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इधर ऑपरेशन थिएटर के बहार सबलोग खड़े आर्यन के लिए प्रार्थना कर रहे थे. पुलिस भी वह पे आचुकी थी और अपनी फॉर्मलिटीज पूरी कर रही थी.
थोड़ी देर में डॉक्टर बहार आता है तोह सब उससे घेरर लेते है और सवालों की बारिश करदेते है.
शालिनी – डॉक्टर कैसा है मेरा बीटा. वह ठीक तोह है ना. उससे कुछ हुआ तोह नहीं है ना.
शेखर – बोलिये ना डॉक्टर. कैसा है आर्यन. वह ठीक है ना.
डॉक्टर – आपलोग शांत होजाइये. अभी हम कुछ नहीं कह सकते. ऑपरेशन अभी भी पूरा नहीं हुआ है. गोली पेशेंट के दिल के बहोत hi करीब लगी है. गोली निकलने में पेशेंट की जान को खतरा भी है. हम भी पूरी कोशिश कर रहे है. हमने सीनियर डॉक्टर को बुला लिया है. वह आते hi हम फिर से ऑपरेशन की तैयारी स्टार्ट करेंगे.
डॉक्टर की बात सुनते hi सबलोगो की हालत ख़राब होजाती है. शालिनी तोह वही गिर्र जाती है. अपने पैरों में खड़े रहने की शक्ति hi खू देती है वह.
शेखर – डॉक्टर आप कुछ भी कीजिये पर हमारे बेटे को बचा लीजिये. बड़े से बड़े डॉक्टर को बुलाइये पर उससे बचा लीजिये.
डॉक्टर – हम अपनी पूरी कोशिश करेंगी. आपलोग तब तक खून का इंतज़ाम करदिजिये. पेशेंट का खून बहोत बह चूका है.
विक्की – डॉक्टर आप मेरा खून ले लीजिये. मेरा ो पॉजिटिव है. यूनिवर्सल डोनर हु मैं. आप मेरा खून ले लीजिये.
शेखर – हां आप मेरा भी ले सकते है. मेरा भी ो पॉजिटिव hi है.
डॉक्टर – ी ऍम सॉरी. बूत हम यह खून नहीं ले सकते. पेशेंट का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है.
शेखर – बी नेगेटिव. यह ग्रुप तोह घर के किसी मेंबर का भी नहीं है.
डॉक्टर – हॉस्पिटल में भी यह ग्रुप अवेलेबल नहीं है. आपलोग जल्द से जल्द ब्लड का इंतज़ाम कर दीजिये. हमलोग ऑपरेशन की तैयारी करते है.
यह बोल डॉक्टर वह से चला जाता है.
शालिनी – शेखर जल्दी से कुछ करो. कही से भी खून का इंतज़ाम करो.
शेखर – मैं कुछ करता हु भाभी. कुछ नहीं होगा आर्यन को. मैं कुछ भी करके खून का इंतज़ाम करदूंगा.
फिर शेखर अपना फ़ोन निकल के अपने जान पहचान वाले सभी को कॉल लगता है और खून का इंतज़ाम करने लगता है. वह कुछ हॉस्पिटल्स में भी कॉल करता है पर उससे खून कही नहीं मिलता.
शालिनी – शेखर मुझे लगता है अब हमारे पास एक hi रास्ता है. हुम्हे उससे बुलाना पड़ेगा. क्योकि उसी के पास इस ब्लड ग्रुप का खून है.
शेखर – नहीं भाभी. अभी हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये है जो हुम्हे उसकी मदद लेनी पड़े. मैं कुछ भी करके खून का इंतज़ाम करदूंगा पर उसकी मदद नहीं लूंगा. कभी भी नहीं.
शालिनी – शेखर हमारे पास वक़्त बहोत काम है. अगर खून का इंतज़ाम नहीं हुआ तोह ऑपरेशन स्टार्ट नहीं होगा.
इशिता – खून का इंतज़ाम होगया है मम्मी.
