Romance भंवर (पूर्ण) - Page 42 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Villano ko dhul chatane ki kosis kyon hogi .. sabhi to shadi me mil rahe hain ... Unka kya hai aayenge daru piyenge aur chale jayenge .. tum kahe sar khapa rahe ..

:doh: unki kahani me maylo group to abhi pata chala hai na to kya taiyari na karenge kya .. tum b na kabhi kabhi bina soche coment mar kar bhag jaye ho
 
:D sachi ke liye aashu bhi baha liye .. koi na hum aap ka dard samjhte hain aur in sabko.. bole to Apasyu, Aimee aur sachi ko karara jawab diya jayega .. aap tension na lo ... Gin gin kar aur chun chun kar badla liya jayega.. fir uame main koi raham na karunga ..

Bus aap aashu na banao .. mujhe dard type hoga me too cry even double cry :cry: :bawl: :cry:

:thanks: a lot for this lovely comment
 
Hahaha .. Aimee ka abhi pura swag to aana baki hai u just don't worry .. abhi to bahut se karname baki hain ..

:thanks: a lot for this lovely comment
 
Aka bhai Aimee aur Sachi ka scene thoda aur aage jaya to scene hi kuch gadbad hoti .. fir to lesbo sex hi dena padta .. joke a part .. Napa tula scene tha .. abhi dono ke bahut se close encounter hai.. aage milte rahenge jayenge .. filhaal engagement hai aur kahani videshi dharti par hai to jaldi se wapsi karenge india me ...

Isi ke sath is waqt story me bahut si kahaniyan parellel hai to ek scene me jayda uljha nahi ja sakta...

Yesss .. abhi Megha ka chepter close nahi hua hai aur na hi dono ka milna bhi dekhiye agle meeting me kya Naya rang laya jata hai... Filhaal abhi ke liye to is ek din me bahut se karname honge .. aur sab jald hi dekhne milega ...

:thanks: a lot for this lovely comment
 
Fir to maze lijiye ... Samne wli ki nasamjhi ka .. kyonki jitni baten maine story me ek ladki ko samjhane ke liye likhi hai.. utni mehnat ke bina ek hi baat hogi .. wo hai compro :D
 
Itna gussa Megha par .. why why why ..

Koi ek abla nari se itna gussa hoga... Chalo chhodo ... Mantri ji wala scene to enjoy kiye na wahi bahut hai mere liye warna mujhe kag raha tha ki Megha ka scene padh kar bhai ko Khali gussa hi dilaya maine update likh kar :D
 
Nandni aur Sinha ji bechare ek hi umr ke aur ek hi waqt ke chot khaye huye hain .. dekhiye inki dosti kya twist dalti hai satory mein :D

Villan part section hai Megha aur Apasyu ka scene to yahan par kafi utar chadhao ke scene milenge .. anth me hi pura clear hoga inka to lekin jo bhi hoga usme maza bana rhe uski kosis mai karunga ...

Yes sari planning ki rup rekha aur samay tay ho chuka hai .. bus ek part hai jo ab tak chhipa hua hai usse ab highlight karne ka samay aa gaya hai.. fir kuch satika aakalan kar payenge ...

Aur sahi likha aapne ye abhi party time hai to .. enjoy the party :woohoo:
 
Megha ke liye utna muh phad rahe .. ladka enjoy kar raha hai hrass :D .. koi na abhi to aayi hai Megha story me ... Dekhiye aage kya rang lati hai iski kahani :yo: :yo:

Aarav ki bada yaad aa rahi .. bhai kuch update me aarav hi Aarav tha .. dusron ko bhi mauka dijiye taki wo bhi perform kar sake :yo:
 
Update:-76

जैसा अंदाजा था ठीक वैसा ही हुआ। विक्रम सिंह राठौड़ अपने परिवार समेत जिंदल के साथ महफ़िल में शिरकत करते हुए नजर आने लगा। जिंदल और विक्रम के साथ कुछ और जाने पहचाने से चेहरे.. और हर एक के चेहरे को पांचों जैसे अपने दिमाग के हार्ड डिस्क में पूरे डाउनलोड करना शुरू कर दिया था।

