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अपडेट-50 (ा) (मेघा अपडेट)
" memsaheb.....aab तो आप हार gayi............aur जैसा की शर्त के मुताबिक़ आज से 24 घंटे के लिए आप हम सबकी घुलम hui.......jiska जो दिल चाहे वो आपके साथ कर सकता हैं और आप किसी को किसी बात के लिए मन नहीं karengi.............aur तो आप बहुत ाचे से जानती हैं की इन 24 घंटों में आपके साथ क्या होने वाला hain.........aur हम सब आपके साथ मिलकर क्या करने वाले hain...........wo कहते हैं na...................samajhdaar को बस इशारा काफी होता हैं.............." और इतना कहकर तीनों ठहाका मरकर ज़ोरों से हसने लगते हैं.....................................................
अब आगे....................................................................................
काव्य उन तीनों के सामने उनके छोटे से उस कमरे में....... उनके सामने अध्नंगी हालत में बैठी हुई thi............aab वो ाचे से समझ चुकी थी की ये तीनों उसे मिलकर इन 24 घंटों में उसके बुर और गांड की बहुत ाचे से कुटाई करने वाले hain.......to अब उसके लिए भी एहि ाचा होगा की वो अपने हथियार उनके आगे दाल दे और जो ये सब उसके साथ करना चाहते हैं वो भी उन्हें जैसे चाहे सब कुछ बिना किसी सवाल जवाब के करने दे...........
मगर अब सवाल ये था की वो ये बात कहे kaise.........kyon की वो रघु को बहुत ाचे से जानती thi........aur वो ये भी जानती थी की रघु अब इन 24 घंटों में उसके साथ क्या कुछ करने वाला hain..........wo रघु के निहायती घटिया गंदे खेल से पूरी तरफ वाकिफ thi........aur अब तो जीतू भी ठीक उसकी के रंग में पूरी तरह से रंग गया tha.......jaisa खेल रघु को पसंद था वैसा hi जीतू ko........magar अब सवाल ये था की राम क्या ये सब पसंद karega.........magar कहीं न कहीं काव्य भी तो एहि चाहती थी की रघु उसके साथ गन्दगी भरा कुछ खेल khele.........uski बेइज़ाती kare........ussey वो सब कुछ करवाए जो एक पेशावर रंडी भी कुछ करने से पहले सौर बार सोचती hain........aab तो वैसे भी काव्य उनकी रंडी hi thi........ek तरह से दूसरी शब्द में कहा जाये तो उनका ...........एक घुलम..........
सच तो ये था की काव्य को रघु की एहि अदा बहुत पसंद thi........na जाने रघु की एहि गन्दगी काव्य को उसकी तरफ पल पल आकर्षित करती thi......kyon की रघु सबसे अलग जो tha.............wo उसे छोड़ता तो था मगर गंदे भरे खेल उसके साथ ज़्यादा खेलता tha.........aur कहीं न कहीं काव्य को उसका ये गन्दा भरा खेल बहुत ाचा लगता tha..........wo तो चाहती hi थी की रघु कुछ उससे अलग karwaye..........usey वो अपनी दासी बनाकर रखे .........उसके जिस्म के साथ वो सब कुछ करे जिसकी उसे चाह hain........bhale hi आज रघु बेईमानी करके उसके साथ जीत तो गया था मगर कहीं न कहीं काव्य भी एहि चाहती थी की वो इस बाज़ी में रघु से हार जाये..........
क्यों की आज के इस हार में उसकी भी जीत thi...........aab तो उसे भी इंतज़ार था इन 24 घंटों ka..........aur उसे पूरा यकीन था की इस बार रघु ज़रूर कुछ ऐसा करेगा जो सबसे हटके hoga..........uska कोई भी सूराख ऐसा नहीं होगा जहाँ पर रघु अपना लुंड नहीं pelega.......aur तो और रघु का सबसे पसंदीदा सूराख उसकी गांड की छोटी सी छेद thi........jisey वो पेल पेलकर उस छोटे से सुराख को बड़ा करना चाहता tha.........aur कहीं न कहीं काव्य को भी ऐसी hi चुदाई पसंद भी thi.........ye सोच सोचकर उसकी छूट में भी गीलापन अब बढ़ता जा रहा tha........magar कहीं न कहीं वो राम को लेकर थोड़ी चिंतित भी thi......pata नहीं वो राम के सामने क्या रघु के साथ वो सब कुछ कर payegi.........jo रघु उससे करवाना चाहता hain.........na जाने इस तरह के हज़ारों सवाल अब काव्य के दिल और दिमाग में चल रहे थे जिसका जवाब अब उसे बहुत जल्द मिलने वाला था...........
