अपडेट -256
रवि घर में चला जाता है और इधर मल्टी बुआ को बहार लेकर सुला देती है
रवि- भाभी आप खा सोने वाली है आप
मल्टी - अआप खा सुलाना कहते है मुझे देवर जी
रवि- अच्छा तो मुद पहले से hi बना हुआ है छुड़वाने का हम्म्म
Malti-aapka मुद नहीं है क्या अपनी बड़े भाई की पत्नी को छोड़ने का
रवि- एक दम रंडी हो की तरह बाटे करने लगी हो भाभी
Malti-aapse छुड़वाने के बाद से hi में रंडियो जैसा वयवहार करने लगी हु
रवि- अच्छी बात है क्योंकि आज की रात के लिए मुझे किसी चुड़क्कड़ रंडी की hi जरुरत है
मल्टी- अच्छा एक hi रंडी चाहिए या एक और चाहिए आपको
रवि- हम भाभी के साथ साथ अगर दीदी भी मिल जाये तो और भी अच्छा
मल्टी- वो तो पहले से hi आपकी है देवर जी
रवि मल्टी की गर्दन दबोच लेता है
मल्टी- क्या हुआ देवरर जी मेने कोई गलती कर दी क्या
रवि- तू क्या गलती करेगी साली रंडी भूल गयी तूने क्या वडा किया था मुझसे
मल्टी- क्या वादा किया था मेने आपसे
तदायकककक
एक जोरदार छठा रवि मल्टी के गाल पर मरता है जिससे मल्टी की आँखों में पानी आ जाता है और उसका पूरा गाल लाल हो जाता है
ये दवाई का hi असर था जो रवि की हवस अब खतरनाक ढंग से अपने पीक पर जा चुकी थी
रवि- साली कुटिया तू मेरे बड़े भाई की बीवी है तो तू क्या सोचती है में तुझ पर रेहम दिखाऊंगा
इस पर मल्टी कुछ नहीं बोलती बस सिसकिया लेती हुई अपनी गर्दन छुड़ाने की कोशिश करती है जिसपर रवि की पकड़ और भी मजबूत होती जा रही थी
रवि- तू भूल गयी न रंडी में नहीं भुला तूने क्या खा था कम्मो दीदी की शादी के समय तू अब मेरे लिए एक चीज़ के सामान है जिसे में जब कहे जैसे कहे इस्तेमाल कर सकता हु
मल्टी- हां हां याद है मेने खा मना किया है पर पहले मेरी गर्दन तो छोड़ो
रवि- आज दिखाऊंगा तुझे कैसे एक औरत का इस्तेमाल किया जाता है
अब मल्टी का दम घुटने लगा था वो रवि को धक्का देती हुई उसकी पकड़ से आजाद हो जाती है
Malti-to बता न सेल हरामी कैसे इस्तेमाल किया जाता है एक औरत का और है अंदर तेरी दीदी भी बैठी है जा पहले उसका इस्तेमाल कर
मल्टी का चेहरा पूरा लाल हो चूका था आँखों से आंसू बह रहे थे
रवि- मादरचोद तू मुझे बताएगी में अपनी दीदी को कैसे छोड़ू ृक्क बताताछु तुझे
रवि फिरसे मल्टी के बाल पकड़ कर उसे अंदर ले जाता है और दरवाजे को बंद कर देता है और मल्टी को धक्का देता हुआ बिस्तर की और फेक देता है
रेखा जो बिस्तर लगाए दोनों का इन्तजार कर रही थी वो रवि की इस हरकत को देखती रह जाती है उसे भी आज अपने छोटे भाई की हरकतों में कुछ बदलाव दिखाई पद रहा था
रवि- सुन्न लो दोनों रंडियो आज ये दरवाजा तभी खुलेगा जब में चाहूंगा तुम दोनों का मूतना हगना सब आज इसी कमरे में होगा
रेखा - अच्छा कमरे में hi मूतना होगा तो क्या तेरे मुँह में मुतुंगी में क्यों रे हरामी
रवि- दीदी मेरे मुँह में मुतो या अपने मुँह में पर आज की रात ये दरवाजा नहीं खुलेगा
मल्टी- दीदी आज इस हरामी को दिखा hi देते है औरतो को हराना न मुमकिन है वो भी छुड़वाने में
रेखा - सही कह रही हो भाभी बड़ा घमंड है इसे अपने लुंड पर आज तो दिखा hi देते है कौन जीतेगा और कौन हारेगा
इसका लुंड ज्यादा पेलू है या हमारी बुरर्र ज्यादा चुड़क्कड़ है
रेखा और मल्टी एक एक करके अपने सरे कपडे उतरने लगती है
