Romance Parivaar aur Pyaar - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Romance Parivaar aur Pyaar

hotaks

Administrator
Staff member
Joined
Dec 5, 2013
Messages
149,443
इंसान की ज़िन्दगी में कुछ लोगो की ऐहमियत सबसे ज्यादा रहती है. जिनकी ऐहमियत ज़िन्दगी में सबसे ज्यादा रहती है इंसान प्यार भी उन्हें hi सबसे ज्यादा करता. एक इंसान के जीवन में सबसे ज्यादा ऐहमियत रखती है उसकी फॅमिली. कहा जाता है दुनिया में सबलोग एक न एक दिन साथ चोरर देते है पर एक परिवार hi होता है जो कभी साथ नहीं चोरता. यह कहानी भी ऐसी hi एक इंसान की है जिसकी फॅमिली hi उसके लिए सब है.
 
इंडेक्स

इंट्रोडक्शन

अपडेट 1

अपडेट 2

अपडेट 3

अपडेट 4

अपडेट 5

अपडेट 6

अपडेट 7

अपडेट 8

अपडेट 9

अपडेट 10

अपडेट 11

अपडेट 12

अपडेट 13

अपडेट 14

अपडेट 15

अपडेट 16

अपडेट 17

अपडेट 18

अपडेट 19

अपडेट 20

अपडेट 21

अपडेट 22

अपडेट 23

अपडेट 24

अपडेट 25

अपडेट 26

अपडेट 27

अपडेट 28

अपडेट 29

अपडेट 30

अपडेट 31

अपडेट 32

अपडेट 33

अपडेट 34

अपडेट 35

अपडेट 36

अपडेट 37

अपडेट 38

अपडेट 39

अपडेट 40

अपडेट 41

अपडेट 42

अपडेट 43

अपडेट 44

अपडेट 45

अपडेट 46

अपडेट 47

अपडेट 48

अपडेट 49

अपडेट 50

अपडेट 51

अपडेट 52

अपडेट 53

अपडेट 54

अपडेट 55
 
इंट्रोडक्शन

प्रताप सिंह राजपूत- यह है अपने हीरो का दादाजी. अपने ज़माने में कुश्ती चैंपियन थे. अच्छे अच्छा को अखाड़े में पछाड़ चुके है. पर फॅमिली बिज़नेस सँभालने के लिए इन्हे कुश्ती चोरनी पढ़ी. पर शौक अभी भी है. घर में सबसे बड़े है. इन्होने अपनी पूरी जायदात को अपने बच्चो में बात दिया है. इनका एक बहोत hi गहरा राज है जिसके बारे में सिर्फ और सिर्फ इनके बड़े बेटे और बहु को hi पता है.

विक्रम सिंह राजपूत- यह है अपने हीरो का पापा. अपने परिवार से बहोत प्यार है पर साथ में बिज़नेस से भी बहोत प्यार है. इनकी 2 शादियां हुई थी. पहली पत्नी एक एक्सीडेंट में मर्डर जाती है. जिसके बाद इन्होने एक और शादी की है. पहली पत्नी का नाम रश्मि था.

शालिनी सिंह राजपूत- यह है विक्रम की दूसरी पत्नी. इनका नेचर बहोत hi केयरिंग है. घर के साथ साथ बिज़नेस भी संभालती है. यह बहोत hi खुशमिज़ाज़ औरत है और हर परेशानी का दत्त के सामना करती है. इन्हे सिर्फ और सिर्फ एक hi चीज़ परेशां करती है और यह छह के भी उस परेशानी को ठीक नहीं कर सकती. यह अपने बच्चो से बहोत प्यार करती है.

इशिता सिंह राजपूत- यह विक्रम और शालिनी की एक लौटी बेटी. थोड़ी बेवकूफ है. माँ बाप के लाड प्यार में थोड़ी बिगड़ गयी है. कॉलेज के 1सत ईयर में है.

माहिरा सिंह राजपूत- यह विक्रम और रश्मि की बेटी है. दिल की अच्छी है. यह कॉलेज के 2ंद ईयर में है. परिवार में सबकी इज़्ज़त करती है.

शेखर सिंह राजपूत- यह है प्रताप सिंह का दूसरा बीटा. अपने भाई के साथ बिज़नेस चलता है. इससे अपने पिता और भाई के राज़ के बारे में कुछ भी नहीं पता है. थोड़ा लालची किसम का इंसान है.

विद्या सिंह राजपूत- यह शेखर की पत्नी है. दिल की बहोत अच्छी है. इससे अपने ससुर और जेठ के राज़ के बारे में पूरा तोह नहीं पर कुछ कुछ पता है.

विक्की सिंह राजपूत- यह शेखर और विद्या का बीटा है. चुप चाप रहने वाला लड़का है. अपने hi मस्त रहता है. कॉलेज के 2ंद ईयर में है.



राजपूत ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज प्रताप सिंह की कड़ी म्हणत का नतीजा है. इन्होने इस कंपनी की नीव अपने पिता के संग राखी थी. उस टाइम पे यह एक छोटी सी कंपनी हुआ करती थी जिसमे मुश्किल से 40 लोग काम करते थे. पर आज इस कंपनी में 4000 से भी ज्यादा लोग काम करते है. इस कंपनी की पूरी जिम्मेदारी पहले प्रताप सिंह के हाथो में थी पर फिर इन्होने साड़ी जिम्मेदारी अपने बेटो को दे दी जिसे अब वह सँभालते है. दिल्ली में इनका घर है जहा सबलोग एक साथ रहते है.
 
अपडेट 1

मुंबई के बाहरी इलाके में कुछ लोग खड़े सिगरेट पि रहे थे. हलकी हलकी ठण्ड थी फिर भी सबके माथे में पसीना था और चेहरे पे एक डर भी था. ओहलोग बार बार इधर उधर देख रहे थे जैसे किसी के आने का इंतज़ार कर रहे हो. अभी उनको वह खड़े कुछ hi टाइम हुआ था के तभी वह उन्हें 2 गाड़ियां आते हुए दिखती है. वह दोनों गाड़ियां एकदम उनके सामने आके कड़ी होजाती है.

दोनों गाड़ियों में से 2 आदमी उतारते है और वह खड़े लोगो के पास आते है और उन्हें एक बैग पकड़ा देते है.

आदमी 1 – उन्हें कहना आज तक का सारा हिसाब क्लियर होचुका है. और अब हुम्हे कांटेक्ट ना करे.

आदमी 2 – अगर हुम्हे किसी चीज़ की जरुरत हुई तोह हम खुद कांटेक्ट करेंगे. जब तक वह पकड़ा नहीं जाता या मारा नहीं जाता हुम्हे किसी भी तरह से कांटेक्ट ना करे.

इसके बाद वह दोनों आदमी वह से फटाफट निकल जाते है. उनके निकलते hi बाकी के लोग भी वह से जल्दी जल्दी निकल जाते है.