" अब जैसे शर्त के मुताबिक अब से आप हम सबकी घुलम hain..........to जिसकी जो इच्छा करे वो आपके साथ जो चाहे कुछ भी कर सकता hain.............magar मैं आपको बता दूँ की हम सब इतने भी निर्दयी नहीं हैं जो हम आपको तकलीफ dengey.........ya ज़ोर ज़बरदस्ती karnegey.........kyon की जो मज़ा प्यार में हैं वो ज़बरदस्ती में kahan............aap निश्चिंत rahiye........isliye अब मैं चाहता हूँ की आप भी इस खेल में हम सबका पूरा पूरा साथ dein.......main विश्वास दिलाता हूँ की आपको भी हमारे साथ इस खेल में पूरा पूरा मज़ा aayega............magar.............." और इतना कहकर रघु अपनी बात अधूरी छोड़ देता हैं वहीँ उन दोनों के साथ साथ काव्य भी हैरत से रघु के तरफ एक तुक देखने लगती हैं.......
" मगर क्या रघु........." अब काव्य काफी रहत महसूस कर रही thi...........kyon की वो राम के सामने ज़लील होने से बस दुर्र रही थी और रघु ने अब ये बात साफ़ कर दी थी...........
" magar..........is खेल में मेरी तीन शर्तें हैं जो आपको माननी hi padegi.........meri पहली शर्त ........ घडी में ठीक 11 बजाते hi आपके जिस्म पर कपड़े का एक टुकड़ा भी नहीं होना chahiye..........aur अभी 11 बजने में आधा घंटा बाकि hain.......in 24 घंटों में आप इसी तरह सर से लेकर पवन तक पूरी नंगी हालत में rahengi.......jahan जाना हैं.... जो काम करना हैं सब ऐसे hi करना padega.........aur सबसे बड़ी बात....... हम सबके बीच शर्म की कोई दीवार अब नहीं rahegi.........jiski जो इच्छा हुई वो आपको तुरंत करनी hogi......chahe उसकी इच्छा जो ho.......aur अगर किसी भी तरह का झिझक और शर्म हमारे बीच अगर आया तो ये आपके लिए ठीक नहीं होगा.........." बोलो मंज़ूर हैं मेरी पहली shart.........aur हाँ इंकार का मतलब फिर से 24 ghanta.........is लिए किसी भी बात को मन करने से पहले सौ बार ज़रूर सोच lena............aur जब तक हम तीनों लोग आपसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाते ये 24 घंटे आगे के लिए भी बढ़ सकते hain.......is लिए इस बीच सबको खुस करना भी ज़रूरी हैं........." और रघु इस बार अपने बात पर ज़ोर देते हुए अपनी बात ख़तम करता हैं वहीँ काव्य कुछ देर तक सोचती रहती हैं फिर वो धीरे से हाँ में अपनी गुर्दें हिला देती hain.........wo बहुत ाचे से जानती थी की रघु कुछ ऐसा hi शर्त उसके सामने रखने वाला हैं.......
" और दूसरी शर्त क्या हैं..........." काव्य धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ उसका दिल अब ज़ोरों से धड़क रहा tha.........wahin रघु इस बार उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.........
" मेरी दूसरी शर्त ये हैं की मेरे छोटे मालिक की जो कुछ भी इच्छा हैं वो आपको पूरी करनी padegi..........kahin ऐसा न हो की आपकी वजह से इन्हें नाराज़ होना pade......aur कोई भी काम करने से पहले हमसे पूछ के hi जाना padega.......chahe वो काम कुछ भी क्यों न ho........aur अगर गलती हुई तो 24 घंटे .........याद हैं na...........kyon ठीक कहा न छोटे मालिक.........." और रघु इस बार अपने पीले काळा दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ राम भी ख़ुशी से झूम उठता hain.............wahin काव्य भी थोड़ा सा सुकून महसूस करती hain......sach तो ये था की उसे ये दोनों शर्त पसंद आ गया tha...........magar रघु कहाँ उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाला tha........jo जाल उसने काव्य के लिए बना था उसमें काव्य आगे चलकर बुरी तरह से फंसे वाली thi.........shayad इस लिए काव्य को ये दोनों शर्तें कोई ख़ास नहीं लग रही थी...........
