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हाँ निशा? सब कुछ ठीक तो है न?
एक दर के साथ अतुल ने निशा को फ़ोन में पूछा.
दूसरी तरफ से निशा कुछ कहती है.
अतुल:- रुको मई अभी आता हूँ.
ा. डैड:- तू कही नहीं जाएगा?
सख्त आवाज के साथ अतुल को आदेश मिला.
अतुल:- (पापा की आँखों में देख फ़ोन में) 2 मिनट में पहुँचता हूँ.
फिर इतना कह कर अतुल वह से जाने लगा.
गौरव:- अब्ब तोह आपको भी आँखें दिखाने लगा है.
अतुल की कानो तक भी ये बात पहुँच जाता है.
अतुल:- तू बस अपना उल्टा गिनती सुरु kar...Iss बार तुझे मुझसे कोई नहीं bachayega...Papa भी नहीं.
अतुल ने काफी गुस्से में kaha...Lekin वो वह से निकल gaya...Ye वक्त गुस्सा दिखाने का नहीं हालात को सम्हालने का था.
न. डैड:- आओ Atul...Tumhara hi इंतजार हो रहा था?
अतुल:- ये अब क्या हो रहा है अंकल?
न. डैड:- यही तोह मई तुमसे पूछना चाहता हूँ.
अतुल:- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Achanak से...
न. डैड:- तुम्हारे पापा और भैया ने कुछ नहीं बताया तुम्हे.
अतुल:- उनकी तरफ से मई माफ़ी मांगता hun...Aur आपको यकीं दिलाता हूँ आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा.
अतुल डरते डरते bola...Kisi तरह उससे निशा की पापा को मनाना था.
न. डैड:- और कितनी बार यकीं दिलाओगे?
एक गुस्सा था निशा की पापा की आवाज mein...Jawaab में अतुल चुप hi raha...Kya जवाब देता?
न. डैड:- पिछली बार भी यही कहा था tumne...Apne घर वालों को ले कर भी aaye...Lekin अब्ब क्या हुआ? एकदम से उन्होंने अपना रंग बदल लिया.
एक नजर गुस्से से अतुल को देखते हुए.
न. डैड:- उनका हमेशा से यही hai...Chhoti छोटी बातों में लड़ना और अपने जिद्द में ऐड jaana...Tum दोनों के प्यार के खातिर मान गया था मई इस रिश्ते के लिए ये सोच कर की वो लोग भी तुम्हारे खातिर बदल jaayenge...Suru में लगा भी था की वो बदल गए hai...Lekin अचानक से...
इतना कह कर वो रुक gaye...Gusse से चेहरा पूरा लाल हो चूका tha...Atul को समझ में नहीं आ रहा था की क्या कहे? पास में बैठी निशा भी काफी दर गयी थी.
अतुल:- अंकल आप एक बार भरोषा कर लीजिये....
न. डैड:- भरोषा करता hun...Issi लिए निशा का हाथ तुम्हारे हाथ में देने का फैसला किया था.
तुम्हारे बारे में काफी बातें सुना hai...Lekin किसी भी बात पर यकीं नहीं kiya...Jaanta हु मई तुम कैसे ho...Bharosha तुम पर नहीं तुम्हारे परिवार पर नहीं कर सकता.
अतुल:- एक बार और कोशिश करता hun...Mujhe यकीं है वो मान जाएंगे.
न. डैड:- छोटे बच्चे है क्या वो? जो तुम दो चॉकलेट्स डोज और वो मान jaayenge...Acche से जानता हूँ unhein...Tum भी जानते हो.
इस बार अतुल चुप raha...Kuch जवाब नहीं था उसके पास.
न. डैड:- बीटा तुम्हे बुरा लग सकता hai...Lekin अब्ब और देर करना सही नहीं hoga...Behtar यही होगा तुम इस रिश्ते को भूल जाओ.
कठोर हो कर इस बार निशा की पापा ने फैसला liya...Atul और निशा बुरी तरह से चौंक gaye...Unhe उम्मीद नहीं था की ये फैसला इतना जल्द वो ले लेंगे.
अतुल:- लेकिन...
न. डैड:- मई उस घर में अपनी बेटी को नहीं भेज सकता जहा उससे अपनाने वाला कोई नहीं हो.
अतुल:- लेकिन मई हूँ naa...Mere रहते निशा के साथ कुछ गलत नहीं हो सकता.
न. डैड:- तुम अपना घरवालों को छोड़ सकते हो?
