Romance भंवर (पूर्ण) - Page 80 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Romance भंवर (पूर्ण)

In baarisho se dosti achchhi nahi fraaj,

Kacha tera makan hai kuch to khyal kar.

[/QUOTE]

Kya baat hai .. kya baat .. kya baat hai Nevil bhai chha gaye aap to
 
Dhang se comment kiye hote to 600 page hote Red skull wale bhaiyya ..

:thanks: for posting your fabulous views... Keep reading .. keep commenting :yo: :yay: :yo:
 
Update:- 108

सर भारी, बदन पुरा टूटा हुआ और आखें जब खुली तो शाम के 4 बज रहे थे। श्रेया चौंककर थोड़ी सक्रिय हुई, लेकिन सर इतना भारी था कि दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। टेबल पर एक छोटा सा नोट परा हुआ था….

"मेरा कॉकटेल पीने पर मज़ा तो बहुत आता है, लेकिन सोकर जागना उतना ही दुखदाई होता है। नोट के पास ही जूस रखा है, पी लेना, वरना कोई काम नहीं कर पाओगे। तुम्हारे फ्लैट की चाभी निकालने के लिए तुम्हारे तिजोरी में हाथ डालना परा उसके लिए सॉरी। आगे का वक़्त आनदमय हो, धन्यवाद।"

दिन के 10 बज रहे थे। अपस्यु लगभग अपनी नींद पूरी करके जाग चुका था। श्रेया क्राउच पर बेसुध लेटी हुई थी। अपस्यु उसे छोड़कर निकल गया। कुछ देर बाद वो आया और छोटा सा स्प्रे श्रेया के नाक पर कर दिया, ताकि नींद और गहरी हो जाए।

श्रेया की और गहरी नींद सुनिश्चित करने के बाद अपस्यु ने गुफरान और प्रदीप को बुलवाकर, श्रेया को उठवाया और ले जाकर उसके फ्लैट में लिटा दिया। उसी दौरान अपस्यु ने उसके फ्लैट की एक छोटी सी झलक चारो ओर की ली और वहां से वापस अपने फ्लैट आ गया। लौटकर उसने सबसे पहले मेघा को कॉल लगाया…. "हेल्लो हैंडसम, कैसे हो।"..

अपस्यु:- मस्त हूं। वहां क्या हो रहा है?

मेघा:- होना क्या है, बिजनेस, बिजनेस और बिजनेस..

अपस्यु:- और फन..

मेघा:- ओह तो तुम ऐसे आ रहे हो। क्या हुआ मेरी याद आ गई क्या?

अपस्यु:- तुम नहीं तुम्हारी वो सेक्सी बदन, जो इतना मादक है कि ख्याल से ही बदन में आग लग जाए।

मेघा:- तारीफ का शुक्रिया। वैसे ऐसे बदन के मज़े लेने हो, तो तुम यूएसए क्यों नहीं चले आते।

अपस्यु:- तुम ही इंडिया क्यों नहीं आ जाती। इसी बहाने काम से के छोटा सा ब्रेक भी मिल जाएगा हर तुम्हारे मज़े भी हो जाएंगे। ऊपर से यहां के फैक्टरी का काम तुम अपनें हाथों से शुरू भी कर सकती हो।

मेघा:- आइडिया बुरा नहीं है, कल सुबह तक सोचकर बताती हूं। बाय बाय डार्लिंग…।

अपस्यु:- बाय बाय स्वीटहार्ट…

मेघा से बात करने बाद अपस्यु नहाने चला गया। मस्त चकाचक तैयार हुआ। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सेलेब्रिटी कैजुअल आउटफिट में तैयार होकर निकल रहा हो। तैयार होने से पहले ही अपस्यु ने प्रदीप को गाड़ी तैयार रखने के लिए बोला दिया था।

अपस्यु कार में बैठकर अपार्टमेंट के बाहर निकल रहा था और उधर मिश्रा आवास साची और ध्रुव बाहर निकल रहे थे। अपस्यु की कार देखकर साची ने हॉर्न देकर कार रोकने का इशारा की।… "सर वो लड़की कार रोकने के लिए कह रही है।"..

अपस्यु:- तू ड्राइवर है या मुर्गी चोर साले। इतने दिन से साची मेरे घर पर आती है और तू कह रहा है कि वो लड़की गाड़ी रोकने कह रही। सुधार जाओ, वरना मै सुधारने पर आया तो खर नहीं।

प्रदीप ने गाड़ी किनारे खड़ी की और अपस्यु उतरकर बाहर आया…. "ओय हैंडसम ऐसे चकाचक होकर किधर जा रहा है।".... साची उसके करीब आती हुई पूछी।

अपस्यु:- ऐमी से मिलने जा रहा हूं, कुछ विशेष काम हो तो कहो..

साची, अपस्यु के गले लगती उसके कान में धीमे से "थैंक्स" कहती हुई अलग हुई। अपस्यु थोड़े आश्चर्य होकर पूछने लगा… "यूं अचानक ऐसे थैंक्स, तुम ठीक तो हो साची"..

ध्रुव:- काम का जिम्मा तुमने अपने सर ले लिया और उसके बाद मुझे पूरे हफ्ते की छुट्टी मिल गई। इसलिए हम चले…..

अपस्यु:- हिनीमून पर …

साची:- मेरे घर वाले, तू.... हर कोई एक ही बात सोचते रहो। सब पागल हो गए है। और तुम क्या हंस रहे हो धुव्र।

"तू कितनी बड़ी बेवकूफ है वो बस उसी बात पर हंस रहा है। कह तो ऐसे रही है जैसे मन में तेरे लड्डू ना फुट रहा होगा।..".. अपस्यु अपनी बात कहते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और ध्रुव ताली देते हुए हसने लगा।

साची:- बेशर्म हो गए हो दोनो, ध्रुव चलो भी। छोड़ो इसे, वरना बाबा जी शाम यहीं कर देंगे।

साची के कुछ दूर आगे जाते ही ध्रुव अपस्यु के करीब आकर धीमे से कहने लगा… "यार मुझे तो लगा ये अपनी फिलॉस्फी के चक्कर में मेरे अरमान पर पानी ना फेर दे, थैंक्स, अब सब क्लियर है।"

अपस्यु:- मज़े करो दोस्त और आराम से लौटना, जबतक यहां का काम शुरू करवाता हूं। अच्छा सुनो ऑफिस के लिए बिल्डिंग रेंट पर लोगो या अपना कोई परमानेंट ऑफिस।

ध्रुव:- इसपर बाद में डिस्कस करता हूं। ये सारा मामला सिस देखती है, और उससे अभी बात करने का मन नहीं है।

इतने में ही साची तेज-तेज हॉर्न बजाने लगी। ध्रुव, अपस्यु को बाय कहता वहां से निकला। अपस्यु भी जैस ही कार के ओर मुड़ने लगा, प्रदीप को कार के बाहर खड़ा देखकर…. "अबे अब तू बाहर क्यों खड़ा था, जरा बताएगा।"

प्रदीप:- आप बाहर खड़े थे इसलिए मै भी बाहर खड़ा था।

अपस्यु:- जी चलिए अब अंदर सर, और कार सिन्हा जी के यहां ले लीजिए।

कुछ ही देर में कार बंगलो के अंदर थी और अपस्यु कार के बाहर। मोबाइल कार में ही छोड़कर अपस्यु अंदर पहुंचा और हॉल में लगे म्यूज़िक सियस्टम को फुल वॉल्यूम पर डालते हुए उसने "सैटरडे सैटरडे (saturday-saturday)" सोंग चला दिया और हॉल में ही नाचना शुरू कर दिया।

छुट्टी का दिन था, सिन्हा जी अपने दोनो बच्चो के साथ बच्चे बने खेल रहे थे। इतने में तेज म्यूज़िक की आवाज़ पर भन्नाते हुए कहने लगे… "जो भी पागल आज इसका दोषी पाया जाएगा उसकी तो खैर नहीं।"…

ऐमी हंसती हुई भागी और भागते-भागते कहने लगी… "डैड आप का दामाद है, उसका का कुछ नहीं बिगाड़ सकते".. और भगति हुई नीचे आकर अपस्यु के साथ कदम से कदम मिलाती वो भी नाचने लगी। अपस्यु उसके बाहों मै लेकर घूमने लगा.. ऐमी खिली सी हंसती हुई कहने लगी… "भावनाओ में बहकर किस्स मत करने लगना वरना सिन्हा जी पागल हो जाएंगे।"

"अजी अब सिन्हा जी हो या नंदनी रघुवंशी, जिसे पागल होना है होते रहे"… कहते हुए अपस्यु अपने होंठ ऐमी के होंठ के ओर बढ़ाने लगा… ऐमी खिल-खिलाकर हंसती हुई उसे धक्के दी और जाकर म्यूज़िक बंद कर दी।

अपस्यु थोड़ा हट दिखाते हुए म्यूज़िक की पुनः फुल वॉल्यूम में चलाया और ऐमी के ओर अपना हाथ बढ़ा दिया…. "हीहीहीही… पागल हो गए हो तुम।".. ऐमी भी हाथ पकड़ती हुई कहने लगी।

अपस्यु हाथ को खींचा और ऐमी गोल घूमकर सीधा अपस्यु के बाहों में आकर गिरी.. दोनो की नजरे एक दूसरे पर टिकी हुई थी… "आज ये सुबह-सुबह जो तुम्हे बदमाशियां सूझ रही है ना.. हटो भी .. डैड है यहीं पर।"

अपस्यु:- जा नहीं हटता मै, जिसे जो करना है कर ले…

ऐमी अपस्यु के बाहों से खड़ी होती डांस मूव करती… "वैसे ये तुम्हरा हीरो वाला लुक कातिलाना है। कहीं बाहर चल रहे है क्या?"

अपस्यु, वापस से खींचकर ऐमी को अपने बाहों में लेते… "मेरा कोई प्लान नहीं, बस आज दिल बेईमान है। आज शाम से लेकर कल रात तक में एक एक्शन की उम्मीद है, वो यदि रोमांस के साथ एक्शन हो, तो ज़िन्दगी में रोमांच आ जाएगा ना लव।"..

ऐमी:- अच्छा सुनो तो मैं क्या कह रही हूं..

दोनो अभी थोड़ी हटखेलियां शुरू ही किए थे कि पीछे से प्रदीप जोड़ से चिल्लाते हुए कहने लगा… "सर आपका फोन बज रहा है।"..

ऐमी, अपस्यु की बाहों में थी। ऐमी के चेहरे पर खिली सी हंसी थी वहीं अपस्यु के चेहरे पर सुकून की मुस्कान और दोनो की नजरे एक दूसरे को निहार रही थी। इसी बीच प्रदीप पहुंच गया फोन कि घंटी लेकर..

