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इधर माय अपनी बीवी की झूठी कहानी सुना के उसे इमोशनल कर चूका था अब लोहा गरम हो चूका था बस हथोड़ा मरने की देरी थी और माय देर न करते हुए झट से आरती को लिए हुए बिस्तर पे सीधा लेता दिया वही आरती बिना किसी विरोध के सिदा लेट के बस मुझे घूरे जा रही थी लेकिन बोल कुछ नहीं रही थी इधर माय उसके दोनों पैरो के बिच में आके एक बार छूट की तरफ देखा तो पाया उसकी छूट ऐसे बाह रही थी जैसे नदी बाह रही हो पूरी तरह से गीली थी उसकी छूट की फांके फड़क रही थी जैसे कह रही हो की पलज़्ज़ज़ अब देर न करो और अपने बड़े लुंड से मेरी काम अग्नि को संत करो?, वही आरती मुझे ऐसा घूरता पके अपने छोटे छोटे गोर हांथो को वह रख के अपनी छूट ढकने की कोशिश करती है लेकिन उसके छोटे हाँथ उसकी फूली हुई छूट को ढकने की नाकाम कोशिश साबित होती है,
इधर मैं, थोड़ा फ़्रस्ट्रेटेड होते हुए आरती से, बस भी कर मेरी बहु रानी अब अपने पापा जी को देखने भी नहीं देगी स्वर्ग का दरवाजा अब हटा अपने ये हाँथ और देख लेने दे तू नहीं जानती मेरे साथ भगवन ने बहुत ज्यादा जयति की है बीवी तो दी उन्होंने लेकिन मुझे वो सुख नहीं मिल पाया और रण्डी भी मुझे कई मिली लेकिन वो भी सुख कभी भोग नहीं पाया अब बस तू आखरी सहारा है मेरी? इतना सुनते hi आरती, धीरे आवाज़ में फुस फूसा के, जल्दी करो न जो करना है और जाओ यहाँ से ये कह के शर्म से अपनी आंखे बंद कर लेती है (वो भी कही न कही काम अग्नि में जल रही थी, लेकिन अपनी संस्कारो से दबी होने के कारन वो खुल के बोल hi नहीं प् रही थी की राधे अंकल प्लीज अपने लुंड से मेरी छूट की खुजली को मिटा दो और जो आपकी बीवी और सहर की रंडिया आपको सुख नहीं दे पाई वो सुख अब मैं दूंगी,
वही मैं, ये सुन के उसके दोनों पैरो को अपने खुरदरे हाथ में लेके फैला दिया और एक बार अपना मुँह उसकी फूली हुई फैंको के पास ले जेक अपनी जुबान निकला और फैंको के ऊपर जैसे रखा वैसे hi आरती मेरे सर पे हाँथ रख के आईईए.. नही ुम्हह.. चींईईई.. ीववव.. वह से मुँह हटाइये पापा जी वो गन्दी जगह होती है?, मैं, उसकी फैंको पे जुबान फेरते हुए बहु तेरी ऐसी कोई चीज नहीं की जो मेरे लिए गन्दी हो और तेरी जैसी जवान बुर को पि के मेरी काम इच्छा और बढ़ेगी बहु और आज तक माय ऐसी छूट गोरी चिकनी राश से भरी और साफ़ सुथरी कभी नहीं देखि है ुंहःहः क्या गंध है तेरी बुर की ुंहःहःह.. और कितनी राश से भरी है ुम्हा.. स्लरुपपपप ुम्हह.. गलछह.. स्लरुपपपप.. ुम्हह.. गलछह.. स्लरुपपपप.. ऊंठ्ठ.. गलछह.. ूमम.. स्लरूप.. मज़ा आ गया वैसे तेरे
