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- Dec 5, 2013
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महक जब सिया के रूम में आती है तोह देखती है सिया बेसुध सो रही है और उसके गालों में आंसू सुख चुके है. चेहरा थोड़ा मुरझा गया है.
महक को उसकी हालत देख कर आँख में आंसू आजाते है.
महक: यह क्या हालत बना ली है मेरे बच्ची ने. मेरी हलकी सी दांत में इसने यह हाल बना लिया है. गलती मेरी hi है. मुझे जब पता था यह कितनी सेंसिटिव है मुझे इससे नहीं डांटना चाहिए था. पर मैं भी क्या करती इसने गलती hi ऐसी की थी.
महक: सिया उठो सिया. देखो कॉलेज का टाइम होगया है उठ जाओ.
महक के बुलाने पे भी सिया कोई रिस्पांस नहीं करती.
महक सिया के पास जाके उसके सर में हाथ रखती है तोह बुरी तरह घबरा जाती है.
महक: हेय्य भगवन इसको तोह बहोत तेज़्ज़ भुकार है. पूरा शरीर भट्टी की तरह टप्प रहा है.
महक चिल्ला के यश और इशांत को बुलाती है.
महक: यशःह्ह्ह्हह्ह िशांतत्तततततत.
यश और इशांत महक की आवाज़ सुनके ऊपर दौड़ते है.
महक: यश इशांत सिया को बहोतट तेज़्ज़ज़ भुकार है. पूरा शरीर भट्टी की तरह टप्प रहा है और यह सेंसलेस होगयी है.
यश: क्याआआआ. सिया सिया उठो ना सियाआ. देखू सिया मैं यष्ठ तुम्हारा यष्ठ. सिया उठू ना.
इशांत: यश इसको तुरंत हॉस्पिटल लेके चलो. मैं शालिनी को बुलाता हु. जल्दी करूओ.
यश सिया को अपनी गोड़ में उठा के नीचे की तरफ भागता है और कार के बैक सीट में उसको सुलट देता है. महक उसके सर को अपनी गॉड में रख लेती है और उसके सर को सहलाने लगती है.
यश ड्राइव करता है और इशांत उसके बगल में बैठ जाता है.
इशांत: शालिनीई.
शालिनी: जी भैया.
इशांत: शालिनी जल्दी से हॉस्पिटल पहोंचो.
शालिनी: हॉस्पिटल क्या हुआ भैया.
इशांत: सिया को बहोत तेज़्ज़ भुकार है और वह सेंसलेस होगयी है. हम उसको हॉस्पिटल ले जारहे है. तुम जल्दी पहोंचो.
शालिनी: मैं अभी पहुंचती हु.
फिर कॉल कट होजाता है.
अवि: क्या हुआ माँ. मामाजी ने क्या कहा.
शालिनी: बीटा सिया को बहोत तेज़्ज़ भुकार होगया है और वह उसकी वजह से सेंसलेस होगयी है.
अवि: व्हाटटटटट.
शालिनी: मैं निकलती हु.
यह बोल शालिनी वह से भगति है.
अवि तुरंत आरव को कॉल करता है.
अवि: भाई सिया दी को बहोत तेज़्ज़ भुकार है और वह हॉस्पिटल में एडमिट है जल्दी पहोंचो मैं भी आरहा हु.
आरव: व्हाटट. मैं अभी आता हु.
किरण: क्या हुआ आरव.
आरव: सिया हॉस्पिटल में एडमिट है उसको बहोत तेज़्ज़ भुकार होगया है.
किरण: क्याआआआ.
आरव: यस माँ.
किरण: अमननननन सोनिया श्रुतियई संजययय.
सब: क्या हुआ.
किरण: सिया हॉस्पिटल में है जल्दी चलिये.
सब: व्हाटटटटट.
आरव: यस डैड. उसको बहोत तेज़्ज़ भुकार चढ़ा है. मुझे अवि का कॉल आया था.
