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निशा:- अब्ब क्या है? क्यों बुलाया?
छत में आते hi निशा गुस्से से boli...Atul तो पहले से hi गुस्से में tha...Fir भी अपना गुस्सा दबाते हुए.
अतुल:- मुझे ये रवि ठीक नहीं लग रहा है.
निशा:- तोह?
अतुल:- क्या तोह? उससे दूर रहा करो.
निशा:- तुम कौन होते हो मुझे ये सलाह देने वाले.
निशा तो गुस्से में बोले जा रही थी लेकिन उसकी ये बात से अब्ब अतुल खुद पर और कण्ट्रोल नहीं कर पाया.
अतुल:- मई कौन हु? अब्ब ये मत कहना की हम दोनों अलग हो गए है और अब्ब वो प्यार भी नहीं रहा.
गुस्से में अतुल की आवाज भी तेज हो रहा था.
निशा:- है अब्ब नहीं रहा pyar...Nahi करती हु तुम से प्यार.
अतुल अब्ब निशा की आँखों में देखते हुए...
अतुल:- सच बोल रही हो?
निशा कुछ जवाब देती इससे पहले अतुल एक बार फिर से...
अतुल:- अगर ये सच है तो मुझे भी आज से तुमसे कोई मतलब nahi...Mai भी हमारे रिश्ते को इस तरह से तोड़ लूंगा की कभी जुट नहीं पायेगा और ना hi जुटने दूंगा.
खुद की कसम खाता हु कभी मुद कर तुम्हे देखूंगा भी nahi...Har वो फोटोज और यादें जला दूंगा जिसमे हम दोनों साथ हो.
फिर तुम्हारी जिंदगी तुम्हे मुबारक और मेरा जिंदगी मुझे.
इतना कह कर अतुल छत की चक्कर लगाने लगता hai...Frustration में दीवाल पर मुक्का मरता तो कभी अपने hi बाल नोचने laga...Gussa अपने चरम पर था.
अतुल:- बहुत सेह liya...Lekin अब्ब और किस हद्द tak...Gussa सिर्फ तुम्हे hi नहीं aata...Aaj जो गुस्सा देख रही हो naa...Yahi gussa...Aisi गुस्सा में सिर्फ "में एंड Myself"...Baaki किसी की मुझे परवाह नहीं और कोई मतलब भी नहीं.
अब्ब अतुल अपना आँखें निशा की तरह उठा कर.
अतुल:- जल्दी जवाब do...Faaltu का टाइम नहीं है मेरे पास.
निशा अतुल को देख कर एकदम से दर जाती है.
अतुल का चेहरा और आँखें गुस्से में बिलकुल लाल हो गया tha...Chehra पूरा पसीना में भींगा हुआ और आँखें उसको hi घूरता हुआ.
अतुल:- जवाब दो.
लगभग दहाड़ते हुए अतुल बोलै.
कुछ देर तो निशा अतुल को देखती hi rahi...Dar के साथ साथ उससे हैरानी भी हो रही thi...Kya ये वही अतुल है जिसको वो जानती hai...Itna gussa!!!Itna गुस्सा वो भी अपने लिए.
निशा:- अब्ब अपनी गलती छुपाने के लिए गुस्से का सहारा लो.
शिकायत भरी आवाज में निशा ने पूछा.
इतना गुस्सा के बावजूद भी अतुल हंस पड़ा.
अतुल:- (लाफिंग इन एंगर) बेवकूफ hi rahogi...Aur बेवकूफी की कोई इलाज नहीं.
निशा:- है बेवकूफ hi तो hu...Tumse प्यार किया और अँधा विस्वाश kiya...Aur मेरी hi बेवकूफी का सज़ा मिल रही है जिस हाल में आज में हु.
अतुल बस चुप hi raha...Gussa तो बहुत आ रहा tha...Lekin कर भी क्या सकता था.
निशा:- क्या प्रीती इतनी अच्छी है?
थोड़ा सा दर्द के साथ निशा ने पूछा.
अतुल:- वो भी बेवकूफ है तुम्हारी तरह.
निशा:- और हम दोनों को बेवकूफ बनाने wale...Tum अपने बारे में क्या कहोगे?
अतुल:- मई भी बेवकूफ tha...Jo तुमसे प्यार हो gaya...Tumse दोस्ती भी नहीं करना चाहिए था.
निशा:- आ गयी ना दिल की बात जुबान par...Waise अब्ब मई तुम दोनों के बिच नहीं आउंगी.
अतुल:- मेरे बारे में तोह इतना कुछ बोल रही ho...Khud की शकल भी तोह देखो आईने me...Mujhe जलाने के लिए रवि से बात चीत बढ़ा दी.
निशा:- व्हाट?
अतुल:- जब बात अपने पर आ गयी तोह? वैसे बात तुम्हारे झुठलाने से झूठ नहीं हो जाएगा.
निशा:- क्या झूठ? मैंने कब मन किया की आज वो मुझसे बात नहीं कर रहा था? तुम्हारी तरह झूठ तोह नहीं बोलती.
अतुल:- तोह मान रही हो की मुझे जलाने के लिए ये सह कर रही हो.
