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कृष्णा जो इतनी देर से यह सब देख रहा था वह माहिरा के पास आकर उसके पास बैठ जाता है.
कृष्णा – माहिरा.
माहिरा का इतना hi सुन्ना बहोत था के वह उसके गले लग रोने लगती है.
माहिरा – रट हुए. मैंने जान मच के कुछ नहीं किया. मुझे नहीं पता था मेरा मज़ाक इतना भयानक होजायेगा. अगर मुझे पता रहता तोह मैं ऐसा कुछ करती hi नहीं. मैं मानती हु मुझसे बहोत बड़ी गलती होगयी है. प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. मेरी वजह से सिर्फ मेरी वजह से आज उसकी यह हालत है.
कृष्णा – चुप हो जाओ. तुम्हे अपनी गलती का एहसास होगया है एहि बहोत है. कुछ नहीं होगा उससे. सब ठीक होजायेगा.
माहिरा – मम्मी और बुआ तोह मुझसे बहोत hi ज्यादा नाराज़ है.
कृष्णा – मैं हूँ ना. मैं सब ठीक करदूंगा. वह दोनों टेंशन में है इसीलिए बस तुमसे थोड़ा नाराज़ है. देखना एकबार वह ठीक होजायेगा तोह सब ठीक होजायेगा.
माहिरा – वह दोनों मुझसे नाराज़ नहीं होंगे ना. मुझे माफ़ करदेंगे न.
कृष्णा – मैंने कहा न मैं सब ठीक करदूंगा. चलो अब रोना बंद करो.
कृष्णा के समझने पे माहिरा शांत होजाती है और वही बैठी रहती है.
कृष्णा – इशिता.
इशिता कृष्णा के मुँह से अपना नाम सुनके थोड़ा हैरान होजाती है.
इशिता – आप मुझे जानते है.
कृष्णा – मैं तुमसब को जानता हु. क्या मेरा एक काम करोगी.
इशिता – जी बोलिये.
कृष्णा – अभिमन्यु को हॉस्पिटल बुलाओगी.
इशिता – अभी किसलिए.
कृष्णा – कल आंटी उससे मिलना चाहती थी पर मिल नहीं पायी. तोह क्या तुम आज बुला लोगी.
इशिता – जी. मैं अभी बुलाती हु.
फिर कृष्णा आर्यन के केबिन के अंदर आजाता है.
केबिन के अंदर संगीता, शालिनी, इशांत, विद्या, शेखर, अजय और उसकी फॅमिली मौजूद थी. शालिनी और संगीता आर्यन के बीएड के दोनों तरफ बैठी हुई थी. संगीता आर्यन का सर पे हाथ फेर रही थी तोह शालिनी आर्यन का हाथ अपने हाथों में लिए बैठी हुई थी.
शालिनी – क्या हालत होगयी है मेरे बच्चे की. मुझे इससे वापस बुलाना hi नहीं चाहिए था. यह मुंबई में hi सही सलामत था.
संगीता – पता नहीं कब होश आएगा मेरे बच्चे को. अगर रोहन की तरह इससे भी कुछ होगया तोह मैं ज़िंदा नहीं रहूंगी.
इशांत – शांत होजाओ संगीता कुछ नहीं होगा इससे. देखना जल्द hi ठीक होजायेगा.
संगीता – कैसे शांत होजाउ. मेरा बच्चा ज़िन्दगी और मौत से लड़ रहा है पिछले 24 घंटो से. डॉक्टर कह रहे है हालत में सुधर बहोत धीरे धीरे है. और कल तोह इस हालत में इस्पे जानलेवा हुम्ला हुआ है.
अभी कोई कुछ बोलता तभी वह फिर से डॉक्टर आजाता है और इतने सारे लोगो को एकसाथ वह देख कर वह सबको बहार जाने को बोलता है.
डॉक्टर – इतने सारे लोग यहाँ नहीं रुख सकते. आपलोग बहार जाइये. पेशेंट को अकेला चोरर दीजिये. इतने सारे लोगो का यहाँ रहना ठीक नहीं.
शालिनी – मैं कही नहीं जाउंगी. मैं एहि रहूंगी.
