Romance भंवर (पूर्ण) - Page 62 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Romance भंवर (पूर्ण)

Are kisne kaha mood thik na hai bus uss moti ke buddhi mote rgcrazyboy ko hakda raha tha... Kal ke comment me dazed likh kar bhag gaya moti buddhi ... :doh:
 
Bus intzar ki ghadiyan khatam .. aalsiyon .. comment ki bhadi girawat se update likhne ki speed me bhi girawat aa rahi hai.. mana ki 2-3 update se hero nahi dikha iska matlab kya sab rgcrazyboy ban jaoge .. be like Naina gali bhi kyon na dena ho bechari niyamit roop se dekar jati hai .. sikho sikho .. sab log
 
Update:-89

आरव झटके से बिस्तर से खड़ा होकर नजर उस ओर दिया जहां अबतक वो कम्बल में लावणी को बैठे समझ रहा था, कम्बल हटा तो पता चला साची बैठी हुई है, और साची के तेज चींख के साथ ही बाहर के हॉल में भी लोगों कि चहल कदमी शुरू हो चुकी थी….

जैसे ही हॉल से लोगों का कमरे के ओर आने लगे, आरव झट से जाकर बाथरूम में छिप गया। अनुपमा और सुलेखा आते ही चिल्लाने का कारन पूछने लगी… साची सामने स्क्रीन दिखाती हुई कहने लगी…. "सीन डरावना हो गया था इसलिए चींख निकल गई।"..

सुलेखा:- रात को अंधेरा करके ऐसे भूतों कि पिक्चर देखोगी तो यही होना है। बंद करो टीवी और सो जाओ दोनों बहन।

अनुपमा:- सोएंगी थोड़े दोनों, अभी तो पूरा खत्म करके ही सोएंगी…

साची:- नहीं हम जा रहे है सोने … गुड नाईट .. अब आप दोनों भी जाओ सोने…

सुलेखा:- चलो दीदी, सफर के थके है तो यह नहीं कि से जाएं.. देर रात तक सोएंगी और सुबह देर से जागेगी।

दोनों चली गई, कुछ देर माहौल को देखने के बाद साची ने लावणी को कमरा बंद करने का इशारा किया… "बाहर आओ रे। खबर लूं तेरा।"..

आरव बाहर आते ही साची के पाऊं में गिरते … "माफ़ कर दो दीदी, मुझे लगा लावणी है।"..

साची:- ओय छछूंदर, मुझे दीदी क्यों कह रहा है?

लावणी:- रिश्ते में आप बड़ी हुई ना, इसलिए कह रहा है।

साची कभी लावणी तो कभी आरव को देखती… "वाह बेटा !!! तो दोनों मियां बीवी मिलकर खूब रिश्तेदारी निभा रहे हो।

आरव:- ठीक है आप दोनों बातें करो मै जाता हूं।

साची:- रुक, दोनों झगड़े थे इसलिए छोड़ रही हूं। तुम दोनों रुको, मै जाती हूं, और कोई शरारत नहीं।

साची वहां से चली गई। उसके जाते ही… "वो मुझे पता नहीं चला कि साची बैठी है।"…

"अभी यहां कौन खड़ी है वो तो तुम्हे पता है ना या वो भी भूल गए।"… चेहरे पर शरारत, होटों पर मुस्कान और आखों में ढेर सारी तम्मनाओं के साथ लावणी आरव से पूछने लगी।

आरव उसके हाव-भाव देखकर उसके थोड़ा करीब जाकर उसके आखों में झांकते हुए कहने लगा… "क्या लगता है तुम्हे, क्या मै तुम्हे भूल सकता हूं?"..

"ऐसा है तो फिर इतने दूर क्यों खड़े हो।".. लावणी गहरी श्वांस लेती अपनी पलकें झपकाकर जैसे स्वीकृति दे रही हो। आरव आगे बढ़कर कमर से लावणी को खिंचते हुए, उसके मासूम से चेहरे पर आयी मुस्कान को देखने लगा।

काफी देर तक आरव लावणी को निहारता रहा। लावणी अपने बोझिल सी आखों को खोलती हुई इशारों में पूछने लगी "क्या हुआ" … "कुछ नहीं" का धीमा सा जवाब आया और आरव ने लावणी को गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके होंठ की चूमकर बिस्तर से नीचे उतरकर वहां से जाने लगा।

"रुक जाओ, मत जाओ"… लावणी की आवाज़ पर आरव दरवाजे को खोलते-खोलते रुक गया। पीछे पलटकर लावणी को देखते हुए तेजी से उसके पास पहुंचा। लावणी को बाहों में भरकर उसके होटों को चूमते हुए, उसे वापस से लिटा दिया, और खुद उसके पास लेटते हुए… "कंट्रोल बेबी, वरना मुझ से मेरे अरमान काबू नहीं होंगे।"

लावणी आरव के ओर करवट लेती उसमे सिमटती हुई कहने लगी… "काबू करने के लिए कहा भी किसने।"

"ए भुटकी, आज बात क्या है .. हां।…

"तुमसे भी हर बात कहनी परे तो फिर उन बातों में मज़ा कहां आरव।"

"हे बेबी सुनो, कोई हमे भरोसे पर छोड़ कर गया है। इसलिए किसी का भरोसा नहीं तोड़ते।"

"और मेरे एहसासों का क्या?"..