इधर रवि जैसे hi अपनी धोती को हटाता है दोनों औरतो की आँखे छोङिया जाती है
रवि का लुंड पहले के मुक़ाबले काफी बड़ा और मोटा लग रहा था
जिसे देख कर एक पल को तो रेखा का भी हलक सुख जाता है
रवि अपने विकराल लुंड को मसलता हुआ दोनों की और बढ़ता है इधर दोनों की हालत अब खराब होने लगी थी रवि का लौड़ा देख कर
रवि- तो किस रंडी से शुरुवात करू अपने बड़े भाई की बीवी से या अपनी बड़ी दीदी से किसको दिखाऊ पहले अपने इस लौड़े की ताक़त भाभी को या दीदी को
रवि दोनों की चूचियों को मसलता हुआ की आँखों में देखता हुआ कहता है
रेखा और मल्टी दोनों को hi रवि की आँखे देख कर पता चल चूका था की आज उन दोनों की खैर नहीं है
दोनों औरते एक दूसरे की और देखती है और मनो आँखों hi आँखों में एक दूसरे से कहती है - आज तो हमने गलत पन्गा ले लिया
रवि- तुम दोनों की आँखों में जो खुद दुःख रहा है उसे देख कर आज मुझे बहुत मजा आ रहा है तो बोलो कैसे शुरू करे
अभी दोनों कुछ बोलती उससे पहले रवि रेखा के होठो को चूसना चालू कर देता है और अपने दूसरे हाथ से मल्टी के बालो को पकड़ कर उसका भी मुँह अपनी और खिस लेता है
तीनो एक दूसरे के मुँह और होठो को पागलो की तरह चाट रहे थे और एक दूसरे का मीठा मीठा थूक पी कर अब रेखा और मल्टी के जिस्म में भी रवि से छुड़वाने की इच्छा जाग गयी थी
दोनों hi औरते खुद बा खुद hi अपने घुटनो पर आ जाती है और रवि का लुंड चूसना चालू कर देती है
इधर रवि का लुंड जैसे जैसे रेखा और मल्टी के गरम मुँह में जा रहा था उसका जोश और भी बढ़ता जा रहा था मनो आज उसके अंदर एक तूफ़ान सा आ गया था जो सब कुछ तबाह करने वाला था
रवि अब तक दोनों के बालो को पकड़ कर बरी बरी से दोनों का मुँह छोड़ रहा था उसके झटको की रफ़्तार इतनी तेज थी की रेखा और मल्टी की आँखे तक्क बहार आ जाती हर झटके के साथ पर रवि आज रुकने वाला नहीं था
रवि रेखा के मुँह को पागलो की तरह छोड़ रहा था
रवि- अह्ह्ह्ह दीदी क्या मुँह है तेरा इसके सामने तो छूट और गांड भी फ़ैल है
जैसे hi रवि लुंड बहार निकलता है रेखा के मुँह से थूक की एक मोती परत बहार गिरने लगती है
यह नजारा देख कर रवि खुद को रोक नहीं पता और निचे बैठ कर अपनी दीदी के मुँह से गिरते थूक को सीधा अपने मुँह में लेने लगता है
और वापस से खड़ा होता हुआ मल्टी के मुँह को छोड़ना शुरू कर देता है
करीब आधे घंटे तक वो दोनों औरतो के मुँह को छोड़ता रहता है और मनो इस बिच उसका लुंड और भी ज्यादा मोटा हो गया था
दोनों की hi हालत खराब थी
अभी दोनों संभल पति उससे पहले रवि मल्टी को घोड़ी बन कर अपना लुंड सीधा उसकी गांड में पेल देता है
मल्टी - है माआआ मारर्र डाला रे हरामी देवरर नई दीदी
रवि- अपने बड़े भाई की बीवी की गांड मरने का तो मजा hi अलग है अह्ह्ह भाभी कितना नाटक करेगी तू साली एक नंबर की चिनार अपने बाप और भाई से छुड़वा कर आयी है मायके में और यहां मुझसे गांड मरवाने में नाटक कर रही है छूट मरी खिङकी एक नंबर की रंडी है दीदी ये साली हमारी भाभी
रेखा - रंडी तो है रवि ये पर बनाया भी तो तूने hi है न इसे रंडी
रवि - हहहहह हम्म्म बात तो सही है पर भूल गयी रंडी तो तुम्हे भी मेने hi बनाया है
दोनों भाई बेहेन की बात भले hi चल रही थी पर इस बिच मल्टी की गांड पेले जबरदस्त तरिके से चालू थी रेखा की गरम बाटे मनो रवि के अंदर और जोश भर रही थी जिसका अंजाम बेचारी मल्टी भुगत रही थी