संगीता – मैं भी कही नहीं जाउंगी. मैं भी एहि रहूंगी.
शेखर – भाभी डॉक्टर ने कहा ना यहाँ इतने लोगो का रहना ठीक नहीं. हम बहार रखते है.
शालिनी – मैंने कहा ना मैं कही नहीं जाउंगी. डॉक्टर सिर्फ हमदोनो hi यहाँ रुकेंगे. हम दोनों माँ है इसकी. प्लीज हुम्हे यहाँ रखने दीजिये. प्लीज डॉक्टर.
डॉक्टर – ठीक है सिर्फ आप दोनों hi यहाँ रुकेंगी. बाकिसब लोग बहार जाइये.
डॉक्टर के कहने के मुताबिक वह से सबलोग बहार निकल जाते है सिर्फ शालिनी और संगीता hi वह रखती है.
रूम से बहार आने के बाद शेखर कृष्णा के पास आता है और कहता है.
शेखर – कृष्णा.
कृष्णा – जी अंकल.
शेखर – बीटा कुछ पता चला कौन था वह जो आर्यन को मारने आया था कल.
कृष्णा – नहीं अंकल. वह डॉक्टर के भेष में आया था और पूरा प्लान करके आया था. जैसे hi हम उसकी नकली दारी और मच निकलते वह खिड़की टॉड के भाग निकला. पर आप चिंता मत कीजिये. उससे कल रात की फायरिंग में गोली भी लगी है. वीर अंकल सेहर के हर हॉस्पिटल में इन्वेस्टीगेट कर रहे है वह जल्द पकड़ जाएगा.
शेखर – भगवन का शुक्र है के कल तुम यही थे. अगर तुम कल यहाँ नहीं होते तोह पता नहीं क्या होजाता.
इशांत – शेखर जब तक कृष्णा है आर्यन को कुछ नहीं होगा. यह लड़का आर्यन का दिल है. ऐसा समजलो इसके अंदर आर्यन का दिल धड़क रहा है. जब तक यह ज़िंदा है आर्यन को कुछ नहीं होसकता.
शेखर – मैंने दोस्ती बहोत देखि है पर तुमलोगो के जैसी दोस्ती मैंने आज तक नहीं देखि. भगवन तुमलोगो की दोस्ती हमेशा सलामत रखे.
विद्या – सही कहा इनके जैसी सच्ची दोस्ती तोह हमने आज तक नहीं देखि. आज आर्यन सिर्फ और सिर्फ इसके वजह से hi ज़िंदा है. अगर यह ना होता तोह आर्यन भी नहीं होता.
फिर सब लोग वही बैठ जाते है.
थोड़ी देर बाद वह इशिता अभिमन्यु के साथ हाज़िर होजाती है.
इशिता – कृष्णा भैया आपने अभिमन्यु को बुलाया था ना.
कृष्णा – हआ.
अभिमन्यु – जी बोलिये.
कृष्णा – तुमसे कोई मिलना चाहते है.
अभिमन्यु – जी कौन.
कृष्णा – अंकल यह hi है अभिमन्यु जिसने आर्यन को अपना खून दिया था इमरजेंसी के वक़्त.
इशांत कृष्णा की बात सुनके उनके पास आता है और अभिमन्यु को गले से लगा लेता है.
इशांत – तुम्हारा बहोत बहोत शुक्रिया बीटा जो तुमने इमरजेंसी के वक़्त अपने खून दिया. अगर तुम उस वक़्त अपना खून नहीं देते तोह पता नहीं क्या होजाता.
अभिमन्यु – आप ऐसे शुक्रिया बोलके मुझे शर्मिंदा कर रहे है अंकल. मैंने तोह बस अपना फ़र्ज़ निभाया है.
इशांत – तुम रुको तुमसे मिलने के लिए कोई बहोत बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है.
यह बोल इशांत केबिन के अंदर चला जाता है और इधर अभिमन्यु कंफ्यूज खड़ा रह जाता है. इशांत के जाने के बाद वह थोड़ा उनकंफर्टबले फील करता है और इशिता की तरफ देखके इशारो में पूछता है तोह वह भी उससे इशारो से शांत रहने को बोलती है.
