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Update-29(B) (मेघा अपडेट)
" आपने जीतू को किस टाइप की पिक्टूरें भरवाने के लिए कहा tha............main कुछ समझा नहीं........" और राम भोलेपन से दुबारा बोल पड़ता हैं वहीँ रघु हौले से अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखता हैं और राम की बाटिओं को सुनकर वो धीरे से मुस्कुरा देता हैं........
" आवो यहाँ par.........mere पास बैठो malik........main आपको शुरू से लेकर आठ तक सब समझाता हूँ............." और रघु वहीँ राम को बैठने का इशारा करता हैं और कुछ देर की गहरी ख़ामोशी के बाद आखिर रघु फिर से बोल पड़ता हैं.......
" da-asal औरत को जितनी बुरी तरह से बिस्टेर पर रगड़ा जाये उसे मज़ा उतना hi आता hain.........aur हमें bhi..........waise तो दुनिया में कई तरह के इंसान होते hain........kisi को पैसा प्यारा होता हैं तो किसी को laundiya......to कोई किसी और चीज़ के पीछे भागता hain..........jo लोग सिर्फ लौंडिया के पीछे पागल रहते हैं उनमें भी कई ऐसे इंसान होते हैं जो कई तरह का शौक पालते hain.........kuch तो बस छूट के पीछे पागल रहते hain........to किसी को अपना लौड़ा चुसवाने में मज़ा आता hain........to कुछ दूसरे मर्दों का शौक रखते hain.......magar कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें सिर्फ लड़कियों की गांड मरने में hi मज़ा आता hain..........aur कुछ ऐसा hi शौक मैं भी रखता हूँ.........." रघु की बातें पूरी होते hi राम उसकी तरफ आँखें फाड़े ऐसे देखने लगता हैं जैसे रघु ने उसकी जान मांग ली हो.........
" yeeeeeee.....gand मरना किसी कहते हैंण्ण्ण्ण्ण्न........." और राम सवाल भरे नज़रियों से रघु के तरफ देखते हुए धीरे से बोल पड़ता hain.........wahin रघु उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं.........
" मान लो की तुम अपनी भाभी को छोड़ रहे ho.........aur अचानक से तुम्हारा मुन्न उनकी गांड मरने का किया तो तुम क्या karogey.........bolo........nahin पता naa.a...........jis तरह से औरत की छूट मरी जाती हैं ठीक उसकी तरह से औरत की गांड में भी लुंड पेला जाता hain.........yani की उसकी पीछे वाली छेद mein..........aur यकीन मनो बरखुरदार छूट मरने से ज़्यादा मज़ा गांड मरने में आता hain.......kyon की छूट तो छोड़ते छोड़ते ढीली पढ़ जाती हैं मगर गांड जितनी बार भी मारो हर बार टाइट hi रहती hain.......aur जब लुंड टाइट होकर गांड के अंदर जब जाती हैं तो पूछो mutt.....kitna मज़ा आता hain..........kabhi मौका मिले तो तुम भी अपनी भाभी की गांड में लुंड ज़रूर dalna........dekhna.........tumhein कितना मज़ा aayega........tum अपने आपको एक अलग दुनिया में महसूस करोगे........" और रघु के चेहरे पर फिर से कमीनी मुस्कान तैर जाती हैं वहीँ राम का लुंड एक बार फिर से टाइट हो गया tha.......raghu की बातें उसके लुंड में खून की संचार को तेज़्ज़ कर रही थी........
" magar.........kya भाभी को उसमें दर्द नहीं hoga...........aur क्या उन्हें मज़ा आएगा.........." और राम भोलेपन से दुबारा बोल पड़ता हैं वहीँ रघु फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं.......
