Romance भंवर (पूर्ण) - Page 69 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Nahi nimmi ka plan as a teamate to nahi kiya hai lekin dekhiye aage kahin laga to dal denge .. filha back up charecter man lijiye

:thanks: for comment... Keep reading and keep commenting

..
 
Parth waise chaku kaise marega... :?: ... Aur ye shayad kya hota hai :doh: clear hi likha hai ki Nandini ke pure pariwar ka hi murder ho gaya hai.. :D
 
Basic banawat ka anter hota hai chaku aur chhuri me.. iski ek teesri kadi dagger bhi hoti hai...

Baki nimmi matr ek abhi tak backup charecter hai jise team me samil karne ki koi wajah ti nahu dikh rahi :D
 
Kya .. khuni Jung me kya ashlilta dikhi aapko jara explain karenge.. bhale hi aap ka ya mera matlab same kyon na ho lekin main baat palat dunga..

Ab khul kar bataeye kaise aslil hua
 
Ji dhanywad kaam dev babu ..w aise doc babu aao ki baat manne se ti rahe :D.

Haa likha kaisa b wo matlab bhi samjh gaye tab b unhe aslil nahi kahna par raha
 
Idea to tumhe bhi nahi tha ki kya surprise milne wala hai ... Jabki tum nimmi ke bare me soch rahe the...

Aur ye JK aur Pallavi kahe aane lage bich me .. wo apne case ko solve kar rahe hain :D

Thakan ka asar update me kaise dekhne mil raha hai. Kya thaka hua sa update aa raha hai kya :?:
 
Ji shukriya Tinku bhai.... Kyabjare waqt ki thodi tangi chal rahi warna 2 update de hi deta hun :).. ji bilkul lay banakar chalenge .. bus aap aise hi comment karte rahiye
 
Bali to abhi tak chadhi nahihai lekin ek baat to tay hai ki taiyariyan itni parakhne ke piche kuch na kuch utsukta to rahegi hi... Baki dekhiye kya hota hai. .

Thanks for your respond..
 
Jante hain chunmun bhai kabhi kabhi to mujhe b issi baat par shaq hota hai ki nimmi usse pel na de... Ab dekhiye kya hota hai.. jo bhi hoga wo aap sab ko oata chak hi jana hai...

Bus aise hi kahani ka luft uthate rahiye aur apne comment dete rahiye :)
 
Update:-97

स्वास्तिका जैसे ही कुंजल की बात सुनी वो तेजी से उसके पास निकलने लगी लेकिन तभी पीछे से आरव उसका हाथ पकड़कर रोकते हुए कहने लगा… "अपस्यु देख तो ये छुटकी क्या कहना चाह रही है।"… अपस्यु की पूछने कि भी जरूरत नहीं हुई और कुंजल ने झट से दीपेश और स्वास्तिका के बारे में सब बता दी।… माहौल अब कुछ ऐसा था कि दोनो भाई हॉल में बैठकर स्वास्तिका को उस लड़के को बुलाने के लिए दबाव डालने लगे।

स्वास्तिका सब लोगों के बीच बैठकर कुंजल को ही देख रही थी। कुंजल अपने दोनो हाथ अपने कानो पर रखती हुई धीमे से "सॉरी" कहने लगी। स्वास्तिका दोनो भाइयों के बीच फसी बस अपने सर पर हाथ दिए सोच रही थी। उसकी हालत को समझते हुए आरव उसके करीब बैठकर…. "एंगेजमेंट से ठीक एक दिन पहले मुझे किसी ने कहा था, खुशियां और प्यार हमारी कमजोरी नहीं इसलिए मुस्कुराकर खुले दिल से स्वागत करो"..

स्वास्तिका आरव को सुनकर उससे लिपटकर रोटी हुई कहने लगी… "मुझे बहुत डर लग रहा है। मै नहीं समझ पा रही क्यों लेकिन मुझेमे सुसाइड करने की चाहत बढ़ने लगी है। मै बस मारना चाहती हूं।"..

