अपडेट-25
औरत- दृष्टि ये कोण ह बेटी
दृष्टि- ये मेरे दोस्त हैं, इन्होने मेरी बहुत मदद की थी, ये हमे उस जालिम से छुटकारा दिलवाने आये हैं
औरत आगे बढ़ क्र ह्रदय के हाथ पकड़ क्र बैठ गई,
औरत- सच बीटा तुम हमे उस जालिम से छुटकारा दिलवा सकते हो, लेकिन वो बहुत खतरनाक ह
ह्रदय ने औरत को उठाया,
ह्रदय- ये क्या क्र रही हो आप, मैं सब ठीक क्र दूंगा,
औरत- दृष्टि ह्रदय को अंदर लेकर चल, हम गरीबो के घर में जो रुखा सूखा ह वो खिला,
दृष्टि ह्रदय का हाथ पकड़ क्र अंदर ले गई, लेकिन ह्रदय के माथे में सलवटे पद चुकी थी, उसने पलट क्र फिर से उस औरत को देखा,
नैना और काम्य जानकारी निकलती हुई रजनी के घर तक पहुंच चुकी थी, जो एक खण्डार सा बना हुआ था, वह कोई नहीं रहता था, अब सीधे किसी से जानकरी तो नहीं निकल सकती थी, लेकिन उसमे उनकी मदद की राजेश जी ने, राजेश जी उनके साथ रजनी के गाओं पहुंचे, और पता किया तो पड़ोस के एक बुजुर्ग आदमी से पता चला की 20 साल पहले रजनी को उसके परिवार ने घर से निकल दिया था, बदचलन औरत थी वो,
परिवार की बहुत बदनामी हो रही थी जिस सदमे ने रजनी की सास गुजर गई, फिर किसी से पता चला की रजनी मर गई, दो लड़किया थी घर में दोनों जवान थी लेकिन शादी नहीं हो प् रही थी, तभी छोटी बेटी ने एक और कांड क्र दिया अपनी माँ की तरह वो भी वैसी hi निकली और किसी के साथ घर से भाग गई,
जिससे उसका बाप सदमे में चला गया, अपनी बेइज्जती सेह नहीं पाया और खुद को फांसी लगा ली, पूरा परिवार तहसनस हो गया उस औरत की वजह से, अकेली बड़ी बेटी नेहा बची, यहाँ गाओं वालो ने उसके लिए जो हो सकता था किया, वो बेचारी ऐसे दुःख में चली गई थी की कभी उभर hi नहीं पाई, उसने कभी शादी hi नहीं की, और यहाँ से चली गई,
राजेश- अगर उससे मिलना चाहे तो कैसे मिल सकते हैं,
बुजुर्ग आदमी- पड़ोस का अनिल उसके बारे में जनता ह, लेकिन किसी को बताता नहीं ह, वो नेहा की जमीन पैर खेती करता ह, और पैसे नेहा को पहुँचता ह,
राजेश- अनिल का घर कोनसा ह
आदमी- नेहा के घर के बगल वाला, अनिल की पत्नी भी उस बदचलन रजनी के साथ मिली हुई थी, उसका भी राज खुला तो घर से भाग गई,
राजेश ने नैना और काम्य को गाड़ी में hi बैठाया और खुद अनिल के पास गया, और नेहा का एड्रेस जानना चाहा लेकिन उसने बताने से मन कर दिया,
राजेश ने काफी कोशिश की लेकिन अनिल ने कुछ नहीं बताया, राजेश उदास सा बहार आ गया,
नैना- क्या हुआ दादू
राजेश- बीटा वो एड्रेस नहीं दे रहा
काम्य- अब हम क्या करेंगे किसी को ये भी नहीं पता शाक्षी किसके साथ भागी थी कहा गई, और नेहा के बारे में पता चला तो कोई एड्रेस नहीं दे रहा,