पीछे की आवाज़ सुनकर अपस्यु ऐमी से अलग हुआ और प्रदीप को घूरने लगा। अपस्यु को देखकर ऐमी और जोर से हंसती हुई जाकर पहले म्यूज़िक बंद की और फ्रिज से चॉकलेट निकालकर खाती हुई वहीं सोफे पर बैठी। अपस्यु भी उसके पास आकर बैठा और प्रदीप के हाथ से फोन लेकर, जाकर दरवाजे के बाहर वहीं खड़े होकर इंतजार करने कहने लगा।

ऐमी, अपस्यु को घूरती हुई…. "आप प्रदीप है ना।"

प्रदीप:- येस मैम..

ऐमी:- भईया आप वहां आराम से बैठो। मीना बाहर आकर भईया के लिए कुछ चाय नाश्ता लगा।

प्रदीप:- नहीं मैम रहने दीजिए।

ऐमी:- वो मुझसे नहीं कहिए, मीना आएगी उसी को मना कीजिएगा।

इधर जबतक अपस्यु, नंदनी को वापस कॉल लगाने लगा। उधर से कॉल पिक होते ही…. "क्या कर रहे हो भाई "

अपस्यु:- कुंजल बेटा तुझे यही वक़्त मिला था क्या कॉल करने…

अपस्यु की बात सुनकर ऐमी उसके हाथ से फोन छीनकर फोन स्पीकर पर डाली… "अपस्यु आज खिसका हुआ है, तुम उसकी बात छोड़ो, बताओ कैसे फोन करना हुआ"

कुंजल:- भाभी आपसे ही बात करनी थी, कई बार आपके नंबर पर कॉल लगाई लेकिन कोई जवाब ही नहीं आया। फिर जैसा अंदाज़ा था वैसा ही हुआ, और रिएक्शन भी वैसे ही देखने मिल रहे।

अपस्यु को लग गया अब हो गया.. वो आराम से ऐमी के गोद में अपना सर डालकर लेट गया। ऐमी,उसके बालों में हाथ फेरती कुंजल से बात करने में व्यस्त हो गई। अपस्यु रात का जगा था, बालों में हाथ फेरने से कब उसे नींद आयी पता भी नहीं चला।

लगभग आधे घंटे तक कुंजल से बात करने के बाद ऐमी जब अपस्यु को देखी तो वो गहरी नींद में चला गया था। ऐमी उसे सुकून से सोते हुए देखकर मुस्कुराने लगी…. "मीना, तेल लेकर आ जरा।"

मीना तेल लेकर ऐमी के हाथ में देती…. "दीदी वो साहब ने कुछ नहीं लिया।"..

ऐमी:- क्यों भईया, आपने कुछ नहीं लिया, बात क्या है?

प्रदीप:- मैम वो मैं चाय नहीं पीता।

ऐमी:- मीना सुन, भईया को स्टाफ क्वार्टर दिखा दे, वहां आराम कर लेंगे और जाकर देख तो डैड और वैभव क्या कर रहे।

मीना, ऐमी के बताए सारे काम करके वापस आती…. "बड़ा अजीब आदमी है दीदी, स्टाफ क्वार्टर दिखाई तो कहता है कि ये तो गरीबों का क्वार्टर है, इससे अच्छा तो हमारे यहां है, जबकि ये तो बंगलो है और हमारे तो फ्लैट में बना है स्टाफ क्वार्टर।

ऐमी:- जाने दे उसे, तुझे ऊपर जाकर बोली थी डैड और वैभव को देखकर आने।

मीना:- दीदी दोनो खेल रहे हैं।

ऐमी:- ठीक है दोनो का खाना ऊपर ही लगवा देना और कहना कोई आवाज़ ना करे, अपस्यु सो रहा है। और हॉल का ये दरवाजा बंद कर दे और सबको बोलना वो साइड का दरवाजा इस्तमाल करे।

हॉल का वो पुरा हिस्सा ही सबसे अलग करके ऐमी, अपस्यु के बालों में तेल डालकर धीरे-धीरे मालिश करने लगी। अपस्यु सुकून से उसके गोद ने निश्चिंत होकर सोता रहा। उसकी भी गहरी नींद लगभग 4 बजे ही खुली। ऐमी अब भी मुसकुराते हुए उसका चेहरा देख रही थी और उसके बालों मै हाथ फेर रही थी।

"मज़ा आ गया। कितनी देर से सोया हूं मै।"… अपस्यु अपना हाथ ऊपर ले जाते ऐमी के गालों पर हाथ फेरते हुए पूछने लगा।

ऐमी:- कोई काम जब नहीं था तब ये सोने का हिसाब क्यों। चलो जकर फ्रेश हो जाओ, मै खाना लगती हूं।

अपस्यु:- कम से कम रूम तक तो चलो।

ऐमी, अपनी आखें दिखती…. "बाहर चल तो रहे है हम, फिर ये बेचैनी क्यों? जाओ फ्रेश होकर आओ।

अपस्यु जबतक फ्रेश होकर आया, ऐमी खाना लगा चुकी थी। दोनो साथ बैठकर खाने लगे। खाना, खाने के बाद अपस्यु वहीं सोफे पर लेटते हुए… "आह ! मज़ा आ गया। मै क्या सोच रहा था जबतक मै आराम करता हूं, तुम तैयार क्यों नहीं हो जाती।"..

ऐमी:- अभी 2 घंटे तक सोए थे फिर अब खाकर भी लेट रहे हो, मै क्या इंसान नहीं हूं जो खाने के बाद सीधा तैयार होने चली जाऊं। एक तो तुम्हारे चक्कर में भूख से मेरी जान निकाल गई, अब जब पूरे गले तक खा ली हूं तब तुम मुझे तैयार होने कह रहे। स्वार्थी कहीं के, मै नहीं जा रही कहीं। मै भी अपने कमरे मे जा रही हूं लेटने।

ऐमी गुस्से में उठकर वहां से अपने कमरे में चली गई। कुछ ही देर बाद अपस्यु भी पहुंचा ऐमी के कमरे में और ऐमी के चेहरे के सामने अपना चेहरा करके सो गया। ऐमी बिना कुछ बोले अपना चेहरा दूसरी ओर की और खुद को चादर से ढककर सोने लगी। सोने का नाटक करते हुए कब उसे नींद आ गई, ऐमी को भी पता नहीं चला।
 
Update:-109

ऐमी गुस्से में उठकर वहां से अपने कमरे में चली गई। कुछ ही देर बाद अपस्यु भी पहुंचा ऐमी के कमरे में और ऐमी के चेहरे के सामने अपना चेहरा करके सो गया। ऐमी बिना कुछ बोले अपना चेहरा दूसरी ओर की और खुद को चादर से ढककर सोने लगी। सोने का नाटक करते हुए कब उसे नींद आ गई, ऐमी को भी पता नहीं चला।

ऐमी जब जागी तब अपस्यु ठीक उसके आंख के सामने कुर्सी पर बैठा हुआ था। अपस्यु को अपने नज़रों के सामने देख ऐमी मुस्कुराई और अपने आंखों के इशारे से उसे अपने करीब बुलाई।

अपस्यु बिस्तर किनारे बैठकर, अपना चेहरा आगे करते ठीक उसके चेहरे के सामने किया और उसे देखकर मुस्कुराने लगा। अपस्यु के होंठ को चूमकर ऐमी… "सॉरी वो थोड़ी चिड़चिड़ापन आ गया था।"..

अपस्यु:- कोई बात नहीं है, अब जाकर तैयार हो जाओ। और हां हम इंडिया गेट चल रहे हैं।

ऐमी चहकती हुई उठकर बैठती हुई…. "क्या सच में"..

"जी हां बिल्कुल सच में। एक ख्वाहिश तो जताई थी, उसमें भी देर कर दूं, नाह। चलो अब जल्दी से चलते है।'.. अपस्यु अपनी बात कहते हुए उठा और वो भी तैयार होने चल दिया।

तकरीबन घंटे भर बाद ऐमी अपने कमरे से बाहर आयी। जब पहली नजर उसपर गई तो अपस्यु का मुस्कुराता चेहरा खिली सी हंसी में बदल गया। एक दिन ख्वाहिशों के झरोखे से अपस्यु ने अपनी इक्छा जताई थी, जब कभी भी मै तुमसे अपने दिल का हाल बताऊंगा तब तुम ठीक वैसे ही तैयार होना जैसे कोई युवती अपने शादी के लिए लड़कों वालों को दिखाने के लिए तैयार होती है।

ऐमी के दिमाग में अब तक थी यह बात और ना जाने कबसे वो भी इसी मौके का इंतजार कर रही थी। गहरे हरे रंग में बड़ी सी लाल बॉर्डर की साड़ी पहने जब वो अपस्यु के नज़रों के सामने आयी, उसका चेहरे की रंगत बता रही थी कि आज वो किसके लिए तैयार होकर आयी है। और जिसके लिए तैयार होकर आयी थी उसकी नजर के भाव को पढ़कर ऐमी अंदर से खुश हो गई।

वह अपनी खिली सी मुस्कान के साथ एक-एक कदम बढ़ाती सीढ़ियों से नीचे आ रही थी और अपस्यु अपनी नजर उसके मनमोहित रूप पर जमाए, अपने कदम ऐमी के ओर बढ़ा रहा था। दोनो जैसे ही करीब हुए अपस्यु उसके अभिवादन में अपना एक हाथ आगे बढाते हुए थोड़ा सा झुका। ऐमी अपस्यु के इस स्वागत को देखकर खुलकर हसने लगी…. "बस भी करो, अब नजरें हटाओ भी"..

"आज तो नजर वैसे भी नहीं हटने वाली है, तो चले क्या?"…. "येस ! चलते है।"..

दोनो वहां निकले, अपस्यु ने प्रदीप को फ्लैट लौट जाने के लिए कहा और दोनो ऐमी की कार में इंडिया गेट पहुंच गए। शाम के समय इंडिया गेट का नजारा काफी मनमोहक था और काफी लोग भी जमा थे। अपस्यु अपना फोन निकालकर एक छोटा सा संदेश भेजा और उसके तुरंत बाद ही वहां आतिशबाजियों होने लगी।

छोटी आतिशबाजी होती तो लोग एकबार ध्यान देते लेकिन यह आतीबाजी जब शुरू हुई तो फिर रुकने का नाम कहां के रही थी। हवाओं में धुएं से लिख दिया गया था…. "आप सब गवाह है एक अनोखे पल का.. होने वाले मोहब्बत के इजहार का आनंद ले।"

इंडिया गेट, उसपर से तकरीबन 20 मिनट की आतिशबाजी। प्रशाशन कोना-कोना छन मार रही थी, मीडिया धुएं से लिखे संदेश को लगातार ब्रेकिंग न्यूज बनाकर…. "कौन अपने प्यार का इजहार करने वाला है".. उसका सस्पेंस क्रिएट कर रही थी। कुछ टीवी देखने वाले, मीडिया को गाली से रहे थे, तो बहुत से दर्शक इस इजहार के गवाह बनना चाहते थे और वो चैनल की टीआरपी को इस कदर बढ़ा रहे थे कि ये घटना मीडिया इवेंट सा बनता जा रहा था।

जब आतिशबाजियों समाप्त हुई तब अचानक भिड़ में से पहले एक लड़की निकलकर इंडिया गेट में सामने थिरकने लगी। क्या डांस मूव थे उसके। उस लड़की ने जैसे ही 2 डांस मूव परफॉर्म की, वो वहां के लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई…..