निशा:- तुम्हे जलाने के liye...Kya अब्ब यही काम बाकी रह गया है मेरे पास?
एक बात कान खोल कर सुन lo...Bhaad में जाओ तुम और रवि.
वो तोह रवि कुछ काम की बात कर रहा था वर्ण मुझे उससे कोई मतलब hi नहीं.
अतुल:- तुम चाहती हो की मई सच मान लू?
निशा:- जरुरत nahi...Jo सोचना है socho...Mujhe कोई मतलब nahi...Aur मई सही होने के बावजूद ये साबित नहीं करुँगी.
अतुल:- Exactly...Mujhe भी जरुरत नहीं खुद को सही साबित करने की.
दोनों का गुस्सा और ईगो चरम में पहुँच गया tha...Naa hi दोनों एक दूसरे के सामने झुकना चाहते थे और ना hi एक दूसरे पर विश्वाश कर पा रहे थे.
कुछ देर बाद.
अतुल:- तुमने जवाब नहीं दिया? क्या सच में अब्ब तुम मुझसे प्यार नहीं karti...Abhi जवाब do...Apna अपना रास्ता चुन लेंगे.
निशा कुछ देर अतुल को देखती है और फिर.
निशा:- तुमसे नफरत नहीं कर पा रही hu...Lekin जल्द कोशिश करुँगी.
कुछ सोचने के बाद.
अतुल:- तुम्हे तोह शायद hi कभी समझा paaunga...Agar समझना होता तो पहले hi समझ jaati...Khair करती रहो nafrat...Aur साबित कर देना "मेरा प्यार तुम्हारे लिए सबसे बड़ा भूल था, गलत था मई की प्यार के रास्ते चल पड़ा"
फैसला तुम्हारे हाथ में hai...Mujh पर यकीं करना या ना karna...Agar कभी यकीं हो भी जाए तो इतना लेट मत कर देना की तब तक मई hi बदल jaau...Mai मई ना राहु.
पहली बार अतुल अपना गुस्सा भूल कर इमोशनल हो गया.
फिर वो वह और रह नहीं paaya...Kya बातें करता और बातों का मतलब hi क्या था.
दोनों अपने अपने रूम की तरफ जाने lage...Nisha की आँखों में आंसू था तो अतुल की आँखों का भी वैसा hi हाल tha...Uski भी आँखें नाम हो गया था.
शायद दोनों महसूस कर रहे thhe...Unka फ्यूचर अब्ब ज्यादा नहीं hai...Aaj नहीं तो कल वो दिन आ hi जाएगा.
निशा:- अब्ब क्या है? क्यों बुलाया?
छत में आते hi निशा गुस्से से boli...Atul तो पहले से hi गुस्से में tha...Fir भी अपना गुस्सा दबाते हुए.
अतुल:- मुझे ये रवि ठीक नहीं लग रहा है.
निशा:- तोह?
अतुल:- क्या तोह? उससे दूर रहा करो.
निशा:- तुम कौन होते हो मुझे ये सलाह देने वाले.
निशा तो गुस्से में बोले जा रही थी लेकिन उसकी ये बात से अब्ब अतुल खुद पर और कण्ट्रोल नहीं कर पाया.
अतुल:- मई कौन हु? अब्ब ये मत कहना की हम दोनों अलग हो गए है और अब्ब वो प्यार भी नहीं रहा.
गुस्से में अतुल की आवाज भी तेज हो रहा था.
निशा:- है अब्ब नहीं रहा pyar...Nahi करती हु तुम से प्यार.
अतुल अब्ब निशा की आँखों में देखते हुए...
अतुल:- सच बोल रही हो?
निशा कुछ जवाब देती इससे पहले अतुल एक बार फिर से...
अतुल:- अगर ये सच है तो मुझे भी आज से तुमसे कोई मतलब nahi...Mai भी हमारे रिश्ते को इस तरह से तोड़ लूंगा की कभी जुट नहीं पायेगा और ना hi जुटने दूंगा.
खुद की कसम खाता हु कभी मुद कर तुम्हे देखूंगा भी nahi...Har वो फोटोज और यादें जला दूंगा जिसमे हम दोनों साथ हो.
फिर तुम्हारी जिंदगी तुम्हे मुबारक और मेरा जिंदगी मुझे.
इतना कह कर अतुल छत की चक्कर लगाने लगता hai...Frustration में दीवाल पर मुक्का मरता तो कभी अपने hi बाल नोचने laga...Gussa अपने चरम पर था.
अतुल:- बहुत सेह liya...Lekin अब्ब और किस हद्द tak...Gussa सिर्फ तुम्हे hi नहीं aata...Aaj जो गुस्सा देख रही हो naa...Yahi gussa...Aisi गुस्सा में सिर्फ "में एंड Myself"...Baaki किसी की मुझे परवाह नहीं और कोई मतलब भी नहीं.
अब्ब अतुल अपना आँखें निशा की तरह उठा कर.
अतुल:- जल्दी जवाब do...Faaltu का टाइम नहीं है मेरे पास.
निशा अतुल को देख कर एकदम से दर जाती है.