मगर शायद काव्य ये भूल रही थी की अब जो कुछ भी करना हैं सब कुछ रघु और जीतू के हाथ में hain.......ram तो बस उनका सिर्फ एक मोहरा hain.......aur वो दोनों बहुत ाचे से जानते थे की अपने मोहरे को कब और ...........कैसे इस्तेमाल करना hain.........aur कब तक काव्य को अपने जाल में फंसाये रखना हैं.........
" और तीसरी shart...........kya हैं............." और काव्य लुम्बी सांस छोड़ते हुए धीरे से बोल पड़ती hain..........wahin रघु कुछ देर तक चुप रहता हैं फिर वो काव्य के तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
" ऐसी भी क्या जड़ली हैं मेरी jaan.............aabhi तो आप बस मेरी ये दो शर्तें hi पूरी कर दीजिये .........एहि मेरे लिए बस बहुत hain..........kahin ऐसा न हो की आपको मेरी ये दो शर्तें पूरी करने में hi आपकी बुर और गांड पूरी तरह से फुट jaye.........aur आप तो एक बात ाचे से जानती हैं की मुझे औरत के बुर और गांड से पानी निकलवाने में कितना मज़ा आता hain........aur हाँ एक बात तो मैं आपको बताना भूल hi gaya............jo कुछ हम कहेंगे उसमें आप किसी तरह से किसी से कोई सवाल जवाब नहीं karengi.........ye आपके लिए hi ाचा नहीं नहीं to..........aap मेरे गुस्से को जानती हैं...........
रघु ने तो जैसे इतने सरे कंडीशंस hi रख दिए they......aab बचा hi क्या था जो काव्य न manti............aab उसे धीरे धीरे समझ में आ गया था की अब रघु इन 24 घंटों में उसके साथ क्या कुछ करने वाला hain..........aab उसे सिवाए चुप चाप से अपने तीनों मालिक की बात माननी thi........sirf उनकी घुलम banke.........chahe वे लोग उसका जैसा चाहे वैसा इस्तेमाल kare......wo अब इन 24 घंटों में उन तीनों के लिए बस एक खिलौना thi........bus खेलने की cheez.........chahe जैसा khele.........magar जो कुछ भी था रघु बहुत शातिर खिलाडी tha...........wo जैसे तैसे अब काव्य को अपनी गिरफ्त में पूरी तरह से ले चूका tha..........aur खुद राम के सामने उसके साथ अब नंगापन का खेल खेलने जा रहा था जिस खेल में अब राम भी उसका बराबर का भागिदार बनाने वाला था.........
सबकी नज़रें अब घडी के कांटे की तरफ thi.....aabhi बस 15 मिनट hi बचे they......us खेल को खेलने के liye..........magar जो कुछ भी था काव्य को भी कहीं न कहीं इस खेल में बड़ी hi रूचि thi.......aur सच कहा जाये तो वो भी अब आने वाले उस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही thi.........jeetu राम के कंधे पर अपने हाथ रखता हैं और उसे काव्य से दूर ले जाता हैं और करीब 05 मिनट तक उसको न जाने क्या क्या समझाता hain.....jab थोड़ी देर बाद वो दोनों वापस लौटते हैं तब राम के चेहरे पर खुशियां साफ़ चालक पड़ती hain..........yani अब वो भी इस खेल में बराबर का हिस्सेदार बन गया tha...........ya फिर राम की सोच भी अब उन जैसे hi हो रही थी.............
" आपके ख्याल से छोटे मालिक खेल कहाँ से शुरू करनी चाहिए............." और इस बार रघु राम की तरफ देखता हुआ बड़े hi गंदे अंदाज़ में काव्य की तरफ देखकर मुस्कुराने लगता hain.........wahin काव्य कभी राम के तरफ देख रही thi.........to कभी रघु और जीतू के तरफ.........