" दर्द तो होगा hi......par मज़े भी बहुत आते hain.........aur जब गांड थोड़ी सी खुल जाएगी तो तुम्हारी भाभी को भी बहुत मज़े aayengey.............aur औरत की गांड तो बानी hi हैं मरने के liye.........aaj जो मैंने वीडियो जीतू से कहा हैं उसे देखने के बाद तुम्हारे ख्यालात हमेशा हमेशा के लिए बदल jayengey..........aur हाँ मैंने उस दिन भी तुमसे कहा था की तुम थोड़ा अपने ऊपर सैयाम rakho..........tumhare जोश की वजह से कल तुम्हारा काम बिगड़ गया naa......na तुम्हारा छुम जल्दी निकलता और न ये खेल जल्दी ख़तम hota...........har काम थोड़ा साबरा से करना chahiye....bilkul आराम se.......tab देखना तुम्हें इस खेल में भी बहुत मज़ा aayega.........aur हाँ आज तुम कुछ भी मुट्ठ karna......sab कुछ तुम अपनी भाभी पर छोड़ dena..........dekh lena.......wo तुम्हें खुद hi सब सीखा degi...........aapke तो भाग्य खुल गए छोटे malik..........aap जैसी किस्मत हमारी कहाँ..............." और रघु अपने काळा पीले दांत दिखता हुआ हौले से हंस पड़ता हैं वहीँ राम भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
थोड़े देर बाद जीतू भी वापस आ जाता hain.............fir पिछली बार की तरह राम उसमें से एक वीडियो को सेलेक्ट करता हैं और उस वीडियो को प्ले कर देता hain........ye एक गैंगबैंग वीडियो था जिसमें एक अकेली लड़की थी और तीन मर्द they.......bari बरी वो वो तीनों लड़की की छूट और गांड में ऊँगली करते हैं जिन्हें राम बड़े गौर से देखे जा रहा tha.......wahin जीतू का भी लुंड खड़ा होता जा रहा tha..........magar ये सब राम के लिए पहली बार tha.........thode देर बाद एक नीग्रो टाइप का आदमी उस लड़की की छूट में लुंड दाल देता hain........aur उसकी चुदाई करने लगता hain.........fir बाद में दूसरा आता hain.....aur फिर teesra.........wahin रघु बड़े ध्यान से उस वीडियो को देख रहा tha......haan बीच बीच में वो अपनी मुर्दनी के ऊपर से अपने लुंड को सेहला दिया करता.......
मगर जीतू तो जैसे पागल सा हो गया tha.......usey तो बिलकुल साबरा hi नहीं हो रहा tha..........wahin जब जीतू की नज़रें रघु के तरफ जाती हैं ........रघु उसकी तरफ देखते हुए हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं और उसे मूठ मरने की पूरी चूत दे देता hain........shayad जीतू भी रघु के इशारे का hi इंतज़ार कर रहा tha..............wo अगले hi पल अपना कपडा पिछली बार की तरह उतर देता हैं और तेज़ी से मूठ मरने लगता hain........aab स्क्रीन पर वो सन आता हैं जिसका रघु को बड़ी hi बेसब्री से इंतज़ार tha..........yani गांड की ठुकाई का.......
वहीँ नीग्रो उस लड़की के पीछे जाता हैं और अबकी बार उस लड़की की गांड में आपने मोटा कला लुंड धीरे धीरे डालने लगता hain.........wahin वो लड़की पूरे मज़े के साथ उसका लुंड अपने अंदर ले रही thi.......wahin राम अपनी आँख फाड़े उस वीडियो के तरफ देखे जा रहा था.........