"मुझे फसाओ मत, अब इसपर क्या कहूं मै।"..

लावणी थोड़ा और आरव में सिमटती… "कुछ मत कहो, बस खामोश होकर यूं ही मेरा पास रहो। तुम्हे मेहसूस करने दो। और जब मै सो जाऊं फिर चले जाना।

"हम्मम !! ठीक है।"..

आरव लावणी के बालों में और पीठ पर हाथ फेरने लगा। लावणी अपना सर आरव के सीने से लगाए आखें मूंदे उसकी धड़कनों को सुनती हुई धीरे-धीरे नींद कि आगोश में चली गई। कुछ देर बाद जब आरव को लगा कि लावणी गहरी नींद में चली गई है, तब आरव उससे अलग हुआ और उसके माथे को चूमते वापस लौट आया।

वापस लौटकर अराव सीधा सो गया। इस बीच अगली सुबह की हलचल में नंदनी और कुंजल दोनों स्वस्तिका को घेरे बैठी थी। दोनों दाएं और बाएं से उसके "शॉर्ट ब्लोंड हेयर" को दाएं और बाएं से छु कर और ऊपर उठाकर देख भी रही थी, और हंस भी रही थी।

स्वस्तिका:- बस भी करो दोनों, इसलिए अपस्यु ने मुझे विग का आइडिया दिया था।

कुंजल:- मां बाल तो देखो ऐसा लग रहा है जैसे किसी चूहे ने कुतर दिया हो।

नंदनी:- वैसे जब तुम फ़ैशन ही नहीं करती फिर इतने फैशनेबल बाल क्यों?

स्वस्तिका:- बस भी करो ना मां। अच्छा छोड़ो ये सब और जरूरी बात सुनो मै मुंबई वापस जा रही हूं।

नंदनी:- हम्मम ! कितने दिनों के लिए जा रही है।

स्वस्तिका:- मां मै वहां मेडिकल कर रही हूं, घूमने नहीं जा रही।

नंदनी:- मै अपस्यु से बात करूंगी। वो होम मिनिस्टर को बोलकर तुम्हारा आगे की पढ़ाई यहीं दिल्ली से करवा देंगा।

स्वस्तिका नंदनी को आखें दिखाती… "कुछ ज्यादा नहीं आप दूसरों पर डिपेंड हो रही है। अच्छा सुनो 3 महीने दो मुझे मै एमबीबीएस 4th ईयर क्लियर करके कोई चक्कर चलती हूं और दिल्ली वापस आ जाऊंगी।

नंदनी:- पक्का !

स्वस्तिका:- हां पक्का बाबा। लेकिन एक शर्त पर, मुझे अब वहां अच्छा नहीं लगेगा अकेले रहना इसलिए मै कुंजल जो साथ लिए जाऊंगी।

नंदनी:- ले जा। मुझे क्या करना। लेकिन दोनों झगड़ा मत करना वहां।

कुंजल:- झगड़ा तो हम करेंगी लेकिन प्यार से…

नंदनी:- कब जा रही हो वैसे।

स्वस्तिका:- आज शाम की फ्लाइट से, मैंने पहले से ही हम दोनों का टिकट करवा रखा था।

नंदनी:- कमाल है, यदि आज रोक लेती तो?

स्वस्तिका:- आज रोक लेती तो मुझे कॉलेज से कल निकाल देते मां।

तीनों बात कर ही रहे थे कि दरवाजे दस्तक हुई और कुंजल ने जाकर दरवाजा खोला… दरवाजे पर प्रदीप और गुफी खड़ा था। नंदनी दोनों को देखकर कहने लगी… "वहां कोने वाले कमरे में जाकर आरव को उठाओ और जाकर मामला सल्टो तुमलोग।"..

दोनों वहां से सीधा आरव के कमरे में चल दिए। आरव अब भी सोया हुए था। प्रदीप आगे बढ़कर आरव को हिलाने लगा… "क्या हुआ दोनों सुबह-सुबह क्यों आ गए?"

गुफी:- भाई 8 बज रहे है। भूल गए आपने ही बुलाया था हमे।

आरव उठकर बैठते हुए….. "8 बज गए क्या".. आरव अपना मोबाइल देखने लगा, इतने में उसकी नजर नोटिफिकेशन पर गई जहां लावणी के 201 टेक्स्ट परे हुए थे… 200 में केवल एंग्री इमोजी पोस्ट थी और आखरी में आरव के नाम संदेश… "रात में तुम्हारा छोड़कर जाना मुझे बहुत गुस्सा दिला रहा है। जल्दी से फ़्री होकर आओ और अपनी लावणी को माना लो। मै इंतजार कर रही हूं।"

संदेश देखते ही आरव के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वो खुश होकर फोन को चूम लिया… "लगता है भाई की गरलफ्रेंड का संदेश था। देख कैसे भाई का चेहरा चमक रहा है।"…. प्रदीप कुछ ज्यादा ही खुश होते बोला..

