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ऐसे hi दिन गुजरने लगे. आर्यन रोज स्कूल जाता और शीतल को देखते रहता. एक दिन आर्यन स्कूल नहीं जा पाटा.
ुस्सदिन Ma'am ने असाइनमेंट सबमिट करने के लिए 1 हफ्ते बाद का टाइम दिया. जो उन्होंने ने कुछ दिन पहले hi दिया था. शीतल को असाइनमेंट में थोड़ा प्रॉब्लम था तोह ma'am ने उससे आर्यन से हेल्प लेने के लिए कहा क्योकि वह क्लास टोपर था.
अगले दिन आर्यन जब स्कूल आता है. तब शीतल उसके पास आके उससे अपनी प्रॉब्लम बताती है. आर्यन यह गोल्डन चांस कैसे मिस करता. इससे तोह उससे शीतल के पास रहने का मौका मिल गया था. इसीलिए उसने फ़ौरन हां करदी.
आर्यन ऋषि को यह बात बताता है. तोह ऋषि उससे बोलता है है तेरी तोह किस्मत खुल गयी लगा रह.
फिर आर्यन शीतल की असाइनमेंट में मदद करता है. जिससे शीतल का असाइनमेंट टाइम पे पूरा होगया.
शीतल आर्यन को थैंक्स बोलती है.
इसी तरह इनकी दोस्ती होगयी.
टाइम गुज़रता जाता है. अब अंकित की नफरत बोलो या जेएलओसी आर्यन के लिए ज्यादा बढ़ गयी थी. वह हरवक़त आर्यन को नीचे दिखने लगता उससे ढंग से बात भी नहीं करता.
अंकित और शीतल की नजदीकियां भी बढ़ रही थी. अब वह लोग क्लास में एक साथ बैठते. ऋषि को इससे कोई ऑब्जेक्शन नहीं था वह अपने दोस्त के लिए खुश था.
आर्यन ने नेहा को भी शीतल से मिलाया था.
नेहा को भी शीतल अच्छी लगी. अब शीतल भी आर्यन के घर आने जाने लगी थी.
आर्यन ने सबसे छुपा के शीतल को एक मोबाइल गिफ्ट किया था बात करने के लिए.
जिससे अब वह दिन रात बात करते रहते.
अब आर्यन का 10तह का एग्जाम था. जिसमे उसने बहोत म्हणत की थी.
शीतल और आर्यन अब कमिटेड थे यह बात नेहा और ऋषि भी जानते थी.
आर्यन ने 10तह में पुरे स्टेट में टॉप किया था. जिसके वजह से विक्रम ने एक पार्टी राखी थी. जिसमे विक्रम के ऑफिस के एम्प्लाइज भी आये थी.
शीतल भी अपनी फॅमिली के साथ आयी थी. जहा पता चला शीतल के पापा विक्रम की कंपनी में मैनेजर थे.
शीतल और आर्यन का प्यार और बढ़ रहा था. देखते देखते आर्यन का 17तह बर्थडे आजाता है. इसमें सबकोई खुश थे सिवाय एक के. वह थे दादाजी. उनको कुलपण्डित की बात का टेंशन था.
शीतल खन्ना- यह बहोत hi चालू लड़की है. यह किसी की कमज़ोरी का फैयदा उठा कर उससे काम निकलवाती है. मतलब सीधे तरीके उससे उसे करती है. इसके पापा विक्रम की कंपनी में अस ा मैनेजर है. इनको नहीं पता इनकी लड़की कितनी चालू है. वह समझते है उनकी लड़की बहोत hi शरीफ और भोली है.
आज आर्यन का 17तह बर्थडे था. रात को तोह सोनिया आर्यन के साथ hi सोती थी. इसीलिए उसने ठीक रात के 12 बजे उससे विश किया. नेहा भी 12 बजे उससे विश करने आजाती है. Dad,Maa,Chachi भी आते है. चाचा बहार गए हुए थे इसीलिए वह नहीं आये. राज भी आता है. पर अंकित नहीं आता क्योकि उससे कोई मतलब hi नहीं था. आर्यन को थोड़ा बुरा लगता है. बूत इसकी अब उससे आदत होगयी थी. दादाजी दवाई लेकर जल्दी सजाते थी इसीलिए वह नहीं आये.
