Romance Parivaar aur Pyaar - Page 6 - SexBaba
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Romance Parivaar aur Pyaar

अपडेट 40

कृष्णा जो इतनी देर से यह सब देख रहा था वह माहिरा के पास आकर उसके पास बैठ जाता है.

कृष्णा – माहिरा.

माहिरा का इतना hi सुन्ना बहोत था के वह उसके गले लग रोने लगती है.

माहिरा – रट हुए. मैंने जान मच के कुछ नहीं किया. मुझे नहीं पता था मेरा मज़ाक इतना भयानक होजायेगा. अगर मुझे पता रहता तोह मैं ऐसा कुछ करती hi नहीं. मैं मानती हु मुझसे बहोत बड़ी गलती होगयी है. प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. मेरी वजह से सिर्फ मेरी वजह से आज उसकी यह हालत है.

कृष्णा – चुप हो जाओ. तुम्हे अपनी गलती का एहसास होगया है एहि बहोत है. कुछ नहीं होगा उससे. सब ठीक होजायेगा.

माहिरा – मम्मी और बुआ तोह मुझसे बहोत hi ज्यादा नाराज़ है.

कृष्णा – मैं हूँ ना. मैं सब ठीक करदूंगा. वह दोनों टेंशन में है इसीलिए बस तुमसे थोड़ा नाराज़ है. देखना एकबार वह ठीक होजायेगा तोह सब ठीक होजायेगा.

माहिरा – वह दोनों मुझसे नाराज़ नहीं होंगे ना. मुझे माफ़ करदेंगे न.

कृष्णा – मैंने कहा न मैं सब ठीक करदूंगा. चलो अब रोना बंद करो.

कृष्णा के समझने पे माहिरा शांत होजाती है और वही बैठी रहती है.

कृष्णा – इशिता.

इशिता कृष्णा के मुँह से अपना नाम सुनके थोड़ा हैरान होजाती है.

इशिता – आप मुझे जानते है.

कृष्णा – मैं तुमसब को जानता हु. क्या मेरा एक काम करोगी.

इशिता – जी बोलिये.

कृष्णा – अभिमन्यु को हॉस्पिटल बुलाओगी.

इशिता – अभी किसलिए.

कृष्णा – कल आंटी उससे मिलना चाहती थी पर मिल नहीं पायी. तोह क्या तुम आज बुला लोगी.

इशिता – जी. मैं अभी बुलाती हु.

फिर कृष्णा आर्यन के केबिन के अंदर आजाता है.

केबिन के अंदर संगीता, शालिनी, इशांत, विद्या, शेखर, अजय और उसकी फॅमिली मौजूद थी. शालिनी और संगीता आर्यन के बीएड के दोनों तरफ बैठी हुई थी. संगीता आर्यन का सर पे हाथ फेर रही थी तोह शालिनी आर्यन का हाथ अपने हाथों में लिए बैठी हुई थी.

शालिनी – क्या हालत होगयी है मेरे बच्चे की. मुझे इससे वापस बुलाना hi नहीं चाहिए था. यह मुंबई में hi सही सलामत था.

संगीता – पता नहीं कब होश आएगा मेरे बच्चे को. अगर रोहन की तरह इससे भी कुछ होगया तोह मैं ज़िंदा नहीं रहूंगी.

इशांत – शांत होजाओ संगीता कुछ नहीं होगा इससे. देखना जल्द hi ठीक होजायेगा.

संगीता – कैसे शांत होजाउ. मेरा बच्चा ज़िन्दगी और मौत से लड़ रहा है पिछले 24 घंटो से. डॉक्टर कह रहे है हालत में सुधर बहोत धीरे धीरे है. और कल तोह इस हालत में इस्पे जानलेवा हुम्ला हुआ है.

अभी कोई कुछ बोलता तभी वह फिर से डॉक्टर आजाता है और इतने सारे लोगो को एकसाथ वह देख कर वह सबको बहार जाने को बोलता है.

डॉक्टर – इतने सारे लोग यहाँ नहीं रुख सकते. आपलोग बहार जाइये. पेशेंट को अकेला चोरर दीजिये. इतने सारे लोगो का यहाँ रहना ठीक नहीं.

शालिनी – मैं कही नहीं जाउंगी. मैं एहि रहूंगी.

संगीता – मैं भी कही नहीं जाउंगी. मैं भी एहि रहूंगी.

शेखर – भाभी डॉक्टर ने कहा ना यहाँ इतने लोगो का रहना ठीक नहीं. हम बहार रखते है.

शालिनी – मैंने कहा ना मैं कही नहीं जाउंगी. डॉक्टर सिर्फ हमदोनो hi यहाँ रुकेंगे. हम दोनों माँ है इसकी. प्लीज हुम्हे यहाँ रखने दीजिये. प्लीज डॉक्टर.

डॉक्टर – ठीक है सिर्फ आप दोनों hi यहाँ रुकेंगी. बाकिसब लोग बहार जाइये.

डॉक्टर के कहने के मुताबिक वह से सबलोग बहार निकल जाते है सिर्फ शालिनी और संगीता hi वह रखती है.

रूम से बहार आने के बाद शेखर कृष्णा के पास आता है और कहता है.

शेखर – कृष्णा.

कृष्णा – जी अंकल.

शेखर – बीटा कुछ पता चला कौन था वह जो आर्यन को मारने आया था कल.

कृष्णा – नहीं अंकल. वह डॉक्टर के भेष में आया था और पूरा प्लान करके आया था. जैसे hi हम उसकी नकली दारी और मच निकलते वह खिड़की टॉड के भाग निकला. पर आप चिंता मत कीजिये. उससे कल रात की फायरिंग में गोली भी लगी है. वीर अंकल सेहर के हर हॉस्पिटल में इन्वेस्टीगेट कर रहे है वह जल्द पकड़ जाएगा.

शेखर – भगवन का शुक्र है के कल तुम यही थे. अगर तुम कल यहाँ नहीं होते तोह पता नहीं क्या होजाता.

इशांत – शेखर जब तक कृष्णा है आर्यन को कुछ नहीं होगा. यह लड़का आर्यन का दिल है. ऐसा समजलो इसके अंदर आर्यन का दिल धड़क रहा है. जब तक यह ज़िंदा है आर्यन को कुछ नहीं होसकता.

शेखर – मैंने दोस्ती बहोत देखि है पर तुमलोगो के जैसी दोस्ती मैंने आज तक नहीं देखि. भगवन तुमलोगो की दोस्ती हमेशा सलामत रखे.

विद्या – सही कहा इनके जैसी सच्ची दोस्ती तोह हमने आज तक नहीं देखि. आज आर्यन सिर्फ और सिर्फ इसके वजह से hi ज़िंदा है. अगर यह ना होता तोह आर्यन भी नहीं होता.

फिर सब लोग वही बैठ जाते है.

थोड़ी देर बाद वह इशिता अभिमन्यु के साथ हाज़िर होजाती है.

इशिता – कृष्णा भैया आपने अभिमन्यु को बुलाया था ना.

कृष्णा – हआ.

अभिमन्यु – जी बोलिये.

कृष्णा – तुमसे कोई मिलना चाहते है.

अभिमन्यु – जी कौन.

कृष्णा – अंकल यह hi है अभिमन्यु जिसने आर्यन को अपना खून दिया था इमरजेंसी के वक़्त.

इशांत कृष्णा की बात सुनके उनके पास आता है और अभिमन्यु को गले से लगा लेता है.

इशांत – तुम्हारा बहोत बहोत शुक्रिया बीटा जो तुमने इमरजेंसी के वक़्त अपने खून दिया. अगर तुम उस वक़्त अपना खून नहीं देते तोह पता नहीं क्या होजाता.

अभिमन्यु – आप ऐसे शुक्रिया बोलके मुझे शर्मिंदा कर रहे है अंकल. मैंने तोह बस अपना फ़र्ज़ निभाया है.

इशांत – तुम रुको तुमसे मिलने के लिए कोई बहोत बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है.

यह बोल इशांत केबिन के अंदर चला जाता है और इधर अभिमन्यु कंफ्यूज खड़ा रह जाता है. इशांत के जाने के बाद वह थोड़ा उनकंफर्टबले फील करता है और इशिता की तरफ देखके इशारो में पूछता है तोह वह भी उससे इशारो से शांत रहने को बोलती है.