"हेहेहे.. नॉटी, शुहहहहहहहहहहहह… शांत.. शांत… शुहहहहहहहहहहहह…"… स्वास्तिका लगातार रोए जा रही थी। आरव उसे लगातार शांत करते हुए, उसके भी आखें छलक आयी। आरव आश्चर्य से नजर उठाकर अपस्यु को देखने लगा। अपस्यु, स्वास्तिका के पास नीचे उसके पाऊं में बैठा और उसके दोनो हाथ थाम कर कहने लगा…. "मरना तो अंतिम मंज़िल है, हर किसी को वहीं पहुंचना है। तो सवाल यह है कि मरने से पहले हम कितना जीते है।"

स्वास्तिका, नजर उठाकर अपस्यु को देखती हुई उसके हाथ को जोर से थामती…. "मुझे भी जीना है अपस्यु लेकिन किसी का मारना अब बर्दाश्त नहीं होगा। दिल में नजाने डर सा पैदा होने लगा है, मै कमजोर पड़ने लगी हूं। मै बर्दाश्त नहीं कर सकती किसी का मरना।"..

अपस्यु:- तुम खुलकर जीना सीखो, और मै खुलकर मौत को देखता हूं। मेरा वादा है तुम सबसे .. तुम लोग खांसते हुए हॉस्पिटल या घर के बेड पर अपनी मौत मारोगे।

स्वास्तिका:- और तुम..

अपस्यु:- और मै उस वक़्त कई सारे बच्चों के बीच बैठकर, उसे तुम्हारी कहानी सुनाऊंगा… एक थी हमारी नॉटी.. जो ऊपर से शक्त अंदर से नरम। रोमांटिक मूवी देखकर जब कपल मिलते तो मुकुराने वाली, कपल जब बिछड़ते तो फुट-फुट कर रोने वाली। यदि कहीं कपल मर गए तो उसके वियोग में 13 दिन भूखे रहना और उनके श्राद करने के बाद खाना खाने वाली। किसी से इस डर से नहीं मिलना, कहीं वो गुम ना हो जाए उसकी ज़िन्दगी से। अरमान तो बहुत थे लेकिन खुलकर कभी किसी से कह ही नहीं पायी… ये कहानी है हमारी नॉट की, जो पिछले एक महीने से अपनी छोटी बहन के साथ रहने के बाद, यह सोचने पर मजबूर हो गई की क्या वाकई में उसकी बहन की जान खतरे में है… क्या वाकई ऐसी कोई अनहोनी होने वाली है… नहीं अभी प्यार का वक़्त नहीं.. अभी मुझे अपनी बहन को देखना है… क्यों सही कहानी सुना रहा हूं ना बच्चों को…

स्वास्तिका रोती हुई हसने लगी, वहीं कुंजल अपस्यु के पास बैठती हुई अपनें भाई को गले लगाती कहने लगी… "भैय्या, दीदी तो विदाई वाला रोना अभी से रोने लगी। लगता है विदाई के वक्त दिल्ली में बाढ़ ना ला दे।"..

आरव, स्वास्तिका के आशु पोच्छते… "दोबारा अगर सुसाइड कि बात सोची ना तो देख लेना नॉटी, बहुत ही गलत कह गई तुम।"..

अपस्यु:- अरे जहिलों अब अपना फैमिली ड्रामा सब बंद करो। अभी इस नॉटी ने गलत किया ना, अब इसके उस डॉक्टर, कुंजल क्या नाम है रे जीजा का..

कुंजल:- भैय्या डॉक्टर ही है..

स्वास्तिका:- हट पागल, दीपेश नाम है..

अपस्यु:- हां तो अब हम सब जरा परेड लगा दे उसकी…

स्वास्तिका:- अपस्यु प्लीज नहीं। बहुत प्यारा है वो..