गुफी:- भाई की पर्सनैलिटी ऐसी है कि 4 गर्लफ्रेंड्स तो होंगी ही।

आरव:- निकम्मों मेरी एंगेजमेंट हो गई है और तुम्हारी होने वाली भाभी का संदेश था। कहीं उसके सामने अपना ये मुंह मत खोल देना, वरना तुम दोनों को मै उल्टा टांग दूंगा। जाओ अपने क्वार्टर में इंतजार करो, मै थोड़ी देर से आता हूं।

कुछ देर बाद आरव उनके क्वार्टर में पहुंचा। हाथों में अपने वहीं 4 फिट के 4 रोड लिए। जब वो निकल रहा था तब नंदनी ने श्रेया के घर को छोड़कर बाकी का हिसाब क्लियर करने बोली। उसके विषय बोली में अंत में देखते हैं क्या करना है।… "लिस्ट नीकाल जरा, पहला नाम किसका है।"… आरव एक-एक रोड उन दोनों को देते हुए बोला।

"भाई चलो वो दरूवा के यहां चलते है, जिसकी बीवी कह रही थी हम उससे रोज सोडा मांगते है।".. गुफी काफी उत्साह से कहा..

तीनों चल दिए सबसे पहले उसी के यहां.. दरवाजा नॉक किया, दरवाजा खुला तीनों अंदर। तीनों के हाथ में हथियार देखकर दरवाजा खोलने वाली लेडी चौंककर पूछने लगी… "ये सब क्या है बेटा"

आरव:- आंटी मै हूं आरव, ये है गुफी, और ये प्रदीप.. और हम लोगों के हाथ में है कर्मा। कर्मा समझती है आप?

आंटी:- किए का फल ना शायद।

आरव:- क्या बात है, जाओ भाई गुफी और प्रदीप इन्हे कर्मा दिखाओ।

दोनों ही उन आंटी के पति यानी अंकल को उठा लाए और साथ में रोड के जोड़ पर घर के कोने-कोने में छिपे शराब भी निकलवा लिए। "आंटी आप के समाने है रोड और ये हैं इनकी छिपी करतूत। जब आप के पति दूसरों के घर में जबरदस्ती घुसकर शराब पिएंगे तो दूसरे भी आप के घर का दरवाजा खटखटाया ही। अब वक़्त है कर्मा का"..

पत्नी के हाथों पति की पिटाई हो गई। इतने में नीचे से कई कार के हॉर्न बजने लगे। गुफी और प्रदीप ने कई कार का रास्ता ब्लॉक कर रखा था। तीनों नीचे पहुंचे.. "जाओ तुम दोनों और सबसे ज्यादा परेशान करने वाले को पकड़ लाओ।"… सब लोग नीचे जमा थे और वो दोनों खड़े लोगों में से मुख्य दोषियों को बड़े प्यार से पकड़ लाया…

"हां भाई तेरी परेशानी क्या थी जो तूने हमारी पार्किंग की जगह को ब्लॉक किया था।"… आरव अपने रोड को हाथ पर पटकते हुए पूछने लगा..

लड़का:- साले तेरी तो..

प्रदीप ने एक थप्पड लगा दिया… "तहजीब से सवाल पूछा गया है, तहजीब से जवाब भी दो।"..

हाथापाई देख अपार्टमेंट का सेक्रेटरी भी वहां पहुंचा…. "यह क्या बदतमीजी है, एक तो अपनी कार से सबका रास्ता ब्लॉक करते हो, ऊपर से गुंडागर्दी।"…

आरव:- सुनिए अधिकारी जी, पहले कॉम्प्लेक्स के लोगों को समझाए की क्यों मेरी पार्किंग की जगह पर रास्ता ब्लॉक किए रहते थे। हमारे यहां काम करने वाले लोगों को सालों ने नौकर समझा और जब दोनों ने उनका काम नहीं किया तो पार्किंग में पहले ड्रामा इन्होंने शुरू कर दिया था। या तो आप सबको कहिए माफी मांगे, वरना मै निकला हूं मूड से। आज सबकी खातिरदारी करूंगा।

आरव अपनी बात कहकर फिर जिस लड़के से बात कर रहा था, उससे दोबारा बात भी नहीं किया और तबतक थप्पड पड़ते रहे जबतक की उस लड़के ने माफी नहीं मांग ली। और उसका थप्पड खाना देखकर बाकियों ने भी अदब से माफी मांग लिया।

अब जब नीचे आ ही गए थे.. फिर बुलावा भेजा गया सरोजा। सरोजा इस कॉम्प्लेक्स में कई लोगों के घर में काम किया करती थी… "हां मैडम सरोजा मेरे 50000 किधर है।"

सरोजा:- कौन से 50000..