तभी अनिल घर से बहार निकला और तेज तेज कदमो से जाने लगा,
राजेश- ये कहा भगा जा रहा ह
नैना- कोण ह ये
राजेश- ये hi ह वो अनिल
काम्य- कही वो किसी से मिलने तो नहीं जा रहा
नैना- पीछा करते हैं,
काम्य ने गाड़ी उसके पीछे लगा दी, अनिल बस में बैठ गया, काम्य ने गाड़ी बस के पीछे लगा दी, अनिल शहर में उतरा और एक ऑटो पकड़ क्र एक सोसिटी के बहार पहुंच गया, गेट पैर कुछ बताया तो गार्ड ने कॉल मिलाया फिर उसे अंदर जाने की परमिशन दी,
राजेश नैना और काम्य उसे देख रहे थे,
नैना- हो न हो ये जरूर दादू के बारे में जानकारी देने आया ह,
राजेश- लेकिन पता कैसे चलेगा,
काम्य- अभी पता चलेगा रुको जरा,
काम्य गाड़ी से उत्तरी और दौड़ती हुई सोसिटी के गेट पैर पहुंची,
राजेश- ये क्या कर रही ह
नैना- दादू उसके दिमाग में जरूर कुछ प्लान होगा आप चिंता मत कीजिये, उसका दिमाग बहुत तेज ह,
काम्य गेट पैर पहुंच क्र हफ्ते हुए गार्ड से बोली,
काम्य- hello सर जी मेरे पापा यहाँ आये थे क्या,
सर जी सुनते hi गार्ड एक दम छोड़ा हो गया इतनी खूबसूरत लड़की उसे सर जी बोल रही ह,
गार्ड- पापा, कोण ह आपके पापा मैडम
काम्य- अरे उन्होंने बोलै था मैं इस सोसिटी के बहार मिलूंगा, अनिल नाम ह उनका
गार्ड ने तुरंत रजिस्टर देखा, तो लास्ट अनिल ने hi एंट्री की थी
गार्ड- है है अनिल नाम से अभी एक आदमी अंदर गया ह,
काम्य- अभी गए हैं, ोुह्ह्ह मतलब मैं जल्दी आ गई, अब इंतजार करना पड़ेगा,
गार्ड- आप उनके पास hi चली जाइये न, वो मिस नेहा के घर गए हैं, फ-707 में,
काम्य के आँखों में चमक आ गई,
काम्य- नहीं नहीं पापा ने कहा था वो गेट पैर hi मिलेंगे, तो मैं उनका इंतजार यही करुँगी, उनकी मर्जी के बिना अंदर नहीं जाउंगी, ठंकु सर जी आपने बता दिया, जब तक पापा आते हैं मैं कुछ खा क्र आती हु,
इतना बोल क्र काम्य वापस चली गई और दूर कड़ी कार में बैठ गई,
नैना- क्या पता चला
काम्य- वो नेहा से hi मिलने गया ह, नेहा यहाँ रहती ह फ्लैट फ-707 में
राजेश- शाबाश बेटी तू बहुत होशियार ह,
काम्य- माँ और बाप दोनों का खून ह मुझमे
उधर अन्य और रम्य लखनऊ में पहुंच गई कामिनी के घर के बहार जहा पेइंग गेस्ट का बोर्ड लगा था,
रम्य- ले ये तो और आसान हो गया,
अन्य ने दूर बेल्ल बजे,
तो सामने एक औरत ने दरवाजा खोला
औरत- है जी क्या चाहिए
रम्य- मैडम हमे रूम चाहिए था आपके यहाँ पेइंग गेस्ट का बोर्ड लगा था, तो बात करनी थी,
औरत- अच्छा अच्छा आओ आओ, कहा से आई हो तुम दोनों
रम्य- अमेरिका से
औरत उन्हें अंदर ले गई और रूम में बैठाया,
औरत- अमेरिका से यहाँ
