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सुबह सुबह हवेली मैं सब उठ चुके थे अभी 8 बज रहे थे और अपने अंकित भाई मजेसे हठी बेच कर सो रहे थे
थोड़ी देर मैं अंकित के दूर र जोर से नॉक होता है
खत.... खत.... खत..... खत.......
अंकित :अबे ये कोण आज्ञा डिस्टर्ब करने
मनीषा :बीटा दूर खोल अंकित
अंकित दूर ओपन करता है तो सामने मनीषा कड़ी थी वो अंदर आके अंकित को गले लगाती है
मनीषा :उठ गया मेरा बचा
अंकित : क्या माँ थोड़ी देर सोने देती कल बहुत थक गया था पर आपने उठा दिया
मनीषा : ी ऍम सॉरी बेबी पर अब उठ जाओ ब्रेकफास्ट रेडी है जल्दी निचे आजाओ ok
अंकित
k माँ
फिर मनीषा प्यार से अंकित के सर पर किश करती है और चली जाती है
अंकित भी फ्रेश होने चला जाता है फिर तैयार होकर निचे चला जाता है जहा मनीषा उसका वेट कर रही थी
फिर वो और मनीषा अपना ब्रेकफास्ट लेकर टेबल पर आजाता है जहा दीपा कविता और एक ायरत और एक लड़का बैठे थे
मनीषा : बीटा ये है सलोनी की भाभी मोहिनी और उसका बीटा रोहन ये तुम्हारी hi आगे का है और ये है मेरा बीटा अंकित
अंकित :होई एवरीवन
मोहिनी: hello अंकित
रोहन :हे what's उप बडी
अंकित : फिट एंड फाइन एंड यू
रोहन : में तो बीआरओ
फिर सब नास्ता करने लगते है सब नास्ता करते हुए इधर उठेर की बाते करने लगते है पर मोहिनी बस अंकित को hi देख रही थी और किसी ने ये बात नोटिस नहीं की पर अंकित रोहन से बात करते हुए उसने ये बात जान ली
फिर ये सब लोग निकल गए अपने अपने काम मैं फिर अंकित थोड़ी देर आर्यन से और कारन से बात करता है और निकल जाता है बहार गार्डन मैं घूमने वो घूम hi रहा था की तभी उसने देखा की बहार गेट पर कुछ लोगो की भीड़ जमा थी ये गेट पीछे की साइड होने से किसी को कुछ पता नहीं चल सकता था अंकित ने देखा वह पर कुछ लोग बहस कर रहे थे तो वो उठेर की और चल पड़ा तब उसे देखा की वह पर मनीषा सलोनी सौरभ और सलोनी खड़े थे और कुछ डाकू जैसे लोग जो दिखने मैं hi खुखार लग रहे थे और उनके पास दोनाली वाली गन्स भी थी अंकित वह जाने लगता है
यहाँ हम डाकू और इन सब की बाते सुनते है
करीब 5 डाकू थे जिसमे से एक लीडर था और बाकि सब भाड़े के टट्टू
सलोनी :देखो यहाँ से चले जाओ यहाँ हु मरी बेटी की शादी है यौम यहाँ कोई भी पन्गा नहीं चाहते
डी1 जो की मुँह से बीड़ी फुक रहा था वो बोलै
D1:humne भी तुमसे कहा हमे 5 लाख और दो जवान लड़किया देदो हम चले जायेंगे नहीं तो कल शादी मैं आएंगे और यहाँ की जितनी भी लड़किया है उन्हें तुम्हारे सामने छोड़ेंगे
सौरभ ने उसे एक थप्पड़ मारा
सौरभ :सेल गन्दी नाली के कीड़े अपने काम से मतलब रख और निकल यहाँ से नहीं तो तुझे पता नहीं के तेरा क्या हाल होगा मेरी पहुंच बहुत ऊपर तक है
डी1 को थप्पड़ कहते देख डी3 गुस्से मैं सौरभ के सर मैं अपनी गन से मरता है तो सौरभ वही बेहोस होजाता है
सलोनी :ये क्या किया तुम्हे तो मैं छोड़ूंगी नहीं
मनीषा : तुम सब अब बचोगे नहीं
मनीषा की बात सुनके डी4 आकर मनीषा क्क हाथ पकड़ लेता है तो मनीषा उससे छूटने केलिए जाट पटाने लगती है
सलोनी :उसे चोर कमीने नहीतो तेरी जान लेलूँगी
डी4 मनीषा को चोर के सलोनी को पकड़ लेता है
तभी किसी को कुछ समाज आता उससे पहले hi एक मुक्का डी4 के माथे पे पड़ा
और वो दूर जाकर गिरा
सब ने पंच मरने वाले सख्श को देखा तो वो कोई और नहीं अंकित था
