Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 14 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 99

निशा:- अब्ब क्या है? क्यों बुलाया?

छत में आते hi निशा गुस्से से boli...Atul तो पहले से hi गुस्से में tha...Fir भी अपना गुस्सा दबाते हुए.

अतुल:- मुझे ये रवि ठीक नहीं लग रहा है.

निशा:- तोह?

अतुल:- क्या तोह? उससे दूर रहा करो.

निशा:- तुम कौन होते हो मुझे ये सलाह देने वाले.

निशा तो गुस्से में बोले जा रही थी लेकिन उसकी ये बात से अब्ब अतुल खुद पर और कण्ट्रोल नहीं कर पाया.

अतुल:- मई कौन हु? अब्ब ये मत कहना की हम दोनों अलग हो गए है और अब्ब वो प्यार भी नहीं रहा.

गुस्से में अतुल की आवाज भी तेज हो रहा था.

निशा:- है अब्ब नहीं रहा pyar...Nahi करती हु तुम से प्यार.

अतुल अब्ब निशा की आँखों में देखते हुए...

अतुल:- सच बोल रही हो?

निशा कुछ जवाब देती इससे पहले अतुल एक बार फिर से...

अतुल:- अगर ये सच है तो मुझे भी आज से तुमसे कोई मतलब nahi...Mai भी हमारे रिश्ते को इस तरह से तोड़ लूंगा की कभी जुट नहीं पायेगा और ना hi जुटने दूंगा.

खुद की कसम खाता हु कभी मुद कर तुम्हे देखूंगा भी nahi...Har वो फोटोज और यादें जला दूंगा जिसमे हम दोनों साथ हो.

फिर तुम्हारी जिंदगी तुम्हे मुबारक और मेरा जिंदगी मुझे.

इतना कह कर अतुल छत की चक्कर लगाने लगता hai...Frustration में दीवाल पर मुक्का मरता तो कभी अपने hi बाल नोचने laga...Gussa अपने चरम पर था.

अतुल:- बहुत सेह liya...Lekin अब्ब और किस हद्द tak...Gussa सिर्फ तुम्हे hi नहीं aata...Aaj जो गुस्सा देख रही हो naa...Yahi gussa...Aisi गुस्सा में सिर्फ "में एंड Myself"...Baaki किसी की मुझे परवाह नहीं और कोई मतलब भी नहीं.

अब्ब अतुल अपना आँखें निशा की तरह उठा कर.

अतुल:- जल्दी जवाब do...Faaltu का टाइम नहीं है मेरे पास.

निशा अतुल को देख कर एकदम से दर जाती है.

अतुल का चेहरा और आँखें गुस्से में बिलकुल लाल हो गया tha...Chehra पूरा पसीना में भींगा हुआ और आँखें उसको hi घूरता हुआ.

अतुल:- जवाब दो.

लगभग दहाड़ते हुए अतुल बोलै.

कुछ देर तो निशा अतुल को देखती hi rahi...Dar के साथ साथ उससे हैरानी भी हो रही thi...Kya ये वही अतुल है जिसको वो जानती hai...Itna gussa!!!Itna गुस्सा वो भी अपने लिए.

निशा:- अब्ब अपनी गलती छुपाने के लिए गुस्से का सहारा लो.

शिकायत भरी आवाज में निशा ने पूछा.

इतना गुस्सा के बावजूद भी अतुल हंस पड़ा.

अतुल:- (लाफिंग इन एंगर) बेवकूफ hi rahogi...Aur बेवकूफी की कोई इलाज नहीं.

निशा:- है बेवकूफ hi तो hu...Tumse प्यार किया और अँधा विस्वाश kiya...Aur मेरी hi बेवकूफी का सज़ा मिल रही है जिस हाल में आज में हु.

अतुल बस चुप hi raha...Gussa तो बहुत आ रहा tha...Lekin कर भी क्या सकता था.

निशा:- क्या प्रीती इतनी अच्छी है?

थोड़ा सा दर्द के साथ निशा ने पूछा.

अतुल:- वो भी बेवकूफ है तुम्हारी तरह.

निशा:- और हम दोनों को बेवकूफ बनाने wale...Tum अपने बारे में क्या कहोगे?

अतुल:- मई भी बेवकूफ tha...Jo तुमसे प्यार हो gaya...Tumse दोस्ती भी नहीं करना चाहिए था.

निशा:- आ गयी ना दिल की बात जुबान par...Waise अब्ब मई तुम दोनों के बिच नहीं आउंगी.

अतुल:- मेरे बारे में तोह इतना कुछ बोल रही ho...Khud की शकल भी तोह देखो आईने me...Mujhe जलाने के लिए रवि से बात चीत बढ़ा दी.

निशा:- व्हाट?

अतुल:- जब बात अपने पर आ गयी तोह? वैसे बात तुम्हारे झुठलाने से झूठ नहीं हो जाएगा.

निशा:- क्या झूठ? मैंने कब मन किया की आज वो मुझसे बात नहीं कर रहा था? तुम्हारी तरह झूठ तोह नहीं बोलती.

अतुल:- तोह मान रही हो की मुझे जलाने के लिए ये सह कर रही हो.

निशा:- तुम्हे जलाने के liye...Kya अब्ब यही काम बाकी रह गया है मेरे पास?

एक बात कान खोल कर सुन lo...Bhaad में जाओ तुम और रवि.

वो तोह रवि कुछ काम की बात कर रहा था वर्ण मुझे उससे कोई मतलब hi नहीं.

अतुल:- तुम चाहती हो की मई सच मान लू?

निशा:- जरुरत nahi...Jo सोचना है socho...Mujhe कोई मतलब nahi...Aur मई सही होने के बावजूद ये साबित नहीं करुँगी.

अतुल:- Exactly...Mujhe भी जरुरत नहीं खुद को सही साबित करने की.

दोनों का गुस्सा और ईगो चरम में पहुँच गया tha...Naa hi दोनों एक दूसरे के सामने झुकना चाहते थे और ना hi एक दूसरे पर विश्वाश कर पा रहे थे.

कुछ देर बाद.

अतुल:- तुमने जवाब नहीं दिया? क्या सच में अब्ब तुम मुझसे प्यार नहीं karti...Abhi जवाब do...Apna अपना रास्ता चुन लेंगे.

निशा कुछ देर अतुल को देखती है और फिर.

निशा:- तुमसे नफरत नहीं कर पा रही hu...Lekin जल्द कोशिश करुँगी.

कुछ सोचने के बाद.

अतुल:- तुम्हे तोह शायद hi कभी समझा paaunga...Agar समझना होता तो पहले hi समझ jaati...Khair करती रहो nafrat...Aur साबित कर देना "मेरा प्यार तुम्हारे लिए सबसे बड़ा भूल था, गलत था मई की प्यार के रास्ते चल पड़ा"

फैसला तुम्हारे हाथ में hai...Mujh पर यकीं करना या ना karna...Agar कभी यकीं हो भी जाए तो इतना लेट मत कर देना की तब तक मई hi बदल jaau...Mai मई ना राहु.

पहली बार अतुल अपना गुस्सा भूल कर इमोशनल हो गया.

फिर वो वह और रह नहीं paaya...Kya बातें करता और बातों का मतलब hi क्या था.

दोनों अपने अपने रूम की तरफ जाने lage...Nisha की आँखों में आंसू था तो अतुल की आँखों का भी वैसा hi हाल tha...Uski भी आँखें नाम हो गया था.

शायद दोनों महसूस कर रहे thhe...Unka फ्यूचर अब्ब ज्यादा नहीं hai...Aaj नहीं तो कल वो दिन आ hi जाएगा.
 
थैंक्स हेललोहोने भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Great तो सी यू आफ्टर लॉन्ग time...Ravi की प्लानिंग hi ऐसी है की धीरे धीरे दोनों उसकी प्लान में फसा gaye...Aur झूठ को बार बार चीख चीख कर बोलने से वो सच लगने लगता hai...Ravi की प्लान इस लिए नहीं लिखा की स्टोरी और लम्बा हो जाता बस उसके प्लान के इफेक्ट्स को दिखाया.

ऐसे hi साथ बने रहिये भाई.
 
अपडेट 100

दिन बीत गया, हफ्ता बीत गया और महीना भी बीत गया लेकिन अगर कुछ बदला नहीं था तो अतुल और निशा की बीच की दूरियां, उनकी हालात, गुस्सा और ईगो.