अन्य- हमे कुछ डाक्यूमेंट्स बनवाने ह गोवत. से और हमारी फॅमिली उत्तरप्रदेश से hi थी और लखनऊ में hi गोवत. के काम होते हैं, लेकिन उसके लिए हमे यहाँ रुकना पड़ेगा, अब होटल्स में रुकना इतने टाइम के लिए सही नहीं लगा हमे,
इसलिए कॉलोनीज में देख रहे थे कोई घर मिल जाये, आप के यहाँ बोर्ड देखा तो आ गए,
औरत- बहुत अच्छा किया, यहाँ मैं और मेरे पति hi रहते हैं हमे भी तुम्हारे जैसे खूबसूरत बच्चियों का साथ मिल जायेगा, वैसे कितने टाइम रहना ह
रम्य- काम से काम 1 महीना तो रुकना hi ह, चार्जेज जो आप कहे हमे कोई तकलीफ नहीं ह, बस घर का खाना और शांत माहौल मिल जाये
औरत- है है बिलकुल बीटा यहाँ हम दोनों hi हैं बस,
अन्य- आपके बच्चे नहीं रहते यहाँ
औरत- नहीं हमारी एक बेटी ह जो बहार रहती ह वो टीचर ह,
अन्य- तो एग्रीमेंट बनवाया जाये किस नाम से बनेगा
औरत- वैसे मेरा नाम कामिनी ह, पैर 1 महीने के लिए एग्रीमेंट की जरुरत नहीं ह, तुम लोग मुझे ऐसे hi पैसे दे दो,
रम्य- ठीक ह आप रूम दिखा दीजिये, फिर मैं पैसे देती हु,
कामिनी दोनों को रूम में ले गई, कामिनी का दो मंजिल का माकन था जिसमे दो कमरे निचे थे और दो कमरे उप्पेर,
कामिनी- यहाँ दो रूम ह एक मेरी बीटा का और दूसरा खली ह, जिसमे तुम दोनों रह सकती हो,
अन्य और रम्य का आधा काम हो गया था बस उन्हें अब कामिनी पैर नजर रखनी थी,
वही ह्रदय को एक कमरे में बैठा क्र दृष्टि बहार चली गई,
दूसरी तरफ....
दृष्टि- आंटी आप यहाँ क्या कर रही हो, ये सब क्या ह
औरत- अरे तेरी दादी का फ़ोन आया था की एक लड़का आ रहा ह, उसके सामने मुझे तेरी माँ का रोले करना ह, बाकि फॅमिली को उसके सामने नहीं आने देना चाहती वो, इसलिए मैं आई, वर्ण तेरी ये सेक्सी आंटी इन फाटे पुराने कपड़ो में होती क्या,
ये थी जालिम दादी की सेक्सी
दृष्टि- दादी भी न, न जाने क्या क्या करती ह, मैंने उसे बताया ह की मेरी माँ नहीं ह,
सेक्सी- क्या अब क्या करू
दृष्टि- कुछ नहीं बोल दूंगी तुम मेरी मौसी हो, माँ के जाने के बाद यहाँ आती रहती हो
सेक्सी- है ये ठीक रहेगा,
सेक्सी- वैसे लड़का बहुत हॉट ह यार
दृष्टि- आंटी अपनी गन्दी नजरो को दूर रखो उससे,
सेक्सी- ओहो तेरे दिल में कुछ ह क्या
दृष्टि- फालतू की बकवास नहीं मेरे साथ, ये गन्दा खेल दादी और पापा के साथ hi खेलो, मुझसे दूर रहना,
इतना बोल क्र दृष्टि चली गई, सेक्सी ने अजीब सा मुँह बनाया
सेक्सी खुद से hi- इतना स्मार्ट ह एक बार तो इसका स्वाद चखना बनता ह, हहहहहए
ह्रदय- दृष्टि ये औरत कोण ह
दृष्टि- ये मेरी मौसी ह, कभी कभी यहाँ आती ह, जब मैं बहार होती हु तो दादी की हेल्प के लिए आ जाती हैं,
ह्रदय- ok, लेकिन बाकि परिवार कहा ह,
दृष्टि- वो लोग बहार गए हुए हैं, तुम क्या कहोगे