सब तुरंत वह से भग्गते है. सोनिया ने वरुण को कॉल करके सब बता दिया था. वह से ओहलोग भी निकल पढ़ते है. राधा ने आरुषि और मेघा को भी बता दिया था तोह ओहलोग भी निकल पढ़ते है.
इधर यश बिलकुल पागलो की तरह ड्राइव कर रहा था और बार बार पीछे घुम्म के सिया को देख रहा था.
इशांत: बेटा संभल के ड्राइव करो. उसको कुछ नहीं होगा. शालिनी है ना.
यश कुछ नहीं बोलता बस गाडी चलता रहता है.
थोड़ी देर में हॉस्पिटल पहुंच जाते है.
यश सिया को गोड़ में लेके अंदर भागता है जहा शालिनी और अवि ने सब तैयारी करके राखी थी.
यश: बुआए देखिये ना क्या होगया है सिया को. पलासी इससे ठीककक करदिजीयी बुआए प्लीसीई.
शालिनी: यष्ठ शांततः होजावू कुछ नही होगा सिया को. मैं हु ना. तुम इसको इस स्ट्रेचर में लेता दो.
यश सिया को स्ट्रेचर में लेता देता है. तोह वार्ड बॉय सिया को एक रूम में ले जाते है. शालिनी भी अंदर चली जाती है.
यश वही बैठ जाता है. थोड़ी देर में सब आजाते है.
राधा: यष्ठ सिया कैसीई हैई कहा है वह.
यश: अंदर है. बुआ देख रही है.
किरण: पर आखिर अचानक इतना भुकार आया कैसी. हमारी सिया तोह बिलकुल फिट है.
यश: पता नहीं ममी. अचानक क्या होगया मेरी सिया को. पता नहीं कब से सेंसलेस है वह.
राधा: कुछ नहीं होगा यश. सिया ठिक्क होजायेगी.
थोड़ी देर बाद शालिनी बहार आती है.
यश: बुआए कैसी है सिया.
शालिनी: भुकार अभी भी है. ज्यादा भुकार की वजह से वह सेंसलेस होगयी. मैंने इंजेक्शन दे दिया है. थोड़ी देर में भुकार उतारर जाएगा और होश आजायेगा.
महक: पर शालिनी अचानक भुकार आया कैसी. कल तोह बिलकुल फिट थी. और पागलो के जैसी नाच रही थी. फिर अचानक कैसी.
शालिनी: भाभी उसको किसी चीज़ का बहोत बड़ा शॉक लगा है जो वह सेहन नहीं कर पायी. वह चीज़ उसके दिमाग में बैठ गयी जिसके वजह से उसको भुकार आगया. और उसकी आँखे देख कर पता चलता है वह बहोत रोई है.
महक यह सुनते hi शॉक से बेंच पे बैठ जाती है और रोने लगती है.
महक: मेरी बच्ची की यह हालत मेरी वजह से हुई है. ना मैं कल उसको दांती और ना उसकी यह हालत होती. यह सब मेरी वजह से हुआ है.
किरण और श्रुति उसके बगल में बैठ जाती है और उसको संभालती है.
दोनों: दीदी चुप होजाइये. मत रोइई. और बात क्या है. आपने आज तक कभी सिया को आँखे तक नहीं दिखाई और आपने कल उसको डांटा.
महक: सब मेरी गलती है. पहले मुझे उससे बात करनी चाहिए थी. उससे पूछना चाहिए था. मुझे पता था मेरी बच्ची कितनी सेंसिटिव है फिर भी मैंने उसको... यह बोल वह और रोने लगती है.
इशांत: मेहक्क़क़ चुप्प्प होजूओ. तुमने जानमुजज़ के नही किया. शन्तत होजावू.
महक: कैसी शन्तत होजाऊ इशांत. मेरी बच्ची आज मेरी वजह से हॉस्पिटल में है. हमने कभी उसके आँख में आंसू नहीं आने दिया. और कल वह मेरी वजह से रोई है.
इशांत: शांत होजाओ महक. सिया ठिक्क है कुछ नहीं हुआ है उसको.
