Update:-89
आरव झटके से बिस्तर से खड़ा होकर नजर उस ओर दिया जहां अबतक वो कम्बल में लावणी को बैठे समझ रहा था, कम्बल हटा तो पता चला साची बैठी हुई है, और साची के तेज चींख के साथ ही बाहर के हॉल में भी लोगों कि चहल कदमी शुरू हो चुकी थी….
जैसे ही हॉल से लोगों का कमरे के ओर आने लगे, आरव झट से जाकर बाथरूम में छिप गया। अनुपमा और सुलेखा आते ही चिल्लाने का कारन पूछने लगी… साची सामने स्क्रीन दिखाती हुई कहने लगी…. "सीन डरावना हो गया था इसलिए चींख निकल गई।"..
सुलेखा:- रात को अंधेरा करके ऐसे भूतों कि पिक्चर देखोगी तो यही होना है। बंद करो टीवी और सो जाओ दोनों बहन।
अनुपमा:- सोएंगी थोड़े दोनों, अभी तो पूरा खत्म करके ही सोएंगी…
साची:- नहीं हम जा रहे है सोने … गुड नाईट .. अब आप दोनों भी जाओ सोने…
सुलेखा:- चलो दीदी, सफर के थके है तो यह नहीं कि से जाएं.. देर रात तक सोएंगी और सुबह देर से जागेगी।
दोनों चली गई, कुछ देर माहौल को देखने के बाद साची ने लावणी को कमरा बंद करने का इशारा किया… "बाहर आओ रे। खबर लूं तेरा।"..
आरव बाहर आते ही साची के पाऊं में गिरते … "माफ़ कर दो दीदी, मुझे लगा लावणी है।"..
साची:- ओय छछूंदर, मुझे दीदी क्यों कह रहा है?
लावणी:- रिश्ते में आप बड़ी हुई ना, इसलिए कह रहा है।
साची कभी लावणी तो कभी आरव को देखती… "वाह बेटा !!! तो दोनों मियां बीवी मिलकर खूब रिश्तेदारी निभा रहे हो।
आरव:- ठीक है आप दोनों बातें करो मै जाता हूं।
साची:- रुक, दोनों झगड़े थे इसलिए छोड़ रही हूं। तुम दोनों रुको, मै जाती हूं, और कोई शरारत नहीं।
साची वहां से चली गई। उसके जाते ही… "वो मुझे पता नहीं चला कि साची बैठी है।"…
"अभी यहां कौन खड़ी है वो तो तुम्हे पता है ना या वो भी भूल गए।"… चेहरे पर शरारत, होटों पर मुस्कान और आखों में ढेर सारी तम्मनाओं के साथ लावणी आरव से पूछने लगी।
आरव उसके हाव-भाव देखकर उसके थोड़ा करीब जाकर उसके आखों में झांकते हुए कहने लगा… "क्या लगता है तुम्हे, क्या मै तुम्हे भूल सकता हूं?"..
"ऐसा है तो फिर इतने दूर क्यों खड़े हो।".. लावणी गहरी श्वांस लेती अपनी पलकें झपकाकर जैसे स्वीकृति दे रही हो। आरव आगे बढ़कर कमर से लावणी को खिंचते हुए, उसके मासूम से चेहरे पर आयी मुस्कान को देखने लगा।
काफी देर तक आरव लावणी को निहारता रहा। लावणी अपने बोझिल सी आखों को खोलती हुई इशारों में पूछने लगी "क्या हुआ" … "कुछ नहीं" का धीमा सा जवाब आया और आरव ने लावणी को गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके होंठ की चूमकर बिस्तर से नीचे उतरकर वहां से जाने लगा।
"रुक जाओ, मत जाओ"… लावणी की आवाज़ पर आरव दरवाजे को खोलते-खोलते रुक गया। पीछे पलटकर लावणी को देखते हुए तेजी से उसके पास पहुंचा। लावणी को बाहों में भरकर उसके होटों को चूमते हुए, उसे वापस से लिटा दिया, और खुद उसके पास लेटते हुए… "कंट्रोल बेबी, वरना मुझ से मेरे अरमान काबू नहीं होंगे।"
लावणी आरव के ओर करवट लेती उसमे सिमटती हुई कहने लगी… "काबू करने के लिए कहा भी किसने।"
"ए भुटकी, आज बात क्या है .. हां।…
"तुमसे भी हर बात कहनी परे तो फिर उन बातों में मज़ा कहां आरव।"
"हे बेबी सुनो, कोई हमे भरोसे पर छोड़ कर गया है। इसलिए किसी का भरोसा नहीं तोड़ते।"
"और मेरे एहसासों का क्या?"..