प्रकाश जिंदल के साथ आए लोगों में कुछ चेहरे ऐसे थे कि जिसे देखकर आरव, स्वस्तिका और पार्थ की आखें ज्वाला सी धधकने लगी। कुछ देर और सब वहां ठहर जाते तो आज डेविल ग्रुप भी लगभग खत्म ही था, क्योंकि जिस प्रकार के सुरक्षा इंतजामात वहां के थे, उस माहौल में ये लोग कहीं टिकने वाले नहीं थे।

अपस्यु तुरंत वहां से सबको बाहर लेकर आया.. पार्थ और आरव जैसे पागलों कि तरह अंदर जाने के लिए बेकरार था और अपस्यु किसी तरह दोनों को रोके हुए था। … "छोड़ मुझे अपस्यु, वो अंदर तूने देखा नहीं उस मुर्तुजा को.. हट जा मेरे सामने से वरना मै भूल जाऊंगा की तू मेरा भाई है।"… आरव, अपस्यु को चेतावनी देते हुए कहने लगा…

वहीं पार्थ नवीन और कृपाल के नाम की रट लगाए जा रहा था, तो स्वस्तिका प्रताप सिंह का… तीनों कुछ लोगों को वहां देख इतने भड़के हुए थे, किसी को ये तक सुध नहीं रहा कि वो लोग कहां है और गुस्से में क्या कर रहे है। मुर्तुजा वो पहला आदमी था जिसने सुनंदा को घसीटकर आग के हवाले किया था। वैसे ही कहनी बाकी नामो की भी थी, जैसे कि वो राजस्थान का भूषण, जमील, नागपुर वाला त्रिवेणी शंकर का बेटा।..

उस रात कुल 100 लोग थे जिन्होंने सबको आग के हवाले करने में कोई रहम नहीं दिखाई थी। और उन 100 भाड़े के लोगों में से वहां उस रात 15 लोग ही वापस लौटे थे, बाकी 85 लोगों को उसके कुरूर्ता की सजा उसी वक़्त उनके साथियों ने दे दिया था। उन 15 लोगों में से बस यही 4 खुशनसीब थे, जो आज रात पूरे डेविल ग्रुप को दिख गए, बाकी 11 का किस्सा बड़ी सफाई से ये लोग खत्म कर चुके थे।

पर्दे के पीछे से जिसने इशारों में काम करवाया था, उस देखकर वो ज्वाला नहीं उफ्फनती, जो इन चार को देखकर इनके खून में उबाल मार रहा था। बदले की आग में जल रहे तीनों को संभालना लगभग मुश्किल सा होता जा रहा था। तीनों कुछ ज्यादा ही बेकाबू हो रहे थे और लोगों ने उन सबको नोटिस करना भी शुरू कर दिया था…. "ये क्या पागलों कि तरह तुम लोग यहां भीड़ लगाए हो।"…

नंदनी कुंजल के साथ एंगेजमेंट हॉल में शिरकत करने ही जा रही थी कि उनको बीच रास्ते में ही सभी मिल गए। नंदनी की आवाज़ पर भी जब इनका गुस्सा शांत नहीं हुआ तब नंदनी ने खींचकर एक तमाचा पार्थ को दी।

पार्थ गुस्से में आखें लाल किए नंदनी के ओर देखा ही थी कि स्वस्तिका को होश आया और वो पार्थ के चेहरे को दोनों हाथों से थामकर … "होश में आओ पार्थ मां है यहां.. पार्थ मै क्या कह रही हूं समझ रहे हो तुम.. पार्थ".. पार्थ वहीं पर हां में अपना सर हिलाते हुए बैठ गया और फुटफुट कर रोने लगा।

आरव और स्वस्तिका में भी जैसे अब हिम्मत नहीं बची हो, वो भी उसी के दाएं और बाएं बैठकर पार्थ के कंधे पर ही अपना सर रखकर रोने लगे। मार्मिक क्षण थे तीनों के लिए। उन गुनाहगारों को सामने देख, जैसे सारे ज़ख्म को किसी ने कुरेद डाले हो। सदमे की वो रात आखों के सामने नाच रही थी और तीनों टूटकर अपने आशु बहा रहे थे।