सबलोग बस खड़े एहसाब देख रहे थे. उन्हें कुछ समाज नहीं आरहा था.
संजना: इशांत भैया आखिर बात क्या है.
इशांत: भाभी कल महक ने किसी बात से नाराज़ होक सिया को थोड़ा गुस्से मैं दांत दिया जो सिया बर्दाश नहीं करपायी.
संजना: पर ऐसा क्या होगया जो महक ने सिया को डांटा.
इशांत: वह बात यहाँ नहीं घर में.
यश बस वह चुप करके बैठा था. किसी से कोई बात नहीं कर रहा था. राधा उसके बगल में बैठी थी.
अभी यश को किसी बात से कोई मतलब नहीं था अभी बस उसको उसकी सिया बिलकुल ठिक्क चाहिए थी.
यश: बुआए होश कब तक आएगा.
शालिनी: 1 घंटे बाद.
यश: ठिक्क है. चलिए चलके हॉस्पिटल की फॉर्मेलिटी पूरी करदे.
अवि: भाई वह मैंने पहले hi करदी है. आप टेंशन ना ले.
फिर वह वह से सिया के रूम में जाता है और उसका हाथ पकड़ के बैठ जाता है.
इधर बहार सब चुप चाप बैठे हुए थी. महक को रह रह के रोना आरहा था.
वह उठ के सिया के रूम में जाती है जहा यश और राधा बैठे हुए थी.
महक: यष्ठ.
यश: यस माँ.
महक: ी ऍम सॉरी यश.
यश: आप ऐसे सॉरी मत बोलिये माँ. आपका हक़ बनता है हुम्हे डांटने का. बस मेरी सिया यह सेहन नहीं कर पायी.
महक: फिर भी हुआ तोह मेरी वजह से hi है ना.
यश: नही मॉम. मैंने कहा ना. आपकी गलती नहीं है. आप एक माँ है. और माँ का हक़ बनता है उसके बच्चो को प्यार करने का डांटने का.
महक को इस बात से उसकी परवरिश पे गर्व होरहा था. उसको पता था उसका बीटा कभी कुछ गलत नहीं करेगा. पर जो उसने सुना वह उसको नकार भी नहीं सकती.
राधा: माँ मैं नहीं जानती आप किस बात से इनसे नाराज़ हुई है. पर यश ने सही कहा है. आप एक माँ है. आपका हक़ बनता है डांटने का. इसीलिए आप ऐसे माफ़ी ना मांगे.
यश: हां माँ. माफ़ी हम मांगते है अगर हमारी वजह से आपको दुःख हुआ है. हम नहीं जानते आप क्यों नाराज़ हुई. पर अगर आप हमारी वजह से नाराज़ हुई है तोह हम माफ़ी मांगते है. ी ऍम सॉरी माँ.
महक कुछ नहीं बोलती बस सिया के पास आके उसका हाथ पकड़ के बैठ जाती है और उसके सर को सहलाने लगती है.
राधा बहार जाती है और थोड़ी देर बाद सोनिया के साथ महक और यश के लिए थोड़ा नाश्ता लेके आती है.
राधा: माँ यश लीजिये थोड़ा नाश्ता करलीजिये. मुझे पता है आपलोगो ने सुबह से कुछ भी नहीं खाया है.
दोनों: नहीं राधा. अभी भुक्क नहीं है. जब तक सिया को होश नहीं आता तब तक गले के नीचे निवाला नहीं उतरेगा.
सोनिया: बुआ भाई सिया अब ठिक्क है. प्लीज थोड़ा सा खा लीजिये.
दोनों के जोरर करने पे यश और महक थोड़ा खा लेते है. बहार आरुषि और मेघा ने भी बाकियों को खिला दिया था.
थोड़ी देर बाद सिया को होश आता है. तोह उसकी नज़र सबसे पहले महक पे पढ़ती है.
सिया महक को देखते hi बोलने लगती है.