राम वहीँ कमरे में रखा अश्लील किताब धीरे से अपने हाथों में उठता हैं और उसे काव्य के तरफ धीरे से बढ़ा देता hain........wahin काव्य कभी usey.......to कभी उस किताब को एक तुक देख रही thi...........wahin राम अगले hi पल धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
" इसमें जितनी भी तसवीरें हैं जो इस किताब में.... bhabhi........wo साडी की साडी मेरी फंतासी hain........aur मैं अपनी एक एक हर फंतासी को पूरी करना चाहता hoon.........aur वो सब कुछ चाहता हूँ जो कुछ इसमें hain..........is लिए गौर से देख लीजिये जो कुछ भी इनमें आपको नज़र आ रहा हैं........." और राम इतना कहकर चुप हो जाता हैं वहीँ काव्य धीरे धीरे करके एक एक पन्ने को पलटना शुरू करती हैं और जैसे जैसे पन्ने बदलते हैं उसके चेहरे पर परेशानी के बदल धीरे धीरे और भी गहराने लगते hain..........kyon की उस पन्ने में कुछ ऐसी भी तसवीरें थी जो काव्य को परेशां कर रही thi...........jisey देखकर उसकी बुर में गीलापन तो बढ़ने लगा था मगर साथ hi साथ दुर्र भी थोड़ा गहराता जा रहा था.........
" अब से ये 24 घंटे ये तुम्हारी भाभी नहीं सिर्फ घुलम hain...........gaur से देख लो इन सरे तस्वीरों ko..........tumhein वो सब कुछ करना हैं जो हमारे छोटे मालिक तुमसे चाहते hain............aur haan............hum इतने निर्दयी नहीं हैं की हम तुम्हें ऐसे नंगा करके यु hi तुम्हारे साथ ये खेल khelengey...........maza तो तब आएगा जब हम खेल शुरू से khelengey.......yani तुम्हें पूरे कपड़े पहनने के बाद .......और फिर हम सब बरी बरी से तुम्हें नंगा karenge...........is लिए जाओ जल्दी से जाकर कपड़े पहन lo..........aur हाँ ये कपड़े नहीं पेहेन्ने हैं जो आपने अभी पहना tha...........upar सफ़ेद रंग की सूट ..........और नीचे लाल रंग की टाइट तुम्हारी laggy..........jo तुम्हारे बदन से पूरी तरह चिपकी हुई ho........aur हाँ चुनरी नहीं होना चाहिए तुम्हारे बदन pe......aab जाओ जल्दी से तैयार होकर aawo.........aab समाय बहुत कम हैं........" और रघु जैसे काव्य को आदेश देता हैं और काव्य अपने सरे कपड़े समेटती हुई फ़ौरन अपने बुगलो में भाग जाती hain..........peechay खड़े सभी लोग बस मुस्कुराते रहते हैं.....
" आपने भाभी को कपड़े फिर से क्यों पहनने diya..........usey तो हम सब उतरने वाले थे न........." और राम भोलेपन से दुबारा बोल पड़ता हैं वहीँ जीतू मुस्कुराते हुए धीरे से हंस पड़ता हैं........
" तुम बस देखते जाओ छोटे malik......jaisa हम कहे वैसा hi karna..........jo हम बोले वहीँ bolna.........aur किसी भी चीज़ में ज़रा भी जल्दीबाज़ी मुट्ठ karna........warna सारा मज़ा बेकार हो jayega.........fir देखना हम तुम्हारी भाभी के साथ कैसे चुदाई का खेल खेलते hain......aur मेरा यकीन मनो की तुम्हें भी इस खेल में मज़ा बहुत आएगा........." और इस बार तीनों फिर से हंस पड़ते hain........tabhi तीनों अंदर अपने अपने कपड़े पहनकर बंगलो में जाते हैं और तीनों की नज़र सामने राखी घडी पर जाती हैं जो इस वक़्त 11 बजने का एलान कर रहे they..........tabhi उन्हें सीढ़ियों से ऊपर की तरफ काव्य सूट में उतरती हुई दिखाई देती hain........jaisa वो तीनों उसे देखना चाहते they........bilkul उसी अंदाज़ में.........
" अब हमारा टाइम शुरू हो gaya..........aur खेल bhi.........to चालो खेल शुरू करते हैं............" और रघु जैसे खेल का एलान करता hain........wahin उन दोनों के चेहरे पर खुशियां साफ़ झलक पड़ती हैं.........
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काव्य अब उन तीनों के बीच में कड़ी thi...........kisi गुनेहगार की tarah.......raghu जीतू की तरफ देखता हैं और उसकी तरफ देखते हुए कमीनी मुस्कान में धीरे से हंस पड़ता हैं.......