डी3 जाकर डी4 को देखता है तो डी4 के मुहसे कान से नाकसे और आखो से भी खून निकल रहा था डी3 जब चेक करता है तो वो घबरा कर डी1 को बोलता है
डी3 :सरदार ये मर चूका है ये बात सुनके तो वह खड़े हर किसी के पेअर दर से काँप जाते है क्यों की डी4 कोई सिंगल पसली नहीं था एक दम हत्ता कट्टा बाँदा था जिससे अंकित ने एक hi पंच मैं परलोक सुधर दिया
डी1 :सेल तेरी ये हिम्मत आज तो तेरी माँ को तेरे सामने छोडूंगा
अंकित ये सुनकर फुल गुस्से मैं आगया
मनीषा दीपा और सलोनी सौरभ को लेकर पीछे हैट गए और जब मनीषा ने ये सुना तो वो अपना सर पीट लेती है
दीपा : क्या हुवा मनु
मनीषा : ये सब आज नर्कवासी होने वाले है चलो कुछ एंटरटेनमेंट होगा मज़ा आएगा
फिर अंकित उन चारो को कपड़ो की तरह धोडालता है और तीन लोगो की तो कहानी hi ख़तम करदेता है और डी1 को इतना मरता है की उसकी सरीर की साडी हड्डिया टूट जाती है और वो बेहोश होजाता है
फिर वो लोग वह से जाने केलिए पीछे मुड़े hi थे की डी1 जैसे तैसे खड़ा हुवा और घुस दे सलोनी के ऊपर एक निशाना लगया और बोलै
डी1 :सुन बे रैंड अब यहाँ बेटी की शादी नहीं तेरी मौत का मातम होगा कोई कुछ कर पता उससे पहले hi एक गोली चली जो सलोनी की और चली थी पर अंकित ने भाग सलोनी को कवर किया और गोली अंकित के हाथ को चुकार निकल गयी
अंकित :aaaaaahhhhhhhhhhh
मनीषा की तो जान हलक मैं आगयी
मनीषा :अंकित बीटा तू ठीक तो हैं
पर अंकित संभाला और डी1 के पास जाकर उससे घुस चीन कर उसके मुँह मैं थुश थी और दोबार फायर किया और डी1 की भी कहा नई ख़तम फिर अंकित सब के पास आजाता है अब सौरभ भी होसे मैं आचुका था
मनीषा :अंकित बीटा तुम ठीख तो हैना हे भगवन कोई जल्दी से फिरस्टैड बॉक्स ले आओ कोटना खून बह रहा है
सलोनी :अंकित बीटा तुम ठीक होना जल्दी चलो और चिंता मूत करो मेरे भैया बिजनेसमैन के साथ डॉक्टर भी है
अंकित :अरे आप सब चिंता मूत करिये गोली बस चुकार निकल गयी है मैं ठीक हु मनीषा तो अंकित को अपने सीने से लागलेटी है और रोने लगती है
अंकित :माँ प्लीज चुप होजाये मैं ठीक हु ी ऍम फाइन
मनीषा :जानती हु बीटा पर माँ hi तेरी चिंता तो होगी हिना
अंकित को आज माँ ईशा के सीने से कोई बुरी फाइलिंग नहीं आरही थी आअज उसे फिरसे मनीषा के अंडर की ममता महसूस हो रही थी
फिर अंकित का ट्रीटमेंट हुवा और वो थोड़ी देर आराम करने रूम मैं आगया वही hi सलोनी सौरभ रश्मि और कविता और दीपा भी थी
मनीषा अंकित का दूसरा हाथ पकड़ कर बैठी थी
सलोनी :अंकित बीटा थैंक्स आज तुम्हारी वजह से मैं मरते मरते बची हु तुम्हारा ये एहसान मैं कैसे चूका पाऊँगी ये तो मुझे नहीं पता
अंकित :देखिये आंटी येतो मेरा फ़र्ज़ था आप माँ की फ्रेंड हो तो मेरी आंटी हो और फमलीय मेंबर्स को कोई थैंक्स कहता है क्या और रही बात एहसान की तो ये बात मुझे न समज मैं आती है न समझना कहता हु तो रिलेक्स
सलोनी :जैसा मनु ने कहा था वैसे hi हो
अच्छा आज पूल पार्टी है याद हैना
पर अंकित तुम कैसे आओगे तुम्हे तो चोट लगी है
मनीषा : बीटा कोई बात नहीं तुम यहाँ आराम करो मैं यही तुम्हारे पास hi हु
अंकित :अरे आप सुब चिंता मूत करिये मैं ठीक हु और पूल पार्टी मैं भी आऊंगा और रही बात चोट की तो तो मेरी चोट ठीक होगयी है ये देखो
फिर अंकित अपनी पट्टी खोलता है तो उसका घाव भर चूका था और पहले जैसा हो चूका था
सभी ये देख कर शॉक होजाते है