इशांत को अंदर गए हुए कुछ hi देर हुआ था के अंदर से शालिनी और संगीता और दोनों बहार आती है और अभिमन्यु के सामने कड़ी होजाती है.

संगीता अभिमन्यु को गोरर से देखने लगती है. उसके ऐसे देखने से अभिमन्यु को अजीब सा लगता है वह कुछ कहता या करता तभी संगीता उसको गले से लगा लेती है.

संगीता – तुम्हारा बहोत बहोत सुखरिया बीटा बहोत बहोत शुक्रिया. तुमने सिर्फ आर्यन की hi जान नहीं बचायी है बल्कि 2 परिवारों की जान बचायी है. तुम्हारा जितना भी धन्यवाद करे काम है.

अभिमन्यु – आप ऐसा बोलके मुझे शर्मिंदा कर रही है आंटी. मैंने जो भी किया वह तोह मेरा फ़र्ज़ था और फिर आर्यन सर तोह मेरे बॉस है.

संगीता – बहोत अच्छे संस्कार है तुम्हारे. मैं एक बार तुम्हारे पेरेंट्स से जरूर मिलना चाहूंगी जिन्होंने तुम्हे इतने अच्छे संस्कार दिए है.

अभिमन्यु यह सुन मुस्कुरा देता है फिर बोलता है.

अभिमन्यु – अच्छा आंटी अब मैं चलता हु ऑफिस का काम अधूरा चोरर के आया हु आज मेरे सीनियर भी नहीं आये है.

शेखर – क्यों क्या हुआ तुम्हारे सीनियर को. और क्या नाम है उसका.

अभिमन्यु – सर उनका नाम तोह विजय खन्ना है और आज सुबह मुझे उनके घर से कॉल आया था के उनका एक्सीडेंट होगया है कल रात को तोह वह कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ सकेंगे.

शेखर – एक्सीडेंट होगया. कैसे हुआ.

अभिमन्यु – वह तोह मुझे नहीं पता.

शेखर – ठीक है. तुम जाओ.



फिर अभिमन्यु वह से चला जाता है.
 
थैंक यू

आपकी बातें पढ़कर मुझे जी की याद आगयी. 🤣🤣🤣

माहिरा की वजह से आर्यन के सिर्फ सिर्र पे चोट लगी थी. जिसमे वह डायरेक्टली इन्वॉल्व थी. पर आर्यन के हॉस्पिटल आने के पीछे माहिरा डायरेक्टली इन्वॉल्व नहीं थी. आर्यन ने तोह माहिरा की मौत अपने सर ले ली इसमें उसकी क्या गलती.
 
अपडेट 41

अभिमन्यु के जाने के बाद संगीता और शालिनी फिर से अंदर जाने को होती है तोह माहिरा उनके सामने आजाती है.

संगीता – शालिनी इससे कह दो मेरी सामने से हट जाए.

माहिरा – रट हुए. बुआ प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. मुझसे बहोत बड़ी गलती होगयी है. मुझे मज़ाक नहीं करना चाहिए था. मुझे नहीं पता था मेरे मज़ाक करने से वह गिर्र जाएगा. प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये.

संगीता – मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है. हट जाओ मेरे सामने से.

माहिरा संगीता के पैरों में गिर्र जाती है और माफ़ी मांगने लगती है. उसके ऐसे पैरों में गिर्र जाने से सबलोग हैरान होजाते है. किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी के माहिरा ऐसा कुछ कर जायेगी.

माहिरा – प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. मैं मानती हु मुझसे बहोत बड़ी गलती हुई है. और देखा जाए तोह मेरी वजह से hi वह इस हालत में है. पर प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. मैं मैं प्रॉमिस करती हु मैं आजके बाद कभी भी किसी के साथ कोई मस्ती नहीं करुँगी. मैं उससे हमेशा के लिए दुर्र रहूंगी. कभी भी उसके सामने नहीं आउंगी. पर प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये.

माहिरा को ऐसे रोटा बिलकता देख सभी को बहोत बुरा लगता है. कृष्णा आगे बढ़ के माहिरा को उठता है और चुप करवाता है.

कृष्णा – आंटी प्लीज माहिरा को माफ़ करदिजिये. उससे अपनी गलती का एहसास है. प्लीज उससे माफ़ करदिजिये.

संगीता आगे बढ़ के माहिरा को अपने गले से लगा लेती है. संगीता के गले लगते hi माहिरा फिर से रो देती है.

संगीता – बस बस और नहीं रट. चुप होजाओ.

अभी कोई कुछ बोलता तभी इशांत केबिन से हड़बड़ी में बहार आता है और डॉक्टर को बुलाने लगता है.

इशांत – डोक्टोररर डोक्टोररर. डॉक्टर कहा है.

इशांत को ऐसे डॉक्टर को बुलाते देख शालिनी और संगीता घबरा जाते है.

संगीता – इशांत क्या हुआ. आप ऐसे डॉक्टर को क्यों बुला रहे है. आर्यन ठीक है ना.

इशांत – मैं अंदर बैठा हुआ था. तभी अचानक से आर्यन की सांसें उखाड़ने लगती है फिर अचानक से वह एकदम शांत होजाता है.

इशांत की बात सुनके शालिनी और संगीता एकदम से डर जाते है दोनों जल्दी से अंदर जाते है तोह देखते है आर्यन एकदम शांत बीएड में लेता हुआ है.

संगीता – आर्यन क्या हुआ तुझे. ार्यानंन्न. ार्यानंन्न.

शालिनी – आर्यन क्या हुआए ारयणणणणण.

इधर बहार इशांत जल्दी से डॉक्टर को बुला के आर्यन के पास ले आता है.

डॉक्टर – आप सबलोग अभी के अभी बहार जाइये. मुझे पेशेंट को चेक करना है.

डॉक्टर के बोलने सबलोग वह से बहार निकल जाते है और डॉक्टर आर्यन को अच्छे से चेक करने लगता है.

थोड़ी देर बाद डॉक्टर बहार आता है तोह सबलोग उसपे झपट पढ़ते है और सवालों की बारिश करदेते है.

डॉक्टर – देखिये आपलोग शांत होजाइये. मुझे बोलने का मौका तोह दीजिये.

डॉक्टर के बोलने सबलोग शांत होजाते है तोह डॉक्टर बोलना स्टार्ट करता है.

डॉक्टर – देखिये जैसे आपने कहा था पेशेंट की सांसें अचानक से उखाड़ने लगी थी फिर वह अचानक से शांत होजाता है तोह उसमे डरने की कोई जरुरत नहीं है. पेशेंट को जो ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था उससे सांस लेने में तकलीफ होरही थी इसीलिए उसकी सांसें उखाड़ने लगी थी. पर अब सबकुछ ठीक है. और मैंने अभी चेक किया है पेशेंट की हालत में अब काफी सुधर है वह पहले के मुक़ाबले अब जल्दी से रिकवर कर रहा है और अब वह खतरे से बहार है.

डॉक्टर की बात सुनके सबकी ख़ुशी का ठिकाना hi नहीं था. माहिरा की तोह आँखों से आंसू hi निकलने लगते है. वह वही बैठ के रोने लगती है. संगीता और शालिनी ने भी अब राहत की सांस ली थी. शेखर और इशांत तोह एकदूसरे के गले लग जाते है. और इधर कृष्णा जब यह न्यूज़ सुनता है तोह वह वही दीवार के सहारे बैठ जाता है और अपने एक्ससिटेमेंट को कण्ट्रोल करने लगता है और साथ में अपने आँखों से आंसू भी साफ़ करने लगता है.

शेखर – आपका बहोत बहोत सुखिया डॉक्टर. बहोत बहोत सुखरिया. आपने यह न्यूज़ सुना कर बहोत बड़ी ख़ुशी दी है हुम्हे. थैंक यू. थैंक यू सो मच.

डॉक्टर – इतस माय ड्यूटी.

इशांत – डॉक्टर उससे होश कब तक आएगा.

डॉक्टर – देखिये फ़िलहाल सिर्फ वह खतरे से बहार हुआ है और उसकी बॉडी बहोत hi ज्यादा कमज़ोर है. उससे पूरी तरह से होश आने में अभी कुछ दिन लगेंगे और तब तक वह होश में आने के संग संग बेहोश होजायेगा.