खुश तो दोनों में से कोई नहीं thhe...Lekin एक दूसरे को हमेशा खुश दिखाने की कोशिश karte...Jaise उन्हें एक दूसरे के बिना कोई फर्क नहीं पड़ता.

दूर जा नहीं सकते थे और पास आना भी नहीं चाहते thhe...Dil में दर्द और दिमाग में ego...Bahut अजीब सा हालात हो गए थे दोनों के बिच.

डॉ. राहुल:- क्या बात है अतुल? फिर से पुराने वाले फॉर्म me...Accha लगा तुझे ऐसे देख kar...Concepts और नॉलेज hai...Bas रेगुलरिटी मेन्टेन करना!!

अतुल:- जरूर sir...Abb समझ में आ gaya...Padhaai hi सब कुछ hai...Baki सब बकवास और बेकार hi बातें hai...Totally टाइम वास्ते.

अतुल की आवाज में एक अलग hi फ़्रस्ट्रेशन tha...Aur ये जवाब सुन कर निशा का गुस्सा और भी बढ़ गया.

राहुल सर को भी अजीब लगा अतुल की ये baat...Lekin क्लास में होने की वजह से इस वक्त उन्होंने इग्नोर कर diya...Fir कभी अतुल से इस बारे में बात करने का सोच कर आगे पढ़ाने लगे.

अजय:- क्या बात है यार? तूने तोह आज कमाल कर दिया?

अतुल:- मेरी बात chhod...Tu बता आज कल तेरा पढ़ाई क्यों डाउन हो रहा है?

अजय:- अभी मेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम चल रहा है ना.

अतुल:- तोह?

अजय:- अब्ब अपना hi ऑर्गन hai...Kyu इतनी म्हणत से पढ़ना?

अतुल:- तोह फिर लिवर और किडनी क्या तेरे चाचा की ऑर्गन है?

इर्रिटेट हो कर अतुल ने जवाब नहीं दिया.

अजय:- ऐसा नहीं है...

अतुल:- फिर?

अजय:- क्या यार? तू हमेशा पढ़ाई की बातें hi क्यों करता है?

अतुल:- तोह फिर किस बारे में बातें करू?

बेवफाई की बारे me...Pyar के बारे me...Jo सिर्फ मीठी जहर का काम करता hai...Aisi बकवास बातों के लिए मेरे पास टाइम नहीं है.

अभी भी कहता hu...Vakt रहते hi सुधर jaa...Padhaai पर भी थोड़ा ध्यान de...Warna पछताते rahega...Padhaai hi कभी हमसे बेवफाई नहीं करता.

अजय:- अच्छा तोह यह बात है.

अजय हँसते हुए बोलता hai...Lekin उसकी हंसी ज्यादा देर टिक नहीं पाया.

अतुल:- हंस क्यों रहा है?

गुस्से से अतुल ने पूछा.

अतुल:- देख bhai...Mere पास फ़ालतू बातों के लिए टाइम नहीं hai...Jaa रहा हु.

इतना कह कर अतुल वह से चला जाता है.

अजय:- यह नहीं सुधरेगा. :डोह:

अतुल और निशा से भी ज्यादा अगर कोई परेशां था तोह वो था Ravi...Dono के बिच कुछ हद्द तक दूरियां बनाने में वो सफल तोह जरूर हुआ लेकिन इससे ज्यादा कामयाब वो नहीं हो पा रहा था.

निशा उससे अपने पास आने की कोई मौका दे नहीं रही thi...Fb पर मैसेज को इग्नोर karna...Kahi बाहर चलने की बात को आसानी से रिजेक्ट कर देना और कभी बातें करता तोह एक लाइन की आंसर में बातें ख़त्म कर देना.

और दूसरी तरफ Atul...Usse तोह जैसे प्रीती से नफरत hi हो गया tha...Har वो रास्ता उसने बंद कर दिया था जिससे प्रीती उसके पास आ सकती थी, उससे बातें कर सकती थी.

यही बातें रवि को परेशां कर रहा tha...Frustration और गुस्से में रहने की अलावा वो और कुछ कर भी नहीं पा रहा था.

अजय:- भाई yaar...Please अभी नहीं है.

लगभग रिक्वेस्ट करते हुए अजय ने kaha...Atul का गुस्सा तोह काम नहीं hua...Lekin वो चुप hi रहा.

उधर निशा और अंजलि की बिच भी ऐसे hi हालात थे.

फिर चारो दोस्त अजय की कार में निकल जाते है एक सफर के liye...Unka सफर रुकता है सेहर से काफी दूर एक नीली से झील के पास.

कार से उतारते hi अतुल अजय को खींच कर थोड़ा दूर ले जाता है.

अतुल:- ये सब क्या है?

गुस्से से अतुल का नाक लाल हो गया था और सांसें भी काफी तेज हो गया था.

अजय:- करना पड़ा? वर्ण तू नहीं आता.

अतुल:- हजार बार बोलै hai...Jhuth मत bolna...Bardaast नहीं होता मुझसे.

क्रिकेट खेलने की बोल कर यहाँ ले aaya...Aur वो भी उसके साथ.

कसम से yaar...Tujhe उनके सामने बेइज़्ज़त नहीं करना चाहता वर्ण तेरा क्या हाल करता मुझे hi पता नहीं.

अतुल का गुस्सा था की काम होने का नाम नहीं ले रहा tha...Dusri तरफ Ajay...Dimaag को बिलकुल ठंडा रख कर सब कुछ सुनते जा रहा था.

अजय:- बस आज मेरे लिए.

अतुल:- क्या तेरे लिए? वैसे भी कोशिश बहुत बार कर चूका hu...Lekin समझ में आये तब ना....

गुस्से में अतुल से बोलै भी नहीं जा रहा था.

दूसरी तरफ अंजलि भी निशा को किसी तरह मन लेती है.

सभी एक साथ झील के किनारे आ जाते hai...Kuch देर बैठने के बाद अजय और अंजलि दोनों को अकेला छोड़ वह से चले जाते है.

अतुल और निशा अकेले रह जाते hai...Lekin दूरियां ऐसा हो गया था की दोनों एक दूसरे से बातें करना तो दूर एक दूसरे की तरफ देख भी नहीं रहे थे.

अतुल वही बैठ कर झील में पत्थर फेंकने लगता hai...Patthar फेंकना एक बहाना था, वो ये जताने की कोशिश कर रहा था की वो वह बोर हो रहा है.

निशा भी ये बात समझ जाती hai...Aur फ़्रस्ट्रेशन में वह से चली जाती है.

जब कुछ देर बाद वो वापस आती है तब अतुल का हाल देख कर हैरान रह जाती है.

अतुल पत्थर फेंकना बंद कर चूका tha...Aur वो कही खोया हुआ लग रहा tha...Aur इससे भी हैरानी की baat....Paas में hi पड़ा अतुल की मोबाइल में एक साद सांग बज रहा tha...Aur गाना की तरह hi अतुल का चेहरा भी मुरझाया हुआ था.

एक गाना, दो, तीन, Chaar...Jab ऐसे hi साद सांग्स बजते रहे तब निशा आखिर में बोल hi पड़ी.

निशा:- अगर चाहो तो माफ़ी भी मांग सकते हो?

निशा की इस बात से अतुल एकदम से होश में aaya...Nisha की आने की उससे एहसास hi नहीं hua...Lekin उसने कुछ जवाब नहीं दिया.

निशा:- कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो?

अतुल:- एक बार कह दिया naa...Bakwas बातों की जवाब नहीं दूंगा.

अब्ब निशा भी चुप हो gayi...Wo भी वही कुछ दूर में बैठ गयी.

अचानक अतुल वह से उठ कर कही चला गया.

निशा वही बैठी rahi...Kuch देर बाद मोबाइल में फ़ोन aaya...Ringtone से पता चल गया की मोबाइल अतुल का था.

अतुल बाहर चला गया था तो निशा फ़ोन उठा कर चेक करती hai...Aur फ़ोन के स्क्रीन में जो दिखा उससे उसकी गुस्सा सातवे आसमान में पहुँच गया.

फ़ोन प्रीती का था.

पासवर्ड तो पता था अतुल का मोबाइल ka...Wo अतुल का मोबाइल चेक करने लगती है.

जब अतुल वापस आता है तब.

निशा:- आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा?

इस बार निशा की आवाज में दर्द था.

अतुल:- जब तक तुम्हे रीलीज़ नहीं होगा.

निशा अतुल को देखती रहती है चेहरे में बिना किसी भाव के.

अतुल:- कोई जबरजस्ती नहीं hai...Tumhara डिसिशन है सोच समझ कर लो.