मनीषा :बीटा ये कैसे हुवा कोई भी घाव इतनी जल्दी हिल नहीं होता तो तुमने कैसे करलिया
अंकित :ये तो सब नेचुरल है और मैं अकेला ऐसा इन्शान नहीं हु मेरे जैसे दुनिया मैं कई इन्शान है जिनकी हीलिंग पावर नार्मल ह्यूमन से ज्यादा है ok तो डोंट बे पेनिस चलो अब मैं थोड़ी देर बहार गर्डर मैं घूम कर आता हु माइड थोड़ा फ्रेश होजायेगा और अंकित फिर बाथ रूम मैं चला जाता है
मनीषा : चलो हम भी चलते है पूल पार्टी से पहले थोड़ा स्पा होजाये
सलोनी :है चलो आज तो बहोत hi मूत और रूस की खूबसूरत लड़कियों को बुलाया है हमे यहाँ हमे स्पा देंगी और पूल पार्टी मैं हमारे साथ मजे करेंगी
अंकित बाथरूम से इनकी बात सुन रहा था उसे लगा की मनीषा भी उनके साथ जाएगी
फिर सब चले गए पर मनीषा और रश्मि वही रहे
अंकित बहार आया
मनीषा :बीटा यहाँ आ मुझे तुझसे कुछ बात करनी है रश्मि बस दो मिनट मैं जरा अंकित से अकेले में बात करके आती हु
फिर ये दोनों बेलकनि मैं आगये
अंकित :यस माँ बोलिये
मनीषा : बीटा मुझे पता है की मैं किसी और के साथ लेस्बियन करू ये तुझे अच्छा नहीं लगेगा पर क्या मैं अपने फ्रेंड के साथ थोड़े मजे करलु
अंकित :ठीक है माँ मैं कुछ ज्यादा hi इस मामले मैं स्ट्रिक्ट होगया था मैं भूल गया था की सब की अपनी अपनी ी छाए होती है तो मेरी और से आपको फुल परमिसन है पैर ओनली लेडीज no जेंट्स ok
मनीषा :बीटा मेरे जिस्म को पर तो सर तेरा और तेरे पापा का हक़ है किसी और का नहीं थैंक्स बीटा पर तुझे एक और बात बतानी है वो नेहा का फ़ोन आया था बता रही थी की निशा दीदी की तबियत ख़राब है
अंकित इतना सुनते hi टेंशन मैं आज्ञा
अंकित :क्या माँ की तबियत ख़राब है और किसी ने मुझे बताया भी नहीं अब कैसे है वो रुको मैं फ़ोन करता हु
अंकित जल्दी से अपना फ़ोन निकल कर निशा के नंबर पर कॉल करता है
यहाँ रावल हाउस मैं निशा अपने रूम मैं आराम कर रही थी और नेहा और मोनिका उसके पास बैठी थी फ़ोन की रिंग से निशा उठ जाती है तभी नेहा उसके पास आकर फ़ोन की स्क्रीन पर देखती है और निशा को कहती है
नेहा : माँ अंकित का फ़ोन
निशा की आखोंस से आशु निकल जाता है
निशा :फ़ोन पिछ कर और स्पेकेर पर रख बोलना मैं सो रही हु ok
यहाँ अंकित परेशां हो रहा था
अंकित :के ों माँ पिछ उप थे फ़ोन
तभी फ़ोन पिछ हुवा और अंकित बरस पड़ा
अंकित : hello माँ कैसी हो आप मैंने सुना आपकी तबियत ख़राब है माँ प्लीज कुछ बोलिये मुझे बहुत टेंशन होरहा है माँ प्लीज
बोलते बोलते अंकित की आखों मैं भी आशु आजाते है जो मनीषा देख लेती है
नेहा :हीलो भाई ये मैं हु नेहा
अंकित : नेहा दी कैसे हुवा ये आपको माँ का ध्यान रखना चाहिए था न आखिर माँ की तबियत कैसे ख़राब हुयी
नेहा :अरे भाई टेंशन मत ले माँ को बस थोड़ा फीवर और थोड़ी वीकनेस है बाकि माँ ठीक है
अंकित : मैं अभी वह आरहा हु
नेहा :भाई भाई संत होजा तुझे यहाँ आने की जरुरत नहीं है हम शूम है यहाँ तू बस शादी एन्जॉय कर
अंकित : दी आप किसी बात कर रही हो शादी क्या माँ से इम्पोर्टेन्ट है क्या
नेहा :भाई अगर ऐसे तू आया न तो माँ को बहुत नाराज़ होंगी देख तुझे माँ की कसम
अंकित :अरे दीदी कसम क्यों देदी और अब मेरी बात ध्यान से सुनो मैं दो दिन बाद आऊंगा और माँ मुझे बिलकुल ठीक चाहिए किसी भी हालत मैं उनका ा छे से ध्यान रखना ok
नेहा : ok भाई और भाई कभी हु मरी भी इतनी फ़िक्र किया कर
अंकित : प्लीज दी मजाक मत करो अभी
नेहा
k बबाचल भाई