पति ने कभी मेरे जैसे छठा है की नहीं यह कह के अपनी दो ऊँगली उसकी तित फैंको पे रख के फैलाया और जुबान छूट की छोटी सी छेद में दाल के एक बार निचे से ऊपर तो कभी बाये से दये करके चाटने लगा, साथ hi साथ उसके चिकनी छूट को सहलाने भी लगा.. उसकी छूट कुछ ज्यादा hi उभरी हुई थी ऐसा लग रहा था जैसा उसकी जांघो के बिच एक छोटा सा कछुआ रखा हो?, वही आरती, ामहहहह.. ऊंठ्ठ.. आह्ह्ह्ह पापा.. वहा.. नाहीई.. प्लीज.. उफ्फ्फ्फ्फ़ हहहयययययय.. ऊऊफफफऊ.. प्लीसीईई.. ोुह्ह्ह्हह्ह.. पापाआ.. जी.. वह से हटा लीजिये मुझे बहुत गुदगुदी सी हो रही है सष्ठ.. उमठ ये सिसकारियां लेने लगी वही मैं, अपनी 2 ऊँगली उसकी मूत वाली छेद पे रख के कभी मरोड़ता तो कभी सहलाता और इधर मेरा जुबान को गोल करके उसकी छूट की छोटी सी छेद में कोई 1 इंच घुसा
के अंदर बहार करने लगा वही उससे पूछते हुए बोल न बहु रानी तेरे हराम ज्यादा पति न ऐसा छूट छत्ता है या नहीं, आरती, थोड़े गुस्से से आह्ह्ह्हह.. ुंहःहः.. मेरी पति को ऐसी गन्दी गली मत दो वो हराम ज्यादा नहीं है वो मेरे से बहुत प्यार करते है और वो ऐसी गन्दी चीज नहीं छत्ते? ये कह के वो मेरे बालो में अपने दोनों हांथो को रख के अपनी छूट में दबाने लगी साथ hi साथ बालो को सहलाने लगी, उसे ऐसा करते देख एक बार छूट की छेद से गांड की होल तक जुबान फिर के क्यों साली जो चीज चाटने की चीज होती है वो तेरा हरामी पति कभी नहीं चाटेगा स्लरुपपप, उस हराम ज्यादे को इतना पता नहीं है की अपनी पत्नी को कैसे खुस रखना चाहिए, आरती, अपनी दोनों टैंगो को पूरा खोल के मेरे कंधे पे रख ली साथ hi साथ वो मेरे सर को बालो को सहलाने लगी वही
मेरी बात को तो सुनी लेकिन कोई रिएक्शन वो नहीं दी क्युकी वो भी अच्छे से जानते थी की उसका पति ने जैसे राधे अंकल उसके साथ कर रहे है वैसा उसका पति ने आज तक उसके साथ नहीं किया था, इधर मैं, उसकी मूत की छोटी से छेद से अपनी दोनों ऊँगली हटा के धीरे से उसकी गांड की भूरी छेद पे ले जा कर 1 ऊँगली से सहलाने लगा और थोड़ी अंदर भी करने लगा तभी आरती, औछहहहह.. पापा.. जी वह से ऊँगली आह्ह्ह्ह.. हतोऊ.. ुंहःहःह.. सशह्ह्ह्ह, ुंहःहः.. नाहीइ.. इधर मैं, धीरे2 अपनी ऊँगली आधी घुसा दी और जैसे hi मेरी मोती ऊँगली गांड के अंदर गई वैसे hi आरती बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और वो अपनी गांड बिस्तर से कोई 4 इंच उठा के छूट को मेरे मुँह के घुसाने की कोशिश करने लगी और मेरे सर के बालो को अपनी हांथो में तितली कसने लगी,