सिया: माँ ी ऍम सॉरी माँ. अगर मुझसे कोई गलती हुई है तोह मुझे माफ़ करदिजिये. पर प्लीज मुझसे ऐसे नाराज़ मत होइए. यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आजाते है.
महक: सिया को गले लगते हुए. नही मेरी बच्ची. मैं तुझसे बिलकुल नाराज़ नहीं हु. तू तोह मेरी जान है. तेरे से मैं कैसे नाराज़ होसकती हु. और मुझे माफ़ करदे मेरी बच्ची. मैं तुझपे गुस्सा किया और मेरी वजह से तू हॉस्पिटल में आगयी. मुझे माफ़ मर्दे मेरी बच्ची.
सिया: नही माँ. आप ऐसे माफ़ी ना मांगे. आप तोह मेरी माँ हो. आपका हक़ बनता है मुझे डांटने का. जरूर मैंने कोई गलती की होगी तभी आपने मुझे डांटा था. ी ऍम सॉरी माँ. आप चाहे तोह मुझे और दांत ले पर प्लीज नाराज़ मत होइएगा.
महक: नही मेरी बच्ची. तुझे बिलकुल नहीं डाटूंगी और नाही नाराज़ होउंगी. बस तू पहले की तरह मेरी हस्ती खेलती पागल सिया बन जा. तू ऐसे बीमार मुझे अच्छी नहीं लगती.
यश: सियाआ. अब कैसी हो तुममम. ठिक्क हो ना.
सिया: मैंन ठीककक हु यशःह्ह.
यश: तुमने बहोत डरा दिया था सिया.
सिया: ी ऍम सॉरी यष्ठ.
राधा: अब कैसी हो सिया.
सिया: मैं ठिक्क हु राधा. मुझे माँ ने माफ़ करदिया और अब मुझसे नाराज़ भी नहीं तोह मैं बिलकुल ठीककक हु.
फिर सब अंदर आते है और एक एक करके सिया के हाल चाल पूछते है.
शालिनी: अगर सबका हाल चाल पूछना होगया हो तोह क्या मैं इस पागल का चेक उप करलु.
महक: हां शालिनी आओ और बताओ कैसी है अब यह. और इसको कब घर ले जा सकते है.
शालिनी आती है तोह सिया को चेक करती है.
शालिनी: तुझे ना किसी दिन सच में पागल खाने में भर्ती करदूंगी. पता है क्या हालत होगयी थी सबकी.
सिया: सॉरी बुआए.
शालिनी: भाभी भुकार तोह अभी भी थोड़ा है और शायद 1-2 बार वापस बढ़ेगा भी. कमज़ोर होगयी है महारानी. खाना नहीं देती हो क्या.
महक: इसको डाइटिंग से फुर्सत मिले तब ना. कितना बोलती हु ज्यादा से ज्यादा खाया करो. पर सुनती कहा है मेरी.
संजना: इस पागल का भी एहि है. हर वक़्त चलती ट्रैन में सवार रहती है. खाना तोह जैसे दुश्मन है इनका.
राधा अपनी माँ को देखती रहती है.
शालिनी: इसको फ्लू होगया है. जब भी भुकार बढ़ेगा यह दवाई दे दीजियेगा और पानी की पट्टी भी करदिजियेगा. और तुम ज्यादा से ज्यादा खाना खाऊ.
महक: तुम चिंता मत करो. इसका पूरा ध्यान रखूंगी. और अब तोह यह डबल खाना खायेगी.
सिया बस बीएड में बैठे हुए छोटे बच्चे की तरह मुँह बनायीं हुई थी.
इशांत: शालिनी इसको घर कब ले जाए.
शालिनी: होगया. अब इसको ले जा सकते है. भाभी इसको मेडिसिन टाइम पे देती रहिएगा. और अगर कुछ प्रॉब्लम हो मैं तोह हु hi.
महक: चिंता मत करो शालिनी. मैं ख्याल रखूंगी इसका.
फिर सब हॉस्पिटल से अपने अपने घर आजाते है.