इशांत – आपका फिर से एकबार बहोत बहोत शुक्रिया.

फिर डॉक्टर वह से चला जाता है.

डॉक्टर के जाने के बाद शालिनी और संगीता फिर से आर्यन के केबिन में चले जाते है पर इसबार वह माहिरा को भी अपने साथ अंदर लाते है.

माहिरा जब सामने आर्यन को देखती है तोह उसकी हालत देख कर माहिरा को अपने आप पे hi गुस्सा आने लगता है. वह खुद को hi कोसने लगती है.

माहिरा – मैं में. मेरी वजह से सिर्फ और सिर्फ मेरी वजह से आज यह इस हालत में है. अगर मैंने अपनी जिद्द छोड़ दी होती और ऐसे परेशां ना किया होता तोह यह कभी हॉस्पिटल आता hi नहीं और नाही इससे कभी मेरे हिस्से की गोली लगती. आज यह यहाँ इस हालत में सिर्फ और सिर्फ मेरी वजह से है.

एहि सब सोचते हुए माहिरा उस कमरे से बहार निकल जाती है. वह रखना उसके लिए बहोत मुश्किल होजाता है. वह वह से निकल के सीधा हॉस्पिटल के मंदिर में चली जाती है और वही बैठ के आर्यन के ठीक होने की प्रार्थना करने लगती है.

इधर सूरज और गैंग जिन्होंने आर्यन पे हुम्ला करवाया था जो कृष्णा ने फ़ैल करदिया था वह जानने के बाद इनके रातों की नींद उड़द चुकी थी.

हरीश – मैं छोड़ूंगा नहीं उस लड़के कृष्णा को और उन् राजपूत को.

सूरज – अभी ऐसा वैसा कुछ नहीं करना. तुम जानते हो ना इस वक़्त उनके साथ खुद िब चीफ और पूरा का पूरा िब डिपार्टमेंट है और फिर वह अंडरकवर एजेंट भी है जिसके बारे में हम कुछ नहीं जानते है.

हरीश – मुझे किसी का डर नहीं है और मैं रणजीत नहीं हु मैं हरीश हु हरीश खन्ना.

सूरज – मैं अभी भी बोल रहा हु अपना दिमाग शांत करो. हुम्हे अभी सबसे पहले उस लड़के कृष्णा के बारे में जानना होगा. आखिर क्यों वह इन् रजौट की इतनी मदद कर रहा है. इसका मक़सद क्या है और साथ में हुम्हे इसकी कमजोरी भी जाँणि होगी.

हरीश – यह आर्यन मुंबई में था ना और वही से यह कृष्णा भी इसके साथ है. मतलब हुम्हे सब कुछ मुंबई से hi पता चलेगा.

सूरज – मेरे आदमी बहोत दिनों से मुंबई में है. पर हुम्हे कुछ भी हाथ नहीं लगा.

हरीश – पर अब लगेगा. एक काम करो अपने आदमियों से बोलो वह कृष्णा के बारे में साड़ी जानकारी निकले. वह आर्यन किस स्कूल कॉलेज में पढता था वह जाए और इस कृष्णा की साड़ी जानकारी निकले. साथ में इनके दोस्त दुश्मन सबके बारे में पता करे.

सूरज – मैं बोलता हु. और जब तक हुम्हे जानकारी नहीं मिलती तुम थोड़ा शांत रहो.

यह बोल सूरज मुंबई में भेजे गए अपने आदमी को कॉल करके कृष्णा के बारे में साड़ी जानकारी निकलने के लिए कहता है.

हरीश वह से सीधा अपने घर आजाता है जहा उसकी बीवी हॉल में hi बैठी हुई थी. हरीश अपनी बीवी कामिनी के पास आता है और उसके बगल में बैठ जाता है.

हरीश – अब कैसा है वह.

कामिनी – आपको क्या लगता है कैसा होसकता है. आपने उसकी हालत देखि थी ना.

हरीश – ठीक होजायेगा वह जल्दी hi.

कामिनी – हम उससे हॉस्पिटल क्यों नहीं ले जा रहे है.

हरीश – पागल हो गयी हो. अगर उससे किसी भी हॉस्पिटल में एडमिट किया तोह हम सब फस जायेंगे. पुलिस तुम्हारे बेटे को हर्र जगह ढूंढ रही है. आर्यन सिंह राजपूत को जान से मारने की कोशिश करने के जुर्म में साड़ी ज़िन्दगी जेल में बितानी होगी फिर. उससे बचने के लिए hi उसका इलाज़ एहि घर में होगा.



यह बोल हरीश वह से अपने कमरे में आजाता है.
 
अपडेट 42

ऐसे hi 2 दिन गुज़र जाते है. इन् 2 दिनों में संगीता और शालिनी हरवक्त आर्यन के पास hi रहती थी. कृष्णा हर रात आर्यन की सिक्योरिटी के लिए हॉस्पिटल में उसके साथ hi रहता था. माहिरा भी सबकी नज़रो से बचके आर्यन के पास आती थी और दुर्र से hi उससे देखती थी.

अगले दिन सबलोग हॉस्पिटल में बैठे हुए थे. डॉक्टर और नर्स अंदर आर्यन का चेकउप कर रहे थे. थोड़ी देर बाद एक नर्स बहार आती है और बोलती है.

नर्स – एक्सक्यूज़ में. पेशेंट को होश आगया है.

नर्स की बात सुनके सबलोग खुश होजाते है. संगीता और शालिनी की आँखों में तोह आंसू आजाते है. दोनों जैसे hi अंदर जाने को होती है तोह नर्स उन्हें रुख देती है.

नर्स – रुख जाइये. अभी आपलोग अंदर नहीं जा सकते.

शालिनी – किसलिए.

नर्स – अभी डॉक्टर उनका चेकउप कर रहे है. वह बहार आजाये उसके बाद आपलोग पेशेंट से मिल सकते है.

संगीता – अभी उसकी हालत कैसी है. वह ठीक तोह है ना.

नर्स – देखिये पेशेंट को होश तोह आगया है पर अभी भी वह कमज़ोर है. तोह आपलोग प्लीज उनसे ज्यादा बात मत कीजियेगा.

शालिनी – जी हम इस बात का ध्यान रखेंगे.

फिर नर्स वह से वापस अंदर चली जाती है और इधर बहार तोह सबलोग ख़ुशी से पागल होने लगते है.

कुछ देर बाद डॉक्टर बहार आजाता है तोह शालिनी और संगीता अंदर चले जाते है.

दोनों जब अंदर आर्यन को देखते है तोह उनकी आँखों से आंसू निकलने लगते है.

दोनों जाके आर्यन के दोनों तरफ बैठ जाते है.

संगीता आर्यन का सर सहलाने लगती है तोह आर्यन धीरे धीरे अपनी आँखें खोलता है.

अपनी आँखें खोलने के बाद जब वह अपने सामने संगीता को देखता है तोह उसके चेहरे में एक मुस्कराहट आजाती है.

संगीता – तुझे शर्म नहीं आती है ना. मुझे रोटा देख तू मुस्कुरा रहा है. तुझे जरा भी हमारी फ़िक्र नहीं है ना. एक बार भी नहीं सोचा अगर तुझे कुछ होजाता तोह हम कैसे जीते. ारी हम तोह जीते जी मर्डर जाते.

आर्यन – धीरे से लदखती आवाज़ में. मैं बिलकुल ठीक हु. माहिरा वह कैसी है. वह ठीक है ना.

शालिनी – तुम अब उसकी फ़िक्र चोरो. उसकी फ़िक्र करने के चाकर में देखो क्या हालत होगयी है तुम्हारी. पुरे 3 दिन के बाद तुम होश में आये हो. तुम्हे पता भी है इन् 3 दिनों में हम हर रोज एक नयी मौत मर्डर रहे है. अगर तुम्हे कुछ होजाता तोह हमारा क्या होता. बहार जो तुम्हारा दोस्त बैठा है जो 3 दिन और रातों से यहाँ तुम्हारे से बैठा उसका क्या होता.

आर्यन यह सुन धीरे से मुस्कुरा देता है फिर संगीता की तरफ देख कर पूछता है.