इस सवाल से अतुल चौंक गया tha...Wo कुछ सोच hi रहा था की.
न. डैड:- झूठ बिलकुल मत बोलना.
अतुल कुछ बोल नहीं पाया.
न. डैड:- अभी तुम्हे पता नहीं है फॅमिली चलना इतना भी आसान काम नहीं जितना तुम सोचते ho...Vakt की kami...Paiso की maang...Ghar वालों के बिच मन mutaaw...Sab के अपने अपने अपने iccha...Kaam का tension...Kuch पता hi नहीं है.
अभी जो बड़े बड़े बातें कर रहे हो naa...Ye करूँगा वो karunga...Jald hi पता चल जाएगा एक्सपेक्टेशन और रियलिटी के बिच जमीन आसमान का fark...Aur ऐसे में सुरूवर होगा दोनों के बिच मन mutaaw...Ek दूसरे से मन भर जाएगा और छोटी छोटी बातो में लड़ाई.
ऐसे में जरुरत होते है परिवार ke...Wo ऐसे माहौल बनाते है की झगड़ा ख़त्म हो और कोई परेशानी ना rahe...Kuch इस तरीके से परिवार को ले कर चलेंगे की सब कुछ ठीक रहे और खुशियां rahe...Lekin क्या तुम्हारे परिवार में ऐसा संभव है?
उनका तोह पहला hi कोशिश रहेगा निशा को तुम्हारे लाइफ से निकाल फेंकने ki...Aur तुम भी पत्नी और परिवार दोनों को एक साथ ले कर चल नहीं sakte...Nisha के साथ झगड़ा हुआ तोह धीरे धीरे उनके साथ हो जाओगे?
इतना कह कर वो चुप हो गए और अतुल को देखने lage...Atul चुप hi tha...Atul उनकी बातो से कुछ हद्द तक सहमत था लेकिन उससे खुद पर भी भरोषा था की वो ऐसे हालात आने hi नहीं देगा.
न. डैड:- तुम्हारे और निशा के बिच कभी झगड़ा हुआ है?
अतुल:- हाँ एक baar...Lekin सब कुछ ठीक हो गया.
न. डैड:- तोह क्या गारंटी है की आगे नहीं होगा? जब पहले छोटी सी बात पर झगड़ा आ सकता है तोह आगे? आगे तोह पहाड़ जैसी बड़ी चुनौती होगा?
अतुल कुछ बोलने hi वाला था की.
न. डैड:- जानता hun...Tum क्या कहना चाहते ho...Apni प्यार की ताकत bataaoge...Mujhe भरोषा दिलाने की कोशिश करोगे.
करता हूँ तुम पर bharosha...Lekin तुम्हारे परिवार पर नहीं.
एक टिपिकल बाप की तरह मुझे भी अपनी बेटी की खुशियां chahiye...Uska अच्छा सा ससुराल ho...Usse प्यार करने और उसको समझने वाला पति हो और थोड़ा बहुत पैसे हो जिससे जिंदगी हंसी ख़ुशी बीत सके.
लेकिन ससुराल hi सही नहीं है तोह क्या कर सकता हूँ? ससुराल वाले भी ऐसे है की इस शादी को रोकने के लिए साजिश करते hai...Jhuthi झूठी अफवाह फैला कर लड़ते झगड़ते hai...Unhe अपने बेटे का ख़ुशी से मतलब नहीं तोह बहु से क्या होगा?
फिर निशा की पापा अतुल को देखने lage...Usse कुछ ना बोलता देख.
न. डैड:- चलो एक मौका देता hun...Unhe मनाओ निशा को अपनाने के liye...Khushi के साथ.
अगर मुझे इस बार फिर उन् पर शक हुआ तो समझ लेना?
फिर अतुल उठता है और निशा को देखता hai...Wo काफी दरी हुई thi...Atul आँखों से hi भरोषा दिलाता है की वो सब कुछ ठीक कर देगा.
अतुल:- उन्हें जरूर मनाऊंगा अंकल.
उसने निशा की पापा की आँखों में देख कर तोह कह diya...Lekin इस बार खुद उसकी बातों में वह कॉन्फिडेंस नहीं था.
फिर एक आखिरी कोशिश करने निकल गया अतुल अपने घर.
[Note:- Friends flashback 3 ya 4 update tak hi hai abb...Waise toh 10 updates lag jaate...Lekin aap sab ki demand ko sochte hue fast karunga...Saath bane rahiye.]