ह्रदय- मैं कुछ नहीं खता, कभी किसी के हाथ का खाना नहीं खता,
दृष्टि- अरे तो क्या भूके रहोगे
ह्रदय- नहीं दही और फरिट्स खा लूंगा, लेकिन मुझे उन लोगो से मिलना ह जिन्होंने तुम्हारे परिवार को डराया हुआ ह,
दृष्टि- लम्बा सफर करके आये हो थोड़ा आराम कर लो, तब तक मैं तुम्हारे लिए खाने के लिए लती हु, और है आज तुम मेरे हाथ का खाना खाओगे समझे,
दृष्टि ने बहार आकर दादी को कॉल किया, दादी ने उसे आगे की प्लानिंग समझा दी,
इधर ह्रदय ने अंजलि को यहाँ के हालत बता दिए और ाव्य को यहाँ आने से मन किया, ये गाओं का इलाका था, यहाँ ाव्य को खतरा हो सकता था,
दृष्टि ह्रदय के लिए खाने को ले आई, ह्रदय को पता था अगर अपनी मंजिल को पाना ह तो अपना ये नियम तोडना hi पड़ेगा, इसलिए उसने चुपचाप खा लिया, खाना उसे बहुत अच्छा लगा, जैसे उसी के घर का खाना हो,
दृष्टि- शाम हो चुकी ह, कल सुबह मैं गाओं घुमाऊँगी, तुम चाहो तो बहार खुली जगह पैर लेट सकते हो या यहाँ पैर भी सो सकते हो,
ह्रदय- जहा तुम्हे ठीक लगे,
रात में ह्रदय लेता हुआ था, दृष्टि दूसरे कमरे में लेती थी, ह्रदय की आँखों में नींद नहीं थी, रात में उसे प्यास लगी तो वो उठा कर बहार आ गया, और घर बहार लगे नल से पानी पिने लगा, फिर थोड़ा टहलने लगा, गाओं एक दम सुमसान था, वो जैसे hi घर के अंदर घुसने को हुआ तो सामने का नजारा देख क्र वही रुक गया,
एक औरत बिलकुल नंगे बदन उसके सामने से चली आ रही थी, उसे देख क्र ह्रदय तुरंत पीछे हो गया, औरत हाथ में बाल्टी लिए बिलकुल नंगी होकर बहार को चली आ रही थी, उसे देख ह्रदय सुरप्रीसेड था,
ये दृष्टि की मौसी थी, एक दम गठीला बदन, एक एक अंग बिलकुल शेप में ढला हुआ था, चूचिया एक दम कड़क थी, गांड की चौड़ाई किसी भी लड़की से ज्यादा फैली हुई थी,
ह्रदय शॉकेड था उसे इस रूप में देख क्र, मौसी घर के बहार आई और नल पैर बाल्टी रख क्र उसे भरने लगी, ह्रदय को झटके पैर झटके लगे जार हे थे, इस औरत को जरा भी दर शर्म नहीं थी, रात में गाओं में खुली सड़क पैर नल पैर नंगी होकर पानी भर रही थी, पानी भर जाने पैर वो वही बैठ क्र उसमे नहाने लगी,
ह्रदय अपनी जगह से हिल नहीं सकता था, उसे दर था कही आवाज होने से मौसी का पता न चल जाये, वो चुप चाप खड़ा रहा, लेकिन तभी मौसी ने एक धमाका कर दिया,
वो कड़ी हुई और अपना एक पेअर उठा क्र नल पैर रखा और पानी से अपनी छूट को धोने लगी, चाँद की रौशनी थी जिसमे बहुत ज्यादा साफ़ तो नहीं दिख रहा था, लेकिन फिर भी बहुत कुछ क्लियर दिख रहा था, इस रूप को देख क्र ह्रदय के लुंड ने भी एक बार झटका मारा,