आरव:- गुफी जा ऊपर से मेरी बहन स्वस्तिका को बुला ला।

गुफी दौड़ा गया और यह संदेश ऊपर दिया, स्वस्तिका भी फटाफट नीचे आयी। आरव और स्वस्तिका की दूर से बस नजरें मिली थी और पास में पहुंचते ही आरव के हाथ से वो रोड लेकर सरोजा की पीठ पर एक रोड चल गया… "सरोजा मेरे 50000 कहां है।"

सरोजा:- गरीब को मारते हो…

बात आधी ही हुई थी और इतने में ही फिर से एक रोड पीठ पर चल गई… "कुछ याद आया सरोजा। 50000…"

सरोजा:- हां साहब सब याद है। थोड़ा वक़्त दो मै सब पैसे दे दूंगी…

प्रदीप:- भाई इसपर भरोसा नहीं कर सकते, ये यहां से कल्ती मार जाएगी, कल से फिर कभी दिखेगी नहीं…

सरोजा:- नहीं नहीं साहेब मै सच कह रही हूं।

आरव:- तू सच कहती है.. तूने तो यह भी कहा था ना कि तू इस गुफी से शादी करेगी।

सरोजा:- वो साहेब पैसे के लिए झूट बोला था।

"साली तूने…." .. गुफी के मुंह से इतना ही निकला, इससे पहले कि कुछ और आगे निकलता पीठ पर 2 रोड पर चुके थे। वो छटपटाता चुप हुआ… "गुफी मेरे भाई, मै हूं यहां। सरोजा.. तूझपर इन लोगों का भरोसा नहीं.. पैसे तो अभी चाहिए।"

सरोजा:- साहब महीना लग गया है। आधा पैसा इस महीने ले लेना आधा अगले महीने।

आरव:- सरोजा बाकी सब तो ठीक है लेकिन अब ये बता की तूने पैसे क्यों लिए थे।

सरोजा:- वो साहब मां की तबीयत बहुत खराब थी, हॉस्पिटल में एडमिट है बेचारी, इसलिए लिए थे पैसे।

जैसे ही सरोजा ने अपनी बात खत्म की उसके पीठ पर 2 रोड पर चुके थे। इस बार थोड़े जोर की पड़ी, बेचारी छटपटा गई… "वो साहब मै अपने मरद को छोड़ कर किसी और के साथ भागने वाली थी, इसलिए कुछ दिन काटने के लिए पैसे लिए थे, सोची थी काम पर वापस आकर पैसे चुका देती मै।"

गुफी ऐसे नजरों से उसे घुरा मान लो कच्चा चबा जाए.. ऐसा लगा जैसे ये सरोजा वापस से उसकी कहानी दोहराने वाली है… गुस्से में आकर गुफी ने एक तमाचा जड़ दिया… "कर्मजली क्या किया तेरे मरद ने जो उसे छोड़ कर भागने वाली थी।"

सरोजा इतनी मार खाकर गुस्से में अा चुकी थी, वो भी ताव में अाकर कहने लगी… "साले नल्ले अपनी बीवी को खुश नहीं रख पाओगे तो वो भागेगी ही ना। हट रास्ते से, मै साहेब को पैसे दे दूंगी।"…

गुस्से में सरोजा कहकर चली गई और इधर आरव, स्वस्तिका और प्रदीप तीनों हंसने लगे। बेचारा गुफी शर्म से पानी-पानी हो गया। आगे के हिसाब के लिए आरव ने स्वस्तिका को भी अपने साथ रखा.. रास्ते में चलते उसने भी बाल की बात छेड़ते हुए कहने लगा… " तू ये अपने बाल वो हॉलीवुड एक्ट्रेस कैरी मल्लीगन की तरह कटवाए है ना।"..

स्वस्तिका:- हां, जिस दिन अपस्यु से मिली उसके ठीक 1 दिन पहले। मां और कुंजल ने मज़ाक उड़ा दिया।

आरव:- अब तू विग लगाकर घने बाल में घूमेगी और अंदर शॉर्ट बलोंड हेयर स्टाइल रखेगी तो कोई भी मज़ाक उड़ाएगा ही। वैसे मेरे हिसाब से ये बाल तेरे ऊपर परफेक्ट सूट करते हैं।

प्रदीप:- भाई सच कह रहे है। आप काफी मस्त लगती है ऐसे बाल में।

आरव:- क्या बोला रे..

प्रदीप:- बहुत मस्त लगती है ऐसे बालों में। आप को क्या हुआ भाई।

स्वस्तिका, उसकी बात पर हंसती हुई…. "थैंक्स प्रदीप। इग्नोर करो उसे, वैसे हमलोग जा कहा रहे है।

गुफी, सबको रोकते… "भाई वो जुनेजा फ़ैमिली की लड़की"..

आरव:- स्वस्तिका जरा पकड़ो मैडम को.. इन्हे 3-4 घंटे के लिए क्वार्टर चाहिए था।

स्वस्तिका:- तू रुक इसे मैं डील करती हूं। हेय यू.. हेयर…

वो लड़की स्वस्तिका के पास आती…. "हां कहो"

स्वस्तिका, दोनों के ओर इशारा करती हुई… "तुम्हे इन से रूम चाहिए था।"..

लड़की:- हां यार चाहिए तो था लेकिन ये दोनों साले गधे है। इन चूतियो को चार जूते मैं मारूंगी।

स्वस्तिका:- क्यों क्या हो गया?

