नहीं ह भाई मर्दो के मुक़ाबले औरतो के अंडरगार्मी कुछ ज्यादा hi होती है

रवि- है दीदी ये बात तो तुम सही कह रही हो इसलिए रेखा दीदी भी हमेशा पसीने में डूबी रखती है

काम्य- तुझे तो सिर्फ रेखा दीदी की फ़िक्र है

नेरी नहीं

रवि- ऐसा क्यों बोल रही हो दीदी

काम्य - और क्या बोलू म इतनी देर से अपनी गर्मी की बात क्र रही हु और तू ह की रेखा दीदी की गर्मी देख रहा ह

रवि- अरे दीदी मेरा मतलब आप दोनों को hi गर्मी ज्यादा लगती है

काम्य- देख न भाई कितना पसीना आ रहा ह

ये बोलकर काम्य अपनी बड़ी बड़ी चूचिया रवि के आगे करके उसे अपना पसीना दिखने लगती है

काम्य की चूचिया हमेशा hi ब्लाउज से बहार रहती थी उसके ऊपर कुछ पसीना जमा था

रवि बड़ी गौर से काम्य की चूचियों की और देल्हता है और अपना हाथ आगे बढ़ा कर काम्य के एक चुके के ऊपर अपनी हथेली रख कर खींच लेता

रवि अपना पसीने से भीगा हुआ हाथ काम्य को दिखता है

रवि - सच में दीदी तुम्हारे अंदर भी बहुत गर्मी है

काम्य रवि की इस हरकत से अंदर तक सिहर जाती है अब उसकी फूल हुई बुर पानी छोड़ना चालू कर चुकी थी

काम्य की आँखे लाल सुर्ख हो चुकी थी

काम्य- भाई इस गर्मी का कुछ करना पड़ेगा नहीं तो म अपने बदन की गर्मी में खुद hi जल जाउंगी

रवि- नहीं दीदी परेशान मत हो थोड़े दिन म गर्मी चली जाएगी

काम्य- मतलब तू कुछ नहीं करेगा अपनी दीदी की गर्मी का

रवि कुछ टेंशन म आ जाता है काम्य की बात सुनकर

रवि- दीदी म क्या कर सकता हु आपके बदन की गर्मी का

काम्य- ये तो म बाद म बताउंगी

पर पहले तू ये बता की अपनी दीदी की मदद करेगा या नहीं

रवि- कैसी बात क्र रही हो दीदी आप जब बोलो म तब आपकी मदद को तैयार हु

रवि को लहै पता था की उसकी बेहेन उससे उसका लुंड मांग नहीं है वो तो बिचारा मासूम साडी चीज़ो म है म है मिला रहा था

काम्य इतना सुनते hi आगे बढ़ कर रवि को अपनी और खींचती है और रवि के गले लग जाती है

काम्य ने भीत hi जोरसे रवि को जकड लिए

अब रवि की नाक में काम्य के पसीने की बदबू जाने लगी जिसका असर सीधा उसकी धोती पर हुआ ेल hi झटके में उसका पूरा लुंड लहड़ा हो गया

5 मिंट बाद जब काम्य अपने छोटे भाई से अलग होती है तो उसकी नजर रवि के लुंड पर पड़ती है

काम्य के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती है

जैसा जैसा वो कह रही थी सब वैसा hi हो रहा था

काम्य तिरछी नजरो से रवि के लुंड को देल्हती हुई अंदर रूम में चली जाती है

और रवि बहार आंगन में पड़े पड़े सो जाता है

काम्य इतनी गरम हो गयी थी की वो अंदर आते hi सीधा जमीन पर लेत जाती है और अपना घाघरा अपनी टैंगो को उठाते हुए अपनी कमर तक चढ़ा लेती है

अब उआकी फूली हुई छूट बहार की और आ जाती है

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और रेखा अपना हाथ अपनी छूट पर रख कर 2 उंगलिया अंदर दाल देती है और तेजी से अंदर बहार करने लगती है

काम्य - हैई रवि छोड़ दे अपनी दीदी को क्यों तड़पा रहा है

किस्मत में शादी नहीं तो क्या हुआ छोटे भाई का लुंड hi सही

काम्य का हाथ बहुत तेजी से चल रहा था पुरे कमरे में पचछहहहह पछ्ह्ह्हह्ह..... की आवाजे गूंज रही थी

अब काम्य का बदन अकड़ने लगा था वो अपने भाई के लुंड को याद करके कुछ ज्यादा hi गरम हो गयी थी

काम्य- भाई जल्दी करना नहीं तो तेरी ये दीदी मर जाएगी अब मुझे सिर्फ तेरा hi सहारा है

अब मुझे सिर्फ अपने छोटे भाई के लुंड का सहारा है

जल्दी करना जल्दी करना

यही सब बड़बड़ाते हुए काम्य की छूट से बहुत सारा कॉमर्स निकलने लगता है और पूरा बिस्तर गिला होजाता है

काम्य 5 मिंट वही पड़ी अपनी सांसे दूरिस्ट करती है एयर फिर उसे अपनी स्थिति का अंदाजा होता है वो जल्दी से उठ कर बिस्तर बदल देती है

और दुबारा से एक नजर रवि पर मरती है रवि दूसरी और करवट लेकर सोया हुआ था

काम्य तेजी के साथ रवि की खत के पास जाती है और बहुत hi मासूमियत के साथ अपने होठ रवि के गलो पर रख कर एक गहरा चुम्बन लेती है

काम्य- भाई अपनी दीदी को निराश मत करना........
 
