Romance भंवर (पूर्ण) - Page 61 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Hahaha .. sablog kahani ke gufi ko dekho re baba ... Kyon bechare garib mod ko troll karne me lage ho .. mera ek kabhi kabhar wala reader @guff kamti ho jayega :D

:thanks: for your awesome wala dil jhumping jhapak response :toohappy: 🪨.. sath bane rahen aur comment karte rahen.. 🌹
 
Mujhe to Night Warrior aur Addicted ka naam nahi pata wrna unhe to main ramu kaka wala role deta ..

Ab baat achi ho ya kharab ho gayi hat nahi sakti :D .. waise b kahani me guffi tab aaya tha jab wo mod nahi tha aur PARADOX aka Pradeep tab aaya jab wo mod tha... Ye mere kahani ka prakop hai.. pradeep mod na raha aur guffi mod ban gaya :D

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Update:-87

नंदनी पूरी भीड़ को वापस भेजती हुई कहने लगी… "इसने जो भी गलत किया है उसका पूरा भुगतान के बाद ही इसे निकालूंगी। आप सब यहां से जा सकते हैं।"

सबको वापस भेजने के बाद नंदनी ने इशारा किया और दोनों को ऊपर खींचा गया, इतने में कुंजल अंदर से डंडा निकालकर लेे आयी और नंदनी ने श्रेया को वहीं कुछ देर रुकने के लिए बोली…

दोनों को हॉल में लेकर आया गया। सब लोग गांव के पंच की तरह कुर्सी में बैठे थे और दोनों गुफी और प्रदीप नीचे किसी मुजरिम की तरह अकडू बैठे हुए थे। वहीं आरव अपने हाथ में डंडा लिए दोनों के गोल-गोल चक्कर लगा रहा था।

नंदनी:- श्रेया क्या कह रही थी तुम, दोनों के बारे में, जरा एक-एक करके इनकी गलती बताना।

गुफी:- मैम दीदी जी को क्यों कष्ट करने कह रही हैं, मैं यह काम जल्दी में खत्म कर सकता हूं।

तभी पीछे से एक डंडा गुफी की पीठ पर और वो बेचारा छटपटा कर रह गया। इतने में प्रदीप जो कुछ कहना चाह रहा था, वो अपनी बात अपने हलख के अंदर निगलते हुए चुपचाप सामने देखने लगा..

नंदनी:- आरव सजा बराबर मिलनी चाहिए..

नंदनी का ऐसा कहना था और एक डंडा प्रदीप के पीठ पर भी पड़ गया। बेचारा छटपटाते हुए यहीं सोच रहा था, कम से कम बोलकर ही मार खा लेता।

कुंजल:- भाई वैसे दोनों की शक्ल और ड्रेसिंग स्टाइल पर गौर किया क्या आपने। पहनावे और चेहरे से तो ये दोनों किसी ऑफिस में काम करने वाला डिसेंट कर्मचारी लगते है।

कुंजल का इतना कहना था कि स्वस्तिका ने उसे एक तमाचा देते हुए नंदनी से कहने लगी… "मां आप आगे देखो, इसको मैंने आप की तरफ से थप्पड दे दिया है।"..

सबके बीच थप्पड पड़ने से गुस्साई कुंजल ने पीछे से स्वस्तिका के लंबे बाल को पकड़ कर पूरा खींच दी। जैसे ही वो बाल खींची पीछे से लावणी और साची के जोड़-जोड़ से हसने की आवाज़ आने लगी और सामने बैठे ये दोनों गुफी और प्रदीप भी अपना मुंह दबाए हंस रहे थे। इसके पूर्व जब कुंजल ने स्वस्तिका का बाल खिंचा तो उसके हाथ ने स्वस्तिका का पूरा बाल ही चला आया और उसे बाल के नीचे स्वस्तिका के छोटे-छोटे असली बाल दिखने लगे।

नंदनी अपना सर पिटती हुई कुंजल और स्वस्तिका को कमरे में जाने के लिए बोल दी। वहीं साची, लावणी और श्रेया को भी अपने घर भेज दी। अब वहां बचे थे सिर्फ 4।

आरव:- इनका क्या करें मां। इतने दिनों में आज तक ना हम किसी पड़ोसी के पास गए और ना उन्हें कभी हमारे पास आने की जरूरत पड़ी, इनकी वजह से आज सब हमसे झगड़ा करने पहुंचे थे।

प्रदीप:- सर वो सब तो आप लोगों से वैसे भी जलते है, बस उन्हें आपके साथ झगड़ा करने का मौका चाहिए था। प्लीज, प्लीज, प्लीज, मारना मत।

गुफी:- हां ये सही कह रहा है मैम ।

"रुका क्यों है मार दोनों को एक-एक डंडे"… नंदनी के आदेश पर पुनः डंडे चल गए। इधर दोनों छटपटा रहे थे उधर नंदनी अपनी बात आगे बढ़ाती हुई…. "मेरे पड़ोसी या अपार्टमेंट वाले मुझसे क्या बैर रखते हैं, वो मै समझ लूंगी, बात तो अभी ये है को तुम्हारी इतनी गन्दी हरकतों पर क्या सजा दी जानी चाहिए।"..