लड़की:- यार मुझे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थोड़ी प्राइवेसी चाहिए थी, अब तुम समझ रही हो ना हमारा रीलेशन।

स्वस्तिका:- हम्मम ! हां समझ गई आगे भी तो बताओ..

लड़की:- यार घरवालों को दिखाने के लिए इसके बाजू में ही एक और चूतिया रहता है पंकज, बताने के लिए उसे मैंने अपना बॉयफ्रेंड बना रखा था। अब उस चूतिया पंकज मेरे साथ सेक्स करने के लिए इसका कमरा मांग लिया। और उसी दिन मैंने भी इससे कमरा मांग लिया, पर अपनी गर्लफ्रेंड के लिए। इस चूतिए गुफी और प्रदीप ने पंकज को बता दिया कि अपार्टमेंट में मेरा एक बॉयफ्रेंड और अपार्टमेंट के बाहर 1,2 और बॉयफ्रेंड है।
 
Update:-90

लड़की:- यार घरवालों को दिखाने के लिए इसके बाजू में ही एक और चूतिया रहता है पंकज, बताने के लिए उसे मैंने अपना बॉयफ्रेंड बना रखा था। अब उस चूतिया पंकज मेरे साथ सेक्स करने के लिए इसका कमरा मांग लिया। और उसी दिन मैंने भी इससे कमरा मांग लिया, पर अपनी गर्लफ्रेंड के लिए। इस चूतिए गुफी और प्रदीप ने पंकज को बता दिया कि अपार्टमेंट में मेरा एक बॉयफ्रेंड और अपार्टमेंट के बाहर 1,2 और बॉयफ्रेंड है।

स्वस्तिका:- सच में गधे है दोनों।

लड़की:- गधे की मां की चू.. जरा ये डंडा देना बैंचों से हिसाब बराबर कर लूं।

स्वस्तिका:- हेय उनके ओर से सॉरी एक्चुली कभी वो किसी बोल्ड गर्ल से मिले नहीं ना, इनफैक्ट तुम समझ सकती हो, जिसने कभी ओपन माहौल ना देखा हो तो वो कैसे रिएक्ट करेगा। वैसे मै एक परमानेंट सॉल्यूशन बता सकती हूं।

लड़की:- क्या?

स्वस्तिका:- तुम और तुम्हारी गर्लफ्रेंड इन दोनों को पकड़ लो तो?

लड़की:- हम्मम ! विचार करने लायक बात तो है, लेकिन यार एक डर भी लगा रहता है, इनकी बेवकूफियां। साले चिपकू होते है, सीरियस टाइप वाले।

स्वस्तिका:- इन्हे इनकी मतलब की चीज मिलेगी, तुम्हे अपने मतलब की। ऊपर से इनका ट्रेवलिंग वाला काम है तो दोनों कभी बाहर कभी अपने कमरे में, ऊपर से दोनों रहेंगे तो पिकअप और ड्रॉप की चिंता भी खत्म।

लड़की:- हम्मम ! गुड आइडिया। थैंक्स डियर, वैसे हॉट तुम भी कम नहीं।

स्वस्तिका:- लेकिन डार्लिंग मेरा अभी लड़कों से मन भरा नहीं, इसलिए हम दोनों में कुछ नहीं हो सकता। बाय द वे मैं स्वस्तिका।

लड़की:- मै जेन..

स्वस्तिका:- ठीक है जेन, नंबर देती जाओ, दोनों को सब समझाकर फोन करवाती हूं उनसे।

जेन के जाते ही स्वस्तिका जब लौटी तो बिना कुछ कहे ही दोनों को 2 डंडे होंक दी।… "क्या हुआ जो दोनों को मार रही हो।"…

स्वस्तिका:- कुछ नहीं छोड़ो, मै बाद में बात करती हूं दोनों से। और भी किसी लेडीज को यहां निपटाना है या हो गया सब खत्म।

आरव:- क्यों क्या हुआ, तुझे मज़ा नहीं आ रहा है क्या?

स्वस्तिका:- नहीं वो बात नहीं है, पहली बार तुम लोगों से दूर जाते थोड़ा इमोशनल फील कर रही हूं।

आरव उसके कंधे पर हाथ रखते, उसे किसी दोस्त की तरह पकड़ा… "हेय हमारी नॉटी तो ब्रेव है ना। अच्छा सुन अपस्यु को लौट आने दे यहां फिर मै और मां कुछ दिनों के लिए तेरे पास आ जाएंगे।

स्वस्तिका:- नहीं कोई मत आना, वरना ये आना जाना और भटकायगा। मै वहां का काम समेटकर तय समय तक वापस आ जाऊंगी।

आरव:- चल ठीक है फिर ऐसे मायूस नहीं होते।

स्वस्तिका और कुंजल के साथ पूरा वक़्त बीतने के बाद शाम को सभी उसे एयरपोर्ट ड्रॉप करने नीकल गए। कुंजल जाए और वहां साची ना हो और जहां साची हो वहां लावणी ना हो। ऐसे करके पूरा कुनवा ही आ गया छोड़ने दोनों को। लौटते वक़्त वहीं से लावणी और आरव अपने कुछ खास पल बटोरने साथ घूमने निकल गए वहीं नादनी साची के साथ वापस लौट आयी।

___________________________________________

राजस्थान वीरभद्र का गांव...