अगली सुबह मुंबई के सिटी कॉलेज में एक लड़की अपने ग्रुप के साथ कैंटीन में बैठी थी पर उसका ध्यान अपने ग्रुप के बहार hi था.

Ladki(Mann में) – आज कॉलेज का लास्ट डे है. आज उसे बोलना hi होगा. पुरे 2 साल इंतज़ार किया है मैंने. आज उससे मेरा इंतज़ार ख़तम करना hi होगा. आज उसे मुझे अपनाना hi होगा.

वह लड़की अपनी सोच में hi घूम थी के तभी उसके पास में बैठे उसके दोस्त उससे उसकी सोच से बहार लाते है.

दोस्त 1 – क्या सोच रही है इतने देरर से.

दोस्त 2 – हां. कुछ सोचा है तूने अब आगे क्या करना है. कॉलेज तोह आज ख़तम.

लड़की – अभी मैंने कुछ नहीं सोचा है. पर जल्द hi कुछ सोच लुंगी. तुमलोग अपना बताओ.

दोस्त 3 – मैं तोह हायर स्टडीज के लिए बहार जा रहा हु.

दोस्त 4 – मैं भी बहार hi जा रही हु.

दोस्त 1 - मेरा भी कुछ ऐसा hi प्लान है. अगर रिजल्ट अच्छा आया तोह बहार जाउंगी वर्ण एहि के किसी कॉलेज में एडमिशन ले लुंगी.

अभी एहलोग और कुछ बोलते तभी वह लड़की झट्ट से अपनी जगह से उठ जाती है और कैंटीन के बहार की तरफ जाने लगती है. उसके उठते hi उसके दोस्त उससे पूछने लगते है पर वह कोई जवाब दिए बिना hi बहार की तरफ निकल जाती है.

वह लड़की कैंटीन से बहार निकल के सीधा पार्किंग की तरफ जाती है और एक बाइक के सामने कड़ी होजाती है.

लड़की – मुझे जवाब चाहिए और अभी चाहिए.

लड़का – मेरे पास तुम्हारे किसी सवाल का जवाब नहीं है. और वैसे भी मैंने तुम्हे पहले बोल दिया है.

लड़की – तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे है. तुम अच्छे से जानते हो मैं तुमसे कितना प्यार करती हु. और मैं यह भी जानती हु तुम भी मुझसे उतना hi प्यार करते हो.

लड़का – मैं तुमसे प्यार नहीं करता यह बात मैंने तुम्हे पहले भी बहोत बार बोलै है फिर क्यों बार बार यह बात बोलती हो.

लड़की – झूट. तुम झूट बोल रहे हो. तुम्हारी आँखों में मुझे मेरे लिए साफ़ प्यार नज़र आता है.

लड़का – ग़लतफहमी है. मैं आज यह आखरी बार कह रहा हु. मुझे भूल जाओ और अपनी लाइफ में आगे बढ़ो. यह बोल वह लड़का वह से जाने लगता है.

लड़की – जाते जाते मेरी भी एक बात सुनलो. मैंने तुमसे सच्चे मैं से प्यार किया है. मैं तुम्हारा इंतज़ार करती रहूंगी. और अगर मेरा प्यार सच्चा है तोह मुझे मेरे इंतज़ार का फल मिलेगा और वह फल मुझे तुम डोज. मैं मर्डर जाउंगी पर तुम्हारे अलावा कभी किसी और की नहीं होउंगी.

वह लड़का यह सब सुन्न के वह से निकल जाता है. लड़की लड़के को जाते देखती रहती है. उसके आँखों से आंसू निकल रहे होते है.

लड़की – अगर मेरा प्यार सच्चा है और मैंने सिर्फ तुमसे प्यार किया है तोह एकदिन तुम खुद अपने प्यार का इज़हार मेरे सामने करोगे.

इसके बाद वह लड़की भी वह से चली जाती है.

दिल्ली के एक बहोत बड़े घर के मंदिर में एक औरत सुबह सुबह भगवन के सामने हाथ जोड़े कड़ी थी. आँखों में थोड़े आंसू थे. तभी पीछे से एक आवाज़ आती है. सुबह सुबह भगवन से क्या माँगा जा रहा है.

औरत – बिना पीछे मुड़े. आप जानते है. मैं हरदिन भगवन से क्या मांगती हु. इन्होने मुझे हर ख़ुशी दी. हर सुख दिया. बस उससे दुर्र करदिया.

आदमी – तुम अच्छे से जानती हो शालिनी बीटा अगर वह यहाँ रहता तोह शायद हम उससे कभी नहीं देख पाते.

शालिनी – कब तक. आखिर कब तक पिताजी. कब तक.

प्रताप – पता नहीं.

इसके आगे शालिनी और कुछ नहीं बोलती. उससे हरदिन एहि जवाब सुनने को मिलता था. वह भगवान् के सामने एकबार फिरसे हाथ जोड़ के मंदिर से बहार आती है और प्रताप के व्हील चेयर को हॉल में डाइनिंग टेबल के पास ले जाती है.

प्रताप – अपने चेहरे से यह दुःख और दर्द हटा दो शालिनी.

शालिनी – आप चिंता मत कीजिये. 10 सालों से वह राज़ सीने में दफ़न है आगे भी दफ़न hi रहेगा. और शायद वह राज़ मेरे साथ hi दफ़न भी होजायेगा.



यह बोल वह अपनी आँखों से आंसू पोछती है और चेहरे पे एक सजावटी मुस्कराहट लाके किचन में चली जाती है.
 
अपडेट 2

प्रताप – हम मजबूर है बीटा. हम छह के भी वह राज़ अभी सामने नहीं ला सकते.

थोड़ी देर बाद सब लोग डाइनिंग टेबल पे बैठे हुए थे.

विक्की – क्या बात है आज तोह घर में खीर बानी है.

इशिता – हां मम्मी आज कुछ खाश है क्या.

शालिनी – एकबार बुझे मैं से विक्रम और प्रताप की तरफ देखती है फिर बोलती है हां आज तुम सब के बड़े भाई का जन्मदिन है. अगर आज वह ज़िंदा होता तोह पुरे 25 साल का होता.

माहिरा – हां सही कहा आपने. काश भैया होते. और वह एक्सीडेंट ना हुआ होता.

विक्रम – शालिनी मैं आज काम से मुंबई जा रहा हु.

शालिनी जैसे hi यह सुनती है उसकी आँखों में एक चमक आजाती है और वह एक उम्मीद के साथ झट्ट से बोलती है.

शालिनी – मैं भी चालू.

अभी कोई कुछ बोलता तभी शेखर बोलता है.

शेखर – ारी भाभी आप कैसे जा सकती है. आज तोह बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की मीटिंग है. भैया भी चले जाएंगे आप भी नहीं रहेंगी तोह मैं अकेला कैसे करूँगा.

शालिनी बुझे मैं से एकबार विक्रम को देखती है फिर ठीक है बोलके फिर से किचन में चली जाती है.