अंकित : अच्छा एक काम करो फ़ोन माँ के गाल के पास रखो
नेहा ने निशा के गाल के पास फ़ोन रखा
अंकित : उउउउउम्मम्मम्मम गेट वेल सून माँ
ब्यय दीदी
और फ़ोन कट होगया और अंकित मनीषा के गले लग गया
अंकित :माँ माँ (निशा) को कुछ होगा तो नहींए
मनीषा : कुछ नहीं होगा बीटा वो जल्दी hi ठीक होजायेगी
यहाँ :निशा अंकित की हरकत से रोने लगती है वैसे तो उसे ये पता था की अंकित उसे बहुत प्यार करता है पर आज जैसे निशके बीमार होने पर रियेक्ट किया उससे निशा को समाज मैं आगया की अंकित अपनी जान से ज्यादा उसे कहता है
नेहा और मोनिका निशा के गले लग जाती है
मोनिका :माँ प्लीज चुप होजयिये भाई अब आपसे नाराज़ नहीं रहेगा आपने देखना वो आपसे कितना प्यार करता है
निशा : है बीटा चलो अब खाना खालो
अब फिर चलते है हवेली की और यहाँ मनीषा अंकित के रूम से चली गयी पर रश्मि वही थी
अंकित :अरे आप यहाँ
रश्मि : है वो मुझे तुमसे कुछ कहना था
अंकित :है बोलिये न ओतय
रश्मि :अंकित मैंने कल रात तुम्हे और कविता को सेक्स करते देखा था सच कहु तो मुझे भी तुम्हारे साथ ये सब करना है पर मैं सूरे नहीं थी तब पर अब मुझे पूरा यकीं है की तुम्हारे साथ कोई खतरा नहीं है मुझे
अंकित
k पर क्या आप ये सब करने केलिए दिलसे तैयार है
रश्मि : है मैं तैयार हु और मुझे पता है की तुम किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करते
अंकित :तो चलिए करते है
रश्मि :अभी नहीं रात को मैं आउंगी ok
अंकित :ठीक है
फिर रश्मि अंकित को एक प्यास सके किश देकर निकल जाती है और अंकित गार्डन की और निकल जाता है
अभी उसे थोड़ी डोर एक बड़ा सा पेड दीखता है और वह कोई बैठा हुवा नज़र आता है तो वो वह चला जाता है
वह कोई और नहीं मनीषा और प्रिय बैठे थे प्रिय जो की सौरभ की बेहेन थी
अंकित चुपके से उनकी बाते सुनता है
मनीषा :अरे प्रिय यार तुम क्यों नहीं आना चाहती पूल पार्टी मैं
प्रिय :मनु मक़िन क्या करू मेरा भी मन है मैं पपर्टी मैं जाऊ और मजे करू और एक तरफ ये छूट की आग है की चैन hi नहीं आता मेरे पति तो मुझे संतुस्ट नहीं करलेते उन्होंने तो कहा है की में चाहते सेक्स कर सकती हु पर अगर इज़्ज़त ख़राब हुयी तो वो मुझे डाइवोर्स दे देंगे और ऐसा इन्शान मिलना तो. बहुत hi मुश् किल हटा है
ऊपर से मेरी सास मुज पर हर वक़्त नज़र रखती है मनु अब तुम hi बताओ की मैं क्या करू
मनीषा :एक काम करसकते है तुम मेरे बेटे अंकित को जानती hi होगी
प्रिय :है अंकित उसे तो मैंने देखा है और उसे देख कर hi तो आग बढ़ गयी है पर वो बच्चा क्या मेरी आग बजा पायेगा
मनीषा :अरे प्रिय वो सर आगे से बच्चा है उसका लुंड बड़े से बड़ी छूट की गर्मी निकल चूका है
प्रिय : मनु देख मज़ाक मत कर वो बच्चा क्या कर लेगा
यह ा अंकित अपने मन में बोलता है
अंकित : अरे एक बार ऑटो सही अगर इस बच्चे ने तेरे पेट मैं बच्चा न दाल दिया तो मैं भी एक नहीं
मनीषा :मेने कहा न वो सिर्फ आगे से बच्चा है एक बार तू उसके साथ जा तो सही अपने पति को तू खुद डाइवोर्स दे देगी
प्रिय :ठीक है मनु तू कहती है तो ठीक है बोलो उसे
नेक्स्ट चुदाई
अपडेट पोस्टेड दोस्तों
ी होप यू लिखे आईटी
सी यू सून
ब्बये
सुबह सुबह हवेली मैं सब उठ चुके थे अभी 8 बज रहे थे और अपने अंकित भाई मजेसे हठी बेच कर सो रहे थे
थोड़ी देर मैं अंकित के दूर र जोर से नॉक होता है
खत.... खत.... खत..... खत.......