सुबह सब कोई वापस आर्यन को विश करते है और पार्टी की तैयारियां स्टार्ट करते है. ऋषि को ुरगेंटली अपने किसी रिलेटिव के यहाँ जाना था इसीलिए वह पार्टी में तोह नहीं आसक्त था. बूत उसने सुबह सुबह hi आर्यन को विश करदिया था. शीतल का भी कॉल आया था. दादाजी भी उससे विश करते है. बूत वह बहोत टेंशन में थे. आर्यन पूछता भी है बूत वह बात को ताल जाते है.
शाम को पार्टी स्टार्ट हुई. सारे गेस्ट आचुके थे. दादाजी की नज़र सिर्फ आर्यन पर थी. केक कट होता है. आर्यन सबसे पहले सोनिया को खिलता है फिर नेहा को फिर एक एक करके सबको खिलता है. पर जब वह अंकित के पास जाता है तोह अंकित वह से निकल जाता है. इससे आर्यन को बहोत बुरा लगता है. उसका मूड भी ऑफ होचुका था. पर उसने यह बात ज़ाहिर नहीं होने दी.
फिर सब पार्टी एन्जॉय करते है. शीतल वह कही नहीं दिख रही थी. तोह आर्यन शीतल की फ्रेंड से पूछता है के वह कहा है. तोह उसकी फ्रेंड उससे वह डायरेक्शन दिखा देती है.
तोह आर्यन जब वह जाता है तब शीतल वह किसी और के साथ कड़ी थी. यह देख के आर्यन को कुछ अजीब नहीं लगता. पर जब वह उनके थोड़ा और पास जाता है. तोह देखता है शीतल किसी और के गले लगी हुई थी. यह देख कर आर्यन की आँखों से आंसू निकलने लगता है. वह अभी जाके पूछना चाहता था यह क्या होरहा है. पर जैसे hi वह आगे बढ़ता है तोह उनकी आवाज़ आती है
शीतल: कितने दिन होगये तुमसे मिले राजेश.
राजेश: क्या करू यार. आजकल तोह हर वक़्त वह आर्यन तुम्हारे साथ hi रहता है. अगर उसके सामने आऊंगा तोह शायद उसको शक्क होजाये तुम मुझसे प्यार करती हो उससे नहीं. वैसे कैसा चल रहा है तुमलोगो का प्यार.
शीतल: कैसा प्यार. मैं तोह उसके साथ सिर्फ अपने फाईदो के लिए हु. उससे अपना असाइनमेंट्स करवाती हु. उससे अपने सारे काम निकलवाती हु. और यह देखो उस बेवक़ूफ़ ने अपने पैसो से मेरे लिए यह मोबाइल लिया है. जिससे मैं तुमसे बात करती हु. वह तोह बस मेरे लिए एक चलता फिरता एटीएम है. जब भी बोलो पैसे हाज़िर.
राजेश: कमाल है.
तभी राजेश की नज़र आर्यन पे जाती है. तोह वह डर जाता है.
राजेश: आर्यन तू यहाँ.
शीतल पीछे मुद के देखती है तोह उसके पैरों टेल ज़मीन खिसक जाती है.
शीतल: आर्यन तुमममम.
आर्यन: नहीं नहीं चलता फिरता एटीएम.
यह सुनके शीतल समाज जाती है आर्यन ने सब सुन्न लिया है.
आर्यन को बहोत गुस्सा आया हुआ था वह सीधे जाके राजेश को मरने लगता है. राजेश को कुछ करने का मौका hi नहीं मिलता. वह जैसे भी करके वह से भाग जाता है.
राजेश वह से भाग के सीधा आर्यन के पेरेंट्स के पास आता है. और उनसे झूठ बोलता है के आर्यन शीतल के साथ जबरदस्ती कर रहा है. और जब उसने रोखने की कोशिश की तोह उससे मार के भगा दिया.