महक जब सिया के रूम में आती है तोह देखती है सिया बेसुध सो रही है और उसके गालों में आंसू सुख चुके है. चेहरा थोड़ा मुरझा गया है.
महक को उसकी हालत देख कर आँख में आंसू आजाते है.
महक: यह क्या हालत बना ली है मेरे बच्ची ने. मेरी हलकी सी दांत में इसने यह हाल बना लिया है. गलती मेरी hi है. मुझे जब पता था यह कितनी सेंसिटिव है मुझे इससे नहीं डांटना चाहिए था. पर मैं भी क्या करती इसने गलती hi ऐसी की थी.
महक: सिया उठो सिया. देखो कॉलेज का टाइम होगया है उठ जाओ.
महक के बुलाने पे भी सिया कोई रिस्पांस नहीं करती.
महक सिया के पास जाके उसके सर में हाथ रखती है तोह बुरी तरह घबरा जाती है.
महक: हेय्य भगवन इसको तोह बहोत तेज़्ज़ भुकार है. पूरा शरीर भट्टी की तरह टप्प रहा है.
महक चिल्ला के यश और इशांत को बुलाती है.
महक: यशःह्ह्ह्हह्ह िशांतत्तततततत.
यश और इशांत महक की आवाज़ सुनके ऊपर दौड़ते है.
महक: यश इशांत सिया को बहोतट तेज़्ज़ज़ भुकार है. पूरा शरीर भट्टी की तरह टप्प रहा है और यह सेंसलेस होगयी है.
यश: क्याआआआ. सिया सिया उठो ना सियाआ. देखू सिया मैं यष्ठ तुम्हारा यष्ठ. सिया उठू ना.
इशांत: यश इसको तुरंत हॉस्पिटल लेके चलो. मैं शालिनी को बुलाता हु. जल्दी करूओ.
यश सिया को अपनी गोड़ में उठा के नीचे की तरफ भागता है और कार के बैक सीट में उसको सुलट देता है. महक उसके सर को अपनी गॉड में रख लेती है और उसके सर को सहलाने लगती है.
यश ड्राइव करता है और इशांत उसके बगल में बैठ जाता है.
इशांत: शालिनीई.
शालिनी: जी भैया.
इशांत: शालिनी जल्दी से हॉस्पिटल पहोंचो.
शालिनी: हॉस्पिटल क्या हुआ भैया.
इशांत: सिया को बहोत तेज़्ज़ भुकार है और वह सेंसलेस होगयी है. हम उसको हॉस्पिटल ले जारहे है. तुम जल्दी पहोंचो.
शालिनी: मैं अभी पहुंचती हु.
फिर कॉल कट होजाता है.
अवि: क्या हुआ माँ. मामाजी ने क्या कहा.
शालिनी: बीटा सिया को बहोत तेज़्ज़ भुकार होगया है और वह उसकी वजह से सेंसलेस होगयी है.
अवि: व्हाटटटटट.
शालिनी: मैं निकलती हु.
यह बोल शालिनी वह से भगति है.
अवि तुरंत आरव को कॉल करता है.
अवि: भाई सिया दी को बहोत तेज़्ज़ भुकार है और वह हॉस्पिटल में एडमिट है जल्दी पहोंचो मैं भी आरहा हु.
आरव: व्हाटट. मैं अभी आता हु.
किरण: क्या हुआ आरव.
आरव: सिया हॉस्पिटल में एडमिट है उसको बहोत तेज़्ज़ भुकार होगया है.
किरण: क्याआआआ.
आरव: यस माँ.
किरण: अमननननन सोनिया श्रुतियई संजययय.
सब: क्या हुआ.
किरण: सिया हॉस्पिटल में है जल्दी चलिये.
सब: व्हाटटटटट.
आरव: यस डैड. उसको बहोत तेज़्ज़ भुकार चढ़ा है. मुझे अवि का कॉल आया था.