अंकित :अबे ये कोण आज्ञा डिस्टर्ब करने
मनीषा :बीटा दूर खोल अंकित
अंकित दूर ओपन करता है तो सामने मनीषा कड़ी थी वो अंदर आके अंकित को गले लगाती है
मनीषा :उठ गया मेरा बचा
अंकित : क्या माँ थोड़ी देर सोने देती कल बहुत थक गया था पर आपने उठा दिया
मनीषा : ी ऍम सॉरी बेबी पर अब उठ जाओ ब्रेकफास्ट रेडी है जल्दी निचे आजाओ ok
अंकित
फिर मनीषा प्यार से अंकित के सर पर किश करती है और चली जाती है
अंकित भी फ्रेश होने चला जाता है फिर तैयार होकर निचे चला जाता है जहा मनीषा उसका वेट कर रही थी
फिर वो और मनीषा अपना ब्रेकफास्ट लेकर टेबल पर आजाता है जहा दीपा कविता और एक ायरत और एक लड़का बैठे थे
मनीषा : बीटा ये है सलोनी की भाभी मोहिनी और उसका बीटा रोहन ये तुम्हारी hi आगे का है और ये है मेरा बीटा अंकित
अंकित :होई एवरीवन
मोहिनी: hello अंकित
रोहन :हे what's उप बडी
अंकित : फिट एंड फाइन एंड यू
रोहन : में तो बीआरओ
फिर सब नास्ता करने लगते है सब नास्ता करते हुए इधर उठेर की बाते करने लगते है पर मोहिनी बस अंकित को hi देख रही थी और किसी ने ये बात नोटिस नहीं की पर अंकित रोहन से बात करते हुए उसने ये बात जान ली
फिर ये सब लोग निकल गए अपने अपने काम मैं फिर अंकित थोड़ी देर आर्यन से और कारन से बात करता है और निकल जाता है बहार गार्डन मैं घूमने वो घूम hi रहा था की तभी उसने देखा की बहार गेट पर कुछ लोगो की भीड़ जमा थी ये गेट पीछे की साइड होने से किसी को कुछ पता नहीं चल सकता था अंकित ने देखा वह पर कुछ लोग बहस कर रहे थे तो वो उठेर की और चल पड़ा तब उसे देखा की वह पर मनीषा सलोनी सौरभ और सलोनी खड़े थे और कुछ डाकू जैसे लोग जो दिखने मैं hi खुखार लग रहे थे और उनके पास दोनाली वाली गन्स भी थी अंकित वह जाने लगता है
यहाँ हम डाकू और इन सब की बाते सुनते है
करीब 5 डाकू थे जिसमे से एक लीडर था और बाकि सब भाड़े के टट्टू
सलोनी :देखो यहाँ से चले जाओ यहाँ हु मरी बेटी की शादी है यौम यहाँ कोई भी पन्गा नहीं चाहते
डी1 जो की मुँह से बीड़ी फुक रहा था वो बोलै
D1:humne भी तुमसे कहा हमे 5 लाख और दो जवान लड़किया देदो हम चले जायेंगे नहीं तो कल शादी मैं आएंगे और यहाँ की जितनी भी लड़किया है उन्हें तुम्हारे सामने छोड़ेंगे
सौरभ ने उसे एक थप्पड़ मारा
सौरभ :सेल गन्दी नाली के कीड़े अपने काम से मतलब रख और निकल यहाँ से नहीं तो तुझे पता नहीं के तेरा क्या हाल होगा मेरी पहुंच बहुत ऊपर तक है
डी1 को थप्पड़ कहते देख डी3 गुस्से मैं सौरभ के सर मैं अपनी गन से मरता है तो सौरभ वही बेहोस होजाता है
सलोनी :ये क्या किया तुम्हे तो मैं छोड़ूंगी नहीं
मनीषा : तुम सब अब बचोगे नहीं
मनीषा की बात सुनके डी4 आकर मनीषा क्क हाथ पकड़ लेता है तो मनीषा उससे छूटने केलिए जाट पटाने लगती है
सलोनी :उसे चोर कमीने नहीतो तेरी जान लेलूँगी
डी4 मनीषा को चोर के सलोनी को पकड़ लेता है
तभी किसी को कुछ समाज आता उससे पहले hi एक मुक्का डी4 के माथे पे पड़ा
और वो दूर जाकर गिरा
सब ने पंच मरने वाले सख्श को देखा तो वो कोई और नहीं अंकित था
डी3 जाकर डी4 को देखता है तो डी4 के मुहसे कान से नाकसे और आखो से भी खून निकल रहा था डी3 जब चेक करता है तो वो घबरा कर डी1 को बोलता है
