Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 28 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -255

खाना बनाने के बाद मल्टी रवि और बुआ को खाने के लिए बुलाती है

रवि तो पहले hi आ जाता है पर बुआ कराह कराह कर चल रही थी

रेखा - अरे क्या हुआ बुआ ऐसे क्यों चल रही हो

मल्टी - है है बुआ जी शाम टक्क तो ठीक थक थी आप अच्चानक से आपकी ये चल कैसे बदल गयी

जानकी बिना कुछ बोले अपनी जगह बैठ जाती है अब बेचारी बताती भी तो क्या बताती की उसके hi भतीजे ने बेरहर्मी से उसकी गांड मारी है

जानकी- अरे कुछ मत पूछ बहु और बस खाना दे दे तू मुझे

है रम्म ये बुढ़ापा भी न मेरी जान लेकर मानेगा

मल्टी- अरे बुआ जी जान लेना बुढ़ापे का काम नहीं है अब जवानी वाले जोखिम बुढ़ापे में उठाओगी तो कमर तो टूटेगी hi न हिझीीी

रवि की आँखे अब भी लाल थी जल्दी hi सब खाना खा लेते है जानकी रेखा को अपना बिस्तर बहार hi लगाने को बोलती है और रेखा करती भी वही है वो भी यही छाती थी की आज की रात बुआ उससे दुर्र hi रहे ताकि वो जे भर के अपने छोटे भाई से छुड़वा सखे

रवि खाने के बाद घर के बहार आता है और अपनी जेब से वो दवाई निकल कर उसमे से एक गोली खा लेता है और वापस घर में जाने लगता है तभी उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आती है उसके कदम वही ृक्क जाते है और दुबारा से दवाई निकल कर एक और गोली निगल जाता है

रवि- जब एक गोली से इतनी ताक़त मिली तो 2-2 गोली से तो में पुरे गाओं की औरतो को गाबगीन कर दूंगा

पर आज की रात तो रेखा दीदी की बरी है मेरी सब दीदियो के पेट में मेरा बीज होना चाहिए शादी नहीं हुई तो क्या हुआ बीज तो बोया ही जा सकता है ना आज दिखता हु रेखा दीदी को की उसके भाई में कितना दम है छोड़ छोड़ कर भोसड़ा hi फाड़ दूंगा दीदी का आज तो और हां भाभी भी तो है कैसे नाटक करती है अपने पति के सामने आज तो साली को एक दम रंडी बना कर छोडूंगा कोई बचने वाला नहीं आएगा आज तुम दोनों को दीदी और मेरी भाभी आज की रात हो हु में hi हु बचने वाला भी और भोगने वाला भी .....

अपडेट थोड़ा छोटा है माफ़ करना दोस्तों पर जल्द hi पूरा किया जायेगा
 
अपडेट -256

रवि घर में चला जाता है और इधर मल्टी बुआ को बहार लेकर सुला देती है

रवि- भाभी आप खा सोने वाली है आप

मल्टी - अआप खा सुलाना कहते है मुझे देवर जी

रवि- अच्छा तो मुद पहले से hi बना हुआ है छुड़वाने का हम्म्म

Malti-aapka मुद नहीं है क्या अपनी बड़े भाई की पत्नी को छोड़ने का

रवि- एक दम रंडी हो की तरह बाटे करने लगी हो भाभी

Malti-aapse छुड़वाने के बाद से hi में रंडियो जैसा वयवहार करने लगी हु

रवि- अच्छी बात है क्योंकि आज की रात के लिए मुझे किसी चुड़क्कड़ रंडी की hi जरुरत है

मल्टी- अच्छा एक hi रंडी चाहिए या एक और चाहिए आपको

रवि- हम भाभी के साथ साथ अगर दीदी भी मिल जाये तो और भी अच्छा

मल्टी- वो तो पहले से hi आपकी है देवर जी

रवि मल्टी की गर्दन दबोच लेता है

मल्टी- क्या हुआ देवरर जी मेने कोई गलती कर दी क्या

रवि- तू क्या गलती करेगी साली रंडी भूल गयी तूने क्या वडा किया था मुझसे

मल्टी- क्या वादा किया था मेने आपसे

तदायकककक

एक जोरदार छठा रवि मल्टी के गाल पर मरता है जिससे मल्टी की आँखों में पानी आ जाता है और उसका पूरा गाल लाल हो जाता है

ये दवाई का hi असर था जो रवि की हवस अब खतरनाक ढंग से अपने पीक पर जा चुकी थी

रवि- साली कुटिया तू मेरे बड़े भाई की बीवी है तो तू क्या सोचती है में तुझ पर रेहम दिखाऊंगा

इस पर मल्टी कुछ नहीं बोलती बस सिसकिया लेती हुई अपनी गर्दन छुड़ाने की कोशिश करती है जिसपर रवि की पकड़ और भी मजबूत होती जा रही थी

रवि- तू भूल गयी न रंडी में नहीं भुला तूने क्या खा था कम्मो दीदी की शादी के समय तू अब मेरे लिए एक चीज़ के सामान है जिसे में जब कहे जैसे कहे इस्तेमाल कर सकता हु

मल्टी- हां हां याद है मेने खा मना किया है पर पहले मेरी गर्दन तो छोड़ो

रवि- आज दिखाऊंगा तुझे कैसे एक औरत का इस्तेमाल किया जाता है

अब मल्टी का दम घुटने लगा था वो रवि को धक्का देती हुई उसकी पकड़ से आजाद हो जाती है

Malti-to बता न सेल हरामी कैसे इस्तेमाल किया जाता है एक औरत का और है अंदर तेरी दीदी भी बैठी है जा पहले उसका इस्तेमाल कर

मल्टी का चेहरा पूरा लाल हो चूका था आँखों से आंसू बह रहे थे

रवि- मादरचोद तू मुझे बताएगी में अपनी दीदी को कैसे छोड़ू ृक्क बताताछु तुझे

रवि फिरसे मल्टी के बाल पकड़ कर उसे अंदर ले जाता है और दरवाजे को बंद कर देता है और मल्टी को धक्का देता हुआ बिस्तर की और फेक देता है

रेखा जो बिस्तर लगाए दोनों का इन्तजार कर रही थी वो रवि की इस हरकत को देखती रह जाती है उसे भी आज अपने छोटे भाई की हरकतों में कुछ बदलाव दिखाई पद रहा था

रवि- सुन्न लो दोनों रंडियो आज ये दरवाजा तभी खुलेगा जब में चाहूंगा तुम दोनों का मूतना हगना सब आज इसी कमरे में होगा

रेखा - अच्छा कमरे में hi मूतना होगा तो क्या तेरे मुँह में मुतुंगी में क्यों रे हरामी

रवि- दीदी मेरे मुँह में मुतो या अपने मुँह में पर आज की रात ये दरवाजा नहीं खुलेगा

मल्टी- दीदी आज इस हरामी को दिखा hi देते है औरतो को हराना न मुमकिन है वो भी छुड़वाने में

रेखा - सही कह रही हो भाभी बड़ा घमंड है इसे अपने लुंड पर आज तो दिखा hi देते है कौन जीतेगा और कौन हारेगा

इसका लुंड ज्यादा पेलू है या हमारी बुरर्र ज्यादा चुड़क्कड़ है

रेखा और मल्टी एक एक करके अपने सरे कपडे उतरने लगती है

इधर रवि जैसे hi अपनी धोती को हटाता है दोनों औरतो की आँखे छोङिया जाती है

रवि का लुंड पहले के मुक़ाबले काफी बड़ा और मोटा लग रहा था

जिसे देख कर एक पल को तो रेखा का भी हलक सुख जाता है

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रवि अपने विकराल लुंड को मसलता हुआ दोनों की और बढ़ता है इधर दोनों की हालत अब खराब होने लगी थी रवि का लौड़ा देख कर

रवि- तो किस रंडी से शुरुवात करू अपने बड़े भाई की बीवी से या अपनी बड़ी दीदी से किसको दिखाऊ पहले अपने इस लौड़े की ताक़त भाभी को या दीदी को

रवि दोनों की चूचियों को मसलता हुआ की आँखों में देखता हुआ कहता है

रेखा और मल्टी दोनों को hi रवि की आँखे देख कर पता चल चूका था की आज उन दोनों की खैर नहीं है

दोनों औरते एक दूसरे की और देखती है और मनो आँखों hi आँखों में एक दूसरे से कहती है - आज तो हमने गलत पन्गा ले लिया

रवि- तुम दोनों की आँखों में जो खुद दुःख रहा है उसे देख कर आज मुझे बहुत मजा आ रहा है तो बोलो कैसे शुरू करे

अभी दोनों कुछ बोलती उससे पहले रवि रेखा के होठो को चूसना चालू कर देता है और अपने दूसरे हाथ से मल्टी के बालो को पकड़ कर उसका भी मुँह अपनी और खिस लेता है

तीनो एक दूसरे के मुँह और होठो को पागलो की तरह चाट रहे थे और एक दूसरे का मीठा मीठा थूक पी कर अब रेखा और मल्टी के जिस्म में भी रवि से छुड़वाने की इच्छा जाग गयी थी

दोनों hi औरते खुद बा खुद hi अपने घुटनो पर आ जाती है और रवि का लुंड चूसना चालू कर देती है

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इधर रवि का लुंड जैसे जैसे रेखा और मल्टी के गरम मुँह में जा रहा था उसका जोश और भी बढ़ता जा रहा था मनो आज उसके अंदर एक तूफ़ान सा आ गया था जो सब कुछ तबाह करने वाला था