थोड़ी देर बाद सबका खाना होजाता है तोह सब अपने अपने काम के लिए निकल जाते है.

विक्रम अपने कमरे में आता है तोह देखता है शालिनी उसका बैग पैक कर रही है.

विक्रम – रख दिया सारा सामान.

शालिनी कोई जवाब नहीं देती.

विक्रम शालिनी के पास आता है तोह देखता है उसके आँखों से आंसू बह रहे है.

विक्रम – कब तक यह सब चलेगा शालिनी.

शालिनी – यह सब तोह आपलोगो को अच्छे से पता होगा ना.

विक्रम – तुम्हे तोह सबकुछ अच्छे से पता है फिर भी तुम ऐसी बाते कर रही हो.

शालिनी – समाज तोह आपलोग नहीं रहे है. पहले की बात और थी और अबकी बात और है. मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हु. प्लीज अब और जुल्म ना कीजिये मुझपे.

विक्रम – अच्छा ठीक है. अगले 2 महीने के अंदर जो तुम्हे चाहिए वह मिल जायेगा.

शालिनी – आँखों में आंसू लिए. सचहहहह. सछह केहह रहे है आप. कही फिर मुझसे झूट तोह नहीं बोल रहे है ना.

विक्रम – इस बार नहीं. अगले 2 महीने के अंदर तुम्हे जो चाहिए वह मिल जाएगा. चलो अब जल्दी से सामान पैक कार्डो.

शालिनी – बस होगया है. देखिये यह सब ठिक्क है ना.

विक्रम – तुम हरबार ऐसा hi करती हो. और हरबार सब कुछ अच्छा hi होता है.

शालिनी – क्या करू. हरबार लगता है कुछ अधूरा रह जा रहा है. कुछ काम हो जारहा है.

विक्रम – कुछ काम नहीं है. इनफैक्ट बहोत ज्यादा है. चलो अब मैं चलता हु.

यह बोल विक्रम अपना बैग लेके वह से जाने लगता है.

शालिनी – सुनिए. इससबार पक्का 2 महीने ना. वर्ण मैं खुद....

विक्रम – मैंने कहा ना बस 2 महीना. उसके बाद सब तुम्हारा.

यह बोल विक्रम वह से निकल जाता है.

उधर मुंबई में एक लड़का अपने कमरे में चुप चाप बैठा हुआ था. वह किसी सोच में घूम था. तभी उसके कंधे में कोई हाथ रखता है वह पीछे घूमके देखता है तोह एक औरत कड़ी होती है.

लड़का – आप यहाँ.

औरत – क्यों नहीं आसक्ति.

लड़का – ऐसी बात नहीं है. आइये बैठिये.

औरत – क्या सोच रहे हो.

लड़का – कुछ नहीं.

औरत – मुझसे झूट नहीं बोल सकते. मैं जानती हु क्या सोच रहे हो.

लड़का बस स्माइल कर देता है.

औरत – बस 2 महीने और फिर सब तुम्हारा.

लड़का हैरानी से औरत की तरफ देखने लगता है.

औरत – ऐसे मत देखो. मैं सच कह रही हु. बस 2 महीने और.

लड़का – अचानक.

औरत – बस समजलो वनवास ख़तम हुआ.

लड़का – क्या अब सब ठिक्क है.

औरत – शायद हां. या फिर शायद ना.

लड़का – मतलब.

औरत – अगर गलत रहा तोह होसकता है तुम्हे ठीक करना पड़े. और तुम्हे तोह सब कुछ पता hi है ना.

लड़का – सब नहीं. कुछ कुछ.

औरत – चलो चोरो वह सब. और लो यह खीर खा लो.

लड़का झट्ट से वह खीर का डब्बा ले लेता है और खाने लगता है.

औरत – ारी आराम से खाओ. सब तुम्हारे लिए hi है.

लड़का कुछ नहीं बोलता बस खाते रहता है.

औरत – कभी कभी सोचती हु इतनी छोटी सी उम्र में तुमने कितना कुछ सहा कितना कुछ देखा. कभी कोई शिकायत नहीं की. सब कुछ है है के अपना लिया.

लड़का – शायद यही मेरे नसीब में था. और जो भी हुआ वह सब मेरे अच्छे के लिए hi ना हुआ.

औरत – अच्छा और उसका क्या सोचा है.

लड़का – किसका.

औरत – तुम जानते हो मैं किसकी बात कर रही हु.

लड़का – थोड़ा सीरियस होक. मैं नहीं जानता. और अभी मैं जानना भी नहीं चाहता.

औरत – आखिर कब तक.

लड़का – नहीं जानता. मैं कुछ नहीं जानता.

औरत – देखलो. मैं तोह एहि कहूँगी जो भी करना सोच समाज कर करना.


फिर वह औरत वह से चली जाती है और वह लड़का फिर से अपनी सोच में चला जाता है.
 
अपडेट 3

दिल्ली में विक्रम अपने ऑफिस में बैठा हुआ था और किसी सोच में घूम भी था. उससे यह तक होश नहीं था के उसका सेक्रेटरी उसके केबिन में आगया है. सेक्रेटरी विक्रम को 2 – 3 बार बुलाता है तब उससे होश आता है.

सेक्रेटरी – क्या बात है सर. आप किसी तरह की टेंशन में है.

विक्रम – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. मेरी मुंबई जाने की तैयारी होगयी है.

सेक्रेटरी – हां सर होगयी है. पर सर ऐसे अचानक मुंबई.

विक्रम – हां थोड़ा काम है. फ्लाइट कितने बजे की है.

सेक्रेटरी – टाइम होगया है. आपको निकलना चाहिए.

विक्रम – हम्म. ठीक है.

फिर सेक्रेटरी वह से निकल जाता है और एक कोने में जाके किसी को कॉल करता है.

सेक्रेटरी – आज वह मुंबई जा रहे है अकेले किसी काम से.

सामने से – कितने दिन के लिए.

सेक्रेटरी – 1 दिन के लिए.

सामने से – ठीक है.

फिर फ़ोन कट होजाता है.

थोड़ी देर बाद विक्रम मुंबई के लिए निकल जाता है और उसके पीछे पीछे 2 आदमी और निकलते है.

कुछ 2 घंटे बाद विक्रम मुंबई पहुँच जाता है. वह एयरपोर्ट से एक कैब लेके सीधा एक होटल में जाता है और वह चेक इन करके अपने रूम में चला जाता है.

इधर सुबह सुबह मुंबई के न्यूज़ चैनल पे एक न्यूज़ चल रही थी जिसमे दिखा रहा था के सेहर में में फिर से पुलिस के हाथ लगा ब्लैक मनी. हर बार की तरह इससबार भी कुछ लोगो को बुरी तरह से मारा गया और फिर उन्हें बेहोश करके पुलिस को इन्फॉर्म किया गया.

जबसे यह न्यूज़ वायरल हुई थी कुछ लोगो की नींदें उड़द गयी थी. एक रूम में बैठे होने के बाद भी उनके पसीने छूट रहे थे.

