Romance Sex kahani - Beintehaan Mohobbat - SexBaba
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Romance Sex kahani - Beintehaan Mohobbat

hotaks

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Dec 5, 2013
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मेरी 2 स्टोरीज कम्पलीट होचुकी है. मैं यह थर्ड स्टोरी स्टार्ट कर रह हु. उम्मीद है इसको भी वैसा hi प्यार मिलेगा जैसा मेरी पिछली 2 स्टोरीज को मिला है.



मुझे रोमांस प्रीफिक्स में पे ज्यादा कुछ नहीं पता. इस प्रीफिक्स में पहली बार लिख रहा हु. आगार कोई गर्बर होजाये तोह माफ़ देना.
 
कहते है इश्क़ प्यार मोहब्बत खुदा की इबादत है. इसकी ताक़त के आगे ऊपर वाला भी सर झुकता है. जिसको प्यार होजाये वह बेहद खुशनसीब होता है. किसीको प्यार में सुकून मिलता है तोह किसी को उम्र भर का दुःख. कोई कहता है प्यार एक तरह से हवस की निशानी है. अपनी हवस मिटने के लिए कुछ लोग प्यार का नाम देते है. तोह कुछ लोग प्यार को एक ख़ूबसूरत एहसास समझते है. जीने का जरिया मानते है. किसी रिश्ते में अगर प्यार ना हो तोह वह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चलता और अगर किसी रिश्ते में सिर्फ और सिर्फ प्यार हो तोह वह रिश्ता मरने के बाद भी कायम रहता है.



यह कहानी भी एक ऐसी hi एक जोड़ी की है जिनको एकदूसरे से बेइन्तेहाँ मोहब्बत हुई. और उन्होंने उसको hi अपने जीने का जरिया बना लिया. एक ने ऐसी मोहब्बत की के उसने अपनी मोहब्बत की ख़ुशी के लिए अपने प्यार को दबाना चाहा पर दबा ना पायी. और एक ने इस कदर मोहब्बत की के सिर्फ सपने में किसी को देख कर hi उसको अपना सब कुछ मान लिया.
 
अपडेट 1

रात का टाइम था. मुंबई के हॉस्पिटल में 1 आदमी टेंशन में बहार चाकर काट रहा था. उसके साथ एक और आदमी भी था. बहार का मौसम भी अच्छा नहीं था. बारिश का मौसम था और आज तोह तूफ़ान आया हुआ था. चारो तरफ जोर जोर से हवाएं चल रही थी. जो माहौल को और खौफनाक बना रही थी. तभी जो दूसरा आदमी था वह बोलता है.



आदमी: भैया शांत होजाइये. कुछ नहीं होगा. महादेव सब अच्छा hi करेंगे.



दूसरा आदमी: पर मुझे बहोत टेंशन होरहा है. महक को अंदर गए हुए 1 घंटे से ज्यादा होने को आया पर अभी तक कुछ पता नहीं चल रहा है.



आदमी: इशांत भैया शांत होजाइये. भाभी को कुछ नहीं होगा. अंदर शालिनी है न. वह भाभी को और बच्चे को कुछ नहीं होने देगी.



तभी ओट से शालिनी बहार आती है.



शालिनी: इशांत भैया विजय



जैसे hi इशांत और विजय शालिनी की आवाज़ सुनते है वह दौड़ के उसके पास आते है.



इशांत: शालिनी. मेरी महक कैसी है. वह ठीक तोह है ना.



शालिनी: भैया आप मुँह मीठा करवाए.



इशांत: पूरी मिठाई की दूकान खरीद दूंगा पहले बोलो महक कैसी है.



विजय: इशांत भैया शांत होजाइये. शालिनी बताओ न कैसी है भाभी.



शालिनी: विजय मुबारक हो आप फूफा बन गए है. भैया आपको बीटा हुआ है. और मैं बुआ बन गयी.



इशांत और विजय ख़ुशी से झूम उठते है.



इशांत: सच्चीई. शालिनी तू सच बोल रही है. मैं मैं पापा बन गया. विजय सुना तूने मैं मैं पापा बन गया.



विजय: है है इशांत भैया सूना मैंने. मैं भी तोह फूफा बन गया.



इशांत: तुझे भी कॉंग्रट्स तू भी तोह बुआ बन गयी. अच्छा महक कैसी है.



शालिनी: भाभी और बच्चा बिलकुल ठीक है. बस थोड़ी देर में हमलोग मिलेंगे.



शालिनी: भैया माँ और पिताजी को बताएँगे. और भाभी के घर वालो को.



इशांत: बताना तोह होगा hi. पर वह हमसे बात कहा करते है. बस अमन संजय किरण और श्रुति hi तोह हमसे बात करते है वह भी चुप चुप के.



शालिनी: आप पिताजी को फ़ोन तोह लगाइये. शायद पोते की बात सुनके आपको माफ़ करदे.



इशांत: देखते है. पहले महक से मिल लू.



फिर थोड़ी देर बाद इशांत अंदर जाता है जहा महक बीएड में लेती हुई थी और पलने में बच्चा सो रहा था.



इशांत महक के पास जाता है और उसके सर में किश करता है.



इशांत बच्चे को hi देख रहा था.



महक: ऐसे क्या देख रहे है इशांत.



इशांत: हमारा बीटा कितना प्यार है ना.



महक: मेरे बेटे को नज़र ना लगाओ.



इशांत: ारी मेरा भी बीटा है और मेरी नज़र मेरे बेटे को कैसे लगेगी. थैंक यू सो मच महक.



महक: थैंक्स तो यू इशांत. आपकी वजह से मुझे माँ बनने का सुख मिला. थैंक यू सो मच.



इशांत: ी लव यू महक. ी लव यू सो मच. यह बोल वापस उसके माथे पे किश कर देता है.



महक: ी लव यू तू इशांत.



जैसे hi महक यह बोलती है बच्चा रोने लगता है.



महक: लगता है हमारे बेटे को पसंद नहीं आया मेरा आपको ी लव यू बोलना.



इशांत: पैदा हुए कुछ hi घंटे हुए है और मेरे माल पे डाका. एकबार बड़ा होजा फिर देखता हु तुझे. यह बोल वह हसने लगता है.



महक भी उसको फीड करते हुए हसने लगती है.



तभी इशांत अपना फ़ोन निकलता है और एक कॉल लगता है. थोड़ी देर बाद दूसरी तरफ से कॉल रिसीव होता है तोह सामने से आवाज़ आती है.



सामने से: तुझे बोलै था यहाँ कभी भी फ़ोन मत करना. हमारा तुझसे कोई रिश्ता नहीं है. फिर क्यों फ़ोन किया है.



इशांत: पिताजी.



इशांत ने अपने पिता राजवीर अग्रवाल को कॉल लगाया था.



राजवीर: मेरी सिर्फ एक बेटी है कोई बीटा नहीं है.



इशांत: आपको कुछ सुनना है पिताजी.



राजवीर: तेरी वजह से पहले hi हुम्हे बहोत कुछ सुनने को मिल चूका है अब क्या सुनना बाकी रहगया है.



इशांत कुछ नहीं बोलता वह आगे बढ़ के बच्चे के पास आता है जिससे महक फीड करवा रही थी. इशांत इशारे से उसको कुछ बोलता है तोह महक ने बच्चे की फीडिंग रुख दी जिससे बच्चा रोने लगा. इशांत फ़ोन को बच्चे के पास लाता है जिससे बच्चे की रोने की आवाज़ राजवीर के कानो में आती है.



राजवीर: यह बच्चा किसका रो रहा है. किसका बच्चा है.



इशांत: यह मेरा बीटा और आपका पोता है पिताजी. अभी कुछ वक़्त पहले hi इसका जनम हुआ है.



राजवीर जब यह सुनता है तोह उसकी आँखों से आंसू निकल जाते है. एक इंसान अपने बेटे से चाहे जितना भी नाराज़ हो पर वह अपने पोते या पोती से कभी नाराज़ नहीं रह सकता. कहते है एक इंसान अपने पोते या पोती में अपनी छवि को देखता है.



राजवीर: िशांतत्तत्त क्या तू सच बोल रहा है. वह वह मेरा पोता है. कही तू मुझसे माफ़ी मांगने के लिए झूट तोह नहीं बोल रहा है ना.



इशांत: नहीं पिताजी. अभी 1 घंटे पहले hi महक ने सिटी हॉस्पिटल में जनम दिया है. और सबसे पहले आपको बताया है.



राजवीर: तू वही रुखह. मैं और तेरी माँ अभी आते है.



यह बोल राजवीर ने कॉल कट करदिया.



राजवीर: राजश्री कहा हो तुममम जल्दी ाऊओ.



राजश्री: क्या हुआ.



राजवीर: इशांत का फ़ोन आया था हुम्हे अभी हॉस्पिटल जाना है.



राजश्री यह सुनते hi रोने लगती है.



राजश्री: रट हुए. क्या हुआ मेरे इशांत को वह ठिक्क तोह ही ना. वह हॉस्पिटल में क्या कर रहा है. कब तक उससे नाराज़ रहेंगे. माफ़ करदिजिये उससे. आपकी वजह से मैं भी मेरे बेटे से नहीं मिल सकती. आपका तोह कुछ नहीं जाता पर मैंने उससे अपने खून से सिछा है. नहीं रहसक्ती मैं उसके बिना.



राजवीर: ारी शन्तत होजाओ. कुछ नही हुआ ही इशांत को.



राजश्री: तोह होस्पिटलल.



राजवीर: ारी हम दादा दादी बन गए है. हमारा पोता हुआ है.



राजश्री: क्याआ. आप आप सच बोल रहे है. हम सच में दादा दादी बन गए है.



राजवीर: हआ मैं सच बोलरहा हु. अभी इसीलिए hi इशांत का कॉल आया था जल्दी चलो. मैं अभी अपने पोते को यहाँ लेके आऊंगा. अग्रवाल खानदान का वारिस आगया है. राजवीर अग्रवाल का पोता.