अतुल का चेहरा और आँखें गुस्से में बिलकुल लाल हो गया tha...Chehra पूरा पसीना में भींगा हुआ और आँखें उसको hi घूरता हुआ.
अतुल:- जवाब दो.
लगभग दहाड़ते हुए अतुल बोलै.
कुछ देर तो निशा अतुल को देखती hi rahi...Dar के साथ साथ उससे हैरानी भी हो रही thi...Kya ये वही अतुल है जिसको वो जानती hai...Itna gussa!!!Itna गुस्सा वो भी अपने लिए.
निशा:- अब्ब अपनी गलती छुपाने के लिए गुस्से का सहारा लो.
शिकायत भरी आवाज में निशा ने पूछा.
इतना गुस्सा के बावजूद भी अतुल हंस पड़ा.
अतुल:- (लाफिंग इन एंगर) बेवकूफ hi rahogi...Aur बेवकूफी की कोई इलाज नहीं.
निशा:- है बेवकूफ hi तो hu...Tumse प्यार किया और अँधा विस्वाश kiya...Aur मेरी hi बेवकूफी का सज़ा मिल रही है जिस हाल में आज में हु.
अतुल बस चुप hi raha...Gussa तो बहुत आ रहा tha...Lekin कर भी क्या सकता था.
निशा:- क्या प्रीती इतनी अच्छी है?
थोड़ा सा दर्द के साथ निशा ने पूछा.
अतुल:- वो भी बेवकूफ है तुम्हारी तरह.
निशा:- और हम दोनों को बेवकूफ बनाने wale...Tum अपने बारे में क्या कहोगे?
अतुल:- मई भी बेवकूफ tha...Jo तुमसे प्यार हो gaya...Tumse दोस्ती भी नहीं करना चाहिए था.
निशा:- आ गयी ना दिल की बात जुबान par...Waise अब्ब मई तुम दोनों के बिच नहीं आउंगी.
अतुल:- मेरे बारे में तोह इतना कुछ बोल रही ho...Khud की शकल भी तोह देखो आईने me...Mujhe जलाने के लिए रवि से बात चीत बढ़ा दी.
निशा:- व्हाट?
अतुल:- जब बात अपने पर आ गयी तोह? वैसे बात तुम्हारे झुठलाने से झूठ नहीं हो जाएगा.
निशा:- क्या झूठ? मैंने कब मन किया की आज वो मुझसे बात नहीं कर रहा था? तुम्हारी तरह झूठ तोह नहीं बोलती.
अतुल:- तोह मान रही हो की मुझे जलाने के लिए ये सह कर रही हो.
निशा:- तुम्हे जलाने के liye...Kya अब्ब यही काम बाकी रह गया है मेरे पास?
एक बात कान खोल कर सुन lo...Bhaad में जाओ तुम और रवि.
वो तोह रवि कुछ काम की बात कर रहा था वर्ण मुझे उससे कोई मतलब hi नहीं.
अतुल:- तुम चाहती हो की मई सच मान लू?
निशा:- जरुरत nahi...Jo सोचना है socho...Mujhe कोई मतलब nahi...Aur मई सही होने के बावजूद ये साबित नहीं करुँगी.
अतुल:- Exactly...Mujhe भी जरुरत नहीं खुद को सही साबित करने की.
दोनों का गुस्सा और ईगो चरम में पहुँच गया tha...Naa hi दोनों एक दूसरे के सामने झुकना चाहते थे और ना hi एक दूसरे पर विश्वाश कर पा रहे थे.
कुछ देर बाद.
अतुल:- तुमने जवाब नहीं दिया? क्या सच में अब्ब तुम मुझसे प्यार नहीं karti...Abhi जवाब do...Apna अपना रास्ता चुन लेंगे.
निशा कुछ देर अतुल को देखती है और फिर.
निशा:- तुमसे नफरत नहीं कर पा रही hu...Lekin जल्द कोशिश करुँगी.
कुछ सोचने के बाद.
अतुल:- तुम्हे तोह शायद hi कभी समझा paaunga...Agar समझना होता तो पहले hi समझ jaati...Khair करती रहो nafrat...Aur साबित कर देना "मेरा प्यार तुम्हारे लिए सबसे बड़ा भूल था, गलत था मई की प्यार के रास्ते चल पड़ा"
फैसला तुम्हारे हाथ में hai...Mujh पर यकीं करना या ना karna...Agar कभी यकीं हो भी जाए तो इतना लेट मत कर देना की तब तक मई hi बदल jaau...Mai मई ना राहु.
पहली बार अतुल अपना गुस्सा भूल कर इमोशनल हो गया.
फिर वो वह और रह नहीं paaya...Kya बातें करता और बातों का मतलब hi क्या था.
दोनों अपने अपने रूम की तरफ जाने lage...Nisha की आँखों में आंसू था तो अतुल की आँखों का भी वैसा hi हाल tha...Uski भी आँखें नाम हो गया था.
शायद दोनों महसूस कर रहे thhe...Unka फ्यूचर अब्ब ज्यादा नहीं hai...Aaj नहीं तो कल वो दिन आ hi जाएगा.