Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 17 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 119

हाँ निशा? सब कुछ ठीक तो है न?

एक दर के साथ अतुल ने निशा को फ़ोन में पूछा.

दूसरी तरफ से निशा कुछ कहती है.

अतुल:- रुको मई अभी आता हूँ.

ा. डैड:- तू कही नहीं जाएगा?

सख्त आवाज के साथ अतुल को आदेश मिला.

अतुल:- (पापा की आँखों में देख फ़ोन में) 2 मिनट में पहुँचता हूँ.

फिर इतना कह कर अतुल वह से जाने लगा.

गौरव:- अब्ब तोह आपको भी आँखें दिखाने लगा है.

अतुल की कानो तक भी ये बात पहुँच जाता है.

अतुल:- तू बस अपना उल्टा गिनती सुरु kar...Iss बार तुझे मुझसे कोई नहीं bachayega...Papa भी नहीं.

अतुल ने काफी गुस्से में kaha...Lekin वो वह से निकल gaya...Ye वक्त गुस्सा दिखाने का नहीं हालात को सम्हालने का था.

न. डैड:- आओ Atul...Tumhara hi इंतजार हो रहा था?

अतुल:- ये अब क्या हो रहा है अंकल?

न. डैड:- यही तोह मई तुमसे पूछना चाहता हूँ.

अतुल:- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Achanak से...

न. डैड:- तुम्हारे पापा और भैया ने कुछ नहीं बताया तुम्हे.

अतुल:- उनकी तरफ से मई माफ़ी मांगता hun...Aur आपको यकीं दिलाता हूँ आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा.

अतुल डरते डरते bola...Kisi तरह उससे निशा की पापा को मनाना था.

न. डैड:- और कितनी बार यकीं दिलाओगे?

एक गुस्सा था निशा की पापा की आवाज mein...Jawaab में अतुल चुप hi raha...Kya जवाब देता?

न. डैड:- पिछली बार भी यही कहा था tumne...Apne घर वालों को ले कर भी aaye...Lekin अब्ब क्या हुआ? एकदम से उन्होंने अपना रंग बदल लिया.

एक नजर गुस्से से अतुल को देखते हुए.

न. डैड:- उनका हमेशा से यही hai...Chhoti छोटी बातों में लड़ना और अपने जिद्द में ऐड jaana...Tum दोनों के प्यार के खातिर मान गया था मई इस रिश्ते के लिए ये सोच कर की वो लोग भी तुम्हारे खातिर बदल jaayenge...Suru में लगा भी था की वो बदल गए hai...Lekin अचानक से...

इतना कह कर वो रुक gaye...Gusse से चेहरा पूरा लाल हो चूका tha...Atul को समझ में नहीं आ रहा था की क्या कहे? पास में बैठी निशा भी काफी दर गयी थी.

अतुल:- अंकल आप एक बार भरोषा कर लीजिये....

न. डैड:- भरोषा करता hun...Issi लिए निशा का हाथ तुम्हारे हाथ में देने का फैसला किया था.

तुम्हारे बारे में काफी बातें सुना hai...Lekin किसी भी बात पर यकीं नहीं kiya...Jaanta हु मई तुम कैसे ho...Bharosha तुम पर नहीं तुम्हारे परिवार पर नहीं कर सकता.

अतुल:- एक बार और कोशिश करता hun...Mujhe यकीं है वो मान जाएंगे.

न. डैड:- छोटे बच्चे है क्या वो? जो तुम दो चॉकलेट्स डोज और वो मान jaayenge...Acche से जानता हूँ unhein...Tum भी जानते हो.

इस बार अतुल चुप raha...Kuch जवाब नहीं था उसके पास.

न. डैड:- बीटा तुम्हे बुरा लग सकता hai...Lekin अब्ब और देर करना सही नहीं hoga...Behtar यही होगा तुम इस रिश्ते को भूल जाओ.

कठोर हो कर इस बार निशा की पापा ने फैसला liya...Atul और निशा बुरी तरह से चौंक gaye...Unhe उम्मीद नहीं था की ये फैसला इतना जल्द वो ले लेंगे.

अतुल:- लेकिन...

न. डैड:- मई उस घर में अपनी बेटी को नहीं भेज सकता जहा उससे अपनाने वाला कोई नहीं हो.

अतुल:- लेकिन मई हूँ naa...Mere रहते निशा के साथ कुछ गलत नहीं हो सकता.

न. डैड:- तुम अपना घरवालों को छोड़ सकते हो?

इस सवाल से अतुल चौंक गया tha...Wo कुछ सोच hi रहा था की.

न. डैड:- झूठ बिलकुल मत बोलना.

अतुल कुछ बोल नहीं पाया.

न. डैड:- अभी तुम्हे पता नहीं है फॅमिली चलना इतना भी आसान काम नहीं जितना तुम सोचते ho...Vakt की kami...Paiso की maang...Ghar वालों के बिच मन mutaaw...Sab के अपने अपने अपने iccha...Kaam का tension...Kuch पता hi नहीं है.

अभी जो बड़े बड़े बातें कर रहे हो naa...Ye करूँगा वो karunga...Jald hi पता चल जाएगा एक्सपेक्टेशन और रियलिटी के बिच जमीन आसमान का fark...Aur ऐसे में सुरूवर होगा दोनों के बिच मन mutaaw...Ek दूसरे से मन भर जाएगा और छोटी छोटी बातो में लड़ाई.

ऐसे में जरुरत होते है परिवार ke...Wo ऐसे माहौल बनाते है की झगड़ा ख़त्म हो और कोई परेशानी ना rahe...Kuch इस तरीके से परिवार को ले कर चलेंगे की सब कुछ ठीक रहे और खुशियां rahe...Lekin क्या तुम्हारे परिवार में ऐसा संभव है?

उनका तोह पहला hi कोशिश रहेगा निशा को तुम्हारे लाइफ से निकाल फेंकने ki...Aur तुम भी पत्नी और परिवार दोनों को एक साथ ले कर चल नहीं sakte...Nisha के साथ झगड़ा हुआ तोह धीरे धीरे उनके साथ हो जाओगे?

इतना कह कर वो चुप हो गए और अतुल को देखने lage...Atul चुप hi tha...Atul उनकी बातो से कुछ हद्द तक सहमत था लेकिन उससे खुद पर भी भरोषा था की वो ऐसे हालात आने hi नहीं देगा.

न. डैड:- तुम्हारे और निशा के बिच कभी झगड़ा हुआ है?

अतुल:- हाँ एक baar...Lekin सब कुछ ठीक हो गया.

न. डैड:- तोह क्या गारंटी है की आगे नहीं होगा? जब पहले छोटी सी बात पर झगड़ा आ सकता है तोह आगे? आगे तोह पहाड़ जैसी बड़ी चुनौती होगा?

अतुल कुछ बोलने hi वाला था की.

न. डैड:- जानता hun...Tum क्या कहना चाहते ho...Apni प्यार की ताकत bataaoge...Mujhe भरोषा दिलाने की कोशिश करोगे.

करता हूँ तुम पर bharosha...Lekin तुम्हारे परिवार पर नहीं.

एक टिपिकल बाप की तरह मुझे भी अपनी बेटी की खुशियां chahiye...Uska अच्छा सा ससुराल ho...Usse प्यार करने और उसको समझने वाला पति हो और थोड़ा बहुत पैसे हो जिससे जिंदगी हंसी ख़ुशी बीत सके.

लेकिन ससुराल hi सही नहीं है तोह क्या कर सकता हूँ? ससुराल वाले भी ऐसे है की इस शादी को रोकने के लिए साजिश करते hai...Jhuthi झूठी अफवाह फैला कर लड़ते झगड़ते hai...Unhe अपने बेटे का ख़ुशी से मतलब नहीं तोह बहु से क्या होगा?

फिर निशा की पापा अतुल को देखने lage...Usse कुछ ना बोलता देख.

न. डैड:- चलो एक मौका देता hun...Unhe मनाओ निशा को अपनाने के liye...Khushi के साथ.

अगर मुझे इस बार फिर उन् पर शक हुआ तो समझ लेना?

फिर अतुल उठता है और निशा को देखता hai...Wo काफी दरी हुई thi...Atul आँखों से hi भरोषा दिलाता है की वो सब कुछ ठीक कर देगा.

अतुल:- उन्हें जरूर मनाऊंगा अंकल.

उसने निशा की पापा की आँखों में देख कर तोह कह diya...Lekin इस बार खुद उसकी बातों में वह कॉन्फिडेंस नहीं था.

फिर एक आखिरी कोशिश करने निकल गया अतुल अपने घर.

[Note:- Friends flashback 3 ya 4 update tak hi hai abb...Waise toh 10 updates lag jaate...Lekin aap sab ki demand ko sochte hue fast karunga...Saath bane rahiye.]
 
अपडेट 120

अब्ब हम क्या करेंगे?

एक डर्टी हुई आवाज में निशा boli...Paas hi बैठा अतुल उदास और निराश था.

निशा:- तुम इतना चुप क्यों हो?

अतुल:- कर भी क्या सकता hun...Jab अपने hi साथ नहीं दे रहे है.

(एक लम्बा सांस ले कर) थक गया हूँ mai...Maan hi नहीं रहे hai...Yaa फिर मानना hi नहीं चाहते hai...Papa तोह अपने hi ईगो में है की तुम्हारे पापा को कमीना गौरव से माफ़ी माँगना चाहिए.

और तुम्हारे पापा है की मेरे पापा के माने बगैर कुछ सुन्ना hi नहीं चाहते.

निशा:- तोह अब्ब क्या करेंगे?

निशा की आवाज में दर tha...Atul भी चुप hi raha...Dono के शकल में दर का साया साफ़ दिख रहा था.

अतुल:- एक आईडिया है?

अतुल ने कह तो दिया था लेकिन खुद सोच में पद गया की निशा मानेगी या नहीं.

निशा:- क्या?

अतुल:- चलो भाग चलते हैं.

निशा कुछ देर तक तोह अतुल को हैरानी से देखती रही और फिर.

निशा:- तुम पागल तो नहीं हो गए?

अतुल:- तोह क्या कर सकते है? उन्हें हमारी कोई मतलब नहीं तोह हम क्यों रखे?

निशा:- ये तुम कैसी बहकी बहकी बाग़ कर रहे हो? ये पॉसिबल नहीं है.

अतुल:- Paagal...Haan शायद हो रहा hun...Tumse बिछड़ने की दर mein...Abb मेरे पास कोई रास्ता नहीं hai...Kya करना है कुछ पता nahi...Agar तुम नहीं मिली तोह सच में पागल हो जाऊँगा.

अतुल का दर भी बढ़ता hi जा रहा tha...Usse अपना अंधकार भविस्य अभी से दिखने लगा tha...Jisse आगे उसने कभी देखा तक नहीं tha...Abb तोह वो ये सोचते हुए भी कांपने लगा था.

निशा:- लेकिन भाग कैसे सकते है? ये उनके विश्वास के साथ अन्याय hoga...Aaj तक पापा ने मेरी हर ख्वाहिश माना hai...Mere लिए तुम्हे पहली बार में hi अपना liya..Ek और मौका भी दिया tumhe...Aaj भी तुमसे मिलने देते है इसकी वजह भी उनका विश्वास है.

तुम hi बताओ मई कैसे भाग सकती हूँ? उनका विश्वाश का क्या होगा? उनका प्यार का?

अतुल:- जब तुम मेरे साथ खुश रहोगी तोह उन्हें भी एक दिन समझ में आ जाएगा हमारा प्यार.

अतुल निशा को समझाने की हर एक कोशिश कर रहा था लेकिन निशा समझना hi नहीं चाहती थी.

अतुल:- तुम मुझसे प्यार तोह करती हो ना?

निशा:- Bahut...Issi लिए अभी भी विश्वाश है की तुम कुछ रास्ता जरूर निकाल loge...Please Atul...Nikaal लेना.

एहि आखिरी आवाज था जो अतुल की कानो में pada...Fir देखते hi देखते निशा अतुल की आँखों से ओझल हो गयी.

अतुल वही खड़ा खुद को हारा हुआ महसूस कर रहा tha...Khud की लाचारी पर बहुत गुस्सा आ रहा tha...Lekin कुछ कर भी नहीं पा रहा था निशा को खुद से दूर जाता हुआ देखने के alawa...Jindagi के एक ऐसे मोड़ पर वो खड़ा था जहा से उससे सिर्फ अपना हार hi दिख रहा था.

न. डैड:- मुझे अतुल पर अब्ब शक होने लगा है?

निशा के घर आते hi उन्होंने कहा.

न. डैड:- कही तुम्हे भगा कर ले जाने का तोह नहीं सोच रहा है?

निशा:- नहीं पापा.

डर्टी हुई निशा ने कहा.

