The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 12 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)

इधर गेट के बहार कड़ी सुन के ठीक है मम्मी जी माय चाचा को जो अपने बोली वो दे आती हु ये कहके वो किचन में गई और गैस पे पानी रख दी और किचन में पुराण बर्तन ढूंढने लगी तभी उसे याद आया (कैसे राधे चाचा ने मेरी इज्जत बचाई और मम्मी पापा को राधे चाचा का उपकार मानना चाहिए लेकिन ये लोग उच्च नीच घटिया नसी रिवाज मान रहे है लेकिन माय ये सब नहीं मानती उन्हें अचे वाला वर्तन ुर अपना कम्बल दूंगी), ये सोचते हुए वो एक बार गैस पे रखे पानी को देखि तो वो गर्म हो रहा था और वह जल्दी से अपने बीएड रूम में गई और अपना कम्बल लेके किचन में ै और जब पानी गरम हो गई तब वो एक स्टील की बड़ी जग में पानी भर के जहा माय सोया था वह ै इधर आरती का बदन उन गुंडों की छेद चढ़ से पूरा बदन तूप रहा था न..

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झाड़ पाने की वजह से जिसकी कारन उसके पुरे बदन में इस ठण्ड के मौसम में भी पसीने बाह रहे थे खास कर उसकी क्लीन सेव आर्मपिट्स के पास कुछ ज्यादा hi बह रही थी जिसकी गवाही उसकी ब्लाउज़ दे रहा था गिला होक? वही हॉल में एते hi जहा माय चार पाई पे सोया हुआ था वो वह कड़ी होक धीरे स आवाज़ दी चाचा पानी पिणि है तो माय गरम पानी ले ै हु और ठण्ड लग रही है तो कम्बल भी ले हु, इधर माय पहले hi आरती की नग्गी बदन देख के गरम था और मेरा लुंड आज सोने का नाम hi नहीं ले रहा था और सायद ऊपर वाले ने मेरी सुन ली आरती को मेरे पास भेज कर? वही माय कम्बल से अपना सर निकल के हॉल के तेज रौशनी में देखा तो पाया की आरती मुझे hi देख रही थी और उसके मासूम खूबसूरत चेहरे पे एक हलकी और प्यारी वाली स्माइल थी और उसकी..

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मासूम चेहरे को देख के हम दोनों की नजरे एक दूसरे से मिल जाती है और माय क्या देखता हु की आरती एक बहुत hi सेक्सी साड़ी में मेरे सामने कड़ी थी एक स्टील के जग के साथ और माय उस साड़ी के खूबसूरती ुर नजाकत का पूरा आनंद उठाने लगता हु, इधर आरती मेरे साइड में आ जाती है और उस के हाँथ में बड़ा सा स्टील का जग था और वो मेरे बगल वाले छोटे से टेबल पे रखने के लिए थोड़ा झुकने लगती है? ये झुकाव इतना तो नहीं था पर आरती के ब्लाउज़ में कैद दोनों स्तन लटक जाये इतना जरूर था, आरती का कमसिन खुशबूदार बदन अब मेरे काफी करीब था उसके बदन की खुसबू पुरे हॉल रूम में फ़ैल जाती है और उसके पसीने से आने वाली इरोटिक महक मेरे नाक और लुंड दोनों सूंघ लेते है और दोनों को hi उस महक से काम इच्छा की भावना पैदा हो जाती है इधर आरती का

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पल्लू भी मनो मेरे बाजु में था वो भी सरकते हुए कहना छह रहे ते (लो देखो मेरे मालिकिन का बदन, घूरो हमें, लो अपने नयन से सुख इस गोरी चमड़ी का), मैं, सुनो बहु रानी?, आरती, मेरी आवाज़ सुन के मुस्कुरा कर मेरी और देखती है ुर अपनी सुरीली और धीमे आवाज़ में क्या हुआ?, मैं, एक बात कहु बहु कही तू ग़ुस्सा तोह नहीं करोगी मेरी बात सुन कर है?, आरती, कहिये न चाचा वैसे भी मुझे जल्दी सोने जाना हैं आपका पानी रख कर, मैं, बहु तू बहुत खूबसूरत है?, मेरी बातो को सुन आरती हल्का सा मुस्कुराती है और एक बार मेरी और देख के शर्मा जाती है लेकिन कुछ कहती नहीं है वही मैं, बात को आगे बढ़ाते हुए ये खूबसूरती मैने आज बहुत करीब से देखि है और यह खूबसूरती तुझे दूसरी लड़कियों से अलग बनती है और तुझे देख के मुझे ऐसा

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लगता है की तू अभी भी 15, 16 साल की है, वैसे तेरी शादी और तेरी उम्र कितनी ह?, आरती, मेरी बातो को सुन के बहुत ज्यादा hi ब्लश करती है ुर मान में ( हे भगवन माय कैसे भूल गई की चाचा मुझे नग्गी देख लिए है अब माय क्या जवाब दू इनका?), ये सोचते हुए धीरे से चाचा माय 18 की हु और मेरी शादी को 4 महीने से कुछ ज्यादा दिन हुए है, मैं, तेरे ये मासूम चेरे और तेरा ये फिगर देख के मेरी नज़र hi नहीं हटती और मान तो करता है सारा दिन तुझे ऐसे hi निहारते राहु लेकिन माय ऐसा नहीं कर सकता क्युकी हम दोनों का रिश्ता ससुर बहु वाले है वैसे तू मुझे चाचा की जगह पापा जी कह के बुलाया कर उसे सुन के बहुत खुसी होगी?, आरती, एक पाल तो शर्मा जाती है जब माय उसकी जिस्म की तारीफ कर रहा था और दूसरे hi पाल जब उसे पापा जी बोलने को बोलै तो..
 
आरती, को शर्माना अपना थोड़ा बुरा लगा इस लिए वो धीरे से ठीक है चाचा ओह सॉरी पापा जी ये कहके वो खिल खिला के हसने लगी और मैं, उसकी चेरे पे स्माइल देख के तू बहु ऐसे hi खिल खिलाती रहा कर तेरे इस मासूम चेहरे पे बहुत जचता है और ये जो तेरी दोनों आँखे और रेशमी बल है वो काफी ाचे लगते है और इस साड़ी में तू किसी मूवी की हेरोइन लगती ह?, ये सुन के आरती को शर्म महसूस होती है पर उसको काफी अच्छा भी लगता है बहुत दिनों बाद उसके पति बिरजू के अलावा किसी दूसरे ने उसकी तारीफ की थी वही आरती को अपनी तारीफ ुर सुननी थी इस लिए , आरती, ब्लश करते हुए ऐसा क्या देख लिया पापा जी मेरे में?, ये कह के वो थोड़ा झुक जाती है (क्युकी माय अभी भी चार पाई पे सोया हुआ था और माय बहुत hi धीरे या ये कह सकते है हम दोनों फुस फूसा के बात कर रहे थे),

