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रिकैप........
जहाँ मनु चैन से सो गया पैर राजिंदर को रात भर नींद नहीं आयी …सोच सोच के की कहीं अगर यह सब मनु को सुच में पता चल गया ..या अजय या सुमित्रा तोह घर में क्या इज़्ज़त रह जायगी उसकी …
या कहीं मनु को पता चल गया है ..यह सोचकर राजिंदर खुद को कोस रहा था ….पैर कोई और अभी खुश था ..उसके प्लान का अगला स्टेप अभी बाकी था ….....
अब आगे........
अगला दिन आया मनु सुबह जल्दी उठा और अजय के साथ उसे ट्रेनिंग पूरी की और जब हु वापस आया तोह घर में उसने देखा की सिर्फ उसकी मम्मी hi घर पैर थी …राजिंदर आज अपने काम पैर सुबह जल्दी चला गया था …शायद फेस नहीं करना चाहता था किसी को ..या जो भी वजह रही हो …सुमित्रा नाश्ता और लंच त्यार कर रही थी …
अजय ने पूछा भी की राजिंदर कहाँ है …तोह सुमित्रा ने कहा की हु तोह सुबह hi चले गए …
सुमित्रा से उसके बाद अजय ने कुछ नहीं kaha…who अपने कामो में लग gaya..nashta सुमित्रा ने लगाया टेबल पैर मनु और अजय दोनों नाश्ता करने लगे ….सुमित्रा ने भी उनके साथ hi नाश्ता किया … तीनो ने हलकी फुलकी बात की राजिंदर को लेकर कोई जीकर नहीं हुआ उसके बाद …अजय नाश्ता करने के बाद अपनी प्लेट लेकर किचन में रखने चला गया …
अब टेबल पैर सिर्फ सुमित्रा और मनु बचे हुए थे …अजय वहां से निकलकर टीवी देकने में बिजी हो गया …
मनु और सुमित्रा ने एक दूसरे को देखा …
सुमित्रा “ बीटा आज पहली बार तुम्हारे पापा इतनी जल्दी चले गए सब ठीक तोह है न ??”
मनु “ मम्मी सब ठीक है आप बस भरोसा रखो …”
सुमित्रा “ तुझे नहीं लगता की ऐसे तोह तुम्हारे पापा हमसे काटने लग जायेंगे ??आगे क्या होगा ”
मनु लम्बी साँस लेकर “ मम्मी ऐसा कुछ नहीं है अभी उनको उनके हाल पैर छोड़ दो ..क्युकी अभी यह जरूरी है …और वैसे भी उनको भी एहसास होना जरूरी है …की हु गलत हैं सो आप टेंशन फ्री रहो ..बाकी सब अपने आप ठीक हो जायेगा “
सुमित्रा “ पैर कब और कैसे ??“
मनु “ इसका जवाब सिर्फ इतना है की …वक़्त अपने एपनिया आप सब ठीक कर देगा ..आप बस भरोसा रखो वक़्त पैर …”
सुमित्रा मुस्कुराते हुए “ वक़्त पैर या तुम पैर मैं अचे से जानती हूँ की तुम कुछ न कुछ करोगे ताकि फॅमिली सेफ रहे …पैर ज़रा धयान से हु पापा हैं तुम्हारे ..”
मनु “ हाँ मुझे पता है की हु मेरे पापा है …बस यही एहसास उनको भी होना जरूरी है की फॅमिली के साथ होने का मतलब क्या है उनको पता चले …आप बस अपना ध्यान रखो …मुझे आप दोनों की चिंता है ..बाकी तोह सब ठीक है …”
सुमित्रा ने इस बात पैर अपनी चेयर से उठकर मनु को अपने सीने से लगा लिया …ख़ुशी से उसका माथा चुकार ..
सुमित्रा “ बीटा सॉरी की तुम्हे यह सब देखना पड़ा न चाहते हुए भी तुमको इसमें पड़ना पड़ा मैं नहीं चाहती थी की तुम दोनों भाई इसमें पदों इसीलिए तुम दोनों को नहीं बता रही थी …मुझे माफ़ करना …मैं सुच नहीं चाहती थी की अपने maa-baap की इनबातों में तुम दोनों पदों …”सुमित्रा के आंसू निकल आये ..
मनु सीने से निकल कर “ कैसी बात करती हो मम्मी हम एक परिवार हैं और परिवार का मतलब सिर्फ सुख का नहीं हर दुःख का भी रिश्ता होता है ..और क्या हुआ अगर मुझे पता चल गया …और वैसे भी आज नहीं तोह कल पता चलता hi …और तब क्या होता जब यह बात मुझे बहार किसी और से पता चलती आपने सोचा भी है की तब मुझे कैसा फील होता …अपने तोह कह दिया की अपने maa-baap की इन बातों में हमे नहीं पड़ना चाहिए …मैं भी समझता हूँ पैर आपने सोच भी एक बार तब क्या होता जब बात हमारे हाथ से निकल जाती …या पापा उसके चक्कर में हम सभी को छोड़ देते या फॅमिली से रिश्ता hi तोड़ लेते …सोचना जरूर एक बार “
सुमित्रा के पैरों टेल ज़मीन निकल चुकी थी ..उसने अब ध्यान दिया इस बात पैर की मनु क्या कहना चाहता है …उसने फील किया की राजिंदर कैसे कुछ दिनों से उसे और फॅमिली को इग्नोर कर रहा था …उसे मनु का मतलब समझ आ चूका था ..उसने एक बार सोचा सुच में अगर रजिनि के चक्कर में अगर कोई ऐसा वैसा फैसला ले लिया तब क्या होता ??? यह सोचकर hi उसके पसीने छूटने लगे ..
मनु ने जब देखा सुमित्रा सोच में गम है और उसके पसीने छूट रहे हैं तोह उसने सुमित्रा को चेयर पैर प्यार से बैठाया और पानी दिया पिने को ताकि सुमित्रा नार्मल हो सके …
सुमित्रा भी कुछ देर में नार्मल हो चुकी थी पैर उसके मंद में मनु की बात फंस चुकी थी …उसे अब मनु की बातों का मतलब समझ आ चूका था ..
मनु “ सॉरी मम्मी मेरे मतलब आपको परेशां करना नहीं था ..पैर आपने सोचा था की आप दोनों अगर परेशान हैं तोह उसमे हम दोनों भाई न पड़े तोह इसमें आपकी गलती नहीं है …यह तोह आपका प्यार है हमारे लिए …पैर पापा का यह कांड आज नहीं तोह कल हमारे सामने भी आता hi ..यह भी सुच है ..क्युकी इंसान ाचा करे या bura..ek न एक दिन उसके एक्शन का रेक्शन होता जरूर है ..सो यहाँ भी होता …मैं सिर्फ आप दोनों की भलाई चाहता हूँ …मेरा मतलब सिर्फ अपने परिवार को सेफ रखना है …क्युकी ऐसी मम्मी और कहाँ मिलेगी मुझे ..??” मनु ने सुमित्रा के गाल को चूमते हुए कहा ..
सुमित्रा भी खुश थी की उसका बीटा कैसे उसके और राजिंदर के लिए सोच रहा है…
सुमित्रा “ सुच में मैं बहुत लकी हूँ की तुम जैसा बीटा है मेरा ..जो हर हाल में हमारे साथ है ..”