अपडेट-9

जैसे तैसे पूरा दिन गुजर गया था

रेखा भी नीलम के घर से आ चुकी थी और तब तक काम्य भी खाना बना चुकी थी

तन्नो भाई बेहेन मिलकर खाना कहते ह

और अब सोने की तैयारी करने लगते ह

काम्य हमेशा की तरह आंगन म लेती लेती आसमान में तारो को देख रही थी और रवि के बारे म सोच रही थी

थोड़ी hi देर में उसकी आँख लग जाती है

अंदर रेखा और रवि दोनों लेते हुए थे

रेखा को लेते हुए बहुत देर हो गयी थी पर आज उसकी आँखों से नींद बहुत दूर थी

रेलः रवि की तरफ अपनी मतवाली गांड करके सोई थी

रवि को भी आज नींद नहीं आ रही थी उसकी नजरे न कहते हुए भी बार बार अपनी दीदी की गांड पर जा रही थी

रेखा ने सिर्फ एक पेटीकोट पहना था उसके निचे न तो कोई पेंटी थी और न hi ऊपर कोई सदी

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रेखा का बदन पसीने से पूरी तरह भीग चूका था

रवि का लुंड अब तक अपनी औक़ात में आ चूका था

पर रवि को ये नहीं समझ आ रहा था की जब भी वो काम्य या रेखा दीदी के पास होता है तो उसका लौड़ा क्यों खड़ा हो जाता है

अब रवि से भी बर्दास्त नहीं हो रहा था उसे लग रहा था की जैसे उसका लुंड फैट जायेगा और उसका हाथ खुद बी खुद अपने लुंड पर चला जाता है

रेखा को कोई अंदाजा नहीं था की उसका छोटा भाई उसे पीछे से देख कर आहे भर रहा ह

खैर जैसे तैसे रेखा को नींद आ जाती है और थोड़ी देर बाद रवि भी सो जाता है

खैर आग तो हर तरफ लगी थी अब देखना ये था की ये आग कब बुझेगी

नीलम का घर ---------

नीलम - बापू ो बापू ाजाओ खाना खा लो

और रामु तू भी अजा भाई

हरिया अपनी बेटी की आवाज सुनकर घर म आ जाता है

और तीनो बाप बेटी खाना खाने लगते ह

हरिया- रामु तू सेहर गया था क्या हुआ बीज मिला या नहीं

रामु- बापू अच्छी क़्वालिटी का बीज अभी बाजार म है नहीं हमे थोड़ा और इन्तजार करना पड़ेगा

रामु बात करते हुए बार बार नीलम की चूचियों को घर रहा था

जिसका अंदाजा नीलम को भी हो चूका था

नीलम- बापू अगर बीज अच्छा मिले तो फसल भी अच्छी होगी न

हरिया अब तक खाना खा चूका था

हरिया उठ कर नीलम के सर पर हाथ फहरता हुआ

हरिया- है मेरी बच्ची अगर जमीन म अच्छा बीज जायेगा तो फसल अच्छी hi होगी न

ये बोलकर हरिया वापस से बहार जाकर अपनी झोपडी में पड़ी खत पर जाकर सो जाता है

नीलम- तू सेहर जाता है तो मेरे लिए भी कुछ ले आया कर

रामु- दीदी क्या चाहिए तुमको

नीलम - चाहिए तो बहुत कुछ पर सब कुछ तो नहीं दे सकता न तू

रामु- दीदी बोल कर तो देखो क्या पता म सब कुछ देदू आपको

नीलम- रहने दे बड़ा आया सब कुछ देने वाला

आज तक तो कुछ लाया नहीं सेहर से

नीलम एक पेटीकोट और ब्लाउज पेहेन कर बैठी थी और अपनी उंगलिया चाट चाट कर खाना खा रही थी