फिर दोनों जल्दी से हॉस्पिटल निकल जाते है.
 
अपडेट 2

इधर महक ने भी अपने माँ बाप को कॉल किया था और उन्हें भी एक hi तरह से उनके नवासे की खबर सुनाई. वह लोग भी वह से निकल पढ़ते है.



थोड़ी देर में राजवीर और राजश्री हॉस्पिटल आते है.



राजवीर: राजश्री पहले तुम अंदर जाओ.



राजश्री: आप क्या अपने पोते से भी नाराज़गी दिखाएंगे.



राजवीर: मैं भला अपने पोते से कैसे नाराज़ होसकता हु. अंदर बहु पता नहीं किस हालत में होगी. इसीलिए पहले तुम जाओ.



राजश्री: जी.



राजश्री वह से सीधा महक के रूम में घुस जाती है जहा पे लेती थी इशांत उसके बगल में बैठा था और बच्चा पलने में सो रहा था.



इशांत: मायआ.



इशांत अपनी माँ को देख कर खड़ा होजाता है. महक भी अपनी सास को देख कर बैठने लगती है. .



राजश्री: लेती रहो. उठने की जरुरत नहीं है.



इशांत अपनी माँ के पास आता है तोह वह बोलती है.



राजश्री: वही खड़ा रेहठ. मैं यहाँ बस अपने पोते और बहु से मिलने आयी हु. तुझसे मेरा कोई रिश्ता नहीं है.



इशांत: ऐसा ना बोलिये माँ.



राजश्री: तोह कैसा बोलू. तूने घर चोर्ने के पहले एकबार भी अपनी माँ के बारे में नहीं सोचा. बस अपने पिता के हुकुम को माना. तूने यह नहीं सोचा तेरे बिना तेरी माँ कैसे जियेगी.



इशांत: माफ़ कार्डो माँ.



राजश्री: अभी हट मुझे मेरे पोते से मिलने दी.



फिर राजश्री बीएड के बगल में रखे पलने की तरफ बढ़ जाती है जहा बच्चा सो रहा था.



राजश्री बच्चे को देखते hi उसके आँखों में आंसू आजाते है. वह बच्चे को अपनी गॉड में उठती है और उसके सर को चूमती है.



राजश्री: बिलकुल इशांत की तरह देखने में हुआ है. बहोत बहोत बधाई हो बहु.



महक: आपको भी बधाई हो माजी.



तभी रूम में राजवीर अग्रवाल आते है. जिसको देखते hi इशांत अपनी नज़रे झुका लेता है तोह महक बगल में पढ़े अपनी ओढ़नी से अपने सर में पल्लू करलेती है.



इशांत: नज़रे झुका के hi. पीताजीइ मुझीऐ.



अभी इशांत इतना hi बोलै था के राजवीर उसकी बात को काटते हुए बोलते है.



राजवीर: राजश्री इससे केहदो. हम यहाँ बस अपने पोते को और बहु को घर लेजाने आये है. यह रहे वही जहा इतने दिन रहा था.



इशांत जाके अपने पिता के पैरर छूटा है.



राजवीर उसको उठा के अपने सीने से लगा लेता है.



राजवीर: मैंने बोलै और तू चला गया. एकबार भी नहीं सोचा तेरे बिना तेरे इस बूढ़े बाप का क्या होगा. जिससे हमेशा से हमने अपने कंधे में बैठाया है. जिससे बात किये बिना हमारा दिन ख़तम नहीं होता उसके बिना हम कैसे जियेंगे.



इशांत: आपने hi तोह कहा था पिताजी. घर चोर्ने को.



राजवीर: तू उस घर का बड़ा बीटा है. वह तेरा घर है. बाप गुस्से में बेटे को बहोत कुछ बोलता है इसका मतलब यह नहीं बीटा गुस्से में कही हुई बात को सीने से लगा ले.



इशांत: माफ़ करदिजिये पिताजी. मैं नहीं चाहता था मेरी वजह से कभी आपका सर झुके. इसीलिए मैनी.



राजवीर: तेरी वजह से हमेशा मेरा सर फक्र से अच्छा हुआ है. गलती हमारी थी. हुम्हे तुझसे पूछना चाहिए था. हुम्हे बिना पूछे वह नहीं करना चाहिए था.



इशांत: नहीं पिता जी. आपने तोह मेरा भला सोचा था.



राजश्री: अब अगर आपलोगो का होगया तोह क्या आप अपने पोते से मिलेंगी. या मैं इससे घर ले जाओ.



राजवीर वह से अपने पोते के पास आता है.



महक: पिताजी हुम्हे माफ़....



राजवीर: नही बहू. तुम्हे माफ़ी मांगने की जरुरत नहीं है. हमने तुम्हे माफ़ किया.



फिर राजवीर अपने पोते को अपने गॉड में लेता है तोह उसकी आँखे भर्र आती है.



राजवीर: मेरा पोता. राजवीर अग्रवाल का पोता. अग्रवाल खानदान का वारिस.



तभी रूम में महक के माँ बाप अंदर आते है.



अजीत: हुम्हे भी तोह हमारे नवासे से मिलने दो. हमारा भी हक़ है उसपे.



राजवीर: किसी और दिन आना. अभी मेरा पोता मेरे पास है.



रुक्मणि वह से चलके अपनी बेटी के पास आती है.



रुक्मणि: कैसी है मेरी बच्ची. तू ठीक तोह है ना.



महक: आँखों में आंसू लिए. माँ मुझे माफ़ करदिजिये माँ.



रुक्मणि: नही मेरी बच्ची. तुझे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है. मैं तोह तुझसे कभी नाराज़ हो hi नहीं सकती. तू तोह मेरी जान है.



महक अपनी माँ के गले लग जाती है और रोने लगती है. आज पुरे 1.5 साल बाद वह अपनी माँ के गले लगी थी और इतने दिन से अपने अंदर दबाया हुआ दुःख बहार निकल जाता है.



थोड़ी देर बाद वह चुप होती है. फिर अपने पिता की तरफ देखती है.



महक: पिता जी. मुझे माफ़ कार्डजिये.



अजीत: अपने बाप की बात से इतना नाराज़ होगयी के एकबार भी अपने बूढ़े बाप का हाल तक नहीं पूछा.



महक: नहीं पिता जी. मैं आपसे कैसे नाराज़ होसकती हु. बस आपसे नज़रे मिलाने की हिम्मत नहीं होरही थी. यह बोल वह फिर रोने लगती है.



अजीत: आगे बढ़ के महक को अपने सीने से लगा लेता है. मत रो मेरी बच्ची मत रो. जितना रोना था रो लिया तुणी. देख अब सब ठीक है.



फिर रुक्मणि वह से उठ के राजवीर के पास आती है.



रुक्मणि: भाईसाहब हुम्हे भी हमारे नवासे से मिलने दीजिये.



फिर रुक्मणि बच्चे को अपने गॉड में लेती है और आदमी के पास आती है.



रुक्मणि: बहोत बहोत बधाई हो बेटा. बिलकुल इशांत की तरह हुआ है. इसकी आँखे बिलकुल तेरी तरह है.



महक: आपको भी बधाई हो माँ पिताजी.



तभी रूम में शालिनी विजय और महक के भाई और भाभी आते है.



शालिनी: पिताजी.



राजवीर: तुमदोनो को सब पता था ना.



अजीत: और तुमलोगो को भी.



सब हां में गर्दन हिला देते है. और माफ़ी मांगते है. तोह वह लोग भी अपने पोते और नवासे की ख़ुशी में सबको माफ़ करदेते है.



राजवीर: शालिनी पुरे हॉस्पिटल में मिठाई बटवाओ. सबको पता चलना चाहिए राजवीर अग्रवाल के घर पोता हुआ है.



शालिनी: बिलकुल पिताजी ऐसा hi होगा. कोंग्रटुलतिओन्स भैया. यह बोल इशांत के गले लग जाती है.



यह बोल शालिनी वह से चली जाती है. इशांत भी राजवीर के गले लग जाता है.
 
इंट्रोडक्शन

राजवीर Agarwal(Dadaji)- यह इंडिया के जाने माने बिजनेसमैन इनका बिज़नेस विदेश में भी है. बहोत hi नरम दिल के इंसान है. अपने बच्चो के साथ साथ बिज़नेस को भी शामे टाइम दिया है. हीरो के सबसे ज्यादा क्लोज इंसान है.



राजश्री Agarwal(Dadiji)- यह एक हाउसवाइफ है. अपने बच्चो में सबसे ज्यादा इन्हे इशांत प्यारा है. जब इशांत ने घर छोरा तब इनकी हालत किसीने नहीं समझी थी. यह अपने दुःख को किसीके सामने नहीं लायी और अंदर hi अंदर तड़पती रहती थी.



इनके 2 बच्चे है.



इशांत Agarwal(Dad): यह राजवीर अग्रवाल का बड़ा बीटा. बिलकुल अपने पिता की तरह. अपने पिता के रिटायर होने के बाद अपनी कंपनी को संभल रहे है. अपनी पत्नी से बहोत प्यार करते है. जब यह कॉलेज में थे तब इनको एक लड़की से प्यार होगया. इसीलिए पहले इन्होने उससे दोस्ती की. धीरे धीरे ओने साइडेड लव बोथ साइडेड होगया. पर इन्होने अपने घर में नहीं बताया था. कॉलेज के बाद उस लड़की के पेरेंट्स ने उसकी शादी किसी और से फिक्स करदी और इशांत के पिता ने उसकी शादी कही और. पर जब इनको पता चला तोह दोनों ने मंदिर में शादी कर्ली.



दोनों के परिवार में बहोत कहासुनी हुई. दोनों के परिवार वाले पहले तोह इनसे रिश्ता hi टॉड दिया पर इनका बच्चा होने के बाद इनको माफ़ करदिया और अपना लिया. और जिनके साथ इनकी शादी तय हुई थी उनकी बेइज़ाती होगयी और इशांत की शादी जिस लड़की से होनी थी वह यह बर्दाश नहीं कर पायी और सुसाइड करलिया.