यह कभी मत सोचना की तुम्हारी वजह से मेरा ये हाल hai...Jab सच्चे दिल से एहसास हो जाए तो आ jaana...Taras कभी मत khaana...Waise भी वक्त के साथ साथ संभल जाऊँगा.

बस इतना याद रखना.

तुम्हारे आने से पहले भी मई अपनी जिंदगी में खुश tha...Aaj भले hi नहीं hu...Lekin यकीं है की कल तुम्हारे जाने के बाद भी खुश रहूँगा.

तुमसे आगे भी बहुत कुछ है जिंदगी में.

इतना कह कर अतुल वह से आगे बढ़ गया निशा की जवाब की परवाह किये बिना.
 
अपडेट 101

एक खामोशी न जाने कितनी देर से दोनों के बिच thha...Dono पास होते हर भी पास नहीं थे.

लगभग आधा घंटा से दोनों छत पर hi चल फिर रहे thhe...Najar एक दूसरे से दूर और कभी कभी दोनों की आँखें मिल भी जाता तो अगले पल hi दूसरी तरफ देखने लग जाते थे.

ऐसे hi कुछ देर बाद अतुल की मोबाइल में फ़ोन aaya...Phone नंबर देखते hi वो इर्रिटेट हो गया.

इस बार वो फ़ोन पिक कर के कुछ देर बातें करता है.

किसका फ़ोन था?

अचानक से निशा ने पूछा फ़ोन कट होते hi.

अतुल:- प्रीती.

इतना कह कर अतुल छत से निकल गया.

इस बार निशा के फेसिअल एक्सप्रेशन में ज्यादा फर्क नहीं आया.

अतुल:- क्या है? क्यों बुलाया?

कॉफ़ी शॉप में पहुँच कर इर्रिटेशन में अतुल ने पूछा.

प्रीती:- बैठिये ना.

अतुल का गुस्सा का परवाह किये बिना hi प्रीती बोली.

अतुल:- ऐसा क्या जरुरी बात था जो फ़ोन में नहीं हो सकता है.

प्रीती:- क्यों? सिर्फ काम के वक्त hi आपको बुला सकती हु.

अतुल की तरफ प्यार से देख कर मुस्कुराते हुए प्रीती ने पूछा.

लेकिन अतुल पर इस मुस्कान का कोई असर नहीं हुआ.

अतुल:- फालतू की बात के लिए मेरे पास टाइम नहीं है वो भी तुम्हारे liye...Pehle hi बहुत टाइम वास्ते कर चुकी हो.

अतुल का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

प्रीती:- (सलौली) इतना गुस्सा!!! आपका इसी गुस्सा पर hi तो प्यार आता है.

अतुल:- कुछ कहा तुमने?

प्रीती:- नहीं.

अतुल:- ऐसे hi चुप रहना था तो बुलाया hi क्यों? और टाइम वास्ते मत करो.

प्रीती:- बता दू.

अतुल:- हां जल्दी.

प्रीती:- सच में बता दू.

अब्ब अतुल से रहा नहीं जा रहा tha...Lekin गुस्से में कुछ रियेक्ट भी नहीं कर पा रहा था.

प्रीती भी अतुल की हालत समझ गयी.

प्रीती:- अच्छा बता hi देती hu...Actually ये बताने की बात नहीं hai...Dikhaane की बात है.

इतना कह कर प्रीती अपने बैग से एक डायरी निकालती है और अतुल को देती है.

प्रीती:- आपकी आँखों में देख कर बोल नहीं paaungi...Issi लिए जो भी मेरे दिल में है वह सब डायरी में लिख दिया है.

अतुल डायरी पढ़ने लगता hai...Jaise जैसे वो आगे आगे पढ़ते जाता है उसकी आँखें हैरानी में फैलता जाता hai...Hairaani के साथ साथ गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था.

पूरी डायरी पढ़ने के बाद वो प्रीती को ऐसे देखने लगा जैसे उससे विश्वाश नहीं हो रहा है.

प्रीती:- जानती thi...Yahi रिएक्शन होगा aapka...Hairaan हो गए ना.

मई ये भी जानती हु की आप भी मुझसे प्यार करते hai...Bas बता नहीं पा रहे hai...Issi लिए मैंने hi आपको पहले प्रोपोज़ करने का सोचा.

और haa...Mera प्यार इस लेटर में लिखे गए शब्द से कई गुना ज्यादा है.

ी लव यू :love:...You अरे माय फर्स्ट एंड लास्ट love...Dear अतुल.

अभी भी अतुल हैरानी से प्रीती को देख रहा था.

प्रीती:- क्या हुआ? बहुत गुस्सा थे aap...Aur अभी से हालत पतली हो gayi...Abhi से यह हाल है तो बाद में क्या होगा मर.

अतुल की मजाक उड़ाने की अंदाज़ में प्रीती बोली.

अतुल:- बस करो.

गुस्सा और हैरानी में अतुल ओतना hi बोल पाया.

प्रीती:- क्या हुआ?

अतुल का गुस्सा देख प्रीती भी हैरान रह गयी.

अतुल:- हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी?

प्रीती:- आप हिम्मत नहीं कर paaye...Issi लिए मैंने hi....

अतुल:- ये जानते हुए भी की मई निशा से प्यार करता hu...Tum ऐसी लेटर और बकवास बातें सोच भी कैसे सकती हो?

अब्ब प्रीती का भी हैरानी बढ़ता जा रहा था.

प्रीती:- आपका तो निशा दी से ब्रेक उप हो गया है ना.

अतुल:- ब्रेक up...Wtf? किसने कह दिया ऐसी बकवास बातें.

प्रीती:- तो फिर आपका दूरियां, झगड़ा?

अतुल:- प्यार में कभी कभी लड़ाई तो होता रहता hai...Lekin ब्रेक up...Aisa सोच भी कैसे लिया तुमने.

प्रीती:- मजाक कर रहे है ना आप.

प्रीती और भी ज्यादा कंफ्यूज होती जा रही thi...Dil चाह रहा था की काश अतुल कह de..."Haan यह मजाक है."

अतुल:- तुम मेरी लगती क्या हो जो मई तुमसे मजाक karu...Aur haan...Aisi बकवास बातें कभी सोचना भी मत.

प्रीती:- क्या आप मुझसे प्यार नहीं करते?

अब्ब प्रीती की आवाज भारी होने lagi...Itna सजाया सवार सपना अचानक से टूट जो गया था.

अतुल:- कभी nahi...Aur सोचा भी नहीं.

प्रीती:- तोह फिर आपका वो मुझे लाइब्रेरी में padhaana...Itni म्हणत से घंटो तक padhaana...Nisha दी से झूठ बोल kar...Wo सब क्या था?

अतुल:- कभी सोच भी नहीं sakta...Tum उस बात का यह मतलब निकलोगी.

तुम में मुझे एक अच्छी स्टूडेंट दिखती thi...Issi लिए तुम्हे पढ़ाता tha...Mera आदत hi है कोई मुझसे कुछ पूछे या पढ़ाने को बोले मई मना नहीं karta...Lekin तुम और तुम्हारा dimaag...Huh.

प्रीती की आँखों में आंसू की कुछ बूँद आ गयी.

प्रीती:- आप झूठ बोल रहे है?

प्रीती अभी भी कोशिश कर रही thi...Khud को सच्चाई से दूर करने की.

लेकिन अगले hi पल.

प्रीती:- ये ye...Kya कर रहे है आप?

तब तक अतुल उसका डायरी का वो पेज फाड़ कर उसकी तरफ फेंक चूका था.

अतुल:- प्रोवे कर रहा tha...Mai सच बोल रहा हु या झूठ.

अब्ब प्रीती को भी यकीं हो gaya...Usse hi ग़लतफहमी tha...Sacchai ये था की उसका प्यार एक तरफ़ा था.

अतुल:- देखो Preeti...Mai तुम्हे हर्ट करना नहीं chaahta...Ek तरफ़ा प्यार का दर्द मई जानता hu...Please जितना जल्दी हो सके मुझे भूल jaao...Aur अपना ध्यान पढ़ाई या फिर किसी और चीज में लगाओ.

मई निशा के अलावा किसी के बारे में सोच भी नहीं sakta...Agar निशा मेरी लाइफ में ना होती तोह भी तुम्हारे बारे में नहीं सोचता.

अतुल अपनी तरफ से समझाने की पूरी कोशिश कर रहा tha...Lekin Preeti...Woh तो अपने ग़म की संसार में खोयी हुई थी.