"मुझे फसाओ मत, अब इसपर क्या कहूं मै।"..
लावणी थोड़ा और आरव में सिमटती… "कुछ मत कहो, बस खामोश होकर यूं ही मेरा पास रहो। तुम्हे मेहसूस करने दो। और जब मै सो जाऊं फिर चले जाना।
"हम्मम !! ठीक है।"..
आरव लावणी के बालों में और पीठ पर हाथ फेरने लगा। लावणी अपना सर आरव के सीने से लगाए आखें मूंदे उसकी धड़कनों को सुनती हुई धीरे-धीरे नींद कि आगोश में चली गई। कुछ देर बाद जब आरव को लगा कि लावणी गहरी नींद में चली गई है, तब आरव उससे अलग हुआ और उसके माथे को चूमते वापस लौट आया।
वापस लौटकर अराव सीधा सो गया। इस बीच अगली सुबह की हलचल में नंदनी और कुंजल दोनों स्वस्तिका को घेरे बैठी थी। दोनों दाएं और बाएं से उसके "शॉर्ट ब्लोंड हेयर" को दाएं और बाएं से छु कर और ऊपर उठाकर देख भी रही थी, और हंस भी रही थी।
स्वस्तिका:- बस भी करो दोनों, इसलिए अपस्यु ने मुझे विग का आइडिया दिया था।
कुंजल:- मां बाल तो देखो ऐसा लग रहा है जैसे किसी चूहे ने कुतर दिया हो।
नंदनी:- वैसे जब तुम फ़ैशन ही नहीं करती फिर इतने फैशनेबल बाल क्यों?
स्वस्तिका:- बस भी करो ना मां। अच्छा छोड़ो ये सब और जरूरी बात सुनो मै मुंबई वापस जा रही हूं।
नंदनी:- हम्मम ! कितने दिनों के लिए जा रही है।
स्वस्तिका:- मां मै वहां मेडिकल कर रही हूं, घूमने नहीं जा रही।
नंदनी:- मै अपस्यु से बात करूंगी। वो होम मिनिस्टर को बोलकर तुम्हारा आगे की पढ़ाई यहीं दिल्ली से करवा देंगा।
स्वस्तिका नंदनी को आखें दिखाती… "कुछ ज्यादा नहीं आप दूसरों पर डिपेंड हो रही है। अच्छा सुनो 3 महीने दो मुझे मै एमबीबीएस 4th ईयर क्लियर करके कोई चक्कर चलती हूं और दिल्ली वापस आ जाऊंगी।
नंदनी:- पक्का !
स्वस्तिका:- हां पक्का बाबा। लेकिन एक शर्त पर, मुझे अब वहां अच्छा नहीं लगेगा अकेले रहना इसलिए मै कुंजल जो साथ लिए जाऊंगी।
नंदनी:- ले जा। मुझे क्या करना। लेकिन दोनों झगड़ा मत करना वहां।
कुंजल:- झगड़ा तो हम करेंगी लेकिन प्यार से…
नंदनी:- कब जा रही हो वैसे।
स्वस्तिका:- आज शाम की फ्लाइट से, मैंने पहले से ही हम दोनों का टिकट करवा रखा था।
नंदनी:- कमाल है, यदि आज रोक लेती तो?
स्वस्तिका:- आज रोक लेती तो मुझे कॉलेज से कल निकाल देते मां।
तीनों बात कर ही रहे थे कि दरवाजे दस्तक हुई और कुंजल ने जाकर दरवाजा खोला… दरवाजे पर प्रदीप और गुफी खड़ा था। नंदनी दोनों को देखकर कहने लगी… "वहां कोने वाले कमरे में जाकर आरव को उठाओ और जाकर मामला सल्टो तुमलोग।"..