महक Agarwal(Mom): कॉलेज में स्कॉलर्शिप से पढाई कर रही थी. वह इनको इशांत से प्यार हुआ पर तब इनको पता नहीं था इशांत भी एक रिच फॅमिली से है. पर जब शादी की बात उठी तब इनको पता चला इशांत कौन है और क्या है कॉलेज ख़तम होने के बाद इन्होने शादी कर्ली. इनकी जिससे शादी तैय हुई थी वह और इशांत से जिसकी शादी तैय हुई थी वह दोनों भाई बेहेन थी.



शालिनी Sharma(Bua): यह एक डॉक्टर है. यह भी इशांत और महक के साथ एक hi कॉलेज में थी. अपने भाई से बहोत प्यार करती है. उनकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकती है. जब सब ने रिश्ता टॉड दिया था तब इन्होने दोनों का बहोत साथ दिया था और जिनसे यह प्यार करती थी उन्होंने भी. जब उन्दोनो को घर से निकला गया तब इनके प्रेमी ने उनको अपने घर रखा था.



विजय Sharma(Fufaji)- यह शालिनी बुआ के हस्बैंड. इन्होने लव मैरिज की है. यह भी डॉक्टर है. नेचर के बहोत hi मज़ाकिया इंसान है. इशांत और महक घर से निकले जाने के नाद इसके घर में hi थी. इनकी शादी इशांत की शादी के कुछ वक़्त बाद hi हुई थी.



अवि- शालिनी और विजय का बीटा. अपने ममी का लाडला है. इसको भी अपनी माँ और पिता की तरह डॉक्टर बनना है.



अजीत Singh(Nanaji): बहोत hi सुलझे हुए इंसान. यह भी एक बिजनेसमैन है. अपनी बेटी से हद्द से ज्यादा प्यार करते है. भाग के शादी करने के वजह से नाराज़ थे पर बाद में माफ़ करदिया.



रुक्मणि Singh(Naniji): यह भी एक सुलझी हुई औरत है. अपने परिवार से बहोत प्यार करती है. पति के वजह से बेटी से दुर्र हुई थी. इनकी जान महक में बस्ती थी.



अमन Singh(Bade मां): इनका खुद का बिज़नेस है. यह अपने दम पे कुछ करना चाहते थे इसीलिए खुद का बिज़नेस स्टार्ट किया जो अच्छे से चल रहा है. बेहेन की शादी जिससे होने वाली थी उसके खिलाफ थे पर अपने पिता के आगे कुछ ना बोल पाए.



किरण Singh(Badi ममी): यह अपने पति की बिज़नेस में हेल्प करती है. पर घर को भी संभालती है. इनका 1 बीटा है. इनकी शादी उस हंगामे के बाद हुई थी.



आरव- यह हीरो को अपने जान से ज्यादा चाहता था. अगर किसी ने उसको कुछ बोल्दिया तोह इससे बुरा कोई नहीं. हीरो जैसे इसके लिए सबकुछ है.



संजय Singh(Chote मां)- अपने पिता का बिज़नेस सँभालते है. अपने बड़े भाई के बिज़नेस में भी हेल्प करते है. यह भी इशांत और महक की शादी से बहोत खुश थे पर ऐसे भाग के जाने के वजह से थोड़े नाराज़ थे.



श्रुति Singh(Choti ममी)- यह हाउसवाइफ है. बिज़नेस में हेल्प करती है पर ज्यादा नहीं. इनको घर संभालना hi ज्यादा अच्छा लगता है. इनकी 1 बेटी है.



सोनिया- हीरो को अपना रोले मॉडल मानती है. अपने भाई आरव से ज्यादा इसको हीरो ज्यादा प्यारा है. एकदम भाई की चमची. पर इससे आरव को कभी कोई जलन नहीं हुई.
 
अपडेट 3

इन्सबके मिलने के बाद किरण और श्रुति तोह जाके सीधा बच्चे को गोदी में ले लेती है.



दोनों: कॉंग्रट्स दीदी. सच में हमारा बीटा बहोत ख़ूबसूरत है. इसकी आँखे बिलकुल आप पे गयी है और चेहरा देखो बिलकुल अपने पापा पे.



महक: तुम दोनों को भी बधाई हो.



अमन और संजय: ारी हुम्हे भी तोह हमारे बेटे से मिलने दो.



दोनों: अभी नहीं बाद में आना. अभी हमको अच्छे से प्यार कर लेने दो.



अमन और संजय: बहोत बहोत बधाई हो दीदी. सच में बहोत ख़ूबसूरत है हमारा भंजहा.



महक: तुम दोनों को भी बधाई हो.



रुक्मणि: ारी तुम दोनों बच्चे के पिता को भी तोह बच्चे से मिलने दो.



दोनों: हां हां जीजाजी लीजिये.



फिर इशांत बच्चे को गोड़ में लेता है तोह उसकी आँखों में आंसू आजाते है.



इशांत: थैंक यू सो मच महक. आज तुमने मुझे और मेरे परिवार को पूरा करदिया. थैंक यू सो मच.



महक कुछ नहीं बोलती बस स्माइल करने लगती है.



महक: शालिनी थैंक यू मेरे बच्चे को इस दुनिया में लाने के लिए.



शालिनी: भाभी कैसे बात कर रही हो. मैं एक डॉक्टर हु और उससे भी पहले आपकी ननद हु. और यह तोह मेरा भतीजा है. देखना इसको तोह आपके पास आने hi नहीं दूंगी.



रुक्मणि: बीटा शालिनी हमलोग कब तक महक को घर ले जा सकते है.



शालिनी: माजी कल भाभी को घर ले जा सकते है.



राजवीर: तोह फिर परसो नामकरण की पूजा रखवा लेते है.



अजीत: हां यह ठीक रहेगा.



राजवीर: तोह फिर हम हमारे कुलगुरु से बात करते है.



शालिनी: चलिए अब भाभी को आराम करने दीजिये. और भाभी आप बच्चे को फीड कर दीजिये. भैया अगर आप चाहे तोह यहाँ बैठ सकते है.



फिर इशांत बच्चे को महक को देके वही बैठ जाता है. और बाकिसब बहार निकल जाते है.



इधर राजवीर सीधा अपने कुलगुरु के आश्रम आता है.



राजवीर: गुरूजी मुँह मीठा कीजिये. मेरे घर पोता हुआ है.



कुलगुरु: पोते की बधाई को राजवीर.



राजवीर: कुलगुरु आपसे निवेदन है. आप hi मेरे पोते का नामकरण करे.



कुलगुरु: अवश्य पुत्र. और परसो hi नामकरण का अच्छा मुहूर्त है.



राजवीर: धन्यवाद् गुरूजी. तोह परसो हवन के साथ नामकरण की पूजा की तैयारी करवाता हु.



कुलगुरु: उचित है. हम परसो सुबह 9 बजे तक आजायेंगे.



राजवीर: जी गुरूजी. अब आज्ञा दे.



फिर राजवीर वह से घर आता है और सबको कॉल करके बोल्डट है.



अजीत ने हेल्प करने के लिए अपने बेटो और बहुओं को भेज दिया था.



अगले दिन सबलोग हॉस्पिटल जाके महक और बच्चे को घर लेके आते है.



राजश्री ने पहले उनकी आरती की फिर उनका गृहप्रवेश करवाया क्योकि महक आज पहली बार अपने ससुराल आयी थी



महक को बच्चे के साथ इशांत के रूम में भेज दिया गया. फिर सब कल की पूजा की तैयारी करने लगते है.



रात को इशांत अपने रूम में जाता है तोह वह पहले से hi शालिनी श्रुति और किरण बैठे हुए थे.



शालिनी: आइये भैया.



इशांत: एक काम करे आज आप तीनो में से कोई महक के पास रुख जाए. अगर रात को उसको कुछ प्रॉब्लम हुई तोह.



शालिनी: नहीं भैया. ऐसी कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी. भाभी बिलकुल फिट है. Don’t वोर्री.



किरण और श्रुति: चलिए आप रेस्ट कीजिये हम चलते है.



फिर सब बच्चे को किश करके अपने अपने रूम में आजाते है.



इशांत भी बच्चे को और महक को किश कर देता है.



इशांत: महक तुम ठीक होना.



महक: हां इशांत मैं बिलकुल ठीक हु. चलिए सो जाइये. कल पूजा है फिर हमारे बेटे को नाम मिलेगा. यह बोल वह भी बच्चे को किश कर देती है.



फिर यह दोनों सो जाते है. अगले दिन सब लोग सुबह जल्दी उठ जाते है. अजीत और रुक्मणि भी जल्दी hi आगये थे. सबलोग पूजा की तैयारी करने लगते है. महक ने अपने बेटे को कमरे से बहार नहीं लाया था. क्योकि पडोसी इशांत और शालिनी के दोस्त भी आये हुए थे और इतने लोगो के बीच बच्चे को बहार लाना अच्छा नहीं लगा इसीलिए वह बच्चे को लेके कमरे में hi बैठी हुई थी.



सुबह 9 बजे कुलगुरु घर में आते है. सबलोग जाके उनका आशीर्वाद लेते है. थोड़ी देर में हवन की तैयारी होती है. इशांत और महक अपने बेटे के साथ हवन में बैठ जाते है. पर महक ने अपने बच्चे को पूरी तरह से धक्का हुआ था जिससे कोई उसको ना देख सके. 1 घंटे हवन करने के बाद कुलगुरु बच्चे को हाथ में लेते है और फिर उसकी कुंडली बनाते है. कुंडली बनाने के बाद उनके चेहरे में एक मुस्कान आजाती है.