इशिता की बात सुनके सब उसकी तरफ देखने लगते है. जो किसी लड़के के साथ वह कड़ी थी.
शेखर – खून का इंतज़ाम होगया. कैसे बीटा. कहा मिला तुम्हे खून.
इशिता – चाचा जी. यह मेरा दोस्त है. इसका ब्लड ग्रुप और भाई का ब्लड ग्रुप शामे है. जब डॉक्टर ने बोलै तोह मैंने संग संग इससे कॉल किया. और यह खून डोनेट करने के लिए तैयार होगया है.
शेखर उस लड़के के पास आता है और उससे गौर से देखने लगता है.
शेखर – मैंने तुम्हे कही देखा है. कौन हो तुम.
लड़का – सर मैं आपकी कंपनी में जूनियर हर हु. मेरा नाम अभिमन्यु है. अभिमन्यु अग्रवाल.
शेखर – हां हां. याद आया. तुम्हारा बहोत बहोत शुक्तिया बीटा. तुम इस मुसीबत के टाइम में मदद के लिए आगे आये.
अभिमन्यु – यह तोह मेरा फ़र्ज़ है सर.
फिर शेखर अभिमन्यु को लेके सीधा डॉक्टर के पास जाता है जहा डॉक्टर अभिमन्यु का ब्लड एक बार फिर से टेस्ट करके आर्यन के निकलने लगता है.
इधर माहिरा को जब आर्यन की हालत के बारे में पता चला तोह उसकी हालत और ज्यादा ख़राब होगयी थी. वह बार बार एक hi बात बोल रही थी उसकी मौत आर्यन ने अपने नाम कर्ली.
उधर अजय और उसका परिवार आर्यन के संग आये लड़के को देखे जा रहे थे.
अजय – कौन है यह लड़का. जिसने आर्यन की इतनी मदद की.
माया – हां. इसी लड़के की वजह से आर्यन वक़्त रहते हॉस्पिटल आगया.
अर्जुन – विक्की बोल रहा था दोस्त है उसका. इसने माहिरा को बचने में भी मदद की है और इसिने गाडी में आर्यन को यहाँ पहोंच्या है.
अर्जुन की बात सुनके अजय उस लड़के के पास जाके बैठ जाता है और उससे बात करने लगता है.
अजय – तुम आर्यन के क्या लगते हो.
वह लड़का एकबार अजय की तरफ देखता है फिर बोलता है दोस्त है वह मेरा.
अजय – ोू. जरूर मुंबई में hi दोस्ती हुई होगी तुम्हारी.
लड़का – हआ.
अजय – तुमने बहोत मदद की है राजपूत परिवार की. अगर कभी भी किसी भी चीज़ की जरुरत हो तोह बे ज़हिज़हाक के मांग लेना.
लड़का – आपको ऐसा क्यों लगा के मैंने जो कुछ भी किया है वह किसी लालच में किया है.
अजय – तुम गलत समाज रहे हो. मेरे कहने का यह मतलब नहीं था. मैं तोह यह कह रहा हु कभी भी अपने आप को अकेला मत समझना. राजपूत परिवार हमेशा तुम्हारे साथ है.
लड़का – मुझे समाज आगया है आपके कहने का मतलब. थैंक यू. यह बोल वह लड़का वह से उठ के चला जाता है.
अजय उसको जाते हुए देखने लगता है.
लड़का – मैं में. एहि चीज़ दर्शाती है इस आदमी का मैं कितना छोटा है. यह सबको अपनी तरह hi समझता है. जैसे यह सबसे अपने फैयदे और लालच के लिए जुड़ा है यह बाकिसब को भी वैसा hi समझता है.
थोड़ी देर में शेखर और अभिमन्यु खून डोनेट करके बहार आजाते है. शेखर अभिमन्यु को बहार एक बेंच में बैठा देता है.
खून देने की वजह से अभिमन्यु को थोड़ी कमज़ोरी आगयी थी.