आरव:- अच्छा वो प्यारा हो गया और हम सब तो खडूस है। सॉरी हम दोनों इस करेला का नहीं कह रहा मै।

बेचारी स्वास्तिका मना करती रहा गई लेकिन सभी भाई बहन, साथ में स्वास्तिका को लेकर उसके कैंपस निकल गए। रास्ते में कुंजल ने खुली जीप को रुकवाकर उसपर बोल्ड अक्षरों से लिखवा दिया… "द डेविल फैमिली".. और फिर खुली हुई जीप पर सवार सभी भाई बहन अपने हाथ में रॉड लिए मेडिकल कैंपस में घुसे।

स्वास्तिका से पूछताछ के बाद पता चला कि इस वक़्त दीपेश अपने हॉस्टल में ही होगा। पूरी पलटन ही चल दी हॉस्टल के ओर और आग की तरह ये बात तुरंत ही कैंपस में फ़ैल गई की स्वास्तिका अपने भाई के साथ और भी कुछ लोगों को लेकर हॉस्टल के ओर आ रहे है।

देखते ही देखते सबके व्हाट्स ऐप से संदेश फॉरवर्ड होने लगा, लेकिन कुछ लोग इन सब बातों से अनभिज्ञ, अपने होस्टल के रूम में बैठ कर सुबह से ही दारू का मज़ा ले रहे थे, वो भी सिर्फ इस बात को सोचकर की उसकी गर्लफ्रेंड आज कॉलेज नहीं आएगी और वो आज ही रखी के लिए अपने घर जा रही है।

उन अभागों के मित्र बार-बार आकर दरवाजा पिट रहे थे लेकिन उन्हें लग रहा था कोई उसकी दारू में शेयर मांगने आ रहा है, इसलिए दरवाजा क्यों खोलने लगे.. और थोड़ी देर बाद बड़े ही जोड़-जोड़ से दरवाजा पीटने की आवाज़… "चुतियों मर जाओ बाहर दरवाजा पिट-पिट कर आज तो महफ़िल समाप्त होने के बाद ही दरवाजा खुलेगा।"… दीपेश का दोस्त निर्मल चिल्लाते हुए कहने लगा।

जैसे ही महफ़िल की बात स्वास्तिका के कानो में गई वो चिंखती हुई कहने लगी… "अभी के अभी दरवाजा खोलो"… अंदर दोनो ही हड़बड़ा गए। निर्मल तो खिड़की के लगे ग्रिल को उखारकर भागने की फिराक में था और दीपेश अपने ऊपर जल्दी से कपड़ा डालकर दरवाजा खोला… "वो बेबी.. वो ओ ओ ओ ओ".. मुंह से कुछ शब्द निकले ही थे कि सामने आरव और कुंजल को देखकर फाटक से दरवाजा बंद करते हुए…. "निर्मल आज बजने वाली है रे, वो लेडी डॉन की छोटी बहन ने हमारे बारे में अपने भाई को बता दी, वो भी आया है।"..

निर्मल:- मां की आंख साले किसने कहा था इतनी खरनाक गर्लफ्रेंड रखने। तेरे चक्कर में कहीं कैंपस में मेरा झंडा ना फहरा दे आज।

तभी दरवाजे पर एक लात और दरवाजा खुल चुका था। सभी भाई बहन अंदर पहुंचे और स्वास्तिका दोनो को देखकर हैरान होती हुई पूछने लगी… "सुबह से कौन बैठता है पीने के लिए डॉक्टर जरा मुझे समझाओगे। मेरे दोनो भाई तुमसे मिलने आए थे.. और तुमने.."

अपस्यु:- सब शांत हो जाएंगे, तुम दोनो में से वो लड़का कौन है जो स्वास्तिका को चाहता है। आगे आओ..