डी3 :सरदार ये मर चूका है ये बात सुनके तो वह खड़े हर किसी के पेअर दर से काँप जाते है क्यों की डी4 कोई सिंगल पसली नहीं था एक दम हत्ता कट्टा बाँदा था जिससे अंकित ने एक hi पंच मैं परलोक सुधर दिया
डी1 :सेल तेरी ये हिम्मत आज तो तेरी माँ को तेरे सामने छोडूंगा
अंकित ये सुनकर फुल गुस्से मैं आगया
मनीषा दीपा और सलोनी सौरभ को लेकर पीछे हैट गए और जब मनीषा ने ये सुना तो वो अपना सर पीट लेती है
दीपा : क्या हुवा मनु
मनीषा : ये सब आज नर्कवासी होने वाले है चलो कुछ एंटरटेनमेंट होगा मज़ा आएगा
फिर अंकित उन चारो को कपड़ो की तरह धोडालता है और तीन लोगो की तो कहानी hi ख़तम करदेता है और डी1 को इतना मरता है की उसकी सरीर की साडी हड्डिया टूट जाती है और वो बेहोश होजाता है
फिर वो लोग वह से जाने केलिए पीछे मुड़े hi थे की डी1 जैसे तैसे खड़ा हुवा और घुस दे सलोनी के ऊपर एक निशाना लगया और बोलै
डी1 :सुन बे रैंड अब यहाँ बेटी की शादी नहीं तेरी मौत का मातम होगा कोई कुछ कर पता उससे पहले hi एक गोली चली जो सलोनी की और चली थी पर अंकित ने भाग सलोनी को कवर किया और गोली अंकित के हाथ को चुकार निकल गयी
अंकित :aaaaaahhhhhhhhhhh
मनीषा की तो जान हलक मैं आगयी
मनीषा :अंकित बीटा तू ठीक तो हैं
पर अंकित संभाला और डी1 के पास जाकर उससे घुस चीन कर उसके मुँह मैं थुश थी और दोबार फायर किया और डी1 की भी कहा नई ख़तम फिर अंकित सब के पास आजाता है अब सौरभ भी होसे मैं आचुका था
मनीषा :अंकित बीटा तुम ठीख तो हैना हे भगवन कोई जल्दी से फिरस्टैड बॉक्स ले आओ कोटना खून बह रहा है
सलोनी :अंकित बीटा तुम ठीक होना जल्दी चलो और चिंता मूत करो मेरे भैया बिजनेसमैन के साथ डॉक्टर भी है
अंकित :अरे आप सब चिंता मूत करिये गोली बस चुकार निकल गयी है मैं ठीक हु मनीषा तो अंकित को अपने सीने से लागलेटी है और रोने लगती है
अंकित :माँ प्लीज चुप होजाये मैं ठीक हु ी ऍम फाइन
मनीषा :जानती हु बीटा पर माँ hi तेरी चिंता तो होगी हिना
अंकित को आज माँ ईशा के सीने से कोई बुरी फाइलिंग नहीं आरही थी आअज उसे फिरसे मनीषा के अंडर की ममता महसूस हो रही थी
फिर अंकित का ट्रीटमेंट हुवा और वो थोड़ी देर आराम करने रूम मैं आगया वही hi सलोनी सौरभ रश्मि और कविता और दीपा भी थी
मनीषा अंकित का दूसरा हाथ पकड़ कर बैठी थी
सलोनी :अंकित बीटा थैंक्स आज तुम्हारी वजह से मैं मरते मरते बची हु तुम्हारा ये एहसान मैं कैसे चूका पाऊँगी ये तो मुझे नहीं पता
अंकित :देखिये आंटी येतो मेरा फ़र्ज़ था आप माँ की फ्रेंड हो तो मेरी आंटी हो और फमलीय मेंबर्स को कोई थैंक्स कहता है क्या और रही बात एहसान की तो ये बात मुझे न समज मैं आती है न समझना कहता हु तो रिलेक्स
सलोनी :जैसा मनु ने कहा था वैसे hi हो
अच्छा आज पूल पार्टी है याद हैना
पर अंकित तुम कैसे आओगे तुम्हे तो चोट लगी है
मनीषा : बीटा कोई बात नहीं तुम यहाँ आराम करो मैं यही तुम्हारे पास hi हु
अंकित :अरे आप सुब चिंता मूत करिये मैं ठीक हु और पूल पार्टी मैं भी आऊंगा और रही बात चोट की तो तो मेरी चोट ठीक होगयी है ये देखो
फिर अंकित अपनी पट्टी खोलता है तो उसका घाव भर चूका था और पहले जैसा हो चूका था
सभी ये देख कर शॉक होजाते है