शालिनी – विक्की जल्दी जा और अभिमन्यु के लिए जूस लेके आ. इससे इसकी कमज़ोरी दुर्र होजायेगी.
अभिमन्यु – ारी ma’am इसकी कोई जरुरत नहीं है. मैं ठीक हु.
शालिनी – बिलकुल जरुरत है. तुमने हमारे लिए जो किया है वह तोह अपने अपनों के लिए नहीं करते. तुम तोह पराये होकर भी हमारे लिए इतना कुछ करगए.
अभिमन्यु – यह तोह मेरा फ़र्ज़ था ma’am. और आर्यन सर मेरे बॉस है साथ hi इशिता के भाई है उनके लिए यह कुछ भी नहीं.
विद्या – तुम दोनों एकदूसरे को कैसे जानते हो.
विद्या के सवाल पे इशिता और अभिमन्यु एक दूसरे को देखने लगते है. दोनों क्या जवाब दे उन्हें समाज नहीं आरहा था. दोनों इशारो में hi एकदूसरे को पूछ रहे थी और यह चीज़ सामने खड़ा वह लड़का साफ़ देख रहा था.
इशिता – वह चची अभी मेरी एक फ्रेंड का भाई है. तोह उसीके जरिये मुझे इसके बारे में पता चला.
शालिनी – अभियई???
इशिता – घबराते हुए. मेरा मतलब है अभिमन्यु.
शेखर – चलो अच्छा hi हुआ के तुम इसकी फ्रेंड के भाई हो और इस मुसीबत की घडी में हमारी इतनी बड़ी मदद की. इसके लिए तुम्हारा दिल से बहोत बहोत शुक्रिया.
अभिमन्यु – आप ऐसे थैंक यू ना बोले. वैसे इशिता ने बताया था माहिरा जी का किडनैप होगया था. मेरा मतलब है मेरी दीदी को बताया था उन्होंने मुझे बताया. क्या अब वह ठीक है.
शेखर – हां अब वह ठीक है. थोड़ी तबियत ख़राब है इसीलिए एहि एडमिट भी है. उसीको बचने के चाकर में आर्यन को गोली लगी.
अभिमन्यु – तोह वह यहाँ हॉस्पिटल में कैसे आये.
विद्या – उन्हें हॉस्पिटल लाने वाला तुम्हारे सामने hi खड़ा है. अगर यह ना होता तोह पता नहीं आज क्या होजाता.
शालिनी – अब बस भगवन आर्यन को जल्दी से अच्छा करदे.
अभिमन्यु – आपलोग चिंता मत कीजिये. सर जल्दी ठीक होजाएंगे. अच्छा अब मैं चलता हु. मुझे ऑफिस भी जाना है.
शेखर – तुम आज सीधा घर जाओगे. आज तुम्हारी ऑफिस से छुट्टी.
अभिमन्यु – पर सर. ऑफिस में आज बहोत काम है. विजय सर को मेरी जरुरत पड़ेगी.
शेखर – काम अपने टाइम पे होजायेगा. तुम सीधा घर जाओगे. That’s ान आर्डर.
अभिमन्यु – ठीक है सर. जैसा आप कहे.
शालिनी – तुम यहाँ आये कैसे थे.
अभिमन्यु – Ma’am बाइक से.
शालिनी – वीर.
वीर – यस Ma’am.
शालिनी – अपने आदमी को बोलो गाडी से इससे घर चोरर दे और इसकी बाइक भी घर पहुंचा दे.
वीर – यस Ma’am.
अभिमन्यु – ारी Ma’am इसकी कोई जरुरत नहीं है. मैं चला जाऊंगा.
शालिनी – वीर तुमने सुन्ना मैंने क्या कहा.
वीर – जी Ma’am होजायेगा.
फिर अभिमन्यु वीर के साथ वह से चला जाता है. पर जाते हुए वह बार बार इशिता को पीछे पलट के देख रहा था और इशिता भी उससे जाते हुए देख रही थी जो सामने खड़ा लड़का साफ़ देख रहा था.