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जिसकी वजह से उसका गरम बदन मेरे ुर करीब आ जाता है और उसके डीप ब्लाउज होने के कारन उसके दोनों लटकते हुए स्थान की गहरी दरारों को देखते हुए 'माय, तेरी खूबसूरती यानि मुर्दे को भी जिन्दा करदे तो मैं क्या चीज हु? लगता है भगवन ने तुझे काफी नाजुक हटो से बनाया है तभी तू इतनी खूबसूरत है, (यह सेक्सी बाटे कहते हुए मेरा बदन ुर बी ज्यादा गरम हो रहा था साथ hi साथ मेरा लुंड उस कम्बल के अंदर खड़ा हो चूका था एक कमसिन बदन मेरे इतने करीब थी की अगर मेरा मन करे तो माय उसको आपने बदन पे ले सकता था), तभी आरती, को महसूस होता है की मेरी आँखे उसके दोनों सथनो को टटोल रही है ुर उसका साड़ी का पल्लू भी ब्लाउज से हैट सा गया था, लेकिन आरती के दोनों हाँथ बिजी थे क्युकी वो बड़ा जग अभी भी उसके हांथो में था वो टेबल पे अभी राखी नहीं थी.

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वही उसको काफी अजीब लग रहा था की उसके पिता के उम्र का आदमी उसके बदन को ऐसे निगाहो से टटोल रहा था जोह किसी भी एंगल से अच्छी बात नहीं थी उसे वह अब असहज सा महसूस हो रहा था वही आरती के स्तनों की दरारे अब काफी हद तक खुल चुकी थी.. इधर मैं उसके 34 साइज की स्तनों को अपने आँखों से चाट रहा था और माय बड़ी बड़ी खायी जैसे दरारे और उसमे फसा कड़क सा आरती का मंगल सूत्र मेरे लुंड को ुर टाइट कर रहा था, मैं, अहह कितना नाजुक और कोमल है तू. इधर आरती, चूकते हुए कक्क क्या पापा जी?, मैं, तेरे हाँथ कितने नाजुक और कोमल हैं पर (बोलते वक़्त मेरी दोनों निगाहे आरती के ब्लाउज़ में बड़े से सैंट्रो पे थी). पर मन तो कर रहा है तेरे हांथो को अपने हाँथ म लेके उनके कोमलता को टटोल साखू साथ hi साथ महसूस भी कर पाव?,

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ये सुनते वक़्त आरती को अच्छा तोह लगा पर (अभी भी मेरी नजरे वही थी जोह उसको अब और ज्यादा शर्मसार कर रही थी), वही आरती जल्दी से पानी का जग टेबल पे रख के अपने बैडरूम निकलने लगती है की तभी मैं, बहु इस खटिये पे सोने से मेरी कमर में दर्द हो रहा है ये सुनते hi आरती जो अपने बैडरूम में जाने के लिए कदम बधाई थी वो रुक से जाते है और मेरी और देख आप फिर चार पाई पे क्यों सोये, (वो बहुत hi मासूमियत से ये पूछी?), मैं, वो क्या है न कामना भाभी ने मेरा इसी पे बिस्तर लगा दिया तो माय इस्पे लेट गया लेकिन अब पता चल रहा है की ये जुले जैसे ये चार पाई है और इसमें माय करवट भी बदल नहीं प् रहा हु और चारपाई के निचे से ये ठंडी हवा कुछ ज्यादा hi लग रही है जिसके कारन मेरी कमर में बहुत ज्यादा दर्द महसूस हो रहा है क्युकी माय कभी चार पाई पे आज

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तक सोया नहीं हु न इस लिए मुझे पता नहीं था की इस चार पाई पे सोने से मुझे कितनी तकलीफ का सामना करना पद सकता ह?, आरती, कुछ सोच कर रुकिए माय एक्स्ट्रा गद्दे और कम्बल ला देती हु सायद उससे आप को ठण्ड नहीं लगेगी और आपका कमर में दर्द भी सायद काम हो जाये ये कह के वो अपने बैडरूम में गई और थोड़ी देर में बहार ै गद्दा और कम्बल लेके और मुझे उठने की बोलो तो मैं अरे बहु मुझे बहुत ठण्ड लग रही है तू ऐसा कर माय थोड़ा खिसक जाता हु फिर तू बिछा दे और ये कहके माय चार पाई के दूसरी और हो गया और आरती एक बार मुझे देखि और गद्दा लगाने लगी (और यही उसकी सबसे पहली गलती शायद साबित हो और उसे क्या पता की माय अब उसे अपने झांसे में लेने की लिए उसके साथ कुछ भी कर सकता हु) वो मेरे मुँह के ठीक बाजु में आके कड़ी हो जाती है ुर झुक के गद्दा लगाने लगती है,
 
इधर मेरे मुँह के सामने आरती के ब्लाउज़ में कैद स्तन फिर से लटक जाते है पर इस बार वो मेरे काफी करीब थी जिसकी वजह से मेरी सांसे काफी गरम हो जाती है और मेरा लुंड लोहे जैसा टाइट हो जाता है?. अब्ब मेरे ठीक मुँह के ऊपर आरती का बदन था जोह अपनी कामुक महक मेरे नक् में सुंघा रही थी और मेरा नाक उस महक की तलाश में ऊपर हो रही थी और मेरा नक् से अब गरम गरम सांसे बहार निकल रही थी जोह अब्ब आरती को हलकी हलकी आपने स्तनों पे महसूस हो रही थी (लेकिन आरती नेक दिल की लड़की थी वो अपने बाप सामान आदमी की मदत करने की कोशिश रही थी लेकिन उसे कहा पता की ये कमीना उसके बदन को अपनी हवस बुझाने की सिर्फ वस्तु समझता है उसके अंदर इंसानियत नाम की चीज नहीं थी उसे जो लड़की पसंद आ जाती है उसे पा के hi रहता है चाहे उसके लिए कुछ भी करना..

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पद जाये और आज उसे आरती पसंद आ गई थी अब उस आरती को रिझाने में लग गया ता), इधर आरती गद्दे लगाने में मसगुल थी और गद्दे लगाने के चक्कर में और थोड़ा निचे झुक जाती है और मेरे लेते हुए बदन के और करीब आ जाती है उसका पूरा बदन मनो मेरे मुँह के ऊपर था और उसके कातिलाना डीप ब्लाउज में कैद 34 साइज के स्थान मेरे मुँह के ठीक ऊपर थे और उसके पसीने से भीगते हुए बदन से कामुकता की ऐसे लहर थी जोह मुझे कामवासना में डूबा के कही ले जा रही थी.. वही मेरे बाजु में हे आरती का पल्लू लटक रहा था काम इच्छा में डूबा माय आरती के उस पल्लू को आपने हलके से हांथो से निचे सरका देता हु और आरती के बदन की सुरक्षा करने वाला वो साड़ी का पल्लू वह से हैट जाता है ुर जब उसे महसूस हुआ की उसका पल्लू पूरा हैट चूका है उसके पुरे बदन से तो आरती को एक शॉक..