न. डैड:- अगर भागने का सोचा तोह भी तुम आज़ाद हो.

अपने पापा की ये बात सुन निशा बिलकुल हैरान हो गयी.

न. डैड:- मई कोई विलन नहीं बनूँगा तुम दोनों के liye...Lekin ये बात भी याद रखना की उसके बाद तुम्हारा और मेरा रिश्ता हमेअह के लिए ख़त्म.

ये काफी था निशा की एक पल की ख़ुशी को दर में बदलने के लिए.

न. डैड:- फिर एक बाप का अपनी बेटी पर से विश्वाश उठ jaayega...Wo पहली बार सोचने पर मजबूर होगा की काश उसके घर में बेटी की जगह बामेता पैदा होता.

कभी तुझे हमने बोझ नहीं maana...Utne hi प्यार से तुझे पाला है जैसे एक बाप अपने बच्चे को पालता hai...Teri हर एक ख्वाहिश पूरी किया hai...Hamesha विश्वाश किया है की तू हमारे सर को गर्व से ऊँचा करेगी.

बीटा या फिर beti...Unn पर hi परिवार का इज़्ज़त टिका रहता hai...Abb हमारा इज़्ज़त तेरे हाथ में है.

अगर फिर भी तू अतुल के साथ hi जाना चाहती है तोह मई कुछ नहीं कर सकता hun...Hamesha प्यार से पाला hai...Itna हिम्मत नहीं आएगा की अब्ब तेरे hi खिलाफ करने का सोचु.

पापा की बात सुनने के बाद अतुल की दो चार बात अब्ब निशा की दिमाग से पूरी तरह निकल gaya...Abb बस वो दुआ hi कर सकती थी की शायद अतुल अब्ब भी कुछ चमत्कार कर दे.

न. डैड:- मैंने ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया है जो जान बुझ कर तुझे तकलीफ de...Shayad तुझे अभी गलत लगे लेकिन धीरे धीरे तू समझ jaayegi...Mujhe अतुल से कोई परेशानी नहीं है बस उसके परिवार से है.

और बिना अतुल की परिवार के माने मई कभी तेरी शादी अतुल से नहीं करवाऊंगा.

[Flashback abb 2 updates aur.]
 
अपडेट 121

एक पार्क में हताश निराश हो कर अतुल चक्कर लगा रहा tha...Kabhi वो गुस्सा होता तोह कभी दिल में एक असहनीय दर्द उठता.

निशा की इंतजार में 15 मिनट से वो पार्क का इधर उधर चक्कर लगा रहा था.

अतुल:- आ गयी तुम.

थोड़ा गुस्सा के साथ अतुल ने पूछा.

अतुल:- एनीवे कोंग्रटुलतिओन्स.

बे मन से अतुल ने kaha...Nisha बस अतुल को देखती hi रही.

निशा:- ये तुम क्या कह रहे हो?

अतुल:- तोह क्या कहु? मुझे छोड़ कर मत jaao...Mujhse शादी कर लो वर्ण मई मर jaaunga...Yeh कहु? यह तोह पहले भी कह चूका हूँ.

अब्ब तोह तुम्हारी शादी होने जा रही है वो भी रवि se...Congratulations तोह बनता hi hai...Congrats वन्स अगेन.

अतुल की आवाज में गुस्सा के साथ साथ कड़वाहट था.

निशा कुछ नहीं boli...Wo भी इस बात से बहुत दुखी thi...Iss बार अतुल को भी निशा का दर्द दीखता है.

अतुल:- मई भी naa...Jis चेहरे में ख़ुशी देखना चाहता हु उसी को दर्द दे रहा हूँ.

अतुल की आवाज में गुस्सा के साथ साथ दर्द भी tha...Gussa खुद पर और दर्द निशा के लिए.

निशा:- प्लीज सम्भालो अतुल खुद को.

अतुल:- कैसे सँभालु? इतना प्यार करता हूँ की तुमसे बिछड़ने की सोच भी नहीं sakta...Sambhaal नहीं पा रहा हूँ.

निशा भी कुछ नहीं bolti...Abb दोनों के बिच एक खामोशी tha...Dono बस एक दूसरे के दर्द hi महसूस कर रहे thhe...Aur एक लाचारी bhi...Kuch ना कर पाने की.

अतुल:- एक बात पुछु?

निशा:- हाँ.

अतुल:- तुम्हारे पापा खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी विद्वान समझते hai...Duniya का हर अच्छाई बुराई से वाकिफ hai...Insaan को अच्छे से समझते है.

लेकिन Ravi...Usko पहचाने में ऐसे मूर्खता क्यों कर रहे है? क्या वो उसका छल को देख नहीं सकते? क्या इतना अँधा हो गए है वो?

अतुल का हर एक लफ्ज़ में गुस्सा और नफरत tha...Usse कोई फर्क नहीं पद रहा था की निशा उसके सामने hi है और वो उसकी पापा का hi बेइज़्ज़ती कर रहा है.

निशा:- प्लीज अतुल पापा के बारे में...

अतुल:- क्यों ना कहु? उस इंसान जो मेरा जिंदगी बर्बाद कर रहा है उसके बारे में ऐसा क्यों ना bolu...Itna हक़ तो है मेरा.

निशा:- पता नहीं रवि ने क्या जादू कर दिया है.

कहते है रवि बहुत अच्छा लड़का hai...Mujhse प्यार भी करता hai...Accha ख़ासा फॅमिली hai...Mera एक बात सुन्ना नहीं चाहते.

निशा ने भी निराश हो कर कहा.

अतुल:- दिल तोह कर रहा है उन्हें इस बात सोच का सबक mile...Lekin किस कीमत पर?

Tumhaari...Bilkul भी nahi...Unka गलत होने का मतलब तुम्हारा dard...Bas यही आ कर उनका गलत साबित होने का दुआ भी नहीं कर सकता.

निशा:- तुम्हारे घर वाले नहीं मान रहे है क्या?

थोड़ी देर बार दर्द भरी आवाज से निशा ने pucha...Shayad अभी भी उम्मीद था.

अतुल:- बिलकुल nahi...Papa अपने जिद्द पर hi अड्डे hai...Andhe हो गए hai...Mera ख़ुशी तोह दीखता hi nahi...Maa और दी भी कोशिश कर रही hai...Lekin वो...

गुस्से में अतुल चुप हो गया.

और वो कमीना Gaurav...Man करता है की जान से मार दू उस कमीने को.

फिर एक बार माहॉक में खामोशी छा gaya...Dono के दर्द का khaamoshi...Abb तोह अतुल की आँखों से आंसू भी बहने लगा था.

निशा:- रू क्यों रहे हो?

अतुल:- अभी से हमारा भविस्य दिख रहा hai...Haar गया हु mai...Kuch नहीं कर पाया और ना hi कुछ कर सकता हूँ.

निशा भी कुछ नहीं boli...Kya बोलती और क्या हिम्मत देती अतुल को? जब वो खुद अतुल से सहमत थी.

अतुल:- कभी सोचा नहीं था सपने भी सच होते hai...Aur मेरा बदकिस्मती है की जिंदगी के सबसे दर्दनाक सपना सच हो गया.

निशा:- अतुल प्लीज तुम खुद को sambhaalo...Tumhe देख कर दर लगने लगा hai...Kahi तुम कुछ उल्टा सीधा...

अतुल निशा की होंठ पर ऊँगली रख देता है.

अतुल:- पागल लग रहा हूँ ना मई abhi...Haan पागल hi तोह hu...Tumhare प्यार में paagal...Tumhe खोने की हिम्मत नहीं और इसी दर में कर रहा हु ये पागलपन.

लेकिन डरो mat...Tumhara प्यार तुम्हारा आशिक़ हु mai...Koi ऐसा कदम नहीं उठाऊंगा जो तुम्हे शर्मिंदा कर दे मुझसे प्यार करने के लिए.

निशा को समझ में नहीं आ रहा था की क्या kahe...Atul की दीवानापन पर गर्व होना चाहिए या फिर हकीकत पर रोना चाहिए.

अतुल:- निशा तुम खुश तू हो ना इस शादी के लिए?

निशा:- तुम तोह जानते हो ना?

अतुल:- Haan...Mai भी क्या पूछ रहा hun...Par तुम खुश रहना sikho...Jindagi भर तोह ऐसे दुखी रह नहीं sakti...Aur मई तुम्हे ऐसा देखना भी नहीं चाहता.

निशा:- ये तुम???

अतुल:- सच कह रहा hun...Ye तुम भी जानती हो की अब्ब शायद hi कुछ बात bane...Aise me...Khushi अब्ब तुम्हे दूसरी चीज में ढूंढ लेना chahiye...Mai भी तोह यही चाहता हु तुम हमेशा hi खुश raho...Yahi दुआ करूँगा मई.

अतुल की बात पर हैरानी होने लगा था निशा ko...Aawaj में दर्द hi दर्द था लेकिन दुआ सच tha...Shayad अब्ब अतुल भी हार मान चूका था.

निशा:- और तुम?

अतुल:- Mai...Kuch सोचस नहीं अभी tak...Mera जिंदगी और सपने तुम तक hi सिमित tha...Abhi कुछ सोचा नहीं.

निशा:- तुम भी...

अतुल:- 1 मिनट...1 मिनट.

बिच में hi रोक कर अतुल ने कहा.

अतुल:- तुम्हे मेरा कसम है की मुझे कोई कसम नहीं डौगी.

और जहा तक मेरा शादी की बात hai...(Gale का रुद्राक्ष को छूटे हुए) कसम भोले बाबा ki...Tumhare अलावा मैंने किसी के बारे में सोचा hi नहीं और ना hi सोचूंगा.

निशा:- ये तुमने क्या कर दिया?

अतुल:- तुमने कहा तुम अपने पापा की बात मानोगी और उनके खिलाफ नहीं jaaogi...Maine तुम्हारा इस बात का सम्मान किया और मान liya....Please तुम भी मेरी ये बात मान लो.

निशा:- लेकिन kaise...Tumhe दर्द में ऐसे छोड़ दू.

अतुल:- शादी के अलावा भी बहुत काम hai...Jisse खुश रह सकते hai...Aur शादी से तोह मेरे घरवालों को भी मतलब नहीं.

वैसे भी डॉक्टर hun...Apne काम भले hi ना aaun...Kisi और के आ जाऊँगा.

एंड लव इस नॉट एवरीथिंग...तेरे अरे लॉट्स ऑफ़ थिंग व्हिच ी विल एक्स्प्लोर.

मेरी फ़िक्र मत karo...Koshish करूँगा खुश रहने ki...Bas तुम्हे भुला नहीं पाऊंगा और किसी और के बारे में शादी नहीं कर पाऊंगा.

निशा:- (इन हेर मंद) बूत फॉर में लव इस एवरीथिंग...हैप्पीनेस, सडनेस एंड आल थे emotions...Majburi है की तुम्हारे साथ नहीं रह सकती.

अतुल:- आज तक तुम्हे कसम दिया tha...Saath निभाने ma...Hamesha प्यार करने ka...Tumhe खुश रखने का और साथ निभाने ka...Abb कसम देता हु तुम आगे खुश rahogi...Mere लिए अपने लिए मेरे बिना.

निशा:- तुम भी खुश रहना.

अतुल:- जरूर.

झूठी मुस्कान के साथ अतुल ने kaha...Shayad आखिरी के पल में वो निशा को ख़ुशी के साथ बीड़ा करना चाहता था.

आखिरी के हर एक बात अतुल अपने दिल पर पत्थर रख के बोल रहा tha...Na जाने कहा से इतना हिम्मत आ गया था usme...Shayad Nisha...Uski khushi...Uske ख़ुशी के लिए इतना कुछ बोल दिया था उसने.

अब्ब दोनों के बिच फिर से ख़ामोशी छा जाता hai...Aakhir के pal...Dono बस एक दूसरे की मौजूदगी को महसूस कर रहे thhe...Shayad hi ये पल उनकी जिंदगी में फिर से कभी aaye...Apne जिंदगी के आखरी पल जी रहे थे दोनों.

दिल तो चाहता था की वक्त hi रुक jaaye...Dono बस एक दूसरे को hi देखते रहे और कभी अलग hi ना ho...Lekin ये हकीकत था जो उनकी चाहत की दुनिया से बिलकुल अलग था. :(

वक्त अपने रफ़्तार से चलता गया और दोनों के आखिरी पल भी आ hi गया.

निशा:- अच्छा Atul...Chalti हूँ abb...Raat होने लगी है.

इस बार निशा अपना दर्द रोक नहीं पायी.

अतुल:- हम्म ठीक hai...Aur मेरा कसम याद रखना.

निशा एक नजर अतुल को अच्छे से देख लेती है और उसका चेहरा अपने दिमाग में कैद कर दूसरी तरफ मुद जाती hai...Aur वह से दौड़ कर जाने लगती है.