कंटिन्यू.............................................................
" memsaheb.....aab तो आप हार gayi............aur जैसा की शर्त के मुताबिक़ आज से 24 घंटे के लिए आप हम सबकी घुलम hui.......jiska जो दिल चाहे वो आपके साथ कर सकता हैं और आप किसी को किसी बात के लिए मन नहीं karengi.............aur तो आप बहुत ाचे से जानती हैं की इन 24 घंटों में आपके साथ क्या होने वाला hain.........aur हम सब आपके साथ मिलकर क्या करने वाले hain...........wo कहते हैं na...................samajhdaar को बस इशारा काफी होता हैं.............." और इतना कहकर तीनों ठहाका मरकर ज़ोरों से हसने लगते हैं.....................................................
अब आगे....................................................................................
काव्य उन तीनों के सामने उनके छोटे से उस कमरे में....... उनके सामने अध्नंगी हालत में बैठी हुई thi............aab वो ाचे से समझ चुकी थी की ये तीनों उसे मिलकर इन 24 घंटों में उसके बुर और गांड की बहुत ाचे से कुटाई करने वाले hain.......to अब उसके लिए भी एहि ाचा होगा की वो अपने हथियार उनके आगे दाल दे और जो ये सब उसके साथ करना चाहते हैं वो भी उन्हें जैसे चाहे सब कुछ बिना किसी सवाल जवाब के करने दे...........
मगर अब सवाल ये था की वो ये बात कहे kaise.........kyon की वो रघु को बहुत ाचे से जानती thi........aur वो ये भी जानती थी की रघु अब इन 24 घंटों में उसके साथ क्या कुछ करने वाला hain..........wo रघु के निहायती घटिया गंदे खेल से पूरी तरफ वाकिफ thi........aur अब तो जीतू भी ठीक उसकी के रंग में पूरी तरह से रंग गया tha.......jaisa खेल रघु को पसंद था वैसा hi जीतू ko........magar अब सवाल ये था की राम क्या ये सब पसंद karega.........magar कहीं न कहीं काव्य भी तो एहि चाहती थी की रघु उसके साथ गन्दगी भरा कुछ खेल khele.........uski बेइज़ाती kare........ussey वो सब कुछ करवाए जो एक पेशावर रंडी भी कुछ करने से पहले सौर बार सोचती hain........aab तो वैसे भी काव्य उनकी रंडी hi thi........ek तरह से दूसरी शब्द में कहा जाये तो उनका ...........एक घुलम..........
सच तो ये था की काव्य को रघु की एहि अदा बहुत पसंद thi........na जाने रघु की एहि गन्दगी काव्य को उसकी तरफ पल पल आकर्षित करती thi......kyon की रघु सबसे अलग जो tha.............wo उसे छोड़ता तो था मगर गंदे भरे खेल उसके साथ ज़्यादा खेलता tha.........aur कहीं न कहीं काव्य को उसका ये गन्दा भरा खेल बहुत ाचा लगता tha..........wo तो चाहती hi थी की रघु कुछ उससे अलग karwaye..........usey वो अपनी दासी बनाकर रखे .........उसके जिस्म के साथ वो सब कुछ करे जिसकी उसे चाह hain........bhale hi आज रघु बेईमानी करके उसके साथ जीत तो गया था मगर कहीं न कहीं काव्य भी एहि चाहती थी की वो इस बाज़ी में रघु से हार जाये..........
क्यों की आज के इस हार में उसकी भी जीत thi...........aab तो उसे भी इंतज़ार था इन 24 घंटों ka..........aur उसे पूरा यकीन था की इस बार रघु ज़रूर कुछ ऐसा करेगा जो सबसे हटके hoga..........uska कोई भी सूराख ऐसा नहीं होगा जहाँ पर रघु अपना लुंड नहीं pelega.......aur तो और रघु का सबसे पसंदीदा सूराख उसकी गांड की छोटी सी छेद thi........jisey वो पेल पेलकर उस छोटे से सुराख को बड़ा करना चाहता tha.........aur कहीं न कहीं काव्य को भी ऐसी hi चुदाई पसंद भी thi.........ye सोच सोचकर उसकी छूट में भी गीलापन अब बढ़ता जा रहा tha........magar कहीं न कहीं वो राम को लेकर थोड़ी चिंतित भी thi......pata नहीं वो राम के सामने क्या रघु के साथ वो सब कुछ कर payegi.........jo रघु उससे करवाना चाहता hain.........na जाने इस तरह के हज़ारों सवाल अब काव्य के दिल और दिमाग में चल रहे थे जिसका जवाब अब उसे बहुत जल्द मिलने वाला था...........