गुफी:- बीवी तो पहले छोड़कर भाग गई है, इससे बड़ी और क्या सजा होगी?

प्रदीप:- अरे गुफी भाई, भाभी के याद में आशु बाद में बहा लेना, पहले अपनी जान तो बचाओ। मैम हम दोनों सजा के लिए तैयार हैं लेकिन अभी आप ने हमारा पक्ष नहीं सुना है।

आरव:- जरा शॉर्ट में समझा अपना पक्ष।

गुफी:- इस फ्लोर के आखिर में है सक्सेना फ़ैमिली। वहां का फ्लैट ऑनर 2 रात जबरदस्ती हमारे क्वार्टर में घुसकर दारू पिया और हमे खूब गालियां दिया। 1 दिन छोड़ दिया, दूसरे दिन बर्दास्त किया लेकिन तीसरे दिन धक्के मारकर निकाल दिया।

प्रदीप:- नीचे के फ्लोर पर है जुनेजा फैमिली। वहां की एक पागल लड़की को हमारा क्वार्टर 3 घंटे के लिए चाहिए था, जिसके वो पैसे भी ऑफर कर रही थी। ये जिस लड़की से आप बात कर रही थी उसका भाई और भी 8-10 लोग हैं जिनमें तो कुछ शादीशुदा भी है, उन्हें भी क्वार्टर कुछ घंटों के लिए चाहिए था।

गुफी:- कुछ लोगों को तो लंबोर्गिनी चलानी थी वो भी आप के जानकारी के बिना। तो कुछ लोगों का काम हमने नहीं किया था तो अपनी-अपनी गाडियां ऐसे पार्क करते थे, कि जगह ही नहीं बचे। शुरू के 4-5 दिन इन लोगों ने हमे बहुत परेशान किया, फिर हमने भी बदला ले लिया।

नंदनी:- हम्मम ! और वो जो तुम उस कामवाली के साथ कर रहे थे वो क्या था फिर।

प्रदीप:- हम उसे भी उसके कर्मों की सजा दे रहे थे।

नंदनी:- बातें तो बड़ी बड़ी करते हो, कर्मों की सजा, जैसा किया उसका बदला लिया। अब ये बताओगे की कैसे उसके कर्मों की सजा दे रहे थे?

गुफी ना में इशारा कर रहा था और प्रदीप उसकी बातों को समझ नहीं पाया और बोलता चला गया…. "वो काम वाली के चक्कर में आपकी ऑडी कार को 30000 रुपए के लिए गिरवी रखना पर गया।"…. प्रदीप ने जैसी ही यह बात बोली, आरव कुछ हरकत में तो आया लेकिन नंदनी अपने इशारे से शांत खड़े रहने के लिए बोलकर, प्रदीप को बात पूरी करने बोली… प्रदीप भी अपनी बात पूरी करते हुए कहने लगा… "उस कामवाली सरोजा ने गुफी से शादी का वादा करके 50000 रुपए ऐठ लिए और अब नाटक कर रही है। गुफी भाई ने एक दिन उसके जुग्गी पहुंच गए पैसे मांगने, वहां सरोजा के कुछ लोगों ने गुफी को बहुत पीटा भी था।"

नंदनी:- हम्मम ! तो ये बात है। आरव इस गुफी को 4 डंडे मार पहले, सबके सामने उसकी नीच हरकत के लिए। अब ये बताओ तुम्हारी जुबान कि क्या कहानी है।

गुफी:- मैम अब कोई गाली खाने लायक काम करेगा तो गाली ही दूंगा ना।

नंदनी:- तुम अब तक इसे मारे नहीं। उधेड़ दो इस गुफी की पीठ और काम से बाहर निकालो।

गुफी नंदनी के पाऊं पकड़ते… माफ़ कर दीजिए मैम प्लीज माफ़ जर दीजिए।

नंदनी:- पाऊं छोड़ो मेरा और ध्यान से सुनो, किसने तुम्हारे साथ क्या किया उसके बदला लेने का मतलब यह नहीं कि तुम बदले के आड़ में किसी औरत को पब्लिक में ऐसे छेड़ो या फिर गालियां देते रहो। पहली और आखिरी बार कह रही हूं, गांठ बांध लो ये बात। आरव हमारे लोगों को जिस-जिस ने नौकर समझा है, उसे उसके किए की सजा कल ही मिल जानी चाहिए। और कहीं ये दोनों झूठे निकले तो इनकी जुबान काटकर इन्हे काम से निकाल देना।

