अपडेट 96 Part ी
रिकैप................
मास्टर के कॉल कट ते hi ैप धामा अपने ऑफिस निकल गए वहां टीम छोड़ कर …
जहाँ मनु और बाकी सब दिल्ली वापस जा रहे थे ..वहां जगन अपनी गांड के मरे जाने से रट हुए सो गया था …पैर रिया वहां बाथरूम में उल्टियां कर रही थी …
अब आगे........
मनु और बाकी सब अभी रस्ते में hi the…ki वहां रस्ते में विरंदा की कॉल आयी …मनु के पास .पैर क्युकी कार में और भी लोग थे ऐसे में मनु ने विरंदा को मस्सगे कर दिया की हु अभी थोड़ा बिजी है बाद में कॉल करेगा ..
जिसके बाद विरंदा ने भी बाद में कॉल करने का मैं बना लिया था ….
उधर रिया उल्टियां करते हुए बाथरूम में खुद से बोली “ ओह्ह!! सहित लगता है पिज़्ज़ा वाले ने मेरे मन्ना करने के बाद भी पिज़्ज़ा में टमाटर (टोमेटो) दाल दिया है …उसको कॉल पैर स्पेशलय मन किया था की टमाटर मत ऐड करना क्युकी मुझे टमाटर से एलर्जी है अब देखो होने लगी न उल्टियां …ओह!! माय गॉड ! न जाने यह उपपरवाले ने यह एलर्जी मुझे क्यों दी … ????”
रिया को टमाटर से एलर्जी थी जिसके चलते उसको उल्टियां हो रही थी …
उधार जगन रट हुए सो चूका था …उसका दर्द सिर्फ वही जनता था …जगन के लिए दुनिआ का सबसे बुरा दिन होगा आज का उसके हिसाब से …
उधर बाकी सब दिल्ली में आ चुके थे ..मनु की कार दिल्ली में जैसे hi एंटर हुई राकेश वहां से उतार गया ..जिसपर उसको मनु और बाकी सबने उसकी हेल्प के लिए राकेश को दिल से थैंक्स कहा ..
राकेश भी एक सरसरी निगाह सुमन और राज पैर देखते हुए मनु को कुछ हल्का सा इशारा करके चला गया ..उसका इशारा मनु समझ चूका था ….खैर वो सब अब वहां से आगे निकल गए जगन के घर की तरफ …
उधर मनु के घर पैर अजय जब वापस आया तोह वहां उससे घर में वहीँ उसके चाचा का नया ड्रामा त्यार मिला …(लास्ट अपडेट आपको याद होगा जिसमे jai-chand टाला तोड़ कर राजिंदर के ख़रीदे हुए माकन में घुस जाता है …)…
अजय ने आज फिर अपने घर में अपने माँ बाप को लड़ते हुए देखा …
सुमित्रा ..” … बस बहुत हुआ …आपका प्यारा भाई …अब हद पार कर चूका है …आज मेरे साथ काम करनेवाली एक साथी ने मुझे बताया की आपका वह कमीना भाई …jai-chander (अक Jai-chand ) अब हमारे माकन के नाम से कागज़ बनवा रहा है …समझ रहे हो न ???”….
राजिंदर ….”…मतलब ???”
सुमित्रा …”… मतलब …?? क्या …?? साफ़ है मकान हड़पने का काम शुरू कर दिया उस कमीने jai-chand ने …और आपको अभी भी लगता है की आपका पायरा भाई हमको चैन से जीने देगा …?????”
राजिंदर कुछ सोचते हुए …” …सुमित्रा यह सब तुमको किसने बताया …??? “
सुमित्रा ..”.. किसने बताया इससे जरूरी यह है की jai-chand नाम का hi नहीं काम का भी jai-chand है ..!”
राजिंदर ..” ..पैर माकन के सारे कागज़ात तोह तुम्हारे नाम हैं …फिर उसके हिसाब से मालिकिन तुम हुई न ..??और ऐसे कैसे वह कागज़ात बनवा सकता है …???”
सुमित्रा ..”… या तोह आप बहुत भोले हो ??? या आपका दिल अभी भी अपने भाई के लिए कुछ ज्यादा hi नरम है ..?? वर्ण यह सुनकर की jai-chand कागज़ बनवाने के लिए घूम रहा है आप कुछ न कुछ करते …”
राजिंदर “ …यार सुमित्रा वह सब तोह ठीक है ..मगर यह समझ नहीं आ रहा की जब ओरिजिनल कागज़ों के हिसाब से तुम मकान की मालिक हो तोह कोई कैसे नकली कागज़ बनवा सकता है …इस देश में कानून नाम की चीज़ है या नहीं ???”