दीपेश सिर झुकाए एक कदम आकर उसके सामने खड़ा होगा। अपस्यु के कहने पर उसने अपना चेहरा ऊपर किया… "हम्मम ! लड़का दिखता तो हैंडसम है। तुम्हारी डाक्टरी कैसी है डॉक्टर।

दीपेश:- सर हम दोनों (दीपेश और निर्मल) स्वास्तिका के तरह टॉपर तो नहीं लेकिन डिस्टिंक्शन मार्क ले आते है, और अपने विषय पर प्रैक्टिकली अच्छी पकड़ भी है।

अपस्यु:- हमें तुम्हारा प्रोफाइल पसंद आया। आरव सबको लेकर फ्लैट जाओ मैं जरा कुछ और निजी जानकारी इनकी निकलता हूं।

आरव:- बेवड़ा कहीं का ये क्यों नहीं कहते कि इनको टेस्ट करना है कि तुम्हारे साथ बैठक के लायक है कि नहीं।

अपस्यु:- एक बार में नहीं समझ में आती क्या, जाओ मै आता हूं।

स्वास्तिका:- अपस्यु खबरदार जो अपने लिए कोई नया पार्टनर के रूप में दीपेश को देखा तो। दीपेश तुम चलो हमारे साथ। अपस्यु तुम उस निर्मल की निजी जानकारी निकलते रहो आराम से।

"ठीक है गुप्त मतदान करते है। सब अपने अपने चिट लिखेंगे और हम किसी बाहर वाले से वो चिट पढ़ाएंगे। बोलो मंजूर"..

स्वास्तिका और आरव इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन कुंजल के कहने पर चिट बनाया गया और बाहर के एक लड़के से पढ़ाया गया। मात्र 2 वोट थे "नहीं जाएंगे" बाकी 4 वोट जाने के थे। फिर क्या था अपस्यु दोनों को लेकर निकल गया और स्वास्तिका उसकी इस हरकत से पूरी तरह चिढ़ गई। उसके गुस्से का शिकार बेचारी कुंजल को भी होना पड़ा। वापस लौटकर स्वास्तिका चिढ़ती हुई सबको बैग पैक करने बोली और जो भी फ्लाइट मिली उसे पकड़ कर दिल्ली।

इधर अपस्यु जब दोनो को लेकर निकला, तीनों पैदल चलते हुए बात करते कैंपस के बाहर निकल आए। कुछ ही कदम अपस्यु साथ चला होगा लेकिन केवल दीपेश ही नहीं बल्कि निर्मल के बारे में भी बहुत कुछ पता चल गया। एक बात जो अपस्यु को सबसे ज्यादा अच्छी लगी वो थी दोनो की दोस्ती। दोनो के रिश्ते में गहराई और सच्चाई दोनो नजर आती थी।

पैदल ही तीनों निकले, और कैंपस के बाहर से टैक्सी में तीनों बैठ गए। निर्मल अपस्यु से पूछने लगा कि पहले कहां जाना है। अपस्यु ने टैक्सी वाले को लैंबोर्गिनी के शोरूम ले जाने के लिए बोल दिया। दीपेश और निर्मल को कुछ भी समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है।

अपस्यु वहां पहुंचकर दोनो को एक मस्त कार पसंद करने के लिए बोला। इसपर पहले दीपेश ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए अपस्यु को बहुत कुछ सुना दिया और उसी के नक्शे कदम पर निर्मल ने भी मेहनत कि कमाई के ऊपर अच्छा खासा भाषण दे दिया। अपस्यु दोनो की बड़े ध्यान से सुनता गया…

"ओ भाई राम मिलाए जोड़ी, कौन से ख्याली पुलाव पका रहे हो। तुम्हे क्या लगा यहां मै 4-5 कारोर की कार तुम्हे दिलवाने लाया हूं। और ये क्या कह रहे थे मेहनत कि कमाई, जब किसी मरीज को आर्थिक रूप से ना मारते हुए अपनी कमाई करोगे तब यह बात कहना, मुझे खुशी होगी। तुम डॉक्टर्स के पास पढ़ाई के वक़्त तो बहुत नैतिकता होती है लेकिन माफ करना 100 में से 90 की नैतिकता हॉस्पिटल में जाते ही उसके पिछवाड़े में घुस जाती है। भूल जाओ की किसी डॉक्टर को मै 5 रुपया का भी कोई गिफ्ट दूं। वो तो हमारी छुटकी को लैंबोर्गिनी बहुत पसंद है तो सोचा दोनो बहन के लिए ले लूं। अब ख्याली पुलाव पकाना बंद करो।"..