" देख लो छोटे malik.......kaise वो मर्द उस लड़की की गांड फाड़ रहा hain..........aur वो लड़की पूरे मज़े से साथ अपनी गांड उससे मरवा रही हैं............" और रघु काव्य के बारे में सोचकर अपने लुंगी पर हाथ रख देता हैं और अपने हाथों से धीरे धीरे अपने लुंड को मसलने लगता hain.......tabhi एक दूसरा आदमी उस लड़की के ऊपर चढ़ता हैं और वो अपना लुंड उस लड़की की छूट में दाल देता hain.......fir तीसरा खड़ा आदमी अपना लुंड उसके चेहरे के करीब ले जाता हैं और अपना लुंड उसकी मुँह में डालने लगता hain..............is सन को देखकर भले hi रघु थोड़ा बहुत विचलित हुआ था मगर वहीँ राम और जीतू की तो हालत ख़राब हो चुकी thi............jeetu के हाथ बहुत तेज़ी से अपने लुंड पर चल रहा tha.......wahin राम अपनी आँख फाड़े कभी उस वीडियो के तरफ देख रहा tha.................to कभी जीतू के खड़े लुंड की तरफ...............
" मैं न कहता था की औरत के तीन छेद होते हैं छोड़ने के liye...........ek उसकी choot......dusara उसका mooh....aur तीसरा उसकी gand...........gaur से देखो कैसे वो लड़की पूरे मज़े लेकर उन तीनों से के साथ चुद रही hain..........aur अगर औरत छोड़ने पर आ जाये तो वो एक साथ दस मर्दों पर भी अकेले भरी पड़ती हैं........" और रघु गहरी सांस छोड़ता हुआ एपीआई बात ख़तम करता हैं वहीँ जीतू की हाथों की रफ़्तार और भी तेज़्ज़ होती जा रही thi.............aab वो अपने चरम के बेहद करीब tha...............aur आखिर कुछ देर बाद उसका साबरा जवाब दे जाता हैं और वो वहीँ सिसकते हुए बिलकुल ठंडा सा पढ़ जाता hain.......wahin कुछ दूर पर बैठा राम भी लुम्बी लुम्बी सांसें ले रहा tha.................lund तो उसका इतना हार्ड हो गया था की हाथ लगते hi उसका छुम चूत padta........jaise तैसे वो अपने आपको संभाले हुआ था........
मूवी ख़तम होने के बाद राम वापस अपने कमरे की तरफ चल पड़ता hain......uska दिमाग जैसे घूम गया tha......baar बार उसकी आँखों के सामने वही नज़ारा घूम रहा tha...........jaise तैसे वो अपने कमरे में जाता हैं और तेज़ी से मूठ मरने लगता hain....kuch देर बाद वो अपने आपको संतोष करता हैं और फिर पूरी तरह से नार्मल हो जाता hain.........aab तो उसे इंतज़ार tha........to bus............raat का..............
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राम के जाने के करीब 1/2 घंटे बाद रघु और जीतू दोनों बहार गेट पर बैठे हुए आपस में बातें कर रहे they........itne में वहां एक ब्लैक कलर की कार आकर ruki.............raghu और जीतू दोनों एक तुक उस कार की तरफ देखने lage...........car का शीशा चरों तरफ से बंद था और उसपर ब्लैक कलर का शीशा चढ़ा हुआ tha..........car में बैठा साक्ष दो तीन बार जब हॉर्न बजता हैं तब रघु कन्फर्म हो जाता हैं की ये बाँदा यहीं इसी घर में आया हुआ hain..........raghu फ़ौरन अपनी जगह से उठता हैं और जाकर मैं गेट खोल देता hain,..........jaise hi मैं गेट खुलता हैं रघु सामने से अंदर बैठे हुए साक्ष की तरफ देखने लगता hain.......magar इससे पहले वो उसे देख पता वो कार तेज़ी से चलती हुई सीधा अंदर चली जाती हैं और रघु टकटकी लगाए बस उस कार के तरफ देखने लगता है........