कुलगुरु: यह बच्चा बहोत भाग्यशाली है. इसके जैसा कोई ना होगा. यह अपनों से बड़ो का सदा सम्मान करेगा और अपनों से छोटो को साधा प्यार करेगा. पर जो इससे शत्रुता करेगा यह उसका सर्वनाश करेगा.



यह जो भी काम करेगा उसमे इसको हमेशा सफलता मिलेगी. बल बूढी और पराक्रम में इससे अच्छा कोई ना होगा.



यह हमेशा सबसे प्रेम करेगा हमेशा शांत रहेगा. पर अगर इसको गुस्सा आया तोह यह सबकुछ तबाह करदेगा. इसका गुस्सा सबसे भयानक होगा. इसके गुस्से को केवल इसकी माता और जीवन संगिनियां hi शांत करसकेगी.



इसकी जो जीवन संगिनियां होंगी वह इससे भी ज्यादा इससे प्रेम करेगी. इसके हर संकट में एक इसकी ढाल बांके कड़ी रहेगी और दूसरी इसकी शक्ति होगी. और दोनों से यह अत्यधिक प्रेम करेगा. और वह दोनों भी इससे अत्यदिक प्रेम करेगी.



महक: 2 जीवन संगिनियां.



कुलगुरु: हां 2 जीवन संगिनियां. इसके जीवन में 2 जीवन संगिनियों का योग है. एक जीवन संगिनी जो इसकी ढाल बनेगी और दूसरी शक्ति बनेगी दोनों इसको अपने जीवन से ज्यादा प्रेम करेगी. और यह भी उनसे सामान रूप से प्रेम करेगा. और कोई इन् तीनो को अलग नहीं करपयेगा.



इशांत: परन्तु 2 जीवन संगिनियां. क्या वह दोनों यह स्वीकार कर पाएंगी या यह यह ुनन्दनो को स्वीकार कर पायेगा.



कुलगुरु: एहि इसके भाग्य में है. और वह दोनों भी अपने भाग्य को स्वीकार करेंगी. क्योकि उनके जीवन में भी उनकी सौतन लिखी हुई है.



महक: मेरे बेटे का नाम क्या होगा गुरूजी.



कुलगुरु: इसका नाम होगा यश.



शालिनी: उसके कान में बोलती है. यश. यश इशांत अग्रवाल. इशांत और महक अग्रवाल का बीटा.



जैसे hi शालिनी यह करती है तभी यश ने अपने हाथ से अपनी माँ का हाथ पकड़ लिया.



श्रुति: गुरूजी आइये खाना तैयार है.



फिर सबलोग खाना खाते है. गुरूजी भी यश को आशीर्वाद देके चले जाते है. बाकी सारे मेहमान भी चले जाते है.



अब वह पे सिर्फ घर के लोग hi थे.



राजवीर: यश को अपनी गॉड में लेते हुए. यश अग्रवाल. अग्रवाल खानदान का वारिस.



किरण श्रुति शालिनी: बहोत अच्छा नाम रखा है गुरूजी ने. यश.



राजश्री: बहु चलो अब आराम करने चलो.



रुक्मणि: अब हुम्हे भी निकलना चाहिए.



महक: इतनी भी जल्दी क्या है माँ.



अजीत: नहीं बीटा हुम्हे भी चलना चाहिए. और तुम कौनसा दुर्र रहती हो. जब मन करे आजाना.



महक: जैसा आप ठीक समझे.



फिर सब यश को प्यार करके निकल पढ़ते है.



ऐसे hi टाइम गुजरने लगता है. यश ने घर में सबका मन मोह लिया था. कोई भी उसके बिना एक पल नहीं रहता. महक की तोह जैसे जान hi उसमे बस गयी थी. अगर यश एक पल के लिए भी रोह देता तोह उसकी जान निकल जाती.



किरण और श्रुति को एक बीटा और एक बेटी हुई. बेटे का नाम आरव और बेटी का नाम सोनिया. शालिनी को भी एक बीटा हुआ जिसका नाम रखा अवि.



यह तीनो हमेशा यश के साथ hi रहते. यश इनके लिए जैसे सबकुछ था. यश भी इनको बहोत प्यार करता. यश अपने घर में सबसे ज्यादा अपने दादाजी के करीब था. वह अपने दादाजी के साथ hi रहता हमेशा.
 
अपडेट 4

यश जब 10 साल का हुआ तब उसके दादाजी और दादीजी की डेथ होगयी. इससे यश को बहोत बड़ा झटका लगा था. वह बिलकुल टूट सा गया था. पर उसकी माँ बाप और बुआ ने उसको संभल लिया था. पर अब यश ने हसना चोरर दिया था. वह अपने में hi गुम्म रहता. किसी से ज्यादा बात ना करता सिर्फ अपने माँ बाप और बुआ को चोरके.



8 साल बाद लंदन



लंदन के आलीशान बंगला के एक आलीशान रूम में एक लड़का सो रहा रहा. उसके चेहरे में दुनिया भर की मासूमियत थी.



तभी वह अलार्म बज जाता है. इस वक़्त सुबह के 5 बजे थे. वह लड़का उठ के फ्रेश होक सीधा उस बंगला के बेसमेंट में बने गयम में जाके एक्सरसाइज करना लगता है. उस लड़के की बॉडी जबरदस्त थी. जो भी एकबार देख ले देखता hi रहे. 6 फ़ीट हाइट मस्कुलर बॉडी 8 पैक्स एबीएस हलकी नीली आँखे.



वह लड़का 2 घंटे गयम करने के बाद अपने रूम में आके फ्रेश होक रेडी होक नीचे आता है. वह एक लड़की कड़ी थी.



लड़की: गुड मॉर्निंग यश भैया.



जी हां वह लड़का अपना हीरो यश hi था.



यश: सिया मैंने तुम्हे कितनी बार कहा है तुम मेरी दोस्त हो मेरी बेस्ट फ्रेंड हो मेरी बेहेन हो शामे आगे की हो फिर भी तुम मुझे रोज भैया कह के क्यों बुलाती हो.



सिया: क्या करे भाई आदत होगयी है. तुमने मुझ जैसे अनाथ को एक फॅमिली दी. यहाँ मेरी स्कूलिंग कम्पलीट करवाई और अब आज हमेशा हमेशा के लिए इंडिया ले जा रहे हो अपने घर. तुम मेरे लिए किसी भगवन से काम नहीं हो.



यश: फिर वही बात. मैंने मन किया न. चलो आओ नाश्ता करो. पैकिंग होगयी तुम्हारी.



सिया: हां होगयी. और तुम्हारी.



यश: बस थोड़ी देर में स्टार्ट करूँगा.



सिया: मुझे माँ ने बोलै था तुम भूल जाओगे. इसीलिए कल रात hi मैंने करदी थी.



यश: यह माँ भी न. अच्छा फ्लाइट कब की है.



सिया: डैड ने तुम्हारा प्राइवेट जेट भेज दिया है. और उसी में आने को बोलै है.



यश: मैंने डैड को बोलै था मुझे यह शो ऑफ करना पसंद नहीं फिर भी वह नहीं माने.



सिया: इसमें शो ऑफ कैसा. तुम पिछले 8 साल से यहाँ लंदन में हो और इन् 8 साल में सिर्फ 2 बार इंडिया गए हो. और अब जब तुम्हारी स्कूलिंग कम्पलीट होगयी है तोह तुम्हे जल्दी से अपने पास बुलाने के लिए माँ ने भिजवाया है डैड से कहके.



यश: हम्म्म चलो जल्दी से नाश्ता कम्पलीट करते है. फिर सबके लिए कुछ गिफ्ट्स खरीद के लाते है.



सिया: ठीक है चलो.



(सिया- यह एक अनाथ है. यश जब लंदन आया था अपने स्कूलिंग के लिए तब इसने सिया को देखा था यह ठण्ड से काँप रही थी. यश ने जल्दी से इसको हॉस्पिटल में एडमिट करवाया और इसका ट्रीटमेंट करवाया. जब इसका ट्रीटमेंट होरहा था तब यश ने इसका हाथ पकडे रखा था.



थोड़ी देर बाद जब इसको होश आता है तब यश को ऐसे अपना हाथ पकडे देख कर यह हैरान होगयी और डर गयी.



सिया: कौन कौन है आप. और मैं कहा हु.



यश: डरो मत. मेरा नाम यश अग्रवाल है. और तुम इस वक़्त हॉस्पिटल में हो. तुम रस्ते में ठण्ड से काँप रही थी और बेहोश होगयी थी. मैं तुम्हे यहाँ लाया हु. अब कैसी हो तुम.



सिया: थैंक यू. अब मैं ठीक हु.



यश: तुम मुझे अपने फॅमिली का एड्रेस या फ़ोन नंबर दे दो मैं उन्हें बुला लेता हु.



सिया फॅमिली का सुनते hi उदाश होगयी. फिर बोलती है.



सिया: मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है. मैं एक अनाथ हु.



यश: ारी किसने कहा तुम्हारा कोई नहीं है. मैं हु ना. आज से तुम मेरी बेहेन हो. और आज से तुम मेरे साथ रहोगी मेरे घर में.



सिया: थैंक यू सर. आपने मेरे लिए इतना किया. पर मैं आपके साथ नहीं रहसक्ती. आपको तकलीफ होगी.



यश: मैंने तुम्हे सिर्फ कहने के लिए नहीं अपने दिल से बेहेन माना है. अब अगर तुम मुझे भाई नहीं मान सकती तोह अब मेरा यहाँ पे रखना बेकार है. मैं चलता हु.



सिया: प्लीज ऐसा मत कहिये. ठीक है मैं चलती हु.



यश: यह हुई ना बात. वैसे तुम्हारा नाम क्या है.



सिया: मेरा कोई एक नाम नहीं है. मुझे बहोत सारे नाम से बुलाते है. मैं जिस आश्रम में रहती थी वह मुझे छोटी कहते थे. कोई मुझे ए लड़की कहता है तोह कोई मुझे ोये लड़की.