आरव दोनों की इशारे करते… चलिए सर मज़े कीजिए। मां मै जरा कमरा भी देख आऊं इनका…

दोनों आगे-आगे और आरव पीछे पीछे… तीनों क्वार्टर में जैसे ही पहुंचे…. "क्यों बे तुम लोगों ने सच कहा था या बचने के लिए कोई कहानी गढ़ी थी।"

प्रदीप:- ये साले पैसे वाले बिना मतलब के किसी को टोकते भी है क्या भाई? वैसे भी मैम थी तो हमने बहुत फिल्टर करके बताया वरना हमारे क्वार्टर को तो कुछ लौंडे आयाशियों का अड्डा बनाना चाहते थे, खासकर वो जो लड़की थी ना श्रेया उसका भाई। ठीक उसके फ्लैट से लगा है हमरा क्वार्टर तो उसकी नजर ज्यादा थी।

गुफी:- अरे वो उसकी गर्लफ्रेंड जो है जुनेजा फैमिली वाली उसका भी तो बताओ।

प्रदीप:- हां भाई वो भी। वो जो लड़की है, वो तो आपके पड़ोसी को तो फसाए है उसके अलावा एक और बाहर के लड़के को फसाए है। उसे भी अपने आईयाशियों के लिए कमरा चाहिए था। मदर.. सॉरी भाई, अब ऐसे में गाली नहीं निकले तो क्या निकले, लगभग 2 कुंवारों के सामने कोई ऐसे करने की बात करे सोचो हम पर क्या बीतती होगी।

गुफी:- लेकिन हमने किसी को भी इस क्वार्टर में घुसने तक नहीं दिया। 30000 के ड्राइवर की नौकरी और रहना कौन आजकल देता है।

आरव:- हम्मम ! समझ गया मै। चलो रिलैक्स हो जाओ लड़कों। कल इस पूरे अपार्टमेंट को ही सजा मिलने वाली है।

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आज की सुबह ही फ्लैट लैंड की थी और सबके साथ पार्थ और वीरभद्र भी थे। नंदनी ने काफी कोशिश की, लेकिन पार्थ, वीरभद्र के साथ राजस्थान के लिए निकल गया। दोनों दिल्ली से जयपुर फ्लाइट से पहुंचे और उसके आगे जयपुर से उदयपुर और उदयपुर से उसके गांव तक का सफर कार से करनी थी।

लगभग शाम हो चुकी थी दोनों को पहुंचने में। उदयपुर से लगे होने के कारन वीरभद्र के गांव में सभी सुविधाएं थी यदि तुलना करें सुदूर के गांव से। कच्चे-पक्के मकान के बीच एक खूबसूरत बिल्डिंग भी दूर से दिखने लगी।… "वीरे, तेरे गांव के मुखिया का घर है क्या वो?"

वीरभद्र:- अरे नहीं भाई वो हमारा घर है।

पार्थ:- क्या छोड़े तू तो बड़ा अमीर निकला।

वीरभद्र:- यह तो मेरे गुरुदेव आरव की असीम कृपा है जिनके वजह से यह मकान खड़ा हुआ है। अभी तो हमरा गृह प्रवेश भी नहीं हुआ है.. अपने आने का सबको पहले से बता दिया था इसलिए कल ही गृह प्रवेश की पूजा भी रखी है। बस यहां पंडित के ही आने का बहुत बड़ा लफड़ा है।

पार्थ:- इसमें इतनी चिंता की क्या बात है, तेरे साथ है तो पंडित। मै गृह प्रवेश करवा दूंगा लेकिन उसके लिए 21121 रुपया लूंगा।

वीरभद्र:- हाहाहाहा.. क्यों मज़ाक कर रहे हो भाई।

पार्थ:- तू क्या पागल है। मै तो शादी से लेकर सारे कर्मकांड की पूजा करवाता हूं। यूरोप में तो ये मेरा पार्ट टाइम बिजनेस था।

वीरभद्र:- ठीक है भाई फिर आप ही पूजा करवा देना। भाई एक काम और था?

पार्थ:- हां वीरे बोल ना..

वीरभद्र:- क्या आप मेरी बहन निम्मी को थोड़ा अंग्रेजी सीखा दोगे। क्या है कुछ दिन बाद दिल्ली जाएंगे तो सोच रहा था कि सबको अपने साथ ही रखूं। अकेले मज़ा नहीं आता रहने में। फिर अंग्रेजी सीख जाएगी तो सहर के हिसाब से पढ़ा लिखा लड़का मिल जाएगा, वरना मेरी मां की तरह उसकी भी ज़िन्दगी गांव में बीत जाएगी।

पार्थ:- एक बात बता फिर जो हमने 10000 डॉलर का खर्चा करके तेरे लिए प्रेसनलाइटी डेवलपमेंट वाली जो टीचर रखी, उसने कुछ नहीं सिखाया क्या?

वीरभद्र कहीं गुम होते… "वो तो कमाल की टीचर थी भाई, ऐसे टीचर पहले मिली होती तो मैं इंग्लिश क्या फ्रेंच रशियन और चाइनीज भी सीख जाता।"

पार्थ:- बस कर लौंडे कहां उस बेचारी को तू नंगे इमेजिन करने लगा। साले गुरु-शिष्य का रिश्ता खराब कर दिया।

वीरभद्र:- क्या भाई, मैंने कोई रिश्ता खराब नहीं किया। वो मुझे सेक्स एजुकेशन दे रही थी और मैं सीख रहा था।

पार्थ:- साले पोर्न एजुकेशन कहते हैं उसे, सेक्स एजुकेशन नहीं।

वीरभद्र:- बस करो भाई, अब वो दौड़ गुजर गया है। लो हम पहुंच गए।

वीरे जैसे ही पहुंचा बैंड बजने लगे। ऐसा लग रहा था पूरा गांव उठकर उसके स्वागत के लिए पहुंच चुका हो। लोग फूल-माला डालकर स्वागत कर रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे कोई नेता पहुंचा हो। वीरभद्र के साथ-साथ पार्थ का भी स्वागत हुआ। दोनों को बीच सभा में बिठाया गया और उसके पास में गांव का मुखिया।

अबतक तो पार्थ को समझ में नहीं आया कि ये आखिर इन गांव वालों को हुआ क्या है, लेकिन जैसी ही उस सभा में वीरभद्र से गांव की पंचायत के लिए 1 लाख की मांग हुई, पार्थ को पूरी कहानी समझ में आ गई। वीरभद्र ने भी बिना दोबारा उनके मांगे 1 लाख रुपए पंचायत को दान कर दिए, साथ में 50000 वहां पर कॉलेज लाने के प्रयत्न कर रहे लोगों के लिए अनुदान दिया, जो गांव के लिए मेहनत कर रहे थे।

पैसा मिलते ही वीरभद्र की जय जयकार करते सारे गांव वाले वहां से निकले। उनके निकलते ही वीरभद्र, पार्थ के साथ एक छोटी सी गली के रास्ते, उस बड़े बंगलो के पीछे जाने लगा, जहां कुछ कच्चे मकान बने हुए थे। छोटी सी गली से जैसे ही दोनों थोड़ा आगे बढ़े.. अल्हड़ सी एक लड़की, घाघरा चोली पहने, रास्ता रोके खड़ी थी। ऐसा लग रहा था अभी-अभी धूल मिट्टी में नहा कर आयी हो। ऊपर से नीचे तक पूरे धूल में वो डूबी नजर आ रही थी।..

वीरभद्र:- क्या हुआ आज घर नहीं जाने देगी क्या मुझे..

तभी मां संकुंतला आरती की थाली लिए, ठीक उसके पीछे खड़ी होकर कहने लगी… "रास्ता छोड़ ना अपने भाई का, अभी तो वो आया है, अभी ही जाकर लाडवा दे सबसे।"..

वीरभद्र:- निम्मी देख हमारे साथ मेहमान आए हुए है। इन्हे ऐसे खड़ा करना अच्छा नहीं लगता।

"जबतक आप बदला नहीं लेते तबतक मै प्रतिशोध की आग में जलती रहूंगी। और जबतक ये प्रतिशोध की ज्वाला जलेगी, तुम्हारी बहन अन्न का एक निवाला नहीं लेगी।".. निम्मी अपनी बात कहती दोनों का रास्ता छोड़कर वहां से सीधा एक कच्चे मकान में घुस गई और धड़ाम से दरवाजा बंद कर लिया…

क्या तेवर थे.. पार्थ जब उसे सुना तो सुनकर ही दंग रहा गया। बिल्कुल किसी तेज छुड़ी की तरह जुबान और आखों में कोई रहम ना बची हो जैसे। क्या एटिट्यूड था, अपनी बात कहकर सीधा अपने कमरे में…

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रात के 8 बजे ऐमी उस कार्गो की डिलीवरी लेकर खोलने में व्यस्त थी, जिसकी शॉपिंग अपस्यु ने यूएसए में किया था। वो अपने स्टोर हाउस में अभी पार्सल खोलना शुरू ही की थी, तभी उसके फोन की घंटी बजी…

"हेल्लो नील"… ऐमी कॉल उठकर बोली..

