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बचपन की यादें फाइनल अपडेट
मनु भी अपने उस रेस्टोरेंट ? में वापस आया और अपना सामान जो उसने डेस्क पैर छोड़ा था उठाया और फ्लाइट ✈ के लिए एयरपोर्ट्स को निकल गया…..
अब आगे ..........
मनु रात को hi घर पहुंचा जहाँ उसके भाई अजय और maa-baap ने उसका वेलकम किया और अजय ने तोह उसे गले hi लग आलिया उसकी ट्रॉफी को तोह अजय ऐसे पकडे हुए था जैसे उसके भाई मनु ने नहीं बल्कि उसी ने यह जीती हो ….सुमित्रा और राजिंदर भी बहुत कुश थे उसके परिवार में मनु ने नेशनल लेवल पैर जीत दर्ज़ किट hi इसमें उनके लिए यह बहुत ख़ुशी का मौका था …
राजिंदर ने उसकी ट्रॉफी देखकर कहा “ बीटा आज तुमने सर फक्र से ुचा कर दिया हम तोह सिर्फ कमाने में ज़िन्दगी बिता बैठे पैर तुमने यह जीत कर आज उस कमी को पूरा कर diya,yeh ट्रॉफी बेशक तुमने जीती है, पैर इसे देखकर लगता है की मैंने hi जीती है ,,,ाचा लगा इसे देखकर जो बाप ने मिस किया बेटे ने जीत लिया ,,बीटा मैं तोह न कभी खेल पाया न ढंग से पद पाया पैर तुम खूब खेलना और खूब दिल से पड़ना जो हम नहीं कर सके (सुमित्रा को देखकर ) हु सब तुम करना अब तुम्हे अपने और हमारे हिस्से के जवानी और बचपन को भी जीना है और खुदको और अजय को अचे से ाचा इंसान बनाना हम दोनों तुम्हारे साथ हैं, यह ट्रॉफी तुमको तुम्हारी जीत के साथ तुम्हें तुम्हारे गुरु की म्हणत भी हमेशा याद दिलाते रहेगी सो घमंड से ज्यादा इससे सिखलेना की तुम्हारी जीत अकेले तुम्हारी नहीं है उसमे हर किसी की म्हणत शामिल है …आगे बढ़ते रहो और सदा जीतते रहो “ राजिंदर ने मनु को उसकी जीत पैर बधाई के साथ उसके आनेवाले कल के लिए कहा …
सुमित्रा के तोह जैसे मुँह से कुछ निकल hi नहीं रहा था ,,,हु तोह बार बार बस मनु को अपने सीने से लगा लेती थी ….क्युकी उसके लिए तोह यह जीत अभी भी किसी सपने जैसा hi था …खैर इन्ही सब में रात बीत चुकी थी …
मनु अगले दिन मास्टर के सामने था …आज अजय घर पैर hi था ….मास्टर ने बड़े गरम जोशी से उसका स्वागत किया जिसमे सुनील गुरु जी भी शामिल थे ….मास्टर ने उसे गले से लगा कर बधाई दी और कहा “ बीटा तुमने आज मेरी हर ट्रेनिंग को वसूल करवा दिया जीत कर मैं बहुत खुश हूँ मनु बोलो तुम क्या चाहते हो ??...आज तुम जो भी कहोगे वही मैं तुम्हे दूंगा यह मेरा वडा है सो जो चाहो मांग लो …”
मनु “ मास्टर अगर बुरा न मने तोह कुछ कहना चाहता हूँ…”
मास्टर “ कहो न क्या कहना चाहते हो जो मांगोगे आज मैं तुम्हे देना चाहता hun…”master आज बहुत खुश थे …
मनु “ मास्टर आज तक मैंने आपको और गुरु जी को अकेले देखा है …पैर अब और नहीं अब सन्यास छोड़ने का टाइम आ चूका है ..”
मास्टर “ मतलब “
मनु “ मास्टर आप समझदार हैं मुझसे ज्यादा आप कब तक अकेले रहेंगे आपके साथ सुनील गुरु जी भी अकेले हैं क्या आप उनके लिए शादी नहीं कर सकते …क्युकी जब तक आप शादी नहीं करेंगे तब तक गुरु जी भी नहीं करेंगे क्युकी हु अप्पको अकेला नहीं छोड़ना चाहते क्या आप को नहीं पता उन्होंने आपके अकेले रहने के चलते खुद भी अब तक शादी नहीं की है ??”
मास्टर ने हैरानी से गुरु जी को देखा गुरु जी मनु की तरफ चुप रहने के लिए इशारा कर रहे थे …
मास्टर “ सुनील क्या यह सुच है ????तुम मेरे लिए अब तक शादी नहीं कर रहे हो ऐसा क्यों भला ???”
सुनील गुरु जी “ मालिक आप मेरे बचपन के दोस्त हैं और आपको मैंने अकेलेपन में देखा है तोह आपको भला अकेला छोड़कर घर कैसे बसा लूँ मालिक के साथ आप मेरे बचपन के दोस्त भी हैं …तोह आपको अकेला छोड़कर खुद खुशियां मानों कैसे हो सकता है ..”
मास्टर “ पैर सुनील मेरे बारे में तुम जानते हो तोह तुम भला कैसे मेरे पीछे अकेले रह सकते हो ??”
सुनील “ मालिक आप मेरे मालिक के साथ दोस्त भी हैं तोह आपको अकेला छोड़कर मैं खुद खुशियां मनौ यह कैसे हो सकता है …??”
मास्टर “पैर “
सुनील “ पैर कुछ नहीं आप जब तक अकेले रहोगे तब तक मैं अकेला hi रहूँगा यह मैंने कसम खाई है …” गुरु जी ने ात -लास्ट मान लिया …जिससे मास्टर सोच में पद गए ..
मनु ने देखा मास्टर सोच में गुमहिं तोह उसने कहा “ मास्टर आपने वडा किया था न की मैं कुछ भी मांग सकता हूँ तोह मैं चाहता हूँ आप और गुरु जी अब शादी कर लो वर्ण मैं समझूंगा मेरे मास्टर क़ानूस निकले …”
जेस्पर मास्टर और गुरु जी दोनों को हंसी आ gayi…master “ तोह मतलब तुमने अचे से सोचकर यह सब प्लान किया है ….और मैं समझ रहा था की तुम शायद कोई बाइक या कार मांगने वाले हो …खैर अब वडा किया है तोह पूरा करना होगा …पैर कोई जब सही मिलेगी तब कर लूंगा अब और कोई बहस नहीं पैर सुनील अब तुम शादी जल्द से करो वर्ण बाल और पाक जायेंगे ….हाहाहाहाहा!”
सुनील “ मालिक आपके बाद hi करूँगा वर्ण नहीं वर्ण पता लगा की आपने मुझे शादी में फंसा दिया और खुद फिरसे अकेले पद गए ???” गुरु जी ने डाउट से कहा जिस पैर मास्टर को हंसी आ गयी …
मास्टर “ अरे पहले सिर्फ तुम्थे अब यह भी है (मनु की तरफ इशारा करके )तुमसे मैं कुछ भी करके बच सकता हूँ पैर इससे कभी नहीं और इस बार इसका प्लान है मुझे और तुम्हे snyaas-mukt करना तोह सोचो की यह भला हम दोनों को ऐसे hi जाने देगा …नहीं न तोह तुम डाउट छोड़ दो …और शादी के लिए लड़की देखो अपने लिए मैं बाकी सब देख लूंगा..”
सुनील “ पैर मालिक आप “
मास्टर “ अरे कोई मिलेगी तोह मैं भी कर लूंगा …”
और ऐसे hi बातें होती रही ….और दिन बीतने लगे …. गुरु जी के लिए लड़की डुंडी गयी …और एक महीने बाद अर्चना गुरजी की लिए पसंद की गयी …गुरूजी और अर्चना ने जब आपस में बात की तोह दोनों hi एक दूसरे के हो चुके थे …सो फाइनली सुनील गुरु जी ने शादी कर ली थी जिसमे मनु और अजय ने खूब मज़े लिए ….इस जषनन में मनु और अजय ने खूब रंग जमाया दोनों भाई खूब नाचे …इसे मौके पैर मास्टर की भी मुलाकात एक विदेशी लड़की से हुई जिसका नाम कैरोलिना था जिससे मास्टर की आँखें चार हुई …क्युकी उसकी कई आदतें मास्टर की लेट वाइफ से काफी मिला करती थी …और न जाने उसे भी शायद मास्टर से कोनसा जुड़ाव महसूस हुआ …की सुनील गुरु जी के शादी के अगले महीने hi दोनों में बॉन्डिंग के चलते मास्टर की भी शादी हो चुकी थी…
टाइम बीतने लगा था …. दो साल बिट चुके थे …जिसमे गुरु जी और मास्टर ने खूब म्हणत की और दोनों के घर पैर एक बार फिर रौनक आ चुकी थी ….जहाँ उस घर में सिर्फ दोनों मर्द hi रहा करते थे वहां अब दोनों की वाइफ और छोटे नन्हे बचे भी हो चुके the….khete हैं न की जब इंसान खुश होता है तोह किस्मत भी मेहरबान हो जाती है …मास्टर और गुरु जी दोनों के घर पैर तीन बचे हो चुके थे ….अब आप कहोगे तीन कैसे ???तोह भाई जुड़वाँ सुना होगा न आपने …मास्टर के दो बचे हुए थे कैरोलिना से एक बीटा और एक बेटी …जिनका नाम अंकित और अंकिता रखा गया …और गुरु जी और अर्चना के घर एक लड़की हुई जिसका नाम पूजा रखा गया …तीनो बचे अब्दे स्वीट और प्यारे थे …क्युकी तीनो के बाप बचपन के दोस्त थे सो तीनो भी एक साथ कहला करते थे …कैरोलिना और अर्चना की भी अछि पता करती थी कैरोलिना नाम बेशक इंग्लिश लगता है ..पैर मास्टर से शादी के बाद हु पुरे इंडियन बन चुकी थी …अब जीन्स या पंत के बदले साडी या इंडियन ऑउटफिट में ज्यादा रहा करती thi…master ने उसे कभी किसी ड्रेस के लिए कुछ नहीं कहा पैर उसे अर्चना के साथ इंडियन ऑउटफिट में रहने में ज्यादा मज़ा आता था …