सब तुरंत वह से भग्गते है. सोनिया ने वरुण को कॉल करके सब बता दिया था. वह से ओहलोग भी निकल पढ़ते है. राधा ने आरुषि और मेघा को भी बता दिया था तोह ओहलोग भी निकल पढ़ते है.
इधर यश बिलकुल पागलो की तरह ड्राइव कर रहा था और बार बार पीछे घुम्म के सिया को देख रहा था.
इशांत: बेटा संभल के ड्राइव करो. उसको कुछ नहीं होगा. शालिनी है ना.
यश कुछ नहीं बोलता बस गाडी चलता रहता है.
थोड़ी देर में हॉस्पिटल पहुंच जाते है.
यश सिया को गोड़ में लेके अंदर भागता है जहा शालिनी और अवि ने सब तैयारी करके राखी थी.
यश: बुआए देखिये ना क्या होगया है सिया को. पलासी इससे ठीककक करदिजीयी बुआए प्लीसीई.
शालिनी: यष्ठ शांततः होजावू कुछ नही होगा सिया को. मैं हु ना. तुम इसको इस स्ट्रेचर में लेता दो.
यश सिया को स्ट्रेचर में लेता देता है. तोह वार्ड बॉय सिया को एक रूम में ले जाते है. शालिनी भी अंदर चली जाती है.
यश वही बैठ जाता है. थोड़ी देर में सब आजाते है.
राधा: यष्ठ सिया कैसीई हैई कहा है वह.
यश: अंदर है. बुआ देख रही है.
किरण: पर आखिर अचानक इतना भुकार आया कैसी. हमारी सिया तोह बिलकुल फिट है.
यश: पता नहीं ममी. अचानक क्या होगया मेरी सिया को. पता नहीं कब से सेंसलेस है वह.
राधा: कुछ नहीं होगा यश. सिया ठिक्क होजायेगी.
थोड़ी देर बाद शालिनी बहार आती है.
यश: बुआए कैसी है सिया.
शालिनी: भुकार अभी भी है. ज्यादा भुकार की वजह से वह सेंसलेस होगयी. मैंने इंजेक्शन दे दिया है. थोड़ी देर में भुकार उतारर जाएगा और होश आजायेगा.
महक: पर शालिनी अचानक भुकार आया कैसी. कल तोह बिलकुल फिट थी. और पागलो के जैसी नाच रही थी. फिर अचानक कैसी.
शालिनी: भाभी उसको किसी चीज़ का बहोत बड़ा शॉक लगा है जो वह सेहन नहीं कर पायी. वह चीज़ उसके दिमाग में बैठ गयी जिसके वजह से उसको भुकार आगया. और उसकी आँखे देख कर पता चलता है वह बहोत रोई है.
महक यह सुनते hi शॉक से बेंच पे बैठ जाती है और रोने लगती है.
महक: मेरी बच्ची की यह हालत मेरी वजह से हुई है. ना मैं कल उसको दांती और ना उसकी यह हालत होती. यह सब मेरी वजह से हुआ है.
किरण और श्रुति उसके बगल में बैठ जाती है और उसको संभालती है.
दोनों: दीदी चुप होजाइये. मत रोइई. और बात क्या है. आपने आज तक कभी सिया को आँखे तक नहीं दिखाई और आपने कल उसको डांटा.
महक: सब मेरी गलती है. पहले मुझे उससे बात करनी चाहिए थी. उससे पूछना चाहिए था. मुझे पता था मेरी बच्ची कितनी सेंसिटिव है फिर भी मैंने उसको... यह बोल वह और रोने लगती है.
इशांत: मेहक्क़क़ चुप्प्प होजूओ. तुमने जानमुजज़ के नही किया. शन्तत होजावू.
महक: कैसी शन्तत होजाऊ इशांत. मेरी बच्ची आज मेरी वजह से हॉस्पिटल में है. हमने कभी उसके आँख में आंसू नहीं आने दिया. और कल वह मेरी वजह से रोई है.
इशांत: शांत होजाओ महक. सिया ठिक्क है कुछ नहीं हुआ है उसको.