सुमित्रा ..” …हु सब मुझे नहीं पता की कानून है या नहीं …पैर अगर कानून होता तोह कानून के हिसाब से इतने केस जो जमीनों के चल रहे हैं कोर्ट सिर्फ असली मालिक के कागज़ देखता और उसको उसका मैलकना हक़ देता …पैर इस देश सबसे बता सिरदर्द है केस …एक बार अगर किसी ने केस कर दिया ..तोह कर दिया!!! .. उसकी तर्रिकों में असली मालिक बस कोर्ट के चक्कर काट काट के थक जाता है ..और केस सालों सालों साल बस चलता रहता है ..जिसमे नुक्सान हमारे जैसे गरीबों का hi हुआ करता है ..और फ़र्ज़ी इंसान मज़े से अगली तारीख का इंतज़ार करता है …और तुम क्या चाहते हो हम कोर्ट के hi चक्कर लगते रहे …उसके पास तोह न काम है न काज ..पैर हमको तोह अपने बचूं का फ्यूचर देखना है …”
राजिंदर ..”.. पैर यह तुमको आखिर बताया किसने ..हो सकता है ..किसी ने बस तंग करने के लिए तुमको झूंठ कह दिया हो ???”…
सुमित्रा ..”.. एक बात आप भी समझ लीजिये की मैं भी बहार काम करती हूँ …रोज़ बहार काम करने जाती हूँ तोह बहुत लोगों को देख टी हूँ …ऐसे hi कोई झूंठ कहेगा और मैं यकीं कर लुंगी ऐसा नहीं है …??”
राजिंदर ..” फिर भी तुमको यह सब पता कैसे लगा ???”
सुमित्रा ..” … मेरे साथ में एक काम करने वाली औरत है उसका देवर लॉयर है …जिसके पास jai-chand उस माकन के कागज़ों के सिलसिले में गया था …उसको मैंने अपने ख़रीदे हुए माकन के बारे में और तुम्हारे प्यारे कमीने भाई की नियत के बारे में बताया हुआ था …सो जैसे hi वह उसके वकील देवर से मिला तोह उसने चाय देते हुए माकन का एड्रेस देख लिया …और अगले दिन मुझे बताया …इस बात को सुनते hi मेरा दिमाग घूम गया …की हु कमीना हमको चैन से जीने भी देगा या नहीं …एक छोटा सा माकन लिया है हमने कैसे कैसे पैसे जोड़कर पैर ..तुम्हारे भाई को उसमे भी चैन नहीं है …खुद कमा के खा नहीं सकता …न खुद कभी माकन खरीदने की सोचेगा ..पैर जब से हमने ख़रीदा है ..उसको भी बुरी नियत से देख रहा है ..क्या हमारे बचे नहीं हैं ???? क्या बचे सिर्फ उसी के हैं …??? और चलो मान भी लिया वह यह सब अपने बचूं के लिए कर रहा है ..पैर क्या उसके हाथ पेअर नहीं हैं ??? क्या ??? खुद कमाए खुद मकान ख़रीदे …!!! हमने यह माकन अपने बचूं के भविष्य के लिए लिया है ..jai-chand और उसके बच्चों के लिए नहीं …तुमने उसको बचपन से पला पोसा ..और उसको बड़ा किया …मैं जब आयी तोह तुमने उसकी शादी करवाई जिसमे मैंने अपने जेवर तक लगा दिए …एक औरत अपने जेवर अपने परिवार के लिए डाव पैर लगाती है …मैंने उस कमीने के लिए लगा दिए ..फिर भी हमे क्या सिला दिया उस कमीने और उसकी नयी बीवी ने ??? तुमको अचे से पता है …जब बात हमने मान ली क्युकी तब हम दोनों hi थे ..बचे नहीं हुए थे ..पैर अब हम दोनों के साथ हमारे दो बचे भी हैं उनके लिए hi मैंने घर से अपने कदम बहार निकले थे ..”
राजिंदर .. चुप चाप सुन रहा था …क्युकी सुमित्रा की बात से गुस्सा उसे भी jai-chand पैर आ रहा था …और बेहिसाब आ रहा था ..क्युकी सुमित्रा का एक -एक शब्द सुच था …पैर सुमित्रा का आज पारा बहुत हाई था …
सुमित्रा ..”…मैंने पहले भी कहा था …jai-chand अपनी जगह है ..तुम्हारा उस हरामी से लगाव भी अपनी जगह है ..पैर इनसब में मेरे दोनों बच्चों का हक़ नहीं लूटना चाहिए ..पैर अब ऐसा हो रहा है …और तुम चुप हो यह मुझे मंज़ूर नहीं है …अभी तक jai-chand को तुमने बहुत बचा लिया भाई के नाम पैर …! ..पैर अब jai-chand ने उस माकन पैर hi गलत नज़र नहीं राखी है ..अब उसने हमारे बचूं के फ्यूचर पैर नज़र …बुरी नज़र रख दी है ..सो अब बहुत हुआ …उसको बहुत दिनों से झेल लिया हमने …पैर अब नहीं उसे माकन से कल के कल बहार निकालो वार्ना मुझे मजबूरन पुलिस का सहारा लेना होगा …फिर jai-chand 2 मिनट में रस्ते पैर आ जायेगा …उसके बाद वह जाने या तुम ….! मुझे कोई लेना देना नहीं …मुझे मेरे बच्चों के हक़ के लिए अगर खुद के सुहाग से भी लड़ना पड़ा तोह वह भी कर गुज़रूंगी …बहुत किया है मैंने उस कमीने jai-chand का …पैर अब और नहीं…! मुझे मेरे बचे भी देखने हैं …..अब तुम सोचलो कैसे और क्या करना है …क्युकी मनु अभी यहाँ है नहीं सो तब तक का टाइम तुम्हारे पास है समझलो करना क्या है ..!!! वह रात दिन इस घर और इस फॅमिली के लिए एक कर रहा है ..बैशाख उसका काम ाचा चल रहा है और आगे हो सकता है वह और अजय आगे जाकर अचे से अछि और सुकून की ज़िन्दगी जिए ..पैर माँ बाप होने के नाते यह हमारे लिए कर्त्तव्य ,करम या वसीयत जो कुछ भी समझो यह माकन उनको मिलना चाहिए ….और कल के कल मुझे वह हराम का पिल्ला jai-chand घर के मेरे घर के बहार चाहिए …समझलो …” सुमित्रा ने राजिंदर को अल्टीमेटम देते हुए कहा …
राजिंदर …सुमित्रा का यह रूप देखकर कुछ बोल नहीं प् रहा था …पैर राजिंदर ने आखिरी कोशिश करते हुए सुमित्रा से कहा “ सुमित्रा पैर हम बडून की बात में क्या मनु को लाना सही है ??? …उसको बिच में लाना क्या सही होगा ???..हु बीटा है हमारा और अपने maa-baap के इन मामलों में बचूं को लाना क्या सही लगता है तुम्हें ???? एक बार सोच कर देखना ??”