रश्मि: यह क्या बोल रहे हो मेरा बीटा ऐसा बिलकुल नहीं करसकता.
नेहा: हां मेरा भाई ऐसा नहीं कर सकता. ारी वह तोह शीतल से प्यार भी करता है.
राजेश: मुझे क्या मिलेगा झूट बोलके. यह देखिये उसने मुझे मारा भी है. अगर आपको विश्वास नहीं तोह मैं ले चलता हु आपलोगो को वह.
फिर आर्यन की पूरी फॅमिली वह उसके साथ चल देते है.
इधर आर्यन शीतल से
आर्यन: क्यों किया तुमने ऐसा. क्या कमी रह गयी थी मेरे प्यार में.
शीतल: आर्यन सुनो तोह.
आर्यन: चुप बिलकुल चुप. फिर वह उसके दोनों कंधो को पकड़ के. पैसा चाहिए ना कितना पैसा चाहिए बोलो मैं दूंगा. तुम्हे तोह पैसे से मतलब है ना.
शीतल: आर्यन चोरो मुझे लग रहा है.
यह आर्यन यह बोलता है तभी वह उसका परिवार आजाता है. और यह यह बात सुन लेता है.
विक्रम जाके आर्यन को एक थप्पड़ लगता है.
शीतल इतने सारे लोगो को देख के डर जाती है. इसीलिए वह भी झूट बोलदेति है.
शीतल: अच्छा हुआ आपलोग आगये. यह मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था और जब मैं नहीं मानी तोह मुझे पैसे ऑफर करने लगा.
यह सब सुनके सबके आँखे बड़ी होजाती है. नेहा और रश्मि के आँखों में तोह आंसू आजाते है.
विक्रम: एहि दिन देखने के लिए. तुझे जनम दिया था. इससे तोह अच्छा होता तू जनम लेते hi मर जाता. मेरा मान सामान सबकुछ तूने मिटटी में मिला दिया.
आर्यन: नहीं पापा यह झूट बोल रही है. मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया.
विक्रम यह सुन्न एक और थप्पड़ उससे लगा देता है.
आर्यन रश्मि के पास जाके.
आर्यन: माँ तुम तोह मेरी बात का विश्वास करो. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया. यह झूट बोल रही है. मैं बेक़सूर हु.
रश्मि भी उससे एक थप्पड़ लगा देती है.
रश्मि: तू मेरा बीटा नहीं है. मर्डर गया है आजसे तू मेरे लिए. खबरदार जो तूने मुझे माँ कहा तोह.
आर्यन नेहा के पास जाके. दी आप तोह मेरी बात का विश्वास कीजिये आप तोह जानती है ना आपका भाई ऐसा नहीं कर सकता. मैंने कुछ नहीं किया.
नेहा: एक थप्पड़ मार कर. खबरदार जो तूने मुझे दी कहा. एक हवस का पुजारी मेरा भाई नहीं होसकता. तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं है.
आर्यन यह सुनके वही बैठ जाता है. उसमे जैसे अब जान hi नहीं बच्ची थी. उसकी दी जो उसको सबसे ज्यादा प्यार करती थी. उस ने उसपे विश्वास नहीं किया.
आर्यन: मेरा विश्वास करो. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया. मैं निर्दोष हु. यह झूट बोल रही है.
यह सब सुन्न अंकित को भी एक चांस मिल गया था
इसीलिए वह भी आके आर्यन को मारने लगता है. वह तोह अपनी नफरत भी मिटा रहा था.
सुप्रिया: एहि है ना वह जिसके गुणगान आपलोग दिन रात गाते रहते थे. यह इतना नीच निकलेगा की. इससे तोह मुझे भतीजा कहते हुए भी शर्म आती है. अच्छा हुआ शिवम् और दीपाली इसके साथ नहीं है. और इसका क्या पता कालको दीपाली पे भी अपनी गन्दी नज़र रखदे.
तभी दादाजी आके रोखते है. बस बहोत होगया. बंद करो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.