अतुल भी निशा को तब तक देखता रहा जब तक वो उसके आँखों से ओझल ना हो gayi...Ek लम्हा को कैद कर लिया उसने bhi...Yaado के जरिये अपने जीने की सहारा.

अतुल:- (इन हिज मंद) तुम हमेशा याद आओगी.

निशा:- (इन हेर मंद) खुद को संभल लेना Atul...Mai भले hi तुम्हारे पास नहीं hun...Mera प्यार हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा.

रात में भी दोनों एक दूसरे के करीब हो कर भी अलग thhe...Koi बात नहीं हुआ.

उनका छत जो हमेशा दोनों की ख़ुशी और प्यार की गवाह था आज वो शांत tha...Naa जाने कितने हसीं और प्यार भरे पल वह बीते thhe...Lekin अब्ब वो हमेशा के लिए शांत tha...Tanhaai में बदल गया tha...Hamesha के लिए.

आज फिर से एक प्रेमी जोड़ी अलग हो गए बाकी की जोड़ी की tarah...Ek मज़बूरी के साथ.

फिर इसी तरह दोनों हमेशा के लिए अलग हो gaye...Aaj अगर मुलाक़ात होता है तोह सिर्फ एक दूसरे के याद mein...Ek प्यार के saath...Adhuri मोहब्बत के साथ. :(

[Update 122 will be last update of flashback.]
 
अपडेट 122

ये सब क्या हो रहा है यार? कुछ दिनों में निशा की शादी होने वाली है?

अजय बहुत गुस्से में tha...Atul कुछ नहीं बोलै.

अजय:- तू कुछ सुन भी रहा है या नहीं?

अतुल:- हाँ सुन रहा हूँ तेरा बकवास तभी से.

इर्रिटेट हो कर अतुल ने जवाब दिया.

अजय:- तो फिर ऐसे चुप क्यों है? कुछ क्यों नहीं कर रहा है? ऐसे कैसे निशा से अलग हो सकता है?

अजय का गुस्सा था की बढ़ता hi जा रहा था.

अतुल:- तुझे क्या लगता hai...Maine कोशिश नहीं किया hai...Ek महीने से पागलो की तरह इधर उधर भटक रहा hu...Kabhi अपने ghar...Kabhi निशा के ghar...Papa और निस्बंहा की डैड को मानाने की हर एक कोशिश किया hai...Lekin कोई मन्ना hi नहीं चाहते.

थक हार कर मंदिर भी गया hu...Ek आखिरी उम्मीद के saath...Shayad उपरवाले को hi तरस आ jaaye...Lekin पता नहीं किस जन्म में इतना पाप कर दिया की सब कुछ गलत hi हो रहा है.

शायद गलती भी मेरा hi tha...Gaurav का वक्त रहते कुछ नहीं किया और पापा का विश्वास कवही जीत नहीं पाया.

और आखिरी koshish...Nisha को भगाने ki...Lekin उसने भी मन कर diya...Ek बार नहीं सौ (100) बार कोशिश kiya...Lekin वो नहीं maani...Shayad वो अपनी जगह सही भी थी और मई galat...Lekin दिल में जो दर्द उठ रहा है ना वो सही गलत कुछ देख नहीं रहा था.

हर एक कोशिश किया लेकिन फिर भी कुछ नहीं कर paaya...Aur अभी थक हार कर तेरे साथ हूँ.

अजय:- तोह फिर मुझे अपना रास्ता अपनाना पड़ेगा.

अतुल:- तेरा रास्ता?

अजय:- जाके सीधे निशा की पापा को धमकी देता hu...Chal साथ चलते hai...Dekhta हु कैसे नहीं मानते है वो?

अजय कुछ अलग hi जोश में था.

अतुल:- पागल है kya...Wo नहीं maanenge...Itna तो जानता हूँ unhe...Mar जाएंगे लेकिन अपना जिद्द नहीं छोड़ेंगे.

और ऐसे में निशा मुझसे नफरत करने लगेगी की मई उसकी पापा को धमकाने गया.

अजय:- तो फिर? तेरे पापा?

इस बाद अजय थोड़ा डरते हुए bola...Atul के सामने hi उसके पापा के बारे में bolna...Itna ाशन भी नहीं था.

अतुल:- कोशिश karle...Lekin वो भी अपने जिद्द नहीं छोड़ेंगे.

बिना किसी भाव के अतुल ने जवाब दिया.

अजय भी अब्ब खुद को लाचार महसूस करने लगा.

अजय:- तो फिर क्या करू?

अतुल:- कुछ नहीं.

अतुल बस सर झुकाये बैठा raha...Ajay सिर्फ अतुल को देखता रहा.

अजय अपने यादो की दुनिया में चला गया और सोचने लगा की कैसे अतुल ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश करके उसके और अंजलि की शादी करवाया tha...Kaise उसने दोनों के परिवार वालों को समझाया था.

और आज का Atul...Apne hi परिवार वालों को मानाने में ना कामयाब tha...Aur गुस्सा तो अजय को खुद पर आ रहा था की वो अतुल के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहा था.

आज वो भी मजबूर हो गया था.

अजय:- एक बार तरय करते है ना यार.

अब्ब अजय की आवाज में मज़बूरी साफ़ दिख रहा था.

अतुल:- जोश अपनी जगह है और हकीकत अपनी jagah...Har कोशिश कर चूका hu...Abb कुछ नहीं हो सकता.

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अजय:- आगे क्या करने का सोचा है?

अब्ब अजय ने भी हार मान liya...Usse दर था की अतुल कही कोई गलत कदम ना उठा ले.

अतुल:- बस यार यहाँ से चला जाना चाहता hu...Hamesha हमेशा के लिए. इस जगह से दूर इन् लोगों से दूर.

अतुल की आवाज में ए.बी.ए. नफरत tha...Usne कहना जारी रखा.

अतुल:- निशा की शादी अपनी आँखों से देख नहीं paaunga...Har पल मरता जा रहा hun...Saha नहीं जा रहा है ये दर्द.

एक अनजान गांव में अपना पोस्टिंग करवाया hai...Baaki की जिंदगी वही jiyunga...Waise भी अब्ब जिंदगी का कोई भरोषा नहीं है.

अजय:- ऐसे कैसे? अपना फॅमिली और करियर?

अतुल:- कौनसा फॅमिली और कौनसा करियर?

वो family...Jisne मुझे जीते जी मार diya...Mera पापा जिन्होंने मुझे अपना बीटा कभी समझा hi nahi...Aur मेरा भाई जो हमेशा मुझे दुश्मन मानता आया है.

सिर्फ माँ और दी hi है मेरा शुभ chintak...Lekin जब भी पापा और भाई को देखता हूँ तो दिल और दिमाग में नफरत छा जाती hai...Unke साथ नहीं रह sakta...Unke शक्ल से hi नफरत हो गया है.

बस माँ और दी की कांटेक्ट में rahunga...Phone के jariye...Kabhi जरुरत पड़ा तो मिल भी लूंगा.

और Career...Kya फायदा ऐसे करियर की जब जीने की कोई वजह है hi नहीं.

अजय:- ऐसे कैसे सब कुछ छोड़ कर चला जाएगा?

अतुल:- जाने का मन किस्से है? लेकिन मज़बूरी भी कोई चीज होता है.

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अजय को भी अब्ब समझ में नहीं आ रहा था.

अतुल:- अच्छा दोस्त अपना ख्याल रखना.

इतना कह कर अतुल उठ गया.

अजय:- कुछ देर और बैठ.

अतुल:- नहीं yaar...Man नहीं कर रहा है.

अजय:- कब जा रहा है?

अतुल:- आज शाम ko...Tere साथ कांटेक्ट में रहूँगा.

अजय को ये सब देख अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन अतुल को रोक भी नहीं पा रहा tha...Aakhir क्या कह कर रोकता?

वो बस अतुल को जाते देखता raha...Dono के दोस्ती का हर पल अजय की दिमाग में घूमने laga...Gussa बहुत आ रहा था उससे खुद पर की वो अतुल का कुछ हेल्प नहीं कर पा रहा tha...Wo भी आज अतुल की तरह hi मजबूर था.

बस वो भी लाचारी से अतुल को जाते हुए देखता रहा.

ा. डैड:- आओ Atul...Bilkul सही वक्त पर आये ho...Tumhare रिश्ते की hi बात चल रहा था.

अतुल ने सामने देखा तो प्रीती और उसकी फॅमिली tha...Lekin अतुल ने बिना कोई परवाह किये.

अतुल:- Maa...Aaj आखिरी चाय बना दीजिये अपने हाथ ka...Pata नहीं ये मौका फिर कब मिले.

अतुल की आँखों में आंसू की कुछ बून्द आ gaye...Wo निशा के साथ साथ माँ, दी और अजय को भी मिस करने वाला था.

निधि:- ये क्या कह रहा है तू?

अतुल:- प्लीज रोकना मत di...Jaa रहा हु अब्ब हमेशा के liye...Ek नयी जिंदगी के और.

अतुल की ये बात सभी के लिए हैरानी का tha...Lekin सबसे बुरा माँ और दी को लगा.

ा. माँ:- कहा जा रहा है तू? और कैसी बात कर रहा है?

अतुल:- इस बार मत रोकिये Maa...Iss जगह और घर से काफी दूर जा रहा hu...Raha नहीं जाएगा इस घर में जहा अपने hi दुश्मन हो.

अतुल ये कहते कहते काफी टूट गया था.

अतुल:- लेकिन आप दोनों से हमेशा कांटेक्ट में rahunga...Aap दोनों hi तो है जिससे मई अब्ब अपना कह सकता हूँ.

फिर किसी तरह अतुल ने दोनों को मना hi liya...Dono मानने के लिए तैयार तो नहीं थे लेकिन अतुल की जिद्द और दर्द के सामने दोनों को मानना hi pada...Lekin उनके लिए ये किसी सदमा से काम नहीं था.

फिर अतुल अपना बैग पैक करके निचे आ जाता है और चाय पीने लगता है.

बहुत मुश्किल वक्त था अतुल के liye...Dil भारी होता जा रहा था और आँखों से आंसू की बून्द टपकने लगा था.

जब वो निकलने hi वाला था तब

निधि:- वक्त पर फ़ोन करते रहना.

ा. माँ:- जहा भी तू रहे तू हमेशा खुश रहना.

भारी मन से दोनों ने कहा.

अब्ब अतुल निकल hi रहा था की.

प. डैड:- ये सब क्या हो रहा है?

ये बात सुनते hi गौरव अतुल के रास्ते के सामने आ जाता है.

अतुल:- हट जा सामने से.

गौरव:- मई भी देखता हूँ तू कैसे जाता है.

अतुल अब्ब कुछ कहता nahi...Ek पंच सीधा उसके नाक पर मार देता hai...Jindagi भर का नफरत आज आग उगलने को तैयार था.

गौरव 2 मीटर दूर जाके रुका.

अतुल उसकी तरफ बढ़ने hi वाला था की उसके पापा बिच में आ गए.

अतुल:- आप सामने से हैट jaaiye...Warna ये हाथ आप पर ना उठ जाये?

अतुल ने गुस्से में kaha...Baat कही से भी झूठा नहीं लग रहा tha...Aur ये साबुत था की वो अपने पापा से कितना नफरत करने लगा था.

पापा भी रास्ते से हैट गए हैरानी के saath...Aakhir कौन बाप अपने hi औलाद से ऐसी बात सुन्न सकता है? ये गहरा सदमा था उनके लिए.

अतुल अब्ब गौरव पर बरस पड़ता hai...Bina देखे सर और छाती पर मुक्कों की अँधा धुन बरसात कर देता है.

गौरव भी खुद की बचाओ करने की हालत में नहीं tha...Usse बचाने के लिए अमित (Preeti's बरोथेर) आया लेकिन उसका भी वही हाल हुआ जो गौरव का हो रहा था.

अतुल गौरव को आज जान से hi मार देता अगर माँ बिच में नहीं aati...Ek बार फिर अतुल मजबूर हो गया.

ा. माँ:- तुझे मेरी kasam!!!Chhod दे इससे.

डरते हुए अतुल की माँ बोली तब अतुल को भी छोड़ना पड़ा.

अतुल:- (गुस्सा और दर्द में भी हँसते हुए) माँ आपका यही प्यार और ममता hi है जिसने आज इस कमीने को ऐसा बना diya...Dekhna एक din...Aap बहुत pachtayengi...Beta गलत है ये जान्ने के बावजूद आपने कुछ ंशी kiya...Ye झूठा उम्मीद की सब कुछ ठीक हो जाएगा और सभी परिवार एक साथ rahenge...Aapki इसी ग़लतफहमी मुझे सभी से अलग कर रहा है और आगे ना जाने क्या होगा.