मनु “ हमारे नहीं आपके साथ हूँ …क्युकी मुझे आपकी फिक्र पापा से बहुत ज्यादा है ..क्युकी पापा यहाँ गलत हैं ..सो मैं आपके साथ हूँ…”
सुमित्रा “ पैर तुम्हारे पापा का भी सोचो ज़रा “
मनु “ उनका और आपका दोनों का hi सोच रहा हूँ …क्युकी मुझे पुरे परिवार की चिंता है ..पैर यह झटका पापा के लिए जरूरी है अभी के लिए ताकि उनको भी परिवार की एहमियत पता चले ..आप ज्यादा मत सोचो वर्ण यह सोचो की आज रजिनि है कल कोई और होगी ..कितनो के पीछे हम भागते रहेंगे …बहार वळून से ज्यादा हमे अपनों पैर लगाम की जरूरत है …आप ज्यादा दिमाग न लगाओ ..और उनकी फ़िक्र भी मुझपर छोड़ दो ..मैं एपनिया आप देख लूंगा …और हाँ जब तक खुद पापा को एहसास न हो जाये आप इसके बिच में ना पड़ा और न hi कमज़ोर पड़ना वर्ण यह कमज़ोरी hi पूरा परिवार तबाह कर देगी ..क्युकी आज तोह सिर्फ रजिनि है आगे शायद कोई और होगी …सो बे रेडी तो फाइट ..”
सुमित्रा “ हाँ मेरे लाल जानती हूँ तुम सब ठीक कर डोज और भरोसा भी है तुम पैर ..वर्ण शायद hi कोई माँ अपने बेटे को यह सब बताने कहे …तुम नहीं जानते मैं कैसे खुद को सभाला है …”
मनु “ अब और नहीं …और आगे से और नहीं सभालना खुद को क्युकी हम हैं न आपको सँभालने के लिए …और आगे से कुछ भी लगे तोह बताना ज़रूर क्युकी हम एक फॅमिली हैं ..और फॅमिली में सब हर हाल में एक दूसरे का साथ देते हैं ..समझी “
सुमित्रा मुस्कुराते हुए “ हाँ बीटा समझ गयी ..अचे से समझ गयी ..अब मुझ बूढी को कुछ टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है ..मेरा शेर बीटा है न तोह मैं क्यों सोचूं ..लव ु बीटा ”
मनु “ अब बूढी कहाँ से बिच में आगयी ..अरे आप तोह जवान हो भूल गयी ..उस दिन ice-cream पारलर में कैसे जब आप मेरे गले लगी हुई थी ..तोह सब देख रहे थे ..अरे आप तोह कितनी सूंदर हो कोई मुझसे पूछे मैं बताऊंगा की मेरी मम्मी दुनिआ की सबसे सुन्दर लेडी hai…I लव ु मम्मी..” मनु ने सुमित्रा को अपने सीने से लगा लिया … सुमित्रा का मूड भी अब हल्का हो चूका था ..क्युकी उसे सुबह से राजिंदर की चिंता हो रही थी …पैर मनु ने उसके दिमाग में उठ रहे सवलून को शांत कर दिया था ..
मनु सीने में लगे हुए ..” एक वडा करो मम्मी आगे से आप मुझे कोई बात नहीं chupaogi..verna मैं आपसे बात नहीं करूँगा ..” मनु ने झूंठे गुस्से से कहा ..सुमित्रा भी समझ रही थी उसके झूठे गुस्से को ..
सुमित्रा “ ok वडा करती हूँ आगे से जो भी होगा तुमको पहले बता दूंगी ok …बॉस “ बॉस सुनकर दोनों माँ बेटे गले लगे हुए एक साथ हंसने लगे ..
की तभी अजय किसी काम से बहार आया और दोनों को हँसते हुए और गले लगे हुए देखकर बोलै ..
अजय “ थिस इस नॉट फेयर मम्मी ..यह सही नहीं है ..भैया hi अकेले आपके बेटे नहीं हैं मैं भी हूँ न आपका बीटा तोह मुझे क्यों नहीं गले लगती हो ..”
सुमित्रा और मनु इस बात पैर एक साथ हंस पड़े और सुमित्रा ने एक तरफ का हाथ खोलकर अजय को भी बुला लिया ..और अपने साथ मिला लिया …अब तीनो माँ बेटे एक साथ सीने से लगे हुए हंस रहे थे….
उधर रजिनि अपने दिमाग में सोच रही थी की जो बात किसी को पता नहीं …उसके बारे में किसी को पता लगा कैसे ..मतलब उस लिफाफे वाले को कैसे पता की रजिनि …यह सब कर रही है..
रजिनि तेरी चलती खोपड़ी की औरत जो करती थी ..उसका पता अनिल को भी नहीं लगने देती थी की कर क्या रही है ..अनिल बेशक बहार मर्द था …गार्ड का काम करने वाला अनिल हत्ता कट्टा था ..पैर उसके घर की मर्द रजिनि थी ..क्युकी अनिल की उसके सामने एक नहीं चलती थी ..रजिनि तीन बार माँ भी ज़बरदस्ती बानी थी …पहली बार जब सोनम हुई तोह hi अनिल ने कहा की अब एक बेटी hi बहुत है ..पैर रजिनि की बेटे की चाहत के आगे अनिल की एक न चली …रजिनि ने अनिल को कोई ऐसा मौका नहीं दिया था ..जिसको लेकर अनिल बहस कर सके …तोह अनिल भी उससे ज्यादा दिमाग और ज़बान नहीं लड़ता था …
पैर रजिनि आज सोच में गम थी ..अब रजिनि के दिमाग में क्या चल रहा था यह तोह सिर्फ रजिनि जानती thi…per आसानी से मान जाये हु रजिनि कहाँ …
रजिनि कुछ सोचते हुए मुस्कुरा रही थी …उसके दिमाग में कुछ चल तोह रहा था उसकी शैतानी मुस्कराहट का मतलब कुछ न कुछ तोह था ..अब क्यात है इसका मतलब यह तोह किस्मत hi जाने ..
खैर उधर सुमित्रा अपने खाना बनाना के बाद ख़ुशी से अपने काम पैर चली गयी ..क्युकी अब राजिंदर और उसके बिच की बात में मनु उसके साथ था …और जैसे मनु ने जैचंद का राशन बंद किया था ..बचपन में उसके दिमाग को देखकर सुमित्रा भी अब टेंशन फ्री थी …सुमित्रा सुच में मनु को अपने साथ फील कर रही थी …और मनु का उसकी केयर करना उसे ाचा लग रहा था ..राजिंदर को लेकर अब उसका मंद भी क्लियर था …उसे मनु पैर सुच में प्राउड वाली फीलिंग आ रही थी ..