सबलोग बस खड़े एहसाब देख रहे थे. उन्हें कुछ समाज नहीं आरहा था.
संजना: इशांत भैया आखिर बात क्या है.
इशांत: भाभी कल महक ने किसी बात से नाराज़ होक सिया को थोड़ा गुस्से मैं दांत दिया जो सिया बर्दाश नहीं करपायी.
संजना: पर ऐसा क्या होगया जो महक ने सिया को डांटा.
इशांत: वह बात यहाँ नहीं घर में.
यश बस वह चुप करके बैठा था. किसी से कोई बात नहीं कर रहा था. राधा उसके बगल में बैठी थी.
अभी यश को किसी बात से कोई मतलब नहीं था अभी बस उसको उसकी सिया बिलकुल ठिक्क चाहिए थी.
यश: बुआए होश कब तक आएगा.
शालिनी: 1 घंटे बाद.
यश: ठिक्क है. चलिए चलके हॉस्पिटल की फॉर्मेलिटी पूरी करदे.
अवि: भाई वह मैंने पहले hi करदी है. आप टेंशन ना ले.
फिर वह वह से सिया के रूम में जाता है और उसका हाथ पकड़ के बैठ जाता है.
इधर बहार सब चुप चाप बैठे हुए थी. महक को रह रह के रोना आरहा था.
वह उठ के सिया के रूम में जाती है जहा यश और राधा बैठे हुए थी.
महक: यष्ठ.
यश: यस माँ.
महक: ी ऍम सॉरी यश.
यश: आप ऐसे सॉरी मत बोलिये माँ. आपका हक़ बनता है हुम्हे डांटने का. बस मेरी सिया यह सेहन नहीं कर पायी.
महक: फिर भी हुआ तोह मेरी वजह से hi है ना.
यश: नही मॉम. मैंने कहा ना. आपकी गलती नहीं है. आप एक माँ है. और माँ का हक़ बनता है उसके बच्चो को प्यार करने का डांटने का.
महक को इस बात से उसकी परवरिश पे गर्व होरहा था. उसको पता था उसका बीटा कभी कुछ गलत नहीं करेगा. पर जो उसने सुना वह उसको नकार भी नहीं सकती.
राधा: माँ मैं नहीं जानती आप किस बात से इनसे नाराज़ हुई है. पर यश ने सही कहा है. आप एक माँ है. आपका हक़ बनता है डांटने का. इसीलिए आप ऐसे माफ़ी ना मांगे.
यश: हां माँ. माफ़ी हम मांगते है अगर हमारी वजह से आपको दुःख हुआ है. हम नहीं जानते आप क्यों नाराज़ हुई. पर अगर आप हमारी वजह से नाराज़ हुई है तोह हम माफ़ी मांगते है. ी ऍम सॉरी माँ.
महक कुछ नहीं बोलती बस सिया के पास आके उसका हाथ पकड़ के बैठ जाती है और उसके सर को सहलाने लगती है.
राधा बहार जाती है और थोड़ी देर बाद सोनिया के साथ महक और यश के लिए थोड़ा नाश्ता लेके आती है.
राधा: माँ यश लीजिये थोड़ा नाश्ता करलीजिये. मुझे पता है आपलोगो ने सुबह से कुछ भी नहीं खाया है.
दोनों: नहीं राधा. अभी भुक्क नहीं है. जब तक सिया को होश नहीं आता तब तक गले के नीचे निवाला नहीं उतरेगा.
सोनिया: बुआ भाई सिया अब ठिक्क है. प्लीज थोड़ा सा खा लीजिये.
दोनों के जोरर करने पे यश और महक थोड़ा खा लेते है. बहार आरुषि और मेघा ने भी बाकियों को खिला दिया था.
थोड़ी देर बाद सिया को होश आता है. तोह उसकी नज़र सबसे पहले महक पे पढ़ती है.
सिया महक को देखते hi बोलने लगती है.