नील:- तुम्हे पता भी है कुछ यहां मेरे साथ क्या हो रहा है? तुमसे यह उम्मीद नहीं थी ऐमी।

ऐमी:- क्या हो गया मेरे बेबी को? आज बहुत उदास लग रहा है।

नील:- तुम मुझसे अभी मिलो ऐमी? प्लीज आ जाओ बहुत कुछ है जो तुम्हे बताना है। आई मिस यू माय लव।

ऐमी:- ठीक है बेबी, कहां आना है बताओ…

नील:- मेरे सुनसान और वीरान घर में ऐमी, और कहां आओगी?

ऐमी:- ठीक है बेबी, अब वो घर सुनसान और वीरान नहीं होगी। 1 घंटे में तैयार होकर पहुंचती हूं।

नील:- सुनो स्वीटहार्ट, मेरे पास आने के लिए तुम्हे तैयार होने की जरूरत नहीं, जिस हाल में हो निकल आओ। आई रियली नीड यू।

"ठीक है बाबा समझ गई.. बस अपनी नीड को जरा संभालो, मै 10 मिनट में पहुंच रही हूं… लव यू स्वीटी।"…
 
Dekhiye ab driver ka kya chakkar hai wo to update se clear hoga ya fir normal hi rahega .. sambhawnayen kuch bhi ho sakti hai ...

Baki haliya update me bahut kuch clear ho jayega .. so sath bane rahiye ...

:thanks: for your support
 
Kisi miss naina ka hair style copy kiya hai swastika ne ... Aur haan pure defective aur disinfective pieces hai udhar ... Dekhte jaeye batate jaeye :woohoo:

:thanks: for your support
 
1) kiya kyon uske bere me to puri kahani chal rahi hai ...

2) bataya kyon kyonki jo chahiye tha wo achieve ho gaya simple

:thanks: for your support
 
Sawal adhura hai .. yadi ye confusion hai ki vikram and Nandni face off kyon ni to simple reply hai .. is waqt Apasyu ready ni hai

:thanks: for your support
 
Veere ki bahan Nayi taja entry hai dekhiye kya hota hai .. baki ab to update aa he raha hai.. milkar pata kar lete hain ki ye neel ka kya chakkar hai

:thanks: for your support
 
Update:-88

"ठीक है बाबा समझ गई.. बस अपनी नीड को जरा संभालो, मै 10 मिनट में पहुंच रही हूं… लव यू स्वीटी।"…

कृपाल सिंह, उन हत्यारों में से एक, जिसने जून 2007 की उस रात कई मासूमों को जिंदा आग में झोंक दिया था, उसी का बेटा था यह नील, जो दिल्ली में रहकर पढ़ाई करता था। नील वहीं लड़का था जो होटल रेडिएशन के डस्को में अपस्यु के हाथों मार खाया था।

कुछ हद तक तो उसका ऐमी को हाथ लगाना अपस्यु को खल गया, लेकिन उससे भी बड़ी वजह यह थी कि अपस्यु….. भूषण और जमील के कत्ल के बाद हर किसी को अपने शिकार पर से ध्यान हटाने और पीछे हटने का संदेश दे चुका था लेकिन ऐमी उसके बावजूद अपने कामों में लगी हुई थी।

उन चार तुचों के कत्ल से उनके सरगना को कोई फर्क तो पड़ना नहीं था, लेकिन उन तूचों के वारिशों के दिल में क्या आग लगी है बस ये जानने के इरादे से ऐमी, नील से मिलने निकल गई।

जैसे ही वो उसके घर के अंदर पहुंची अंदर पूरा अंधेरा था… "नील, नील"..

नील:- यहीं बैठा हूं आ जाओ।

ऐमी:- कुछ रौशनी तो करो, यहां तो पूरा अंधेरा है।

नील:- अब तो ये ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है ऐमी, लेकिन तुम कहती हो तो रौशनी कर देता हूं।

"क्या हुआ ? तुम ऐसी हालत में?"… ऐमी, नील के पास पहुंचती हुई कहने लगी।

नील, रोते हुए कहने लगा… "कितना अभागा हूं मै ऐमी, मेरे पापा एक हादसे में मर गए और लाश तक नहीं मिली उनकी क्रियाक्रम के लिए। उनकी आत्मा को तृप्ति कैसे मिलेगी?"

नील, ऐमी के गोद में सर रखकर रोने लगा और ऐमी उसे सांत्वना देती हुई पूछने लगी…. "लेकिन ये हादसा हुआ कैसे?"

नील:- पापा अपने दोस्तों के साथ किसी कि एंगेजमेंट में यूएसए गए हुए थे। उसी होटल के बाहर 30 माले की बिल्डिंग से जेनरेटर उनकी कार पर गिरा और उनके साथ 3 और लोग मारे गए।

नील:- कितना अजीब है ना नील 30 माले की बिल्डिंग के ऊपर रखा जेनरेटर होटल से नीचे गिर जाता है, जो कि यूएसए जैसी जगह का होटल है, जहां सुरक्षा के सारे पैमाने सही-सही आंकते है। अपने यहां जो सेफ्टी मजर्स पर कोई ध्यान नहीं देते, उनके होटल कि छत से गमला तक नहीं गिरता और वहां पूरा जेनरेटर गिर गया। स्ट्रेंज नहीं…

ऐमी की बात सुनने के बाद नील चौंककर बैठ गया। अपने आखों से आंसू पोंछते हुए ऐमी से कहने लगा… "ठीक है तुम जाओ, मै बाद में मिलता हूं, अभी मुझे कुछ जरूरी काम निपटाने हैं।

ऐमी:- लेकिन बेबी तुम्ही ने यहां पर बुलाया था ना, अचानक से क्या हुआ तुम्हे…

नील:- कहा ना जाओ अभी.. मेरा बाप मरा नहीं मारा गया है। इसका बदला तो मै लेकर रहूंगा।

ऐमी:- नील मैं एक मशहूर वकील की बेटी हूं। एक बात अच्छे से कह सकती हूं, जिसने भी यह किया है वो कोई आम कातिल नहीं, बल्कि बहुत पहुंच वाला होगा। क्योंकि यूएसए में उसने इंडियन एंबेसी मैनेज कर लिया, एक पूरा मर्डर मैनेज कर लिया.. जो भी करना सोचकर करना।

नील:- थैंक्स ऐमी, मै समझ गया कि मुझे क्या करना है और कैसे करना है। बस कभी-कभी मै फसुं तो यूं ही मुझे सही रास्ता बताना। अभी तुम जाओ मुझे अब बहुत से काम करने है..

ऐमी बाहर निकलकर अपने कार में जैसे ही बैठी, जोर-जोर से हंसती हुई खुद से ही कहने लगी…. "लव यू सर, कहां रह गए जल्दी आ जाओ अब दिल नहीं लगता तुम्हारे बिना।"…

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राजस्थान.. वीरभद्र का गांव….


वीरभद्र निम्मी की हरकत पर थोड़ा चिढ़ गया। साथ में कौन आया है, उसका भाई कितने दिनों बाद आया है, ये सब जानने के बदला, अपना बचपना लेकर जिद पर अड़ी थी। खैर निम्मी के रास्ता छोड़ते ही पार्थ और वीरभद्र थोड़ा आगे बढ़े और सकुंतला दोनों की आरती उतार कर स्वागत की।

धूल मिट्टी और थकान से भड़ा सफर। पार्थ सबसे पहले नहाना ही जरूरी समझा। संकुंतला पार्थ को हुसल खाने के ओर ले जाने लगी और वीरभद्र अपनी बहन के कमरे जाते ही… "तुम्हे जरा भी तमीज नहीं है, किस वक़्त कैसे पेश आते है।"

निम्मी:- मुझे कुछ नहीं सुनना है, ये बताओ कि तुम उसका मुंह तोड़ोगे या नहीं।

वीरभद्र:- किससे झगड़ा करके आयी है?

निम्मी:- वृज किशोर और उसकी जोरू से। वृज किशोर की जोरू कमला मुझसे कहती है वो मेरी शादी अपने भाई से करवाएगी। इसपर मैंने भी दोनों को सुना दिया। अब तुम आ गए हो तो मेरा बदला लो।

वीरभद्र खींचकर उसे एक थप्पड लगाते हुए…. "तू भैय्या और भाभी से झगड़ा कर आयी है, और मुझसे उनका मुंह तोड़ने कह रही है। देख निम्मी अपनी ये बचपना बंद कर दे। और कान खोलकर सुन ले मेरे साथ बहुत ही खास मेहमान आए है, जो तुझे अंग्रेजी भी सिखाएंगे, इसलिए उनके सामने जरा अच्छे से पेश अना।

वीरभद्र की बात पर निम्मी अपना गुस्से से भड़ा चेहरा दूसरी ओर घुमा लेती है और वीरभद्र अपनी बात कहते हुए वहां से निकल जाता हैं। दोनों ही थके थे सो वीरभद्र भी चला गया नहाने के लिए। कुछ देर बात करने के बाद वीरभद्र अपने कमरे में चला गया सोने और पार्थ जिद करके बाहर चारपाई पर ही सो गया।

अंधेरी गहरी रात और खामोश इलाका। पार्थ आखें मूंदे सोया हुआ था, तभी उसने अपने ओर बढ़ रहे चाकू वाले हाथ को पकड़ा और कलाई को मोड़कर पीछे कमर तक ले जाते, उसने हमलावर को अपने ऊपर खींच लिया। जैसे ही हमलावर पार्थ के उपर आयी उसे स्त्री के होने का आभास हुआ और वो उठकर बैठ गया।