इधर विक्रम थोड़ी देर बाद अपने रूम से एक बैग लेके निकलता है और सीधा एक कैब बुक करके निकल जाता है. उसके पीछे पीछे वह 2 लोग भी निकल जाते है.

विक्रम अपने कैब में बैठ के ड्राइवर को लोकेशन बता देता है और ड्राइवर उस लोकेशन की तरफ जाने के लिए निकल पढता है.

विक्रम – गाडी थोड़ा तेज़ चलना.

ड्राइवर – जी सर.

विक्रम – तुम मुझे अपना उपि स्कैनर दो मैं पाय करदेता हु.

ड्राइवर – यह लीजिये सर.

विक्रम उस स्कैनर को स्कैन करके उससे पैसे भेज देता है. जैसे hi पैसे ड्राइवर के अकाउंट में जाते है ड्राइवर का मोबाइल ब्लिंक करदेता है. ड्राइवर वह मश्ग चेक करता है और पीछे घूमके बोलता है.

ड्राइवर – थैंक यू सर.

विक्रम – अब गाडी को एयरपोर्ट की तरफ ले चलो. यहाँ जिस काम के लिए आया था वह होगया है.

ड्राइवर – जी सर.

विक्रम – वैसे गाडी काफी अच्छी चला लेते हो.

ड्राइवर – थैंक यू सर.

कुछ देर में गाडी एयरपोर्ट के बहार कड़ी रहती है. विक्रम वह उतरता है और ड्राइवर को कुछ बोलके अंदर की तरफ चला जाता है. ड्राइवर भी गाडी बहार की तरफ निकल लेता है.

इधर जो लोग विक्रम का पीछा कर रहे थे वह लोग विक्रम को होटल से सीधा एयरपोर्ट आते देख कंफ्यूज होजाते है. वह किसी को फ़ोन करते है और बोलते है.

आदमी 1 – सर यह तोह पहले सीधा होटल गया. फिर होटल में 15 – 20 मीन्स रुका और वापस से एयरपोर्ट आगया.

सामने से – तुम्हे पूरा यकीन है वह विक्रम hi था.

आदमी 2 – यह सर.

सामने से – अब इसका क्या मतलब हुआ. दिल्ली से मुंबई गया वह सिर्फ 15 – 20 मीन्स सिर्फ होटल गया और वापस दिल्ली. इसके मुंबई जाने का एक्सएक्ट रीज़न क्या था. यह मुंबई गया क्यों.

आदमी 1 – अब हम क्या करे सर.

सामने से – तुमलोग वापस आजाओ. अब वह रहके कोई फैयदा नहीं.

आदमी 1 – ठीक है सर.

फिर वह लोग भी वापस से दिल्ली चले जाते है.

इधर शालिनी विक्रम को कॉल करती है और पूछती है.

शालिनी – कहा हो आप.

विक्रम – वापस आरहा हु.

शालिनी – होगया.

विक्रम – हां.

शालिनी – ठीक है ना. कोई प्रॉब्लम तोह नहीं है ना. सब अच्छा है ना.

विक्रम – तुम चिंता मत करो. सब अच्छा है और कोई प्रॉब्लम नहीं है.

शालिनी – अच्छा.

फिर कॉल कट होजाता है तोह शालिनी एक और कॉल लगाती है.

सामने से – Hello.

शालिनी – Hello. अभी शालिनी और कुछ बोलती तभी पीछे से विद्या आवाज़ आती है.

विद्या - भाभी चलिए मीटिंग के लिए लेट होरहा है. और यह आप किस्से बात कर रही है.

शालिनी – थोड़ा घबरा कर. किसी से नहीं. तुम चलो मैं आती हु.

विद्या – जल्दी आइये.

फिर विद्या वह से चली जाती है.

शालिनी – ी ऍम सॉरी.

सामने से – आप क्यों सॉरी बोल रही है. शायद अभी हमारा टाइम नहीं आया है.

शालिनी – ऐसे मत बोलो. गलती मेरी hi है. मुझे अभी कॉल नहीं करना चाहिए था.

सामने से – कोई बात नहीं. आप जाइये. फिर कभी बात होगी.

शालिनी – ठीक हो ना.

सामने से – हआ.

शालिनी – बस और कुछ दिन.

सामने से – हस्ते हुए. ठीक है. जल्द hi.

शालिनी – हआ.

फिर कॉल कट होजाता है.

उधर कुछ लोग एक कमरे में बैठे हुए थे और कुछ सोच रहे थे.

आदमी 1 – पता नहीं यह हरबार मुंबई सिर्फ 15 – 20 मीन्स के लिए क्यों जाता है. आखिर क्यों.

आदमी 2 – इतना तोह पता है इसका वह राज़ मुंबई में hi है. इसीलिए वह सिर्फ 15 – 20 मीन्स के लिए मुंबई जाता है.

आदमी 3 – अभी तक पता नहीं चला ऐसा कौनसा राज़ है जो यह बाप बेटे छुपाये बैठे है. जिसकी खबर कानो कान किसीको नहीं.

आदमी 4 – और वह पेपर्स भी पता नहीं कहा छुपा रखा है इन् बाप बेटो ने.

आदमी 1 – मुझे यह कंपनी चाहिए. पूरी की पूरी चाहिए किसी भी कीमत पे.

आदमी 2 – पर यह कैसे पॉसिबल है.

आदमी 1 – पॉसिबल नहीं है तोह पॉसिबल करो. तुम्हे पैसे किस बात के दे रहा हु. मैंने इस प्रॉपर्टी के लिए hi उसके बेटे को 10 साल पहले मौत के हवाले किया था. जल्द से जल्द यह पूरी जायदात मेरे नाम करो. और उस आदमी का पता चला जो हमारा नुक्सान किये जा रहा है.

आदमी 3 – अभी तक कुछ पता नहीं चला है. पता नहीं कौन है कहा से आता है. बस हमारे आदमियों मारता है बेहोश करता है और पुलिस को कॉल करके पैसे और सामान पकड़वा देता है.

आदमी 1 – जल्दी पता लगाओ उसका. उसकी वजह से पिछले 4 महीने से बहोत नुक्सान होचुका है मेरा. और अब तोह कंपनी के फाइल्स में भी पता लगने लगा है. इससे पहले किसी और को पता चले जल्दी से ख़तम करो उससे.



यह बोल वह आदमी वह से निकल जाता है और बाकी के लोग उससे वह से जाते हुए देखते रहते है.
 
अपडेट 4

इधर विक्रम मुंबई से सीधा दिल्ली आता है और अपने घर चला जाता है जहा प्रताप उसका इंतज़ार कर रहे थे.

प्रताप – सब ठीक है.

विक्रम – हां सब ठीक है.

प्रताप – मैंने सुने 2 महीने के अंदर सब होजायेगा.

विक्रम – हां. मैंने सिर्फ 2 महीने के अंदर hi शालिनी को वडा किया है.

प्रताप – पर क्यों. तुझे पता है अभी भी सब सही नहीं है.