राजिंदर ने लगभग पूरी तरह से मामला सुमित्रा के पीला में दाल दिया था उसे लग रहा था की शायद उसकी इन बातों से सुमित्रा शायद रुक जाये और मनु या अजय को इनसब से दूर रखेगी ..पैर शायद यह उसकी भूल थी.. बदले में जो सुमित्रा ने कहा उसे संकर राजिंदर और छिपकर सुन रहा अजय दोनों सोचने पैर मजबूर होगये ..
सुमित्रा “ तुम क्या सोचते हो या दुनिआ क्या सोचती है इसमें सोचने से ज्यादा मुझे यह लगता है की घर की ऐसी बताएं घर के हर एक बचे को पता होनी चाहिए …क्युकी हर बचा बहार जितना सीखता है उससे ज्यादा घर पैर सीखता है …और जब घर में hi बचूं को बचा बोलकर साइड कर दिया जाये तोह बात सही नहीं hai..tumko क्या लगता है ??? मनु को मैं बिच में ला रही हूँ ??? हु और अजय शुरू से hi हमारे बिच में हैं !! वह दोनों हमारे बिच में किसी कमज़ोरी की तरह नहीं हैं एक ताकत की तरह हैं ..मेरे दोनों बच्चों ने आज तक मुझसे या तुमसे कभी कुछ माँगा है ??? उनको बचपन से इनसब से दूर करती आयी हूँ ..पैर बचपन से उनको इनसब से दूर रखकर शायद मैंने गलत किया था ..क्युकी दुनिआ में जब भी ऐसा कोई मामला आता है तब बड़े बचूं को इनसब से दूर कर देते हैं ..पैर बचे बहार की दुनिआ और सपनो की दुनिआ में जीने लगते हैं ..पैर सुच असल में कुछ और होता है ..और बचपन तोह उनका जैसे तैसे काट जाता है पैर जब उनपर अचानक से या टाइम से जिम्मेदारी आती तोह वही बचे उस सपनो की दुनिआ जो उसने बचपन से जी है और असलियत को देखकर अचानक से ज़िन्दगी में बहुत कुछ समझ नहीं पते ..तब वह सही गलत में उलझ जाते hain..per बचपन में अगर उनको इनसब में अपने ma-baap के फैसले को देखने को मिलता तब उनको पता चलता की यह दुनिआ का असल सुच यही है की यहां हर पल ज़िन्दगी में दुःख और टेंशन उनको देखनी पड़ेगी …और उनको हर पल इनके लिए त्यार रहना होगा …मेरे बेटे बचपन से बेशक तुम्हारे और मेरे बिच में in-baton से दूर रहे पैर क्युकी घर छोटा है और ऐसे में उन्होंने अपने बाप और माँ की इन बेहासून को ज़रूर सुना होगा ..और तुम्हारे उस कमीने भाई की कामिनी हरकतोओं को भी सुना होगा ..जिसमे तुम्हारे na-kabil फैसले भी देखे होंगे …सो यह मत सोचना की उनको पता नहीं होगा ..पैर मेरे दोनों बेटे मेरी कमज़ोरी नहीं ताकत hain..or बचपन से दुखों की भट्टी में तपकर मेरे बेटे मज़बूत बने हैं उनको अचे से पता है की कब क्या और कैसे करना है …यह ज़िन्दगी है कोई परियूं की कहानी नहीं है यहाँ ..हरपाल धोखा ,dukh,takleef ज़िन्दगी में दो पल की खुशियूं से ज़ादा होंगे ..और दूर क्यों जाते हो खुद तुम खुद को देख लो बहार क्या तुम्हारे भाई के नामपर तुम सर उठा कर चलते हो??? या अपने बेटे के नाम पैर ?? और तुम ऐसे कितने बचूं को जानते हो जो हमारे मनु की तरह इस काम उम्र में ऐसा कामयाब hai..or जहाँ लोग खुद के खाने कामने में बिजी रहते हैं वहां मेरा बीटा कितने घरों को खाना देता होगा?? और ऐसा तब hi हो पता है जब इंसान कड़े फैसले लेने की सोच और हिम्मत रक्त हो तब hi लोग कामयाबी को देख पते हैं ..!! क्युकी हर इंसान अपने लिए फैसले से hi या तोह हिस्ट्री बनता या खुद में हिस्ट्री बन जाता है ..और मुझे अपने मनु पैर पूरा यकीं है की हु इनसब कामिनी हरकतों में तुमसे बेटर फैसला लेगा और तब भी यकीं न आये तोह खुद देख लेना ..बात करते हूँ बिच में न लाऊँ बच्चों को “”” सुमित्रा की इस पूरी बात को सुनकर राजिंदर की रही सही हिम्मत भी हवा हो गयी ..
