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में लेते लेते सोच रहा था ये क्या हो रहा हे मेरे साथ मुझे माधुरी को खोने का दर था लेकिन उम्मीद भी थी की वो वापस अपनी साडी गंदगी को छोड़कर जरूर आएगी. मेरे दिमाग में वही नजारा घूम रहा था. वो माधुरी की नंगी तश्वीर मेरे जशन में आ रही थी मेरा हाथ कब पाजामे में चला गया मुझे पता नहीं चला.
कब माधुरी अंदर आई ये भी मुझे पता नहीं चला. अचानक मुझे लैंड पे कुछ गिला सा महसूस हुआ मेने देखा तो माधुरी बिल्ली की तरह सामने से ज़ुकी हुई मेरे लैंड पे जीभ फेर रही थी. मेने उसे धक्का दिया वो सामने गिर गई वो कड़ी हुई और फिर से पुरे लैंड को मुँह में ले ली. मेरी आंखे बंद थी मुझे लगा में अंतिम चार्म सिमा तक पहोच जाऊंगा. इतने में माधुरी बोली.
माधुरी ; कोण मेरे साथ हारेगा कोण जीतेगा ये मेरी मर्जी हे.
और में तुम्हे हरने नहीं दूंगी.
में ; बहोत घमान हे तुम्हे की तुम नहीं हरोगी.
माधुरी ; है हे.
में ; तुम अपने आप को क्या समझती हो??
माधुरी ; शेरनी.
माधुरी की बाटे और गुरुर से मुझे गुस्सा आया
में उठा और माधुरी को खींच के तप्पड़ मारा माधुरी निचे गिरी उसके होठो ( लिप्स ) से खून निकलने लगा.
में ; शेरनी ये मत भूल के शेर पे भी सवा शेर होता हे.
मेने माधुरी के बल पकडे और जब बल खींचे तो उसका फेस ऊपर हो गया माधुरी की आँखों में अंशु थे और लिप्स से खून निकल रहा था. लकिन मुझे बिलकुल भी दया नहीं आई. सायद जलन की वजह से माधुरी को मेने पहेली बार हाथ उठाया था लेकिन मेरे गुस्से और जलन की वजह से में बिलकुल भी नहीं पिग्ला.
मेने बीएड के किनारे पर माधुरी को पटका और कमर में हिस्से को पंजो से जकड के उठाया वो पूरी नंगी थी. मेने अपना लैंड माधुरी की छूट पे रखा और जोर का झटका मारा और माधुरी के बालो को जोर से पीछे की तरफ खींचा. जिस से माधुरी का फेस ऊपर आसमान की तरफ उठ गया. माधुरी दर्द से चिल्लाई. मगर में परवाह न करते जोर से झटका मारा.
माधुरी ; अहह स प्लीज तपन अहह मुझे माफ़ कार्डो.
वो रो रही थी उसकी आँखों में अंशु थे में रुका और उसका मुँह जोर से पकड़ के पीछे जातक के बोलै.
में ; क्यों तू तो शेरनी हे न कोई नहीं हरा सकता न तुजे.
माधुरी ; शेरनी को सिर्फ शेर हरा सकता हे.
मेने जोर जोर से चुदाई चालू कर दी बड़ी बेहरमी से झटके नर रहा था ऐसा मेने पहेली बार किया था लेकिन तब मुझे पछतावा नहीं था.
माधुरी ; अहह उम्म्म्म.
में आगे ज़ुका माधुरी के सर को पकड़ा और जबरदस्त किश की उसके होठो को को भी काट खाया.
माधुरी ; प्लीज तपन आह्हः नही..
मेने अपने मुँह के जबड़ो से माधुरी की गरदन पीछे से पस्काद ली लेकिन उसने मेरा ऐसा करने से मुश्कुरै और बोली.
माधुरी ; है तुम हो अह्ह्ह तुम hi मेरे शेर हो. लव यू तपन कोई रहें मत करना मुझपे. Ahhhh..sssss करलो करलो मुझे अपने वश में करलो.
और माधुरी हर जाती हे क्यों मुझे पता नहीं सायद वो मुझे जितना चाहती हो माधुरी ने पुरे सेक्स के दौरान एक या दो बार hi अपनी आंखे खोली. लेकिन जलन और मेरी तड़प में कारन मेने जो किया बाद में मुझे बहोत अफ़सोस हुआ.
जिस माधुरी को मेने प्यार किया उसे बेरहमी से पिता और उसके साथ जबरदस्ती की सायद ये बलात्कार भी था मुझे अपने आप से घिरना होने लगी. में अब टूट चूका था माधुरी भी बीएड पे रट रट सो गई जी छह रहा था उसे गले लागलु और माफ़ी मांगू लेकिन ऐसा नहीं कर पाया. माधुरी भी नींद में पूरी रत बड़बड़ा रही थी.