हु अपने काम पैर भी खुश रही आज …उधर माँ के जाने के कुछ देर बाद अजय भी निकल गया ..स्विमिंग के लिए स्पोर्ट्स क्लब …उसे आजकल नया बहुत सवार था स्विमिंग सिखने का ..जब मनु ने कहा तोह अजय का जवाब था “ भैया स्विमिंग सीखा जरूरी है क्युकी जब बचपन में अगर उस टाइम आप नहीं होते तोह मेरा क्या होता “
मनु ने इस पैर अजय को अपने सीने से लगा लिया ..और कहा “ तू कभी भी मुझसे अलग नहीं है ..जहाँ तू वहां तेरा भाई हमेशा तेरे साथ खड़ा होगा आज तोह कह दिया आगे ऐसा सोचना भी नहीं की तुझे कुछ हो jaye…agar जरूरत पड़ी तोह …बड़ी बातें करना ाचा नहीं लगता पैर इतना समझ ले …जब जरूरत होगी वहां तेरे कहने से पहले तेरे सामने तेरे साथ मिलूंगा …क्युकी तू दुनिआ में सबसे कीमती है मेरे लिए …जब तू छोटा सा स्कूल में पॉटी कर देता था तब भी ..मैं तेरे साथ hi होता था ..अब भी तेरे साथ हूँ …चाहे तू कितना भी बड़ा क्यों न हो जाये पैर मेरे लिए तू हमेशा मेरा छोटा भाई रहेगा …हमशा “
अजय भी इस बात पैर चुपके से कुछ आंसू बहा देता और जल्दी से पंच भी देता की भैया को पता न चल जाये …हु अचे से जनता था की उसका भाई उसे लेकर कितना प्रोटेक्टिव है..
अजय अपने क्लब जा चूका था और क्युकी रजिनि और राजिंदर शाम को मिला करते थे तोह मनु ने सोच पुरे दिन क्या किया जाये सो ..सोचा चलो ऑफिस hi चला जाये ..पैर उसके त्यार होते hi उनसे बाइक स्टार्ट की तुरंत कॉल आगया उसके मोबाइल पैर ..
मनु ने नंबर देखा “ चला गया ऑफिस अब ड्यूटी hi भरनी होगी पैर कहीं और “ खुद से बोलै और मुस्कुराते हुए कॉल पिक किया …
कॉल शबनम का था …उसने मनु को बुलाने के लिए कॉल किया था ..मनु भी चल पड़ा ..शबनम के घर ..
कुछ देर में hi मनु उसके सामने था …
शबनम ने आज लाल रंग का सूट पहना हुआ था मांग में सिन्दूर और गले में मगलसूत्र देखकर सुहागन महसूस हो रही थी shabnam..manu की सुहागन ..उसका गोरा रंग और लाल रंग का सूट दोनों की चमक किसी का भी दिल घायल कर दे …मनु भी इंसान hi था ..उसका हाल भी शबनम को देखकर मचल उठा ..
पैर शबनम ने आगे आकर मनु के पेअर छुए …मनु ने उसे पेअर चुने से रोका..
मनु “ कितनी बार कहा है आप मुझसे बड़ी हो यह मेरे साथ मत किया करो ाचा नहीं लगता मुझे किआ आप मेरे पेअर छुओ ..”
शबनम “ हाँ जानती हूँ ..पैर मैं अब आपकी बीवी हूँ ..और इस रिश्ते से आप मुझसे बड़े हैं और आपके पेअर चुना मेरा हक़ है …आप प्लीज मुझे मेरे इस हक़ से महरूम न करो ..”
मनु “ बस करो आपसे बहस भी तोह नहीं कर सकता क्युकी आपके आगे तोह मेरी चलने से रही ..क्युकी आप थेइर मेरी गुरु …ाचा किस लिए बुलाया मुझे आपने ?”
शबनम ने मनु को प्यार से देखा दुनिआ भर का प्यार उसकी आँखों में सिमट आया था …मनु के लिए .. मनु के सीने से लग गयी शबनम ..
शबनम शिकयत भरे लहज़े में “ लगता है आपको मेरी फिक्र hi नहीं …कितने दिन हो गए आपको मुझसे मिले हुए ..देखना तोह दूर एक बार कॉल भी नहीं किया ..अपने लगता हैं बीवी नहीं कोई बोझ हूँ आप पैर …मैं जानती हूँ यह रिश्ता अचानक से जो हमारे बिच में बना उसे सबके सामने आप नहीं कहना चाहते पैर चाहे जो भी हो हूँ तोह मैं आपकी बीवी ..जानती हूँ ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकती ..पैर इतना हक़ तोह मेरा मेरे पति पैर बनता है की कुछ पल अपने पति के पहलू में गुज़रूँ ..कहीं ज्यादा तोह नहीं मांग रही हूँ मैं ..”शबनम की आँखों में ांसो थे ..मनु ने भी देखा तोह उसके आंसू पूछे अपने हाथों से और उसके माथे को चुम लिया ..
मनु “ ऐसा नहीं है शबनम ..तुम मेरी बीवी हो …और बीवी मतलब बीवी …सिर्फ बीवी ..ऐसा नहीं है की मुझे इस रिश्ते से कोई शर्म है या तुम्हारे पहले से शादी शुदा होने से कोई परहेज़ है ..न hi मुझे किसी और कहने की परवाह है ..जब रिश्ता बना है तोह ..रिश्ता निभाना भी होगा ..उसने अकेले साड़ी जिम्मेवारी तुम्हारी नहीं हो सकती ..मेरा हिस्सा भी उतना hi है जितना तुम्हारा है ..पैर क्या करूँ ..थोड़ा सा किसी और वजह से बिजी था ..सो खुद अपने लिए भी टाइम नहीं निकल पाया ..जनता हूँ तुम समझदार हो …पैर यकीं मनो मैं भी तुमको बोझ नहीं मंटा हूँ बस थोड़ा सा परेशां था कुछ दिनों से …”
शबनम ने सुना की मनु भी उसे चाहता है तोह उसका मुझाया हुआ चेहरा खिल उठा …उसे दुनिआ की सबसे बड़ी ख़ुशी मिल गयी ..उसने मनु के होटों को अचानक से ख़ुशी के मारे चुम लिया …मनु ने भी इस अचानक से हुए किश में भी उसका साथ दिया ..
शबनम “ ी लव ु ..आपने आज मुझे दुनिआ की सबसे बड़ी ख़ुशी दे दी है ..आप जानते नहीं की मैं आज कितनी खुश हूँ अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए ..अब ने कह दिया इतना मेरे लिए काफी है ..”
मनु “ हाँ पैर एक बात सोचता हंट ओह बुरा लगता है ..??”
शबनम नार्मल होते हुए “ किस बात का ??”
मनु “ यही की क्या हम दोनों तुम्हारे हस्बैंड इसरार के साथ सही कर रहे हैं ???”
शबनम के अंडर इसरार का नाम सुनकर लावा फूटने लगा ..” देखिये ..आप मेरे पति हैं …मैं आपकी पत्नी हूँ ..इसरार से मुझे कोई लेना देना नहीं है ..वह चाहे जिए या मरे मुझे उससे कोई लेना देना nahi…aap मुझे अपनाओ या छोड़ दो मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है ..आपसे हाथ जोड़कर विनती है …आप इसरार का नाम लेकर मुझे जलील न करो “
मनु ने शबनम का मूड बिगड़ता हुआ देखा तोह उसे खचकर अपनी गॉड में बैठा लिया ..शबनम का चेहरा दोनों हाथों से थामकर उसने उसके लाल लिपस्टिक को अपने होटों से भिड़ा लिया …और उसके होटों का रास पिने लगा …शबनम अचानक से हुए इस हमले के लिए त्यार नहीं थी ..उसका मूड ऑफ था ..उसके हाथ body-reaction के चलते ..मनु को ओपपोसे करने लगे पैर जैसे hi उसे मनु के होठों का एहसास हुआ …उसकी आँखें अपने आप बंद होती चली गयी ..