रवि अब तक दोनों के बालो को पकड़ कर बरी बरी से दोनों का मुँह छोड़ रहा था उसके झटको की रफ़्तार इतनी तेज थी की रेखा और मल्टी की आँखे तक्क बहार आ जाती हर झटके के साथ पर रवि आज रुकने वाला नहीं था

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रवि रेखा के मुँह को पागलो की तरह छोड़ रहा था

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी क्या मुँह है तेरा इसके सामने तो छूट और गांड भी फ़ैल है

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जैसे hi रवि लुंड बहार निकलता है रेखा के मुँह से थूक की एक मोती परत बहार गिरने लगती है

यह नजारा देख कर रवि खुद को रोक नहीं पता और निचे बैठ कर अपनी दीदी के मुँह से गिरते थूक को सीधा अपने मुँह में लेने लगता है

और वापस से खड़ा होता हुआ मल्टी के मुँह को छोड़ना शुरू कर देता है

करीब आधे घंटे तक वो दोनों औरतो के मुँह को छोड़ता रहता है और मनो इस बिच उसका लुंड और भी ज्यादा मोटा हो गया था

दोनों की hi हालत खराब थी

अभी दोनों संभल पति उससे पहले रवि मल्टी को घोड़ी बन कर अपना लुंड सीधा उसकी गांड में पेल देता है

मल्टी - है माआआ मारर्र डाला रे हरामी देवरर नई दीदी

रवि- अपने बड़े भाई की बीवी की गांड मरने का तो मजा hi अलग है अह्ह्ह भाभी कितना नाटक करेगी तू साली एक नंबर की चिनार अपने बाप और भाई से छुड़वा कर आयी है मायके में और यहां मुझसे गांड मरवाने में नाटक कर रही है छूट मरी खिङकी एक नंबर की रंडी है दीदी ये साली हमारी भाभी

रेखा - रंडी तो है रवि ये पर बनाया भी तो तूने hi है न इसे रंडी

रवि - हहहहह हम्म्म बात तो सही है पर भूल गयी रंडी तो तुम्हे भी मेने hi बनाया है

दोनों भाई बेहेन की बात भले hi चल रही थी पर इस बिच मल्टी की गांड पेले जबरदस्त तरिके से चालू थी रेखा की गरम बाटे मनो रवि के अंदर और जोश भर रही थी जिसका अंजाम बेचारी मल्टी भुगत रही थी

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रेखा - हहहहह ये तेरी गलत फेहमी है भूल गया मेने कैसे फसाया था तुझे तू क्या समझता था की में सोती रहती थी रात में जब तू मेरी गांड के छेद को फैला फैला कर सुंघा और छठा करता था

और भूल गया उस दिन कैसे मेने अपने हाथ में चोट लगने का नाटक करके तुझे अपने गांड पर लगी हगवास धुलवाई थी क्यों बोल भूल गया वो दिन

रवि- दीदी उन दिनों को याद करके तो आज भी मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है मर्द तो में पहले से hi था पर मर्दानगी का सही इस्तेमाल करना तो आपने भी सिखाया था कैसे भूल सकता हु दीदी में जब रात को आप मेरे सामने अपने सरे कपडे खोल कर सोया करती थी

और सच में मैं आपको सोता हुआ समझ कर घंटो तक्क आपकी चूचियों को पिया करता और आपकी गांड में ऊँगली दाल कर उसे सुंघा करता तो कभी छठा करता कैसे भूल सकता हु दीदी में

और आपको याद है कैसे आपकी गांड में कटा सुबह गया था तो मेने उसे घंटो तक्क चूस चूस कर निकला था जिस बिच कितनी hi बार अपने मेरे मुँह पर पाद मारा था अहह दीदी आज भी वो महक याद है मुझे जब आपकी गांड के अंदर की हवा सीधी मेरे मुह्ह में आ गयी थी

रेखा - बीटा वो कटा चुभने वाली बात भी बस एक नाटक hi थी तुझे क्या लगा था तेरी दीदी एक कटे की वजह से अपनी ये गद्देदार गांड तेरे सामने फैला देगी सुकर मना अपनी किस्मत का की तुझे रेखा की गांड को चूसने का अवसर मिला

रेखा अपनी गांड को फैला कर रवि को दिखती है

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रवि अपनी ललचाई नजरो से अपनी दीद की गांड देख रहा था और अचानक से वो अपना मुँह रेखा की गांड से भिड़ा देता है इस बिच उसका लुंड मल्टी की गांड से बहार आ जाता है और मल्टी पड़ती हुई साइड में गिर्र जाती है

कुछ देर तक्क रवि अपनी दीदी की गांड चाटता है और फिर अपना लुंड उसमे दाल कर छोड़ने लगता है

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रेखा - अह्ह्ह छोड़ हरामी छोड़ और फाड़ दाल अपनी दीदी की गांड अह्ह्ह इतनी hi जान है तेरे लौड़े में

रवि - दीदी जान तो आज दिखाऊंगा में तुम्हे

रवि अपनी फुल स्पीड से रेखा की गांड मार रहा था पर मनो रेखा को कोई फरक hi नहीं पड़ता था

रेखा उसे लगातार उकसा रही थी ताकि वो अपनी पूरी रफ़्तार से उसे चोदे

इधर अब टक्क मल्टी की हालत कुछ हद्द टक्क ठीक हो चुकी थी और वो ताज्जुब से रवि और रेखा की चुदाई देख रही थी

मल्टी- आज तो में मान गयी रेखा दीदी इस जानवर को अगर कोई काबू कर सकता है तो वो आप hi हो बस और कोई नहीं

रवि- ये बात तो सही कहि भाभी आपने मेरी दीदी के जैसा कोई नहीं है

रवि अपना लुंड बहार निकल कर रेखा की छूट को पागलो की तरह रगड़ने लगता है

रेखा खुद को रोकक नहीं पति और वही पड़े पड़े hi पेहसाब करना शुरू कर देती है

रवि तुरंत अपना मुँह उसकी छूट पर लगा कर अपनी दीदी का गरमा गरम पेहसाब पिने लगता है

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रवि- असली इनाम तो अब मिला है दीदी अह्ह्ह मजा आ गया

रेखा - सच में बहुत बड़ा हरामी है तू कोई अपनी दीदी का पेशाब भी पिता है क्या

मल्टी- जब रेखा जैसी गदराई हुई मस्त घोड़ी दीदी हो तो कौन भाई खुद को रोक पायेगा

रवि- हम्म भाभी सही बात है आजाओ अब बहुत आराम कर लिया तुमने

रवि दोनों को एक दूसरे के ऊपर लिया देता है और बरी बरी दोनों को छोड़ने लगता है अब उसके पास एक साथ 4-4 छेद थे 2 छूट तो 2 गांड

रवि बरी बरी सबको छोड़ रहा था एक एक झटका सबमे लगा रहा था

यह नजारा इतना मादक हो चला था की दोनों औरते अब मजे में एक दूसरे का मुँह चूसना शुरू कर चुकी थी बिच बिच में रवि अपना मुँह दोनों के छेड़ो में लगा कर उन्हें चूसने लगता तो वही दोनों औरते कभी कभी पेहसाब करना शुरू कर देती जिसे रवि सीधा जातक जाता और दुबारा से उनकी चुदाई शुरू कर देता

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पहला राउंड करीब 1-30 मिनट टक्क चला

इस बिच रवि ने अलग अलग तरीको से अपनी दीदी और भाभी को छोड़ा

अंतत में रवि का वीर्य निकलने वाला था और वो मल्टी को छोड़ कर रेखा के होठो को चबाते हुए उसकी छूट छोड़ना शुरू कर देता है

रवि का शरीर अब काँप रहा था रेखा समझ जाती है की उसका प्यारा छोटा भाई अब झड़ने वाला है वो उसे धक्का देकर अलग करने की कोशिश करती है पर रवि उसे पागलो की तरह छोड़ता hi जा रहा था

अनंतत में रवि का सारा विरया उसकी दीदी की छूट में गिरने लगता है

यह पहली बार था जब रेखा की छूट में रवि ने अपना वीर्य गिराया था

जिसकी गर्माहट को महसूस कर रेखा भी झड़ने लगती है और अपने नाख़ून रवि की पीठ पर गदति हुई अपनी कमर ऊपर उठा देती है

कुछ पल बाद रवि अपना लुंड बहार निकल लेता है और मल्टी को ताज्जुब होता है की रेखा की छूट से सिर्फ कुछ hi बुँदे विरया की बहार आती है बाकि सारा उसकी छूट पी गयी थी

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रेखा रवि को धक्का देती हुई उससे अलग होती है और अपनी फटी हुई बुरर्र में 2 उंगलिया पेल कर बाकि का विरया बहार निकलने की कोशिश करती है

मल्टी यह सब देख रही थी और उसे रवि के चेहरे की मुस्कान देख कर रवि के इरादे मालूम चल गए थे

मल्टी- अब कोई फायदा नहीं है दीदी

रेखा - आप समझ नहीं थी हो भाभी सब गड़बड़ हो जायेगा इसकी इस गलती की वजह से

रेखा पागलो की तरह अपनी छूट से वीर्य बहार निकलने का प्रयास कर रही थी

मल्टी- दीदी बास अब कुछ बहार नहीं आने वाला सारा विरया आपकी बच्चेदानी में चला गया है