सिया: माँ ी ऍम सॉरी माँ. अगर मुझसे कोई गलती हुई है तोह मुझे माफ़ करदिजिये. पर प्लीज मुझसे ऐसे नाराज़ मत होइए. यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आजाते है.
महक: सिया को गले लगते हुए. नही मेरी बच्ची. मैं तुझसे बिलकुल नाराज़ नहीं हु. तू तोह मेरी जान है. तेरे से मैं कैसे नाराज़ होसकती हु. और मुझे माफ़ करदे मेरी बच्ची. मैं तुझपे गुस्सा किया और मेरी वजह से तू हॉस्पिटल में आगयी. मुझे माफ़ मर्दे मेरी बच्ची.
सिया: नही माँ. आप ऐसे माफ़ी ना मांगे. आप तोह मेरी माँ हो. आपका हक़ बनता है मुझे डांटने का. जरूर मैंने कोई गलती की होगी तभी आपने मुझे डांटा था. ी ऍम सॉरी माँ. आप चाहे तोह मुझे और दांत ले पर प्लीज नाराज़ मत होइएगा.
महक: नही मेरी बच्ची. तुझे बिलकुल नहीं डाटूंगी और नाही नाराज़ होउंगी. बस तू पहले की तरह मेरी हस्ती खेलती पागल सिया बन जा. तू ऐसे बीमार मुझे अच्छी नहीं लगती.
यश: सियाआ. अब कैसी हो तुममम. ठिक्क हो ना.
सिया: मैंन ठीककक हु यशःह्ह.
यश: तुमने बहोत डरा दिया था सिया.
सिया: ी ऍम सॉरी यष्ठ.
राधा: अब कैसी हो सिया.
सिया: मैं ठिक्क हु राधा. मुझे माँ ने माफ़ करदिया और अब मुझसे नाराज़ भी नहीं तोह मैं बिलकुल ठीककक हु.
फिर सब अंदर आते है और एक एक करके सिया के हाल चाल पूछते है.
शालिनी: अगर सबका हाल चाल पूछना होगया हो तोह क्या मैं इस पागल का चेक उप करलु.
महक: हां शालिनी आओ और बताओ कैसी है अब यह. और इसको कब घर ले जा सकते है.
शालिनी आती है तोह सिया को चेक करती है.
शालिनी: तुझे ना किसी दिन सच में पागल खाने में भर्ती करदूंगी. पता है क्या हालत होगयी थी सबकी.
सिया: सॉरी बुआए.
शालिनी: भाभी भुकार तोह अभी भी थोड़ा है और शायद 1-2 बार वापस बढ़ेगा भी. कमज़ोर होगयी है महारानी. खाना नहीं देती हो क्या.
महक: इसको डाइटिंग से फुर्सत मिले तब ना. कितना बोलती हु ज्यादा से ज्यादा खाया करो. पर सुनती कहा है मेरी.
संजना: इस पागल का भी एहि है. हर वक़्त चलती ट्रैन में सवार रहती है. खाना तोह जैसे दुश्मन है इनका.
राधा अपनी माँ को देखती रहती है.
शालिनी: इसको फ्लू होगया है. जब भी भुकार बढ़ेगा यह दवाई दे दीजियेगा और पानी की पट्टी भी करदिजियेगा. और तुम ज्यादा से ज्यादा खाना खाऊ.
महक: तुम चिंता मत करो. इसका पूरा ध्यान रखूंगी. और अब तोह यह डबल खाना खायेगी.
सिया बस बीएड में बैठे हुए छोटे बच्चे की तरह मुँह बनायीं हुई थी.
इशांत: शालिनी इसको घर कब ले जाए.
शालिनी: होगया. अब इसको ले जा सकते है. भाभी इसको मेडिसिन टाइम पे देती रहिएगा. और अगर कुछ प्रॉब्लम हो मैं तोह हु hi.
महक: चिंता मत करो शालिनी. मैं ख्याल रखूंगी इसका.
फिर सब हॉस्पिटल से अपने अपने घर आजाते है.