प्रीती:- (सलौली तो हरसेल्फ़) रवि सर ने मुझसे झूठ क्यों बोलै?

इस बार अतुल ने प्रीती की बात सुन लिया.

अतुल:- रवि? रवि ने क्या बोलै?

प्रीती:- यही की आप मुझसे प्यार करते है.

अब्ब अतुल को समझते देर नहीं laga...Saara खेल रवि का hai...Shak तो पहले भी था उसका निशा के पास जाने की कोशिश dekh...Lekin अब्ब कन्फर्म हो gaya...Wohi था जो दोनों के साथ डबल गेम खेल रहा था.

अब्ब अतुल का गुस्सा कण्ट्रोल में नहीं था.

वो वह से निकल gaya...Preeti पीछे से अतुल अतुल चिल्लाती rahi...Lekin अतुल गुस्से में उसकी कोई बात सुने बिना hi वह से निकल गया.

अतुल:- (इन हिज बाइक) क्या करू उसका? उसको तो अपना दोस्त मानने लगा tha...Apna सीक्रेट भी शेयर करता tha...Lekin कमीने ने पीठ पीछे बार kiya...Itna कमीना होगा सोचा नहीं था.

साले को उसके घर में घुस कर मारना पड़ेगा?

फिर अतुल अपना बिले आगे बढ़ाता है.

अतुल:- नहीं nahi...Abhi गुस्से में hu...Shayad ये फैसला गलत hai...Kal उसको कॉलेज में देखता हु.

फिर अतुल वापस अपने घर में आता है.

जब वो छत में पहुंचा तो देखा की निशा अभी भी छत में है.

अतुल निशा के पास जाता है.

अतुल:- सॉरी.

शर्मिंदगी के साथ अतुल ने kaha...Iss बार अपने ईगो की परवाह नहीं था usse...Bas एक दर tha...Kahi वो अपना निशु को खो ना दे.

निशा:- क्या हुआ?

इस बार निशा ने भी थोड़ा डरते हुए pucha...Atul का हालत भी ठीक नहीं लग रहा था.

अतुल:- तुम पर गुस्सा होने के लिए?

निशा:- हुआ क्या है?

अतुल:- अभी बताने की हालत में नहीं hu...Ek ऐसी बात पता चला है जो शायद पहले hi पता चल जाना चाहिए था.

बस तुमसे माफ़ी माँगना चाहता था.

फिर अतुल वापस अपने रूम में चला gaya...Aur कोशिश करता रहा अपना गुस्सा शांत करने की.

दूसरी तरफ Nisha...Pehle hi उसने अतुल के मोबाइल में जो देखा था उस वजह से कन्फ्यूज्ड thi...Aur अब्ब अतुल का ये haalath...Usse भी समझने में देर नहीं लगा की कुछ तो गलत हुआ है.

अब्ब उससे भी इंतजार था तो अतुल का जवाब ka...Abb वो भी अतुल से बात करना चाहती थी अपना गुस्सा और ईगो भुला kar...Atul के liye...Kuch देर पहले अतुल का जो हालत था निशा से वो देखा नहीं जा रहा था.
 
अपडेट 102

रात तो बहुत हो गया tha...Lekin निशा अभी भी अपनी सोच में hi गुम्म thi...Atul का हालत उससे बहुत अजीब लग रहा tha...Usse भी समझ में नहीं आ रहा था की अतुल के साथ क्या हो रहा है.

ऐसे में उससे अतुल और प्रीती का चाट याद आया.

प्रीती:- Hi.

No रिप्लाई.

प्रीती:- Hello.

No रिप्लाई.

प्रीती:- क्या आप अभी भी नाराज है?

No रिप्लाई.

प्रीती:- Sorry...Aage से अच्छे से पढूंगी.

No रिप्लाई.

प्रीती:- मेस्सगेस सीन आ रहा hai...Lekin आप रिप्लाई भी नहीं कर रहे है.

No रिप्लाई.

कुछ दिनों बाद.

प्रीती:- Hello.

No रिप्लाई.

प्रीती:- अब्ब तो सीन भी नहीं आ रहा hai...Kya आप सच में नाराज है?

No रिप्लाई.

आफ्टर 7 डेज.

प्रीती:- प्लीज अगर मैसेज पढ़ रहे है तो रिप्लाई kijiye...Aapka हेल्प चाहिए पढ़ाई me...Baaki सब पढ़ लिया है खुद se...Lekin लंग कैंसर समझ में नहीं आ रहा है.

अतुल:- प्लीज yaar...Abb मुझे इन् सब चीजों में मत ghasito...Tum अपना टाइम वास्ते तो कर hi रही हो और साथ में मेरा भी.

प्रीती:- फाइनली रिप्लाई aaya...Lekin सच में इस बार पढ़ना चाहती हु लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Aap अगर हेल्प कर देते तोह.

अतुल:- अच्छी बात है तुम पढ़ना चाहती ho...Lekin इसके लिए पैथोलॉजी डिपार्टमेंट से कांटेक्ट करो.

प्रीती:- अगर आप hi पढ़ा सकते है तोह?

अतुल:- नहीं अब्ब वही गलती नहीं karunga...Pehle hi इसका रिजल्ट देख चूका hoon...Aur वैसे भी स्टूडेंट्स को पढ़ाने की रिपॉन्सिबिलिटी उनका है मेरा नहीं.

प्रीती:- उनसे पूछने में दर लगता हैं.

अतुल:- तोह मैं क्या कर सकता हूँ? पढ़ना तुम्हे hain...Pucchna तुम्हे hi padega...Aur कब तक ऐसी बकवास रीज़न से डर्टी rahogi...Koshish करो ऐसी दर हटाने ki...Agar ऐसी hi रेअसोंस से डर्टी रही तोह तुम्हारी लाइफ बहुत hi बेकार है.

प्रीती:- प्लीज आप hi पढ़ा दीजिये ना.

अतुल:- एक बार बोलै ना नहीं.

तुम्हे पढ़ाया वही मेरा सबसे बड़ा गलती tha...Sochta था की लेक्चर में कुछ बातें समझ में नहीं आया hoga...Issi लिए कॉन्सेप्ट्स देता tha...Par मुझे क्या पता था की तुम एकदम से जीरो हो और कभी पढ़ने की कोशिश भी नहीं करती.

सबसे अच्छे से प्रोफेस्सोर्स hi पढ़ाते hai...Unka काम hi है padhana...Wo एक्सपेरिएंस्ड, होने के साथ साथ एक्सपर्ट भी हैं.

अगर सच में पढ़ना चाहती हो तोह उनसे कांटेक्ट karo...Mujhe नहीं.

मैं सिर्फ हेल्प कर सकता हु कैसे पढ़ना है और क्या पढ़ना है अस ा senior...But पढ़ाने का काम मेरा नहीं हैं.

प्रीती आगे भी कोशिश करती रही अतुल को मनाने ki...Lekin अतुल ने कोई रिप्लाई hi नहीं दिया.

ऐसे hi.

अतुल:- स्टॉप इर्रिटेटिंग me...Otherwise यू विल बे इन माय ब्लॉकलिस्ट.

फिर इसके बाद ना प्रीती का मैसेज था और ना hi अतुल का.

ये चाट पढ़ कर निशा को बहुत ख़ुशी hui...Jo वो सोच रही थी अतुल और प्रीती के बारे में वह बिलकुल hi गलत tha...Khaas कर अतुल का प्रीती को ब्लॉक करने की धमकी.

साड़ी नाराजगी तो एक पल में hi दूर हो गयी thi...Lekin Atul...Uska गुस्सा और ego...Atul का गुस्सा था hi इतना की वो किसी भी हालत ने झुकना नहीं चाहता tha...Toh फिर निशा भी कैसे?

कुछ इसी सोच में दोनों का दूरियां काम होने की नाम hi नहीं ले रही thi...Pehle ग़लतफहमी और फिर ईगो की लड़ाई.

लेकिन abb...Nisha को कोई परवाह नहीं tha...Bas अब्ब वो किसी भी तरह अतुल से बात करना चाहती thi...Usse इस हालत से बाहर निकालना चाहती थी.

नेक्स्ट डे ात लंच टाइम.

जैसे hi अतुल ने रवि को कैंटीन में dekha...Usne जोर से अपना मुट्ठी को bhincha...Chehra गुस्से से लाल हो गया था.

अजय:- अभी नहीं यार.

अजय ने अतुल को रोकते हुए कहा.

अतुल का गुस्सा में कोई फर्क नहीं पड़ा.