रवि- हां दीदी मेरा बीज अब आपके पेट में पहुंच चूका है

रेखा - तुझे बोलै था न रवि अगर बच्चा हो गया तो क्या मुँह दिखाएंगे हम दुनिया वालो को

रवि- अरे माँ छुड़ाने गयी दुनिया और मेरे लिए तो आप hi मेरी दुनिया हो और आप hi मेरे बच्चे को पैदा करोगी जो मुझे मां मां कहेगा और में दिन रात उसकी माँ छोडूंगा दीदी आज मेने वो काम कर दिया जिसका मेने खुद से वडा किया था अपनी तीनो दीदियो के पेट में अब मेरा बीज है और तीनो के बच्चे भी मेरी hi तरह ताकतवर होंगे

मल्टी- अब जो हो गया सो हो गया दीदी

रेखा - पर भाभी

मल्टी- सही तो कह रहे है देवर जी शादी नहीं हुई तो क्या हुआ माँ नहीं बनोगी क्या कभी देखो मेरे पेट में भी मेरे बाप ने बीज बोया है और ज्यादा दिन भी नहीं हुए है जब पेट बढ़ना चालू होगा तो हम सेहर चल पड़ेंगे और बच्चा होने के बाद आएंगे किसीको कुछ पता नहीं लगेगा सबको यही लगेगा दोनों बच्चे मेरे hi है

क्यों सही कह रही हु न में देवर जी

रवि- आप कभी गलत बोलती हो क्या भाभी

रेखा - अच्छा जब तुम लोगो का यही इरादा है तो चल आजा और अच्छे से अपना बीज मेरे अंदर दाल और बना दे अपनी रेखा दीदी को भी अपने बच्चे की माँ

रवि एक बार फिर दोनों को छोड़ने लगता है और ये कार्यक्रम रात भर चलता है ना तो दोनों औरते हार मानती है और न hi रवि रात में रवि 4 बार अपना विरया रेखा की छूट में गिरता है

और रेखा की छूट भी सारा का सारा वीर्य सीधा बच्चेदानी में पहुँचती जाती है ...
 
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अपडेट -257

ऐसे hi काफी दिनों तक्क रवि अपनी रेखा दीदी और भाभी को छोड़ता रहा बिच बिच में कभी कभार वो बुआ को भी छोड़ा करता था पर उसे बुआ की चुदाई में इतना मजा नहीं आता था जितना की अपनी दीदी और भाभी को छोड़ने में आता था

ऐसे hi दिन बीत रहे थी

इधर दूसरी तरफ कम्मो भी अपने जिस्म को ठंडा करने के अलग अलग तरिके ढूंढने लगी थी

शादी के 10 दिन बाद hi बेचारी का पति बहार सेहर में कमाने चला गया

घर पे सिर्फ उसकी सास और ससुर hi बाकि थे

सास बेचारी खेतो का काम संभालती और ससुर की हालत तो ऐसी थी की हो न हो एक समान

उसे लकवा मार गया था और अब वो बिचारा बस बिस्तर पर पड़ा पड़ा आँखे खोले आस्मां को hi देखा करता था

डॉक्टर ने बताया था की वो देख सुन्न सब सकता है बस अपने दिल की बात किसी से नहीं कह सकता

कामो रोज देखा करती थी की कैसे उसकी सास रात को खाना खिलते समय अपने पति से बाटे किया करती थी और अपनी नई नवेली बहु की तारीफ भी किया करती थी और अंतत में बेचारी रोने लगती आखिर करे भी तो क्या बेचारी का पति उसके hi सामने एक मुर्दा की तरह पड़ा रहता था

कम्मो की सास नाम का नाम गिरजा देवी था

जो एक बला की खूबसूरत और गदराई औरत थी

जवानी में hi शादी हो गयी और जब मौज लूटने की उम्र आयी तो पति बीमार रहने लगा

एक ाचे संस्कारो वाली औरत की hi तरह उसने भी अपनी इच्छाएं अपने अंदर hi दबा ली और कहते हुए भी अपनी जवानी की आग को कभी ठंडा नहीं कर पति

कम्मो की एक छोटी नन्द थी जिसकी शादी 16 की hi उम्र में हो गयी थी और वो भी अपने ससुराल में hi रहती थी

दूसरी और

केशव घर आता है और सबसे मिलता है

रवि इस समय खेतो पर था

केशव - तुम दोनों के खिले हुए चेहरे देख कर लग रहा है की रवि बराबर ध्यान दे रहा है दोनों का

मल्टी का पेट अब फूलना लगा था

रेखा अपनी भाभी का पेट सहलाती हुई केशव की है में है मिलती है

केशव - अच्छा है मेरा काम भी मेरा भाई कर रहा है काम से काम मृ बीवी को तो मेरी तरह नहीं तड़पना पड़ेगा

रेखा - अच्छा भैय्या कम्मो से बात हुई थी आपकी

केशव - अरे है में तो बताना hi भूल गया कम्मो के घर जाना है उसी मिलने

मल्टी- अभी

केशव - नहीं अभी नहीं 2-4 दिन बाद

मल्टी- अच्छा अगर मेरी बात आप मने तो एक बात खु

केशव - है है कहो न

मल्टी- आप रवि बाबू को hi भेज दीजिये वह कुछ दिन के लिए

केशव - अरे पर तुम दोनों जानती हो न दोनों के बारे में

रेखा - अरे भैय्या सही hi तो कह रही है भाभी जब से कम्मो गयी है न जाने मेरा प्यारा भाई खा गुमसुम रहता है एक बार घूम आएगा तो उसका भी मन हल्का हो जायेगा

केशव - वो तो ठीक है पर अगर कुछ उच्च नीच हो गयी तो

रेखा - कुछ नहीं होगा भैय्या आप भरोषा करो मेरा में सब समझा दूंगी रवि को

मल्टी- है है वैसे भी वो सिर्फ रेखा दीदी की hi सुनता है

और वो तो वैसे भी कम्मो से छोटा है तो भले hi वो वह महीना hi क्यों न रुके किसी को क्या दिक्कत होगी और वो बेचारी कम्मो की सास अकेली क्या क्या करेगी नई फसल लगाने में रवि भी उनकी मदद कर देगा

केशव - तो ठीक है तुम दोनों रवि को बोल देना और ये पैसे उसे दे देना में जा रहा हु और 20दिन के बाद आऊंगा

रेखा -अरे भैय्या अभी तो आये हो

केशव - काम बहुत है रेखा में तो सिर्फ पैसे देने आया था तुम दोनों याद से बोल देना रवि को की सोमवार को कम्मो के घर चला जाये

और है अगर वो चला गया तो खेतो का काम तुम दोनों को hi देखना पड़ेगा

रेखा - अरे भैय्या वो चिंता आप मत करो वो हम कर लेंगे

शाम होते hi कम्मो रवि को साडी बात बता देती है रवि की खुसी का ठिकाना hi नहीं था

उधर दूसरी और केशव कम्मो को भी फ़ोन करके बता देता है की सोमवार को उसका छोटा भाई आने वाला है

कामो भी खुसी से पागल हुई जा रही थी

कम्मो ये बात अपनी सास को बताती है

गिरजा - अरे बहु ये तो अच्छी बात है पहली बार तुम्हारा छोटा भाई आ रहा है कोई कमी मत करना उसके लाड में मेरे लिए भी वो मेरे बेटे के समान है तुम पकवान बना लेना जो तुम्हारा मन करे

इधर रवि भी दिन रात एक करके खेतो में काम कर रहा था और नई फसल बू रहा था

देखते hi देखते वो दिन आ जाता है जिसका दोनों भाई बहनो को बेसब्री से इन्तजार था

रेखा और मल्टी तरह तरह के पकवान बना कर रवि को देते है और रवि पहली बार अपनी बहन की ससुराल की और निकल जाता है .....
 
अपडेट -258

शाम होने तक्क रवि अपनी दीदी की ससुराल पहुंच चूका था

लोगो से अपने जीजा का पता पूछता हुआ जल्द hi वो उसके घर भी पहुंच गया

झा घर के बहार hi उसे कम्मो की सास बैठी हुई मिली जिसे रवि देखता hi रह गया

गजब की गदराई हुई औरत थी गिरजा देवी जिसका सारा रॉस अब भी उसके अंदर hi भरा हुआ था

रवि पहली hi नजर में अपनी दीदी की सास पर लट्टू हो गया

गिरजा देवी भी रवि को देखतेही पहचान गयी की ये उसकी बहु का छोटा भाई है

गिरजा - अरे बीटा रवि इतनी देर कैसे होगयी आने में

रवि तो मनो गिरजा को देखते hi सपनो की दुनिया में खो गया था और न जाने कीच hi सेकण्ड्स में वो गिरजा जैसी पाक साफ़ औरत के साथ ख्वाबो में क्या क्या कर चूका था

रवि- अरे मम्मी जी क्या बताऊ ये रोड पे न लोगो से ज्यादा तो गाड़िया चलने लगी है

रवि लपक कर गिरजा के पेअर चूका है और एक तेज साँस खींचता हुआ अपनी दीदी की सास की महक को सूंघने की कोशिश भी करता है

गिरजा - सुबह से hi तेरी दीदी इन्तजार कर रही है जा तू अंदर जा में आती हु

रवि- आप खा जा रही है मम्मी जी

असल में तो गिरजा शाम होने का hi इन्तजार कर रही थी ताकि वो खेतो में जाकर अपने अंदर की हगवास निकल सखे जो सुबह से hi उसे परेशां किये हुए थी