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सा लगता है जब वो देखती है की उसके ब्लाउज़ के ऊपर से उसके दोनों अधनंगे स्थान के गोरी उभर आज़ाद होक आपने नंग्नता को दिखा रहे थे लेकिन अब वोह गद्दा लगाना छोड़ भी नहीं सकती थी?, यहाँ मेरी हालत ख़राब हो रही थी जैसे जैसे माय उसके करीब आ रहा था तो मुझे उसका बदन और भी कामुक और सेक्सी लग रहा था ुर उसने अंदर रेड कलर की ब्रा पहनी थी जिसका स्ट्रिप अब माय उस डीप ब्लाउज से देख प् रहा था और आरती के शादी की निशानी यानि उसका मंगल सूत्र उसके दोनों संतरो के दरारों में धस हुई थी और दोनों चुके के गोरी चमड़ी पे नाजुक सा पसीने की बुँदे चमक रही थी जिसे चाटने का मन मेरा हो रहा था वही आरती के ब्लाउज़ का एक बटन आगे से खुला हुआ था जोह उसके नंग्नता को और भी बढ़ा रहा था सायद आरती आज निघ्त्य नहीं पहनी थी या सायद वो सोने की तैयारी..

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नहीं की होगी तभी तो वो रात के इस पहर में एक खूबसूरत साड़ी ब्लाउज ने थी, वही अब्ब आरती को खुद पे शर्म और मेरे ऊपर बहुत ग़ुस्सा आने लगा था वह आपने बदन पे मेरी गरम गरम सांसे महसूस कर प् रही थी पर फिर भी वोह गद्दे लगाना बंद नहीं करती है, कही न कही उसका बदन ऐसा करने पे मजबूर कर रहा था लेकिन आरती की आत्मा ाइआ न करने को कह रही थी वो अपने आप से लड़ रही थी और कास म कास में फांसी थी, इधर मेरा मुँह और भी करीब आ चूका था दोनों की नजरे एक दूसरे से मिल जाती है और आरती अचानक गद्दा लगाना बंद कर देती है और आपने साड़ी का पल्लू को ठीक कर hi रही थी की तभी वो देखती है उसका साड़ी का पल्लू मेरे काळा हांथो में था, जिसे देखते हुए वो मुँह से कुछ बोल पति तभी मेरा कला सा मुँह ब्लाउज के ऊपर से उसके बड़े बड़े स्तनों के पास आकर

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मेरी गरम गरम सांसे फेकने लगता हु मनो माय अपने सांसो से आरती के 34 साइज के स्तनों को गरम करना छह रहा हु, उधर आरती शर्म से पानी पानी हो चुकी थी और उसी वक़्त आपने दोनों हांथो से अपने आँखों को बंद कर लेती है उसे इस टाइम क्या करे कुछ भी सूझ नहीं रहा था वैसे भी 18 साल की लड़की को इतनी मातुरित्य कहा होती है और आज तो उसके नग्गे बदन को दो गुंडों ने बहुत छठा था साथ hi साथ उसके सास ससुर भी उसके नग्गे बदन को देखने पे मजबूर हो गए थे यहाँ तक की उसके ससुर भजन का लुंड उसके धोती के अंदर तम्बू बन गया था जो आरती ने एक बार देख ली जब उसको गुंडे लोग चुके चूस रहे थे तब जिससे वो बहुत शर्म शर हुई थी, इधर आरती की आँखे बंद देख मेरे, चेहरे पे एक शैतानी मुस्कान च जाती है और अपना सर उठा के अब्ब आरती के..
 
दोनों पके खरबूजे को सूंघने लगता हु वही मेरी नक् उसके बदन को ऐसे सूंघ रही थी जैसे कुत्ता अपना खाना खोज रहा हो और उसके बदन को सूंघते हुए कब मेरा मुँह उसके नंगे कंधो पे पहुंच गया पता hi नहीं चल पता है, उधर मेरी गरम गरम सांसे आरती को असहज कर रही थी लेकिन वो चाहे तो वह से जा सकती थी पर उसने अपनी आँख बंद कर ली थी उसको तो कुछ समाज नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है उसके साथ?, उसके पुरे बदन में उन सांसो की गर्माहट तैर रही थी साथ hi साथ उस गर्मी से पूरा बदन काम अग्नि म सिहर उठा था और उसके 34 साइज के स्तनों पे एक गन गुनी सी गरमी चढ़ चुकी थी, और अगले पल उसके कामुकता भरे बदन पे मेरी गरम सांसो वाला मुँह उसके कंदो को चुम लेता है और आरती के चेहरे पे एक अलग सा असहज खुमारी देखने को मिलता है,

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जोह शायद उसे भी नहीं पता होगा की वो क्या कर रही है अब आरती की भी सांसे गरम हो चुकी थी और उसकी बंद आँखे उसके गर्मी का साबुत दे रही थी साथ hi साथ उसके भरी स्थान अकड़ से गए थे एक कड़क पैन उसमे आ चूका था और कुछ घंटे पहले उसे वो पाल याद अत है की (कैसे गुंडों ने उसकी पूरा नग्गा कर दिया था उसके hi बाप जैसे ससुर और माँ जैसी सास के सामने और उन गुंडों ने कैसे उसके बुर से लेकर उसके स्थान तक अपनी जुबान फिर फिर का चाट रहे थे), ये याद एते hi आरती अपनी पूरी ताकत जूता के मेरे बदन को दूर करने की कोशिश करती है पर मेरा जैसे दानव जैसे बदन कड़क बना था जो आरती जैसी फूल जैसी नाजुक लड़की मुझे तस से मास नहीं कर पाती.. और माय अगले hi पल आपने गंदे काली हाँथ की कड़क उँगलियों को आरती के सुराही दर गर्दन पे रख देता हु,

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और उसके कोमल से पसीने से भरी गर्दन को आपने हटो से सेहला देता हु. और आरती आपने नाजुक से हाँथ से मेरे हांथो को पकड़ लेती है पर उसके पकड़ म वो दम नहीं था जो होना चाहिए था, वही माय आपने कड़क कड़क हांथो की उँगलियों को हलके हलके कामुकता भरे ऐडा से आरती के गोरी चिकनी पसीने से भीगी हुई गर्दन पे घुमा देता हु जिससे आरती का पूरा बदन मचल उठता है और अपने बंद आँखों से भी उसका चेहरा सारा बयां कर देता है और उधर आरती धीरे से फुस फुसती है अह्ह्ह्ह पापा जी क्या कर रहे हो?, आरती के मुँह से पहली कामुकता भरी सिसकारी उसके कोमल गुलाबी होंठो से आती है जोह साफ बया कर रही थी की उस की क्या हालत हो रही थी आपने नाजुक गर्दन पे, वही मेरे काळा हाँथ आरती के नाजुक गर्दन से हैट के धीरे धीरे निचे लाने लगता हु और आरती के दरारों को..