अब मुझे पता चल गया की वो कभी भी जहर सकती है और कही जहर गई तो पता नहीं फिर से इसका पति प्रेम जाग जाये इस लिए इसे नहीं झड़ना है मुझे ये सोचते हुए माय अपना मुँह छूट से हटा लिया और गांड से ऊँगली निकल लिया और उसकी और देखने लगा उधर आरती इतने करीब आने के बाद न जहर पाने कारन अपनी आंखे खोल के मुझे गुस्से से घूरने लगती है वही माय उसकी और अपनी कामिनी मुस्कान लाते हुए धीरे से, क्या हुआ बहु? तू गुस्सा क्यों हो गई तूने hi तो कहा था की मैं अपना मुँह तेरी छूट से हटा लू वो गन्दी जगह होती है और जब मैं अपना मुँह तेरी छूट से हटा लिया तो तू मेरे से गुस्सा हो गई? अब माय क्या करू की तू खुस हो जाए, उधर आरती, मेरी तरफ खा जाने वाले नज़रों से घूरती है और फिर अपना मुँह फेर क दूसरी और देखने लगती है,
इधर मैं, थोड़ा फ़्रस्ट्रेटेड होते हुए आरती से, बस भी कर मेरी बहु रानी अब अपने पापा जी को देखने भी नहीं देगी स्वर्ग का दरवाजा अब हटा अपने ये हाँथ और देख लेने दे तू नहीं जानती मेरे साथ भगवन ने बहुत ज्यादा जयति की है बीवी तो दी उन्होंने लेकिन मुझे वो सुख नहीं मिल पाया और रण्डी भी मुझे कई मिली लेकिन वो भी सुख कभी भोग नहीं पाया अब बस तू आखरी सहारा है मेरी? इतना सुनते hi आरती, धीरे आवाज़ में फुस फूसा के, जल्दी करो न जो करना है और जाओ यहाँ से ये कह के शर्म से अपनी आंखे बंद कर लेती है (वो भी कही न कही काम अग्नि में जल रही थी, लेकिन अपनी संस्कारो से दबी होने के कारन वो खुल के बोल hi नहीं प् रही थी की राधे अंकल प्लीज अपने लुंड से मेरी छूट की खुजली को मिटा दो और जो आपकी बीवी और सहर की रंडिया आपको सुख नहीं दे पाई वो सुख अब मैं दूंगी,
वही मैं, ये सुन के उसके दोनों पैरो को अपने खुरदरे हाथ में लेके फैला दिया और एक बार अपना मुँह उसकी फूली हुई फैंको के पास ले जेक अपनी जुबान निकला और फैंको के ऊपर जैसे रखा वैसे hi आरती मेरे सर पे हाँथ रख के आईईए.. नही ुम्हह.. चींईईई.. ीववव.. वह से मुँह हटाइये पापा जी वो गन्दी जगह होती है?, मैं, उसकी फैंको पे जुबान फेरते हुए बहु तेरी ऐसी कोई चीज नहीं की जो मेरे लिए गन्दी हो और तेरी जैसी जवान बुर को पि के मेरी काम इच्छा और बढ़ेगी बहु और आज तक माय ऐसी छूट गोरी चिकनी राश से भरी और साफ़ सुथरी कभी नहीं देखि है ुंहःहः क्या गंध है तेरी बुर की ुंहःहःह.. और कितनी राश से भरी है ुम्हा.. स्लरुपपपप ुम्हह.. गलछह.. स्लरुपपपप.. ुम्हह.. गलछह.. स्लरुपपपप.. ऊंठ्ठ.. गलछह.. ूमम.. स्लरूप.. मज़ा आ गया वैसे तेरे
पति ने कभी मेरे जैसे छठा है की नहीं यह कह के अपनी दो ऊँगली उसकी तित फैंको पे रख के फैलाया और जुबान छूट की छोटी सी छेद में दाल के एक बार निचे से ऊपर तो कभी बाये से दये करके चाटने लगा, साथ hi साथ उसके चिकनी छूट को सहलाने भी लगा.. उसकी छूट कुछ ज्यादा hi उभरी हुई थी ऐसा लग रहा था जैसा उसकी जांघो के बिच एक छोटा सा कछुआ रखा हो?, वही आरती, ामहहहह.. ऊंठ्ठ.. आह्ह्ह्ह पापा.. वहा.. नाहीई.. प्लीज.. उफ्फ्फ्फ्फ़ हहहयययययय.. ऊऊफफफऊ.. प्लीसीईई.. ोुह्ह्ह्हह्ह.. पापाआ.. जी.. वह से हटा लीजिये मुझे बहुत गुदगुदी सी हो रही है सष्ठ.. उमठ ये सिसकारियां लेने लगी वही मैं, अपनी 2 ऊँगली उसकी मूत वाली छेद पे रख के कभी मरोड़ता तो कभी सहलाता और इधर मेरा जुबान को गोल करके उसकी छूट की छोटी सी छेद में कोई 1 इंच घुसा