विक्रम – पता है. पर अब सब संभाला जाएगा.

प्रताप – तुम्हे पता है ना क्या हुआ था उस वक़्त. कितनी मुश्किलें आयी थी.

विक्रम – और कितने दिन डरेंगे. कितने दिन ऐसे hi रहेंगे. बस अब और नहीं. अब वक़्त आगया है उस राज़ के बहार आने का. अगर अब स राज़ को बहार नहीं लाया तोह यह एक नाइंसाफी होगी.

प्रताप – देखलो जैसा तुम्हे ठीक लगे.

विक्रम – अब जो होगा देखा जाएगा.

फिर विक्रम अपने कमरे में चला है और प्रताप अपनी सोचो में घूम होजाता है.

विक्रम अपने कमरे में आके अपने वार्डरॉब से एक पिक्चर निकलता है और उससे देखते हुए बोलता है.

विक्रम – मुझे माफ़ करना रश्मि मैंने कही न कही तुम्हारे साथ बहोत बड़ी नाइंसाफी की है. पर मैं क्या करता. तुम तोह जानती हो ना मैं मजबूर था. अगर मैं वह नहीं करता तोह पता नहीं क्या होजाता. पर अब और नहीं. अब मैं सबकुछ ठीक करदूंगा. बहोत जी लिया डर डर के. अब जो होगा देखा जाएगा.

इधर वह लड़की अपना कॉलेज ख़तम करके बुझे मैं से अपने घर आके अपने कमरे में चली जाती है और अपनी एक बुक से उस लड़के की पिक्चर निकालके देखने लगती है.

लड़की – तुम चाहे कितनी भी कोशिश करलो छुपाने की पर मैं जानती हु तुम भी मुझसे उतना hi प्यार करते हो. मुझे पता है तुम्हारी कोई न कोई मज़बूरी है जिसके वजह से तुम मुझसे ऐसे बेहवे करते हो. पर मैंने भी तुमसे सच्चा प्यार किया है मैं तुम्हारे लिए पूरी ज़िन्दगी इंतज़ार करुँगी.

इधर मुंबई में एक लड़का अपने कमरे में बैठा था तभी उसके कमरे में एक औरत आती है.

औरत – मिल आये उनसे.

लड़का – हां.

औरत – चलो अच्छा है. दिखाओ इससबार क्या आया.

लड़का – वही जो हरबार आता है. यह बोल वह लड़का एक बैग उस औरत की तरफ बढ़ा देता है.

औरत – हम्म्म. और बताओ बात हुई उनसे.

लड़का – हम्म. पर ज्यादा नहीं.

औरत – कोई बात नहीं. बस और कुछ hi समय की तोह बात है.

लड़का – हम्म.

औरत – क्या बात है. क्या सोच रहे हो.

लड़का – यही. कुछ समय बाद क्या सब कुछ वैसा hi होगा जैसा अब है.

औरत – हम्म. सच कहु तोह मुझे नहीं लगता सब कुछ ऐसा रहेगा. बहोत कुछ बदलेगा पर तुम्हे सब संभालना भी होगा. और मुझे पता है तुम सब संभल लोगे. चलो अब सो जाओ. बहोत रात होगयी है.

लड़का – गुड नाईट.

औरत – गुड नाईट.

फिर वह औरत अपने कमरे में चली जाती है और वह लड़का अपना मोबाइल निकल के उसमे आये एक मैसेज को देखने लगता है जिसमे लिखा था हैप्पी बर्थडे.

ऐसे hi कुछ दिन निकल जाते है. इन् कुछ दिनों में विक्रम और शालिनी ने उस राज़ को बहार लाने की बहोत सी तैयारियां कर ली थी जिसके बारे में किसी को कानो कान खबर नहीं थी.

धीरे धीरे टाइम गुजरने लगता है और वह वक़्त आने को होता है. एकदिन विक्रम अपने ऑफिस का काम ख़तम करके घर जाने के लिए निकलता है. तभी उसका फ़ोन बजता है.

विक्रम – Hello.

सामने से – Hello.

विक्रम – कैसे हो.

सामने से – अच्छा हु. आप कैसे है.

विक्रम – मैं भी अच्छा हु. आज अचानक सामने से तुमने कॉल किया.

सामने से – बस आपसे बात करने का मैं कर रहा था.

विक्रम – क्या बात है कुछ कहना चाहते हो.

सामने से – नही कुछ नहीं.

विक्रम – सब ठीक है ना.

सामने से – हां सब ठीक है.

विक्रम – कुछ कहना है तोह कह सकते हो.

सामने से – अभी नहीं. कुछ दिन बाद जब मिलूंगा तब बोलूंगा.

विक्रम – ठीक है. जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. हम जल्दी मिलेंगे.

सामने से – जी.

विक्रम – तुम नाराज़ तोह नहीं हो न. हमने तुम्हारे साथे ऐसा क्या.

सामने से – जी नहीं. मैं बिलकुल भी नाराज़ नहीं हु.



अभी और कोई कुछ बोलता तभी एक जोरदार धमाका होता है और कॉल कट होजाता है.
 
अपडेट 5

1 दिन बाद हर एक न्यूज़ चैनल में एक hi ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही थी जिसमे लिखा था दिल्ली के मशहूर बिजनेसमैन विक्रम सिंह राजपूत की परसो रात ुइ सड़क दुर्घटना में मौत होचुकी है. उनके साथ उनके ड्राइवर की भी मौत होचुकी है.

राजपूत मेन्शन में एकदम मातम छाया हुआ था. घर के हॉल में विक्रम की लाश राखी हुई थी और चारो तरफ लोग बैठे हुए थे. विक्रम की लाश के पैरों की तरफ शालिनी एकदम चुप बैठी हुई थी. उसके चेहरे पे किसी भी तरह का कोई भी इमोशन नहीं था वह एकदम इमोशनलेस बैठी हुई थी.

बड़े बड़े बिजनेसमैन और पॉलिटिशंस जिनसे विक्रम की जान पहचान थी सबलोग उसके आखरी दर्शन करने आये हुए थे. उनमे से hi एक आया था सूरज वर्मा, वर्मा ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज का मालिक और राजपूत ग्रुप का सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर.

सूरज – इतनी जल्दी आप चले जाएंगे यह कभी सोचा ना था. बिज़नेस में हमारी बहोत बार आमना सामना हुआ था. मेरे एक अच्छे दोस्त थे आप. इतनी जल्दी चले जाएंगे यह कभी नहीं सोचा था मैंने. भाभी जी अपने आप को अकेला मत समझिये. हमलोग है आपके साथ.

शालिनी उसके किसी भी बात का जवाब नहीं देती बस एकदम चुप चाप बैठी हुई थी.

सूरज वर्मा के बाद और भी कुछ लोग आते है और विक्रम को आखरी बार देख कर चले जाते है. धीरे धीरे विक्रम को समशान की और के जाय जाता है. उसकी अर्थी को विक्की, शेखर और भी कुछ लोग कांधा देते है.