हमलावर वीरभद्र की बहन निम्मी थी, जिसे पार्थ ने अभी-अभी छोड़ा था और वो भी तेजी के साथ उठकर खड़ी हो गई… "तुम मुझ पर हमला क्यों कर रही थी"… पार्थ निम्मी को देखते पूछने लगा।

निम्मी:- शहरी बाबू यहां कदम कदम पर खतरा है, बेहतर यह होगा कि यहां से भाग जाओ।

पार्थ:- उसके लिए तुम मुझ पर चाकू से वार करने आयी थी।

निम्मी, अपने चाकू के धार पर अपना अंगूठा फेरती हुई…. "अभी तो बस ये एहसास करवाने आयी थी कि थोड़ा सचेत होकर सोया करो, वरना गला भी कट सकता है।

पार्थ उसकी बातों पर हंसते हुए पूछने लगा… "और क्या मै जन सकता हूं कि मेरा गला काटने की तैयारी क्यों हो रही है?

निम्मी:- क्योंकि वीरे बहुत बदल गया है। उसकी भाषा बदल गई, उसकी चाल बदल गई और तो और उसकी आदत को भी बदल गई तुम्हारे यहां होने की वजह से। खून बहने वाला मेरा भाई, आज मुझ पर ही गुस्सा होकर हाथ उठा दिया।

पार्थ, निम्मी को उसके बातों से भटकाते हुए पूछने लगा…. "तुमने खाना खाया?"

निम्मी:- मजाल है जो कोई खाना खिला दे मुझे, जबतक उस वृज किशोर का मुंह ना तोड़ दूं, तबतक खाना नहीं खाने वाली।

पार्थ:- ठीक है चलो।

निम्मी:- कहां

पार्थ:- मुंह तोड़ने..

निम्मी:- रहने दो सहरि बाबू, तुमलोग कांच के बने होते हो। पकड़े गए ना तो ऐसा तोड़ेंगे की फेवीक्विक से भी ना जोड़े जाओगे।

पार्थ:- हां तो अच्छा ही है ना, तुम्हे मारने कि जरूरत नहीं होगी। लेकिन कहीं मै उसका मुंह तोड़ने में कामयाब हो गया फिर..

निम्मी:- फिर क्या आराम से वापस आकर चारपाई पर सो जाना, समझो खतरा टल गया।

पार्थ:- नाह ये प्रस्ताव मुझे पसंद नहीं आया कुछ और ऐसा बताओ जो मुझे सच में पसंद आए..

निम्मी:- मै खूब समझती हूं साहरी बाबू.. सुनो मै कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं जो तुम्हारे बातों के जाल में फांस जाऊं। वैसे भी तुमसे मैंने मदद नहीं मांगी है लेकिन करोगे तो मना भी नहीं करूंगी। बस बात खत्म।

निम्मी की बात सुनकर पार्थ की हंसी बंद नहीं हो रही थी। पार्थ ने निम्मी को आगे का रास्ता दिखाने कहा, और निम्मी उसे लेकर अपने चचरे भाई के दरवाजे पर पहुंच गई। वृज बाहर ही चारपाई पर सो रहा था, निम्मी इशारों में पार्थ को बता दी और पीछे अपने घर के रास्ते पर खड़ी होकर पार्थ के एक्शन का इंतजार करने लगी।

पार्थ ने भी बिना आगे की सोचो वृज के मुंह पर एक घुसा जड़ते हुए उसका मुंह तोड़ दिया। इधर जैसे ही उसका मुंह टूटा निम्मी कल्टि होकर सीधा गई और खाने पर टूट गई। इधर वृज दर्द से छटपटाते हुए उठा और अपना मुंह पकड़ कर बैठ गया। उसकी पत्नी जो अंदर सो रही थी बड़े ही अचेत अवस्था में कमरे से भागकर बाहर आयी और सामने किसी मर्द को देखकर वापस अपने कमरे में भागकर खुद के कपड़े ठीक करने लगी।

वृज काफी गुस्से में पार्थ को घूरते हुए उसे मारने के लिए बढ़ने लगा तभी पार्थ अपने दूसरे हाथ में रखे सांप को दिखाते हुए कहने लगा… "जान बच गई तुम्हारी वरना आज तो गए थे काम से।"..