अतुल से गुस्सा में अब्ब और कुछ कहा भी नहीं जा रहा tha...Wo वह से जाने hi वाला था की.

ा. माँ:- ये बेहोश हो गया है.

डरते हुए वो boli...Sabhi आ कर गौरव को देखने लगती hai...Sach में खून से लथपथ वो बेहोश था.

अतुल उससे बाहर से hi चेक करने के बाद.

अतुल:- Papa...Aap हमेशा नाराज थे ना मुझसे की मई डॉक्टर बनने जा रहा hun...Aaj उसे वजह से आपका सबसे पसंदीदा बीटा मरने से बच रहा hai...Isse एपिडरल हेमरेज हुआ hai...Sir की सबसे कमजोर हड्डी यानी की टेम्पोरल बोन ऑफ़ पटरिओं रीजन में चोट लगा hai...Aur मिडिल मैनिंजाल आर्टरी फटने की वजह से ये हालत hai...Kisi न्यूरोसर्जन को दिखा dijiye...Bach जाएगा.

इतना कह कर अतुल वह से निकल गया.

एक बार पीछे मुद कर अपने घर को देखा और फिर निशा की घर को.

अच्छे से ले कर हर बुरे याद एक बार फिर दिमाग में घूमने laga...Lekin आखिर में थक हार कर रट दिल के साथ वो वह से निकल gaya...Ek नयी सफर में.

और यही से सुरुवात होता है सफर डॉ. अतुल ki...Jiske भविस्य में अभी भी बहुत कुछ होना बाकी था.

फ्लैशबैक एंड्स
 
अपडेट 123

इतनी जल्दी लौट आये!!!

श्रेया की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं raha...Atul ने जिस तरह से कहा था उससे तो लग रहा था की 1 महीने से पहले अतुल वापस नहीं aayega...Bas अभी 2 दिन हुआ था की अतुल वापस लौट आया.

अतुल:- और घुट नहीं सकता खुद mai...Socha तुम्हे सच सच बता दू.

अतुल अभी भी खुद में hi उलझा हुआ था.

श्रेया:- कैसा सच?

श्रेया के लिए एक नयी हैरानी की बात था ये.

श्रेया:- पापा कुछ गलत बोल गए क्या?

अतुल:- नहीं.

श्रेया:- तो फिर.

अतुल:- अभी यहाँ nahi...Shaam में मिलना तालाब के पास.

अतुल ने आस पास आते जाते लोगो को देख कर kaha...Wo सभी के सामने ये बातें कह नहीं पा रहा था.

श्रेया का हैरानी भी बढ़ता जा रहा tha...Atul की आँखों में एक अजीब सा उलझन दिख रहा था जैसे वो किसी गहरी सोच में ho...Itna तो वो समझ गयी की कुछ बहुत जरुरी बातें है.

श्रेया ने बस हां में सर हिला दिया.

ात इवनिंग.

श्रेया:- अब्ब तो bataao...Kya बात है?

शाम के 6 बजे दोनों तालाब के पास अकेले thhe...Shreya को अतुल की बातें जाननी थी तो अतुल अभी भी उलझन में था की अपने दिल की बात कैसे hai...Usse पता था की श्रेया का रिएक्शन क्या होने वाला hai...Thoda दर भी रहा था वो.

इसी दर में वो इधर उधर टहल रहा था.

श्रेया:- बता भी दो.

श्रेया से और रहा नहीं जा रहा था.

अतुल भी अब्ब अपनी आँखें बंद कर लेता है और डरते हुए कहता है.

अतुल:- प्लीज Shreya...Mujhse इतना प्यार मत karo...Bardaast नहीं कर पा रहा हु.

अतुल ने डरते हुए आँखें खोला और श्रेया को dekha...Shreya भी हैरानी से अतुल को hi देख रही थी.

श्रेया:- व्हाट???

अतुल:- एक बार पहले भी गलती कर चूका हूँ जो निशा का प्यार दिखा nahi...Abb वही गलती दोहरा नहीं सकता तुम्हारे प्यार का नजर अंदाज़ करके तुम्हे झूठा आशा नहीं दे सकता.

श्रेया:- मई तुमसे प्यार नहीं...

अतुल:- प्लीज झूठ मत बोलो.

श्रेया इस बार चुप रही.

अतुल:- मई भी यही चाहता हूँ की तुम मुझसे प्यार ना karo...Lekin चाहने से क्या होता hai...Dil पर आखिर किसका बस चलता है?

श्रेया:- आखिर क्यों? निशा दी तो तुम्हारा पास्ट थी naa...Kabhi फ्यूचर के बारे में नहीं सोचोगे तुम?

श्रेया की इस बात का अतुल ने कोई जवाब नहीं दिया...

श्रेया:- सच कहा tumne...Pyar करती हूँ tumse...Bahut प्यार करती hun...Pata नहीं कब और कैसे तुमसे प्यार करने लगी कुछ पता hi नहीं chala...Aage भी करती रहूंगी बस एक हां के इंतजार में.

मई तुम पर कोई दवाब नहीं daalungi...Agar कभी मन बदल जाए तो आ जाना मेरे paas...Jindagi के आखिरी वक्त तक तुम्हारा इंतजार करुँगी.

जो दर था वही सच साबित हुआ अतुल के liye...Wo ये तो जानता था की श्रेया उससे प्यार करती है लेकिन इतना प्यार? अब्ब अतुल को भी दर लग रहा था.

अतुल:- प्लीज रिक्वेस्ट समझ कर मान jaao...Agar तुम इतना प्यार करोगी तो तुम्हारा गुनेहगार बन jaaunga...Aisa प्यार ठुकराने की.

प्लीज समझने की कोशिश karo...Mai तुम्हे किसी भी हाल में अपना नहीं सकता.

अतुल को अपने हालात पर बहुत गुस्सा आ रहा tha...Lekin साथ में वो मजबूर भी था.

श्रेया को ये सब देख बहुत रोना आ रहा था लेकिन रू भी नहीं पा रही थी.

श्रेया:- क्यों? निशा दी को दिया हुआ उस कसम की वजह se...Ki तुम उनके अलावा किसी और के बारे में नहीं सोचोगे?

अतुल:- बात सिर्फ उस कसम की नहीं hai...Pyar का ताकत के सामने कसम कुछ नहीं hai...Nisha तो मुझे माफ़ कर hi degi...Bhole नाथ भी माफ़ कर देंगे शायद मेरा ख़ुशी के लिए.

लेकिन वही प्यार तुमसे कर नहीं पाऊंगा और कर नहीं सकता.

आज भी निशा मेरे दिल में hai...Dil की गहराई में hai...Kabhi भुला नहीं पाऊंगा और भुला नहीं sakta...Shayad इस जन्म भी काम पद jaaye...Itna प्यार करता हु मई अपनी निशु से.

और ऐसे में तुम्हारे साथ कैसे आगे बढ़ सकता hu...Naa hi मई तैयार हु और ना hi तुम्हे वो खुशियां और प्यार दे पाऊंगा जिसकी जरुरत और उम्मीद तुम्हे अपने पति से होगी.

श्रेया चुप hi rahi...Wo कुछ बोल नहीं पा रही thi...Waise भी बोलने से कुछ होने वाला भी तो नहीं था.

अतुल:- (तो हिमसेल्फ) बहुत गुस्सा आता है खुद par...Hamesha कोशिश किया था की किसी से इतना भी ना जुड़ने ka...Lekin यहाँ तो इतना बड़ा गलती कर बैठा.

श्रेया:- तुम्हारा कोई गलती नहीं है Atul...Jab तुमसे पहली बार मिली थी या फिर जाना था तो तुमसे नफरत करती thi...Aur ये pyar...Ye चीज है hi aisi...Pata नहीं कब किस से हो जाए.

जब तुम यहाँ आये थे यहाँ एक डॉक्टर के रूप me...Tumhari आदत पर बहुत गुस्सा आता tha...Tum सभी से छुपा कर सिगरेट और दारु पीते the...Lekin मेरी नजरो से बच नहीं sake...Gussa तो बहुत आता था की एक डॉक्टर जो दुसरो को ये सब ना इस्तेमाल करने की सलाह देता है वो खुद hi इसके नशे में है.

ऊपर से तुम्हारा attitude...Tumhaara काम bolna...Aisa लगता था की तुम में बहुत ऐटिटूड है.

लेकिन धीरे धीरे तुम्हारे बारे में ख्याल बदलने laga...Insaan कैसे भी हो लेकिन डॉक्टर बहुत बढ़िया thhe...Gaanw वालो के साथ साथ मेरा भी विश्वाश जीत लिया tumne...Wo पेशेंट से बात करने का tarika...Unka तकलीफ समझना, उन्हें हौशला देना और दवाई के बारे में अच्छे से जानकारी dena...Sach में तुम्हारे रूप में बहुत अच्छे डॉक्टर को देखा maine...Aur ये बात इससे भी साबित होता है की तुम्हारे आने के बाद गांव का स्वस्थ्य में कितना बदलाव आया है.

और जब डॉक्टर नहीं सिर्फ अतुल को jaana...Toh तुम से प्यार हो gaya...Aakhir एक इंसान कैसे इतना बर्दास्त कर सकता है? इतना दर्द में हो कर भी दुसरो के लिया इतना kuch...Har वक्त हर पल मरीज के लिए तैयार रहते हो अपने हाल का परवाह किये bina...Sabse पसंद तुम्हारी ये बात लगी की तुम निशा दी से इतना प्यार करते ho...Itna कुछ होने की बावजूद.

सोचा जब तुम किसी से इतना प्यार कर सकते हो और सभी का इतना ख्याल रखते हो तो मुझसे प्यार करोगे तो मेरा कितना ख्याल रखोगे?

शायद थोड़ा स्वार्थी हो गयी hun...Par मामला प्यार का है.

अतुल:- सच कहु तोह तुम मेरी बहुत अच्छी दोस्त ho...Aisa दोस्त जो ढूंढ़ने से भी नहीं milta...Mera मुश्किल वक्त में तुमने मुझे बहुत सपोर्ट किया hai...Mai तुम्हारी इस दोस्ती का कर्ज शायद hi कभी चूका paau...Lekin प्यार? शायद नहीं कर पाऊंगा.

एक दोस्त की नाते, जब भी तुम्हे मेरा जरुरत पड़े बुला lena...Sab कुछ छोड़ कर आ jaaunga...Bahut ख़ास दोस्त हो तुम meri...Ajay और निशा के बाद.

अब्ब तक श्रेया भी समझ गयी थी की अतुल उससे कभी प्यार नहीं कर पायेगा.

श्रेया:- ठीक hai...Koi बात nahi...Tum मुझसे प्यार नहीं karte...Kabhi दवाब नहीं daalungi...Pyar जबरदस्ती नहीं हो सकता और मई ऐसा चाहती भी नहीं.

लेकिन मुझसे ये मत कहना की तुमसे प्यार ना छोड़ du...Ye तुम भी जानते हो की ऐसा हो नहीं सकता.

कुछ देर सोचने के बाद.

अतुल:- हाँ सही कह रही ho...Pyar चाह कर होता नहीं और ना चाहने से प्यार नहीं होगा ऐसा भी नहीं hai...Mai खुद महसूस कर चूका हूँ.

प्लीज तुम जिंदगी के साथ आगे बढ़ते रहना.

श्रेया:- प्लीज...

अतुल:- Please...Mere लिए hi sahi...Warna सबसे बड़ा गुनेहगार मई खुद को hi मानूंगा की मेरी वजह से तुम भी आगे बढ़ नहीं पा रही ho...Kabhi खुद को माफ़ नहीं कर पाऊंगा.

श्रेया:- लेकिन तुम...

अतुल:- Mai...Mera क्या है? मई तो उसी दिन मर गया था जब निशा से अलग हुआ tha...Aaj जैसे तैसे जी रहा हु जिंदगी की बाकी की फर्ज निभाने के liye...Aur मेरे लिए तुम भी इस हाल में rahogi...Ye मेरे लिए सबसे दुःख की बात hoga...Tum जिंदगी में आगे बढ़ेगी, खुश रहोगी तोह मुझे भी ख़ुशी होगा.

अतुल अब्ब हाथ जोड़ने तक के लिए मजबूर हो गया tha...Shreya का मन तोह नहीं कर रहा था पर...

अतुल:- प्लीज...

अतुल की इस रिक्वेस्ट पर श्रेया भी पिघल gaya...Haal hi अतुल का कुछ ऐसा था.

श्रेया बस "हां" में सर को हिलाती है.

अतुल:- एक रिक्वेस्ट और है.

श्रेया ने बस आँखों से hi पूछा, "क्या?"

अतुल:- याद है उस दिन तुम्हारे पापा ने मुझे बुलाये थे.

असल में उस दिन मुझसे ये पूछा था उन्होंने की, "मई तुमसे शादी कर लू."