मनु दोनों के लिए बहुत खुश था …हु भी अब 18 साल का लड़का हो चूका था …मास्टर और गुरु जी के परिवार में भी मनु को ाचा प्यार मिलकर्ता था …और क्युकी दोनों की शादी की वजह मनु से किया वडा था ..तोह जबसे कैरोलिना और अर्चना को पता चला था ..तोह उसके लिए भी मनु किसी अपने की तरह था …मन ऊके साथ अजय भी 3 बच्चों के साथ एन्जॉय किया करता था …पैर अब ट्रेनिंग घर के बजाये मास्टर ने किसी और farm-house पैर कर दी थी ताकि बचे और फॅमिली दोनों की वजह से डिस्टर्बेंस न हो …पैर वीकेंड पैर मनु और अजय दोनों के फॅमिली और बच्चों के साथ एन्जॉय किया करते थे …
इन दो सालो में शबनम की शादी भी हो चुकी थी ..क्युकी शबनम मास्टर की शादी के बाद अकेली हो चुकी थी …सो उसने मास्टर के ंगो में अपना दिल दिमाग ज्यादा लगाना शुरू कर दिया सो …वहीँ उसकी मुलाकात इसरार अहमद से हुई जो शबनम को देखकर दिल हार चूका था …इसरार ाचा इंसान था जिसने जब खुद को शबनम के प्यार में पड़ता महसूस किया तोह उसने शबनम से साफ़ साफ़ निकाह के लिए कहा …जेस्पर शबनम ने अपने बारे में सब कुछ बता दिया …जेस्पर इसरार को सुनकर तगड़ा झटका लगा …हु दो दिन तक सदमे में रहा जेस्पर शबनम को लगा की इसरार अब शायद अपना इरादा बदल दे …पैर 3 दिन बाद इसरार घर से निकला शबनम से मिला और फिर निकाह के लिए कहा …पैर शबनम ने उसे साफ़ साफ़ मन कर दिया …की हु कोई अचे घर की लड़की देखे …पैर इसरार ने कहा की तुम भी अछि इंसान हो तुम्हे भी सर उठाकर जीने का हक़ है ..और वही हक़ तुम्हे मिलना चाहिए …जेस्पर शबनम को जैसे मन मांगी मुराद मिल चुकी थी ..उसने अपनी गुज़री ज़िन्दगी क्र बारे में पहले hi इसरार को बता दिया था ..(मास्टर को छोड़कर)
फिर भी इसरार उसे निकाह करना चाहता था …इससे उसे इसरार की मोहबत का पता भी चल रहा था …सो उसने भी रट हुए हाँ कह दिया और इसरार और शबनम का निकाह हुआ …पैर इसरार के घरवाले किसी रैंड को अपनी घर की बहु कैसे मान लेते …सो दोनों को घर से बेदखल कर दिया …पैर यहाँ मास्टर ने इसरार और शबनम का साथ दिया ….मास्टर ने इसरार को पूछा हु क्या कर सकता है इसरार को ड्राइविंग अछि आती थी तोह मास्टर ने उसे अपनी ऑफिस में ड्राइविंग पे लगा दिया …और जिस farm-house में शबनम मनु को दवाई और बॉडी लैंग्वेज पैर सिखाया करती थी वही farm-house दोनों को तोहफे में दे दिया …इसरार को शबनम ने मनु से भी मिलवाया और बताया की हु उसे बड़े लोगो के तौर तरीके सिखाती है …साथ में थोड़ा बॉडी लैंग्वेज पैर भी काम करवाती है …जेस्पर इसरार हैरान हुआ …पैर जब उसने देखा मनु को शबनम क्या सिखाती है …तोह उसे तब शबनम पैर बड़ा फक्र हुआ ….शबनम अभी तक जूस में मनु को हु दवाइयां देती थी जिसको मनु आराम से झेल लेता था …क्युकी अब उसकी बॉडी को उसकी हब्बित पद चुकी थी …यह बात सिर्फ शबनम और मास्टर को hi पता थी की उस जूस में मनु को दवाई मिलती है इसरार और मनु को इसके बारे में कुछ पता नहीं था..
खैर इसरार भी मनु के अचे नेचर से एफ्फेक्टेड था …हु भी मनु को पसंद करने लगा था …क्युकी उसके घर के आधे से ज्यादा काम उसके होते हुए या उसके पीछे से मनु hi देखकर्ता था ….और साथ में मनु का शांत नेचर जिसमे हु इस बात का ध्यान भी रखता था …की इसरार और शबनम को जब भी कोई जरूरत पड़े तोह उनकी हेल्प सही टाइम से हो ….उसके इस नेचर से इसरार और शबनम दोनों hi खुश थे …दोनों की ज़िन्दगी भी अछि चल रही थी …पैर घरवालों ने तोह जैसे इसरार से नाता hi तोड़ लिया था …हु शबनम के साथ खुश था ..पैर बचपन से जिनके साथ पला पड़ा हो उसको भला कैसे खुद से जुड़ा करता …हु फिर भी कभी कभी हिम्मत करके घर चला जाया करता पैर …घर में उसकी बहिन को छोड़कर सभी उसे रैंड का खसम कहकर बेज़्ज़त किया करते …तोह हु भी वापस घर आ जाया करता …
टाइम अपने हिसाब से बिट रहा था कल hi मनु का 18 व बर्थडे गया था ..और आज हु अजय को जस्ट ट्रेनिंग देकर हटा hi था …की एक कॉल आयी जिसके बाद उसने अजय को घर जाने को कहा और भागा … कॉल शबनम के पास से आयी थी …जिसमे इसरार का एक्सीडेंट होने की बात थी …मनु भगा भगा शबनम और इसरार को देखने हॉस्पिटल आया जहाँ इसरार बीएड पैर बेहोश पड़ा था …
उसे काफी छोटाइने आयी thi…uske पेअर में फ्रैक्चर था …सो उसे अभी नींद का इंजेक्शन दिया हुआ …था जिसके चलते हु सोया हुआ था …मनु आया उसने शबनम को काफी हिम्मत दी और मास्टर को भी भी इन्फॉर्म किया मास्टर के ंगो में काम करने और पुराणी मेंबर होने के नाते मास्टर के ंगो ने इसरार का सारा खर्चा उठा लिया …पैर इसरार मेंटली थोड़ा परेशान था …जिसमे मनु और शबनम ने उसे काफी हद तक निकला ….खैर कोई एक महीने बाद इसरार पूरी तरह से ठीक था …पैर न जाने क्यों कभी कभी बड़ा परेशान रहने लगा था …एक महीने में एक बार भी उसने शबनम को नहीं छुआ था …पैर शबनम ने इसे सोचा शायद इसरार की परेशानी समझकर उसे नज़रअंदाज़ कर दिया था ..
पैर इसरार में बहुत से बदलाव आ चुके थे …जिनको नज़रअंदाज़ करना शबनम के बुते से बहार था …जैसे रोज़ हसने और खुश रहनेवाला इसरार अब हसने से ज्यादा संजीदा और खामोश रहा …करता था … इन सब में अजीब बात यह थी की इसरार के एक्सीडेंट की खबर शबनम ने उसके घर दी तोह सिर्फ उसकी बहिन hi उसे देखने आयी …पैर उसके जाने के बाद से hi इसरार की ख़ामोशी का नक़ाब उतरने के बजाये और गहरा हो चला …
एक और महीना बीता तोह शबनम को थोड़ा डाउट हुआ की प्रॉब्लम क्या है इसरार की पहले हो सकता है …परेशान हो पैर अब क्या परेशानी है इसरार की ?? उसने सोचा ाचा मौका देखकर इसरार से बात करनी होगी,,,,
इसरार अपनी सोच मैं गम था शबनम ने उसके कंधे पैर हाथ रखा “ क्या बात है जनाब आप हमारे होते हुए सोच में गम हैं क्या हमसे कोई खता हुई क्या ???”शबनम ने बड़े hi शोख अंदाज़ में कहा इसरार से ..
इसरार अपनी सोच से बहार आकर झूटी मुस्कान के साथ “ नहीं ऐसी कोई बात नहीं है तुम बेकार मैं परेशान हो ??”
शबनम “ ाचा जनाब आने पुरे तीन महीने से अपनी बेगम को हाथ नहीं लगाया इसे क्या समझूँ मैं???”
इसरार इस बात पैर संजीदा होकर बोलै “ बेगम श्याद अब तुम्हारे मिया को हाथ न लगने की सजा मिली है ??”
शबनम “ मतलब “
इसरार “ बेगम तुमको अचे से पता है मेरे घरवाले तुमको लेकर मुझसे नाराज़ हैं और उस पैर मेरा एक्सीडेंट होना जेस्पर मेरी बहिन आयी उसने मुझे कहा की अगर हमारा कोई बचा हुआ तोह उसके बाद उनकी नाराज़गी शायद काम हो जाये पैर एक बात है जो मैंने तुमसे छुपाई है …???”
शबनम बड़े ध्यान से “ और हु क्या है जान सकती हूँ भला ??”
इसरार “यही की इस एक्सीडेंट के बाद शायद hi मैं कभी तुमको एक मर्द की तरह प्यार कर सकूंगा …”
शबनम “ मतलब”
इसरार ने इसके बाद सब कुछ शबनम को बता दिया की कैसे उसके सिर्फ तंग में hi नहीं बल्कि उसके लैंड और ाँद के अंदरूनी हिस्से बेकार हो चुके हैं जिनके चलते उसकी मर्दानगी ख़तम है और यह बात doctor’s ने उसे पहले hi बतादि थी पैर उसने इस बात पैर शबनम से बात करने का सोचा था जिसको सुनकर शबनम के ांसो निकल ने लगे हु बहुत रोई की उसके शोहर को कितना कुछ सहना पड़ा …पर इसरार ने उसे कुछ नहीं कहा जिस पैर इसरार ने शबनम से कहा “ यह सब मैं तुम्हें इसी लिए नहीं बताना चाहता था की तुम बेकार में रोटी रहो ??”
शबनम “ बेकार में आपको लगता है यह सब बेकार है आपने अकेले कितना कुछ सहा और मैं आंसू तक न बाहों यह कैसे सही होगा ???”
इसरार “ पैर प्रॉब्लम यहाँ शुरू नहीं होती प्रॉब्लम यहां से शुरू होती है …की घरवाले एक बचे की अस्स में बैठे हैं और मैं अब किसी काबिल नहीं रहा …कभी कभी सोचता हूँ की सुसाइड कर लूँ ताकि बाद में कोई तुमको ब्लैम न कर सके….”
शबनम “ ाचा जी आपने यह सोच लिया और मेरे बारे में ज़ारा सब hi नहीं सोचा की आपके जाने के बाद मैं कैसे जी सकुंगी …मैं तोह हूँ hi मनहूस जिसके चलते आपकी ज़िन्दगी भी बर्बाद हो गयी …पहले hi रंडी के नाम से बदनाम थी उसके बाद बेवा (विडो ) की तोहमत नहीं इससे ाचा तोह यह होगा की आपसे पहले मैं hi मर जॉन?”