के अंदर बहार करने लगा वही उससे पूछते हुए बोल न बहु रानी तेरे हराम ज्यादा पति न ऐसा छूट छत्ता है या नहीं, आरती, थोड़े गुस्से से आह्ह्ह्हह.. ुंहःहः.. मेरी पति को ऐसी गन्दी गली मत दो वो हराम ज्यादा नहीं है वो मेरे से बहुत प्यार करते है और वो ऐसी गन्दी चीज नहीं छत्ते? ये कह के वो मेरे बालो में अपने दोनों हांथो को रख के अपनी छूट में दबाने लगी साथ hi साथ बालो को सहलाने लगी, उसे ऐसा करते देख एक बार छूट की छेद से गांड की होल तक जुबान फिर के क्यों साली जो चीज चाटने की चीज होती है वो तेरा हरामी पति कभी नहीं चाटेगा स्लरुपपप, उस हराम ज्यादे को इतना पता नहीं है की अपनी पत्नी को कैसे खुस रखना चाहिए, आरती, अपनी दोनों टैंगो को पूरा खोल के मेरे कंधे पे रख ली साथ hi साथ वो मेरे सर को बालो को सहलाने लगी वही
मेरी बात को तो सुनी लेकिन कोई रिएक्शन वो नहीं दी क्युकी वो भी अच्छे से जानते थी की उसका पति ने जैसे राधे अंकल उसके साथ कर रहे है वैसा उसका पति ने आज तक उसके साथ नहीं किया था, इधर मैं, उसकी मूत की छोटी से छेद से अपनी दोनों ऊँगली हटा के धीरे से उसकी गांड की भूरी छेद पे ले जा कर 1 ऊँगली से सहलाने लगा और थोड़ी अंदर भी करने लगा तभी आरती, औछहहहह.. पापा.. जी वह से ऊँगली आह्ह्ह्ह.. हतोऊ.. ुंहःहःह.. सशह्ह्ह्ह, ुंहःहः.. नाहीइ.. इधर मैं, धीरे2 अपनी ऊँगली आधी घुसा दी और जैसे hi मेरी मोती ऊँगली गांड के अंदर गई वैसे hi आरती बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और वो अपनी गांड बिस्तर से कोई 4 इंच उठा के छूट को मेरे मुँह के घुसाने की कोशिश करने लगी और मेरे सर के बालो को अपनी हांथो में तितली कसने लगी,
अब मुझे पता चल गया की वो कभी भी जहर सकती है और कही जहर गई तो पता नहीं फिर से इसका पति प्रेम जाग जाये इस लिए इसे नहीं झड़ना है मुझे ये सोचते हुए माय अपना मुँह छूट से हटा लिया और गांड से ऊँगली निकल लिया और उसकी और देखने लगा उधर आरती इतने करीब आने के बाद न जहर पाने कारन अपनी आंखे खोल के मुझे गुस्से से घूरने लगती है वही माय उसकी और अपनी कामिनी मुस्कान लाते हुए धीरे से, क्या हुआ बहु? तू गुस्सा क्यों हो गई तूने hi तो कहा था की मैं अपना मुँह तेरी छूट से हटा लू वो गन्दी जगह होती है और जब मैं अपना मुँह तेरी छूट से हटा लिया तो तू मेरे से गुस्सा हो गई? अब माय क्या करू की तू खुस हो जाए, उधर आरती, मेरी तरफ खा जाने वाले नज़रों से घूरती है और फिर अपना मुँह फेर क दूसरी और देखने लगती है,