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उठते hi उसकी गोरी बे दाग गांड मेरी नज़रो के सामने आ गई जिसे देखते hi मेरा लुंड से पानी छुट्टे छुट्टे बचा वही इतनी गोल ुर बेदाग़ गांड आज तक नहीं देखि थी जिसके चलते लुंड बार बार झटके दे रहा था, वही मैं, देर न करते हुए अपने लुंड को पकड़ा और लुंड को गांड की छेद पे रख के छूट से लेकर गांड तक अपने सुपडे को सहलाने लगा वही राधा जो टेबल पे झुकी हुई थी वो वह पूरा लेट गई मज़े से अब राधा का आधा सरीर टेबल पे तो दूसरा सरीर टेबल के निचे वही राधा के पूरा झुकने से मुझे उसकी छोटी सी गुलाबी छूट पीछे से दिखने लगी उसे देख के माय सोचने लगा की राधा तो करीब करीब 18 की होगी लेकिन छूट तो किसी बच्ची की तरह दिख रही थी छूट की दोनों फांके एक दम चिपकी हुई थी और जब गांड की सुराग पे पड़ी जो थोड़ी लाइट डार्क कलर की थी वो भी बिलकुल तित इधर राधा मुझे कुछ न करता हुआ महसूस करके वो अपने सर को घुमा के मेरी और देखि तो पाई की माय अब उसके पीछे झुका हुआ था.
और उसकी गांड की और देख रहा था यह देखते hi राधा, जीजू ऐसे न देखो न मुझे बहुत शर्म आ रही है?, मैं, अरे साली साहिबा तू बहार से जितनी खूबसूरत है उतनी अंदर से भी क्या छूट और गांड है तेरी दिल खुस कर दिया तूने ये कह के माय अपना मुँह राधा की गांड की दोनों परतो को अपने काळा मजबूत हाँथ को मदत से अलग किया और अपनी बड़ी जुबान निकल के उसकी भूरी गांड की छेद पे लगाया hi था की राधा, ओह्ह्ह.. मासा.. आह्हः.. जीजू.. आउउउ.. ुंहःहःह.. मररररर.. गई.. यह क्या कर रहे है वह से मुहहह हटाइये न ओह्ह्ह गन्दी जगह है आठ.. सष्ठ.. ुंहःहःह.. बस्स्स.. बस्स्स.. सशह्ह्ह्ह.. उम्मठ ये कैसा जादू कर दिया जीजू आह्ह्ह्ह.. हिय ुंहःहःह.. उफ्फ्फ.. बहुत ाचा लग रहा है, इधर राधा धीरे धीरे सिसकारियां मु से निकलने लगी जब माय उसकी छूट तो कभी उसकी गांड की सुराख़ को अपनी जुबान से छाते जा रहा था एक तो माय नसे म वही दूसरी और एक दम जवान लड़की जिसकी छूट और गांड की महक मुझे और काम उत्तेजना
में डुबो रही थी, इधर माय एक हाँथ से राधा की गोरी गांड को कभी सहलाता तो कभी जोर जोरसे थप्पड़ मरता जिसके चलते रूम में कुछ ऐसे चटककककक.. चटककककककक की आवाज़ गूंज उठती साथ hi साथ उसकी गांड किसी स्प्रिंग की तरह इधर हिलने लगती हाला के उसकी चुतर की साइज ज्यादा नहीं थी लेकिन जितनी भी साइज थी वही बहुत बड़ी लग रही थी क्युकी उसकी गांड की बनावट किसी मिटटी की मटके की तरह एक दम गोल मटोल थी साथ hi साथ एक दम गोरी दूध की तरह कही भी दाग का नमो नीसाण तक नहीं थी तो भला ऐसी साफ़ सुथरी चिकनी गांड कौन नहीं चाट सकता, वही हम काम वासना की आग में झेल रहे थे जिसके चलते यह भूल चुके थे की रूम में हम दोनों के अलावा कोई तीसरा भी है वह कोई और नहीं मेरी लाड़ली बेटी रानी थी, जिसकी आंख खुल चुकी थी और वो कम्बल से थोड़ा सा मु निकल के हम दोनों की राश लीला निहार रही थी,