और इसी वजह से मई गांव छोड़ कर गया था ये सोच कर की कुछ दिन वक्त लूंगा ताकि खुद को तैयार कर लू तुम्हे मानाने के लिए और उन्हें मन करने के liye...Jo शायद यहाँ गांव में तुम्हे देख कर खुद को तैयार नहीं कर पाटा.

क्या तुम hi उन्हें मन कर dogi...Mujhse बहुत मुश्किल होगा.

श्रेया दर्द की आंसू पी कर एक बार फिर सर को हां में हिला देती है.

अतुल के दिल में श्रेया के लिए इज़्ज़त फिर बढ़ गया tha...Bas अतुल के लिए वो कितना कुछ कर रही thi...Atul को गर्व था की उससे इतनी अच्छा दोस्त मिला hai...Lekin एक अफसोश भी था की वो अपना इस दोस्त की सबसे बड़ी इच्छा को कभी पूरा नहीं कर सकता.

दूसरी तरफ श्रेया भी अतुल के बारे में सोच रही थी. "आखिर कैसा इंसान hai...Jo ख़ुशी से hi दूर भागता रहता hai...Hamesha दर्द में hi रहता है और रहना चाहता hai...Kya प्यार में इतना दर्द झेलते है लोग की उन्हें दर्द से hi प्यार हो जाता है?"

श्रेया:- एक बात पुछु.

अतुल:- हाँ.

श्रेया:- तुमने कहा था की अजय और निशा दी के बाद मई hi तुम्हारा सबसे अच्छी दोस्त hu...Kajal का क्या हुआ?

एक सवाल श्रेया के मन में aaya...Kajal का जिक्र अतुल ने अपने कहानी में बहुत पहले hi बंद कर दिया था.

बिना किसी भाव के अतुल ने जवाब दिया.

अतुल:- वो बस दोस्त hai...Close फ्रेंड नहीं.

ये तो मैंने बताया था की उसको प्रोपोज़ करते वक्त उसने बताया की वो किसी और से प्यार करती है.

उसके बाद वो अपने बर्फ के साथ hi बिजी रहने lagi...Bas उसके बाद "hi", " hello" वाले hi फ्रेंड रहे हम लोग.

सही भी hai...Wo खुद में और अपने बर्फ में बिजी रहने lagi...Aur मई निशा me...Aur आज ये हाल है की हम दोनों कॉन्टैक्टलेस है.

फिर दोनों में कुछ बात नहीं hota...Karte भी क्या? माहौल था hi ऐसा.

फिर दोनों वह से चले गए.

अतुल की दिल में श्रेया के लिए इज़्ज़त और बढ़ गया था तो श्रेया के लिए अतुल के बारे में सोच कर हैरानी और अपना पहला प्यार अधूरा रह जाने का दर्द. :(

हैप्पी नई ईयर तो आल माय फ्रेंड्स एंड रीडर्स.
 
अपडेट 124

आफ्टर 5 मोनथस

जानती हो Nishu...Issi दिन का इंतजार कर रहा था मई.

अतुल का ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था...5 साल से ज्यादा हो गए thhe...Aaj इसी पल का तोह इंतजार कर रहे थे दोनों.

निशा:- अभी कुछ मत बोलो.

अतुल के कंधे में अपना सर रख कर boli...Wo बस इस पल को महसूस करना चाहती थी.

अतुल भी बस निशा को अपने बाहो में महसूस करता रहा.

अजीब खामोशी था दोनों के bich...Dono अपने आखिरी मुलाक़ात में भी खामोश thhe...Uss खामोशी में दर्द था जिस वजह से दोनों से कुछ बोलै नहीं जा रहा था.

लेकिन aaj...Khushi की khaamoshi...Itna ख़ुशी की दोनों बोलना hi भूल गए थे.

बस आँखों से hi बात कर रहे थे.

कुछ देर बाद.

निशा:- मुझे विश्वाश था तुम सब कुछ ठीक कर डोज एक दिन.

अतुल:- कैसे नहीं करता? इस जिंदगी को तुम्हारे नाम कर चूका hun...Tumhare ख़ुशी के लिए कुछ भी.

अतुल की बातो में आज कुछ ज्यादा hi प्यार tha...Shayad दुबारा मिलने की ख़ुशी.

निशा:- हमारा प्यार भी कितना अजीब है ना? वक्त के साथ प्यार काम होने की जगह और भी बढ़ता चला गया.

अतुल:- सच्चा प्यार है madam...Vakt तो क्या दुनिया की कोई भी ताकत हमारे प्यार को रोक नहीं sakta...Aur किसी चीज को खोने के बाद hi हमे उस चीज का कीमत का पता चलता है.

जवाब में निशा बस अतुल को देखती है मुश्कुराते हुए.

निशा:- ऐसे क्या देख रहे हो?

अतुल की ऐसी प्यार भरी नजर से निशा को अब्ब शर्म आने लगा था.

अतुल:- उसी खूबसूरत chehra...Wohi adaah...Jisne मेरा दिल चुरा लिया tha...Mera रातो की नींद और दिन की छैन चुरा लिया tha...Jiski एक झलक के लिए पूरा ज़माना बीत गया.

वही मेरी प्यारी निशु ko...Jiski मिल जाने से मेरा जीवन सफल हो गया.

निशा की चेहरे की ख़ुशी से यही लग रहा था की उसको अतुल की तारीफ़ बहुत पसंद आ रही है.

निशा:- अब्ब आपकी उम्र को ऐसी बातें सोभा नहीं देता है मर?

निशा अतुल की साइड की सफ़ेद बाल को सहलाती हुई बोली.

अतुल:- अभी तो जवान hu...Jawani में ऐसी बात नहीं करूँगा तो क्या बुढ़ापे में karunga...Abhi उम्र हुआ hi क्या है? 26 साल का hi तो हूँ.

निशा:- 26 साल :ीक:

अतुल:- हाँ...26 साल का hi तो hun...Jab तुमसे अलग हुआ tha...Aur आज मई अपनी जिंदगी का सुरुवात कर रहा हूँ तो उसी वक्त से सुरु करना चाहता हूँ जहा से हम अलग हुए थे.

ज़माना एक तरफ और हमारा प्यार एक तरफ. :स्मार्त्य:

अतुल की बातों में आज कुछ अलग hi जोश था.

निशा:- तुम्हारी बातें आज भी वैसी hi है.

अतुल:- प्यार भी वैसा hi hai...Haan ये अलग बात है की तुम मोती हो गयी ho...Pehle जैसी हॉट एंड अट्रैक्टिव नहीं rahi...Lekin आज भी तुम्हे वैसा hi प्यार करता हूँ जैसा पहले करता था. :डी

निशा:- यू...

फिर निशा अतुल पर मुक्कों की बर्षात करने लगती है 🪑...Atul को आज इसमें भी मजा आ रहा tha...Shayad इसी की तो कमी था उसकी जिंदगी में.

फिर ऐसे hi दोनों के बिच मस्ती और छेड़खानी चलता है.

निशा:- अब्ब क्या सोच रहे हो?

अतुल:- अपनी खुशियों के बारे में सोच रहा hun...Sach में आज बहुत खुश हूँ.

निशा:- कितना खुश?

अतुल:- वो शब्दों में बयान नहीं कर sakta...Bas इतना समझ लो की मेरा बेजान और बेमतलब की जिंदगी में वापस ख़ुशी बन कर आयी ho...Ek बार जीने की इच्छा जाग उठी hai...Tumhare saath...Har पल आखिरी पल तक.

रियली लव यू ा लोट.

अतुल ने निशा की बाल को प्यार से सहलाते हुए कहा.

फिर दोनों की बिच खामोशी छा जाती hai...Pyar और ख़ुशी की खामोशी.

निशा:- आगे का क्या सोचा है?

अतुल:- कुछ ख़ास nahi...Shaadi, सुहाग रात और बच्चे.

निशा:- यू...

एक बार फिर मुक्कों की बरसात होता है अतुल पर.

निशा:- मुझसे पीटने में मजा आता है क्या तुम्हे?

अतुल:- तुम्हारा hi hun...Tumhara हर ाड़ाः मुझे भाति hai...Pyar भी और मार भी.

अब्ब निशा की हाथ अपने आप रुक जाती hai...Aur प्यार से वो अतुल को देखने लगती है.

अतुल:- वैसे अभी कुछ ज्यादा सोचा नहीं hai...Abhi प्यार के कुछ पल साथ जियेंगे और फिर शादी.

हाँ दो चार लोगों से हिसाब किताब भी बराबर करना है.

अतुल:- वैसे तुमने बताया नहीं तुमने अभी तक शादी नहीं किया? लेकिन क्यों और कैसे?

हैरानी से अतुल ने पूछा.

निशा:- क्यों? तुम्हारा hi प्यार सच्चा hai...Tumhaari जानकारी के लिए बता du...Jitna प्यार तुम मुझसे करते हो उससे ज्यादा....

डॉक्टर डॉक्टर....

अतुल:- ये डॉक्टर डॉक्टर क्यों कह रही हो?

अब्ब अतुल की दृष्टि (विज़न) कमजोर होता जा रहा tha...Aur निशा की तस्वीर धुंधली पड़ने लगता है और कुछ hi पल में गायब :ीक:.

अतुल का आँख खुल जाता है.

एक पल को तो अतुल को कुछ समझ में नहीं आया.

लेकिन अगले पल दरवाजा खटखटाने की आवाज से उससे समझते देर नहीं लगा की वो सपना देख रहा tha...Ek मीठी सपना.

टाइम देखा तो रात के 2 बज रहे थे.

अतुल:- (इन हिज मंद) इतनी रात को?

मायूस हो कर वो आँख मलते है गेट खोल देता है.

गेट में दो लोग खड़े thhe...Ek लड़का और एक बूढ़ा insaan...Shayad वो उस लड़के की पिता थे.

लड़का:- माफ़ कीजिये Doctor...Itni रात को तकलीफ दिया.

मेरे पापा को छाती में बहुत तेज दर्द हो रहा hai...Chhaati के साथ साथ निचले दांत में भी दर्द हो रहा hai...Ye सेह नहीं पा रहे थे तो आप को तकलीफ देना पड़ा.

अतुल को कुछ कुछ समझ में तो आ गया tha...Wo कुछ सवाल और पूछता है फिर दवाई लिख कर कहता है.

अतुल:- एक दवाई का नाम लिख रहा हूँ अभी के liye...Dawaai की दूकान से ले lijiye...Aur हाँ इस दवाई को निगलना नहीं hai...Bas जीभ के अंदर रख कर दबाना hai...Dard नहीं होगा.

कल हॉस्पिटल में इन्हे ले कर aaiye...Baaki की इलाज वही karunga...Aur haan...Tel वाला खाना काम खाइये जितना हो sake...Warna हार्ट अटैक का चांस बढ़ जाएगा.

फिर वो दोनों अतुल को शुक्रिया कह कर वह से चले जाते है.

अतुल भी आ कर अपने बीएड में बैठ जाता hai...Kaafi मायूस था wo...Unhe पेशेंट से कोई प्रॉब्लम नहीं tha...Ye अक्षर उसके साथ होता आया hai...Aur ये उसका कर्म और धर्म भी था एक डॉक्टर होने के नाते.

अभी भी वो सपने में hi अटका हुआ tha...Kitna अच्छा और प्यारा सपना आया था usse...Aur वो भी बस कुछ hi पल के लिए.

अपने रुद्राक्ष पर हाथ लगा कर.

अतुल:- शायद आप hi नहीं चाहते कुछ पल की ख़ुशी और मिले.

फिर उदास हो कर वो सोने hi लगता है की एक बात उसकी दिमाग में आता है.

अतुल:- (इन हिज मंद) Nishu...Abb तो 6 महीने हो गए तुम्हे dekhe...Pata नहीं क्यों आज दिल कर रहा है की तुमसे milu...Tumse बातें karu...Apna दर्द baantu...Lekin शायद kismat...Kismat hi तो साथ नहीं है.

एक minute...Aaj पहली बार कोई अच्छा सा सपना aaya...Warna हमेशा खुद को हारा हुआ, टूटा हुआ सपना देखते आया tha...Lekin आज :हम्म:

एक सपना आया था 10 साल pehle...Dard वाली पहली बार और वो सच हो gaya...Uss वक्त विश्वाश नहीं हुआ.

लेकिन आज 10 साल baad...Pyara सा और ख़ुशी वाला sapna...Kya ये भी सच होगा?

(दोबारा रुद्राक्ष पर हाथ रख कर) Kaas...Kaash ये सच हो जाए?

अतुल भी जानता था की ऐसा कुछ नहीं hoga...Iss हालत में और इतने वक्त के बाद तो बिलकुल भी nahi...Lekin दिल का एक कोने में उम्मीद की एक किरण था.