दोनों वहां से सीधा आरव के कमरे में चल दिए। आरव अब भी सोया हुए था। प्रदीप आगे बढ़कर आरव को हिलाने लगा… "क्या हुआ दोनों सुबह-सुबह क्यों आ गए?"
गुफी:- भाई 8 बज रहे है। भूल गए आपने ही बुलाया था हमे।
आरव उठकर बैठते हुए….. "8 बज गए क्या".. आरव अपना मोबाइल देखने लगा, इतने में उसकी नजर नोटिफिकेशन पर गई जहां लावणी के 201 टेक्स्ट परे हुए थे… 200 में केवल एंग्री इमोजी पोस्ट थी और आखरी में आरव के नाम संदेश… "रात में तुम्हारा छोड़कर जाना मुझे बहुत गुस्सा दिला रहा है। जल्दी से फ़्री होकर आओ और अपनी लावणी को माना लो। मै इंतजार कर रही हूं।"
संदेश देखते ही आरव के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वो खुश होकर फोन को चूम लिया… "लगता है भाई की गरलफ्रेंड का संदेश था। देख कैसे भाई का चेहरा चमक रहा है।"…. प्रदीप कुछ ज्यादा ही खुश होते बोला..
गुफी:- भाई की पर्सनैलिटी ऐसी है कि 4 गर्लफ्रेंड्स तो होंगी ही।
आरव:- निकम्मों मेरी एंगेजमेंट हो गई है और तुम्हारी होने वाली भाभी का संदेश था। कहीं उसके सामने अपना ये मुंह मत खोल देना, वरना तुम दोनों को मै उल्टा टांग दूंगा। जाओ अपने क्वार्टर में इंतजार करो, मै थोड़ी देर से आता हूं।
कुछ देर बाद आरव उनके क्वार्टर में पहुंचा। हाथों में अपने वहीं 4 फिट के 4 रोड लिए। जब वो निकल रहा था तब नंदनी ने श्रेया के घर को छोड़कर बाकी का हिसाब क्लियर करने बोली। उसके विषय बोली में अंत में देखते हैं क्या करना है।… "लिस्ट नीकाल जरा, पहला नाम किसका है।"… आरव एक-एक रोड उन दोनों को देते हुए बोला।
"भाई चलो वो दरूवा के यहां चलते है, जिसकी बीवी कह रही थी हम उससे रोज सोडा मांगते है।".. गुफी काफी उत्साह से कहा..
तीनों चल दिए सबसे पहले उसी के यहां.. दरवाजा नॉक किया, दरवाजा खुला तीनों अंदर। तीनों के हाथ में हथियार देखकर दरवाजा खोलने वाली लेडी चौंककर पूछने लगी… "ये सब क्या है बेटा"
आरव:- आंटी मै हूं आरव, ये है गुफी, और ये प्रदीप.. और हम लोगों के हाथ में है कर्मा। कर्मा समझती है आप?
आंटी:- किए का फल ना शायद।
आरव:- क्या बात है, जाओ भाई गुफी और प्रदीप इन्हे कर्मा दिखाओ।
दोनों ही उन आंटी के पति यानी अंकल को उठा लाए और साथ में रोड के जोड़ पर घर के कोने-कोने में छिपे शराब भी निकलवा लिए। "आंटी आप के समाने है रोड और ये हैं इनकी छिपी करतूत। जब आप के पति दूसरों के घर में जबरदस्ती घुसकर शराब पिएंगे तो दूसरे भी आप के घर का दरवाजा खटखटाया ही। अब वक़्त है कर्मा का"..
पत्नी के हाथों पति की पिटाई हो गई। इतने में नीचे से कई कार के हॉर्न बजने लगे। गुफी और प्रदीप ने कई कार का रास्ता ब्लॉक कर रखा था। तीनों नीचे पहुंचे.. "जाओ तुम दोनों और सबसे ज्यादा परेशान करने वाले को पकड़ लाओ।"… सब लोग नीचे जमा थे और वो दोनों खड़े लोगों में से मुख्य दोषियों को बड़े प्यार से पकड़ लाया…
"हां भाई तेरी परेशानी क्या थी जो तूने हमारी पार्किंग की जगह को ब्लॉक किया था।"… आरव अपने रोड को हाथ पर पटकते हुए पूछने लगा..
लड़का:- साले तेरी तो..
प्रदीप ने एक थप्पड लगा दिया… "तहजीब से सवाल पूछा गया है, तहजीब से जवाब भी दो।"..
हाथापाई देख अपार्टमेंट का सेक्रेटरी भी वहां पहुंचा…. "यह क्या बदतमीजी है, एक तो अपनी कार से सबका रास्ता ब्लॉक करते हो, ऊपर से गुंडागर्दी।"…
आरव:- सुनिए अधिकारी जी, पहले कॉम्प्लेक्स के लोगों को समझाए की क्यों मेरी पार्किंग की जगह पर रास्ता ब्लॉक किए रहते थे। हमारे यहां काम करने वाले लोगों को सालों ने नौकर समझा और जब दोनों ने उनका काम नहीं किया तो पार्किंग में पहले ड्रामा इन्होंने शुरू कर दिया था। या तो आप सबको कहिए माफी मांगे, वरना मै निकला हूं मूड से। आज सबकी खातिरदारी करूंगा।
आरव अपनी बात कहकर फिर जिस लड़के से बात कर रहा था, उससे दोबारा बात भी नहीं किया और तबतक थप्पड पड़ते रहे जबतक की उस लड़के ने माफी नहीं मांग ली। और उसका थप्पड खाना देखकर बाकियों ने भी अदब से माफी मांग लिया।
अब जब नीचे आ ही गए थे.. फिर बुलावा भेजा गया सरोजा। सरोजा इस कॉम्प्लेक्स में कई लोगों के घर में काम किया करती थी… "हां मैडम सरोजा मेरे 50000 किधर है।"
सरोजा:- कौन से 50000..
आरव:- गुफी जा ऊपर से मेरी बहन स्वस्तिका को बुला ला।
गुफी दौड़ा गया और यह संदेश ऊपर दिया, स्वस्तिका भी फटाफट नीचे आयी। आरव और स्वस्तिका की दूर से बस नजरें मिली थी और पास में पहुंचते ही आरव के हाथ से वो रोड लेकर सरोजा की पीठ पर एक रोड चल गया… "सरोजा मेरे 50000 कहां है।"
सरोजा:- गरीब को मारते हो…
बात आधी ही हुई थी और इतने में ही फिर से एक रोड पीठ पर चल गई… "कुछ याद आया सरोजा। 50000…"
सरोजा:- हां साहब सब याद है। थोड़ा वक़्त दो मै सब पैसे दे दूंगी…
प्रदीप:- भाई इसपर भरोसा नहीं कर सकते, ये यहां से कल्ती मार जाएगी, कल से फिर कभी दिखेगी नहीं…
सरोजा:- नहीं नहीं साहेब मै सच कह रही हूं।
आरव:- तू सच कहती है.. तूने तो यह भी कहा था ना कि तू इस गुफी से शादी करेगी।
सरोजा:- वो साहेब पैसे के लिए झूट बोला था।
"साली तूने…." .. गुफी के मुंह से इतना ही निकला, इससे पहले कि कुछ और आगे निकलता पीठ पर 2 रोड पर चुके थे। वो छटपटाता चुप हुआ… "गुफी मेरे भाई, मै हूं यहां। सरोजा.. तूझपर इन लोगों का भरोसा नहीं.. पैसे तो अभी चाहिए।"
सरोजा:- साहब महीना लग गया है। आधा पैसा इस महीने ले लेना आधा अगले महीने।
आरव:- सरोजा बाकी सब तो ठीक है लेकिन अब ये बता की तूने पैसे क्यों लिए थे।
सरोजा:- वो साहब मां की तबीयत बहुत खराब थी, हॉस्पिटल में एडमिट है बेचारी, इसलिए लिए थे पैसे।
जैसे ही सरोजा ने अपनी बात खत्म की उसके पीठ पर 2 रोड पर चुके थे। इस बार थोड़े जोर की पड़ी, बेचारी छटपटा गई… "वो साहब मै अपने मरद को छोड़ कर किसी और के साथ भागने वाली थी, इसलिए कुछ दिन काटने के लिए पैसे लिए थे, सोची थी काम पर वापस आकर पैसे चुका देती मै।"