मनीषा :बीटा ये कैसे हुवा कोई भी घाव इतनी जल्दी हिल नहीं होता तो तुमने कैसे करलिया
अंकित :ये तो सब नेचुरल है और मैं अकेला ऐसा इन्शान नहीं हु मेरे जैसे दुनिया मैं कई इन्शान है जिनकी हीलिंग पावर नार्मल ह्यूमन से ज्यादा है ok तो डोंट बे पेनिस चलो अब मैं थोड़ी देर बहार गर्डर मैं घूम कर आता हु माइड थोड़ा फ्रेश होजायेगा और अंकित फिर बाथ रूम मैं चला जाता है
मनीषा : चलो हम भी चलते है पूल पार्टी से पहले थोड़ा स्पा होजाये
सलोनी :है चलो आज तो बहोत hi मूत और रूस की खूबसूरत लड़कियों को बुलाया है हमे यहाँ हमे स्पा देंगी और पूल पार्टी मैं हमारे साथ मजे करेंगी
अंकित बाथरूम से इनकी बात सुन रहा था उसे लगा की मनीषा भी उनके साथ जाएगी
फिर सब चले गए पर मनीषा और रश्मि वही रहे
अंकित बहार आया
मनीषा :बीटा यहाँ आ मुझे तुझसे कुछ बात करनी है रश्मि बस दो मिनट मैं जरा अंकित से अकेले में बात करके आती हु
फिर ये दोनों बेलकनि मैं आगये
अंकित :यस माँ बोलिये
मनीषा : बीटा मुझे पता है की मैं किसी और के साथ लेस्बियन करू ये तुझे अच्छा नहीं लगेगा पर क्या मैं अपने फ्रेंड के साथ थोड़े मजे करलु
अंकित :ठीक है माँ मैं कुछ ज्यादा hi इस मामले मैं स्ट्रिक्ट होगया था मैं भूल गया था की सब की अपनी अपनी ी छाए होती है तो मेरी और से आपको फुल परमिसन है पैर ओनली लेडीज no जेंट्स ok
मनीषा :बीटा मेरे जिस्म को पर तो सर तेरा और तेरे पापा का हक़ है किसी और का नहीं थैंक्स बीटा पर तुझे एक और बात बतानी है वो नेहा का फ़ोन आया था बता रही थी की निशा दीदी की तबियत ख़राब है
अंकित इतना सुनते hi टेंशन मैं आज्ञा
अंकित :क्या माँ की तबियत ख़राब है और किसी ने मुझे बताया भी नहीं अब कैसे है वो रुको मैं फ़ोन करता हु
अंकित जल्दी से अपना फ़ोन निकल कर निशा के नंबर पर कॉल करता है
यहाँ रावल हाउस मैं निशा अपने रूम मैं आराम कर रही थी और नेहा और मोनिका उसके पास बैठी थी फ़ोन की रिंग से निशा उठ जाती है तभी नेहा उसके पास आकर फ़ोन की स्क्रीन पर देखती है और निशा को कहती है
नेहा : माँ अंकित का फ़ोन
निशा की आखोंस से आशु निकल जाता है
निशा :फ़ोन पिछ कर और स्पेकेर पर रख बोलना मैं सो रही हु ok
यहाँ अंकित परेशां हो रहा था
अंकित :के ों माँ पिछ उप थे फ़ोन
तभी फ़ोन पिछ हुवा और अंकित बरस पड़ा
अंकित : hello माँ कैसी हो आप मैंने सुना आपकी तबियत ख़राब है माँ प्लीज कुछ बोलिये मुझे बहुत टेंशन होरहा है माँ प्लीज
बोलते बोलते अंकित की आखों मैं भी आशु आजाते है जो मनीषा देख लेती है
नेहा :हीलो भाई ये मैं हु नेहा
अंकित : नेहा दी कैसे हुवा ये आपको माँ का ध्यान रखना चाहिए था न आखिर माँ की तबियत कैसे ख़राब हुयी
नेहा :अरे भाई टेंशन मत ले माँ को बस थोड़ा फीवर और थोड़ी वीकनेस है बाकि माँ ठीक है
अंकित : मैं अभी वह आरहा हु
नेहा :भाई भाई संत होजा तुझे यहाँ आने की जरुरत नहीं है हम शूम है यहाँ तू बस शादी एन्जॉय कर
अंकित : दी आप किसी बात कर रही हो शादी क्या माँ से इम्पोर्टेन्ट है क्या
नेहा :भाई अगर ऐसे तू आया न तो माँ को बहुत नाराज़ होंगी देख तुझे माँ की कसम
अंकित :अरे दीदी कसम क्यों देदी और अब मेरी बात ध्यान से सुनो मैं दो दिन बाद आऊंगा और माँ मुझे बिलकुल ठीक चाहिए किसी भी हालत मैं उनका ा छे से ध्यान रखना ok