इस सोलो परफॉर्मेंस के 2 मूव करने के बाद, लोगो को पता चला कि वहां मोब डांस शुरू हो चुका है। अचानक ही वहां डांस करने वालों का पूरा हंजूम लग गया। डीजे की म्यूज़िक इतनी तेज थी कि वहां घूम रहे हर सैलानी और स्थानीय लोगों को उस ओर आने पर मजबूर कर दिया।

अपस्यु मुसकुराते हुए ऐमी के ओर अपना हाथ बढ़ा दिया। दोनो के रिश्ते में छिपाने जैसा कुछ भी नहीं था, और इजहार तो कब से ये एक दूसरे की आंखों में देखकर कर चुके थे, लेकिन फिर भी ना जाने क्यों ये समा और यहां का माहौल देखकर दोनो का ही दिल जोड़ों से धड़क रहे थे और आने वाले पल की कामना करके रोमांचित हो उठा था।

एक दूसरे के आंखों में आखें डालकर मुसकुराते हुए दोनो हाथ थामे उस मोब डांस के ओर बढ़ रहे थे। डांस ग्रुप का एक हिस्सा भिड़ के बीच में था, जैसे ही अनलोगों ने अपस्यु और ऐमी को आते देखा बीच से रास्ता बना दिए और फोकस लाइट दोनो पर परने लगी।

फिर क्या, ध्यान पीछे से आ रहे क्यूट से कपल पर गई जो एक दूसरे का हाथ थामे, मुसकुराते हुए नज़रों से नजरें मिलाए चल रहे थे। ना तो नजर हटी एक दूसरे से और ना ही दोनो ने एक बार भी सामने देखा। मोब डांस के बीच जैसे ही अपस्यु पहुंचा, अपने घुटनों पर बैठकर दोनो बाहें फैला दिया।

अपस्यु ने जैसे ही दोनो बाहें फैलाई ऐमी खिल खिलाकर हंसने लगी किन्तु भावनापूर्ण आशु उसके आंखों से छलक रहे थे, जो इस खुशी के पल को दर्शा रहा था। अपने कोट के अंदर की जेब से अपस्यु ने वहीं उजला और नीला फुल निकालकर सामने बढ़ाते हुए कहा…. "तुम्हारे लिए मै हमेशा, आई लव यू ऐमी"

ऐमी हंसती हुई अपस्यु से लिपटकर कहने लगी… "हमेशा के आगे भी यदि कोई जहां है और मै जब भी इस जहां में रहूं तुम ही मुझे मिलना..लव यू टू"

कुछ देर ऐमी लिपटे रहने के बाद अपस्यु से अलग हुई और अपना हाथ आगे बढ़ा दी। जैसे ही अपस्यु ने ऐमी का हाथ थामा, झन्नेटेडर म्यूज़िक बजने लगी। परफॉर्मेंस करने आए युवक और युवतियां, दोनो के इर्द गिर्द करतब वाला डांस दिखाने लगे।

तभी अपस्यु ने माइक हाथ में लिया और जोर से कहा… "चेंज थे म्यूज़िक" और जैसे ही धुन बदली एक बार फिर ऐमी और अपस्यु वहां पर थिरकना शुरू किए और जब इन दोनों ने उस जगह पर नाचना शुरू किया तब सभी डांसर मुंह पर हाथ दिए उनके डांस को देखकर यही सोच रहे थे…. "बिना नजरें एक दूसरे से हटाए, क्या साड़ी में इतने छोटे स्टेप के साथ ऐसा भी डांस किया का सकता है।"..

इन दोनों के नज़रों के विश्वास का किसे ज्ञान था। सामने यदि खाई भी हो, तो ऐमी, अपस्यु के आंखों में देखकर बस उसके कदम से कदम मिलाकर बढ़ती रहेगी, आगे जहां उसका प्यार ले जाए। दोनो तबतक वहां नाचते रहे, जबतक वहां पुलिस नहीं आ गई। अरेस्ट भी करने आया तो कौन, शहर का सिटी कमिसनर और दोनो को कमीसनर ऑफिस ही लाया गया।

कमिश्नर ऑफिस में पहले से सिन्हा जी और होम मिनिस्टर बैठे हुए थे। अपने डैड को सामने देख ऐमी शर्माकर अपस्यु के पीछे छिप गई और ऐमी का हाल-ए-दिल समझते हुए अपस्यु भी सिन्हा जी से कहने लगा…. "क्या है बापू, आप यहां क्यों आ गए।"

सिन्हा जी:- अब मेरी बेटी और दामाद को कोई छोटा ऑफिसर अरेस्ट करता तो मेरे प्रेस्टिज पर पड़ती, इसलिए आना पड़ा।

अपस्यु:- तो इसके लिए आपने सर को यहां बुला लिया। हद होती है किसी भी बात की।

होम मिनिस्टर:- हद क्यों होगी। तुम दोनो को टीवी पर देखकर आज मै अपने पोस्ट का ख्याल छोड़कर, केवल एक अभिभावक के तौर पर आया हूं। मुझे भी तो मिलना था अपनी बहू से।

होम मिस्टर साहब खास तौर पर ऐमी से मिलने के लिए अपने सारे काम छोड़कर पहुंचे थे। और ऐसा नहीं था कि कोई 1 या 2 मिनट की ये मुलाकात थी। निश्चिंत होकर मिले और सुनिश्चित होकर वहां से निकले। उनके जाते ही सिन्हा जी खड़े हो गए। अपस्यु और ऐमी को देखकर वो मुस्कुराते दोनो को गले से लगाए और वो भी वहां से निकल लिए।

ऐमी, अपस्यु के कांधे पर अपना सर टिकती…. "हम लाइव आ रहे थे क्या"?

अपस्यु:- क्या पता, हां शायद..

ऐमी:- फिर तो आंटी, कुंजल, आरव और सब लोगों ने देखा होगा।

अपस्यु:- हां तुम्हारी मासी-मौसा और मामा-मामी ने भी देखा होगा।

ऐमी गुस्से से सीधी होकर बैठी और घूरती हुई कहने लगी…. "अच्छे खासे चल रहे मोमेंट में आग लगाना इसे ही कहते है अपस्यु।"

अपस्यु, उसका सर अपने सीने पर टिकाए उसके गाल को स्पर्श करते… "सॉरी, बाद में बात करते है इसपर".. ऐमी खुद को थोड़ा और अपस्यु के अंदर समेटती… "नाह ! बाद में भी नहीं, और कभी भी कभी नहीं"…

"सर आप का बेल तो यहां आने से पहले हो चुका है, आप जा सकते है।"… एक हवलदार उनके करीब आकर कहा। दोनो वहां से उठकर चल दिए। दोनो जब कार में बैठकर अपने प्यार का कारवां आगे बढ़ा रहें थे तभी अपस्यु को कुछ भनक लगी… "क्या साड़ी में कोई एक्शन कर पाओगी"…

ऐमी:- साड़ी के एक्शन में वो मज़ा नहीं आएगा। चलो फिर मॉल कुछ ढंग के कपड़े ले लिए जाए।

दोनो ने रास्ते में पड़ने वाले शॉपिंग मॉल के पार्किंग में गाड़ी रोका और शॉपिंग के लिए चल दिए। दोनो को तो सबने अभी-अभी टीवी पर देखा था, इसलिए कुछ लोगों के आकर्षण का केंद्र दोनो बने हुए था…. "हीहीहीही… अपस्यु हम लाइव थे , कमाल है अबतक किसी का कॉल नहीं आया।"

अपस्यु:- कैसे आएगा, मैंने मोबाइल स्विच ऑफ कर रखा है।

ऐमी:- चालक हां ।

ऐमी ने मूड और सिट्यूशन के हिसाब से आउटफिट सेलेक्ट कर लिया। स्त्रचबल जीन्स, टी-शर्ट और ऊपर एक जैकेट। दोनो वहां से पार्किंग में आए और कार की बैंक सीट पर एक दूसरे को किस्स करने लगे। दोनो व्याकुलता से एक दूसरे को किस्स कर रहे थे और एक दूसरे के बदन पर हाथ फेर रहे थे।

बस 2 मिनट ही हुए होंगे, की कार पर अंधाधुन फायरिंग शुरू हो गई। बुलेटप्रूफ कार थी इसलिए गोली अंदर तो नहीं आयी, लेकिन अपस्यु और ऐमी की आंखों में एक चमक जरूर आ चुकी थी। दोनो एक दूसरे से अलग हुए और ऐमी, अपस्यु के कानो में कहने लगी…."आज सुबह से इन लोगों ने हमारे रोमांस को महसूस किया है लेकिन अब पागलपन को देखेंगे। इन सब में कोई एक श्रेया का साथी होंगा। फाइट के बाद इन्हे एहसास हो जाना चाहिए, कि क्यों हमे उलझाने के लिए भी इन्हे कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए था। इन्हे फायर करके जान से मारने कि कोशिश नहीं करनी चाहिए थी"..

अपस्यु:- तुम अंदर ही बैठी रहो, जब लगे तुम्हे फाइट करनी चाहिए तब उतर आना।

ऐमी, अपस्यु के होंठ चूमती… "जब उस एक को मारना तो कोई रहम मत करना।"

अपस्यु नीचे झुका, नीचे से कवर हटाकर एक सेट ग्लव्स पहना और वहीं से छोटी सी चाकू को अपने हाथ में रखकर कार के दूसरे दरवाजे से बाहर निकला । हमलावर अब भी वहीं खड़े थे। बुलेटप्रूफ कार पर गोली चलाने का कोई फायदा तो नहीं हुआ, इसलिए कांच को तोड़ने के लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे थे।

अपस्यु को यह तो पता था कि अभी हुए हमला का दोषी किसी ऐसे को बनाया जाएगा, जो श्रेया या उसके ऊपर जो भी है, उसके हिट लिस्ट में है। लेकिन दिमाग वहीं नहीं काम कर रहा था कि श्रेया उसे अनलझाने वाली कैसे है।

अपस्यु के नीचे उतरते ही कुछ लोग गन लिए कार के दूसरे हिस्से में आए, लेकिन वहां कोई नहीं था। 4 लोग हथियार के साथ फ़ैल गए और अपस्यु को ढूंढने लगे। इधर कांच तोड़ने वाले लोगों को कुछ नहीं सूझा, तब वो लोहे की मजबूत आड़ी ही लेकर पहुंच गए।

2 लोगों के हाथ में आड़ी थी और वो दोनो के दोनो कार को काटने के इरादे से आ रहे थे…ऐमी सामने घनघनाती आवाज़ में चालू हुई आड़ी को देखकर अपनी आखें बड़ी कर ली…. "रियली, ये आड़ी" ..

ऐमी ने अपस्यु को तुरंत संदेश भेजा…. "यार ये बेज्जती है, यहां कोई कॉमेडी शो चल रहा है क्या, 2 लोग आड़ी लेकर आ रहे है कर काटने। हद होती है बेवकूफी की, पेट्रोल डालकर आग लगाना बजाय कार काटने आ रहे है। ऐसे लोगों को हमे मारने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। मै उस श्रेया का खून कर दूंगी।"
 
It's ohk chunmun bhai .. khyal rakhiye apna ... Main sabko idhar miss karta hun bus likh nahi pata.. acha nahi lagta.. jald hi kusal ho aur yahan ki raunak badhayen .. :hug:
 
Ji tahe dil se dhanywad Nevil bhai... Apasyu ka full charecter detail badhte kahani ke sath milta jayega... Ummid hai kahani aap ko romanchit kar rahi ho
 
Yahan har kisi ke koi na koi atit hain ... Shayad kuch dukhdayi hai aur kuch ati hi dukhdayi..m Khair hum vartman ko dekhte hain aur usi ke sath aage badhte hain :)
 
Update:-110

ऐमी ने अपस्यु को तुरंत संदेश भेजा…. "यार ये बेज्जती है, यहां कोई कॉमेडी शो चल रहा है क्या, 2 लोग आड़ी लेकर आ रहे है कर काटने। हद होती है बेवकूफी की, पेट्रोल डालकर आग लगाना बजाय कार काटने आ रहे है। ऐसे लोगों को हमे मारने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। मै उस श्रेया का खून कर दूंगी।"

अपस्यु:- एक्शन रोमांटिक से ये एक्शन कॉमेडी कैसे हो गया। कोई नहीं मुझे वो अकेला मिल गया जो श्रेया का साथी लगता है। आगे जैसा तुम सही समझो, मै गन मैन को क्लियर करके उसे दबोचता हूं।

अपस्यु, अपनी कार की आड़ लेकर दूसरी और दूसरे से तीसरे कार के पीछे छिपकर फैले लोगों को देख रहा था, तभी अपस्यु के पीछे से एक गनमैन उसपर पिस्तौल तान दिया…. "लड़का मिल गया है।"..

"पागल कहीं का"… पालक झपकते ही अपस्यु ने एक हाथ से ट्रिगर कि उंगली गन सहित पकड़ा और दूसरे हाथ को कलाई के ठीक नीचे ले जाकर उल्टा घुमा दिया। उसकी कलाई टूट गई और वो चिल्लाता हुए जमीन पड़ गिर गया। उसकी आवाज़ के पीछे बाकी के तीन लोग अंधा फायरिंग करते हुए पहुंचे। लेकिन अपस्यु वहां नहीं था।

तीनों ही अपने घायल साथी को घेरकर पूछने लगे कि वो गया किधर… इतने में अपस्यु बिल्कुल उसके पास खड़े होकर… "ओह हो बेचारे का कलाई तोड़ डाला रे, किसने किया।"

तीनों का ध्यान जैसे ही अपस्यु पर गया.. जबतक वो सोचते की गन भी निकालना है, तबतक अपस्यु ने अपने दाएं-बाएं वाले आदमी के हाथ की उंगली को पकड़ कर उल्टा घुमा दिया और सामने वाले को एक जोरदार लात उसके सीने पर दिया। जिनकी उंगलियां टूटी वो उंगली पकड़कर नीचे जमीन में थे और जिसे लात परी थी वो एक सस्ती सी कार के दरवाजे में घुसकर फिट हो गया था।

नीचे पड़े घायल कॉन्ट्रैक्ट किलर पर अपस्यु ने कहर बरसाते हुए, तीनों पर लात और घुसों के हमला करके, उन्हें बेहोश करने के बाद खड़ा होकर दूसरी ओर ऐमी को देखने लगा। अपस्यु जबतक ऐमी को देखने में व्यस्त था, इतने में श्रेया का वो टीम मेट वहां पहुंचा और अपस्यु के चेहरे पर स्प्रे छिड़क दिया। स्प्रे के छिड़काव से ही अपस्यु का सर घूम गया और पूरा बदन स्थूल पड़ने लगा।

इधर अपस्यु के संदेश पढ़ने के बाद ऐमी हसने लगी और तभी उसे बाहर किसी के चिल्लाने कि आवाज़ आने लगी। ऐमी हंसती हुई कहने लगी… "ये दिन आ गए की अब किड्डो को मारना पर रहा है।"

दोनो आरी वाले सामने से घनघनाते हुए चले आ रहे थे। ऐमी पहले से ही अपने डिक्की और दरवाजा खोल रखी थी, जैसे ही वो नजदीक पहुंचे ऐमी ने दरवाजे पर जोर से लात मारी। चूंकि आरी आगे के ओर था इसलिए दरवाजा दोनो के आड़ी से तेजी से टकराया। दोनो लड़खड़ा कर गिर गए और उनके हाथ से आड़ी छूटकर नीचे पड़ी थी। ऐमी फुर्ती से बाहर निकली और उनके खड़े होने से पहले डिक्की से वो अपना हथियार निकाल चुकी थी।

रॉड लेकर ऐमी तेजी से उनके ओर दौड़ी। वो दोनो जबतक गन निकालते तबतक ऐमी उसके करीब पहुंच चुकी थी। ऐमी तेजी दिखती हुई एक के हाथ पर तेज रोड का हमला करके उसका हाथ तोड़ चुकी थी और ठीक उसी वक़्त उसके दूसरे साथी पर अपना हाई किक चलाते हुए उसके चेहरे पर ऐसा किक मारी की उसका दिमाग घूम गया।

जिसके चेहरे पर ऐमी का लात परा, वो अपने झन्नाते दिमाग को जबतक शांत करके सामने देखता, ऐमी तेजी से रॉड उसके कंधे से लेकर पाऊं पर बरसाती हुई जय हड्डियां तोड़ कर नीचे गिरा चुकी थीं और वो पुरा कर्राहते हुए नीचे धम्म से गिरा। ऐसा खतरनाक हमला देखकर उसके दूसरे साथी की तो आंखें फटी रह गई।

ऐमी वापस पलटी और जिसका हाथ टूटा था उसके पास बैठती हुई जिज्ञासावश पूछने लगी…. "भाई तू ये आड़ी लेकर मेरी प्यारी कार को काटने आया था।"..

आदमी, कर्रहते हुए… "बहन बहुत दर्द हो रहा है, हमे तो बस तुम्हे मारने के लिए कहा गया था और वही हम करने आए थे।".

ऐमी:- भाई मारने मतलब जान से मारने या हाथ पाऊं तोड़ने।

आदमी:- हाथ पाऊं तोड़ने के लिए तो बॉडी बिल्डर आते है। हम तो गन वाले है।

ऐमी:- भाई ये आड़ी फिर..

आदमी:- वो कभी-कभी हम घायल लोगों को नए तरीके से मारने या लाश को ठिकाने लगाने के लिए इस्तमाल करते है।

ऐमी को उससे बात करने में मज़ा आ रहा था, लेकिन इससे पहले की वो कुछ और पूछती ऐमी की नजर भी अपस्यु से मिल गई जो उसे खड़ा होकर देख रहा था। दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए ही थे कि तभी वो श्रेया का टीम मेट वहां पहुंच गया। ऐमी बचने के संकेत तो दी लेकिन दोनो में से किसी को पता नहीं था कि यहां पर कोई हथियार प्रयोग होने के बदले बेहोशी का स्प्रे छिड़काव होगा।..

ऐमी किसी तूफान कि तरह खड़ी हुई। अपने रॉड को पीछे के हाथ से चलाती हुई नीचे पड़े उस आदमी पर ऐसे चलाई की उसका नाक और दांत टूट टूट चुके थे। ऐमी के आंखों के सामने अपस्यु एक कार के पीछे अचेत होता का रहा था और उसके पास वो आदमी, अपने एक हाथ में स्प्रे लिए दूसरे हाथ से उसकी तस्वीर निकाल रहा था।

ऐमी पूरी गति से दौड़ लगाती, कार के छत के ऊपर छलांग लगा दी और उसके छत से स्लाइड करती, वहां खड़े आदमी के मुंह पर, गति के साथ जोर वाला अपने लात जामाती ऐमी उस पार उतरी। नीचे बेहोश परे अपस्यु का सर अपने गोद में लेकर उसके बालों में हाथ फेरी और जैकेट निकालकर अपस्यु के सर के उसके नीचे डालकर उसे लिटाती हुई….. "बस 2 मिनट बेबी"…। गुस्से में लाल ऐमी की आखें अब उसपर टिकी थी जिसने अपस्यु को लिटाया था। ऐमी अपने हाथ से रॉड को मजबूती से पकड़ी और दौड़ती हुई हवा में उछलकर उसके सर पर रॉड चला चुकी थी।

वो भी एक फाइटर था शायद, लेकिन पहले अचानक अपने चेहरे पर हुए ऐमी का स्लाइड किया वो धांसू किक, उसके होश उड़ा चुके थे और जैसे ही खड़ा होकर कुछ सोचता, उससे पहले ही ऐमी उछलकर रॉड चला चुकी थी। अगर वो अपने दोनो हाथ से सर ना बचाया तो शायद उसका सर बुरी तरह से फट जाता। फोरहैंड से जैसे ही उस आदमी ने रॉड का हमला रोका, उसका फोरहैंड की हड्डियां चुर हो गई। ऐसा टूटा उसका हड्डी की वो पिरा से पागल हो गया।

रात के तकरीबन 2 बजे अपस्यु की नींद खुली। वो अपने बिस्तर पर लेटा था और ऐमी भी उसके पास सोई हुई थी। अपस्यु उठकर कप 2 चाय बनाकर लेकर आया और ऐमी को जगा दिया…. "तुम ठीक हो बेबी".... ऐमी अपस्यु के चेहरे को स्पर्श करती पूछने लगी…

अपस्यु:- हां ठीक हूं।

ऐमी:- बात कर सकते हो यहां, जगह सुरक्षित है।

अपस्यु:- कभी-कभी किसी को कम आंकना कितना भारी पर जाता है। ये बेहोश वाला स्प्रे भी इस्तमाल कर सकता था, मैंने सोचा तक नहीं था।

ऐमी:- पूरी तरह से चौंकाया…

अपस्यु:- मै यहां हूं, इसका मतलब वो कहां है, श्रेया का टीममेट।

ऐमी:- कार की डिक्की में पैक करके नीचे पार्किंग में छोड़ा है।

अपस्यु:- उनका मकसद तुम पर जानलेवा हमला करके मुझे अपने टारगेट के साथ उलझाना था ना।

ऐमी:- हां। उन्होंने क्लू छोड़ा है उस आदमी के जरिए..

अपस्यु:- मतलब उस आदमी को भी पूरी बात पता नहीं या फिर उसके अंदर कोई ट्रांसमीटर लगाया हो, ताकि वो उसे छुड़ाकर ले जा सके।

ऐमी:- कोई फायदा नहीं है अब तो। मैंने उसे इंजेक्शन लगा दिया है, ज्यादा से ज्यादा 1 घंटे का मेहमान होगा वो अब तो। रुको चेक करके बताती हुं वो डिक्की में है या गया।

ऐमी ने पार्किंग की सीसी टीवी ऑन की जो कि सर्वर से बंद आ रहा था।… "हां उसे लेकर गए पार्किंग से, अपार्टमेंट का सीसी टीवी बंद आ रहा है।"..

अपस्यु:- हम्मम ! छानबीन में टारगेट कौन निकला है, वो तो बताओ?

ऐमी:- जगदीश राय….

अपस्यु:- कौन जगदीश राय… वहीं जिसके यहां से मैने केस की फाइल उड़ाई थी। वो अंडरग्राउंड फाइटिंग करवाने वाला जगदीश राय।

ऐमी:- हां वही जगदीश राय।

अपस्यु जोर जोर से हंसते हुए कहने लगा…. "भंवर है ये भंवर… वक़्त है फंसने का, लेकिन मेरे दिल को अब भी सुकून नहीं की उस श्रेया ने मामला उलझाने के लिए तुम्हे मारने की कोशिश की है। मुझे सुकून नहीं मिला ऐमी। उलझाने के लिए उन्हें कोई और तरकीब सोचना चाहिए था। आज तुमपर हमला करवाकर मामला फसाने की चाहत थी, कल को मां होगी, कुंजल होगी, कोई भी हो सकता है।"

ऐमी:- शांत हो जाओ, 8 दिन और तो रह गए है बस, फिर तो उस श्रेया को लपेट ही रहे है।

अपस्य:- सजा तय हो चुकी है और उन्हें भुगतान तो करना ही पड़ेगा। मै जानता हूं कि तुमने ऐसे तो उसे डिक्की में नहीं छोड़ा होगा। ऐमी कहां है वो डिक्की वाला आदमी इस वक़्त।

ऐमी:- उसे छोड़ो, जगदीश राय को खत्म करते है ना।

अपस्यु:- बेबी सूट उप करो आज रात शिकार होगा। आखरी शिकार जगदीश राय होगा और शुरवात करेंगे उन लोगों से जिसने डिक्की से श्रेया के साथी को उड़ा ले गया।

ऐमी:- छोड़ो भी उन लोगों को अभी। इस वक़्त वो लोग इसी अपार्टमेंट में है और यहां हम कुछ नहीं कर सकते।

अपस्यु:- यहां तो हम आसानी से कुछ भी कर सकते हैं, तुम फ्लैट नंबर बताओ। जब मुझे पता है कि केवल मै नहीं बल्कि मेरा परा परिवार यहां अंजान लोगों से घिरा है फिर मै अपात कालीन स्तिथि के लिए तैयार ना रहूं। बस देखती जाओ और सूट उप करो।

ऐमी:- यहां से सारा सामान ले गए फिर सूट उप कैसे करेगे?

अपस्यु:- लोग छिपी हुई चीज ही ढूंढ़ते है, नज़रों के सामने की चीज को नजरंदाज कर देते हैं। हॉल के दीवारों पर गौर करोगी तो सब मिल जाएगा। मैं इमरजेंसी के लिए हमेशा तैयार रहता हूं।

दोनो ही जल्द ही सूट उप हो गए। जैसे ही सूट उप हुए, अपस्यु कमरे के पीछे की खिड़की खोला और ऐमी को दिखाने लगा। डिज़ाइन की तरह दिखने वाला दीवार पर लगा 2 छोटी-छोटी स्टील की पटरियां जो नीचे तक जाती थी, अपस्यु उसमे हुक फसा दिया और स्लाइड करते हुए सीधा नीचे आ गया। उसके पीछे ऐमी भी नीचे उतर आयी।

कोई बड़ी बात थी नहीं ऐमी के लिए पता करना की छुड़ाकर उनके साथी उस आदमी को कहां लेकर गए है। फ्लैट 102 में ऐमी माइक्रो डिवाइस भेजकर सुनिश्चित कर चुकी थी। अपस्यु ने तुरंत ही 102 नंबर फ्लैट की पटरियां ढूंढ निकाली और जल्द ही सिसा कट्टर से खिड़की का ग्लास कट करके दोनो उस फ्लैट के एक कमरे में दाखिल हुए।

किसी के होने की आहट से, उस कमरे का आदमी जाग गया। जैसे ही उसने लाइट जलाई… ऐमी ने उसके पीछे से मुंह पकड़ा और अपस्यु ने उसके गर्दन के वोकल कोर्ड में चाकू घुसेड़ दिया। लाइट बंद करके अपस्यु दरवाजे की आड़ से हॉल में देखने लगा।

3 लोग हॉल में थे और नीचे वो आदमी लेटा हुआ था, जिसे ऐमी ने इंजेक्शन लगाया था। उन लोगों के बीच श्रेया भी थी। श्रेया को देखकर अपस्यु ने ऐमी का हाथ थाम कर रुकने का इशारा किया… 3,2,1…0

जैसे ही कंटडाउन शून्य हुआ, दिमाग को इरिटेट करने वाला काफी तेज आवाज़ होने लगी। आवाज़ इतनी तेज थी कि फ्लैट के अंदर तक काफी जोर से आ रही थी। श्रेया अपने साथियों से कुछ कहती हुई वहां से निकल गई, और दोनो उसके जाने के बाद 10 की गिनती से तेज दौड़ लगा दिए। श्रेया के जाने के बाद, वो तीनो फिर से तिल-तिल मरते अपने साथी को देख रहे थे।

तीनों ही अपने साथी की हालत पर इतने हताश थे कि जबतक उन लोगों ने अपना ध्यान अपने मरते साथी से हटाकर ऊपर किया, तबतक उनका काल बड़ी तेजी से उसके पास पहुंच चुका था। तीनों ने जैसे ही अपना सर ऊपर किया, एक के गले में ऐमी अपनी चाकू उतार चुकी थी। अपस्यु एक आंखों में चाकू घोंपते हुए, दूसरे हाथ का चाकू उसके गले में उतार दिया।

आखरी बचा आदमी जिसके नज़रों के सामने सब कुछ इतना जल्दी हुआ की वो भय से लड़खड़ा गया। ऐमी फुर्ती से उसके पीछे पहुंचकर उसका मुंह दबायी और उसके गर्दन को आगे की ओर ऊंचा कर दी। अपस्यु बड़े ही स्लो तरीके उसका गला रेतते हुए कहने लगी…. "अपनी महत्वकांक्षा के लिए किसी के परिवार पर हमला नहीं करना चाहिए बेटा"..

लगभग 2 मिनट के अंदर ही सबका काम तमाम करने के बाद अपस्यु ने वहां से निकलने का इशारा किया। दोनो उसी कमरे की खिड़की से बाहर निकले, लेकिन बाहर निकलने से पहले, वहां पड़ी लाश के सर को खिड़की की जांच से टकराकर चकनाचूर कर दिया ताकि कांच काटने के सबूत ना रहे।

दोनो वहां से निकलकर पीछे के रास्ते सड़क पर आए और एक कार को बड़ी सफाई से उड़ाकर जगदीश राय के आवास तक पहुंच गए।…. "इसके घर में घुसकर मारना रिस्की है अपस्यु, पुलिस पहुंच जाएगी यहां। हम इतने तैयार भी नहीं है।"..
 
Update:- 111

दोनो वहां से निकलकर पीछे के रास्ते सड़क पर आए और एक कार को बड़ी सफाई से उड़ाकर जगदीश राय के आवास तक पहुंच गए।…. "इसके घर में घुसकर मारना रिस्की है अपस्यु, पुलिस पहुंच जाएगी यहां। हम इतने तैयार भी नहीं है।".

अपस्यु:- किसने कहा हम तैयार नहीं है, पीछे देखो कौन आ रहे है।

जेके और पल्लवी पूरी तैयारी के साथ चले आ रहे थे। आते ही जेके कहने लगा…. "अबे ये कौन है जो मेरा टारगेट तुझसे मरवा रहा है।"

अपस्यु:- वो जो कोई भी है, उसका लिंक जरूर उस डायरी से है, जिसकी फोटो मैंने आपको दी थी।

जेके:- ये तो वैसे भी मरता लेकिन अभी इसे मारने का मन नहीं था। आज राठी ब्रदर्स या शुक्ला को टपकाना था।

पल्लवी:- वक़्त बहुत कम है क्योंकि 15 मिनट में पुलिस पेट्रोलिंग यहां होगी। तुम दोनो का कोई अभी पीछा तो नहीं कर रहा था ना।

ऐमी:- जो हमे फसाकर अपना काम निकलवाना चाहते थे, उनके 5 लोगों को सुला आए हैं। पीछा करने का तो सवाल ही नहीं होता।

पल्लवी:- दैट्स माय बॉय.. चलो जी अपने शागिर्द कि मदद कर दो..

जेके:- ठीक है, अपस्यु, ऐमी तुम दोनो सामने के गेट इनको उलझाओ, मैं और पल्लवी अंदर उस जगदीश को परम पिता जगदीश के पास पहुंचाकर आते हैं।

इस काम के लिए अपस्यु ने ऐमी को बाहर ही रखा, क्योंकि वो नहीं चाहता था कि हर जगह 2 लोग दिखे। अपस्यु बाउंड्री के फैंस को चेक किया, अंदाज़ा सही था, करंट दौड़ रहा था ऊपर के लोहे में।

जेके, अपस्यु को बिजली विभाग वाला ग्लोब्स थामते हुए कहा… "सिक्योरिटी गार्ड के ऑफिस में करंट ऑफ का तरीका मिल जाएगा, जल्दी करना।"

अपस्यु तेजी से उस बाउंड्री पर चढ़ गया। बॉडी तो पुरा मास्क पहले से थी, मोटे परत की ग्लोब्स लगने के बाद, झटका का कोई सवाल ही नहीं था। लेकिन अंदर आते ही मोशन सेंसर एक्टिव हो गए और तुरंत ही अलार्म भी बजने लगा।

यह एक अलर्ट अलार्म था जो केवल सिक्योरिटी वालों के लिए था। सिक्योरिटी वाले ने अपस्यु को देखा और उसने सभी गार्ड और बॉडी गार्ड को तुरंत अलर्ट अलार्म से जगाना शुरू किया। जब तक वो सभी बाहर आते, तबतक अपस्यु गेट पर खड़े गार्ड के केबिन में दाखिल हो गया और सभी अलार्म एक साथ ऑन करके फैंस करंट सप्लाई को बंद कर दिया।

अपस्यु को तो वक़्त काटना था। अपना काम करने के बाद अपस्यु ने जेके को बढ़ने के लिए संकेत दिया और खुद वहां के लॉन में आकर गार्ड से लरने की तैयारी करने लगा।

पहले तो उसपर फायरिंग शुरू हुई, लेकिन अपस्यु के बुलेट प्रूफ जैकेट के आगे सब बेअसर था। सभी गार्ड तेजी से अपस्यु के ओर दौड़े। अपस्यु भी तेजी से भागता हुआ लॉन के चक्कर लगाने लगा। अपस्यु को पकड़ने के लिए वो सभी गार्ड जो एक साथ दौड़ रहे थे, सब बिखर गए और अलग अलग दिशा से अपस्यु को पकड़ने की कोशिश करने लगे।

अपस्यु के पीछे से 2 गार्ड दौड़ लगा रहे थे और सामने से 2 चले आ रहे था। अपस्यु अपने दोनो मुट्ठी में छोटी सी चाकू दबाए आगे बढ़ा और अपने घुटनों पर आते हुए दोनो गार्ड के पाऊं को काटते हुए आगे फिसल गया और वो दोनो पीछे जाकर गिर पड़े।

अपस्यु खड़ा होकर फिर से दौड़ लगा चुका था। देखते ही देखते बिखरे हुए गार्ड अब कर्राहते हुए जमीन कर बैठे कोई पाऊं पकड़े था, तो कोई अपने पेट के स्क्रैच को संभाले था।

इधर जेके अपने तय समय पर काम खत्म करके अपस्यु को लौटने के संकेत देने ही वाला था कि वहां पुलिस के कई जीप की सायरन की आवाज़ आने लगी। अपस्यु को भनक थी कि ऐसा कुछ होने वाला है इसलिए ऐमी को वो बाहर रहने कहा था।

ऐमी बाहर अपना काम कर चुकी थी। आने वाले दो ओर के रास्ते को वो वहां बाहर खड़ी जितनी भी कार थी उससे ब्लॉक कर चुकी थी और जिन कार के पेट्रोल पाइप काट सकती थी उनके काटकर सबको आग के हवाले कर चुकी थी।

जेके दोनो की होशियारी पर खुश होते हुए अपस्यु को लौटने का संकेत दिया। जबतक 2 मुख्य मार्ग से पुलिस पैदल गस्त करती हुई पहुंचती, चारो जेके की कार में छोटी सी गली के रास्ते, जेके के ठिकाने तक पहुंच चुके थे।

इधर अपार्टमेट में पागल कर देने वाले इस सिऊंड ने पूरे अपार्टमेंट को परेशान कर रखा था और श्रेया के लिए चिंता का विषय उसके साथी की गिरती नवज थी। उसके लिए पहले से पदेशनी कम थी क्या जो अब ये साउंड। श्रेया फ्लैट नंबर102 से निकलकर अन्य लोगों की तरह ही अपार्टमेंट सेक्रेटरी के घर पर हल्ला बोल दी।

श्रेया तकरीब 5 मिनट वहां रुकी और वापस उस फ्लैट में पहुंचीं। जब वो वापस पहुंची और वहां का नजारा देखी, उसके होश ही उड़ गए। श्रेया पागलों की तरह छटपटाने लगी और नागिन सी फुफकार मारने लगी।

श्रेया अपने फ्लैट में पागलों कि तरह भटक रही थी। कुछ ही देर में उसके लोग श्रेया के फ्लैट में पहुंचे।… "तुम लोग ने 102 में देखा या नहीं।"..

गुफरान आंखों से धधकते शोले निकालते….. "5 साथी मारे गए हैं और हम यहां बस योजना बना रहे है। अभी वो कुत्ता और उसकी गर्लफ्रंड अंदर ही होगी। पहले उसे ठोको फिर समझते रहेंगे की क्या करना है।"..

तकरीबन 10 साथी उनके जमा थे, सब लोग "हां हां" करने लगे। श्रेया सबकी भावनाओ में शरीक होती हुई कहने लगी…. "पापा को अपनें लिए एक कातिल चाहिए तो कहीं और से इंतजाम करेंगे। परिणाम का बाद में सोचेंगे पहले साफ करो दोनो को। हां लेकिन सब साथ रहना। क्योंकि हमें उसे कमज़ोर नहीं समझना चाहिए।"..

जेन:- स्प्रे मारकर बेहोश करेंगे फिर इत्मीनान से उसके अंग-अंग को चीरकर अपने कलेजे कि आग को ठंडा करेंगे। सब लोग मस्क पहनो और स्प्रे लो।

बस कुछ ही पल में सब तैयार हो गए। स्टाफ क्यूटर्स के दरवाजे से सब लोग अपस्यु के फ्लैट दाखिल हुए। अंधेरे हॉल में जैसे ही उन लोगों ने रौशनी की… हॉल में लगा प्रोजेक्टर चलने लगा और वहां आवाज़ गूंजने लगी…. "मुझे मारने आए आप सभी लोगों को नमस्कार। मैं रात के 3-5 के बीच, तुम लोगों को भाड़े पर काम देने वाले जगदीश राय को साफ कर रहा होऊंगा, उसके बाद घूमने निकल जाऊं वो मूड पर है।"..

"खैर ये सब तो तुम्हारे काम की बात नहीं थी, लेकिन अब जो कह रहा हूं उसे सुनने और समझने में कोई चूक ना हो। यदि मुझे मारने कि इक्छा हो तो जगदीश राय के बंगलो आ जाना, वरना अपने 5 लोगों की लाश 102 से उठाकर निकल जाओ। कॉन्ट्रैक्ट मुझे मारने का मिला था तो मुझे मारना चाहिए था, मेरे परिवार पर हमला करना माफी के लायक नहीं।"

"तुम्हारे ग्रुप को मै केवल एक चेतावनी देकर मै छोड़ रहा हूं, कि उन पांचों की डिटेल मैंने अपने पास रख ली है। अगली बार मुझे शंका हुआ कि तुमने मेरी सुपाड़ी ली है, तो मै तुम्हारा पता लगाऊंगा। पहले मारूंगा और फिर तुम्हारी लाश से पूछना शुरू करूंगा…. "भाई बता अब तुझे किसने मुझे मारने कि सुपाड़ी दी थी, या अपने 5 लोगों का बदला लेने आया है"। ज़िन्दगी प्यारी हो तो बदला भूल जाओ वरना मृत्यु ही एक मात्र सत्य है और मैं, अपस्यु रघुवंशी, उस सत्य से तुम सबको अवगत करवा दूंगा।"…

अपस्यु का संदेश सुनने के बाद सब लोग अजीब ही गुस्से के साथ, श्रेया के फ्लैट में लौटे और हर कोई अपस्यु पर हुए आज के हमले के बारे ने पूछने लगा। किसी को खबर नहीं थी कि यह स्टेप लिया जा चुका है। श्रेया सबको शांत करती हुई कहने लगी….

"कल रात अपस्यु से बात करने के बाद मुझे लगा कि वो ऐमी या आरव के लिए कुछ भी कर सकता है। जगदीश राय पर एजेंसी वालों का सिकांजा बढ़ रहा था यदि वो गवाह बान जाता या अपना मुंह खोल देता तो पदेशानी का कारन बन जाता, इसलिए यह फैसला लिया गया था।"

गुफरान:- इसका मतलब जित्तू (वहीं आदमी जिसे ऐमी ने जहर का इंजेक्शन दिया था) को इन्हीं दोनो ने कुछ किया था और तुम कह रही थी इन दोनों (अपस्यु और ऐमी) के डिक्की में माइक्रोफोन और जीपीएस फिट करने घुसा था। तुमने हमसे पूरी कहानी छिपाई।

प्रदीप:- श्रेया, तुम्हारे बकवास प्लान के वजह से हमारे 5 साथी मारे गए। साफ शब्दों में कह गया अगली बार कुछ होगा तो हमारे ग्रुप का वो पता लगाएगा… जब तुम उसे अपने जाल म फसा ही रही थी फिर उसके परिवार पर हमला करवाने किसने कहा था। उसमे भी तुमने ऐमी को चुना। वो तो खुद भी एक ट्रेंड फाइटर है और शायद हम सब से बेहतर हो। ऊपर से दोनो को देखी थी ना इंडिया गेट पर, फिर भी उसपर हमला। जहालत है ये तो….

श्रेया:- मुझे लगा जिस लड़की से वो प्यार करता है, उसके घायल होने या मरने के बाद, वो अपना आपा खोकर बिना कुछ सोचे जगदीश राय को खत्म कर देगा और उसका वकील सिन्हा तो उसे निकाल ही लेगा, इसलिए मैंने सब कुछ प्लॉट कर दिया।

जेन उसे एक थप्पड़ खींचकर मारती…. "देख लिया उसको उकसाने का नतीजा। खुद ही कहती थी ना की उसके जैसा एक भी अपने टीम में हो फिर तो दुनिया जीत लेंगे। हर पॉवर को क़दमों में लाकर झुका देंगे। फिर क्यों उसको छेड़ दी।"

श्रेया:- कल पिए म जब उसको सुनी तो लगा कि उसे हम कुछ ज्यादा ही आंक रहे है। सेक्स और पॉवर उसकी भी ख्वाहिश है और इसका भी दिमाग आम लड़कों जितना ही है, बस एबिलिटी थोड़ी ज्यादा है।

प्रदीप:- आम लड़का, हाहाहाहा… उस भूत को आम लड़का समझ रही थी। 5 मिनट में तो उसने 4 लोगों को काट दिया। कब आया कब गया कीसी को भनक तक नहीं। तुम उसे फसाने के लिए जाल बुन रही थी और उसने डिक्की में जिसे बंद किया, उसपर बाहर से नजर रखवाए था। उसने पता भी लगा लिया कि हम जित्तू को 102 में लेकर गए है और तुम फालतू की टेक्नोलॉजी से उसके बदन में ट्रैकिंग डिवाइस ढूंढ रही थी।

"हमारे साथियों को मारने के बाद कितने विश्वास से कहता गया है कि वो अब जगदीश राय को साफ करेगा। वही जगदीश राय जिसपर 3 बार हमले करवा चुके है पर उल्टा मुह की खाने पड़ी थी। उसे तो यहां तक पता था कि उसने क्या किया और लोग उसे कहां ढूंढने आ सकते है। शुक्र करो उसने अपने घर में मौत का जाल नहीं बिछा रखा था। सामान्य सा लड़का है बस… । तुम जरा अपनी ओवर स्मार्टनेस कम करो श्रेया तो हमसब के लिए अच्छा होगा। भूत जैसे शिकारी को फसाने की चाहत है और अक्ल रत्ती भर भी नहीं।"

गुफरान भी गुस्से में लाल होते… "ऐमी को कोई मारने आया था, सिर्फ इस ख्याल से ही उसने सबकी बलि ले ली। परिवार की बीच रहने वाला मासूम सा लड़का जिसके चाकू का घाव देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये वही मासूम है। उसे तुम इतना कम कैसे आंक सकती है। बिना सोचे जब वो इतना कर सकता है, फिर जब ध्यान स सोचकर करेगा तो अंदाज़ा भी है वो क्या कर सकता है और कहां तक घुस सकता है। बदला भूलकर पहले सबूत मिटाओ और सर्विलेंस पर रखो 24 घंटे, ताकि पता तो चले ये हमारे ग्रुप के पीछे पड़ा है कि नहीं। अच्छा हुआ वो फ्लैट ने नहीं था वरना 10 लोगों में से 5-7 को तो लपेट ही लेता।

जेन:- जिस श्रेया को हम अपने पापा की तरह चालक समझ रहे थे वो तो आज बेवकूफी कर गई और तुम गुफरान बोलते बोलते फिर से साबित कर दिए की तुम सबसे बड़े बेवकूफ हो। सब कुछ आंखों के सामने है, फिर भी ये सोच रहे हो कि उसकी जगह पर तुम 10 लोग टिक जाते। 4 सूरमा को तो 5 मिनट में उनकी जगह पर साफ कर दिया और तुम्हारे यकीन कि मै दाद देती हूं , उसके घर में घुसकर 10 लोग जाओगे मारने। बस भी करो तुम लोग और जाकर पहले सबूत मिटाओ ताकि वो हम तक पहुंचने का उसे कोई लिंक ना मिले।

श्रेया:- जेन सही कह रही है। वैसे भी अपस्यु ने यह कत्ल, यह सोचकर किया की किसी ने उसके ऐमी को मारने की कोशिश की थी, इसलिए आवेश में उसने 5 कॉन्ट्रैक्ट किलर को मारा डाला। अब उसे मारने गया है जिसने ये कॉन्ट्रैक्ट दिया था। मतलब साफ है, परिस्थिति कैसी भी हो वो अपना आपा नहीं खोने वाला। तुम सब सही कह रहे हो, हमारे 5 साथी के मरने के पीछे केवल और केवल मेरी बेवकूफी थी और अपस्यु उसे हमारा साथी के तौर पर नहीं बल्कि अलग सोच के साथ कत्ल किया है। उसके पीछे जाने से अच्छा है कि मेरी बेवकूफी को भूलकर उसे साथ मिलाकर काम किया जाए।

सभी लोग अभी बात कर ही रहे थे कि श्रेया के पास कॉल आया… "पापा आप इतनी रात को जाग क्यों रहे हो।"

पापा:- क्योंकि मै तुम्हारी पहली सफलता पर बधाई देना चाहता हूं। जिस सोच के साथ अपस्यु पर दाव खेला था वह सही हो गया। उम्मीद से परे है इसका काम और इसे मुमकिन तुम्हारी कोशिश ने बनाया है। इसे पूरे काबू में रखो ये लड़का कुछ भी कर सकता है।

श्रेया को लग गया कि हो ना हो अपस्यु ने जगदीश राय को खत्म कर दिया होगा। श्रेया ने तुरंत न्यूज लगाया और न्यूज में अभी वही चल रहा था… "मशहूर उदयोगपति जगदीश राय के घर में घुसकर, कुछ अज्ञात लोगों ने उसका कत्ल कर दिया। पुलिस मामले की छानबीन में लगी।"… टीवी की न्यूज सभी आंख फाड़े देख रहे थे और बस अपस्यु के क्षमता के बारे में पुनः आकलन करने में जुट गए।
 
Update:- 112

सुबह के 7.30 बज रहे थे। फ्लैट की बेल जोड़ों से बज रही थी। अपस्यु ने जैसे ही दरवाजा खोला, एसपी के साथ पुलिस की पूरी टीम दरवाजे पर खड़ी थी। अपस्यु पुरा दरवाजा खोलते हुए… "सॉरी मै वो सो रहा था सर, आइये ना अंदर।"

अपस्यु सबको हॉल में बिठाकर, ऐमी को जगा दिया और वापस से उनके बीच चला आया। अपस्यु के आते ही एसपी ने सीधे सवाल करने शुरू कर दिए, मामला था इस अपार्टमेंट में हुए कल रात की वारदात और उसी वारदात का एक लिंक जगदीश राय के घर तक जाता था, क्योंकि चोरी कि गई कार इसी अपार्टमेंट के बाहर से उठाई गई थी और शक था कि जिसने यहां कत्ल किए है वही जगदीश राय के यहां भी गया होगा।

अपस्यु। के चेहरे पर घोर आश्चर्य के भाव थे और वह जिज्ञासावश पूछने लगा कि कल इस अपार्टमेंट में हुआ क्या था, क्योंकि कल शाम शॉपिंग मॉल की घटना से बाद उसकी अभी आंख खुल रही है।

एसपी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अपस्यु से उसके साथ हुई कल शाम की घटना के बारे में पूछने लगा। बेहोश होने के पहले तक का अपस्यु ने बता दिया और उसके बाद सीधा उसकी आंख यही खुली।

इतने में ऐमी सबके लिए चाय ले आयी और सबको चाय देने के बाद आगे की घटना का जिक्र करती हुई पूरी बात बताई। कैसे फिर वहां पार्किंग में अजिंक्य और उनके थाने के लोग पहुंचे, सभी हमलावरों को अरेस्ट करने के बाद फिर वहां से अपस्यु को हॉस्पिटल लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया की घबराने वाली बात नहीं है, बस बेहोश किया गया है, उसी के साथ अजिंक्य सर ने डॉक्टर से अकेले में कुछ बात की और डॉक्टर ने मुझे कुछ दवा लिखकर दी।

अजिंक्य सर खुद यहां आए थे। उनके हवलदार की मदद से हमने अपस्यु को लिटाया और फिर मुझे वो दावा खिलाकर यहां से चले गए। उसके कुछ देर बाद नींद आ गई और अभी जाग रही हूं। एसपी पुरा मामला सुनने के बाद क्रॉस चेक किया और अजिंक्य से पूरे मामले की जानकारी लेकर वहां से चलते बाना।

उनसब के जाते ही अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और किचेन में पहुंचकर, ऐमी के कमर में हाथ डालकर उसके गले को चूमने लगा… ऐमी गहरी श्वांस लेती अपने हाथ को किचेन स्लैब से टिका दी और अपनी आखें मूंद ली।

अपस्यु गले को चूमते हुए अपने हाथ धीमे से खिसकाते हुए लोअर के अंदर ले जाने लगा… "अम्मम ! बेबी अभी रुक जाओ ना प्लीज, काम बहुत परे है। खत्म तो कर लेने दो।"….. गले पर हल्के दातों का निशान देते हुए अपस्यु हाथ को धीमे से पैंटी के अंदर खिसकाते उसे चूमने लगा।

श्वांस दोनो की ही चढ़ आयी थी, तभी अपस्यु के फोन की घंटी बज गई। एक पूरी रिंग होकर कट गई लेकिन अपस्यु ने ध्यान नहीं दिया। वो धीरे-धीरे अपने हाथ चलाते, ऐमी की उत्तेजना को बढ़ाने में लगा था। तभी फिर से दोबारा रिंग होना शुरू हुआ।

ऐमी, अपस्यु को धक्का देकर दूर की…. "हद है फोन बज रहा है अपस्यु, उठाओ उसे पहले।"… अपस्यु गुस्से में फोन को घूरा और फोन उठाकर हॉल में चला आया…. "हां बोल भाई"..

आरव:- कहां था, पूरी घंटी हुई फिर भी कॉल नहीं उठाया।

अपस्यु:- कुछ काम कर रहा था। तू सुना कैसी चल रही है छुट्टियां।

आरव:- अरे यार तेरा कल रात का शो हमदोनो ने देखा, अब मैडम को भी इक्छा हो रही है, वैसे ही एक इजहार की।

अपस्यु:- हाहाहाहा.... प्यारी सी ख्वाइश है कर दे पूरी, इसमें इतना सोच क्यों रहा है। वो छोड़ तू आराम से रह और चिंता ना कर, समझा।

आरव:- कामिना, अब कौन मन की भाषा पढ़ रहा?

अपस्यु:- जुड़वा तो मरने के बाद भी जुड़वा होते है, फिर तू सोच कैसे लिया कि तेरी बात मै ना समझूं या तू मेरी ना समझेगा।

आरव:- हम्मम ! सो तो है, बस मन ना लग रहा तुम लोगों के बिना। तू और ऐमी यहां होते तो बात ही कुछ और होती।

अपस्यु:- अभी लावणी को समय दे समझा, और ज्यादा बहस नहीं।

आरव:- ठीक है गुरुजी समझ गया। चल मै फोन रखता हूं।

अपस्यु ने सोचा, "ये फोन बार-बार तंग ना करे इसलिए खुद ही सबको फोन लगा दूं"। अपस्यु ने फिर एक तरफ से सबको कॉल लगाना शुरू कर दिया। जब वो कुंजल को कॉल लगाया तब उसका फोन व्यस्त आ रहा था। अपस्यु किचेन में झांककर देखा तो ऐमी फोन पर लगी थी, वह समझ गया दोनो लगे हैं, इसलिए उससे छोड़ बाकी सबसे बात कर लिया।

कुछ देर बाद उखड़ा सा चेहरा बनाती ऐमी हॉल में आयी और टेढ़े मुंह अपस्यु को फोन देती कहने लगी… "कुंजल है लाइन पर बात कर लो"..

अपस्यु इशारों में अपने दोनो कान पकड़ते सॉरी कहने लगा… ऐमी फोन उसके पास रखकर रूम में चली गई। जबतक अपस्यु कुंजल से बात करता, ऐमी नहाकर, तैयार होकर कमरे से बाहर निकली। ऐमी को देखकर ही समझ में आ गया, आज इसका पारा फिर चढ़ा…. "कहीं बाहर जा रहे है क्या बेबी।".. अपस्यु ऐमी का हाथ पकड़ कर खींचते हुए बाहों में लेकर पूछने लगा।

ऐमी:- खाना ऑर्डर कर दिया है, 12.30 बजे तक आ जाएगा। मै घर का रही हूं।

अपस्यु, ऐमी के कानो के नीचे से बाल को किनारे करते चूमते हुए कहने लगा… "सॉरी बाबा, वो कॉल आ गया था।"

ऐमी:- कोई बात नहीं है अपस्यु, मै जा रहीं हूं तुम खाना खा लेना।

अपस्यु, ऐमी से अलग होकर उसको अपनी ओर घुमाया, और अपने दोनो कान पकड़ कर कहने लगा…. "गलती हो गई बाबा, मुझे मान जाना चाहिए था। तुम जब कही तब हट जाना चाहिए था। अब माफ भी करो और गुस्सा शांत करो।"

ऐमी, अपनी आखें शुकुड़ती…. "अगली बार ऐसे जिद तो नहीं करोगे ना, और कहूंगी अभी नहीं, तो मान जाओगे ना।"..

अपस्यु:- हां बाबा सच में। चलो अब गुस्सा छोड़ो और आराम से बैठ जाओ। आज मै तुम्हे अपने हाथों का बना खिलाऊंगा…

ऐमी:- येस ! यह अच्छा विचार है। वो चीज वाली आलू दम जो तुमने मियामी में खिलाई थी, वहीं बनाओ।

अपस्यु:- ठीक है फिर वो रेस्ट्रो के खाने का आर्डर कैंसल कर दो, और जबतक तुम बाजार से चीज ले आओ, मै बाकी का काम करके रखता हूं।

ऐमी:- प्रदीप को भेज दो ना, अब क्या बाजार भी मै ही जाऊं…

अपस्यु:- नाह ! उन गावरों को रहने दो, मुझे और भी कुछ याद आ गया है, मै खुद बाजार जाता हूं, जबतक तुम आलू छिलकर रखना और 8-10 प्याज काट लेना।

ऐमी:- जी सर जैसा आप कहें।

अपस्यु, ऐमी को काम समझकर निकल गया, वो जबतक किचेन में अपना काम समाप्त करती तबतक अपस्यु भी बाजार से लौट आया था। अपस्यु जब लौटकर आया, ऐमी किचेन में ही थी। अपस्यु किचेन में जाकर सारा समान रख दिया और पीछे से ऐमी को गले लगाते, उसके गाल को चूमते हुए…. "चलो अब तुम जाओ मैं सब रेडी करता हूं।

ऐमी मुस्कुराती वहीं किचेन स्लैब पर बैठती हुई कहने लगी…. "नाह ! तुम पकाओ और मै तुम्हे देखती रहूंगी।…

लगभग 8.30 से 10 बजने को आए थे। श्रेया और उसकी पूरी टीम उन दोनो पर नजर बनाए-बनाए पक से गए थे। रात को इतने बड़े काम की अंजाम देने के बाद भी सुबह उठकर एक शब्द की भी चर्चा नहीं। ना ही पुलिस उनके दरवाजे पर थी तो उनके हाव-भाव में कोई बदलाव।

सब के सब अपना सर पटक रहे थे और दोनो के बीच का रोमांस देखकर बस यही सोच रहे थे… "पागल है क्या दोनो, पूरी दिल्ली में पुलिस प्रशासन हिली हुई है। पूरा अपार्टमेंट पागल बना हुआ है, और इन्हे कोई फर्क ही नहीं पर रहा। आपस में ही लगे है।"

सादिक, श्रेया का साथी और जेन के भाई का किरदार निभाने वाले… "यार या तो ये बहुत ज्यादा होशियार है या लापरवाह। इतने बड़े कांड के बाद कुछ तो चर्चा होती ना।"

श्रेया:- यह भी तो हो सकता है कि उनके अनुसार उन लोगों ने पुरा मैटर रात को हो सॉल्व कर लिया हो, इसलिए कल के इजहार के बाद दोनो बस आपस में ही लगे है।

जेन:- हां लेकिन अब हम क्या करें, उनका रोमांस देखकर तो मुझे अंदर से कुछ रोमांटिक और कुछ एग्जॉटिक सी फीलिंग आने लगी है।

सादिक:- मेरा भी वही हाल है।

श्रेया:- हम्मम ! कहीं ऐसा तो नहीं कि इसने मुझे कल रात जित्तू के पास देख लिया था और शक हो की हम उसके घर में घुसपैठ करके उनपर नजर बनाए हुए हूं।

जेन:- प्वाइंट में दम तो है, लेकिन उनके प्रतिक्रिया इतने नेचुरल है कि कुछ समझ पाना नामुमकिन है। वैसे जिस हिसाब से दोनो के बीच का प्यार और रोमांस है, उसे देखकर तो यही लगता है कि, अगर वो तुम्हे कल सबके साथ देख लेता तो वहां 5 की जगह 6 लाश होती।

श्रेया:- हम्मम ! ठीक है, कुछ देर और वॉच पर रहो, मै कुछ सोचती हूं।

इधर ऐमी किचेन स्लैब पर बैठी अपस्यु को प्यार से खाना बनाते हुए देख रही थी। अपस्यु बड़े ही प्रेम से और पुरा ध्यान खाना पकाने पर दिए हुए था… "कुछ बोलो भी ऐमी, पास हो और इतनी ख़ामोश।"..

ऐमी:- नाह तुम्हे देखने का मज़ा ही कुछ और है। अपनी ये शर्ट क्यों नहीं उतार देते। जरा नजर भर तुम्हारे दिलकश बदन को देख लूं।

अपस्यु अपनी नजर ऐमी पर दिया, आंखों में शरारत और होटों पर कातिलाना हंसी… अपस्यु अपने होंठ आगे बढ़ाकर ऐमी के होठों को चूमते… "अब कौन रिझा रहा है।"..

ऐमी:- हीहीहीही… पहले शर्ट उतारो फिर बताती हूं।

अपस्यु:- तुम खाली बैठी हो, इतनी मेहनत तो तुम भी कर सकती हो।

ऐमी:- नाना, आज मै आलसी हूं, सब तुम्हे ही करना होगा…

"उफ्फ ! मार ही डाला।"… अपस्यु आंख मरते हुए अपनी शर्ट उतार लिया और उसे लपेटकर ऐमी के मुंह पर फेंक दिया। ऐमी, अपस्यु की इस हरकत पर हंसती हुई कहने लगी… "नजर ना लगे, इन्ना सोना। चलो अब अपने पैंट उतारो।"

अपस्यु, आश्चर्य में अपनी आखें बड़ी किए….. "क्या?"

ऐमी:- हीहीहीही.. पैंट उतारो।

अपस्यु:- हट पागल, मै कहता हूं तुम अपने ये जीन्स उतारो।

"पहले ही कहीं मै आज आलसी हूं, बाकी तुम्हारी मर्जी है, मुझे कोई ऐतराज नहीं।"… ऐमी हंसती हुई आंख मारते कहने लगी…

अपस्यु, हंसते हुए अपना सर झुका लिया और अपना काम करने लगा।… "बेबी, शर्ट की तरह पैंट भी फेको ना। प्लीज।"..

"आज पागल हो गई हो तुम।" .. अजीब शर्म सी हंसी हंसते हुए अपस्यु ने अपने पैंट उतरकर भी ऐमी के मुंह पर मरा। … "भिंगे होंठ तेरे, प्यासा दिल मेरा… मेरे इमरान हाशमी, अंदर तो काफी सेक्सी बॉक्सर पहन रखी है, कहीं और परफॉरमेंस तो नहीं देने वाले थे।"..

अपस्यु:- बस भी करो, अब खुश तो हो ना..

ऐमी:- नाह ! वो आखरी वस्त्र, बॉक्सर भी उतार कर दो।

अपस्यु:- पागल, सुंबह-सुबह कोई पोर्न तो नहीं देख ली।

ऐमी:- आय हाय लड़का तो शर्मा गया। अच्छा तुम्हारी लाज्जा को देखते हुए छोड़ती हूं। जाओ नहा लो, सब तो लगभग पक गया है।

अपस्यु:- बस 5 मिनट का रह गया है, जबतक ये पकता है, तबतक मैं तुम्हे भी निर्वस्त्र कर दूं।

ऐमी फाटक से किचेन स्लैब से नीचे उतरती…. "अभी कुछ देर पहले ही ना कान पकड़ कर बोल रहे थे, मै मना कर दूंगी तो मना हो जाओगे। तो चलो अब मना हो जाओ।"

अपस्यु खा जाने वाली नज़रों से घूरा .. "बहुत शरारत सूझ रही है मिस ऐमी, अभी बताता हूं तुम्हे।"… अपस्यु दौड़ा, ऐमी भागी.. भागते दौड़ते, सामान गिराते पीछा चालू था। ऐमी की खिल खिलहट पूरे घर में गूंज रही थी और अपस्यु उसके पीछे दौड़कर पकड़ने कि कोशिश में लगा था….

अंततः अपस्यु ऐमी को पकड़कर कमर से उठाया और तेजी से गोल घूमते हुए उसके कान के नीचे गले पर अपने दांत जोड़ से गड़ाते हुए कहने लगा… "मेरे तो सीधे-सीधे इमोशंस थे, लेकिन ये सुबह से जो तुम मुझे परेशान कर रही हो ना, अभी बताता हूं।"..

एमी:- क्या करोगे नहीं मानूंगी तो, रेप ही करोगे ना, और क्या.. हीहीहीही।

अपस्यु, ऐमी को उठाकर डायनिंग टेबल पर बिठाते हुए… "तुमने वो सुना है"..

ऐमी:- क्या ?

अपस्यु:- बोंडेज एंड डिसिप्लिन (Bondage and Discipline), डमिनेंस एंड सबमिशन (Dominance and Submission) सदोचिज्म एंड मसोचिज्म (Sadochism and Masochism).

ऐमी, अपनी दोनो आखें फाड़े अपस्यु को देखती हुई… "क्या बीडीएसएम (BDSM)"

अपस्यु:- येस । बिल्कुल यही, सही सुन रही हो।

ऐमी, अपस्यु के बालों पर प्यार से हांथ फेरती…. "बेबी ऐसा ना करो ना, प्लीज। एक बार और सोच लो ना बेबी। मूड तो मेरा भी बहुत हो रहा है, लेकिन ये…."

अपस्यु:- ई.. हा.. हा.. हा… अब तो यही फाइनल है।

ऐमी:- ठीक है फिर हंटर खाने तैयार रहना, मेरी तैयारी पूरी है। सबमिसिव और डिसिपिलन बनकर रहना।

इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"
 
Back
Top