फिर वो मैं गेट बंद करता हैं और जब वो वापस उस कार के तरफ जाता हैं जहाँ कुछ दूर पर वो कार जाकर रुकी हुई thi.......wo उस कार के शीशे पर नॉक करता hain......thode देर बाद उस कार का शीशा नीचे की तरफ सरकता हैं और अंदर baitha/baithi साक्ष पर जब रघु की नज़र पड़ती हैं एक पल के लिए तो उसकी आँखें चौंडिया जाती hain.......ander एक लड़की बैठी हुई थी और सर उसका पूरी तरह ब्लैक स्कार्फ़ से ढाका हुआ tha........haan चेहरा उसका साफ़ नज़र आ रहा tha.....magar गले के नीचे भी वही ब्लैक स्कार्फ़ मौजूद tha........aankhon पर काळा रंग का चस्मा चढ़ा हुआ tha........wo फ़ौरन उस कार का दरवाज़ खोलती हैं और रघु उसे देखकर थोड़ा साइड हो जाता hain..........magar उसकी नज़रें अभी भी उसपर hi थी.......................
जैसे hi वो बहार निकलती हैं वो एक तुक रघु के तरफ बड़े अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain..........fir उसकी नज़र थोड़ी दूर पर खड़े जीतू की तरफ जाती hain.........wo उन दोनों को सर से लेकर पवन तक घूर रही thi........magar अजीब नज़रियों se..........kuch देर बाद वो धीरे से रघु की तरफ देखकर बोल पड़ती हैं.............
" काव्य मेहता का घर एहि हैं नाहा....." और वो लड़की रघु के जवाब की परवाह किये बगैर सीधा उस मैं दूर की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ रघु उसे सर से लेकर पवन तक घूरे जा रहा tha.........usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये आखिर हो कौन सकती hain...........agar ये कोई रिश्तेदार होती तो इस तरह से काव्य का पता नहीं पूछती .......तो फिर कौन हो सकती हैं ये............
" ये लौड़ा हैं कौन!!!!!!!!.......... और हैं क्या चीज़...................................." और रघु के मुँह से धीरे से आवाज़ निकल पड़ती हैं वहीँ कुछ दूर पर खड़ा जीतू भी उसे हैरत से देख रहा tha.........................aur शायद वो भी उससे एहि पूछ रहा था की .............आखिर ye............hain कौन !!!!!!!!!........................................................
कंटिन्यू...................................................................
" आपने जीतू को किस टाइप की पिक्टूरें भरवाने के लिए कहा tha............main कुछ समझा नहीं........" और राम भोलेपन से दुबारा बोल पड़ता हैं वहीँ रघु हौले से अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखता हैं और राम की बाटिओं को सुनकर वो धीरे से मुस्कुरा देता हैं........
" आवो यहाँ par.........mere पास बैठो malik........main आपको शुरू से लेकर आठ तक सब समझाता हूँ............." और रघु वहीँ राम को बैठने का इशारा करता हैं और कुछ देर की गहरी ख़ामोशी के बाद आखिर रघु फिर से बोल पड़ता हैं.......
" da-asal औरत को जितनी बुरी तरह से बिस्टेर पर रगड़ा जाये उसे मज़ा उतना hi आता hain.........aur हमें bhi..........waise तो दुनिया में कई तरह के इंसान होते hain........kisi को पैसा प्यारा होता हैं तो किसी को laundiya......to कोई किसी और चीज़ के पीछे भागता hain..........jo लोग सिर्फ लौंडिया के पीछे पागल रहते हैं उनमें भी कई ऐसे इंसान होते हैं जो कई तरह का शौक पालते hain.........kuch तो बस छूट के पीछे पागल रहते hain........to किसी को अपना लौड़ा चुसवाने में मज़ा आता hain........to कुछ दूसरे मर्दों का शौक रखते hain.......magar कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें सिर्फ लड़कियों की गांड मरने में hi मज़ा आता hain..........aur कुछ ऐसा hi शौक मैं भी रखता हूँ.........." रघु की बातें पूरी होते hi राम उसकी तरफ आँखें फाड़े ऐसे देखने लगता हैं जैसे रघु ने उसकी जान मांग ली हो.........
" yeeeeeee.....gand मरना किसी कहते हैंण्ण्ण्ण्ण्न........." और राम सवाल भरे नज़रियों से रघु के तरफ देखते हुए धीरे से बोल पड़ता hain.........wahin रघु उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं.........