" अब जैसे शर्त के मुताबिक अब से आप हम सबकी घुलम hain..........to जिसकी जो इच्छा करे वो आपके साथ जो चाहे कुछ भी कर सकता hain.............magar मैं आपको बता दूँ की हम सब इतने भी निर्दयी नहीं हैं जो हम आपको तकलीफ dengey.........ya ज़ोर ज़बरदस्ती karnegey.........kyon की जो मज़ा प्यार में हैं वो ज़बरदस्ती में kahan............aap निश्चिंत rahiye........isliye अब मैं चाहता हूँ की आप भी इस खेल में हम सबका पूरा पूरा साथ dein.......main विश्वास दिलाता हूँ की आपको भी हमारे साथ इस खेल में पूरा पूरा मज़ा aayega............magar.............." और इतना कहकर रघु अपनी बात अधूरी छोड़ देता हैं वहीँ उन दोनों के साथ साथ काव्य भी हैरत से रघु के तरफ एक तुक देखने लगती हैं.......
" मगर क्या रघु........." अब काव्य काफी रहत महसूस कर रही thi...........kyon की वो राम के सामने ज़लील होने से बस दुर्र रही थी और रघु ने अब ये बात साफ़ कर दी थी...........
" magar..........is खेल में मेरी तीन शर्तें हैं जो आपको माननी hi padegi.........meri पहली शर्त ........ घडी में ठीक 11 बजाते hi आपके जिस्म पर कपड़े का एक टुकड़ा भी नहीं होना chahiye..........aur अभी 11 बजने में आधा घंटा बाकि hain.......in 24 घंटों में आप इसी तरह सर से लेकर पवन तक पूरी नंगी हालत में rahengi.......jahan जाना हैं.... जो काम करना हैं सब ऐसे hi करना padega.........aur सबसे बड़ी बात....... हम सबके बीच शर्म की कोई दीवार अब नहीं rahegi.........jiski जो इच्छा हुई वो आपको तुरंत करनी hogi......chahe उसकी इच्छा जो ho.......aur अगर किसी भी तरह का झिझक और शर्म हमारे बीच अगर आया तो ये आपके लिए ठीक नहीं होगा.........." बोलो मंज़ूर हैं मेरी पहली shart.........aur हाँ इंकार का मतलब फिर से 24 ghanta.........is लिए किसी भी बात को मन करने से पहले सौ बार ज़रूर सोच lena............aur जब तक हम तीनों लोग आपसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाते ये 24 घंटे आगे के लिए भी बढ़ सकते hain.......is लिए इस बीच सबको खुस करना भी ज़रूरी हैं........." और रघु इस बार अपने बात पर ज़ोर देते हुए अपनी बात ख़तम करता हैं वहीँ काव्य कुछ देर तक सोचती रहती हैं फिर वो धीरे से हाँ में अपनी गुर्दें हिला देती hain.........wo बहुत ाचे से जानती थी की रघु कुछ ऐसा hi शर्त उसके सामने रखने वाला हैं.......
" और दूसरी शर्त क्या हैं..........." काव्य धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ उसका दिल अब ज़ोरों से धड़क रहा tha.........wahin रघु इस बार उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.........
" मेरी दूसरी शर्त ये हैं की मेरे छोटे मालिक की जो कुछ भी इच्छा हैं वो आपको पूरी करनी padegi..........kahin ऐसा न हो की आपकी वजह से इन्हें नाराज़ होना pade......aur कोई भी काम करने से पहले हमसे पूछ के hi जाना padega.......chahe वो काम कुछ भी क्यों न ho........aur अगर गलती हुई तो 24 घंटे .........याद हैं na...........kyon ठीक कहा न छोटे मालिक.........." और रघु इस बार अपने पीले काळा दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ राम भी ख़ुशी से झूम उठता hain.............wahin काव्य भी थोड़ा सा सुकून महसूस करती hain......sach तो ये था की उसे ये दोनों शर्त पसंद आ गया tha...........magar रघु कहाँ उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाला tha........jo जाल उसने काव्य के लिए बना था उसमें काव्य आगे चलकर बुरी तरह से फंसे वाली thi.........shayad इस लिए काव्य को ये दोनों शर्तें कोई ख़ास नहीं लग रही थी...........