मौसी फिर से बैठ गई, मौसी का फेस दूसरी तरफ था तो ह्रदय ने तुरंत वह से निकलना सही समझा, और वो धीरे से निकल क्र अंदर आ गया, उसके अंदर जाते hi मौसी ने पलट क्र देखा और मुस्कुरा दी,
उसके फेस पैर एक खतरनाक मुस्कान थी,
वही दूसरी तरफ नैना और काम्य नेहा की सोसिटी के बहार पूरा दिन नजर रखे हुए थी, नेहा सोसिटी से बहार निकलती तो उसका पीछा करती, उसकी हर गतिविधि पैर नजर रखे हुए थी,
नेहा किस्से मिलती ह कोण नेहा से मिलने आता ह, इधर राजेश सोसिटी में किसी जानकर को ढूढ़ने में लगे थे जिससे अंदर जाने का तरीका मिल जाये,
और सफलता मिली तो अंजलि के तरीके से, अंजलि ने एक फ्लैट खरीद लिया राजेश जी के नाम से नेहा की hi बिल्डिंग में,
काम्य- ये अंजलि माँ का दिमाग कुछ ज्यादा hi तेज चलता ह,
राजेश- बेटी उसने अपने दिमाग के बल पैर hi आज तक दुश्मनो को हराया ह, बस एक बार वो मात खाई ह जिसकी सजा आज तक अपने बेटे और बेटी को खो क्र भुगत रही ह, उसके अलावा अंजलि को मात देना नामुमकिन ह,
नैना- वो तो दिख hi रहा ह, लेकिन अब हम वह तक कैसे पहुंचेंगे,
राजेश- उसका इंतजाम क्र दिया ह, दीपा आ रही ह, दीपा और नेहा दोस्त थे, अगर नेहा कुछ भी गलत क्र रही ह तो दीपा उसे परख सकती ह, दीपा hi थी जिसने रजनी का राज खुलवाया था,
काम्य- ये जल्दबाजी न हो जाये,
राजेश- अब इंतजार का वक़्त नहीं ह, अब तक बहुत इंतजार क्र लिया, अगर अंजलि ये सब कर रही ह मतलब अब hi सही समय ह,
रात में दीपा राजेश नैना और काम्य के पास पहुंच गई,
इधर अन्य और रम्य कामिनी के साथ दोस्ती बढ़ने में लगी हुई थी, और कामिनी का पति जो हमेशा एक कमरे में hi बैठे रहते, किसी से बात नहीं करते, कामिनी उससे किसी को मिलने भी नहीं देती थी,
अन्य- कामिनी आंटी आपसे एक बात पुछु
कामिनी- है पूछो
अन्य- ये अंकल हमेशा अंडर hi क्यों रहते हैं,
कामिनी- उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं ह, किसी से कुछ भी बोल देते हैं इसलिए उन्हें बहार नहीं जाने देती वर्ण झगड़ा करवा देंगे,
रम्य को कामिनी की बात हजम नहीं हुई, उसने अन्य को इशारा किया की इस बारे में जानकरी निकालनी पड़ेगी,
दोनों ने प्लान बनाया और अगले दिन अन्य कामिनी के पास पहुंची
अन्य- आंटी मुझे आपकी हेल्प चाहिए, मुझे डीएम ऑफिस जाना ह, वह कुछ पैसे देने हैं एक ब्रोकर लेकर जा रहा ह वो मुझे 10000 डॉलर मांग रहा ह, अगर आप चले तो शायद काम में काम हो जाये,
आप चाहे तो मैं आपको पैसे दे दूंगी,
10000 डॉलर का नाम सुनते hi कामिनी के अंदर लालच भर आया, उसने तुरंत अपने दिमाग की लोमड़ी दोड़नी शुरू की और किसी को फ़ोन किया,
कामिनी- है बेटी काम हो जायेगा, मैं ीक से बात की ह वो 9000 डॉलर में काम क्र देगा लेकिन पैसे मेरे हाथ से लेगा, किसी और पैर उसे विश्वास नहीं ह,