और फिर अतुल सोचने लगता है की अगर ये सपना सच हो गया तो?

इस बार अतुल जागते हुए भी सपने में खो जाता hai...Nisha के saath...Nisha के पास.

कितना अच्छा होता अगर ये सब सच हो जाए toh...Kaash सच hi होता.

ये सब सोचते हुए अतुल की चेहरे में मुस्कान आ जाता hai...Khushi की muskaan...Ummeed से भरी हुई muskaan...Bahut वक्त के बाद.

पता नहीं क्या था इस सपने me...Jisne अतुल की अरमान अचानक से बढ़ा दिया था?

[Aap sabhi ne agar pehle hi predict kar liya tha ye sapna hai to hats off...Agar nahi to mera likhna safal ho gaya :D...Hint waise to diya tha...Sapna me sirf Atul ki feeling likha tha...Nisha ka nahi...Nisha ka sirf wohi expression dikhaya jo Atul ne mehsus kiya tha.]
 
अपडेट 125

पहली बार आपको इतना डरते हुए देख रही हु डॉ. समीर

निशा मुस्कुराते हुए बोली.

6 महीने से ज्यादा वक्त हो चूका tha...Abb समीर और निशा की दोस्ती भी काफी बढ़ गया था.

समीर:- डरने की hi तो बात है डॉ. निशा.

ये कहते वक्त भी समीर काफी डरा हुआ लग रहा tha...Usse समझ में नहीं आ रहा था की बात को कहा से सुरु करे और क्या कहे?

निशा:- कैसा दर?

समीर:- बहुत अजीब तरह का दर है.

अभी भी समीर का वही हाल tha...Ek दर जो दिल में बैठ गया था पिछली baar...Ye अभी तक उसके दिल से निकल नहीं पाया था.

लेकिन निशा को बिन बताये भी उससे रहा नहीं जा रहा था.

निशा अभी भी समीर को सवालिया नजरो से देख रही थी.

समीर:- कैसे बताओ कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Kahi आप गुस्सा हो गयी तोह?

निशा:- अगर इसी तरह बात को गोल गोल घुमाते रहे तो जरूर गुस्सा हो जाउंगी.

आप बिना डरे boliye...Kya बात है?

निशा ने मुस्कुरा कर kaha...Lekin थोड़ा बहुत तो उससे भी समझ में आ रहा tha...Wo मन hi मन दुआ कर रही थी की जो वो सोच रही है काश वैसा ना हो.

समीर एक नजर निशा को देखता है और फिर हिम्मत जुटा कर कहता है.

समीर:- मई आपसे प्यार करने लगा hu...Pata नहीं कब और kaise...Lekin जब से एहसास हुआ है मुझे अपने दिल की बात तब से सिर्फ एक hi बात जानता hu...Aapse बहुत प्यार करने लगा हु.

समीर ने फिर हिम्मत जुटा कर निशा को dekha...Jis चीज का दर था निशा को आखिर hua...Usse कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या kahe...Wo बिना किसी भाव के ऐसे hi अपनी जगह पैट कड़ी रही.

समीर:- शायद आपकी acchaiyan...Aap तो जानती hi hai...Mujhe हमेशा अपने माँ और पापा की चिंता सताती रहती hai...Mujhe एक पत्नी का तलाश था जो मेरा पेरेंट्स का भी ख्याल रखे.

उस दिन जब आपको मेरे घर में dekha...Shayad तभी se...Aapne मेरा दिल में जगह बना ली thi...Fir धीरे धीरे जैसे जैसे आपको और भी अच्छे से जान्ने लगा आपसे प्यार हो gaya...Aap में वो साड़ी चीज दिखा जो मुझे एक पत्नी में चाहिए था.

इतना कह कर समीर चुप हो gaya...Aur निशा की जवाब का इंतजार करने लगा.

निशा:- सॉरी डॉ. Sameer...Mai किसी और की हूँ.

इतना कह कर निशा वह से चली gayi...Wo अब्ब कुछ भी कहने सुनने की हालत में नहीं thi...Aur पीछे छोड़ गयी एक बार फिर दिल से हारा समीर को.

पहले प्यार में धोखा और दूसरे पयद में inkaar...Iss बार समीर का दिल ऐसे टूटा था जो शायद hi फिर कभी जुड़ पाटा.

आफ्टर फ्यू डेज

सौरव:- (Sameer's फ्रेंड) पता चल गया निशा के बारे में.

समीर:- हाँ बता.

समीर ने बिना किसी भाव के pucha...Waise भी ये बात जान लेने से उसका कुछ होने वाला भी तो नहीं था.

सौरव:- डॉ. रवि.

समीर ने कुछ जवाब नहीं दिया.

भैया अम्लोदीपिने की कुछ टेबलेट दीजिये?

हाँफते हुए अतुल ने kaha...Chehre से काफी डरा हुआ लग रहा था.

थोड़ी देर चेक करने के बाद.

फार्मासिस्ट:- वो तो ख़त्म हो चूका hai...Kya हुआ? किस लिए?

अतुल:- मुखिया जी (Shreya's डैड) ...उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया hai...Unhe सेहर ले जा रहा हूँ एडमिट karaane...Yaha इलाज के लिए ज्यादा इक्विपमेंट्स नहीं hai...Tab तक के लिए बप कण्ट्रोल करने टेबलेट चाहिए था.

अतुल की आवाज में दर था.

फार्मासिस्ट:- एटेनोलोल dijiye...Wo भी बप में अच्छा काम करता है.

अतुल:- (फींकी मुस्कान के ससथ) उनका ब्लड शुगर भी काफी ज्यादा है.

फिर अतुल वह से निकल जाता है एक दर के साथ.

दवाई ना मिलने की वजह से वो कुछ नॉन - फार्माकोलॉजिकल मैसूर के साथ एक गाडी में उन्हें सेहर ले जाते है एक दुआ के साथ की वो वक्त पर सेहर पहुँच जाए.

सेहर पहुँचते hi वो अपने जान पहचान के कार्डियोलॉजिस्ट से कांटेक्ट करके उन्हें एडमिट कर देता है.

कुछ देर इंतजार करने के बाद.

कार्डियोलॉजिस्ट:- अभी वो कण्ट्रोल में hai...Jyada लेट नहीं hua...Supportive मेझस में है वो abhi...Kuch देर के बाद तुम उन्हें ले जा सकते हो.

और haan...Jaate वक्त दवाई ले कर jaana...Stage 2 हाइपरटेंशन hai...Dawaai रेगुलरली नहीं लिया तो कभी भी कम्प्लीकेशन बढ़ सकता है.

अतुल:- थैंक यू डॉक्टर.

और फिर अतुल श्रेया की पापा से मिल कर कुछ देर कॉफ़ी के लिए बाहर चला जाता hai...Iss भाग दौड़ में काफी थक गया था वो.

इसी थकान को मिटाने के लिए वो कॉफ़ी पीने बैठा hi था की उसकी नजर साइड के एक टेबल लार gaya...Jise देख अतुल की आँख गुस्से से लाल हो gaya...Ek तो इतना टेंशन और ऊपर से सामने का नजारा.

नजारा hi कुछ ऐसा tha...Ravi किसी दूसरी लड़की के साथ कॉफ़ी पी रहा tha...Dono मुस्कुराते हुए बातें कर रहे thhe...Aur उनकी बात चीत को सुन कर दोनों की करीबियां की अंदाजा लगाया जा सकता था.

रवि भी अतुल की मौजूदगी से अनजान करके अपने hi दुनिया में खोया हुआ था.

अतुल की दिमाग में कई तरह के सवाल aaye...Sabse गुस्सा तो उससे इस बात पर आ रहा था की "रवि निशा को धोखा दे रहा है?"

अब्ब उससे निशा का भी ख्याल aaya...Wo कहा hogi...Kis हाल में होगी? रवि के साथ वो खुश होगी भी या नहीं?

एक अनजाना सा दर अतुल के दिल और दिमाग में छ गया रवि को आज ऐसे देख kar...Aaj उसका निशा से मिलने का बहुत मन कर रहा tha...Uska हाल चाल जाने का.

कुछ पल से दबा हुआ प्यार फिर उभर aaya...Nisha के लिए उससे फ़िक्र हो रहा था तो रवि के लिए गुस्सा.

वो रवि की बात को सुन रहा था उससे खा जाने वाली नजर से घूरते हुए.

कुछ hi वक्त में अतुल के दिल और दिमाग में इतने बदलाव आ गया tha...Vakt का ये कैसा खेल था ये तो वक्त hi jaane...Lekin ये तो तय है की अतुल की ये उत्शुकता और फ़िक्र से ना जाने कितने बदलाव आना बाकी था सभी की जिंदगी में.
 
थैंक्स कामदेव भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Aapki बहुत बातों से सहमत hun...Jaise की इमोशन और practical...Haan दोनों साथ में ले कर चलना पड़ता hai...Sirf इमोशनल होने से काम नहीं chalta...Saath में प्रक्टिकली सोचना भी पड़ता hai...Jaldbaazi में और इमोशन में अतुल ने बहुत गलतियां किया hai...Ye स्टोरी के साथ साथ पता चलता जाएगा.

बूत निशा के केस में हमारे सोच शायद शामे नहीं hai...Ravi के केस me...Ravi तोह पहले से hi चिपकू टाइप hai...Wo हर एक कोशिश करता रहा अतुल और निशा की बिच में आने ka...Atul और निशा की फाइट के वक्त रवि की हर कोशिश के बाद भी वो निशा की करीब आ नहीं paaya...Bas अतुल को मिसुन्दरस्टण्डींग के लिए मजबूर कर paaya...Aur जब निशा को रवि का असलियत पता चला तो खुद को पूरी तरह से दूर कर liya...Present में भी अभी बहुत कुछ पता चलना बाकी है दोनों के बारे में.

और समीर के बारे me...Sameer की हालत ऐसा है की अगर निशा की जगह कोई भी होता और थोड़ा बहुत सपोर्ट करता तो उसका फीलिंग शामे hota...Usse बस एक इमोशनल सपोर्ट की जरुरत है.

और मुखिया जी का प्रेशर हाई होने की वजह अतुल की शादी के लिए मन करना नहीं था...5 मोनथस हो गए अतुल का शादी के लिए मन करने के baad...Tension इतने दिनों तक नहीं होता hai...Blood प्रेशर ऐसा बीमारी है की जिससे पूरी तरह से ठीक करना बहुत मुश्किल काम hai...Dawaai और फिजिकल एक्टिविटी से कण्ट्रोल में रख सकते hai...Aur भी कारण हो सकते है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.

आप का हर कमैंट्स और सोच का बहुत रेस्पेक्ट करता hun...Bahut से कमैंट्स और इस कमैंट्स में bhi...Aapka कमेंट से पता चलता है की आपका फलसफा कितना अच्छा है. 🙇🙇

बस इस कमेंट में मेरा अलग बिचार के बारे में कहा निशा related....Aur मुखिया जी के बारे में मिसकन्सेप्शन को क्लियर किया.

ऐसे hi साथ बने रहिये bhai...Agar कही कमी लगे तोह ऐसे hi जरूर बताइये.
 
अपडेट 126

समीर का गुस्सा रवि की हर एक बात के साथ बढ़ता जा रहा था.

और अतीत की यादो में वो खो गया.

बात उन् दिनों की है जब निशा की शादी रवि के साथ तय हुआ tha...Khud से hi हारा हुआ Atul...Apne घूम में शराब की नशे में कुछ ज्यादा hi खतरनाक प्लान कर रहा tha...Ravi को रास्ते से हटाने ka...Aisa हालत करने का की वो जिंदगी भर सोचता रहे निशा के बारे में hi सोचना उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा भूल था.

जो शराब की बोतल अभी उसने खली किया था उसी से रवि की सर पर फोड़ने का सोच वो चला गया रवि के पास.

एक रेस्टोरेंट में रवि और अभिशेख बैठे thhe...Atul भी छुप कर उनके साथ वह पहुँच गया था.

रवि:- आज पार्टी है मेरी तरफ se...Shaadi कन्फर्म होने की पार्टी.

अभिशेख:- कॉंग्रट्स yaar...Tune आखिर करके दिखा hi दिया.

रवि:- सब दिमाग का खेल है बच्चू.

अभिशेख:- मान गया yaar...Abb आगे की प्लान को कब अंजाम देगा?

रवि:- आगे का प्लान?

अभिशेख:- Wohi...Atul को रास्तव से हटाने की.

ये सुनते hi अतुल के कान खड़े हो गए.

रवि कुछ सोचने के बाद.

रवि:- नहीं इसकी जरुरत नहीं है अब्ब.

अभिशेख:- क्यों?

रवि:- निशा मिल hi गयी है mujhe...Abb बाकी चीज से मुझे कोई मतलब नहीं.