पर अब बेचारी रवि से क्या hi बोलती

रवि- अगर कहि चलना है तो बताइये में भी चलता हु

गिरजा - अरे नहीं नहीं बीटा बस में आती हु तू जाए अंदर तेरी दीद ने नजाने क्या क्या बनाया है तेरे लिए

तू अंदर चल में बस कुछ hi देर में आती हु

और सुन्न अंदर जाकर तेरी दीदी को भी बोल देना की मेने उसे बुलाया है

रवि- पर खा बुलाया है

गिरजा अब उसे कैसे बताती की वो अपनी बहु को भी संडास करने के लिए बुला रही है

गिरजा - अरे तू बस उसे बोल देना वो समझ जाएगी तू जा अंदर

गिरजा खेतो की और चल देती है और रवि पीछे से उसकी मतवाली गांड को देखता हुआ अपना लुंड मसलता रह जाता है

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रवि- गजब की गदराई हुई है साली संडास करने जा रही है तो ऐसे बहाना बना रही है मनो ये हगति hi नहीं होगी

ना जाने कितना हगवास निकलेगी आज रात ये अपनी गांड से है मजा आ गया दीदी आपकी सास को देख कर तो मन तो करता है अभी जाकर साली को हगते हुए hi घोड़ी बना कर छोड़ना चालू कर दू

रवि घर में जाता है झा आंगन में hi उसे कामो का बूढ़ा ससुर लेता हुआ मिलता है

रवि उसके पेअर छू कर उसे भी परनाम करता है पर वो बिचारा कोई जवाब नहीं दे पता

रवि- अरे पिताजी में हु आपकी बहु का भाई रवि

बुद्धा सिर्फ अपनी आँखे hi हिला पता था जिसे वो हिला कर मन hi मन रवि को आशीर्वाद देता है

तभी पीछे से आवाज आती है

अरे ये कुछ नहीं बोलते बस पड़े रहते है ऐसे hi

रवि पलट कर देखता है तो उसकी दीदी कड़ी थी जिसे देखने के लिए उसकी आँखे तरस गयी थी

कम्मो का भी यही हाल था

कम्मो दौड़ कर अपने भाई के गले लग जाती है

रवि भी अपनी पूरी ताक़त से अपनी दीदी को जकड लेता है और उसकी पहली हुई चूचियों को अपनी छाती में धस्ता महसूस कर उसका लुंड खड़ा होना शुरू हो जाता है

रवि- दीदी कितने दिन हो गए तुम्हे चुवे हुए

कम्मो - मेरा भी हाल बुरा था तेरे बिना भाई अब तू आ गया है न तू देखना तेरी दीदी कितना प्यार देगी तुझे

ये भाई बेहेन का मिलान देख कम्मो के ससुर की आँखों में भी आंसू आ जाते है

रवि धीरे से कम्मो के कान में कहता है

रवि- दीदी तुम्हारी सास तो गजब की गदराई हुई माल है

कामो - अच्छा कमीने चल इधर आ मेरे कमरे में चल पहले

कमरे में जाते hi दोनों एक दूसरे के मुँह में मुँह दाल कर चूमा छाती शुरू कर देते है रवि अपनी दीदी के पेटीकोट को उठता हुआ उसकी गांड मसलने लगता है इधर कामो भी अपने भाई के लुंड को उसकी पेण्ट के ऊपर से hi सहलाना चालू कर देती है

रवि- अरे दीदी में तो भूल hi गया

तुम्हारी सास ने बुलाया है तुम्हे खेतो में

कम्मो - हम्म जाना पड़ेगा

रवि- वैसे दीदी क्या करने जाते हो आप दोनों खेतो में इतनी रात को

कम्मो - गांड मरवाने

और इतना बोल कर वो कहि कहि करके हसने लगती है

रवि अपने लौड़े को सहलाता हुआ बोलता है - अरे तो इतनी दूर जाने की क्या जरुरत है अपनी सास को भी बुला लो यही मार देता हु दोनों की गांड

कम्मो - अच्छा तो अब तुझे मेरी सास की भी गांड मारनी है कमीने

रवि- गजब की बवाल सास है दीदी तुम्हारी

कम्मो - हम्म बेचारी का पति पिछले 10 सालो से ऐसे hi बिस्तर पर पड़ा हुआ है जब कोई होगा hi नहीं फूल कर रस चूसने वाला तो फूल पहला हुआ तो होगा hi ना

रवि- और रसभरा भी मुझे पहली नजर में hi उसके अंदर का रस नजर आ गया दीदी

कम्मो - भूल जा वो तेरे हाथ नहीं आने वाली

रवि- क्यों उसकी छुड़वाना पसंद नहीं है क्या

कम्मो - किस औरत को छोड़ना पसंद नहीं होता पर वो एक नंबर की पुजारन है दिन रात पूजा पथ करती है और 10 सालो से उसकी बुर्र सुखी हुई है न जाने अब उसके अंदर ये छोड़ने छुवने की इच्छा बची भी होगी या नहीं

रवि - वो तो में पता कर लूंगा दीदी पर तुम्हारी छुड़वाने की इच्छा तो है न

कम्मो - भरपूर है भाई आज रात साला ये पलंग तोड़ देंगे

रवि- और सुबह सास को क्या खोजी की रात भर अपने छोटे भाई से छुड़वा रही थी

कम्मो - तो उसको भी छोड़ देना तू उसके बाद उसका मुँह बंद हो जायेगा

Ravi-abhi तो आपने खा की वो हाथ नहीं आने वाली

कम्मो - अरे बुद्धू उसे बस अपना लौड़ा दिखा अगर एक बून्द भी पानी उसकी बुरर्र से बहार आया न तो सच कहती हु वो साडी पूजा छोड़ कर सिर्फ तेरे लुंड की पुजारन बन जाएगी

कम्मो - अच्छा अभी मुझे जाना है वो इन्तजार कर रही होगी मेरा

रवि- क्यों आप जाकर उसकी गांड की हगवास ढूँगी क्या

कम्मो - अरे बुद्धू पानी तो में hi ले जाउंगी न तभी तो धोएगी वो बेचारी अपनी गांड पर लगी हगवास

रवि- दीदी में भी चालू क्या पानी लेकर फिर आप दोनों की हगवास धो दूंगा

कम्मो - अच्छा बड़ा उतावला है तू मेरी सास और मेरी गांड धोने के लिए वैसे तुझे एक बात बताऊ

रवि- हां बताओ न दीदी

कम्मो - मेरी सास को अकेले खेतो में जाने से डर लगता है

रवि- तो इससे मेरा क्या फायदा

कामो - फायदा तो हो सकता है अगर में साहू तो चल तू छोड़ वो सब में जा कर आती हु तू बैठ

रवि- दीदी में भी चालू

कामो - तू क्या करेगा व्हा

रवि - मुझे देखना है दीद कैसे हगति है आपकी सास कैसे उसकी फैली हुई गांड से हगवास बहार निकलती है

कामो - पर अगर उसे पता लग गया तो

रवि - अरे नहीं लगेगा दीदी में चुप कर देखूंगा और तुम लोगो के आने से पहले hi घर आ जाऊंगा

कम्मो - तो चल भाई दिखती हु तुझे मेरी सास की फैली हुई गांड से हगवास कैसे बहार आती है

कामो अपने छोटे भाई को लेकर खेतो की और निकल पड़ती है

अपनी रोज की जगह से थोड़ा पहले hi कामो रवि को छुपा देती है और अपनी सास को पानी का दबा पकड़ती हुई उससे थोड़ा दुरी पर बैठ जाती है

चांदनी रात में रवि को अपनी दीदी और गिरजा देवी की खुली हुई गांड साफ़ साफ़ नजर आ रही थी और जैसे जैसे गिरजा देवी की गांड से हगवास बहार आ रही थी वैसे वैसे रवि का लुंड भी फूलता hi जा रहा था

रवि अपने लुंड को वही मुठियाने लगता है

और कुछ hi पालो में उसका सारा विरया वही खेतो में गिर्र जाता है

अब तक कम्मो और गिरजा देवी भी संडास कर चुकी थी और अब दोनों अपनी अपनी गांड धो रही थी

गिरजा अपनी गांड को साफ़ कर रही थी खूब अच्छे से बिच बिच में तो वो अपनी ऊँगली भी थोडासा अंदर दाल देती जिसे देख कर रवि का दिमाग खराब हो जाता

दोनों के जाने से पहले रवि घर की और निकल जाता है

घर के अंदर पहुंच कर रवि चैन की सास लेता है

और कामो के ससुर के बाजु में बैठ कर उससे बाटे करने लगता है

रवि जनता था की अब ये बुद्धा न तो कुछ बोल सकता है और न hi कर सकता है सिर्फ सुन्न सकता है

रवि- तुझे पता है बुढऊ में खा से आ रहा हु तू तो पूछेगा नहीं में hi बता देता हु

तेरी बहु और तेरी बीवी को हगते हुए देखने गया था और क्या मस्त हग्ग रही थी तेरी बीवी अपनी मस्त मतवाली गांड से साली ने लुंड की नशे तोड़ डाली

रवि की बाटे सुनकर बुद्धा अंदर hi अंदर विचलित हो जाता है उसे जरा भी अंदाजा नहीं था की उसकी बहु का भाई ऐसी हरकते करेगा

रवि- अरे अरे सास मत पहला बुड्ढे अटैक आ जायेगा तू बस अब देखता जा जिस रास को तुझे चूसना था अब वो में चूसूंगा और तेरी बीवी और बहु को यही तेरे सामने छोडूंगा तू अब देखता जा

तब तक गिरजा देवी और कम्मो भी आ जाती है

गिरजा - अरे वह रवि लगता है इनसे अच्छी दोस्ती हो गयी है तुम्हारी

रवि- अरे खा मम्मी जी में तो बस पापा जी को बता रहा था आज मेने क्या क्या किया क्या क्या देखा

जल्द hi सब खाना खा लेते है

कामो - माजी वो एक बात खु

गिरजा - हां बहु बोल ना क्या बात है

कम्मो - मजी क्या रवि मेरे कमरे में सो सकता है

कामो की बात सुनकर गिरजा देवी हसने लगती है

गिरजा - अरे इसमें पूछने की क्या बात है आज hi क्यों रवि जब तक यह है तेरे hi कमरे में सोयेगा में जानती हु एक बेहेन का प्यार उसके छोटे भाई के प्रति तू इतना मत पूछा कर मुझसे अब तू hi मालकिन है इस घर की रवि कोई गैर मर्द थोड़े hi है वो तेरा छोटा भाई है जो तेरी इजात की रक्षा करेगा समझी जा अब उसे दूध देदे में भी जा रही हु अपने कमरे में सोने तू भी जाकर सो जा बिचारा रवि भी थक्क गया होगा

कामो मन hi मन खुस थी अब वो अपनी सास को क्या hi बताती की वो जिस भाई को इज्जत की रक्षा करने वाला कह रही है वो रात भर उसकी नयी नवेली बहु की इज्जत लूटेगा.....
 
अपडेट -259

कमरे में जाते hi कम्मो दरवाजा बंद करती है और अपने छोटे भाई के ऊपर टूट पड़ती है मनो कितने दिनों की प्यासी हो

रवि भी अपनी दीदी का पूरा साथ देता हुआ उसके रसीले होतो को चूसने लगता है

कम्मो अपने छोटे भाई के हाथो में पिघलने लगती है मनो इस दिन का उसे कबसे इन्तजार था

रवि अपनी दीदी के होठो को चबाते हुआ उसकी गांड सहलाते हुए उसके पेटीकोट को उठाने लगता है

कम्मो कुछ पालो के लिए अपने भाई से अलग होती है और अपनी सदी खोलते हुए फिरसे अपने भाई की बहो में समा जाती है

आगे का काम रवि करता है पहले तो अपनी दीदी के ब्लाउज के एक एक हक्क को खोलता है और फिर उसे उसके बदन से अलग कर देता है

इस बिच रवि का मुँह अब भी उसकी दीदी के मुँह से जुड़ा हुआ hi था

रवि अपनी दीदी की चूचियों के साथ खेलते हुए उसके मोठे मोठे अंगूर समान निप्पल्स को मुँह में भर कर चूसना चालू कर देता है

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इस बिच कम्मो अपनी आँखे मुण्ड लेती है और कराहती हुई अपने भाई का सर अपनी चूचियों पर दबाने लगती है

रवि भी पागलो की तरह अपनी दीदी की पपीते जैसी फूल चुकी चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर उनका रसपान करने लगता है

और अगले hi पल वो अपनी दीदी का पेटीकोट भी खोल देता है और अब उसकी दीदी उसके सामने नंगी खड़ी थी

रवि एक पल में लिए पीछे होकर नजर भर अपनी दीदी के नंगे जिस्म को निहारता है

अपने छोटे भाई को यु देखते हुए देख आज कम्मो के गाल शर्म से लाल हो जाते है

रवि- सच में दीदी ऊपर वाले ने तुम्हे किस सांचे में ढला है पता नहीं पर उसका शुक्र है की उसने तुम्हे मेरी दीदी बनाया

रवि फिरसे अपनी दीदी के नंगे जिस्म पर टूट पड़ता है और उसके होठो से शुरू करता हुआ अपने मुँह को उसकी पनियाई बुरर्र तक्क ले आता है

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एक झटके से रवि अपनी दीदी की टैंगो को पकड़ कर खोलता हुआ उसके अपनी दीदी की छूट को नजर भर देखता है

मनो कबसे उसे इस दीदार का इन्तजार था

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अगले hi पल रवि अपना मुँह अपनी दीदी की छूट से भिड़ा देता है

कामो अपने छोटे भाई के इस हमले से पागलो की तरह अपनी कमर को उठा उठाकर अपने भाई के सर को अपनी छूट पर दबाने लगती है

जैसे आज वो अपने छोटे भाई को अपनी छूट में घुसा कर hi मानेगी

इस बिच रवि अपनी 2 उंगलियों को गिला करता हुआ कम्मो दीदी की गांड में ठुस्स देता है

कम्मो के लिए तो मनो ये सोने पर सुहागा था

अपने छोटे भाई से बुरर्र चतवते हुए गांड में ऊँगली करवाना उसे बहुत hi आनंद दे रहा था जिस कारन वो ज्यादा देर खुद को रोकक नहीं पति

उसके पेअर कम्पनी लगते है जिन्हे अब तक्क रवि ने थमा हुआ था

रवि अपनी दीदी के पैरो के कम्पन्न से समझा जाता है की उसकी दीदी अब झड़ने वाली है वो अपनी जीभ को अपनी दीदी की छूट में और भी गहराई तक्क उतर देता है और अब उसकी जीभ अंदर काम कर रही थी और उसके होठ लगातार अपनी दीदी की छूट के फैले हुए होठो को चूस रहे थे

जल्द hi कम्मो ढेर हो जाती है और अपनी कमर को उठती हुई अपने भाई का सर जोर लगाकर अपनी छूट पर दबती हुई अपनी साडी मलाई सीधा उसके मुँह में गिराने लगती है

रवि तो मनो इस सफ़ेद पानी को पिने में लिए hi अपनी दीदी की ससुराल आया था

वो भी खूब मंत्र लगाकर अपनी दीदी की छूट का पानी पिता जाता है तब तक अपनी दीदी की छूट को चाटता है जब तक की वो अपनी कमर निचे नहीं कर देती

कम्मो लम्बी लम्बी सांसे खींचती हुई रवि के बालो को पकड़ कर उसे ऊपर की और उठती है

रवि का चेहरा पूरा भीग चूका था

जिसे देख कर कम्मो और भी ज्यादा गरमा जाती है

रवि- दीदी मजा आया न

कम्मो - तुझे आया या नहीं मजा मेरे भाई

रवि- बहुत मजा आया दीदी न जाने कबसे इस दिन का इन्तजार कर रहा था जब तुम्हारी छूट का पानी पिने को मिलेगा

कम्मो - तुझे मजा आया तो मुझे भी आया

ला अब मुझे भी वो पीला जिसका मुझे इन्तजार था

रवि- खुद hi पी लो दीदी

रवि बीएड से थोड़ा पीछे हट जाता है

कामो अपने सर को इस तरफ करती हुई अपने छोटे भाई का पजामा उतर देती है और अगले hi पल उसके छोटे भाई का फनफनाता हुआ लुंड उसकी आँखों के सामने था

कम्मो - आँखे तरस गयी थी इस लौड़े को देखने के लिए

रवि- अभी तो सामने है न दीदी करलो अपने दिल के सरे अरमान पुरे

कम्मो - हम्म आज तो कर hi लुंगी अपनी साडी इच्छाएं पूरी

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कम्मो उस काळा लुंड को थममम लेती है और बिना वक़्त गए अपने भाई के लुंड को अपने होठो से चूमने लगती है

काम्फू देर तक कम्मो रवि के लुंड को चूमती चाटती रहती है जिस वजह से कम्मो के होठो पर लगी लाली अब रवि के लौड़े पर लग चुकी थी

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रवि भी माहोल का पूरा फायदा उठा रहा था वो अपनी दीदी के बालो को धीरे धीरे सेहला रहा था जिसकी वजह से कम्मो की छूट के अंदर एक साथ हजारो चीटिया रेंगना शुरू हो गयी थी

धीरे धीरे कम्मो लुंड को मुँह में उतरना चालू कर देती है और देखते hi देखते रवि का आधे से जयादा लुंड उसकी दीदी के मुँह में था

कुछ देर तक्क तो कम्मो खुद hi अपनी मुँह को आगे पीछे करके अपने भाई का लुंड चुस्ती है उसे लगता है की उसका भाई खुद hi उसका मुँह छोड़ना चालू कर देगा जोकि कम्मो को बहुत पसंद था

पर वो नहीं जानती थी की रवि यह आने से पहले hi सोच कर आया था की वो ऐसी कोई भी हरकत नहीं करेगा जिससे उसकी दीदी को दर्द है परेशानी हो

पर रवि को खा पता था की उसने खुद hi अपनी दीदी को उस सांचे में ढल दिया था जिसमे अब उसे सिर्फ रफ़ सेक्स hi पसंद आता था

कम्मो काफी देर तक उस पल का इन्तजार करती है और जब रवि की तरफ से कोई हरकत नहीं होती तो वो खुद hi अपने छोटे भाई के दोनों हाथो को पकड़ कर अपने सर पर रख देती है और लुंड को बहार निकलती हुई अपने छोटे भाई की आँखों में देखती है

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कम्मो - अब मेरा मुह्ह छोड़ मेरे भाई जैसे तू घर पर छोड़ा करता था