अन्य- ठीक ह आंटी मुझे कोई ऐतराज नहीं ह,
कामिनी- तुम दो मिनट्स रुको मैं तैयार होकर आती हु,
कामिनी जल्दी से तैयार होकर आ गई,
अन्य- मैं और आप hi चलते हैं कही ज्यादा लोग देख क्र वो नाराज हो जाये
कामिनी- है है ये सही ह,
अन्य कामिनी को लेकर निकल गई, घर में रह गई रम्य और कामिनी का पति,
वही दूसरी तरफ दीपा नैना और काम्य को लेकर चल दी नेहा के घर,
ह्रदय दृष्टि के साथ गाओं में घूमने चल दिया था, उसे इस गाओं की पूरी डिटेल निकालनी थी,
और दिया और शनाया को मैनेजर की जानकारी मिल गई थी जो एक हॉस्पिटल में एडमिट था, मरने की हालत में जिसके बच्चे भी उसका साथ छोड़ क्र जा चुके थे, सरकारी हॉस्पिटल में लावारिसों की तरह पड़ा हुआ था, कभी भी उप्पेर वाले का बुलावा आ सकता था,
इधर वन्य निधि के दिल का हाल जानने में लगी हुई थी, ाव्य को गाओं नहीं जाने दिया गया तो वो रैना और आशना के साथ उन पुलिस वालो की खोज में थी जो सुरेश चोपड़ा के एनकाउंटर में शामिल थे, उन्हें बहुत से राज पता चल रहे थे,
साडी घटनाये एक साथ हो रही थी, तो सबसे पहले चलते ह दीपा के पास जो नेहा क्र घर के सामने कड़ी थी,
नेहा ने दरवाजा खोला और सामने दो खूबसूरत लड़कियों को देख क्र चौंक गई,
नेहा- किस्से मिलना ह बीटा
तभी पीछे से दीपा निकल क्र आई
दीपा- मेरी दोस्त से
नेहा की नजर जैसे hi दीपा से मिली तो उसने एक पल उसे गौर से देखा और गले hi पल आँखों में आंसू चालक आये, दीपा की आँखे भी नाम थी,
नेहा बस कड़ी दीपा को देखती रही,
दीपा- अंदर नहीं बुलाओगी
नेहा जैसे होश में आई और अंदर आने का रास्ता दे दिया,
दीपा नैना और काम्य अंदर आ गए, नेहा ने एक बार बहार झाका और गेट फिर से बंद क्र लिया,
नेहा- तुम्हे मेरा एड्रेस कैसे मिला, क्यों ढूंढ रहे हो मुझे, राजेश अंकल क्यों पूछने गए थे गाओं में
दीपा- शांत हो जा आराम से बात कर्नेगे,
नेहा- बात करने के लिए ह की क्या, किस बारे में बात करू अपनी बर्बादी के बारे में, जो तुम्हारी वजह से हुई
काम्य- इनकी वजह से या आपकी माँ
दीपा- शांत बेटी ये हम दो दोस्तों की बात ह, तुम बिच में मत आओ,
बोल नेहा जो तुझे बोलना ह,
नेहा- क्या बोलना ह अगर तुम मेरी दोस्त बन क्र नहीं आती तो ये सब न होता, तुमने तुषा रको मेरी माँ के पास भेजा, अगर तुम नहीं भेजती तो ये सब न होता,
मेरा परिवार बर्बाद न होता, मेरे पिता जिन्दा होते,
दीपा- अगर मैं तुम्हारी दोस्त न बनती तुषार को न भेजती उससे तुम्हारी माँ का चरित्र साफ़ रहता,
नेहा- जैसा भी रहता हमे तो पता न चलता