अजय:- बाद me...College में लफड़ा हो जाएगा.

फिर अतुल न चाहते हुए भी जैसे तैसे खुद पर कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगा.

आफ्टर कॉलेज.

एक सिगरेट जला कर अजय ने अतुल की तरफ बढ़ाया.

अजय:- ले भाई एक फूंक मार और सब टेंशन भूल जा.

अतुल:- मई नहीं peeta...Bas उस टाइम पीटा था उसके बाद कभी नहीं.

अजय:- क्या बात है? प्यार क्या मिला तू तोह सिगरेट hi भूल गया.

अतुल:- सिगरेट क्या चीज hai...Jarurat पड़ा तो तुझे hi भूल जाऊँगा.

अजय:- यही है तेरा दोस्ती.

अजय ने दुखी होने की एक्टिंग ki...Lekin अतुल को कुछ फर्क नहीं pada...Wo अभी भी गुस्से में था और किसी चीज की इंतजार में.

अतुल:- अपना यह ओवरएक्टिंग बंद kar...Aur जल्दी बुला उस कमीने ko...Aadha घंटा से वेट कर रहा हु.

बात भी सही था अतुल ka...Aadha घंटा से दोनों अजय का इंतजार कर रहे थे क्रिकेट ग्राउंड me...Itna इंतजार करने के बाद अतुल का फ़्रस्ट्रेशन और भी बढ़ता जा रहा था.

अजय:- बोल रहा था पहुँच रहा है.

अजय का बस इतना कहना था की दोनों को दूर से रवि आता हुआ दिखा.

रवि:- आज तुम दोनों hi क्रिकेट खेलने ए हो? बाकी सब किधर है?

अतुल:- छूती पर भेज दिया hai...Aaj स्पेशल गेम है तेरे और मेरे बिच.

रवि:- क्या कह रहा है तू? कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

अतुल:- समझ में आएगा kaise...Jab तू अपना दिमाग किसी और चीज पर लगा रहा है.

अब्ब रवि को थोड़ा बहुत समझ में आ रहा tha...Ek नजर अतुल को dekha...Uska चेहरा गुस्से में लाल था.

अतुल:- तैयार हो jaa...Warna ये मत कहना की मैंने तुझे मौका नहीं दिया सँभालने का.

फिर अतुल आगे बढ़ कर पूरी दम लगा कर एक किक रवि के चेस्ट पर मारता है.

रवि गिरते गिरते बचा.

रवि:- ये क्या कर रहा है.

अतुल का अगला baar...Ek जोरदार पंच रवि के फेस पर.

रवि ने एक दो बार कोशिश की पलटवार ki...Lekin अतुल के सामने उसका कुछ नहीं chala...Agle 3 मिनट में अतुल ने रवि का हालत खराब कर दिया और सारा फ़्रस्ट्रेशन किक और पंच से निकाला.

रवि का ना जाने क्या हो जाता अगर बिच में अजय न आता.

लेकिन अजय को साइड हटा कर फिर दो किक रवि पर वार किया अतुल ने.

इस बार अजय अतुल को खिंच कर.

अजय:- अब्ब bas...Paagal हो गया है क्या? अगर इस कुछ हो गया तोह?

अतुल:- तोह हो जाने de...Dharti का एक बोझ काम हो jaayega...Saale को जान से मारने का मन कर रहा है.

फिर अतुल रवि की तरफ बढ़ने hi वाला था की अजय एक बार फिर बिच में आ gaya...Ajay के सामने इस बार अतुल भी कुछ नहीं कर सका.

अतुल एक बार रवि को देखता है और फिर अगले hi पल नफरत से दूसरी तरफ देखने लगता है.

अतुल:- नफरत हो गया है isse...Saala दोस्त के नाम पर कलंक hai...Kitna अच्छा दोस्ती हो गया था.

सोचता था गलत था मई जो इससे घमंडी सोचता hu...Kitna अच्छा दोस्त hai...Helping, केयरिंग और supportive...Bas पढ़ाई में घमंड है.

लेकिन क्या पता था इसका मुखौटा (मास्क) के पीछे का असली chehra...Itna गन्दा soch...Apne hi दोस्त को धोखा.

अतुल अजय को देखता hai...Wo भी अजय को नफरत से देख रहा था.

अतुल:- और मई इसकी बात में आ gaya...Iski बातो से hi निशा पर गुस्सा करने laga...Itna भड़का रहा था ये कमीना की अगर इसकी बात में पूरी तरह आ जाता तो ना जाने क्या कर बैठता.

फिर भी इसकी बातों का hi असर है जो आज मई निशा को ना समझ पाया और ना समझा पाया.

अतुल का इतना कहना था की उससे रवि का हसने की आवाज सुनाई दिया.

रवि:- एवरीथिंग इस फेयर इन लव एंड war...Tujhse दोस्ती कौन करेगा? मई इस लिए तुम लोगो की पास आया था की मई निशा के करीब हो पाउ.

ी लव her...Aur उसके लिए मई कुछ भी कर सकता हु.

अतुल:- अगर लव एंड वॉर में सब कुछ फेयर है तो सुन्न le...War में मई इतना अनफेयर हो जाऊँगा की तू सोच भी नहीं सकता.

कमीनापन में तेरा भी बाप hu...Bas बिना वजह किसी को परेशां नहीं karta...Abb तूने मुझसे पन्गा लिया है naa...Dekh कैसे तेरे लाइफ का बंद बजाता हु.

फिर अतुल अजय के साथ कुछ देर ऐसे hi अपना फ़्रस्ट्रेशन निकलता है और दोनों वह से चले जाते है अजय को उसी हाल में छोड़ कर.

अजय:- (तो हिमसेल्फ) और nahi...Bahut बार हराया है अतुल तूने mujhe...Padhaai में, प्यार में और आज फाइट में bhi...Lekin जिंदगी की आखिरी लड़ाई में मई तुझे haraunga...Aise हराऊंगा की तेरा जिंदगी hi तेरा दुश्मन बन jaayega...Bin पानी की मछली की तरह हो जाएगा tu...Har जगह भटकते रहेगा अपना अधूरा प्यार की याद में.

निशा सिर्फ मेरी hai...Chahe उसकी मर्जी से या मर्जी की खिलाफ.

ये कहते hi रवि की चेहरे पर अजीब सी मुस्कान था.

निशा:- हमेशा इतना कटे?

अतुल:- पुराण अतुल जो लौट आया hai...Abb फिर से प्रैक्टिस कर रहा हु लेट होने का और तुमसे दांत सुनने के लिए.

अतुल की चेहरे में एक अलग hi ख़ुशी tha...Nisha से इतने दिनों बाद प्यार से बात करने की.

[Note:- Next few updates will be romantic before the tragedy starts.]
 
अपडेट 103

निशा:- आज तुम भी?

अतुल और निशा दोनों फिर उसी ढाबे पर आये थे.

अतुल:- तुम्हारा फवौरीते प्लेस!!

निशा:- किसने कह दिया? यह मेरा फवौरीते प्लेस है.

अतुल:- तोह फिर chalo...Mandir चलते है.

निशा:- अब्ब फिर किसने कह दिया की मंदिर मेरा फवौरीते प्लेस है.

अतुल:- यही दो जगह तोह है हजहा तुम मुझे ले चलती हो.

निशा:- अच्छा तोह तुम्हे मेरा फवौरीते प्लेस जाना है?

अतुल:- हाँ बताओ.

निशा:- वह कल bataungi...Sorry, ले चलूंगी.

अतुल:- कल hi क्यों? आज क्या प्रॉब्लम है?

निशा:- मेंटली प्रेपर होने के लिए टाइम दे रही hu...Kal बंद बजने वाली है तुम्हारी.

निशा हँसते हुए बोली.

बस यही hansi...Issi हंसी को तोह वो इतने दिनों से ढूंढ रहा tha...Nisha की हंसी में अलग सी जादू था और उसकी यही हंसी यही adaa...Jis पर ना जाने अतुल कितनी बार मर मिटा था.

निशा:- Hello!!! कहा खो गए? रेडी रहना कल के लिए.

अतुल:- वह तोह कल hi देखेंगे.

तभी चाय नास्ता आ गया.

निशा:- बहुत पसंद है ना तुम्हे चाय?

अतुल:- हाँ बहुत पसंद hai...Sirf चाय hi nahi...Coffee, सिगरेट, दारु कुछ भी कितना भी पीला do...Pee लूंगा.