हाँ निशा? सब कुछ ठीक तो है न?
एक दर के साथ अतुल ने निशा को फ़ोन में पूछा.
दूसरी तरफ से निशा कुछ कहती है.
अतुल:- रुको मई अभी आता हूँ.
ा. डैड:- तू कही नहीं जाएगा?
सख्त आवाज के साथ अतुल को आदेश मिला.
अतुल:- (पापा की आँखों में देख फ़ोन में) 2 मिनट में पहुँचता हूँ.
फिर इतना कह कर अतुल वह से जाने लगा.
गौरव:- अब्ब तोह आपको भी आँखें दिखाने लगा है.
अतुल की कानो तक भी ये बात पहुँच जाता है.
अतुल:- तू बस अपना उल्टा गिनती सुरु kar...Iss बार तुझे मुझसे कोई नहीं bachayega...Papa भी नहीं.
अतुल ने काफी गुस्से में kaha...Lekin वो वह से निकल gaya...Ye वक्त गुस्सा दिखाने का नहीं हालात को सम्हालने का था.
न. डैड:- आओ Atul...Tumhara hi इंतजार हो रहा था?
अतुल:- ये अब क्या हो रहा है अंकल?
न. डैड:- यही तोह मई तुमसे पूछना चाहता हूँ.
अतुल:- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Achanak से...
न. डैड:- तुम्हारे पापा और भैया ने कुछ नहीं बताया तुम्हे.
अतुल:- उनकी तरफ से मई माफ़ी मांगता hun...Aur आपको यकीं दिलाता हूँ आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा.
अतुल डरते डरते bola...Kisi तरह उससे निशा की पापा को मनाना था.
न. डैड:- और कितनी बार यकीं दिलाओगे?
एक गुस्सा था निशा की पापा की आवाज mein...Jawaab में अतुल चुप hi raha...Kya जवाब देता?
न. डैड:- पिछली बार भी यही कहा था tumne...Apne घर वालों को ले कर भी aaye...Lekin अब्ब क्या हुआ? एकदम से उन्होंने अपना रंग बदल लिया.
एक नजर गुस्से से अतुल को देखते हुए.
न. डैड:- उनका हमेशा से यही hai...Chhoti छोटी बातों में लड़ना और अपने जिद्द में ऐड jaana...Tum दोनों के प्यार के खातिर मान गया था मई इस रिश्ते के लिए ये सोच कर की वो लोग भी तुम्हारे खातिर बदल jaayenge...Suru में लगा भी था की वो बदल गए hai...Lekin अचानक से...
इतना कह कर वो रुक gaye...Gusse से चेहरा पूरा लाल हो चूका tha...Atul को समझ में नहीं आ रहा था की क्या कहे? पास में बैठी निशा भी काफी दर गयी थी.
अतुल:- अंकल आप एक बार भरोषा कर लीजिये....
न. डैड:- भरोषा करता hun...Issi लिए निशा का हाथ तुम्हारे हाथ में देने का फैसला किया था.
तुम्हारे बारे में काफी बातें सुना hai...Lekin किसी भी बात पर यकीं नहीं kiya...Jaanta हु मई तुम कैसे ho...Bharosha तुम पर नहीं तुम्हारे परिवार पर नहीं कर सकता.
अतुल:- एक बार और कोशिश करता hun...Mujhe यकीं है वो मान जाएंगे.
न. डैड:- छोटे बच्चे है क्या वो? जो तुम दो चॉकलेट्स डोज और वो मान jaayenge...Acche से जानता हूँ unhein...Tum भी जानते हो.
इस बार अतुल चुप raha...Kuch जवाब नहीं था उसके पास.
न. डैड:- बीटा तुम्हे बुरा लग सकता hai...Lekin अब्ब और देर करना सही नहीं hoga...Behtar यही होगा तुम इस रिश्ते को भूल जाओ.
कठोर हो कर इस बार निशा की पापा ने फैसला liya...Atul और निशा बुरी तरह से चौंक gaye...Unhe उम्मीद नहीं था की ये फैसला इतना जल्द वो ले लेंगे.
अतुल:- लेकिन...
न. डैड:- मई उस घर में अपनी बेटी को नहीं भेज सकता जहा उससे अपनाने वाला कोई नहीं हो.
अतुल:- लेकिन मई हूँ naa...Mere रहते निशा के साथ कुछ गलत नहीं हो सकता.
न. डैड:- तुम अपना घरवालों को छोड़ सकते हो?