" मान लो की तुम अपनी भाभी को छोड़ रहे ho.........aur अचानक से तुम्हारा मुन्न उनकी गांड मरने का किया तो तुम क्या karogey.........bolo........nahin पता naa.a...........jis तरह से औरत की छूट मरी जाती हैं ठीक उसकी तरह से औरत की गांड में भी लुंड पेला जाता hain.........yani की उसकी पीछे वाली छेद mein..........aur यकीन मनो बरखुरदार छूट मरने से ज़्यादा मज़ा गांड मरने में आता hain.......kyon की छूट तो छोड़ते छोड़ते ढीली पढ़ जाती हैं मगर गांड जितनी बार भी मारो हर बार टाइट hi रहती hain.......aur जब लुंड टाइट होकर गांड के अंदर जब जाती हैं तो पूछो mutt.....kitna मज़ा आता hain..........kabhi मौका मिले तो तुम भी अपनी भाभी की गांड में लुंड ज़रूर dalna........dekhna.........tumhein कितना मज़ा aayega........tum अपने आपको एक अलग दुनिया में महसूस करोगे........" और रघु के चेहरे पर फिर से कमीनी मुस्कान तैर जाती हैं वहीँ राम का लुंड एक बार फिर से टाइट हो गया tha.......raghu की बातें उसके लुंड में खून की संचार को तेज़्ज़ कर रही थी........
" magar.........kya भाभी को उसमें दर्द नहीं hoga...........aur क्या उन्हें मज़ा आएगा.........." और राम भोलेपन से दुबारा बोल पड़ता हैं वहीँ रघु फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं.......
" दर्द तो होगा hi......par मज़े भी बहुत आते hain.........aur जब गांड थोड़ी सी खुल जाएगी तो तुम्हारी भाभी को भी बहुत मज़े aayengey.............aur औरत की गांड तो बानी hi हैं मरने के liye.........aaj जो मैंने वीडियो जीतू से कहा हैं उसे देखने के बाद तुम्हारे ख्यालात हमेशा हमेशा के लिए बदल jayengey..........aur हाँ मैंने उस दिन भी तुमसे कहा था की तुम थोड़ा अपने ऊपर सैयाम rakho..........tumhare जोश की वजह से कल तुम्हारा काम बिगड़ गया naa......na तुम्हारा छुम जल्दी निकलता और न ये खेल जल्दी ख़तम hota...........har काम थोड़ा साबरा से करना chahiye....bilkul आराम se.......tab देखना तुम्हें इस खेल में भी बहुत मज़ा aayega.........aur हाँ आज तुम कुछ भी मुट्ठ karna......sab कुछ तुम अपनी भाभी पर छोड़ dena..........dekh lena.......wo तुम्हें खुद hi सब सीखा degi...........aapke तो भाग्य खुल गए छोटे malik..........aap जैसी किस्मत हमारी कहाँ..............." और रघु अपने काळा पीले दांत दिखता हुआ हौले से हंस पड़ता हैं वहीँ राम भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
थोड़े देर बाद जीतू भी वापस आ जाता hain.............fir पिछली बार की तरह राम उसमें से एक वीडियो को सेलेक्ट करता हैं और उस वीडियो को प्ले कर देता hain........ye एक गैंगबैंग वीडियो था जिसमें एक अकेली लड़की थी और तीन मर्द they.......bari बरी वो वो तीनों लड़की की छूट और गांड में ऊँगली करते हैं जिन्हें राम बड़े गौर से देखे जा रहा tha.......wahin जीतू का भी लुंड खड़ा होता जा रहा tha..........magar ये सब राम के लिए पहली बार tha.........thode देर बाद एक नीग्रो टाइप का आदमी उस लड़की की छूट में लुंड दाल देता hain........aur उसकी चुदाई करने लगता hain.........fir बाद में दूसरा आता hain.....aur फिर teesra.........wahin रघु बड़े ध्यान से उस वीडियो को देख रहा tha......haan बीच बीच में वो अपनी मुर्दनी के ऊपर से अपने लुंड को सेहला दिया करता.......