जहरीली नस्ल के सांप को देखकर उसकी पत्नी और वृज दोनों चौंक गए… "तुम कौन हो परदेशी और यहां क्या कर रहे हो।"

पार्थ:- मै वीरभद्र के साथ आया हूं, शायद उस सभा में देखा हो तुमने मुझे, जहां वीरभद्र पंचायत के लिए पैसे दे रहा था।

कमला:- बाबूजी उस घर में एक एक पागल लड़की है आप जरा बचकर रहिएगा, पूरा गांव को सर पर उठाए रहती है पागल।

वृज:- कमला तू पागल हो गई क्या? नहीं बाबूजी ऐसी कोई बात नहीं है, वो तो हम सबकी लाडली है इसलिए थोड़ा बचपना है अभी। उसी से तो इस जगह की रौनक है।

राधिका:- हां दूध ही पीती बच्ची है अबतक। जब वीरे आएगा मुंह तोड़ने तब पता चलेगा। जैसी बहन वैसा भाई।

वृज:- तू लगाई बुझाई में मत रह। जाकर बाबूजी के लिए कुछ लेकर आ।

पार्थ उन दोनों को माना करके वहां से निकल तो आया लेकिन रात के अंधेरे में वो रास्ता भटक गया। बहुत ढूंढ़ने के बाद भी उसे घर की गली नहीं मिली, अतः मजबूरन उसे वापस फिर वृज के पास आना परा। जब वो वापस आया तब वृज घोड़े बेचकर सो रहा था और कमला अपने दरवाजे के बाहर बैठी हुई थी… "क्या हुआ बाबूजी"…

पार्थ:- कुछ नहीं बस वो रास्ता भूल गया था इसलिए इन्हे साथ चलने कहने आया था।

कमला:- आइए बाबूजी मेरे पीछे।

कमला आगे-आगे चल रही थी और छोटे-छोटे सवाल पार्थ से पूछ रही थी, जिसका जवाब वो भी देते चल रहा था। जैसे ही पतली गाली आयी, कमला ने पार्थ को दीवार से सटा दिया और उसके ऊपर लदती हुई अपने छाती को पूरा पार्थ के सीने से चिपकते कहने लगी… "मुझे पता है बाबूजी की वहां कोई सांप नहीं था, आप वो कुतिया निम्मी के कहने पर मेरे मरद का मुंह तोड़े हो।"

पार्थ, उसे अपने ऊपर से हटाते हुए कहने लगा…. "ये तुम क्या कर रही हो, तुम जाओ यहां से मै चला जाऊंगा।"

कमला:- अभी तो जा रही हूं लेकिन कल रात 12 बजे के बाद मुझे यहीं मिलना, एक काम तुमने निम्मी के लिए किया, अब एक काम कल मेरे लिए करना होगा?

पार्थ बड़े ही आश्चर्य से पूछने लगा… "कैसा काम"..

कमला हंसती हुई कहने लगी.. "वही मर्दों वाला काम".. और हंसती हुई वहां से वापस लौट गई। पार्थ थोड़ी देर तक वहीं घोर आश्चर्य में खड़े रहने के बाद खुद से ही कहने लगा… "इतनी शॉर्ट मुलाकात में अमेरिकन ना पटे, कमाल है… यहां का गांव तो काफी तरक्की में है। मुझे क्या, ख्वाहिश है, पूरी कर देंगे।"…

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रात के तकरीबन 1.30 बज रहे थे, आरव लावणी के कॉल पर बस सबके सोने का इंतजार कर रहा था। कुंजल और स्वस्तिका के बीच का नोक झोंक कुछ लंबा ही खींच गया, और देर हो गई। तकरीबन 1.30 बजें लावणी से मिलने आरव चोरी से निकला।

छिपते-छिपाते लावणी के कमरे में पहुंचा। अंदर का माहौल काफी डरावना था। अंधेरा कमरा और कम्बल को सर पर ओढ़े लावणी, बैठकर टीवी पर हॉरर फिल्म देख रही थी। वो इतना मगन थी कि कब दरवाजा खुला और कब आरव अंदर पहुंचा पता भी नहीं चला। आरव उसके करीब बैठते कम्बल समेत अपने बाहों में जैसे ही समेटा, सामने हॉरर पिक्चर ऊपर से स्क्रीन पर पूरा थ्रिलिंग माहौल, बाहों में लेने के साथ ही जोर कि चींख निकल गई। चींख सुनते ही बाथरूम का दरवाजा खुला और अंदर की रौशनी में पता चला लावणी तो उधर है।

आरव झटके से बिस्तर से खड़ा होकर नजर उस ओर दिया जहां अबतक वो कम्बल में लावणी को बैठे समझ रहा था, कम्बल हटा तो पता चला साची बैठी हुई है, और साची के तेज चींख के साथ ही बाहर के हॉल में भी लोगों कि चहल कदमी शुरू हो चुकी थी….
 
Aisa kaise aise parakh wale jawab ka main kayal ho gaya .. bilkul aisa laga jaise humari soch milti hai .. pk bhai.. mujhe to shak ho raha hai ki aap naam ke tarah kahin sach me wo alian wale to pk nahi jo post padh kar sab samjh jaye.. wowwwwwwww 🙇 🙇 🙇
 
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