विक्रम: पापा आप आज कुछ मत बोलिये. इसने आज हमारा इतनी म्हणत से कमाई िज़ात को मिटटी में मिला दिया.
रश्मि और नेहा तोह शीतल से माफ़ी मांगने लगती है. जो झूठे आंसू बहा रही थी. राजेश भी वही खड़ा यह सब देख कर खुश होरहा था.
फिर सबलोग वह से चले जाते है. आर्यन अभी भी वह बैठे रो रहा था. दादाजी उसके पास आके उससे उठा के ले जाते है.
सबके वह से चले जाने के बाद राजेश शीतल के पास आता है.
राजेश: क्या बात है मेरी जान क्या एक्टिंग की है तुणी. एक पल के लिए तोह मुझे भी सच लग रहा था.
शीतल: क्या करू यार इतने लोगो को देख कर मैं डर गयी थी. तोह जो मन में आया बोल दिया. पर तुम इनसब को यहाँ कैसे लाये.
राजेश: ारी मैंने बोल्दिया वह तेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा है और मैंने रोखना चाहा तोह मुझे मारा भी. और वह बेवक़ूफ़ लोग अपने बेटे पे भरोसा hi नहीं किया और उससे hi गलत समझा.
शीतल: चलो जो हुआ अच्छा हुआ. हम तोह बच गए और क्या चाहिए. पर मेरा एटीएम हमेशा के लिए एक्सपिरे होगया.
राजेश: हां यह बुरा हुआ. अब चल यहाँ से किसीने देख लिया तोह गर्बर होजायेगी.
शीतल: हां चलो.
रश्मि: रुख जाइये पापा यह अब यहाँ नहीं रहेगा.
दादाजी: यह मेरा घर है. और जब तक मैं ज़िंदा हु यह यही रहेगा. और यह मेरा आर्डर है.
दादाजी के आर्डर के आगे किसीने कुछ नहीं बोलै.
फिर वह उससे लेके उसके रूम में लेके जाने लगते है. तोह सोनिया भी उसके पीछे पीछे जाने लगती है.
मिनाक्षी: रुख जाओ सोनिया. तुम वह नहीं जाओगी.
सोनिया: मैं अपने भैया के साथ रहूंगी.
रश्मि: कहा ना एकबार तुम उसके साथ नहीं जाओगी और नाही उससे बात करोगी.
सोनिया: पर....
आर्यन: तुम अपने कमरे में जाओ गुड़िया.
सोनिया: मैं नहीं जाउंगी.
आर्यन: मैंने कहा ना. क्या अपने भैया की बात नहीं मानोगी.
सोनिया कुछ नहीं बोलती चुप चाप अपने कमरे में चली जाती है.
आर्यन भी अपने कमरे में चला जाता है.
दादाजी: क्या हुआ अब बता.
आर्यन: मैंने कुछ नहीं किया दादाजी वह झूट बोल रही है.
दादाजी: मुझे पता है तूने कुछ नहीं किया. पर वह पर हुआ क्या था वह बता.
फिर आर्यन उनको सब कुछ बता देता है.
दादाजी: मैं अभी जाके सबको सच बताता हु.
आर्यन: रहने दीजिये दादाजी. जब किसी को मुझपर विश्वास hi नहीं है तोह वह आप पर भी विश्वास नहीं करेंगे.
दादाजी: पर....
आर्यन: प्लीज दादाजी.
फिर वह भी कुछ नहीं बोलते.
फिर आर्यन को सोने का बोल वह अपने कमरे में आजाते है.
दादाजी: शायद कुलपण्डित ने इसी घटना के बारे में बताया था. अब कैसे सब ठीक होगा. आर्यन ने भी मुझे मन करदिया है किसी को कुछ भी बताने से.
इधर आर्यन की आँखों से अभी भी आंसू बह रहे थी. उसकी आँखों से नींद hi उड़द चुकी थी. पहले उसके प्यार ने धोका दिया फिर उसके फॅमिली ने भी उसपे भरोसा नहीं किया. वह एहि सब सोच के रो रहा था.