वह समझ गया की is-baar सुमित्रा ने आप आप कहने वाली एक बीवी को राजिंदर को तुम कहकर एक जुंग शुरू कर दी thi.or पहली बार सुमित्रा ने अपने बच्चों के और उनके फ्यूचर के लिए खुद राजिंदर से भी जुंग का एलान कर दिया था …सो राजिंदर ने जब पहली बार सुमित्रा को गुस्से में लाल देखा तोह चुप रहने में hi भलाई समझी ..और कल के लिए तयारी करने लगा …
यह सब अजय ने सुना तोह उसको समझ आ गया ..की उसके भाई ने जब कहा था की …” ..यह सब लम्बा चलने वाला है …”….उसका मतलब क्या था …आज उसने खुद देखा की उसकी माँ जो इनसब से दूर रहा करती थी ..पैर अपने बचूं के फ्यूचर के नाम पैर उसने राजिंदर को भी अचे से सुना दिया …बल्कि उसको अल्टीमेटम दे दिया की अगर यहाँ वहाँ हुआ तोह बचूं के लिए वह अपने पति तक से लड़ जाएगी …
अजय यह सब देखकर चुप चाप वहां से बहार चल दिया ..अपनी सोच में गम अजय को आज समझ में आ रहा था की क्यों मनु उसको घर पैर नज़र बनाये रखने को ज्यादा कहता था ..और क्यों उसको ज्यादा से ज्यादा सुमित्रा की हेल्प करने के लिए कहता था …क्युकी मनु अचे से जानता था अपने चाचा की मक्कारी ko,,,or अपने बाप के नरम रुख और सुमित्रा की परेशानियों को ..जो आज कहीं न कहीं अजय के सामने पूरी तरह से आ चुकी थी.. ऐसा नहीं है की अजय अपने घर में अजान जैसा रहता था ..पैर उसके दिमाग तक jai-chand की पूरी मक्कारी नहीं आने दी जाती थी …
अजय यह सब देखकर किसी बुरे टाइम का अंदेशा कर रहा था ..ऐसे में उसको मनु की बड़ी याद आ रही थी ……
इधर जहां मनु की फॅमिली की किस्मत ने एक नया मोड आने जा रहा था …एक ऐसा नया मोड जिसके आने से शायद बहुत कुछ बदलने वाला था ….और क्या ??? बदलनेवाला था ??? यह तोह शायद किस्मत और वक़्त hi जानते थे …!!
क्युकी जहां अजय मनु को इस टाइम याद कर रहा था …वहीँ मनु जगन के घर के चौखट पैर एक नयी दस्तक दे रहा था …
जी हाँ मनु , जस ,नीता मम, सुमन और बेहोश राज के साथ सब जगन के घर के बहार मैं गेट पैर आ चुके थे ..
जहां आकर कार रुकी तब मनु ने ड्राइवर को उसकी हेल्प के लिए थैंक्स कहा …बदले में ड्राइवर भी सर हिला कर ..”okay” कहकर मनु को रेतुर्न में ..”दोने “ बोलकर बात ख़तम कर देता है …जिसपर मोस्टली किसी का ध्यान नहीं tha…per मनु उसके इस दोने का मीनिंग समझ चूका था ..(ऐसा क्या मीन्स था आप सब आगे समझ जायेंगे ..)
सुमन ने मैं गेट तक आने के बाद राज की तरफ देखा जो अभी तक बेहोश था …ऐसे में उसको अंडर ले जाने के लिए उसने देखा मनु की तरफ …
मनु ने ज्यादा कुछ नहीं कहा चुपचाप किसी चावल की बेग के जैसे राज को उठाया और सुमन को देखा और कहा “ डिअर मामी आज जो कुछ हुआ है …उसस्के अंडर चाओ तोह बिंदास बता देना ..पैर जो देखा है और जो कहा है तुमने उसको अचे से याद रखना ..क्युकी इनसब में ज़रा सब hi इधर -उधर हुआ तोह ..बाप और भाई के बारे में याद कर लेना डिअर मामी ..आगे आप बची नहीं हैं …!”” मनु ने सुमन की आँखों में आँखें दाल कर देखते हुए कहा …
सुमन की रूह कांप चुकी थी …उसके देखने से क्युकी कुछ हरष पहले hi मनु ने उसके बाप और भाई को उसके सामने ख़तम किया था …अब चाहे उस टाइम सुमन को बेशक दुःख नहीं हुआ था …धीरेन और हिरेन के मरने का ..पैर दोनों के कटे हुए सर को वह अभी तक भूल नहीं प् रही थी… उस पैर मनु का हु खून से lath-path चेहरा जिसको देखकर na-jane कितने ख्याल उसके सामने आये होंगे और हवा में डर की दहशत में फुर्र हो गए होंगे …
बरहाल सुमन पैर मनु के बोलने का असर हुआ …और मनु राज को कंधे पैर लटकाये घर में सबके साथ चला गया . उस टाइम जगन अपने रूम में सो रहा था ..और रिया उल्टियां करके लौट रही थी …
रिया ने राज को जब मनु के कंधे पैर लटके देखा तोह उससे पूछा की राज को क्या हुआ है ???