इधर ऑपरेशन थिएटर के बहार सबलोग खड़े आर्यन के लिए प्रार्थना कर रहे थे. पुलिस भी वह पे आचुकी थी और अपनी फॉर्मलिटीज पूरी कर रही थी.
थोड़ी देर में डॉक्टर बहार आता है तोह सब उससे घेरर लेते है और सवालों की बारिश करदेते है.
शालिनी – डॉक्टर कैसा है मेरा बीटा. वह ठीक तोह है ना. उससे कुछ हुआ तोह नहीं है ना.
शेखर – बोलिये ना डॉक्टर. कैसा है आर्यन. वह ठीक है ना.
डॉक्टर – आपलोग शांत होजाइये. अभी हम कुछ नहीं कह सकते. ऑपरेशन अभी भी पूरा नहीं हुआ है. गोली पेशेंट के दिल के बहोत hi करीब लगी है. गोली निकलने में पेशेंट की जान को खतरा भी है. हम भी पूरी कोशिश कर रहे है. हमने सीनियर डॉक्टर को बुला लिया है. वह आते hi हम फिर से ऑपरेशन की तैयारी स्टार्ट करेंगे.
डॉक्टर की बात सुनते hi सबलोगो की हालत ख़राब होजाती है. शालिनी तोह वही गिर्र जाती है. अपने पैरों में खड़े रहने की शक्ति hi खू देती है वह.
शेखर – डॉक्टर आप कुछ भी कीजिये पर हमारे बेटे को बचा लीजिये. बड़े से बड़े डॉक्टर को बुलाइये पर उससे बचा लीजिये.
डॉक्टर – हम अपनी पूरी कोशिश करेंगी. आपलोग तब तक खून का इंतज़ाम करदिजिये. पेशेंट का खून बहोत बह चूका है.
विक्की – डॉक्टर आप मेरा खून ले लीजिये. मेरा ो पॉजिटिव है. यूनिवर्सल डोनर हु मैं. आप मेरा खून ले लीजिये.
शेखर – हां आप मेरा भी ले सकते है. मेरा भी ो पॉजिटिव hi है.
डॉक्टर – ी ऍम सॉरी. बूत हम यह खून नहीं ले सकते. पेशेंट का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है.
शेखर – बी नेगेटिव. यह ग्रुप तोह घर के किसी मेंबर का भी नहीं है.
डॉक्टर – हॉस्पिटल में भी यह ग्रुप अवेलेबल नहीं है. आपलोग जल्द से जल्द ब्लड का इंतज़ाम कर दीजिये. हमलोग ऑपरेशन की तैयारी करते है.
यह बोल डॉक्टर वह से चला जाता है.
शालिनी – शेखर जल्दी से कुछ करो. कही से भी खून का इंतज़ाम करो.
शेखर – मैं कुछ करता हु भाभी. कुछ नहीं होगा आर्यन को. मैं कुछ भी करके खून का इंतज़ाम करदूंगा.
फिर शेखर अपना फ़ोन निकल के अपने जान पहचान वाले सभी को कॉल लगता है और खून का इंतज़ाम करने लगता है. वह कुछ हॉस्पिटल्स में भी कॉल करता है पर उससे खून कही नहीं मिलता.
शालिनी – शेखर मुझे लगता है अब हमारे पास एक hi रास्ता है. हुम्हे उससे बुलाना पड़ेगा. क्योकि उसी के पास इस ब्लड ग्रुप का खून है.
शेखर – नहीं भाभी. अभी हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये है जो हुम्हे उसकी मदद लेनी पड़े. मैं कुछ भी करके खून का इंतज़ाम करदूंगा पर उसकी मदद नहीं लूंगा. कभी भी नहीं.
शालिनी – शेखर हमारे पास वक़्त बहोत काम है. अगर खून का इंतज़ाम नहीं हुआ तोह ऑपरेशन स्टार्ट नहीं होगा.
इशिता – खून का इंतज़ाम होगया है मम्मी.
इशिता की बात सुनके सब उसकी तरफ देखने लगते है. जो किसी लड़के के साथ वह कड़ी थी.
शेखर – खून का इंतज़ाम होगया. कैसे बीटा. कहा मिला तुम्हे खून.
इशिता – चाचा जी. यह मेरा दोस्त है. इसका ब्लड ग्रुप और भाई का ब्लड ग्रुप शामे है. जब डॉक्टर ने बोलै तोह मैंने संग संग इससे कॉल किया. और यह खून डोनेट करने के लिए तैयार होगया है.
शेखर उस लड़के के पास आता है और उससे गौर से देखने लगता है.
शेखर – मैंने तुम्हे कही देखा है. कौन हो तुम.
लड़का – सर मैं आपकी कंपनी में जूनियर हर हु. मेरा नाम अभिमन्यु है. अभिमन्यु अग्रवाल.
शेखर – हां हां. याद आया. तुम्हारा बहोत बहोत शुक्तिया बीटा. तुम इस मुसीबत के टाइम में मदद के लिए आगे आये.
अभिमन्यु – यह तोह मेरा फ़र्ज़ है सर.
फिर शेखर अभिमन्यु को लेके सीधा डॉक्टर के पास जाता है जहा डॉक्टर अभिमन्यु का ब्लड एक बार फिर से टेस्ट करके आर्यन के निकलने लगता है.
इधर माहिरा को जब आर्यन की हालत के बारे में पता चला तोह उसकी हालत और ज्यादा ख़राब होगयी थी. वह बार बार एक hi बात बोल रही थी उसकी मौत आर्यन ने अपने नाम कर्ली.
उधर अजय और उसका परिवार आर्यन के संग आये लड़के को देखे जा रहे थे.
अजय – कौन है यह लड़का. जिसने आर्यन की इतनी मदद की.
माया – हां. इसी लड़के की वजह से आर्यन वक़्त रहते हॉस्पिटल आगया.
अर्जुन – विक्की बोल रहा था दोस्त है उसका. इसने माहिरा को बचने में भी मदद की है और इसिने गाडी में आर्यन को यहाँ पहोंच्या है.
अर्जुन की बात सुनके अजय उस लड़के के पास जाके बैठ जाता है और उससे बात करने लगता है.
अजय – तुम आर्यन के क्या लगते हो.
वह लड़का एकबार अजय की तरफ देखता है फिर बोलता है दोस्त है वह मेरा.
अजय – ोू. जरूर मुंबई में hi दोस्ती हुई होगी तुम्हारी.
लड़का – हआ.
अजय – तुमने बहोत मदद की है राजपूत परिवार की. अगर कभी भी किसी भी चीज़ की जरुरत हो तोह बे ज़हिज़हाक के मांग लेना.
लड़का – आपको ऐसा क्यों लगा के मैंने जो कुछ भी किया है वह किसी लालच में किया है.
अजय – तुम गलत समाज रहे हो. मेरे कहने का यह मतलब नहीं था. मैं तोह यह कह रहा हु कभी भी अपने आप को अकेला मत समझना. राजपूत परिवार हमेशा तुम्हारे साथ है.
लड़का – मुझे समाज आगया है आपके कहने का मतलब. थैंक यू. यह बोल वह लड़का वह से उठ के चला जाता है.
अजय उसको जाते हुए देखने लगता है.
लड़का – मैं में. एहि चीज़ दर्शाती है इस आदमी का मैं कितना छोटा है. यह सबको अपनी तरह hi समझता है. जैसे यह सबसे अपने फैयदे और लालच के लिए जुड़ा है यह बाकिसब को भी वैसा hi समझता है.
थोड़ी देर में शेखर और अभिमन्यु खून डोनेट करके बहार आजाते है. शेखर अभिमन्यु को बहार एक बेंच में बैठा देता है.
खून देने की वजह से अभिमन्यु को थोड़ी कमज़ोरी आगयी थी.