दीपा- और इसकी क्या गारंटी ह की भविष्य में वो वैसा न करती जो मेरे साथ किया, उस औरत को कोई और मिल जाता तो उसके लिए तुम सब को छोड़ क्र न भाग जाती,
वो मेरी भी माँ थी क्या उसने मेरे साथ बेटी जैसा व्यव्हार किया, हमेषा मोहरा बना क्र रखा,
उसे पता था तुषार और शाक्षी का आपस में रिश्ता बन रहा ह फिर भी उसने तुषार के साथ सम्बन्ध बनाने की पहल की,
नेहा की आँखों से आंसू भेने लगे, वो फुट फुट क्र रोने लगी,
नेहा ने दीपा को गले से लगा लिया,
नेहा- उस औरत ने सब बर्बाद क्र दिया, पूरा परिवार समाज में इज्जत सब ख़तम क्र दिया, उसकी वजह से मैं पिछले 20 साल से अकेली तनहा जी रही हु, कोई अपना नहीं ह,
दीपा- उसकी वजह से तुम hi अकेली नहीं रही ह मेरी बहन वो जाते जाते भी हम दोनों के परिवारों को तबाह क्र गई,
नेहा- तुम क्यों आई हो यहाँ क्या चाहिए,
दीपा- तुम्हे इस अकेले पैन से बहार निकलने आई हु, तुम अकेली नहीं हो हमारे पिता अलग सही लेकिन उस बदचलन औरत की वजह से बहन का रिश्ता तो बनता hi ह, उस बहन के रिश्ते से आई हु,
नेहा- मेरी खुद की सगी बहन मुझे मेरे परिवार को बर्बाद करके भाग गई, अब मैं किस पैर विश्वास करू
दीपा- क्या हुआ उसे कहा गई वो
नेहा- मुझे नहीं पता मैं कुछ नहीं जानती
दीपा- नेहा अगर तुम चाहती हो तुम समाज में सम्मान से सबके सामने सर उठा क्र जी सको तो तुम्हे मुझे सब कुछ बताना होगा,
नेहा ने आंसुओ में भीगी आँखों से दीपा को देखा,
नैना और काम्य दोनों शांत बैठ देख रही थी,
नेहा- वो बदल गई थी, माँ के मरने की खबर सुनकर वो बदल गई थी, वो एक दम खामोश हो गई थी,
दीपा- शुरू से बताओ
नेहा- मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हु
तभी नैना हाथ में पानी का गिलास लिए कड़ी थी,
नैना- मौसी आप पानी पीजिये,
नेहा ने नैना को देखा- मौसी
दीपा- तुम रिश्ते छोड़ सकती हो लेकिन रिश्ते तुम्हे नहीं छोड़ेंगे, ये मेरी बहन की बेटी ह, तो मेरी तरह तुम भी इनकी मौसी लगी न,
नैना- मौसी आप बैठिये मैं चाय बना क्र लती हु
नेहा- लेकिन सामान
नैना- सामान किचन में hi होगा न मैं ढूंढ लुंगी,
दीपा- तुम बैठो और मुझे सब बताओ,
दूसरी तरफ दिया और शनाया हॉस्पिटल में उस मैनेजर के सामने कड़ी थी जो अपनी आख़री सांसे गईं रहा था,
दिया- hello मर. राहुल
राहुल ने आँखे खोल क्र देखा तो सामने दो बहुत hi खूसूरत लड़किया कड़ी थी,
उसने आस पास देखा उसे लगा किसी और को पुकार रही हैं,
दिया- मैं आपसे hi बात करने आई हु राहुल जी
राहुल- मुझसे? क्या मैं तुम दोनों को जनता हु, मुझे कुछ याद नहीं ह
राहुल ने बड़ी मुश्किल से ये शब्द बोले
दिया- तुम हमे नहीं जानते लेकिन हमारी फॅमिली को जरूर जानते हो.
शनाया- मैं अंजलि की बेटी सीमा की बेटी हु, सीमा को तो अच्छे से जानते होंगे तुम, सुरेश चोपड़ा के पालतू डॉग थे न तुम
अंजलि और सीमा का नाम सुनते hi राहुल की साँस फूलने लगी,
दिया- शांत हो जाओ राहुल हम यहाँ तुमसे बदला लेने नहीं आये हैं बस कुछ जानकारी लेने आये हैं,
राहुल- मैंने कुछ नहीं किया, मैं उन लोगो से तभी दूर हो गया था, मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं ह अब
दिया- हमने कब कहा तुमने कुछ किया ह, तुम इतना क्यों दर रहे हो,
राहुल- अंजलि मम से बोलना मुझे माफ़ क्र दे, मेरी गलती नहीं थी, मैं बहक गया था, जिसकी सजा मैं आज तक भुगत रहा हु, उसने जबरदस्ती मुझसे करवाया,
शनाया- क्या करवाया किसने करवाया, तुम किस्से दर रहे हो,
राहुल- तुम लोगो ने मुझे ढूंढा कैसे, अगर तुमने ढूंढ लिया ह तो वो भी ढूंढ लेगी, वो मुझे मर देगी, मेरे परिवार को मर देगी, उससे बचने के लिए मैं अपने परिवार से दूर हो गया, सबसे दूर हो गया, यहाँ लावरिशो की तरह पड़ा हु, वो मर देगी,
दिया- कोण मर देगी, क्या किया ह तुमने
राहुल- उसने उन सबको मर दिया जिन्होंने उसका साथ दिया था, मुझे नहीं पता था वो तुषार को
राहुल इतना hi बोल पाया था की उसके जबान बंद हो गई उसकी धड़कन रुक गई,
दिया- राहुल राहुल उठो क्या किया तुषार को कोण थी वो किसने किया,
शनाया दौड़ क्र डॉक्टर को बुला क्र ले, डॉक्टर ने चेक किया और बोलै, इनका हार्ट फ़ैल हो गया ह, इन्हे पहले होइ 3 अटैक आ चुके थे, इनकी हालत कोई भी प्रेशर झेलने की नहीं थी, शायद किसी बात से ज्यादा प्रेशर पद गया,
डॉक्टर ने लोगो को बुलाया- इन्हे उठाओ को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो,
दिया- इनकी बॉडी का क्या होगा
डॉक्टर- लावारिश ह तो सरकारी खर्चे पैर इनका इलाज हो रहा था तो अंतिम संस्कार भी सरकारी खर्चे पैर होगा,
शनाया और दिया के चेहरे पैर बहुत दुःख और गुस्सा था, इस गिरे हुए इंसान के मरने का दुःख हो रहा था उन्हें,
दिया- इसके पास जानकरी थी शनाया, ये हमारे हाथ से निकल गया,
शनाया- ये तो सब बर्बाद हो गया, ये किसकी बात कर रहा था, क्या हुआ था पापा को,
दिया- ये बार बार मर देगी बोल रहा था मतलब कोई औरत थी, ये किसी औरत से इतना डरेगा,
शनाया- अंजलि माँ को बताना चाहिए
दिया ने अंजलि को फ़ोन मिला क्र सब बताया,
अंजलि- मुझसे गलती हो गई मैंने उसे बेकार समझ क्र छोड़ दिया था, मुझे लगा उसके पास जानकरी नहीं होगी, वो बुरी हालत में अपने दिन गुजर रहा था, ये मुझसे गलती हो गई,
खैर जो हो गया सो हो गया लेकिन तुम दोनों ने अच्छा काम किया ह, एक जानकरी तो निकल ली की ये किसी औरत का काम ह,
तुम अब वापस आ जाओ आगे की जानकरी मैं निकलती हु,
इधर ह्रदय दृष्टि के साथ घर से निकला तो सामने उसकी मौसी आ गई, जिसे देख क्र ह्रदय को रात का सीन याद आ गया, ह्रदय ने मौसी की आँखों में झाकने की कोशिश की लेकिन वह सब नार्मल था,
मौसी- कहा जा रहे हो तुम लोग
दृष्टि- मौसी मैं ह्रदय को गाओं घूमने जा रही हु, और सब दुश्मन देख ले अब हमारे साथ हमारा रक्षक ह, हमे किसी का दर नहीं ह,
मौसी ने ह्रदय के सर पैर हाथ घुमाया और फिर ह्रदय को अपने छाती से लगा लिया, और उसपर प्यार दिखने के बहाने अपनी कड़क चूचिया ह्रदय की छाती में रागादि, ह्रदय को मौसी की ठोस चूचियों का अहसास हो रहा था,
दृष्टि गुस्से में लाल हो गई और बोली
दृष्टि- ह्रदय चले देर हो रही ह,
ह्रदय एक दम अलग हुआ है है चलो
दृष्टि गुस्से में मौसी को देखती हुई चली गई, और मौसी ने गन्दी सी स्माइल दी दृष्टि को,