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महसूस करता हु उफ्फ्फ कितनी बड़ी बात थी मेरे लिए एक और लड़की जो 18 साल की खूबसूरत हुस्न की पारी के गोर बदन के स्तनों पे मेरा जैसे काळा बदसूरत आदमी के उंगलिया थी जोह अब आरती के ब्लाउज के ऊपर से उसकी सतानो की गहरायी नाप रही थी वही माय अपनी गंदे काळा हाँथ की 3 मोती उँगलियों को आरती के ब्लाउज़ में कैद चुके के दरारों के ऊपर से घुसा देता हु और पहली बार आरती अपने पति बिरजू के अलावा आपने कमसिन बदन पे किसी गैर मर्द का हैट महसूस करती हैं मर्द भी वो उसके बाप के उम्र का एक 40 साल का आदमी जोह उसके बदन के साथ अभी कहल रहा था आपने 3 उँगलियों को ब्लाउज में फसा के माय आरती का ब्लाउज खींचने लगता है और उसके दोनों स्थान के दरार को अपने उँगलियों स हल्का2 दबाने लगता हु, दृश्य कुछ ऐसा थे जोह देख किसी के भी लुंड से कामुक पानी निकल जाये..

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वही माय, इतना गरम हो चूका था की ब्लाउज को ऐसे खींचने लगा जैसे अब फाड़ hi दूंगा और उस दरार को माय ऐसे भींच रहा था मनो पूरा काबू प लिया हु (शायद प् भी लिया था जिस प्रकार आरती रियेक्ट कर रही थी), इधर आरती भी कही न कही अब अपने बदन की सुन रही थी उसका तप्त बदन मेरी छुअन से और ज्यादा गरम हो रहा था जिसके कारन वो छह कर भी कुछ रियेक्ट नहीं कर प् रही थी, जिसे देख के मेरी हिम्मत और बढ़ जाती है और माय आपने मुँह उठा के आरती के गर्दन के निचे ले जाता हु वही आरती को गरमा गरम सरब की गन्दी बदबू वाली सांसे उसके स्तनों के थोड़ा ऊपर और गर्दन के थोड़ा निचे महसूस हो रही थी वो गरम और गन्दी सांसे उसके पुरे बदन को मचलने पे कैसे मजबूर कर रही थी जिसके चलते उसके मुँह से ुम्हह.. आह्ह्ह्ह.. ुघठ.. की आवाज़ निकलने लगती है और..
 
अपनी आणखी बंद कर वोह ऊपर देखने लगती है इधर यहाँ निचे एक हाँथ स्तनों के टटोलने में बिजी था और मेरी गरमा गरम होंठ आरती के कमसिन बदन के भाग को चुम लेती है उस चूमने में एक क्रूरता थी जोह आरती को महसूस होती है पर फिर भी वोह स्पर्श गरम होंठो की आपने कोमल मुँह से सिसकारी को छोड़ने में मजबूर कर देता है आह्ह्ह्हह्ह दूर हो जाओ पापा जी, ये कोमल आवाज़ के शब्दों को सुन मेरी गन्दी सी जुबान बहार आ जाती हैं और माय उस गरदन के निचे वाले हिस्से को ऐसे चाट लेता हु मनो कोई गरम आइस क्रीम जो गर्माहट से पिघल रही हो उस गन्दी जबान को आपने गर्दन के निचे पाकर?, आरती लाल.. लाल ..हो जाती है और अपनी आँखे खोल देती है, यहाँ निचे मेरा एक हाँथ आरती के कोमल कमसिन बदन के एक स्तन को ब्लाउज के ऊपर से पुरे कब्जे में ले लेता हु और बड़े बड़े स्तन जोह 2 बटन..

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के सहारे ठीके हुवे थे उस गोर बदन को अपने हटो में भींच के पूरी ताकत से मसलने की तयारी कर लेता हु ऊपर मेरी जुबान हवस की लार से पूरी बिग चुकी थी जो अब आरती के ठीक स्तनों के दरार के ऊपर अपनी कुत्ते जैसे लार गिराने में तैयार हो चुकी थी और मेरा वो हाँथ और गीली जुबान एक साथ hi आरती के बदन पे हमला बोल देती है कड़क खुरदरा हाँथ ुसस्स अप्सरा के बड़े से स्तनों को इस्सस कदर बीच देते हु की आरती के पुरे बदन में कामुकता भरी और ग़ुस्से की भावना दौड़ पड़ती है और मुँह से आह्हः.. सशः ोुछः.. ऊह्ह्ह्ह.. माआ.. नहीं.. आह्हः ये चीख पुरे हॉल में फ़ैल जाती है और मेरी कुत्ते जैसे जुबान आरती के बड़े बड़े दोनों स्तनों के खूबसूरत दरार में जेक उसके दरार को चाट लेती है इस हमले से आरती के आँखे लाल हो जाती है और स्तनों में हो रहा दर्द उसके घुसे को और

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बढ़ा देती है और वो अपने हाथ को उसी दर्द से आगे ले आती है और पुरे ताकत से पीछे हैट के एक जोरदार तमाचा मेरे काळा गाल पे मर देती है और चटकककक.. कर के पुरे हॉल में ये आवाज गूंज जाती है आँखों में अंगार और टेप लिए हुए आरती, हैट हरामी गन्दी नाली के कीड़े नीच जाट तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे बदन को चुने की उम्र का लिहाज कर के छोड़ रही हु वर्ण अभी क अभी इस ठण्ड वाली की रात में तुझे यहाँ से निकल देती औकात क्या है तुम जैसो की अगर फिर से ऐसा कुछ किये तो अभी के अभी पापा जी और मम्मी जी को बुला के सब कुछ बता दूंगी समझे?, इधर मैं, अपने मान में (साली हराम जादि कुछ ज्याद hi बोल गयी रण्डी कुत्तिया कही की इसको जितना सीधा समजा ये तो उससे भी ज्यादा तीखी मिर्ची काटने वाली कुत्तिया निकली इसको तो माय औकात दिखाऊंगा की कैसे एक गंदे नाली के कीड़े और नीच जाट का

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लुंड जब उसके हर छेद में घुस के अपना वंश इसके छूट में छोड़ेगा तब इस रण्डी की मेरी औकात समझ आएगी?), उधर आरती ग़ुस्से से भरी अंगार वाली खुद को कोस रही थी की वो राधे चाचा के पास क्यों ै और अपने मन और दिमाग म मुझे गन्दी गन्दी गलियां दे रही थी पर निचे आरती को दोनों जांघो के बिच कुछ गिला गिला सा महसूस हो रहा था वोह गिला पैन जोह कुछ और hi बयां कर रहा था उसके दोनों जांघो की बिच कामर्स से भरी योनि ने किसी कारन आपने अमृत को त्याग दिया था और वोह आरती का अमृत दोनों जंगो के बिच योनि को भिगो के उसके कामवासना को और hi भड़का रहा था?, वही आरती मुझे सुना के अपने साड़ी की पल्लू को सवारते हुए वह से अपने बैडरूम में जाने के लिए मुड़ती है की तभी मैं बिस्तर से उठ के उसके हांथो को पकड़ लेता हु बड़े hi रफ़ स्टाइल में और..
 