मगर शायद काव्य ये भूल रही थी की अब जो कुछ भी करना हैं सब कुछ रघु और जीतू के हाथ में hain.......ram तो बस उनका सिर्फ एक मोहरा hain.......aur वो दोनों बहुत ाचे से जानते थे की अपने मोहरे को कब और ...........कैसे इस्तेमाल करना hain.........aur कब तक काव्य को अपने जाल में फंसाये रखना हैं.........
" और तीसरी shart...........kya हैं............." और काव्य लुम्बी सांस छोड़ते हुए धीरे से बोल पड़ती hain..........wahin रघु कुछ देर तक चुप रहता हैं फिर वो काव्य के तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
" ऐसी भी क्या जड़ली हैं मेरी jaan.............aabhi तो आप बस मेरी ये दो शर्तें hi पूरी कर दीजिये .........एहि मेरे लिए बस बहुत hain..........kahin ऐसा न हो की आपको मेरी ये दो शर्तें पूरी करने में hi आपकी बुर और गांड पूरी तरह से फुट jaye.........aur आप तो एक बात ाचे से जानती हैं की मुझे औरत के बुर और गांड से पानी निकलवाने में कितना मज़ा आता hain........aur हाँ एक बात तो मैं आपको बताना भूल hi gaya............jo कुछ हम कहेंगे उसमें आप किसी तरह से किसी से कोई सवाल जवाब नहीं karengi.........ye आपके लिए hi ाचा नहीं नहीं to..........aap मेरे गुस्से को जानती हैं...........
रघु ने तो जैसे इतने सरे कंडीशंस hi रख दिए they......aab बचा hi क्या था जो काव्य न manti............aab उसे धीरे धीरे समझ में आ गया था की अब रघु इन 24 घंटों में उसके साथ क्या कुछ करने वाला hain..........aab उसे सिवाए चुप चाप से अपने तीनों मालिक की बात माननी thi........sirf उनकी घुलम banke.........chahe वे लोग उसका जैसा चाहे वैसा इस्तेमाल kare......wo अब इन 24 घंटों में उन तीनों के लिए बस एक खिलौना thi........bus खेलने की cheez.........chahe जैसा khele.........magar जो कुछ भी था रघु बहुत शातिर खिलाडी tha...........wo जैसे तैसे अब काव्य को अपनी गिरफ्त में पूरी तरह से ले चूका tha..........aur खुद राम के सामने उसके साथ अब नंगापन का खेल खेलने जा रहा था जिस खेल में अब राम भी उसका बराबर का भागिदार बनाने वाला था.........
सबकी नज़रें अब घडी के कांटे की तरफ thi.....aabhi बस 15 मिनट hi बचे they......us खेल को खेलने के liye..........magar जो कुछ भी था काव्य को भी कहीं न कहीं इस खेल में बड़ी hi रूचि thi.......aur सच कहा जाये तो वो भी अब आने वाले उस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही thi.........jeetu राम के कंधे पर अपने हाथ रखता हैं और उसे काव्य से दूर ले जाता हैं और करीब 05 मिनट तक उसको न जाने क्या क्या समझाता hain.....jab थोड़ी देर बाद वो दोनों वापस लौटते हैं तब राम के चेहरे पर खुशियां साफ़ चालक पड़ती hain..........yani अब वो भी इस खेल में बराबर का हिस्सेदार बन गया tha...........ya फिर राम की सोच भी अब उन जैसे hi हो रही थी.............
" आपके ख्याल से छोटे मालिक खेल कहाँ से शुरू करनी चाहिए............." और इस बार रघु राम की तरफ देखता हुआ बड़े hi गंदे अंदाज़ में काव्य की तरफ देखकर मुस्कुराने लगता hain.........wahin काव्य कभी राम के तरफ देख रही thi.........to कभी रघु और जीतू के तरफ.........