बदले में मनु कुछ कहता उससे पहले hi सुमन “ कुछ नहीं बस उसकी तबियत ठीक नहीं है ..सो थकन के वजह से सो गया था …रिया तुम अपने रूम में जाओ …!” सुमन ने बात सँभालते हुए कहा …
रिया पूछना तोह चाहती थी पैर उस टाइम सुमन का रुख देखकर चुप हो gayi.or अपने रूम में चली गयी ..सुमन ने मनु को राज को उसके रूम में जाकर छोड़ने का इशारा किया …और खुद सुमन रिया के जाने के बाद सीधे जगन को देखने गयी ..जहां जगन दर्द में रट हुए सो गया था ..जब सुमन ने जगन को सोते देखा तोह उसकी जान में जान आयी ..
हु लपक कर राज के रूम की तरफ उप्पेर गयी ..जहां मनु उसको लिटा कर रूम का दूर बंद hi कर रहा था …उसने देखा रिया जस और नीता अपने रूम में जा चुके थे ..सुमन ने मनु को देखा ..तोह मनु इस टाइम भी नार्मल hi था …सुमन कुछ कहने को हुई ..तब मनु ने उसके हाथ को पकड़ा और सीधे छत्त पैर ले गया उसी स्टोररूम में ..(store-room में सुमन की चुदाई हुई थी प्रीवियस अपडेट में उसके बारे में बताया था..)
सुमन की गांड उस store-room को देखकर फट चुकी थी ..जहां कुछ टाइम पहले इसी मनु को देखकर वह उसे दीवानी की तरह चिपकने की वजह ढूंढा करती थी ..पैर आज उसी मनु को देखकर न जाने कितनी फटती पड़ी थी सुमन की यह उसका दिल hi जानता था ..
खैर ..मनु ने सुमन को देखा ..सुमन की रूह कांप गयी ..मनु के देखने भर से ..उसका हलक सूखने लगा था ..पैर बात बड़ी हिम्मत करके बोली सुमन ..” देखो मनु तुम जानते हो तुमने मेरे साथ क्या किया है ??? उसके बाद भी मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ …” सुमन अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi मनु ने उसको रोक दिया …
मनु “ क्या किया मैंने ..मामी डिअर ??? ..तुमने बड़ी सफाई से अपनी ठरक या जिस्मानी भूख को मेरे उप्पेर थोप दिया ..बहुत सफाई से यह कह दिया की मैं hi तुमको उछाल उछाल कर छोड़ता था …और तुम तोह बस निचे किसी बर्फ की सिल्ली के जैसे पड़ी रहती thi…bhul कर भी यह सोचने की गलती मत करना तुम खुद को कोई शर्रिफ औरत सब्बित करके निकल जाओगी …सो आगे से जो बोलो सोच समझ कर और सही वर्ड्स के साथ बोलना क्युकी .मुझे तुम्हारी इस drame-baazi से सख्त ऐतराज़ है ..!!”
सुमन समझ गयी की मनु उसको सरीफ या अबला बनने के drame-baazi में फँसनेवाला नहीं hai..suman ने सभाल कर कहा …”” सॉरी मेरा हु मतलब नहीं था.. मैं यह कहना चाहती हूँ की तुम्हारे और मेरे बिच चाहहए जो भी हुआ ..उसका असर मेरे फॅमिली पैर नहीं पड़ना चाहिए ..ख़ास टूर पैर राज और रिया पैर ..तुम समझ रहे हो न ???”
मनु ने सुमन को देखा और हलके से मुस्कुरा कर कहा “ तोह मामी डिअर इसका मतलब ममे (जगन) को बता दूँ ..???””
सुमन घबराते हुए ..” मैं जानती हूँ तुम जो चाहो कर सकते हो ..पैर मेरा घर बर्बाद करके क्या मिलेगा तुमको ??”
मनु ने इसबार सख्त लहज़े में सुमन को कहा “ बस …आगे फिर नहीं कहूंगा ..लास्ट बार कह रहा हूँ …फिर से वर्ड के साथ खेलना नहीं खुद को मजबूर या कमज़ोर बनने का ड्रामा मत करना मेरे आगे …क्युकी चुदाई तुमने खुद मज़े ले ले कर करवाई hai..jisme मैंने जितना मज़्ज़ा लिया उतना तुमने भी लिया ..और यहां तुम खुद को कमज़ोर दिखा रही हो ??? देखो जब माँ ने तुमको यह घर और ऑफिस दे दिया तब बात वहीँ रुक गयी …तुम्हारे बाप और भाई ने जो किया उसका हशर क्या हुआ ??? यह भी तुमने देखा है सो जब बात रुक गयी है उसको वहीँ रोक देना तुम्हारे लिए ठीक है …”” मनु बोलते हुए सुमन के करीब आया ..