इसरार “ ऐसा सोचना भी नहीं मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ यह मेरा दिल जानता है …और अगर तुम्हें कुछ हुआ तोह क्या मैं जी सकूंगा नहीं कभी नहीं …”
शबनम ने इस बात पैर इसरार को गले लगा लिया …इसरार “ पैर बेगम अभी तोह प्रॉब्लम बचे की है उसका क्या ..”
शबनम “ मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे बस तुम चाहिए …बस कोई मेरे साथ रहे न रहे बस तुम हमशा मेरे साथ रहना ..मुझे और कुछ नहीं चाहिए ..”
इसरार “ पैर बेगम बचा होता तोह मेरा परिवार तुमको अपना लेता जो मैं चाहता हूँ पैर अब मैं तुम्हे बचा तोह क्या एक मर्द का एहसास तक नहीं दे सकता ..उसका क्या ??”
शबनम “ एक औरत के लिए माँ बना उसके पुरे होने की निशानी है पैर बिना शोहर के उसके लिए दुनिआ का हर सुख बेकार है …क्या बचा hi सबकुछ है ???दुनिआ में कितने लोग हैं जिनके बचे नहीं होते क्या हु सब जीना छोड़ देते हैं नहीं न ..क्या हम बचा गॉड नहीं ले सकते ???”
इसरार “ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है ..पैर मेरी फॅमिली इस बात को शायद कभी न मने की पहले उनकी मर्ज़ी के खिलाफ निकाह किया और उसके बाद बचा गॉड ले लिया …तुम खुद सोचो क्या यह सब हु सेह सकेंगे नहीं न …???”
शबनम भी इस बात पैर सोच में गम थी …क्युकी इसरार की बात तोह वाज़िब थी अपनी जगह पैर …उसने बहुत सोचा पैर उसे कोई सलूशन नहीं मिल पा रहा था …
इसरार ने उसे सोच में गम देखकर कहा “ जानता हूँ की बचा गॉड लेने से इसका हल नहीं निकलनेवाला है पैर इसका एक और हल है …जो तुम चाहो तोह हो सकता है …”
शबनम हैरानी से “ ऐसा कोनसा हल है अगर है तोह आपकी बेगम का वडा है की आपको खुश करने के लिए मैं सब करुँगी …” इसरार इस बात के hi जैसे इंतज़ार में था …हु बहुत खुश हुआ …
इसरार “ बेगम मैं बाप नहीं बन सकता पैर तुम तोह माँ बन सकती हो ..समझ रही हो न …??”
शबनम समझ तोह गयी थी “ आप कहना क्या चाहते हो मैं कुछ समझी नहीं ..”
इसरार “ देखो अगर तुम माँ बन सकती हो तोह साड़ी प्रॉब्लम का सलूशन निकल सकता है …”
शबनम “ पैर कैसे ..??”
इसरार “ देखो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है की बचा किसी और का भी हो तोह पैर अगर तुम माँ बानी तोह यह पक्का है की बचे के पैदा होने के बाद मेरे घरवाले तुमको ज़रूर अपना लेंगे …”
शबनम “ मतलब आपके होते हुए मुझे किसी और के साथ सोना होगा ..नहीं हरगिज़ नहीं मुझे यह मंज़ूर नहीं है …और आपने सोच भी कैसे लिया की बचे की चाहत में यह गुनाह में कर गुज़रूंगी …क्या आपके लिए आपके उस परिवार की खुसी hi सब कुछ है मेरी ख़ुशी का कोई मायने नहीं hai…or आपने यह बात सोची भी कहाँ से कोई मैं किसी के साथ भी सो कर बचा पैदा कर दूंगी …और आगे हु हमको ज़लील नहीं करेगा इसकी क्या गारंटी है की हु बाद मैं हमे बदनाम नहीं करेगा …??”
इसरार “ देखो पहली बात मैं चाहता हूँ तुमको एक मुक़ामाल फॅमिली देना उसके लिए बचा ज़रूरी है …और रही बात मेरे सोचने की तोह मैं अचे से जानता हूँ एक औरत को मर्द का प्यार क्या मायने रखता है …मैं खुदगर्ज़ नहीं हूँ की अपने लिए तुमको कैद करके रख दूँ …”
शबनम “ पैर ऐसा अगर हो भी गया तोह क्या हु हमदोनो के इस राज़ को राज़ रखेगा कोण भला खुद के बचे को ऐसे hi जाने देगा …नहीं मुझे नहीं लगता ऐसा कोई होगा …”
इसरार “ ऐसा नहीं है की मैंने इस बारे में सोचा नहीं है …मैंने इस बारे में बहुत सोचा और ऐसा एक शक्श है मेरी नज़र में जो हमको एक बचा भी दे सकता हो और बाद में भी हमारे इस राज़ को बरकार रखेगा …तुम उसे अचे से जानती हो ???”
शबनम हैरत से इसरार की बात सुन रही थी “ ऐसा कोण होगा जो इतने बड़े राज़ को बरकार रख सकेगा और हमे बचा भी देगा …???”
इसरार “ तुम उसे अचे से जानती हो और उसे पसंद भी करती हो …”
शबनम हैरान थी ..की कोण है जिसे शबनम भी पसंद करती थी “ कोण है हु पेहलियाँ न बुजाएँ इस बात पैर पहले hi काम धमाके कर दिए आपने मेरे साथ जो अभी भी कुछ बाकी है …??”
इसरार “ हु शकस है मनु …तुम्हारा चेला जिसे तुम सिखाती हो और कमसे काम मुझसे झूंठ न कहना की तुम उसे एक मर्द की हैसियत से पसंद नहीं करती क्युकी मैंने खुद तुम्हे उसमे खोते देखा है कई बार …यकीं मानो मुझे इस बात से कोई प्रॉब्लम नहीं है की तुम उसे पसंद करती हो …”
शबनम ने इस बात पैर अपना सर झुका लिया था …क्युकी सुच में मनु की तरफ हु आजकल बहुत अत्त्रक्ट हो रही थी …क्युकी यह बात सिर्फ मास्टर और शबनम को hi पता थी की मनु को कोनसी दवाइयां शबनम दे रही थी …और शबनम भी मनु को अपने किसी बनाये अचे मोन्यूमेंट की तरह देखा करती thi…or बार बार देखने के बाद मनु में उसे एक मुकमल मर्द नज़र आया करता था …जो खुद शबनम ने त्यार किया था ..अपनी सालो की एक्सपीरियंस से उसको बॉडी लैंग्वेज सीखना हो या मर्दानगी बढ़ाने की दवाई देना हो तोह यह भी सुच है की कोई अपने बनाये मोन्यूमेंट से कैसे प्यार न करे सो शबनम भी उसे देखकर खुश हुआ करती thi..or कभी कभी मनु को देखते हुए खो जाया करती थी …उसकी आँखों और दिमाग में दवाइयां देने के बाद हमेशा एक कंकाश चला करती थी की मनु पैर उसका क्या रिजल्ट आया होगा …सो ऐसे में hi इसरार ने उसे कई बार देखा था मनु को ऐसे देखते हुए …
शबनम निचे सर करके बोली “पैर हु तोह मेरा स्टूडेंट है और बहुत छोटा है …और क्या हु इसके लिए त्यार होगा ??और क्या …?” उसके इस बात को इसरार ने पकड़ लिया ..
इसरार “ अभी तोह तुमने क्या क्या नहीं कहा था की कोण होगा पैर मनु का नाम आते hi तुमने एक बार भी नहीं कहा की तुम्हे कोई ऑब्जेक्शन है ..बल्कि तुमने कहा की हु रेडी होगा ??”
इस पैर शबनम की जैसे चोरी पकड़ ली हो इसरार ने “ नहीं मेरा हु मतलब नहीं था ..”
इसरार “ जाने दो मैंने पहले hi कहा था मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है …मनु पे बल्कि मैं खुद ट्रस्ट करता हूँ …और जब बात तुम्हारी होगी तोह हु हेल्प ज़रूर करेगा ..मुझे दिल से यकीं है उसपर ..और रही बात उसके बचे होने की तोह तुम शायद भूल गयी हो हु मुझसे सिर्फ उम्र में hi छोटा है …पैर हु मुझे ज्यादा जवान मर्द है शरीर में भी दुगना है …तुम एक बार उसे बात कर लेना हु पक्का हाँ कहेगा …”
शबनम अब मनु को याद करने लगी मनु अब 18 साल का जवान मर्द था उसकी हाइट 6’ 3’’ हो चुकी थी …मज़बूत फुलड़ी शरीर ढोले शोले और मज़बूत 10 पैक एबीएस …हाँ भाई 10 पैक भी होते हैं …चेक कर लेना गूगल पैर और क्युकी जवानी अपना रंग दिखा रही थी तोह मनु का रंग भी जो बचपन से साफ़ (gehuan)tha पैर जवानी और अछि डाइट के चलते उसका कलर अब थोड़ा सा पिंकिश यानी थोड़ा अंग्रेज़ों जैसा हो चूका था …और पर्सनालिटी के क्या कहने बाँदा जहाँ से गुज़र जाता था …लड़के उसकी पर्सनालिटी को देखते और लड़कियां बस बर्फ मनु के जैसे होने ki….are उसके जैसे hi क्यों अपना छोरा किसी से काम है क्या उसी को बर्फ के रूप मैं माँगा करती thi…manu की पर्सनालिटी को इस बात से समझ लो की खुद शबनम भी उसे कहीं न कहीं पसंद करने लगी थी …जिसे कई बार इसरार ने खुद देखा था पैर उसे भी मनु पैर ट्रस्ट हो चूका था …सो हु शबनम की इस बात को इग्नोर करदेता था ….शबनम को इसरार की इस बात से की मनु से उसका बचा होगा सुनकर कहीं न कहीं उसके दिल में हलचल मचा दी थी …क्युकी मनु उसे लम्बे टाइम से जुड़ा हुआ था …और टाइम टाइम पैर इसरार और उसकी हेल्प भी किया करता था …सो कहीं न कहीं उसके लिए भी मनु का दिल अपनेपन से भरा हुआ …था ..और जबसे इसरार ने मनु से बचे के लिए कहा था तोह शबनम के दिल के साथ उसके दिमाग में भी हु सोच की दवाइयां क्या असर कर रही हैं मनु पैर ज़ोर मरने लगी थी …और उसका दिमाग न चाहते हुए भी कहीं न कहीं मनु के लैंड के साइज की कल्पनों में खो चूका था जिसका सिद्ध एस्सार उसकी छूट पैर होने लगा था …हु बार बार मनु की बॉडी और पर्सनालिटी के साथ उसके लैंड की कल्पना करती की मनु कैसे उसे छोडेगा और कैसे उसके कमसिन जिस्म को रौंदेगा …उसकी कल्पना का यह हाल था की उसकी 3 महीने से भुकी छूट पानी से भार कर चालक ने वाली थी ….इसरार ने शबनम को सोचते देखा तोह उसे हिलाकर सोच से बहार निकला ….