यश: तोह जब तुम आश्रम में थी तोह वह से बहार क्यों आयी.



सिया: वह के लोग बहोत बुरे है. मुझे मारते है परेशां करते है. और मुझसे बहोत काम भी करवाते है. इसीलिए मैं वह से भाग आयी.



यश: ठीक है कोई बात नहीं. आज से बल्कि अभी से तुम मेरी बेहेन हो. और तुम्हारा नाम होगा सिया. सिया अग्रवाल.



सिया: सिया. अच्छा नाम है. थैंक यू भैया.



यश: भैया नहीं. ओनली यश.



सिया: यश.



यश: गुड. वैसे तुमने कहा तक पढाई की है.



सिया: वह आश्रम में मुझे स्कूल भेजते थे.



यश: ठीक है चोरो. अब से तुम यश अग्रवाल की बेहेन हो. तुम मेरे साथ मेरे स्कूल में जाओगी.



सिया: थैंक यू.



फिर यश सिया का डिस्चार्ज करवा के उसको अपने घर लाता है. वह उसको उसके कमरे में भेज देता है और अपने डैड को कॉल लगता है. इनसब काम में यश के साथ एक आदमी था जिससे इशांत और महक ने उसके साथ रखा था उसकी हेल्प के लिए.



इशांत: कैसे हो मेरे शेर.



यश: गुड डैड. डैड एक बात करनी थी.



इशांत: हां बोलो ना.



यश: क्या माँ है पास में.



इशांत: हां मैं अभी घर में hi हु. रुको बुलाता हु.



फिर वह महक आती है.



महक: कैसा है मेरा बीटा. तबियत तोह ठीक है ना. खाना खाया तूने. तुझे वह कोई परेशानी तोह नहीं है ना.



यश: माँ माँ मैं बिलकुल ठीक हु. मैंने खाना खा लिया है. और मुझे कोई परेशानी नहीं है. मुझे आपदोनो से एक बात करनी है.



इशांत: हां बोलो न.



फिर यश उन्हें सब कुछ बताता है.



महक: वे अरे प्राउड ऑफ़ यू बीटा. हुम्हे तुमपे गर्व है. और तुम बिलकुल भी टेंशन मत लो. आज से सिया मेरी बेटी है.



इशांत: बिलकुल आज से सिया यश की बेहेन इशांत और महक अग्रवाल की बेटी है. सिया इशांत अग्रवाल. आज से हमारे 2 बच्चे है. यश और सिया.



यश: थैंक यू माँ डैड.



महक: हम जल्द hi लंदन आके तुमसे मिलेंगे. तब तक अपना और अपनी बेहेन का ख्याल रखना.



इशांत: और मैं वह के ब्रांच के मैनेजर से बोल देता हु. वह सिया का एडमिशन तुम्हारे स्कूल में तुम्हारे क्लास में करवा देगा.



यश: थैंक यू माँ डैड.



और तब से लेकर एक अनाथ लड़की बनगयी सिया इशांत अग्रवाल. )



इधर यश और सिया शॉपिंग करने के लिए एक मॉल में आते है. वह से वह अपने माँ डैड बुआ मां ममी आरव और सोनिया के लिए गिफ्ट लेते है. (नाना और नानी की भी डेथ होचुकी है.)



फिर एहलोग घर आके रेडी होते है और एयरपोर्ट के लिए निकल जाते है जहा इनका प्राइवेट जेट खड़ा था.



यश और सिया जाके अपनी सीट्स में बैठ जाते है. थोड़ी देर में फ्लाइट टेकऑफ होजाती है.
 
अपडेट 5

इधर इंडिया में एक बंगला के एक रूम में एक ख़ूबसूरत लड़की सोई हुई थी. चेहरे में दुनिया भर की मासूमियत. कोई अगर इसके चेहरे को देखे तोह उसमे खू जाए.



तभी उस कमरे में एक औरत आती है.



औरत: हाय राम. इस लड़की का क्या करू. स्कूलिंग कम्पलीट होगयी. कॉलेज में आगयी फिर भी देखो कितना लेट तक सो रही है.



औरत: राधा राधा उठो देखो सुबह होगयी है. सूरज सर पे छड्ड गया है. उठो.



राधा: उम्म्म माँ सोने दो ना. अभी थोड़ी देर पहले hi तोह सोई हु. और अब तोह स्कूल भी नहीं है.



औरत: नहिई उठो अब. बहोत लेट होगया है. तुम्हारे डैड तुम्हारा निचे वेट कर रहे है. चलो उठो.



राधा उठ के बैठ जाती है पर आँखे बंद hi रखती है.



राधा: एक तोह साड़ी रात वह सोने नहीं देता और सुबह आप सोने नहीं देती.



औरत: राधा तुम्हे कितनी बार कहा है उसके बारे में इतना मत सोचो. कौन है कैसा है कहा है और है भी या नहीं यह तक नहीं जानती. और तुम होक उसके hi सपने देखे जा रही हो.



राधा: कौन है कहा है कैसा है यह तोह मैं नहीं जानती. पर वह है जरूर. और सिर्फ मेरा है राधा का विक्रम और संजना सिंह की बेटी राधा विक्रम सिंह का.



संजना: और अगर उसकी लाइफ में पहले से hi कोई हुआ तोह.



जैसे hi राधा यह सुनती है उसकी आँखों में आंसू आजाते है.



संजना: ारी राधा रट नहीं. मैंने तुम्हे कितनी बार कहा है मुझे तुम्हारी आँखों में आंसू सेहन नहीं होते.



राधा: तोह आपने ऐसा क्यों कहा माँ. पीछे 2 साल से वह मेरे सपनो में आरहा है. और अब तोह वह मेरी ज़िन्दगी बन गया है. आपको पता है जिस दिन उसका सपना नहीं आता मेरा दिल कितना बेचैन होजाता है.



संजना: पर अगर सच में उसकी लाइफ में कोई और रहा तोह.



राधा: तोह मैं नहीं जानती मैं क्या करुँगी. पर इतना जरूर है. अगर मेरे प्यार सच्चा है तोह इस राधा को उसका कृष्णा जरूर मिलेगा. और कोई रुक्मिणी हमारे बीच नहीं आसक्ति.



संजना: भगवन करे तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी हो. चलो अब जल्दी से फ्रेश होजाओ. तुम्हारे डैड नीचे तुम्हारा वेट कर रहे है.



फिर राधा जल्दी से नीचे फ्रेश होने चली जाती है.



संजना भी नीचे चली जाती है.



विक्रम: क्या बात है संजना इतनी परेशां क्यों हो.



संजना: राधा को आज फिर उसका सपना आया. और अब तोह वह उससे पागलो की तरह प्यार करने लगी है. आज बात बात में मैंने कह दिया के अगर उसकी लाइफ में कोई और रहा तोह. तोह उसने जैसे hi यह सुना उसकी आँखों में आंसू आगये. अगर हमारी राधा को उसके सपनो का कृष्णा नहीं मिला तोह यह शायद पागल होजायेगी. यह कहते वक़्त संजना के आँखों आंसू आजाते है.



विक्रम: चिंता मत करो संजना. हमारी राधा ने कभी किसी का बुरा नहीं किया और नाही कभी किसी का बुरा चाहा है. भगवन उसके साथ अच्छा hi करेंगे.



संजना: भगवन करे ऐसा hi हो. वर्ण मेरी बच्ची टूट जाएगी.



विक्रम: अच्छा अपने आंसू साफ़ करो राधा आरही है.



राधा: गुड मॉर्निंग डैड.



विक्रम: गुड मॉर्निंग प्रिंसेस. आज तुम लेट होगयी.



राधा: सॉरी डैड. रात को लेट नींद आयी थी.



विक्रम: कोई बात नहीं. संजना अब तोह नाश्ता दो. अब तोह हमारी प्रिंसेस भी आगयी.



संजना: अभी लायी.



विक्रम: क्या बात है बीटा तुम परेशां दिख रही हो.



राधा मैं में अब आपको क्या बताऊ डैड. माँ की बात से मुझे टेंशन होगया है अगर माँ ने जो बोलै वह सच होगया तोह. मैं तोह जीते जी मर जाउंगी. भगवन प्लीज मेरे कृष्णा को किसी और का मत होने देना. वर्ण यह राधा जीते जी मर जाएगी.



विक्रम: राधा क्या हुआ.



राधा: कुछ नहीं डैड वह आज मेरा रिजल्ट है ना तोह उसकी hi टेंशन होरही है.



विक्रम समाज जाता है राधा झूट बोल रही है पर वह कुछ नहीं बोलता.



विक्रम: ारी मेरी प्रिंसेस बहोत होशियार है. देखना तुम बहोत अच्छे नंबर्स पास होजाओगी.



राधा: होप सो.



विक्रम: अच्छा बताओ आगे चल के क्या करना है.



राधा: बिज़नेस.



विक्रम: बिज़नेस क्यों.



राधा: सिंपल डैड. आपके बाद कंपनी को मुझे hi तोह संभालना है.



विक्रम यह सुनके हसने लगता है. साथ में राधा भी हसने लगती है.



संजना: क्या बात है दोनों बाप बेटी किस बात पे है रहे है.



राधा: कुछ नहीं माँ डैड बोल रहे थे आप बहोत लेट लतीफ़ होगयी है.



संजना: क्याआ. विक्रमममम.



विक्रम: नहीं नहीं संजना मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.



संजना: राधायआ.



राधा जोर जोर से हसने लगती है. और बोलती है



राधा: सॉरी माँ. मैं मज़ाक कर रही थी. अब जल्दी से नाश्ता दीजिये फिर मुझे अपना रिजल्ट भी चेक करना है.



विक्रम: तोह कौनसे कॉलेज में जाना है.



राधा: आईएम कॉलेज ऑफ़ बिज़नेस मेडिकल एंड इंजीनियरिंग.



विक्रम: वाह गुड चॉइस. यह यहाँ का टॉप कॉलेज है. और मेरे दोस्त का है.



