Incest Story EK MAA PART-2 - Page 4 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Story EK MAA PART-2

बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी का,

ये स्टोरी कुछ खास पसंद नहीं आ रही ह मैं ये महसूस कर रही हु, दो स्टोरीज की तुलना नहीं की जा सकती, और ह्रदय को तुषार के जैसा नहीं बनाया जा सकता, अगर कहानी के लीड हीरो में कोई अंतर hi न हो तो कहानी कैसी, हर बार हीरो बस वही शामे काम करता हुआ नजर आये, हीरो को हीरो कैसे बनाया जाता ह मैं ये दिखने की कोशिश कर रही हु, एक 18-19 साल के लड़के में कितनी अकाल होती ह ये आप सब जानते हैं, वो दुनिया को किस नजर से देखता ह, मैं बस उसी आगे के लड़के को हीरो में बदलने की कोशिश कर रही हु,
 
अपडेट-22






ह्रदय ने नैना को कॉल किया, दिया ने सबके नंबर लेकर ह्रदय को भेज दिए थे,

नैना- hello

ह्रदय- नैना मैं ह्रदय बात कर रहा हु

ह्रदय की आवाज सुनकर नैना की धड़कन बढ़ गई,

ह्रदय- hello तुम सुन रही हो न

नैना- है है मैं सुन रही हु

ह्रदय- मुझे तुमसे मिलना ह

नैना- क्यों मेरा मतलब क्या हुआ कोई बात ह

ह्रदय- मुझे लगा हमे बात करनी चाहिए,

नैना- ok कहा आना ह

ह्रदय ने उसे जगह बता दी,

नैना के फेस पैर मिली जुली प्रतिक्रियाएं थी, कन्फूसिओं ख़ुशी टेंशन वो काफी देर पहने पकडे कड़ी रही,

नंदनी- नैना क्या हुआ कहा खोई हुई ह

नैना- वो मुझे बुला रहा ह

नैना एक दम बोल गई

नंदनी- क्या कोण बुला रहा ह

नैना- क्या कुछ नहीं मैंने क्या कहा

नंदनी- कोई बुला रहा ह कोण बुला रहा ह

नैना- कोई नहीं, आप भी माँ क्या क्या सुनती हो,

नंदनी- काम्य से तेरी बात हुई

नैना – नहीं माँ समझ नहीं आ रहा कैसे बात करू,

नंदनी- कुछ तो करना होगा, पता नहीं कैसे समझौ उसे, हमारे अलावा कोई उसे समझा भी नहीं सकता,

नैना के दिमाग में कुछ आईडिया आया,

नैना- माँ मैं कुछ तरय करती हु शायद बात बन जाये,

नैना तुरंत रूम में चली गई,

नैना- काम्य उठ हमे कही जाना ह

काम्य- मुझे नहीं जाना

नैना- उठ तो, मेरी बहन ह न तू प्यारी सी मेरे लिए प्लस

काम्य ने नैना को देखा, दोनों बहन कभी एक दूसरे की बात नहीं टालती थी,

दोनों तैयार होकर निकल गई,

ह्रदय पार्क में बैठा था, नैना काम्य को लेकर वही पहुंच गई थी,

ह्रदय को वह देख क्र काम्य चौंक गई,

काम्य- हम यहाँ क्यों आये हैं, और ये यहाँ कैसे, क्या चल रहा ह तुम दोनों के बिच

नैना- तेरी जानकरी के बिना मेरा कुछ नहीं चल सकता समझी, चुप चाप आ जा,

काम्य को देख क्र ह्रदय भी सरप्राइज हुआ,

नैना- यहाँ इस जगह क्यों बुलाया, हम कही और भी मिल सकते थे न,

ह्रदय- कुछ चीजे छुपाई जा रही हैं ताकि किसी को खतरा न हो,

नैना- क्या बात करनी थी आपको

ह्रदय- मैं यहाँ तुम्हे किसी रिश्तो का बंधन देने नहीं आया हु बस चाहता हु की हम सब एक रहे,

हम सबने अपनों को खोया ह और हमारे अपने लापता हैं, तो हमारी जिम्मेदारी ह उन्हें ढूंढ़ना, तो मैं चाहता हु तुम लोग मेरा साथ दो,

कमाया- मेरा कोई अपना नहीं बचा, मेरी माँ जो माँ खेलने के लायक नहीं थी, और पिता,

ह्रदय- कमाया जीवन में कभी माँ को गली मत देना, तुम्हारे पैदा होने से पहले उन्होंने क्या किया ये अलग चीज ह जवानी में बहुत लोग गलतिया करते हैं, अच्छा बुरा बहुत कुछ होता ह लेकिन तुम्हारे पैदा होने के बाद वो क्या थी ये मायने रखता ह, तुम्हारे भले के लिए उन्होंने खुद का पूरा जीवन की गुमनाम जगह बीता दिया, ताकि तुम पैर उनकी बुराई का साया न पद सके,

इससे ज्यादा और क्या करवाना चाहती हो उनसे,

अब तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं ह क्या उन्हें ढूंढ़ना उनके हिस्से की ख़ुशी उन्हें देना, जब उन्हें ज्ञान नहीं था तो उन्होंने खुशियों की जगह केवल बुराई मिली, और जब उन्हें ज्ञान हुआ तो साडी खुशिया hi चीन गई, अब उनके हिस्से की ख़ुशी उन्हें मिलनी चाहिए,

काम्य बस ह्रदय को देखे जा रही थी, इतनी घेरि बात क्र गया था वो,

काम्य- हमारे परिवार में जो रिश्ते बने तुम्हे उनसे कोई ऐतराज नहीं ह

ह्रदय- मैं उस बारे में नहीं सोच रहा, उससे बड़ी बात ह की वो इंसान जो अच्छे की एक मिस्साल थी वो लापता हैं हमारे पिता लापता ह, पहेली जिम्मेदारी उन्हें ढूंढ़ना ह,

नैना- ह्रदय सही बोल रहे हैं काम्य, हमे पहले उन सबको खोजना होगा, उसके बाद ये सब देखा जायेगा,

काम्य ने घेरि साँस भरी- लेकिन सब मुझे निचे नजरो से देखेंगे,

ह्रदय- ये तुम्हारी गलफहमी ह, एक बार बाकि सब के बारे में सोचो,

क्या सीमा जी ने रिश्ता बनाया वो गलत नहीं था अपने hi भाई के साथ जबरदस्ती जैसी की हवस में अंधी हो गई थी, दीपा माँ वो भी सेक्स की खुमारी में अपने भाई के साथ hi रिश्ता बना गई, वो बात अलग ह की वो दोनों भाई बहन नहीं थे, लेकिन उन्हें तो नहीं पता था, और सबसे खास मेरी माँ अंजलि उन्हें क्या जरुरत थी रिश्ता बनाने की, उनकी सेक्स की जरुरत के अलावा तो कोई मज़बूरी नहीं थी, फिर भी हम उन्हें गलत नहीं बता रहे,

रिंकी और अनीता जी वो दोनों केवल अपने मजे और सुख के लिए पापा के पास आई थी, वर्षा जी उन्हें तो सब पता था फिर भी वो पापा से रिश्ता जोड़ बैठी, रूचि वो बहन होते हुए इतना घेरा प्यार कर बैठी, तुम्हारी माँ तो सेक्स अद्दिकित थी उनसे ये सब हो गया तो गलत क्या ह, बस नैना की माँ का रिश्ता मज़बूरी में बना, और अलका जी वो असल में सबसे सही थी, उन्हें कुछ नहीं पता था, वो असल प्यार कर बैठी थी,

लेकिन उन्हें वो प्यार ठीक से हासिल भी नहीं हुआ,

तो यहाँ सब ऐसे hi जन्मे हैं, किसी के रिश्ते सही नहीं थे, और उन रिश्ते बनाना वालो की कही न कही गलती रही ह,

ह्रदय की बात सुनकर काम्य और नैना दोनों सोच में दुब गई,

नैना- कमाया ह्रदय सही बोल रहे हैं, हमारे पैदा होने में सबने नियम तोड़े हैं, इसलिए खुद को गुन्हेगार मत समझो,

काम्य- तुम सच में बहुत दिमाग रखते हो, कमल का सेन्स ह तुम्हारा, बताओ हमे क्या करना ह हम तैयार हैं

नैना- ये हुई न बात

ह्रदय- हम टीम बना रहे हैं, हमे 4 जगह अलग अलग टारगेट करना ह तो उसके लिए सबको अलग अलग होना होगा,

नैना- कब

ह्रदय- अभी तक टीम में मैं दिया वन्य शनाया और बी तुम दोनों हो, बाकि सबको भी एक साथ लाना होगा,

काम्य- ठीक ह हम तुम्हारा साथ देंगे, हर कदम पैर देंगे,

ह्रदय- ठंकु

नैना- ठंकु बोल क्र पराया मत करो

ह्रदय- ok ok अब चले क्या,

नैना का मन तो नहीं था लेकिन जाना तो था hi,

तीनो वह से निकले और जैसे hi वो आगे बढे तो उन्हें टाइगर के दहाड़ने की आवाज आई, तीनो एक दम चौंक गए इस शहर में टाइगर कहा से आ गया, तीनो सतर्क हो गए और पलट क्र देखने लगे तभी उनके पास का बड़ा पेड उन पर गिर पड़ा,

टाइगर को देखने के चक्कर में तीनो सतर्क थे, तो पेड को गिरता देख लिया तो ह्रदय उन्हें लेकर कूद पड़ा,

और तीनो बच गए, वो हैरत से देखने लगे,

बड़ी विचित्र घटना थी ये, तीनो उठे और पेड को देखने लगी, तभी वह भीड़ आने लगी तो उन्होंने वह से निकलना hi सही समझा,

ह्रदय ने दिया को बता दिया की नैना और काम्य रेडी हैं,

शनाया और दिया ने आशना और रैना से बात करके उन्हें भी तैयार क्र लिया था,

ह्रदय पंहुचा तम्मना के पास,

तम्मना ह्रदय से लिपट गई और अपने हॉट उसके होतो से जोड़ दिए,

ह्रदय ने भी उसका साथ दिया,

तम्मना- चलो कही चलते हैं न,

ह्रदय- आप के अंदर सेक्स की खुमारी कुछ यदा hi नहीं बढ़ती जा रही ह,

तम्मना- जब से जवानी में कदम रखा ह खुद को कण्ट्रोल hi करती आई हु, अब जाकर आजादी मिली ह, तो खुल क्र जीना छाती हु, ऐसा लगता ह बस दिन रात तुम्हारे साथ सेक्स करती रहु,

ह्रदय- इतनी बेताबी, इतना पागलपन किसलिए,

तम्मना- मेरी छोड़ो तुम बताओ शनाया का कुछ किया या नहीं,

ह्रदय- उसमे बड़ा इंट्रेस्ट ह आपको,

तम्मना- नहीं मुझे बस ुचि चुदाई देखनी ह, मैंने कहा था न मुझे देखने में मजा आता ह,

ह्रदय- किसी और की दिखवा दू

तम्मना- नहीं मुझे शनाया की देखनी ह, या उन बहेनो में से किसी की भी,

ह्रदय- शनाया की hi क्यों, उनमे ऐसा क्या ह

तम्मना- नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi

ह्रदय- कुछ तो बात ह जो आप छुपा रही हैं,

तम्मना- बस मुझे उनके घमंड को तुम्हारे लुंड के सामने चीखते हुए देखना ह,

ह्रदय- अगर मैं कहु की शनाया के साथ तो हो गया

तम्मना- क्या सच में,

तम्मना के फेस पैर अलग hi ख़ुशी थी जो उसके छुपाये भी नहीं चुप रही थी,

ह्रदय- श्री वो सब इतनी जल्दी हुआ की मैं कुछ बता नहीं पाया

तम्मना- कोई बात नहीं दूसरी की दिखा देना

ह्रदय- दूसरी की मतलब

तम्मना- दिया आशना या रैना में से किसी की भी दिखा देना

ह्रदय- अब शनाया से प्यार का रिश्ता बना ह तो उनके साथ क्यों होगा ये सब

तम्मना- तुम पागल हो क्या प्यार का रिश्ता क्यों बनाना उनके साथ, मजे लो जिंदगी मजे लेने के लिए, वो चारो खुद तुम्हे पसंद करती हैं तो उनके मजे लो न,

ह्रदय- ये क्या सीखा रही हैं आप मुझे

तम्मना- इसमें गलत क्या ह मैं भी तो तुमसे चूड़ी, कल्पना भी तैयार थी, मैंने तुम्हे कहा क्या प्यार वयर के लिए, ये सब प्यार वयर झूट ह, लड़कियों को बस मजे चाहिए तुम उन्हें मजे दो वो तुम्हारे साथ रहेंगी,

ह्रदय- लेकिन ये गलत होगा शनाया के साथ धोका होगा

तम्मना- अगर तुम उनके पास जाओगे तो धोका होगा वो खुद आये तो कोई धोका नहीं होगा,

ह्रदय ने सोचने की एक्टिंग की,

तम्मना- ज्यादा मत सोचो तुमने शनाया का घमंड अपने निचे रूंध दिया वही काफी ह मेरे लिए, आओ इसी ख़ुशी में तुम्हे जानत दिखती हु, चले कही पार्टी करने ,

ह्रदय- फिर कभी अभी मुझे काम से जाना ह कल मिलता हु,

तम्मना ने बिना किसी ऐतराज के ok बोल दिया,

ह्रदय वह से निकल गया,

ह्रदय के जाते hi तम्मना ने अपनी माँ को कॉल लगाया,

तम्मना- माँ उसने शनाया का शिकार क्र लिया ह, मैंने उससे उसी की बहन को छुड़वा दिया ह,

तम्मना की माँ- शाबाश बेटी शाबाश तूने अपना काम कर दिया ह, दीपा और सीमा एक दूसरे की बहन ह तो उनके बच्चे भाई बहन हुए न,

तम्मना- और क्या करना ह माँ

टी माँ- कुछ नहीं बस कोशिश क्र वो एक या दो को और छोड़ दे, फिर मैं करुँगी,

इधर ह्रदय ने निकलते hi, सचिन को कॉल मिलाया,

सचिन- ह्रदय बच्चे क्या बात ह

ह्रदय- अंकल आपकी कंपनी में जिस आदमी को जॉब के लिए मैंने कहा था, वो कैसा काम कर रहा ह

सचिन- बीटा ये कैसी बात की तूने आपकी कंपनी, ये तेरी कंपनी ह,

ह्रदय- अंकल अभी मैं बहार का आदमी हु तो उसी हिसाब से बात करूँगा,

सचिन- वो ठीक काम कर रहा ह, पढ़ा लिखा ह तो मैंने उसे अपने ऑफिस में hi लगा दिया,

ह्रदय- उसने बोलै ऑफिस में लगने के लिए या आपने,

सचिन- मैंने उससे पूछा था वो क्या काम कर सकता ह तो उसने ऑफिस का वर्क करने के लिए बोलै,

क्या बात ह सब ठीक ह न

ह्रदय- वो जासूस भी हो सकता ह, तो थोड़ा नजर रखना उस पैर, और उसके बारे में छोटी से छोटी डिटेल्स निकलवाइये, घर परिवार सबकुछ

सचिन- ठीक ह बीटा मैं करता हु,

इधर दिया रश्मि के पास बैठी थी,

दिया- ममी अब ममी कहु या चची समझ नहीं आ रहा,

रश्मि- कुछ भी बोल ले बीटा जवाब तो मेरा hi होगा,

रश्मि की ये बात दिया के दिल को छू गई, वो रश्मि को देखती रह गई,

तभी वह दीपा और अंजलि भी वही आ गए थे,

रश्मि- क्या देख रही ह मैंने कुछ गलत कहा क्या,

दिया- नहीं आपकी एक बात ने पूरा दिमाग क्लियर क्र दिया, ऐसा लगा जैसे मुझे मेरे सरे सवालो का जवाब मिल गया हो,

दीपा- कोनसे सवाल

दिया- इन रिश्तो को लेकर जितना भी कन्फूसिओं था सब क्लियर हो गया

अंजलि- ऐसा क्या बोल दिया, जो तू एक hi शब्द में समझ गई

दिया- रिश्ता कोई भी उसका कुछ भी नाम हो, हम किसी को किसी भी नाम या रिश्ते से पुकार ले लेकिन उधर से जवाब देने वाला इंसान होता ह, जिसे हम प्यार करते हैं, क्या फरक पड़ता ह किसी बच्चे को छोटू कहो बाबू बोलेगा तो वो बच्चा hi,

ऐसे hi इस घर के रिश्ते हैं, क्या फरक पड़ता ह कोण माँ ह कोण मौसी या बुआ, सब अपने hi तो हैं

अंजलि- शाबाश बेटी शाबाश, तुझे देख क्र अब मेरी चिंता ख़तम हो गई, जब तेरे जैसी बेटी इस घर में ह तो ये परिवार कभी नहीं बिखर सकता,

रश्मि- तू कुछ पूछने आई थी,

दिया- श्री भूल गई, मैं आपकी माँ याने कामिनी जी के बारे जानकारी लेने आई थी,

कामिनी का नाम सुनकर सब चौंक गए,

रश्मि- उनके बारे में क्यों,

दिया- ह्रदय की शक की सुई वह अटकी हुई ह, उसे कुछ खटक रहा ह,

अंजलि- कामिनी तो सब समझ क्र गई थी, लेकिन दुबारा कभी वापस नहीं आई, न कभी अपनी बेटियों से मिलने न hi अपने भाई से मिलने, मैंने भी उन्हें उनके हाल पैर छोड़ दिया,

रश्मि- नहीं माँ वो बिच बिच में फ़ोन करती रही हैं, हमारी राजी ख़ुशी के बारे में जानकरी लेती रही हैं,

दिया- किस तरह की जानकारी,

रश्मि- यही की हम कैसे हैं, बच्चे कैसे हैं,

दिया- मुझे उनके बारे में सब कुछ जानना ह, छोटी से छोटी बात जननी ह,

अंजलि- रश्मि तूने उन्हें हमारे किसी रिश्ते के बारे में तो नहीं बताया, लड़कियों के बारे में तो नहीं बताया,

रश्मि- नहीं बस वो आपके और दीपा के बारे में पूछती थी, और किसी के बारे में तो उन्हें पता hi नहीं ह, उन्हें नहीं पता तुषार के किस किस के साथ रिश्ते थे, उन्हें तो ये भी नहीं पता की सीमा और दीपा दीदी के बच्चो के बाप तुषार हैं, बस उन्हें इतना पता ह तुषार और रूचि लापता हैं,

इसलिए वो अंजलि माँ और दीपा के बारे में पूछती थी, तो मैंने बस दीपा दीदी के बारे में यही बताया की वो हिमाचल में हैं,

रश्मि की बात सुनते hi अंजलि ने सर पकड़ लिया,

अंजलि- ये तूने सही नहीं किया बेटी, हमे बस दीपा को hi छुपाना था, क्योकि उसके पास ह्रदय था,

रश्मि- माँ वो कुछ गलत तोडना करेंगी,

दिया- ममी आज जो हालत ह उस हिसाब से हम किसी पैर ट्रस्ट नहीं क्र सकते, खेर आप मुझे उनके बारे में सब जानकरी दो,

रश्मि ने दिया को साडी जानकरी दी,

इधर ह्रदय तम्मना के पास से सीधा वर्षा के घर पंहुचा,

ह्रदय को अपने घर देख क्र वर्षा ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी, वर्षा ने ह्रदय को अंदर बुलाया,

किसी के आने की आवाज सुनकर ाव्य बहार आ गई, ह्रदय को देख क्र उसका दिल जोर से धक् धक् करने लगा था,

वर्षा- कैसे हो बीटा

ह्रदय- अच्छा हु मौसी

वर्षा- मौसी

ह्रदय- मैं तो माँ की बहन आप hi तो हो जिसे मैं मौसी बोल सकता हु,

वर्षा ने ह्रदय को गले से लगा लिया, ाव्य दूर कड़ी देख रही थी,

वर्षा- क्या खायेगा

ह्रदय- मैंने कभी किसी के घर खुश नहीं खाया कभी, वैसे भी मैं बस मिलने आया था, आप बैठिये तकलीफ मत कीजिये,

ह्रदय ने वर्षा का हाथ पकड़ क्र बैठा लिया,

ह्रदय- आप एक लोटी ऐसी थी जिसे पापा के बारे में सब जानकारी थी, फिर भी आप उनके प्यार में पद गई,

वर्षा- वो ऐसे hi थे, जब मैं उनसे मिली तो थी अलका के लिए लेकिन खुद को रोक नहीं पाई, मैंने सोचा था की कभी अपने रिश्ते को किसी के समाने आने नहीं दूंगी लेकिन वो कुछ भी छुपा क्र नहीं करते थे,

ह्रदय- अलका मौसी कैसी थी

वर्षा- अलका वो मेरी जान थी, मैं उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती थी, उसे तकलीफ न हो इसलिए उसे सुरेश चोपड़ा से बचा क्र रखा, लेकिन मैं अपनी बहन को आज तक ढूंढ नहीं पाई,