अतुल ने हँसते हुए kaha...Usse पता था निशा का जवाब क्या होने वाला है.

निशा:- बहुत दिन से पीटते नहीं हो ना? चलो घर फिर बताती हु.

जवाब में अतुल सिर्फ मुस्कुराता है.

फिर दोनों नास्ता करने लगते है.

अतुल:- क्या बात है? ऐसी हसमुख चेहरे में यह उदासी.

निशा:- सोच रही थी पिछले दो महीने के बारे me...Kya से क्या हो गया?

अतुल:- हाँ बहुत अजीब टाइम tha...Fir भी अच्छा hi हुआ.

निशा:- अच्छा हुआ?

अचानक से निशा की चेहरे पर हैरानी के भाव आ गए.

अतुल:- अच्छा सबक मिला hume...Abb हमारा प्यार और भी मजबूत hoga...Vishwash इतनी आसानी से टूटेगा नहीं.

निशा:- क्या ऐसा होना जरुरी था?

अतुल:- जरुरी तोह नहीं tha...Lekin अब्ब सब ठीक हो गया hai...Unn दोनों का असली चेहरा सामने आ गया.

इस बार अतुल की आवाज में थोड़ा गुस्सा था.

निशा:- एक रिक्वेस्ट है तुमसे.

अतुल:- रिक्वेस्ट क्यों? खुल कर बताओ क्या बात है?

निशा:- अगर मई कभी गुस्सा हो जाऊं तो मुझे संभाल लेना इसी tarah...Bahut प्यार करती हु tumse...Khona नहीं chaahti...Issi लिए तुम्हारा और प्रीती की नजदीकी पसंद नहीं आ रहा था.

अतुल:- फ़िक्र मत karo...Aage से कभी ऐसा होने नहीं दूंगा.

और मुझसे दूर कभी हो भी नहीं सकती tum...Puri जिंदगी झेलना जो है.

निशा:- झेल lungi...Bas कभी दूर मत जाना.

अतुल:- एक रिक्वेस्ट मेरा भी है?

निशा:- अब्ब तुम भी रिक्वेस्ट कर रहे हो!!!

अतुल:- बात यह है की तुम भी मुझ पर विश्वाश karna...Tumhe धोखा देने की कभी सोच भी नहीं सकता.

तुम्हे हमेशा मनाने की कोशिश करता रहा...1 महीने तक कोशिश करता raha...Naa जाने कितनी बार अपना ईगो और सेल्फ रेस्पेक्ट डाउन kiya...Tab भी तुम नहीं maani...Aur फिर मई भी कण्ट्रोल नहीं कर paaya...Aur इतना कुछ हो गया.

बचपन से hi ईगो और सेल्फ रेस्पेक्ट बहुत hai...Kabhi किसी के सामने झुकता nahi...Sirf तुम्हारे liye...Aage भी तैयार hoon...Bas तुम्हारा विश्वाश और साथ चाहिए.

निशा:- Sorry...Abb आगे से ऐसा नहीं होगा.

अतुल:- सॉरी की जरुरत nahi...Bas आगे हम दोनों समझदारी से आगे badhe...Yahi काफी है.

फिर दोनों कुछ देर तक होना गीले सिक्वे मिटाते रहे.

निशा:- वैसे बात क्या है? आज कल कुछ ज्यादा hi पढ़ाई कर रहे हो?

अतुल:- पढ़ना पड़ता है Madam...Topic hi कुछ ऐसा है.

ये सुनते hi निशा के चेहरा एकदम से लाल हो gaya...Atul बात कर रहा था रिप्रोडक्टिव सिस्टम की.

निशा:- क्या तुम भी?

अतुल:- वैसे यह सिस्टम है बहुत interesting...Bahut मजा आ रहा है पढ़ने me...Especially फीमेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम.

अतुल की हर बात के साथ निशा की हालत ख़राब होती जा रही थी और यह देख अतुल को और भी मजा आ रहा था.

निशा:- बस करो.

अतुल:- अभी तोह पढ़ना सुरु hi किया hai...Tum कहती हो बस करो.

निशा:- मेरा मतलब था ऐसी बातें करना बंद करो.

अतुल:- वैसे पढ़ने के लिए कह रही हो तोह भी no problem...Waise भी थ्योरी में कुछ ख़ास मजा नहीं आ रहा.

निशा शर्म से और लाल होती जा रही थी.

अतुल:- क्या हम प्रैक्टिकल कर सकते हैं?

इस बार निशा अतुल को घूरती है.

निशा:- क्या?

अतुल:- अब्ब किस मुंह से बताओ.

अतुल सोचने की एक्टिंग करता है.

निशा:- किसी मुंह से nahi...Abb चुप हो जाओ.

अतुल:- प्लीज निशु.

अब्ब निशा की आँखें हैरानी में फैलती जा रही थी.

निशा:- यह क्या कह रहे हो?

अतुल:- वही practical...Samjha करो.

निशा अतुल पर मुक्कों की बरसात करती hai...Fir आस पास देखती hai...Uss वक्त वह कोई नहीं tha...Fir निशा चैन की सांस लेती है.

अतुल:- जितना प्यार से अभी मार रही हो अगर उतने hi प्यार से...

अतुल इससे आगे कुछ कहता उससे पहले hi निशा उसकी मुंह पर अपना हाथ रख देती है.

निशा:- प्लीज.

निशा ने इतने प्यार से कहा की एक पल के लिए अतुल का दिल और दिमाग ने काम करना hi बंद कर diya...Abb अतुल को भी एहसास हुआ की इससे ज्यादा नहीं.

अतुल:- (इन हिज मंद) अगर इतना hi प्यार से कहोगी तोह प्यार क्या जान भी दे दूंगा.

अतुल तभी एक मस्ती करने का सोचता hai...Wo निशा की उसी हाथ को चूमने चाटने लगता है.

निशा:- यू???

निशा झूठा गुस्से दिखाते हुए अतुल को मारने लगती hai...Atul भी डरने की एक्टिंग कर वह से भागता है.
 
अपडेट 104

तोह क्या हाल है मर. एक?

अतुल के फ़ोन उठाते hi निशा ने पूछा.

अतुल:- यह तुम पूछ रही हो? :बीए:

निशा:- कहा था ना मुझसे पन्गा मत लो?

अतुल:- मुझे क्या पता था मुझ बेचारे के साथ इतना कुछ हो जाएगा. :(

निशा:- हहै :हहै:

अतुल:- हंसो और हंसो.

निशा:- और जाना चाहोगे मेरा फवौरीते चीज क्या है?

अतुल:- Nahi...Kabhi नहीं.

हुआ ये था की अतुल निशा की फवौरीते चीज पूरी करने की कोशिश में उसके साथ निकल gaya...Pehle दोनों गए शॉपिंग par...Waha ना सिर्फ अतुल का पर्स खली हुआ बल्कि 5 घंटे तक दिमाग का दही भी हो गया.

और फिर उसी मॉल में निशा के साथ साथ उसकी 3 सहेलियों के साथ कॉफ़ी session...Atul का जो खिंचाई हुआ उससे तोह शायद hi वह कभी अपने लाइफ में भूल पायेगा.

अतुल:- और वह सहेलियों के साथ इज़्ज़त का कचरा करवाना जरुरी था क्या?

निशा:- और वह मुझे चैलेंज करना जरुरी था क्या?

अतुल:- यह kya...Tum तोह मेरी तरह hi जवाब देने लगी.

निशा:- ईंट (ब्रिक) का जवाब पत्थर से देना पड़ता है मर. :ेविलौगह:

अतुल:- बड़ा खतरनाक किस्मत मिली है यार.

निशा:- किस्मत को nahi...Vakt को koso...Kal तुम्हे फिर मेरे साथ शॉपिंग पर चलना है.

इतना काफी था अतुल की हालत ख़राब करने के लिए.

अतुल:- नहीं nahi...Abb इस शरीर में इतनी ताक़त नहीं.

निशा:- अब्ब क्या हुआ? तारीफ़ करते तोह थकते नहीं थे की रोज एक्ससरसीसे करते ho...Cricket खेलते वक्त अच्छा स्टैमिना होता है.

अतुल:- एक्सरसाइज और स्टैमिना गया भाड़ mein...Gf के आगे सब फ़ैल है.

निशा:- अब्ब पता चला मेरा पावर? :स्मार्त्य:

अतुल:- जी madam...Acche से.

फिर अतुल की एक मस्त सुझा.

अतुल:- Nishu...Wo जो सहेली थी ना tumhari...Bich में baithi...Kya नाम था? हाँ निकिता.