विक्रम का बीटा तोह था नहीं इसीलिए उसकी चीता को आग विक्की hi देता है. चीता को आग देने के बाद सबलोग धीरे धीरे अपने अपने घर की तरफ निकल जाते है पर कोई था जो स्टार्टिंग से लेकर एन्ड तक वही पे खड़ा था जिसकी आँखों में ांगारें बरस रहे थे.

घर में सबका हाल बेहाल था सबसे ज्यादा हालत तोह शालिनी की ख़राब थी. विद्या ने सभी को जैसे तैसे करके कुछ खिला दिया था पर शालिनी को वह नहीं खिला पा रही थी. पर तभी शालिनी के मोबाइल में एक मैसेज आता है जिसको पढ़ने के बाद उसने थोड़ा खा लिया था.

इधर दिल्ली में सूरज वर्मा के घर में महफ़िल जमी हुई थी जिसमे कुल 4 लोग थे और सब विक्रम की मौत का जश्न मन रहे थे.

सूरज – चिरस्सस्सस. आखिर कर विक्रम को हमारे रास्ते से हटा hi दिया.

आदमी 2 – हआ. बहोत hi बढ़िया काम हुआ है यह. हमने उस कंपनी की नीव hi हिला दी है.

आदमी 3 – अब राजपूत ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज बर्बाद होगी.

आदमी 4 – अब वह पे हमारी हुकूमत चलेगी. वही होगा जो अब हम चाहेंगे.

सूरज – सही कहा. उस विक्रम को कितनी बार समझाया हमारे रास्ते में मत आओ. पर वह माना hi नहीं. हमेशा हमारे रास्ते में आजाता और हमसे सबकुछ ले जाता.

आदमी 3 – अब होगा राजपूत ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज के नए मद का सिलेक्शन जिसमे अब हमारा शेखर बैठेगा.

आदमी 4 – पर उस पोस्ट के लिए सबसे बड़ी दावेदार विक्रम की बीवी है. उसके होते हुए वह पोस्ट पाना मुश्किल है.

आदमी 2 – पर वह उस पोस्ट पे बैठेगी नहीं. उसने उस पोस्ट के लिए पहले hi मन करदिया है.

आदमी 4 – तब तोह फिर उसका वह भाई शेखर hi है.

सूरज – हां. बैठेगा वह पर कंपनी चलेगी हमारे ीशीटरो में. पावर होगी उसके पास पर उसे करेंगे हम.

यह बोल वह हसने लगता है और उसके साथ बाकी सब भी हसने लगते है.

ऐसे hi कुछ दिन गुज़र जाते है. इन् कुछ दिनों में हर दिन राजपूत मेन्शन में किसी न किसी का आना जाना लगा रहता था. शालिनी ने भी अपने आप को संभल लिया था.

एकदिन शालिनी शाम को घर से निकलती है और एक होटल में जाती है जहा उसका इंतज़ार 6 लोग पहले से hi कर रहे थे.

शालिनी – मेरे एक बार बुलाने पे आप सब आये इसके लिए बहोत बहोत सुखरिया.

आदमी 1 – यह आप कैसी बात कर रही है. आप ऐसे शुक्रिया मत बोलिये.

आदमी 2 – हां. बोलिये हमसे क्या काम था.

शालिनी – देखिये अब विक्रम तोह रहे नहीं. और अब कंपनी के नए मद के किये सिलेक्शन होगा जिसमे वोटिंग की जायेगी.

आदमी 3 – हआ. और मेरे ख्याल से आपको भी इसमें हिस्सा लेना चाहिए.

आदमी 4 – सही कहा. इस पोस्ट की अब बड़ी दावेदार आप hi है.

शालिनी – मैंने पहले भी कहा है मुझे मद नहीं बनना है.

आदमी 5 – तोह फिर शेखर जी.

शालिनी – नहीं. पर एहसाब हो उससे पहले मैं कुछ कहना चाहती हु. उम्मीद है आपसब मेरा साथ देंगे.

आदमी 6 – क्या बात है शालिनी जी.

फिर शालिनी उन् सब को कुछ बोलती है जिससे सुनके विह सब हैरान होजाते है.

आदमी 1 – यह सब आप क्या कह रही है शालिनी जी.

आदमी 2 – हां शालिनी जी. यह सब क्या है.

शालिनी – मुझे पता है यह बहोत hi बड़ी बात है. पर एहि विक्रम की आखरी इच्छा थी.

आदमी 3 – पर क्या कोई इस बात को मानेगा.

आदमी 4 – हां. इस पर बहोत तरह के सवाल उठेंगे. मीडिया बवाल खड़ा करदेगी.

शालिनी – मुझे पता है और उनन्साब सवालों का जवाब होगा मेरे पास. मुझे बस आपलोगो का साथ चाहिए. विक्रम आपलोगो पे बहोत भरोसा करते थे.

वह सारे आदमी सोच में घूम होजाते है. वह क्या करे क्या ना करे इसमें hi घूम थी.



शालिनी – मैं चलती हु. आपसब सोच लीजिये. कल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की मीटिंग है जिसमे नए मद के सिलेक्शन की अनाउंसमेंट होगी. यह बोल शालिनी वह से निकल जाती है.
 
अपडेट 6

अगले दिन राजपूत ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज के मैं हॉल में भीड़ जमा थी. सारे एम्प्लाइज वह खड़े थे जिनके साथ पूरा राजपूत परिवार भी था. एक स्टेज में कुछ चेयर्स लगे हुए थे जिसमे बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स बैठे हुए थे साथ में शालिनी प्रताप और शेखर भी बैठे हुए थे.

कुछ देर बाद hi मीटिंग स्टार्ट होती है और शालिनी पोडियम में आकर बोलने लगती है.

शालिनी – कुछ दिनों पहले hi इस कंपनी के मद और मेरे पति मर. विक्रम सिंह राजपूत की मौत के बाद जैसे सबकुछ रुख सा गया है. पर जैसे की वह कहा करते थे “थे शो मस्ट जो ों”. उसी बात को ध्यान में रखते हुए आज यह मीटिंग इसीलिए बुलाई गयी है ताकि इस कंपनी के नए मद का सिलेक्शन होसके.

इस पोस्ट के लिए टोटल 2 दावेदार है. एक मैं शालिनी विक्रम सिंह राजपूत और दूसरे है शेखर सिंह राजपूत. पर जैसा की मैंने पहले hi कह दिया था के मुझे मद नहीं बनना है इसीलिए मैं मेरी जगह किसी और को देना चाहती हु.

शालिनी की यह बात सुनते hi सबलोग हैरान होजाते है और पुरे हॉल में शोर मचने लगता है क्यों अचानक से पुरे हॉल की लाइट्स ऑफ जाती जय. पर तभी सामने एक स्क्रीन में विक्रम की पिक्चर दिखाई देने लगती है.