जिसे रामु बड़े hi गुजर से देख रहा था

नीलम को भी रामु का ऐसा देखना थोड़ा ाहीब लग रहा था पर उसने इतना ध्यान नहीं दिया

नीलम- चल जल्दी खाना खा ऐसे क्या देख रहा ह

नीलम की बात सुनकर रामु एक डैम से हड़बड़ा जाता है

रामु- कुछ भी तो नहीं दीदी म क्या देख रहा हु

नीलम - म खा कह रही हु की तू कुछ देख रहा ह

रामु- है दीदी जल्दी जल्दी खाना खा लेते ह फिर सोना बी तो है

नीलम- है भाई अब तो सिर्फ सोना hi लिखा है

रामु- क्या हुआ दीदी

नीलम- कुछ नहीं जा बहार हेण्डपम्प से पानी लेकर आ

रामु बहार से पानी ले आता ह और नीलम जल्दी जल्दी बर्तन धो कर दोनों का बिस्तर लगा देती है और दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के अगल बगल लेत जाते ह

नीलम रामु की तरफ मुँह करके लेती हुई थी उसके ब्लाउज के ऊपर के 1-2 बटन्स खुले हुए थे जिस वजह से रामु को नीलम की आधी चूचिया साफ़ दिख रही थी

रामु की नजर बार बार अपनी चूचियों पर पड़ती देख नीलम भी अंदर hi अंदर शर्मा रही थी

आखिर उसकी चूचिया थी hi ऐसी की कोई एक बार देख ले तो पागल हो जाये

फिर भी नीलम अपने छोटे भाई का दिल नहीं दुखाना कहती थी इसलिए वो ऐसे hi लेते लेते अपने छोटे भाई को अपनी आधी नंगी चूचियों के दर्शन करवा रही थी

रामु- दीदी आपको क्या चाहिए सेहर से

नीलम- तू अपनी पसंद से जो भी लेकर आजा

रामु- ठीक ह दीदी मुझे कुछ याद ह जो मुझे अच्छा लगा था म वो लेकर आऊंगा आपके लिए

नीलम- क्या ह वो

रामु- वो तो जब म लेकर आऊंगा तब hi आप देख लेना ठीक ह मेरी प्यारी दीदी

ये बोलकर रामु आगे बढ़ कर नीलम के गलो पर एक प्यारी सी पप्पी लेलेते है

नीलम को अपने छोटे भाई द्वारा इस तरह का प्यार देख कर बहुत अच्छा लगा

नीलम- चल सजा ज्यादा मस्का मत लगा अपनी दीदी को

नीलम वैसे hi आँखे बंद करके लेत जाती है

और रामु लगा तर नीलम की चूचिया घर रहा था

और धीर से रामु अपना हाथ अपने लुंड पर लेजाता है

और नीलम की चूचियों को देखते हुए धीरे धीरे अपने लुंड को मसलने लगता है

नीलम को आँखे बंद किये हुए काफी समय हो चूका था तो रामु तो यही सोच रहा था की दीदी सो चुकी ह

पर उसे क्या पता था की जिस तरह वो अपनी दीदी को देख कर तड़प रहा ह उसकी दीदी को भी अब इस खेल म मजा आ रहा ह

रामु धीरे से अपना हाथ आगे करके अपनी धोती खोल देता है

और रामु का विशाल 10 " कला लुंड लहराता हुआ धोती से आजाद हो जाता है जिसे नीलम भी देख लेती है

और तड़प क्र रह जाती है

रामु अब अपना एक हाथ आगे करके धीरे से नीलम के गाल को सहलाता है

नीलम के शरीर पर जैसे hi रामु का हाथ पड़ता है वो अंदर तक सिहर जाती है

क्योंकि अब उसे पता था की उसका भाई किस नियत से उसे छू रहा ह

नीलम हल्का सा हिलती है फिर दुबारा. से शांत होकर लेत जाती है

दरअसल नीलम देखना कहती थी की उसका छोटा भाई उसके साथ लय करना कहता ह

पर रामु की हिम्मत नहीं हो रही थी आगे बढ़ने की

रामु अपना हाथ आगे बढ़ा कर नीलम की चुकी पर रखता है और धीरे से एक चुकी को मसल देता है

रामु की इस हरकत से नीलम के दोनों पैरो के बिच हलचल होती है और उसकी छूट पानी छोड़ना चालू कर देती है

आज रामु का हाथ लगने से नीलम पानी पानी हो रही थी उसे अच्छा लग रहा था

पर रामु वापस से अपना हाथ खींच लेता है

शायद रामु दर रहा था और ये बात नीलम भी समझ रही थी

पर वो अपने छोटे भाई के सामने अपनी पहली हुई काली छूट ऐसे hi थोड़ी परोस देती वो उसे तड़पना कहती थी

रामु अपनी धोती दुबारा से बांध लेता है और सीधा होकर लेत जाता है

उसका लुंड अभी तक किसी टावर की तरह लहड़ा था जिसे नीलम भी देख लेती है

और मन मर कर रह जाती है

जैसे तैसे नीलम और रामु दोनों को नींद आती है और दोनों भाई बेहेन जवानी की आग में जलते हुए नींद की आगोश में चले जाते है ......

भाई लोगो स्टोरी कैसी लग रही है कमैंट्स करके जरूर बताना

और कुछ सुग्गेस्टियन्स हो तो वो भी बताना
 
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