और सुमन के कंधे पैर हाथ रखकर उसने बात शुरू की “ डिअर मामी तुम मिया बीवी ने जो सोचा हु हो न सका …उल्टा तुम्हारे बाप और भाई के सर फुटबॉल बन गए ..अब जो चल रहा है चलने दो ..वर्ण dialogue-baazi मेरी आदत नहीं ..!!!!”” सुमन के मुँह में अलफ़ाज़ून ने खुदकशी कर्ली यह सुनकर …
मनु ने सुमन को वहां पसीने पसीने होते देखा …तोह सोचा मैं में “ अभी सुमन को देखकर दया कर्ली तोह यह कामिनी जब टाइम आने पैर बाप और भाई के सामने से बदल गयी तोह फिर यह सगी किसकी है ?? थैंक्स शबनम तुमने यह अछि सिख दी की मक्कार औरत के ांसो में बहना सरासर बेवकूफी है ..एक तरफ खुद जगन ममे के साथ रहकर इसने मुझे से चुदाई की एक बार नहीं कई बार की ..नीता माँ को फंसे मरने का प्लान बनाया और उसका टिकट सिर्फ और सिर्फ जगन के सर टिका देने की कोशिश की ..टाइम आया तोह इसने बाप और भाई की मौत भी बर्दास्त कर्ली …चलो 1% मान भी लिया की उस टाइम इसको राज की जान की टेंशन थी ..पैर बाप और भाई हवा से तोह टपके नहीं थे …इसके सेज थे ..उनके लिए एक आंसू नहीं ..और इसको टेंशन इस बात की है की मैं जगन के सामने इसकी चुदाई के राज़ न खोल दूँ …वह सुमन डिअर !! वैरी नीस !!..तुम पैर तोह क्या तुम्हारी किसी बात पैर मैं बिना सोचे मान जाओ यह तोह होने से रहा ..और उसपर बोनस की तुम चुदाई के सरे मज़े ले कर भी ऐसे वर्ड खेलकर कह रही हो ..जिससे की मैं मेंटली यह समझू की मैं hi गलत हूँ …??? क्या बात है ?? no वे डिअर !!! जो लोग बिना सोचे समझे औरत के हर आंसू में बह कर उलटे सीधे फैसले ले कर उनके बांये जाल में फंस जाते हैं ..और बाद में डायलाग भी मरते हैं की औरत को समझना बहुत मुश्किल है …तोह उनको सिर्फ और सिर्फ उनके बर्ताव और उनके सोचने और रियेक्ट करने के तरीके के बाजरे में ध्यान देना चाहिए उस से इंसान की सोच उसके बर्ताव और उसके सोचने का तरीका पता चलता है ..और आनेवाले धोखे से कमसे काम अलर्ट रहने की आदत बन जाती है ..सुमन डिअर तुम पैर भरोसा no चांस!!!!” मनु के दिमाग में ख्याल अपने हिसाब से लड़ रहे थे …
सुमन “ तुम मुझे गलत समझ रहे हो मेरा मतलब है की ..मेरा परिवार टूटने मत dena..baaki आगे से मैं तुम्हारे रस्ते में नहीं आउंगी “
मनु मुस्कुराते हुए सुमन की कमर को सहलाते हुए कहता है “ ऐसा गज़ब मत करना मामी डिअर तुम्हारा यह राजा तुम्हारे बिना कैसे रहेगा …अब मां का तोह तुमको पता hi है ..जो बिट गया सो बिट गया .आओ थोड़ा सा थकन मिटा लेते हैं ..” मनु ने सुमन को हलके से कमर को एक साइड से मसलते हुए कहा ..
सुमन इस टाइम इन सब के लिए त्यार नहीं thi..jahaan पहले खुद मनु की बाहों में आने का बहाने ढूंढती थी ..पैर उसके खून खराबे वाले रूप को देखकर सुमन थोड़ी ढीली पद गयी थी ..न तोह सामने से मन कर रही थी और ना hi पहले जैसे पहल कर रही थी ..एक अजीब सी कश्मकश में थी सुमन ..
मनु ने सुमन को ध्यान से देखा ..और अपने हाथ हत्ये और सुमन को देखते हुए कहा ..” देखो डिअर मामी तुमने उस टाइम जो किया हु कोई नहीं बदल सकता ..बदले में मैंने जो किया हु एक बेटे का फ़र्ज़ है ..आगे जो भी तुम लोग एक्शन लोगे वैसे hi मेरा रिएक्शन होगा …सो उसमे मैं गलत कैसे हुआ ..और अगर फिर भी तुम्हारी समझ में न आये तोह नीता माँ की जगह खुद को और मेरी जगह राज को रखकर सोच लेना ..तब श्याद आसानी होगी ..और रही घर तोड़ने की बात जब माँ ने तुमको माफ़ कर दिया बात वहीँ रुक गयी ..पैर आगे बात बढ़ानी चाहती हो तोह बात बढ़ेगी …और वैसे भी तुम्हारी लाइफ है तुम जैसे चाहे रहो मैं तुमको सही गलत समझने वाला कोई नहीं हूँ ..पैर बात अगर मेरी नीता माँ को बिच में रखकर हुई या तुम्हारे दिमाग में ऐसे ख्याल भी आये तब ..मामी डिअर एक बीटा तुम्हारे सामने होगा सही गलत से परे सिर्फ एक बीटा …जिसके लिए शायद hi तुम फिर से मुझे उस रूप में देखना चाहो. फैसला तुमपर है ..”मनु प्यार से समझा कर वहाँ से चलने को हुआ …
सुमन मनु की बातों को सुनकर सोचने लगी की नीता की किस्मत शायद उससे कितनी अछि थी की दुनिआ जहां से अकेले लड़ने के लिए मनु जैसा एक बीटा उसके साथ था ..जो न सही की फ़िक्र करता और न गलत का गम ..वहीँ उसको जब मनु ने राज को उसकी जगह रखकर सोचने को कहा ..और नीता को सुमन की जगह तब सुमन सुच में सोचने लगी की …मनु ने जो किया शायद सही हो या नहीं पैर उसने अपनी माँ के लिए किया ..और जो किया सिर्फ उसको सेफ रखने के लिए ऐसे में उसको जज करे भी तोह कैसे ??? पैर बेचारी करे भी तोह क्या ?? मनु बाबू का एक्शन यहाँ सुमन को वहीँ उस बिल्डिंग में कई बार मुतवा चूका था ..सो ऐसे में उस खून भरे चेहरे को देखकर उसे भूलना आसान भी नहीं था सुमन के लिए ..