ऐसे hi दिन गुजरने लगे. आर्यन रोज स्कूल जाता और शीतल को देखते रहता. एक दिन आर्यन स्कूल नहीं जा पाटा.
ुस्सदिन Ma'am ने असाइनमेंट सबमिट करने के लिए 1 हफ्ते बाद का टाइम दिया. जो उन्होंने ने कुछ दिन पहले hi दिया था. शीतल को असाइनमेंट में थोड़ा प्रॉब्लम था तोह ma'am ने उससे आर्यन से हेल्प लेने के लिए कहा क्योकि वह क्लास टोपर था.
अगले दिन आर्यन जब स्कूल आता है. तब शीतल उसके पास आके उससे अपनी प्रॉब्लम बताती है. आर्यन यह गोल्डन चांस कैसे मिस करता. इससे तोह उससे शीतल के पास रहने का मौका मिल गया था. इसीलिए उसने फ़ौरन हां करदी.
आर्यन ऋषि को यह बात बताता है. तोह ऋषि उससे बोलता है है तेरी तोह किस्मत खुल गयी लगा रह.
फिर आर्यन शीतल की असाइनमेंट में मदद करता है. जिससे शीतल का असाइनमेंट टाइम पे पूरा होगया.
शीतल आर्यन को थैंक्स बोलती है.
इसी तरह इनकी दोस्ती होगयी.
टाइम गुज़रता जाता है. अब अंकित की नफरत बोलो या जेएलओसी आर्यन के लिए ज्यादा बढ़ गयी थी. वह हरवक़त आर्यन को नीचे दिखने लगता उससे ढंग से बात भी नहीं करता.
अंकित और शीतल की नजदीकियां भी बढ़ रही थी. अब वह लोग क्लास में एक साथ बैठते. ऋषि को इससे कोई ऑब्जेक्शन नहीं था वह अपने दोस्त के लिए खुश था.
आर्यन ने नेहा को भी शीतल से मिलाया था.
नेहा को भी शीतल अच्छी लगी. अब शीतल भी आर्यन के घर आने जाने लगी थी.
आर्यन ने सबसे छुपा के शीतल को एक मोबाइल गिफ्ट किया था बात करने के लिए.
जिससे अब वह दिन रात बात करते रहते.
अब आर्यन का 10तह का एग्जाम था. जिसमे उसने बहोत म्हणत की थी.
शीतल और आर्यन अब कमिटेड थे यह बात नेहा और ऋषि भी जानते थी.
आर्यन ने 10तह में पुरे स्टेट में टॉप किया था. जिसके वजह से विक्रम ने एक पार्टी राखी थी. जिसमे विक्रम के ऑफिस के एम्प्लाइज भी आये थी.
शीतल भी अपनी फॅमिली के साथ आयी थी. जहा पता चला शीतल के पापा विक्रम की कंपनी में मैनेजर थे.
शीतल और आर्यन का प्यार और बढ़ रहा था. देखते देखते आर्यन का 17तह बर्थडे आजाता है. इसमें सबकोई खुश थे सिवाय एक के. वह थे दादाजी. उनको कुलपण्डित की बात का टेंशन था.
शीतल खन्ना- यह बहोत hi चालू लड़की है. यह किसी की कमज़ोरी का फैयदा उठा कर उससे काम निकलवाती है. मतलब सीधे तरीके उससे उसे करती है. इसके पापा विक्रम की कंपनी में अस ा मैनेजर है. इनको नहीं पता इनकी लड़की कितनी चालू है. वह समझते है उनकी लड़की बहोत hi शरीफ और भोली है.
आज आर्यन का 17तह बर्थडे था. रात को तोह सोनिया आर्यन के साथ hi सोती थी. इसीलिए उसने ठीक रात के 12 बजे उससे विश किया. नेहा भी 12 बजे उससे विश करने आजाती है. Dad,Maa,Chachi भी आते है. चाचा बहार गए हुए थे इसीलिए वह नहीं आये. राज भी आता है. पर अंकित नहीं आता क्योकि उससे कोई मतलब hi नहीं था. आर्यन को थोड़ा बुरा लगता है. बूत इसकी अब उससे आदत होगयी थी. दादाजी दवाई लेकर जल्दी सजाते थी इसीलिए वह नहीं आये.