पूजा की तैयारियां करनी थी इसलिए बिल्कुल सुबह से ही सब तैयारियों में लगे हुए थे। वीरभद्र और शकुंतला दोनों मिलकर सरा काम कर रहे थे। पार्थ ने बीती शाम ही अगली सुबह 11.10 मिनट का मुहरत निकाल दिया था।

दोनों काम में लगी थी। कुछ देर बाद निम्मी भी जाग गई और वो भी पूजा के काम में हाथ बटाने लगी। सुबह के 8 बजे लगभग जब सरा काम खत्म हो गया, तब वीरभद्र और शकुंतला गांव वालों की बुलाने चले गए। जाते-जाते निम्मी को तैयार होकर पार्थ को उठाकर विधि शुरु करने के लिए कहते गए दोनों।

धुप तेज होने की वजह से पार्थ की भी नींद खुल गई और वो जम्हाई लेते जैसे ही जगा, नजरों के सामने वहीं कल वाली निम्मी थी, जो अल्लहर और धूल से नहाई हुई थी। पार्थ अपना आंख मिजते हुए, पूरी आखें खोल कर देखा… उसे देखकर तो उसके मुंह से "वाउ" ही निकला… "ओय शहरी बाबू, नजरें ठीक करो अपनी, वरना चाकू घुसेड़ दूंगी।"..

"सॉरी वो तुम इतनी कमाल कि लग रही थी कि मै खुद को तुम्हे देखने से रोक नहीं पाया।"..

निम्मी:- देखना हो गया हो तो जाओ तैयार हो जाओ, खुद ही सुबह का मुहरत देकर भूल गए। आज ही मुझे अपने खुद के कमरे में जाना है।

पार्थ:- तुमलोग वहां चले जाओगे तो फिर ये मकान।

निम्मी:- मेरे दानवीर भाई और मेरी मां है ना.. उन्होंने ये सब मेरे चचेरे भाई को दान कर दिया। हम वहां जाएंगे और वो यहां आएंगे… लो देखो भिकरी आ भी रहे है। मै जा रही हूं तुम तैयार होकर आओ।

पार्थ अंदर बैग से अपना तौलिया निकाला और चल दिया जल्दी से फ्रेश होने। वो जब नहाकर तौलिए में बाहर निकाल रहा था, ठीक उसी वक़्त वृज उसका रास्ता रोके उसे कल रात के लिए एक बार फिर धन्यवाद कहने लगा। वहीं पास में ही खड़ी उसकी बीवी कमला इतने नेक इरादे से पार्थ को देख रही थी, कि पार्थ को थोड़ा डर भी ही गया, कहीं कमला उसका रेप ना करदे अपने पति के ही सामने।

पार्थ तेजी से अपनी जान और इज्जत दोनों बचाते हुए वहां से सीधा कमरे ने भागा और धोती कुर्ते पहनकर तैयार हो गया। गृह प्रवेश का सरा काम खत्म करके वीरभद्र और पार्थ दोनों कुछ पल के लिए ही मात्र घर के अंदर घुसे, फिर वहां से ऐमी के भेजे कार्गो को लेने दोनों उदयपुर के लिए निकल गए।

बीती रात को ऐमी ने हर किसी का सामान उसके सुविधानुसार उनके बताए जगह पर भिजवा दिया था। चूंकि पार्थ को काम जल्दी शुरू करना था इसलिए ऐमी ने अपने एक कर्मचारी के हाथ से वो पार्सल उदयपुर भिजवा दिया था।

पार्थ:- तुम्हे कुछ आइडिया है कि तुम्हे यूएसए में स्निपर ट्रेनिंग और यहां मै तुम्हे 3 महीने की ट्रेनिंग क्यों देने आया हूं।

वीरभद्र:- अपना मर्दों वाला काम है पार्थ भाई। खून से सने पैसों को साफ करना और जमीन पर लेट कर रोना।

पार्थ:- अच्छा मज़ाक था। अब जो पूछा वो बताओ।

वीरभद्र:- मुझे ज्यादा तो पता नहीं लेकिन अंदर ही अंदर आप लोग किसी को बर्बाद करने कि सोच रहे हो, और सबसे ख़तरनाक तो वो अपस्यु भाई हैं। केवल बिजली के लाइट ऑन ऑफ करवाया और उसी के कुछ देर बाद 4 लोगों को कार समेत पापड़ बना दिया।

पार्थ:- हम्मम। मतलब चीजों को परखना तुम भी सीख रहे हो।

वीरभद्र:- सब गुरुदेव आरव की कृपा है।

पार्थ:- तुम विक्रम सिंह राठौड़ को जानते हो।

वीरभद्र:- वो बड़ी से कंपनी के मालिक, महाराज हर्षवर्धन सिंह राठौड़ के वंशज की बात तो नहीं कर रहे ना।

पार्थ:- हां उसी कि बात कर रहा हूं।

वीरभद्र:- उन्हें कौन नहीं जानता। ये पूरा गांव और इसके अंदर तक सुदूर इलाका सब उन्हीं का तो था। पहले राजा थे तो सीमा बढ़ाते थे, अब व्यापारी है तो व्यापार बढ़ाते हैं। उनकी पड़ोस के गांव पर तो उनकी असीम कृपा भी है। आप ये जो मेरा मकान देख रहे हो ना, पड़ोस का पूरे गांव में इससे भी शानदार मकाने हैं, कोई 1 एकर, तो कोई 2 एकड़ में बने मकान। उसी गांव के बीच है राजा साहब का भव्य महल।

पार्थ:- अच्छा एक बात बताओ, ये कुंवर सिंह राठौड़ की क्या कहानी है?