शालिनी – यह विक्रम की लास्ट वीडियो रिकॉर्डिंग है जिसमे उन्होंने नए मद का सिलेक्शन खुद किया है.

स्क्रीन में विक्रम की रिकॉर्डिंग स्टार्ट होती है जिसमे विक्रम बोलता है.

विक्रम – मैंने पूरी दुनिया से एक राज़ छिपाया है. एक ऐसा राज़ जिससे सिर्फ मैं मेरे पिता और मेरी पत्नी hi वाकिफ है. पर अब वक़्त आगया है उस राज़ के खुलने का. आप में बहोत लोगो को पता होगा मेरा एक बीटा भी था जिसकी आज से 10 साल पहले मौत होचुकी थी. पर यह बात सच नहीं है. मेरा बीटा मेरा अपना खून ज़िंदा है और बिलकुल सही सलामत है.

जैसे hi विक्रम यह बोलता है पुरे हॉल में शोर गूंजने लगता है. सबको विक्रम की बात से बहोत hi ज्यादा हैरानी हुई थी. कुछ लोग शॉक में थे तोह कुछ लोगो के चेहरे में ख़ुशी नज़र आरही थी.

विक्रम – मेरा बीटा जिससे मैंने पिछले 10 सालों से पूरी दुनिया से छुपा के रखा था अब उसके वापस आने का वक़्त आगया है. मेरे बाद इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर मेरा अपना बीटा बनेगा. मेरा बीटा “आर्यन विक्रम सिंह राजपूत”. इसके बाद hi वीडियो रिकॉर्डिंग बंद होजाती है और हॉल की लाइट जल जाती है.

शालिनी – सो लेडीज एंड जेंटलमेन प्लीज वेलकम थे नई मद ऑफ़ राजपूत ग्रुप मर. आर्यन सिंह राजपूत.

शालिनी के चुप होते hi पुरे कमरे में तालियों की गरगराहट सुरु होजाती है और झट्ट से पीछे का मैं दूर ओपन होता है जिसमे से आर्यन अंदर आता है और सीधा स्टेज में आके प्रताप के पेअर छूटा है.

आर्यन को देख कर बहोत लोगो के होश उड़द चुके थे जिसमे पूरा राजपूत परिवार भी शामिल था. सबलोग बड़ी बड़ी आँखों से आर्यन को देख रहे थे.

इधर आर्यन प्रताप के पेअर चुने के बाद विक्रम की पिक्चर के पास जाके हाथ जोड़ के खड़ा होजाता है और फिर शालिनी के पास आके उसके पैरर छूटा है तोह शालिनी उससे गले से लगा लेती है.

फिर आर्यन पोडियम में जाता है और बोलने लगता है.

आर्यन – आप सब का बहोत बहोत शुक्रिया. मुझे पता है यहाँ सबके मैं में बहोत सारे सवाल है. पर धैर्य रखिये सबको सब सवालों के जवाब मिलेंगे. मुझे पता है यहाँ बहोत से लोगो को मुझे देख कर ख़ुशी होरही है तोह बहोत से लोगो को हैरानी के साथ साथ परेशानी भी होरही है. पर यकीन मानिये कुछ hi दिनों के अंदर सबकी हैरानी और परेशानी हमेशा हमेशा के किये दुर्र करदूंगा. यह मेरा वडा है. आर्यन सिंह राजपूत का वडा है.

आर्यन के बोलने के बाद फिर से तालियों की गरगराहट गूंजने लगती है.

फिर सारे एम्प्लोयी एक एक करके अपने काम में लग जाते है. शालिनी प्रताप शेखर और आर्यन बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के साथ कांफ्रेंस रूम में चले जाते है और घर वाले अपने घर चले जाते है.

कांफ्रेंस रूम में एकदम सन्नाटा फैला हुआ था. किसी के कुछ समाज नहीं आरहा था. उस सन्नाटे को ख़तम करते हुए एक बोर्ड मेंबर बोलता है.

मेंबर 1 – यह सब क्या है शालिनी जी. आप ऐसे hi किसी को भी कैसे मद बना सकती है.

प्रताप – बोलने से पहले सोच लो किसके बारे में बोल रहे हो. यह कोई भी नहीं मेरा पोता है.

मेंबर 2 – माना की यह आपका पोता है पर इतने साल से यह कहा था. विक्रम जी आखरी समय में यह कहा था. आज अचानक से यह आगया और आपलोगो ने इसको मद बना दिया. यह गलत है सरासर गलत है.

शालिनी – यह उस वक़्त कहा था यह हमारा निजी मामला है. और इस मद हमने नहीं बनाया है इससे मद खुद विक्रम ने बनाया है. और यह रहा इसका लीगल डॉक्यूमेंट जिसमे खुद विक्रम के सिग्न है.

मेंबर 3 – पर यह गलत है. खाश कर शेखर जी के साथ यह गलत है. मद बनने का हक़ शेखर जी को था. और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स से चर्चा किये बगैर वह कैसे इतना बड़ा फैसला ले सकते है.

शेखर – अगर भैया ने यह फैसला किया है तोह कुछ सोच कर hi किया होगा.

शालिनी – और रही बात बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स से पूछने की तोह वह अभी होजायेगा. आज यहाँ सारे बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स मौजूद है. तोह जो लोग विक्रम के फैसले से सहमत है वह अपना हाथ खड़ा करे.

शालिनी के बोलने के संग संग 10 बोर्ड मेंबर्स में से 6 मेंबर्स अपना हाथ खड़ा कर देते है.

शालिनी – लीजिये फैसला होगया. अब आर्यन hi होगा इस कंपनी का मद.



जिन 4 बोर्ड मेंबर्स ने हाथ नहीं उठाया था वह इस फैसले से ना खुश होक उस रूम से बहार निकल जाते है. थोड़ी देर बाद बाकी सब भी वह से निकल जाते है. शालिनी प्रताप शेखर और आर्यन चारो भी अपने घर के लिए निकल जाते है.
 
अपडेट 7

कुछ देर बाद सबलोग घर आजाते है. जैसे hi आर्यन घर में एंट्री करने वाला होता है विद्या आरती की थाली हाथ में लेके आजाती है और आर्यन की आरती उतरती है और फिर वह घर के अंदर आता है.

थोड़ी hi देर में सबलोग आर्यन को घेरर के बैठ जाते है और सवालों के पहाड़ खड़े कर देते है.

माहिरा – मम्मी यह सब क्या है. अगर भैया ज़िंदा थे तोह आपलोगो ने 10 साल तक यह बात हमसे क्यों छुपाई. क्यों भैया को हमसे दुर्र रखा.

इशिता – हां मम्मी. अगर भाई ज़िंदा थे तोह क्यों हुम्हे बोलै गया के यह अब ज़िंदा नहीं है.

विद्या – बोलिये भाभी. आपलोगो ने इतने बड़ा सच हमसे क्यों छुपाया. क्यों इस घर के बड़े बेटे को इतने साल तक दुर्र रखा. और आर्यन तुम कहा थी इतने साल. क्या तुम्हे हमारी याद नहीं आयी.