आर्यन – आप यहाँ कैसे.

संगीता – अभी एकदम चुप होजाओ. खबरदार अगर एक शब्द भी निकला तोह. अब तुम सिर्फ और सिर्फ आराम करोगे.

शालिनी – एकदुम्म. देखो क्या हालत कर्ली है खुदकी. अब तुम आराम करो हम बहार जाते है.

फिर दोनों वह से बहार निकल जाती है और आर्यन आखें बांध करके आराम करने लगता है.

शेखर – भाभी अब कैसा है आर्यन. वह अब ठीक तोह है ना.

शालिनी – ठीक है पर अभी भी उससे अपनी नहीं माहिरा की फ़िक्र है. होश में आने के बाद वह सबसे पहले माहिरा की hi खबर ले रहा है.

माहिरा जब यह सुनती है तोह उसके आँखों से आंसू गिरने लगते है. उससे अपने ऊपर hi गुस्सा और घिन्न आने लगती है.

माहिरा – मैं में. इस हालत में भी उससे मेरी फ़िक्र है. मेरी hi वजह से वह इस हालत में है फिर भी मेरी सलामती की खबर पूछ रहा है. और मैंने कितना बुरा किया उसके साथ. कितनी तकलीफ दी उससे. कोई भी इंसान इतना अच्छा कैसे होसकता है.

शेखर – इससे पता चलता है कितने अच्छे संस्कार दिए है संगीता ने उससे.

विद्या – बिलकुल.

संगीता – इशांत डॉक्टर से पूछिए ना उससे कब तक हॉस्पिटल में रखना होगा. कितने दिन लगेंगे उससे ठीक होने में.

इशांत – थोड़ा सब्र करो संगीता. अभी अभी तोह उससे होश आया है. और नर्स ने कहा था ना अभी वह बहोत hi ज्यादा कमज़ोर है.

संगीता – समाज रही हु. पर अब उससे यहाँ हॉस्पिटल में मैं नहीं देख सकती.



शेखर – थोड़ा सब्र करो. देखना जल्दी hi वह ठीक होजायेगा.
 
अपडेट 43

थोड़ी देर बाद सबलोग एक बार करके आर्यन से मिलने जाते है पर माहिरा एकबार भी उससे मिलने नहीं जाती. उसकी हिम्मत नहीं होरही थी के वह आर्यन से नज़रे मिला सके. इसीलिए वह बहार से hi चुप चुपके उससे देख रही थी.

आर्यन से मिलने का बाद सबलोग घर जाने के लोए तैयार थे. कृष्णा हमेशा की तरह आर्यन से साथ हॉस्पिटल में रखने वाला था.

संगीता – कृष्णा हमसब घर जा रहे है. अगर किसी भी चीज़ की जरुरत हो तोह कॉल कर लेना.

कृष्णा – जी.

यह सुनके अजय अपने बेटे अर्जुन से बोलता है.

अजय – अर्जुन तुम आज यहाँ हॉस्पिटल में hi रुख जाओ. इसकी मदद होजायेगी.

कृष्णा – जी नहीं इसकी कोई जरुरत नहीं है. आर्यन का ध्यान रखने के लिए मैं अकेला hi काफी हु.

कृष्णा के बोलने का ढंग अजय को कुछ खाश पसंद नहीं आया फिर भी वह अपने चेहरे पे हसी रखते हुए hi कहता है.

अजय – ारी नहीं बीटा तुम गलत सोच रहे हो. मैं जानता हु आर्यन का ध्यान तुम अकेले अच्छे से रख सकते हो और इस्बात को तुमने साबित भी करदिया है. मैं तोह अर्जुन को तुम्हारा हाथ बटाने के लिए hi बोल रहा हु.

शेखर – हां यह ठीक रहेगा अगर तुम्हे किसी भी तरह की जरुरत पड़ेगी तोह अर्जुन तुम्हारी मदद करदेगा.

विद्या – बिलकुल. अर्जुन तुम यही hi रह जाओ.

अर्जुन जो इतनी देर से सब कुछ चुप चाप सुन रहा था वह बोलता है.

अर्जुन – ठीक है मैं रुख जाता हु यहाँ पे. आखिर एक फॅमिली मेंबर का भी यहाँ पे होना जरुरी है.

यह बोल अर्जुन कृष्णा की तरफ देखता है और इशारो से hi बोलता है के वह सिर्फ एक दोस्त है कोई फॅमिली मेंबर नहीं.

माहिरा जब यह बात सुनती है तोह वह उसके कहना का मतलब अच्छे से समाज जाती है.

माहिरा – भैया आप कहना क्या चाहते हो के फॅमिली मेंबर का होना भी जरुरी है. आप क्या इन्हे कोई गैरर इंसान समाज रहे हो.

अर्जुन – तुम गलत समाज रही हो माहिरा मेरा यह कहना का मतलब नहीं था.

माहिरा – मैं आपके कहने का मतलब अच्छे से समाज रही हु. आप यह बताना चाहते हो के यह सिर्फ एक दोस्त है कोई फॅमिली मेंबर नहीं. ारी इन्होने तोह वह किया है जो कोई फॅमिली मेंबर किसी के लिए नहीं करता. इन्होने तोह अपनी जान पे खेलके अपने दोस्त की जान बचायी है. और आप कहते है के यह कोई अपने नहीं है.

तोह आजसे बल्कि अभी से मैं माहिरा सिंह राजपूत, लेट विक्रम सिंह राजपूत, लेट रश्मि सिंह राजपूत, और शालिनी विक्रम सिंह राजपूत की बेटी और राजपूत एम्पायर की ओनर्स की बेहेन, बेटी और पोती होने के नाते पुरे होश ो हवास में पुरे दिल से अपने अंतरात्मा से कृष्णा को अपना सागा भाई बनती हु. आजके बल्कि अभी से इन्हे राजपूत परिवार का बीटा बनती हु. इन्हे कृष्णा सिंह राजपूत बनती हु.

यह बोल वह अपने हाथ में पहना एक ब्रेसलेट उतरती है और कृष्णा के पास जाके उसको राखी के रूप में पहना देती है.

माहिरा का यह रूप देख और उसकी हरकत देख वह खड़े सभी हैरान होजाते है और सभी की आँखें हैरत से बड़ी होजाती है. उन्हें यकीन नहीं होरहा था के माहिरा ने अभी अभी क्या किया. उन्हें यकीन नहीं होरहा था के माहिरा ने अभी अभी क्या कहा.

सब बस हैरानी से खड़े होकर माहिरा को देख रहे थे.

कृष्णा को ब्रेसलेट पहनाने के बाद माहिरा शेखर, संगीता और शालिनी के सामने आके कड़ी होजाती है.

माहिरा – मम्मी, चाचा जी और बुआ मुझे पता है मुझे यह करने का कोई हक़ नहीं था. मैंने अपने हक़ से बहोत ज्यादा बोल दिया है और कुछ ऐसा करदिया है जो शायद आपलोगो को अच्छा नहीं लगा होगा. पर अर्जुन भैया ने कृष्णा भैया को लेके जो बोलै वह मुझे पसंद नहीं आया. उन्होंने एक तरह से कृष्णा भैया को बेइज़ात किया उन्हें निचय दिखाया जो मुझे सरासर गलत लगा. इसीलिए उस वक़्त मुझे जो समाज आया मैंने वह करदिया. अब अगर आपलोग मुझे कोई सजा देना चाहते है तोह मैं उसके लिए तैयार हु. आपलोग मुझे जो सजा देंगे मुझे वह मंजूर होगा.

यह बोल माहिरा चुप होजाती है और अपनी गर्दन नीचे झुका लेती है.

तीनो माहिरा की बात सुनके एकदूसरे को देखने लगते है.

तीनो एक नज़र अर्जुन को देखते है जो गुस्से से माहिरा को और कृष्णा को देख रहा था फिर एक नज़र कृष्णा को देखते है जो अभी भी हैरानी में शॉक में था.

अजय – माहिरा बीटा यह क्या किया तुमने. अर्जुन के कहना का वह मतलब नहीं था. वह तोह बस यह कहना चाहता था के अगर हमारे पीछे से अगर किसी पेपर्स में सिग्न करना होता तोह अर्जुन अस ा कजिन बरोथेर सिग्न करसकता था.