वहां के तैनात कुछ जवानों की मदद से उनको कंधे का सहारा देकर कमरे में लाया गया। नंदनी लगातार तीनों के पास बैठकर उसके आशु साफ करती रही, और उनके गम को देखकर, उनकी आखें भी नम हो चुकी थी। लेकिन मां थी वो, अपने आशु छिपाए, वो तीनो के बीच में बैठकर, तीनों के सर को गोद में रखकर, उनके बालों में हाथ फेरने लगी।

धीरे-धीरे तीनों शांत होते हुए वहीं अपनी आखें मूंद लिए। तीन को शांत देख नंदनी ने इशारों में अपस्यु, ऐमी और कुंजल को वहां जाने के लिए बोल दी। अपस्यु भी दोनों को लेकर वहां से बाहर आ गया। कुंजल को इस तरह से खामोश देखकर ऐमी पूछने लगी… "क्या हुआ कुंजल ऐसे शांत क्यों हो?"

कुंजल:- ऐमी कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। वो लोग ऐसे रो क्यों रहे थे।

अपस्यु, कुंजल के ठीक सामने खड़े होकर उसके दोनों कंधे पकड़ कर उसे हिलाते हुए कहने लगा… "कुछ बुरी यादों से सामना हो गया है, थोड़ा टूटा हुआ मेहसूस कर रहे होंगे सब। लेकिन मां है उनके साथ और कुछ पल में वो लोग भी धमाल मचाते नजर आएंगे। वो लगभग उबर चुके होंगे अपने दर्द से, इसलिए तुम खुद को ठीक करो और चलो साची के एंगेजमेंट में। वैसे भी इस वक़्त उसके साथ उसकी कोई दोस्त नहीं होगी, तो एक फ़र्ज़ तो तुम्हारा भी यहां बनता ही है।"

कुंजल:- हे भगवान !! बस भाई समझ गई। इतना भाषण कुछ देर पहले ही दे देते, तीनों उठकर भांगड़ा करते और कहते.. कैसा दर्द अपस्यु, अब हमे कोई दर्द नहीं बस और बोले तो हम सर फटने से मार जाएंगे…

कुंजल की बात सुनकर अपस्यु और ऐमी तीनों जोर-जोर से हंसने लगे.. कुंजल को आगे भेजकर, ऐमी ने उसे कहा वो अपना मेकअप ठीक करके तुरंत ही उसे ज्वाइन करती है, और यही बात अपस्यु ने भी कुंजल से कह दी। दोनों को एक जैसी बातें करते सुन कुंजल शरारती नजरों से देखती हुई ऐमी को .. "ठीक है भाभी".. कहती हुई वहां से फुदक कर भाग गई।

दोनों बड़ी ही तेजी में अपने कमरे में गए और वहीं बिस्तर पर बैठकर एक दूसरे को देखते हुए कहने लगे…. "क्या तुम भी वहीं सोच रही हो"… "हां अपस्यु बिल्कुल सही सोच रहे हो। एक कि बली तो अभी चाहिए। तभी इस सीने कि आग कुछ ठंडी होगी।"…

अपस्यु:- मुर्तुजा को लपेट लो फिर… मैजिक गिम्मिक करो ....

ऐमी:- बिल्कुल नहीं, मैजिक गीमिक फ्लॉप आइडिया है। इसे भ्रम से लपेटो।

अपस्यु:- मारना आसान है सजा देना मुश्किल। कहानी बदले पर आ ही गईं। न्याय बचता है और बदला सुलगता है। मै क्या इतना बेवकूफ हूं कि तुम्हारी नजरें ना पढ़ पाऊं।

ऐमी:- अपस्यु तुम मेरा मन नहीं बदल सकते। मैं बिना मारे नहीं रुकने वाली हूं।

अपस्यु:- ठीक है जाओ मारो, फलाओ भ्रम जाल। और फिर क्या होगा..

ऐमी:- ज्यादा से ज्यादा मै पकड़ी जाऊंगी ना, मुझे मार देंगे और क्या होगा? लेकिन नफरत में सुलगती तो नहीं रहूंगी।

अपस्यु उसके कमर में हाथ डालकर उसे अपने नजदीक खिंचा, उसके गुस्से से भरे चेहरे पर अपनी उंगली चलते हुए उसे देखने लगा…. ऐमी बिना उसकी आखों में झांके बस वहां खड़ी रही… अपस्यु खामोश उसके कमर को थामे उसके चेहरे को लगातार देखते रहा..

इस नफरत के जहां के आगे एक छोटा सा आशियां होगा..

ना तो कुछ पाने की चाहत होगी,

ना कुछ खोने का डर होगा….


अपस्यु इतना कहकर खामोश हो गया। ऐमी खामोश अपनी नजरें उसपर डाली और कहने लगी…

कहीं दूर एक अपना छोटा सा घर,

जहां तुम और मै, मै और तुम

और दुनिया भर कि खुशियां…


अपस्यु, ऐमी के होंठ को अपने होंठ से छू कर….

ना मंजिल हो कोई और ना कारवां

बस मैं और तुम, तुम और मै

और मिलो दूर ना खत्म होने वाला सफर


ऐमी, मुस्कुराती अपस्यु को देखती…..

भीगे हम बेखौफ होकर बारिशों में

सिर्फ मै और तुम, तुम और मै

नीचे उस नीले आसमान के चार दिवारी में

दोनों अपने सर से सर को जोड़े एक साथ मुस्कुराते हुए…

फिर आखरी वो अपना पड़ाव होगा

जहां मै और तुम, तुम और मै

छोड़ चले इस जहां को हाथों में हाथ डाले।

ऐमी गहरी श्वांस लेती अपस्यु के चेहरे को अपने हाथो में थामकर उसके होठों से होंठ लगाकर चूमती हुई, धीरे-धीरे अपनी आखें बंद कर ली। अपस्यु भी उसका साथ देते उन लम्हों में डूबकर चूमने लगा। श्वांस गहरी और लंबी होती चली गई और दोनों के होंठ अपने एहसासों को बयान करते, एक दूसरे में सिमटे रहे।

कुछ समय बाद दोनों ही अलग हुए और एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हुए चल दिए साची के एंगेजमेंट में। लगभग इंगेजमेंट खत्म हो चुका था। लड़का-लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहना चुके थे और कुछ अति व्यस्त लोग वो जगह छोड़कर जाने के लिए तैयार थे… तभी उस हॉल की लाइट चली गई। बिल्कुल अंधेरा वो माहौल हो गया, कुछ ही पल में वहां लोगों ने मोबाइल के फ़्लैश से रौशनी शुरू की।

ठीक उसी वक़्त एक फोकस लाइट साची और ध्रुव पर परी, और पीछे के सैक्रीन पर कुछ लम्हों कि तस्वीरें चलने लगी। कुछ साची की खूबसूरत तस्वीरें अकेले कि, कुछ तस्वीरें ध्रुव की और कुछ तस्वीरें ध्रुव और साची के साथ की। इधर तस्वीरें खत्म उधर ठीक मध्य में एक ओर ऐमी और दूसरे ओर अपस्यु खड़ा था और तेज गाना बजने कि आवाज़ शुरू हुई… "गोरी गोरी, चोरी चोरी, फिल्म मै हूं ना" की वो संगीत कि शुरवात और अपस्यु अपने घुटनों पर फिसलता हुए सीधा ऐमी के पास पहुंचा।

जैसे कि साची ने ख्वाहिश जताई थी, उसकी ये हसरत दोनों पूरे करते हुए बीच फ्लोर पर आग लगा चुके थे। शर्टस, जीन्स और कॉस्ट्यूम की डांस एक तरफ और साड़ी में कातिलाना अंदाज के साथ ठुमके लगाकर, पाऊं ठीक से ना फैलने की स्तिथि में, डांस को वो छोटे-छोटे तेज मूव्स, सभी के कदम को रुकवाकर जैसे अपनी जगह खड़ा रहने पर मजबूत कर चुके थे।

इनकी खुशी में साथ देने लावणी और कुंजल भी पहुंच गई और भी कई सारे लोग जो खुद को रोक नहीं पाए। माहौल ऐसा हो गया कि हॉल का मध्य हिस्सा डांस फ्लोर में तब्दील हो गया, जहां पार्थ और साची के साथ-साथ उनके परिवार के लोग भी नाचने लगे।