खैर मनु जैसे hi चलने को हुआ तोह सुमन ने उसे रोका और कहा “ देखो हु सब तोह ठीक है पैर तुमने जो हरयाणा कुछ भी किया है उसका क्या होगा ??”
मनु “ उसका क्या ???”
सुमन “ मेरा मतलब मेरे फॅमिलीवालो से है ..”
मनु “ उसका पता कल तक चल जायेगा हाँ ..तुम सिर्फ कल का वेट करो मामी डिअर !”
सुमन” मतलब “
मनु “ तुम्हारे बाप और भाई की मौत हुई है ,और ज़िन्दगी एक बार चिप सकती है पैर मौत नहीं …सो कल को जब सबको पता चलेगा की हु दोनों नहीं रहे तब तुम और बाकी सबको उनके अंतिम संस्कार के लिए जाना hi होगा चाहे मैं से जाओ या be-mann से पैर जाना होगा ..तब जाने से मन मत करना बस इतना hi काफी है मेरे लिए बाकी तुम्हारा राज़ मेरे साथ सेफ है …okay ! और हाँ ज्यादा मत सोचना मामी डिअर ..क्युकी तुम लोगों के एक्शन पैर मेरा रिएक्शन होगा ..डरा नहीं रहा हूँ समझा रहा हूँ ..बाकी तुम पैर है.”
सुमन उसके बाद सोच में पद गयी ..क्युकी मनु ने उसको साफ़ साफ़ कह दिया था की उसको मतलब उसके फॅमिली को हिरेन और धीरेन के अंतिम संस्कार में जाना है और इसमें कोई चॉइस नहीं है …सो सुमन ने आगे कुछ नहीं कहा ..
मनु और सुमन दोनों इसके बाद अपने अपने रूम में वापस आ चुके थे ..इसके बाद मनु ने जस को कॉल किया और कल के लिए उसको समझा दिया जिसमे कुछ हिदायत थी नीता मम को लेकर साथ में कल क्या करना है उस बारे में.. उसके बाद मनु भी थकन से कुछ देर सोने चला गया ..
जहां यह सब टेंशन का माहोल चल रहा था वहीँ उधर अंटोनी लुका जोकि अपने लोगों के पकड़े जाने से थोड़ा टेंशन में था ..जिसका राइट हैंड उसको आनेवाले खतरे की घंटी साफ़ साफ़ सुना रहा था ..अब काम में प्रॉब्लम तोह आती रहती हैं और जब काम सिंडिकेट (जिन लोगों को सिंडिकेट के बारे में पता नहीं उनके लिए आसान वर्ड्स में सिंडिकेट एक बड़े ग्रुप को कहते हैं जिसका काम और पावर ज़रूरत के हिसाब से डिवाइड हुआ करती हैं ..बाकी सबके अपने अपने काम डीडे होते हैं बूत थे आल्सो हेल्प each-others .)
जहाँ अंटोनी लुका को उसका राइट हैंड बाँदा क्लियर कर चूका था की यह प्रॉब्लम छोटी नहीं थी ..और अगर अभी अंटोनी ने अपने लोगों को नहीं बचाया तोह आने वाले टाइम में उसके साथियों में फुट पद सकती है…
सो अंटोनी भी समझ चूका था की यह टाइम कुछ करने का है ..सो उसने अपने एन्ड से बहुत से लोगों को ख़रीदा पैर पुलिस ने केस फाइल कर दिया था ..और प्रॉब्लम यह हुई की केस को बहुत से बड़े इन्फ्लुएंटीएल को देखते हुए केस को साउथ से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया जहां अंटोनी ने बहुत ज़ोर लगाया की उसके लोगों को बैल या लॉयर्स के थ्रू कैसे भी छुड़ाया जा सके पैर ऐसा कुछ हुआ नहीं …
उल्टा उसकी बुरी किस्मत कहो की उसके बन्दों का केस एक सख्त और ईमानदार जज के कोर्ट में आ चूका था …यह जज अपने इन्साफ के और सकती के लिए हर जगह फेमस था …और जब ऐसा हुआ तब खबरें उड़ने लगी और उड़ती खबर अंटोनी के कानो तक भी aayi..antony के लिए बात पहले hi साउथ से नार्थ आ चुकी थी ..और केस दिल्ली शिफ्ट हो चूका था ..ऐसे में दिल्ली में उसका केस उसको उसके हाथ से निकलता नज़र आ रहा था …
सो ऐसे में क्युकी अंटोनी सिंडिकेट का मेंबर था सो उसने फरहान कुरैशी को कॉल किया और उसको सारा मटर बताया ..जिसपर फरहान ने उसको खुद हैंडल करने को कह दिया …जिसपर अब जाकर अंटोनी को सांस आयी ..क्युकी यहाँ बात उसके गैंग और उसकी लीडरशिप की थी ..और हिस्ट्री इस बात की सबूत है ..जो लीडर अपने लोगों के भरोसे को कमाने में नाकाम होता है उसका अंजाम उसकी मौत या takhta-palat के रूप में सामने आता hai…baaki आप लोग स्मार्ट हैं …
खैर फरहान ने उस जज की हिस्ट्री, जियोग्राफी सब पता करने को बोल दिया ..और इधर जहाँ जज साब की हिस्ट्री निकली जा रही थी …
उधर वहाँ जिसका इनसब से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था मनु वह अपने रूम में सो कर उठा अपने मोबाइल की कॉल से ..उसने देखा की कॉल मास्टर की थी ..उसने कॉल पिक की …और कुछ देर दोनों में नार्मल सी बात हुई उसके बाद मास्टर ने मनु से पूछा …
मास्टर “ सो बीटा जैसा तुमने बताया की वहाँ के हालात इतने सही नहीं हैं सो ऐसे में अगर कोई भी प्रॉब्लम हो तोह याद है न की एक कॉल भर की दूरी पैर हूँ ..बाकी वहाँ अपना ध्यान रखना …”
मनु “ मास्टर आप को ड्राइवर ने बता दिया होगा की मैंने क्या करवाया है ..मास्टर उस टाइम जो सही डिसिशन लगा लेना पड़ा सॉरी आपको उस टाइम बता नहीं पाया ..”