माया – हां. माहिरा तुम्हारे मां सही कह रहे है. तुमने अर्जुन की बात को गलत समाज लिया और इतना बड़ा फैसला अकेले ले लिया.

माहिरा – क्या आपलोगो को भी एहि लगता है के मैंने कुछ गलत किया है.

शेखर – तुमने आजतक बहोत सी गलतियां की. बहोत शैतानियां की. और हमसब ने वह सब तुम्हारी नादानी समाज कर चोर दिया. तुमने हमेशा ना समझी में बहोत से काम किये. पर आज तुमने जो किया है वह कोई नादानी नहीं थी और नाही कोई ना समझी थी और नाही कोई गलती. तुमने जो किया बिलकुल सही किया. आज मुझे तुम्हारे अंदर अपने भैया को देखा है. तुमने आज यह दिखा दिया के तुम विक्रम सिंह राजपूत की बेटी हो.

शालिनी – बिलकुल. हम तुंहरे इस फैसले बिलकुल भी नाराज़ नहीं है. तुमने कृष्णा को अपना भाई बनके कोई गलती नहीं की. कृष्णा ने आर्यन की जान बचके पहले hi हमपे बहोत उपकार किये है. आज मुझे यह कहते हुए बहोत ख़ुशी होरही है के मेरी बेटी आज सही मायनो में बड़ी होगयी है.

यह बोल शालिनी माहिरा के सर को चुम कर अपने गले लगा लेती है.

इधर कृष्णा माहिरा की हरकत से अभी भी शॉक में था. उससे समाज नहीं आरहा था आखिर यह सब हुआ क्या था. ऐसा कुछ होगा यह उसने कभी नहीं सोचा था. वह वह खड़े खड़े हैरानी से बस सबको देखे जा रहा था.

उधर एहसाब देखने के बाद अजय और उसका परिवार वह से बिना कुछ बोले वह से निकल जाते है.

शेखर – विक्की.

विक्की जो माहिरा की बात से शॉक में था वह अपने पापा की आवाज़ सुनके होश में आता है.

विक्की – जी पापा.

शेखर – अर्जुन तोह चला गया क्या तुम रुख सकते हो यहाँ पे.

विक्की – हां पापा क्यों नहीं. मैं रुख जाऊँगा.

शेखर – ठीक है. फिर हम सब अब चलते है.



फिर सबलोग वह से घर की तरफ जाने लगते है. माहिरा जाते हुए बार बार पीछे घूम के कृष्णा को hi देखे जारही थी और कृष्णा भी उससे जाते हुए देख रहा था.
 
अपडेट 44

सबके चले जाने के बाद वह सिर्फ कृष्णा और विक्की hi रह जाते है.

विक्की अभी भी हैरानी और परेशानी में था. उससे समाज नहीं आरहा था के वह कृष्णा से कैसे डील करे. उससे क्या बात करे. उसके साथ कैसे रहे.

कृष्णा – मैं समाज सकता हु विक्की िःस्वक़्त तुम्हारे dil-o-dimaag में क्या क्या चल रहा है. पिछले कुछ दिनों में तुमने बहोत कुछ देखा है बहोत कुछ सुना है और बहोत कुछ जाना है. मैं समाज सकता हु िःस्वक़्त तुम्हारी मनोदशा क्या होगी.

विक्की – मुझे समाज नहीं आरहा है मैं कौन सी बातों पे यकीन करू कौनसी बातों पे यकीन ना करू.

कृष्णा – अभी भी ऐसी बहोत सी बातें है विक्की जो सामने नहीं आयी है. पर जब सामने आएँगी तब तुम्हे उस वक़्त सही फैसला करना होगा. क्योकि तुम्हारा वह एक फैसला बहोत ज्यादा मायने रखता है.

विक्की – कौन है आप. मैंने जब से आपको यहाँ हॉस्पिटल में देखा है तबसे यह पूछना चाहता था. मैंने आपको पहली बार राजपूत मेन्शन के बहार ताऊजी की अंतिम यात्रा पे देखा था. फिर उस दिन हॉस्पिटल में देखा. आखिर कौन है आप. और क्यों कर रहे है इतना हमसब के लिए. सिर्फ दोस्ती के लिए. मैं यह नहीं मानता. कोई भी दोस्त किसी भी दोस्त के लिए इतना नहीं करता. बुआ ने बताया था भैया ने आपके डैड की जान बचायी थी जिसके लिए आप उनकी मदद कर रहे है. पर आप जो कर रहे है वह मदद नहीं है. वह कुछ और है. और आप हमसब के बारे में इतना कैसे जानते है. और फिर आज माहिरा ने जो कुछ भी किया वह बहोत hi ज्यादा अजीब था. बोलिये आखिर कौन है आप.

कृष्णा – अभी इसका सही वक़्त नहीं आया है विक्की. मैं जानता हु तुम्हारे मैं में मुझे लेके बहोत से सवाल है. पर अभी तुम्हारे सवालों के जवाब देने का सही वक़्त नहीं आया है. बस इतना जान लो राजपूत परिवार की मुसीबत काम नहीं हुई है बल्कि इनकी मुसीबते बहोत बड़ी है.

विक्की – और यह सब किसलिए सिर्फ प्रॉपर्टी के लिए.

कृष्णा – यह सब सिर्फ प्रॉपर्टी के लिए नहीं होसकता है विक्की. जहा तक मैं समाज पाया हु यह सब किसी पुराणी दुश्मनी की वजह से है.

विक्की – पुराणी दुश्मनी. पर जहा तक मैं जानता हु हमारा ऐसा कोई दुश्मन नहीं है.

कृष्णा – मैंने कहा ना विक्की ऐसा बहोत कुछ है जो सामने नहीं आया है.

यह बोल कृष्णा आर्यन के केबिन के अंदर चला जाता है और इधर विक्की कन्फूसिओं और हैरानी में hi खड़ा रह जाता है.

उधर अजय एंड फॅमिली हॉस्पिटल से निकल के राजपूत मेन्शन ना आके कही और hi चले जाते है.

अजय – किसने आखिर किसने कहा था तुझे अपना मुँह हद से ज्यादा खोलने के लिए. बोल किसने कहा था.

अर्जुन – पर डैड मुझे क्या पता था वह माहिरा ऐसा कुछ कर जायेगी सिर्फ एक अनजान इंसान के लिए.

माया – ारी बेवक़ूफ़ वह लड़का अब इन् राजपूत वालों के लिए कोई अनजान इंसान नहीं है. उस लड़के ने इनके बेटे को बचाया है. वह भी एक बार नहीं 2 बार. वह लड़का इनके लिए किसी फ़रिश्ते से काम नहीं था. और तूने उसी फ़रिश्ते को निचा दिखाना चाहा और देखा क्या होगया. उस कल की लड़की ने कितना बड़ा फैसला ले लिया.

अर्जुन – अब क्या करेंगे डैड.

अजय – कुछ तोह करना hi होगा. कैसे भी करके इस लड़के की कमज़ोरी ढूंढ़नी hi होगी. एकबार इसकी कमज़ोरी हाथ लग गयी फिर इस लड़के को भी वही पहुंचा देंगे जहा विक्रम को पहुंचाया है.

माया – तुम्हारे वह आदमी सौराह, हरीश और रणजीत तोह किसी काम के नहीं है. रणजीत को तोह उस लड़के ने हमेशा हमेशा के लिए बर्बाद करदिया. फिर उस हरीश का बीटा विजय वह भी नाकामयाब रहा उस आर्यन को मारने में. और फिर वह सूरज वह भी शालिनी को मारने में नाकायाब रहा.

अजय – और यह सब हुआ है वह लड़के कृष्णा की वजह से. ना जाने आखिर ऐसा कौनसा रिश्ता है उसका इन् राजपूत परिवार के साथ जो हरवक्त इनके सामने एक ढाल बांके खड़ा रहता है.

अर्जुन – डैड क्या आप उनसे बात नहीं कर सकते. मेरा मतलब है इनसब के मास्टर मंद से.

माया – हां अजय तुम उनसे बात क्यों नहीं करते. होसकता है उनके पास इस कृष्णा की कोई इनफार्मेशन हो. आखिर वह हमसब से ज्यादा जानते है इन् राजपूत वालों को.