निर्मल:- यार अपना तो पुरा बलात्कार कर दिया तेरे साले ने..

दीपेश:- साला ऐसे ही ओवर रिएक्ट करते रहे तो ऐसे ही पोपट होना है।

कार की शॉपिंग के बाद तीनों फिर निकले। दोनो सोचकर तो निकले थे कि आज शायद अपस्यु के साथ बैठक हो, लेकिन अपस्यु ने दोनो को किसी कुली कि तरह खटाया और लगभग 3 घंटे वो दोनो से समान उठवाते रहा। अंत में जब अपस्यु उसे छोड़कर जाने लगा तब दीपेश से अकेले में मिलते हुए कहने लगा… "वैसे तो मुझे नॉटी की चॉइस पर कभी 2 राय नहीं रही लेकिन तुम से मिलने के बाद और भी अच्छा लगा। अपना एड्रेस मैसेज कर देना। जल्द ही मां के साथ आऊंगा तुम्हारे परिवार से मिलने।"..

अपस्यु के जाते ही निर्मल, दीपेश के कंधे पर हाथ रखते हुए कहने लगा… "साला 5 करोड़ की शॉपिंग अपनी बहन के लिए कर गया, हमें एक जूस के लिए नहीं पूछा। बड़ा ही कंजर परिवार है ये।"..

दीपेश:- यार 10 मिनट तक जो मेहनत पर भाषण दिए जाते, लगता है मेरे सले ने सच में दिल पर लगा लिया। हम तो कार के बारे में कह रहे थे.. थोड़े ना कुछ खिलाने-पिलाने के लिए मना किया था।

निर्मल:- साला इनके चक्कर ने 400 रुपए का खंबा भी फेंक दिया..

दीपेश:- चुतीया, पैसे भी नहीं है अब..

इधर अपस्यु भी फ्लाइट पकड़ कर दिल्ली आ गया और कुंजल के लिए भी पूरी खरीदारी करने के बाद लगभग 7 बजे शाम तक वापस पहुंच गया। अपस्यु को इतनी जल्दी वहां देखकर कुंजल उसके पास दौड़ कर पहुंची और दोनो (आरव और स्वास्तिका) की शिकायत करने लगीं। उसके नेगेटिव वोटिंग के कारन दोनो ने उसे खूब सुनाया था।

अपस्यु मुसकुराते हुए उसके माथे को चूमा…. "चल जल्दी नीचे तुझे कुछ दिखाना है।"

कुंजल:- क्या है भाई, मेरे लिए कोई सरप्राइज है क्या?

अपस्यु:- पहले चल तो सही..

ब्रांड न्यू पैक लंबोर्गिनी को देखकर कुंजल उछलती हुई अपस्यु के गले लगती कहने लगी… "थैंक्स थैंक्स थैंक्स भैय्या.. आप को याद था।"..

अपस्यु:- पागल, भुला ही कब था।

कुंजल:- हां लेकिन दोनो लंबोर्गिनी मेरी। मुझे जिस दिन जो चलाने का मन होगा मै वो चलाऊंगी।

अपस्यु:- ठीक है, हैप्पी ना अब..

कुंजल:- भैय्या सुनो ना..

अपस्यु:- अभी तो खुश थी, इतनी जल्दी मायूस क्यो..

कुंजल:- मै लालची तो नहीं होते जा रही जो ना जाने क्यों इतने बड़े -बड़े और कीमती गिफ्ट देखकर खुश होती हूं जबकि जीने के लिए तो 10000 में भी अच्छे से गुजरा हुआ करता था कभी।

"इधर आ मेरे पास".. कुंजल जैसे ही उसके पास पहुंची, उसके सर पर हाथ फेरने हुए अपस्यु कहने लगा…. "सबके लिए सोचना अच्छी बात होती है, लिए लेकिन हम सबके लिए कुछ नहीं कर सकते। यहां हर किसी को अपने और अपने परिवार के लिए खुद काम करना पड़ता है। रही बात लालच की तो थोड़े बहुत तो दुनिया लालची है लेकिन किसी चीज को पाने की चाहत में दूसरों को रौंद कर उस चाहत को पुरा करना असल लालच होती है।

"फिर वो किसी की फीलिंग को ही रौंदना क्यों ना हो। बस अब खुश हो जा और तुझे यदि ऐसा रहा हो कि जितने पैसे अकेले तुझ पर खर्च हो रहे है उतने में दूसरों के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है तो भगवान वो अवसर तुम्हे जल्द देगा जब तुम बहुत से लोगों को बहुत कुछ करने के लायक हो जाओगी। उस वक़्त खुद को मजबूत करते हुए दोनो हाथों से जितना कर सकती हो करते रहना।"

कुंजल फिर से "थैंक्स भैय्या" बोलकर चाभी हाथ में ले ली और दौड़ते हुए भागी। अंदर जाकर नाचती हुई सबके कमरे में जा जाकर अपनी नए कार के बारे में बताने लगी। ऐसा लग रहा था आज कुंजल का दिन ही खराब चल रहा था। जैसी ही वो खुश होकर नंदनी के कमरे में गई अपनी बात कहने, एक थप्पड़ खा गई, और कार के लिए डांट सुनी सो अलग।

इसी क्रम में सबको पता भी चल गया कि अपस्यु वापस लौट आया है। बाकी सब को तो पता था सिवाय नंदनी के इसलिए नंदनी अपस्यु से मिलने हॉल में चली आयी.. कुछ देर बाद पूरे परिवार की सभा बैठी। बात अभी अपस्यु और उसके शराब के बारे में चलना शुरू ही हुई थी, कि इतने में गुफरान का फोन आया।

घबराया वो कॉल करके बताने लगा कि एक छोटा सा ऐक्सिडेंट हो गया और कुंजल को कुछ लोग घेर लिए है। उनमें से कुछ ने उसपर हाथ भी उठाया.. अपस्यु ने जैसी ही ये बात सुनी, थोड़ा लड़खड़ा गया.. उसे ऐसी हालत में देख सब चौक कर खड़े हो गए..

अपस्यु अपने घबराए चेहरे को तुरंत ही ठीक करते हुए आरव और स्वास्तिका से कहने लगा… "एक दोस्त का ऐक्सिडेंट हुआ है, बहुत ही परेशान वो पहले से है, ऊपर से कुछ लोग और परेशान कर रहे है।"

नंदनी:- बहुत बुरा हुआ.. जल्दी जाओ अपस्यु अपने दोस्त की जल्द से जल्द सहायता करो।

आरव और स्वास्तिका भी कहने लगे.. "हम भी आ रहे है।" अपस्यु ने आरव को गाड़ी निकालने कहा और स्टोर रूम से जाकर अपना एक बैग निकाल लाया जिसमें पुरा हथियार भड़ा हुए था… जैसे ही अपस्यु कार में बैठा दोनो अपस्यु से हड़बड़ी में पूछने लगी… "कुंजल तो ठीक है ना।"..

"वो भले ही ठीक हो लेकिन इस वक़्त मै ठीक नहीं हूं। अगर मेरी बहन की गलती हुई तो उसका मार खाने का गम मै सह लूंगा.. वरना मै युद्ध आवाहन मंत्र शुरू कर चुका हूं। आरव कार को छोटी की जीपीएस लोकेशन पर ले.. जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी।"..
 
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