माधुरी ; लव यू तपन प्लीज मुझे छोड़ के मत जाओ में तुम्हारी ह
में उसकी हालत देख नहीं पाया सोफे पर बैठे बैठे सो गया तक़रीबन पूरी रत में सो नहीं पाया. सुबह के 4 बज मुझे नींद आ गई.
कब माधुरी अंदर आई ये भी मुझे पता नहीं चला. अचानक मुझे लैंड पे कुछ गिला सा महसूस हुआ मेने देखा तो माधुरी बिल्ली की तरह सामने से ज़ुकी हुई मेरे लैंड पे जीभ फेर रही थी. मेने उसे धक्का दिया वो सामने गिर गई वो कड़ी हुई और फिर से पुरे लैंड को मुँह में ले ली. मेरी आंखे बंद थी मुझे लगा में अंतिम चार्म सिमा तक पहोच जाऊंगा. इतने में माधुरी बोली.
माधुरी ; कोण मेरे साथ हारेगा कोण जीतेगा ये मेरी मर्जी हे.
और में तुम्हे हरने नहीं दूंगी.
में ; बहोत घमान हे तुम्हे की तुम नहीं हरोगी.
माधुरी ; है हे.
में ; तुम अपने आप को क्या समझती हो??
माधुरी ; शेरनी.
माधुरी की बाटे और गुरुर से मुझे गुस्सा आया
में उठा और माधुरी को खींच के तप्पड़ मारा माधुरी निचे गिरी उसके होठो ( लिप्स ) से खून निकलने लगा.
में ; शेरनी ये मत भूल के शेर पे भी सवा शेर होता हे.
मेने माधुरी के बल पकडे और जब बल खींचे तो उसका फेस ऊपर हो गया माधुरी की आँखों में अंशु थे और लिप्स से खून निकल रहा था. लकिन मुझे बिलकुल भी दया नहीं आई. सायद जलन की वजह से माधुरी को मेने पहेली बार हाथ उठाया था लेकिन मेरे गुस्से और जलन की वजह से में बिलकुल भी नहीं पिग्ला.
मेने बीएड के किनारे पर माधुरी को पटका और कमर में हिस्से को पंजो से जकड के उठाया वो पूरी नंगी थी. मेने अपना लैंड माधुरी की छूट पे रखा और जोर का झटका मारा और माधुरी के बालो को जोर से पीछे की तरफ खींचा. जिस से माधुरी का फेस ऊपर आसमान की तरफ उठ गया. माधुरी दर्द से चिल्लाई. मगर में परवाह न करते जोर से झटका मारा.
माधुरी ; अहह स प्लीज तपन अहह मुझे माफ़ कार्डो.
वो रो रही थी उसकी आँखों में अंशु थे में रुका और उसका मुँह जोर से पकड़ के पीछे जातक के बोलै.
में ; क्यों तू तो शेरनी हे न कोई नहीं हरा सकता न तुजे.
माधुरी ; शेरनी को सिर्फ शेर हरा सकता हे.
मेने जोर जोर से चुदाई चालू कर दी बड़ी बेहरमी से झटके नर रहा था ऐसा मेने पहेली बार किया था लेकिन तब मुझे पछतावा नहीं था.
माधुरी ; अहह उम्म्म्म.
में आगे ज़ुका माधुरी के सर को पकड़ा और जबरदस्त किश की उसके होठो को को भी काट खाया.
माधुरी ; प्लीज तपन आह्हः नही..
मेने अपने मुँह के जबड़ो से माधुरी की गरदन पीछे से पस्काद ली लेकिन उसने मेरा ऐसा करने से मुश्कुरै और बोली.
माधुरी ; है तुम हो अह्ह्ह तुम hi मेरे शेर हो. लव यू तपन कोई रहें मत करना मुझपे. Ahhhh..sssss करलो करलो मुझे अपने वश में करलो.
और माधुरी हर जाती हे क्यों मुझे पता नहीं सायद वो मुझे जितना चाहती हो माधुरी ने पुरे सेक्स के दौरान एक या दो बार hi अपनी आंखे खोली. लेकिन जलन और मेरी तड़प में कारन मेने जो किया बाद में मुझे बहोत अफ़सोस हुआ.
जिस माधुरी को मेने प्यार किया उसे बेरहमी से पिता और उसके साथ जबरदस्ती की सायद ये बलात्कार भी था मुझे अपने आप से घिरना होने लगी. में अब टूट चूका था माधुरी भी बीएड पे रट रट सो गई जी छह रहा था उसे गले लागलु और माफ़ी मांगू लेकिन ऐसा नहीं कर पाया. माधुरी भी नींद में पूरी रत बड़बड़ा रही थी.
माधुरी ; लव यू तपन प्लीज मुझे छोड़ के मत जाओ में तुम्हारी ह
में उसकी हालत देख नहीं पाया सोफे पर बैठे बैठे सो गया तक़रीबन पूरी रत में सो नहीं पाया. सुबह के 4 बज मुझे नींद आ गई.