Episode 5ा

तभी मैं उसके कोमल हाँथ को कास के पकड़ लेता हु इधर आरती, जो बहुत hi गुस्से में थी और उससे आपने हांथो पे घुटन से महसूस होती है क्यों की मेरे मरदाना हांथो से आरती के नाजुक कोमल हाँथ को काफी कास के पकड़ा हुआ था, ुर कुछ सेकंड ऐसे हे आरती अपने हाँथ पे मेरे सख्त और कड़क हांथो को महसूस करती है और मेरे हैट का रौग़नेस्स से आरती का गोरी गोरी कलाई हल्की लाल हो जाती है जिसे देखते हुए छोड़ो मेरा हाथ वर्ण मैं सूर मचा दूंगी?, मैं, उसके गुस्से को देख के अरे एक बार मेरी बात तो सुन ले बहु, आरती, मुझे आपकी कोई बात नहीं सुननी आप भी उन् गुंडों की तरह hi हो जो मुझे भोगने चाहते थे, मैं, अरे बहु मैं वैसा होता तो उनके साथ साथ तुझे भोग सकता था? वो गुंडे मुझे भी तो ऑफर किये थे लेकिन माय इतना गिरा हुआ इंसान नहीं हु, (माय अब आरती को फिर..

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एक बार अपने झांसे में लेने के लिए अपनी मीठी मीठी बाते उसपे चोर दिया और देखने लगा की मेरा तीर सही ठिकाने पे लगा या अपने निशाने से चूक गया) इधर आरती, कुछ सोच कर जो अपने हाँथ मेरे द्वारा पकड़े जाने से चाट पता रही थी वो अब बंद कर देती है, वही मैं, मन में (वहहहह मैने जो अपनी मीठी मीठी बातो का तीर आरती पे छोड़ा था वो काम कर गया अब देख तेरे थप्पड़ का जवाब कैसे माय देता हु?) इधर उसका चाट पटना बंद होते hi माय धीरे2 उसका कास के पकड़ा हुआ नाजुक कलाई को अपने कड़क हांथो से छोड़ देता हु, वही आरती, को आपने नाजुक हांथो में अभी भी मेरा कड़क हाँथ महसूस हो रहा था उस पल को देख के और महसूस कर के उसको कुछ अलग सा फील होता है? उसको एक अलग सा करंट लगता है और आपने उँगलियों से मनो मेरे कड़क हांथो की लकीरो को..

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महसूस करती हुई छोड़ देती है जिससे उसके चपटे बदन में एक अलग से ऊर्जा का संचार महसूस करती है, इधर मैं, उसका हाँथ छोड़ते hi फिर से बिस्तर पे बैठ जाता हु वही आरती, मेरे जस्ट बगल में कड़ी थी और मैं, उसके कामुकता से भरे बदन को देख कर मेरा लुंड जो थोड़ी देर पहले उसके गुस्सा करने से सिकुड़ सा गया था? लेकिन अब उसके संत होते hi मेरा लुंड फिर एक बार काम अग्नि में तपने लगा? (बस अब कुछ देर और इस मासूम सी दिखने तीखी मिर्ची को अपने मीठी मीठी बातो के झांसे में लेना था? है थोड़ा बहुत डर तो लग रहा था की कही उसके सास ससुर सो के उठ न जाये लेकिन मुझे आरती ने hi बताया था की उसकी सास के पैरो में बहुत दर्द होता है इस लिए एक बार बिस्तर में घुसने के बाद वो जल्दी बहार नहीं आती है इस लिए मेरा जो डर था वो कुछ काम हो गया था,

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और मुझे बस ये ख्याल रखना है की आरती को सूर मचने नहीं देना है साथ hi साथ उसे अपने मीठी मीठी बातो में फसा के hi इस मासूम सी दिखने वाली एक 18 साल की शादी सुदा लड़की को अपना बना सकता हु?), वही आरती, का अब थोड़ा गुस्सा काम हो गया था इसलिए जो अपना काम ख़तम नहीं कर पाई थी वो फिर से सुरु करना चाही और मेरे करीब आ के पापा जी थोड़ा खिसको मैं गद्दा आपका लगा नहीं पाई थी? ये बात बहुत hi फुसफुसा के की जैसे उसे डर था की उसकी सास ससुर सुन न ले वही उसकी फुसफुसाहट वाली बातो को समझ के मेरे दिल में एक उम्मीद बांध गई की (आरती को मैं अपना बना सकता हु लेकिन उसके लिए मुझे फुक फुक के कदम रखना होगा वैसे भी ज्यादा रात नहीं हुई है अभी तो मेरे पास बहुत घंटे पड़े है इसे गर्म करने को अब देखना होगा मेरी बातो में ये आती है या नहीं..

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साथ hi साथ इसके थपड का बदला मुझे सूत समेत वसूल करना ह साली रण्डी से), इधर आरती, की बातो को सुन के माय चार पाई के एक दम ऊपर हो गया जिसकी वजह से माय देवल पे अपना पीठ टिका लिया और अपने पेअर को चार पाई पे फैलाये hi रखे रहा, वही आरती, फिर से झुकी गद्दा लगाने के लिए और मुझे फिर से वही दिल कास नज़ारा मिला उसकी ब्लाउज़ में कैद आधे चुके फिर एक बार बहार को झाकने लगे, उधर आरती ने ये जान बुज कर नहीं कर रही थी लेकिन जो हो रहा था उससे मेरे काळा नाग जैसे दिखने वाला लुंड पंत में अपना फैन फैला रहा था और कुछ hi देर में वो पुरे विकराल रूप म आके विद्रोह करने वाला था, वही आरती, (वह से जल्द हे गद्दे लगा के हॉल से निकलना चाहा रही थी पर आज उसके किस्मत और नियति को कुछ और hi मंजूर था), इधर गद्दे लगते हुए आरती का कामुक गदर्य हुआ बदन मुझे काफी..
 
तंग कर रहा था वही आरती, जब झुक के गद्दे लगा रही थी तब उसके पीछे से देखने पे मुझे उसके ब्लाउज के निचे और ऊपर गोरी गोरी नंगी पीठ और एक दम पतली कमर मुझे आकर्षित कर रही थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था की आरती इतनी ठण्ड के मौसम म भी उसके बदन में इतने पसीना क्यों निकल रहा था (लेकिन मुझे ये नहीं पता था की आरती उन गुंडों की छेद चढ़ से अपनी काम अग्नि से तूप रही थी), इधर पसीने से भीगी हुई आरती की कमर जन्नत से काम नहीं थी और उसका बदन मेरे काफी करीब होने से मुझे और भी तड़पा रहे थे और मेरे पंत के अंदर कला नाग पूरा तम्बू बना चूका था जिसपे अब बस हाँथ रखने की देरी थी और अगले hi पाल काम उत्तेजना में तड़प रहा मैं अब पंत के ऊपर से अपने काळा नाग पर अपना कड़क हाँथ रख देता हु और लुंड को थोड़ा सा मसल देता हु,

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जिससे कारन मेरे मुँह से आह्ह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल जाती है और आरती को भी अब्ब भनक लग जाती है की मैं क्या कर रहा हु पर वोह अब अपने हाँथ में लिए काम को अंजाम देके बस वह से निकलना छह रही थी, पर यहाँ माय आपने पूरा कण्ट्रोल खो चूका था और अपने पंत के ऊपर से अपने बड़े से फुले हुए लुंड को मसलना शुरू कर देता हु, आरती अपने नजरे तिरछी कर के देखती है तोह उसको आपने आँखों पे विश्वास नहीं होता है वो बस तिरछी निगाहों से देखती जाती है उसकी नजरो के सामने माय आपने मुसल लुंड को मसल रहा था मनो माय आपने लुंड का आकर आपने इस हरकत से आरती को दिखाना छह रहा था और हुआ भी वैसा hi आरती वो देख के उसके पुरे बदन में अजीब से ऊर्जा दौड़ जाती है और वोह अपनी तिरछी नजरे वह से नहीं हटा प् रही थी उसके आँखे उस शैतानी हरकत पे ऐसे गड चुकी थी जैसे कोई लोहा मैगनेट की..

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तरफ आकर्षित होता हो? और आरती का कामुक बदन पुरे हॉल रूम में एक अलग से खुसबू छोड़ने लगता है जिसमे वो खुद भी मदहोश होना पर मजबूर हो जाती है, इधर मैं, आपने लुंड को मसलते हुए थोड़ा आरती की तरफ आगे बढ़ता हु जिसे देख आरती को कुछ समाज नहीं आता और वो गद्दा लगाना बंद करके वह से भागना चाहती थी लेकिन तृप्त बदन उसका वह से हिलने भी नहीं देते है, वह बस चार पाई के बगल में कड़ी रह के मेरे की हुई हरकतों को देख रही थी, वही मेरी नजरे आरती की पसीने से लटपट हुई नंगी कमर पे hi तिकी हुई थी भले hi माय काम उत्तेजना में अपना आप खो चूका था पर था बड़ा मांजा हुवा खिलाडी कुछ देर पहले जब उसने मुझे थपड मरी थी तो उससे मैने कुछ सीखा था और माय जान चूका था की आरती को जबरदस्ती वाली प्यार नहीं बल्कि मीठा ुर कोमल दर्द वाला प्यार

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पसंद है (क्युकी कुछ लड़कियों को रफ़ प्यार पसंद आता है तो किसी को सॉफ्ट तरीके वाला लव पसंद आता है) और मैं, अब्ब उसे वही मीठा प्यार देने जाने वाला था और कुछ hi पल में मेरा कड़क हाथ आरती के कामुकता भरी साड़ी पहने हुए बदन के नंगी कमर में पहुंच जाता है ुर उसी पल आरती के चेहरे के एक्सप्रेशन थोड़ा बदल से जाते है और उसके पुरे बदन में करंट सा लगता है, वही मेरे कड़क हांथो की ताकत उसे अपने नंगे नाजुक कमर पे महसूस होती है जोह उसे काम उत्तेजना के भाव में डालने के लिए काफी थी, इधर मैं, बड़े hi कामुक अंदाज में अपना कड़क हाँथ आरती की कमर से होते हुए उसके नंगे पीठ पे घूमने लगता हु और न चाहते हुए भी उस मीठे छुअन से आरती की सांसे ऊपर निचे होने लगती है ुर उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती है और इस शारद वाली हवा में भी उसको गर्मी का अहसास होने लगता है

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वही आरती, को इस वक़्त मेरे ऊपर काफी गुस्सा आ रहा था पर वो छह कर भी कुछ रियेक्ट नहीं कर प् रही थी क्यों की उसका बदन उसका साथ नहीं दे रहा था, और उसके बदन में जो हड़कंप मच चूका था उससे उसके पुरे बदन की गर्मी मुझे उसके पीठ पे महसूस हो रही थी वही कामुकता से सहलाते हुए हाँथ मनो सैप की तरह आरती की नंगी पीठ पे कब्ज़ा कर चूका था और आरती धीरे धीरे जैसे मेरे कब्जे में आ रही थी?, जैसे न वो वह से हिल रही थी? न वो मुझे कुछ कह प् रही थी? न hi वो मेरा विरोध कर रही थी? कामुकता में डूबी आरती धीरे धीरे उस समंदर में दुब रही थी और इसकी गवाही उसकी बंद होती हुई पलके साफ गवाही दिए रही थी, (क्युकी आरती पिछले कई महीनो से अपने पति से दूर थी उसका पति सहर में काम जो करता था वो हर 3 महीने के बाद
 
घर आता और 5 दिन रुकने के बाद फिर से सहर अपने काम पे चला जाता था) वही आज जब उन गुंडों ने आरती के नग्गे बदन से खेला तो आरती जो कई महीने से अपने काम अग्नि में तूप रही थी वो उन गुंडों की वजह से उसकी कामवासना और भड़क गई थी और आरती न झाड़ पाने की वजह से उसका बदन इतना गरम हो चूका था की इस शारद की रात में भी उसके जिस्म पसीने पसीने हो चुकी थी वही उन गुंडों के छेद चाँद के बाद जब मेरे हाँथ उसके बदन में लगे तो वो दूसरी बार अपने काम अग्नि में जलने लगी, ये सब देख मेरा लुंड और भी मचल जाता है और मेरा कॉन्फिडेंस सातवे आसमान में पहुंच जाता है और पीछे घूमता हुआ हाँथ वोह अब्ब कमर से छूटे हुए बड़ी hi नाजुकता से आरती के नंगे नैवेल पे सहलाना शुरू कर देता हु मेरे इस वॉर

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से मासूम आरती तेजी से आपने सांसे लेने लगती है मनो उससे साँस लेने में कोई प्रॉब्लम हो रहा हो इधर माय अब अपने पांचो उँगलियों को उसके नाजुक और गोरी कमर पे हलके से दबा देता हु जिससे आरती को मीठे दर्द का अनुभव होता है और उसके मुँह से आज की दूसरी सिसकारी बहार निकल पड़ती है, जो सिचुएशन को और भी गरम करने ने मदत करती है वही आरती, आह्ह्ह्ह.. ओछ्ह.. ुंहःहः.. सष्ठ उस आवाज से मेरा कला नाग और भड़क जाता है और वोह मनो अपने मालिक से विनती करता है की प्लीज मुझे देखने डोह उस कामुक अप्सरा को जिसे देख मैं आपने रास उसके यौवन पैन छोड़ सकू पर यहाँ मैं आपने hi मजे में आरती के पुरे बदन से खेलने लगता हु कमर से होते हुए अब मेरा आत्मविश्वास और बढ़ चूका था बढे भी क्यों न आरती मेरे सामने निढाल होक लम्बी लम्बी सांसे