अभी सिर्फ शादी के बारे में सोच रहा hun...Uske बाद निशा का दिल और प्यार भी जीतना hai...Jaanta हु गलत तरीके से शादी कर रहा hu...Lekin निशा के बिना जी भी तो नहीं सकता.

अभिशेख:- तू सूरे है? वो तुझसे प्यार karegi...Hamesha तुझसे नफरत hi किया है usne...Kabhi तुझे लाइन नहीं diya...Suruwat में तुझसे नफरत करती thi...Atul से दोस्ती करने के बाद भी निशा काम hi बात करती थी.

अतुल और निशा की लड़ाई के वक्त भी तुझे कुछ खास भाव नहीं diya...Haan तूने दोनों के बिच मिसुन्दरस्टण्डींग करवा diya...Lekin निशा के करीब तू तब भी जा नहीं सका.

तो ऐसे में वो तुझ से कैसे प्यार करेगी ये जानते हुए भी की तूने hi उससे अतुल से उससे अलग किया है?

रवि:- जानता हु वो इतनी जल्द मुझसे प्यार तो नहीं karegi...Lekin शायद धीरे धीरे मेरा प्यार देख अपना मन बदल ले.

उसके बिना मन hi नहीं lagta...Aisa लगता है मर hi जाऊँगा उसके bin...Wo मेरे पास रहे वो hi काफी hai...Usse देखते hi मेरा दिन बन जाएगा.

जानता हूँ मई गलत कर रहा हूँ उसके साथ ऐसा कर ke...Lekin मई अपने प्यार के मलहम से सब कुछ ठीक कर दूंगा.

अतुल ने इतना hi सुना था की वो वह से चला गया.

उस वक्त तो उसने ये सोचा की, "रवि बहुत गलत इंसान है लेकिन निशा से बहुत प्यार करता hai...Mera किस्मत में निशा तो वैसे भी नहीं hai...Gharwale मान hi नहीं रहे hai...Aur निशा की पापा भी मानना नहीं चाहते बिना परिवार ke...Wo रवि नहीं तो किसी और से hi करा देंगे निशा की शादी लेकिन मुझसे नहीं.

शायद ऐसी हाल में रवि hi ठीक रहेगा निशा के liye...At लीस्ट बाद में निशा खुश तोह रहेगी."

ये सोच कर अतुल अपने दिल में पत्थर रख के इस बात के लिए खुद को मन लेता hai...Bahut बुरा लग रहा था उससे रवि और निशा के बारे में soch...Lekin हालात के सामने उसको घुटना टेकना hi पड़ा.

आँखों में आंसू के साथ उसने इस बात को मान hi लिया.

और आज का din...Ravi को ऐसा देख उसका खून उबाल रहा tha...Hajaar गालियां उसने खुद को दिया उस दिन की गलती के लिए.

"आखिर ये है रवि का प्यार?"

दूसरी तरफ Ravi...Shayad अतुल की badkismati...Usne अतुल को देख liya...Lekin कुछ इस तरह से अतुल को देखा की अतुल अंदाजा नहीं लगा सकता था इस बात ko...Dar तो बहुत गया था वो लेकिन फिर भी उसने हिम्मत से काम लेने का सोचा.

वो कुछ खरीदने की बात कह कर आगे काउंटर पर जाता hai...Aur इशारा से उस लड़की को अपने पास bulaya...Atul कुछ समझता उससे पहले hi दोनों वह से भाग गए.

अतुल को एक पल तो विश्वाश hi नहीं hua...Wo उन् दोनों के पास जाता उससे पहले दोनों बाइक से निकल गए.

अतुल बस देखता hi रह गया.

अतुल को रवि का घर पता tha...Wo वह गया उसकी तलाश में.

लेकिन वह पहुँचने पर देखा की घर में ताला लगा हुआ hai...Padosi से पूछा तो पता चला की, "रवि की पापा का डेथ हो चूका है और रवि अपने फॅमिली के साथ इस घर को बेच कर कही और शिफ्ट हो चूका है."

रवि के नयी घर के बारे में कोई पडोसी बता नहीं सका.

अतुल के लिए ये हैरानी की बात tha...Aakhir इतनी बड़ी घर छोड़ कर उससे कही और जाने की क्या जरुरत पद गयी.

हैरानी से भी ज्यादा वो दर गया tha...Nisha के liye...Nisha के बारे में सोच कर.

बिना कोई देर किये वो निशा के घर चला gaya...Uski माँ और पापा से मिलने.

वह पहुंचा तो देखा उस घर में भी ताला लगा हुआ hai...Padosi भी ज्यादा कुछ मदद नहीं कर sake...Itna hi पता चला की बहुत पहले वो इस घर को छोड़ कही और शिफ्ट हो चुके है.

अतुल के लिए ये बहुत बड़ा झटका tha...Inn 5 सालों में न जाने कितना कुछ बदल चूका tha...Haalaat के साथ साथ इंसान भी बदल गए थे.

दिल में दर बैठता जा रहा tha...Nisha से मिले तो मिले कैसे? उससे कैसे ढूंढे.

बहुत सोचने पर भी कुछ जवाब ना मिला.

बहुत गुस्सा आ रहा था उससे खुद पर, "एक दिन निशा मिली थी उससे लेकिन फिर भी उसका एड्रेस नहीं pucha...Usse उसकी लाइफ में खुश सोच दखल ना देने के लिए कुछ भी नहीं पूछा."

लेकिन आज निशा की तलाश में वो हर जगह भटक रहा था."

कही से भी कोई हिंट नहीं मिल रहा था उससे.

सामने इतना बड़ा सेहर tha...Abb निशा को ढूंढे तो ढूंढे कहा?

लेकिन हार मान जाए अतुल इतना भी कायर नहीं tha...Usse निशा से मिलना था उसका हाल चाल जानना था हर हाल me...Aaj न जाने क्यों अतुल के दिल में निशा के लिए प्यार और फ़िक्र बहुत बढ़ गया था.

वो बस यही चाहता था की निशा जहा भी रहे खुश rahe...Lekin आज रवि को जिस रूप में देखा था उससे लग रहा था की निशा बहुत मुशीबत में है.

निशा को ढूंढ़ने से पहले उसने सेहर में रहने वाले गांव के एक आदमी को फ़ोन किया मुखिया जी को वापस गांव ले जाने के liye...Naa जाने उससे यहाँ कितना वक्त लगता.

निशा को ढूंढ़ने की चक्कर में वो हर वो जगह जा रहा था जहा उसने और निशा ने वक्त बिठाये थे इस उम्मीद में की निशा उससे वह मिल जाये.

पहले तो वो पार्क gaya...Bahut देर इंतजार kiya...Lekin निशा वह आयी hi नहीं.

फिर सिनेमा hall...Waha भी वही हाल tha...Jheel, रिवरसाइड, कॉलेज, लाइब्रेरी और भी बहुत सी जगह लेकिन निशा कही नहीं मिली.

फिर धीरे धीरे बस स्टेशन, म्यूजियम, Market...Lekin निशा कही नहीं मिल रही थी.

अतुल का हालत बहुत ख़राब हो गया tha...Pure शरीर से पसीना से भींग गया tha...Kapde गंदे हो गए thhe...Sharir थक कर कमजोर पड़ने लगा tha...Lekin फिर भी...

फिर भी वो हार मानने के लिए तैयार नहीं tha...Naa hi thakaan...Aur ना hi भूख pyaas...Dil और दिमाग में एक hi चीज था Nisha...Nisha की तलाश तो उसके लिए उसकी जिंदगी की आखिरी मकशद बन गया था.

रात हो गया tha...Lekin अतुल का तलाश अभी भी ख़त्म नहीं हुआ था.

रात में भी वो वही पार्क में गया जहा वो और निशा कभी कभी रात में वक्त बिताने जाते थे इस उम्मीद में की कही निशा मिल जाए.

अब्ब उससे रहा नहीं gaya...Aankhein आंसू से भर गया tha...Dil में एक दर्द था जो बढ़ता hi जा रहा था.

अतुल:- प्लीज एक बार मिल जाओ yaar...Itna भी ना तरसाओ.

फिर अतुल रोने लगता hai...Aaj आंसू था की रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

अतुल:- जानता हूँ बहुत देर कर diya...Hamesha तुम्हारे बुरे वक्त में साथ देता tha...Lekin इस बार इतना बुरा वक्त में साथ देने आ नहीं सका.

बस एक बार मिल jaao...Tumhari हर घूम को दूर कर dunga...Kisi तरह तुम्हारी जिंदगी को खुशियों से भर दूंगा.

प्लीज Nishu...Ek बार मिल जाओ.

इसके बाद अतुल खुद को रोक नहीं saka...Fut फुट कर वो रोने लगा.

रात में इंतजार करते करते वो पार्क में hi सू गया.

अगले दिन भी वही हाल tha...Wo उसी जगह फिर से गया जहा वो और निशा साथ में वक्त बिताते thhe...Lekin नतीजा wohi...Nisha कही नहीं मिली.

शरीर की कमजोरी तो बढ़ता जा रहा tha...Lekin हौसला और जूनून? वो बिलकुल भी काम नहीं हुआ था और ना hi शायद हो पाटा.

इस बिच अतुल ने खुद का ख्याल रखना भी भूल गया tha...Raaste में कुछ भी खरीद कर खा लेता और आगे की तलाश जारी rakhta...Bilkul पागल प्रेमी बन गया था वो निशा की प्यार में और याद में.

सोचने समझने की ताकत भी काम हो गया tha...Jitna सोच सकता था उसने वो सब किया लेकिन निशा फिर भी नहीं mili...Aur उससे ज्यादा वो सोच भी नहीं पा रहा था.

ऐसे hi तलाश के वक्त उससे एक ख्याल आया और वो...

ये क्या हाल बना लिया अतुल तूने?

हैरानी में अजय ने pucha...Raat के 10 बजे अपने घर के बाहर अतुल को इस हालत में देख वो भी काफी दर गया tha...Pehli नजर में तो वो अतुल को पहचान भी नहीं पाया था.

अतुल:- तेरा हेल्प की जरुरत है यार?

अतुल की बात से hi उसका दर्द, लाचारी और कमजोरी दिख रहा था.

अजय ने भी अतुल का हाल देख कर पहले उसको घर के अंदर ले आया और फिर उसके लिए खाने का आर्डर कर दिया.

पहले वो अतुल को फिर से नार्मल बनाना चाहता था और फिर अतुल की बात सुन्ना चाहता था.

अतुल का ये हाल देख वो भी बहुत दर गया tha...Itna तो समझ गया था वो की कुछ तो बहुत गलत हुआ है.

अतुल अभी कुछ खाना पीना नहीं चाहता tha...Abhi भी दिल में निशा के लिए फ़िक्र और दर tha...Lekin अजय के सामने उसका कुछ नहीं चल पाया.

[Friends ek jaruri baat kehna tha...Picchle 24 dino me maine 14 updates post kar diye hai...Thoda free aur study load kam hone ki vajah se...Lekin kal se Central Nervous System suru hone jaa raha hai...Aakhiri system...Aur medical field me ye sabse tough maana jaata hai aur mera favourite...So iss baar study ke saath compromise nahi kar sakta...Pehle ki routines ki hisaab se update post karunga...2 ya 3 din me ek update...Daily ki chance bahut kam hai...Waise bhi story 10 updates ke around complete ho jaayega.]
 
अपडेट 127

डॉ. Sameer...Aapka चॉइस हमेशा से गलत रहा है.

निशा ने आते hi ये कहा.

समीर:- शायद.

निशा:- आप को अपने आस पास सच्चा प्यार करने वाला कोई दीखता hi nahi...Galat लोगो से उम्मीद लगा बैठते है और जब आपकी ये उम्मीद पूरा नहीं होता तो इल्जाम दुसरो पर.

और क्या लगता है ये अल्कोहल सब कुछ ठीक कर देगा? जो आज कल फिर से पीने लगे है?

समीर:- ठीक तो नहीं karta...Lekin घूम को भुलाने में मदद करता है.

अभी भी समीर की बातों में कोई भाव नहीं था.

समीर:- वैसे अब्ब कौन मुझसे प्यार करने लगी है?

समीर ने इस अंदाज़ में कहा की जैसे वो इससे भी एक मजाक समझ बैठा है.

निशा:- नेहा.

समीर:- नेहा

हैरानी में समीर की मुंह से निकला.

निशा:- Haan...Lekin आपको दुसरो से क्या मतलब? एक अलग hi दुनिया बना लिया है aapne...Aur सिर्फ वही होता है जो आपकी मर्जी.

Neha...Uski आपके लिए प्यार किसी से छुपा nahi...Bas आप hi है या तो समझ नहीं पाए या फिर समझना hi नहीं चाहते.