साथ hi साथ उसकी काम वासना भी जाग चुकी थी, इधर माय बे खबर होक उसकी गांड तो कभी छूट का राश पान किये जा रहा था, वही राधा मेरे हमले से ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाती और वह अब जोर से झरने लगती है और वह तो ऐसा जहर रही थी जैसे मूत hi रही हो साथ hi साथ उसकी गांड की सुराख़ कभी खुल रही थी तो बंद हो रही थी, जिसे देखते हुए माय एक ऊँगली अपनी उसकी गांड में भी दाल दिया लेकिन राधा जहर रही थी इस लिए उसे ये दर्द पता नहीं चला वही माय एक ऊँगली उसकी छूट में भी दाल दिया अब कुछ ऐसा पोजीशन ऐसा था मेरे एक हाँथ की एक ऊँगली उसकी गांड में तो दूसरी ऊँगली उसकी छूट में और माय तेजी से अंदर बहार करने के साथ अपनी जुबान भी लगाए हुए था, वही राधा, के दोनों पेअर काँप रहे थे उसे खड़ा होने में बहुत म्हणत लग रही थी इस लिए वो टेबल पे पूरा लेट सी गई, थोड़ी देर तक माय कभी उसकी छूट से निकली पहला राश को चुस्त तो कभी गांड की सुराख़ पे अपनी खुरदरी जुबान खुरदता,
और उसकी गांड की और देख रहा था यह देखते hi राधा, जीजू ऐसे न देखो न मुझे बहुत शर्म आ रही है?, मैं, अरे साली साहिबा तू बहार से जितनी खूबसूरत है उतनी अंदर से भी क्या छूट और गांड है तेरी दिल खुस कर दिया तूने ये कह के माय अपना मुँह राधा की गांड की दोनों परतो को अपने काळा मजबूत हाँथ को मदत से अलग किया और अपनी बड़ी जुबान निकल के उसकी भूरी गांड की छेद पे लगाया hi था की राधा, ओह्ह्ह.. मासा.. आह्हः.. जीजू.. आउउउ.. ुंहःहःह.. मररररर.. गई.. यह क्या कर रहे है वह से मुहहह हटाइये न ओह्ह्ह गन्दी जगह है आठ.. सष्ठ.. ुंहःहःह.. बस्स्स.. बस्स्स.. सशह्ह्ह्ह.. उम्मठ ये कैसा जादू कर दिया जीजू आह्ह्ह्ह.. हिय ुंहःहःह.. उफ्फ्फ.. बहुत ाचा लग रहा है, इधर राधा धीरे धीरे सिसकारियां मु से निकलने लगी जब माय उसकी छूट तो कभी उसकी गांड की सुराख़ को अपनी जुबान से छाते जा रहा था एक तो माय नसे म वही दूसरी और एक दम जवान लड़की जिसकी छूट और गांड की महक मुझे और काम उत्तेजना
में डुबो रही थी, इधर माय एक हाँथ से राधा की गोरी गांड को कभी सहलाता तो कभी जोर जोरसे थप्पड़ मरता जिसके चलते रूम में कुछ ऐसे चटककककक.. चटककककककक की आवाज़ गूंज उठती साथ hi साथ उसकी गांड किसी स्प्रिंग की तरह इधर हिलने लगती हाला के उसकी चुतर की साइज ज्यादा नहीं थी लेकिन जितनी भी साइज थी वही बहुत बड़ी लग रही थी क्युकी उसकी गांड की बनावट किसी मिटटी की मटके की तरह एक दम गोल मटोल थी साथ hi साथ एक दम गोरी दूध की तरह कही भी दाग का नमो नीसाण तक नहीं थी तो भला ऐसी साफ़ सुथरी चिकनी गांड कौन नहीं चाट सकता, वही हम काम वासना की आग में झेल रहे थे जिसके चलते यह भूल चुके थे की रूम में हम दोनों के अलावा कोई तीसरा भी है वह कोई और नहीं मेरी लाड़ली बेटी रानी थी, जिसकी आंख खुल चुकी थी और वो कम्बल से थोड़ा सा मु निकल के हम दोनों की राश लीला निहार रही थी,
साथ hi साथ उसकी काम वासना भी जाग चुकी थी, इधर माय बे खबर होक उसकी गांड तो कभी छूट का राश पान किये जा रहा था, वही राधा मेरे हमले से ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाती और वह अब जोर से झरने लगती है और वह तो ऐसा जहर रही थी जैसे मूत hi रही हो साथ hi साथ उसकी गांड की सुराख़ कभी खुल रही थी तो बंद हो रही थी, जिसे देखते हुए माय एक ऊँगली अपनी उसकी गांड में भी दाल दिया लेकिन राधा जहर रही थी इस लिए उसे ये दर्द पता नहीं चला वही माय एक ऊँगली उसकी छूट में भी दाल दिया अब कुछ ऐसा पोजीशन ऐसा था मेरे एक हाँथ की एक ऊँगली उसकी गांड में तो दूसरी ऊँगली उसकी छूट में और माय तेजी से अंदर बहार करने के साथ अपनी जुबान भी लगाए हुए था, वही राधा, के दोनों पेअर काँप रहे थे उसे खड़ा होने में बहुत म्हणत लग रही थी इस लिए वो टेबल पे पूरा लेट सी गई, थोड़ी देर तक माय कभी उसकी छूट से निकली पहला राश को चुस्त तो कभी गांड की सुराख़ पे अपनी खुरदरी जुबान खुरदता,