इशांत को अंदर गए हुए कुछ hi देर हुआ था के अंदर से शालिनी और संगीता और दोनों बहार आती है और अभिमन्यु के सामने कड़ी होजाती है.
संगीता अभिमन्यु को गोरर से देखने लगती है. उसके ऐसे देखने से अभिमन्यु को अजीब सा लगता है वह कुछ कहता या करता तभी संगीता उसको गले से लगा लेती है.
संगीता – तुम्हारा बहोत बहोत सुखरिया बीटा बहोत बहोत शुक्रिया. तुमने सिर्फ आर्यन की hi जान नहीं बचायी है बल्कि 2 परिवारों की जान बचायी है. तुम्हारा जितना भी धन्यवाद करे काम है.
अभिमन्यु – आप ऐसा बोलके मुझे शर्मिंदा कर रही है आंटी. मैंने जो भी किया वह तोह मेरा फ़र्ज़ था और फिर आर्यन सर तोह मेरे बॉस है.
संगीता – बहोत अच्छे संस्कार है तुम्हारे. मैं एक बार तुम्हारे पेरेंट्स से जरूर मिलना चाहूंगी जिन्होंने तुम्हे इतने अच्छे संस्कार दिए है.
अभिमन्यु यह सुन मुस्कुरा देता है फिर बोलता है.
अभिमन्यु – अच्छा आंटी अब मैं चलता हु ऑफिस का काम अधूरा चोरर के आया हु आज मेरे सीनियर भी नहीं आये है.
शेखर – क्यों क्या हुआ तुम्हारे सीनियर को. और क्या नाम है उसका.
अभिमन्यु – सर उनका नाम तोह विजय खन्ना है और आज सुबह मुझे उनके घर से कॉल आया था के उनका एक्सीडेंट होगया है कल रात को तोह वह कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ सकेंगे.
शेखर – एक्सीडेंट होगया. कैसे हुआ.
अभिमन्यु – वह तोह मुझे नहीं पता.
शेखर – ठीक है. तुम जाओ.
फिर अभिमन्यु वह से चला जाता है.
कृष्णा जो इतनी देर से यह सब देख रहा था वह माहिरा के पास आकर उसके पास बैठ जाता है.
कृष्णा – माहिरा.
माहिरा का इतना hi सुन्ना बहोत था के वह उसके गले लग रोने लगती है.
माहिरा – रट हुए. मैंने जान मच के कुछ नहीं किया. मुझे नहीं पता था मेरा मज़ाक इतना भयानक होजायेगा. अगर मुझे पता रहता तोह मैं ऐसा कुछ करती hi नहीं. मैं मानती हु मुझसे बहोत बड़ी गलती होगयी है. प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. मेरी वजह से सिर्फ मेरी वजह से आज उसकी यह हालत है.
कृष्णा – चुप हो जाओ. तुम्हे अपनी गलती का एहसास होगया है एहि बहोत है. कुछ नहीं होगा उससे. सब ठीक होजायेगा.
माहिरा – मम्मी और बुआ तोह मुझसे बहोत hi ज्यादा नाराज़ है.
कृष्णा – मैं हूँ ना. मैं सब ठीक करदूंगा. वह दोनों टेंशन में है इसीलिए बस तुमसे थोड़ा नाराज़ है. देखना एकबार वह ठीक होजायेगा तोह सब ठीक होजायेगा.
माहिरा – वह दोनों मुझसे नाराज़ नहीं होंगे ना. मुझे माफ़ करदेंगे न.
कृष्णा – मैंने कहा न मैं सब ठीक करदूंगा. चलो अब रोना बंद करो.
कृष्णा के समझने पे माहिरा शांत होजाती है और वही बैठी रहती है.
कृष्णा – इशिता.
इशिता कृष्णा के मुँह से अपना नाम सुनके थोड़ा हैरान होजाती है.
इशिता – आप मुझे जानते है.
कृष्णा – मैं तुमसब को जानता हु. क्या मेरा एक काम करोगी.
इशिता – जी बोलिये.
कृष्णा – अभिमन्यु को हॉस्पिटल बुलाओगी.
इशिता – अभी किसलिए.
कृष्णा – कल आंटी उससे मिलना चाहती थी पर मिल नहीं पायी. तोह क्या तुम आज बुला लोगी.
इशिता – जी. मैं अभी बुलाती हु.
फिर कृष्णा आर्यन के केबिन के अंदर आजाता है.
केबिन के अंदर संगीता, शालिनी, इशांत, विद्या, शेखर, अजय और उसकी फॅमिली मौजूद थी. शालिनी और संगीता आर्यन के बीएड के दोनों तरफ बैठी हुई थी. संगीता आर्यन का सर पे हाथ फेर रही थी तोह शालिनी आर्यन का हाथ अपने हाथों में लिए बैठी हुई थी.
शालिनी – क्या हालत होगयी है मेरे बच्चे की. मुझे इससे वापस बुलाना hi नहीं चाहिए था. यह मुंबई में hi सही सलामत था.
संगीता – पता नहीं कब होश आएगा मेरे बच्चे को. अगर रोहन की तरह इससे भी कुछ होगया तोह मैं ज़िंदा नहीं रहूंगी.
इशांत – शांत होजाओ संगीता कुछ नहीं होगा इससे. देखना जल्द hi ठीक होजायेगा.
संगीता – कैसे शांत होजाउ. मेरा बच्चा ज़िन्दगी और मौत से लड़ रहा है पिछले 24 घंटो से. डॉक्टर कह रहे है हालत में सुधर बहोत धीरे धीरे है. और कल तोह इस हालत में इस्पे जानलेवा हुम्ला हुआ है.
अभी कोई कुछ बोलता तभी वह फिर से डॉक्टर आजाता है और इतने सारे लोगो को एकसाथ वह देख कर वह सबको बहार जाने को बोलता है.
डॉक्टर – इतने सारे लोग यहाँ नहीं रुख सकते. आपलोग बहार जाइये. पेशेंट को अकेला चोरर दीजिये. इतने सारे लोगो का यहाँ रहना ठीक नहीं.
शालिनी – मैं कही नहीं जाउंगी. मैं एहि रहूंगी.
संगीता – मैं भी कही नहीं जाउंगी. मैं भी एहि रहूंगी.
शेखर – भाभी डॉक्टर ने कहा ना यहाँ इतने लोगो का रहना ठीक नहीं. हम बहार रखते है.
शालिनी – मैंने कहा ना मैं कही नहीं जाउंगी. डॉक्टर सिर्फ हमदोनो hi यहाँ रुकेंगे. हम दोनों माँ है इसकी. प्लीज हुम्हे यहाँ रखने दीजिये. प्लीज डॉक्टर.
डॉक्टर – ठीक है सिर्फ आप दोनों hi यहाँ रुकेंगी. बाकिसब लोग बहार जाइये.
डॉक्टर के कहने के मुताबिक वह से सबलोग बहार निकल जाते है सिर्फ शालिनी और संगीता hi वह रखती है.
रूम से बहार आने के बाद शेखर कृष्णा के पास आता है और कहता है.
शेखर – कृष्णा.
कृष्णा – जी अंकल.
शेखर – बीटा कुछ पता चला कौन था वह जो आर्यन को मारने आया था कल.
कृष्णा – नहीं अंकल. वह डॉक्टर के भेष में आया था और पूरा प्लान करके आया था. जैसे hi हम उसकी नकली दारी और मच निकलते वह खिड़की टॉड के भाग निकला. पर आप चिंता मत कीजिये. उससे कल रात की फायरिंग में गोली भी लगी है. वीर अंकल सेहर के हर हॉस्पिटल में इन्वेस्टीगेट कर रहे है वह जल्द पकड़ जाएगा.
शेखर – भगवन का शुक्र है के कल तुम यही थे. अगर तुम कल यहाँ नहीं होते तोह पता नहीं क्या होजाता.
इशांत – शेखर जब तक कृष्णा है आर्यन को कुछ नहीं होगा. यह लड़का आर्यन का दिल है. ऐसा समजलो इसके अंदर आर्यन का दिल धड़क रहा है. जब तक यह ज़िंदा है आर्यन को कुछ नहीं होसकता.
शेखर – मैंने दोस्ती बहोत देखि है पर तुमलोगो के जैसी दोस्ती मैंने आज तक नहीं देखि. भगवन तुमलोगो की दोस्ती हमेशा सलामत रखे.
विद्या – सही कहा इनके जैसी सच्ची दोस्ती तोह हमने आज तक नहीं देखि. आज आर्यन सिर्फ और सिर्फ इसके वजह से hi ज़िंदा है. अगर यह ना होता तोह आर्यन भी नहीं होता.
फिर सब लोग वही बैठ जाते है.
थोड़ी देर बाद वह इशिता अभिमन्यु के साथ हाज़िर होजाती है.
इशिता – कृष्णा भैया आपने अभिमन्यु को बुलाया था ना.
कृष्णा – हआ.
अभिमन्यु – जी बोलिये.
कृष्णा – तुमसे कोई मिलना चाहते है.
अभिमन्यु – जी कौन.
कृष्णा – अंकल यह hi है अभिमन्यु जिसने आर्यन को अपना खून दिया था इमरजेंसी के वक़्त.
इशांत कृष्णा की बात सुनके उनके पास आता है और अभिमन्यु को गले से लगा लेता है.
इशांत – तुम्हारा बहोत बहोत शुक्रिया बीटा जो तुमने इमरजेंसी के वक़्त अपने खून दिया. अगर तुम उस वक़्त अपना खून नहीं देते तोह पता नहीं क्या होजाता.
अभिमन्यु – आप ऐसे शुक्रिया बोलके मुझे शर्मिंदा कर रहे है अंकल. मैंने तोह बस अपना फ़र्ज़ निभाया है.
इशांत – तुम रुको तुमसे मिलने के लिए कोई बहोत बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है.
यह बोल इशांत केबिन के अंदर चला जाता है और इधर अभिमन्यु कंफ्यूज खड़ा रह जाता है. इशांत के जाने के बाद वह थोड़ा उनकंफर्टबले फील करता है और इशिता की तरफ देखके इशारो में पूछता है तोह वह भी उससे इशारो से शांत रहने को बोलती है.
इशांत को अंदर गए हुए कुछ hi देर हुआ था के अंदर से शालिनी और संगीता और दोनों बहार आती है और अभिमन्यु के सामने कड़ी होजाती है.
संगीता अभिमन्यु को गोरर से देखने लगती है. उसके ऐसे देखने से अभिमन्यु को अजीब सा लगता है वह कुछ कहता या करता तभी संगीता उसको गले से लगा लेती है.
संगीता – तुम्हारा बहोत बहोत सुखरिया बीटा बहोत बहोत शुक्रिया. तुमने सिर्फ आर्यन की hi जान नहीं बचायी है बल्कि 2 परिवारों की जान बचायी है. तुम्हारा जितना भी धन्यवाद करे काम है.
अभिमन्यु – आप ऐसा बोलके मुझे शर्मिंदा कर रही है आंटी. मैंने जो भी किया वह तोह मेरा फ़र्ज़ था और फिर आर्यन सर तोह मेरे बॉस है.
संगीता – बहोत अच्छे संस्कार है तुम्हारे. मैं एक बार तुम्हारे पेरेंट्स से जरूर मिलना चाहूंगी जिन्होंने तुम्हे इतने अच्छे संस्कार दिए है.
अभिमन्यु यह सुन मुस्कुरा देता है फिर बोलता है.
अभिमन्यु – अच्छा आंटी अब मैं चलता हु ऑफिस का काम अधूरा चोरर के आया हु आज मेरे सीनियर भी नहीं आये है.
शेखर – क्यों क्या हुआ तुम्हारे सीनियर को. और क्या नाम है उसका.
अभिमन्यु – सर उनका नाम तोह विजय खन्ना है और आज सुबह मुझे उनके घर से कॉल आया था के उनका एक्सीडेंट होगया है कल रात को तोह वह कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ सकेंगे.
शेखर – एक्सीडेंट होगया. कैसे हुआ.
अभिमन्यु – वह तोह मुझे नहीं पता.
शेखर – ठीक है. तुम जाओ.
फिर अभिमन्यु वह से चला जाता है.