वीरभद्र:- बहुत ही नीच और गिरा हुआ था वो। शुरू-शुरू में तो सब उसे राजा का ही दर्जा देते थे, लेकिन कुंवर सिंह ने पहले तो धोखे से अपने भाई की सारी संपत्ति हड़प ली।

पार्थ:- किसकी..

वीरभद्र:- राजा विक्रम के पिताजी सूरज भान की। फिर उन्हें पड़ोस के ही गांव में छोटा सा जमीन का टुकड़ा दे दिया। यहीं कहते है पार्थ भाई की कोई एक भाई कितना भी बेईमान हो जाए, दूसरा भाई में अपने भाई के लिए दया जरूर होती है। सूरज भान भी वही दयालु भाई था। कुंवर सिंह ने चाहे कितने भी धोखे किए हो, लेकिन कभी सूरजभान ने किसीको अपनी आपबीती नहीं सुनाई।

पार्थ:- आपबीती नहीं सुनाई तो तुम्हे कैसे पता?

वीरभद्र:- क्योंकि हम जहां से गुजर रहे है ये पूरा इलाका कुंवर सिंह का है और पड़ोस के गांव सूरजभान को दिया गया था। वहां देखिए राजा विक्रम ने जब खुद की तरक्की की, तो पूरा गांव तरक्की कर रहा है और यहां सब ऐसे ही पड़ा है, भोगने वाला कोई वारिश नहीं।

पार्थ:- क्यों उस परिवार का क्या हुआ सो?

वीरभद्र:- कुत्ते की मौत मेरे थे। पहले गाड़ी पर बिजली गिरि, जिसमे पूरा खानदान झुलस गया। फिर पत्थर में कहीं दब गई उनकी गाड़ी। कोई क्रियाकर्म करने वाला तक नहीं था तो राजा विक्रम ने ही सबका क्रियाक्रम किया था। हां उसकी एक बेटी तो थी जो किसी के प्रेम में पड़कर शादी कर ली, लेकिन वो दोबारा कभी लौटी नहीं। वैसे भी ना ही लौटे उसीमें उसकी भलाई है, क्योंकि वो यदि यहां आ गई तो लोग उसे और उसके पूरे परिवार को जान से मार देंगे।

पार्थ:- यह परिवार इतना बुरा है तुम लोगों की कब पता चला?

वीरभद्र:- पता क्या चलना भाई, कोई बात छिपी थोड़े ना रहती है। दोनों गांव के कई शादियां है तो पता चल ही जाता है।

पार्थ:- फिर तो कुंवर सिंह का भी महल होगा।

वीरभद्र:- नहीं यहां गांव में नहीं थी कोई महल। एक उदयपुर में उनका निवास था जो शायद आजकल किसी होटल में बदल गई है। दूसरी दिल्ली में एक आलीशान भवन है, वहां राजा विक्रम रहते हैं। उनकी इंसानियत देखिए वो चाहे तो पूरे इलाके का इकलौता वारिस हो, क्योंकि बेटियों का संपत्ति पर हिस्सा नहीं होता लेकिन राजा विक्रम ने केवल एक चौथाई हिस्सा अपने पास रखा और उसी ने अपना और अपने लोगों की तरक्की कर रहे। और जो मुंह कला करके भाग गई उसके नाम बाकी की संपत्ति जमा होते रहती है। केवल इस आस में कि कभी तो वो लौटेगी। कमाल है ना, राजा विक्रम ने 1 रुपए की संपत्ति को अपनी मेहनत से 1000 रुपए का बना गए और एक महारानी बिना मेहनत किए 750 की मालकिन है। जो मेहनत कर रहा है उसके हिस्से में 250 रुपए है.. लेकिन वो उसमे भी खुश है। वो तो यही कहता है मै तो 0 से शुरू करके 250 पर हूं, दूसरो की संपत्ति क्यों देखूं।

पार्थ:- कमाल के इंसान है ये राजा विक्रम। वैसे तुम्हे पता है कि नहीं एंगेजमेंट में विक्रम सिंह राठौड़ भी पहुंचे हुए थे…

वीरभद्र:- क्या बात कर रहे हो भाई, मुझे बताया क्यों नहीं की वो वहीं होटल में है, मुझे मिलना था उनसे..

पार्थ:- चिंता मत कर जल्द ही मिलेगा।

वीरभद्र:- भाई आप लोग की कृपा रही तो मै उस देवता से जरूर मिल लूंगा।

पार्थ:- एक बात बता सच सच..