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जोह ले रही थी जैसे आह्ह्ह्हह.. सशह्ह्ह्ह.. हहममम.. ऊह्ह्ह्ह.. हहहयययय.. औछहः इस्सस आवाज से तड़प रहा मैं आपने हैट साड़ी के ऊपर से उसके गदरायी हुई करीब जो करीब 36 साइज की मोती मोती कासी टाइट गांड पे ले जाता हु और हल्का सा पर आरती को अच्छा लगेगा उस मात्रा म मैने उसके गांड को दबा देता हु जिसकी वजह से आरती, औछहहह.. स्स्स्सस्छ्हः.. ह्ह्ह्हह्म्म औछहहहहह.. ुंहःहःह.. की ऐसी सिसकारियां निकलती है वही आपने बदन के कीमती भाग को ऐसे गैर मर्द के हाँथ में देख आरती का ग़ुस्सा अब सातवे आसमान पे पहुंचना चाइये था पर यहाँ तोह वो आपने गांड को उस हाँथ में ऐसा त्याग चुकी थी मनो मेरा वो ऐडा उसे पसंद आयी हो.. ऐसा लग रहा था मनो मैं उसके मचलती बड़ी से गांड पे आपने कब्ज़ा जमा चूका हु और आरती उस पल का मजा ले रही हो शायद हो भी कुछ वैसा..

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hi रहा था अब माय कास के वोह गांड दबा देता हु जिससे आरती के दोनों गांड के द्वार जैसे फांके एक दूसरे पे घिस से जाते है, आरती, आअह्ह्ह्हह.. सस्शह्ह्ह्ह.. औछहहह.. ऐसा मत करो आअह्ह्ह पापा जी?, ये आवाज़ सुन मेरा लुंड का टोपा मचल जाता है (क्या इरोटिक और मधुर आवाज़ थी जो किसी के भी लुंड को खड़ा करने की ताकत रखती टी), अब मुझे ये सब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था मेरे सामने आरती की सांसे ऊपर निचे हो रही थी और मेरा लुंड पंत में नाग जैसा फैन निकल के खड़ा हो चूका था मनो वो भिक मांग रहा था की मुझे बहार निकालो देखने दो उस हुस्न को जो मुझे पागलो की तरह तड़पा रही है जोह मुझे यहाँ लेन पे मजबूर कर दिया जिसको देख मैंने सलामी दी अह्ह्ह देखो मुझे वो जिस्म जिसको नोचने के लिए ये गरम लावा भड़क रहा है ुर
 
उसी पल मैं आपने पंत को खोल के सरका देता हु और मेरा कला एनाकोंडा सैप उछाल के बहार आके आजादी की ख़ुशी में मचलने लगता है और वो कला लुंड जब आरती के खूबसूरत बदन को देखता है तोह मनो उसके राश को पिने के लिए तड़प उठता है और आरती को देख आपने आप मचलते हुवे सैप की तरह हिलने डुलने लगता है, ुसस्स लुंड के बहार आते हे आरती जो आपने नज़र दूसरे तरफ थी जिसकी वजह से उसको कुछ दिखा नहीं देता पर एक अजीब से गंध उसके नक् में घुस जाती है जैसे कोई बहुत पुराणी चीज कैद में हो और अब छूटने की खुसी में वोह गंध छोड़ रही हो वह लुंड की गन्दी स्मेल जो बहुत दिनों से साफ़ न होने की वजह स गंध छोड़ रही थी वही गन्दी बदबू आरती के नक् में अपनी जगह बना रही थी?, इधर मेरा लुंड का गुलाबी टोपा आरती के रसीले होंठो को देख पिघल सा जाता है,

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इधर लुंड की गन्दी बदबू से आरती का पूरा बदन जैसे कम्प उठता है वो बस उस सुगंध को महसूस कर रही थी? लेकिन उसे तोह पता भी नहीं था की वोह जिस चीज के गंध को सूंघ रही है आगे जाके वो उसको कितना महंगा पड़ने वाला था, यहाँ पीछे से आरती की साड़ी के ऊपर से गांड को दबाने, सहलाने और अपने लुंड को आजाद करने के बाद मेरे चेहरे पे एक अजीब तरह की हसी च जाती है मनो मुझे ऐसा लग रहा था की उसकी दुखती नस यानि कमजोरी का पता चल गया हो? माय अब उस कमजोरी का फायदा उठाना च रहा था और माय वैसा hi करता भी हु? फिर मैं आपने एक काली मोती ऊँगली को जोह एकदम कड़क थी उसको अब्ब साड़ी के ऊपर से आरती के 36 साइज की गांड के बिच की दरार को दबना चालू कर देता हु मनो धीरे धीरे माय उस गदरायी हुई गांड के लाइन को अपने ऊँगली से टटोल के कास के दबा रहा था जिससे..

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आरती, ुहम्म.. नन्ही.. ुहम्म.. आह्ह्ह्ह.. ुघम्म.. उफ्फ्फ्फ़.. ुम्हह.. सशह्ह्ह.. ओह्ह्ह आरती की सिसकारियां उस हरकत के साथ तेज हो चुकी थी यहाँ दूसरे हाँथ में मेरा लुंड आरती के पुरे बदन को और उसके कामुक एक्सप्रेशन को टटोल रहा था ुर देर न करते हुए माय लुंड को अपने हांथो के लेके आरती को देख हिलना शुरू कर चूका था और मेरा लुंड उस के बदन को देख आगे पीछे आगे पीछे हो रहा था मेरे काळा लुंड के गुलाबी सुपडे पे परइ छुम निकलना शुरू हो चूका था जिसकी गंध आरती के नाक तक पहुंच रही थी, वही आरती अपने बदन पे होता हुआ वॉर सेह नहीं प् रही थी उसके गांड में एक अलग सी हलचल मचल चुकी थी उसकी गांड अपने गांडू होने का मनो साबुत दे रही थी पर आरती वो साबुत एक्सेप्ट करने को तैयार hi नहीं थी उसे बस ये सब एक सपना सा लग रहा था ऐसा सपना जो उसके जिंदगी को पूरा

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बदलने वाला था कुछ hi देर में ुर आरती को चाप चप्प्प ऐसे आवाजे सुनाई देती है जो काफी जोर पकड़ चुकी थी वोह आवाज उसके कानो में गूंज रही थी और जेहन में भी च.. पपप.. छप्पपपपप.. छप्पपपपप.. छप्प्प्प, आरती अपनी नाजुक से आँखे खोल देती है और उसके सामने का दृश्य देख कई सरे इमोशंस उसके आँखों के सामने से होक निकल जाते है उसके सामने एक 40 साल का मातुरे कला आदमी आपने काळा नाग को बेदर्दी से हिलाये जा रहा था और वोह कला नाग आरती को देख अपना फैन फैला रहा था जैसे कह रहा हो की अब्ब ऐसा वैसा कुछ मत करना वर्ण अपना जहर तेरे मुँह या बुर में छोड़ दूंगा वही काळा नाग का गुलाबी सूपड़ा आरती के जेहन में बस जाता है और वोह दृश्य को देख उसके जेहन में डर, कामुकता, घिन, गन्दगी और आकर्षित होने के भाव जेहन से होक उसके बुर में बिजली चमकने लगती है,