और कब यह किश स्मूच में बदल गया ..दोनों को पता नहीं चला ..पिछले 15 मिनट से दोनों लगातार एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे …अब शबनम की साँसे भरी हो चली थी …उसे सांस लेने में दिक्कत हो चली थी ..उसकी ढूढ़ अब ठोस होने लगे थे …उसकी धड़कने तेज़ हो चली थी ..
मनु ने महसूस किया की शबनम को सांस लेने में दिक्कत हो रही है ..सो उसने hi स्मूच को तोडा ..
शबनम हैरत तेज़ सांसें लिए मनु की गॉड में बैठी थी …उसकी पूरी लिपस्टिक मनु खा चूका था ..जो थोड़ी बची थी हु दोनों के होटों पैर फ़ैल चुकी थी …शबनम ने जब मनु के चेहरे पैर खुद की लाल लिपस्टिक देखि तोह शर्मा गयी ..वहीँ मनु भी शबनम को शरमाते हुए देखकर अब खुश था ..की शबनम अब ठीक है ..
मनु ” होटों की पायस तोह भुझ गयी पैर आज बड़ा दिल है ..अपनी बीवी के हाथ का कुछ खाने का क्या हमारी …बीवी हमारे लिए एक कप चाय बना सकती है ??”
शबनम झूंठ में मन ऊके सीने में मरते हुए “ बड़े आये चाय वाले ..अरे आपकी बीवी इतनी बेकार भी नहीं है की सिर्फ अपने पति को चाय से खुश कर दूँ आप रुको मैं अभी गयी और अभी आयी …आज आप बिना खाये नहीं जाओगे यहाँ से कह देती हूँ”
मनु शबनम को देखते हुए “ हाँ मैं भी खाये बिना नहीं जाऊंगा ..”
शबनम मनु की बातों का मतलब समझ gayi..per अभी हु किचन में चली गयी ..खाना बनाना ..शबनम मैं से जुट गयी वहां ..उसने एक साथ कई चीज़ें बनाई अपने पति के लिए..
मनु किचन में नहीं गया ..अभी उसके दिमाग में रजिनि आगे क्या करेगी यह ख्याल आ रहा था ..वह उसी सोच में गम था ..टाइम बिता और शबनम का खाना रेडी था ..पैर मनु अभी तक अपने सोच में गम था .. शबनम ने आवाज़ लगाई खाने के लिए मनु ने टाइम देखा तोह लंच का टाइम हो चूका था …मतलब पीछे घंटा भर से मनु उसके बारे में सोच रहा था …उसने अपने दिमाग को झटका दिया और हाथ मुँह धोकर टेबल पैर आ गया ..
शबनम ने गज़ब का कमल किया था ..उसने आज कई सब्ज़ी एक साथ बनाई थी ..matar-paneer , आलू गोभी , और चपटी साथ में खीरे का रायता , और पुलाव ,,,और जैसे hi शबनम ने पुलाव का ढक्कन हटाया तोह जो भीनी भीनी खुशबू उठी मनु की न चाहते हुए भी और भूख बढ़ने लगी …शबनम मुस्कुराते हुए मनु को देख रही थी …जैसे मनु की आखों में उसे समझ आ रहा था ..की मनु को उसकी म्हणत से बनाया खाना पसंद आया है ..
मनु ने भी शबनम का हाथ चुम लिया …और कहा “सुच में इतनी जल्दी बना लिया तुमने इतना सब??”
शबनम ने कुछ नहीं कहा हु अपने हाथों से मनु को प्लेट में खाना सर्वे करने लगी …जैसे hi खाना सर्वे हुआ …मनु ने खींच कर शबनम को अपने गॉड में बैठा लिया ..
शबनम “ अरे पहले खाना तोह खा लीजिये न मैं कहीं भागी तोह नहीं जा रही हूँ न …”
मनु “ तुमको क्या लगता है क्यों गॉड में बैठाया है तुम्हे …चलो मुँह खोलो “
मनु ने पहला निवाला शबनम को खुद अपने हाथों से खिलाया ..शबनम ने मुँह खोला तोह उसके आंसू निकल आये थे ..ऐसे पूरी लाइफ में उसकी चिंता किसी ने नहीं किट hi ..खुद अपने घर में भी जब तक हु रही थी …वहां के रूल के हिसाब से पहले मर्द खाना कहते थे .उसके बाद औरते खाना कहती थी ..आजतक इसरार ने भी उसे इस तरह से कभी खाने को नहीं पूछा था ..पैर मनु तोह पहला निवाला hi उसे अपने गॉड में बैठकर खिला रहा था ….
मनु ने देखा शबनम रो रही है तोह उसने उसके आंसू पि लिए “ बहुत हुआ इतना ाचा खाना बनाया ..खुद अपने हाथ से खिला रहा हूँ ..पैर तुमको रोने की पड़ी है …मैं नहीं कहूंगा की रोना मत क्युकी आंसू बड़े बेवफा होते हैं ..कब ख़ुशी में कब गम में निकल आते हैं किसी को नहीं पता ..पैर इतना जरूर कहूंगा ..की मेरी कोशिश यही रहेगी की अगर तुम्हारी आँख में पानी आये भी तोह सिर्फ खुशियों के नाम पैर …अब रोना बंद करो और खाना खाओ ..”
शबनम को मनु ने खुद अपने हाटों से खिलाया ..और शबनम भी ख़ुशी से खाने लगी …मनु के हातून …शबनम ने उसके बाद खुद अपने हाथों में प्लेट ले ली और मनु को उसकी गॉड में बैठे हुए hi खाना खिलने लगी …दोनों का खाना ख़तम हुआ …
तोह शबनम सब समेटने लगी …और किचन से एक कटोरी लेकर मनु के सामने आगयी …उसमे खीर थी ..
मनु ने उसे भी शबनम को गॉड में लेकर खाया …और उसे भी खिलाया …
शबनम खाना का सामान समेटने लगी तोह मनु ने उसे खचकर गॉड में बैठा लिया ..
मनु “ अब “
शबनम “ अब क्या ??”
मनु “ सोच लो …शायद भूख अभी भी हो ..???”
शबनम मनु का मतलब समझ रही थी ..”कैसी भूख…”
मनु “ ाचा ठीक है तोह मैं चलूँ क्युकी मेरी बीवी को तोह भूख hi नहीं है …” मनु ने उठने की कोशिश करते हुए कहा ..
पैर शबनम ने उसे उठने नहीं दिया न खुद उसकी गॉड से उतरी …ुटला उसके गले से लिपट गयी …ताकि मनु को रोक सके ..