अजय – नहीं. नहीं करसकता उनसे बात. पता नहीं कौन है वह और कहा रहता है. मेरी उनसे बात विक्रम के मरने के समय हुई थी. और उससे पहले तोह उस संगीता को इन् राजपूत वालों से अलग करते टाइम. संगीता वाला प्लान ख़तम होने के बाद उन्होंने मुझे फिर विक्रम के मरने पे भी बात की थी. उसके बाद से उनका कोई कांटेक्ट नहीं है मेरे पास.

अर्जुन – तोह आप उसी नंबर पे फिर से कांटेक्ट कीजिये ना.

अजय – अबे गधे वह हर बार अलग अलग प्राइवेट नंबर से कॉल करता है. वह हमसब से ज्यादा चालक और शातिर है तभी इतने सालों से सबकी नज़रों से दुर्र है और खबर सब रखता है अपने पास.

माया – तोह अब क्या करेंगे.

अजय – सूरज के आदमी मुंबई में इस कृष्णा के बारे में पता लगा रहे है. बस एक बार वह से इसकी कोई कमज़ोरी मिल जाए फिर इस कृष्णा का हमेशा हमेशा के लिए खेल ख़तम करदूंगा.

माया – पर वह अंडरकवर एजेंट उसका क्या करना है. हुम्हे तोह पता hi नहीं आखिर वह अंडरकवर एजेंट कौन है और कहा है. पहले तोह हुम्हे लगा था वह कृष्णा hi एजेंट है फिर उस इशांत ने बोल दिया एजेंट कोई और है.

अजय – उसके बारे में पता लगाना होगा. वह एजेंट हमारे लिए खतरा बन्न सकता है.

अर्जुन – पर तब तक हम क्या करेंगे.

अजय – करना क्या है. वही करेंगे जो इतने दिनों से इनके बीच कर रहे है. माया शालिनी और विद्या पे नज़र रखेगी. मैं शेखर और उस बूढ़े पे नज़र रखूँगा. और तू उस विक्की और आर्यन पे नज़र रखेगा साथ में उस कृष्णा पे भी.



फिर यह तीनो राजपूत मेन्शन आने के लिए निकल जाते है.
 
अपडेट 45

राजपूत मेन्शन आने के बाद यह तीनो अपनी शकल ऐसी बना लेते है जैसे इन्हे हॉस्पिटल में की गयी बातों का बहोत दुःख है. तीनो अपना चेहरे में दुनिया भर के दुःख और पछतावा ले आते है.

अर्जुन – बुआ हॉस्पिटल में मैंने जो भी कहा वह मुझे नहीं कहना चाहिए था. मुझसे गलती होगयी. कृष्णा ने हमारे लिए इतना किया और मैंने उससे बदतमीज़ी करने की कोशिश की. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. मुझे माफ़ करदिजिये.

शालिनी – जो होगया उससे भूल जाओ अर्जुन. तुम्हे अपनी गलती का एहसास होगया एहि बहोत है. जाओ अब जाके आराम करो.

अर्जुन – नहीं बुआ. मैं हॉस्पिटल जारहा हु. कृष्णा वह अकेला होगा.

माहिरा – इसकी अब कोई जरुरत नहीं है. आप वह से चले गए थे तब विक्की भैया वह रुख गए है.

माहिरा के कहने का तरीका अर्जुन को अच्छा नहीं लगा. उससे गुस्सा तोह बहोत आरहा था पर फिर भी वह अपने चेहरे पे एक उदासी hi रखता है.

विद्या – माहिरा अब बस भी करो. जो होना था होगया. तुम जाओ जाके अपने कमरे में आराम करो.

माहिरा भी विद्या की बात सुनके वह से बिना कुछ बोले निकल जाती है और इधर अजय और उसका परिवार भी अपने अपने कमरे में निकल जाता है.

शेखर – भाभी आज माहिरा ने जो कुछ भी किया वह बहोत अजीब था. आजसे पहले उससे इस तरह रियेक्ट करते हुए हमने कभी नहीं देखा. फिर आज वह ऐसा कैसे करगयी.

विद्या – हां भाभी. जिस तरह से उसने कृष्णा को अपना भाई बनाया उससे तोह ऐसा लगता है जैसे वह उसी पहले से जानती हो.

शालिनी – कृष्णा ने हमारी बहोत मदद की है शेखर. पहले उसने माहिरा को बचने में मदद की. फिर 2 बार आर्यन कज जान बचायी. और ऐसे में अर्जुन ने ूनिंटेन्शनली जो भी कहा या किया वह उससे गलत लगा. तभी उसने ऐसा रियेक्ट किया. और तुमलोग तोह माहिरा को जानते हो उसमे अभी भी अकाल की कमी है उसकी सिर्फ उम्र बड़ी है पर दिमाग अभी भी किसी छोटे बच्चे जैसा है.

संगीता – अब जो होगया उससे चोरो. माहिरा को जो सही लगा उसने वह करदिया. और फिर हॉस्पिटल में भी तोह तुम दोनों ने उसे सही बताया ना.

शेखर – वह तोह जरुरी होगया ना संगीता. अगर हम उस वक़्त उससे गलत बताते तोह सबके सामने हमारी बच्ची की नाक काट जाती.

इशांत – अब जो होना था होगया. वैसे भी कृष्णा को हम बचपन से जानते है. ऐसा समाज लो कृष्णा और आर्यन दोनों एक hi है. आर्यन का दिल हमेशा कृष्णा के अंदर hi धड़कता है.

फिर शेखर और विद्या भी कुछ देर वह रखने के बाद अपने कमरे में चले जाते है. इनके जाने के बाद वह सिर्फ शालिनी, प्रताप, संगीता और इशांत hi बैठे हुए थे और शालिनी अपनी hi सोच में घुम्म थी.

प्रताप – अब क्या सोच रही हो शालिनी.

शालिनी – सोच रही हु पिताजी के अब आगे क्या होगा.

प्रताप – जो भी होगा अच्छा hi होगा. जब हमलोग इतनी दुर्र आगये है तोह अपनी मंज़िल में भी पहुंच जाएंगे.

इधर अभी और कोई कुछ बोलता तभी संगीता का फ़ोन बज उठता है. वह फ़ोन की तरफ देखती है तोह उससे एक अननोन नंबर दिखाई देता है. संगीता कॉल रइवे करती है तोह उससे सामने से जानी पहचानी आवाज़ मिलती है तोह संगीता वह से उठ कर दूसरी तरफ जाके बात करने लगती है.

संगीता – हां बोलो.

सामने से – क्या जो हमने देखा वह सच है.

संगीता – हां यह सच है.

सामने से – यह सब कैसे हुआ. सब ठीक है ना.

संगीता – चिंता मत करो. सब ठीक है.

फिर थोड़ी देर संगीता उनसे बात करने के बाद कॉल कट करदेती है और सबके पास आके बैठ जाती है.

शालिनी – किसका कॉल था.

संगीता – मुंबई से था. वह भी यह न्यूज़ जा चुकी है के आर्यन हॉस्पिटल में है. तोह उसके कुछ दोस्तों का कॉल था.

थोड़ी देर बाद सबलोग अपने अपने कमरे में चले जाते है.

इधर सूरज के आदमी मुंबई में आर्यन के साथ साथ कृष्णा के बारे में भी हर तरह की जानकारी जुटाने में लगे हुए थे. ओहलोग मुंबई के हर कॉलेज में जाके उनके बारे में पूछताछ कर रहे थे पर उन्हें कुछ हासिल नहीं होरहा था.

कुछ कॉलेज वाले तोह बहार के लोगो को अपने स्टूडेंट्स की जानकारी नहीं दे रहे थे तोह उंनलोगो ने कॉलेज वालों को डरा धमका के जानकारी निकालनी भी चाही पर उन्हें कुछ हाथ नहीं लगा इसीलिए उनमे से एक आदमी सूरज को कॉल करता है.

आदमी – सर यहाँ तोह उन् लड़को के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है. अब तक बहोत से कॉलेजेस में हमने पूछताछ की वह तोह हुम्हे कुछ पता नहीं चला.

सूरज – मुझे कुछ नहीं पता. मुझे उन् लड़को के बारे में साड़ी जानकारी चाहिए.

आदमी – पर सर इतने बड़े सेहर में कैसे सिर्फ 2 लड़को का पता लगाए.

सूरज – एक काम कर. तुझे पता है वह िब चीफ का घर कहा है.

आदमी – थोड़ा डरते हुए. हां सर पता है. पर वह क्यों भेज रहे है आप. वह जगह खतरे से खाली नहीं है. पुलिस फाॅर्स का जमावड़ा लगा रहता है वह.

सूरज – तुझे वह नहीं भेज रहा हु. तू उस एरिया में और उसके आस पास के एरिया में जितने भी स्कूल और कॉलेज है हर जगह पूछताछ कर. अगर कोई कुछ नहीं बोल रहा है तोह कुछ भी करके उसका मुँह खुलवा पर मुझे साड़ी जानकारी लाके दे.

आदमी – ठीक है सर. मैं करता हु कुछ.

फिर कॉल कट होजाता है.

आदमी – किस मुसीबत में फस गया हु. पता नहीं ऐसा क्या है इन् लड़को में जो पिछले कितने समय से ढूंढ रहा है. और यह दोनों लड़के तोह जैसे अलादीन का चिराग है मिल hi नहीं रहे है. क्या पता वह यहाँ भी रहते भी है या नहीं.

अपने मैं में अपनी परेशानी दिखने के बाद वह आदमी बाकी के आदमियों के साथ निकल पढता है संगीता और इशांत के घर की तरफ.

कुछ देरर में एहलोग उस एरिया में पहुंच जाते है.

आदमी – सुनी रे सब. इस एरिया में और इस के पास के एरिया में जितने भी स्कूल और कॉलेज है वह जानेका और इन् लड़को के बारे में जानकारी जुटाने का. क्या समझी. अगर कोई मुँह नहीं खोलना चाहता है तोह साम दाम दंड भेद कुछ भी करने का पर मुँह खुलवाने का. समझिए.

सब – हां भाई.

आदमी – तोह सबलोग फैल जाओ चारो तरफ और खोजो इन् लड़को को.

उस आदमी के कहने के बाद सारे आदमी चरों तरफ फैल जाते है और आर्यन और कृष्णा के बारे में जानकारी जुटाने लगते है.

इधर हॉस्पिटल में कृष्णा आर्यन के सिरहाने पे hi बैठा हुआ था और विक्की उस दुर्र सामने रखे सोफे में बैठा था.

कुछ देर में जब आर्यन की नींद टूट टी है और वह अपने सामने कृष्णा को देखता है तोह उसके चेहरे पे एक मुस्कान आजाती है.

कृष्णा – है क्या रहा है. तुझे पता है तेरी वजह से घरवालों की क्या हालत है. सबलोग कितने परेशां है.

आर्यन – पता है यार. पर मेरे इस हालत से एक चीज़ अच्छी होगयी. दो परिवार फिर से एक होगये. इतने सालों की नाराजगी और ग़लतफहमी सब दुर्र होगयी.

कृष्णा – पर अगर इस चाकर में तुझे कुछ होजाता तोह मैं सबको क्या जवाब देता. क्या बोलता उन्हें.

आर्यन – जब तक मेरा भाई मेरा दोस्त मेरे साथ है मुझे कोई छू भी नहीं सकता. मम्मी कहा है. वह ठीक तोह है ना.

कृष्णा – हां वह ठीक है अब. घर में है.

आर्यन – और माहिरा. उसकी तबियत अब ठीक है ना.

कृष्णा – तुझे सबकी पढ़ी है बस अपनी hi नहीं पढ़ी. सबलोग ठीक है. किसी को कोई परेशानी नहीं है. बस अब तू जल्दी से ठीक होजा.

आर्यन – मैं तोह एकदम फिट हु. पता नहीं यह डॉक्टर घर क्यों नहीं जाने दे रहा है.

आर्यन की बात सुनके कृष्णा है देता है और उसी हस्ते देख आर्यन भी हस्स देता है. पर जैसे hi वह हस्ता है उसके दिल में दर्द होने लगता है जिससे उसके मुँह से दर्द भरी सिसकारी निकल जाती है.

कृष्णा – दिख रहा है मुझे कितना फिट है तू. चल अब बाते बंद कर और आराम कर. मैं डॉक्टर को बोल देता हु तू उठ गया है.

फिर कृष्णा बहार जाने लगता है और आर्यन आँखें बंद करके आराम करने लगता है.

कृष्णा बहार जाने के पहले एकबार पीछे घूम के देखता है फिर विक्की को बोलता है.

कृष्णा – विक्की.

विक्की – जी.

कृष्णा – मैं डॉक्टर के पास जारहा हु. इसका ध्यान रखना.

विक्की – जी. आप फ़िक्र ना करे. मैं संभल लूंगा.



फिर कृष्णा वह से निकल जाता है और विक्की आर्यन के पास आके बैठ जाता है.
 
अपडेट 46

आर्यन और विक्की दोनों एकदूसरे को hi देख रहे थे. ऐसे तोह दोनों भाई है पर इस वक़्त उनके बीच जैसे एक खालीपन था एक अधूरापन था जिससे दोनों hi अच्छे से समाज रहे थी.

आर्यन – मैं समाज रहा हु विक्की. इन् कुछ दिनों में तुमने बहोत कुछ देखा है बहोत कुछ सुना है और उससे भी बढ़कर तुमने बहोत कुछ सहा है.

विक्की यह सुनके हैरानी से आर्यन की तरफ देखने लगता है जैसे पूछ रहा हो वह कहना क्या चाहता है.

आर्यन – मैं तुम्हारे बारे में सबकुछ जानता हु विक्की. तुम क्यों इतना शांत रहते थे क्यों इतना बड़ा परिवार होने के बाद भी अपने आप को सबसे अलग रखते थे.

विक्की की आँखें अब हैरानी से बड़ी होजाती है. वह असमंजस में पढ़ जाता है के आखिर आर्यन को क्या और कैसे पता.

विक्की – आप क्या बोल रहे है मुझे कुछ समाज नहीं आरहा है. फ़िलहाल आप आराम करे. आपकी तबियत अभी ठीक नहीं है.

आर्यन – तुम सब समाज रहे हो विक्की. तुम समाज रहे हो मैं निधि की बात कर रहा हु.

यह नाम सुनते hi विक्की की आँखों से 2 बूँद आंसू के झलक पढ़ते है और उसकी आँखों के सामने एक हस्ता और खेलता हुआ चेहरा आजाता है.

विक्की – मुझे नहीं पता आप क्या बोल रहे है और मैं किसी निधि को नहीं जानता.

आर्यन – अगर नहीं जानते हो तोह तुम्हारी आँखें नम्म क्यों है उनमे अचानक से यह आंसू क्यों आगये.

विक्की – आप आराम कीजिये मैं बहार जाता हु.

यह बोल विक्की बिना कुछ बोले अपने आंसू छुपाते हुए वह से निकल जाता है और आर्यन उससे जाते हुए देखने लगता है.

विक्की वह से निकल कर सीधा हॉस्पिटल की छत्त में चला जाता है और बाउंड्री के सहारे खड़ा होजाता है. उसका चेहरा आंसुओं से बीघा हुआ था. इस वक़्त कोई भी अगर उसके चेहरे को देखता तोह उससे साफ़ समाज आजाता के वह कितने समय से दुःख में जी रहा है. उसके सीने में कितना बड़ा बोझ है.

विक्की अपने पॉकेट से मोबाइल निकलता है एक सीक्रेट एन्क्रिप्टेड फोल्डर को ओपन करके उसमे रखे फोटो को देखने लगता है.

4 साल पहले

दिल्ली सेहर के एक कॉलेज में एक लड़का बड़ी शान से एंट्री करता है. उसके साथ उसके 2 दोस्त भी थे. तीनो दोस्त कॉलेज में एंट्री करने के साथ साथ hi अपनी फवौरीते जगह यानी के कॉलेज के कैंटीन में चले जाते है और वह एक खाली टेबल में बैठ जाते है.

तीन दोस्तों में से एक दोस्त बोलता है.

दोस्त 1 – फाइनली. फाइनली हम स्कूल की दुनिया से आज़ाद होक कॉलेज की दुनिया में आगये है. अब ना होमवर्क का टेंशन और नाही रोज स्कूल जाने का टेंशन. अब तोह सिर्फ घूमना, एन्जॉय करना और अगर मैं किया तोह साल में 1-2 बार पढाई करना.