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जोऊ उसे अपनी आंखे फिर से बंद करने पे मजबूर कर देती है इधर मेरा अंत का समय नजदीक आ रहा था जो एक नयी शुरुवात का आरम्भ था लेकिन माय अपने काम राश को ऐसे बर्वाद नहीं करने वाला था इस लिए मैं आरती की तरफ देखा तो चार पाई की बगल के कड़ी थी अपने आँखों को बंद किये हुए वही आरती यहाँ से भाग सकती थी लेकिन वो नहीं भागी इस का मतलब साफ़ था कही न कही वो भी इस पाल का एन्जॉय करना चाहती होगी सायद, इधर मेरा लुंड जो पंत के बहार था उसे माय फिर से पंत में दाल के चार पाई से उठा ुर उसके पीछे से पकड़ लिया की तभी, आरती, आह्ह्ह्ह.. माआ.. छोडोऊ.. मुझे ुंहःहः.. आह्ह्ह्हह.. छोड़ू.. पलासी, मैं, सस्शह्ह्ह्हह्ह चुप्प्प्प हो जोऊ,.. ये बोल के माय जल्द बाजी में आरती का मन पकड़ने जाता हु (क्युकी मुझे डर था कही उसके सास ससुर इसका सोर को सुन के कही जग न जाये),
 
और इसी जल्द बाजी के चक्कर में गलती से मेरे हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से एक बड़े गोल चुके से जा टकराता है और टकराने से मुझे तो जैसा करंट सा लगता है उस अहसास से लेकिन पकडे जाने का भी दर था इसलिए माय किसी तरह आरती का मु पकड़ के धीरे आवाज़ में चुप रहो कोई सुन लेगा. आरती, मेरी कैद से आज़ाद होने के लिए पापा जी छोड़ो मुझे ये क्या बतमीजी hai..(Arti मेरे इतने करीब होने से दर जाती है उसे कुछ नहीं सुजाता है वो बार बार मेरे से अलग होने की गुहार लगाने लगती है), वही माय उसे पकडे हुए hi आगे आ जाता हु और उसे अपने साइन से तितली पकड़ के सत्ता लेता हु और उसके 34 साइज की चुकी जो एक दम खड़े महसूस हो रहे थे वो मेरे सख्त साइन में दुब से जाते है और इस तरह मेरे गले लगने से मेरा लुंड बार बार झटके मरने लगता है एक18 साल की..

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जवान ुर वो बी शादी शुदा चूचियों के अहसास से hi मेरी तो हवा टाइट हो जाती है, ुर आरती की बदन की महक मेरे नाक में जाकर शराब से भी ज्यादा नशे का काम कर रही थी. वही आरती की चुके और बड़ी गांड कपड़ो के ऊपर से देखने पर मेरा लुंड जो पहले hi अकड़ा हुवा था वो उसकी जांघों के बिच में जेक चुभने लगता है और ये चुभन उसको भी रीलीज़ होता है की अभी अभी मैने क्या किया है और इस वक़्त उसके दोनों हाथ मेरे गले के इर्द गिर्द थे और वो लिटेराल्ल्य मेरे से एक दम से चिपकी हुई थी और जब उसे अच्छे से ाहस होता है की उसको अपनी झागों के बिच के सामने कुछ सख्त चीज़ चुभ रही है तो उसके दिल की धड़कने तेज़ हो जाती है और तभी आरती को अपनी गलती का अहसास होता है की पहले hi यहाँ वे क्यों नहीं

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भाग गई जब वो फ्री थी (लेकिन प्रॉब्लम ये थी के क्या उसने लेट तो नहीं कर दिया अपनी गलती रीलीज़ करने में), वही आरती को मेरे से चिपके होने से उसको शराब और मर्दानगी महक आ रही थी जो पता नहीं क्यों मदहोश होने पे मजबूर कर थी, हालाँकि आरती अब अपने हाथों को इधर उधर मार के, मेरे से दूर होने की कोष िश करना उसका बंद नहीं हुआ था लेकिन मेरी पकड़ इतनी कड़क और मज़बूत थी के वह ऐसा नहीं कर प् रही थी तभी आरती, मुझी.. चोरररूओ?.. आह्हः.. कमीने.. मैं, अब आरती की गर्दन पर अपना मन रख देता हु. "आह्ह्ह्ह.. सशह्ह्ह.. उफ्फफ्फ्फ़", की आवाज़ करते हुए फिर से आरती मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करती है इधर मेरे हाथ में (पूरी की पूरी आरती थी इस वक़्त लेकिन उसे पता था ये मछली को अगर सही से नहीं पकड़ा तो हाथ से फिसल के निकल भी..

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सकती और अगर पकड़ने में कामयाब होगया तो आज रात मेरे मज़े hi मज़े है), मैं अब आरती की कमर से अपने दोनों हाथों को हटा के सीधा उसकी बड़ी गांड के दोनों फांकों पर ले जाता हु और उन्हें धीरे2 बड़े hi इरोटिक अंदाज़ में मसलने लगता हु आरती, "आह्ह्ह्ह पापा जी प्ल्ज़ रुकक्क जावू", मैं बिना कुछ जवाब दिए आरती की गांड की मालिश जारी रखता हु और ऊपर से माय उसकी गर्दन पर मेरी गरम जुबान उसे चूमे जा रही थी वही आरती के पास इस वक़्त मेरे वार का कोई जवाब नहीं थी उल्टा वो खुद काम अग्नि में मदहोश हुए जा रही थी, ज़िन्दगी में पहली बार आरती की बड़ी गांड को बेरहमी से कोई इस तरह गूँथ रहा था खुद उसके पति ने भी कभी ऐसे उसकी गांड नहीं दबायी थी. यहाँ तक के उसकी मस्ती में सिसकियाँ भी निकलने लगती है,

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आरती, "चुर्रू पापा जी मुज्झी सशह्ह्ह", लेकिन इस टाइम उसके विरोद में कोई जान नहीं थी उसके बोलने के अंदाज़ से ये अंदाज़ा हो गया था और उसकी वजा से मेरी हिम्मत भी बढ़ रही थी. मैं अब आगे बढ़ने का सोचकर उसकी गांड पर से हाथ हटाकर आरती के खूबसूरत चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़ लेता हु और अपना चेहरा उसके तरफ करने लगता हु और आरती को इसका अहसास हो जाता है और वो अपना चेहरा हटाने की भर शाम कोशिश करती है लेकिन जितनी ताकत वो लगा रही थी जिससे मेरा कुछ कर नहीं प् रही थी. कोई रास्ता न देख आरती मजबूरन अपनी ऑंखें बंद करके अपने होंठो को जोर से भींच लेती है उसके ऐसा करने का साफ़ मतलब था की वो किश नहीं करना चा रही थी, इधर माय अपने होंठो को आरती के कोमल वाली होंठ से मिलाने hi वाला था के तभी?
 
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