इस सवाल से अतुल चौंक गया tha...Wo कुछ सोच hi रहा था की.
न. डैड:- झूठ बिलकुल मत बोलना.
अतुल कुछ बोल नहीं पाया.
न. डैड:- अभी तुम्हे पता नहीं है फॅमिली चलना इतना भी आसान काम नहीं जितना तुम सोचते ho...Vakt की kami...Paiso की maang...Ghar वालों के बिच मन mutaaw...Sab के अपने अपने अपने iccha...Kaam का tension...Kuch पता hi नहीं है.
अभी जो बड़े बड़े बातें कर रहे हो naa...Ye करूँगा वो karunga...Jald hi पता चल जाएगा एक्सपेक्टेशन और रियलिटी के बिच जमीन आसमान का fark...Aur ऐसे में सुरूवर होगा दोनों के बिच मन mutaaw...Ek दूसरे से मन भर जाएगा और छोटी छोटी बातो में लड़ाई.
ऐसे में जरुरत होते है परिवार ke...Wo ऐसे माहौल बनाते है की झगड़ा ख़त्म हो और कोई परेशानी ना rahe...Kuch इस तरीके से परिवार को ले कर चलेंगे की सब कुछ ठीक रहे और खुशियां rahe...Lekin क्या तुम्हारे परिवार में ऐसा संभव है?
उनका तोह पहला hi कोशिश रहेगा निशा को तुम्हारे लाइफ से निकाल फेंकने ki...Aur तुम भी पत्नी और परिवार दोनों को एक साथ ले कर चल नहीं sakte...Nisha के साथ झगड़ा हुआ तोह धीरे धीरे उनके साथ हो जाओगे?
इतना कह कर वो चुप हो गए और अतुल को देखने lage...Atul चुप hi tha...Atul उनकी बातो से कुछ हद्द तक सहमत था लेकिन उससे खुद पर भी भरोषा था की वो ऐसे हालात आने hi नहीं देगा.
न. डैड:- तुम्हारे और निशा के बिच कभी झगड़ा हुआ है?
अतुल:- हाँ एक baar...Lekin सब कुछ ठीक हो गया.
न. डैड:- तोह क्या गारंटी है की आगे नहीं होगा? जब पहले छोटी सी बात पर झगड़ा आ सकता है तोह आगे? आगे तोह पहाड़ जैसी बड़ी चुनौती होगा?
अतुल कुछ बोलने hi वाला था की.
न. डैड:- जानता hun...Tum क्या कहना चाहते ho...Apni प्यार की ताकत bataaoge...Mujhe भरोषा दिलाने की कोशिश करोगे.
करता हूँ तुम पर bharosha...Lekin तुम्हारे परिवार पर नहीं.
एक टिपिकल बाप की तरह मुझे भी अपनी बेटी की खुशियां chahiye...Uska अच्छा सा ससुराल ho...Usse प्यार करने और उसको समझने वाला पति हो और थोड़ा बहुत पैसे हो जिससे जिंदगी हंसी ख़ुशी बीत सके.
लेकिन ससुराल hi सही नहीं है तोह क्या कर सकता हूँ? ससुराल वाले भी ऐसे है की इस शादी को रोकने के लिए साजिश करते hai...Jhuthi झूठी अफवाह फैला कर लड़ते झगड़ते hai...Unhe अपने बेटे का ख़ुशी से मतलब नहीं तोह बहु से क्या होगा?
फिर निशा की पापा अतुल को देखने lage...Usse कुछ ना बोलता देख.
न. डैड:- चलो एक मौका देता hun...Unhe मनाओ निशा को अपनाने के liye...Khushi के साथ.
अगर मुझे इस बार फिर उन् पर शक हुआ तो समझ लेना?
फिर अतुल उठता है और निशा को देखता hai...Wo काफी दरी हुई thi...Atul आँखों से hi भरोषा दिलाता है की वो सब कुछ ठीक कर देगा.
अतुल:- उन्हें जरूर मनाऊंगा अंकल.
उसने निशा की पापा की आँखों में देख कर तोह कह diya...Lekin इस बार खुद उसकी बातों में वह कॉन्फिडेंस नहीं था.
फिर एक आखिरी कोशिश करने निकल गया अतुल अपने घर.
[Note:- Friends flashback 3 ya 4 update tak hi hai abb...Waise toh 10 updates lag jaate...Lekin aap sab ki demand ko sochte hue fast karunga...Saath bane rahiye.]