वर्षा की आँखों में आंसू थे, और ह्रदय की नजर दूर कड़ी ाव्य पैर थी, जिसकी आँखों में आंसू थे, ह्रदय वही चाहता था, ाव्य दौड़ती हुई वर्षा के गले लग गई,

ाव्य- आप दुखी मत होये माँ मैं ढूंढ क्र लाऊंगी उन्हें, मेरे लिए आप मेरी माँ हो लेकिन वो आपकी जान ह तो आपकी जान को मैं लाऊंगी,

वर्षा ाव्य से लिपट गई, ह्रदय के फै पैर मुस्कान आ गई,

ह्रदय- आप अकेले ले आओगी

ाव्य – है ले आउंगी जरूर ले आउंगी, तुम्हे मैं कमजोर लगती हु क्या

ह्रदय- बिलकुल नहीं, लेकिन हम तुम्हारे बिना उन्हें नहीं ढूंढ पाएंगे,

ाव्य ने सुर्प्रीस्ली ह्रदय को देखा,

ह्रदय- सही कहे रहा हु, मुझे तुम सबकी जरुरत ह, मैंने साडी जिंदगी दीपा माँ के साथ अकेले जीवन जिया ह, मेरा पूरा बचपन अकेले बिता ह, तुम सबके पास बचपन बाटने वाला कोई था लेकिन मैं अकेला था, लेकिन अब मैं अकेला नहीं रहना चाहता, मुझे तुम सभी का साथ चाहिए,

वर्षा ह्रदय को देख मुस्कुरा रही थी, वो समझ गई थी ह्रदय क्या कर रहा ह,

ाव्य- मेरा कोई नहीं ह, मैं किसी की नहीं हु

ह्रदय- दो लड़किया जिन्हे अपने बाप के प्यार की जगह उसकी हवस भरी नजरे देखनी पड़ी हो, भाई की जगह शैतान मिले हो, माँ जिनकी नीलामी करने को तैयार हो, उन्होंने कैसे खुद को बचा क्र रखा, और फिर जीवन में एक साथी मिला तो दोनों ने सही गलत भूल क्र उसे hi अपना सब कुछ मान लिया, लेकिन किस्मत ने उनसे वो भी चीन लिया, क्या उन्हें जीवन में कोई सुख पाने का अधिकार नहीं ह, और आज उनकी औलादे ये फैसला नहीं कर प् रही की हम सब एक साथ होकर उनके लिए लड़ सके,

धिकार ह हम पैर,

ह्रदय की बात सुनकर ाव्य वह से उठी और अंदर भाग गई,

वर्षा- ाव्य बेटी सुन तो

ह्रदय- रहने दीजिये मौसी, शायद अभी उसे समझ नहीं आएगा लेकिन मैं वडा करता हु पुरे परिवार को एक करूँगा,

वर्षा- मैं जानती हु तू कर सकता ह, तू अंजलि दीदी का बीटा ह, उन्होंने इस परिवार को ऐसे सम्हाला ह, जैसे माली फुल्लो के बगीचे को संझो क्र रखता ह,

ह्रदय- कमल ह न मौसी उन्होंने किसी और के बच्चो को भी अपना बना क्र पला और हम अपने होकर भी उनके लिए कुछ नहीं क्र प् रहे हैं,

ाव्य- किसने कहा उनके लिए कुछ नहीं कर पाएंगे, हम करेंगे सब मिल क्र करेंगे, लेकिन एक शर्त पैर

वर्षा- शरत कैसी शरत

ाव्य- इन्होने कहा ये कही का कुछ नहीं कहते, इन्हे यहाँ का भोजन करना पड़ेगा, ये हमे अपना कहा मानते हैं, अपनों के हाथ के खाने को कोण मन करता ह, प्रयो के हाथ के खाने को मन करते ह लोग

वर्षा की आँखों में आंसू और ह्रदय के फेस पैर मुस्कान थी,

ह्रदय- मैंने बस भूक की वजह से मन किया था, आप सबके लिए मेरे कोई नियम मायने नहीं रखते, और आप मेरे कितने अपने ह ये मेरा दिल चिर क्र देख लो

ाव्य- दिल को सम्हाल क्र रखो इसमें जो बेस हैं उन्हें बहार मत निकलने दो,

ाव्य खाना लेकर ह्रदय के सामने बैठ गई, ह्रदय ने तुरनत खाना खाना शुरू क्र दिया

ाव्य- है तो क्या जरुरत ह अपुन की, माँ कसम बंद बजा दूंगी सबकी

सबकी हसी छूट गई,

ह्रदय ने ाव्य और वर्षा को सब समझा दिया,

वर्षा- थोड़ा धयान से जो लोग तुषार को गायब कर सकते हैं, मतलब बहुत hi चालक हैं, क्योकि तुषार और रूचि जब साथ हो तो कोई भी कमजोर नहीं क्र सकता,

ह्रदय- जब अपने खतरे में हो तो कोई भी कमजोर पद जाता ह, न जाने उनके सामने कैसी परिश्थिति आ गई हो,

ाव्य- कब करना ह

ह्रदय- बस अन्य और रम्य से और बात क्र लू एक बार फिर अलग अलग टीम बनाते हैं,

तभी ह्रदय का फ़ोन बजा,

ह्रदय- hello

फ़ोन पैर दिया थी,

दिया- मैंने कामिनी के बारे में पता किया ह, और *******

दिया ने ह्रदय को रश्मि द्वारा बताया सब बता दिया,

ह्रदय के फेस पैर मुस्कान आ गई,

ह्रदय- बहुत बहदिया दिया, पहेली सफलता तो मिल गई

दिया- कैसी सफलता

ह्रदय- मिलकर बताता हु, ऐसा करो सचिन अंकल से कोई ऐसी जगह पता करो जहा हम सब मिल सकते हो, और हमारी सभी मुलाकाते वही होनी चाहिए, जगह थोड़ा सेफ रहे,

फ़ोन काटने के बाद,

वर्षा- क्या सफलता मिली कुछ पता चला,

ह्रदय- अभी नहीं मौसी बस कुछ लोगो के राज खुले हैं, अब उनके द्वारा आगे की जानकरी मिलेगी,

वर्षा- शाबाश बेटे

ाव्य- मतलब मुझसे पहले hi काम शुरू क्र दिया

ह्रदय- नहीं बस जानकारी निकली जा रही ह, जो जहा से जानकरी इकठा कर सकता ह कर रहा ह,

ह्रदय- अब मैं चलता हु मौसी, कल सब एक साथ मिलेंगे और वही सब तय होगा कोण क्या करेगा,

ह्रदय वह से निकल गया, ाव्य बैठी उसे hi देख रही थी,

ह्रदय फार्महाउस की तरफ जा hi रहा था की अननोन नंबर से फ़ोन आया,

ह्रदय- hello

उधर से एक लड़की- hello मर. ह्रदय

ह्रदय- hello है जी बोल रहा हु आप कोण

लड़की- आपकी एक कदरदान

ह्रदय- हाहाहाहा बिना नाम की कदरदान

लड़की- नाम बता दूंगी लेकिन प्रॉमिस करो आप किसी को बताओगे नहीं

ह्रदय- मैं तो आपको जनता भी नहीं नाम कैसे बताऊंगा

लड़की- अच्छा मुझे मिलना ह आपसे, वही नाम भी बता दूंगी और आप देख भी लेना

ह्रदय- लेकिन मैं आप पैर ट्रस्ट क्यों करू, मैं आपको जनता तक नहीं हु,

लड़की- इतना बहादुर लड़का एक लड़की से दर गया, मैं सोचती थी आप किसी से नहीं डरते

ह्रदय- हहहहह दर अच्छा ठीक ह बताइये कहा मिलना ह,

लड़की ने तुरंत ह्रदय को एड्रेस बता दिया, ह्रदय ने फ़ोन कटा और खुद से बोलै- नित्य

फ़ोन पैर नित्य थी जिसे ह्रदय पहेली आवाज में hi पहचान गया था,

ह्रदय ने गाड़ी उस एड्रेस की तरफ मोड़ दी, ये एक साफé टाइप था, कुछ देर में नित्य भी वह आ गई, ह्रदय ऐसे शो कर रहा था जैसे उसे कुछ भी नहीं पता

ह्रदय जहा खड़ा था नित्य भी उसके पास आ गई,

नित्य- hi

ह्रदय- hi तुम यहाँ

नित्य- आप यहाँ

ह्रदय- है किसी से मिलने आया था, और तुम

नित्य- जिससे आप मिलने आये हो वही हु मैं

ह्रदय- तुम, तुमने कॉल की थी मुझे,

नित्य- है जी, कोई प्रॉब्लम तो नहीं

ह्रदय- नहीं मुझे क्या प्रॉब्लम होगी, वैसे जान सकता हु क्यों मिलना छाती थी आप

नित्य- बस ऐसे hi लेकिन माँ को मत बताना

ह्रदय- नहीं बताऊंगा,

नित्य- आपने कहा था मेरे दोस्त अच्छे नहीं हैं, तो मैंने वो दोस्त छोड़ दिए, अब नए दोस्त ढूंढ रही हु, क्या आप बनेंगे मेरे दोस्त,

ह्रदय- मैं लेकिन मैं क्यों

नित्य- आपने कहा था न आप सही दोस्त चुनते हैं तो हो सकता ह आपके साथ मैं भी सही हो जाऊ,

ह्रदय- तुम मुझे ठीक से जानती भी नहीं हो

नित्य- जान्ने के लिए hi तो दोस्ती क्र रही हु,

ह्रदय- मैंने तुम्हारा फायदा उठा लिया तो,

नित्य- मुझे ख़ुशी होगी

ह्रदय- क्या

नित्य- मेरा मतलब ह, तुम आज कल कोई किसी का फायदा नहीं उठा सकता जो होता अपनी मर्जी से होता ह,

ह्रदय- तुम्हारी माँ को अगर पसंद नहीं आया मेरे साथ होना

नित्य- उन्हें खुद मर्दो के साथ रहना पसंद ह लेकिन मुझे किसी दोस्त के साथ भी नहीं रहने देती, अब मैं जवान हो चुकी हु बालिग हो चुकी हु, अब मेरी मर्जी ह जो चाहे वो करू, दुनिया में इतना कुछ ह करने के लिए, और मैं बस वही दादा जी और माँ के चक्कर में फांसी रह गई, और वो हनी जिंदगी के मजे ले रहा ह

ह्रदय- है वो तो मजे ले रहा ह मैंने भी देखा ह उसे एक बार एक नंगी लड़की के साथ

नित्य- क्या सच में

ह्रदय- है स्पोर्ट्स में देखा था

नित्य- वो ऐसा hi ह कभी भी घर में लड़किया लता ह न जाने क्या क्या करता ह उसे कोई नहीं रोकता मेरे पीछे पड़े रहते हैं,

ह्रदय- शायद तुम्हारे भले के लिए

नित्य- मुझे ऐसा भला नहीं चाहिए, मुझे खुल क्र जीना ह,

ह्रदय- ok समझ गया, ठीक ह मुझे तुम्हारी दोस्ती मंजूर ह,

निथा तुरंत ह्रदय के गले लग गई- ठंकु ठंकु ठंकु

ह्रदय- इतनी ख़ुशी,

नित्य- जब हमे हमारा मन चाहा कुछ मिलता ह तो ख़ुशी कण्ट्रोल नहीं होती,

ह्रदय मन में- कितनी मासूम ह ये, क्या मैं सही क्र रहा हु, इसके साथ नहीं नहीं लेकिन निधि को तो सबक सीखना होगा,

ह्रदय- तुम्हारी माँ करती क्या ह, तुम्हारे पापा क्या करते हैं

नित्य- पापा तो बहार hi रहते हैं, मैंने तो पिछले 5 साल से नहीं देखा उन्हें, और माँ वो कभी घर में रहती hi नहीं ह, जब भी मिलती हैं उनके साथ कोई न कोई आदमी या क्लाइंट hi होता ह, मुझे तो बात किये hi महीनो हो जाते हैं,



वैसे मुझसे ज्यादा तो आपको पता होगा उनकी कार आप hi लेकर घूम रहे हो आज कल, बड़े क्लोज फ्रेंड के बेटे हो शायद आप, वर्ण माँ इस कार को कभी किसी को हाथ नहीं लगाने देती,
 
दोस्तों मैं अभी सबके रिप्लाई नहीं दे पाऊँगी, कहानी लिखने के चक्क्र में मेरी खुद की कहानी बन गई ह. मेरे कहानी के हीरो ने बहुतो की गाड़ी ह लेकिन अब मेरी फटी पड़ी ह, सभी से माफ़ी मांगती हु, कुछ दिन और वेट क्र लीजिये प्लस,

मैं थोड़ा माहौल ठीक क्र लू,

फ़िलहाल मेरे पास फ़ोन भी नहीं ह, ये भी एक रिलेटिव के फ़ोन से संस क्र रही हु, जल्दी hi आप सबके बिच वापस आती हु
 
बहुत बहुत धन्यवाद् आप सभी का

और दिल से माफ़ी मांगती हु सबको इतना इंतजार करवाया,

https3a2f2f662emedia2etumblr2ecom2f69d183b7761da40254d38fbbf5d241e72ftumblr-pjltw1v1bw1v5rfu4o1-5002.gif
 
बहुत बहुत धन्यवाद् आप सभी का

और दिल से माफ़ी मांगती हु सबको इतना इंतजार करवाया,

असल में हुआ ये था

जब मैंने लास्ट अपडेट दिया था तो तभी कोई गेस्ट घर में आ गई मैं उनसे बात करने लगी और कंप्यूटर बंद करना भूल गई और I'd भी लॉगआउट नहीं की, मेरे बेटे ने कंप्यूटर खोल लिया और उसमे ये कहानिया सामने आ गई और नुदे पिक्स भी, नुदेस पिछ देख क्र मेरी सास गुस्से में लाल हो गई और किस्मत ख़राब मेरे पति भी तभी आ गए, सास ने मेरे पति को कंप्यूटर दिखा दिया, मैं गेस्ट के लिए चाय बनाने में लगी थी,

पति ने यहाँ की साडी स्टोरी और पिक्स देख ली, बस किस्मत की बात थी की उन्हें ये पता नहीं चला की इनमे से कोई स्टोरी मैं भी लिख रही हु,

साडी स्टोरी इन्सेक्ट थी तो उन्हें बहुत गुस्सा आ गया, गेस्ट के जाते hi घर में महाभारत शुरू हो गई, सास और पति तो मेरी आगे और पीछे दोनों जगह से एक साथ बजने लगे,

पति को लगा मैं ऐसी स्टोरी पढ़ती हु तो मेरे भी नाजायज सम्बन्ध होंगे किसी से उन्होंने मेरा फ़ोन ले लिया और उसकी भी चेकिंग की और मेरे सभी दोस्तों के नंबर डिलीट केर दिए, फ़ोन में काफी पोर्न मूवीज थी तो उन्होंने फ़ोन तोड़ दिया,

मैंने बहुत समझाया लेकिन मेरी कोण सुनने वाला था, उन्हें तो ये भी शक हो गया की मेरा को नाजायज रिश्ता मेरे सेज भाई कजिन भाइयो से भी हो सकता ह. तो उन्होंने मुझे मेरे घर जाने पैर भी पाबन्दी लगा दी,

कंप्यूटर में से सब फॉर्मेट क्र दिया और पैक करके रख दिया,

मैं लगातार समझती रही की मैं अकेली रहे जाती हु इसलिए स्टोरी पढ़ लेती हु या पोर्न देख लेती हु लेकिन किसी को नहीं समझा सकीय,

अगले 1महीने ये लड़ाई चलती रही, बस उन्होंने हाथ नहीं उठाया ये रेहमत थी,

मैं अपने hi घर में मुजरिम की तरह बन गई थी न कही जाना न किसी से मिलना,

फिर कुछ समय पहले पति ने मुझसे बात की और सब पूछा, मैंने उन्हें बताया की घर में अकेले बोर हो जाती थी तो यहाँ स्टोरी पढ़ने लगी, उनके एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी की वो मुझसे बात करे तब वो मेरे पास आये,

उनके दोस्त ने उन्हें समझाया की भाभी को सेक्स की जरुरत ह, औरत को सेक्स नहीं मिलता तो वो भटक जाती ह, पति को शायद उसकी बात समझ आ गई तो उन्होंने ऑफिस की छुट्टी की और मुझे 1 वीक के लिए बहार ले गए, वह खूब तसली से मेरे साथ प्यार किया,

मैंने बड़ी मुश्किल से उन्हें ये विश्वास दिलाया की अब मैं खुश हु और अब मुझे कुछ नहीं चाहिए,

तब जाकर उन्होंने मुझे फ़ोन दिलवाया लेकिन कीपैड वाला, और काफी दिन तक नजर राखी, मैंने भी कोई गलती नहीं की,

जब उन्हें विश्वास हो गया की अब सब ठीक ह तो कंप्यूटर ों किया ह बच्चो के लिए,

उन्होंने ऑफिस से छुट्टी ली थी तो 15 दिन के लिए ऑफिस ट्रिप पैर गए हैं कल सुबह से तो मुझे टाइम मिल गया ह, लेकिन पूरी स्टोरी फॉर्मेट क्र दी जो मैंने लिख क्र राखी थी अब फिर से लिखनी पड़ेगी,

और इस सब में उनका वो दोस्त मुझ पैर लाइन मरने लगा ह, उसे लगता ह मैं हवस की भूकी हु उसकी झोली में जा गिरूँगी,

ये प्रॉब्लम थी बस घर बर्बाद होते होते बचा,

और सबसे अच्छा ये हुए पति को इस फॉर्म का नाम याद नहीं रहा वर्ण मैं स्टोरी आगे नहीं लिख पाती
 
अपडेट- 23


वैसे मुझसे ज्यादा तो आपको पता होगा उनकी कार आप hi लेकर घूम रहे हो आज कल, बड़े क्लोज फ्रेंड के बेटे हो शायद आप, वर्ण माँ इस कार को कभी किसी को हाथ नहीं लगाने देती,

ह्रदय- ऐसा क्यों

नित्य- वो खेती ह उन्हें ये कार जान से ज्यादा प्यारी ह, इस कार को मॉडिफाई करवाती रहती ह, लेकिन चलती इसे hi हैं, ये देखने में जीतनेय नई मोडल की लगती ह उतनी ह नहीं, तुम तो जानते hi होंगे सर्कार हर 10 साल में पुराणी गाड़ी बंद क्र देती ह, लेकिन ये गाड़ी 20 साल पुराणी ह, माँ इसे hi चलती हैं,

ह्रदय- बड़ा अटेचमेंट ह इस कार से

नित्य- मैं तो ये सोच रही हु आपकी माँ की कितनी अच्छी सहेली होंगी जिसके बेटे को ये कार दे दी, लगता ह बहुत ज्यादा घेरि दोस्ती ह

ह्रदय सोच में पद गया,

ह्रदय- तुम्हारी माँ ह कहा की रहने वाली हैं,

नित्य- यही के तो हैं

ह्रदय- यहाँ तो तुम्हारे दादा जी रहते ह न, माँ कहा से ह

नित्य- माँ का पुराण घर **** शहर में ह,

ह्रदय- वह तो तुम्हारे नाना की फ़मिलय रहती होगी

नित्य- पता नहीं माँ कभी लेकर hi नहीं गई, वो मुझे पूरी दुनिया घुमा चुकी हैं लेकिन आज तक अपने शहर लेकर नहीं गई,

ह्रदय- चलो कोई बात नहीं,

नित्य- आपने मुझे दोस्ती की ह या माँ से, केवल माँ के बारे में hi पूछे जा रहे हो

ह्रदय- श्री श्री मैं तो बस ये जानना छटा था की तुम्हारी माँ इतनी बिजी क्यों रहती ह, पुराणी बिज़नेस वुमन होंगी वो,

नित्य- मुझे नहीं लगता,

ह्रदय- क्यों

नित्य- एक बार दादा जी बोल रहे थे की मैं तुझे उस झोपड़ पट्टी से उठा क्र लाया हु, अपने बेटे की वजह से, तो शायद पापा को माँ पसंद होंगी और वो गरीब होंगी इस लिए दादा जी ने शादी करवा दी होगी और इसीलिए माँ वह नहीं जाती

ह्रदय- तुमने कभी पूछा नहीं

नित्य- जरुरत hi नहीं लगी, जब वो लोग नहीं जाना चाहते तो मैं क्या करुँगी,

ह्रदय- हम्म ये भी सही ह, खेर अब क्या इरादा ह, अब घर चले

नित्य- मन तो क्र नहीं रहा लेकिन जाना तो पड़ेगा

नित्य ह्रदय के गले लगी और वह से निकल गई, ह्रदय भी निकल क्र फार्महाउस पैर आ गया,

निधि वह नहीं थी, दिन भर की भाग दौड़ से ह्रदय रेस्ट कर रहा था,

और साडी घटनाओ को जोड़ने की कोशिश क्र रहा था, सुरेश चोपड़ा का एनकाउंटर, एक साल बाद एक ऐसी पार्टी जिसमे देश के बड़े बड़े लोग आये हुए थे, क्रिमिनल्स भी वह थे, सबको मारा गया, जब सब मर दिए तो उन्हें कोण लेकर गया,