संजना: कही यह इशांत भैया और महक का तोह नहीं.



विक्रम: हां सही कहा.



संजना: वाह तब तोह वह हमारी बेटी को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.



विक्रम: हम्म मैं अभी वह के प्रिंसिपल से बात करता हु.



राधा: No डैड. मैं खुद जाके अपना एडमिशन करवाउंगी. और मेरे साथ तोह आरुषि और मेघा भी होंगे.



विक्रम: ोकक जैसा तुम कहो.



संजना: चलो अब जल्दी से नाश्ता करो. फिर तुम्हारा रिजल्ट देखते है.



फिर एहलोग जल्दी से नाश्ता करते है फिर राधा जल्दी से अपना रिजल्ट देखने के लिए लैपटॉप ओपन करती है.



उसका दिल बहोत जोरो से धड़क रहा था. वह उसी धड़कते दिल के साथ अपना रिजल्ट चेक करती है.



जैसे hi रिजल्ट आता है राधा जोरो से चीख उठती है.



संजना: ारी क्या हुआ.



राधा: मॉम्म ड़ड़ड़ड़ मुझे पुरे 98% मिले है. और मैंने पुरे स्टेट में टॉप किया है.



विक्रम और संजना भी ख़ुशी से झूम उठते है.



राधा तोह वह ख़ुशी से नाचने लगती है.



दोनों: कोंग्रटुलतिओन्स बेटा.



राधा: नाचते हुए hi थैंक यू माँ थैंक यू डैड. एंड थैंक यू माय ड्रीम कृष्णा.



विक्रम और संजना जैसे hi यह सुनते है वह हैरान होजाते है.



संजना: राधा रुको लग जाएगी. और पहले यह बताओ यह ड्रीम कृष्णा क्या है.



राधा: माँ मैं राधा तोह इस राधा के सपने में जो आता है वह उसका कृष्णा hi होगा ना. इसीलिए ड्रीम कृष्णा. और अगर वह मेरे पास होता तोह वह भी मुझे कोंग्रटुलते करता न.



यह बोल राधा जल्दी से अपने रूम में जाती है और अपना मोबाइल लाती है और आरुषि और मेघा को कॉल करती है.



इधर विक्रम और संजना राधा का यह पागलपन देख एक पल के लिए टेंशन में आजाते है पर वह जाहिर नहीं होने देते.



इधर राधा ने भी आरुषि और मेघा का रिजल्ट जाना और अपना बताया. फिर ओहलोग जल्दी से स्कूल के लिए निकलते है.
 
अपडेट 6

इधर यश और सिया इंडिया लैंड करते है.



यश और सिया एयरपोर्ट के बहार आते है और वह से सीधा हेलीकाप्टर में बैठ के उड़द जाते है अग्रवाल मेन्शन. मुंबई का सबसे बड़ा बंगला.



जैसे जैसे यश करीब आरहा था वैसे वैसे किसी की धड़कन बढ़ रही थी. और जब उसने हेलीकाप्टर की आवाज़ सुनी तोह भाग के हेलिपैड की तरफ जाती है. उसके पीछे पीछे घर के बाकी मेंबर्स भी भागते है.



वह जाके सीधा हेलिपैड के सामने कड़ी होजाती है. जहा पे हेलीकाप्टर लैंड करता है और यश और सिया बहार निकलते है तोह सबके आँखों में एक चमक आजाती है. पर जो हेलिपैड के सामने कड़ी थी वह जब यश को देखती है तोह उसके आँखों में आंसू आजाते है.



यश और सिया चलके उसके पास आते है.



यश: माँ. अभी यश ने इतना hi बोलै था के महक उसके गले लग जाती है और रोने लगती है.



वह 1 जान कोई और नहीं महक hi थी जो अपने बेटे के आने की आहात को भी पहचान लेती है.



यश: माँ अगर आप रोयेंगी तोह मैं वापस चला जाऊंगा.



महक: चला जायेगा. अपनी माँ को चोर के चला जायेगा. तुझे जरा भी अपने माँ की याद नहीं आती.



यश: मुझे हरदिन हर पल आपकी डैड की सबकी याद आती है माँ.



महक: तोह क्यों रहा इतने साल मेरे से दुर्र. और अब आया तोह बोल रहा hi वापस चला जायेगा.



यश: सॉरी माँ. पर आप जानती है ना मैं क्यों इंडिया वापस नहीं आना चाहता था.



महक: चोरर यह साड़ी बाते. सिया यहाँ आ. वह क्यों कड़ी. अपनी माँ से नहीं मिलेगी.



सिया माँ बोलते हुए महक के गले लग जाती है.



महक: कैसी है मेरी बच्ची.



सिया: एकदम फिट माँ आप कैसी है.



महक: तुम दोनों को गले लगा लिया ना अब मुझे चैन आया.



इशांत: महक हुम्हे भी अपने बच्चो से मिलने दो.



महक: पहले मुझे मेरे बच्चो को ठीक से देख तोह लेने दो. कितने साल बाद देख रही हु इन्हे.



इशांत: अब वह हमेशा के लिए यही रहेंगे. चिंता मत करो.



महक यह सुनके साइड होजाती है. यश और सिया जाके इशांत के गले लग जाते है.



जैसे hi इशांत ने यश और सिया को अपने सीने से लगाया उसके दिल को एक रहत मिली और आँखों में आंसू आजाते है जिन्हे वह बड़े अच्छे से पॉच लेता है.



इशांत: कैसे है मेरे शेर और शेरनी.



दोनों: बिलकुल फिट डैड. आप कैसे है.



इशांत: तुम दोनों को देख लिया ना अब बिलकुल अच्छा हु.



शालिनी: यश सिया. हम भी यहाँ खड़े है.



फिर यश सिया एक एक करके सबसे मिलते है. सोनिया तोह जैसे यश को चोर hi नहीं रही थी.



यश: सोनिया मैं एहि हु अब कही नहीं जाऊंगा.



सोनिया: प्रॉमिस.



यश: प्रॉमिस.



सोनिया फिर झट्ट से सिया को गले लगा लेती है.



सोनिया: क्या बात है सिया. हमारी याद नहीं आती.



सिया: ारी मैं मेरी सोनू को कैसे भूल सकती हु. यह बोल सिया भी सोनिया को काश लेती है.



फिर सब घर के अंदर आते है.



यश: बुआ फूफाजी और अवि कहा है.



शालिनी: वह किसी काम से बहार गए है कल सुबह आजायेंगे.



महक: यश सिया आओ खाना खालो.



फिर दोनों जाके डाइनिंग टेबल में बैठ जाते है.



महक शालिनी किरण श्रुति सोनिया उन्हें अपने हाथो से खिलते है.



फिर सबलोग अपने अपने कमरे में आजाते है.



महक हरदिन यश और सिया का कमरा साफ़ करवाती थी. यश और सिया आज पहली बार अग्रवाल मेन्शन आये थे क्योकि यह बंगला इशांत ने नया बनवाया था.



महक ने यश और सिया को पूरा घर दिखाया फिर उन्हें उनके कमरे में चोर गयी.



वह दोनों अपने अपने रूम में जाके फ्रेश होक सजाते है.



अगले दिन महक जल्दी उठ अपने हाथो से अपने बच्चो का फवौरीते नाश्ता बनती है फिर उनके कमरे में उन्हें उठाने जाती है.



महक सबसे पहले सिया के कमरे में जाती है तोह वह कोई नहीं था. वह वाशरूम चेक करती है तोह वह भी नहीं थी.



महक: कहा गयी यह लड़की सुबह सुबह.



फिर वह यश के रूम में जाती है तोह वह भी वह नहीं था. यह देख कर महक को थोड़ी टेंशन होती है.



महक: ारी कहा गए यह दोनों भाई बेहेन.



तभी उसको याद आता है सिया ने उसको बताया था यश रोज सुबह उठ के गयम में जाता है.



महक जल्दी से गयम में जाती है तोह देखती है दोनों वह एक्सरसाइज कर रहे है.



महक: तुम दोनों यहाँ हो और मैं तुम्हे पुरे घर में ढूंढ रही हु.



दोनों: गुड मॉर्निंग माँ.



महक: गुड मॉर्निंग. चलो बहोत एक्सरसाइज होगयी. सबलोग नाश्ते के लिए वेट कर रहे है.



सिया: हां माँ जल्दी चलिए. वर्ण यह मुझे जीने नहीं देगा. कितने आराम से सो रही थी. जबरदस्ती उठा के यहाँ ले आया.



फिर दोनों जल्दी से अपने रूम में जाते है और फ्रेश होक नीचे आते है.



दोनों: गुड मॉर्निंग.



सब: गुड मॉर्निंग.



फिर सबलोग नाश्ता करने लगते है. नाश्ते के बाद इशांत यश और सिया से पूछता है.



इशांत: तोह मेरे शेर और शेरनी यह बताओ तुम दोनों के रिजल्ट कब है.



दोनों: फ्राइडे को.



महक: ारी आज hi तोह फ्राइडे है. आरव सोनिया जल्दी से लैपटॉप लेके नीचे आना तोह.



दोनों जल्दी से लैपटॉप लेके आते है.



आरव: क्या हुआ बुआ.



महक: ारी आज इनदोनो का रिजल्ट है. तुमदोनो का तोह कल निकल गया है.



सिया: तोह आरव और सोनू क्या आया.



आरव: मेरा 96 और इसका 97.



सिया: वाह कॉंग्रट्स.



दोनों: थैंक यू.



महक: ले तू जल्दी से देख अपना रिजल्ट.



फिर सिया जल्दी से अपना और यश का रिजल्ट चेक करती है.



जैसे hi रिजल्ट आता है सिया झट्ट से यश के गले लग जाती है.



सिया: कॉंग्रट्स भाई.



महक: क्या हुआ सिया.



सिया: माँ भाई ने पुरे लंदन में टॉप किया है. 99.99% के साथ.