समीर:- मुझे क्या पता था की वो प्यार करती है mujhse...Kabhi कुछ कहा भी nahi...Bas पीछे पड़ी रहती है और मजाक करती रहती है.

निशा:- जरुरी नहीं की कहने पर hi आप को समझना chahiye...Kuch बातो की समझ आपको भी होना चाहिए?

समीर:- लेकिन मेरे दिल में उसके लिए कोई फीलिंग नहीं है?

निशा:- और वो क्यों?

समीर:- क्यों का क्या मतलब? नहीं है तो नहीं है. :डेड:

निशा:- और मेरे लिए था.

समीर:- Haan...Vajah भी तो बताया था.

निशा:- Neha...Kuch पता भी है आपको उसके बारे में? वो दिल की कितनी अच्छी hai...Logon की ख़ास कर पेशेंट्स की कितना केयर करती है.

जब वो पेशेंट्स की इतना केयर करती है तो अपने सास ससुर का क्यों नहीं करेगी.

इस बात ने समीर को सोचने पर मजबूर कर दिया.

निशा:- अगर प्यार नहीं है तो बिलकुल मत करिये pyar...Pyar जबरदस्ती नहीं होता है.

लेकिन पहले लोगो के बारे में अच्छे से जानिये, समझिये और फिर कोई डिसिशन liya...Bas ऐसे नहीं की पगार नहीं है तो नहीं है.

अब्ब समीर सच में गहराई से सोचने laga...Usko निशा की बात सही लगने लगा.

निशा वह से जाने hi वाली थी की समीर ने उससे रोक कर पूछा.

समीर:- एक बात पूछना चाहता tha...Jo कई दिन से मेरे दिमाग में चल रहा था.

समीर ने डरते हुए पूछा.

निशा:- हाँ पूछिए.

समीर:- आखिर आप रवि के साथ खुश कैसे रह सकती है? बहुत hi घटिया इंसान है वो.

निशा:- Ravi!!!Mujhe क्या जरुरत पद गयी उसके साथ रहने की.

समीर:- लेकिन रवि आपका हस्बैंड है ना?

समीर ने भी हैरानी से पूछा.

निशा:- व्हाट? क्या बकवास कर रहे है aap...Mai उस से शादी karungi...Kabhi nahi...I ऍम स्टिल ुनमर्रिएद.

समीर के लिए ये बहुत हैरानी की बात tha...Wo निशा को अपने साथ आने की बोल कर चला गया डॉ. सौरव के केबिन में.

सौरव:- क्या हुआ? तू अभी इस vakt...Kuch काम था.

समीर:- तूने कहा था की रवि और निशा हस्बैंड वाइफ है.

सौरव:- Haan...Pata करने पर यही पता chala...Maine निशा की एक क्लासमेट, विकाश से ये पता किया.

सौरव भी हैरान था.

निशा:- एक बार विकाश से बात करवाइये meri...Uss बेवकूफ ने कैसे देख लिया हमारे शादी ko...Haan शादी तय हुआ tha...Lekin मैंने बाद में मन कर दिया.

सौरव:- हाँ उसने भी यही कहा tha...Aap दोनों की शादी होने वाली है.

निशा:- जरुरी तो नहीं की शादी तय होने का मतलब शादी हो जाना hi है.

सौरव:- सॉरी.

वो निशा का गुस्सा देख डरने लगा tha...Aaj तक निशा को इतना गुस्सा कभी नहीं देखा tha...Shayad रवि की नाम से निशा का गुस्सा आज आसमान को छू रहा था.

निशा:- मई अतुल के अलावा किसी और के बारे में सोच नहीं sakti...Aaj तक उसी की याद में hi जी रही हूँ और आगे bhi...Please अब्ब आप दोनों ये प्यार और शादी की बात मत कीजिये.

और डॉ. समीर aap...Aap को क्या लगता है सिर्फ आपको hi लव फेलियर हुआ hai...Aap की hi लाइफ में परेशानी hai...Sabhi की लाइफ में अपनी अपनी परेशानी होती hai...Iska मतलब ये नहीं की पीना सुरु कर दे और जिंदगी को ऐसे hi तबाह कर दे.

समीर ने कुछ जवाब तो नहीं दिया लेकिन उसकी जुबान से सिर्फ इतना hi निकला.

समीर:- अतुल!!!

निशा:- अतुल?

समीर:- Nahi...Aapka अतुल nahi...Mai किसी दूसरे अतुल के बारे में सोच रहा hun...Bahut hi अजीब था वो.

फिर समीर अतुल के बारे में कुछ और बातें कहता hai...Lekin Nisha...Wo हैरानी से समीर को देखने लगी :ीक:

सब कुछ मैच हो रहा था समीर के बताये हुए अतुल और उसके अतुल के बिच.

अपना मोबाइल ों करके अतुल का 5 साल पुराना फोटो दिखाया उसने समीर को.

जवाब और भी चौकाने वाला.

समीर:- हाँ ये वही है.

अब्ब एक गहरी खामोशी छा गया था सभी के bich...Baat कहा से कहा पहुँच गया था.

निशा चुप thi...Lekin दिल में बहुत सारे सवाल घूम रहे thhe...Dabaa हुआ प्यार फिर उभर आया था.

निशा:- कैसा है मेरा अतुल?

अब्ब निशा की आँखों से भी आंसू आने lage...Aur दिल में सलामती की दुआ.

आज मन कर रहा था अतुल के बारे में और भी जान्ने का.

समीर:- 3 साल के लगभग हुआ है मुझे अतुल से mile...Mai उस वक्त जिस हॉस्पिटल में काम करता था वह अतुल ने ज्वाइन किया था अस ा मद स्टूडेंट.

हम दोनों में वैसे कोई ख़ास दोस्ती या बातें भी नहीं होता tha...Hum दोनों hi अपने लाइफ में इस तरह से खोये हुए थे किसी से कोई मतलब hi नहीं होता था.

वो फिजिशियन बनने की तैयारी कर रहा था और मई सर्जन.

लेकिन उसमे सबसे ज्यादा पसंद मुझे इस बात का था की वो सभी को इज़्ज़त देता tha...Baat बहुत काम करता था लेकिन जितना भी करता था अच्छी बातें करता था.

सबसे पहले मुझे किसी का अप्प्रेसिअशन उसी से मिला tha...Aaj भी याद है उसकी बात.

"समीर sir...You अरे ा ग्रेट surgeon...Kabhi कभी देखा है आप को सर्जरी करते hue...Accha नॉलेज है आपके paas...Baaki से बिलकुल alag...Chhoti छोटी बातो पर भी अच्छा फोकस रहता है आपका और बहुत hi केयरफुल हो कर आप अपना काम करते है.

मेरा भी सपना हुआ करता था कभी सर्जन बनने ka...Jindagi ने एक ऐसी मोड़ पर ला खड़ा कर दिया की अब्ब फिजिशियन बनने जा रहा hun...Lekin खुश hun...Shayad बहुत लोगों के काम aaunga...Agar सर्जन बनता तो बिलकुल आपकी तरह."

एक दर्द था एक तारीफ़ था उसकी बातों में.

निशा अभी भी समीर को देख रही thi...Shayad और भी जानना चाहती थी.

निशा:- वो पढ़ने में बहुत अच्छा था न?

समीर:- मार्क्स के हिसाब से एवरेज student...Haan लेकिन बहुत टैलेंटेड tha...Kam पढता था लेकिन जितना जरुरत होता था उतना पढ़ लेता tha...Practical नॉलेज बहित अच्छा था जो बहुत जरुरी है.

उसका लाइफ भी मेरा जैसा hi tha...Padhne में कायदे मन लगता.

निशा:- आपके जैसा?

समीर:- हाँ उसने कहा था की उसका भी प्यार सफल नहीं हुआ hai...Bilkul अलग tha...Aur उसी में खुश था.

निशा:- लेकिन अब्ब वो अकेला नहीं है... लगभग 2 साल पहले शादी हो गयी है. (आरव के बारे में सोचते hue...Mall का वो इंसिडेंट जब अतुल, श्रेया और आरव साथ थे)

समीर:- नहीं...2 महीने पहले उससे मिला tha...Ek काम के सिलसिले me...Lekin तब भी उसका कोई शादी नहीं हुआ था.

समीर ने कुछ सोंचते हुए कहा.

निशा को तो एक पल के लिए यकीं hi नहीं hua...Wo एक बार फिर उस मॉल के इंसिडेंट को सोचने lagi...Atul ने तो कहा था की उसका शादी श्रेया से हो चूका है? लेकिन.

शायद डॉ. समीर सही hai..."Acche से अतुल का वो एक्सप्रेशन करने lagi...Shayad वो कुछ छुपाना चाहता था." अब्ब निशा को भी ये बात सही लगने लगा.

दिल की धड़कन एक दम से तेज हो gaya...Dimaag ने तो जैसे काम करना hi बंद कर दिया tha...Hajaar सवाल उसके दिमाग में चल रहे थे.

"पता नहीं अतुल किस हाल में होगा?" ये सवाल अब्ब निशा को परेशान कर रहा tha..."Khush भी होगा या उसकी तरह hi तन्हाई में पूरी जिंदगी काटा होगा?"

निशा:- अरे यू सूरे?

समीर:- यस.

फिर निशा वह और नहीं रुक सकीय.

कुछ hi घंटो के बाद निशा की पापा अतुल के घर में thhe...Unhone भी कन्फर्म कर लिया की अतुल का शादी सच में हुआ नहीं है.

अतुल से कांटेक्ट करने की कोशिश किया तो जवाब मिला "मोबाइल इस स्वित्चेद ऑफ." कुछ देर सोचने के बार निधि ने श्रेया को कॉल किया तो पता चला "अतुल अभी गांव में नहीं है."

बहुत अजीब हालत हो गया tha...Sabhi को अतुल के लिए फ़िक्र हो रहा tha...Kaafi दर भी गए थे की अचानक अतुल कहा चला गया.

अतुल इन् बातो से अनजान की उसके घर वाले और श्रेया उसके लिए फ़िक्र कर रही है, वो अभी भी अपने hi तलाश में भटक रहा था.

अजय से बात करके उसने निशा का पता लगाना भी chaaha...Lekin सेहर की किसी भी घर में निशा और उसकी फॅमिली नहीं mile...Naa hi किसी भी हॉस्पिटल me...Aur सबसे चौंकाने वाली बात.

रवि का एड्रेस मिला लेकिन ये भी पता चला की रवि की शादी किसी और से हुआ hai...Usse कुछ पूछ भी नहीं सकते थे क्युकी वो 2 दिन से सेहर से फरार था.

अतुल के लिए निशा को ढूंढ़ने की हर एक तरीका बेकार साबित हो रहा था.

अंजलि और निशा की कांटेक्ट भी अब्ब नहीं tha...Khud निशा ने hi सब कुछ तोड़ दिया था अकेले रहने के लिए सभी से दूर.

आज सालो बाद अतुल ने सोशल मीडिया खोला तो 100 से भी ज्यादा मश्ग थे बहुत लोग ke...Lekin जो जरुरी थी उसका एक भी nahi...Nisha भी सोशल मीडिया से बहुत पहले hi दूर हो गयी थी.

लेकिन अतुल अभी भी हार मानने को तैयार नहीं था.

एक हफ्ता हो गया लेकिन कोशिश जारी tha...Aaj भी वो निशा के साथ जहा जहा घुमा था उस जगह पर जाता सिर्फ एक उम्मीद के saath..."Kahi तो कभी भी वो मिलेगी? :("

खुद की हालत से बे परवाह हो कर अभी भी निशा की फ़िक्र था usse...Bas एक बार मिलना चाहता tha...Bas एक बार.

और उसी एक बार के लिए उसने अपना हालत ऐसा बना लिया था की अजय से देखा भी नहीं जा रहा था.

दर तो बहुत लग रहा था अजय ko...Lekin अतुल को रोकने की हिम्मत उसमे भी नहीं tha...Bas अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा था अपने कॉन्टेक्ट्स से सेहर के बाहर भी निशा को ढूंढ़ने ki...Lekin उससे भी निराशा hi हाथ लगा था.

अतुल और निशा दोनों का हाल वही tha...Milne के लिए बेक़रार thhe...Lekin मजबूर thhe...Itni कोशिश की बावजूद भी अभी भी एक दूसरे से दूर थे.

बहुत बेसब्री से इंतजार था उस पल ka...Lekin किस्मत? क्या इस बार साथ देगी जो कभी दोनों को पास लाता है तो कभी दूर ले जाता है?

ऐसे hi एक दिन रात के 9 बजे अतुल एक गली से थक कर निकल hi रहा था की उसका सामना उस इंसान से हुआ जिसको वो दिल बहुत इज़्ज़त करता था.

वो भी हैरान थे अतुल को आज इस हालत में देख कर.
 
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