मास्टर कुछ सोचते हुए “ नहीं बीटा मैं अचे से जानता हूँ की जहाँ जो सिचुएशन होती है उसमे वही डिसिशन लेना पड़ता है ..और उसके लिए किसी को भी बिना हालात जाने जज करना सही नहीं है ..वहां जो तुमने देखा सुना और जो तुमने फेस किया उसके हिसाब से तुमने एक्शन लिया ..उस टाइम उस जगह उस हालत को जाने बिना यहाँ से मैं कैसे कह दूँ की तुमने सही किया है गलत …बीटा यह सब जो तुम कर रहे हो चाहे जो भी है ..मैं उसमे तुम्हारे सात हूँ …और बिना टेंशन के काम करके वापस आ जाना टाइम से ..ok bye टेक केयर …” मास्टर ने एक मिनट में मनु को क्लियर कर दिया की उसका डिसिशन जो भी है मास्टर को कोई प्रॉब्लम नहीं है ..यह सुनकर मनु को भी एक राहत मिली ..
मनु ने उसके बाद सुकून से बात करके कॉल कट किया और मैं में सोचने लगा ..
मनु मैं में “ सॉरी master….hum lower-middle क्लास के लोग प्रॉब्लम के आने पैर लड़ने से ज्यादा उसको आने से पहले hi उसको जड़ से उखाड़ फेखने की सोच रखते hain..hum लोग जब कभी जैसे hi जब सुनते हैं कल से बाजार में aloo,pyaaz या टमाटर मेहगा होगा तब हम पहले hi कई किलोग्राम aloo,pyaaz या टमाटर ले लेते हैं ..जब सुनते हैं की पेट्रोल अगले दिन मेहगा होने वाला है तब अपने बजट के हिसाब से गाडी की टंकी भरवा लेते हैं ..जब हम इन choti-choti चीज़ों के लिए इतना त्यार रहते हैं तब यहाँ तोह बात सामने से आती बड़ी प्रॉब्लम की है ..और आज नहीं तोह कल ko…raj आगे चलकर प्रॉब्लम करता इसलिए जब ड्राइवर के पास छोड़ा था उसे तब hi उसको ड्राइवर से कहकर इंजेक्शन लगवा दिया ..उस इंजेक्शन से राज आज के बाद कितना भी चाहे उसका सामान (लैंड ) खड़ा नहीं होगा …और जगन को तोह पहले hi यह दोसे में वहां दे चूका हूँ जहाँ जगन की गांड का ढक्कन उसके खुद के बेटे ने खोला tha…or यह जरूरी भी था …क्युकी ी बेलीवे प्रकशन इस बेटर थें क्योर. ..क्युकी जहाँ बाप मक्कार है ..वहां उसका बीटा हवस के चक्कर में मेरे लिए आगे और सिरदर्द पैदा करता …उस पैर सुमन को काबू करना भी जरूरी है ..और राज आज नहीं तोह कल सुमन के करीब जाता और तब सुमन सोच समझ कर या सुमन कमज़ोरी के पलों में राज को मेरे बारे में बता देती तब फिर प्रॉब्लम बढ़ती मेरे लिए यह सल्ले कमीने लोग फिर नीता माँ को बिच में लेन की कोशिश करते ..उनको किसी न किसी तरह टारगेट करते या किसी और तरह से प्रॉब्लम लेन की कोशिश करते ,नीता माँ को या मेरी फॅमिली में किसी और को प्रॉब्लम देते ,,,सो ऐसा मौका hi क्यों दूँ इन सालों को …दोनों बाप बेटे अब लोडे पैर कुछ भी करे और कितनी भी बात करें खुद के लोडे से तब भी एक hi सिर्फ एक आवाज़ आएगी उनके लोडे से “”वैलिडिटी एक्सपिरे “” …. :हिंट: