Romance भंवर (पूर्ण) - Page 81 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Sabse pahle to dhanywad ... Yah khas dhanywad aapke sawalon ke liye... Kahani me suspense hai to sawal hote rahne chahiye... Kyonki hum bhi insan hain aur lakh kosis kar len kuch na kuch chhut hi jata hai... Jab kabhi kahani samapt hone ke baad wo sawal achanak se takra gaye tab dhyan aate hai ki ... Ye to rah hi gaya...

Khair main ek ek karke sawal leta hun ..

Sargent hopes ka chepter abhi pura baki hai .. isliye aap iske bare me pure vistar se padhenge... Haan rahi baat apasyu ke uss hairatangej karname ki to wo US se laut'kar hi Aarav aur aimi ke sath discuss hone the.. lekin India me alag hi scene chal rahe the aur Apasyu lagbhah mahine din baad lauta to main aage ke scene me ulajh kar iss ghtna ko bistar karna bhul gaya.. shayad yah sawal nahi dekhta to chhut jata... Main adjust karke uss karname ko vistar roop se batata hun ....

Chandrbhan ke aashrm ka swarth aur Maylo group ka swarth Jk aur Apasyu ki meeting me hai .. jab Apasyu ne Jk ko bhushan Raghuvanshi ki detail di thi... Wahan saf tha ki chandrbhan ki company c&b shak ke dayre me hain... Inhe hawala ke paison ko profit me dikhane ke liye koi strong base chahiye ... Aur isi ke tahat target kiya gaya tha .. Guru Nishi ke aashram aur Maylo group ko...

Aate hain ab sath aaye 85 log kaise mare.. ek preplanned tha... Itne bade hatya kand ko itne logon ke bich sajha nahi rakha ja sakta tha... Kewal head of log bache the... 15 log jo hawala ka kaam karte the .. baki bhare ke log ko 1,2 karke girate chala gaya tha... Iss group se us group ko kaha gaya tha girane .. anth me ek group bacha jise mukhya logon ne gira diya..

Update :-57,58,64,65,66 ... Inme atit ki baat puri tarah se clear hai ... Update 66 me hi clear tha ki 160 logon ke sath hi Sunanda aur Sunita jali thi .. aur jo sabse pahli lash giri thi us bhatti me wo Apasyu ke maa ki hi thi... June ka samay tha ... Aur sab log wahin par the ...

Sinha ji ke baad ke update me dikhaya hai ki wo 2 din ke liye Delhi case ke silsile me aaya tha... Aag lagane ki jimmedari chandrbhan Raghuvanshi ki thi jise apasyu ne khud apne hathon se fasi di thi... To uske jinda hone ka to sawal hi nahi hota hai..

Sulekha aur Apasyu ki maa Sunanda ka ek chhota sa chepter baki hai .. so uski gahraiyon me nahi jate hai..

Pahle aate hain uss aag lagane ke waqt kaun kaun tha aur kaun kaun nahi ... To yah tay kar pana muskil tha ki wahan par kaun kaun tha.. ek gurukul jahan diye ki raushni ho aur aag ki jaltii lau par chehra dekha jaye to kah nahi sakte kaun kaun hoga... Haan ye sawal hai ki fir apasyu aur uski team ko kaise pata chala .. soo ek inki kadi jo tha Rajeev aur Manish.. se investigation shuru hui thi... Aur sab kuch clear hote hote lagbhag 5 sal lag gaye.. usi ke baad in logon ne yojna banana shuru kiya..

Sampatti hadap nahi li hai.. haan lekin indirectly uska istamal kar rahe hain Vikram singh .. baki is chepter ki ore to badh rahe hi hain .. to wahin baki barikiyon ko samjh lenge ..

Ummid hai maine aap ke sare sawal le liye hain .. baki yadi aur koi sawal ho to awashya puche .. dhanywad
 
Update:- 113

इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"

इधर श्रेया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था और उधर दोनो के रोमांस में कोई तब्दीली नहीं नजर आ रही थी। ऐमी डायनिंग टेबल पर बैठी गौर से अपस्यु का चेहरा देख रही थी। अपस्यु उसे सीने से लगाते हुए कहने लगा…. "खुलकर जीने का मज़ा ही कुछ और है।"..

ऐमी, अपस्यु से अलग होती मुस्कुराती हुई उसे देखने लगी… "आज ऐसा लग रहा है कि हम अपनी सोच में बेवकूफ थे। लेकिन जो बीत गया उसे जाने दो और जाकर तुम नहाकर आओ।"

अपस्यु:- तुम भी साथ चल रही हो क्या?

ऐमी, अपस्यु को धक्के देकर दूर हटती… "शाम को जब लौटेंगे तब देखते है, अभी जाओ नहा लो, जबतक मै किशोर को बुला लेती हूं। आज घर का काम करवा लेते है।"..

अपस्यु:- सारे काम 2 बजे तक खत्म कर लेना अभी कह देता हूं।

ऐमी:- हां ठीक है मैंने सुन लिया अब तुम जाओ।

अपस्यु चला गया और उसे जाते देख ऐमी मुस्कुराती हुई किशोर को कॉल लगा दी। अभी वो किशोर से बात करके कॉल रखी ही थी कि बेल बजने लगी। ऐमी दरवाजा खोलकर देखी तो बाहर श्रेया खड़ी थी…. "अपस्यु नहीं है क्या?"

ऐमी:- क्यों वो नहीं रहता तो तुम घर में नहीं आती क्या?

श्रेया, पूरी तरह चौंकती…. "क्या?"

ऐमी, हंसती हुई…. "मज़ाक कर रही थी आओ अंदर। कई बार आंटी के साथ देखी हूं तुम्हे, इसलिए थोड़ा सा मज़ाक।"

श्रेया अंदर आती हुई… "तुमसे कभी ठीक से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन अच्छे से जानती हूं तुम्हे।"

ऐमी:- जी इस ज़र्रे नवाजी का शुक्रिया। (कामिनी जानती तो कल कुछ ढंग के लोग भेजती, इतने कमजोर प्लेयर को कॉन्ट्रैक्ट तूने दिया की तेरा खून करने का मन करता है)

श्रेया:- अपस्यु नहीं है क्या ? (देखने से लगता नहीं कि ये इतनी बड़ी फाइटर होगी। अपने फिगर को क्या मेंटेन किया है। तब उस अपस्यु की नजर इसपर से हटती नहीं। पहले इसे अपस्यु से थोड़ा दूर करना होगा, तब मुझे इनके बीच जगह मिलेगी)..

ऐमी:- कहां खो गई, मै कब से पूछ रही हूं, कुछ लोगी क्या?

श्रेया:- सॉरी कुछ सोच रही थी, इसलिए ध्यान नहीं दी। नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस अपस्यु से थोड़ी बात करनी थी।

ऐमी:- नहाने गया है थोड़ी देर में आ जाएगा.. (और तू कामिनी जल्दी से भाग जाना बात करके, क्योंकि ये वक़्त सिर्फ हम दोनों का है)

श्रेया से और बात करना ऐमी को उबाऊ सा लगने लगा इसलिए वो श्रेया को हॉल में बिठाकर किचेन में चली गई। तकरीबन 15 मिनट बाद अपस्यु हॉल में आया… "हेल्लो श्रेया"..

श्रेया:- हेय अपस्यु, क्या हो रहा है?

अपस्यु:- अपनी होने वाली बीवी के साथ हूं, वो भी अकेले तो होना क्या है, खट्टे-मीठे पल का मज़ा उठा रहे है।

श्रेया:- यहां पूरी कॉलोनी सदमे में है और तुम रोमांस में लगे हो।

अपस्यु:- ना तो मै पुलिस हूं और ना ही जो मरे उनमें से किसी को जानता, सो क्या फर्क पड़ता है।

श्रेया:- कमाल है, मै उसी लड़के से आज मिल रही हूं क्या, जो कुछ दिन पहले एक किसी अनजान के शव को नंगे पाऊं कांधा दे रहा था।

अपस्यु:- अखबार और न्यूज में ऐसे खबरे रोज आती हैं, क्या हर खबर के लिए तुम्हारी ऐसी ही भावना होती है। सामान्य सी बात है यार, जिसे नहीं जानते उसके लिए क्या कर सकते है। सुबह सुना मैंने भी, अफ़सोस तो कर लिया अब क्या चाहती हो छाती पीट लूं…

अपस्यु अपनी बात समाप्त ही किया था ठीक उसी वक़्त किशोर दरवाजे पर खड़ा होकर बेल बजाने लगा।… "ऐमी दरवाजे पर देखो शायद किशोर आया हुआ होगा।"…. ऐमी दरवाजा खोलती… "आइए सर"..

जैसे ही किशोर अंदर आया श्रेया की आखें बड़ी हो गई। हालाकि किशोर को श्रेया के बारे में नहीं पता था, लेकिन श्रेया किशोर के बारे में सब जानती थी। दिल्ली का एथिकल हैकर जो अपने सिक्योरिटी सिस्टम के लिए मशहूर था।

ऐमी:- किशोर सर वेलकम…

किशोर, ऐमी के सर पर एक हाथ मारते….. "कितनी बार तुमसे कहा है की ये बोरिंग नाम से मत पुकारा कर। कॉल में रेक्स।"..

अपस्यु दूर से ही… "ऐसा भी क्या फैशन किशोर भईया.. ये तो.. सेक"..

अपस्यु आधे पर ही था तो… "देखो अपस्यु अगर वो नाम बोला तो मै यहां से चला जाऊंगा।".. किशोर हड़बड़ी में अपनी बात कहते हुए अपस्यु के पास पहुंचा।

अपस्यु:- ठीक है नहीं कहता, कुछ लोगे आप?

किशोर:- काम बहुत परे है, क्या करना है वो बता। वहीं रेगुलर चेक करूं की कहीं कोई तेरी जासूसी तो नहीं कर रहा या आज कोई नई मांग है।

ऐमी:- हां सिक्योरिटी अलार्म भी चाहिए जो मोबाइल पर नोटिफिकेशन दे। कल का केस तो पता ही होगा यहां अपार्टमेंट में क्या हुआ है। कब कौन कहां से दुश्मनी निकालने आए किसे पता।

श्रेया:- ठीक है अपस्यु मैं चलती हूं।

"अरे श्रेया कहां जा रही हो। बैठो थोड़े गप्पे मारेंगे। किचेन का काम लगभग खत्म है।"…… ऐमी अपनी बात कहती, हंसती हुई अपस्यु के ओर देखने लगी।

श्रेया:- नहीं जाने दो, वैसे भी तुम्हारे होने वाले पतिदेव कह ही चुके हैं कि आज वो अकेले तुम्हारे साथ खट्टे-मीठे पल बांट रहा है।

श्रेया गेट तक बड़े आराम से निकली और बड़ी तेजी के साथ अपने फ्लैट में गई। बाकी लोगों को सर्विलेंस से सब खबर लग चुकी थी कि अपस्यु के यहां कौन आया है, अब बस सबको भेद खुलने का डर था।

श्रेया की साथी जेन और सादिक अपने अपने शब्दो में चिंता जाहिर करते हुए पूछने लगे….. "हम तो अपस्यु को नॉन टेक्निकल समझते थे, लेकिन इसके पास टैक्निकल टीम भी है।"..

श्रेया, जोर जोर हंसती हुई…. "जानती हो उसमे और हम सब में क्या फर्क है?"

श्रेया की पूरी टीम एक साथ… "वो शिकार है और हम शिकारी।"..

श्रेया:- नहीं, हम बेवकूफ शिकारी है और वो चालाक शिकार। कम से कम उन्हीं दोनो से तो कुछ सीख लेते। कल रात इतने शिकार किए उसने, लेकिन पुलिस को देखकर जरा भी पैनिक नहीं हुए और एक तुमलोग हो, एक लीगल हैकर क्या घुसा उसके घर में, पैनिक हो गए।

"सर्विलेंस पर रहो, यदि ये किशोर इसके साथ है, इसका मतलब इसे शुरू से पता है कि हम कौन है, फिर तो कोई गम ही नहीं, डायरेक्ट डील करेंगे, लेकिन नतीजा निकालने से पहले आराम से सर्विलेंस पर रहो, पूरे दिन में एक यही तो काम का आदमी आया है।

इधर श्रेया के जाने के बाद…. "अपस्यु, बेबी किशोर भईया को अपना काम करने दो, जबतक हम घर से होकर आते है। वैभव और पापा से मिल लेते है। कल से नहीं मिले।"..

अपस्यु, घूरती नज़रों से… "ऐमी देखो मुझे तुम ऐसे जान बूझकर परेशान नहीं करो, हम कहीं नहीं जा रहे।"

ऐमी, अपनी घूरती नजर अपस्यु पर डालती…. "तुम चल रहे हो और इस बात पर कोई बहस नहीं होगी। जाओ चेंज करके आओ।"..

अपस्यु छोटा सा मुंह बनाए अपने कपडे बदल कर आया।… "दरवाजे और कार की चाबी तो लेते आओ बेबी, श्रेया को देते चलते है, आने में देर हो गई तो।"..

दोनो थोड़े ही देर में श्रेया के दरवाजे पर पहुंचे, श्रेया के हाथ में सारी चाबियां देते हुए अपस्यु कहने लगा… "मेरे घर में कुछ काम हो रहा है श्रेया, प्लीज तुम थोड़ा देख लेना, हमे अभी ऐमी के घर जाना है।"

श्रेया:- ओय तुम दोनो झूठे हो, जा रहे हो रोमांस करने कहीं बाहर और मुझे जबरदस्ती काम दे रहे।

अपस्यु, श्रेया के दोनो गाल खिंचते…. "प्लीज अपने दोस्त की मदद कर दो, और वैसे भी मैंने सच कहा था। ऐमी खडूस हो गई है, रोमांस ना करूं मैं इसलिए बहाने से मुझे घर से बाहर ले जा रही है।

ऐमी गुस्से में अपस्यु का हाथ खींचकर ले जाने लगी और उन दोनों को देखकर श्रेया हंसने लगी। दोनो ऐमी की कार से जैसे ही अपार्टमेंट से बाहर निकले… "क्या हुआ ऐमी।"..

ऐमी:- आरव अभी-अभी किडनैप हुआ है।

अपस्यु:- हम्मम ! और कोई जानकारी।

ऐमी:- सिंगल बीप साउंड भेजा है, मतलब केवल वही किडनैप हुआ है, लावणी नहीं।

अपस्यु:- चलो फिर स्वागत कि तैयारी करते है।

ऐमी:- क्यों नहीं सर, वैसे भी कल के एक्शन ने बहुत निराश किया था, शायद आज कुछ टक्कर के लोग मिले। चलो जरा दुश्मन की जानकारी निकाली जाए।

अपस्यु और ऐमी दोनो ही अपने तीसरे फ्लैट पहुंचे जहां पुरा वर्क शॉप था इनका। ऐमी तुंरत अपने कंप्यूटर के साथ लग गई। सभी जानकारी पुख्ता करने लगी। कुछ बधाएं थी इसलिए ऐमी ने पल्लवी को गोवा एयरपोर्ट पर नजर दिए रहने के लिए बोली। इधर जबतक अपस्यु पुरा बैग तैयार कर चुका था, उसमे सारे जरूरत के प्रयाप्त समान के साथ अपने नए सेल रिप्लेसमेंट लिक्वड (cell replacement liquid) के इंगेजेक्शन बैग में डालकर तैयार हो गया।

ऐमी अब भी कंप्यूटर पर नजर बनाए थी। अपस्यु उसके कंधे से लगकर गाल को चूमते…. "क्या पता चला ऐमी।"..

ऐमी, अपस्यु के ओर मुड़कर अपस्यु के होंठ को चूमती…. "हाई टेक प्रोफेशनल, 12 लोगों की एक टीम है। अभी से 10 मिनट पहले एक प्राइवेट प्लेन में गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरे है।

अपस्यु, भी ऐमी के होंठ को चूमते…. "जो भी है उसे हमारे बारे में सब पता है और शायद कोई सौदा करना चाहते है।"..

ऐमी:- चलो कम से कम आज मुंह छिपाकर तो नहीं लड़ना होगा।..

ऐमी अपना लैपटॉप बैग में पैक करके दोनो आराम से कार में जकार बैठ गए और बस इंतजार, इंतजार, इंतजार… तकरीबन डेढ़ घंटे बाद… "बेबी तैयार हो जाओ, वो लोग पहुंच गए।"

अपस्यु:- कौन से रास्ते पर है ऐमी।

ऐमी:- जिस हिसाब से ट्रैफिक लाइट को हैक करके अपनी तस्वीरें गायब करते चल रहे है, उस हिसाब से तो लग रहा है कि ये लोग अपने पसंदीदा रास्ते पर होंगे।

अपस्यु कार पूरी रफ्तार से भागते हुए… "ऐमी, पल्लवी भाभी अभी सर्वर पर थी क्या बैठी।"..

ऐमी:- हां वही बैठी है।

अपस्यु, पल्लवी को कॉल लगाया… "जी कहिए।"..

अपस्यु:- कुछ नहीं आपसे बात ही नहीं करनी मुझे।

तकरीबन 2 मिनट बाद पल्लवी प्राइवेट लाइन से कॉल लगाती… "आरव को कुछ समय पहले दिल्ली लाया गया है। मै और जेके थोड़े ऑफिशियल काम में फसे है, जल्द ही फ्री होकर हम भी ज्वाइन करेंगे। हमारे आने का इंतजार करना। ऐसा ना हो आने से पहले ही सारा एक्शन खत्म हो जाए।

अपस्यु:- भाभी, वो तो परिस्थिति तय करेगी ना। फिलहाल मैं कुछ कहता हूं ध्यान से सुनना और जल्द से जल्द जवाब देना, अभी हम दोनों ही दिल्ली उत्तराखंड के हाईवे पर है। अब ध्यान से सुनना, 12 लोगों की एक टीम जो काफी हाई टेक है और काफी योजनाबद्ध। दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कहां जाकर हमसे डील कर सकते है।

तकरीबन 5 मिनट बाद पल्लवी एक लोकेशन साझा करती हुई कहने लगी…. "जिस हिसाब से तुमने उनका ब्योरा दिया है, उस हिसाब से तुम्हारे साथ डील वो भेजे गए पते पर ही करने वाले है। इस जगह में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की हाई सिक्यूरिटी है ,जो आज ही सुबह की गई है।..

ऐमी, अपस्यु का चेहरा देखती हुई मंद मंद मुस्कुराने लगी। अपस्यु उसके सर पर एक हाथ मारते हुए… "मै जान रहा हूं तुम क्या सोच रही हो।"..

ऐमी:- अच्छा बताओ मै क्या सोच रही हूं?

अपस्यु:- यही ना की जिसके टेक्नोलॉजी हमने चोरी किए। जिसके ट्रेनिंग मॉड्यूल हमने चुराया, आज वो हमारे सामने होगा वो भी इस बात से अनजान।

ऐमी:- नाह ! मै तो एक्साइटेड हूं यह सोचकर, क्या होगा जब तुम एक एक्सपेरिमेंटल बेबी से भिरोगे, जो तुम्हारा मौसेरा भाई है।

अपस्यु:- फिलहाल तो उसने आरव को उठाकर एक दुश्मन की तरह दस्तक दिया है, तो उससे उसी की भाषा में मिलना है, आगे वक़्त की मर्जी। और हां कुछ रिश्ते आपके माता पिता के जाने के बाद ही चले जाते है, इसलिए वो मेरा भाई नहीं है।..

लोकेशन मिलने के बाद दोनो बस 5 मिनट में अंदर वहां थे। ऐमी वहां के सारे सिक्यूरिटी सिस्टम भेदने के बाद दोनो अंदर पहुंचे। जैसे ही वहां का सुरक्षा चक्र भेदा गया, वैसे ही किडनैपर को खबर लग गई की उसकी जगह पर घुसपैठ हुई है।…
 
Updated:- 114

यह साल 2008 था। अपस्यु अपने दर्द को तो कुछ ही दिनों में भुल गया था किन्तु आरव और ऐमी को उबारने में लगभग 1 साल का वक़्त लग गया था। एक दिन अपस्यु अपने मां के ख्याल में डूबा हुआ था और उसे वो घटना याद आयी, जब उसने अपनी मां सुनंदा से अपने ननिहाल के बारे में पूछा था।

इस सवाल पर उसकी मां के छलकते आंसू याद गए और उन आशुओं में एक दर्द की कहानी बयां हो गई, जो उसकी बड़ी बहन कंचन और जीजा वीर प्रताप के साथ घटा था। इस घटना को याद करके अपस्यु के मन में इक्छा सी हो गई अतीत को जानने की। जानने की तलब इसलिए भी थी, की कहीं दोनो बहन के साथ हुए हादसे में कुछ कड़ियां जुड़ी तो नहीं।

अपस्यु पता लगाते हुए पहुंचा था प्रताप महल। प्रताप महल के छानबीन से अपस्यु को पता चल चुका था कि दोनो बहन के साथ बहुत ही बुरा हुआ। हालांकि वजह अलग-अलग थी, लेकिन घटना एक जैसी। अपस्यु खाली हाथ वहां से वापस आ रहा था और तभी लौटते वक़्त एक घटना हुई थी।

कुछ लोग पीछे के भुल-भुलैया में कुछ गुत्थियां सुलझा रहे थे। सफलता भी हाथ लगी और अंत में फिर वही हुआ जिसे देखकर अपस्यु हंसने लगा था। अपनो के हाथ एक धोखा। अपस्यु धोखेबाज को पहचान चुका था और वो कुछ दिन के बाद अपस्यु को दिल्ली में भी दिखा गया। वो धोखेबाज किसी और जगह नहीं बल्कि उसी एथिकल हैकर किशोर के यहां दिखा था, जो उस धोखेबाज को हैकिंग का ज्ञान दे रहा था।

अपस्यु ने बड़ी चतुराई से ऐमी को उस धोखेबाज के पीछे लगा दिया। फिर तो एक के बाद एक कहानी खुलती चली गई। हालांकि अपस्यु के अतीत से इसका कोई संबंध नहीं था, लेकिन अपने मौसेरे भाई दृश्य के धोखेबाज दोस्त के पीछे पड़ने से, अपस्यु के भविष्य कि तैयारी इतनी आगे पहुंच गई की उसके दुश्मन के पहचान होने के बाद वो काफी बौने नजर आने लगे।

अपने भाई दृश्य के इस दुश्मन के पीछा करने से अपस्यु के हाथ 2012 में एक ऐसी वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी हाथ लगी, जिसके दम पर वो किसी भी खुफिया विभाग के नेटवर्क को एसेस कर सकता था, वो भी बिना उसके नजर में आए। ऐसा भी नहीं था कि अपस्यु ने अपने भाई दृश्य से केवल कुछ लिया ही था, जिस प्रकार वो चोरी से उसके कई सारे अच्छे चीजों को अपना रहा था, ठीक उसी प्रकार वो कई ऐसे मौके पर गुप्त तरीके से उसकी मदद भी करते आया था।

साल 2012 में उसके भाई दृश्य को उसके लक्ष्य में सफलता हासिल हुई थी, उसके बाद फिर कभी अपस्यु ने उसकी खबर नहीं रखी, लेकिन उसका दिल जानता था, अनजाने में ही सही एक ना एक दिन उसके रास्ते टकराएंगे। इन सब मामलों में एक बात और सत्य थी, अपस्यु जहां अपने भाई को हीरो मानता था वहीं उसके दिल में दृश्य के लिए काफी नफरत भी भरी हुई थी।

दृश्य अपने बदले के दौर में एक ऐसी कहानी लिख रहा था, जिसके गुस्से के आगे जो आया वो तबाह सा हो गया। जब वो बदला लेने के लिए निकला था तब ना जाने कितने लोगों के खून से अपनी कहानी लिखी थी। इस कहानी को लिखने के क्रम में दृश्य यह बिल्कुल भुल चुका था कि बहुत सारे लोग पैसों के कारन केवल साथ देते है, जिनको मरना जरूरी नहीं था। और यही एक बड़ी वजह थी, जिस कारन अपस्यु दृश्य से उतनी ही नफरत भी करता था और उसके अनाथालय में उन्हीं घटना से अनाथ हुए बच्चे पल रहे थे।

मज़े की बात एक और थी। दृश्य अपने बदले के क्रम में 2 नाजायज बच्चो को भी पीछे छोड़ आया था, जिसमें से एक उसे मिल गया था जो इस वक़्त उसी के पास था। लेकिन अपने जीत के साथ ही वो अपना दूसरे बच्चे को भुल चुका था जो इस वक़्त सिन्हा जी के देख रेख में पल रहा था।

अपस्यु को भली-भांति पता था कि दृश्य को शायद ही कभी पता चले कि उसका कोई मौसेरा भाई भी है, लेकिन अपने इस नाजायज बच्चे का पता लगाकर वो एक ना एक दिन उसके दरवाजे तक जरूर पहुंचेगा, लेकिन ऐसे आरव को उठाकर पहुंचेगा उसे उम्मीद ना थी। अपस्यु और ऐमी को भी उन लोगों के दिल्ली पहुंचने से पहले तक जारा भी अंदाजा नहीं था कि आरव को दृश्य ने उठाया है। लेकिन जैसे ही दिल्ली के ट्रैफिक कैमरे से केवल उनकी इमेज गायब होनी शुरू हुई, अपस्यु और ऐमी को समझते देर ना लगी ये नया दुश्मन कौन है।

जैसे ही अपस्यु ने अपने भाई के सिक्योरिटी सिस्टम को भेदकर जैसे ही वहां कदम रखा, उन लोगों तक भी ये खबर पहुंच गई….

"भाई, लगता है मीटिंग की जगह पर कोई घुसपैठ हुई है।".. दृश्य का कंप्यूटर एक्सपर्ट और उसके छोटे भाई जैसा साथी आरूब मामले की जानकारी देते हुए दृश्य से कहने लगा।

दृश्य:- अरूब, देखो कौन घुसा है।"..

अरुब ने लैपटॉप ऑन करके जैसे ही स्क्रीन पर देखा, आश्चर्य से उसकी आखें बड़ी हो गई, और वो स्क्रीन घुमा कर सबको दिखाने लगा….

"वाउ.. क्या रोमांटिक कपल है लव, कितना पशनेटली नाच रहे है।".. दृश्य की जान अश्क उन्हें देखकर मुस्कुराती हुई कहने लगी।

दृश्य, अश्क को अपनी बाहों में समेटकर… "मै कबसे इतना पैशनेटली तुमसे एक किस्स चाह रहा हूं, उसपर कोई ध्यान ही नहीं है। सच ही लोग कहते है, शादी के बाद प्यार हवा हो जाता है।

अश्क:- इसलिए बाहर प्यार बर्षा रहे थे उसी की एक नाजायज कड़ी तो आज मै समेटने जा रही हूं, और एक परा है अपने दादा-दादी के पास। लव सच-सच बताओ और कितने नाजायज बच्चे है जो मेरी जानकारी में नहीं है।

दृश्य:- हद है क्यूटी, मै जब भी रोमांस के मूड में होता हूं, तुम पुरानी बात छेड़ देती हो।

अश्क:- मेरा मूड था अभी रोमांस का, लेकिन आपके नाजायज अफेयर मुझे याद आ गए और अब मेरा मूड आपसे झगड़ा करने का हो रहा है।

दृश्य:- हां ये अच्छा है। जारा फ्लैशबैक में जाओगी। एक बच्चा क्या 2 बच्चा ले लो, मेरे ओर से एक गिफ्ट, कौन भावनाओ में बहा था। मै किस दौर से गुजर था उस वक़्त तुम्हे याद है क्यूटी। मुझे पता है आज भी वो वाकया याद करके तुम रोती हो, लेकिन क्या ही करे, बुरा दौड़ था वो भी और हम कितने नासमझ।

अश्क, दृश्य में सिमटती हुई…. "जाने दो, बीती बातों को याद करने से केवल दर्द ही मिलेगा। चलो चलकर अपने बच्चे को वापस लाए। ना जाने वो लोग अपने बच्चे को किस तरह का हथियार के रूप में ढाल रहे होंगे…"

दृश्य:- कोई बात नहीं होगी उनसे क्यूटी, यदि हमारा प्रस्ताव मान गए तो ठीक वरना सबकी लाश पर से अपना बच्चा लेकर जाऊंगा।

इधर जबतक अपस्यु और ऐमी एक दूसरे को देखकर मदहोश होकर नाच रहे थे, दृश्य की पूरी टीम पहुंच गई…. "शुक्रिया मेरा वक़्त बचाने के लिए, वरना लगा था कि कहीं मुझे पता बताकर बुलाना ना पड़ता। देखो मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है तुमसे, मेरा कुछ तुम्हारे पास है उसे शांति से लौटा दो। फिर तुम अपने रास्ते और मै अपने रास्ते"… दृश्य अंदर घुसते ही अपस्यु से कहने लगा।

अपस्यु:- कमाल है बिना निजी दुश्मनी के ही तुमने मेरे भाई को उठा लिया। खैर ऐसा क्या है जो तुम्हे मुझसे चाहिए?

मुखिया:- तुम्हारे पास एक लड़का है वैभव वो और तुम्हारे अनाथालय के 60 बच्चे जो वीरदोई के है मुझे वो सब चाहिए।

अपस्यु:- ना ही मै कोई अनाथालय चलता हूं और ना ही मेरे बच्चे अनाथ है। उन सबका पिता तुम्हारे सामने खड़ा है, और जबतक मै जीवित हूं, उन्हें कोई हाथ भी नहीं लगा सकता।

"कितने प्यारे लगते है दोनो साथ में, तुम दोनो अलग रहकर काफी तरप जाओगे, इसलिए दोनो के आत्मा की तृप्ति आज ही एक साथ कर देंगे, और तुम्हारी लाश पर से उन सबको ले जाएंगे। ".. अश्क उस जगह पर हुंकार भरती हुई कहने लगी…

अपस्यु:- जैसा तुम चाहो स्वीटहार्ट। हम दोनों तो कबसे मरने को तैयार है, बस साथ मारने का मजा और भी बढ़ जाता यदि मेरा भाई आरव भी साथ होता…

दृश्य:- मरने वाले की आखरी इक्छा पूरी कर दो आदिल, छोड़ दो उस लड़के को। और कुछ तो डिमांड तो नहीं है…

उसके कहने पर आरव को खोल दिया गया… वो भागकर अपस्यु और ऐमी के ओर आया। उसके आते ही ऐमी उसके चेहरे से लेकर पूरे बदन को व्याकुलता से देखती हुई आरव के गले लग गई…. "तुझे कहीं चोट तो नहीं आयी।"..

आरव, ऐमी से अलग होते… "नहीं आयी भाभी, तुम परेशान ना हो।"…

ऐमी:- बेबी आज मै और आरव है, आप ड्रिंक एन्जॉय करो। हमारे हथियार दो और बैकअप देते रहना।

आरव:- क्या बात कर रही हो। यार ये लोग चिड़ियाघर से भागे जरूर लगते है लेकिन सभी प्रोफेशनल है, अपस्यु को भी बोले आए।

अपस्यु, दोनो के बैग से रॉड निकालकर फेकते हुए…. "मै हूं ना, बस जो भी करना खुद पर काबू रखकर।"… फिर अपस्यु अपना बॉटल निकालकर दृश्य से कहने लगा… "अब क्या मुहरत का इंतजार कर रहे हो, आ भी जाओ।"..

जैसे ही आरव और ऐमी रॉड लेकर अपनी पोजीशन लिए, उसे देखकर दृश्य की टीम से आदिल कहने लगा…. "ये तो सिंडिकेट का लगता है। हमारे जैसी फाइटिंग स्टाइल।"..

दृश्य:- हां तो देर किस बात की है आदिल इन्हे भी उनके गुरुओं के पास जल्दी पहुंचा दो। चलकर फिर उन बचे हुए वीरदोयी से भी तो हिसाब लेना है।

आदिल ने अपने 2 लोगों को इशारा किया और वो लोग भी उन्हीं की तरह रॉड लेकर मैदान में उतर गए। वो दोनो तेजी से दौड़ते हुए ऐमी और आरव की ओर बढ़ने लगे। आरव इशारे से ऐमी को अपनी पोजीशन पर रुकने के लिए कहा और खुद तेजी से दौड़ता हुए आगे बढ़ने लगा।

जो 2 लोग दौड़ते आ रहे थे उनमें से एक अपने घुटने पर स्लाइड करते हुए आरव के पाऊं को निशाना बनाया, तो दूसरा हवा में उछलकर आरव के सर को। आरव उनकी नीति देखकर मुस्कुराए बिना नहीं रह सका और अगले ही पल आरव 360⁰ बैंक फ्लिप लेकर 3 फिट पीछे आ गया।

जो आदमी हवा से उछलकर सर को निशाना बना रहा था, वो अपना खाली वार करने के बाद सीधा आरव के सामने गिरा, जिसपर आरव ने बिना कोई रहम दिखाए अपना रॉड उसके कनपट्टी पर चला दिया और वो आदमी वहीं बेहोश।

दूसरा जो स्लाइड करते हुए आ रहा था वो सीधा ऐमी के पाऊं के पास रुका। जबतक वो खुद को दूसरे वार करने के लिए तैयार करता, उससे पहले ही ऐमी ने एक लात उसके मुंह पर दिया और वो भी बेहोश होकर किनारे हो गया।

इस तरह के लड़ाई की उम्मीद दृश्य को कतई नहीं थी। उसने आदिल के ओर इशारा किया और आदिल सहित सभी 6 लोग मैदान में कूद पड़े। तभी उन 7 में से एक लड़ाकी, अपने कपड़ों से कई सारी चाकू निकालकर लगातार फेकने लगी।

उन चाकुओं की बरसात के पीछे से, 6 लोगों की टीम भी आगे बढ़ने लगी। इधर जैसे ही चाकू फेकने शुरू हुए, आरव और ऐमी ने अपने दोनो हाथ के 4 फिट के रॉड को बीच से जोड़ते हुए उसे 8 फिट के 1 रॉड में तब्दील कर दिया और बीच से पकड़कर इतनी तेजी के साथ गोल-गोल घुमा रहे थे कि ऐसा लग रहा था कोई पंखा नाच रहा हो। सभी चाकू टकराकर दाएं बाएं गिर रहे थे।

"क्या निम्मी तुझे अपने पास बुलाकर नहीं सिखाई तो तूने तो वफादारी ही बदल ली।"… ऐमी अपने रॉड घूमती हुई कहने लगी…

तभी अपस्यु अपना एक पेग खिंचते हुए, पास परे 2 चाकू को उठाया और दोनो चाकू इस तेजी से निम्मी के उपर फेका की जबतक निम्मी को पता चलता उसे बचना है, उसके दाएं और बाएं दोनो हाथ में चाकू घुस चुका था। जैसे ही निम्मी का खून गिरा, वैसे ही पूरी टीम ठहर गई और निम्मी कर्राहते हुई अपना मस्क उतारती हुई कहने लगी…. "वफादारी तो शुरू से जैसी थी वैसी ही है, बस आपसे बहुत कुछ सीखने की चाहत थी है और सदा रहेगी।"

निम्मी को अप्पू ने थामा। अपने साथी का खून गिरते देख सब लोग आग बबूला हो गया, इसी बीच अश्क गुस्से में खड़ी हुई, लेकिन दृश्य ने उसका हाथ पकड़कर इशारों में इंतजार करने कहने लगा..

सभी 5 लोग आदिल की अगुवाई में ऐमी और आरव को घेरे खड़े थे। सबके हाथ में एक ही जैसे रॉड और बस फर्क साइज का थोड़ा सा। आते ही सभी एक साथ टूट परे। वहीं ऐमी और आरव के बीच नज़रों का कुछ संवाद हुआ और ऐमी 2 स्टेप पीछे लेकर तेजी से दौड़ी, आरव ने जल्दी से अपना हाथ आगे किया।

ऐमी दौड़कर हवा में आरव के हाथ पर तकरीबन 4 फिट उछली, जहां आरव ने उसके उछाल को नई गति देकर तकरीबन 8 फिट उछाल दिया। ऐमी हवा में फिलिप करती, उनके घेरे के पार खड़ी हो गई। सभी लोगों का ध्यान जैसे ही भटक कर पीछे गया, आरव के अपने रॉड की मार से उन्हें अवगत करवा दिया।
 
Update:- 115

ऐमी दौड़कर हवा में आरव के हाथ पर तकरीबन 4 फिट उछली, जहां आरव ने उसके उछाल को नई गति देकर तकरीबन 8 फिट उछाल दिया। ऐमी हवा में फिलिप करती, उनके घेरे के पार खड़ी हो गई। सभी लोगों का ध्यान जैसे ही भटक कर पीछे गया, आरव के अपने रॉड की मार से उन्हें अवगत करवा दिया।

जैसे ही आरव का वार शुरू हुआ यह लोग भी हरकत में आए और आरव पर हमला करना शुरू कर दिया। इधर ऐमी कूदकर अपनी पोजिशन लेती ही अगुवाई कर रहे आदिल पर अपना वार की। यह वार इतना तेज और खतरनाक था कि आदिल बचाव करते हुए 2 फिट तक पीछे गया।

इतने में ही अपस्यु ने अपने हाथो की रस्सी को बड़ी तेजी के साथ उछालकर आदिल के पाऊं में फसा दिया और फसाकर खींच दिया। अभी वो ऐमी के वार से बचकर 2 फिट पीछे आया था और पुरा ध्यान सामने ही था। जैसे ही पाऊं में रस्सी फसी उसने अपना संतुलन खोया और इतना वक़्त काफी था आरव और ऐमी के लिए की अगुवाई कर रहे मुखिया को टारगेट कर ले।

आरव अपने ओर से दो लोगों का तेज वार अपने कंधे पर झलेकर थोड़ा आगे जगह बनाया। वहीं ऐमी तेजी के साथ अपने दोनो पाऊं फिसलाकर 180⁰ की लाइन बनाती नीचे बैठी और 2 लोग जो उसकी ओर अपना रॉड उसके सर पर चला चुके ये उसका वार खाली करती, दोनो के नीचे पाऊं के ज्वाइंट पर ऐसा प्रहार की, दोनो वहीं अपना पाऊं पकड़ कर नीचे बैठ गए।

ऐमी और आरव के टारगेट, लड़खड़ाता हुआ वह आदिल था जिसे पहले तो 1 रॉड आरव का लगा, जो कि उसके कानपट्टी पर था और जैसे ही वो नीचे गिरने लगा ऐमी ने अपना एक रॉड उसके जबड़ों पर चिपकाकर, रोल करती हुई पाऊं को हवा में ले गई और बॉडी शॉट देते उसके मूर्छित शरीर पर प्रहार करती खुद से दूर कर दी।

दृश्य और अश्क इनके लड़ाई का तरीका देखकर दातों तले उंगलियां दावा ली। 3 लोग कुल खड़े बचे थे, ऐमी और आरव अपने पोजिशन पर खड़े होकर, उनको देखकर मानो ऐसे हंस रहे थे जैसे वो उन्हें आगे बढ़कर सामना करने का निमंत्रण दे रहे हो।

तभी अश्क खड़ी हुई और अपने कपड़ों से छोटे-छोटे बॉम्ब निकलती वहां के फ्लोर पर पटकती हुई धुएं करती तेजी से आगे बढ़ने लगी…. अपस्यु अबतक अपने प्यारे से कॉकटेल का 5 जाम खींच चुका था। अपस्यु के इशारा मिलते ही दोनो आकर उसकी जगह बैठ गए और अपस्यु खड़ा होकर बीच में आया।

धुएं कि आड़ में उनके 3 ट्रेंड जो खड़े थे, वो हमला की मंशा से आगे बढ़े, जिसे दिशा वहां का कंप्यूटर एक्सपर्ट अरुब बता रहा था। उनलोगों ने सोचा ये छोटा से ट्रिक और धुएं कि आड़ में अपस्यु को मार सकते है।

लेकिन ये अपस्यु था, जिसके सुनने और हवा को परखने की क्षमता इतनी अद्भुत थी कि उनसे अबतक ये रू-बरू नहीं हुए थे। वो लोग बेफिक्र होकर आगे बढ़े और बस धुएं के अंदर उनकी चींख ही गूंजकर रह गई। इधर पीछे से वह अश्क भी वहां पहुंच चुकी थी और जैसे ही धुएं छांटा नजारा ही कुछ और था।

अश्क को अपस्यु ने पीछे से जकड़ रखा था और बड़ी तेजी के साथ जैसे ही अपस्यु ने उसका मास्क उतारा, तभी वहां का धुआं छंट चुका था। दृश्य को आभाष हो चला था कि उन लोगों ने अपने दुश्मन को थोड़ा कम आकां, और जिसे इस वक़्त अपस्यु ने जकड़ रखा था वो थी दृश्य की जान से ज्यादा प्यारी पत्नी।

जबतक दृश्य यह साबित करता की वो इन सबका मुखिया क्यों है, उससे पहले ही अपस्यु अश्क का गर्दन घूमाकर, उसके होंठ से होंठ लगाकर एक छोटा सा चुम्बन लिया और झटक कर उसे साइड कर दिया। साइड करने के तुरंत बाद वो ऐमी और आरव को देखा और नज़रों के छोटे से इशारे से बहुत कुछ समझा चुका था।

जैसे ही अपस्यु अपनी नजर की भाषा समझाकर आगे मुड़ा, ठीक उसी वक़्त ऐमी और आरव के मुंह खुले रह गए। गुस्से में पागल दृश्य ने इतनी तेजी के साथ अपना कांधा अपस्यु के शरीर से ऐसे टकराया, की अपस्यु 6 फिट दूर जाकर गिरा।

अपस्यु जब खड़ा हो रहा था तब वो खांश रहा था और मुंह से उसके खून भी निकल रहा था। ऐमी अपने लैपटॉप से टक्कर का तुरंत आकलन की और जो स्क्रीन पर था वो चौंकाने वाले तथ्य थे। ऐमी और आरव तुरंत हरकत में आते हुए बैग पर लपके और दोनो अपस्यु के इशारे को समझकर बस उसी पर काम कर रहे थे।

इधर गुस्से में दृश्य जैसे हल्क बाना हुआ था। अपस्यु ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ था कि हवा में गति को महसूस करते वो तेजी के साथ साइड हुआ। ऐसा लगा जैसे कोई पागल सांढ सिंघ मारने पर उतारू है। अपस्यु पुरा डिफेंस मोड पर आ चुका था। उसने 50 रॉड चला दिए होंगे, लेकिन दृश्य के शरीर पर तो जैसे कुछ असर ही नहीं हुआ हो।

गुस्से में पगलाया दृश्य, अपस्यु को दोनो हाथों से हवा में उठा लिया और फुटबॉल की भांति उछाल कर फेंक दिया। अपस्यु हवा में फ्लिप करते नीचे आकर खड़ा हुआ। एक बार फिर पगलाया दृश्य, अपस्यु के ओर बड़ी तेजी के साथ बढ़ा और एक हाथ से उसका गर्दन पकड़ कर हवा में 5 फिट उठा दिया। उसके आंखों में जैसे कोई सैतान नजर आ रहा था।

वहीं अपस्यु मौत की इस पकड़ में जब आया तब वो मुस्कुराते हुए उसके पकड़ को महसूस कर रहा था। ऐमी ने जैसे ही इधर से सिग्नल दिया अपस्यु थोड़ा और मुस्कुराया और चौंकाने की वहीं पुरानी प्रक्रिया शुरू हो गई। अपस्यु सामने वाले के शरीर पर मार झेलने की अभूतपूर्व क्षमता को महसूस कार ही चुका था इसलिए वो पाऊं से कनपट्टी पर हमला करने के बदले बड़ी सफाई से दृश्य की छोटी उंगली को तोड़ डाला।

दृश्य अचानक ही अपना हाथ झटका और अपस्यु तुरंत उसकी पकड़ से निकलकर खांसते हुए वहीं बैठ गया। दृश्य के ठीक चार कदम आगे अपस्यु बैठकर खुद को सामान्य करने में लगा था। पगलाया दृश्य फिर से पागलों कि तरह अपस्यु को मारने कि कोशिश करने लगा, लेकिन वो चाहकर भी अपने कदम हिला नहीं पा रहा था। वो अपने हाथ आगे बढ़ाने की कोशिश करने लगा, लेकिन कुछ कर नहीं पाया। चीखना और चिल्लाने की कोशिश करने लगा किन्तु कोई आवाज़ निकल नहीं रही थी।

दृश्य एक एक्सपेरिमेंटल बच्चा था, जिसकी क्षमता का ज्ञान ऐमी, अपस्यु और आरव को उसी दौरान हो चुका था, जिस दौरान दृश्य के धोखेबाज दोस्त के पीछे ऐमी को लगाया गया था। दृश्य तो किसी प्रोफेशनल को यहां सबक सिखाने के हिसाब से आया था।

किन्तु अपस्यु को जब यह इल्म हुआ कि किसी प्रयोग से किसी इंसान की क्षमता सामान्य इंसान की तुलना में 200 गुना बढ़ाई जा सकती है, तो फिर यह भी संभव था, जब वो अपने दुश्मनों से भिड़ने निकले, तो अपस्यु को 200 नहीं बल्कि 10000 गुना ज्यादा क्षमता वाले किसी काल से ना भिड़ना पर जाए। बस इसी सोच के साथ लगभग 1 साल की कठिन परिश्रम करके, इन्होंने माइक्रो सब्सटेंस का इजाद किया जिसके परिणाम काफी कमाल के थे। इसी माइक्रो सब्सटेंस की मदद से ऐमी और आरव ने मिलकर दृश्य को अपनी जगह पर ही लॉक कर दिया।

ऐमी और आरव ने जैसे ही दृश्य को फंसाया, दोनो उछलने लगे, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर की मेहमान नहीं थी। खुशी से उछलकर जब आरव और ऐमी ने उस बड़े से हॉल के दूसरी ओर का नजारा देखा, दोनो एक साथ बोल परे… "उम्मीद से परे, ये खतरनाक है।"… हुआ कुछ यूं कि जैसे ही अपस्यु ने अश्क को होंठ लगाया, वो भी उतनी ही पागल हो गई जितना दृश्य था, साथ में उसके कंप्यूटर एक्सपर्ट का भी पूरा दिमागी संतुलन बिगड़ चुका था।

अश्क और आरुब अपने लैपटॉप पर बैठकर कमांड पर कमांड देने लगे और देखते ही देखते वहां पर कई सारी ब्लास्टिंग तितली डिवाइस और साथ में बुलेट उगलता एक ड्रोन उस जगह पहुंच चुका था।… "अबे भाग उस हल्क के पीछे सभी वरना इसकी पगलाई बीवी और मुंहबोला भाई मिलकर, हमे नरकवासी बाना देंगे।"…

तुरंत ही तीनों आकर दृश्य के पीछे छिप गए। उन्हें पीछे छिपते देख अश्क ज़ोर से चिल्लाती हुई कहने लगी….. "भागकर लव के पीछे कहां छिप गए चूहे, दम है तो सामने आओ।"

आरव:- अरे भाभी आप तो कुछ ज्यादा ही नाराज हो गई, कहां आप भी एक किस्स के बदले हमारी जान लेने पर तुली हो। वैसे भी नीचे फर्श पर आपकी पूरी टीम बिछी हुई है, इन्हे हॉस्पिटल में एडमिट तो करवा दो, कहीं कोई टपक ना जाए।

आरव की बात सुनकर अरुब को भी होश आया कि उसके साथी घायल पड़े है, तुरंत ही उसने सबको एक बड़ी सी वैन में लोड करवाकर हॉस्पिटल भेजने का इंतजाम करवाने लगा और इधर तबतक अश्क, गुस्से में बौखलाए, आरव को जवाब देने लगी…. "खबरदार जो मुझसे कोई रिश्ता जोड़ा तो, अभी बाहर निकल चूहे।'

आरव:- रिश्ता तो हमारा बहुत पुराना है, भले आप मानो की ना मानो। फिलहाल इतना ही कहूंगा, यदि आपको मेरे भाई का किस्स अच्छा नहीं लगा तो अपने पति को कह दो वो मेरे भाई की होने वाली पत्नी को किस्स कर ले। चुम्मा का जवाब चुम्मा से दो ना, कहे मारने पर तुली हो।

आरव और अश्क के बीच बातों का द्वंद चल रहा था इसी बीच जेके का संदेश अपस्यु के पास पहुंचा। संदेश में साफ लिखा था….. "नेशनल सिक्योरिटी वालों को इस जगह पर भारी हथियार होने के संकेत मिल रहे है। पूरी फोर्स तुरंत ही पहुंचने वाली है।"..

अपस्यु ने ऐमी को इशारा किया कि तुरंत ही खेल को विराम लगाए। ऐमी हालात को समझती हुई, दृश्य के कंप्यूटर एक्सपर्ट को एक छोटा संदेश भेजकर तुरंत ही दृश्य को उस माइक्रो सब्सटेंस से आज़ाद की। जैसे ही दृश्य कैद से आजाद हुआ पागलों कि तरह उन्हें मारने के लिए अपना हाथ बढ़ाया ही था…. "लव नहीं, बस बहुत हुआ। इन्हे अपने साथ लेकर चलो।"

दृश्य, अश्क की बात सुनकर उसकी ओर देखने लगा। अश्क ना में अपना सर हिलती हुई उस कुछ ना करने का इशारा करने लगी और इन सबको साथ लेकर चलने के लिए अपने हाथ जोड़ ली। हालांकि अपस्यु का कोई इरादा नहीं था इन लोगों के साथ जाने का, लेकिन फिर भी समय की किल्लत और गायब होने की जल्दी में, इन्हे भी दृश्य के साथ उसके हैलीकॉप्टर में बैठना परा।

आलम यह था कि वो तीनो एक ओर बैठे थे और अपस्यु अपने लोगों के साथ ठीक उनके सामने बैठा था। दृश्य अब भी खुन्नस खाए…. "क्यूटी मुझे रोक क्यों ली। इनका सिना चीरकर मै दिल निकालने वाला था।"

अरूब अपना लैपटॉप दृश्य के ओर घूमते हुए सामने के स्क्रीन का नजारा दिखा दिया, जहां लिखा हुआ था…. "द डेविल गैंग।".. जैसे ही दृश्य के आंखों के सामने यह नजर आया, सवालिया नज़रों से वो तीनो के ओर देखने लगा।

दृश्य की ऐसी उठती नजर लाजमी थी, क्योंकि "द डेविल गैंग" एक ऐसा मददगार साथी था इनके सफर का, जो बिना सामने आए अरूब को कंप्यूटर भाषा की उन गहरायों तक पहुंचाया जहां से उसे कुछ भी करने का विश्वास पैदा हुआ। एक ऐसा साथी जिसे अरुब ने जब भी याद किया मदद करके ही गई थी।

इन्हीं की मदद से अरूब ने कई सारे कठिन फायरवॉल को भेदना सीखा था, यहां तक कि सिंडिकेट की नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी को भी बड़े आसानी से ऑपरेट करना सीखा था। हालाकि सिंडिकेट के उसी टेक्नोलॉजी को ऐमी ने चुरा भी लिया था, जिस बात का इल्म इन्हे अब तक नहीं है।

अपस्यु, दृश्य के नजर में उठते सवाल का जवाब देते हुए कहने लगा…. "जिसके लक्ष्य बड़े हो उन्हे मदद मिलती रहती है। हम नहीं भी होते तो भी आप अपने जंग में सफल होते ही। हम तो आपके बड़े से मकसद की सफलता के एक बहुत ही छोटे जरिया मात्र थे।"..

दृश्य:- तुम्हे शुरू से पता था कि हम कौन है और यहां क्यों आए है?

अपस्यु:- शुरवात से तो नहीं लेकिन दिल्ली में पहुंचकर जो आपने ट्रैफिक सीसीटीवी को हैक किया, उससे मुझे समझ में आ गया था कि आरव को किसने किडनैप किया है। रही बात "क्यों आने कि", तो मैं उम्मीद कर रहा था अपनी मुलाकात 2012 में ही हो जानी चाहिए थी, आप 2 साल देरी से आए।

दृश्य:- फिर भी तुमने मुझे मेरे बच्चे को सौंपने के बदले लड़ाई चुना, ऐसा क्यों?

अपस्यु:- वो इसलिए क्योंकि उस वक़्त मैंने सही ही कहा था, ना तो मै कोई अनाथालय चलता हूं और ना ही उन बच्चों का अभिभावक इतना कमजोर है। आप सही रास्ता चुने या गलत, ना तो मै उन बच्चो को छोड़ सकता हूं जो आपके बदले कि राह में यतीम हो गए और ना ही वैभव को, जिसकी मां अपने लोगों के अत्याचार से दम तो तोड़ दी, लेकिन अपने बच्चे को उसने कभी किसी गलत हाथ में नहीं सौंपा।

अपस्यु की बात सुनकर कुछ पल दृश्य ख़ामोश रहा फिर जिज्ञासावश पूछने लगा…. "क्या जो वीरदोयी के बच्चे तुम्हारे पास है वो अनाथ है, और क्या तुम उनकी क्षमता को जानते हो?"
 
Update:- 116

अपस्यु:- डॉक्टर भार्गव, जिसने अपने प्रयोग से उनके पिता में सामान्य मनुष्य से 20 गुना ज्यादा कि क्षमता निहित किया और डॉक्टर सांतनु ने आप में आम मनुष्य की तुलना में 200 गुना ज्यादा क्षमता दिया था। मेरे बच्चे उन्हीं क्षमता के साथ पैदा हुए, लेकिन वो कोई हथियार नहीं जिसे कोई भी अपने मकसद के लिए इस्तमाल करे। सभी आम मनुष्य होंगे जो आम जीवन बिताएंगे। जिनमे बदले की भावना ना हो अपितु बौद्धिक विकास से न्याय करने की क्षमता हो।

अश्क:- ओय ये बताओ कि मेरे हॉर्स (hourse) के हॉर्स पॉवर को तुम लोगों ने कैसे सिज कर लिया।

ऐमी:- जब हमने देखा प्रयोग से किसी इंसान के अंदर 200 गुना क्षमता बढ़ाई जा सकती है, उसी वक़्त हमने ठान लिया था कि इन क्षमता वालों को रोकने के उपाय भी होने चाहिए। इसलिए हमने अपनी प्रोग्रामिंग 10000 गुना क्षमता वाले मनुष्य को ध्यान में रखकर किया, और नतीजा आपके सामने है।

दृश्य, ऐमी का हाथ थामते…. "सवालों के घेरे में एक अरमान कहीं दब कर रह गए थे।"..

ऐमी,अपनी आखें बड़ी करती… "सर कहीं आप इस छछूंदर की बात को सीरियसली लेकर मुझे किस्स तो नहीं करने की सोच रहे।"..

जैसी ही यह बात अश्क के कानो तक गई…. "मिस्टर दृश्य प्रताप सिंह ये मै क्या सुन रही हूं। भूलना मत की मै यही हूं, और साथ में यह भी भूलना मत क्या हुआ था रचना मैडम और वर्षा के केस में।"..

दृश्य:- अरे मेरी बुलेट हर वक़्त फायर होने के लिए क्यों तैयार रहती हो, जिस तरह से इसने मदद की हमारी, जिस तरह से ये लड़ती है और इसका नाम भी ऐमी है।

अश्क:- हां दृश्य इसका नाम भी ऐमी है, शायद हम ही इंसाफ नहीं कर पाए अपनी ऐमिं के साथ, जिसे सब कुछ मिलना चाहिए था वह हमारे लिए सब कुछ त्याग गई।

दृश्य, अश्क को खुद में समेटते हुए…. "रोकर याद ना करो ऐमी को वरना उसे भी रोना आ जाएगा। और देखो जब वो इस जहां से गई थी हमारे लिए अपने जैसे ऐमी को मदद के लिए पीछे छोड़ गई थी।'..

ऐमी, अपस्यु और आरव को सवालिया नज़रों से ऐसी देखी मानो वो समझने कि कोशिश कर रही हो। अारूब ऐमी के आश्चर्य को विराम देते हुए ऐमी की पूरी कहानी बता दिया।

एक दूसरे से बातों के दौरान सभी राजस्थान पहुंच चुके थे। दृश्य सबको प्रताप महल में लेकर चला आया। कंचन और वीर प्रताप को जैसे ही पता चला की दृश्य और अश्क आए है, वो दोनो भागकर अपने बेटे और बहू से मिलने पहुंचे। दरवाजे पर ही 10 मिनट रोककर पहले तो गीले-शिकवे दूर होते रहे, फिर हर कोई प्रताप महल के नीचे दरबार में बैठक लगाने पहुंचे।

कंचन की नजर दृश्य के साथ आए मेहमानों पर गई और वो दृश्य से पूछने लगी ये सब कौन है। अपस्यु और ऐमी कंचन के पाऊं छूते हुए, एक छोटा सा परिचय दिया और जाकर बैठ गए, किन्तु आरव ने जैसे ही कंचन के पाऊं छुए, उसके आशु छलक आए।

खड़ा होकर आरव अपने छलकते आशु के साथ कंचन को देखने लगा और अचानक ही उसके गले लगकर, कंचन के गलो को चूमते हुए आकर अपस्यु और ऐमी के पास बैठ गया। उस माहौल में अभी-अभी क्या हुआ किसी को भी समझ में नहीं आया। कंचन चिंखकर दृश्य को अपने पास बुलाई… इस से पहले की आरव की हरकत पर वो कुछ बोल पता, कंचन गुस्से से लाल आखें उसे दिखाती हुई एक थप्पड़ जर दी।

वह थप्पड़ इतनी तेज थी कि उस दरबार में थप्पड़ की गूंज आखिर में काम कर रहे लोगों ने भी सुनी… दृश्य जब ठीक से देखा तो कंचन के आंखों में भी आशु थे और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आरव की हरकत में इतना बुरा मानने जैसा क्या था।

"कंचन क्या हुआ, इतने दिन बाद दृश्य यहां आया और तुम उसे ऐसे थप्पड़ मार रही, वो भी एक छोटे से लड़के के प्यार दिखाने कि वजह से।" … कंचन के पति वीर प्रताप कंधों से पकड़कर कंचन से कहने लगे। लेकिन ऐसा लग रहा था कंचन ने उसकी बात सुनी ही नहीं। वह एक बार फिर दृश्य को उतनी ही तेजी से थप्पड़ मारती हुई, अपने कदम धीरे-धीरे आरव और अपस्यु के ओर बढ़ा दी।

कंचन जैसे-जैसे अपने कदम बढ़ा रही थी, उसके आशुओं का सैलाब उतना ही बढ़ता जा रहा था। वह जैस ही अपस्यु और आरव के पास पहुंची, टूटकर वहीं उनके बीच बैठ गई। बेसुध सी सामने देखती हुई पूछने लगी… "अपनी मां को साथ नहीं लाया।"

कंचन की आवाज़ धीमी थी, किसी को समझ में नहीं आया वो क्या बोली, लेकिन कंचन कि आवाज़ अपस्यु और आरव के दिल तक जरूर पहुंची थी। दोनो भाई, कंचन के उस बहन प्रेम को महसूस कर रहे थे, जिसके बच्चों कि आखें बता गई की वो किसके बच्चे है। अपस्यु अपने एक और बिछड़े परिवार से मिलने की खुशी में मुस्कुरा रहा था, वहीं आरव अपनी मासी के लिए तो पहले से आशु बहा चुका था, इसलिए वो सीधा कंचन की गोद में लेट गया और हाथ बढ़कर कंचन के आशु पोछने लगा।..

दृश्य, अश्क और वीर प्रताप तीनों ही दुविधा में बस कंचन को देखे जा रहे थे…. "ऐसे सब घुर क्या रहे हो। एक मेरा बेटा है जिसे 2 साल पहले कहीं थी अपनी मासी का पता लगाओ कहां है इस वक़्त, लेकिन ये दुनियाभर के लोगों का पता अपने उस कंप्यूटर से लगा लेता है.. एक मेरी बहन और उसके परिवार का पता नहीं लगा पाया। एक ये दोनो है, इन्हे अपनी मासी के भी बारे में पता है, और अपने भाई के बारे में भी। क्यों रे सोनू, मोनू"..

अपस्यु:- मासी आप हमसे मिल चुकी है पहले क्या?

कंचन:- हां बेटा बिल्कुल। तुम दोनो जब पैदा लिए थे तब तुम दोनो को सबसे पहले मैंने ही अपने गोद में उठाया था। वो तो हमारे सुहाने दौड़ थे रे पागल। मै और वीर उस वक़्त यूएसए में थे और सुनंदा, चन्द्रभान के साथ यूरोप में थी। तू जब पैदा हुआ था तब मैने ही तो नाम दिया सोनू और मोनू। सुनंदा की वही एक आखरी अच्छी याद आखों में है, उसके बाद हम दृश्य का पांचवा जन्मदिन मनाने भारत आए हुए थे। तब से लेकर आज तक फिर दोबारा कभी मुलाकात नहीं हुई। जल्दी बता ना कहां है मेरी बहन।

अपस्यु:- मां और पापा की एक हादसे मै मौत हो गई।

पहले बिछड़े परिवार के मिलने की खुशी में रोई कंचन, अब अपने बहन के गम में टूटकर रोनी लगी। फिर कभी ना मिल पाने का दर्द आखों से छलक आया… अपस्यु मुसकुराते हुए कंचन को शांत करवाते हुए कहने लगा…. "ऐसे रोकर आप मेरी मां को याद करोगी मासी, तो आज रात वो मेरे कमरे में भूत बनकर आएंगी और मुझे दौरा-दौरा कर मारेगी। इसलिए जो चला गया उसे हंसकर याद कीजिए।"…

कंचन आरव के सर पर हाथ फेरती, दोनो को बारी-बारी देखती हुई कहने लगी…. "तेरी आखें बिल्कुल सुनंदा जैसी है।"..

आरव:- ये तो हमे भी पता है मासी, रोज ही सुलेखा आंटी मुझसे ये कहती है।

कंचन:- सुलेखा, हीहीहीही.. उसका नाम सुनकर ही हंसी आ जाती है। तुम जानते हो जैसे रामायण में भगवान श्री राम थे और उनका भक्त हनुमान, ठीक वैसे ही सुलेखा के लिए सुनंदा थी। वो तो पूरी भक्त थी।

ऐमी, जिज्ञासावश….. "दोनो के बीच की कहानी क्या थी?"..

कंचन:- अरे मैंने अपनी बच्ची पर तो ध्यान भी नहीं दिया। तेरी छोटी..

अपस्यु, बीच में ही बात काटते हुए…. "मासी ये है ऐमी, आपकी होने वाली बहू।"..

कंचन:- हाएं ! ये कब हुआ.. मै तो समझी की ये तेरी बहन है।

कंचन की बात सुनकर सभी लोग हंसने लगे। तभी कंचन ऐमी के कपड़ों को देखती हुई कहने लगी…. "आज क्या घर से लड़ाई करने निकली थी जो ऐसे चुस्त कपड़े पहन कर चली आयी, अरे यहां तो सबने एक जैसे कपड़े पहन रखे है। दृश्य तू तो अपना बच्चा किसी से लेने गया था ना… फिर ये लोग लड़ाई के कपड़ों में। बहू (अश्क) आगे आकर सारा मामला मुझे अभी के अभी समझाओ।"..

अश्क सामने आकर खड़ी हो गई और सारा मामला समझती क्या, वो सीधा वीडियो ही चलाकर दिखा दी… जैसे-जैसे वीडियो आगे बढ़ने लगी, कंचन तीनों के चेहरे घूरने लगी। और अंत आते-आते दृश्य और अश्क को देखकर हंसती हुई कहने लगी….. "मतलब तुझसे 4-5 छोटे तेरे भाइयों ने धूल चटा दी। और मेरी ये होने वाली बहू ऐमी तो काफी खतरनाक है। शर्म करो तुमलोग 12 लोग गए थे और 3 लोग का मुकाबला नहीं कर पाए।"..

दृश्य:- मां बहुत चालाक है तीनों। याद है जीजू क्या कहते है हमेशा, बल पर छल भारी पड़ता है। आज तक सभी गद्दार पीछे से छल करते थे, जिसका तोड़ हम बड़ी आसानी से निकाल लेते थे, ये तो सामने सिना तानकर हमसे छल कर गए और हमे पता तक नहीं चला।

सभी लोग कई अरसे बाद मिल रहे थे। ऐमी को अश्क के साथ भेज दिया गया और दोनो बहू को पूरे सज संवर के आने के आदेश मिले। वहीं अपस्यु ने आरव को गोवा वापस छोड़ने की बात कही और वहीं से कंचन को पता चला कि सुलेखा की बेटी लावणी और आरव का विवाह भी तय हो चुका है।

सुलखा एक बार और चर्चा में थी। कंचन सुलेखा और सुनंदा के वो किस्से भी कह गई, जो आज तक अपस्यु और आरव के लिए राज बने हुए थे। गांव के किसी आईयाश के कुकर्म का नतीजा था, जो सुलेखा पैदा हुई थी। उस मासूम के पैदा होने के खबर ने ही पूरे गांव को चौंका दिया था।

उसकी मां को तो सबने मार दिया और सुलेखा को एक ब्राह्मण परिवार ने अपने पास पालने के लिए रख लिया। सुरवती दिनों से ही जब वो काम करने लायक हुई तबसे उसे काम करवाया जाने लगा था। चूंकि उस ब्राह्मण परिवार को उन्हीं के पूर्वजों ने बसाया था इसलिए सुनंदा का उस घर में आना जाना लगा रहता था। यहीं से सुनंदा और सुलेखा की दोस्ती की कहानी शुरू हुई थी।

दोनो साथ खेले, इस लालच में सुनंदा, सुलेखा के आधे काम कर दिया करती थी और वहीं से दोनो खेलने निकल जाय करती थी। बातों के दौरान सुनंदा की हिम्मत की वो दास्तां भी पता चली जिसे वो चुपचाप सुलेखा के उज़्ज़वल भविष्य के लिए कर गई और किसी को कानो कान खबर तक नहीं हुई थी।

एक तो सुलेखा के मां का सच गांव में किसी से छिपा नहीं था, ऊपर से सुलेखा का सुंदर होना, उसके लिए काल बनता जा रहा था। बढ़ती उम्र के साथ कईयों के नजर में भी बदलाव आने शुरू हो चुके थे और कई छुब्द मानसिकता के रोगी सुलेखा को नोचने की फिराक में थे। अलहर सा बचपन बीतने के बाद सुलेखा जवानी के दहलीज पर कदम रखी थी और आए दिन उसके साथ कोई ना कोई जबरदस्ती छेड़-छाड़ कर ही देता।

सुनंदा के साथ हंसने और बोलने वाली सुलेखा, अपने बातों से सबको हंसने पर विवश करने वाली सुलेखा, अब बिल्कुल शांत-शांत रहना शुरू कर दी थी। बाहर तो किसी तरह बचकर वो चली भी आती लेकिन 24 घंटे घर के अंदर तकती नज़रों से कौन बचाए।

सुनंदा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। उसकी सबसे प्यारी साथी को वो घुटते देख रही थी। उस वक़्त सुनंदा ने अपनी बहन की घुटन और पिरा को भी बड़े नजदीक से देखा था, और फिर उसने ठान लिया कि बस बहुत हुआ अत्याचार। क्या कलेजा था उसका। सुनंदा को पता था कि एक बार फटे कपड़े गांव वालों के नजर में आ गए, फिर कपड़ों के साथ इज्जत भी फट जाती है। यह बात सुनंदा को भाली भांति पता थी, लेकिन केवल सुलेखा को बचाने के लिए वो एक दिन उस घर से रोती हुई, फटे कपड़ों में निकली, और मामला था जबरदस्ती का।

पंचायत ने उस परिवार को तो भगा दिया और चूंकि सुलेखा ने एक इन पूरे मामलों में सुनंदा की जान बचाई इसलिए पंचायत ने सुलेखा की शादी की जिम्मेदारी हमारे परिवार को सौंप दी, लेकिन उस दिन के बाद से सुनंदा लोगों के तानों के बोझ के अंदर दबती चली गई। कहते-कहते कंचन ने एक बार सुनंदा के जज्बे को भी नमन कि, क्योंकि वो लोगों के तानों को कभी ध्यान ही नहीं दी और बस इस बात से खुश हुई जा रही थी कि सुलेखा को हमारे परिवार ने एक बेटी की तरह विदा किया, एक अच्छे परिवार में।
 
Update:- 117

पंचायत ने उस परिवार को तो भगा दिया और चूंकि सुलेखा ने एक इन पूरे मामलों में सुनंदा की जान बचाई इसलिए पंचायत ने सुलेखा की शादी की जिम्मेदारी हमारे परिवार को सौंप दी, लेकिन उस दिन के बाद से सुनंदा लोगों के तानों के बोझ के अंदर दबती चली गई। कहते-कहते कंचन ने एक बार सुनंदा के जज्बे को भी नमन कि, क्योंकि वो लोगों के तानों को कभी ध्यान ही नहीं दी और बस इस बात से खुश हुई जा रही थी कि सुलेखा को हमारे परिवार ने एक बेटी की तरह विदा किया, एक अच्छे परिवार में।

वहीं जिस जगह सुनंदा कि शादी हो चुकी थी और गौना बाकी था, वो परिवार शादी तोड़कर चले गए। पंचायत भी इसमें कुछ नहीं कर सकती थी, क्योंकि हमारे परिवार ने पहले भी एक कि हुई शादी तोड़ने पर कुछ नहीं कहा था। परिवार के लिए तो मानो सुनंदा एक बोझ की तरह ही थी, अब बस या तो जहर दे दो या कहीं जाकर किसी से भी विवाह कर आओ। उसी दौरान जयपुर का एक घराना आगे आया और उसने सुनंदा से शादी का प्रस्ताव रखा था। वहीं से फिर चन्द्रभान और सुनंदा की शादी हुई।

अपस्यु जब इतिहास सुन रहा था फिर उसने इतिहास को और खंगालने की कोशिश की और कंचन पर जोड़ डालते हुए पूछने लगा… "जब समाज इतना पिछड़ा था, फिर जयपुर का रघुवंशी घराना कैसे मिला।"..

कंचन अपस्यु के सवाल को बिल्कुल समझ चुकी थी कि अपस्यु अतीत की उन बातों से क्या जानने की कोशिश कर रहा है। सुनंदा कुछ पल ख़ामोश रहने के बाद अपस्यु को उसके दादा पक्ष के भी इतिहास से अवगत कराने लगी।

जयपुर का रघुवंशी परिवार एक ऐसा परिवार था जहां कोई भी अपनी लड़की या लड़का नहीं देना चाहता था। समाज से एक निकाला गया परिवार था। बेहद ही बदनाम और अलग किया हुआ, जिसके पास ना तो कोई संपतिं थी और ना ही कोई इज्जत।

अपस्यु को पूरी कहानी समझ में आ चुकी थी। इतिहास के पन्ने जब कंचन ने पलट दिए तब बहुत सी तस्वीरें साफ हो चुकी थी। कंचन से मिलने के बाद अपस्यु अपनी मां को और करीब से जान पाया था, और जब करीब से जाना, अपस्यु की मुस्कान और भी गहरी हो गई।

बातों के दौरान फिर पहले तो दृश्य को एक बार और चपेट परी की आखिर क्यों वो अपने भाई को नहीं ढूंढ पाया, फिर अपस्यु को भी एक चपेट परी की आखिर क्यों वो सबकुछ जानते हुए भी छिपाए रखा और कबसे वो यह सच्चाई जान रहा है?

पहले दृश्य ने बताना शुरू किया कि जब वो सुनंदा मासी की तलाश कर रहा था तो जहां वो रहते थे वहां की फाइल में वो लापता घोषित थे और पासपोर्ट के हिसाब से वो 2007 में भारत आए हुए थे। लेकिन यहां कितना भी तलाश किया तो केवल फाइल में उनका यहां आना तो दर्ज है, लेकिन उसके बाद एक रहस्य बनकर रह गया, इसलिए वो ढूंढने में पूरी तरह से असमर्थ रहा।

वहीं अपस्यु अपनी बात का जिक्र में कहने लगा वो दृश्य को 2008 से जनता है। उस वक़्त सभी की नज़रों में उसके मौसा और मौसी एक हादसे का शिकार हो गए थे और उसका मौसेरा भाई यूएसए में उसके कातिलों तक पहुंचने की जद्दजहद कर रहा था। कहानी वहीं धोक से शुरू हुई, जहां अपस्यु ने बताया कि वो निराश होकर इस जगह से लौट रहा था, लेकिन पीछे के भुल भुलैया में गुत्थी सुलझा रहे कुछ लड़के और लड़कियों के साथ धोका हो गया।

कैसे फिर अपस्यु ने उस धोखेबाज का पीछा किया। चूंकि वो एक हैकर था, इसलिए ऐमी को उसके पीछे लगाना काफी आसान था, और जब एक बार ऐमी उसके पीछे लगी फिर तो पूरी कहानी लाइव देखने जैसा था। वहीं से फिर सारी बातों का पता चलता रहा।

जब बात अाई की इतने लंबे समय तक अपने भाई का गुमनाम तरीके से साथ देने के बाद, जब चारो ओर खुशियां वापस लौटी थी, तब सामने क्यों नहीं आए? अपस्यु इस सवाल के जवाब में अपनी सोच साफ कहते हुए कहने लगा, किसी ने दृश्य को अनाथ बना दिया और उससे बदला लेने के लिए दृश्य ने कितनों को अनाथ कर दिया, बस उसे इस बात से नफ़रत थी। उसे नफरत थी कि जब दृश्य खुशियां समेट रहा था, अपने बिछड़े परिवार से मिल रहा था, तब उस खुशी में वो ये भुल गया कि उसकी बदले कि कहानी ने कई मासूम को अपने परिवार से जुदा कर दिया।

किए की साजा देना आवश्यक है किन्तु कईयों के लाश पर चढ़कर मुख्य आरोपी को यदि आप सजा देते हो, फिर आप खुद भी सजा के भागीदार हो, फिर यह कहके पल्ला नहीं झाड़ सकते कि जो लोग मरे वो किसी खरनाक लोगों के साथ काम करते थे। काम करना किसी की मजबूरी हो सकती है तो किसी का शौक। इसका यह अर्थ नहीं कि साथ काम करने वाले हर किसी को मौत कि साजा दी जाए। और दृश्य के प्रति ये नफरत पूरी उम्र रहेगी।

बातों के दौरान अपस्यु ने अपने चिल्ड्रंस केयर में लाए गए पहले उन हर 60 बच्चों की कहानी बता दिया, कौन-कौन किं हालातों में उसे मिले थे। बातों के दौरान उसने वैभव और उसके मां की भी कहानी बता गया, जो दृश्य और अपने वीरदोयी समाज को एक जैसा मानते थे और उस बच्चे को दृश्य को ना सौंप कर उसे सौंप गई। क्योंकि अपस्यु ने लाशों के बीच से उन बच्चो को उठाया था, जिसे देखने ना तो वो लोग सामने आए, जिसके लिए उनके माता-पिता मारे गए और ना ही वो सामने आए जो इनको अनाथ बनाकर आगे बढ़ गए।

अपस्यु के दिल का विकार जब फूटा तो वो न्याय और बदले की पूर्ण परिभाषा को समझा चुका था। गुस्से में गूंजती उसकी आवाज़ सुनकर जैसे पुरा प्रताप महल शर्मसार हो रहा हो। कंचन, वीर प्रताप और दृश्य तीनों ही एक ऐसी सच्चाई से अवगत हो रहे थे जिसपर उनका ध्यान कभी नहीं गया। उनको तो अब तक ऐसा लग रहा था जैसे उसके बेटे ने समाज से दो ऐसे नासूर जड़ों को उखाड़ दिया जिसे बड़े-बड़े देश की एजेंसी नहीं उखाड़ सकी।

लेकिन सब सच से रू-बरू हुए तब एहसास हुआ की ये कितनी बड़ी गलती कर आए थे। खुद भी तो कई जिंदगियां पीछे छोड़ आए थे, जो बड़ा होकर ना जाने क्या बनता। तीनों को ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बड़े खामोशी से उनके की गई गलती को सही करके चुपचाप आगे बढ़ गया।..

दृश्य से ये जिल्लत बर्दाश्त नहीं हुई… वो घुटते हुए पूछने लगा… "गुस्से के उस दौर में मैंने क्या कर दिया वो मुझे अभी समझ में आ रहा है। लेकिन मै भी क्या करूं जब सब लोग ही उसके परिवार के दुश्मन बने थे और वो सब के सब जान से मारने के लिए आगे बढ़ रहे थे।"..

दृश्य की सवाल पर अपस्यु मुस्कुराने लगा और मुकुरेते हुए कहने लगा… "आज आप भी मुझे मारने ही आए थे। मेरे भाई को आपने उठवाया था, और आपकी पत्नी ने पुरा गोला बारूद सीधा हमपर तान दिया था। आप को क्या लगा जब मै सिंडिकेट के उस नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी को चुरा सकता हूं, तो क्या आपके मारक खिलौनों का जवाब नहीं था मेरा पास, या आपको मारने की वजह नहीं थी। मेरे 60 बच्चे, जिसके सर से उसका साया उठ गया, उसकी वजह आप हो। मकसद आपको जलील नहीं करना है, बस इतना समझना है कि गुस्सा, बदला और ताकत के नशे में इतने अंधे ना हो जाए कि कभी जब एहसास हो कितनी बड़ी गलती हो गई तो लौटकर आने का मौका भी ना हो।"

"जय हो, जय हो, बाबा अपस्यु की जय हो, आज ही मिले हो और उगल दिए पुरा ज़हर। चलो अब भैय्या से माफी मांगो और उन्हें भी दिल से माफ करो। उनकी सारी गलती तुमने सुधार दी ना। और हां बेबी मुझे यकीन है कि तुम्हारे संगत में उन बच्चों को, अपने नालायक अभिभावक से अच्छी ज़िन्दगी मिलेगी। अब जब सबके बाप तुम बन गए और वो सब एक अच्छी ज़िन्दगी देख रहे है, फिर कैसा गीला।"… ऐमी किसी राजकुमारी कि तरह तैयार होती ऊपर से नीचे उतर हुई अपस्यु के सारी बातों पर विराम लगती हुई कहने लगी।

अपस्यु की नजर जब उसपर पड़ी, फिर क्यों वो कहीं और मुरे, बस एक टक उसे ही देखता रहा। दोनो को नजरें जैसे ठहर सी गई थी। तभी दृश्य उसे एक हाथ मारते…. " सर इधर भी थोड़ा। इतना गिल्ट फील करवा दिए अब क्या माफ भी नहीं करेगा।"..

अपस्यु मुसकुराते हुए…. "केवल एक शर्त पर।"

दृश्य:- हर शर्त मंज़ूर है, अब बताओ भी।

अपस्यु:- ना तो आप मेरे चिल्ड्रंस केयर में एक पैसा डोनेट करोगे और वैभव भी हमारे पास ही रहेगा।

दृश्य:- क्या यार इतना गिल्ट फील करवा गए और ऊपर से उनके लिए कुछ करने की सोच रहा था, तो तू मना कर रहा है। मां तुम ही कुछ कहो क्योंकि इसके सामने तो मै खुद को काफी छोटा महसूस कार रहा हूं।

ऐमी:- भईया केवल नंदनी रघुवंशी इसके ऊपर है, बाकी हम सब के लिए ये बाप है इतना ही समझ लो। बेबी अब बस भी करो ये कैसी शर्त है, जबतक कुछ सुधारने का मौका नहीं दिए, फिर इतना जमीर जागने का क्या फायदा?

अपस्यु:- नहीं थोड़ा घुटने दो ऐमी। जबतक पछतावा नहीं होगा तबतक ये परिपक्व नहीं होंगे। हां 3 साल आप कुछ ना कर पाने का पछतावा लिए घूमो, फिर मै कुछ सोचता हूं।

ऐमी:- आज चौथा दिन चढ़ रहा है बेबी और 6 दिन बचे है सोच लो।

अपस्यु, ऐमी की बात सुनकर हंसते हुए कहने लगा…. "अच्छा ठीक है भईया, आप एक पैसा भी डोनेट नहीं करोगे बल्कि उन बच्चो के ऊपर अपना वक़्त दोगे।.… और हां कोई लड़ाई की ट्रेनिंग नहीं और ना ही लड़ाई झगड़े जैसा कोई बात होगा। बस खेलना कूदना, उनके मासूम से सवालों का जवाब देना और वक़्त बिताना। इतना ही होगा"..

दृश्य:- थैंक्स ऐमी। वरना ये तो मुझसे ना जाने कितना खुन्नस खाए हुए था। वैसे एक बात का फैसला मै अभी से कर चुका हूं, मै अब जो भी करूंगा वो अपस्यु के विचार से ही करूंगा।

अपस्यु:- लगता है किसी मिशन पर निकल रहे हो, इसलिए ऐसी बातें कर रहे हो।

दृश्य:- हां सही समझे। फिलहाल मै एक काम को समेत रहा हूं। उम्मीद है जब तुम वीरदोयी को जानते हो, तो तुम्हे ये भी पता होगा कि लड़ाई में बचे हुए वीरदोयी कहां होंगे। आज मै तुमसे वैभव को लेने के बाद, एक धरती के बोझ से मिलने जा रहा था, जिसे इस दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं। अब समस्या ये है कि उस धरती के बोझ के पास बचे हुए वीरदोयी की फौज है। पहले तो मैंने सोचा सबको मारते हुए मकसद को पूरा कर लू, लेकिन अब इस ख्याल से भी डर लगने लगा है।

अपस्यु:- होना भी चाहिए ऐसे ख्याल, क्योंकि हर ज़िन्दगी की कीमत है। बाद में बात करते है इसपर, फिलहाल वो देखो भाभी कितनी सेक्सी बनकर आयी है, पहले उनपर ध्यान दो।

दृश्य, एक हाथ अपस्यु के सर पर मारते…. "पहले मेरी क्यूटी को चूमा, अब उसपर नजर गड़ाए है। अपनी वाली को देख वो भी कितनी प्यारी और मासूम लग रही है। कोई देखकर कह नहीं सकता कि ये इतनी खतरनाक फाइटर है।"..

अपस्यु:- क्या भईया आपको ठीक से तारीफ भी नहीं करनी आती। ऐमी क्या दिलकश लग रही है। एक काम करो आप हमे वापस दिल्ली छोड़ दो।

दृश्य:- मां ये दिल्ली वापस जाना चाहता है , तुम ही बात कर लो अब।

ऐमी जैसे ही दिल्ली जाने की बात सुनी, तुरंत सीढ़ियों से नीची आती हुई कहने लगी…. "मै अपने ससुराल आयी हूं, आज तो कहीं नहीं जाने वाली।"… ऐमी, अपस्यु को देखकर हंसती हुई कहने लगी।

कंचन:- कोई कहीं नहीं जा रहा है। बाकी इसके पापा से बात करके उन्हें सूचना देनी है क्या वो बताओ।

ऐमी:- नहीं नहीं मासी, मैंने पहले ही उनको संदेश भेज दिया है, आप उसकी चिंता ना करे।

कंचन:- तेरे पापा कैसे है, उन्हें जारा भी चिंता नहीं क्या, तू बाहर है।

अपस्यु, कंचन के कांधे से टिकते हुए अपना हाथ ऐमी के खुले कमर पर चलाते हुए कहने लगा…. "मासी इसके पापा के 2 वारिस है, एक आरव और दूसरा वैभव, वो इसे अपनी बेटी नहीं मानते।".. अपस्यु हाथ चलाते हुए कुछ जोर कि ही चिकोटी ऐमी के कमर पर काट लिया, अचानक ही चूड़ियों की खंखनाहट तेज हो गई। पायल की आवाज छम-छम करने लगी और ऐमी खिल-खिलाती हुई झटककर कंचन से अलग होकर खड़ी हो गई।
 
Update:- 118

कंचन:- अब तुम्हे क्या हुआ, ऐसे भागी क्यों?..

ऐमी:- मासी मेरी कमर लाल हो गई और आप पूछ रही है क्या हुआ। आपका बेटा छेड़खानी कर रहा है।

कंचन, अपस्यु को घूरती हुई…. "एक बात बता, इतनी बड़ी-बड़ी बातें करने वाला इतना बेशर्म कैसे हो सकता है। मै यहां खड़ी हूं और जारा भी लिहाज नहीं।"..

दृश्य और अश्क, दोनो (अपस्यु और ऐमी) को देख रहे थे और इन दोनों को देखते हुए, उन्हें अपने भी पुराने दिन याद आ गए। दोनो एक दूसरे के करीब, और करीब होते चले जा रहे थे। कंचन का इधर अभी पुरा फोकस अपस्यु पर ही था, तभी अपस्यु चिल्लाते हुए कहने लगा…. "मासी वो देखो दोनो को, और आप मुझे डांट रही थी।"…

छोटी छोटी नोक झोंक के बीच हंसी मज़ाक का काफी लंबा दौड़ चलता रहा। इसी बीच आधे घंटे की निजी मुलाकात दृश्य और अपस्यु के बीच भी हुई, जहां एक बार फिर दोनो के रास्ते मिल रहे थे। अपस्यु पूरी बात समझकर एक छोटी सी योजना पर दोनो साथ मिलकर काम करने के लिए राजी हो गए।

एक सुखद मुलाकात थी ये अपस्यु के लिए। जब वो वापस लौटा, तब उसकी मां का पूरा इतिहास उसके सामने था। उसकी खुशी उसके चेहरे से झलक रही थी जिसे ऐमी भी महसूस करते जा रही थी।

कुछ दिन अपस्यु और ऐमी के लिए काफी रोमांस और रोमांच से भड़ा परा था, जिसमें वो दोनो खुलकर जीने के एक अलग ही एहसास में डूबे हुए थे। वहीं श्रेया दोनो को देखकर अजीब ही कस-म-कस में दिख रही थी। श्रेया और उसकी पूरी टीम कितने भी नतीजों पर क्यों ना पहुंचे, लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे थे कि अपस्यु को उसकी सच्चाई पता है या नहीं है।

ऊपर से श्रेया पर उसके पापा का प्रेशर बढ़ता जा रहा था, जो जल्द से जल्द अपने दूसरे टारगेट को एलिमिनेट होते देखना चाहता था, जिसके लिए श्रेया और टीम को खुलकर काम करने लिए 50 करोड़ की राशि दी गई थी।

इसी बीच अपस्यु के आमंत्रण पर मेघा भी भारत पहुंच चुकी थी, जो कि विक्रम की मेहमाननवाजी स्वीकार करती हुई राठौड़ मेंशन में अपने भाड़े के सिपाही जेम्स हॉप्स और उसकी टीम के साथ ठहरी हुई थी। उसके दिमाग में भी बहुत गहरी साजिश कहीं दूर से पक रही थी, जिसका नतीजा सोचकर वो अपने पूरी टीम के साथ पहुंची थी।

हर कोई अपने दिमाग पर बोझ दिए बस हर दिन अपने योजना को सुदृढ़ करने में लगे हुए थे। 10 दिनों की छुट्टी में अब मात्र 3 दिन बच गए थे। ऐमी, अपस्यु को रोमांस के चले एक लंबे दौर से जगाती हुई ,अब काम पर ध्यान लगाने की सलाह देने लगी, और अपस्यु के लिए अब वक़्त आ चुका था हर किसी के योजना को समझने का।

12, अगस्त 2014 की सुबह…

अपस्यु और ऐमी दोनो ही सुबह-सुबह मेघा के कॉल पर उससे मिलने राठौड़ मेंशन निकल चुके थे। एक बहुत लंबा इंतजार और फैसले के घड़ी के इतने करीब, ऐमी और आरव जब वीडियो कॉल पर थे तब उनकी एक्साइटमेंट देखने बनती थी। ..

दोनो राठौड़ मेंशन के दरवाजे पर थे, और गार्ड ने उनको बाहर खड़ा कर अंदर कॉल लगा रहे थे। तभी उस वक़्त कुसुम पूजा करके मंदिर से लौट रही थी और जब उसने दरवाजे पर अपस्यु को खड़ा देखी, उत्साह से अपने गाड़ी से बाहर निकली….. "सर आप यहां खड़े क्यों है।"..

अपस्यु:- क्या करे बड़े लोगों की हवेली है, कुछ देर तो इंतजार करना ही पड़ता है।

"यहां आप से बड़ा कौन है।".. कुसुम जैसे अपस्यु के अभिवादन में अपने शब्द कहीं हो और खुशी से चिल्लाती हुई कहने लगी, जल्दी से दरवाजा खोला जाए। गार्ड ने तुरंत दरवाजा खोला और कुसुम अपस्यु का हाथ पकड़कर वहां के हर चीज का इतिहास बताती हुई उसे लेकर आगे बढ़ने लगी।

पीछे से ऐमी कार को पार्क करती, वो भी उनके साथ हो गई। ऐमी पर नजर पड़ते ही कुसुम मुस्कुराती हुई कहने लगी…. "क्या सर जब से इन्हे परपोज किया है, हर जगह साथ लेकर ही जाते हो।"..