सुबह सब कोई वापस आर्यन को विश करते है और पार्टी की तैयारियां स्टार्ट करते है. ऋषि को ुरगेंटली अपने किसी रिलेटिव के यहाँ जाना था इसीलिए वह पार्टी में तोह नहीं आसक्त था. बूत उसने सुबह सुबह hi आर्यन को विश करदिया था. शीतल का भी कॉल आया था. दादाजी भी उससे विश करते है. बूत वह बहोत टेंशन में थे. आर्यन पूछता भी है बूत वह बात को ताल जाते है.
शाम को पार्टी स्टार्ट हुई. सारे गेस्ट आचुके थे. दादाजी की नज़र सिर्फ आर्यन पर थी. केक कट होता है. आर्यन सबसे पहले सोनिया को खिलता है फिर नेहा को फिर एक एक करके सबको खिलता है. पर जब वह अंकित के पास जाता है तोह अंकित वह से निकल जाता है. इससे आर्यन को बहोत बुरा लगता है. उसका मूड भी ऑफ होचुका था. पर उसने यह बात ज़ाहिर नहीं होने दी.
फिर सब पार्टी एन्जॉय करते है. शीतल वह कही नहीं दिख रही थी. तोह आर्यन शीतल की फ्रेंड से पूछता है के वह कहा है. तोह उसकी फ्रेंड उससे वह डायरेक्शन दिखा देती है.
तोह आर्यन जब वह जाता है तब शीतल वह किसी और के साथ कड़ी थी. यह देख के आर्यन को कुछ अजीब नहीं लगता. पर जब वह उनके थोड़ा और पास जाता है. तोह देखता है शीतल किसी और के गले लगी हुई थी. यह देख कर आर्यन की आँखों से आंसू निकलने लगता है. वह अभी जाके पूछना चाहता था यह क्या होरहा है. पर जैसे hi वह आगे बढ़ता है तोह उनकी आवाज़ आती है
शीतल: कितने दिन होगये तुमसे मिले राजेश.
राजेश: क्या करू यार. आजकल तोह हर वक़्त वह आर्यन तुम्हारे साथ hi रहता है. अगर उसके सामने आऊंगा तोह शायद उसको शक्क होजाये तुम मुझसे प्यार करती हो उससे नहीं. वैसे कैसा चल रहा है तुमलोगो का प्यार.
शीतल: कैसा प्यार. मैं तोह उसके साथ सिर्फ अपने फाईदो के लिए हु. उससे अपना असाइनमेंट्स करवाती हु. उससे अपने सारे काम निकलवाती हु. और यह देखो उस बेवक़ूफ़ ने अपने पैसो से मेरे लिए यह मोबाइल लिया है. जिससे मैं तुमसे बात करती हु. वह तोह बस मेरे लिए एक चलता फिरता एटीएम है. जब भी बोलो पैसे हाज़िर.
राजेश: कमाल है.
तभी राजेश की नज़र आर्यन पे जाती है. तोह वह डर जाता है.
राजेश: आर्यन तू यहाँ.
शीतल पीछे मुद के देखती है तोह उसके पैरों टेल ज़मीन खिसक जाती है.
शीतल: आर्यन तुमममम.
आर्यन: नहीं नहीं चलता फिरता एटीएम.
यह सुनके शीतल समाज जाती है आर्यन ने सब सुन्न लिया है.
आर्यन को बहोत गुस्सा आया हुआ था वह सीधे जाके राजेश को मरने लगता है. राजेश को कुछ करने का मौका hi नहीं मिलता. वह जैसे भी करके वह से भाग जाता है.
राजेश वह से भाग के सीधा आर्यन के पेरेंट्स के पास आता है. और उनसे झूठ बोलता है के आर्यन शीतल के साथ जबरदस्ती कर रहा है. और जब उसने रोखने की कोशिश की तोह उससे मार के भगा दिया.