रेखा - हहहहह ये तेरी गलत फेहमी है भूल गया मेने कैसे फसाया था तुझे तू क्या समझता था की में सोती रहती थी रात में जब तू मेरी गांड के छेद को फैला फैला कर सुंघा और छठा करता था
और भूल गया उस दिन कैसे मेने अपने हाथ में चोट लगने का नाटक करके तुझे अपने गांड पर लगी हगवास धुलवाई थी क्यों बोल भूल गया वो दिन
रवि- दीदी उन दिनों को याद करके तो आज भी मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है मर्द तो में पहले से hi था पर मर्दानगी का सही इस्तेमाल करना तो आपने भी सिखाया था कैसे भूल सकता हु दीदी में जब रात को आप मेरे सामने अपने सरे कपडे खोल कर सोया करती थी
और सच में मैं आपको सोता हुआ समझ कर घंटो तक्क आपकी चूचियों को पिया करता और आपकी गांड में ऊँगली दाल कर उसे सुंघा करता तो कभी छठा करता कैसे भूल सकता हु दीदी में
और आपको याद है कैसे आपकी गांड में कटा सुबह गया था तो मेने उसे घंटो तक्क चूस चूस कर निकला था जिस बिच कितनी hi बार अपने मेरे मुँह पर पाद मारा था अहह दीदी आज भी वो महक याद है मुझे जब आपकी गांड के अंदर की हवा सीधी मेरे मुह्ह में आ गयी थी
रेखा - बीटा वो कटा चुभने वाली बात भी बस एक नाटक hi थी तुझे क्या लगा था तेरी दीदी एक कटे की वजह से अपनी ये गद्देदार गांड तेरे सामने फैला देगी सुकर मना अपनी किस्मत का की तुझे रेखा की गांड को चूसने का अवसर मिला
रेखा अपनी गांड को फैला कर रवि को दिखती है
रवि अपनी ललचाई नजरो से अपनी दीद की गांड देख रहा था और अचानक से वो अपना मुँह रेखा की गांड से भिड़ा देता है इस बिच उसका लुंड मल्टी की गांड से बहार आ जाता है और मल्टी पड़ती हुई साइड में गिर्र जाती है
कुछ देर तक्क रवि अपनी दीदी की गांड चाटता है और फिर अपना लुंड उसमे दाल कर छोड़ने लगता है
रेखा - अह्ह्ह छोड़ हरामी छोड़ और फाड़ दाल अपनी दीदी की गांड अह्ह्ह इतनी hi जान है तेरे लौड़े में
रवि - दीदी जान तो आज दिखाऊंगा में तुम्हे
रवि अपनी फुल स्पीड से रेखा की गांड मार रहा था पर मनो रेखा को कोई फरक hi नहीं पड़ता था
रेखा उसे लगातार उकसा रही थी ताकि वो अपनी पूरी रफ़्तार से उसे चोदे
इधर अब टक्क मल्टी की हालत कुछ हद्द टक्क ठीक हो चुकी थी और वो ताज्जुब से रवि और रेखा की चुदाई देख रही थी
मल्टी- आज तो में मान गयी रेखा दीदी इस जानवर को अगर कोई काबू कर सकता है तो वो आप hi हो बस और कोई नहीं
रवि- ये बात तो सही कहि भाभी आपने मेरी दीदी के जैसा कोई नहीं है
रवि अपना लुंड बहार निकल कर रेखा की छूट को पागलो की तरह रगड़ने लगता है
रेखा खुद को रोकक नहीं पति और वही पड़े पड़े hi पेहसाब करना शुरू कर देती है
रवि तुरंत अपना मुँह उसकी छूट पर लगा कर अपनी दीदी का गरमा गरम पेहसाब पिने लगता है
रवि- असली इनाम तो अब मिला है दीदी अह्ह्ह मजा आ गया
रेखा - सच में बहुत बड़ा हरामी है तू कोई अपनी दीदी का पेशाब भी पिता है क्या
मल्टी- जब रेखा जैसी गदराई हुई मस्त घोड़ी दीदी हो तो कौन भाई खुद को रोक पायेगा
रवि- हम्म भाभी सही बात है आजाओ अब बहुत आराम कर लिया तुमने
रवि दोनों को एक दूसरे के ऊपर लिया देता है और बरी बरी दोनों को छोड़ने लगता है अब उसके पास एक साथ 4-4 छेद थे 2 छूट तो 2 गांड
रवि बरी बरी सबको छोड़ रहा था एक एक झटका सबमे लगा रहा था