भीड़ बढ़ चुकी थी, अपस्यु और ऐमी के कदम रुक चुके थे और दोनों किनारे खड़े होकर लोगों को नाचते देख मज़े कर रहे थे। अपस्यु घड़ी में समय देखा और ऐमी का हाथ पकड़ कर खिंचते हुए बार काउंटर तक ले आया। अपस्यु ने दोनों के लिए एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल का ऑर्डर दिया।

घड़ी का कंटडाउन शुरू करते अपस्यु ने ऐमी के साथ जाम का टोस्ट किया और घड़ी देखते हुए… "5.. 4.. 3.. 2… 1, जाम उठाओ सेलिब्रेशन का ऐमी।"

ऐमी:- क्या मै समझी नहीं…

अपस्यु:- तुम जाम पियो.. और मज़ा लो इस माहौल का।

ऐमी:- हम्मम ! आज कुछ तो बात है अपस्यु, खैर जब तुमने वक़्त देख ही लिया है तो मेरा दिल कह रहा है न्याय हो चुका है। मै देख पा रही हूं, जो यहां के व्यवस्थापक है उनके चेहरे पर कुछ सिकन सी है।

अपस्यु:- कुछ बातें वक़्त पर छोड़ना ही बुद्धिमानी होती है। न्याय शांति देती है, इंसान को इंसान बनाए रखती है और बदला, अच्छे के लिए लिया गया हो या बुरे के लिए, इंसान को हैवान बनता है।

ऐमी:- क्या फर्क है अपस्यु, किसी से बदला ले या उसे न्याय का नाम दे, किए की सजा हम दोनों ही शुरतों में देंगे और मारना दोनों ही केस में है।

अपस्यु:- हां लेकिन न्याय उसके करतूतों की पूरी तरह समीक्षा करके उसे उचित मौत प्रदान करेगा, जबकि बदले में बिना किसी नतीजे को सोचकर सजा दे देती है।

ऐमी:- अभी न्याय कैसे हुआ अपस्यु।

अपस्यु:- थोड़ा तो मुस्कुराओ या सवाल जवाब में ही ये शाम गुजार दोगी, वैसे भी आज मूड कुछ ज्यादा ही रोमांटिक है…

ऐमी:- क्या तय हुआ था… भूल गए..

अपस्यु:- ऑफ आे, कहा तो आज मूड रोमांटिक है…

ऐमी:- मै आज कुंजल के साथ सोने वाली हूं, जो करना है कर लेना आज तो मै हाथ नहीं आने वाली।

अपस्यु:- सोच लो फिर, अभी तुम्हारे छछूंदर का एंगेजमेंट होने में अब भी 1 घंटे की देर है और वो देखो बापू को, जिंदल के साथ बातचीत कर रहे है। ये अपना बार जिंदाबाद.. यहां तो 24 घंटे खुला रहता है।

ऐमी:- अपस्यु आज अगर तुम्हारी नौटंकी हुई ना तो देख लेना मै क्या करूंगी।

अपस्यु:- ना तो पाने कि चाहत है और ना ही तुम्हे खोने का कोई डर है। मै भी जरा देख लूं तुम क्या करोगी… मै चला बापू के पास। बड़ा प्यार है ना आरव से तो जाओ उसका एंगेजमेंट संभालो, और हां जो करना हो वो कर लेना..

"सुनो अपस्यु, अरे सुनो तो.. मत जाओ.. देखो मै माफी मांगती हूं… प्लीज… आरव तो तुम्हारी जान है ना.. रूको तो"…. "ऐमी हम दोनों जुड़वा है, उसकी और मेरी लड़ाई तो ऊपरवाला लिखकर नीचे भेजा है, मै तो चला"…. "सुनो तो अपस्यु, प्लीज ना। पागल कहीं के आज अगर नौटंकी किए तो देख लेना मै भंडा फोड़ दूंगी की तुम नशे में नहीं होते हो। ओए छोटी आंख वाले सुन"….
 
एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल

  • 1 1/2 ounces vodka
  • 1 1/2 ounces brandy -- brandy
  • 1 teaspoon sherry
  • 1 1/2 ounces Brut champagne
 
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