रश्मि: यह क्या बोल रहे हो मेरा बीटा ऐसा बिलकुल नहीं करसकता.
नेहा: हां मेरा भाई ऐसा नहीं कर सकता. ारी वह तोह शीतल से प्यार भी करता है.
राजेश: मुझे क्या मिलेगा झूट बोलके. यह देखिये उसने मुझे मारा भी है. अगर आपको विश्वास नहीं तोह मैं ले चलता हु आपलोगो को वह.
फिर आर्यन की पूरी फॅमिली वह उसके साथ चल देते है.
इधर आर्यन शीतल से
आर्यन: क्यों किया तुमने ऐसा. क्या कमी रह गयी थी मेरे प्यार में.
शीतल: आर्यन सुनो तोह.
आर्यन: चुप बिलकुल चुप. फिर वह उसके दोनों कंधो को पकड़ के. पैसा चाहिए ना कितना पैसा चाहिए बोलो मैं दूंगा. तुम्हे तोह पैसे से मतलब है ना.
शीतल: आर्यन चोरो मुझे लग रहा है.
यह आर्यन यह बोलता है तभी वह उसका परिवार आजाता है. और यह यह बात सुन लेता है.
विक्रम जाके आर्यन को एक थप्पड़ लगता है.
शीतल इतने सारे लोगो को देख के डर जाती है. इसीलिए वह भी झूट बोलदेति है.
शीतल: अच्छा हुआ आपलोग आगये. यह मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था और जब मैं नहीं मानी तोह मुझे पैसे ऑफर करने लगा.
यह सब सुनके सबके आँखे बड़ी होजाती है. नेहा और रश्मि के आँखों में तोह आंसू आजाते है.
विक्रम: एहि दिन देखने के लिए. तुझे जनम दिया था. इससे तोह अच्छा होता तू जनम लेते hi मर जाता. मेरा मान सामान सबकुछ तूने मिटटी में मिला दिया.
आर्यन: नहीं पापा यह झूट बोल रही है. मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया.
विक्रम यह सुन्न एक और थप्पड़ उससे लगा देता है.
आर्यन रश्मि के पास जाके.
आर्यन: माँ तुम तोह मेरी बात का विश्वास करो. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया. यह झूट बोल रही है. मैं बेक़सूर हु.
रश्मि भी उससे एक थप्पड़ लगा देती है.
रश्मि: तू मेरा बीटा नहीं है. मर्डर गया है आजसे तू मेरे लिए. खबरदार जो तूने मुझे माँ कहा तोह.
आर्यन नेहा के पास जाके. दी आप तोह मेरी बात का विश्वास कीजिये आप तोह जानती है ना आपका भाई ऐसा नहीं कर सकता. मैंने कुछ नहीं किया.
नेहा: एक थप्पड़ मार कर. खबरदार जो तूने मुझे दी कहा. एक हवस का पुजारी मेरा भाई नहीं होसकता. तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं है.
आर्यन यह सुनके वही बैठ जाता है. उसमे जैसे अब जान hi नहीं बच्ची थी. उसकी दी जो उसको सबसे ज्यादा प्यार करती थी. उस ने उसपे विश्वास नहीं किया.
आर्यन: मेरा विश्वास करो. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया. मैं निर्दोष हु. यह झूट बोल रही है.
यह सब सुन्न अंकित को भी एक चांस मिल गया था
इसीलिए वह भी आके आर्यन को मारने लगता है. वह तोह अपनी नफरत भी मिटा रहा था.
सुप्रिया: एहि है ना वह जिसके गुणगान आपलोग दिन रात गाते रहते थे. यह इतना नीच निकलेगा की. इससे तोह मुझे भतीजा कहते हुए भी शर्म आती है. अच्छा हुआ शिवम् और दीपाली इसके साथ नहीं है. और इसका क्या पता कालको दीपाली पे भी अपनी गन्दी नज़र रखदे.
तभी दादाजी आके रोखते है. बस बहोत होगया. बंद करो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.