महक: Kyaaaaaaaaaa. सचहहहह मेंननननन.



सिया: यस माँ.



महक झट्ट से यश को गले लगा लेती है. फिर उसके माथे को चुम्म के



महक: कोंग्रटुलतिओन्स बीटा. आज तूने हमारा सीना गर्व और चौड़ा करदिया.



इशांत: कोंग्रटुलतिओन्स बीटा. और तुम्हारी माँ ने बिलकुल ठीक कहा. आज मैं बहोत खुश हु. मेरे बेटे ने मेरा नाम रोशन करदिया.



यश: थैंक यू माँ. थैंक यू डैड.



फिर एक एक करके सब यश को विश करते है.



यश: सिया तेरा क्या हुआ.



सिया: ोू. मैं अपना देखना भूल hi गयी.



फिर सिया अपना देखती है तोह वह भी राधा की तरह ख़ुशी से नाचने लगती है.



महक: ारी मेरी पागल सिया. बता तोह क्या हुआ. और ऐसे नाच क्यों रही है.



सिया झट्ट से महक के गले लग जाती है. माँ मुझे पुरे 99% आये है. और मैं पुरे लंदन में 2ंद आयी हु.



महक और इशांत यह सुनते hi उसको गले लगा लेते है. फिर उसको भी कोंग्रटुलते करते है.



एक एक कर के सब उसको भी कोंग्रटुलते करते है.



सोनिया: सिया इससबार तोह तूने बाज़ी मरली. अगली बार देख लुंगी.



सिया: देख लेना अगली बार भी मैं hi जीतूंगी.



इशांत: तुम दोनों ने हमारा नाम रोशन करदिया. बोलो क्या चाहिए तुमदोनो को.



दोनों: हुम्हे कुछ नहीं चाहिए डैड. आपने हुम्हे भिन्न मांगे hi सब दे दिया है.



महक: ारी ऐसे कैसे. ठीक है तोह जो हम देंगे वह तुम दोनों को रखना होगा. और तुमदोनो को भी.



सब: ोककक.



सिया: ारी मैं तोह भूल hi गयी. हम आप सब के लिए लंदन से गिफ्ट्स आये थे.



यश: हआ. यह बोल वह दोनों ऊपर भागते है और वह गिफ्ट्स वाला बैग लाते है.



फिर सबको उनका गिफ्ट्स देते है.



इशांत: अच्छा यह बताओ आगे क्या करना है.



यश: बिज़नेस



सिया: मेडिकल



आरव: इंजीनियरिंग



सोनिया: इंजीनियरिंग.



महक: बहोत अच्छी बात है.



श्रुति: ारी यह सबटोह आईएम कॉलेज में hi है.



किरण: ारी हां. चलो अच्छा हुआ. सारे भाई बेहेन एक साथ रहेंगे.



महक: हां यह अच्छा कहा.



इशांत: ठीक है तोह मैं इनसब का एडमिशन करवा देता हु.



यश: No डैड. हमसब वह जाके करवाएंगे. पर एडमिशन के पहले मेरी एक शर्त है.



सब: कैसी शर्त.



यश: मैं और सिया वह अग्रवाल बिज़नेस एम्पायर के इन्हेरीटेर बांके नहीं कमान पीपल बांके जायेंगे.



महक: नॉट एक्सेप्टेड. तुम दोनों इशांत और महक अग्रवाल के बच्चे हो और उस कॉलेज के मालिक भी. और वह तुम दोनों कॉमन पीपल बांके जाओगे.



सिया: माँ भाई ने सही कहा. अगर किसी को वह पे हमारी रियल आइडेंटिटी पता चली तोह सब हुम्हे स्पेशल ट्रीट करेंगे. जो हुम्हे पसंद नहीं. और होसकता कोई हमारे फ्रेंड्स हमारे स्टेटस देख कर बने और अगर कोई बनना चाहता हो तोह हमारा स्टेटस देख कर पीछे हैट जाए.



इशांत: पर कॉलेज के ओनर होक तुम दोनों ऐसे जाओगे.



यश: प्लीज डैड. प्लीज माँ.



महक: ठीक है. पर जब तक सबकुछ ठीक चलेगा तब तक. अगर मुझे मेरे बच्चो पे कोई भी प्रॉब्लम आते हुए दिखी तोह तुम लोग संग संग अपनी रियल आइडेंटिटी में आओगे.



किरण: दीदी चिंता मत कीजिये. आरव और सोनिया अपनी रियल आइडेंटिटी के साथ जायेंगे. अगर कोई प्रॉब्लम होती है तोह यह दोनों संभालेंगे.



आरव: हां बुआ आप चिंता ना करे.



इशांत: ठीक है फिर. हम चले ऑफिस. फिर वह ऑफिस चले जाते है.



सोनिया: अच्छा मेरी एक बात है.



श्रुति: अब क्या शरारत सूझी है तुझे.



सोनिया: शरारत नहीं माँ आपके बेटे को कॉलेज की बुरी बालाओ से दुर्र रखने का आईडिया है.



श्रुति: कहना क्या चाहती है.



सोनिया: माँ आप भाई को देखिये. कितने स्मार्ट हॉट और हैंडसम है. इनकी बॉडी देखिये. कोई भी लड़की इनपे फ़िदा होजायेगी. इसीलिए उनन्साब को इनसे दुर्र रखने के लिए एक आईडिया है.



सिया: जल्दी बता.



महक: तुझे बड़ी जल्दी है.



सिया: हआ तोह. अगर किसी ने मेरे भाई की तरफ देखा तोह वही ज़िंदा ना गार दू. और तू बता ना.



सोनिया: आईडिया में मैं काम आपका hi है.



सिया: मेरा मतलब.



सोनिया: पहले प्रॉमिस करो कोई डाँटेगा नहीं.



श्रुति: मतलब जरूर कोई बदमाशी सूझी है इसको. पहले बता फिर सोचेंगे.



सोनिया: नहीं नहीं नहीं नहीं. पहले प्रॉमिस. बुआ. क्या आप चाहती है कोई बुरी बाला आपके बेटे को फास ले.



महक: ठीक है चल प्रॉमिस कोई नहीं डाँटेगा मेरी सोनू को.



सोनिया: आईडिया यह है सिया कॉलेज में भाई की बेहेन नहीं गर्लफ्रेंड बांके जाएगी. जिससे कोई भी लड़की आने के पहले hi ु टर्न मार लेगी.



श्रुति: देखा मैंने कहा था ना इसके दिमाग में बदमाशी सूझ रही है. बेहेन को इसने गर्लफ्रेंड बना दिया. तेरी तोह रुख.



सोनिया भाग के महक के पीछे छुप जाती है.



यश: सोनिया तुम्हारा दिमाग ख़राब होगया है. क्या उलटी सीधी बाते कर रही हो.



सिया: हां सोनिया. यह क्या बेहूदा बात है.



सोनिया: आप सबने प्रॉमिस किया था कोई डाँटेगा नहीं. बाआआ.



महक: अच्छा अच्छा ठीक है सब चुप करो. अब पहले यह बताओ तूने सिया को hi क्यों चूसे किया.



सोनिया: बस मेरे मैं में आया इसीलिए. सॉरी बुआ.



महक: कोई बात नहीं. वैसे सोनू का कहना सही है. अगर किसी ने मेरे बेटे को फास लिया तोह.



सिया: Don’t वोर्री माँ. हम है ना हम संभल लेंगे.



यश: माँ मैं कोई बच्चा नहीं. जो ऐसे hi किसी के जाल में फहस्स जाऊ.



महक: अच्छा अच्छा ठीक है. अब यह सब चोरो. अब यह बताओ अब दिन भर क्या करोगे तुमलोग.



सोनिया: भाई के साथ शॉपिंग मूवी डिनर.



यश: ठीक है चल.



सोनिया नाचते हुए यश के गले लग जाती है.



महक: ठीक है यश सिया मेरे कमरे में आओ. और तुम सब जाके रेडी होजाओ.



फिर सब अपने अपने काम में लग जाते है. यश और सिया महक के रूम में आते है.



यश: बोलिये माँ.



महक: यह लो तुमदोनो के कार्ड्स. जितना मर्ज़ी उसे करो इसकी कोई लिमिट्स नहीं है.



सिया: हमारे पास पहले से hi कार्ड्स है माँ.



महक: हुम्हे पता है. पर यह तुम्हारे डैड ने दिया है. तोह अगर कोई बात है तोह उनसे करो.



यश सिया: नहीं माँ हम ले लेते है.



फिर एहलोग अपने रूम में आके रेडी होने लगते है.



थोड़ी देर में सबलोग रेडी होक मॉल में जाने लगते है.
 
अपडेट 7

उधर राधा अपनी माँ से बोलती है.



राधा: माँ मैं आरुषि और मेघा के साथ शॉपिंग पे जा रही हु.



संजना: ठीक है. और यह लो तुम्हारा कार्ड. जितना मर्ज़ी उसे करो. No लिमिट्स.



राधा: मेरे पास है माँ.



संजना: पता है. फिर भी यह रखो.



राधा: ोकक माँ.



फिर राधा भी रेडी होक मॉल में चली जाती है.



यश: तोह बताओ पहले क्या करना है.



सोनिया: सिंपल शॉपिंग करनी है. सिया भाई चलो मेरे साथ.



आरव: यश भाई मेरे साथ रहेंगे.



सोनिया: नहीं. वह मुझे शॉपिंग में हेल्प करेंगे.



आरव: तोह तुमने सिया को लिया है ना.



सोनिया: मुझे दोनों की हेल्प चाहिए. यह बोल वह यश का हाथ पकड़ के अपने साथ ले जाने लगती है.



यश: आरव चलो मेरे साथ. इनके साथ हम भी करलेंगे.



फिर यह चारो जाके शॉपिंग करने लगते है.



इधर राधा जब मॉल में कदम रखती है तोह उसको थोड़ा अजीब सी फीलिंग आती है. उसको लगता है जैसे उसका कोई अपना यहाँ उसके पास है. तोह वह वह कड़ी होक इधर उधर देखने लगती है.