निशा:- हाँ तोह!!!

अतुल:- बहुत अच्छी लग रही thi...Uski हाइट, वेट, शेप...

निशा:- बस bas...Kehna क्या छाते हो?

अतुल:- यही की वह बहुत अच्छी लग रही thi...Kaas तुमसे पहले वो मेरी लाइफ में आती तोह...

निशा:- हाँ तोह अभी कौनसा देर हुआ hai...Bata दू उसको?

अतुल:- अरे नहीं nahi...Saath में बहुत खड़ूस भी hai...Agar उससे पता चल गया तोह मुझ बच्चे की जान ले लेगी.

अतुल ने डरने की ाकिंग किया.

निशा:- अब्ब आये ना लाइन par...Mujhe जलाने की ऐसी चीप ट्रिक्स उसे मत करो.

अतुल कुछ कहता उससे पहले उसकी पापा की तेज आवाज उसके कानो में आया.

ा. डैड:- Atul...Kaha है तू? जरा निचे आ.

अतुल:- (इन फ़ोन) बाद में बात करता हु.

फिर अतुल फ़ोन कट करके निचे चला जाता है.

निचे उसका पूरा फॅमिली tha...Aur साथ में चार लोग भी.

जब वो अपने पापा के पास पहुंचा तोह उसने देखा की गौरव उससे देख मुस्कुरा रहा tha...Usse महसूस हो रहा था की कुछ तो गड़बड़ है.

ा. डैड:- समधी ji...Ye है हमारा दूसरा बीटा Atul...Aur अतुल ये है गौरव के होने वाले सास ससुर (Preeti's माँ एंड डैड) और तुम्हारे भी.

और ये है रिया (पॉइंट कर ke)...Tumhare होने वाली bhabhi...Aur ये Amit...Inka छोटा बीटा.

अतुल को उनकी आधी बात hi समझ में aaya...Fir वो जाके रिया और उसकी माँ पापा का पेअर छू लेता है.

अतुल:- Papa...Mere bhi...Samjha नहीं?

प. डैड:- बीटा बात ये है की तुम्हारे भैया का रिश्ता हो hi रहा है तोह हमने सोचा की तुम्हारा रिश्ता भी मेरी छोटी बेटी प्रीती से करा देते hai...Usse तोह तुम जानते hi honge...Tumhara hi कॉलेज में पढ़ती है?

अतुल:- लेकिन...

प. डैड:- अभी nahi...Jab तुम दोनों का पढ़ाई कम्पलीट हो jaayega...Tab की बात hai...Abhi बस रिश्ता फिक्स hi किया है.

अतुल को समझ में नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है.

प. डैड:- तोह तुम्हारे तरफ से हां समझू?

अतुल कुछ बोलता उससे पहले hi.

ा. डैड:- Haan...Maine सहमति दे दिया मतलब मेरे बीटा ने bhi...Ye मेरे खिलाफ कभी नहीं जाता.

इस बात से अतुल का हैरानी में मुँह खुला का खुला रह gaya...Lekin यह वक्त हैरान होने का नहीं tha...Samajhdaari से मामले को निपटाने का tha...Warna बातों hi बातों में क्या से क्या हो जाता.

अतुल:- पापा मई आपका हर बात मानता hu...Aur आगे भी मानता rahunga...Aapka बहुत इज़्ज़त करता हु इस्सलिये.

लेकिन ये बात नहीं मान sakta...Dusri बार मन कर रहा हु aapko...Ek करियर (स्टडी) के लिए और अब्ब अपने लाइफ (मैरिज) के liye...Sorry.

फिर अतुल वह से निकल gaya...Papa को ऐसे वह छोड़ कर जाना उससे अच्छा तोह नहीं लग रहा tha...Par वो अभी कुछ बोलने और सुनने की हालत में भी नहीं tha...Maamla और बिगड़ता इससे पहले वो वह से निकल गया.

वह खड़ा गौरव इस बात से और भी खुश हो गया और उसका मुस्कान भी और बढ़ gaya...Atul को अपने पापा की खिलाफ जाते देख उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

अतुल वह से तोह निकल गया आने वाले खतरा से पूरी तरह अनजान हो kar...Ravi की साजिश से तोह शायद वह बच gaya...Lekin गौरव? क्या वो वक्त रहते गौरव की शातिर दिमाग और उसकी साजिश को समझ पायेगा जो एक स्लो पाइजन की तरह काम कर रहा था?
 
अपडेट 105

अजय:- देखते hi देखते बेसिक साइंस कम्पलीट होने का टाइम आ gaya...Pata hi नहीं चला कब बीत गए ये दिन.

अतुल:- Haan...Tujhe कैसे पता चलेगा? बहुत बिजी रहता हैं ना तू? पढ़ाई छोड़ बाकी सब चीज में.

अजय:- क्या यार तू भी.....

अजय कहते कहते रुक gaya...Saamne से आ रही प्रीती को देख वो आगे बोल नहीं paaya...Usse देख कर लग रहा था की वो काफी गुस्से में hain...Uski चाल तोह यही बता रही थी.

प्रीती:- अतुल.

थोड़ा तेज आवाज में प्रीती बोली तोह अतुल और निशा दोनों उसकी तरफ मूड gaye...Jo कुछ देर पहले तक एक दूसरे की टांग खींच रहे थे.

प्रीती:- तुमने कल हमारे रिश्ते की बात के लिए मन कर दिया?

प्रीती की इस बात से तोह अतुल को कोई फर्क नहीं pada...Lekin Nisha...Wo सोच में जरूर पद gayi...Kaisa रिश्ता?

अतुल ने कुछ जवाब नहीं दिया.

प्रीती:- सुना नहीं तुमने?

अतुल:- मई बकवास बातों का जवाब देना जरुरी नहीं समझता.

प्रीती:- मेरी बातें तुम्हे बकवास लग रही है?

अतुल:- तुम हो hi बकवास.

कुछ देर तक प्रीती अतुल को गुस्से से देखती रही फिर.

प्रीती:- आज तुम मेरे घर आ कर पापा से माफ़ी मांगोगे.

जवाब में अतुल अजय को देख कर.

अतुल:- अबे हंस ना!!! इतना अच्छा कॉमेडी कर रही है.

अतुल की बात से तोह नहीं पर उसकी अंदाज से अजय भी हसने लगा.

प्रीती दोनों को गुस्से से देखने लगी.

अतुल:- अगर ऐसे hi आँखें बाहर निकालती रही तोह देखती jaa...Eyes एंड हेड डाउन.

अचानक से अतुल की चिल्लाने से कैंटीन में मौजूद सभी का ध्यान उन् पर hi आ गया.

अब्ब अतुल के चेहरे में भी गुस्सा साफ़ दिख रहा था.

प्रीती सभी को अपने तरफ देख एक पल के लिए घबरा gayi...Lekin अगले hi पल हिम्मत कर के.

प्रीती:- तुम मेरे हो.

अतुल:- ग़लतफहमी में जीने वाली बेवकूफ हो तुम.

फिर अतुल उठ कर वह से जाने लगा.

प्रीती:- आज तक मैंने जो भी चाहा है हर कुछ हासिल किया hai...Chaahe वो छोटी सी छोटी जिद्द हो या फिर जिंदगी के हर बड़े फैसला.

तुम्हे तो मैंने प्यार किया hai...Aise कैसे छोड़ सकती हूँ?

अतुल:- तुम्हारे साथ तो दूर की बात hai...Tumhe अपने आस पास देखना भी पसंद नहीं करता हूँ मैं.

प्रीती:- कल तुम पापा से तोह मिल hi चुके ho...Kal तो उन्होंने प्यार से बात किया tha...Agar फिर भी नहीं माने toh...Tum उन्हें जानते नहीं?

अब्ब सीधा सीधा धमकी सुन कर अतुल का गुस्सा भी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गया.

अतुल:- जानना भी नहीं है mujhe...Waise भी देखने में सूखा हुआ हड्डी लग रहा tha...Ek फूंक मारूंगा तोह ना जाने बुद्धा कहा जा कर गिरेगा.

प्रीती:- अतुल.

अतुल:- चुप.

प्रीती से कई गुना तेज आवाज था अतुल का.

प्रीती भी अपनी बेइज्जती सेह नहीं पा रही थी.

प्रीती:- (तो निशा) अतुल को मेरा hi होना padega...Jab तक हमारी शादी नहीं हो jaati...Tum लगे raho...Mauj मस्ती की गिने चुने दिन है तुम्हारे पास.