रवि- पर दीदी

कम्मो - पर वर्कर कुछ नहीं पूरा जोरर लगा कर छोड़ अपनी दीदी कमठ और पहाड़ दे तू नहीं जनता में कितने दिनों की प्यासी हु मेरे भाई में बास यह छाती हु की इतने दिनों तक्क जो सब मुझसे छूटा है आज की रात तू मुझे वो सब लौटा दे

क्या तू इतना भी नहीं कर सकता अपनी दीदी के लिए

बोल क्या तू अपनी दीदी का मुँह नहीं छोड़ सकता जैसे तू रेखा दीदी और मल्टी भाभी का छोड़ा करता था

या तेरे अंदर तेरी इस दीदी के लिए प्यार ख़तम हो चूका है

रवि- ऐसा नहीं है दीदी में वडा करता हु आज की रात में तुम्हे वो सारा सुख दूंगा जिससे तुम इतने दिनों तक्क दुर्र थी और हां दीदी में सबसे ज्यादा प्यार तुमसे hi करता हु

कम्मो रवि के लुंड को पकड़ कर अपने मुँह पर सेट करती हुई कहती है

कामो- तो साबित कर

रवि के हाथ तो पहले से hi उसकी दीदी के सर को थामे हुए थे बस फिर क्या था रवि एक जोरदार और करारा झटका लगता है

एक hi झटके कम आधे से ज्यादा लुंड कम्मो के मुँह के अंदर घुस जाता है जिससे कम्मो की साँस उसके हलक में hi अटक जाती है

पर कामो पीछे हटने की बिलकुल भी कोशिश नहीं करती बल्कि वो तो अपने मुँह को और आगे की और दबती है ताकि उसके छोटे भाई का लुंड उसके मुँह के और भी भीतर तक जा सखे

अब रवि अपनी दीद के सर को थामे हुए लगातार झटके मरना शुरू कर चूका था कामो के मुँह से थुक्क गुरता hi जा रहा था लगातार हल्गिरता जा रहा था उसकी आँखों का काजल बह कर उसके चेहरे पर एक काली लकीर बना चूका था

आँखों का पानी मुँह से होता हुआ निचे गिर रहा था

पर कहते है न ये खुसी के आंसू थे

वही हाल कम्मो का भी था

कामो इस लम्हे का पूरा मजा ले रही थी हां थोड़ी तकलीफ भले hi हो रही थी पर असली मर्द से छुड़वाने का मजा भी तो उसे मिल रहा था जिसके लिए न जाने कितनी hi औरते तड़पती है

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अब रवि का लुंड कामो के गले तक उतर चूका था और अपने दीदी के मुँह की गर्मी अब रवि को अपने लुंड पर साफ़ महसूस हो रही थी

भले hi वो अपनी दीदी के रसीले होठो को फाड़ता हुआ उसका मुँह छोड़ रहा था पर अपनी दीदी के इस निर्णय को देख कर रवि के अंदर उसके लिए इज्जत और भी ज्यादा बढ़ चुकी थी

कुछ hi पालो बाद रवि भी झड़ने लगता है और अपनी दीदी के मुँह में अपना विरया गिरता हुआ अपना लुंड बहार खींच लेता है कामो हाफति हुई एक बून्द विरया भी बहार नहीं आने देती और मुँह में गिरा सारा विरया गतततक जाती है

कुछ पानी कम्मो के चेहरे और होठो पर भी गिरता है जिसे बाद में वो खुद hi अपनी उंगलियों से लपेट कर पी जाती है
 
अपडेट -260

अनंत में कामो रवि का सूपड़ा अपने मुँह में पकड़ कर चूसना शुरू कर देती है ताकि बची हुई बुँदे भी उसे मिल जाये

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अपनी बेहेन के इस रूप को देख कर रवि का लुंड उसके मुँह में hi दुबारा से फूलना शुरू हो जाता है

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रवि अपनी दीदी का झूलता हुआ मंगल सूत्र पकड़ कर अपने खड़े लुंड पर लपेट लेता है जिससे उसकी दीदी का मुँह और भी पास आ जाता है उसके लुंड के

अपने भाई की इस हरकत को देख कर कामो के अंदर की ज्वाला और भी भड़काने लगती है

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रवि कामो को पकड़ कर बीएड पर पटक देता है

और अपनी दीदी के गले होठो को चूसने लगता है

कामो भी अपना पूरा मुँह खोल देती है और अपने hi भाई के विरया का स्वाद उसे चखने लगती है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के मुँह को पागलो की तरह चाट रहे थे कुछ पल तक ऐसे hi चलता है

रवि- दीदी यही कहती थी न आप

कामो- तू बता क्या तू नहीं चाहता था अपनी दीदी का मुँह छोड़ना

रवि- हम्म छठा तो था पर दीदी

Kaamo-par क्या भाई

कामो प्यार से अपने छोटे भाई के बालो को सहलाती हुई बोलती है

रवि- पर दीदी इससे आपको तकलीफ होती है और मुझे वो बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता

कामो- अच्छा तो इस लिए तूने अपने आप को रोक रखा था अब समझी में

रवि- तो क्या दीदी आपको मजा आया

कामो - सच खु तो असली मजा तो तभी आता है जब तू ताबड़तोड़ झटको के साथ मेरा मुँह छोड़ता है तुझे मजा नहीं आता

रवि- बहुत मजा आता है दीदी

कामो - तो बस तू अपनी दीदी और उसके मुँह के मजी ले और देख तो तूने मेरी छूट और गांड के साथ साथ मेरा मुँह भी कितना फैला दिया है

इतना बोल कर कामो अपने मुँह को खोल कर अपने छोटे भाई को दिखने लगती है

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रवि तुरंत अपनी दीदी के मुँह में अपनी जीभ घुसा कर दुबारा से उसका मुँह चाटने लगता है

रवि- दीदी अब इन्तजार नहीं होता

कामो- मुझसे भी नहीं भाई

रवि- तो बोलो दीदी किस्से शुरुवात करू

कामो- जिससे तेरा मैं करे

रवि- मेरा मैं तो आपकी गांड मरने का है दीदी

Kaamo-accha तो तुझे अपनी दीदी की गांड मारनी है

रवि- हां दीदी मुझे अपनी दीदी की गांड मारनी है

Kaamo-accha बस गांड hi मारनी है न

रवि- नहीं दीदी छुटत भी मारनी है

कामो- अच्छा दोनों मारनी है तुझे

रवि- हम्म दीदी मुझे अपनी दीदी की गांड और छूट दोनों मारनी है

Kaamo-aur कैसे मरेगा तू अपनी दीदी की छूट और गांड

रवि कामो का हाथ पकड़ कर अपने खड़े लुंड पर रख देता है

रवि - दीदी इसे मरूंगा में अपनी दीदी की छूट और गांड

कामो- है ढैय्या इतना बड़ा लौड़ा डालेगा तू अपनी दीदी की छूट और गांड में तेरी दीदी को दर्द नहीं होगा क्या वो बर्दास्त कर पायेगी तेरा ये घोड़े जैसा लुंड अपनी छूट और गांड में

रवि- मुझे पूरा यकीन है अपनी दीदी और उसके छेड़ो पर वो मेरा पूरा का पूरा लुंड अपनी गांड और छूट में घुसा लेगी और उफ्फ्फ ताकक नहीं करेगी

कम्मो - अच्छा इतना यकीन है तो आजा आजमा कर देख ले अपनी दीदी और उसके छेड़ो को

इतना बोलती हुई कामो घोड़ी बन जाती है और उसकी छूट और गांड एक बार फिर रवि के सामने आ जाती है

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रवि - दीदी अच्छे से फैला कर दिखाओ न

कामो- कैसे फैलाऊ भाई

रवि- अपने हाथो से दीदी

Kaamo-kyo तुम्हे अपनी दीदी के छेद साफ़ साफ़ नजर नहीं आ रहे क्या

रवि- मुझे और अच्छे से देखना है दीदी

कामो- अच्छा तो कौनसा वाला छेद देखना है तुझे अच्छे से

रवि अपनी दीदी की गांड के छेद पर ऊँगली लगता हुआ बोलता है

रवि- ये वाला देखना है दीदी

कामो- अच्छा तो ये वाला देखना है तो ठीक है पर ध्यान रखना सिर्फ थी वाला छेद देखना अपनी दीदी का जब वो अपनी गांड फैलाएगी तो दूसरे वाले को मत देखना

Ravi-thik है दीदी

असल में तो कामो को अपने भाई से इस तरह की बाटे करने में बहुत मजा आ रहा था

बातो hi बातो में न जाने कब उसकी छूट पूरी गीली हो चुकी थी उसे पता hi नहीं लगा

इधर जैसे hi कामो ने अपनी गांड का छेद फैला कर अपने छोटे भाई को दिखाया तो मनो वो अपनी दीदी की गांड के छेद को देख कर मंत्रा मुग्धा सा हो गया

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रवि- दीदी ये तो काफी मस्त हो गया है पहले से भी ज्यादा

कामो - सब तेरा hi रेहम है भाई इसकी खूबसूरती तूने hi बधाई है नहीं तो आज भी ये छेड़ सिर्फ संडास करने के hi काम आता

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इतना बोलती हुई कामो अपनी गांड को और भी ज्यादा फैला देती है जिसे देख कर रवि के सबररर का बांध टूट जाता है और वो अपनी दीदी की गांड पर हमला बोल देता है