आरुषि: आई राधा चल ना. वह क्यों कड़ी है.



राधा: हां. हां हां चल.



फिर यह लोग शॉपिंग करने चले जाते है.



उधर सोनिया और सिया ने यश और आरव को परेशां करदिया था. कभी यह तोह कभी वह.



यश: सोनिया सिया जल्दी करो. देखो तुम्हारे शॉपिंग में कितना लेट होगया है. रात होने आयी है.



दोनों: बस बस आज का होगया है. नेक्स्ट टाइम बाकी का देख लेंगे.



आरव: अभी नेक्स्ट टाइम बाकी है. इतनी शॉपिंग के बाद.



दोनों: ारी अभी तोह थोड़ा सा hi हुआ है.



यश: माफ़ करना नेक्स्ट टाइम अकेले आना.



आरव: भाई ने ठीक कहा.



दोनों: मुँह बनाते हुए. देखेंगे.



यश: तोह अब बताओ क्या करना है.



दोनों: मूवी.



यश: ठीक है चलो फिर. आरव इन्हे बोल दो यह शोप्पेर्स यह घर पहुंचा दे.



आरव: ठीक है मैं बोल देता हु.



फिर यह लोग मूवी देखने के लिए चले जाते है.



राधा भी अपनी शॉपिंग करके मूवी के लिए जाने लगती है.



जब यह लोग मल्टीप्लेक्स में एंटर करने वाले होते है तभी यश को एक कॉल आता है.



यश: रुको घर से कॉल आया है.



फिर यश थोड़ा साइड होक बाते करने लगता है. फिर इनके पास आके बोलता है.



यश: चलो घर चलो. फूफाजी और अवि आये है.



सोनिया: ोू. ठीक है मूवी नेक्स्ट टाइम.



फिर यह लोग घर जाने लगते है.



इधर राधा जैसे जैसे मल्टीप्लेक्स के करीब आरही थी उसकी धड़कने तेज़ होरही थी. वह बार बार इधर उधर घूम घूम के देख रही थी.



तभी उससे मेघा बुलाती है.



मेघा: राधा चल ना मूवी स्टार्ट होजायेगी.



राधा जब मूर्ति है तोह उसका हाथ किसी से टच होजाता है जिससे उससे एक झटका लगता है और उसको अपने ड्रीम कृष्णा का एहसास होता है.



पहले तोह वह उस एहसास में खू जाती है. पर जब उससे होश आता है तोह वह पागलो के जैसे इधर उधर भाग भाग के देखने लगती है. पर तब तक वह भीड़ में कही खू गया था.



आरुषि और मेघा उसकी ऐसी हरकत को देख कर शॉक होजाते है. दोनों उसके पास आते है.



आरुषि: राधा राधा क्या हुआ. तुम ऐसे क्यों बेहवे कर रही हो.



राधा: वह वह वह यही है. अभी मुझे उसका एहसास हुआ.



मेघा: कौन किसका एहसास हुआ.



राधा: ड्रीम कृष्णा का.



दोनों: ड्रीम कृष्णा. यह कैसे नाम है और यह है कौन.



राधा: वही जिससे मैं अपनी जान से ज्यादा प्यार करती हु.



दोनों: शॉक से व्हाटटटटटटट.



राधा: पता नहीं वह कहा चला गया. अभी तोह एहि था. उसका हाथ मेरे हाथ से टच भी हुआ था. यह बोल वह रोने लगती है.



दोनों: राधा राधा शांत होजाओ. चलो घर चलो. वह शांति से बैठ के सोचेंगे.



फिर दोनों जबरदस्ती राधा को घर लेके जाती है.



जब एहलोग घर आते है तोह विक्रम भी घर आचुका था.



आरुषि: आंटी जल्दी से पानी लाइए.



संजना बहार आके देखती है आरुषि और मेघा दोनों आये है और राधा रो रही है. उसको ऐसे रट देख वह टेंशन में आजाती है.



संजना: विक्रममममम जल्दी आइये.



विक्रम भी जल्दी से बहार आता है तोह राधा को ऐसे रट देख उसको पास जाता है.



संजना: राधा मेरी बच्ची क्या हुआ. क्यों रो रही हो.



विक्रम: आरुषि मेघा क्या हुआ. क्यों रो रही है यह.



दोनों: अंकल आंटी पता नहीं हम लोग मॉल में थे मूवी देखने जा रहे थे. राधा कुछ अजीब से बेहवे कर रही थी. बार बार इधर इधर घूम घूम के कुछ ढूंढ रही थी. फिर अचानक यह पागलो की तरह भागने लगी फिर एक जगह बैठ के रोने लगी. जब हमने पूछा तोह बोलै इसके ड्रीम कृष्णा का एहसास हुआ है इससे इसके हाथ को टच किया उसने.



राधा: रट हुई. माँ डैड. मैंने आज उससे एहसास किया. उसका हाथ मेरे हाथ से टच हुआ. मैंने उससे बहोत ढूंढा पर वह नहीं मिला.



संजना और विक्रम दोनों परेशां होजाते है. राधा का पागलपन कुछ ज्यादा hi बढ़ गया था.



विक्रम: राधा मेरी प्रिंसेस ऐसे रट नहीं. चुप होजाओ. तुम्हे पता है ना हम तुम्हे ऐसे रट हुए नहीं देख सकते. प्लीज चुप होजाओ.



संजना: राधा को गले लगते हुए. चुप होजा मेरी बच्ची मत रो. हम है ना हम उससे मिल के खोजेंगे. प्लीज चुप होजा.



दोनों: हां राधा चुप होजाओ. हम है ना हम खोज लेंगे उससे चुप होजाओ.



राधा संजना के गले लगे हुए रट हुए hi सो जाती है.



विक्रम उससे उसके कमरे में पहुंचा देता है.



दोनों: आंटी यह सब क्या है. राधा किसी से इतना प्यार करती है यह हुम्हे कभी बताया hi नहीं.



संजना: यह प्यार नहीं एक तरह का पागलपन है.



दोनों: मतलब.



संजना: पिछले 2 साल से राधा को किसी लड़के का सपना आता है. राधा उस सपने वाले लड़के से इस कदर प्यार कर बैठी है के उसके बिना ना कुछ खाती है न पीती है न सोती है न जागती है. वह सपने वाला लड़का इसके तन मन यहाँ तक के आत्मा में भी बस गया है.



दोनों: तोह राधा को उससे मिलने दीजिये न.



संजना: एहि तोह प्रॉब्लम है बीटा. किसी को नहीं पता वह लड़का कैसा दीखता है कहा रहता है कौन है कहा है. वह बस राधा की एक सोच है एक सपना है. और यह पागल उस सपने को अपनी ज़िन्दगी बना बैठी है. उसके बिना तोह यह सांस तक नहीं लेती. कल मैंने गलती से बोल दिया अगर उस लड़के के जीवन में कोई और रहा तोह. तोह यह सुनते hi उसके आँखों में आंसू आगये. अब मुझे डर है अगर वह इससे ना मिला तोह शायद यह जी नहीं पायेगी.



आरुषि: यह तोह बहोत hi सीरियस मटर है आंटी.



संजना: और आज तोह इसने हद्द करदी. तुमदोनो ने देखा था क्या किसी को.



दोनों: नहीं ना आंटी.



संजना: पता नहीं मेरी बच्ची का क्या होगा.



मेघा: आंटी क्या राधा को सपने में उसका चेहरा दीखता है.



संजना: हां दीखता है लेकिन क्लियर नहीं.



मेघा: तोह क्यों ना हम उस आधे अधूरे चेहरे का स्केच बनाये. और उससे hi उस लड़के को खोजने की कोशिश करे.



संजना: ारी हआ यह हो सकता है. थैंक यू सो मच बीटा.



मेघा: आंटी इसमें थैंक यू कैसा. हमने राधा को हमेशा अपनी बेहेन माना है. अपनी बेहेन के लिए यह कुछ भी नहीं है.



आरुषि: मेरे कांटेक्ट में एक ऐसा स्केच आर्टिस्ट है. मैं कल hi उसको बुला लेती हु.



संजना: हां बीटा पलासी. तुम उससे कल hi बुला लो.



विक्रम: किस्से बुलाने की बात होरही है.



फिर संजना विक्रम को साड़ी बात बताती है.



विक्रम: ारी यह बहोत अच्छा आईडिया है. तुम कल hi उसको बुलाओ. अब हम अपनी बच्ची को ऐसे नहीं देख सकते.



दोनों: जी अंकल. अच्छा अंकल अब हम चलते है.



संजना: ारी आज एहि रुख जाओ. बहोत रात होगयी है.



दोनों: नहीं आंटी हमारे पास कार है हम चले जायेंगे.



विक्रम: ठीक है ध्यान से जाना.



दोनों: जीई अंकल.



फिर वह दोनों भी अपने घर चली जाती है.



संजना: विक्रम राधा का पागलपन तोह दिन के दिन बढ़ते hi जा रहा है.



विक्रम: क्या करे संजना. वह लड़का सच में एक्सिस्ट करता भी है या नहीं यह तक हुम्हे नहीं पता. अगर वह हुम्हे मिल जाये तोह मेरी बेटी के बदले हमारी पूरी प्रॉपर्टी उसको दे दू.



संजना: मैं मेरी बच्ची को अब ऐसे नहीं देख सकती. यह बोल वह रोने लगती है.



विक्रम: चुप होजाओ संजना. हम कल उसका स्केच बनवाते है फिर देखते है.



संजना: मैं जा रही हु अपनी बच्ची के पास. यह बोल वह राधा के कमरे में चली जाती है. जहा वह सो रही थी. आंसू उसके गाल पे सुख गए थे.



संजना उसके बगल में बैठ जाती है और उसके सर को सहलाने लगती है. और उसके पास hi सो जाती है.
 
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