यह नजारा इतना मादक हो चला था की दोनों औरते अब मजे में एक दूसरे का मुँह चूसना शुरू कर चुकी थी बिच बिच में रवि अपना मुँह दोनों के छेड़ो में लगा कर उन्हें चूसने लगता तो वही दोनों औरते कभी कभी पेहसाब करना शुरू कर देती जिसे रवि सीधा जातक जाता और दुबारा से उनकी चुदाई शुरू कर देता
पहला राउंड करीब 1-30 मिनट टक्क चला
इस बिच रवि ने अलग अलग तरीको से अपनी दीदी और भाभी को छोड़ा
अंतत में रवि का वीर्य निकलने वाला था और वो मल्टी को छोड़ कर रेखा के होठो को चबाते हुए उसकी छूट छोड़ना शुरू कर देता है
रवि का शरीर अब काँप रहा था रेखा समझ जाती है की उसका प्यारा छोटा भाई अब झड़ने वाला है वो उसे धक्का देकर अलग करने की कोशिश करती है पर रवि उसे पागलो की तरह छोड़ता hi जा रहा था
अनंतत में रवि का सारा विरया उसकी दीदी की छूट में गिरने लगता है
यह पहली बार था जब रेखा की छूट में रवि ने अपना वीर्य गिराया था
जिसकी गर्माहट को महसूस कर रेखा भी झड़ने लगती है और अपने नाख़ून रवि की पीठ पर गदति हुई अपनी कमर ऊपर उठा देती है
कुछ पल बाद रवि अपना लुंड बहार निकल लेता है और मल्टी को ताज्जुब होता है की रेखा की छूट से सिर्फ कुछ hi बुँदे विरया की बहार आती है बाकि सारा उसकी छूट पी गयी थी
रेखा रवि को धक्का देती हुई उससे अलग होती है और अपनी फटी हुई बुरर्र में 2 उंगलिया पेल कर बाकि का विरया बहार निकलने की कोशिश करती है
मल्टी यह सब देख रही थी और उसे रवि के चेहरे की मुस्कान देख कर रवि के इरादे मालूम चल गए थे
मल्टी- अब कोई फायदा नहीं है दीदी
रेखा - आप समझ नहीं थी हो भाभी सब गड़बड़ हो जायेगा इसकी इस गलती की वजह से
रेखा पागलो की तरह अपनी छूट से वीर्य बहार निकलने का प्रयास कर रही थी
मल्टी- दीदी बास अब कुछ बहार नहीं आने वाला सारा विरया आपकी बच्चेदानी में चला गया है
रवि- हां दीदी मेरा बीज अब आपके पेट में पहुंच चूका है
रेखा - तुझे बोलै था न रवि अगर बच्चा हो गया तो क्या मुँह दिखाएंगे हम दुनिया वालो को
रवि- अरे माँ छुड़ाने गयी दुनिया और मेरे लिए तो आप hi मेरी दुनिया हो और आप hi मेरे बच्चे को पैदा करोगी जो मुझे मां मां कहेगा और में दिन रात उसकी माँ छोडूंगा दीदी आज मेने वो काम कर दिया जिसका मेने खुद से वडा किया था अपनी तीनो दीदियो के पेट में अब मेरा बीज है और तीनो के बच्चे भी मेरी hi तरह ताकतवर होंगे
मल्टी- अब जो हो गया सो हो गया दीदी
रेखा - पर भाभी
मल्टी- सही तो कह रहे है देवर जी शादी नहीं हुई तो क्या हुआ माँ नहीं बनोगी क्या कभी देखो मेरे पेट में भी मेरे बाप ने बीज बोया है और ज्यादा दिन भी नहीं हुए है जब पेट बढ़ना चालू होगा तो हम सेहर चल पड़ेंगे और बच्चा होने के बाद आएंगे किसीको कुछ पता नहीं लगेगा सबको यही लगेगा दोनों बच्चे मेरे hi है
क्यों सही कह रही हु न में देवर जी
रवि- आप कभी गलत बोलती हो क्या भाभी
रेखा - अच्छा जब तुम लोगो का यही इरादा है तो चल आजा और अच्छे से अपना बीज मेरे अंदर दाल और बना दे अपनी रेखा दीदी को भी अपने बच्चे की माँ
रवि एक बार फिर दोनों को छोड़ने लगता है और ये कार्यक्रम रात भर चलता है ना तो दोनों औरते हार मानती है और न hi रवि रात में रवि 4 बार अपना विरया रेखा की छूट में गिरता है
और रेखा की छूट भी सारा का सारा वीर्य सीधा बच्चेदानी में पहुँचती जाती है ...