मगर जीतू तो जैसे पागल सा हो गया tha.......usey तो बिलकुल साबरा hi नहीं हो रहा tha..........wahin जब जीतू की नज़रें रघु के तरफ जाती हैं ........रघु उसकी तरफ देखते हुए हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं और उसे मूठ मरने की पूरी चूत दे देता hain........shayad जीतू भी रघु के इशारे का hi इंतज़ार कर रहा tha..............wo अगले hi पल अपना कपडा पिछली बार की तरह उतर देता हैं और तेज़ी से मूठ मरने लगता hain........aab स्क्रीन पर वो सन आता हैं जिसका रघु को बड़ी hi बेसब्री से इंतज़ार tha..........yani गांड की ठुकाई का.......
वहीँ नीग्रो उस लड़की के पीछे जाता हैं और अबकी बार उस लड़की की गांड में आपने मोटा कला लुंड धीरे धीरे डालने लगता hain.........wahin वो लड़की पूरे मज़े के साथ उसका लुंड अपने अंदर ले रही thi.......wahin राम अपनी आँख फाड़े उस वीडियो के तरफ देखे जा रहा था.........
" देख लो छोटे malik.......kaise वो मर्द उस लड़की की गांड फाड़ रहा hain..........aur वो लड़की पूरे मज़े से साथ अपनी गांड उससे मरवा रही हैं............" और रघु काव्य के बारे में सोचकर अपने लुंगी पर हाथ रख देता हैं और अपने हाथों से धीरे धीरे अपने लुंड को मसलने लगता hain.......tabhi एक दूसरा आदमी उस लड़की के ऊपर चढ़ता हैं और वो अपना लुंड उस लड़की की छूट में दाल देता hain.......fir तीसरा खड़ा आदमी अपना लुंड उसके चेहरे के करीब ले जाता हैं और अपना लुंड उसकी मुँह में डालने लगता hain..............is सन को देखकर भले hi रघु थोड़ा बहुत विचलित हुआ था मगर वहीँ राम और जीतू की तो हालत ख़राब हो चुकी thi............jeetu के हाथ बहुत तेज़ी से अपने लुंड पर चल रहा tha.......wahin राम अपनी आँख फाड़े कभी उस वीडियो के तरफ देख रहा tha.................to कभी जीतू के खड़े लुंड की तरफ...............
" मैं न कहता था की औरत के तीन छेद होते हैं छोड़ने के liye...........ek उसकी choot......dusara उसका mooh....aur तीसरा उसकी gand...........gaur से देखो कैसे वो लड़की पूरे मज़े लेकर उन तीनों से के साथ चुद रही hain..........aur अगर औरत छोड़ने पर आ जाये तो वो एक साथ दस मर्दों पर भी अकेले भरी पड़ती हैं........" और रघु गहरी सांस छोड़ता हुआ एपीआई बात ख़तम करता हैं वहीँ जीतू की हाथों की रफ़्तार और भी तेज़्ज़ होती जा रही thi.............aab वो अपने चरम के बेहद करीब tha...............aur आखिर कुछ देर बाद उसका साबरा जवाब दे जाता हैं और वो वहीँ सिसकते हुए बिलकुल ठंडा सा पढ़ जाता hain.......wahin कुछ दूर पर बैठा राम भी लुम्बी लुम्बी सांसें ले रहा tha.................lund तो उसका इतना हार्ड हो गया था की हाथ लगते hi उसका छुम चूत padta........jaise तैसे वो अपने आपको संभाले हुआ था........