शालिनी – विक्की जल्दी जा और अभिमन्यु के लिए जूस लेके आ. इससे इसकी कमज़ोरी दुर्र होजायेगी.
अभिमन्यु – ारी ma’am इसकी कोई जरुरत नहीं है. मैं ठीक हु.
शालिनी – बिलकुल जरुरत है. तुमने हमारे लिए जो किया है वह तोह अपने अपनों के लिए नहीं करते. तुम तोह पराये होकर भी हमारे लिए इतना कुछ करगए.
अभिमन्यु – यह तोह मेरा फ़र्ज़ था ma’am. और आर्यन सर मेरे बॉस है साथ hi इशिता के भाई है उनके लिए यह कुछ भी नहीं.
विद्या – तुम दोनों एकदूसरे को कैसे जानते हो.
विद्या के सवाल पे इशिता और अभिमन्यु एक दूसरे को देखने लगते है. दोनों क्या जवाब दे उन्हें समाज नहीं आरहा था. दोनों इशारो में hi एकदूसरे को पूछ रहे थी और यह चीज़ सामने खड़ा वह लड़का साफ़ देख रहा था.
इशिता – वह चची अभी मेरी एक फ्रेंड का भाई है. तोह उसीके जरिये मुझे इसके बारे में पता चला.
शालिनी – अभियई???
इशिता – घबराते हुए. मेरा मतलब है अभिमन्यु.
शेखर – चलो अच्छा hi हुआ के तुम इसकी फ्रेंड के भाई हो और इस मुसीबत की घडी में हमारी इतनी बड़ी मदद की. इसके लिए तुम्हारा दिल से बहोत बहोत शुक्रिया.
अभिमन्यु – आप ऐसे थैंक यू ना बोले. वैसे इशिता ने बताया था माहिरा जी का किडनैप होगया था. मेरा मतलब है मेरी दीदी को बताया था उन्होंने मुझे बताया. क्या अब वह ठीक है.
शेखर – हां अब वह ठीक है. थोड़ी तबियत ख़राब है इसीलिए एहि एडमिट भी है. उसीको बचने के चाकर में आर्यन को गोली लगी.
अभिमन्यु – तोह वह यहाँ हॉस्पिटल में कैसे आये.
विद्या – उन्हें हॉस्पिटल लाने वाला तुम्हारे सामने hi खड़ा है. अगर यह ना होता तोह पता नहीं आज क्या होजाता.
शालिनी – अब बस भगवन आर्यन को जल्दी से अच्छा करदे.
अभिमन्यु – आपलोग चिंता मत कीजिये. सर जल्दी ठीक होजाएंगे. अच्छा अब मैं चलता हु. मुझे ऑफिस भी जाना है.
शेखर – तुम आज सीधा घर जाओगे. आज तुम्हारी ऑफिस से छुट्टी.
अभिमन्यु – पर सर. ऑफिस में आज बहोत काम है. विजय सर को मेरी जरुरत पड़ेगी.
शेखर – काम अपने टाइम पे होजायेगा. तुम सीधा घर जाओगे. That’s ान आर्डर.
अभिमन्यु – ठीक है सर. जैसा आप कहे.
शालिनी – तुम यहाँ आये कैसे थे.
अभिमन्यु – Ma’am बाइक से.
शालिनी – वीर.
वीर – यस Ma’am.
शालिनी – अपने आदमी को बोलो गाडी से इससे घर चोरर दे और इसकी बाइक भी घर पहुंचा दे.
वीर – यस Ma’am.
अभिमन्यु – ारी Ma’am इसकी कोई जरुरत नहीं है. मैं चला जाऊंगा.
शालिनी – वीर तुमने सुन्ना मैंने क्या कहा.
वीर – जी Ma’am होजायेगा.
फिर अभिमन्यु वीर के साथ वह से चला जाता है. पर जाते हुए वह बार बार इशिता को पीछे पलट के देख रहा था और इशिता भी उससे जाते हुए देख रही थी जो सामने खड़ा लड़का साफ़ देख रहा था.