पैर मनु तेरा अपना body-builder उसे शबनम का वजन क्या पता चलता …उसने शबनम को गले में लटका कर hi उठा लिया बस शबनम के गांड के निचे हाथ लगा लिए की शबनम कहीं गिर न जाये …
शबनम को लेकर हु मैं गेट की तरफ चलने लगा ..तोह शबनम को भी लगा की मनु सुच में जा रहा है ..
शबनम “ प्लीज रुक जाइये न हाँ मुझे भूख है ..मैं बीवी हूँ आपकी मुझपर आपका हक़ है ..पैर ऐसे तोह न जेईएन मुझे आपका ऐसे जाना बर्दास्त नहीं होगा ..कह देती हूँ …” शबनम ने शिकायत भरे लहज़े में कहा ..
मनु मुस्कराते हुए शबनम की आँखों में देखने लगा …शबनम की आँखों में प्यार उसे भी दिख रहा था ..पैर छेड़ने के लिए मनु उसे अभी भी मैं गेट की तरफ उठए लिए जा रहा था …
डर कर शबनम ने आँखें बंद कर ली …पैर मनु का चलना उसे महसूस हो रहा था …
थोड़ी देर में शबनम को लगा की मनु ने उसे कहीं बैठा दिया था ..पैर शबनम अभी तक मनु के जाने से दरी हुई थी …उसे कुछ आवाज़ें आयी तोह …उसने देखा हु अपने बैडरूम में अपने बीएड पैर बैठी है ..
और सामने मनु नंगा है …उसका हौलबी लोढ़ा हवा में किसी लोहे के रोड जैसे तना हुआ खड़ा था …मनु का मज़बूत जिस्म उसके फलादि बाज़ो मोठे मोठे तगड़े डोले …उसका 10 पैक से भरा पेट …और छुड़ा मज़बूत सीना और तगड़े टाइट ठोस जंघे देखकर शबनम …का जिस्म भी आग में झुलसने लगा … सामने मनु का ताज़ा साफ़ गोरा लोढ़ा देखकर शबनम के मुँह में पानी आने लगा ..पैर औरत चाहे कितनी भी बड़ी हो या छोटी उम्र की हो हाय और शर्म उसका घेणा hi है ..शबनम के जिस्म की आग उसे जला रही थी ..पैर मुँह से उसने मनु को अभी तक कुछ नहीं कहा था …पहले भले hi उसने मनु को रोकने के लिए कह दिया था पैर अब जब मनु हवा तने हुए अपने लोडे के साथ नंगा था तोह शबनम का मुँह और छूट एक साथ लार टपकने लगा था …पैर नज़रें जुख़ी हुई थी …
मनु आगे बिस्तर की और बढ़ा …शबनम समझ गयी आगे क्या होगा ….उसे भी उसका जिस्म अब तड़पा रहा था …मनु उसके पास आ चूका था ..शबनम के फेस के निचे एक ऊँगली टीकाकार उसके फेस को उप्पेर अपने आँखों के सामने किया ..
मनु “ क्या हुआ मेरी बीवी शर्मा रही है ..एक बार देखो ज़रा मेरी आँखों में {शबनम ने देखा } जो आगे करना छह रहा हूँ उसकी इज़ाज़त है क्या ???”
शबनम मनु के नंगे बदन से लिपट गयी “ आप बार बार ऐसे क्यों पूछते हैं मैं आपकी बीवी हूँ कोई गैर नहीं हक़ है आपका मुझपे जो चाहे करलो ..पैर ऐसे पूछा मत करो …अह्ह्ह!” मनु ने शबनम की गांड को मुठी में भींच लिया था …
मनु “ जनता हूँ की मेरा हक़ है …पैर इसमें तुम्हारी मर्ज़ी भी उतनी जरूरी है जितनी मेरी …इसलिए पूछता हूँ तुमसे ….और वैसे भी आज पूछने की ख़ास वजह है …”
शबनम ने हैरत से देखा मनु को …मनु उसकी गांड को सेहला रहा था …उसे समझ आ गया की आज उसकी गांड का उद्घाटन पक्का है …मनु का हलबी लोढ़ा अपने गांड में जाते हुए महसूस करके hi शबनम के जिस्म में एक सनसनी फ़ैल चुकी थी …
उसने भी एक बार सर हिला दिया मतलब मनु समझ गया …मनु आगे बढ़ा और शबनम के जिस्म से उसने ek-ek कपडे को अलग कर दिया …मनु यह देखकर हैरत में था की शबनम ने आज न ब्रा पहनी थी और न hi पंतय …मतलब सिर्फ सूट hi पहना था शबनम ने …
अब शबनम बिलकुल नंगी थी …मनु की तरह …शबनम और मनु अब बीएड पैर लेते हुए थे ….मनु का लोढ़ा उसके नाभि से उप्पेर तना हुआ था …शबनम के भी नाभि के उप्पेर हु उसे महसूस हो रहा था …
पैर मनु और शबनम के स्मूच के साथ लोडे और छूट का रगड़ना अभी शुरू था …मतलब दोनों हलके हलके एक दूसरे के जिस्मो को आपस में घिस रहे थे …
मनु की चीब शबनम के मुँह में थी …और उसके हाथ अचे से शबनम की चुकी मसल रहे थे …मनु अपने हाथों से बिना रेहम किये चुकी मसल रहा था …शबनम भी एक तरफ चुकी एक तरफ स्मूच और एक तरफ जिस्म की घिसाई का मज़ा ले रही थी …उसका जिस्म तप रहा था ….
उसके हाथ मनु के कमर को सेहला रहे थे …इतना तगड़ा मर्द उसके उप्पेर था पैर शबनम और मनु अपने अपने जिस्मो की देहक में एक दूसरे को मस्ती से घिस रहे थे …की अचानक से शबनम इस गर्मी के आगे हार गयी … तीन तरफ का माज़ा उसकी छूट से पानी निकलने का सबब बन चूका था …
शबनम के जिस्म ने अचानक झटके खाये तोह मनु भी रुक चूका था …उसने आराम से शबनम को ओर्गास्म का मज़ा लेने दिया …कुछ सेकंड में hi शबनम आसमान से ज़मीं पैर आ चुकी थी …
बैडरूम के बहार आज कई दिन बाद इसरार काम से जल्दी लौट चूका था …भूक के मारे उसका हाल बुरा था …बहार बाइक देखकर उसे समझ आ चूका था शबनम और मनु साथ में होंगे ..पैर करता क्या खाली पेट इंसान को दुनिआ की सबसे सुन्दर लड़की भी अछि नहीं लगती …सो सिद्ध गया किचन की तरफ ..वहां उसने देखा आज तोह खाने में शबनम ने मज़े दर खाना बनाया है …
चाहे शबनम उसे अपने पास न आने देती हो पैर खाना और सारा काम अभी भी इसरार के और शबनम के जिम्मे hi था ….खाना शबनम बनती तोह बहार का काम इसरार देखता …इस आप एक बिना कही अंडरस्टैंडिंग कह सकते हैं … इसरार ने खाना देखा तोह एक प्लेट में लिया और तेज़ी से खाने लगा …कुछ मिनटों में इसरार का पेट भर चूका था …वहां उसने खीर देखि …तोह हु एक कटोरी में कहते हुए …उप्पेर वाले रूम में जाने लगा …
की बैडरूम का गेट ओपन था …उसमे से शबनम की सिसकियाँ उसे सुनाई दी ….उसका दिमाग उसे उप्पेर जाने को कह रहा था …पैर उसके पेअर खुद बा खुद गेट की आगे आ चुके थे …जहाँ मनु शबनम को ओर्गास्म के मज़े लेते हुए देख रहा था ..
अब शबनम नार्मल हो चुकी थी ….मनु ने जब उसे नार्मल होते देखा तोह उसके हाथों में अपना टाइट लोढ़ा थमा दिया …शबनम उसे थामे हलके से उसकी मस्सगे करने लगी ….मनु शबनम के चुकी को एक हाथ से और दूसरे से उसकी छूट की लकीर को सहलाने लगा …शबनम भी थोड़ी hi सही फिर से गरम होने लगी …
बहार इसरार ने जब शबनम के हाथों में मनु का तगड़ा हलबी लोढ़ा देखा तोह उसकी गंडपंती भी जाग गयी …इसरार की गांड में खुजली उठने लगी ..उसने देखा मनु का लोढ़ा कितना टाइट है तोह खीर को खाना छोड़कर उसने इधर उधर देखा …की कुछ मिल जाये ..
शबनम की छूट से निकले पानी की वजह से मनु की उँगलियाँ पूरी लथपथ हो चुकी थी ….पैर मेहनती मनु लगा हुआ था छूट को घुसने में ..
शबनम भी कभी जोर से पकड़ कर मनु का लोढ़ा दबा देती तोह कभी उसकी खाल पूरी पीछे करके सुपडे को निकाल देती …फिर अचानक से बंद कर देती …मनु को ऐसा करने से दर्द होता …पैर ऐसे में उसे यह दर्द भी मज़्ज़ा दे रहा था …
उधर मनु का लाल सुर्ख सूपड़ा देखकर इसरार के मुह्ह से लार पानी के जैसे टपकने लगी थी ..
शबनम से अब कण्ट्रोल करना मुश्किल था ..उसने मनु को रोक कर उसके कान में कहा ..” जानू अब सहा नहीं जाता अब दाल दो न “
मनु ने भी उसकी बात को समझा क्युकी अब उसका लोढ़ा भी फूलों टाइट हुआ पड़ा था …
मनु अब शबनम के उप्पेर थोड़ा सा उप्पेर आ चुका था …थोड़ा सा उप्पेर मतलब हाइट का डिफरेंस सही हो और लोडे और छूट आमने और सामने सही से लड़ाई कर सकें ..
मनु लोढ़ा लिए अभी भी शबनम के उप्पेर था ..उसने लोढ़ा पेलने की जल्दी अभी तक नहीं की …उसने उप्पेर आकर शबनम को देखा और इशारा किया ..
शबनम भी उसके इशारे को समझ गयी उसने खुद से लोढ़ा अपनी छूट के सही छेद पैर टिका दिया …
और मनु को ढाका लगाने का इशारा किया ..
मनु ने एक ज़ोरदार झटका दिया और लोयडा छूट के गीले होने की वजह से संसंता हुआ आधे से काम घुस चूका था …शबनम भी हलके से दर्द के साथ मनु को और अंदर आने को कह रही थी …मनु शबनम के उप्पेर चढ़ा हुआ ज़ोर से झटका देता है ..और इस बार पूरा लोढ़ा एक बार में उतार देता है शबनम की छूट में …
बहार खड़ा इसरार ऐसे सन को देखकर बेचैन हो उठा था …उसकी गांड की खुजली उसके सोचने की ताकत ख़तम कर चुकी थी ..उसे पहले से मनु का गोरा हलबी लोढ़ा पसंद था ..आज दूसरी बार अपनी hi बेगम को मनु से चुड़ते हुए देख रहा था …हु पैर छूट से ज्यादा लैंड उसके दिमाग में चाय हुआ था …इसरार ने देखा तोह पाया की पहले वाला क्रिकेट बात बैडरूम के गेट के अंडर hi साइड में रखा हुआ है …उसने एक सेकंड की देर न करते हुए उस बात को अपने हाथ में लिया …और अपनी पंत निचे करके सिद्ध गांड पे लगा लिया …बिना यह सोचे की लकड़ी का बात जिसकी हठी पैर रबर की गृप है हु बिना चिकनाई के उसके गांड में जाएगी कैसे …
अंडर शबनम की छूट में जैसे hi मनु ने एक बार में hi लोढ़ा अंदर उत्तार दिया …उसके मुँह से अचानक हिचकी निकली हूखखक्क! दर्द तोह हुआ उसे पर पहली चुदाई जितना नहीं …
मनु ने उसके बाद हलके से धक्के लगाने शुरू किये …शबनम को धीरे मज़ा कहाँ आता ..
शबनम “ अहहहह! थोड़ा तेज़्ज़ …….अह्ह्ह्ह!!!”
मनु ने ढके और तेज़ कर दिए ..
शबनम की सिसकी ो तेज़ निकलने लगी …आहहह!!! और तेज़्ज़ ….”
मनु की स्पीड बाद रही थी …
बहार इसरार भी सूखा बात की हठी गांड में लेने में लगा हुआ था …अंडर से शबनम की सिसकी सुनकर और मनु के तेज़ झटके देखकर उसका हाल बुरा हो चला था …
उसने इधर उधर देखा तोह कुछ नज़र नहीं आया …तोह जो बची हुई खीर थी ठंडी फ्रिज की उसी को इसरार ने फटाफट बात की हठी पैर माला और अपनी गांड में सरका लिया ..और गीली खीर से लथपथ हठी को गांड में उप्पेर निचे करने लगा …
अंडर शबनम का हाल मज़ेदार था ….उसका जिस्म मनु के निचे होते हुए भी उसका जिस्म कमान जैसे तन चूका था …उसकी छूट पैर मनु का लोढ़ा अंदर जाते हुए मनु की जंघे शबनम की जांघों से टकरा कर पट्ट!!!
पाटट! की आवाज़ पैदा कर रही थी …पैर इसमें छूट में लोढ़ा पूरी तरह से नहीं जा प् रहा था मनु को मज़्ज़ा नहीं आ रहा था …पैर शबनम तोह मस्ती में मस्त थी ….मनु ने अब शबनम की जंघे थम के उप्पेर कर लेता है …उसके पेअर खचकर अपने कंधे पैर रख लेता है …और अब मनु का लोढ़ा शबनम की छूट में और अंडर उसकी छूट की जड़ तक जाने लगा था ….
उधर बहार ठप्प्प!!! ठप्प्प!!!! की आवाज़ें सुनकर इसरार का हाल बुरा हो चूका था ..उसके हाथों से उसकी गांड में बात की हठी ..और तेज़ी से जाने लगी थी …उसकी गांड में अब रबर चुबने लगी थी …पैर अंदर लाइव होती उसकी बेगम की चुदाई …उसकी गर्मी बढ़ा रही थी …सामने मनु जैसा तगड़ा इंसान कंधे पैर शबनम के पेअर टंगे हुए तेज़ी से चुदाई करने में लगा हुआ था …
मनु के झटके अब तूफानी रफ़्तार से बाद रहे थे …शबनम भी दो बार झाड़ चुकी थी …और तीसरी बार झड़ने की तयारी में थी …और तेज़ झटको के वजह से और छूट के पानी में आते जाते लोडे से झाग निकलने लगा था …
सफ़ेद झाग सा निकल रहा था ….शबनम झड़ी तोह मनु नहीं रुका ….क्युकी उसका रुकना मुश्किल था …शबनम का हाल अब बेहाल था …क्युकी तीसरी बार झाड़ रही थी शबनम …मनु ने अब छूट से लोढ़ा निकल कर शबनम के गांड के निचे एक ताखिया लगा दिया और गीला लोढ़ा शबनम के गांड के छेद पैर लगा दिया …शबनम को देखा उसके बाद …
शबनम ने भी मनु को रुकने को नहीं कहा …उसके मुँह से सिर्फ इतना निकल “ थोड़ा आराम से करना ..बस “
मनु ने भी इशारे से उसे कहा की हु धयान रकेहगा …मनु ने हल्का सा पुश किया …शबनम की गांड में लोडे का सूपड़ा चला गया …शबनम को हल्का सा दर्द हुआ …पैर उसके मुँह से आवाज़ नहीं निकली …
मनु ने एक झटका दिया और आहे लोढ़ा शबनम की गांड में जा चूका था …शबनम को दर्द हुआ …पैर लोडे के गीले होने के चलते ज्यादा नहीं …कुवारी जरूर थी उसकी गांड पैर शबनम पिछले कुछ दिनों से गांड में अनल प्लग लगाए गांड को खोल रही थी …ताकि मनु का गांड मरने की विश को पूरा कर सके ..
मनु ने देखा शबनम को दर्द नहीं हुआ …तोह मनु ने अगले झटके में पूरा जड़ तक लोढ़ा गांड में घुसा दिया …शबनम को अब बेहिसाब दर्द हुआ क्युकी बट प्लग की उतनी लम्बाई नहीं थी जितना मनु का लोढ़ा था ..
शबनम की गांड से खून निकल आया था ..क्युकी शबनम को दर्द हो रहा था और गांड में लोढ़ा फंसा हुआ था सो दोनों इस बात से अनजान थे …
शबनम ने दर्द के बाद भी मनु को देखा और उसके गाल पैर हाथ रखकर कहा ..”आज मेरी गांड का आपका सपना भी पूरा हुआ मैं बहुत खुश हूँ की आपका यह सपना मैं पूरा कर पायी …हाँ दर्द है ..पैर हैरान मत होना क्युकी पिछले दिनों से आपके सपने के लिए मैं कोशिशों में लगी हुई थी ..सो काम से काम आपके लिए कुछ तोह कुंवारा मैंने बचा रखा था …एन्जॉय माय लव …लव ु जानू “
मनु ने कुछ नहीं कहा …उसने शबनम को एक लम्बा स्मूच लेकर उसके गांड में लोढ़ा आगे पीछे करना शुरू कर दिया …शबनम को कुछ देर दर्द हुआ पैर मनु लगातार लोडे को थोड़ा सा बहार निकल कर थोड़ा सा थूक देता अपने लोडे पैर और गांड में और तेज़ी से चुदाई करने लगता …शबनम को अब गांड मरवाने में मज़्ज़ा आ रहा था …
उधर इसरार बहार थक चूका था ..गांड चिल गयी थी उसकी अंदर से रबर के हठी के चलते …हु अब उप्पेर जा चूका था ..पैर साथ में हु बात भी ले गया था ..क्युकी उसकी गांड का माल और खीर से बात की हठी बहुत गन्दी हो चुकी थी …
अंदर मनु लगातार गांड पेलते हुए शबनम के साथ मज़े में डूबा हुआ था ….शबनम भी अब खुलकर मज़े में डूबी हुई थी ..शबनम के साथ मनु भी अब झड़ने के कगार पैर था …शबनम ने देखा मनु झड़ने वाला है तोह उसने इशारा किया की मनु अपना पानी उसकी छूट में खाली करे ..
मनु ने भी बिना देरी किये लोडे को गांड से निकल कर छूट में थुश दिया और लगा पेलने तेज़ी से और अपना पानी उसने छूट में खाली कर दिया …
आठ!!! आईईईई! की आवाज़ के साथ शबनम भी झड़ने लगी …मनु का गरमा गरम लावा छूट में उत्तर चूका था उसके …शबनम की छूट सिखुद का मनु के पानी को चूस गयी ..उसने आज एक बांड भी पानी वास्ते नहीं किया …
मनु झड़ने के बाद शबनम के उप्पेर से उत्तर चूका था …शबनम भी अब नार्मल हो चुकी थी …
मनु ने देखा टाइम 3.00पं बज चुके थे …सो टाइम था अब जाने का ..मनु ने एक बार शबनम को चूमा और जाने को कहा …शबनम भी थक चुकी थी …सो वैसे hi नंगी सो गयी …मनु बहार आया और अपने कपडे पहन कर जाने के लिए त्यार हुआ …
उसने देखा एक बार शबनम को शबनम इतने बार झड़ने के बाद और इतनी लम्बी चुदाई की थकन से थकी हुई सो चुकी थी ..मनु ने एक बार उसके माथे को चूमा और निकल गया ..
कुछ टाइम बाद hi मनु रजिनि के घर के पास था …टाइम बिता आज राजिंदर 4.30पं बजे तक नहीं आया …मनु भी हैरान था ..पैर उसके दिल में एक तरफ ख़ुशी थी ..चलो राजिंदर तोह काम से काम लाइन पैर आ चूका है ..पैर उसका दिमाग बिना सबूत के यकीं मैंने को त्यार नहीं था …टाइम बीता 5.00पं बज चुके थे राजिंदर वहां से गुज़रता हुआ दिखा …रजिनि के घर का रोड के पास होने का एक फ़ायदा यह भी था की रजिनि अपने घर के अंदर से hi आने जाने वाले को बिना गेट खोले देख सकती थी …उसकी वजह थी रजिनि के घर में दो गेट का होना ..मतलब उसका मैं गेट अंडर था जो मोस्टली खुला रहता था …पैर जो गेट लगा रहता था …हु जाली वाला गेट था …सो उसे नज़र रखने के लिए बस मैं गेट को ओपन रखना होता था …
सो राजिंदर जैसे hi रस्ते से गुज़रने वाला था …रजिनि राजिंदर के सामने फुल make-up में थी …
राजिंदर भी रजिनि को देख चूका था ..सो उसने भी बाइक रोक ली …
रजिनि “ मनु के पापा चलो मैंने आपके लिए चाय बनाई है “
राजिंदर “ नहीं कोई बात नहीं आज मेरा दिल चाय पिने का नहीं है आप बेकार में परेशान न हो..”
रजिनि “ कोई बात नहीं चाय का मैं नहीं तोह कमसे काम आज आराम से बात करेंगे चलो तोह सही …” रजिनि ने ज़ोर देते हुए कहा ..
राजिंदर “ सोनम की मम्मी आज तबियत ठीक नहीं है फिर कभी और देखेंगे ..आप चिंता न करो ाचा चलता हूँ ..”
राजिंदर ने उसके बाद एक न सुनी रजिनि की और बाइक लिए घर की ऑर्डर चला गया …पैर रजिनि गुस्से में पेअर पटकती हुई अंडर चली गयी …
मनु भी उसी विंडो के पास खड़ा था …उसका मैं अब शांत था ..क्युकी काम से काम राजिंदर अब रजिनि से दुरी बनाने में लग गया था ..मतलब राजिंदर के सर से काम से काम रजिनि का भूत अभी के लिए उत्तर चूका था …
अंडर मनु ने देखा रजिनि ने पहले जैसे छूट को आईने के सामने खोल कर गुस्से में राजिंदर को जामंकर गलियां दी ..और कहा “ कबतक इस छूट के जाल से बचेगा राजिंदर एक na-ek दिन तुझे इसी छूट में डूबा न दिया तोह रजिनि नाम नहीं …” उसके बाद रजिनि ने किसी को कॉल किया ..और कुछ बात की ..मनु ने आखिर तक सुना और आपने घर वापस आ गया ..
राजिंदर घर में hi था ..पैर मनु के सामने आने से बचता रहा …मनु भी अपने कंप्यूटर पैर कुछ करता रहा ..और टाइम बिता और सबके आने पैर खाना खाया और सो गया …
अगला दिन निकल चूका था मनु और अजय सुबह जल्दी अपनी ट्रेनिंग पैर निकल गए और कल की तरह आज भी राजिंदर आज घर से उनके आने से पहले घर से निकल चूका था ..
उसके बाद सुमित्रा भी अपने टाइम से निकल गयी ..और अजय भी टाइम के साथ स्पोर्ट्स क्लब निकल गया ..
अब बचा मनु …उसने एक लिफाफा त्यार किया और रजिनि के घर के सामने पहले की तरह पाथेर मार्कर रख दिया ..
रजिनि बहार आयी तोह उसने लिफाफा देखा और उसे लेकर अंदर चली गयी ..
उसके बाद मनु भी वहां से उसी फैक्ट्री में चला गया ..जो उसने उस दिन देखि थी …वहां वही लोग आये हुए थे ..मनु ने उनको कॉल करके hi बुलाया था …मनु ने उनको कुछ समझया ..और कुछ हिदायतें दी ..और एक खाली चैम्बर में चला गया ..जहाँ मनु ने एक पुराण सैग अड्डा रखा हुआ था …मनु उसी पैर बेथ गया और उसने अपने जेब से मास्क निकल कर मुँह पैर लपेट लिया यह मास्क कुछ अलग था ..यह कुछ कुछ स्पाइडर मन के जैसे था मतलब उस मास्क में मनु की आईज कवर थी …पैर उसमे जो कपडा था उसे दिखाई अचे से देता था …और उसके साथ hi मनु का पूरा फेस भी कवर होता था …मनु ने अपनी बाइक पहले hi छुपा दी थी …ताकि जान पहचान का कोई इंसान पता न लगा सके की मनु वहां है …
उसके बाद मनु ने उस दिन जो सामान मेडिकल स्टोर से लिया था ..उसे भी वहीँ पड़े एक टूटे छोटे अलमारी टाइप के ड्रावर में रख दिया …मनु अब वेट कर रहा था …थोड़ी देर में hi उसे ऐसा लगा की कोई बहार है …मनु बहार आया तोह पाया की रजिनि अकेले आयी हुई थी …
मनु ने उसके पास जाकर उसे अपने साथ ले आया ..रजिनि दरी हुई थी ..पैर उसके साथ उसी रूम में आ चुकी थी ..
मनु भारी आवाज़ में चलने वाला एक पोर्टेबल रेकडर निकल कर चला देता है ..
उस से आवाज़ आती है “ तुम्हे पता है न क्यों आयी हो यहाँ ??”रेकडर को उसी पैर पॉज कर देता है मनु..
रजिनि “ हाँ जानती हुई तुम मुझे छोड़ोगे और मैं भी अपनी मर्ज़ी से आयी हूँ ..वर्ण मेरी हालत क्या करोगे अचे से पता है ..”
रिकॉर्डर प्ले करता है आगे “ यह तुम्हारी मर्ज़ी से हो रहा है न .???”आगे पॉज कर देता है ..
रजिनि ”हाँ मेरी मर्ज़ी शामिल है इसमें मुझे अचे से पता है इंकार करने पैर क्या होगा सो मैं त्यार हूँ ..”
रिकॉर्डर “ कपडे उत्तर दो एक भी कपडा जिस्म पैर नहीं होना चाहिए ..” रिकॉर्डर पॉज ..
रजिनि उसके बाद हिचकते हुए कपडे उतरने लगती है ..कुछ hi देर में रजिनि पूरी तरह से नंगी मनु के सामने थी ..वह मनु को ऐसे नंगा देखते हुए उनकंफर्टबले थी ..
मनु अपनी जगह से उठा …रजिनि का हलक सुख चूका था …उसे अचे से पता था क्या होने वाला है ..शायद हु इसके लिए घर से त्यार होकर भी आयी थी …उसे अचे से पता था की उसके साथ होने क्या वाला है …पैर मनु रजिनि के पास आकर रुक गया ..
उसने अचे से रजिनि को देखा …रजिनि को पहली बार नहीं नंगा देख रहा था मनु ..पैर यह देखना चाहता था की रजिनि यहाँ कोई होशियारी न करे सो उसने आगे पीछे अचे से चेक किया …ताकि रजिनि को चालाकी न कर सके ..
मनु ने रेकडर रजिनि ने कान के पास प्ले किया ..” अब मेरे साथ चलो ..”
रजिनि बुरी तरह से डर चुकी थी क्युकी सामने वाला एक शब्द नहीं बोलै था ..और जो कहना था ..वह सब रिकॉर्डर के ज़रिये hi बोल रहा था ..पैर रजिनि करती क्या ..मनु रजिनि को देखने लगा ..
रजिनि नंगे जिस्म को छुपाते हुए मनु के साथ चलने लगी …
मनु उसे एक चैम्बर के पास ले आया ..जहाँ सब शीशा लगे हुए थे ..जिसका अरेंजमेंट मनु और उनलोगों ने hi किया था ..वर्ण जेल हुई पुराणी फैक्ट्री में शीशा भला कैसे बचते …
मनु ने वहां आकर फिर एक बार रिकॉर्डर ों किया ..” वहां शीशा से अंदर देखो ..”
रजिनि डरते हुए आगे आयी और अंदर झाकने लगी …शीशा नए थे सो साफ़ साफ़ दिख रहा था ..
अंडर जो उसने देखा तोह रजिनि की रूह कांप चुकी थी …रजिनि की आँखें हैरत से फ़ैल चुकी थी …उसे यकीं hi नहीं हुआ ऐसा होगा अंडर का हाल …रजिनि बुरी तरह से टूट चुकी थी ….
रजिनि वहीँ ज़मीन पैर धम्म !! से बेथ गयी जैसे उसके जिस्म में जान hi न ..हो ..क्युकी अंदर का हाल hi रजिनि के होश उड़ा देने वाला था ..उसे यकीं नहीं हो रहा था की ऐसा भी कुछ हो सकता है ..:हिंट: