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- Dec 5, 2013
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इतने दिनों बाद अपने hi छोटे भाई से रात भर छोड़ने में बाद कम्मो का रोम रोम खुल उठा था
करीब 5 बजे उसकी आंख खुलती है
पूरा बदन टूट रहा था
कामो अंगड़ाई लेती हुई उठती है और जैसे hi उसकी नजर अपने छोटे भाई पर पड़ती है उसके रसीले होठो पर मुस्कान आ जाती है और उसकी आँखों के सामने रात वाला नजारा चलने लगता है कैसे उसके छोटे भाई में बिना रुके रात भर उसकी छूट और गांड मरी थी
कामो एक नजर रवि के खड़े लुंड पर डालती है और उसे देख कर उसके अंदर अजीब सा अहसास होता है
इस वक़्त भी रवि का लुंड अपने विकराल रूप में था
कामो - रात भर छोड़ा है फिर भी देखो तो कैसे सर उठाने पड़ा है कमीना
कम्मो एक चपत अपने छोटे भाई के लुंड पर लगती हुई अपनी छूट पर हाथ रख देती है झा से अभी तक रवि का विरया टपक रहा था
कामो- इसे तो देखो कमीनी को रात भर ठुकाई हुई है फिर भी लुंड देख कर पनिया रही है
कामो बिना देर किये अपनी दोनों टंगे फैलाती हुई अपने भाई की कमर पर कॅश जाती है और उसके लुंड को अपनी छूट पर सेट करती हुई निचे की और कमर को दबान लगती है
देखते hi देखते कामो की छूट एक बार फिर अपने भाई का लुंड निगल जाती है
कामो जोश में थी उसके अंदर मनो फिर से हवस का ज्वाला मुखी फिर चूका था
वो बिना देर किये अपनी कमर को ऊपर निचे करने लगती है
कमरे में एक बार फिर वही महक फैलने लगती है जो रात भर थी
कामो की छूट का पानी उसकी छूट को और चीखना बनता हुआ रवि की कमर पर गिर्र रहा था
रवि के लुंड की तनी हुई नशे कामो को अपनी छूट की दीवारों में साफ़ महसूस हो रही थी
कुछ hi देर में रवि की आँख भी खुल जाती है
जैसे hi उसे महसूस होता है की उसकी दीदी उसके ऊपर बैठी छुड़वा रही है
रवि भी अपनी दीदी की कमर को थमता हुआ अपनी कमर निचे से उठाने लगता है
कामो इतना जोश और मजे में थी की मेरे लिए भी बया कर पाना मुश्किल है
रवि अपनी दीदी के बालो को पकड़ते हुए उसके चेहरे को अपनी और खींचता है और उसके रसीले होठो को चूसने लगता है
रवि को अपनी दीदी का मुँह इस वक़्त रात से भी जयादा मीठा लग रहा था
दोनों भाई बेहेन धुँवाधार तरिके से चुदाई में मसल थे तभी दरवाजे पर दस्तक होती है
गिरजा- अरे बहु अभी तक्क सोई हुई है क्या
कामो रोज 4-4:30 तक उठ कर घर में कामो में लग जाया करती थी और आज कामो के कमरे का दरवाजा बंद पाकर वो अपनी बहु को आवाज लगती है
गिरजा की आवाज सुनते hi दोनों भाई बेहेन ृक्क जाते है
कामो जैसे hi उठाने वाली थी रवि उसकी कमर को थम लेता है
रवि- मत जाओ न दीदी बस होने hi वाला है
Kaamo-dekh रवि सासु माँ बुला रही है कही उन्हें शॉ हो गया तो
रवि- तो हो जाने दो शॉ दीदी वैसे भी आज नहीं तो कल तो पता चलना hi है
पर जो शुरू किया है उसे ख़तम करके जाओ
इतनी मस्त चुदाई को बिच में छोड़ कर जाने का तो कामो का भी मन नहीं था
अपने छोटे भाई की बात मान कर कामो एक बार फिरसे अपनी कमर को ऊपर निचे करने लगती है
इस बार रवि अपनी दीदी की कमर को थोड़ा उचाई पर मज़बूरी से थम लेता है और निचे से ताबड़तोड़ झटके लगाने लगता है
इधर बहार खड़ी गिरजा देवी काफी देर तक दरवाजा बजती है पर कोई जवाब नहीं आता
गिरजा- लगता है रात भर दोनों भाई बेहेन देर तक बाटे करते थे
गिरजा जाने hi वाली थी तभी उसके कानो में कुछ आवाज आती है जो कमरे के अंदर से आ रही थी
आवाज सुनते hi गिरजा देवी के पेअर मनो जम्म से जाते है
क्योंकि गिरजा जानती थी ये ठप्प ठप्प की आवाज कैसे और क्यों आती है
गिरजा का दिल जोरो से धड़कने लगता है
एक hi पल में उसके अंदर न जाने क्या क्या ख्याल आने लगते है
पर अगले hi पल उसके दिमाग में आता है की नहीं वो दोनों तो भाई बेहेन है सेज भाई बेहेन ये कैसे हो सकता है
इधर गिरजा की हालत खराब थी और उधर रवि जान बुझ कर अपनी दीदी को इस तरह छोड़ रहा था की आवाज बहार तक्क जाये
जब जब रवि की जंघे कम्मो की गद्देदार गांड से टकराती तो थप थप की आवाज गूंज जाती
कुछ hi पल में रवि कामो के अंदर hi झाड़ जाता है
और आवाज आणि बंद हो जाती है
गिरजा अब भी दरवाजे पर खड़ी पैने पैने हुई पड़ी थी पर अब आवाज आणि बंद हो चुकी थी हिज कारन उसके शकक अब उसे यकीन दिलवा रहा था की हो न हो कुछ तो गड़बड़ है
कामो- कर ली न तूने अपने मन की
रवि- दीदी शुरू भी तो आपने hi किया था न में तो सोया हुआ था
कामो- अच्छा सोया हुआ था और तेरा ये लौड़ा ये तो जगा हुआ था न
रवि- अब आपके जैसे मस्त गदराई दीदी बगल में नंगी सोई होगी तो किस लौड़े को नींद आएगी दीदी
कामो - अच्छा चल अब तो सो गया न ये
कामो अपनी कमर को उठती हुई ऊपर उठ जाती है और रवि का सिकुड़ना हुआ लुंड पच्छ से अपनी दीदी की छूट से बहार आ जाता है और उसके साथ hi उसका विरया भी कामो की छूट से भेजने लगता है
कामो जल्द hi अपने कपडे पेहेन कर बहार आ जाती है झा उसकी सास उसे दिखाई देती है और कुछ चिंता में लग रही है
कामो- मजी माफ करना वो आज आँख लग गयी थी
गिरजा- कोई बात नहीं बहु
गिरजा ऊपर के मन से कामो से बात करती है और वो उसके चेहरे पर कुछ पढ़ने को कोशिश करती है
और उसे वही सुकून अपनी बहु के चेहरे पर दिखाई देता है जो एक औरत के चेहरे पर होता है हर रात ले बाद.....
इतने दिनों बाद अपने hi छोटे भाई से रात भर छोड़ने में बाद कम्मो का रोम रोम खुल उठा था
करीब 5 बजे उसकी आंख खुलती है
पूरा बदन टूट रहा था
कामो अंगड़ाई लेती हुई उठती है और जैसे hi उसकी नजर अपने छोटे भाई पर पड़ती है उसके रसीले होठो पर मुस्कान आ जाती है और उसकी आँखों के सामने रात वाला नजारा चलने लगता है कैसे उसके छोटे भाई में बिना रुके रात भर उसकी छूट और गांड मरी थी
कामो एक नजर रवि के खड़े लुंड पर डालती है और उसे देख कर उसके अंदर अजीब सा अहसास होता है
इस वक़्त भी रवि का लुंड अपने विकराल रूप में था
कामो - रात भर छोड़ा है फिर भी देखो तो कैसे सर उठाने पड़ा है कमीना
कम्मो एक चपत अपने छोटे भाई के लुंड पर लगती हुई अपनी छूट पर हाथ रख देती है झा से अभी तक रवि का विरया टपक रहा था
कामो- इसे तो देखो कमीनी को रात भर ठुकाई हुई है फिर भी लुंड देख कर पनिया रही है
कामो बिना देर किये अपनी दोनों टंगे फैलाती हुई अपने भाई की कमर पर कॅश जाती है और उसके लुंड को अपनी छूट पर सेट करती हुई निचे की और कमर को दबान लगती है
देखते hi देखते कामो की छूट एक बार फिर अपने भाई का लुंड निगल जाती है
कामो जोश में थी उसके अंदर मनो फिर से हवस का ज्वाला मुखी फिर चूका था
वो बिना देर किये अपनी कमर को ऊपर निचे करने लगती है
कमरे में एक बार फिर वही महक फैलने लगती है जो रात भर थी
कामो की छूट का पानी उसकी छूट को और चीखना बनता हुआ रवि की कमर पर गिर्र रहा था
रवि के लुंड की तनी हुई नशे कामो को अपनी छूट की दीवारों में साफ़ महसूस हो रही थी
कुछ hi देर में रवि की आँख भी खुल जाती है
जैसे hi उसे महसूस होता है की उसकी दीदी उसके ऊपर बैठी छुड़वा रही है
रवि भी अपनी दीदी की कमर को थमता हुआ अपनी कमर निचे से उठाने लगता है
कामो इतना जोश और मजे में थी की मेरे लिए भी बया कर पाना मुश्किल है
रवि अपनी दीदी के बालो को पकड़ते हुए उसके चेहरे को अपनी और खींचता है और उसके रसीले होठो को चूसने लगता है
रवि को अपनी दीदी का मुँह इस वक़्त रात से भी जयादा मीठा लग रहा था
दोनों भाई बेहेन धुँवाधार तरिके से चुदाई में मसल थे तभी दरवाजे पर दस्तक होती है
गिरजा- अरे बहु अभी तक्क सोई हुई है क्या
कामो रोज 4-4:30 तक उठ कर घर में कामो में लग जाया करती थी और आज कामो के कमरे का दरवाजा बंद पाकर वो अपनी बहु को आवाज लगती है
गिरजा की आवाज सुनते hi दोनों भाई बेहेन ृक्क जाते है
कामो जैसे hi उठाने वाली थी रवि उसकी कमर को थम लेता है
रवि- मत जाओ न दीदी बस होने hi वाला है
Kaamo-dekh रवि सासु माँ बुला रही है कही उन्हें शॉ हो गया तो
रवि- तो हो जाने दो शॉ दीदी वैसे भी आज नहीं तो कल तो पता चलना hi है
पर जो शुरू किया है उसे ख़तम करके जाओ
इतनी मस्त चुदाई को बिच में छोड़ कर जाने का तो कामो का भी मन नहीं था
अपने छोटे भाई की बात मान कर कामो एक बार फिरसे अपनी कमर को ऊपर निचे करने लगती है
इस बार रवि अपनी दीदी की कमर को थोड़ा उचाई पर मज़बूरी से थम लेता है और निचे से ताबड़तोड़ झटके लगाने लगता है
इधर बहार खड़ी गिरजा देवी काफी देर तक दरवाजा बजती है पर कोई जवाब नहीं आता
गिरजा- लगता है रात भर दोनों भाई बेहेन देर तक बाटे करते थे
गिरजा जाने hi वाली थी तभी उसके कानो में कुछ आवाज आती है जो कमरे के अंदर से आ रही थी
आवाज सुनते hi गिरजा देवी के पेअर मनो जम्म से जाते है
क्योंकि गिरजा जानती थी ये ठप्प ठप्प की आवाज कैसे और क्यों आती है
गिरजा का दिल जोरो से धड़कने लगता है
एक hi पल में उसके अंदर न जाने क्या क्या ख्याल आने लगते है
पर अगले hi पल उसके दिमाग में आता है की नहीं वो दोनों तो भाई बेहेन है सेज भाई बेहेन ये कैसे हो सकता है
इधर गिरजा की हालत खराब थी और उधर रवि जान बुझ कर अपनी दीदी को इस तरह छोड़ रहा था की आवाज बहार तक्क जाये
जब जब रवि की जंघे कम्मो की गद्देदार गांड से टकराती तो थप थप की आवाज गूंज जाती
कुछ hi पल में रवि कामो के अंदर hi झाड़ जाता है
और आवाज आणि बंद हो जाती है
गिरजा अब भी दरवाजे पर खड़ी पैने पैने हुई पड़ी थी पर अब आवाज आणि बंद हो चुकी थी हिज कारन उसके शकक अब उसे यकीन दिलवा रहा था की हो न हो कुछ तो गड़बड़ है
कामो- कर ली न तूने अपने मन की
रवि- दीदी शुरू भी तो आपने hi किया था न में तो सोया हुआ था
कामो- अच्छा सोया हुआ था और तेरा ये लौड़ा ये तो जगा हुआ था न
रवि- अब आपके जैसे मस्त गदराई दीदी बगल में नंगी सोई होगी तो किस लौड़े को नींद आएगी दीदी
कामो - अच्छा चल अब तो सो गया न ये
कामो अपनी कमर को उठती हुई ऊपर उठ जाती है और रवि का सिकुड़ना हुआ लुंड पच्छ से अपनी दीदी की छूट से बहार आ जाता है और उसके साथ hi उसका विरया भी कामो की छूट से भेजने लगता है
कामो जल्द hi अपने कपडे पेहेन कर बहार आ जाती है झा उसकी सास उसे दिखाई देती है और कुछ चिंता में लग रही है
कामो- मजी माफ करना वो आज आँख लग गयी थी
गिरजा- कोई बात नहीं बहु
गिरजा ऊपर के मन से कामो से बात करती है और वो उसके चेहरे पर कुछ पढ़ने को कोशिश करती है
और उसे वही सुकून अपनी बहु के चेहरे पर दिखाई देता है जो एक औरत के चेहरे पर होता है हर रात ले बाद.....