रवि अपनी जीभ से अपनी दीदी की गांड के छेद को चाटने लगता है और अपनी जीभ को इस छेद के और अंदर घुसाने लगता है

Kaamo-ahhh तूने सिर्फ देखने को बोलै था अब चाट क्यों रहा है भाई

रवि बिना कुछ बोले अपने काम में लगा हुआ था

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रवि लगात अपनी दीदी की गांड को चाट रहा था और अगले hi पल वो अपनी 2 उंगलियों से अपनी दीदी की छूट को छेड़ना भी शुरू कर देता है

रवि के इस हमले से कामो मनो पागल सी हो जाती है

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कामो- हट जा भाई मेरा पहाड़ निकलना वाला है

कामो रवि के सर को पकड़ कर पीछे हटती हुई अपनी 2 उंगलिया अपनी गांड में पेल देती है

रवि समझ जाता है की अब उसकी दीदी उसे और भी ज्यादा उकसाना साठ रही है

कामो दोनों उँगलियों को लगातार अपनी गांड में अंदर बहार पेलने लगती है

यह नजारा देख कर तो रवि के लुंड की नशे फटने को हो जाती है

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जैसे hi कामो अपनी उँगलियों को बहार निकलती है रवि दुबारा से अपना मुँह अपनी दीदी की गांड पर लगा देता है और पानी दीदी की गांड से निकल रहे पाद को सीधा अपने मुँह में ले जाता है

जिसकी महक उसे अपनी दीदी की गांड की महक महसूस करवा रही थी

कामो अपने भाई की इस हरकत से अंदर hi अंदर गरमा रही थी तभी रवि कुछ ऐसा करता है जिसकी कामो को भी उम्मीद नहीं थी

रवि अपनी दीदी के हाथो को पकड़ता हुआ उन्ही दोनों उंगलियों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगता है जो कुछ देर पहले तक्क कम्मो की गांड में थी

कामो अब इतनी बैचैन हो चुकी थी की उसे समझ hi नहीं आ रहा था की अब और अपनी गांड चटवाये या अपने छोटे भाई के सामने किसी रंडी की तरह गिड़गिड़ाती हुई अपने गांड मरवाने की विनती करे....
 
अपडेट -260

काफी देर तक्क रवि अपना मुँह कम्मो की गांड में घुसाए रहता है और अपनी जीभ से लगातार अपनी दीदी की गांड के छेद को कुरेदता हुआ उसे ज्यादा से ज्यादा अंदर तक घुसाने की कोशिश करता रहता है

इस उच्च न जाने कितनी hi बार कामो अपने छोटे भाई के मुँह पर पड़ती है और रवि अपनी दीदी की गांड से निकल रही ममोहक महक को सूंघ कर और भी ज्यादा मस्त हो जाता है

कामो- अह्ह्ह रवि अब बर्दास्त नहीं होता भाई

रवि- क्या करू दीदी

कामो- जो भी करना है कर पर जल्दी कर मुझे लग रहा है मेरा शरीर टूट कर बिखर जायेगा भाई

रवि- अच्छा दीदी ऐसा क्या कर दिया मेने जो मेरी दीदी का शरीर इतना टूट रहा है इतनी भी टूटन ाची नहीं है दीदी

कामो- तुझे मजाक सूझ रही है

रवि- मजाक नहीं दीदी मजाआ रहा है मजा आपकी गांड चाटने में

कामो - तभी तो मेरा शरीर टूट रहा है

रवि- अच्छा तो यह वजह है

इतना बोलता हुआ रवि एक साथ अपनी 2 उंगलिया उसकी गांड में पेल देता है

कामो - अह्ह्ह्ह भैई क्या दाल दिया तूने मेरी गांड में

रवि- अभी तो बस ऊँगली hi डाली है दीदी

असल में तो अब कामो उन औरतो में शामिल हो चुकी थी जो गांड मरवाने की शेविंग होती है पर कहि न कहि उसे अपने छोटे भाई से ये बात बोलने में शर्म आ रही थी की वो जल्दी से अपना लौड़ा उसकी गांड में पेल कर उसे छोड़ना चालू करे

इसी लिए वो बात को घुमा घुमा कर अपने मक़सद को पूरा करना कहह रही थी

कामो- अह्ह्ह्हह कितना दर्द हो रहा है तेरी मोती मोती उंगलियों से

रवि- दीदी जब वो डालूंगा तो क्या होगा आपकी गांड का

कामो - हैए अब क्या डालेगा तू कमीने अपनी दीदी की गांड में

रवि - कुछ खास नहीं दीदी बस अपना लौड़ा डालूंगा देखो तो कैसे फुल्ल रहा है

जब से तुम्हारी गांड से निकली पाद सूंघ रहा हु तभी से ऐसा लग रहा है मनो मेरा लौड़ा भी टूट कर बिखर जायेगा

इतना तो कभी दर्द नहीं हुआ दीदी पर आज जो तनाव आया है न मेरे लुंड में वो तो सिर्फ तुम्हारी गांड में लौड़ा पेलने के बाद hi ख़तम होगा

Kaamo-accha तो तेरा यही इरादा है तू अपनी दीदी की गांड को अपने इस लौड़े से छोड़ना चाहता है

रवि- हां दीदी इसी लौड़े से छोड़ना चाहता हु तुम्हारी गांड और इसी से छोडूंगा भी और भगवन ने कहा तो इसी लौड़े से तुम्हारी सास को भी छोडूंगा

कामो - अच्छा तो तुझे बहु और सास दोनों को छोड़ना है

रवि- हां दीदी पहले बहु को छोडूंगा और फिर उसकी सास को फसा कर छोडूंगा

कामो - अच्छा तो मतलब आज की रात सिर्फ बहु की चुदाई hi होगी

रवि- है लगता तो ऐसा hi है दीदी और मुझे तो लगता है जिस छेद से बहु संडास करती है आज रात उसी छेद की ठुकाई और कुटाई होगी

कामो - अच्छा ऐसी बात है तो चल थोक ले आज की रात बहु को hi और चला ले अपना काम बहु से क्या पता तुझे सास मिलेगी या नहीं

रवि- ऐसा मत खो दीदी एक दिन अगर तुम्हारी सास को अपना ये लौड़ा दिखा दिया न तो मेरे आगे पीछे अपनी बुर्र और गांड खोल के नाचेगी

कामो- वो तो वक़्त hi बताएगा भाई

फ़िलहाल तो तू मुझसे hi काम चला ले

रवि- दीदी मेरा वडा है की एक दिन तुम्हारी आँखों के सामने hi तुम्हारी सास की ठुकाई करूँगा वो भी तुम्हारी मदद के बिना

कामो- मुझे तो ऐसा नहीं लगता भाई की तू मेरी मदद के बिना मेरी सास को छोड़ सकेगा चल कोई बात नहीं दीदी हु तेरी तुझसे मुँह थोड़े hi मोड़ सकती हु तू भले कुछ भी कहे पर मुझसे जो बल पड़ेगा में करूंगी पर अभी के लिए सिर्फ तू मुझे छोड़

रवि- अच्छा इतनी खुजली हो रही है क्या दीदी

कामो- अह्ह्ह्ह पूछ मत भाई कितनी खुजली हो रही है

रवि- एक नंबर की चुड़क्कड़ बन गयी हो दीदी आप

कम्मो - अच्छा और मुझे चुड़क्कड़ बनाया किसने है कमीने बोल किसने अपनी दीदी को शादी के पहले hi चुड़क्कड़ बना दिया और अब जब छोड़ने की बरी आयी तो लम्बी लम्बी बाते करता है

रवि- यही अड्डा तो पागल करती है दीदी मुझे तुम्हारी

इतना बोलते हुए रवि उठ खड़ा होता है और अपने लुंड को अपनी दीदी की गांड के सुराख़ पर सेट करता हुआ एक जोरदार झटका मरता है और पूरा का पूरा लुंड एक hi झटके में कामो की गांड में समाए जाता है ....
 
अपडेट -261

एक hi झटके में रवि का पूरा लुंड उसकी दीदी की गांड में घुस जाता है

कामो दर्द में मरे तड़प उठती है

उसकी चिकनी निकलने hi वाली थी वो तो रवि सही वक़्त पर अपनी दीदी के मुँह को अपने हाथो से दबा देता है

नहीं तो आज गिरजा देवी को पता चल hi जाता भाई बेहेन के इस रिश्ते के बारे में

अब रवि का लुंड आराम से कम्मो की गांड में जा रहा था

और अब तक कम्मो का दर्द भी मजे में बदल चूका था वो मजा जो सिर्फ उसका भाई hi उसे दे सकता था

बिच बिच में रवि अपना लुंड बहार निकल लेता और अपनी दीदी की गांड के खुले हुए छेद को देख कर उसकी आँखों में चमक आ जाती

तुरंत hi वो अपना मुँह लगा कर अपनी दीदी की गांड और छूट चाटता और फिर उसपर थूक कर एक hi वॉर में अपना लौड़ा अपनी दीदी की गांड में उतार देता

काफी देर तक्क रवि अपनी दीदी को घोड़ी बना कर उसकी गांड मरता रहा

इधर दूसरी और गिरजा देवी अपने कमरे में लेती रोज की तरह चाट पर लगे पंखे को निहार रही थी