गुफी ऐसे नजरों से उसे घुरा मान लो कच्चा चबा जाए.. ऐसा लगा जैसे ये सरोजा वापस से उसकी कहानी दोहराने वाली है… गुस्से में आकर गुफी ने एक तमाचा जड़ दिया… "कर्मजली क्या किया तेरे मरद ने जो उसे छोड़ कर भागने वाली थी।"
सरोजा इतनी मार खाकर गुस्से में अा चुकी थी, वो भी ताव में अाकर कहने लगी… "साले नल्ले अपनी बीवी को खुश नहीं रख पाओगे तो वो भागेगी ही ना। हट रास्ते से, मै साहेब को पैसे दे दूंगी।"…
गुस्से में सरोजा कहकर चली गई और इधर आरव, स्वस्तिका और प्रदीप तीनों हंसने लगे। बेचारा गुफी शर्म से पानी-पानी हो गया। आगे के हिसाब के लिए आरव ने स्वस्तिका को भी अपने साथ रखा.. रास्ते में चलते उसने भी बाल की बात छेड़ते हुए कहने लगा… " तू ये अपने बाल वो हॉलीवुड एक्ट्रेस कैरी मल्लीगन की तरह कटवाए है ना।"..
स्वस्तिका:- हां, जिस दिन अपस्यु से मिली उसके ठीक 1 दिन पहले। मां और कुंजल ने मज़ाक उड़ा दिया।
आरव:- अब तू विग लगाकर घने बाल में घूमेगी और अंदर शॉर्ट बलोंड हेयर स्टाइल रखेगी तो कोई भी मज़ाक उड़ाएगा ही। वैसे मेरे हिसाब से ये बाल तेरे ऊपर परफेक्ट सूट करते हैं।
प्रदीप:- भाई सच कह रहे है। आप काफी मस्त लगती है ऐसे बाल में।
आरव:- क्या बोला रे..
प्रदीप:- बहुत मस्त लगती है ऐसे बालों में। आप को क्या हुआ भाई।
स्वस्तिका, उसकी बात पर हंसती हुई…. "थैंक्स प्रदीप। इग्नोर करो उसे, वैसे हमलोग जा कहा रहे है।
गुफी, सबको रोकते… "भाई वो जुनेजा फ़ैमिली की लड़की"..
आरव:- स्वस्तिका जरा पकड़ो मैडम को.. इन्हे 3-4 घंटे के लिए क्वार्टर चाहिए था।
स्वस्तिका:- तू रुक इसे मैं डील करती हूं। हेय यू.. हेयर…
वो लड़की स्वस्तिका के पास आती…. "हां कहो"
स्वस्तिका, दोनों के ओर इशारा करती हुई… "तुम्हे इन से रूम चाहिए था।"..
लड़की:- हां यार चाहिए तो था लेकिन ये दोनों साले गधे है। इन चूतियो को चार जूते मैं मारूंगी।
स्वस्तिका:- क्यों क्या हो गया?
लड़की:- यार मुझे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थोड़ी प्राइवेसी चाहिए थी, अब तुम समझ रही हो ना हमारा रीलेशन।
स्वस्तिका:- हम्मम ! हां समझ गई आगे भी तो बताओ..
लड़की:- यार घरवालों को दिखाने के लिए इसके बाजू में ही एक और चूतिया रहता है पंकज, बताने के लिए उसे मैंने अपना बॉयफ्रेंड बना रखा था। अब उस चूतिया पंकज मेरे साथ सेक्स करने के लिए इसका कमरा मांग लिया। और उसी दिन मैंने भी इससे कमरा मांग लिया, पर अपनी गर्लफ्रेंड के लिए। इस चूतिए गुफी और प्रदीप ने पंकज को बता दिया कि अपार्टमेंट में मेरा एक बॉयफ्रेंड और अपार्टमेंट के बाहर 1,2 और बॉयफ्रेंड है।