दोस्त 2 – सही कहा कार्तिक. अब ना घरवाले रोज रोज पढ़ने को बोलेंगे और नाही अब वह भारी भारी बुक्स बैग में ढाल्के स्कूल जाना होगा.

इन् दोनों की बाते सुन्न वह तीसरा लड़का है देता है और फिर उनको समझते हुए बोलता है.

दोस्त 3 – हां सही कहा. अब कोई होमवर्क का टेंशन, ना रोज रोज पढ़ने का टेंशन, ना घर वालों के तानो का टेंशन अब लाइफ एकदम सेट है. पर स्कूल लाइफ ख़तम होने के बाद हमारा बचपन भी वही ख़तम होगया. वह रोज होमवर्क ना करने पे टीचर की पनिशमेंट का डर, वह पढाई ना करने पे मम्मी पापा की प्यार भरी दांत, वह लंच ब्रेक का इंतज़ार, अपनी क्रश को चुप चुप के देखना, वह की बेस्ट टीचर पे क्रश होना, सबके साथ मिलके पिकनिक जाना, स्कूल में मस्तियाँ करना, दुसरो की टिफ़िन से चुरा के खाना एहि छोटी छोटी चीज़े भी अब हमेशा के लिए ख़तम होगयी है. बस अब 3 साल या फिर 5 साल की पढाई और है फिर तोह वही तोह वही 9 तो 5 की नौकरी, घर वालों की टेंशन, पैसों की टेंशन, यह टेंशन वह टेंशन और फिर ज़िन्दगी ख़तम. जब तक हमलोग स्कूल में थे तब तक ज़िन्दगी हसीं थी. जो हम कभी स्कूल में डेब्ट हुए समाज नहीं पाए.

अपने दोस्त की यह बाते सुन्न वह दोनों मुँह फाड़े इसको देखने लगते है. उनको ऐसा लग रहा था जैसे उनके सामने उनका दोस्त नहीं कोई दूसरा इंसान hi बैठा हुआ है.

अभी वह कुछ बोलते तभी उनके पास 3 लड़कियों का एक ग्रुप आता है और ताली बजने लगता है.

लड़की 1 – मन्ना पड़ेगा स्कूल लाइफ को लेके तुम्हारी यह सोच बहोत अच्छी है. तुम्हारी बातें सुनकर तोह हुम्हे फिर से स्कूल में एडमिशन लेने का मैं होरहा है.

लड़की 2 – सच में. स्कूल लाइफ को ऐसी सोच रखने वाले बहोत काम hi दीखते है आजकल. वर्ण आजकल तोह हर कोई बस कॉलेज hi आना चाहता है. जिनमे से यह दो लड़के भी है. यह बोल तीनो उनको अजीब नज़रो से देखने लगते है.

दोस्त 3 – यह तोह बस सबकी अपनी अपनी सोच है.

लड़की 3 – आपकी सोच सच में बहोत अच्छी है. पर आपके इन् दोस्तों की सोच बिलकुल भी अच्छी नहीं है. कुछ शिखाइये अपने दोस्तों को.

दोस्त 3 – कोशिश तोह कर रहा हु उम्मीद है जल्दी शिख जाए.

लड़की 3 - अच्छा लगा आपसे मिल कर और आपकी बातें सुनकर. अब हम चलते है. फिर मिलेंगे.

यह बोल वह लड़कियां वह से चली जाती है और यह तीनो उनको hi देखते रहते है.

उनके जाने के बाद यह दोनों उस लड़के को घूरने लगते है.

दोस्त 3 – अभी ऐसे क्यों घुर्र रहे हो कोई भूत देख लिया क्या.

कार्तिक – भूत अगर देख भी लेते तब भी इतना शॉक नहीं होते जितना अभी होरहे है.

दोस्त 3 – क्यों ऐसा क्या होगया.

दोस्त 2 – अभी जो लड़का स्कूल के नाम से भी चिढ़ता हो. जिसको स्कूल की दहलीज में कदम रखने में भी मौत आती हो वह स्कूल को लेके ऐसी बातें करेगा तोह शॉक तोह लगेगा hi ना.

कार्तिक – समीर बिलकुल ठीक बोल रहा है. जो लड़का मर्डर मर्डर के स्कूल की क्लासेज करता हो वह स्कूल को लेके अगर ऐसे बोलेगा तोह शॉक तोह लगेगा ना. सच सच बता आखिर क्या चाकर है.

समीर – औरर उन् लड़कियों के सामने ऐसा भोला बन्न रहा था जैसे उस पुरे संसार में तुझसे भला और अच्छा कोई हो hi ना.

कार्तिक – साले खुद को उन् लड़कियों के सामने अच्छा बन्न गया और हुम्हे बुरा बना दिया.

दोस्त 3 – तोह कमीनो किसने बोलै था चरों तरफ देखे बिना अपना मुँह खोलने के लिए. सालों कॉलेज के पहला दिन है. बहोत से लोग यहाँ इस वक़्त स्कूल लाइफ को, अपने क्लासरूम को, अपने बेंच को मिस कर रहे होंगे और तुमलोग आते के संग संग स्कूल की बुराई करने लग गए.

समीर – मतलब तूने अभी थोड़ी देर पहले स्कूल को लेके इतना लम्बा भासन दिया वह एक नाटक था.

दोस्त 3 – हआ.

कार्तिक – मतलब तूने सिर्फ उन् लड़कियों के सामने अपनी इमेज बनाने के लिए नाटक किया.

दोस्त 3 – और क्या. ारी मैं तोह बचपन से hi स्कूल ना जाने के बहाने खोजता था. हर हफ्ते कोई न खोज बीमारी का बहाना बनके घर भाग जाता था. जिस लड़के को पढाई से एलर्जी हो उससे स्कूल कैसे पसंद आसक्त है.

समीर – वाह बेटे वाह्ह्ह. कॉलेज के पहले दिन hi तूने अपनी इमेज बना ली. और हमारी इमेज बर्बाद करदी.

दोस्त 3 – मैंने तुम्हारी इमेज नहीं बर्बाद की. तुमने अपनी इमेज अपने हाथों से खुद बर्बाद की है. और इस तरह की इमेज बनाना विक्की सिंह राजपूत के बाए हाथ का खेल है.

यह बोल विक्की अपने बालों को थोड़ा स्टाइल से सेट करने लगता है.

कुछ देर बाद क्लास स्टार्ट होने की बेल्ल बजती है तोह तीनो अपने क्लास की तरफ निकल पढ़ते है.

क्लास में आके विक्की, समीर और कार्तिक देखते है पूरी क्लास फुल होचुकी है उनके बैठने के लिए उनकी पसंदिता जगह लास्ट बेंच पूरी तरह से भर्ती है. उनके लिए अब सिर्फ फर्स्ट 3 रौस hi जगह बचे हुए है.

कार्तिक – ारी यार हम लेट होगये. लास्ट बेंच तोह पूरी तरह से फुल है. और फर्स्ट में हुम्हे बैठना नहीं.

विक्की – ारी फर्स्ट बेंच में बैतँना कितना अच्छा होता है तुम्हे पता है. फर्स्ट बेंच में बैठने से कितना कुछ सिखने को मिलता है. और तुमलोग हो के लास्ट में जाना चाहते हो. मेरी इमेज का कुछ तोह ख्याल किया करो.

समीर और कार्तिक विक्की का फिर से यह बदला हुआ रूप देख हैरान होजाते है. दोनों चरों तरफ नज़र घूमते है तोह उन्हें क्लास में फर्स्ट रौ में hi वह तीन लड़कियां बैठी हुई मिलती है जो इन्हे hi देख रही थी.

उन् तीन लड़कों को देख यह दोनों समाज जाते है के विक्की की नौटंकी फिर से चालु होचुकी है. दोनों फिर से उन् लड़कियों के सामने अपनी इमेज बर्बाद करदेते है.



विक्की इनदोनो को देखकर एक आँख मरदेता है और सीधा जाके फर्स्ट रौ में बैठ जाता है. समीर और कार्तिक भी बुझे मैं से विक्की के पास जाके बैठ जाते है.
 
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