मूवी ख़तम होने के बाद राम वापस अपने कमरे की तरफ चल पड़ता hain......uska दिमाग जैसे घूम गया tha......baar बार उसकी आँखों के सामने वही नज़ारा घूम रहा tha...........jaise तैसे वो अपने कमरे में जाता हैं और तेज़ी से मूठ मरने लगता hain....kuch देर बाद वो अपने आपको संतोष करता हैं और फिर पूरी तरह से नार्मल हो जाता hain.........aab तो उसे इंतज़ार tha........to bus............raat का..............
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राम के जाने के करीब 1/2 घंटे बाद रघु और जीतू दोनों बहार गेट पर बैठे हुए आपस में बातें कर रहे they........itne में वहां एक ब्लैक कलर की कार आकर ruki.............raghu और जीतू दोनों एक तुक उस कार की तरफ देखने lage...........car का शीशा चरों तरफ से बंद था और उसपर ब्लैक कलर का शीशा चढ़ा हुआ tha..........car में बैठा साक्ष दो तीन बार जब हॉर्न बजता हैं तब रघु कन्फर्म हो जाता हैं की ये बाँदा यहीं इसी घर में आया हुआ hain..........raghu फ़ौरन अपनी जगह से उठता हैं और जाकर मैं गेट खोल देता hain,..........jaise hi मैं गेट खुलता हैं रघु सामने से अंदर बैठे हुए साक्ष की तरफ देखने लगता hain.......magar इससे पहले वो उसे देख पता वो कार तेज़ी से चलती हुई सीधा अंदर चली जाती हैं और रघु टकटकी लगाए बस उस कार के तरफ देखने लगता है........
फिर वो मैं गेट बंद करता हैं और जब वो वापस उस कार के तरफ जाता हैं जहाँ कुछ दूर पर वो कार जाकर रुकी हुई thi.......wo उस कार के शीशे पर नॉक करता hain......thode देर बाद उस कार का शीशा नीचे की तरफ सरकता हैं और अंदर baitha/baithi साक्ष पर जब रघु की नज़र पड़ती हैं एक पल के लिए तो उसकी आँखें चौंडिया जाती hain.......ander एक लड़की बैठी हुई थी और सर उसका पूरी तरह ब्लैक स्कार्फ़ से ढाका हुआ tha........haan चेहरा उसका साफ़ नज़र आ रहा tha.....magar गले के नीचे भी वही ब्लैक स्कार्फ़ मौजूद tha........aankhon पर काळा रंग का चस्मा चढ़ा हुआ tha........wo फ़ौरन उस कार का दरवाज़ खोलती हैं और रघु उसे देखकर थोड़ा साइड हो जाता hain..........magar उसकी नज़रें अभी भी उसपर hi थी.......................
जैसे hi वो बहार निकलती हैं वो एक तुक रघु के तरफ बड़े अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain..........fir उसकी नज़र थोड़ी दूर पर खड़े जीतू की तरफ जाती hain.........wo उन दोनों को सर से लेकर पवन तक घूर रही thi........magar अजीब नज़रियों se..........kuch देर बाद वो धीरे से रघु की तरफ देखकर बोल पड़ती हैं.............
" काव्य मेहता का घर एहि हैं नाहा....." और वो लड़की रघु के जवाब की परवाह किये बगैर सीधा उस मैं दूर की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ रघु उसे सर से लेकर पवन तक घूरे जा रहा tha.........usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये आखिर हो कौन सकती hain...........agar ये कोई रिश्तेदार होती तो इस तरह से काव्य का पता नहीं पूछती .......तो फिर कौन हो सकती हैं ये............
" ये लौड़ा हैं कौन!!!!!!!!.......... और हैं क्या चीज़...................................." और रघु के मुँह से धीरे से आवाज़ निकल पड़ती हैं वहीँ कुछ दूर पर खड़ा जीतू भी उसे हैरत से देख रहा tha.........................aur शायद वो भी उससे एहि पूछ रहा था की .............आखिर ye............hain कौन !!!!!!!!!........................................................
कंटिन्यू...................................................................