राम वहीँ कमरे में रखा अश्लील किताब धीरे से अपने हाथों में उठता हैं और उसे काव्य के तरफ धीरे से बढ़ा देता hain........wahin काव्य कभी usey.......to कभी उस किताब को एक तुक देख रही thi...........wahin राम अगले hi पल धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
" इसमें जितनी भी तसवीरें हैं जो इस किताब में.... bhabhi........wo साडी की साडी मेरी फंतासी hain........aur मैं अपनी एक एक हर फंतासी को पूरी करना चाहता hoon.........aur वो सब कुछ चाहता हूँ जो कुछ इसमें hain..........is लिए गौर से देख लीजिये जो कुछ भी इनमें आपको नज़र आ रहा हैं........." और राम इतना कहकर चुप हो जाता हैं वहीँ काव्य धीरे धीरे करके एक एक पन्ने को पलटना शुरू करती हैं और जैसे जैसे पन्ने बदलते हैं उसके चेहरे पर परेशानी के बदल धीरे धीरे और भी गहराने लगते hain..........kyon की उस पन्ने में कुछ ऐसी भी तसवीरें थी जो काव्य को परेशां कर रही thi...........jisey देखकर उसकी बुर में गीलापन तो बढ़ने लगा था मगर साथ hi साथ दुर्र भी थोड़ा गहराता जा रहा था.........
" अब से ये 24 घंटे ये तुम्हारी भाभी नहीं सिर्फ घुलम hain...........gaur से देख लो इन सरे तस्वीरों ko..........tumhein वो सब कुछ करना हैं जो हमारे छोटे मालिक तुमसे चाहते hain............aur haan............hum इतने निर्दयी नहीं हैं की हम तुम्हें ऐसे नंगा करके यु hi तुम्हारे साथ ये खेल khelengey...........maza तो तब आएगा जब हम खेल शुरू से khelengey.......yani तुम्हें पूरे कपड़े पहनने के बाद .......और फिर हम सब बरी बरी से तुम्हें नंगा karenge...........is लिए जाओ जल्दी से जाकर कपड़े पहन lo..........aur हाँ ये कपड़े नहीं पेहेन्ने हैं जो आपने अभी पहना tha...........upar सफ़ेद रंग की सूट ..........और नीचे लाल रंग की टाइट तुम्हारी laggy..........jo तुम्हारे बदन से पूरी तरह चिपकी हुई ho........aur हाँ चुनरी नहीं होना चाहिए तुम्हारे बदन pe......aab जाओ जल्दी से तैयार होकर aawo.........aab समाय बहुत कम हैं........" और रघु जैसे काव्य को आदेश देता हैं और काव्य अपने सरे कपड़े समेटती हुई फ़ौरन अपने बुगलो में भाग जाती hain..........peechay खड़े सभी लोग बस मुस्कुराते रहते हैं.....
" आपने भाभी को कपड़े फिर से क्यों पहनने diya..........usey तो हम सब उतरने वाले थे न........." और राम भोलेपन से दुबारा बोल पड़ता हैं वहीँ जीतू मुस्कुराते हुए धीरे से हंस पड़ता हैं........
" तुम बस देखते जाओ छोटे malik......jaisa हम कहे वैसा hi karna..........jo हम बोले वहीँ bolna.........aur किसी भी चीज़ में ज़रा भी जल्दीबाज़ी मुट्ठ karna........warna सारा मज़ा बेकार हो jayega.........fir देखना हम तुम्हारी भाभी के साथ कैसे चुदाई का खेल खेलते hain......aur मेरा यकीन मनो की तुम्हें भी इस खेल में मज़ा बहुत आएगा........." और इस बार तीनों फिर से हंस पड़ते hain........tabhi तीनों अंदर अपने अपने कपड़े पहनकर बंगलो में जाते हैं और तीनों की नज़र सामने राखी घडी पर जाती हैं जो इस वक़्त 11 बजने का एलान कर रहे they..........tabhi उन्हें सीढ़ियों से ऊपर की तरफ काव्य सूट में उतरती हुई दिखाई देती hain........jaisa वो तीनों उसे देखना चाहते they........bilkul उसी अंदाज़ में.........
" अब हमारा टाइम शुरू हो gaya..........aur खेल bhi.........to चालो खेल शुरू करते हैं............" और रघु जैसे खेल का एलान करता hain........wahin उन दोनों के चेहरे पर खुशियां साफ़ झलक पड़ती हैं.........
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काव्य अब उन तीनों के बीच में कड़ी thi...........kisi गुनेहगार की tarah.......raghu जीतू की तरफ देखता हैं और उसकी तरफ देखते हुए कमीनी मुस्कान में धीरे से हंस पड़ता हैं.......
कंटिन्यू.............................................................