ऐमी:- कुसुम, तुम सर के बदले अपस्यु को भईया कह सकती हो और मुझे भाभी। चलेगा ना।

कुसुम, अपना प्यारा सा चेहरा बनाती….. "बहुत दिन के बाद मै दिल से खुश हुई हूं। मै बयान नहीं कर सकती की मै कितनी खुश हूं भईया। आप को यहां देखना मतलब, ऐसा लग रहा है किसी भक्त के घर भगवान स्वयं चलकर आए है।"

अपस्यु उसकी बातें सुनकर हंसते हुए कहने लगा…. "पहले ठीक से इंसान तो बन जाऊं, और तुम मुझे भगवान बाना रही हो।"

तीनों बात करते हुये, राठौड़ मेंशन पहुंचे। हॉल में पहुंचते ही कुसुम चिल्लाती हुई सबको इकठा करते, सबको अपस्यु से मिलवाने लगी। हर किसी को लगा कि अपस्यु कुसुम के साथ आया है, लेकिन तभी मेघा बीच में आती हुई दोबारा सब को अपस्यु का परिचय कराते हुए कहने लगी कि यह वही लड़का है जो रुकी फैक्टरी का काम आगे बढाने का काम अपने जिम्मे लिया है।

कुछ देर अपस्यु से मिलकर सब चले गए। कुसुम के आग्रह पर ऐमी उसके साथ जाकर उसका घर देखने लगी। वहीं अपस्यु डियनीग टेबल पर अपना मोबाइल रखकर मेघा और लोकेश से प्रोजेक्ट क्लीयरेंस संबंधित बातें करने लगा।

इसी बीच नंदनी का कॉल अपस्यु के मोबाइल पर आया और उसी के साथ नंदनी की तस्वीर भी स्क्रीन पर दिखने लगी। रिंग बजते ही लोकेश और मेघा का ध्यान भी फोन पर गया। फोन पर फ़्लैश होती फैमिली फोटो पर जैसे ही लोकेश की नजर गई वो दोबारा तस्वीर देखने पर विवश हो गया।

अपस्यु फोन काटकर फोन को साइलेंट पर डाला और प्रोजेक्ट के अन्य परेशानी के बारे में समझाने लगा। इस बीच नंदनी के 2-3 कॉल आए। हर बार लोकेश का ध्यान अपस्यु के फोन पर ही रहता। अपस्यु अपनी बात खत्म करते हुए नंदनी का कॉल पिक किया और कुछ देर के बाद वापस हॉल में आया।

लोकेश:- प्रोजेक्ट पर अच्छा काम किया है तुमने। वैसे तुम्हारे पापा क्या करते है अपस्यु।

अपस्यु:- वो एक हादसे में मर गए थे।

लोकेश:- ओह माफ करना। वैसे तुम्हारे पापा का क्या नाम है?

अपस्यु:- जी स्वर्गीय भूषण रहुवशी।

लोकेश:- और तुम्हारी मां का नाम?

अपस्यु:- नंदनी रघुवंशी।

"अपस्यु एक काम करना तुम अपना बायोडेटा इसे दे देना, फिलहाल तुमसे कुछ सीरियस डिस्कस करना है, उम्मीद है तुम्हारे पास वक़्त हो।"… मेघा अपस्यु को साइड ले जाकर पूछने लगी।

अपस्यु:- हाहाहाहा… आज शाम से लेकर पूरी रात फ्री ही हूं, बस तुम कहीं बिज़ी नहीं हो जाना।

मेघा:- बिल्कुल नहीं डार्लिंग, शाम को मिलती हु, तैयार रहना…..

मेघा अपनी बात कहती हुई निकल गई। अपस्यु एक बार फिर लोकेश के पास पहुंचा…. "सॉरी सर वो मेघा मैम ने बीच में टोक दिया। आप कुछ पूछ रहे थे।"..

लोकेश:- नहीं, मै बस ऐसे ही पूछ रहा था, अच्छा लगा तुमसे मिलकर।

लोकेश आगे कोई भी बात ना करते हुए, तेजी के साथ वहां से निकलकर विक्रम के कमरे में पहुंच गया और इधर ऐमी भी घूमकर लौट आई थी। दोनो वापस निकले राठौड़ मेंशन से। कार थोड़ी दूर आगे बढ़ी होगी, ऐमी अपस्यु के जांघ पर अपना हाथ फेरती उसे पैंट कि जीप तक बढ़ाने लगी… "अरे, अरे अरे.. ये क्या जर रही हो स्वीटी"..

"फीलिंग हॉर्नी बेबी, इसलिए तुम्हे रिझा रही हूं।"… ऐमी बड़ी अदा से कहने लगी।

"आज मज़ा तो मुझे भी आ रहा है, और एक अंदर से उमंग तो है, लेकिन कार में"… अपस्यु बोलते बोलते रुका…

"बेबी जल्दी से मेरी ओर देखो ना।" … जैसे ही अपस्यु मुड़ा, ऐमी उसके होठों को चूमती…. "जल्दी से कार मुक्ता अपार्टमेंट लगाओ।".. इतना कहती ऐमी नीचे झुकी और अपस्यु के पैंट के बटन को खोलती उसके जीप को नीचे की। अपस्यु अपने कमर को हल्का ऊपर किया और ऐमी पैंट को सरकाती हुई उसके पाऊं में ले आयी।

जल्द ही उसके पूरे बाल अपस्यु के जांघ पर फैले हुए थे और अपस्यु का चेहरा ऊपर अजीब ही मादक एहसाह में डूबा हुआ था। थोड़े ही देर में वो मुक्ता अपार्टमेंट में थे। दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए, तेजी से कदम बढ़ाते फ्लैट के ओर चल रहे थे।

जैसे ही दोनो फ्लैट के अंदर हुए, अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और ऐमी उसे खींचकर अपने ऊपर लेती, होंठ से होंठ लगाकर चूसने लगी। अपस्यु भी होंठ को चूमते हुए उसके जीन्स के बटन खोलने लगा। ऐमी, अपस्यु को चूमती हुई अपने हाथ नीचे ले गई और जीन्स खोलने में अपस्यु की मदद करती, तुरंत जीन्स को पैंटी सहित निकलकर बाहर फेंक दी।

अपस्यु भी ऐमी के जीभ को अपने जीभ से लगाए उसे लगातार चूमते हुए अपने हाथ को नीचे ले जाकर फोरप्ले करने लगा। चुम्बन के बीच में ही ऐमी ठंडी आहें लेती, अपने पंजे को अपस्यु के पीठ से जकड़कर, किस्स को तोड़ती हुई बदहवासी में कहने लगाई…. "बेबी ये दीवाल मज़ा नहीं से रहा, बिस्तर पर चलो।"..

अपस्यु अपने होंठ ऐमी के गले से लगाकर उसके चूमते हुए हटा और अपने बदन से कपड़े निकालते बिस्तर तक पहुंचा, ऐमी भी पीछे-पीछे वैसे ही पहुंचीं। जैसे ही बिस्तर के पास दोनो पहुंचे, ऐमी ने धक्का देकर अपस्यु को बिस्तर पर लिटाया और उछलकर उसके कमर पर बैठती, पूर्ण मज़ा के ओर बढ़ने लगी।

ऐमी लिंग को योनि में डालकर, धीरे-धीरे अपने कमर हिलती, अपस्यु का हांथ पकड़ कर अपने स्तन पर डाली और धीरे-धीरे मज़े लेने लगी। अपस्यु भी कुछ देर स्लो मोशन धक्के का मज़ा लेते हुए बैठ गया और ऐमी के होंठ को अपने होठ से लगाते हुए, पूर्ण जोश की रफ्तार शुरू कर चुका था। जोश ऐसा की दीवाना बना दे।

ऐमी का नरम और गोरा बदन, हर धक्के की थाप पर बड़ी ही मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था। उत्साह से ऐमी, अपस्यु के पूरे होंठ को चूस रही थी और अपने दोनो पंजे अपस्यु के पीठ में पूरे घुसे हुए थे। एक कामुक पल पुरा मस्ती में बिताने के बाद, दोनो निढाल बिस्तर पर गिर गए और ऐमी अपस्यु के सीने में घुसकर खामोशी से बस उसकी धड़कने सुनने लगी…

"बेबी, बहुत लंबा साल इंतजार किया है। अब बस इसे अंजाम तक पहुंचाओ।"… ऐमी, अपस्यु में कुछ और सिमटती हुई कहने लगी।

"तुम जैसा चाहोगी वहीं होगा ऐमी। हम एक साथ बिजली गिराने वाले हैं पहले इन्हे झटकों का मज़ा तो लेने दो।"…

"हम्मम ! उस सार्जेंट जेम्स हॉप्स का क्या करोगे।"…

"जेके और पल्लवी से थोड़े देर बाद मुलाकात होने वाली है, वहीं देखते है इनका बारे में क्या निष्कर्ष निकला है।"…

"अपस्यु, बेईमान तुम्हे पता चल गया ना श्रेया के पीछे कौन है।"…

"ज्यादा बोझ क्यों लेती हो, श्रेया और उसकी टीम तो बेचारे बेकार में पीस गए हमारे बीच। टीम तो उनकी अच्छी है, लेकिन नवसिखियों की टीम है, जो ट्रेनिंग के बाद सीधा हमारे पीछे आ गए। लेकिन तुम सही कही थी, उसके साथ रहा तो हमारा भविष्य योजना काफी मजबूत होगा। जिस हिसाब से उसकी बेचैनी मै आजकल देख रहा हूं, उस हिसाब से तो लगता है कि आज से कल तक में वो अपने दूसरे टारगेट से भी भिड़ा देगी।"…

"हम्मम ! यहां हर किसी की प्लैनिंग चल रही है, और मै बेकार में आज एक्साइटेड हो गई। ये वक़्त फोकस बनाए रहने का था। बेबी, इतने दिन से रोमांस कर रहे है फिर भी आज मैंने तुम्हे फसा दिया। मुझे ये स्टेप नहीं लेना चाहिए था।"…

"पागल कहीं की। लगता है तुम्हे मज़ा नहीं आया क्या, यदि ना है तो बोल दो, मैं दूसरे राउंड के लिए तैयार हूं।"

"मुझे ना लगता है सुबह सुबह तुम्हारी वाली बेशर्मी ही घुस गई थी जो मै इतनी हॉर्नी हो गई। चलिए उठिए सर, चलकर जरा माहौल का जायजा लिया जाए।"..

इधर राठौड़ मेंशन में नंदनी की तस्वीर देखने के बाद तो जैसे लोकेश खुद में अब जीता हुआ महसूस कर रहा था। हर खींचती श्वांस में वो अपने अंदर आने वाले ताकत को महसूस करने लगा था। उसके कई सालों की योजना अब सफल होने वाली थी। लोकेश तुरंत ही अपने पिता विक्रम और मेघा के साथ प्राइवेट प्लेन में उदयपुर स्थित अपने छोटे से लंका में पहुंचा।

एक पुरा इलाका जो लोकेश के नियंत्रण में था। जहां हर तरह के अंतरराष्ट्रीय हथियार से लेकर, दुनियाभर कि नई तकनीक दिन रात लोकेश के इशारे पर काम कर रही थीं। अपनी जगह पर खड़ा होकर लोकेश अट्टहास भरी हंसते हुए विक्रम से कहने लगा….

"पापा इतने दिनों से आपको इसी दिन के लिए रोक रखा था। यें पूरी तैयारी बस जैसे आज का ही इंतजार कर रही थी। बस 2 दिन और दे दो, और मुझे जारा अपनी बुआ के बारे में छानबीन करने दो। जैसे ही यह सुनिश्चित हुआ की वही नंदनी रघुवंशी है, सबसे पहले बिजली उस राजीव मिश्रा और उसके समस्त परिवार पर गिरेगी, जो हमसे मिलकर काम करने की बजाय हमारे पार्टनर के झांसे में आकर, मेरे ही खिलाफ कार्यवाही कर रहा था। राजीव मिश्रा के साथ ही जाने वाले की लिस्ट में है होम मिनिस्टर जिसने बहुत दर्द दिए है और फिर एक बार खत्म हो जाएगा नंदनी के पुरा वंश और इस बार भी वो केवल अकेली जिंदा बचेगी।"
 
Doston ... Aaj Update Diya Hai... Kal subah se kewal reply dunga... Isliye jin jin ke comment ke reply nahi aaye hain... Wo kripya painic na ho... Kal ek hi update par kaam hoga .. lekin reply pura karke .. thread update kar dun ..
 
Haan aap ke suggestion mujhe ache lage .. isliye baithkar main 4 din tak pura KNTB padhta raha .. kamal ki baat dekhiye ... Timeline wahan ki mast chal rahi thi .. bole to 2005 se kahani ki surwat hui aur 7 sal me mamla khatm hua tha... yani 2012... :D..

Fir dono hi kahani rajasthan ki ... Upar se dono hi action pack ... Sath me kahani ke dauran mujhe bahut kuch link karne ka mauka mil gaya...

Waise bhi kahani me maasi ka charecter introduce hona hi tha... Kyonki ek jo Sulekha aur Sunanda ke bich ki kadi jo rah gayi thi usse dikhana tha...

Soooo ... Aap ke hi suggestions ka natija hai ki future planning kar liya hun .. Avenger bane ki na bane lekin tayari to kar hi liya hun :D
 
Surprise dono ko hi mile .. apasyu ko ek nausikhiye se aur Shreya ko apne hi plan par aage badhne ke liye... Isliye hamesa pure aakalan ke baad hi thos natije par pahunchna chaiye...

:thanks: for your compliments.... Keep reading and keep commenting :yo: :yay: :yo:
 
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