वीरभद्र:- पूछो ना भाई।

पार्थ:- अगर तू आरव को देखता है और उसे राजा विक्रम की तुलना करते हो तो कौन ज्यादा अच्छा है।

वीरभद्र:- यह कैसा सवाल है। दोनों में कहां आप मेल ढूंढ़ रहे हो?

पार्थ:- फिर भी बता ना..

वीरभद्र:- सुनो भाई, राजा विक्रम की सुनी सुनाई बात है। इसलिए मैंने जो देखा, मेहसूस किया, और अपनी बुद्धि से जितना समझा हूं, उससे मै एक ही बात कहूंगा, आप सब का कोई तुलना नहीं। आप लोग न्याय और नीति के साथ अपने लोगों का ख्याल रखते हो, बाकी वो राजा विक्रम है उन्होंने जो किया है वो भी कोई कम नहीं लेकिन चूंकि मैंने उन्हें कभी देखा नहीं और ना ही उनके बारे में करीब से जाना इसलिए तुलना नहीं कर सकता।

पार्थ:- वीरे तू अपस्यु के पास बैठता था क्या?

वीरभद्र:- हां… पूरे एंगेजमेंट उन्होंने मुझे अपने साथ रखा था। लेकिन बात क्या है भाई?

पार्थ:- समझदारी की बातें किसी को भी जो समझा सके वो इकलौता पंडित वहीं है। खैर अब एक अहम सवाल.. क्या तुम्हे पता है कि तुम्हे इतनी ट्रेनिंग और बाकी सारी चीजे क्यों सिखाई जा रही है?

वीरभद्र:- नाह, मैंने कभी नहीं सोचा और ना ही पुछा। केवल इस विश्वास के साथ की पहले मै गलत लोगों के साथ था, अब तो जैसा काम दीजिए करता जाऊंगा। मर भी गया तो सुकून होगा कि कुछ अच्छा करके मरा। सुकून इस बात का भी होगा कि मेरे पीछे मेरे परिवार को कोई देखने वाला होगा।

पार्थ:- ठीक है वक़्त आ गया है तुम्हे बताने का की तुम क्या काम करोगे और किसके लिए करोगे..

वीरभद्र काफी उत्सुकता से … "जल्दी बताओ भाई"

पार्थ:- तुम्हारे ऊपर कुंजल और आंटी की जिम्मेदारी रहेगी। उन्हें पूरा सुरक्षा प्रदान करना। तुम्हे उनके लिए एक बॉडीगार्ड से बढ़कर बनना होगा।

वीरभद्र:- क्या मज़ाक कर रहे हो भाई। उन दोनों कि किसी ने छुए भी तो उनका अस्तित्व मिट जाना है। मैं बेवकूफ हूं लेकिन इतना भी नहीं की ये ना समझ सकू की आपसब क्या कर सकते हो और खासकर वो शांत इंसान जो हमेशा मुस्कुराते रहता है। ऐसा लगता है स्वयं महादेव विराजमान है उनके अंदर। जिनका विनाश करीब होगा वही पंगे लेगा आप लोगों से।

पार्थ:- अभी पता चल जाएगा.. जैसे अब तक सब जान कर भी सारे बातों से अनजान हो, ये बात भी ठीक वैसे ही है। नंदनी रघुवंशी के पिताजी का नाम कुंवर सिंह राठौड़ है।..

वीरभद्र जो अबतक पूरे संतुलन के साथ गाड़ी चला रहा था, पार्थ के मुंह से यह सच सुनकर ऐसा संतुलन खोया की ब्रेक लगाते-लगाते एक चट्टान से जाकर गाड़ी भिड़ा दिया। उसका पूरा दिमाग ही जैसे काम करना बंद कर दिया हो और टुकुर टुकुर बस पार्थ को ही देखे जा रहा था।
 
Hahaha .. parth ki to kahani shuri hi hui hai dekhiye ab kya hoga ... Update aane hi wala hai..

:thanks: for your support .. keep reading & keep commenting :declare:
 
Kambal par hath dalna to samjh me bhi ata hai .. ye izzat par hath dalna kuch jyada na ho gaya :hehe:..

Ji jaroor dekhiye kya ho raha hai.. hum bhi likhte hai and ..

:thanks: for your support .. keep reading & keep commenting :declare:
 
Hahaha .. jhoot to pahle se pakdi hui hai .. bus log ko dono ko chhilne me maza aata hai addy bhai..

:thanks: for your support .. keep reading & keep commenting :declare:
 
:thanks: for your support .. keep reading & keep commenting :declare:

Ek signature aap ki formality ke liye

:thanks: for your support .. keep reading & keep commenting :declare:
 
Kuch faltu logon ki wajah se mood kharab ho jaye to ise mood kharab nahi rah rah kar bhaw khana kahte hain ...

Katai nahi tha mood kharab .. ulta mast mood se baithkar update likh raha tha main.. wo to bich bich me ikka dukka comment reply chalu tha :(
 
Hahaha .. Aarav ko sab enjoy karte hain avinash bhai .. hope u r enjoying the story

:thanks: for your support .. keep reading & keep commenting :declare:
 
Back
Top