माहिरा – मम्मी दादाजी आपलोग चुप क्यों है. बताइये हुम्हे आपलोगो ने ऐसा क्यों किया.

प्रताप – ताकि तुम्हारा भाई ज़िंदा रह सके. अगर उस वक़्त हम यह झूट नहीं बोलते तोह आज तुम्हारा भाई ज़िंदा नहीं होता.

शालिनी – विद्या तुम्हे याद होगा न बचपन में आर्यन पे कितने हमले हुए थे. और जब वह 15 साल का था तब इस्पे जानलेवा हुम्ला हुआ था.

विद्या – हां याद है. और उस जानलेवा हमले में hi तोह हुम्हे बताया गया था के आर्यन नहीं रहा.

शालिनी – हां. वह झूट कहा था. उस हमले क्र बाद आर्यन 3 साल के लिए कोमा में था. और अगर तब हम बोल देते के आर्यन अब भी ज़िंदा है तोह शायद मेरा बच्चा आज ज़िंदा ना होता. हुम्हे इससे बचने के लिए इतना बड़ा झूट बोलना पड़ा और इससे एक राज़ बनाना पड़ा.

विद्या – तोह इतने समय से कहा था यह. और कौन था वह जो इस्पे हुम्ला करता था.

आर्यन – मैं मुंबई में था. और मेरे ऊपर हमले कौन करता था यह अब जल्द पता चलेगा. वह अब मेरी पकड़ से ज्यादा दुर्र नहीं है.

शेखर – इसीलिए भैया हर महीने मुंबई जाते थे.

विद्या – और आप जो चुप चुप कर फ़ोन में बाते करती थी वह आर्यन से करती थी.

शालिनी – हआ. और हुम्हे माफ़ कार्डो हमने सिर्फ इसकी जान बचने के लिए इतनी बड़ी सच्चाई तुम सब से छुपाई.

माहिरा – पर भाई का चेहरा इतना क्यों बदला हुआ है. बचपन की फोटो के साथ थोड़ी भी मैच नहीं है.

शालिनी – वह एक्सीडेंट के बाद इसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी भी करनी पढ़ी थी. इसीलिए इसका चेहरे अलग दिख रहा है.

विद्या – अगर यह ज़िंदा था तोह विक्रम भैया के आखरी समय में यह क्यों नहीं आया.

शालिनी – किसने कहा आर्यन वह नहीं था. आर्यन ने सिर्फ विक्रम की चीता को आग नहीं दी है बाकी इसने पूरा काम किया है. एक बेटे होने का पूरा फ़र्ज़ निभाया है आर्यन ने.

अब अगर तुमलोगो के सवाल ख़तम होगये है तोह इससे आराम करने दो.

शेखर – हम्म्म ठिक्क है.

यह बोल सबलोग वह से चले जाते है. बस शालिनी प्रताप और आर्यन hi वह खड़े रहते है.

आर्यन – आप चिंता ना करे अब सब कुछ आर्यन की निगरानी में होगा. आज तक जो कुछ भी हुआ है उसकी सजा सबको मिलेगी.

शालिनी – हम्म्म. तुम चलो तुम्हे तुम्हारा कमरा दिखा देती हु.

फिर शालिनी आर्यन को उसका कमरा दिखा देती है और वह खुद अपने कमरे में चली जाती है.

आर्यन अपने कमरे में आके संग संग किसी को एक मश्ग करता है और फिर वह मश्ग डिलीट भी कर देता है.

इधर सूरज वर्मा जब यह न्यूज़ सुनता है तोह उसके पैरों टेल ज़मीन खिसक जाती है.

सूरज – यह कैसे होसकता है. हमारा बनाया हुआ प्लान फ़ैल कैसे होगया. और उसका वह मारा हुआ बीटा वापस कैसे आगया.

आदमी – यह तोह तुम्हे पता होना चाहिए. वह मुंबई अपने बेटे से मिलने जाता है और तुमलोगो को इस बात की खबर तक नहीं थी. तुम्हारे आदमी क्या झक्क मारने के लिए जाते थे उसके पीछे.

सूरज – मुझे खुद कुछ समाज नहीं आरहा है. मुझे तोह लगा था विक्रम के मरने के बाद यह कंपनी हमारी होगी. पर यह सब कैसे होगया. विक्रम ने मरने के बाद भी कंपनी हमारे हाथों में नहीं आने दी.

आदमी – यह कंपनी तोह हमारी होक रहेगी. उसका बीटा तब नहीं मारा तोह अब मरेगा. अब उससे मैं अपने हाथों से मरूंगा. पिछली बार तोह किस्मत से वह बछ गया था. पर अब वह नहीं बचेगा. मुझे उस आर्यन की पल पल की खबर चाहिए. वह क्या करता है किस्से मिलता है कहा जाता है कब जाता है सब कुछ.

सूरज – ठीक है.

थोड़ी देर बाद शालिनी आर्यन के कमरे में जाती है तोह देखती है वह सोफे में बैठा हुआ है.

शालिनी – ारी तुम यहाँ क्यों बैठे हुए हो.

आर्यन – बस ऐसे hi.

शालिनी – मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

आर्यन – जी बोलिये.

शालिनी – मुझे सब कुछ बताओ. खाश कर वह जो मुझे नहीं पता.

आर्यन – आप क्या बोल रही है मुझे समाज नहीं आरहा है.

शालिनी उससे घुर्र के देखती है तोह ेओह सकपका जाता है.

शालिनी – अब बोलोगे भी या नहीं.

आर्यन – मैं नहीं बता सकता.

शालिनी – माँ हु मैं. मुझे जान्ने का पूरा हक़ है.

आर्यन – पर.

शालिनी – तुम चिंता मत करो. मैं देख लुंगी.

फिर शालिनी जो जानना चाहती थी आर्यन उससे सब कुछ बता देता है.

शालिनी – क्या वह सच है.

आर्यन – हआ.

शालिनी – कौन है वह. उसके बारे में सब बताओ.

आर्यन फिर शालिनी को बोलना स्टार्ट करता है और शालिनी वह सब अपने मोबाइल में नोट करने लगता है.

शालिनी – और भी कुछ है जो मुझे पता होना चाहिए.

आर्यन – जी नहीं. जो कुछ भी था मैंने बोल दिया. अब मुझे और कुछ नहीं पता.

शालिनी – ठीक है.

आर्यन – अगर....

शालिनी – मैं हूँ ना.

आर्यन – जीई.

फिर शालिनी वह से अपने रूम में चली जाती है और अपने फ़ोन में कुछ सर्च करने लगती है. थोड़ी देर बाद उससे कुछ मिलता है जिससे देख कर उसके चेहरे में एक मुस्कराहट आजाती है.

शालिनी – तोह यह है वह.



फिर वह एक कॉल करती है और सामने वाले को कुछ इंस्ट्रक्शंस देती है और कॉल कट कर देती है.
 
Back
Top