विक्रम: पापा आप आज कुछ मत बोलिये. इसने आज हमारा इतनी म्हणत से कमाई िज़ात को मिटटी में मिला दिया.
रश्मि और नेहा तोह शीतल से माफ़ी मांगने लगती है. जो झूठे आंसू बहा रही थी. राजेश भी वही खड़ा यह सब देख कर खुश होरहा था.
फिर सबलोग वह से चले जाते है. आर्यन अभी भी वह बैठे रो रहा था. दादाजी उसके पास आके उससे उठा के ले जाते है.
सबके वह से चले जाने के बाद राजेश शीतल के पास आता है.
राजेश: क्या बात है मेरी जान क्या एक्टिंग की है तुणी. एक पल के लिए तोह मुझे भी सच लग रहा था.
शीतल: क्या करू यार इतने लोगो को देख कर मैं डर गयी थी. तोह जो मन में आया बोल दिया. पर तुम इनसब को यहाँ कैसे लाये.
राजेश: ारी मैंने बोल्दिया वह तेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा है और मैंने रोखना चाहा तोह मुझे मारा भी. और वह बेवक़ूफ़ लोग अपने बेटे पे भरोसा hi नहीं किया और उससे hi गलत समझा.
शीतल: चलो जो हुआ अच्छा हुआ. हम तोह बच गए और क्या चाहिए. पर मेरा एटीएम हमेशा के लिए एक्सपिरे होगया.
राजेश: हां यह बुरा हुआ. अब चल यहाँ से किसीने देख लिया तोह गर्बर होजायेगी.
शीतल: हां चलो.
रश्मि: रुख जाइये पापा यह अब यहाँ नहीं रहेगा.
दादाजी: यह मेरा घर है. और जब तक मैं ज़िंदा हु यह यही रहेगा. और यह मेरा आर्डर है.
दादाजी के आर्डर के आगे किसीने कुछ नहीं बोलै.
फिर वह उससे लेके उसके रूम में लेके जाने लगते है. तोह सोनिया भी उसके पीछे पीछे जाने लगती है.
मिनाक्षी: रुख जाओ सोनिया. तुम वह नहीं जाओगी.
सोनिया: मैं अपने भैया के साथ रहूंगी.
रश्मि: कहा ना एकबार तुम उसके साथ नहीं जाओगी और नाही उससे बात करोगी.
सोनिया: पर....
आर्यन: तुम अपने कमरे में जाओ गुड़िया.
सोनिया: मैं नहीं जाउंगी.
आर्यन: मैंने कहा ना. क्या अपने भैया की बात नहीं मानोगी.
सोनिया कुछ नहीं बोलती चुप चाप अपने कमरे में चली जाती है.
आर्यन भी अपने कमरे में चला जाता है.
दादाजी: क्या हुआ अब बता.
आर्यन: मैंने कुछ नहीं किया दादाजी वह झूट बोल रही है.
दादाजी: मुझे पता है तूने कुछ नहीं किया. पर वह पर हुआ क्या था वह बता.
फिर आर्यन उनको सब कुछ बता देता है.
दादाजी: मैं अभी जाके सबको सच बताता हु.
आर्यन: रहने दीजिये दादाजी. जब किसी को मुझपर विश्वास hi नहीं है तोह वह आप पर भी विश्वास नहीं करेंगे.
दादाजी: पर....
आर्यन: प्लीज दादाजी.
फिर वह भी कुछ नहीं बोलते.
फिर आर्यन को सोने का बोल वह अपने कमरे में आजाते है.
दादाजी: शायद कुलपण्डित ने इसी घटना के बारे में बताया था. अब कैसे सब ठीक होगा. आर्यन ने भी मुझे मन करदिया है किसी को कुछ भी बताने से.
इधर आर्यन की आँखों से अभी भी आंसू बह रहे थी. उसकी आँखों से नींद hi उड़द चुकी थी. पहले उसके प्यार ने धोका दिया फिर उसके फॅमिली ने भी उसपे भरोसा नहीं किया. वह एहि सब सोच के रो रहा था.