तभी निधि आ गई, जो एक बहुत hi खूबसूरत सेक्सी हॉट ड्रेस में थी, आँखों में नशा साफ़ दिख रहा था, क़यामत लग रही थी, कोई भी उसके सामने आ जाये उस पैर फ़िदा हुए बिना न रह सके, एक बार तो ह्रदय की आँखे भी उसी पैर टिक गई थी,


275115-yzfn54tv.webp


निधि बड़ी अदा के साथ चली हुई उसके पास आई, और उसकी गॉड में बैठ गई,

निधि बस ह्रदय की आँखों में देखे जा रही थी,

ह्रदय- क्या बात ह, कुछ परेशां लग रही हो

निधि- तुम मेरी परेशानी को पहचान लेते हो

ह्रदय- आपके फेस पैर दिख जाती ह

निधि- सबको नहीं दिखती, एक बात पुछु

ह्रदय- जरूर

निधि- तुम मेरे साथ क्यों हो,

ह्रदय- आपने hi तो बुलाया मुझे यहाँ

निधि- मेरा मतलब ह, तुम मेरे साथ रहना चाहते हो या मैंने बुलाया इसलिए तुम यहाँ आ गए, अपने माँ बाप को ढूंढ़ने, लेकिन उसमे हम दोनों का रिश्ता क्या ह

ह्रदय- मुझे नहीं पता लेकिन आपने कहा था, आप मुझे किसी रिश्ते में नहीं बांधेंगी,

निधि- तुम मुझसे दूर जाना चाहते हो

ह्रदय- आज कैसी बात कर रहे हो, कुछ हुआ ह क्या,

निधि- तुमने कहा था तुम मेरे प्यार को वापस लेन के लिए कुछ भी क्र सकते हो, क्या वो सच था

ह्रदय ने एक पल के सोचा

ह्रदय- मैंने उस समय जो कहा था सब सच कहा था, मैं कभी झूट नहीं बोलता,

निधि- लेकिन क्या आज भी वही बात ह

ह्रदय- ये आप पैर निर्भर करता ह, मैं वही ह्रदय हु लेकिन क्या आप वही निधि हैं,

निधि ने बड़े गोर से ह्रदय को देखा,

निधि- तुम नित्य के साथ क्यों थे,

ह्रदय हल्का सा मुस्कुराया

ह्रदय- आप मुझ पैर नजर रख रही हैं,

निधि- नहीं बिलकुल नहीं, लेकिन आज मैंने तुम्हे नित्य के साथ देखा

ह्रदय- आपको ऐतराज ह उससे मिलने से

निधि- नहीं बिलकुल नहीं, लेकिन उससे मिल कोण रहा ह, वो ह्रदय जिससे मैं हिमाचल में मिली थी या ये ह्रदय जो मेरे सामने बैठा ह

ह्रदय- आज मैं जो भी हु आपने hi बनाया ह, मैं तो बड़ा शरीफ था लेकिन मेरे अंदर सेक्स आपने जगाया और जो भी फीलिंग्स ह वो सब आपकी दी हुई हैं,

निधि – तुम्हे मुझ पैर भरोसा ह

ह्रदय- आपके भरोसे hi तो यहाँ तक आया था,

निधि के सवाल और ह्रदय के जवाब अपनी अपनी कहानी बयां क्र रहे थे,

निधि- तुम्हे मेरे बारे में किसी ने कुछ कहा ह

ह्रदय- आपको ऐसा क्यों लगता ह, आपने कुछ किया ह क्या

निधि- मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया

ह्रदय- ये आपका नजरिया हो सकता ह लेकिन क्या पता किसी के साथ किया हो,

निधि- मैं तुम्हे अपने बारे में कुछ बताना चाहती हु,

ह्रदय- क्या बताना चाहती हो, यही की तुम अशोक कपूर की रखैल हो,

ह्रदय के मुँह से ये सुनते hi निधि की आँखे फटी रह गई और वो तुरंत कड़ी हो गई, ह्रदय भी खड़ा हो गया,

निधि की आँखों में आंसू थे,

ह्रदय- माफ़ करना मैं कुछ नहीं कहना छटा था लेकिन आपकी बाते मुझे अंदर से तोड़ रही हैं तो खुद को रोक नहीं पाया,

मैं आपके बारे में सब जनता हु, आप अशोक की सेक्स डॉल हो जो उसके लिए लोगो के साथ सोती हो, पिछले 19 साल से उसके लिए काम करती आ रही हो आपके पति शायद रियल पति भी नहीं ह, और मुझे भी आपने अपने किसी मकसद के लिए यहाँ बुलाया ह, जो कहानी आपने सुनाई थी अपने प्यार की सब झूटी ह,

ह्रदय की बाते निधि के दिल को चीरती हुई जा रही थी,

ह्रदय- मुझे आपकी आँखों में हमेशा प्यार दिखाई दिया था लेकिन शायद मैं hi दुनिया का सब मूरख इंसान हु, जिसे कोई भी औरत आकर बेवकूफ बना क्र चली जाती ह, शुरुआत आपने hi की,

निधि- ऐसा नहीं ह्रदय मेरी बात तो सुनो

ह्रदय- आपने मेरा दिल दुखाया ह, मैं आपको इतना मैंने लगा था की आप मुझे अपने अतीत की बदलने के लिए खाई में कूदने को भी खेती तो मैं कूद जाता,

निधि- मैं तुम्हे सब बताना चाहती थी,

ह्रदय- करने और चाहने में बहुत अंतर ह निधि जी, आपने मेरे साथ गलत किया मेरा विश्वास थोड़ा, मन तो करता ह सब कुछ तहस नहस क्र दू, लेकिन आपने मेरी मदद की मेरे अपनों को ढूंढ़ने में, इसलिए आपको माफ़ कर रहा हु, लेकिन फिर कभी मेरे सामने मत आना, मैं नहीं चाहता मैं आपके साथ कुछ गलत करू,

निधि ह्रदय की तरफ डोडी और उसके गले लग्न चाहा, लेकिन ह्रदय ने उसे खुद से दूर क्र दिया,

ह्रदय- अब ये तिरयाचरित्र मत दिखाओ मुझे, मुझसे कुछ गलत मत करवाओ,

ह्रदय मुदा और फार्महाउस के बहार चल दिया

निधि- कहा जा रहे हो

ह्रदय- कही भी लेकिन आपसे दूर

निधि- मेरे किये की सजा मेरी बेटी को मत देना, बस एक बात याद रखना मैंने जीवन में जो किया ह बस उसी के लिए किया, मैं गलत हु लेकिन वो बहुत भोली ह, उसे सजा मत देना, मैं सेह नहीं पाऊँगी,

ह्रदय ने पलट क्र देखा

ह्रदय- मैं तो आपको भी कोई सजा नहीं दे रहा उसे भला क्यों दूंगा, मनमे तो था आपको सजा दू, लेकिन आपको सजा देने के चक्कर में किसी के साथ गलत नहीं कर सकता मैं,

निधि दौड़ क्र ह्रदय के पास गई और उसके होतो पैर जबरदस्ती किश क्र दिया,

ह्रदय ने उसे दूर धकेला,

ह्रदय- अब कुछ नहीं

ह्रदय वह से बहार निकल गया,

निधि वही जमीन पैर गिर पड़ी और रोने लगी,

ह्रदय बस पैदल पैदल चले जा रहा था, वो बहुत गुस्से में था, वो ये सब नहीं करना चाहता था, वो निधि को सबक सीखना चाहता था, लेकिन निधि की बातो ने उसे इतना मजबूर क्र दिया था की वो खुद को रोक नहीं पाया और पूरा गुस्सा निकल क्र वह से चल दिया, उसे समझ नहीं आ रहा था वो कहा जाये,

रात का समय वो किसी को कॉल भी नहीं क्र रहा था बस चले जा रहा था,

उसके फ़ोन पैर निधि की कॉल आने लगी तो उसने फ़ोन को बंद क्र लिया और एक पार्क के बहार जाकर बैठ गया, ठण्ड तो उसे लगती hi नहीं थी, काफी देर वो बैठा था,

इधर निधि को चिंता होने लगी थी, ह्रदय का फ़ोन बंद हो चुक्का था निधि को कुछ समझ नहीं आ रहा था तो उसने वन्य को कॉल किया,

वन्य- मम क्या बात ह इस टाइम

निधि- वन्य ह्रदय को ढूंढ लाओ वो मुझे नाराज होकर कही चला गया ह,

वन्य- क्या कहा,

निधि- मुझे नहीं पता उसका फ़ोन भी बंद आ रहा ह,

वन्य- आप चिंता मत कीजिये मैं देखती हु,

वन्य ने तुरंत कॉल दिया को किया, कही ह्रदय हवेली न चला गया हो,

दिया भी तुरंत भागी तो उसे रम्य मिल गई,

रम्य- क्या हुआ ऐसे क्यों घबरा रही हो,

दिया- बहुत जरुरी काम ह, तुम साथ चलना चाहोगी,

रम्य दिया को घबराया हुआ देख क्र उसे साथ चल दी,

दिया वन्य की बताई जगह पैर पहचुहि फिर तीनो एक hi गाड़ी में ह्रदय को ढूंढ़ने चल दी, ह्रदय निधि के फार्महाउस से पैदल चला था तो ज्यादा दूर नहीं गया होगा, तीनो उसी तरफ चल दी,

काफी देर ढूंढ़ने के बाद जब उन्हें ह्रदय नहीं मिला तो उन्हें घबराहट होने लगी थी,

इधर ह्रदय बैठा हुआ खुद के बारे में सोच रहा था, क्या वो इतना आसान टारगेट ह की कोई भी उसे फ़साने के लिए चला आता ह, इस तरह से दुनिया से नहीं लड़ा जा सकता, अगर दुनिया से लड़ना ह तो शराफत छोड़नी होगी, दुनिया को झुकना सिख,

ह्रदय उठा और वह से चल दिया, तभी उसके सामने से गाड़ी आकर रुकी और उसमे से तीन लड़किया उतर के ह्रदय की तरफ दौड़ पड़ी और तीनो hi उससे लिपट गई,

वन्य- कहा चले गए थे और फ़ोन क्यों बंद ह

दिया- ये क्या तरीका हुआ, मैं बहुत नाराज हु तुमसे

ह्रदय ने रम्य की तरफ देखा वो बोली तो कुछ नहीं पर नाराजगी उसे भी थी,

ह्रदय- तुम कुछ नहीं कहोगी

रामय- मेरा ये अधिकार नहीं ह

ह्रदय- किसने कहा हम सब एक hi तो हैं, हम सबका एक दूसरे पैर पूरा अधिकार ह,

वन्य- ये कैसा अधिकार ह, हमे बिना बताये गायब हो गए

ह्रदय- गायब नहीं हुआ था बस खुद को शांत क्र रहा था,

दिया- क्र लिया शांत अब चलो घर

ह्रदय- मैं घर नहीं जा सकता,

वन्य- तो मेरे रूम पैर चलो

दिया- वह क्यों

वन्य- और कहा भेजेंगे,

रम्य ने धीरे से वन्य के कान में कहा- इसे तुम पैर भरोसा नहीं ह, कही तुम इसके ासिक पैर डोरे न दाल लो,

वन्य ने रम्य को देखा

दिया- क्या कहा इसने

रम्य- मैंने क्या कहा,

रम्य है पड़ी

वन्य को समझ आ गया रम्य मजाक क्र रही ह,

ह्रदय- रम्य क्या तुम हमारा साथ डौगी

रम्य- क्या तुम लोगो को हम दोनों बहेनो की जरुरत ह

ह्रदय- हमे सबकी जरुरत ह,

रम्य- अगर जरुरत ह तो हम जरूर साथ देंगी,

ह्रदय- दिया कल सबको अपने सेफ हाउस पैर बुलाओ, और अंजलि माँ को भी बुलाना

रामय- उन्हें क्यों

वन्य- क्योकि जितना दिमाग हम सबके पास इकठा करके ह उससे ज्यादा वो अकेली रखती हैं, उनके पास बहुत दूर तक का सोचने की छमता ह,

दिया- ये बात तो ह, ठीक ह अब यहाँ से चलो,

वो सब गाड़ी में बैठने लगे तभी जोर की बिजली कड़की और पास का बिजली का ख्माबा टूट गया जो गाड़ी के उप्पेर गिरा और बिजली की वजह से गाड़ी में आग लग गई, वो तो सही समय पैर ह्रदय सबको लेकर कूद पड़ा,

चारो भोचके से देखने लगे,

लड़किया तो बुरी तरह दर गई थी, लेकिन ह्रदय के दिमाग में घमाशान शुरू हो गया था, वो तुरंत उठा और इधर उधर देखने लगा,

एक दम चौकन्ना होकर चारो तरफ घूमने लगा,

दिया- क्या हुआ क्या ढूंढ रहे हो,

ह्रदय- कुछ अलग सा

दिया- मतलब

ह्रदय- कुछ नहीं चलो यहाँ से,

दिया ने शनाया को कॉल की और उसे गाड़ी लेकर बुलाया, शनाया कुछ hi देर में उनके पास पहुंच गई थी,

शनाया के बहुत से सवाल थे और बहुत नाराजगी की उसे इस सब में शामिल क्यों नहीं किया गया, ह्रदय के समझने पैर वो मणि,

वन्य और ह्रदय को ड्राप करके बाकि तीनो घर चली गई, ह्रदय घेरि सोच में डूबा हुआ था,

वन्य- क्या सोच रहे हो,

ह्रदय- वो बिजली

वन्य- बिजली तो कही भी गिर जाती ह, लेकिन तुमने निधि से झगड़ा क्यों किया,

ह्रदय- उसकी चिकनी माखन जैसी बाते उसके झूठे मुँह से अच्छी नहीं लग रही थी, मुझे गुस्सा दिलाये जा रही थी तो मैंने सब बोल दिया,

वन्य- लेकिन ये सही वक़्त नहीं था, तुमने तो कहा था उसे सबक सिखाओगे

ह्रदय- है तो सबक सीखा क्र hi आया हु,

वन्य- इसे सबक सीखना नहीं कहते गुस्सा निकलना कहते हैं, खेर मैं उन्हें बता देती हु तुम मिल गए हो,

ह्रदय- तड़पने दो उसे

वन्य- तुम जानते हो एक औरत या लड़की किसी के लिए इतना कब तड़पती ह, इतनी फ़िक्र कब करती ह, जब वो उससे प्यार करने लगती ह, मुझे लगता ह निधि तुमसे प्यार करने लगी ह,

ह्रदय- अरे उसका प्रोजेक्ट ख़राब हो गया इसलिए तड़प रही होगी,

वन्य- प्रोजेक्ट के लिए तो और कोई मिल जायेगा वो इतना नहीं तडपेगी, अशोक कपूर चालक आदमी ह उसने दूसरा प्लान भी बनाया होगा, लेकिन जो तड़प निधि की आवाज में थी वो प्यार में हरी हुई औरत की थी,

ह्रदय- मुझे फरक नहीं पड़ता, अब मेरी मंजिल अलग ह,

वन्य ह्रदय का हाथ पकड़ क्र बैठ गई, दोनों बिलकुल एक दूसरे के करीब बैठे थे,

वन्य- खुद को इतना कठोर मत बनाओ की किसी के दर्द का अहसास होना hi बंद हो जाये,

ह्रदय- मैं अब किसी के लिए आसान टारगेट नहीं बनना चाहता

वन्य- तुम और आसान टारगेट, जिसने भी तुम्हे टारगेट करने का सोचा ह वो बहुत hi बहादुर या चालक किसम के लोग होंगे, तुम्हे टारगेट करना मतलब अपनी मुसीबत बुलाना,

ह्रदय- मुझे लोगो से नफरत सी होने लगी ह

वन्य- लेकिन तुमसे कोई दुश्मन भी नफरत नहीं क्र सकता,

वन्य की आवाज में एक भारीपन सा आ गया था, उसने ये बात ह्रदय की आँखों देखते हुए कही, वन्य की ये नजर ह्रदय को विचलित क्र गई,

ह्रदय उठाना चाहता था लेकिन वन्य उसके हाथो को पकड़ क्र बैठी थी, ह्रदय छह क्र भी अपने हाथ नहीं खींच सका,

वन्य की आँखों में खुमारी साफ़ दिख रही थी, वन्य ह्रदय के नजदीक होती जा रही थी,

और वन्य वो कदम उठाने hi वाली थी जिससे एक तूफ़ान आ जाता, वन्य के हॉट ह्रदय के होतो की तरफ बढ़ चुके थे, तभी उसका फ़ोन बज उठा जो निधि का था,

फ़ोन बजते hi वन्य जैसे होश में आई, वो खुद पैर बहुत शर्मिंदा हुई,

वो शर्म की वजह से ह्रदय से नजरे भी नहीं मिला प् रही थी, वो फ़ोन को लेकर दूसरे रूम में चली गई और निधि से बात करने लगी, ह्रदय भोचका सा बैठा रह गया, अभी जो होने वाला था उसे सोच क्र hi ह्रदय के रोंगटे खड़े हो रहे थे, उसे वन्य की उम्मीद नहीं थी वो ऐसा कदम उठाएगी,

ह्रदय काफी देर वही बैठा रहा जब वन्य वापस नहीं आई तो वो उठ क्र देखने गया तो वन्य बिस्टेर में लेती हुई थी,

ह्रदय को लगा की वो सो गई ह ह्रदय भी वापस रूम में आकर लेट गया, उधर वन्य शर्म की वजह से ह्रदय के सामने नहीं आना चाहती थी,

ह्रदय भी सोचता सोचता सो गया,

अगले दिन सभी एक घर में बैठे हुए थे,

सभी लड़किया एक साथ और ह्रदय और साथ में अंजलि,

अंजलि- क्या सोचा ह तुम लोगो ने,

ह्रदय- हमारे हिसाब से 4 अलग अलग जगह के लोग हैं जिन पैर हम शक कर सकते हैं, पहला शक कामिनी दादी की तरफ ह, उन्होंने कुछ चले चली हैं, बस हमे देखना ह वो किस हद तक चाल खेल सकती हैं, दूसरा एक मंजर ह जिसे आपने जॉब से निकला था उसके पीछे भी जाना ह, तीसरा रजनी जी की बेतिया उनके पीछे भी जाना ह, और छोटी ह दृष्टि, अब ये कन्फर्म नहीं ह की दृष्टि इनमे से किसी से मिली भी हो सकती ह, तो उसके लिए हमे अलग अलग टीम बनानी होंगी,

अंजलि- सोच तो सही ह, लेकिन मैं उस मैनेजर पैर नजर रख चुकी हु वह कुछ नहीं मिला

ह्रदय- फिर भी देखते ह कोई कनेक्शन मिल जाये,

अंजलि- कोण कहा जा रहा ह,

ह्रदय- अन्य और रम्य जाएँगी कामिनी जी के पास, वो अगर हमारे परिवार के बारे में जानती होंगी भी तो शायद इनके बारे में कुछ न जानती हो,

अंजलि- बिलकुल सही सोचा, इनके बारे में वो कुछ नहीं जानती होगी,

ह्रदय- नैना और काम्य जाएँगी रजनी जी की बेटियों के पीछे, वह इनके बारे में कोई जानकारी नहीं होगी,

और मैं और ाव्य जायेंगे दृष्टि के पीछे, दिया और शनाया जायेंगे उस मैनेजर के पीछे,

दिया- हम तुम सबके के साथ क्यों नहीं,

ह्रदय- जो भी हमसे बदला ले रहा ह यहाँ रहने वाले सभी को जनता होगा अगर नहीं जनता होगा तो उन्हें जो यहाँ कभी आये नहीं,

ाव्य और मुझे कोई नहीं जनता क्योकि हम कभी सामने नहीं आये, रम्य और अन्य अमेरिका रही हैं इन्हे बी कोई नहीं जनता, और कमाया और नैना को दृष्टि जानती ह इसलिए इन्हे उनके पीछे नहीं भेज रहा,

बाकि सब यही रह क्र निगरानी कर्नेगे, यहाँ की जानकारी भी हमे होनी चाहिए और सभी एक साथ गायब नहीं हो सकते वर्ण दुश्मन को शक हो जायेगा, क्या पता दुश्मन इसी शहर में हो,

अंजलि- ह्रदय ठीक बोल रहा ह, लेकिन तुम सब सम्हाल क्र रहना, खतरा बहुत बड़ा हो सकता ह,

शनाया- लेकिन वो इंसान कोण था जिसने घर पैर हुम्ला किया, वो किसके साथ जुड़ा हो सकता ह, अगर वो ह्रदय के अलावा किसी से टकरा गया तो उससे बचना नामुमकिन हो जायेगा, बहुत ताकत ह उसमे

ह्रदय- बस उसी की चिंता ह मुझे न जाने वो कोण था किसके साथ जुड़ा हुआ ह, हमारे बाद उसने हुम्ला किया तो

अंजलि- यहाँ की फ़िक्र मत करो यहाँ मैं हु, अब किसी माँ के जाने में हिम्मत नहीं ह घर में घुस भी जाये,

अंजलि की बात सुनकर साडी लड़कियों के रोंगटे खड़े हो गए, 60 की उम्र में इतना जोश देख क्र सब शॉकेड थी, बस रामय और अन्य को हैरत नहीं थी क्योकि उन्होंने अंजलि का वो रूप देखा था,

अनाया- आप हो तो फ़िक्र कैसे हो सकती ह आप तो सुपर वुमन हो,

अन्य की बात पैर अंजलि है पड़ी,

अंजलि- वैसे कब जा रहे हो,

ह्रदय- सब अलग अलग दिन निकलेंगे, आप सबको उन लोगो के बारे में उनके खतरे के लेवल के बारे में समझाइये,

दिया- तुम दृष्टि के पीछे क्यों जाना चाहते हो,

ह्रदय- क्यों इन सब में सबसे बड़ा खतरा और इस पूरी घटना से डायरेक्ट दृष्टि hi जुडी हुई ह, और उसके पीछे किसका हाथ ह ये भी जानकारी नहीं ह, मैं किसी और को उसके खतरे में नहीं दाल सकता,

वन्य- लेकिन तुम उसे ढूंढोगे कैसे,

ह्रदय- मैं जनता हु वो कहा मिलेगी,

ह्रदय की बात शुक्र सब चौंक गए,

अंजलि- तुम्हे कैसे पता, तुम उसे जानते हो,

ह्रदय- जनता तो नहीं हु लेकिन ये पता ह वो किस शहर से आई ह

दिया- कैसे

ह्रदय- उसकी एक सोशल मीडिया ईद ह जिस पैर वो वीडियोस बनाती ह, बहुत ज्यादा फोल्लोवेर्स नहीं ह उसके, ज्यादा वीडियोस नहीं ह,

शनाया- फिर तुम्हे कैसे पता

ह्रदय- क्योकि मैं उसका फोल्लोवेर हु,

वन्य- दिखाओ मुझे मैं साडी जानकरी निकल लुंगी,

ह्रदय ने दृष्टि की ईद निकल क्र दिखाई, जो धड़कन के नाम से थी,

वन्य- धड़कन के नाम से ह, लेकिन इसमें तो फेस दीखता hi नहीं, कही किसी भी वीडियो में उसका फेस नहीं ह, फिर तुम्हे कैसे पता ये वही ह,

ह्रदय- पता नहीं बस पहचान लिया,

दिया- अरे ऐसे कैसे पहचान लिया,

ह्रदय- मत पूछो तुम सब हसोगे

अंजलि- कोई नहीं हसेगा,

ह्रदय- वो जब उसने किश किया था न तो वो बहुत नजदीक आ गई थी तो उसके हॉट पैर एक टिल ह वो दिखा था, उसकी एक दो वीडियो में उसके हॉट दिखे थे तो उसी टिल से पहचान लिया,

ह्रदय की बात सुनकर सभी लड़किया मुँह फाडे उसे देख रही थी, जैसे उसकी बात पैर यकीन करे की कोशिश कर रही हो, की ह्रदय इतने गोर से उसके हॉट देखता था,

ह्रदय- ऐसे मत देखो मैंने कोई गलत काम नहीं किया ह

अंजलि- ये तो बहुत बारीक़ नजर से परखा ह तूने लेकिन तू गलत भी तो हो सकते हो

ह्रदय- है हो सकता हु लेकिन कही से तो शरुआत करनी hi ह,

अंजलि- ठीक ह तो फिर तैयारी करो, और है तुम लोग कहा जा रहे हो कैसे जार हे हो ये जानकारी किसी को नहीं होनी चाहिए, बाकि जो यहाँ हैं वो बाकि की मदद के लिए तैयार रहेंगे,

और है कही भी किसी को भी गलती से ये नहीं बताओगे तुम्हारा आपस में क्या रिश्ता ह, ये रिश्ते बस तुम तक hi सिमित रहने चाहिए,

सबने सर हिला क्र है भरी,

ह्रदय- इस सब में सबसे जरुरी और सोचने वाली बात, जब सुरेश चोपड़ा शकील और सोनिया का एनकाउंटर हुआ तो वह गिने चुने लोग थे, और आज उनमे से कोई भी जिन्दा नहीं ह, ऐसा कैसे हो सकता ह,

अंजलि- मैंने सबके बारे में पता किया सबकी मोत के पीछे अपने अपने रीज़न थे, ऐसा कही नहीं लगा जैसे किसी ने गलत किया हो,

दिया- लेकिन ये सबसे बड़ी चीज ह सोचने वाली इस पैर धयान दिया जाना चाहिए,

वन्य- दिया हम सब यहाँ रह क्र उन लोगो की जानकारी निकालेंगे जो उस एनकाउंटर में शामिल थे,

सब कुछ तय हो गया, साडी लड़किया ह्रदय के साथ रहना चाहती थी लेकिन ये मौका ाव्य को मिला, जो सबके फेस पैर उनकी तड़प को दिखा रहा था,

ह्रदय- एक और बात अगर कोई मेरी जानकारी निकलने हिमाचल गया तो, कॉलेज से पूरी जानकारी निकली जा सकती ह,

अंजलि- तुम मत घबराओ वो मेरी बसाई हुई जगह ह, उस जगह से कोई कुछ जानकारी नहीं निकल सकता, वो मेरा इलाका ह,

ह्रदय- लेकिन एक तो वह पहुंच गई मुझे ढूंढ़ती हुई,

अंजलि- कोण

ह्रदय- तम्मना

अंजलि- तम्मना वह ह लेकिन उसे कैसे पता

दिया- रश्मि ममी की वजह से

अंजलि- ओह्ह्ह ये सही नहीं हुआ, लेकिन वो भी तुम्हारा रिकॉर्ड नहीं निकल पायेगी, उसे पता भी होगा तो बस इतना की तुम दीपा के बेटे हो,

ह्रदय- दिया और शनाया तुम दोनों तम्मना पैर नजर रखो, उसकी सभी हरकतों पैर नजर रखना, उसका मकसद मुझे थोड़ा अलग लग रहा ह

अंजलि- अलग कैसा अलग

ह्रदय- बाद में बताऊंगा

दिया- हम सबसे छुपाने से क्या फायदा अगर हमे hi पता नहीं होगा तो हम लड़ेंगे कैसे

ह्रदय- मैं नहीं बोल पाउँगा

अंजलि- बीटा मैंने अपने बच्चो को कभी ऐसा नहीं बनाया की वो एक दूसरे के सामने किसी भी बात को करने में शर्मा जाये, फिर तुम लोग ऐसे कैसे बन गए,

ह्रदय- लेकिन लड़कियों के सामने

अंजलि- तूने मेरी कहानी सुनी थी न, तुझे कही लगा तेरे पिता या माँ मौसी एक दूसरे से कुछ भी बोलने में शरमाते थे, वो इसलिए एक साथ तह ेक्योकि उनमे एक दूसरे के सामने कोई झिजक कोई शर्म कोई पर्दा नहीं था,

अगर तुमलोगो को ये लड़ाई लड़नी ह तो सबसे पहले सबको एक होना होगा, तुम्हे जो पता ह वो सबको पता होना चाहिए, तभी तुम सब अपने दुश्मनो को हरा सकते हो,

ह्रदय- ठीक ह माँ जैसा आप कहे, आप ज्यादा जानती हैं,

उसकी अब तक की बातो और हरकतों से मुझे महसूस हुआ की वो चाहती थी की मेरा रिश्ता मेरी hi बहेनो यानि शनाया दिया रैना और आशना के साथ बने, उसे इन्ही के बारे में जानकारी ह की ये चारो मेरी बहन लगती ह, वो बार बार मुझे इन चारो के साथ रिलेशन बनाने को फाॅर्स करती हुई आई ह, वो मेरे करीब आई और मेरे अंदर सेक्स के लिए फीलिंग्स जगाई और दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स करने के लिए भी मेरे दिमाग में बाते दाल रही थी,

ह्रदय की बात सुनकर साडी लड़किया शर्म और एक्सिटमेंट में आ गई सबके मुँह लाल हो गए,

अंजलि- बीटा तुम सबकी किस्मत उप्पेर वाला लिख चुक्का ह, किसी के बहकाने या दिशा दिखने से कुछ नहीं बदलेगा जो होना ह वो होकर hi रहेगा,

बस वो रास्ता चुनना जो हालत के हिसाब से जरुरी हो, किसी भी रस्ते पैर जाने के लिए झिझकना मत,



सभी एक साथ- समझ गए माँ हम कसम कहते हैं अपने माता पिता को ढूडन क्र लाएंगे, चाहे उसके लिए हमे कुछ भी करना पड़े,
 
अपडेट-24




इधर परिवार की मीटिंग चल रही थी वही दृष्टि हिमाचल में ह्रदय की खोज में लगी हुई थी, वो उसके कॉलेज पहुंच गई थी, लेकिन जैसा अंजलि ने कहा था वह उसे कुछ नहीं मिलने वाला था, कोई उसके बारे में कुछ भी बताने को तैयार नहीं था, कुछ स्टूडेंट्स से उसकी जानकारी मिली जिससे वो घर तक पहुंच गई, लेकिन वह टाला लगा था, आस पास पता करना चाहा लेकिन सच किसी ने नहीं बताया बस इतनी जानकी की माँ बीटा रहते हैं, माँ का नाम रूचि ह,

दृष्टि हिमाचल में ह ये खबर अंजलि के पास आ गई,

अंजलि और ह्रदय कार में बैठे थे अकेले,

अंजलि- वो हिमाचल पहुंच चुकी ह,

ह्रदय- अगर उसने दीपा माँ का नाम सुनलिया तो पहेचा जाएगी,

अंजलि- नहीं पहचानेगी, उसे वह सब रूचि बताएँगे, और हमारे सभी दुश्मनो को पता ह रूचि लापता ह तो

ह्रदय- और पिता

अंजलि- कोई तुम्हारे पिता का नाम जनता hi नहीं ह

ह्रदय- लेकिन निधि तो मेरी जानकरी निकलती हुई वह पहुंच गई थी,

अंजलि- उसके बाद hi ये फैसला लिया गया की किसी को कुछ न बताया जाये,

ह्रदय- आप निधि के बारे में जानती हो,

अंजलि- मैं सबके बारे में जानती हु, मैंने hi दीपा से कहा था तुझे उसके करीब भेजे,

ह्रदय- लेकिन क्यों

अंजलि- क्योकि तेरे पास सब कुछ था बस ये hi ज्ञान नहीं था, और मैं तेरे पास थी नहीं की तुझे ये सब सीखा पति, और दीपा जो सीखा सकती थी वो सब तुझे सीखा दिया था, कोई तो गुरु चाहिए था तुझे जो ये सब सीखा सके,

ह्रदय- उसने मेरा इस्तेमाल करना चाहा

अंजलि- दुनिया ऐसी hi ह कोई फ्री में कुछ नहीं देता, हर चीज की कीमत होती ह, बस माँ होती ह जो बिना किसी स्वार्थ के करती ह, बाकि दुनिया अगर तुम्हे कुछ दे रही ह तो उसके बदले कुछ तो लेगी hi, और दुनिया की कोई भी औरत किसी के साथ रिश्ता बनती ह बिना सवर्थ के नहीं बनती, किसी को सुरक्षा चाहिए तो किसी को पैसा किसी का कोई और स्वार्थ होता ह,

बस तुझे अब ये hi धयान रखना होगा की जब भी तेरे पास कोई औरत आये तुझे उसके झांसे में न आकर उसके स्वार्थ का पता लगाना ह,

ह्रदय- समझ गया माँ, मुझे लगता ह अगर दृष्टि के पीछे जाना ह तो मुझे उसके पास जाना चाहिए,

अंजलि- सही विचार ह,

ह्रदय- मैं हिमाचल निकलता हु, ाव्य को कहा आना ह वो मैं बता दूंगा,

अंजलि- ठीक ह,

अंजलि ने ह्रदय को बस स्टॉप पैर ड्राप क्र दिया,

इधर दृष्टि ने ह्रदय के घर पैर नजर राखी हुई थी, वो घूमने के बहाने वह आ जाती, उसे उम्मीद थी कोई तो आएगा वह पैर,

उसका इंतजार ख़तम हुआ जब ह्रदय अपने घर में घुसा, दृष्टि की आँखों में चमक सी आ गई, उसने पूरा दिन ह्रदय पैर नजर राखी, सब कुछ नार्मल रहा, ह्रदय भी जान बुझ क्र बार बार घर के बहार खड़ा हो जाता, जैसे वो बोर हो रहा हो, आस पास के लोग वह से गुजरते तो बस हे hello होता, कुछ भी अलग नहीं हो रहा था,

दृष्टि ने ह्रदय के करीब जाने का विचार किया, उसने दादी को कॉल लगाया और सब बताया,

दादी- किसी तरह ये पता क्र उसका अंजलि के साथ कोई और रिश्ता तो नहीं ह,

दृष्टि- उसके लिए मुझे उसके करीब जाना होगा

दादी- कुछ भी करना पड़े क्र अपना जादू चला बस अपने खजाने को लुटा मत देना, ये कीमती ह इसका इस्तेमाल ऐसे hi छोटे काम पैर नहीं करते

दृष्टि- दादी क्या बोलती हो तुम, ऐसा सोचा भी कैसे सकती हो तुम,

दादी- तेरी दादी हु तुझे समझाना जिम्मेदारी ह मेरी, अच्छा तू उसके बारे में पता क्र थोड़ी दोस्ती बढ़ा, अगर तुझे लगे की सब ठीक ह तो मुझे बताना, फिर उसे यहाँ ले आना,

दृष्टि- वो मेरे कहने से वह क्यों आएगा

दादी- उसका इंतजाम मैं क्र दूंगी, तू बस उससे दोस्ती क्र

दृष्टि – ठीक ह

दृष्टि सोच में दुब गई कैसे उससे दोस्ती करू, ऐसे सीधे जाकर तो बोल नहीं सकती मुझसे दोस्ती क्र लो,

काफी सोचने के बाद भी जब उसे कुछ नहीं सुझा तो उसने पुराणी घटना को सोचते हुए उसी से शुरुआत करने का सोचा और निकल पड़ी ह्रदय के घर की तरफ,

दृष्टि के निकलते hi ह्रदय के पास जानकरी पहुंच गई की वो उसके घर की तरफ निकली ह, ह्रदय भी घर के बहार आकर खड़ा हो गया, हाथ में कॉफ़ी के मग लिए हुए, खिली हुई धुप का आनंद ले रहा था,

दृष्टि बड़ी अदा के साथ उसके सामने से गुजारी, उसे लगा था ह्रदय उसे देखेगा, लेकिन ह्रदय तो पहले भी किसी लड़की की तरफ नजर नहीं उठता था ये तो फिर भी उसकी दुश्मन हो सकती थी, इसको फ़साने hi तो वो यहाँ तक आया था,

दृष्टि को खुद की इंसल्ट महसूस हुई, दृष्टि थी भी बहुत खूबसूरत ये बात दृष्टि भी जानती थी,

दृष्टि वह से आगे बढ़ गई, उसे गुस्सा आ रहा था लेकिन यहाँ गुस्से से काम नहीं चलने वाला था, इसलिए वो कुछ देर बाद फिर वापस आ गई, ह्रदय अब भी वही खड़ा था,

दृष्टि ने खुद hi बात करने का फैसला किया,

दरसहटि- hello

ह्रदय ने बड़ी गोर से दृष्टि को देखा और बोलै- hello मिस क्या मैं आपको जनता हु,

दृष्टि- शायद है शायद न,

ह्रदय- मतलब

दृष्टि- मेरा नाम दृष्टि ह, शायद आपको याद नहीं, लेकिन हमारी एक बार मुलाकात हुई थी, और वो कुछ अच्छी नहीं थी, मैं उसके लिए सॉरी बोलना चाहती हु

ह्रदय- आप यहाँ सॉरी बोलने आई ह, जिसके बारे में मुझे याद तक नहीं

दृष्टि- नहीं मैं तो यहाँ घूमने आई हु, यहाँ से निकली तो आपको खड़े देखा, और आपको देख क्र याद आ गया, इसलिए वापस मुद क्र आई हु सॉरी बोलने,

ह्रदय- लेकिन आपने ऐसा क्या किया जिसके लिए आ सॉरी बोल रही हैं,

दृष्टि- कुछ टाइम पहले आप कुछ लड़कियों के साथ थे, और वह एक लड़की ने आपको आकर सीधे किश क्र दिया था,

इतना बोल क्र दृष्टि ने शर्म ने सर निचे कर लिया, उसकी आँखों में नमी थी और चेहरे पैर शर्म,

ह्रदय- ोुह्ह्ह है है है याद आया आप तो वही लड़की हैं, आपने ऐसा क्यों किया, एक अनजान लड़के को ऐसे

दृष्टि- प्लस मुझे माफ़ क्र दीजिये, मैं किसी को जलने के चक्कर में अपनी लिमिट क्रॉस क्र गई थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था,

ह्रदय- आप में बड़ी हिम्मत ह, उस दिन जो किया वो भी बड़ी हिम्मत का काम ह, और आज उसके लिए माफ़ी मांगना भी बड़ी हिम्मत का काम ह,

दृष्टि- माफ़ी मांगना हिम्मत नहीं लेकिन उस दिन जो किया वो मेरे लिए बहुत ज्यादा था, मैंने कभी किसी के लिए ऐसा सोचा तक नहीं लाइफ में, वो करना तो मेरे लिए खुद को मार लेने के बराबर था,

ह्रदय- क्या मैं इतना बुरा हु जिसे किश करने की वजह से खुद को मर लोगी,

दृष्टि- नहीं नहीं नहीं ऐसी बात नहीं ह, आप तो इस दुनिया में मेरे जानकारी में दूसरे सबसे खूबसूरत और हैंडसम इंसान हैं,

ह्रदय- ठंकु जी, लेकिन दूसरे तो पहले कोण हैं कोई बर्फ

दृष्टि- नहीं जी मैं लड़को से दूर रहती हु, लेकिन वो मेरे पिता हैं वो आपसे काम नहीं हैं,

ह्रदय- पिता होते hi हैं ऐसे हैं, उनसे बढ़ क्र कोई नहीं होता,

दृष्टि- तो आपने मुझे माफ़ क्र दिया न

ह्रदय- एक शरत पैर

दृष्टि- कैसी शरत

ह्रदय- मैं अकेले कॉफ़ी पि रहा हु, मेरे साथ बैठ क्र एक एक कॉफ़ी हो जाये

दृष्टि- जरूर इतना तो मैं कर hi सकती हु, मैं बी अकेले यहाँ बोर हो रही हु,

ह्रदय दृष्टि को घर के अंदर ले गया,

दृष्टि तो चाहती hi यही थी, अंदर आकर ह्रदय कॉफ़ी बनाने चला गया, जबकि दृष्टि अपनी तेज नजरो को चारो तरफ दौड़ने लगी, जिससे कोई जानकरी निकल सके, वह एक औरत की तस्वीर लगी हुई थी,

दृष्टि उसे गोर से देखने लगी, तब तक ह्रदय भी आ गया,

दृष्टि- ये कोण ह

ह्रदय- मेरी माँ ह रूचि, आप जानती हैं

दृष्टि- नहीं मैं कैसे जानूँगी, काफी खूबसूरत हैं,

ह्रदय- मुझ पैर गई ह न,

ह्रदय की बात पैर दोनों है पड़े,

असल में वह दीपा की नहीं किसी और औरत की तस्वीर लगी हुई थी, जो ह्रदय ने घर में आते hi लगा दी थी, अंजलि ने समझा के भेजा था,

दृष्टि- वैसे आपकी गर्लफ्रेंड को बुरा लग जायेगा मैं आपके साथ बैठ क्र कॉफ़ी पि रही हु,

ह्रदय- गर्लफ्रेंड

दृष्टि- है वो शनाया

ह्रदय समझ गया ये पूरी डिटेल्स के साथ आई ह,

ह्रदय- उसे क्यों बुरा लगेगा, वैसे आपकी क्या दुश्मनी ह उससे, जो आपने सिर्फ उसे जलने के लिए इतना बड़ा कदम उठा लिया,

दृष्टि- कुछ खास नहीं बस कॉलेज में नंबर 1 बनने की लड़ाई में मैं वो बेवकूफी क्र गई,

ह्रदय- हहहहा लड़किया भी न बस कमल होती ह

दृष्टि- ऐसा कुछ नहीं,

ह्रदय- वैसे आपकी जानकरी के लिए बता दू मेरी कोई गफ नहीं ह बस दोस्त ह, गेम्स में मुलाकात हो गई थी, तो दोस्ती हो गई, थोड़ी घमंडी ह लेकिन बुरी नहीं ह,

दृष्टि ने ह्रदय की तरफ देखा उसकी आँखों में एक ख़ुशी एक चमक सी आ गई थी,

दोनों अपनी अपनी बाते बताने में लग गए और एक दूसरे पैर दोस्ती का जाल फैकने लगे,

इधर अन्य और रम्य निकल चुकी थी कामिनी की जानकारी निकलने काम्य और नैना निकल चुकी थी रजनी की बेटियों का पता करने, बाकि सब भी अपने अपने काम में लग गई थी,

सबने सबूत इकठे करने शुरू क्र दिए थे,

अगले 7 दिन तक सब पूरी महेनत क्र साथ लगे हुए थे, और कड़ी से कड़ी जोड़ने में लगे थे, इधर ह्रदय और दृष्टि की दोस्ती काफी मजबूत सी होने लगी थी, दृष्टि के दिमाग में साजिश थी लेकिन उसका दिल ह्रदय के लिए पूरी तरह साफ़ था, वो दिल से उसके बारे में कुछ गलत करने का ख्याल भी नहीं ला प् रही थी,

ह्रदय के सामने आते hi उसका दिल और आँखे उसके कण्ट्रोल से बहार हो जा रही थी, वैसे hi ह्रदय भी उसके लिए फीलिंग्स कुछ अलग hi थी,

दृष्टि ने दादी को कॉल किया

दृष्टि- दादी दोस्ती तो हो गई लेकिन अब वह कैसे लौ

दादी- कुछ नहीं बस जैसा मैं खेती हु वैसा hi करना, कल उसकी ताकत का नमूना भी देख लेंगे

दृष्टि- ऐसा कुछ मत करना जिससे किसी को खतरा हो जाये

दादी- तू फ़िक्र मत कर, बस जैसा मैंने कहा ह वैसा hi करना,

दृष्टि को बिना मन के भी है करनी पड़ी,

अगले दिन दृष्टि ह्रदय के पास पहुंची बाते करते करते दृष्टि ने पहाड़ो पैर घूमने को कहा, ह्रदय भी मान गया दोनों पहाड़ो पैर चल दिए,

दृष्टि की नजर चारो तरफ दौड़ रही थी और ह्रदय का धयान दृष्टि पैर था, वो समझ रहा था कुछ होने वाला ह,

ह्रदय- तुम्हारी फॅमिली में कोण कोण ह

दृष्टि- मेरी दादी और पापा

ह्रदय- और माँ

दृष्टि खामोश हो गई

ह्रदय- सॉरी, अपनों के खोने का दुःख मैं समझ सकता हु,

दृष्टि- उन्हें चीन गया ह, मुझसे चीन लिया मेरी माँ को, हमारे दुश्मनो ने मार दिया उन्हें,

ह्रदय- दुश्मन

दृष्टि- है जिनसे चुप क्र हम रहते हैं, अगर उन्हें पता चला तो वो हमे भी मार देंगे,

ह्रदय- ऐसे कैसे मार देंगे, मेरे रहते कोई कुछ नहीं क्र सकता,

दृष्टि- क्या तुम हमारी रक्षा करोगे,

ह्रदय- जरूर करूँगा,

दृष्टि- लेकिन उसके लिए तुम्हे

वो इतना hi बोल पाई थी की उनके सामने दो पहाड़ जैसे आदमी आकर खड़े हो गए, दोनों किसी राक्षश की तरह लम्बे और तगड़े थे, उन्हें देख क्र दृष्टि दर के सहम गई, उसे आश्चर्य हो रहा था उसके दादी ने ऐसे इंसान कहा से भेज दिए, दोनों की लम्बाई 8 फिट से काम नहीं थी ह्रदय जैसा लम्बा छोड़ा लड़का भी बच्चा सा दिख रहा था, उन्हें देख क्र ह्रदय भी शॉकेड था,

तभी उन आदमियों में से एक ने एक तलवार से ह्रदय पैर वार किया, ह्रदय चौकन्ना था तुरंत दृष्टि को दूर धकेल क्र दूसरी साइड में कूद गया,

ह्रदय- अरे चाचा कोण हो, पहले बात तो क्र लो कोण हो क्यों आये हो, किसने भेजा ह, सीधे हमला क्र दिया,

आदमी- हम तुम्हे उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं हैं, तुम्हे किसी भी किमीअत पैर अपने साथ लेकर जाना hi हमारा एक मात्रा लक्ष्य ह,

उनकी भाषा सुन क्र ह्रदय और दृष्टि उन्हें आँखे फाडे देखे जा रहे थे,

ह्रदय- इतना तो बता दो तुम्हे भेजा किसने ह,

आदमी- तुम्हे उनके समक्ष hi जाना ह खुद भेट क्र लेना,

इतना बोल क्र वो दोनों ह्रदय की तरफ बढे,

ह्रदय भी तैयार था, ह्रदय ने उछाल क्र एक की छाती में लात मरी लेकिन सामने वाला अपनी जगह से हिला तक नहीं, अब ह्रदय सच में चिंता में आ गया था, उससे ज्यादा दृष्टि दरी हुई और चिंता में थी,

वो दोनों तलवार से ह्रदय पैर हुम्ला क्र रहे थे, ह्रदय किसी तरह उनसे बच रहा था, ह्रदय को मौका hi नहीं मिल रहा था उन पैर वॉर करने का, दृष्टि ने तुरंत दादी को कॉल मिलाया,

दृष्टि- दादी ये दो कोण हैं, किसे भेज दिया ह आपने,

दादी- डोडो कोण दोनों मैंने तो 20 आदमी भेजे हैं,

दृष्टि- दादी यहाँ दो लोग आये हैं बहुत विशाल कए,

दादी- मुझे वीडियो कॉल कर और सब दिखा,

दरसहटि ने तुरंत वीडियो कॉल करके ह्रदय और उन दोनों आदमियों की लड़ाई दिखानी शुरू की,

दादी- ये कोण हैं मैं नहीं जानती, मैंने इन्हे नहीं भेजा

अब दृष्टि और घबरा गई,

ह्रदय अपनी पूरी फुर्ती और ताकत से लड़ रहा था, वो उन दोनों से शरीर में हल्का था तो उनके सामने ह्रदय की रफ़्तार बहुत तेज थी, जिसका वो फायदा उठा रहा था, ह्रदय ने हवा में उछाल क्र एक के नाक पैर लात मरी जिससे उसकी नाक से खून आने लगा और अपनी नाक पकड़ क्र बैठ गया तो ह्रदय ने तुरंत उसकी तलवार को उठा लिया, तलवार बहुत भरी थी, कोई नार्मल इंसान उस तलवार को नहीं उठा सकता था,

लेकिन ह्रदय भी कोई नार्मल इंसान नहीं था, जब तक वो पहला इंसान उठा ह्रदय ने दूसरे पैर तलवार से हमला क्र दिया, तलवार के साथ ह्रदय उस पैर भरी पड़ने लगा था, दोनों की तलवारे जब आपस में टकराती तो चिंगारिया निकलने लगाती,

दूसरा आदमी ह्रदय के पीछे आ गया और पीछे से हुम्ला करने hi वाला था की दृष्टि चीख पड़ी ोोोू राक्षश पीछे से वॉर कर रहा ह,

दृष्टि की आवाज सबके कानो में पड़ी ह्रदय एक दम चौकन्ना हो गया और साइड में घूम गया, ह्रदय तो बच गया लेकिन जब उसने दोनों आदमियों को देखा तो वो एक दूसरे से कमर मिला क्र खड़े हो गए और चारो तरफ देखने लगे, कहा ह कहा ह राक्षश,

उन्हें ऐसा देख क्र ह्रदय और दृष्टि सुरप्रीसेड हो गए, वो दोनों खुद राक्षश जैसे थे लेकिन राक्षश का नाम सुनकर कैसे बच्चो की तरह घबरा रहे थे,

तभी ह्रदय ने मौका देखते हुए उनकी तरफ डोडा और जोर से चिलाय, ये आया राक्षश और उन दोनों पैर कूद पड़ा, तलवार से उनकी बाजुओं पैर हुम्ला किया जिससे दूसरे की तलवार भी गिर गई, तभी एक शेर के दहाड़ने की आवाज की जिसे सुन क्र दोनों आदमी और घबरा गए और वह से भागने लगे,

ये देख क्र ह्रदय और दृष्टि शॉकेड थे, इतने ताकतवर इंसाने केवल एक नाम सुनकर दर क्र भाग गए, कोण ह ये राक्षश,

लेकिन ज़ालिम दादी शॉकेड सी लाइव वीडियो पैर सब देख रही थी, उन आदमियों के भागते hi दादी ने फ़ोन कटा और किसी को फ़ोन मिलाया,

इधर ह्रदय थोड़ा जख्मी हुआ था दृष्टि उसकी बहुत केयर क्र रही थी, यहाँ दृष्टि के मन में कोई छल नहीं था, उसकी आँखों में आंसू थे,

ह्रदय- कोण थे आदि मानव टाइप के लोग इतने ताकतवर और विशालकाय,

दृष्टि- मुझे नहीं पता, लेकिन इतना पता ह ये मेरे लिए आये थे

ह्रदय- तुम्हारे लिए मतलब?

दृष्टि- मेरे परिवार के दुश्मनो ने भेजा होगा, मेरा परिवार भी खतरे में होगा मुझे उनके पास जाना होगा,

ह्रदय- लेकिन तुम इन लोगो से कैसे लड़ पाओगी

दृष्टि- मैं नहीं लड़ सकती, लेकिन परिवार को ऐसे अकेला भी तो नहीं छोड़ सकती,

ह्रदय- मैं तुम्हारे साथ चलता हु

दृष्टि- तुम मेरे लिए अपनी जान खतरे में क्यों डालोगे

ह्रदय- अब हम दोस्त ह न, और दोस्तों के लिए कुछ करने के लिए सोचना नहीं पड़ता,

दृष्टि- लेकिन मैं कैसे

ह्रदय- ज्यादा मत सोचो, हमे चलना चाहिए कही देर न हो जाये,

ह्रदय और दृष्टि तुरंत वह से चल दिए, दृष्टि ने दादी को संस क्र दिया की काम बन गया ह्रदय उसके साथ वह आ रहा ह, आगे का काम वो सम्हाल ले,

दृष्टि सोच रही थी उसकी चल कामयाब रही वही ह्रदय खुश था की जल्दी hi आगे की मंजिल मिल जाएगी,

इधर चंडीगढ़ में वन्य ने वर्षा को बताया की निधि और ह्रदय के बिच क्या क्या हुआ ह, जिसे सुनकर वर्षा के फेस पैर चिंता के भाव आ गए,

वर्षा- ये ठीक नहीं हुआ

वन्य- क्यों माँ इससे हमे क्या प्रॉब्लम हो सकती ह

वर्षा- अगर प्रॉब्लम न होती तो अंजलि माँ तुझे कभी इन लोगो के साथ नहीं जोड़ती, कुछ तो ह जिसकी जरुरत हो सकती ह, वार्ना इस निधि को ह्रदय के करीब कभी आने hi नहीं देती वो

वन्य- आपको पता था ह्रदय और निधि के रिश्ते के बारे में,

वर्षा- तुझे चंडीगढ़ भेजना और निधि के साथ जोड़ना सब अंजलि माँ का फैसला था, उन्हें सब पता ह, मुझे उनसे बात करनी होगी,

वर्षा ने अंजलि को फ़ोन मिलाया और बताया

अंजलि- ये बोलना मुश्किल ह की सही हुआ या गलत लेकिन हमे ये निर्देश मिले ह की जो हो रहा ह उसे रोका न जाये, बस रिश्ते क्लियर करते जाये, तू वन्य को बोल की निधि से बात करे और उसके मन को परखे और पता करे वो क्या चाहती ह, ह्रदय से मैं बात करुँगी,

वर्षा- आप कभी क्लियर नहीं बताती

अंजलि- सब कुछ क्लियर मुझे भी नहीं पता, और जितना पता ह उसे बताने से मन किया गया ह, वर्ण जो हो रहा ह उसमे बढ़ा आ सकती ह, जो नहीं आणि चाहिए,

वर्षा- तुषार को ढूंढ़ना मकसद ह हमारा फिर ये निधि और अशोक कपूर का क्या रोले,

अंजलि- तुषार को ढूंढ़ना हमारा मकसद ह, लेकिन जिसकी वजह से तुषार मिलेगा उनका मकसद इससे बहुत बड़ा ह,

वर्षा- ठीक ह मैं वन्य को बोलती हु,

दूसरी तरफ

दिया और शनाया नंदनी के साथ कमिसनीयर के घर पैर थी और सुरेश चोपड़ा के केस से जुड़े हर इंसान की जानकारी ले रहे थे,

नैना और काम्य पहुंच चुकी थी अंजलि के पुराने शहर जहा वो अपने 6 बच्चो के साथ रहती थी, रजनी की बेतिया नेहा और शाक्षी की जानकरी निकलने, रजनी के मरने के बाद उनका क्या हुआ, इधर अन्य और रम्य पहुंच गई लखनऊ कामिनी की जानकारी निकलने,

आशमा और रैना भी दिया के साथ लगी हुई थी पूरी जानकरी निकलने में,

एक तरफ

सुमसान जंगल में एक बुजुर्ग औरत पैदल पैदल तेज तेज कदमो से चले जा रही थी, वो एक आश्रम के सामने जाकर रुक गई,

ये एक आश्रम जैसा बना हुआ था जो पूरी तरह पैक था चारो तरफ से ुचि दीवारों से घिरा हुआ,

औरत ने दरवाजे पैर पहुंच क्र हाथ जोड़े, तो अंदर से साधु जैसे रूप में आदमी आया

आदमी- क्या चाहिए

औरत- मुझे उनसे मिलना ह

आदमी- वो ऐसे किसी से नहीं मिलते

औरत- मैं उनकी सेविका हुआ

आदमी- अब तेरी उम्र सेविका बनने लायक नहीं रही, तू कैसे सेविका रह सकती ह, हहहहह

औरत- मुझसे मजाक मत करो उनसे कहो मैं आई हु

वो आदमी अंदर चला गया और कुछ देर बाद वापस आया

आदमी- जा उन्होंने बुलाया ह क्र आ सेवा, अब त्रि उम्र नहीं ह सेवा करने की, हहहहह

औरत गुस्से में देखती हुई चली गई,

अंदर जाकर वो एक दूसरा आदमी उसे अपने साथ लेकर अंदर चला गया, ये एक बड़ा सा हॉल था बहुत hi खूबसूरत और सभी आधुनिक चीजों से भरा हुआ, बहार से एक साधारण सी कुटिया लगती थी लेकिन अंदर से पूरा महल सा था,

औरत अंदर घुसी तो सामने एक ुचे से बिस्टेर पैर एक बहुत hi आकर्षक रूप वाला साधु बेष बुश में आदमी बैठा हुआ था, बहुत hi विशाल शरीर का मालिक था, आधा बदन नंगा था, शरीर किसी पहलवान जैसा, चेरे पैर मुस्कान लिए बैठा था,

औरत- चिरंजीवी बाबा ये सब क्या हो रहा ह,

इस बाबा का नाम चिरंजीवी था,

बाबा- क्या हुआ इतना व्याकुल क्यों ह तू, क्या शंश्य ह,

औरत- आज कुछ लोगो ने हुम्ला किया क्यों, वह क्यों किया हुम्ला उससे का सम्बन्ध ह,

बाबा- तू ये सब क्यों सोच रही ह तू अपना काम करती जा, तेरा उस सब से कोई सम्बन्ध नहीं ह, हम जो करते ह उसके पीछे का कारन कोई नहीं समझ सकता

औरत- लेकिन अचानक उनका सामने आने का क्या कारन ह, मुझे जानना ह

बाबा- गुस्से में… शांत, अब तू हमसे सवाल करेगी, तुझे जितना बोलै ह उतना क्र इससे आगे न सोच न पूछ,

औरत घबरा गई और तुरंत बाबा के पेअर पकड़ लिए,

औरत- माफ़ क्र दीजिये बाबा जी, गलती हो गई,

वो औरत बाबा के पेअर सहलाने गली और धीरे धीरे हाथ बाबा की जांघो पैर ले गई और सहलाने लगी,

बाबा ने मुस्कुरा क्र देखा,

बाबा- इस उम्र में भी तेरे अंदर बहुत गर्मी ह, लेकिन अब तू मेरी सेवा करने के लायक नहीं रही, अब वो आएगी, जल्दी से भेज उसे मैं उसका भोग लगाना चाहता हु,

औरत- जी बाबा जल्दी hi भेजती हु उसे,

बाबा- अब जा और जो बोलै ह करती जा, जल्दी hi तुझे उसका फल मिलेगा, जल्दी hi तू मेरी और मेरे शिष्यों की सेवा करने लायक हो जाएगी, फिर पुरे जीवन ख़ुशी से रहना,

औरत हाथ जोड़ क्र प्रणाम करते हुए बहार निकल गई,

औरत के जाते hi,

बाबा- जोर से चिल्ला क्र, bahuuuuuuuuuuuu

बाबा के सिलने के आवाज सुनकर आश्रम के सभी लोग भेज दौड़े वह आ गए, पुरे 20 लोग थे, सब के सब किसी अखाड़े के पहलवान लगते थे, कोई भी 6.5 फिट से काम नहीं था, सभी नंगे बदन निचे सफ़ीद धोती पहने, साथ में 10 औरते भी थी, जिनका शरीर और सुंदरता किसी भी हेरोइन को मात दे दे, बदन पैर बस एक सफ़ीद साड़ी और अंदर से नंगी,

सभी घबराये से हाथ जोड़े बाबा के सामने खड़े थे, तभी पीछे से दो विशालकाय शरीर वाले आदमी आकर खड़े हो गए,

जिनमे से एक का नाम बहु था,

उनके आते hi सभी ने रास्ता दे दिया,

दोनों आदमी बाबा के सामने हाथ जोड़े खड़े हो गए,

बाबा- क्या हुआ वह, तुम दोनों ने वह की जानकरी अब तक मुझे क्यों नहीं दी,

बहु- गुरु जी वो लड़का बहुत ताकतवर ह,

बाबा- तो इसी लिए तुम दोनों को भेजा था, और उसकी जानकरी मुझसे पहले इसके पास कैसे पहुंच गई,

बहु- गुरु जी वह एक लड़की भी थी,

बाबा- मुझे उस लड़की से मतलब नहीं ह, मुझे वो लड़का चाहिए, और वो भी जीवित, तुम दोनों मिलकर भी उसे नहीं ला पाए, इस धरती पैर तुम दोनों की ताकत के बराबर ताकत मिलना न मुमकिन ह,

बहु- गुरु जी, उसका सामना करना बहुत मुश्किल हो रहा था, बहुत फुर्तीला था वो और वह वो आ गया था

बाबा – कोण वो

बहु- राक्षश

राक्षश का नाम सुनते hi बाबा अपनी जगह से खड़ा हो गया, उसके चेरे पैर दर साफ़ दिख रहा था,

बाबा- क्या बकवास क्र रहा ह तू, वो यहाँ कैसे आ सकता ह, तूने उसे देखा क्या

बहु- नहीं गुरु जी वो लड़की छिलाई ोोू राक्षश

बाबा ने अपना सर पिट लिया,

बाबा- मूरख इंसान उसने तुम लोगो को राक्षश कहा होगा, आज के लोगो के लिए तुम रखसश से काम हो क्या,

मूरख किसी काम के नहीं हो तुम लोग, इतनी महेनत के बाद तो वो लड़का मिला ह तुम लोग उसे पकड़ भी नहीं पाए,

बहु- गुरु जी इस बार चमा कर दीजिये हम उसे अवश्य पकड़ लेंगे,

बाबा- मेरा क्रोध बढ़ने से पहले चले जाओ यहाँ से,

बाबा की बात सुनते hi दोनों वह से तुरंत निकल लिए,

बाबा एक सोच में दुब गया, बाकि खड़े लोग भी तुरंत वह से निकल गए,

इधर सभी लड़कियों ने अपने अपने टारगेट पैर नजर रखनी शुरू क्र दी थी, थोड़ी थोड़ी जानकरी मिलनी शुरू हो चुकी थी, लेकिन कोई मंजिल नहीं मिल रही थी, ह्रदय और दृष्टि अपने सफर पैर थे, जालिम दादी के शहर में,

जब ह्रदय वह पंहुचा तो उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था, क्योकि उसका सामना ऐसे इंसान से होने वाला था जिसके पास अंजलि और उसके परिवार के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी थी,

दृष्टि ह्रदय को एक घर में लेकर गई जहा एक औरत से उसका सामना हुआ पुराने से कपडे जैसे पुराने ज़माने में गाओं की औरते पहना करती थी,



ह्रदय बड़े गौर से उस औरत को देख रहा था,
 
अपडेट-25



औरत- दृष्टि ये कोण ह बेटी

दृष्टि- ये मेरे दोस्त हैं, इन्होने मेरी बहुत मदद की थी, ये हमे उस जालिम से छुटकारा दिलवाने आये हैं

औरत आगे बढ़ क्र ह्रदय के हाथ पकड़ क्र बैठ गई,

औरत- सच बीटा तुम हमे उस जालिम से छुटकारा दिलवा सकते हो, लेकिन वो बहुत खतरनाक ह

ह्रदय ने औरत को उठाया,

ह्रदय- ये क्या क्र रही हो आप, मैं सब ठीक क्र दूंगा,

औरत- दृष्टि ह्रदय को अंदर लेकर चल, हम गरीबो के घर में जो रुखा सूखा ह वो खिला,

दृष्टि ह्रदय का हाथ पकड़ क्र अंदर ले गई, लेकिन ह्रदय के माथे में सलवटे पद चुकी थी, उसने पलट क्र फिर से उस औरत को देखा,

नैना और काम्य जानकारी निकलती हुई रजनी के घर तक पहुंच चुकी थी, जो एक खण्डार सा बना हुआ था, वह कोई नहीं रहता था, अब सीधे किसी से जानकरी तो नहीं निकल सकती थी, लेकिन उसमे उनकी मदद की राजेश जी ने, राजेश जी उनके साथ रजनी के गाओं पहुंचे, और पता किया तो पड़ोस के एक बुजुर्ग आदमी से पता चला की 20 साल पहले रजनी को उसके परिवार ने घर से निकल दिया था, बदचलन औरत थी वो,

परिवार की बहुत बदनामी हो रही थी जिस सदमे ने रजनी की सास गुजर गई, फिर किसी से पता चला की रजनी मर गई, दो लड़किया थी घर में दोनों जवान थी लेकिन शादी नहीं हो प् रही थी, तभी छोटी बेटी ने एक और कांड क्र दिया अपनी माँ की तरह वो भी वैसी hi निकली और किसी के साथ घर से भाग गई,

जिससे उसका बाप सदमे में चला गया, अपनी बेइज्जती सेह नहीं पाया और खुद को फांसी लगा ली, पूरा परिवार तहसनस हो गया उस औरत की वजह से, अकेली बड़ी बेटी नेहा बची, यहाँ गाओं वालो ने उसके लिए जो हो सकता था किया, वो बेचारी ऐसे दुःख में चली गई थी की कभी उभर hi नहीं पाई, उसने कभी शादी hi नहीं की, और यहाँ से चली गई,

राजेश- अगर उससे मिलना चाहे तो कैसे मिल सकते हैं,

बुजुर्ग आदमी- पड़ोस का अनिल उसके बारे में जनता ह, लेकिन किसी को बताता नहीं ह, वो नेहा की जमीन पैर खेती करता ह, और पैसे नेहा को पहुँचता ह,

राजेश- अनिल का घर कोनसा ह

आदमी- नेहा के घर के बगल वाला, अनिल की पत्नी भी उस बदचलन रजनी के साथ मिली हुई थी, उसका भी राज खुला तो घर से भाग गई,

राजेश ने नैना और काम्य को गाड़ी में hi बैठाया और खुद अनिल के पास गया, और नेहा का एड्रेस जानना चाहा लेकिन उसने बताने से मन कर दिया,

राजेश ने काफी कोशिश की लेकिन अनिल ने कुछ नहीं बताया, राजेश उदास सा बहार आ गया,

नैना- क्या हुआ दादू

राजेश- बीटा वो एड्रेस नहीं दे रहा

काम्य- अब हम क्या करेंगे किसी को ये भी नहीं पता शाक्षी किसके साथ भागी थी कहा गई, और नेहा के बारे में पता चला तो कोई एड्रेस नहीं दे रहा,

तभी अनिल घर से बहार निकला और तेज तेज कदमो से जाने लगा,

राजेश- ये कहा भगा जा रहा ह

नैना- कोण ह ये

राजेश- ये hi ह वो अनिल

काम्य- कही वो किसी से मिलने तो नहीं जा रहा

नैना- पीछा करते हैं,

काम्य ने गाड़ी उसके पीछे लगा दी, अनिल बस में बैठ गया, काम्य ने गाड़ी बस के पीछे लगा दी, अनिल शहर में उतरा और एक ऑटो पकड़ क्र एक सोसिटी के बहार पहुंच गया, गेट पैर कुछ बताया तो गार्ड ने कॉल मिलाया फिर उसे अंदर जाने की परमिशन दी,

राजेश नैना और काम्य उसे देख रहे थे,

नैना- हो न हो ये जरूर दादू के बारे में जानकारी देने आया ह,

राजेश- लेकिन पता कैसे चलेगा,

काम्य- अभी पता चलेगा रुको जरा,

काम्य गाड़ी से उत्तरी और दौड़ती हुई सोसिटी के गेट पैर पहुंची,

राजेश- ये क्या कर रही ह

नैना- दादू उसके दिमाग में जरूर कुछ प्लान होगा आप चिंता मत कीजिये, उसका दिमाग बहुत तेज ह,

काम्य गेट पैर पहुंच क्र हफ्ते हुए गार्ड से बोली,

काम्य- hello सर जी मेरे पापा यहाँ आये थे क्या,

सर जी सुनते hi गार्ड एक दम छोड़ा हो गया इतनी खूबसूरत लड़की उसे सर जी बोल रही ह,

गार्ड- पापा, कोण ह आपके पापा मैडम

काम्य- अरे उन्होंने बोलै था मैं इस सोसिटी के बहार मिलूंगा, अनिल नाम ह उनका

गार्ड ने तुरंत रजिस्टर देखा, तो लास्ट अनिल ने hi एंट्री की थी

गार्ड- है है अनिल नाम से अभी एक आदमी अंदर गया ह,

काम्य- अभी गए हैं, ोुह्ह्ह मतलब मैं जल्दी आ गई, अब इंतजार करना पड़ेगा,

गार्ड- आप उनके पास hi चली जाइये न, वो मिस नेहा के घर गए हैं, फ-707 में,

काम्य के आँखों में चमक आ गई,

काम्य- नहीं नहीं पापा ने कहा था वो गेट पैर hi मिलेंगे, तो मैं उनका इंतजार यही करुँगी, उनकी मर्जी के बिना अंदर नहीं जाउंगी, ठंकु सर जी आपने बता दिया, जब तक पापा आते हैं मैं कुछ खा क्र आती हु,

इतना बोल क्र काम्य वापस चली गई और दूर कड़ी कार में बैठ गई,

नैना- क्या पता चला

काम्य- वो नेहा से hi मिलने गया ह, नेहा यहाँ रहती ह फ्लैट फ-707 में

राजेश- शाबाश बेटी तू बहुत होशियार ह,

काम्य- माँ और बाप दोनों का खून ह मुझमे

उधर अन्य और रम्य लखनऊ में पहुंच गई कामिनी के घर के बहार जहा पेइंग गेस्ट का बोर्ड लगा था,

रम्य- ले ये तो और आसान हो गया,

अन्य ने दूर बेल्ल बजे,

तो सामने एक औरत ने दरवाजा खोला

औरत- है जी क्या चाहिए

रम्य- मैडम हमे रूम चाहिए था आपके यहाँ पेइंग गेस्ट का बोर्ड लगा था, तो बात करनी थी,

औरत- अच्छा अच्छा आओ आओ, कहा से आई हो तुम दोनों

रम्य- अमेरिका से

औरत उन्हें अंदर ले गई और रूम में बैठाया,

औरत- अमेरिका से यहाँ

अन्य- हमे कुछ डाक्यूमेंट्स बनवाने ह गोवत. से और हमारी फॅमिली उत्तरप्रदेश से hi थी और लखनऊ में hi गोवत. के काम होते हैं, लेकिन उसके लिए हमे यहाँ रुकना पड़ेगा, अब होटल्स में रुकना इतने टाइम के लिए सही नहीं लगा हमे,

इसलिए कॉलोनीज में देख रहे थे कोई घर मिल जाये, आप के यहाँ बोर्ड देखा तो आ गए,

औरत- बहुत अच्छा किया, यहाँ मैं और मेरे पति hi रहते हैं हमे भी तुम्हारे जैसे खूबसूरत बच्चियों का साथ मिल जायेगा, वैसे कितने टाइम रहना ह

रम्य- काम से काम 1 महीना तो रुकना hi ह, चार्जेज जो आप कहे हमे कोई तकलीफ नहीं ह, बस घर का खाना और शांत माहौल मिल जाये

औरत- है है बिलकुल बीटा यहाँ हम दोनों hi हैं बस,

अन्य- आपके बच्चे नहीं रहते यहाँ

औरत- नहीं हमारी एक बेटी ह जो बहार रहती ह वो टीचर ह,

अन्य- तो एग्रीमेंट बनवाया जाये किस नाम से बनेगा

औरत- वैसे मेरा नाम कामिनी ह, पैर 1 महीने के लिए एग्रीमेंट की जरुरत नहीं ह, तुम लोग मुझे ऐसे hi पैसे दे दो,

रम्य- ठीक ह आप रूम दिखा दीजिये, फिर मैं पैसे देती हु,

कामिनी दोनों को रूम में ले गई, कामिनी का दो मंजिल का माकन था जिसमे दो कमरे निचे थे और दो कमरे उप्पेर,

कामिनी- यहाँ दो रूम ह एक मेरी बीटा का और दूसरा खली ह, जिसमे तुम दोनों रह सकती हो,

अन्य और रम्य का आधा काम हो गया था बस उन्हें अब कामिनी पैर नजर रखनी थी,

वही ह्रदय को एक कमरे में बैठा क्र दृष्टि बहार चली गई,

दूसरी तरफ....

दृष्टि- आंटी आप यहाँ क्या कर रही हो, ये सब क्या ह

औरत- अरे तेरी दादी का फ़ोन आया था की एक लड़का आ रहा ह, उसके सामने मुझे तेरी माँ का रोले करना ह, बाकि फॅमिली को उसके सामने नहीं आने देना चाहती वो, इसलिए मैं आई, वर्ण तेरी ये सेक्सी आंटी इन फाटे पुराने कपड़ो में होती क्या,

ये थी जालिम दादी की सेक्सी

दृष्टि- दादी भी न, न जाने क्या क्या करती ह, मैंने उसे बताया ह की मेरी माँ नहीं ह,

सेक्सी- क्या अब क्या करू

दृष्टि- कुछ नहीं बोल दूंगी तुम मेरी मौसी हो, माँ के जाने के बाद यहाँ आती रहती हो

सेक्सी- है ये ठीक रहेगा,

सेक्सी- वैसे लड़का बहुत हॉट ह यार

दृष्टि- आंटी अपनी गन्दी नजरो को दूर रखो उससे,

सेक्सी- ओहो तेरे दिल में कुछ ह क्या

दृष्टि- फालतू की बकवास नहीं मेरे साथ, ये गन्दा खेल दादी और पापा के साथ hi खेलो, मुझसे दूर रहना,

इतना बोल क्र दृष्टि चली गई, सेक्सी ने अजीब सा मुँह बनाया

सेक्सी खुद से hi- इतना स्मार्ट ह एक बार तो इसका स्वाद चखना बनता ह, हहहहहए

ह्रदय- दृष्टि ये औरत कोण ह

दृष्टि- ये मेरी मौसी ह, कभी कभी यहाँ आती ह, जब मैं बहार होती हु तो दादी की हेल्प के लिए आ जाती हैं,

ह्रदय- ok, लेकिन बाकि परिवार कहा ह,

दृष्टि- वो लोग बहार गए हुए हैं, तुम क्या कहोगे

ह्रदय- मैं कुछ नहीं खता, कभी किसी के हाथ का खाना नहीं खता,

दृष्टि- अरे तो क्या भूके रहोगे

ह्रदय- नहीं दही और फरिट्स खा लूंगा, लेकिन मुझे उन लोगो से मिलना ह जिन्होंने तुम्हारे परिवार को डराया हुआ ह,

दृष्टि- लम्बा सफर करके आये हो थोड़ा आराम कर लो, तब तक मैं तुम्हारे लिए खाने के लिए लती हु, और है आज तुम मेरे हाथ का खाना खाओगे समझे,

दृष्टि ने बहार आकर दादी को कॉल किया, दादी ने उसे आगे की प्लानिंग समझा दी,

इधर ह्रदय ने अंजलि को यहाँ के हालत बता दिए और ाव्य को यहाँ आने से मन किया, ये गाओं का इलाका था, यहाँ ाव्य को खतरा हो सकता था,

दृष्टि ह्रदय के लिए खाने को ले आई, ह्रदय को पता था अगर अपनी मंजिल को पाना ह तो अपना ये नियम तोडना hi पड़ेगा, इसलिए उसने चुपचाप खा लिया, खाना उसे बहुत अच्छा लगा, जैसे उसी के घर का खाना हो,

दृष्टि- शाम हो चुकी ह, कल सुबह मैं गाओं घुमाऊँगी, तुम चाहो तो बहार खुली जगह पैर लेट सकते हो या यहाँ पैर भी सो सकते हो,

ह्रदय- जहा तुम्हे ठीक लगे,

रात में ह्रदय लेता हुआ था, दृष्टि दूसरे कमरे में लेती थी, ह्रदय की आँखों में नींद नहीं थी, रात में उसे प्यास लगी तो वो उठा कर बहार आ गया, और घर बहार लगे नल से पानी पिने लगा, फिर थोड़ा टहलने लगा, गाओं एक दम सुमसान था, वो जैसे hi घर के अंदर घुसने को हुआ तो सामने का नजारा देख क्र वही रुक गया,

एक औरत बिलकुल नंगे बदन उसके सामने से चली आ रही थी, उसे देख क्र ह्रदय तुरंत पीछे हो गया, औरत हाथ में बाल्टी लिए बिलकुल नंगी होकर बहार को चली आ रही थी, उसे देख ह्रदय सुरप्रीसेड था,

ये दृष्टि की मौसी थी, एक दम गठीला बदन, एक एक अंग बिलकुल शेप में ढला हुआ था, चूचिया एक दम कड़क थी, गांड की चौड़ाई किसी भी लड़की से ज्यादा फैली हुई थी,

ह्रदय शॉकेड था उसे इस रूप में देख क्र, मौसी घर के बहार आई और नल पैर बाल्टी रख क्र उसे भरने लगी, ह्रदय को झटके पैर झटके लगे जार हे थे, इस औरत को जरा भी दर शर्म नहीं थी, रात में गाओं में खुली सड़क पैर नल पैर नंगी होकर पानी भर रही थी, पानी भर जाने पैर वो वही बैठ क्र उसमे नहाने लगी,

ह्रदय अपनी जगह से हिल नहीं सकता था, उसे दर था कही आवाज होने से मौसी का पता न चल जाये, वो चुप चाप खड़ा रहा, लेकिन तभी मौसी ने एक धमाका कर दिया,

वो कड़ी हुई और अपना एक पेअर उठा क्र नल पैर रखा और पानी से अपनी छूट को धोने लगी, चाँद की रौशनी थी जिसमे बहुत ज्यादा साफ़ तो नहीं दिख रहा था, लेकिन फिर भी बहुत कुछ क्लियर दिख रहा था, इस रूप को देख क्र ह्रदय के लुंड ने भी एक बार झटका मारा,

मौसी फिर से बैठ गई, मौसी का फेस दूसरी तरफ था तो ह्रदय ने तुरंत वह से निकलना सही समझा, और वो धीरे से निकल क्र अंदर आ गया, उसके अंदर जाते hi मौसी ने पलट क्र देखा और मुस्कुरा दी,

उसके फेस पैर एक खतरनाक मुस्कान थी,

वही दूसरी तरफ नैना और काम्य नेहा की सोसिटी के बहार पूरा दिन नजर रखे हुए थी, नेहा सोसिटी से बहार निकलती तो उसका पीछा करती, उसकी हर गतिविधि पैर नजर रखे हुए थी,

नेहा किस्से मिलती ह कोण नेहा से मिलने आता ह, इधर राजेश सोसिटी में किसी जानकर को ढूढ़ने में लगे थे जिससे अंदर जाने का तरीका मिल जाये,

और सफलता मिली तो अंजलि के तरीके से, अंजलि ने एक फ्लैट खरीद लिया राजेश जी के नाम से नेहा की hi बिल्डिंग में,

काम्य- ये अंजलि माँ का दिमाग कुछ ज्यादा hi तेज चलता ह,

राजेश- बेटी उसने अपने दिमाग के बल पैर hi आज तक दुश्मनो को हराया ह, बस एक बार वो मात खाई ह जिसकी सजा आज तक अपने बेटे और बेटी को खो क्र भुगत रही ह, उसके अलावा अंजलि को मात देना नामुमकिन ह,

नैना- वो तो दिख hi रहा ह, लेकिन अब हम वह तक कैसे पहुंचेंगे,

राजेश- उसका इंतजाम क्र दिया ह, दीपा आ रही ह, दीपा और नेहा दोस्त थे, अगर नेहा कुछ भी गलत क्र रही ह तो दीपा उसे परख सकती ह, दीपा hi थी जिसने रजनी का राज खुलवाया था,

काम्य- ये जल्दबाजी न हो जाये,

राजेश- अब इंतजार का वक़्त नहीं ह, अब तक बहुत इंतजार क्र लिया, अगर अंजलि ये सब कर रही ह मतलब अब hi सही समय ह,

रात में दीपा राजेश नैना और काम्य के पास पहुंच गई,

इधर अन्य और रम्य कामिनी के साथ दोस्ती बढ़ने में लगी हुई थी, और कामिनी का पति जो हमेशा एक कमरे में hi बैठे रहते, किसी से बात नहीं करते, कामिनी उससे किसी को मिलने भी नहीं देती थी,

अन्य- कामिनी आंटी आपसे एक बात पुछु

कामिनी- है पूछो

अन्य- ये अंकल हमेशा अंडर hi क्यों रहते हैं,

कामिनी- उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं ह, किसी से कुछ भी बोल देते हैं इसलिए उन्हें बहार नहीं जाने देती वर्ण झगड़ा करवा देंगे,

रम्य को कामिनी की बात हजम नहीं हुई, उसने अन्य को इशारा किया की इस बारे में जानकरी निकालनी पड़ेगी,

दोनों ने प्लान बनाया और अगले दिन अन्य कामिनी के पास पहुंची

अन्य- आंटी मुझे आपकी हेल्प चाहिए, मुझे डीएम ऑफिस जाना ह, वह कुछ पैसे देने हैं एक ब्रोकर लेकर जा रहा ह वो मुझे 10000 डॉलर मांग रहा ह, अगर आप चले तो शायद काम में काम हो जाये,

आप चाहे तो मैं आपको पैसे दे दूंगी,

10000 डॉलर का नाम सुनते hi कामिनी के अंदर लालच भर आया, उसने तुरंत अपने दिमाग की लोमड़ी दोड़नी शुरू की और किसी को फ़ोन किया,

कामिनी- है बेटी काम हो जायेगा, मैं ीक से बात की ह वो 9000 डॉलर में काम क्र देगा लेकिन पैसे मेरे हाथ से लेगा, किसी और पैर उसे विश्वास नहीं ह,

अन्य- ठीक ह आंटी मुझे कोई ऐतराज नहीं ह,

कामिनी- तुम दो मिनट्स रुको मैं तैयार होकर आती हु,

कामिनी जल्दी से तैयार होकर आ गई,

अन्य- मैं और आप hi चलते हैं कही ज्यादा लोग देख क्र वो नाराज हो जाये

कामिनी- है है ये सही ह,

अन्य कामिनी को लेकर निकल गई, घर में रह गई रम्य और कामिनी का पति,

वही दूसरी तरफ दीपा नैना और काम्य को लेकर चल दी नेहा के घर,

ह्रदय दृष्टि के साथ गाओं में घूमने चल दिया था, उसे इस गाओं की पूरी डिटेल निकालनी थी,

और दिया और शनाया को मैनेजर की जानकारी मिल गई थी जो एक हॉस्पिटल में एडमिट था, मरने की हालत में जिसके बच्चे भी उसका साथ छोड़ क्र जा चुके थे, सरकारी हॉस्पिटल में लावारिसों की तरह पड़ा हुआ था, कभी भी उप्पेर वाले का बुलावा आ सकता था,

इधर वन्य निधि के दिल का हाल जानने में लगी हुई थी, ाव्य को गाओं नहीं जाने दिया गया तो वो रैना और आशना के साथ उन पुलिस वालो की खोज में थी जो सुरेश चोपड़ा के एनकाउंटर में शामिल थे, उन्हें बहुत से राज पता चल रहे थे,

साडी घटनाये एक साथ हो रही थी, तो सबसे पहले चलते ह दीपा के पास जो नेहा क्र घर के सामने कड़ी थी,

नेहा ने दरवाजा खोला और सामने दो खूबसूरत लड़कियों को देख क्र चौंक गई,

नेहा- किस्से मिलना ह बीटा

तभी पीछे से दीपा निकल क्र आई

दीपा- मेरी दोस्त से

नेहा की नजर जैसे hi दीपा से मिली तो उसने एक पल उसे गौर से देखा और गले hi पल आँखों में आंसू चालक आये, दीपा की आँखे भी नाम थी,

नेहा बस कड़ी दीपा को देखती रही,

दीपा- अंदर नहीं बुलाओगी

नेहा जैसे होश में आई और अंदर आने का रास्ता दे दिया,

दीपा नैना और काम्य अंदर आ गए, नेहा ने एक बार बहार झाका और गेट फिर से बंद क्र लिया,

नेहा- तुम्हे मेरा एड्रेस कैसे मिला, क्यों ढूंढ रहे हो मुझे, राजेश अंकल क्यों पूछने गए थे गाओं में

दीपा- शांत हो जा आराम से बात कर्नेगे,

नेहा- बात करने के लिए ह की क्या, किस बारे में बात करू अपनी बर्बादी के बारे में, जो तुम्हारी वजह से हुई

काम्य- इनकी वजह से या आपकी माँ

दीपा- शांत बेटी ये हम दो दोस्तों की बात ह, तुम बिच में मत आओ,

बोल नेहा जो तुझे बोलना ह,

नेहा- क्या बोलना ह अगर तुम मेरी दोस्त बन क्र नहीं आती तो ये सब न होता, तुमने तुषा रको मेरी माँ के पास भेजा, अगर तुम नहीं भेजती तो ये सब न होता,

मेरा परिवार बर्बाद न होता, मेरे पिता जिन्दा होते,

दीपा- अगर मैं तुम्हारी दोस्त न बनती तुषार को न भेजती उससे तुम्हारी माँ का चरित्र साफ़ रहता,

नेहा- जैसा भी रहता हमे तो पता न चलता

दीपा- और इसकी क्या गारंटी ह की भविष्य में वो वैसा न करती जो मेरे साथ किया, उस औरत को कोई और मिल जाता तो उसके लिए तुम सब को छोड़ क्र न भाग जाती,

वो मेरी भी माँ थी क्या उसने मेरे साथ बेटी जैसा व्यव्हार किया, हमेषा मोहरा बना क्र रखा,

उसे पता था तुषार और शाक्षी का आपस में रिश्ता बन रहा ह फिर भी उसने तुषार के साथ सम्बन्ध बनाने की पहल की,

नेहा की आँखों से आंसू भेने लगे, वो फुट फुट क्र रोने लगी,

नेहा ने दीपा को गले से लगा लिया,

नेहा- उस औरत ने सब बर्बाद क्र दिया, पूरा परिवार समाज में इज्जत सब ख़तम क्र दिया, उसकी वजह से मैं पिछले 20 साल से अकेली तनहा जी रही हु, कोई अपना नहीं ह,

दीपा- उसकी वजह से तुम hi अकेली नहीं रही ह मेरी बहन वो जाते जाते भी हम दोनों के परिवारों को तबाह क्र गई,

नेहा- तुम क्यों आई हो यहाँ क्या चाहिए,

दीपा- तुम्हे इस अकेले पैन से बहार निकलने आई हु, तुम अकेली नहीं हो हमारे पिता अलग सही लेकिन उस बदचलन औरत की वजह से बहन का रिश्ता तो बनता hi ह, उस बहन के रिश्ते से आई हु,

नेहा- मेरी खुद की सगी बहन मुझे मेरे परिवार को बर्बाद करके भाग गई, अब मैं किस पैर विश्वास करू

दीपा- क्या हुआ उसे कहा गई वो

नेहा- मुझे नहीं पता मैं कुछ नहीं जानती

दीपा- नेहा अगर तुम चाहती हो तुम समाज में सम्मान से सबके सामने सर उठा क्र जी सको तो तुम्हे मुझे सब कुछ बताना होगा,

नेहा ने आंसुओ में भीगी आँखों से दीपा को देखा,

नैना और काम्य दोनों शांत बैठ देख रही थी,

नेहा- वो बदल गई थी, माँ के मरने की खबर सुनकर वो बदल गई थी, वो एक दम खामोश हो गई थी,

दीपा- शुरू से बताओ

नेहा- मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हु

तभी नैना हाथ में पानी का गिलास लिए कड़ी थी,

नैना- मौसी आप पानी पीजिये,

नेहा ने नैना को देखा- मौसी

दीपा- तुम रिश्ते छोड़ सकती हो लेकिन रिश्ते तुम्हे नहीं छोड़ेंगे, ये मेरी बहन की बेटी ह, तो मेरी तरह तुम भी इनकी मौसी लगी न,

नैना- मौसी आप बैठिये मैं चाय बना क्र लती हु

नेहा- लेकिन सामान

नैना- सामान किचन में hi होगा न मैं ढूंढ लुंगी,

दीपा- तुम बैठो और मुझे सब बताओ,

दूसरी तरफ दिया और शनाया हॉस्पिटल में उस मैनेजर के सामने कड़ी थी जो अपनी आख़री सांसे गईं रहा था,

दिया- hello मर. राहुल

राहुल ने आँखे खोल क्र देखा तो सामने दो बहुत hi खूसूरत लड़किया कड़ी थी,

उसने आस पास देखा उसे लगा किसी और को पुकार रही हैं,

दिया- मैं आपसे hi बात करने आई हु राहुल जी

राहुल- मुझसे? क्या मैं तुम दोनों को जनता हु, मुझे कुछ याद नहीं ह

राहुल ने बड़ी मुश्किल से ये शब्द बोले

दिया- तुम हमे नहीं जानते लेकिन हमारी फॅमिली को जरूर जानते हो.

शनाया- मैं अंजलि की बेटी सीमा की बेटी हु, सीमा को तो अच्छे से जानते होंगे तुम, सुरेश चोपड़ा के पालतू डॉग थे न तुम

अंजलि और सीमा का नाम सुनते hi राहुल की साँस फूलने लगी,

दिया- शांत हो जाओ राहुल हम यहाँ तुमसे बदला लेने नहीं आये हैं बस कुछ जानकारी लेने आये हैं,

राहुल- मैंने कुछ नहीं किया, मैं उन लोगो से तभी दूर हो गया था, मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं ह अब

दिया- हमने कब कहा तुमने कुछ किया ह, तुम इतना क्यों दर रहे हो,

राहुल- अंजलि मम से बोलना मुझे माफ़ क्र दे, मेरी गलती नहीं थी, मैं बहक गया था, जिसकी सजा मैं आज तक भुगत रहा हु, उसने जबरदस्ती मुझसे करवाया,

शनाया- क्या करवाया किसने करवाया, तुम किस्से दर रहे हो,

राहुल- तुम लोगो ने मुझे ढूंढा कैसे, अगर तुमने ढूंढ लिया ह तो वो भी ढूंढ लेगी, वो मुझे मर देगी, मेरे परिवार को मर देगी, उससे बचने के लिए मैं अपने परिवार से दूर हो गया, सबसे दूर हो गया, यहाँ लावरिशो की तरह पड़ा हु, वो मर देगी,

दिया- कोण मर देगी, क्या किया ह तुमने

राहुल- उसने उन सबको मर दिया जिन्होंने उसका साथ दिया था, मुझे नहीं पता था वो तुषार को

राहुल इतना hi बोल पाया था की उसके जबान बंद हो गई उसकी धड़कन रुक गई,

दिया- राहुल राहुल उठो क्या किया तुषार को कोण थी वो किसने किया,

शनाया दौड़ क्र डॉक्टर को बुला क्र ले, डॉक्टर ने चेक किया और बोलै, इनका हार्ट फ़ैल हो गया ह, इन्हे पहले होइ 3 अटैक आ चुके थे, इनकी हालत कोई भी प्रेशर झेलने की नहीं थी, शायद किसी बात से ज्यादा प्रेशर पद गया,

डॉक्टर ने लोगो को बुलाया- इन्हे उठाओ को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो,

दिया- इनकी बॉडी का क्या होगा

डॉक्टर- लावारिश ह तो सरकारी खर्चे पैर इनका इलाज हो रहा था तो अंतिम संस्कार भी सरकारी खर्चे पैर होगा,

शनाया और दिया के चेहरे पैर बहुत दुःख और गुस्सा था, इस गिरे हुए इंसान के मरने का दुःख हो रहा था उन्हें,

दिया- इसके पास जानकरी थी शनाया, ये हमारे हाथ से निकल गया,

शनाया- ये तो सब बर्बाद हो गया, ये किसकी बात कर रहा था, क्या हुआ था पापा को,

दिया- ये बार बार मर देगी बोल रहा था मतलब कोई औरत थी, ये किसी औरत से इतना डरेगा,

शनाया- अंजलि माँ को बताना चाहिए

दिया ने अंजलि को फ़ोन मिला क्र सब बताया,

अंजलि- मुझसे गलती हो गई मैंने उसे बेकार समझ क्र छोड़ दिया था, मुझे लगा उसके पास जानकरी नहीं होगी, वो बुरी हालत में अपने दिन गुजर रहा था, ये मुझसे गलती हो गई,

खैर जो हो गया सो हो गया लेकिन तुम दोनों ने अच्छा काम किया ह, एक जानकरी तो निकल ली की ये किसी औरत का काम ह,

तुम अब वापस आ जाओ आगे की जानकरी मैं निकलती हु,

इधर ह्रदय दृष्टि के साथ घर से निकला तो सामने उसकी मौसी आ गई, जिसे देख क्र ह्रदय को रात का सीन याद आ गया, ह्रदय ने मौसी की आँखों में झाकने की कोशिश की लेकिन वह सब नार्मल था,

मौसी- कहा जा रहे हो तुम लोग

दृष्टि- मौसी मैं ह्रदय को गाओं घूमने जा रही हु, और सब दुश्मन देख ले अब हमारे साथ हमारा रक्षक ह, हमे किसी का दर नहीं ह,

मौसी ने ह्रदय के सर पैर हाथ घुमाया और फिर ह्रदय को अपने छाती से लगा लिया, और उसपर प्यार दिखने के बहाने अपनी कड़क चूचिया ह्रदय की छाती में रागादि, ह्रदय को मौसी की ठोस चूचियों का अहसास हो रहा था,

दृष्टि गुस्से में लाल हो गई और बोली

दृष्टि- ह्रदय चले देर हो रही ह,

ह्रदय एक दम अलग हुआ है है चलो


दृष्टि गुस्से में मौसी को देखती हुई चली गई, और मौसी ने गन्दी सी स्माइल दी दृष्टि को,
 
अपडेट-26






कामिनी और अन्य के घर से निकलते hi रम्य कामिनी के पति के कमरे में पहुंची जहा वो बीएड पैर लेते हुए थे,

रम्य- hello अंकल कैसे हो आप, क्या मैं अंदर आ सकती हु

अंकल- तुम अंदर hi तो कड़ी हो और कितना अंदर आओगी

रम्य- ओह्ह है श्री वो मैं चाय पीना चाहती थी, आंटी तो ह नहीं मैं खुद बना लू क्या

अंकल- बना लो मुझे क्या

रम्य- आप पियोगे चाय

अंकल ने रम्य को देखा, उसकी आँखों में एक चमक थी, लेकिन कुछ बोल नहीं पाए,

रम्य- चलो मैं बना hi लेती हु,

रम्य चाय बना ले

रम्य- लो अंकल आज मेरे हाथ की चाय पियो और बताओ कैसी बानी ह,

अंकल ने चुपचाप चाय उठाई और एक घुट पि क्र आँखे बंद कर ली,

अंकल- वह कितने सालो बात इतनी अच्छी चाय पि ह, मेरी बेटी रश्मि ऐसी hi चाय बनती थी,

रम्य- रश्मि? आपकी बेटी तो तम्मना ह न

अंकल चुप हो गए

रम्य- आंटी से पूछ लुंगी

अंकल- नहीं नहीं उसे कुछ मत बोलना ये भी मत बोलना की तुम यहाँ आई थी, और चाय बनाई थी, वो नागिन ह नागिन मुझे मर देगी

रम्य- ये क्या बोल रहे हो आप

अंकल- मुझे उस नंगीं ने कैद क्र रखा ह मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, मैंने न जाने क्यों उससे शादी की, उसने सब तबाह क्र दिया,

रम्य- आप चिंता मत कीजिये मैं कुछ नहीं बताउंगी, मैं वडा करती हु, आप मुझे बताइये मैं आपकी हेल्प करुँगी,

अंकल- तुम मुझे यहाँ से निकल लोगी

रम्य- जरूर मैं आपको यहाँ से बचा क्र ले जाउंगी, आप मुझे बताइये,

अंकल- इस नागिन ने मुझे अपने प्यार के जाल में फसाया और मैं सीधा सा आदमी इस्सके जाल में फास गया, मेरी एक बेटी थी रश्मि मेरी पहेली पत्नी से उसके भले के लिए मैंने इससे शादी की, मैं दूसरा बच्चा नहीं छटा था लेकिन इसकी जींद पैर बच्चा किया तो वो भी बेटी हुई, आशिमा,

मेरी दोनों बछिया बहुत प्यारी थी, फिर दो लड़के हमारे यहाँ रहने आये, सचिन और कपिल, मेरे बार बार मन करने के बाद भी इसने दोनों लड़कियों को उन लड़को के प्यार के चक्कर में फस्वय, और मेरी बछिया उनके प्यार में पद गई और उनसे शादी करके चली गई, ये नागिन खुद मिल आई लेकिन मुझे कभी उनसे मिलने तक नहीं दिया,

रम्य- फिर ये तम्मना कोण ह

अंकल- जब मैं बार बार अपनी बेटी से मिलने को बोलता तो ये मन कर देती, फिर एक दिन बोली तुम अपनी बेटी से मिलना छाते हो न तो एक और बच्चा पैदा कर लो,

मैंने मन किया लेकिन ये जींद पैर आड़ गई और मेरे साथ उस रात इसने रपे किया, बेटी इस नागिन ने मेरा रपे किया, मुझे बांध क्र बीएड पैर, इसमें न जाने मुझे क्या खिलाया की उसी दिन से मेरी तबियत ख़राब रहने लगी, और 7 महीने बाद इसको बेटी पैदा हुई,

रम्य- लेकिन बच्चा तो 9 महीने में होता ह,

अंकल- मैं उस समय पूछने की हालत में नहीं था, और मेरा परिवार गाओं में रहता था उन्हें महीनो का पता नहीं था,

वो बच्ची बड़ी होती गई इसने उसे हमेशा गन्दी शिक्षा दी, उसके बॉयफ्रैंड्स बनवाये, उसे पता नहीं क्या क्या करवाया उसने दिमाग में नफरत हवस भरने लगी, मैं रोकता तो नहीं रूकती,

मैं कमजोर होता गया और बिस्टेर पैर आ गया, और ये अपनी मनमानी करती गई, ये रंडी ह रंडी न जाने कहा कहा मुँह मरती थी, मैं कुछ नहीं कर सका, मुझे डरा धमका क्र रहती ह,

रम्य- क्या आपके सामने किसी अंजलि तुषार का कोई जीकर होता ह,

अंकल- है ये किसी अंजलि से बहुत नफरत करती ह, बोलती ह उसे बर्बाद क्र दूंगी,

रम्य- और क्या खेती ह

अंकल- मुझे नहीं पता बेटी तू मुझे यहाँ से निकल ले, मैं मर जाऊंगा ये मुझे मर देगी,

रम्य- आप फ़िक्र मत कीजिये ये आपका कुछ नहीं बिगड़ सकती, मैं जब यहाँ से जाउंगी आपको लेकर जाउंगी, बस आप खामोश रहना और डरना नहीं, और ये आंटी जब तम्मना से कोई बात करे आपके सामने या किसी से भी तो आप धयान से सुन्ना और मुझे बता देना

अंकल- तू सच बोल रही ह तू मुझे ले जाएगी यहाँ से,

रामय- है अंकल

अंकल- ठीक ह मैं इसकी साडी बात तुझे बताऊंगा,

रम्य- मैं जल्दी hi आपको यहाँ से निकल लुंगी,

इधर नेहा ने दीपा को बताना शुरू किया,

दीपा- मुझे शुरू से सब बताओ क्या हुआ,

नेहा- जिस दिन रजनी की उस हरकत को सबने देखा तो घर में बहुत हंगामा हुआ और पापा और दादी ने उसे घर से निकल दिया, शाक्षी बहुत रो रही थी,

फिर कुछ दिन बाद खबर मिली की रजनी मर गई, हमे तो उसकी लाश भी नई मिली थी, और बाद में पता चला तुम्हारे परिवार में से hi किसी ने उसे मारा था और जला दिया,

दादी ये दर्द सेह नहीं प् रही थी, और सदमे में hi गुजर गई,

और वो सुनीता रजनी के पाप की साथी, वो भी घर से भाग गई थी, फिर लगभग 1 साल बाद शाक्षी से एक औरत मिलने लगी, कुछ लोगो ने उसे देखा था लेकिन कोई उसे नहीं जनता था, और एक दिन लत्तेर मिला की मैं यहाँ से जा रही हु, मेरी जिंदगी ऐसे घुट घुट क्र जीने के लिए नहीं ह, मैं अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती हु,

जिन लोगो ने मेरी माँ को मारा ह मैं उन्हें सबक सिखाऊंगी,

बस इतना hi लिखा था,

जब वो घर से भाग गई तो समाज में पापा का निकलना मुश्किल हो गया और उन्होंने खुद को फांसी लगा ली, और मैं वह अकेली हो गई, तो सब कुछ छोड़ चढ़ क्र यहाँ आ गई, एक स्कूल में पद्धति हु, और गाओं की जमीन से कुछ पैसे आ जाते हैं उसमे गुजरा कर रही हु,

दीपा ने नेहा को गले से लगा लिया,

दीपा- मैं जानती हु उस घटना की वजह से सब बर्बाद हो गया, वो मेरी गलती थी मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, लेकिन उस आगे में इतना गुस्सा भरा हुआ था उस औरत के लिए की मैं सही गलत सोच hi नहीं पाई, ये भी भूल गई की उससे तुम सबकी जिंदगी का क्या होगा,

नेहा- तुमने कुछ गलत नहीं किया, तुम्हारी जगह अगर मैं होती तो शायद मैं भी यही करती,

काम्य- अब कहा ह शाक्षी, कुछ जानकारी ह उनके बारे में

नेहा- नहीं बस कुछ सालो पहले किसी ने उसे ***** शहर में देखा था,

काम्य- उनकी कोई तस्वीर ह क्या आपके पास,

नेहा ने शाक्षी के कॉलेज के टाइम की तस्वीर उन्हें दिखा दी, काम्य ने अपने फ़ोन में फोटो खींच लिया,

दीपा- तुम्हारी उससे कभी बात नहीं हुई

नेहा- नहीं जब से वो गई ह वापस लोट क्र नहीं आई, उसने ये तक नहीं सोचा उसकी बहन का क्या होगा,

दीपा- तुम अपना सामान पैक करो और चलो मेरे साथ

नेहा- कहा?

दीपा- घर अपने परिवार के पास, हमारी माँ एक थी तो जो मेरा ह उस पैर तुम्हारा भी हक़ ह

नेहा- नहीं मेरी बहन, मैं खुद अपने सरे हक़ छोड़ क्र आ गई तो अब किसी और के हक़ क्या लुंगी

दीपा- जो तुम्हारे साथ हुआ उसकी जिम्मेदार मैं हु और अपनी गलती को मैं सुधरूंगी

नेहा- अब वो सब बदल नहीं सकता

दीपा- बदल तो नहीं सकता लेकिन आने वाली जिंदगी को तो बदला जा सकता ह, तुम्हे मेरी कसम ह बहन तुम मेरे साथ चलो,

नेहा- नहीं दीपा ये नहीं हो सकता

दीपा- अगर तुम नहीं जाओगी तो मैं यहाँ तुम्हारे साथ रहूंगी,

नेहा- ये तुम्हारा घर ह जब तक चाहे रहो,

दीपा- नैना काम्य तुम लोग जाओ मैं यहाँ नेहा के साथ रहूंगी, और इसे अपने साथ hi लेकर आउंगी,

काम्य- ठीक ह मौसी,

दोनों बहेनो ने आज्ञा ली और वह से निकल ली,

नैना- ये मौसी वह क्यों रुक गई,

काम्य- तू कब बड़ी होगी,

नैना- क्यों

काम्य- हमे नहीं पता नेहा मौसी ने हमे जो जानकारी दी ह उसमे कितनी सच्चाई ह, हमारे जाने के बाद वो हमारे बारे में किसी को बताएंगी या नहीं, दीपा मौसी उनके साथ रहेंगी तो सब उनकी नजरो के समाने रहेगा,

नैना- और ये सब तुझे कैसे पता

काम्य- मैंने दीपा मौसी की आँखों में पढ़ा था, उनकी आँखे मुझसे hi बात कर रही थी

नैना- तेरी तगड़ी बात चित हो गई दीपा मौसी से, तुम दोनों ने आँखों hi आँखों में बात भी कर ली,

काम्य- तू अभी बच्ची ह न इसलिए उन्होंने मुझसे बात की

नैना- है है पता ह तू दादी आमा ह, चल अंजलि माँ को सब बताया जाये,

वही ह्रदय और दृष्टि गाओं में घूम रहे थे, सबकी नजर ह्रदय पैर hi थी, कोई ऐसा भी था जो लगातार चुप चुप क्र ह्रदय पैर नजर रखे हुए थे,

ह्रदय को सब पता लगा रहा था, न यहाँ कोई दुश्मन था और न hi अब तक दृष्टि का परिवार सामने आया था, और जो मौसी सामने आई थी उसमे तो बहुत बड़ा लफड़ा था,

दोनों गाओं के बिच में पहुंचे hi थे की सामने से 20 मुश्तंडे आकर खड़े हो गए हाथ में डंडे लेकर,

दृष्टि घबरा गई,

उसे समझ तो आ गया की इन्हे दादी ने भेजा ह लेकिन अब क्यों भेजा ह

ह्रदय- क्या ये hi वो दुश्मन ह

दृष्टि- है ये उन्ही के भेजे लोग होंगे,

ह्रदय- ोू भाई लोग अगर तुम सब अपनी खैरियत चाहते हो तो चले जाओ यहाँ से, और दुबारा इस परिवार को परेशां मत करना वर्ण जिंदगी भर किसी को परेशां करने लायक नहीं रहोगे,

उन गुंडों में से एक बोलै- ोू चोरे चला जा यहाँ से वर्ण बेमौत मारा जायेगा,

ह्रदय हँसा- तो आजा देखते हैं,

ह्रदय उनकी तरफ दौड़ पड़ा वो सब भी ह्रदय पैर हुम्ला करने को दौड़े,

ह्रदय ने उछाल कर एक गुंडे के साइन में लात मरी वो किसी फुटबॉल की तरह फिसलता हुआ दूर जाकर पड़ा, उसकी ऐसी हालत देख क्र बाकि गुंडे रुक गए,

इधर दृष्टि अपनी दादी को कॉल क्र रही थी,

ह्रदय की नजर दृष्टि पैर hi थी, वो मुस्कुरा पड़ा उसे समझ तो पहले hi आ गया था ये इनके hi आदमी ह,

लेकिन ह्रदय ने उन्हें अच्छे से सबक सीखने का फैसला कर लिया था,

गाओं के काफी मर्द और औरत वह आ गए थे, ह्रदय ने अपनी फुर्ती और ताकत का ऐसा नमूना दिखाया की जो भी सामने आ रहा था, किसी का हाथ किसी का पेअर किसी की कमर वो ऐसे तोड़ रहा था जैसे गाजर मूली तोड़ रहा हो,

ह्रदय उन्हें मर नहीं रहा था बल्कि उन्हें जिंदगी भर के लिए लचर क्र रहा था, ह्रदय को ऐसा लड़ता देख गाओं के सभी लोग शॉकेड थे,

कोई भी आदमी ह्रदय को छू तक नहीं पाया था,

एक तगड़ा सा आदमी ह्रदय के सामने आया तो ह्रदय ने उछाल क्र उसके कंधे पैर पेअर रखा और हवा में उप्पेर उछाल गया, और तभी ह्रदय की नजर भीड़ में कड़ी एक औरत पैर चली गई, और जैसे hi ह्रदय ने उसे देखा उसे लगा जैसे वो उसे जनता ह, या पहले कही देखा ह, इससे ह्रदय का धयान भटक गया और वो निचे गिर गया तभी, 4 आदमियों ने डाँडो से ह्रदय पैर हुम्ला कर दिया,

ह्रदय के सर में चोट आ गई, दृष्टि तुरंत ह्रदय की तरफ डोडी लेकिन तब तक ह्रदय सम्हाल चुक्का था, उसने चारो आदमियों को एक साथ उठा कर दूर फैक दिया, गुस्से में एक एक मुक्का उन्हें ज्यादा वो चारो वही बेहोश हो गए,

ह्रदय के सर से खून निकल रहा था,

दृष्टि ने तुरंत अपना दुपट्टा लिया और ह्रदय का खून पोछने लगी,

दृष्टि- तुम्हे चोट लगी ह,

ह्रदय- ये तो सिर्फ खरोंचे हैं,

ह्रदय ने घूम क्र आदमियों से कहा, आज के बाद अगर इन्हे छुआ भी न तो जान से मार दूंगा,

तभी वो औरत भीड़ में से झांकती हुई दिखी जिसे देख क्र ह्रदय का बैलेंस बिगड़ गया था, ह्रदय का धयान उसी तरफ गया, तो वो औरत एक दम भीड़ में चुप गई, ह्रदय को अजीब लगा,

दृष्टि ह्रदय को लेकर घर आ गई,

मौसी डोडी हुई आई और ह्रदय से लिपट गई,

मौसी- कैसे हो बीटा ये सब कैसे हुआ, उन लोगो ने हुम्ला किया क्या,

ह्रदय- मैं ठीक हु आंटी आप परेशां न हो, अब सब ठीक ह वो लोग फिर हमला नहीं करेंगे,

ह्रदय- दृस्टि तुम्हारी दादी और पापा अब तक नहीं मिले

दृष्टि- वो बहार गए हुए हैं आ जायेंगे,

ह्रदय उनसे मिलने के इंतजार में hi था शायद वही से कोई सुराग मिल जाये,

अब तक उसे कोई मंजिल नहीं मिली थी,

रात में ह्रदय को नींद नहीं आ रही थी, या यु कहे की वो सोना नहीं चाहता था न जाने कोण हमला क्र दे, वो घर के बहार निकल आया तो देखा दृष्टि की मौसी आज फिर नल पैर नंगी कड़ी होकर अपने उप्पेर पानी दाल रही थी,

ह्रदय एक दम रुक गया वो वापस मुड़ने लगा तो मौसी ने आवाज लगाई- ह्रदय कहा जा रहे हो, इधर आओ न

ह्रदय रुक गया, लेकिन पलटा नहीं

ह्रदय- आंटी आपने कपडे नहीं पहने हैं

मौसी- तो क्या हुआ तुम्हे शर्म लग रही ह क्या, इसमें शर्माने जैसा क्या ह

ह्रदय- लेकिन आप इस हालत में हो, मैं कैसे

मौसी- मेरी हेल्प क्र दो मेरी कमर की थोड़ी सी मालिश कर दो मेरा हाथ नहीं पहुंच रहा,

ह्रदय- मैं दृष्टि को भेजता हु

मौसी- जो मालिश किसी मर्द के हाथ से हो सकती ह वो औरत के हाथो से नहीं होती, क्या तुम मेरी मदद नहीं क्र सकते

ह्रदय के दिमाग में भी कुछ आ गया, वो पलटा और मौसी के पास पहुंच गया,

ह्रदय- आप इतनी रात में ऐसे क्यों नाहा रही हो,

मौसी- दिन में तो सब देख लेंगे न, अपना खजाना सबको तोडना दिखाना ह

ह्रदय- मैं भी तो देख रहा हु

मौसी- तुम तो अपने हो, तुम्हे तो ये खजाना दिखा सकती हु, देखोगे,

इतना बोल क्र मौसी ह्रदय की तरफ पलट गई, मौसी की बड़ी बड़ी गोल चूचिया ह्रदय के सामने आ गई,


2-sexy-nude-woman-with-big-boobs-mihai-b.jpg


ह्रदय ने आँखे निचे क्र ली

मौसी- मेरी तरफ देखो और बताओ क्या ये सब मैं सबको दिखा सकती हु, पूरा गाओं टूट पड़ेगा मुझ पैर,

ह्रदय उप्पेर देख क्र मुस्कुरा दिया,

मौसी- बताओ न कैसी लग रही हु मैं

ह्रदय- मेरे पास शब्द नहीं हैं इस सुंदरता को बयां करने के लिए, लेकिन आपने बताया नहीं आप रात में नंगी होकर क्यों नाहा रही हैं,

ह्रदय ने नंगी शब्द पैर थोड़ा जोर दिया

मौसी- मुझे खुले आसमान में नंगे बदन नहाना पसंद ह लेकिन यहाँ गाओं में ये सब नहीं हो पता इसलिए रात में आती हु,

तुम मेरी कमर मसल दो न

ह्रदय आगे बढ़ा तो मौसी उसके सामने झुक गई अपनी बड़ी गांड उसने बहार को निकल दी, मौसी का मुँह ह्रदय के लुंड के सामने था, जैसे वो झुक क्र ह्रदय का लुंड चूस रही हो, खुली कमर ह्रदय के सामने थी,

मौसी- मसलो न

ह्रदय ने मौसी की कमर पैर हाथ रखा और मसलने लगा, मौसी के पैरो में दर्द होने लगा तो उसने ह्रदय की कमर को पकड़ लिया,

ह्रदय का लुंड निचे से जोर मरने लगा था, ह्रदय का हाथ कमर से होता हुआ मौसी की गांड की दरार तक पहुंच रहा था,

कुछ देर ऐसे hi मालिश करवाने के बाद मौसी उठने लगी तो उसने अपना एक हाथ ह्रदय के लुंड पैर रगड़ दिया जिससे उसे अहसास हो गया की ह्रदय का लुंड खड़ा ह और साइज भी ाचा खासा ह,

ह्रदय- काफी ह ये और कुछ करना ह

मौसी- करना तो बहुत कुछ ह लेकिन ये जगह ठीक नहीं ह, आओ मेरे साथ,

मौसी ह्रदय का हाथ पकड़ क्र उसे घर के पीछे ले गई जहा जानवर बंधे हुए थे,

मौसी- मुझे कुछ और जगह भी खुजली हो रही ह, प्लीज थोड़ी सी खुजली मिटा दो न,

ह्रदय- कहा पैर आंटी जी

मौसी ने ह्रदय का हाथ अपनी छूट पैर रख दिया, यहाँ पैर

ह्रदय ने तुरंत हाथ पीछे क्र लिया

ह्रदय- ये क्या कर रही हैं आप

मौसी- इतनी भोले मत बनो, मुझे नंगी देख क्र तुम्हारा लोढ़ा भी खड़ा हो गया ह, इसे क्यों तड़पा रहे हो, मेरी छूट में दाल क्र शांत क्र लो न, मेरी भी प्यास बुझ जाएगी,

ह्रदय- आप दृष्टि की मौसी हो और वो मेरी दोस्त ह, मैं उसे धोका नहीं दे सकता

मौसी- तुम किसी को धोका नहीं दे रहे, ये मैं खुद चाहती हु, यहाँ गाओं में अपने अंदर की गर्मी को शांत कारण इ के लिए मैं तड़प रही हु, तुम मेरी गर्मी शांत क्र दो, मैं तुम्हे बहुत मजा दूंगी, देखना मेरे साथ मजे करके तुम यहाँ से कभी जाना नहीं चाहोगे,

ह्रदय- अगर दृष्टि को पता चला तो

मौसी- वो मैं सम्हाल लुंगी,

इतना बोल क्र मौसी ह्रदय से लिपट गई और उसकी जीन्स खोलने लगी, और जल्दी जल्दी में उसका लुंड बहार निकल लिया और जैसे hi ह्रदय का लुंड मौसी के हाथो में आया उसकी आँखों में हैरत और मुँह से लार टपकने लगी, ह्रदय का लुंड उसकी सोच से कही बड़ा और मोटा था, उसने बहुत बड़ा लुंड लिया हुआ था लेकिन ये उससे भी बड़ा और मोटा था,


3c189ac63f99baf3a4015e634008a41f.gif


मौसी- इतना खूबसूरत खजाना छुपा रखा ह तुमने ये तो पुरे गाओं की यस बजा देगा, अगर तुमने मेरी प्यास बुझा दी तो तुम्हे इतने मजे दिलवाऊंगी, पुरे गाओं की औरतो को छुड़वा दूंगी तुमसे

मौसी ने ह्रदय के लुंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगा,

लुंड उसके मुँह में आ भी नहीं रहा था फिर भी वो पूरा घुसाने की कोशिश कर रही थी,

ह्रदय को मजा आने लगा था, उसने भी काफी टाइम से चुदाई नहीं किट hi, लेकिन वो मौसी को खुद पैर हावी नहीं होने दे रहा था खुद मौसी पैर हावी हो रहा था,


94cfbfcf37c971f968198ab4f17f5df2.gif


ह्रदय ने मौसी का मुँह पकड़ा और लुंड को अंदर बहार करने लगा, मौसी की हालत ख़राब होने लगी थी, उसका मुँह दर्द करने लगा था,

मौसी ने ह्रदय को रोकने की कोशिश की, तो ह्रदय ने मौसी को खड़ा किया और फिर झुका क्र उसके पीछे आ गया और अपना लुंड मौसी की छूट में लगाया और एक जोर दर धक्का मारा और पूरा लुंड मौसी की छूट में घुसा दिया, मौसी की छूट को इतना बड़ा लुंड लेने की आदत थी लेकिन धक्का इतना तेज था की मौसी की चीख निकल गई,


371ba4dfb8100334485b6a25f677c9bca1116549359472a6baf73fb2babb6bec-0.gif


ह्रदय ने उसकी चीख की कोई परवाह नहीं की और लुंड को वापस खींच क्र दुबारा तेज धक्का मारा,

पहले धक्के में hi ह्रदय समझ गया था मौसी की छूट पूरी तरह खुली हुई ह, किसी तगड़े लुंड से चुदवाती ह,

लेकिन औरत की छूट कितनी भी खुली हो जब उसमे कोई दुमदार लुंड घुसता ह और धक्के लगता ह तो औरत को मजा उन धक्को से आता ह, ह्रदय के धक्को की रफ़्तार बहुत तेज थी, जिससे मौसी का साँस तक लेने की फुर्सत नहीं हो रही थी, और पहले 10 मिन्तुइस में hi मौसी झाड़ गई,

Aahhhhhhhhhhhhhhhhha hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhahahha अह्हह्ह्ह्ह

छोड़ दी आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट छोड़ दी मस्त छोड़ू ह तू ahhhhhhhhhhhhhh मेरे यार से भी तगड़ा छोड़ू ह तू aahhhhhhhhhhh फाड् दे मेरी छूट अपनी सेक्सी मौसी की छूट को फाड़ दे,


1919b027a794899bd6d7fc4e27708a689e9ce941d9fbb74b9222af8617919de4-0.gif


ह्रदय- आंटी मजा आ रहा ह न

मौसी- आंटी मत बोल सेक्सी बोल बस सेक्सी, सब मुझे सेक्सी बोलते हैं मुझे सेक्सी hi सुन्ना पसंद ह,

ह्रदय- सेक्सी उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ्फ़ सेक्सी मजा आ रहा ह न,

सेक्सी- बहुत मजा आ रहा ह, छोड़ता जा बस ऐसे hi छोड़ता जा

ह्रदय ने सेक्सी को गॉड में उठाया और लुंड लीची दाल क्र उसे अपने हाथो में hi उछलने लगा,


271196071-1291167888126840-8783085686948867120-n.gif


ह्रदय- सेक्सी किसने रखा नाम

सेक्सी पुरे जोश में थी, और जोश में अपना आप खोने लगी थी,

सेक्सी- मेरा नाम शाक्षी था लेकिन अब मैं सेक्सी हु

ह्रदय- शाक्षी

सेक्सी- है, लेकिन तुम ये सब छोडो और छोड़ो मुझे,

ह्रदय ने सेक्सी को दीवार से लगाया और छोड़ने लगा, अगले 1 घंटे तक ह्रदय लगातार धक्के लगता रहा, सेक्सी 4 बार झाड़ गई थी, ह्रदय एक पल के लिए भी धीमा नहीं हुआ था, उसकी रफ़्तार बहुत तेज थी,

जब ह्रदय झड़ने को हुआ तो उसने सेक्सी मौसी को अपने सामने बैठाया और अपना लुंड उसके मुँह में दे दिया और जब तक पूरा लुंड खली नहीं हो गया उसने लुंड बहार नहीं निकला, मौसी का मुँह कुंड से बंद हो गया था तो उसे ह्रदय का पूरा रास अपने गले के अंदर उतरना पड़ा, मौसी की आँखों से आंसू बह रहे थे, उसे साँस नहीं आ रहा था, ह्रदय के लुंड से रास हीटना निकला था की, वो मौसी के मुँह के बहार उसकी चूचियों तक भेने लगा था,


270353686-451337943216963-5038538747344944902-n.gif




ह्रदय घेरि साँस भरने लगा, और मौसी ऊर्फ शाक्षी जमीं पैर पड़ी घेरि साँस भर रही थी, और ह्रदय के लुंड क ेरस को अपनी चूचियों पैर रगड़ रही थी, और ह्रदय की तरफ देख क्र मुस्कुरा रही थी,

शाक्षी- क्यों जानेमन मजा आया न अपनी सेक्सी मौसी के साथ

ह्रदय- बहुत मजा आया, इतना मजा कभी नहीं मिला था,

शाक्षी- मेरे साथ रहोगे तो ऐसे hi मजा लोगे, चलो अब अपने रूम में जाओ कही दृष्टि न आ जाये, मैं जरा फिर से नाहा कर आती हु,

ह्रदय अपनी जीन्स पहन क्र रूम में चला गया और शाक्षी नहाने के लिए फिर से नल पैर पहुंच गई,

ह्रदय के दिमाग में शाक्षी नाम अटका हुआ था, रात के 2 बज रहे थे, उसने अंजलि को कॉल लगा दिया,

अंजलि- है बीटा क्या हु इतनी रात को कॉल किया सब ठीक ह न

ह्रदय- माँ एक शाक्षी रजनी की बेटी थी न,

अंजलि- है क्यों क्या हुआ

ह्रदय- एक शाक्षी मुझे यहाँ मिली ह और उसकी हरकते किसी गिरी हुई औरत से काम नहीं ह, वह वाली कुछ शाक्षी के बारे में पता चला

अंजलि- है पता चला वो उसी शहर में देखि गई थी जिसके पास के गाओं में तू गया ह, मैं तुझे शाक्षी की फोटो भेजती हु, देख क्र बता

अंजलि ने ह्रदय को फोटो भेजी, उसने देखि और देखते hi पहचान गया,

ह्रदय- है माँ ये hi ये ह वो शाक्षी, ये दृष्टि की मौसी बानी हुई ह, लेकिन मौसी लग नहीं रही, मतलब हमारी मंजिल यहाँ मिल सकती ह,

अंजलि- तू और पता क्र मैं टीम लेकर सुबह वह पहुँचती हु, वह बड़ा खतरा हो सकता ह,

ह्रदय- नहीं माँ पहले मैं सब पता कर लू उसके बाद आना, सुबह मुझे किसी को ढूंढ़ने जाना ह, उसे दकह क्र ऐसा लग रहा ह जैसे कही देखा ह, हो न हो वो हमारी मंजिल को आसान कर सकती ह,

अंजलि- तू अपना काम कर मैं अपनी तैयारी करती हु,

ह्रदय ने फ़ोन रखा और सोचने लगा, तभी शाक्षी अंदर आई और ह्रदय को देखने लगी ह्रदय ने तुरंत आँखे बंद क्र ली जैसे वो सो रहा हो,

शाक्षी बड़े नजदीक से ह्रदय को देखने लगी फिर बहार आ गई,

ह्रदय भी तुरंत उसके पीछे आ गया,

शाक्षी अपने कमरे में न जाकर इस टाइम बहार क्या करने गई, ये सोच क्र वो उसके पीछे हो लिया,

शाक्षी ने बहार आकर किसी को कॉल लगाया

शाक्षी- मैंने उसे जन्नत का मजा दे दिया ह, अब वो मेरी छूट के चक्कर में हमसे जुड़ेगा, गाओं में एक दो छूट और दिलवा दूंगी फिर वो हमारा साथ दे सकता ह, कल मैं उस पैर अपना जादू चलाऊंगी फिर उससे और राज जानने की कोशिश करुँगी,

उधर से कुछ कहा गया

शाक्षी- नहीं दृष्टि उसके नजदीक नहीं जा रही ह, लेकिन उसकी आँखों में कुछ देखा ह इस लड़के के लिए

उधर से कुछ कहा गया

शाक्षी- तुम चिंता मत करो मैं कोशिश करुँगी वर्ण इसे भी वैसे hi क्र देंगे

हस्ते हुए शाक्षी ने फ़ोन काट दिया,

ह्रदय वापस बिस्टेर पैर आकर लेट गया, शाक्षी वापस आई और फिर से ह्रदय को देख क्र अपने कमरे में चली गई,

सुबह के 4 बज चुके थे, सब घेरि नींद में थे शाक्षी पूरी तरह थकी हुई थी वो तो देर से उठने वाली थी, ह्रदय ने उस औरत को ढूंढ़ने का फैसला किया और घर से बहार निकल गया,

गाओं में लोग जल्दी उठ जाते हैं तो ह्रदय ने सोचा शायद कोई सफलता मिल जाये,

ह्रदय काफी देर पुरे गाओं में घूमता रहा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ, वो वापस घर की तरफ चल दिया था की उसे एक औरत चुप चुप क्र जाती दिखी, ह्रदय को शक हुआ वो उसके करीब पंहुचा और उसके कंधे पैर हाथ रख दिया, वो औरत दर के हाथ जोड़ क्र कड़ी हो गई,

औरत- गलती हो गलती हो मैं कही नहीं जा रही,

ह्रदय- आंटी क्या हुआ आप ऐसे दर क्यों रही हैं, मैं कुछ नहीं क्र रहा

औरत- तुम यहाँ, कोण हो तुम

ह्रदय ने देखा ये वही औरत ह जिसे वो ढूंढ़ने आया था,

ह्रदय- मैं आपको hi ढूंढ रहा था, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं आपको जनता हु,

औरत- मुझे नहीं पता लेकिन तुम जो भी हो भले लड़के लगते हो, तुम इस गाओं से चले जाओ इन लोगो से दूर चले जाओ

ह्रदय- क्या आप मुझे अपना नाम बताएंगी,

औरत- तुम क्या करोगे जान क्र

ह्रदय- न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा जैसे मैंने आपको देखा ह



औरत- मेरा नाम कोमल ह, अब तुम जाओ यहाँ से इस गाओं से निकल जाओ, इन सबसे दूर चले जाओ,
 
बहुत बहुत धन्यवाद् आप सभी दोस्तों का, लव यू आल

Messenger-creation-3185565254911048.webp
 
Back
Top