नींद उसकी आँखों से कोसो दुर्र थी

कहने को तो वो सुहागन थी पर सुहागन वाला कोई भी सुख उसे नहीं मिल रहा था

अगर वो धार्मिक और पूजा पथ करने वाली औरत न होती तो न जाने कब का वो किसी न किसी से चुद चुकी होती

अपनी जवानी में गिरजा देवी में भी बहुत गर्मी थी जिसे काफी हाड तक्क उसका पति शांत भी कर पता था

और अपने जीवन में गिरजा ने सिर्फ एक hi मर्द के साथ सम्बन्ध बनाये थे जो आज कुछ न कर पाने की हालत में था

मन तो गिरजा का भी बहुत करता था की उसके वो दिन लौट आये जबउसका पति घंटो तक उसे छोड़ा करता था

उसके गदराये बदन की तारीफ किया करता था

पर वो जानती थी की अब वैसा नहीं होने वाला और इसे hi वो अपनी किस्मत मान चुकी थी

ना तो अब कभी उसका पति सही होगा और न hi गिरजा के अंदर जल रही बरसो पुराणी हवस की आग कभी शांत होगी

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गिरजा का जिस्म ऐसा था की गाओं का हर बूढ़ा और बच्चा उसे पाना चाहता था

कैसी तो रोज उसके नाम की मुठ मारा करते थे

ये बात गिरजा देवी भी भली भाटी जानती थी की गाओं के मर्द उसे किस निगाह से देखते है

पर गिरजा का खुद पर इतना काबू था की वो किसी के बहकावे में नहीं आयी

कोई क्या जनता था की गिरजा जैसे गदराई महिला जो एक इशारे भर से किसी का पानी निकल दे

वो जलती है रोज रात उस हवस की आग में जो उसके पुरे जिस्म को जला कर रख कर देना छाती है

उसके अंदर भी इच्छा होती है की उसे भी कोई मसल मसल कर चोदे

पर ये ख्वाब hi थे जो पूजा पथ करने के बाद भी रात को गिरजा के दिमाग में आते थे

रोज की तरह गिरजा अपनी आँखे मुंड कर अपनी छाती से एक तकिया सत्ता कर सोने की कोशिश करती और काफी म्हणत के बाद उस बेचारी को नींद आ भी जाती

दूसरी तरफ उसकी बहु जो अपनी जवानी के पुरे मजे लूट रही थी

और इस वक़्त वो अपने छोटे भाई से ावाल दर्जे की रंडियो की तरह गांड मरवा रही थी

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रवि- दीदी पानी निकलने वाला है मेरा बोलो गांड में hi गिरा दू

कामो- नहीं रे मुझे पीना है तेरा पानी बहुत दिनन हो गए स्वाद कहे हुए

रवि अपना लुंड गांड से निकल कर उसके मुँह के आगे कर देता है

और कामो किसी कुटिया की तरह अपने छोटे भाई के लुंड पर लगी हुई सफ़ेद मलाई को चाट चाट कर उसका लुंड चूसना चालू कर देती है

कामो इस वक़्त काफी जोश में थी वो खुद hi अपनी गर्दन तक्क अपने छोटे भाई के लुंड को भर रही थी

रवि भी ये देख कर काफी खुश था

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रवि - दीदी खा से सीखा ये सब तुमने

कामो बिना कुछ बोले अपने काम में लगी हुई थी

रवि प्यार से अपनी दीदी के बालो को सहलाता हुआ ऐसी बाटे बोल रहा था जिससे उसकी दीदी और भी ज्यादा पागलपन करे

रवि- दीदी एक नंबर की रंडी हो गयी हो तुम मुझे तो लगता है की अगर एक दिन लुंड न मिले तो पागल hi हो जाओगी तुम

कामो - हरामी तूने hi बनाया है मुझे ऐसा रोज रोज मेरी आँखों के सामने तू रेखा दीदी को छोड़ा करता था भूल गया और साली साली रंडी मेरी दीदी कैसे मजे से अपने hi छोटे भाई से अपनी छूट और गांड मरवाया करती थी

में तो कितनी शरीफ थी तुम दोनों ने hi मुझे ऐसा नया है

अपने शब्द पुरे करते hi कामो फिरसे लुंड चूसना चालू कर देती है

रवि अपनी दीदी के मुँह की गर्मी को और बर्दाश्त नहीं कर पता और झटके खता हुआ अपनी दीदी के मुँह में hi झड़ने लगता है

कामो भी सारा विरया गाठ गाठ करके पीती जाती है

और अनंतते जब उसके प्यारे भाई का लुंड सिकुड़ना शुरू होता है तो उसे छोड़ कर अपने भाई की आँखों में देखती हुई बाकि का विरया भी जातक जाती है

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रवि अपनी दीदी को बहो में लेकर बीएड पर लेट जाता है

रवि- दीदी मजा आया की नहीं

कामो - तू बता तुझे अपनी दीदी की गांड मर के मजा आया की नहीं

रवि- मुझे तो बहुत मजा आया अपनी दीदी की गांड मरने

में

कामो - तो मुझे भी बड़ा मजा आया अपने छोटे भाई से गांड मरवाने में

रवि- दीदी कभी सोचा है आपकी सास कितना अकेला महसूस करती होगी

Kaamo-socha तो है पर जिस तरह से वो दिन रात भगवन की सेवा में लगी रहती है कभी कभी तो ऐसा लगता है की वो ये सब करना hi भूल चुकी होगी

रवि- नहीं दीदी छूट है तो छुड़वाने का मैं भी करता होगा भले hi ऊपर से कोई औरत कितनी भी सटी सावित्री हो पर उसके अंदर एक रंडी छुपी होती है बास कोई उसे बहार निकलने वाला चाहिए

कामो - जैसे तूने अपनी दीदियो के अंदर छुपी रंडी को बहार निकला

रवि प्यार से अपनी दीदी के गुलाबी होठो को चुम लेता है

रवि- बिलकुल सही खा दीदी आपने

और देखना एक दिन इसी बिस्तर पर आपके साथ साथ अपनी सासु माँ को भी छोडूंगा और फिर बताना कितनी सटी सावित्री थी वो जो मेरे लुंड के निच्चे न आयी तो

Kaamo-hmm मानना तो पड़ेगा ावाल दर्जे का खिलाडी है तू इस खेल में चल में भी देखती हु तू कैसे मेरी सास को फसता है और अगर फस्स भी गयी तो तू कैसे उसे समझायेगा की तू अपनी दीदी के सात बिस्तर गरम करता है

सच कहु भाई तो मुझे भी मजा आएगा अब ये खेल देखने में

रवि- बास तुम देखती जाओ दीदी कैसे में उस पवित्र औरत को रंडी बनता हु बस देखती जाओ

चलो अब सो जाओ रात काफी हो गयी है

कामो एक मुक्का रवि की छाती पर मरती है

Ravi-ahhh क्या हुआ दीदी

कम्मो - कमीने गांड मार ली तो क्या मेरी छूट को भूल गया तू देख तो कैसे पानी पानी हुई जा रही है तेरा विरया निगलने के लिए

रवि- अरे में तो मजाक कर रहा था दीदी इतने दिनों बाद मिली हो आज की रात तो जमकर छोडूंगा आपको

कामो - तो देर किस बार की आजा मेरे छोड़ू भाई और अपनी इस रखैल की छूट की प्यार बुझा दे जिसे तू प्यार से अपनी दीदी बुलाता है

रवि- ये हुई न बात दीदी

कामो अपनी दोनों टैंगो को हवा में फैला देती है

जिससे रवि को अपनी दीदी की पनियाई बुरर्र दिखने लगती है

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रवि सीधा अपना मुँह अपनी दीदी की छूट से भिड़ा देता है और अपनी जीभ को अंदर डालता हुआ अपनी दीदी की छूट से निकल रहे अमृत को पिने लगता है

कामो भी आनंद में अपने छोटे भाई के बालो को सहलाती हुई उसके सर को अपनी छूट पर दबाने लगती है

कामो इतनी गरम थी की 5 hi मिंट में वो झड़ने लगती है और अपने भाई के बालो को खींचती हुई अपनी कमर उठा उठा कर अपने छोटे भाई को अपने छूट से निकलते अमृत का रसपान करवाती है

कामो- अब छोड़ रवि अब्ब और बर्दाश्त नहीं होता लग रहा है मेरा शरीर जाल जायेगा

और ये सब शुरू होगा इस भोसड़े से

रवि- अरे मेरी छिनाल तू चिंता क्यों करती है नहीं मिलेगा तेरा ये भोसड़ा तेरा छोटा भाई है न इसकी प्यास बुझाने ले लिए तू बस मजे कर मेरी रखैल मेरी दीदी मेरी कुटिया मेरी रंडी

रवि एक hi झटके में अपना लुंड अपनी दीदी की छूट में पेल देता है और अपना मुँह अपनी दीदी के होठो से सत्ता कर दोहरे मजे ले साथ उसकी छूट चुदाई चालू कर देता है

कामो भी अपने भाई की पीठ पर नाख़ून गदति हुई अपनी कमर उठा उठा कर अपने छोटे भाई का पूरा साथ दे रही थी

भाई बेहेन की ये चुदाई काफी लम्बी चलती है

सुबह के 4 बजे तक दोनों hi एक दूसरे से लिपटे रहते है

कभी दीदी ऊपर तो कभी छोटा भाई ऊपर

पूरा कमरा वासना की महक से सुगन्धित हो चूका था

और ये महक दोनों के अंदर की वासना को और भी भड़का रही थी .....
 
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