नेहा : ok भाई और भाई कभी हु मरी भी इतनी फ़िक्र किया कर
अंकित : प्लीज दी मजाक मत करो अभी
नेहा
अंकित : अच्छा एक काम करो फ़ोन माँ के गाल के पास रखो
नेहा ने निशा के गाल के पास फ़ोन रखा
अंकित : उउउउउम्मम्मम्मम गेट वेल सून माँ
ब्यय दीदी
और फ़ोन कट होगया और अंकित मनीषा के गले लग गया
अंकित :माँ माँ (निशा) को कुछ होगा तो नहींए
मनीषा : कुछ नहीं होगा बीटा वो जल्दी hi ठीक होजायेगी
यहाँ :निशा अंकित की हरकत से रोने लगती है वैसे तो उसे ये पता था की अंकित उसे बहुत प्यार करता है पर आज जैसे निशके बीमार होने पर रियेक्ट किया उससे निशा को समाज मैं आगया की अंकित अपनी जान से ज्यादा उसे कहता है
नेहा और मोनिका निशा के गले लग जाती है
मोनिका :माँ प्लीज चुप होजयिये भाई अब आपसे नाराज़ नहीं रहेगा आपने देखना वो आपसे कितना प्यार करता है
निशा : है बीटा चलो अब खाना खालो
अब फिर चलते है हवेली की और यहाँ मनीषा अंकित के रूम से चली गयी पर रश्मि वही थी
अंकित :अरे आप यहाँ
रश्मि : है वो मुझे तुमसे कुछ कहना था
अंकित :है बोलिये न ओतय
रश्मि :अंकित मैंने कल रात तुम्हे और कविता को सेक्स करते देखा था सच कहु तो मुझे भी तुम्हारे साथ ये सब करना है पर मैं सूरे नहीं थी तब पर अब मुझे पूरा यकीं है की तुम्हारे साथ कोई खतरा नहीं है मुझे
अंकित
रश्मि : है मैं तैयार हु और मुझे पता है की तुम किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करते
अंकित :तो चलिए करते है
रश्मि :अभी नहीं रात को मैं आउंगी ok
अंकित :ठीक है
फिर रश्मि अंकित को एक प्यास सके किश देकर निकल जाती है और अंकित गार्डन की और निकल जाता है
अभी उसे थोड़ी डोर एक बड़ा सा पेड दीखता है और वह कोई बैठा हुवा नज़र आता है तो वो वह चला जाता है
वह कोई और नहीं मनीषा और प्रिय बैठे थे प्रिय जो की सौरभ की बेहेन थी
अंकित चुपके से उनकी बाते सुनता है
मनीषा :अरे प्रिय यार तुम क्यों नहीं आना चाहती पूल पार्टी मैं
प्रिय :मनु मक़िन क्या करू मेरा भी मन है मैं पपर्टी मैं जाऊ और मजे करू और एक तरफ ये छूट की आग है की चैन hi नहीं आता मेरे पति तो मुझे संतुस्ट नहीं करलेते उन्होंने तो कहा है की में चाहते सेक्स कर सकती हु पर अगर इज़्ज़त ख़राब हुयी तो वो मुझे डाइवोर्स दे देंगे और ऐसा इन्शान मिलना तो. बहुत hi मुश् किल हटा है
ऊपर से मेरी सास मुज पर हर वक़्त नज़र रखती है मनु अब तुम hi बताओ की मैं क्या करू
मनीषा :एक काम करसकते है तुम मेरे बेटे अंकित को जानती hi होगी
प्रिय :है अंकित उसे तो मैंने देखा है और उसे देख कर hi तो आग बढ़ गयी है पर वो बच्चा क्या मेरी आग बजा पायेगा
मनीषा :अरे प्रिय वो सर आगे से बच्चा है उसका लुंड बड़े से बड़ी छूट की गर्मी निकल चूका है
प्रिय : मनु देख मज़ाक मत कर वो बच्चा क्या कर लेगा
यह ा अंकित अपने मन में बोलता है
अंकित : अरे एक बार ऑटो सही अगर इस बच्चे ने तेरे पेट मैं बच्चा न दाल दिया तो मैं भी एक नहीं
मनीषा :मेने कहा न वो सिर्फ आगे से बच्चा है एक बार तू उसके साथ जा तो सही अपने पति को तू खुद डाइवोर्स दे देगी
प्रिय :ठीक है मनु तू कहती है तो ठीक है बोलो उसे
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