निशा कुछ बोलने hi वाली थी की.

अतुल:- लगता है तुमने बहुत एक्सपीरियंस किया है ये सब.

ये कह कर अतुल हसने laga...Saath hi कुछ लोग और भी हसने लगे.

अब्ब प्रीती कुछ बोल नहीं पा रही थी.

अतुल:- जानता हु यह बोलना नहीं चाहिए tha...Waise भी लड़कियों का इज़्ज़त करता hu...Par तुम जैसी की nahi...Aur हिम्मत कैसे हुई तेरी मेरी निशु के बारे में ऐसा बोलने की.

फिर अतुल निशा के साथ वह से जाने लगा.

जाते जाते मूड कर.

अतुल:- जितना अच्छा और शरीफ समझती थी तुम मुझे उतना hi बुरा भी बन सकता हु अगर जरुरत पड़े तोह.

अगर मेरा अच्छाई जानना है तोह माँ, दी या फिर निशु से पूछ lena...Agar बुराई जानना चाहती हो तोह जल्द hi तुम और रवि जान जाओगे अगर ऐसा hi चलता रहा तोह.

सोचा था रवि तुमसे ऐसा करवा रहा hai...Tumhe अच्छे से samjhaaunga...Lekin तुम भी काम नहीं ho...Ek ऐसी जिद्द जो कभी पूरा हो भी नहीं sakta...Apni लिमिट में raho...Warna तुम खुद समझ जाओगी.

फिर अतुल और निशा वह से चले गए.

अतुल को इन् बातों से कोई परवाह नहीं tha...Preeti का धमकी, उसकी bewkoofi...Atul को इसकी कोई परवाह नहीं tha...Bas अगर एक hi परेशानी था तोह अपने पापा को समझाना, उनकी नाराजगी दूर करना.

Nisha...Kuch कुछ बातें तोह वह समझ hi गयी thhi...Bas बाकी की बातें करने के लिए सही मौके का इंतजार में thi...Itni जल्दी यह सब कुछ होना उसकी समझ में भी नहीं आ रहा था.

प्रीती:- अपना पावर से लोगो को मजबूर karna...Aaj उसकी ये घमंड भी टूट गया था... अब्ब अतुल को पाने के लिए किसी और साजिश की तरफ वो अपना दिमाग चलाने की सोच रही थी.

Ajay...Usse विश्वाश था अपने दोस्त पर की वह कुछ गलत होने नहीं dega...Agar हो भी गया तोह वह किस काम का?

[Note:- Sorry friends for late update...Abhi festival time me family ke saath busy tha...Issi vajah se delay hua...2 weeks baad exam hai...Exam preparation aur study me busy rahunga, issi vajah se aane wale 2 weeks tak regular post nahi kar paaunga...Fir bhi try karunga iss beech 4 or 5 update post karne ki...Stay tuned.]
 
फ्रेंड्स ी हैवे ा क्वेश्चन फॉर यू आल !!!

वैसे तोह मैंने सोचा था कसम hi मेरा लास्ट स्टोरी hai...Study प्रेशर और टाइम की कमी की वजह से.

अब्ब सोच रहा हु की कसम कम्पलीट करने के बाद एक और स्टोरी लिखू "एक भूल 2"...ये स्टोरी एक भूल का सीक्वल नहीं hai...Totally डिफरेंट प्लाट है.

आगे और भी बिजी हो सकता हु स्टडी me...Aur कसम से भी थोड़ा लेट उपदटेस आ सकता hai...Aur स्टोरी एक पेनफुल लव स्टोरी hoga...Romance पोरशन से ज्यादा ट्रेजेडी है स्टोरी में.

क्वेश्चन ये है की क्या आप सब कम्फर्टेबले है? ट्रैजिक लव स्टोरी और डिलेड उपदटेस mein...May बे डिफरेंस ऑफ़ 3 और 4 डेज?

अगर हाँ तोह मई कोशिश करूँगा अपनी तरफ से एक बेस्ट इमोशनल स्टोरी लिखने ki...Agar ना तोह प्लान कैंसिल.
 
अपडेट 106

बात तोह कहा से कहा पहुँच गयी.

कॉफ़ी की एक घूँट पी कर निशा ने कहा.

अतुल:- हाँ वही तोह? पता नहीं क्या हो गया है सभी ko...Itni जल्दी यह सब.

निशा:- वैसे भी चाइल्ड मैरिज सही नहीं है.

अतुल:- क्या? किया? क्या कहा टटुमने?

अतुल हकलाते हुए bola...Nisha बस उसकी हालत पर हंस रही थी.

अतुल:- Child...Baccha देख रही हो तुम mujhe...Abb बच्चो की उम्र नहीं है मेरा...21 का हो चूका hoon...Yeh तोह बच्चे पैदा करने की उम्र है.

निशा बस हैरानी से अतुल को देखती रही.

अतुल:- अगर तुम साथ दो तो. :डी

निशा आस पास देखते हुए थोड़ा गुस्से से अतुल को कहती है.

निशा:- क्या बोल रहे हो? कोई सुन लगा तोह?

अतुल:- तोह सुनने दो na...Koi मेरा बिगाड़ लेगा कोई?

निशा:- अच्छा तुम्हारा कोई बिगाड़ नहीं सकता?

अतुल:- अरे नहीं nahi...Tumhare बारे में नहीं था यह.

निशा:- यह सब छोडो? यह बताओ तुमने क्या सोचा है?

अतुल:- किस बारे में?

निशा:- वही शादी के बारे में?

अतुल:- मन तोह कर दिया न!!!

निशा:- अरे buddhu...Unki बात नहीं कर रही hu...Unse कोई लेना देना नहीं hai...Mai तोह हमारे बारे में बात कर रही थी.

अतुल:- कुछ देर पहले आप hi चाइल्ड मैरिज की अगेंस्ट थी? अब्ब क्या हो गया? खुद hi अर्ली मैरिज के लिए ुटतौली हो रही है?

निशा:- अभी nahi...Lekin घरवालों को भी तोह मानना padega...Waise भी हमारे घरवालों के बिच अच्छा रिलेशन नहीं hai...Unhe मानाने की बात कर रही थी.

अतुल:- हो जाएगा आराम se...Bas देखती जाओ.

निशा:- कैसे?

अतुल:- बहुत आसान है.

निशा:- बताओ भी!!

अतुल:- ये प्यार और शादी बस पटाने की गेम hai...Pyar हो गया तोह तुम्हे पता liya...Abb शादी करना है तोह घर वालों को पता लेंगे.

वैसे भी दो hi लोग को पटाने की जरुरत hai...Ek मेरा ससुर और एक तुम्हारा ससुर.

अतुल की बातो में विश्वाश साफ़ झलक रहा था.

तुम कुछ कर क्यों नहीं रहे हो?

गुस्से में रिया ने गौरव से पूछा.

गौरव:- अपनी तरफ से तोह कोशिश कर रहा हूँ naa...Abb अतुल hi नहीं मान रहा है तोह क्या कर सकता हु.

रिया:- अतुल Atul...Aakhir किस बात की अक्कड़ है इससे?

गौरव:- पता nahi...Agar कुछ बात पसंद ना आये तोह मानने के लिए तैयार hi नहीं होता.

रिया:- मानना padega...Uski शादी प्रीती से hi hogi...Mai बस इतना जानती हूँ.

गौरव:- कोशिश कर रहा hu...Dekhte हैं.

गौरव:- (इन हिज मंद) साला कहा फंस gaya...Kaha मैं उस अतुल को अपने लाइफ से निकाल फेंकना चाहता था और अब्ब yeh...Yeh अपनी बेहेन को अतुल के साथ सेट कराने की कोशिश में लगी हुई हैं.

यार एक बार फिर सोच ले.

डरते हुए अभिशेख ने रवि से पूछा.

रवि:- कितना डरता है बी फत्तू? सिर्फ सोचा नहीं अब्ब डीडे कर चूका hu...Isse अच्छा मौका नहीं मिलेगा बदला लेने के लिए.

रवि की आँखों में अभी सिर्फ गुस्सा और नफरत tha...Nafrat में वो इस तरह पागल हो गया था की अब्ब उसका मकशद सिर्फ एक hi tha...Badla.

अभिशेख कुछ नहीं bola...Abhi भी उससे दर था की कही कोई गलत ना हो जाए उनके saath...Ravi को ना वो समझा सकता था और ना hi मन कर पा रहा था.

नोट:- प्लीज व्यू थिस लिंक एंड क्वेश्चन इन लिंक.
 
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