इसरार “ तुम ज्यादा न सोचो मैं जानता हूँ यह तुम्हारे लिए भी कितना मुश्किल है इसमें में तुम्हारे साथ हूँ “
जिस पैर शबनम खुद पैर शर्मिंदा सा फील करने लगी हु इसरार के सीने से लगी और बोली “ पैर मनु इसके लिए त्यार कैसे होगा ..”
इसरार “ पहले सोचा था खुद बात करूँगा पैर फिर सोचा तुमसे कहूंगा ..पैर अब यह लगता हैं हम दोनों को बात करनी चाहिए ताकि …हु ठीक से समझे हमारी प्रॉब्लम को ..किसी इंसान के लिए कितना मुश्किल है खुद की बेगम को किसी और के साथ सोने के लिए कहना यकीं मानो मैं जनता हूँ …सो प्ल्ज़ मुझसे नफरत न करना …”यह बात इसरार ने रट हुए कही थी अपने दोनों हाथ शबनम के सामने जोड़कर …
शबनम ने उसके हाथ रोक लिए उसके आंसू पूछे …और कहा “ आप अपना दिल छोटा न करें मैं खुद मनु से बात करुँगी ताकि मनु आपके सामने इंकार करे पैर मुझे इंकार न कर सके …क्युकी आप साथ में रहे तोह शायद मैं खुद को कमज़ोर महसूस करुँगी …पैर आप चाहें तोह मुझे साथ के कमरे में सुन सकते hain..taaki आपको यकीं रहे मुझपे …”
इसरार “ कैसी बात करती हो बेगम एक मर्द भला कैसे सुन सकेगा की उसकी बीवी किसी और मर्द के साथ नहीं मैं वहां मौजूद hi नहीं rahunga..tumko जो ठीक लगे सो कर लेना …” दोनों मैं बात चलती रही …
उधर मनु ने 2 साल में बहुत कुछ किया था …जैसा की आपको अचे से पता होगा की बाबा की ट्रेनिंग और भटनागर और अशोक की ट्रेनिंग मनु काफी लम्बे टाइम से ले रहा था …सो उसके पास काफी एक्सपीरियंस था …बिज़नेस का एक तरफ बाबा का कोर लेवल और दूसरी तरफ मॉडर्न बिज़नेस मंद का भटनागर और अशोक का बिज़नेस मैनेजमेंट पैर मनु सिर्फ पैसे से महरूम था …और जब उसने देहरादून में चैंपियनशिप जीती थी तोह उसने 50,000 भी जीते थे …जिसमे से मनु ने उसे बचे जिसने उसका पर्स मारा था उसके बाप को उस बचे के पड़े के लिए 25,000 दे दिए थे जिसपर उसके बाप ने बहुत दुआएं मनु को दी थी …और घर पैर जब बचे हुए 25,000 लेकर मनु आया तोह उसके पैसे उसकी maa-baap ने उसे hi खरच करने को कह दिया थे …जिसपर मनु ने उस पैसे से दमत अकाउंट खुलवाया था …और डेली ट्रेडिंग पैर मार्किट में पैसा लगाया था …ताकि कुछ ाचा प्रॉफिट मिल सके ….
शायद उस बाप और बाकी लोगो का प्यार hi था की मनु को एक बड़ा प्रॉफिट 6 महीने में मिला जिसमे उसने थोड़ा पैसा निकल कर जगह ली और एक छोटा सा डिस्ट्रीब्यूटरशिप ले लिया और उसका एक्सपीरियंस यहाँ काम कर चूका था …सो उसमे ाचा प्रॉफिट हुआ जिसके बाद मनु ने एक छोटा सा ढाबा लिया था …और बचे दोनों काम से उसका प्रॉफिट बाद रहा था …जिसपर उसने एक ाचा सा रेस्टोरेंट लिया …जिसके पीछे एक ख़ास वजह थी …
और हु वजह थी कुछ लोग जो उसे डिस्ट्रीब्यूशन के बिज़नेस में मिले थे …जो थे तोह ईमानदार पैर अपने क्रिमिनल रिकॉर्ड के चलते उनको कोई भी काम देकर राज़ी नहीं था …क्युकी उनमे से ज्यादातर जेल से छूटे हुए कैदी थे …पैर उनके साथ एक वजह कमान थी …की कोई भी पहले से क्रिमिनल back-ground से नहीं था …हर कोई इस समाज के जुल्म का शिकार था …कोई मर्डर करके गया था …तोह कोई मारपीट में पैर वजह उन्सब्कि अपनी जगह सही थी ..जब तक हु जाइलो में थे तब तक ठीक था ..पैर जब बहार आये तोह उनका जीना पुलिस और बाकी criminal’s ने हराम कर रखा था …तोह मनु ने सोचा उनकी हेल्प की जाये ताकि हु लोग भी सर उठाकर जी सकें …मनु ने उन सभी को नया रेस्टोरेंट लेने के बाद उनको स्टाफ के टूर पैर वहां जॉब दे दी …जिसपर उन सभी की आँखें ख़ुशी से भर चुकी थी …की अब उनके पास भी काम होगा …
मनु ने उन सभी से कहा “ hi एवरीवन यह रेस्टोरेंट का नाम है “ Hell’s किचन “ इस नाम के पीछे की वजह है की हमने अपनी -अपनी लाइफ कहीं न कहीं हु नरक या जहन्नुम महसूस किया है …जिसके चलते हर किसी ने आपको एक क्रिमिनल या डेविल के तरह देखा होगा आप यहाँ भी डेविल होंगे पैर अंतर यह है की यहाँ आपको उस हेलल की गर्मी सिर्फ अपने खाने पैर निकालनी है ताकि लोग और आये ताकि आपकी और मेरी फॅमिली और ग्रो करे पैसे से भी और हर तरह से …इसके साथ hi यहाँ मौजूद हर इंसान आज से इस फॅमिली यानि hell’s किचन का हिस्सा है …”
जिसके बाद तालियां बजने लगी …सभी खुश थे जॉब पैर एम्प्लोयी को एम्प्लोयी समझने वाले की जगह फॅमिली मानेवाले बॉस को देखकर हु सब भी खुश थे जिनमे एडुकाते और ुनेदुकातेड़ सभी तरह के लोग थे …मनु का यह रेस्टोरेंट नाम के साथ काम में भी अलग सा था..
क्युकी उनके रेस्टोरेंट के नाम “ hell’s किचन “ के नाम के साथ स्टाफ का नाम devil’s रखा था मनु ने जिसको सभी के ड्रेस पैर साफ़ प्रिंट किया हुआ था ….जो अपने रेस्टोरेंट में काम करने के बाद आस पास के इलाके में भी काम करते थे एहि डेविल ड्रेस पहनकर जिसमे मनु ने सबसे पहले आस पास के रोड जहाँ भी घड़ा दिखा उसे भरवाने से लेकर आस पास घूमकर फेरी लगनेवाले को रात में फ्री खिलाना भी शामिल था …जिस पैर उसके पास का रेस्टोरेंट का मालिक बहुत हंसा था की पता नहीं कोण पागल है जिसने यह रेस्टोरेंट लिया है …पैर आस पास के खड़े को रोड पैर से हटने का फ़ायदा भी जल्द hi मिला रोड पैर जो गाढ़े होने से जैम लगता था हु ख़तम था …और डेविल टीम को सभी ने देखा था काम करते हुए …सो आस पास का हर इंसान मनु के रेस्टोरेंट में आने लगे थे ….और रात को फेरी वाले फ्री खाने के बदले दिन में हर तरह से “ Hell’s किचन “ का प्रमोशन पैम्फलेट बांटकर किया करते थे …जिससे उस आस पास के एरिया में उस रेस्टोरेंट का ाचा नाम हो चूका था .और जिसका स्टाफ और रेस्टोरेंट दोनों हर तरह से फायदे में चल रहा था …उस एरिया में बहुत सारा काम इन devil’s ने किया था और पब्लिक में भी यह रेस्टोरेंट अपने यूनिक नाम और वर्क के चलते दिन रात फेमस हो रहा था ….
और इनसब के पीछे था मनु का दिमाग जिसने हर चीज़ पैर ाचा काम किया था …समाज सेवा अपनी जगह हो रही थी …और रेस्टोरेंट अपनी जगह बिज़नेस में फेम हासिल कर रहा था …और वहां के devil’s भी अपने नाम और काम के चलते फेमस हो रहे थे …और इन सबके पीछे का दिमाग मनु का था ..इस डेविल टीम को मनु ने एक फॅमिली की तरह सपोर्ट किया था …हु मोस्टली रेस्टोरेंट के पैसे से कोई न कोई सोशल वर्क कर दिया करता था जिसके चलते ….उसकी इमेज वहां के लोगों में पॉजिटिव हो चली थी …अगर लड़का इलेक्शन में खड़ा होता तोह जीत जाता इसी से समझ जाओ आप सब…
मास्टर और गुरूजी के साथ मनु की फॅमिली भी खुश थी की मनु ने काम टाइम में बिना किसी और के हेल्प के बहुत कुछ आर्काइव किया था …
ऐसे hi मनु अपने रेस्टोरेंट को जा रहा था …की शबनम का कॉल आया उसने मनु को farm-house जो अब उसका परमानेंट घर था वहां बुलाया …मनु भी चला गया बिना यह जाने की आज सिकने को कुछ और भी मिल सकता है …
इसरार अपने कहे हुए बात के हिसाब से बहार चला गया था …शबनम सिर्फ अकेली थिग हर पैर उसने हल्का सा मेकअप किया हुआ था …
बेल्ल बजी उसने मनु को कीहोल से देखा मनु hi था उसने गेट ओपन किया और अंदर भुला लिया और गेट क्लोज कर दिया और मनु को लेकर सोफे पैर चलदी …जूस पिलाने के बाद जिसमे आज थोड़ा और तेज़ डोज़ था ….शबनम ने मनु को देखा मनु आज सुबह घर से सिर्फ एक पोलो ब्लू टी शर्ट और ब्लैक डेनिम जीन्स में निकला था उसे चहरे और बॉडी पैर दोनों काफी अचे जांच रहे थे …और उसका क्लैम नेचर देखकर शबनम भी उसे हसरत भरी नज़र से देख रही थी …..... :हिंट:
बचपन की यादें फाइनल अपडेट
मनु भी अपने उस रेस्टोरेंट ? में वापस आया और अपना सामान जो उसने डेस्क पैर छोड़ा था उठाया और फ्लाइट ✈ के लिए एयरपोर्ट्स को निकल गया…..
अब आगे ..........
मनु रात को hi घर पहुंचा जहाँ उसके भाई अजय और maa-baap ने उसका वेलकम किया और अजय ने तोह उसे गले hi लग आलिया उसकी ट्रॉफी को तोह अजय ऐसे पकडे हुए था जैसे उसके भाई मनु ने नहीं बल्कि उसी ने यह जीती हो ….सुमित्रा और राजिंदर भी बहुत कुश थे उसके परिवार में मनु ने नेशनल लेवल पैर जीत दर्ज़ किट hi इसमें उनके लिए यह बहुत ख़ुशी का मौका था …
राजिंदर ने उसकी ट्रॉफी देखकर कहा “ बीटा आज तुमने सर फक्र से ुचा कर दिया हम तोह सिर्फ कमाने में ज़िन्दगी बिता बैठे पैर तुमने यह जीत कर आज उस कमी को पूरा कर diya,yeh ट्रॉफी बेशक तुमने जीती है, पैर इसे देखकर लगता है की मैंने hi जीती है ,,,ाचा लगा इसे देखकर जो बाप ने मिस किया बेटे ने जीत लिया ,,बीटा मैं तोह न कभी खेल पाया न ढंग से पद पाया पैर तुम खूब खेलना और खूब दिल से पड़ना जो हम नहीं कर सके (सुमित्रा को देखकर ) हु सब तुम करना अब तुम्हे अपने और हमारे हिस्से के जवानी और बचपन को भी जीना है और खुदको और अजय को अचे से ाचा इंसान बनाना हम दोनों तुम्हारे साथ हैं, यह ट्रॉफी तुमको तुम्हारी जीत के साथ तुम्हें तुम्हारे गुरु की म्हणत भी हमेशा याद दिलाते रहेगी सो घमंड से ज्यादा इससे सिखलेना की तुम्हारी जीत अकेले तुम्हारी नहीं है उसमे हर किसी की म्हणत शामिल है …आगे बढ़ते रहो और सदा जीतते रहो “ राजिंदर ने मनु को उसकी जीत पैर बधाई के साथ उसके आनेवाले कल के लिए कहा …
सुमित्रा के तोह जैसे मुँह से कुछ निकल hi नहीं रहा था ,,,हु तोह बार बार बस मनु को अपने सीने से लगा लेती थी ….क्युकी उसके लिए तोह यह जीत अभी भी किसी सपने जैसा hi था …खैर इन्ही सब में रात बीत चुकी थी …
मनु अगले दिन मास्टर के सामने था …आज अजय घर पैर hi था ….मास्टर ने बड़े गरम जोशी से उसका स्वागत किया जिसमे सुनील गुरु जी भी शामिल थे ….मास्टर ने उसे गले से लगा कर बधाई दी और कहा “ बीटा तुमने आज मेरी हर ट्रेनिंग को वसूल करवा दिया जीत कर मैं बहुत खुश हूँ मनु बोलो तुम क्या चाहते हो ??...आज तुम जो भी कहोगे वही मैं तुम्हे दूंगा यह मेरा वडा है सो जो चाहो मांग लो …”
मनु “ मास्टर अगर बुरा न मने तोह कुछ कहना चाहता हूँ…”
मास्टर “ कहो न क्या कहना चाहते हो जो मांगोगे आज मैं तुम्हे देना चाहता hun…”master आज बहुत खुश थे …
मनु “ मास्टर आज तक मैंने आपको और गुरु जी को अकेले देखा है …पैर अब और नहीं अब सन्यास छोड़ने का टाइम आ चूका है ..”
मास्टर “ मतलब “
मनु “ मास्टर आप समझदार हैं मुझसे ज्यादा आप कब तक अकेले रहेंगे आपके साथ सुनील गुरु जी भी अकेले हैं क्या आप उनके लिए शादी नहीं कर सकते …क्युकी जब तक आप शादी नहीं करेंगे तब तक गुरु जी भी नहीं करेंगे क्युकी हु अप्पको अकेला नहीं छोड़ना चाहते क्या आप को नहीं पता उन्होंने आपके अकेले रहने के चलते खुद भी अब तक शादी नहीं की है ??”
मास्टर ने हैरानी से गुरु जी को देखा गुरु जी मनु की तरफ चुप रहने के लिए इशारा कर रहे थे …
मास्टर “ सुनील क्या यह सुच है ????तुम मेरे लिए अब तक शादी नहीं कर रहे हो ऐसा क्यों भला ???”
सुनील गुरु जी “ मालिक आप मेरे बचपन के दोस्त हैं और आपको मैंने अकेलेपन में देखा है तोह आपको भला अकेला छोड़कर घर कैसे बसा लूँ मालिक के साथ आप मेरे बचपन के दोस्त भी हैं …तोह आपको अकेला छोड़कर खुद खुशियां मानों कैसे हो सकता है ..”
मास्टर “ पैर सुनील मेरे बारे में तुम जानते हो तोह तुम भला कैसे मेरे पीछे अकेले रह सकते हो ??”
सुनील “ मालिक आप मेरे मालिक के साथ दोस्त भी हैं तोह आपको अकेला छोड़कर मैं खुद खुशियां मनौ यह कैसे हो सकता है …??”
मास्टर “पैर “
सुनील “ पैर कुछ नहीं आप जब तक अकेले रहोगे तब तक मैं अकेला hi रहूँगा यह मैंने कसम खाई है …” गुरु जी ने ात -लास्ट मान लिया …जिससे मास्टर सोच में पद गए ..
मनु ने देखा मास्टर सोच में गुमहिं तोह उसने कहा “ मास्टर आपने वडा किया था न की मैं कुछ भी मांग सकता हूँ तोह मैं चाहता हूँ आप और गुरु जी अब शादी कर लो वर्ण मैं समझूंगा मेरे मास्टर क़ानूस निकले …”
जेस्पर मास्टर और गुरु जी दोनों को हंसी आ gayi…master “ तोह मतलब तुमने अचे से सोचकर यह सब प्लान किया है ….और मैं समझ रहा था की तुम शायद कोई बाइक या कार मांगने वाले हो …खैर अब वडा किया है तोह पूरा करना होगा …पैर कोई जब सही मिलेगी तब कर लूंगा अब और कोई बहस नहीं पैर सुनील अब तुम शादी जल्द से करो वर्ण बाल और पाक जायेंगे ….हाहाहाहाहा!”
सुनील “ मालिक आपके बाद hi करूँगा वर्ण नहीं वर्ण पता लगा की आपने मुझे शादी में फंसा दिया और खुद फिरसे अकेले पद गए ???” गुरु जी ने डाउट से कहा जिस पैर मास्टर को हंसी आ गयी …
मास्टर “ अरे पहले सिर्फ तुम्थे अब यह भी है (मनु की तरफ इशारा करके )तुमसे मैं कुछ भी करके बच सकता हूँ पैर इससे कभी नहीं और इस बार इसका प्लान है मुझे और तुम्हे snyaas-mukt करना तोह सोचो की यह भला हम दोनों को ऐसे hi जाने देगा …नहीं न तोह तुम डाउट छोड़ दो …और शादी के लिए लड़की देखो अपने लिए मैं बाकी सब देख लूंगा..”
सुनील “ पैर मालिक आप “
मास्टर “ अरे कोई मिलेगी तोह मैं भी कर लूंगा …”
और ऐसे hi बातें होती रही ….और दिन बीतने लगे …. गुरु जी के लिए लड़की डुंडी गयी …और एक महीने बाद अर्चना गुरजी की लिए पसंद की गयी …गुरूजी और अर्चना ने जब आपस में बात की तोह दोनों hi एक दूसरे के हो चुके थे …सो फाइनली सुनील गुरु जी ने शादी कर ली थी जिसमे मनु और अजय ने खूब मज़े लिए ….इस जषनन में मनु और अजय ने खूब रंग जमाया दोनों भाई खूब नाचे …इसे मौके पैर मास्टर की भी मुलाकात एक विदेशी लड़की से हुई जिसका नाम कैरोलिना था जिससे मास्टर की आँखें चार हुई …क्युकी उसकी कई आदतें मास्टर की लेट वाइफ से काफी मिला करती थी …और न जाने उसे भी शायद मास्टर से कोनसा जुड़ाव महसूस हुआ …की सुनील गुरु जी के शादी के अगले महीने hi दोनों में बॉन्डिंग के चलते मास्टर की भी शादी हो चुकी थी…
टाइम बीतने लगा था …. दो साल बिट चुके थे …जिसमे गुरु जी और मास्टर ने खूब म्हणत की और दोनों के घर पैर एक बार फिर रौनक आ चुकी थी ….जहाँ उस घर में सिर्फ दोनों मर्द hi रहा करते थे वहां अब दोनों की वाइफ और छोटे नन्हे बचे भी हो चुके the….khete हैं न की जब इंसान खुश होता है तोह किस्मत भी मेहरबान हो जाती है …मास्टर और गुरु जी दोनों के घर पैर तीन बचे हो चुके थे ….अब आप कहोगे तीन कैसे ???तोह भाई जुड़वाँ सुना होगा न आपने …मास्टर के दो बचे हुए थे कैरोलिना से एक बीटा और एक बेटी …जिनका नाम अंकित और अंकिता रखा गया …और गुरु जी और अर्चना के घर एक लड़की हुई जिसका नाम पूजा रखा गया …तीनो बचे अब्दे स्वीट और प्यारे थे …क्युकी तीनो के बाप बचपन के दोस्त थे सो तीनो भी एक साथ कहला करते थे …कैरोलिना और अर्चना की भी अछि पता करती थी कैरोलिना नाम बेशक इंग्लिश लगता है ..पैर मास्टर से शादी के बाद हु पुरे इंडियन बन चुकी थी …अब जीन्स या पंत के बदले साडी या इंडियन ऑउटफिट में ज्यादा रहा करती thi…master ने उसे कभी किसी ड्रेस के लिए कुछ नहीं कहा पैर उसे अर्चना के साथ इंडियन ऑउटफिट में रहने में ज्यादा मज़ा आता था …
मनु दोनों के लिए बहुत खुश था …हु भी अब 18 साल का लड़का हो चूका था …मास्टर और गुरु जी के परिवार में भी मनु को ाचा प्यार मिलकर्ता था …और क्युकी दोनों की शादी की वजह मनु से किया वडा था ..तोह जबसे कैरोलिना और अर्चना को पता चला था ..तोह उसके लिए भी मनु किसी अपने की तरह था …मन ऊके साथ अजय भी 3 बच्चों के साथ एन्जॉय किया करता था …पैर अब ट्रेनिंग घर के बजाये मास्टर ने किसी और farm-house पैर कर दी थी ताकि बचे और फॅमिली दोनों की वजह से डिस्टर्बेंस न हो …पैर वीकेंड पैर मनु और अजय दोनों के फॅमिली और बच्चों के साथ एन्जॉय किया करते थे …
इन दो सालो में शबनम की शादी भी हो चुकी थी ..क्युकी शबनम मास्टर की शादी के बाद अकेली हो चुकी थी …सो उसने मास्टर के ंगो में अपना दिल दिमाग ज्यादा लगाना शुरू कर दिया सो …वहीँ उसकी मुलाकात इसरार अहमद से हुई जो शबनम को देखकर दिल हार चूका था …इसरार ाचा इंसान था जिसने जब खुद को शबनम के प्यार में पड़ता महसूस किया तोह उसने शबनम से साफ़ साफ़ निकाह के लिए कहा …जेस्पर शबनम ने अपने बारे में सब कुछ बता दिया …जेस्पर इसरार को सुनकर तगड़ा झटका लगा …हु दो दिन तक सदमे में रहा जेस्पर शबनम को लगा की इसरार अब शायद अपना इरादा बदल दे …पैर 3 दिन बाद इसरार घर से निकला शबनम से मिला और फिर निकाह के लिए कहा …पैर शबनम ने उसे साफ़ साफ़ मन कर दिया …की हु कोई अचे घर की लड़की देखे …पैर इसरार ने कहा की तुम भी अछि इंसान हो तुम्हे भी सर उठाकर जीने का हक़ है ..और वही हक़ तुम्हे मिलना चाहिए …जेस्पर शबनम को जैसे मन मांगी मुराद मिल चुकी थी ..उसने अपनी गुज़री ज़िन्दगी क्र बारे में पहले hi इसरार को बता दिया था ..(मास्टर को छोड़कर)
फिर भी इसरार उसे निकाह करना चाहता था …इससे उसे इसरार की मोहबत का पता भी चल रहा था …सो उसने भी रट हुए हाँ कह दिया और इसरार और शबनम का निकाह हुआ …पैर इसरार के घरवाले किसी रैंड को अपनी घर की बहु कैसे मान लेते …सो दोनों को घर से बेदखल कर दिया …पैर यहाँ मास्टर ने इसरार और शबनम का साथ दिया ….मास्टर ने इसरार को पूछा हु क्या कर सकता है इसरार को ड्राइविंग अछि आती थी तोह मास्टर ने उसे अपनी ऑफिस में ड्राइविंग पे लगा दिया …और जिस farm-house में शबनम मनु को दवाई और बॉडी लैंग्वेज पैर सिखाया करती थी वही farm-house दोनों को तोहफे में दे दिया …इसरार को शबनम ने मनु से भी मिलवाया और बताया की हु उसे बड़े लोगो के तौर तरीके सिखाती है …साथ में थोड़ा बॉडी लैंग्वेज पैर भी काम करवाती है …जेस्पर इसरार हैरान हुआ …पैर जब उसने देखा मनु को शबनम क्या सिखाती है …तोह उसे तब शबनम पैर बड़ा फक्र हुआ ….शबनम अभी तक जूस में मनु को हु दवाइयां देती थी जिसको मनु आराम से झेल लेता था …क्युकी अब उसकी बॉडी को उसकी हब्बित पद चुकी थी …यह बात सिर्फ शबनम और मास्टर को hi पता थी की उस जूस में मनु को दवाई मिलती है इसरार और मनु को इसके बारे में कुछ पता नहीं था..
खैर इसरार भी मनु के अचे नेचर से एफ्फेक्टेड था …हु भी मनु को पसंद करने लगा था …क्युकी उसके घर के आधे से ज्यादा काम उसके होते हुए या उसके पीछे से मनु hi देखकर्ता था ….और साथ में मनु का शांत नेचर जिसमे हु इस बात का ध्यान भी रखता था …की इसरार और शबनम को जब भी कोई जरूरत पड़े तोह उनकी हेल्प सही टाइम से हो ….उसके इस नेचर से इसरार और शबनम दोनों hi खुश थे …दोनों की ज़िन्दगी भी अछि चल रही थी …पैर घरवालों ने तोह जैसे इसरार से नाता hi तोड़ लिया था …हु शबनम के साथ खुश था ..पैर बचपन से जिनके साथ पला पड़ा हो उसको भला कैसे खुद से जुड़ा करता …हु फिर भी कभी कभी हिम्मत करके घर चला जाया करता पैर …घर में उसकी बहिन को छोड़कर सभी उसे रैंड का खसम कहकर बेज़्ज़त किया करते …तोह हु भी वापस घर आ जाया करता …
टाइम अपने हिसाब से बिट रहा था कल hi मनु का 18 व बर्थडे गया था ..और आज हु अजय को जस्ट ट्रेनिंग देकर हटा hi था …की एक कॉल आयी जिसके बाद उसने अजय को घर जाने को कहा और भागा … कॉल शबनम के पास से आयी थी …जिसमे इसरार का एक्सीडेंट होने की बात थी …मनु भगा भगा शबनम और इसरार को देखने हॉस्पिटल आया जहाँ इसरार बीएड पैर बेहोश पड़ा था …
उसे काफी छोटाइने आयी thi…uske पेअर में फ्रैक्चर था …सो उसे अभी नींद का इंजेक्शन दिया हुआ …था जिसके चलते हु सोया हुआ था …मनु आया उसने शबनम को काफी हिम्मत दी और मास्टर को भी भी इन्फॉर्म किया मास्टर के ंगो में काम करने और पुराणी मेंबर होने के नाते मास्टर के ंगो ने इसरार का सारा खर्चा उठा लिया …पैर इसरार मेंटली थोड़ा परेशान था …जिसमे मनु और शबनम ने उसे काफी हद तक निकला ….खैर कोई एक महीने बाद इसरार पूरी तरह से ठीक था …पैर न जाने क्यों कभी कभी बड़ा परेशान रहने लगा था …एक महीने में एक बार भी उसने शबनम को नहीं छुआ था …पैर शबनम ने इसे सोचा शायद इसरार की परेशानी समझकर उसे नज़रअंदाज़ कर दिया था ..
पैर इसरार में बहुत से बदलाव आ चुके थे …जिनको नज़रअंदाज़ करना शबनम के बुते से बहार था …जैसे रोज़ हसने और खुश रहनेवाला इसरार अब हसने से ज्यादा संजीदा और खामोश रहा …करता था … इन सब में अजीब बात यह थी की इसरार के एक्सीडेंट की खबर शबनम ने उसके घर दी तोह सिर्फ उसकी बहिन hi उसे देखने आयी …पैर उसके जाने के बाद से hi इसरार की ख़ामोशी का नक़ाब उतरने के बजाये और गहरा हो चला …
एक और महीना बीता तोह शबनम को थोड़ा डाउट हुआ की प्रॉब्लम क्या है इसरार की पहले हो सकता है …परेशान हो पैर अब क्या परेशानी है इसरार की ?? उसने सोचा ाचा मौका देखकर इसरार से बात करनी होगी,,,,
इसरार अपनी सोच मैं गम था शबनम ने उसके कंधे पैर हाथ रखा “ क्या बात है जनाब आप हमारे होते हुए सोच में गम हैं क्या हमसे कोई खता हुई क्या ???”शबनम ने बड़े hi शोख अंदाज़ में कहा इसरार से ..
इसरार अपनी सोच से बहार आकर झूटी मुस्कान के साथ “ नहीं ऐसी कोई बात नहीं है तुम बेकार मैं परेशान हो ??”
शबनम “ ाचा जनाब आने पुरे तीन महीने से अपनी बेगम को हाथ नहीं लगाया इसे क्या समझूँ मैं???”
इसरार इस बात पैर संजीदा होकर बोलै “ बेगम श्याद अब तुम्हारे मिया को हाथ न लगने की सजा मिली है ??”
शबनम “ मतलब “
इसरार “ बेगम तुमको अचे से पता है मेरे घरवाले तुमको लेकर मुझसे नाराज़ हैं और उस पैर मेरा एक्सीडेंट होना जेस्पर मेरी बहिन आयी उसने मुझे कहा की अगर हमारा कोई बचा हुआ तोह उसके बाद उनकी नाराज़गी शायद काम हो जाये पैर एक बात है जो मैंने तुमसे छुपाई है …???”
शबनम बड़े ध्यान से “ और हु क्या है जान सकती हूँ भला ??”
इसरार “यही की इस एक्सीडेंट के बाद शायद hi मैं कभी तुमको एक मर्द की तरह प्यार कर सकूंगा …”
शबनम “ मतलब”
इसरार ने इसके बाद सब कुछ शबनम को बता दिया की कैसे उसके सिर्फ तंग में hi नहीं बल्कि उसके लैंड और ाँद के अंदरूनी हिस्से बेकार हो चुके हैं जिनके चलते उसकी मर्दानगी ख़तम है और यह बात doctor’s ने उसे पहले hi बतादि थी पैर उसने इस बात पैर शबनम से बात करने का सोचा था जिसको सुनकर शबनम के ांसो निकल ने लगे हु बहुत रोई की उसके शोहर को कितना कुछ सहना पड़ा …पर इसरार ने उसे कुछ नहीं कहा जिस पैर इसरार ने शबनम से कहा “ यह सब मैं तुम्हें इसी लिए नहीं बताना चाहता था की तुम बेकार में रोटी रहो ??”
शबनम “ बेकार में आपको लगता है यह सब बेकार है आपने अकेले कितना कुछ सहा और मैं आंसू तक न बाहों यह कैसे सही होगा ???”
इसरार “ पैर प्रॉब्लम यहाँ शुरू नहीं होती प्रॉब्लम यहां से शुरू होती है …की घरवाले एक बचे की अस्स में बैठे हैं और मैं अब किसी काबिल नहीं रहा …कभी कभी सोचता हूँ की सुसाइड कर लूँ ताकि बाद में कोई तुमको ब्लैम न कर सके….”
शबनम “ ाचा जी आपने यह सोच लिया और मेरे बारे में ज़ारा सब hi नहीं सोचा की आपके जाने के बाद मैं कैसे जी सकुंगी …मैं तोह हूँ hi मनहूस जिसके चलते आपकी ज़िन्दगी भी बर्बाद हो गयी …पहले hi रंडी के नाम से बदनाम थी उसके बाद बेवा (विडो ) की तोहमत नहीं इससे ाचा तोह यह होगा की आपसे पहले मैं hi मर जॉन?”
इसरार “ ऐसा सोचना भी नहीं मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ यह मेरा दिल जानता है …और अगर तुम्हें कुछ हुआ तोह क्या मैं जी सकूंगा नहीं कभी नहीं …”
शबनम ने इस बात पैर इसरार को गले लगा लिया …इसरार “ पैर बेगम अभी तोह प्रॉब्लम बचे की है उसका क्या ..”
शबनम “ मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे बस तुम चाहिए …बस कोई मेरे साथ रहे न रहे बस तुम हमशा मेरे साथ रहना ..मुझे और कुछ नहीं चाहिए ..”
इसरार “ पैर बेगम बचा होता तोह मेरा परिवार तुमको अपना लेता जो मैं चाहता हूँ पैर अब मैं तुम्हे बचा तोह क्या एक मर्द का एहसास तक नहीं दे सकता ..उसका क्या ??”
शबनम “ एक औरत के लिए माँ बना उसके पुरे होने की निशानी है पैर बिना शोहर के उसके लिए दुनिआ का हर सुख बेकार है …क्या बचा hi सबकुछ है ???दुनिआ में कितने लोग हैं जिनके बचे नहीं होते क्या हु सब जीना छोड़ देते हैं नहीं न ..क्या हम बचा गॉड नहीं ले सकते ???”
इसरार “ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है ..पैर मेरी फॅमिली इस बात को शायद कभी न मने की पहले उनकी मर्ज़ी के खिलाफ निकाह किया और उसके बाद बचा गॉड ले लिया …तुम खुद सोचो क्या यह सब हु सेह सकेंगे नहीं न …???”
शबनम भी इस बात पैर सोच में गम थी …क्युकी इसरार की बात तोह वाज़िब थी अपनी जगह पैर …उसने बहुत सोचा पैर उसे कोई सलूशन नहीं मिल पा रहा था …
इसरार ने उसे सोच में गम देखकर कहा “ जानता हूँ की बचा गॉड लेने से इसका हल नहीं निकलनेवाला है पैर इसका एक और हल है …जो तुम चाहो तोह हो सकता है …”
शबनम हैरानी से “ ऐसा कोनसा हल है अगर है तोह आपकी बेगम का वडा है की आपको खुश करने के लिए मैं सब करुँगी …” इसरार इस बात के hi जैसे इंतज़ार में था …हु बहुत खुश हुआ …
इसरार “ बेगम मैं बाप नहीं बन सकता पैर तुम तोह माँ बन सकती हो ..समझ रही हो न …??”
शबनम समझ तोह गयी थी “ आप कहना क्या चाहते हो मैं कुछ समझी नहीं ..”
इसरार “ देखो अगर तुम माँ बन सकती हो तोह साड़ी प्रॉब्लम का सलूशन निकल सकता है …”
शबनम “ पैर कैसे ..??”
इसरार “ देखो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है की बचा किसी और का भी हो तोह पैर अगर तुम माँ बानी तोह यह पक्का है की बचे के पैदा होने के बाद मेरे घरवाले तुमको ज़रूर अपना लेंगे …”
शबनम “ मतलब आपके होते हुए मुझे किसी और के साथ सोना होगा ..नहीं हरगिज़ नहीं मुझे यह मंज़ूर नहीं है …और आपने सोच भी कैसे लिया की बचे की चाहत में यह गुनाह में कर गुज़रूंगी …क्या आपके लिए आपके उस परिवार की खुसी hi सब कुछ है मेरी ख़ुशी का कोई मायने नहीं hai…or आपने यह बात सोची भी कहाँ से कोई मैं किसी के साथ भी सो कर बचा पैदा कर दूंगी …और आगे हु हमको ज़लील नहीं करेगा इसकी क्या गारंटी है की हु बाद मैं हमे बदनाम नहीं करेगा …??”
इसरार “ देखो पहली बात मैं चाहता हूँ तुमको एक मुक़ामाल फॅमिली देना उसके लिए बचा ज़रूरी है …और रही बात मेरे सोचने की तोह मैं अचे से जानता हूँ एक औरत को मर्द का प्यार क्या मायने रखता है …मैं खुदगर्ज़ नहीं हूँ की अपने लिए तुमको कैद करके रख दूँ …”
शबनम “ पैर ऐसा अगर हो भी गया तोह क्या हु हमदोनो के इस राज़ को राज़ रखेगा कोण भला खुद के बचे को ऐसे hi जाने देगा …नहीं मुझे नहीं लगता ऐसा कोई होगा …”
इसरार “ ऐसा नहीं है की मैंने इस बारे में सोचा नहीं है …मैंने इस बारे में बहुत सोचा और ऐसा एक शक्श है मेरी नज़र में जो हमको एक बचा भी दे सकता हो और बाद में भी हमारे इस राज़ को बरकार रखेगा …तुम उसे अचे से जानती हो ???”
शबनम हैरत से इसरार की बात सुन रही थी “ ऐसा कोण होगा जो इतने बड़े राज़ को बरकार रख सकेगा और हमे बचा भी देगा …???”
इसरार “ तुम उसे अचे से जानती हो और उसे पसंद भी करती हो …”
शबनम हैरान थी ..की कोण है जिसे शबनम भी पसंद करती थी “ कोण है हु पेहलियाँ न बुजाएँ इस बात पैर पहले hi काम धमाके कर दिए आपने मेरे साथ जो अभी भी कुछ बाकी है …??”
इसरार “ हु शकस है मनु …तुम्हारा चेला जिसे तुम सिखाती हो और कमसे काम मुझसे झूंठ न कहना की तुम उसे एक मर्द की हैसियत से पसंद नहीं करती क्युकी मैंने खुद तुम्हे उसमे खोते देखा है कई बार …यकीं मानो मुझे इस बात से कोई प्रॉब्लम नहीं है की तुम उसे पसंद करती हो …”
शबनम ने इस बात पैर अपना सर झुका लिया था …क्युकी सुच में मनु की तरफ हु आजकल बहुत अत्त्रक्ट हो रही थी …क्युकी यह बात सिर्फ मास्टर और शबनम को hi पता थी की मनु को कोनसी दवाइयां शबनम दे रही थी …और शबनम भी मनु को अपने किसी बनाये अचे मोन्यूमेंट की तरह देखा करती thi…or बार बार देखने के बाद मनु में उसे एक मुकमल मर्द नज़र आया करता था …जो खुद शबनम ने त्यार किया था ..अपनी सालो की एक्सपीरियंस से उसको बॉडी लैंग्वेज सीखना हो या मर्दानगी बढ़ाने की दवाई देना हो तोह यह भी सुच है की कोई अपने बनाये मोन्यूमेंट से कैसे प्यार न करे सो शबनम भी उसे देखकर खुश हुआ करती thi..or कभी कभी मनु को देखते हुए खो जाया करती थी …उसकी आँखों और दिमाग में दवाइयां देने के बाद हमेशा एक कंकाश चला करती थी की मनु पैर उसका क्या रिजल्ट आया होगा …सो ऐसे में hi इसरार ने उसे कई बार देखा था मनु को ऐसे देखते हुए …
शबनम निचे सर करके बोली “पैर हु तोह मेरा स्टूडेंट है और बहुत छोटा है …और क्या हु इसके लिए त्यार होगा ??और क्या …?” उसके इस बात को इसरार ने पकड़ लिया ..
इसरार “ अभी तोह तुमने क्या क्या नहीं कहा था की कोण होगा पैर मनु का नाम आते hi तुमने एक बार भी नहीं कहा की तुम्हे कोई ऑब्जेक्शन है ..बल्कि तुमने कहा की हु रेडी होगा ??”
इस पैर शबनम की जैसे चोरी पकड़ ली हो इसरार ने “ नहीं मेरा हु मतलब नहीं था ..”
इसरार “ जाने दो मैंने पहले hi कहा था मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है …मनु पे बल्कि मैं खुद ट्रस्ट करता हूँ …और जब बात तुम्हारी होगी तोह हु हेल्प ज़रूर करेगा ..मुझे दिल से यकीं है उसपर ..और रही बात उसके बचे होने की तोह तुम शायद भूल गयी हो हु मुझसे सिर्फ उम्र में hi छोटा है …पैर हु मुझे ज्यादा जवान मर्द है शरीर में भी दुगना है …तुम एक बार उसे बात कर लेना हु पक्का हाँ कहेगा …”
शबनम अब मनु को याद करने लगी मनु अब 18 साल का जवान मर्द था उसकी हाइट 6’ 3’’ हो चुकी थी …मज़बूत फुलड़ी शरीर ढोले शोले और मज़बूत 10 पैक एबीएस …हाँ भाई 10 पैक भी होते हैं …चेक कर लेना गूगल पैर और क्युकी जवानी अपना रंग दिखा रही थी तोह मनु का रंग भी जो बचपन से साफ़ (gehuan)tha पैर जवानी और अछि डाइट के चलते उसका कलर अब थोड़ा सा पिंकिश यानी थोड़ा अंग्रेज़ों जैसा हो चूका था …और पर्सनालिटी के क्या कहने बाँदा जहाँ से गुज़र जाता था …लड़के उसकी पर्सनालिटी को देखते और लड़कियां बस बर्फ मनु के जैसे होने ki….are उसके जैसे hi क्यों अपना छोरा किसी से काम है क्या उसी को बर्फ के रूप मैं माँगा करती thi…manu की पर्सनालिटी को इस बात से समझ लो की खुद शबनम भी उसे कहीं न कहीं पसंद करने लगी थी …जिसे कई बार इसरार ने खुद देखा था पैर उसे भी मनु पैर ट्रस्ट हो चूका था …सो हु शबनम की इस बात को इग्नोर करदेता था ….शबनम को इसरार की इस बात से की मनु से उसका बचा होगा सुनकर कहीं न कहीं उसके दिल में हलचल मचा दी थी …क्युकी मनु उसे लम्बे टाइम से जुड़ा हुआ था …और टाइम टाइम पैर इसरार और उसकी हेल्प भी किया करता था …सो कहीं न कहीं उसके लिए भी मनु का दिल अपनेपन से भरा हुआ …था ..और जबसे इसरार ने मनु से बचे के लिए कहा था तोह शबनम के दिल के साथ उसके दिमाग में भी हु सोच की दवाइयां क्या असर कर रही हैं मनु पैर ज़ोर मरने लगी थी …और उसका दिमाग न चाहते हुए भी कहीं न कहीं मनु के लैंड के साइज की कल्पनों में खो चूका था जिसका सिद्ध एस्सार उसकी छूट पैर होने लगा था …हु बार बार मनु की बॉडी और पर्सनालिटी के साथ उसके लैंड की कल्पना करती की मनु कैसे उसे छोडेगा और कैसे उसके कमसिन जिस्म को रौंदेगा …उसकी कल्पना का यह हाल था की उसकी 3 महीने से भुकी छूट पानी से भार कर चालक ने वाली थी ….इसरार ने शबनम को सोचते देखा तोह उसे हिलाकर सोच से बहार निकला ….
इसरार “ तुम ज्यादा न सोचो मैं जानता हूँ यह तुम्हारे लिए भी कितना मुश्किल है इसमें में तुम्हारे साथ हूँ “
जिस पैर शबनम खुद पैर शर्मिंदा सा फील करने लगी हु इसरार के सीने से लगी और बोली “ पैर मनु इसके लिए त्यार कैसे होगा ..”
इसरार “ पहले सोचा था खुद बात करूँगा पैर फिर सोचा तुमसे कहूंगा ..पैर अब यह लगता हैं हम दोनों को बात करनी चाहिए ताकि …हु ठीक से समझे हमारी प्रॉब्लम को ..किसी इंसान के लिए कितना मुश्किल है खुद की बेगम को किसी और के साथ सोने के लिए कहना यकीं मानो मैं जनता हूँ …सो प्ल्ज़ मुझसे नफरत न करना …”यह बात इसरार ने रट हुए कही थी अपने दोनों हाथ शबनम के सामने जोड़कर …
शबनम ने उसके हाथ रोक लिए उसके आंसू पूछे …और कहा “ आप अपना दिल छोटा न करें मैं खुद मनु से बात करुँगी ताकि मनु आपके सामने इंकार करे पैर मुझे इंकार न कर सके …क्युकी आप साथ में रहे तोह शायद मैं खुद को कमज़ोर महसूस करुँगी …पैर आप चाहें तोह मुझे साथ के कमरे में सुन सकते hain..taaki आपको यकीं रहे मुझपे …”
इसरार “ कैसी बात करती हो बेगम एक मर्द भला कैसे सुन सकेगा की उसकी बीवी किसी और मर्द के साथ नहीं मैं वहां मौजूद hi नहीं rahunga..tumko जो ठीक लगे सो कर लेना …” दोनों मैं बात चलती रही …
उधर मनु ने 2 साल में बहुत कुछ किया था …जैसा की आपको अचे से पता होगा की बाबा की ट्रेनिंग और भटनागर और अशोक की ट्रेनिंग मनु काफी लम्बे टाइम से ले रहा था …सो उसके पास काफी एक्सपीरियंस था …बिज़नेस का एक तरफ बाबा का कोर लेवल और दूसरी तरफ मॉडर्न बिज़नेस मंद का भटनागर और अशोक का बिज़नेस मैनेजमेंट पैर मनु सिर्फ पैसे से महरूम था …और जब उसने देहरादून में चैंपियनशिप जीती थी तोह उसने 50,000 भी जीते थे …जिसमे से मनु ने उसे बचे जिसने उसका पर्स मारा था उसके बाप को उस बचे के पड़े के लिए 25,000 दे दिए थे जिसपर उसके बाप ने बहुत दुआएं मनु को दी थी …और घर पैर जब बचे हुए 25,000 लेकर मनु आया तोह उसके पैसे उसकी maa-baap ने उसे hi खरच करने को कह दिया थे …जिसपर मनु ने उस पैसे से दमत अकाउंट खुलवाया था …और डेली ट्रेडिंग पैर मार्किट में पैसा लगाया था …ताकि कुछ ाचा प्रॉफिट मिल सके ….
शायद उस बाप और बाकी लोगो का प्यार hi था की मनु को एक बड़ा प्रॉफिट 6 महीने में मिला जिसमे उसने थोड़ा पैसा निकल कर जगह ली और एक छोटा सा डिस्ट्रीब्यूटरशिप ले लिया और उसका एक्सपीरियंस यहाँ काम कर चूका था …सो उसमे ाचा प्रॉफिट हुआ जिसके बाद मनु ने एक छोटा सा ढाबा लिया था …और बचे दोनों काम से उसका प्रॉफिट बाद रहा था …जिसपर उसने एक ाचा सा रेस्टोरेंट लिया …जिसके पीछे एक ख़ास वजह थी …
और हु वजह थी कुछ लोग जो उसे डिस्ट्रीब्यूशन के बिज़नेस में मिले थे …जो थे तोह ईमानदार पैर अपने क्रिमिनल रिकॉर्ड के चलते उनको कोई भी काम देकर राज़ी नहीं था …क्युकी उनमे से ज्यादातर जेल से छूटे हुए कैदी थे …पैर उनके साथ एक वजह कमान थी …की कोई भी पहले से क्रिमिनल back-ground से नहीं था …हर कोई इस समाज के जुल्म का शिकार था …कोई मर्डर करके गया था …तोह कोई मारपीट में पैर वजह उन्सब्कि अपनी जगह सही थी ..जब तक हु जाइलो में थे तब तक ठीक था ..पैर जब बहार आये तोह उनका जीना पुलिस और बाकी criminal’s ने हराम कर रखा था …तोह मनु ने सोचा उनकी हेल्प की जाये ताकि हु लोग भी सर उठाकर जी सकें …मनु ने उन सभी को नया रेस्टोरेंट लेने के बाद उनको स्टाफ के टूर पैर वहां जॉब दे दी …जिसपर उन सभी की आँखें ख़ुशी से भर चुकी थी …की अब उनके पास भी काम होगा …
मनु ने उन सभी से कहा “ hi एवरीवन यह रेस्टोरेंट का नाम है “ Hell’s किचन “ इस नाम के पीछे की वजह है की हमने अपनी -अपनी लाइफ कहीं न कहीं हु नरक या जहन्नुम महसूस किया है …जिसके चलते हर किसी ने आपको एक क्रिमिनल या डेविल के तरह देखा होगा आप यहाँ भी डेविल होंगे पैर अंतर यह है की यहाँ आपको उस हेलल की गर्मी सिर्फ अपने खाने पैर निकालनी है ताकि लोग और आये ताकि आपकी और मेरी फॅमिली और ग्रो करे पैसे से भी और हर तरह से …इसके साथ hi यहाँ मौजूद हर इंसान आज से इस फॅमिली यानि hell’s किचन का हिस्सा है …”
जिसके बाद तालियां बजने लगी …सभी खुश थे जॉब पैर एम्प्लोयी को एम्प्लोयी समझने वाले की जगह फॅमिली मानेवाले बॉस को देखकर हु सब भी खुश थे जिनमे एडुकाते और ुनेदुकातेड़ सभी तरह के लोग थे …मनु का यह रेस्टोरेंट नाम के साथ काम में भी अलग सा था..
क्युकी उनके रेस्टोरेंट के नाम “ hell’s किचन “ के नाम के साथ स्टाफ का नाम devil’s रखा था मनु ने जिसको सभी के ड्रेस पैर साफ़ प्रिंट किया हुआ था ….जो अपने रेस्टोरेंट में काम करने के बाद आस पास के इलाके में भी काम करते थे एहि डेविल ड्रेस पहनकर जिसमे मनु ने सबसे पहले आस पास के रोड जहाँ भी घड़ा दिखा उसे भरवाने से लेकर आस पास घूमकर फेरी लगनेवाले को रात में फ्री खिलाना भी शामिल था …जिस पैर उसके पास का रेस्टोरेंट का मालिक बहुत हंसा था की पता नहीं कोण पागल है जिसने यह रेस्टोरेंट लिया है …पैर आस पास के खड़े को रोड पैर से हटने का फ़ायदा भी जल्द hi मिला रोड पैर जो गाढ़े होने से जैम लगता था हु ख़तम था …और डेविल टीम को सभी ने देखा था काम करते हुए …सो आस पास का हर इंसान मनु के रेस्टोरेंट में आने लगे थे ….और रात को फेरी वाले फ्री खाने के बदले दिन में हर तरह से “ Hell’s किचन “ का प्रमोशन पैम्फलेट बांटकर किया करते थे …जिससे उस आस पास के एरिया में उस रेस्टोरेंट का ाचा नाम हो चूका था .और जिसका स्टाफ और रेस्टोरेंट दोनों हर तरह से फायदे में चल रहा था …उस एरिया में बहुत सारा काम इन devil’s ने किया था और पब्लिक में भी यह रेस्टोरेंट अपने यूनिक नाम और वर्क के चलते दिन रात फेमस हो रहा था ….
और इनसब के पीछे था मनु का दिमाग जिसने हर चीज़ पैर ाचा काम किया था …समाज सेवा अपनी जगह हो रही थी …और रेस्टोरेंट अपनी जगह बिज़नेस में फेम हासिल कर रहा था …और वहां के devil’s भी अपने नाम और काम के चलते फेमस हो रहे थे …और इन सबके पीछे का दिमाग मनु का था ..इस डेविल टीम को मनु ने एक फॅमिली की तरह सपोर्ट किया था …हु मोस्टली रेस्टोरेंट के पैसे से कोई न कोई सोशल वर्क कर दिया करता था जिसके चलते ….उसकी इमेज वहां के लोगों में पॉजिटिव हो चली थी …अगर लड़का इलेक्शन में खड़ा होता तोह जीत जाता इसी से समझ जाओ आप सब…
मास्टर और गुरूजी के साथ मनु की फॅमिली भी खुश थी की मनु ने काम टाइम में बिना किसी और के हेल्प के बहुत कुछ आर्काइव किया था …
ऐसे hi मनु अपने रेस्टोरेंट को जा रहा था …की शबनम का कॉल आया उसने मनु को farm-house जो अब उसका परमानेंट घर था वहां बुलाया …मनु भी चला गया बिना यह जाने की आज सिकने को कुछ और भी मिल सकता है …
इसरार अपने कहे हुए बात के हिसाब से बहार चला गया था …शबनम सिर्फ अकेली थिग हर पैर उसने हल्का सा मेकअप किया हुआ था …
बेल्ल बजी उसने मनु को कीहोल से देखा मनु hi था उसने गेट ओपन किया और अंदर भुला लिया और गेट क्लोज कर दिया और मनु को लेकर सोफे पैर चलदी …जूस पिलाने के बाद जिसमे आज थोड़ा और तेज़ डोज़ था ….शबनम ने मनु को देखा मनु आज सुबह घर से सिर्फ एक पोलो ब्लू टी शर्ट और ब्लैक डेनिम जीन्स में निकला था उसे चहरे और बॉडी पैर दोनों काफी अचे जांच रहे थे …और उसका क्लैम नेचर देखकर शबनम भी उसे हसरत भरी नज़र से देख रही थी …..... :हिंट: